Journalist Death Mystery: पूजा की मौत के मामले में पुलिस के शक की सुई भले ही पुलिस इंसपेक्टर अमित वशिष्ठ की ओर उठ रही हो, लेकिन हकीकत की तह तक वह अभी भी नहीं पहुंच पाई है. क्या हत्या और आत्महत्या के बीच झूलता पूजा की मौत का रहस्य सामने आ सकेगा?
महिला पत्रकार पूजा तिवारी फरीदाबाद के सैक्टर 46 स्थित सद्भावना अपार्टमेंट के फ्लैट नंबर 42 में रहती थी. वह दिल्ली से प्रकाशित होने वाले एक अंग्रेजी अखबार में रिपोर्टर थी. इस अखबार में वह पिछले 3 सालों से काम कर रही थी. फरीदाबाद वाले फ्लैट में पूजा अकेली नहीं बल्कि अपनी रूममेट आफरीन के साथ रहती थी. पूजा अपार्टमेंट की 5वीं मंजिल स्थित जिस फ्लैट में रहती थी, वह उस ने हरियाणा पुलिस के इंसपेक्टर अमित वशिष्ठ के सहयोग से किराए पर लिया था.
2 मई, 2016 की रात लगभग 11 बजे पूजा के साथ इंसपेक्टर अमित वशिष्ठ और उस के साथ न्यूजपेपर में काम करने वाली आफरीन फ्लैट में मौजूद थी. रात लगभग साढ़े 11 बजे अपार्टमेंट के एक सिक्योरिटी गार्ड ने धमाके के साथ किसी महिला की चीख सुनी तो वह उस दिशा में दौड़ा, जिधर से आवाज आई थी. कुछ ही दूर आगे सिक्योरिटी गार्ड ने अपार्टमेंट के नीचे फर्श पर एक युवती को खून से लथपथ पड़े देखा. यह हृदय विदारक दृश्य देख कर उस ने शोर मचा दिया. शोर सुन कर अपार्टमेंट में रहने वाले तमाम लोग वहां आ गए. इन में से कुछ लोग मृत युवती को पहचानते थे. वह पत्रकार पूजा तिवारी थी. एक व्यक्ति ने 100 नंबर पर फोन कर के घटना के बारे में पुलिस कंट्रोल रूम को बता दिया.
वह इलाका थाना सूरजकुंड के अंतर्गत आता था. पुलिस नियंत्रण कक्ष ने यह सूचना थाना सूरजकुंड को दे दी. थाना सूरजकुंड के थानाप्रभारी राजेंद्र सिंह सूचना मिलते ही पुलिस टीम के साथ घटनास्थल के लिए रवाना हो गए. राजेंद्र सिंह ने डीसीपी एनआईटी पूरनचंद पवार, पुलिस आयुक्त हनीफ कुरैशी तथा सहायक पुलिस आयुक्त गजेंद्र सिंह को भी इस बारे में बता दिया था. पुलिस घटनास्थल पर पहुंची तो वहां काफी भीड़ एकत्र थी. लोग पूजा तिवारी की क्षतविक्षत लाश को घेरे खड़े थे. पुसिल ने उन्हें वहां से हटाया, ताकि काररवाई की जा सके. मृतका के शरीर पर नाइटसूट था. उस की मौत 5वीं मंजिल से गिरने की वजह से हुई थी.
राजेंद्र सिंह लाश और घटनास्थल का निरीक्षण कर ही रहे थे कि डीसीपी पूरनचंद पवार, पुलिस आयुक्त हनीफ कुरैशी, सहायक पुलिस आयुक्त गजेंद्र सिंह, फिंगरप्रिंट एक्सपर्ट तथा क्राइम टीम के साथ मौके पर आ गए. सभी अपनीअपनी काररवाई में लग गए. पूजा 5वीं मंजिल स्थित फ्लैट की बालकनी से चित अवस्था में नीचे गिरी थी. उस का सिर बुरी तरह फट गया था. आसपास काफी मात्रा में खून फैला था. देखने से ही लग रहा था कि उस की मौत हो चुकी है.
क्राइम टीम ने लाश का मुआयना करने के बाद उस के फ्लैट की तलाशी ली तो वहां से शराब और बीयर की कई खाली बोतलें, मेज पर रखी ऐशट्रे में सिगरेट के टोटे और शीशे के 2 गिलास मिले, साथ ही बैड के नीचे 2 कंडोम भी मिले, जिस में एक इस्तेमाल किया हुआ था. सभी चीजों को क्राइम टीम ने सील कर के अपने कब्जे में ले लिया.
