Honey Trap Case: कंचन का तो पेशा ही था मर्दों को फांस कर उन से की गई बातों को मोबाइल से रिकौर्ड कर के ब्लैकमेल करने का, लेकिन नायब तहसीलदार संदीप कुमार के बारे में जो पता चला है, उन्हें भी पाकसाफ नहीं कहा जा सकता.

25 अप्रैल की सुबह जयपुर के थाना अशोकनगर के थानाप्रभारी बालाराम ने औफिस में आते ही सब से पहले ड्यूटी अफसर को बुला कर खैरखबर पूछी. उन्होंने बताया कि सब ठीकठाक है तो थानाप्रभारी ने चैन की सांस ली. ड्यूटी अफसर के जाने के बाद उन्होंने घंटी बजा कर अर्दली को बुलाया और चाय मंगाई. इस के बाद चाय पीते हुए मेज पर रखी पुरानी फाइलों को देखने लगे.

थानाप्रभारी चाय पी रहे थे कि अर्दली ने पुन: कमरे में आ कर कहा, सर, एक आदमी आया है, वह आप से मिलना चाहता है. ठीक है, चाय का कप मेज पर रखते हुए उन्होंने कहा, यह चाय का कप हटाओ और उन्हें अंदर भेज दो.

अर्दली के बाहर जाते ही एक आदमी अंदर आया. उस ने बालाराम की ओर हाथ बढ़ा कर कहा, सर, मेरा नाम संदीप कुमार है. मैं नायब तहसीलदार हूं. इस समय मेरी पोस्टिंग अलवर में है. थानाप्रभारी ने नायब तहसीलदार संदीप कुमार से हाथ मिलाते हुए सामने रखी कुर्सी पर बैठने का इशारा किया तो वह बैठ गए. इस के बाद बालाराम ने अर्दली को बुला कर पानी लाने को कहा. अर्दली पानी ले आया तो संदीप कुमार ने पानी पिया. इस के बाद थानाप्रभारी ने पूछा, बताइए नायब साहब, कैसे आना हुआ?

सर, मैं कुछ परेशानी में हूं, इसलिए आप के पास आया हूं. संदीप कुमार ने कहा. नायब साहब, आप की जो भी परेशानी हो, उसे विस्तार से बताइए, ताकि मैं आप की मदद कर सकूं. थानाप्रभारी ने कहा. सर, बात एक महिला से जुड़ी है, वह मुझे ब्लैकमेल कर रही है. संदीप कुमार ने कहा, मैं सीधासादा आदमी हूं और सरकारी अधिकारी हूं. वह मेरी सिधाई का फायदा उठा कर मुझ से लाखों रुपए ऐंठना चाहती है. पैसे न देने पर वह मुझे किसी गलत मामले में फंसाने की धमकी दे रही है.

बालाराम ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पूछा, वह महिला आप से कितने पैसे मांग रही है? पहले 15 लाख रुपए मांग रही थी, अब 50 लाख रुपए मांग रही है. संदीप कुमार ने कहा, मैं इतने पैसे कहां से लाऊं, फिर उसे पैसे क्यों दूं? थानाप्रभारी बालाराम को मामला काफी गंभीर लगा. उन्होंने अर्दली को बुला कर नायब साहब के लिए चाय मंगाई. चाय पीने के बाद उन्होंने संदीप कुमार से पूरा मामला विस्तार से बताने को कहा. इस के बाद संदीप कुमार ने जो बताया, वह इस प्रकार था.

संदीप कुमार की पत्नी अंजना शेरावत भी तहसीलदार है. उन की पोस्टिंग जयपुर में ही थी. लेकिन उन का पत्नी से तलाक का मुकदमा चल रहा था. पिछले साल यानी सन 2015 के सितंबर महीने में रिट पिटीशन की सुनवाई के दौरान उन की मुलाकात हाईकोर्ट के वकील देशराज सिंह से हुई.

तभी वकील देशराज सिंह ने संदीप कुमार का परिचय एक महिला से कराया. उन्होंने उस का नाम कंचन कंवर बताते हुए कहा था कि इस के मातापिता नहीं हैं. इस का अपने पति से विवाद चल रहा है, जिसकी जांच मंडोला के एसीपी कर रहे हैं. महिला उन की मुवक्किल थी, इसलिए उन्होंने संदीप कुमार से उस महिला की कुछ कानूनी मदद करवाने को कहा. वह चाहते थे कि उस का अपने पति से राजीनामा हो जाए.

