Double Murder Suicide Case : कैलीफोर्निया की नामी यूनिवर्सिटी से शोध कर रहे मैनक का सपना था कि वह कुछ बन कर दिखाएगा. लेकिन पत्नी ही नहीं, वह जिस प्रोफेसर क्लग के अंडर में शोध कर रहा था, उन्होंने भी धोखा दिया तो उसे लगा कि उस के सपने बिखरने लगे हैं. तब उस ने पत्नी ही नहीं, प्रोफेसर को भी मार दिया…
अमेरिका के गोल्डन स्टेट कहे जाने वाले कैलीफोर्निया का एक बड़ा और खूबसूरत शहर है लौस एंजिलस. इसी शहर के बीच स्थित है यूनिवर्सिटी औफ कैलीफोर्निया लौस एंजिलस (यूसीएलए). इस का शुमार अमेरिका के बेहद प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में किया जाता है. सन 1870 में स्थापित इस यूनिवर्सिटी में देशविदेश के हजारों स्टूडैंट्स पढ़ाई करते हैं. 2 जून, 2016 को भी यूनिवर्सिटी में आम दिनों की तरह ही गतिविधियां चल रही थीं. लगभग सभी विभागों में पढ़ाई चल रही थी, साथ ही छात्रों का आनाजाना भी लगा था.
हादसे हों या घटनाएं, उन का कोई वक्त तय नहीं होता. कब, कहां और क्या घट जाए, इस बात को भी कोई नहीं जानता. यूसीएलए यूनिवर्सिटी भी इस हकीकत से जुदा नहीं थी. दोपहर का समय था, जब शहर की सड़कों से तेजी से आ रही एक कार यूनिवर्सिटी के मुख्य दरवाजे से दाखिल हुई. कार की ड्राइविंग सीट पर अच्छी कदकाठी का एक युवक बैठा था. उस ने कार पार्क की, बाहर निकल कर कार की पिछली सीट पर रखे बैग को कंधे पर लटकाया और सधे कदमों से पैदल चल कर कुछ ही देर में इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट में पहुंच गया. वहां वह मैकेनिकल एवं एयरोस्पैस इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के अंदर पहुंचा, जहां एसोसिएट प्रोफेसर विलियम क्लग मौजूद थे.
वह उन के पास जा कर बोला, सुनिए प्रोफेसर. क्लग पलट कर बोले, ओह यू, बोलिए.मैं आप को बहुत अच्छा इंसान समझता था. लेकिन ऐसा नहीं है. तुम बेहद घटिया आदमी हो. उस युवक की बात पर क्लग हैरानी से बोले, व्हाट? यह क्या कह रहे हो तुम? यस, आई एम राइट प्रोफेसर, बट आज मैं तुम्हें सबक सिखाने आया हूं, ताकि तुम किसी और के साथ ऐसा कतई न कर सको, जैसा मेरे साथ किया है. व्हाट डू यू मीन. तुम यह क्या कह रहे हो? युवक की बातों से हैरानपरेशान क्लग ने कहा.
लेकिन उसी बीच उस युवक ने पलक झपकते अपनी पैंट की दाईं जेब से पिस्टल निकाली और प्रोफेसर पर तान दी. प्रोफेसर की आंखें हैरानी से फैल गईं. वह संभल पाते, उस से पहले ही युवक ने ट्रिगर दबा दिया. धमाके के साथ निकली गोली प्रोफेसर के जिस्म में जा धंसी.
युवक ने और भी गोलियां चलाईं, जिस से प्रोफेसर कटे पेड़ की तरह फर्श पर गिर गए. चंद सैकेंड में ही उन की सांसों की डोर टूट गई. यूनिवर्सिटी में गोलियां चलने से अफरातफरी मच गई. घबराए छात्र इधरउधर भागने लगे. युवक हवा में हथियार लहराते हुए बरामदे से होता हुआ दूसरे कमरों में भी गया. शायद वह किसी और को भी तलाश रहा था.
जो भी उसे देख रहा था, वही भयभीत हो जा रहा था. युवक एक बार फिर प्रोफेसर के पास आया और अपने सिर से पिस्टल सटा कर ट्रिगर दबा दिया. धमाके के साथ युवक धड़ाम से फर्श पर गिर गया. इस बीच इस घटना की सूचना पुलिस को दे दी गई थी.