पूजा के साथ वाले फ्लैट में रहने वाली महिला आशा भाटिया लाश के पास खड़ी सिसक रही थीं. डीसीपी पूरनचंद पवार ने आशा से पूछा, ‘‘आप मृतका की रिश्तेदार हैं?’’
‘‘जी नहीं,’’ आशा दुपट्टे से आंसू पोंछते हुए बोली, ‘‘पूजा हमारे साथ वाले फ्लैट में रहती थी. मुझ से उस का काफी अपनत्व था. वह मुझे भाभी कहती थी. मैं भी उसे अपनी ननद की तरह मानती थी.’’
‘‘आप के खयाल से यह हादसा है या खुदकुशी?’’ पूरनचंद पवार ने पूछा तो आशा ने बताया, ‘‘पूजा इतनी लापरवाह नहीं थी कि बालकनी से गिर जाती. रही खुदकुशी करने की बात तो मैं यकीन के साथ कह सकती हूं कि वह खुदकुशी कभी नहीं कर सकती थी.’’
‘‘न हादसा न खुदकुशी,’’ पुलिस आयुक्त हनीफ कुरैशी ने कहा, ‘‘तो फिर आप यह मान रही हैं कि ये हत्या का मामला हो सकता है?’’
‘‘ऐसा मुझे संदेह है, लेकिन यकीनी तौर पर मैं इस बारे में अभी कुछ नहीं कह सकती.’’
‘‘आप पूजा के काफी नजदीक थीं. क्या आप बता सकती हैं कि पूजा के फ्लैट पर कौनकौन आया करता था?’’ डीसीपी पूरनचंद ने पूछा.
‘‘उस के साथ अखबार में काम करने वाली आफरीन, हरियाणा पुलिस का इंसपेक्टर अमित वशिष्ठ और कभीकभी पूजा की रूममेट रह चुकी मिडी रीबा आया करती थी. अमित वशिष्ठ इस समय यहीं मौजूद है.’’ कह कर आशा ने पास खड़े इंसपेक्टर अमित वशिष्ठ की ओर इशारा किया. डीसीपी पूरनचंद पवार ने अमित की ओर देखा. उस के चेहरे पर बदहवासी के भाव थे और आंखें आंसुओं से डबडबा रही थीं.
डीसीपी पूरनचंद पवार को सैल्यूट करते हुए अमित बोला, ‘‘सर, मेरा नाम अमित वशिष्ठ है और मैं फरीदाबाद पुलिस लाइन में हूं.’’
‘‘पूजा के रिश्तेदार हो या जानपहचान वाले?’’ पुलिस आयुक्त हनीफ कुरैशी ने अमित वशिष्ठ के चेहरे की ओर देखते हुए पूछा तो वह एकाएक हड़बड़ा गया. फिर उस ने बताया, ‘‘पूजा एक न्यूजपेपर के साथसाथ एक न्यूज चैनल की रिपोर्टर थी. कवरेज के सिलसिले में उस की मुझ से अकसर मुलाकात होती रहती थी. मैं ने उसे छोटी बहन मान रखा था. वह बहुत मासूम और ईमानदार थी.’’
कहतेकहते अमित हथेलियों से चेहरा छिपा कर फफक पड़ा. डीसीपी पूरनचंद पवार ने उसे चुप कराया, फिर सवाल किया, ‘‘आप इतनी रात गए यहां क्यों आए थे?’’
‘‘मैं पूजा के बुलाने पर रात 9 बजे उस के फ्लैट पर आया था. उस वक्त पूजा के साथ आफरीन भी मौजूद थी. पूजा काफी परेशान थी. उस ने 2 साल पहले अवैध रूप से गर्भपात और गर्भ में लिंग परीक्षण करने वाले डाक्टरों का स्टिंग औपरेशन किया था. डाक्टरों ने उस पर ठगी और ब्लैकमेलिंग का मुकदमा दर्ज करा दिया था. उसी वजह से पूजा को नौकरी से निकाल दिया गया था. पता नहीं रात 11 बजे के बाद उसे क्या हुआ कि वह रोरो कर कहने लगी, ‘लोग मुझे जीने नहीं देंगे.’ फिर वह तेजी से बालकनी की तरफ गई और वहां से छलांग लगा दी.’’