इस के बाद कंचन कंवर ने वकील साहब से संदीप कुमार के मोबाइल नंबर ले लिए. इस के बाद कंचन उन्हें फोन करने लगी. संदीप कुमार ने उसे एसीपी साहब से मिलवा कर कहा कि अब वह उन्हें फोन न किया करे. उसे जो भी बात करनी है, अपने वकील से करे. लेकिन इस के बाद भी कंचन ने उन्हें फोन करने बंद नहीं किए.

कंचन उन्हें कुछ दिनों के अंतराल फोन कर के खुद को असहाय तथा बिना घरबार वाली बताते हुए कहती कि उस की 2 साल की एक बेटी है, उस के मातापिता भी नहीं हैं. इस तरह की बातें कर के वह उन से सहानुभूति पाने की कोशिश करती. लेकिन संदीप कुमार उस की बातों पर ध्यान न देते. अकसर वह उस का फोन काट देते. इस के बावजूद उस ने उन्हें फोन करना बंद नहीं किया.

ऐसे में ही एक दिन कंचन ने उन्हें फोन कर के कहा, सर, आप बड़े हैंडसम हैं. आप की पर्सनैलिटी गजब की है. मुझे ऐसे ही मर्द अच्छे लगते हैं. कंचन की इन बातों का कोई जवाब देने के बजाय संदीप कुमार ने फोन काट दिया.  कुछ दिनों बाद फिर कंचन ने उन्हें फोन कर के कहा, मैं आप से प्यार करती हूं, जबकि आप मुझ से बात तक नहीं करते. मैं ही फोन कर के प्यार जताती हूं. आप तो कभी पलट कर फोन भी नहीं करते. यह अलग बात है कि मैं असहाय हूं, लेकिन खूबसूरत तो हूं ही.

कंचन की प्यार जताने वाली बातें सुन कर संदीप कुमार हैरान रह गए. उन्होंने नाराजगी जताते हुए साफसाफ कह दिया, आज के बाद मुझ से इस तरह की बातें दोबारा मत करना. इस के बाद संदीप कुमार ने कंचन का फोन उठाना बंद कर दिया. कुछ दिनों बाद 17 मार्च को संदीप कुमार जयपुर के विद्याधरनगर के सेक्टर 6 के केंद्रीय विहार स्थित अपने घर में थे. सुबह के करीब 6 बजे के करीब वह सो कर उठे ही थे कि उन की डोरबेल बजी. उन्होंने दरवाजा खोला तो सामने चंचल खड़ी थी.

वह उस से कुछ कहते, उस के पहले ही उस ने उन के हाथ में एक सीडी थमाते हुए कहा, आखिर मैं ने आप के घर का पता लगा ही लिया. इस सीडी को ध्यान से सुनना, उस के बाद मुझ से संपर्क करना. संदीप कुमार ने पूछा, इस सीडी में क्या है? इसे सुनोगे तो खुद ही जान जाओगे. संदीप कुमार उस से कुछ पूछते, वह पलटी और तेजी से चली गई.

उन्होंने उसी दिन वकील देशराज सिंह से संपर्क किया तो उन्होंने उन्हें हाईकोर्ट आने को कहा. वह हाईकोर्ट पहुंचे तो कंचन वकील साहब के पास बैठी मिली. उन्हें देखते ही कंचन ने कहा, आप ने सीडी सुनी या नहीं? मेरे पास लैपटौप या कंप्यूटर नहीं है, इसलिए मैं ने सीडी नहीं सुनी. तुम सीडी को सुन लो, तब तुम्हें पता चल जाएगा कि हमारे बीच कबकब, क्याक्या बातें हुई हैं. उस के बाद मुझ से बात कर लेना. तब मैं जहां कहूं, वहां 5 लाख रुपए पहुंचा देना, वरना आप की सारी इज्जत और सामाजिक प्रतिष्ठा मैं मिट्टी में मिला दूंगी. यही नहीं, जरूरत पड़ी तो आप के खिलाफ दुष्कर्म का मुकदमा भी दर्ज करा दूंगी. आप को बता दूं, आप के खिलाफ दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज कराने के लिए आप की पत्नी अंजना शेरावत मुझे 5 लाख रुपए दे रही हैं.कंचन ने कहा.