यह आतंकी घटना भी हो सकती थी, इसलिए सूचना मिलते ही पुलिस सक्रिय हो गई. लौस एंजिलस के पुलिस प्रमुख चार्ली बेक ने तत्काल फोर्स रवाना कर दिया. अत्याधुनिक हथियारों से लैस पुलिस के सैकड़ों जवान और अफसर यूनिवर्सिटी पहुंच गए और चारों ओर से मोर्चाबंदी कर के अंदर दाखिल हुए.
यूनिवर्सिटी में जो छात्रछात्राएं मौजूद थे, उन के चेहरों पर डर साफ झलक रहा था. इस तरह की यह पहली घटना थी. अंदर की वास्तविक स्थिति से कोई वाकिफ नहीं था. आतंकवादियों के होने का अंदाजा होने की वजह से पुलिस ने सर्चिंग औपरेशन चलाया. छात्रछात्राओं को तलाशी ले कर बाहर निकाला गया.
अफरातफरी के माहौल में पुलिस इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट में पहुंची. 2 लाशें आसपास पड़ी थीं. प्रोफेसर को कई गोलियां लगी थीं, जबकि युवक के सिर में एक गोली का सुराख था. एक पिस्टल उस की हथेली में अटकी फर्श पर पड़ी थी. घटना को देख कर पुलिस के लिए यह अंदाजा लगाना कठिन नहीं था कि युवक ने प्रोफेसर की हत्या कर के खुदकुशी कर ली है.
पुलिस ने मारे गए दोनों लोगों की शिनाख्त कराई तो पता चला कि मारे गए प्रोफेसर विलियम क्लग थे, जबकि उन्हें मारने वाले युवक की पहचान मैनक सरकार के रूप में हुई. मैनक यूनिवर्सिटी में ही शोध छात्र था. वह भारत का रहने वाला था और मारे गए प्रोफेसर के अधीन ही सौलिड मैकेनिक्स में कई सालों से शोध कर रहा था.
युवक की तलाशी ली गई तो उस की जेब से एक और हाफ औटोमैटिक लोडेड पिस्टल और उस की मैगजीन के साथ एक सुसाइड नोट मिला. उस के बैग में कारतूस और अन्य कुछ कागजात थे. हथियारों के मिलने से साफ हो गया कि युवक खूनखराबे के इरादे से ही वहां आया था. सुसाइड नोट में उस ने प्रोफेसर के खिलाफ चौंकाने वाले अंदाज में काफी कुछ लिखा था.
इस घटना ने भारतीयअमेरिकी समुदाय को हिला कर रख दिया था. मामला बेहद गंभीर था. इस की जांच में संघीय जांच ब्यूरो एफबीआई को भी लगा दिया गया. शिनाख्त के बाद पुलिस को उस स्थान का पता मिल गया, जहां मैनक रहता था. पुलिस ने उस के फ्लैट जा कर तलाशी ली तो वहां कुछ कारतूस के अलावा मेज पर रखा एक कागज मिला, जिसे पढ़ कर पुलिस अधिकारी हैरान रह गए.
कागज पर ‘किल लिस्ट’ लिखा था, जिस के नीचे 3 नाम लिखे थे. उन में एक नाम एश्ले हस्ती का था. दूसरा नाम मारे गए प्रोफेसर का तथा उस के साथ एक और नाम था. पुलिस ने उन दोनों नामों के बारे में पता किया तो पता चला कि एश्ले उस की पत्नी थी, जो उस से अलग हो कर उपनगर मिनियापोलिस में रह रही थी. पुलिस को उस की कुछ तसवीरें भी मिल गईं. तीसरा नाम क्लग के साथी प्रोफेसर का था.
साफ हो गया कि मैनक ने हत्या की प्लानिंग पहले ही कर ली थी. पुलिस जांच करते हुए ब्रकलिन पार्क स्थित एक अपार्टमेंट में बने एश्ले के फ्लैट नंबर 1052 पर पहुंची तो फ्लैट का दरवाजा खुला था. पुलिस अंदर दाखिल हुई तो हैरान रह गई, क्योंकि वहां एक युवती की लाश पड़ी थी. मैनक के फ्लैट से बरामद फोटोग्राफ और आसपास के लोगों से पता चला कि वह लाश एश्ले की थी. उसे गोलियां मारी गई थीं. इस का मतलब पत्नी की हत्या करने के बाद मैनक यूनिवर्सिटी गया था.