‘‘आफरीन कहां है, उस से भी पूछताछ करनी है?’’ हनीफ कुरैशी ने पूछा तो अमित ने कहा, ‘‘मैं 9 बजे पूजा के फ्लैट पर आया था, उस वक्त आफरीन कौफी पी रही थी. कौफी खत्म कर के वह सोने चली गई थी. आफरीन 3 महीने से पूजा के साथ फ्लैट में रह रही थी.’’
अमित वशिष्ठ से पूजा के पिता का फोन नंबर और पता मिल गया. नंबर और पता नोट करने के बाद हनीफ कुरैशी ने पूजा के पिता रवि तिवारी को फोन पर पूजा की मौत की सूचना दे दी. पूजा के मातापिता और भाई सौरभ इंदौर से 9 मई की दोपहर दिल्ली आ गए. तब तक पूजा का शव पोस्टमार्टम हेतु मोर्चरी में भेजा जा चुका था.
पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने पूजा का शव उस के घर वालों को सौंप दिया. बेटी की मौत के गम में डूबे घर वालों ने दिल्ली में ही उस का दाहसंस्कार कर दिया. पूजा के पिता रवि तिवारी ने थाना सूरजकुंड में फरीदाबाद निवासी डा. अनिल गोयल, उन की पत्नी अर्चना गोयल और झोलाछाप डा. धवल सिंह के खिलाफ पूजा को मानसिक रूप से प्रताडि़त करने तथा खुदकुशी के लिए उकसाने के लिए मुकदमा दर्ज करा दिया.
गौरतलब है कि पूजा तिवारी ने इन्हीं डाक्टरों के खिलाफ स्टिंग औपरेशन किया था. लेकिन इन डाक्टरों ने उस पर ठगी तथा ब्लैकमेलिंग का आरोप लगा कर मुकदमा दर्ज करा दिया था. इसी वजह से पूजा को नौकरी से निकाल दिया गया था. फिलहाल वह बेरोजगार थी, जिस से तनावग्रस्त थी. इसी कारण पूजा ने आत्महत्या करने का फैसला किया और 5वीं मंजिल से छलांग लगा कर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली.
इंसपेक्टर अमित वशिष्ठ पूजा के घर वालों का भी काफी करीबी था. वह पूजा के साथ 2-3 बार उस के घर वालों से मिलने इंदौर भी गया था. पूजा के घर वाले उसे अपना फैमिली मैंबर मानते थे. डाक्टरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने से पहले अमित से पूजा के पिता रवि तिवारी की तमाम पहलुओं पर बातचीत हुई थी. उसी के उकसाने पर रवि तिवारी ने डाक्टरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था. उधर मीडिया द्वारा मामले को प्रमुखता से उछालने के कारण पुलिस की छीछालेदर शुरू हुई तो पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेना शुरू किया.
क्राइमटीम ने पूजा के साथ रहने वाली आफरीन खान से पूछताछ की तो उस ने बताया, ‘‘करीब 8 बजे अमित फ्लैट पर आया था. अमित लगभग रोजाना ही आता था. जब भी वह आता था, मैं उन दोनों को अकेला छोड़ कर सोने चली जाती थी. उस रात भी मैं सोने चली गई थी. मेरे पीछे वहां क्या हुआ, मुझे नहीं पता. हां, मैं ने अमित व पूजा की आवाजें जरूर सुनी थीं. उन की आवाजों से लग रहा था, जैसे दोनों में झगड़ा हो रहा हो?’’
‘‘तुम पूजा के बेहद नजदीक थीं. अमित से रिश्तों को ले कर पूजा ने तुम से कुछ खास बातें तो जरूर शेयर की होंगी?’’ हनीफ कुरैशी ने पूछा तो आफरीन ने पल भर सोचने के बाद कहा, ‘‘पूजा ने बस यही बताया था कि अमित उस का फैमिली मैंबर भी है और सब से खास दोस्त भी.’’
‘‘तुम्हारे खयाल से पूजा खुदकुशी कर सकती थी?’’
‘‘बिलकुल नहीं, उस जैसी हिम्मतवाली लड़की, जिस का जीवन संघर्ष और दुश्वारियों से भरा हुआ था, खुदकुशी का विचार भी मन में नहीं ला सकती थी.’’
‘‘तो फिर यह हादसा…’’
‘‘इस बारे में मैं कुछ नहीं कह सकती.’’