मामला काफी गंभीर और एक प्रशासनिक अधिकारी से जुड़ा था, इसलिए सारी बातें सुनने के बाद थानाप्रभारी बालाराम ने संदीप कुमार को तसल्ली देते हुए कहा, ऐसा कीजिए, आप सारी बातें लिख कर दे दीजिए. उस के बाद हम मुकदमा दर्ज कर के जांच करते हैं. अगर मामला सही निकला तो हम महिला को गिरफ्तार कर लेंगे. अगर आप पाकसाफ हैं तो अब वह महिला आप का कुछ नहीं बिगाड़ सकती. लेकिन एक बात का विशेष ध्यान रखना, किसी की बातों में आ कर या किसी बिचौलिए के माध्यम से आप किसी को पैसे मत दे देना.

संदीप कुमार ने थानाप्रभारी की बात पर सहमति जताई, साथ ही प्रार्थना पत्र लिख कर रिपोर्ट दर्ज करने के लिए दे दिया तो उसी दिन थाना अशोकनगर में संदीप कुमार की यह रिपोर्ट अपराध संख्या 139/2016 पर भादंवि की धारा 384, 420 एवं 120बी के तहत दर्ज कर ली गई. मामले की गंभीरता को देखते हुए बालाराम ने खुद ही इस मामले की जांच करने का निर्णय लिया.

जांच शुरू करने से पहले बालाराम ने डीसीपी दक्षिण मनीष अग्रवाल एवं एसीपी महेंद्र सिंह हरसाना को इस मामले की जानकारी दी तो मनीष अग्रवाल ने इस मामले की जांच के लिए एसीपी महेंद्र सिंह हरसाना के निर्देशन में बालाराम के नेतृत्व में एक टीम गठित कर दी. शुरुआती जांच में ही पता चल गया कि कंचन कंवर बहुत ही शातिर एवं चालाक है. वह फोन पर बातें कर के उन्हें रिकौर्ड कर लेती है, उस के बाद ब्लैकमेल करती है.

कंचन की गतिविधियों पर नजर रखने और उस की असलियत का पता लगाने के लिए पुलिस ने उस के मोबाइल नंबरों को सर्विलांस पर लगा दिया. इस से पुलिस को उस के मोबाइल से होने वाली सारी बातों की जानकारी मिल रही थी. इस बीच कंचन लगातार संदीप कुमार को फोन कर के मुकदमा दर्ज कराने का भय दिखा कर ब्लैकमेल करने की कोशिश करती रही.

यही नहीं, पैसों की डिमांड भी बढ़ा दी थी. वह कभी 15 लाख रुपए मांगती तो कभी 50 लाख रुपए. वह संदीप से कह रही थी कि उस की पत्नी अंजना शेरावत उसे फंसाने के लिए 15 लाख रुपए दे रही है. अगर वह समझौता करना चाहता है, तो उसे 50 लाख रुपए देने होंगे.

संदीप कुमार और कंचन के बीच समझौता कराने के लिए कुछ बिचौलिए भी आ गए थे. शायद कंचन को मिलने वाली रकम से उन्हें भी कुछ रकम मिलने की उम्मीद थी. कंचन के मोबाइल नंबरों को सर्विलांस पर लगवाने और अन्य जांच से साफ हो गया कि कंचन संदीप कुमार को ब्लैकमेल कर के रकम ऐंठना चाहती है तो पुलिस ने उन की मदद से कंचन को पकड़ने का जाल बिछाया.

पुलिस के कहने पर संदीप कुमार ने कंचन से 7 लाख रुपए में मामला निपटाने की बात पक्की की. पैसों की बात तय हो गई तो कंचन ने यह रकम 9 मई को वैशालीनगर के नर्सरी सर्किल के पास रुपए पहुंचाने को कहा. पूरी तैयारी कर के नियत समय पर नर्सरी सर्किल के पास पुलिस सादे कपड़ों में लग गई. वहां कुछ पुलिस अधिकारी भी आ गए थे.