वह अपनी लिस्ट में शामिल दोनों प्रोफेसरों को मारना चाहता था, लेकिन संयोग से क्लग के साथी बच गए थे. घटना के बाद यूनिवर्सिटी की सभी क्लासें रद्द कर के उसे बंद कर दिया गया था. अगले दिन होने वाली परीक्षा भी स्थगित कर दी गई थी.
जांच अधिकारियों ने मैनक के सुसाइड नोट, उस के साथियों, सहपाठियों और शिक्षकों से पूछताछ और उस की सोशल लाइफ का आकलन किया तो एक चौंकाने वाली जो कहानी निकल कर सामने आई, उस में 7 समंदर पार पहुंच कर सफलताओं के शिखर पर पहुंचने की नींव मजबूत करने वाला एक प्रतिभाशाली युवक अप्रत्याशित तरीके से बदले हालातों में इस कदर हिंसक हो गया कि उस ने इतनी बड़ी घटना को अंजाम दे दिया. सीधासादा रहा मैनक दुनिया की नजरों में अचानक क्यों खलनायक बन गया?
38 साल का मैनक मूलरूप से भारत के पश्चिमी बंगाल का रहने वाला था. कभी उस का परिवार प्रमुख औद्योगिक शहर दुर्गापुर की विद्यानगर हाउसिंग कालोनी में रहा करता था. वह सरकारी मुलाजिम सत्येन सरकार का बेटा था. खुशहाल परिवार था. परिवार में सत्येन के अलावा पत्नी, बेटा मैनक और बेटी सोमी थी.
मैनक बचपन से ही पढ़ाई में अव्वल था. उस की पहचान एक सीधेसादे पढ़ाकू स्टूडेंट की थी. वह हंसमुख, किंतु संकोची स्वभाव का था. किताबें ही उस की दोस्त थीं. अपने स्कूलकालेज में हमेशा टौपर रहा मैनक बहुत ही मेधावी स्टूडेंट था. उस ने सन 2000 में देश के नामी तकनीकी शिक्षा संस्थान आईआईटी खड़गपुर से एयरोस्पैस इंजीनियरिंग में स्नातक किया था.
इस के बाद अच्छे भविष्य की तलाश में वह अमेरिका चला गया. उस की पढ़ाई पर सत्येन ने काफी खर्च किया था. बेटे की पढ़ाई के लिए उन्हें घर तक बेचना पड़ा. बेटी का वह विवाह कर चुके थे. सरकार दंपत्ति अकेले थे. इस बीच सत्येन की पत्नी की मृत्यु हो गई. इस के बाद नितांत अकेले सत्येन ने एक वृद्धाश्रम का रुख किया. लेकिन वह बेटे के संपर्क में रहते थे.
स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएशन करने के बाद मैनक ने सन 2007 में प्रतिष्ठित यूसीएलए यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया और मैकेनिकल एवं एयरोस्पैस इंजीनियरिंग के प्रोफेसर विलियम क्लग के अधीन पीएचडी शुरू कर दी. क्लग ने मैकेनिक्स एवं जीवविज्ञान के बीच संबंधों का अध्ययन किया था. उन के परिवार में पत्नी एवं 4 साल का एक बेटा था.
क्लग ने मैनक की काफी मदद की. वह होनहार था, लिहाजा उसे रिसर्च ग्रुप का सदस्य भी बना दिया. उस के ग्रुप में कुछ और छात्र भी थे, जो बायोमेकैनिक्स पर शोध कर रहे थे. मैनक व्यवहारकुशल और मेहनती युवक था. वह दूसरे मुल्क पढ़ाई और अच्छे भविष्य की तलाश में गया था, लिहाजा अपनी मेहनतकशी को कायम रखता था.