क्राइम टीम ने अपार्टमेंट की जांच के दौरान तीसरी मंजिल स्थित एक फ्लैट की बालकनी की रेलिंग को थोड़ा मुड़ा हुआ पाया. इस से यह अनुमान लगाया गया कि जब पूजा 5वीं मंजिल से नीचे गिरी होगी तो उस के नीचे गिरने से पहले उस का शरीर तीसरी मंजिल की रेलिंग से टकराया होगा. क्राइम टीम ने फोरैंकिस एक्सपर्ट की मदद से क्राइम सीन रीक्रिएट कराने के लिए पूजा की कदकाठी की 3 डमी बनवाईं, फिर 3 बार क्राइमसीन रिक्रिएट किया गया. 2 बार डमी नीचे फर्श पर पेट के बल गिरी, जबकि पूजा की डैडबौडी पीठ के बल पड़ी मिली थी.
फोरैंसिक एक्सपर्ट ने इस बाबत बताया, ‘चूंकि पूजा की डैडबौडी पीठ के बल मिली, इस से यह आशंका बलवती होती है कि अगर कोई उसे गोद में उठा कर नीचे फेंकता तो लाश इसी हालत में मिली होती. लेकिन छलांग लगाने के बाद उस का शरीर तीसरी मंजिल की रेलिंग से टकरा कर नीचे गिरा, ऐसी स्थिति में बौडी पेट के बल गिरी होगी.’ पूजा की मौत के तीसरे दिन यानी 11 मई को अमित वशिष्ठ पूजा के पिता रवि तिवारी से मिला. रवि तिवारी को 4 पन्ने दिखाते हुए अमित ने कहा, ‘‘यह पूजा का सुसाइड नोट है, जो मुझे मेज की दराज में रखा मिला है. इस में पूजा ने डाक्टरों के बारे में विस्तार से चर्चा करते हुए लिखा है, ‘उन्हीं लोगों ने मेरी जिंदगी बर्बाद की है. मेरी मौत के जिम्मेदार यही डाक्टर हैं.’
अमित ने आंसू पोंछते हुए आगे कहा, ‘‘पूजा तो हमें छोड़ कर चली गई. उस की आत्मा को तब तक शांति नहीं मिलेगी, जब तक उसे आत्महत्या करने को मजबूर करने वाले डाक्टर सुकून से रहेंगे. आप साथ दें तो पूजा के इस सुसाइड नोट के जरिए हम 1-2 करोड़ रुपए उन डाक्टरों से वसूल सकते हैं.’’
लेकिन रवि तिवारी इस के लिए राजी नहीं हुए. रवि तिवारी ने पूजा का वह सुसाइड नोट पुलिस के हवाले कर दिया. सुसाइड नोट 4 पन्नों का था. वह पहले काले रंग के पेन से, फिर नीले रंग के पेन से लिखा हुआ था. इस से पुलिस का माथा ठनका. पुलिस ने पूजा की रूम पार्टनर आफरीन खान से इस बाबत पूछताछ की तो उस ने बताया, ‘‘पूजा मैजिक पैन से लिखती थी, जिस का रंग ग्रीन था. यह सुसाइड नोट पूजा का लिखा हरगिज नहीं हो सकता.’’
यही बात पूजा के भाई सौरभ ने भी बताई. उस ने रहस्य की एक बात यह भी बताई कि उस ने अमित के पास एक पेन देखा था, जिस में 3 रिफिल थीं. लाल, नीली और काली. यह सुसाइड नोट अमित का लिखा हो सकता है. इस मामले में ट्विस्ट तब आया, जब अरुणाचल प्रदेश की रहने वाली एक युवती मिडी रीबा अखबार में पूजा की मौत की खबर पढ़ कर दिल्ली आई. मिडी रीबा सन 2011 में नोएडा स्थित एक मीडिया हाउस में काम करती थी. वहीं पूजा तिवारी भी काम करती थी, दोनों में गहरी दोस्ती हो गई थी.
सन 2012 में पूजा की नौकरी दिल्ली में लगी तो उस ने साउथ एक्स में किराए पर फ्लैट ले लिया. मिडी रीबा उस की रूममेट बन कर 2 साल तक उस के साथ रही थी. फिर पूजा की नौकरी एक अंगरेजी अखबार में लग गई तो पूजा फरीदाबाद में रहने लगी थी. मिडी रीबा ने क्राइमटीम को बताया, ‘‘सितंबर, 2015 की एक रात मैं फरीदाबाद स्थित पूजा के सद्भावना अपार्टमेंट के फ्लैट में गई थी. उस दिन पूजा मिडी की मुलाकात अमित से कराने वाली थी. पूजा अमित को अपना खास दोस्त बताती थी. रात को अमित आया. वह बहुत ही रूखा इंसान था.