संदीप कुमार एक बैग में 7 लाख रुपए ले कर पहुंच गए. तय समय पर कंचन एक अन्य महिला के साथ स्कूटी से वहां पहुंची. उसे देख कर संदीप कुमार ने पुलिस टीम को इशारा कर दिया. कंचन ने स्कूटी सड़क किनारे खड़ी की और साथ आई महिला के साथ संदीप के पास आई. हायहैलो कर के उस ने रुपए मांगे तो संदीप ने रुपयों का बैग कंचन को थमा दिया. उस ने वह बैग साथ आई महिला को थमा दिया. तभी वहां टीम में आई महिला सिपाहियों ने कंचन और उस के साथ आई महिला को पकड़ लिया.

दोनों को थाना अशोकनगर ला कर पूछताछ की गई तो पता चला कि कंचन के साथ पकड़ी गई महिला का नाम प्राची था. वह उस की सहेली थी. संदीप कुमार के षड्यंत्र में कंचन के साथ उस की सहेली प्राची भी शामिल थी. इस पूछताछ में जो कहानी उभर कर सामने आई, वह इस प्रकार थी.

कंचन कंवर राजस्थान के जिला पाली के शिवगंज सुमेरपुर के रहने वाले जोरावर सिंह की बेटी है. उस की शादी बचपन में ही सुमेर सिंह से हो गई थी. तीखे नाकनक्श वाली कंचन खूबसूरत तो थी ही, जवान हुई तो उस की खूबसूरती में और भी निखार आ गया.

वह पढ़ी भले बारहवीं तक थी, लेकिन अंग्रेजी ठीकठाक बोल लेती थी. उस की सुंदरता युवाओं का दिल मचलाने के लिए काफी थी. अपने रूपसौंदर्य और अंग्रेजी बोल लेने की वजह से उस की महत्वाकांक्षाएं जाग उठीं, जिस की वजह से उस ने सुमेर सिंह को तलाक दे दिया.

पति के बाद वह सुशील कड़वासरा के संपर्क में आई. वह हनुमानगढ़ का रहने वाला था. दोनों एकदूसरे को प्यार करने लगे और जोधपुर में पतिपत्नी की तरह रहने लगे. यहां कंचन को एक बेटी हुई, जिस का नाम उस ने हर्षिता उर्फ हनी रखा. लेकिन सुशील से भी कंचन की ज्यादा दिनों तक नहीं निभ पाई. उस की महत्वाकांक्षाएं उसे सुशील के मोहपाश में नहीं बांध नहीं सकीं.

सुशील से अलग होने के बाद उस ने सुशील एवं उस के परिवार वालों के खिलाफ हनुमानगढ़, जोधपुर के थाना महामंदिर तथा महिला थाना के अलावा जयपुर के थाना अशोकनगर में मुकदमे दर्ज करा दिए. सुशील से अलग होने के बाद कंचन करीब 4 साल पहले जोधपुर से जयपुर आ गई. फिलहाल वह जयपुर के वैशालीनगर के आचार्य विनोबाभावे नगर में रहती थी.

जयपुर में वह अपने पूर्व पति सुमेर सिंह के साथ ही रहती थी, जबकि वह उस से पहले उस ने तलाक ले चुकी थी. वह इतनी शातिर है कि वह रहती तो थी सुमेर सिंह के साथ, लेकिन गिरफ्तारी के समय उस ने पति का नाम सुशील कड़वासरा बताया था.

कंचन जयपुर में भले ही पूर्वपति सुमेर सिंह के साथ रहती थी, लेकिन उस की महत्वाकांक्षाओं में कमी नहीं आई थी. सुमेर सिंह वैशालीनगर में पतासी व अंडे आदि का ठेला लगाता था. अपनी सीमित आमदनी से सुमेर सिंह न तो उस के शौक पूरे कर सकता था और न ही उस की महत्वाकांक्षाएं. जयपुर आने के बाद कंचन की महत्वाकांक्षाएं और ज्यादा बढ़ गई थीं, साथ ही खर्चे भी.

कंचन शातिर तो पहले से थी, बातें बनाने में भी माहिर थी. उस पर उस का रूपसौंदर्य और खिलखिला कर हंसने की अदा किसी को भी दीवाना बना देती थी. थोड़ीबहुत अंग्रेजी बोल कर वह अपना रुतबा सोसायटी गर्ल के रूप में जमा लेती थी. जयपुर में उस ने अपना एक फ्रैंड सर्किल बना लिया था, जिन में कुछ महिलाएं भी थीं.