मैनक प्रोफेसर क्लग को आदर्श मानता था. हमउम्र होने के चलते उन के रिश्ते भी अच्छे थे. कुल मिला कर गुरुशिष्य का उन का रिश्ता काफी मजबूत था. उस की हर कोई तारीफ करता था. उसे एक कंपनी में नौकरी भी मिल गई थी. इस बीच मैनक की मुलाकात एक युवती एश्ले हस्ती से हुई.
सभ्रांत व समृद्ध परिवार की एश्ले कैलीफोर्निया की ही रहने वाली थी. वह मिनेसोटा की यूनिवर्सिटी औफ मिनेसोटा मैडिकल स्कूल में मैडिकल की छात्रा थी. दोनों के बीच पहले दोस्ती हुई और फिर बहुत जल्द उन की यह दोस्ती प्यार में बदल गई. रिश्तों की मिठास बढ़ी तो दोनों ने सन 14 जून, 2011 में विवाह कर लिया. लेकिन जब यह बात मैनक के पिता को पता चली तो बेटे की इस हरकत पर वह काफी नाराज हुए. पितापुत्र के रिश्तों में कड़वाहट आ गई और एक साल बाद दिल का दौरा पड़ने से उन की मौत हो गई.
उधर मैनक की जिंदगी खुशियों से गुलजार थी. एश्ले भी उसे पा कर खुश थी. मैनक मिनेसोटा के एक अपार्टमेंट में रहता था. वह ऊंचाइयों के ख्वाब देखता था. उस ने अपनी सफलता की नींव रख दी थी, जिस के लिए उस ने पूरी लगन से पढ़ाई की थी.
सन 2013 उस के लिए खास था. दरअसल उस साल वह अपना शोध जमा करने वाला था. उसे अपने सपनों को पूरा करने का समय नजदीक लग रहा था. इंसान जो सोचता है, जरूरी नहीं कि जिंदगी में ठीक वैसा ही हो. सपने देखना इंसानी फितरत है. तकलीफ तब होती है, जब खूबसूरत सपने टूटते हैं. मैनक भी इस कड़वी हकीकत का शिकार हुआ. कड़ी मेहनत के बाद उस ने खुशीखुशी सन 2013 में अपना शोध कार्य जमा कर दिया. इतना ही नहीं, उस ने शोध के पहले पन्ने और अपने सोशल नेटवर्क पर क्लग के लिए लिखा कि ‘मेरा गुरु होने का धन्यवाद.’
जाहिर था, वह क्लग की दिल से इज्जत करता था. मैनक को झटका तब लगा, जब उसे पता चला कि उस के शोध को अस्वीकार कर दिया गया है. उस के शोध निबंध को अच्छा नहीं माना गया था. पलक झपकते ही उस के सपने चकनाचूर हो गए. उस ने प्रोफेसर से बात की तो उन्होंने कहा, ‘‘आप ने जो किया है, वह पर्याप्त नहीं है, आप को और करना होगा.’’
मैनक को ऐसी उम्मीद कतई नहीं थी. वह हताश हुआ और परेशान भी. इस से वह एक सप्ताह तक यूनिवर्सिटी नहीं जा सका. लेकिन यारदोस्तों के समझाने पर उस ने किसी तरह खुद को संभाल लिया. इस बीच उस की नौकरी छूट गई और उस ने ओहायो की एक एंडुरिका एलएलसी नामक कंपनी में बतौर एनैलिस्ट की नौकरी कर ली.
शोध के बीच वह कंप्यूटर जनित वर्चुअल हार्ट विकसित करने की कोशिश भी कर रहा था. वक्त बीतता रहा, लेकिन उस के शोध को हरी झंडी नहीं मिली. इस से वह अवसादग्रस्त हो गया. इस बीच पत्नी एश्ले हस्ती से भी उस की अनबन रहने लगी. रिश्ते की बुनियाद दरकी तो उस का चलना मुश्किल हो गया. इस के बाद एश्ले अलग हो गई. बाद में एश्ले ने नौर्थ हिनतपिन कम्यूनिटी कालेज में ट्यूटर की नौकरी कर ली और मिनियापोलिस उपनगर जा कर रहने लगी.