‘‘हम सभी ने बीयर पी, फिर न जाने किस बात को ले कर पूजा व अमित में झगड़ा होने लगा. अमित ने पूजा की बेरहमी से पिटाई कर दी. उस का सिर फट गया और दोनों हाथों में फ्रेक्चर भी हुआ. अमित वहां से चला गया तो मैं उसे एक स्थानीय डाक्टर के पास ले कर गई थी.’’
मिडी रीबा ने आगे कहा, ‘‘पूजा बहुत ही सीधी, सरल स्वभाव की जिंदादिल लड़की थी. वह मीडिया में पौपुलर होना चाहती थी. वह आत्महत्या नहीं कर सकती थी.’’
क्राइम टीम ने पूजा का लैपटौप तथा उस का मोबाइल फोन अमित के पास से बरामद किया है, जो उस ने पंचकूला स्थित घर में रखा हुआ था. पुलिस ने लैपटौप व फोन को खंगाला. पुलिस को उस में से कई ऐसे साक्ष्य मिले, जो यह साबित कर सकते हैं कि पूजा का अमित के साथ कितना गहरा रिश्ता था. बहरहाल पुलिस ने अभी तक इस का खुलासा नहीं किया है. पूजा तिवारी युवावस्था से ही एक पौपुलर पत्रकार बनने की इच्छुक थी. वह अपनी मां और भाई के काफी करीब थी. सन 2011 में पूजा इंदौर से दिल्ली आई. सब से पहले उसे नोएडा स्थित एक मीडिया हाउस में काम मिला. इस के डेढ़ साल बाद वह दिल्ली में एक न्यूज चैनल से जुड़ी तो अपने सहयोगी अशोक मिश्रा के साथ अवैध रूप से गर्भपात करने वाले डाक्टरों का स्टिंग औपरेशन करने लगी.
अपने जुनून, साहस, लगन और हिम्मत के बूते पर उस ने इस क्षेत्र में काफी नाम व इज्जत कमाई. लेकिन कुछ भ्रष्ट पत्रकारों व डाक्टरों की मिलीभगत से वह ठगी व ब्लैकमेलिंग के झूठे केस में फंस गई. नौकरी छूटने से वह काफी तनाव में रहने लगी थी. पूजा तिवारी की मौत के आठवें दिन पुलिस को फोरैंसिक टीम से घटनास्थल की जांच कराने की याद आई. मधुबन स्थित फोरैंसिक साइंस लैब के एक्सपर्ट्स ने घटनास्थल की जांच करने के बाद पुलिस पर कई सवाल उठाए. एक्सपर्ट ने कहा कि 8 दिनों में साक्ष्य नष्ट भी किए जा सकते हैं और गायब भी.
बहरहाल, एक्सपर्ट ने पूजा के कथित सुसाइड नोट की जांच कर के यह पता लगाने की कोशिश की है कि उस में पूजा की राइटिंग है या किसी और की. जबकि पूजा के घर वाले, मिडी रीबा और आफरीन का कहना है कि वह राइटिंग पूजा की नहीं है. पूजा ने आत्महत्या की या उस की हत्या की गई, इस का सारा दारोमदार उस सुसाइड नोट पर है, जिस की फोरैंसिक साइंस लैब के एक्सपर्ट जांच कर रहे हैं. अगर एक्सपर्ट की रिपोर्ट में यह बात सामने आई कि सुसाइड नोट में पूजा की राइटिंग नहीं है तो इंसपेक्टर अमित वशिष्ठ पर पुलिस का शिकंजा कसना लाजिमी है. तभी यह बात सामने आएगी कि पूजा व अमित के रिश्ते किस हद तक थे. बहरहाल अमित को सस्पैंड किया जा चुका है.
पुलिस इस बात पर क्यों गौर नहीं कर रही कि पूजा के बैड के नीचे इस्तेमाल किया एक कंडोम कहां से आया? यदि ऐसा है तो इस मामले में गहरी साजिश होने का प्रबल अंदेशा है. अमित के अलावा शक की सुई आफरीन की तरफ भी उठ सकती है. यकीनन सच सामने आने के बाद कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकता है. पूजा के रूम से मिला इस्तेमाल किया हुआ कंडोम चीखचीख कर कह रहा है कि इस मामले में सैक्स भी एक महत्वपूर्ण पहलू हो सकता है. Journalist Death Mystery