पुलिस जांच के अनुसार, कंचन अपनी बातों से लोगों को मोहपाश में फंसा कर उन के मोबाइल नंबर हासिल कर लेती थी. उस के बाद उन से बातें कर के उन बातों की रिकौर्डिंग कर लेती थी. फिर उसी रिकौर्डिंग के आधार पर उन्हें ब्लैकमेल करती थी. पुलिस ने कंचन के कब्जे से 2 मोबाइल फोन जब्त किए थे, जिन में से एक मोबाइल में 2 सिम थे, जबकि दूसरे मोबाइल में कोई सिम नहीं था.

नायब तहसीलदार संदीप कुमार भी कंचन कंवर के जाल में इसी तरह फंसे थे. हनुमानगढ़ के रहने वाले मंगतूराम के बेटे संदीप कुमार की शादी अंजना शेरावत से हुई थी. वह भी तहसीलदार हैं. फिलहाल वह जयपुर में तैनात हैं. दोनों के बीच तलाक का मुकदमा चल रहा है. उन का कोई बच्चा नहीं है. अंजना ने संदीप के खिलाफ पुलिस में भी मुकदमा दर्ज करा रखा है.

अंजना द्वारा मुकदमा दर्ज करने के बाद संदीप ने झुंझुनू की रहने वाली एक कालेज लैक्चरार से शादी कर ली थी. कंचन कंवर को संदीप कुमार की पत्नी अंजना शेरावत के बारे में पता चला तो वह जा कर अंजना से मिली और संदीप कुमार के बारे में उल्टासीधा बता कर उस की सहानुभूति हासिल कर ली.

इस के बाद उस ने अंजना को मोहरा बना कर संदीप से कहा कि उस के खिलाफ दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज कराने के एवज में अंजना उसे 5 लाख रुपए दे रही है. कुछ दिनों बाद उस ने कहा कि उसे फंसाने के लिए अंजना अब 15 लाख रुपए देने को तैयार है, जिस में से 5 लाख रुपए वह उस की बेटी के नाम फिक्स डिपौजिट कराएगी. पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि कंचन अंजना शेरावत से कब मिली थी? और अंजना ने उसे कैसे आश्वासन दिए थे.

अब आते हैं कंचन की सहेली प्राची पर. जयपुर के दुर्गापुर के रहने वाले स्व. भगवानदास की बेटी प्राची ने जयपुर के कनौडिया महिला कालेज से ग्रेजुएशन किया था. उस की शादी विजय खुमानी से हुई थी. विजय जलदाय विभाग में सरकारी कर्मचारी हैं. वह जयपुर की चित्रकूट कालोनी के सेक्टर एक में रहती थी. उस की एक बेटी है चेष्टा, जो मौडर्न एकेडमी में पढ़ती है.

इसी स्कूल में कंचन की बेटी हर्षिता भी पढ़ती थी, जहां आनेजाने के दौरान चंचल एवं प्राची की मुलाकात हुई तो लगभग एक जैसी उम्र होने की वजह से दोनों में दोस्ती हो गई. इस के बाद जल्दी ही दोनों घनिष्ठ सहेलियां बन गईं. हालांकि प्राची के घर वाले कंचन से उस की दोस्ती के विरोधी थे, लेकिन चंचल ने प्राची पर पता नहीं ऐसा क्या जादू कर दिया था कि वह उस की संगत में फंसती गई अैर उसी का नतीजा है कि आज वह उस की वजह से जेल में है.

पुलिस ने गिरफ्तारी के अगले दिन 10 मई को कंचन और प्राची को मजिस्ट्रैट के समक्ष पेश कर के पूछताछ के लिए रिमांड पर मांगा तो अदालत ने दोंनों महिला आरोपियों को एक दिन के पुलिस रिमांड पर दे दिया. रिमांड अवधि पूरी होने के बाद पुलिस ने दोनों को फिर से अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया.

पुलिस द्वारा की गई जांच से पता चला है कि कंचन जयपुर में राजस्थान सरकार के शासन सचिवालय के कई अधिकारियों के संपर्क में थी. उस के मोबाइल फोन से ऐसी कई रिकौर्डिंग मिली हैं, जिन में वह लोगों को ब्लैकमेल कर रही है. उन में एक पुलिस इंसपेक्टर और चिकित्सा विभाग का एक अधिकारी भी शामिल है.

कंचन ने इन से मोटी रकम ऐंठी थी. एक रिकौर्डिंग में वह किसी से कह रही थी कि उस का एक फोन कहीं खो गया है, जिस का मैमोरी कार्ड बहुत जरूरी है. वह मोबाइल नहीं, अलादीन का चिराग है. अगर वह मोबाइल मिल जाए तो वह सचिवालय को हिला कर रख देगी.

उस ने इस मोबाइल फोन के गायब होने की रिपोर्ट करीब 2 महीने पहले जयपुर के थाना जवाहर सर्किल में दर्ज करा रखी थी. एक मोबाइल रिकौर्डिंग में कंचन किसी से कह रही थी कि किसी मंत्री से मिला दो. एक बार किसी मंत्री से सेटिंग हो जाए तो बहुत काम कराएंगे. मंत्री उस के पीछेपीछे घूमता रहेगा.

यह भी पता चला है कि कंचन लोगों को फंसाने के लिए तांत्रिकों का भी सहारा लेती थी. तांत्रिक उसे कोई ऐसी चीज देते थे, जिसे वह पानी में मिला कर लोगों को पिला देती थी. उस के बाद वह उन्हें अपने जाल में फंसाती थी. जाल में फंसने वाले शिकार को वह दुष्कर्म के मामले में फंसाने की धमकी दे कर मोटी रकम ऐंठती थी. एक रिकौर्डिंग में वह किसी तांत्रिक से नायब तहसीलदार संदीप कुमार को फंसाने की भी बात कर रही है.

पुलिस ने एक तांत्रिक को चिह्नित किया है. उस का नाम विनोद है और वह जयपुर का ही रहने वाला है. दुष्कर्म के मामले में फंसाने की धमकी दे कर ब्लैकमेल करने के अपराध में जेल गई कंचन ने एक इस्तगासा दायर किया है. उस इस्तगासे पर जयपुर महानगर मजिस्ट्रैट क्रम-19 सरिता यादव ने नायब तहसीलदार संदीप कुमार जाट के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच करने के आदेश दिए हैं. यह आदेश जून के पहले सप्ताह में दिया गया है.

मजिस्ट्रेट ने जयपुर के थाना विद्याधरनगर पुलिस को धारा 376 एवं 384 तथा आरटी एक्ट की धारा 67 के तहत काररवाई करने को कहा है. पीडि़ता का कहना था कि उस का ससुराल पक्ष से विवाद होने की वजह से वह मुकदमे को जयपुर ट्रांसफर कराना चाहती थी.

12 सितंबर, 2013 को ससुराल वालों ने उस पर हमला कर दिया था. दायर इस्तगासे में उस ने अरोप लगाया कि नायब तहसीलदार संदीप कुमार ने उसे मुकदमे में मदद करने का आश्वासन देने के साथ बेटी को अपना कर शादी का झांसा दिया और 15 अगस्त, 2015 से अब तक कई बार उस के साथ दुष्कर्म किया. वह उस के साथ अपने दोस्तों से भी दुष्कर्म करवाना चाहता था. अब पुलिस इस मामले की भी जांच कर रही है.

बहरहाल, इस पूरे मामले में सामाजिक और चारित्रिक पतन के साथ मौके का लाभ उठाने वाली बात है. संदीप कुमार का अपनी पत्नी से तलाक का मामला, उस के बाद एक लेक्चरार से शादी और तलाकशुदा कंचन से मुलाकात, ब्लैकमेलिंग एवं दुष्कर्म के आरोप.

नायब तहसीलदार संदीप कुमार के आरोपों में कितना दम है और दुष्कर्म पीडि़ता के आरोपों में क्या सच्चाई है, यह पुलिस जांच के बाद ही पता चलेगा. लेकिन पुलिस को मिले साक्ष्यों ने चालबाज हसीना की महत्वाकांक्षाओं ने उसे जेल के सीखचों के पीछे पहुंचा दिया है. उस की सहेली प्राची भी उस के चक्कर में फंस गई. संदीप कुमार का असली चेहरा तो पुलिस जांच के बाद ही समाने आएगा.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित. कथा में किसी वजह से मुख्य आरोपी का नाम बदल कर कंचन कर दिया गया है.

 

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