इन सब घटनाओं से मैनक परेशान रहने लगा. परेशानी में उस की नौकरी भी जाती रही. जिंदगी से जब शिकायतें बढ़ती हैं तो इंसान का पूरा स्वभाव ही बदल जाता है. मैनक के साथ भी ऐसा ही हो रहा था. वह ढेरों सपनों के साथ विदेश आया था. शोध स्वीकार नहीं हुआ. जिस के लिए पिता की नाराजगी झेली, वह भी उसे छोड़ कर चली गई. नौकरी छूट गई. भविष्य अधर में था.
इस सब के बावजूद सफलता की उम्मीद में उस ने अपना पूरा ध्यान शोध पर लगाया. क्योंकि उस के लिए कई सालों से लगा था. शोध यूनिवर्सिटी में जमा हो कर उस पर लाइसैंस मिलना था और रौयल्टी समझौते के बाद उस पर साझा मोटे लाभ मिलने थे. यही उस का सपना भी था.
वक्त अपनी गति से बीत रहा था. उस का दिलोदिमाग इस हकीकत को मानने को तैयार ही नहीं था कि वह नाकाबिल है. एक साल बाद उस के सहपाठी छात्रों को पीएचडी की उपाधि मिल गई, जबकि मैनक के निर्धारित समय से 2 साल ऊपर हो चुके थे. अन्य छात्र आगे बढ़ रहे थे, जबकि उसे असफलता मिल रही थी. इस के बाद उस ने क्लग के व्यवहार पर गौर किया तो उस के दिमाग में यह बात बैठ गई कि क्लग वास्तव में वैसे इंसान नहीं हैं, जैसे दिखते हैं. वह भेदभाव करते हैं.
मैनक के दिमाग में इस बात ने घर कर लिया. मैनक को खुद पर भरोसा था, इसलिए उस ने जम कर मेहनत की. उस की मेहनत को तब झटका लगा, जब सन 2015 में उस के बाद आए छात्रों के शोधों को स्वीकार कर लिया गया, लेकिन उसे सफलता नहीं मिली. इतना ही नहीं, उस ने जब उन छात्रों के शोधों पर गौर किया तो उन्हें अपने से मिलतेजुलते पाया.
पहले से ही परेशान मैनक सोचने पर मजबूर हो गया. क्लग के साथ उस का भरोसे का रिश्ता रहा था. वह लैपटौप ले कर यूनिवर्सिटी जाता था तो उसे क्लग के पास भी छोड़ देता था. उसे शक हुआ कि क्लग ने उस के लैपटौप को डीकोड कर के उस के शोध के अंश अपने चहेते छात्रों को दे दिए हैं. मैनक के सब्र का बांध टूट गया. बाद में एक दिन उस ने उन पर चोरी का आरोप भी लगाया, लेकिन क्लग ने उस के आरोपों से इंकार कर दिया.
इस घटना के बाद मैनक क्लग से चिढ़ने लगा. परेशानी की अवस्था में उस ने शोध जारी रखा. पत्नी भी उस से दूर हो चुकी थी. मैनक का हर सपना आईने की तरह टूट कर बिखर रहा था. अब वह विदेश आ कर पढ़ाई करने के अपने निर्णय पर पछता रहा था. पत्नी के साथ छोड़ने और प्रोफेसर क्लग के कथित धोखे व भेदभाव को ले कर दोनों के प्रति उस के मन में गुस्से ने अपनी जगह बना ली थी.
10 मार्च को उस ने सोशल मीडिया पर सार्वजनिक तौर पर प्रोफेसर क्लग पर टिप्पणी करते हुए लिखा कि ‘विलियम क्लग प्रोफेसर होने के योग्य नहीं है. वह बीमार मानसिकता का व्यक्ति है. मैं यूनिवर्सिटी में आने वाले हर नए छात्र को उस से दूर रहने की सलाह देता हूं, क्योंकि उस ने मुझे बर्बाद कर दिया है.’
इस के बाद एक टिप्पणी में उस ने कहा कि ‘विलियम क्लग प्रोफेसर जैसे गुणों वाले व्यक्ति नहीं हैं. वह बहुत खराब इंसान हैं. दुश्मन तो दुश्मन ही होता है, लेकिन अच्छे रिश्तों की आड़ में कोई दुश्मन से अधिक नुकसान कर सकता है. हम जिन पर भरोसा करते हैं, उन्हें ले कर सतर्क रहना चाहिए. क्लग रिश्तों का फायदा उठाते हैं.’
उस की टिप्पणियां यूनिवर्सिटी में चर्चाओं का केंद्र बन रही थीं, लेकिन इस का कोई नतीजा नहीं निकला. यूनिवर्सिटी प्रशासन ने न इस की कोई जांच की और न ही गंभीरता दिखाई. इन सब बातों ने गुरुशिष्य के बीच और भी दूरियां पैदा कर दीं. यूनिवर्सिटी के एक और प्रोफेसर थे. उन की क्लग से दोस्ती थी. मैनक को लगा कि वह भी क्लग को उस के खिलाफ भड़काने का काम करते हैं.
इस साल के सेमेस्टर एग्जाम में क्लग ने उसे ग्रेड देने से मना कर दिया था. यह उन की नाराजगी का नतीजा था. मैनक को लगने लगा कि क्लग उस के शोध को कभी स्वीकार नहीं करेंगे. उस की इतने सालों की मेहनत बेकार जाएगी. मैनक दिनरात परेशान रहने लगा. भविष्य को देख कर उस की रातों की नींद उड़ गई और सब्र जवाब दे गया.
अवसाद में इंसान का विवेक खो जाता है और उस का संतुलन डगमगाने लगता है. मैनक के साथ भी ऐसा ही हुआ. उसे प्रोफेसर क्लग, पत्नी एश्ले और क्लग के साथी प्रोफेसर अपने सब से बड़े दुश्मन नजर आने लगे. उस ने मन ही मन भयानक निर्णय ले लिया. उस ने एक ‘किल लिस्ट’ बनाई, जिस में तीनों के नाम दर्ज कर लिए. इस बीच उस ने प्रतिशोध लेने के लिए अवैध तरीके से 2 पिस्टलों का इंतजाम कर लिया.
एक जून की सुबह सब से पहले वह कार से एश्ले के फ्लैट पर पहुंचा और गोली मार कर उस की हत्या कर दी. इस के बाद वह यूनिवर्सिटी गया और प्रोफेसर क्लग को मौत की नींद सुला दिया. उस ने अपनी दुश्मन लिस्ट में शामिल उन के साथी प्रोफेसर को भी ढूंढ़ने की कोशिश की, लेकिन वह नहीं मिले तो उस ने खुद को गोली मार ली.
समूची घटना ने लोगों को हिला कर रख दिया था. सवाल उठ रहे थे कि आखिर ऐसी नौबत आई ही क्यों? क्या वाकई मैनक के साथ भेदभाव किया जा रहा था? अगर ऐसा था तो यह गंभीर मामला था. जो लोग महंगी पढ़ाई के सपने ले कर विदेश जाते हैं, उन के साथ ऐसा नहीं होना चाहिए. 3 जून को यूनिवर्सिटी खुली. क्लग की मौत पर गहरा शोक जता कर छात्रों ने श्रद्धासुमन अर्पित किए.
इस बीच विरोध प्रदर्शन भी हुए. लोगों ने भारतीय छात्र के साथ हुई नाइंसाफी का आरोप लगा कर नाराजगी जाहिर की तो कुछ लोगों ने मारे गए प्रोफेसर के समर्थन में मार्च निकाला. पुलिस ने लोगों को शांत किया. यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर व छात्र मैनक के आरोपों को गलत मानते हैं. कई लोगों का मानना था कि मैनक मानसिक रूप से बीमार हो गया था.
वास्तव में क्लग बहुत अच्छे इंसान थे. घटना पर मैनक के भारतीय सहपाठी और शिक्षक भी हैरान हैं. अंदर की हकीकत चाहे जो भी रही हो, लेकिन सब से बड़ा सवाल है कि सफलताओं की नींव मजबूत करने वाला मैनक आखिर हिंसक कैसे हो गया? उस के नाइंसाफी वाले आरोपों की जांच समय रहते नहीं की गई. वह अकेला पड़ गया. बहरहाल एक होनहार छात्र के अवसाद को समय रहते गंभीरता से समझा जाता और उस ने भी संयम से काम लिया होता तो शायद ऐसी नौबत नहीं आती. Double Murder Suicide Case
—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित






