High Profile Death Case. पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव की दूसरी पत्नी के बेटे प्रतीक यादव की मौत से सभी अचंभित हैं. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उन के शरीर पर कुल 6 चोटों के निशान पाए गए. ये सभी चोट मृत्यु से पहले की बताई गईं. मात्र 38 वर्ष की आयु में एक फौलादी शरीर के मालिक प्रतीक का अचानक यूं चले जाना अपने आप में एक रहस्यमयी प्रश्न खड़ा कर रहा है. आखिर क्या है प्रतीक यादव की मौत का रहस्य?
13 मई, 2026 की सुबहसुबह जब प्रतीक यादव की अकस्मात हुई मृत्यु का समाचार मीडिया में हाईलाइट हुआ तो केवल उत्तर प्रदेश के लोग ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लोग अचंभित हो कर रह गए थे. बुधवार 13 मई को प्रतीक यादव को लखनऊ के डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी (सिविल) अस्पताल लाया गया, जहां विस्तृत जांच के बाद डौक्टरों की टीम ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.
प्रतीक यादव एक सामान्य इंसान नहीं थे, बल्कि वह समाजवादी पार्टी के संस्थापक, उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व रक्षामंत्री मुलायम सिंह यादव और उन की दूसरी पत्नी साधना गुप्ता के छोटे बेटे थे.
लखनऊ के डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी (सिविल) अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) डा. देवेश चंद्र पांडे के अनुसार प्रतीक यादव को अस्पताल में मृत अवस्था में ही लाया गया था. सुबह साढ़े 5 बजे प्रतीक के घर से कोई व्यक्ति मदद के लिए अस्पताल आया था, जिस के बाद एक मैडिकल औफिसर को उन के आवास पर भेजा गया.
डौक्टर को घर पहुंचने पर प्रतीक के शरीर में हलचल नहीं दिखाई दी. 5.55 बजे प्रतीक को सिविल अस्पताल लाया गया. अस्पताल में उस समय इमरजेंसी डौक्टर कुलदीप वर्मा के अलावा डा. प्रिंस और डा. अनिल कुमार भी मौजूद थे.
डौक्टरों ने तुरंत प्रतीक यादव को आईसीयू में शिफ्ट किया और ईसीजी सहित सभी वाइटल जांचें कीं. असल में अस्पताल लाने से पहले ही प्रतीक की पल्स बंद हो चुकी थी, जिस के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया गया.
सिविल अस्पताल के सीएमएस डा. देवेश चंद्र पांडे ने आगे बताया कि अस्पताल लाते समय उन का शरीर और नाखून नीले पड़ चुके थे. शुरुआत में औक्सीजन की कमी या संदिग्ध जहर की आशंका को देखते हुए मृत्यु के असली कारण को जानने के लिए प्रतीक के शव को पोस्टमार्टम के लिए किंग जौर्ज मैडिकल यूनिवर्सिटी भेज दिया गया.
मेदांता हौस्पिटल की डौक्टर रुचिता शर्मा ने बताया कि प्रतीक उन के पुराने पेशेंट थे और वे उन का हाई ब्लडप्रेशर और डीवीटी का इलाज कर रही थीं. कुछ समय पहले ही प्रतीक का पल्मोनरी एंबोलिज्म डायग्नोज हुआ था, जोकि रक्त धमनियों में एक बेहद गंभीर और जानलेवा बीमारी है.
फेफड़ों में ब्लौकेज
फेफड़ों में इस ब्लौकेज के कारण प्रतीक की दिल की कार्यप्रणाली पर बहुत बुरा असर पड़ रहा था. इस के अलावा उन्हें सांस लेने में तकलीफ की शिकायत भी थी, जिस के लिए वे ब्लड थिनर्स यानी कि खून को पतला करने वाली दवाइयां और बीपी की दवाइयां नियमित रूप से ले रहे थे.
इस के अलावा 30 अप्रैल, 2026 को लखनऊ एयरपोर्ट पर फ्लाइट से उतरते समय प्रतीक को सीने में तेज दर्द हुआ था और वे गिर गए थे, जिस के बाद उन्हें मेदांता अस्पताल के आईसीयू में भरती कराया गया था. लेकिन डौक्टरों की चेतावनी और सलाह के बावजूद भी प्रतीक अस्पताल से खुद ही डिस्चार्ज हो कर अपने घर चले गए थे.
उधर दूसरी तरफ प्रतीक यादव की मौत की खबर मिलते ही लखनऊ के डीसीपी (सेंट्रल) विकांत वीर और मजिस्ट्रैट भी तुरंत प्रतीक यादव के आवास पर पहुंच चुके थे.
दोनों अधिकारियों ने काफी समय तक कमरे और आसपास की स्थिति का सूक्ष्मता से निरीक्षण किया. पुलिस को शुरुआती जांच में कई महत्त्वपूर्ण चीजें कमरे से मिलीं, इसी कारण ऐहतियातन प्रतीक का कमरा सील कर दिया गया.
पुलिस ने प्रतीक यादव का मोबाइल, लैपटाप, डायरी और अन्य निजी सामान अपने कब्जे में ले कर फोरैंसिक जांच शुरू कर दी.
प्रदीप यादव की आकस्मिक मौत को ले कर संदेह और भी अधिक बढ़ता जा रहा था, क्योंकि उन के हाथ और सीने पर नीले निशान पाए गए थे.
डौक्टरों ने भी शुरुआती तौर पर जहर की आशंका जताई थी. विशेषज्ञों के अनुसार आमतौर पर शरीर पर चोट लगने के तुरंत बाद निशान लाल हो जाता है और कुछ घंटों के बाद नीला और बाद में काला पडऩे लग जाता है. यही कारण था कि पुलिस और डौक्टर दोनों इस मामले को गंभीरता से देख रहे थे.
यह एक हाईप्रोफाइल मामला था, इसलिए 3 प्रशिक्षित डौक्टरों के एक विशेष पैनल द्वारा किंग जौर्ज मैडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) में विधिवत पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी की गई और साथ ही पूरी जांच रिपोर्ट की वीडियोग्राफी भी कराई गई.
पूर्व रक्षामंत्री दिवंगत मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे और भाजपा नेता अपर्णा यादव के पति प्रतीक यादव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का मुख्य कारण ‘कार्डियोरेस्पिरेटरी कोलैप्सÓ (हृदय और श्वसन तंत्र का अचानक ठप होना) मैसिव पल्मोनरी थ्रोंबोएंबोलिज्म (फेफड़ों की धमनियों में खून का बड़ा थक्का जमना) बताया गया.
मौत के सटीक कारणों की सूक्ष्मता से पुष्टि करने और किसी भी प्रकार के बाहरी या टौक्सिकोलौजिकल यानी कि विषाक्त कारकों की संभावनाओं को खारिज करने के लिए पोस्टमार्टम करने वाली डौक्टरों की टीम ने प्रतीक यादव का विसरा, हृदय और फेफड़ों से मिले थक्के के हिस्से को फोरैंसिक और कैमिकल एनालिसिस के लिए सुरक्षित रख लिया.
उधर प्रतीक यादव की मौत की खबर मिलते ही उन के परिवार में और सपा समर्थकों में शोक की लहर दौड़ गई. सपा प्रमुख और प्रतीक के बड़े भाई अखिलेश यादव ने पोस्टमार्टम हाउस से निकलने के बाद एक बड़ा भावुक बयान दिया. उन्होंने कहा कि प्रतीक अपने स्वास्थ्य के प्रति हमेशा जागरूक रहता था और अपने बिजनैस में ही व्यस्त रहता था.
उन्होंने आगे कहा कि करीब 2 महीने पहले उन की प्रतीक से मुलाकात हुई थी, जिस दौरान उन्होंने प्रतीक को अपने काम पर ध्यान देने की सलाह दी थी.
सपा प्रमुख अखिलेश ने प्रतीक को एक बहुत अच्छा लड़का बताते हुए कहा कि प्रतीक परिवार के लिए हमेशा समर्पित रहता था.
कौन थे प्रतीक यादव
प्रतीक के बिजनैस के उतारचढ़ाव पर बात करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि कई बार व्यापार में नुकसान होने पर व्यक्ति मानसिक रूप से काफी प्रभावित हो जाता है.
अखिलेश यादव ने कहा कि परिवार जो भी फैसला करेगा, उसी के मुताबिक कानूनी रास्ते में आगे बढ़ा जाएगा.
प्रतीक यादव के पूर्व और बायोलौजिकल पिता चंद्रप्रकाश गुप्ता थे. प्रतीक की मम्मी साधना गुप्ता का पहला विवाह 4 जुलाई, 1986 को फर्रुखाबाद के एक किराना व्यापारी चंद्रप्रकाश गुप्ता से हुआ था. विवाह के एक वर्ष के बाद 7 जुलाई, 1987 को साधना गुप्ता और चंद्रप्रकाश गुप्ता के घर बेटे प्रतीक (प्रतीक गुप्ता) का जन्म हुआ.
साधना गुप्ता और चंद्रप्रकाश गुप्ता की शादी के तुरंत बाद से ही दोनों के बीच गंभीर वैचारिक मतभेद होने शुरू हो गए थे.
दोनों के विचारों और स्वभाव में जमीनआसमान का अंतर था. शादी के बाद से ही साधना गुप्ता अपनी इस गृहस्थी से बिल्कुल भी खुश नहीं थीं. दोनों के बीच पारिवारिक अनबन इतनी बढ़ गई कि प्रतीक के जन्म के कुछ साल बाद साधना गुप्ता अपने 2 साल के बेटे प्रतीक के साथ अपनी ससुराल छोड़ कर अपने मायके औरैया, उत्तर प्रदेश आ गई थीं. उस के बाद दोनों पतिपत्नी के बीच तलाक का मुकदमा चलता रहा और अंतत: वर्ष 1990 में दोनों का कानूनी तौर पर तलाक हो गया.
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और देश के पूर्व रक्षामंत्री मुलायम सिंह यादव और साधना गुप्ता की प्रेम कहानी उत्तर प्रदेश की राजनीति और व्यक्तिगत जीवन की सब से दिलचस्प और बहुचर्चित कहानियों में से एक रही है. इस प्रेम संबंध की शुरुआत 1980 के दशक में हुई थी और इस रिश्ते को आधिकारिक पहचान मिलने में लगभग 2 दशकों का समय लगा था.
शुरू हुई प्रेम कहानी
साधना गुप्ता नेताजी मुलायम सिंह यादव से उम्र में करीब 20 साल छोटी थीं. साधना गुप्ता समाजवादी पार्टी (तत्कालीन लोकदल) में एक बेहद ही साधारण और युवा कार्यकर्ता के रूप में जुड़ी थीं. साधना गुप्ता के आत्मविश्वास, तीक्ष्ण बुद्धि और खूबसूरती ने मुलायम सिंह को पहली मुलाकातों में ही प्रभावित कर लिया था.
यह प्रेम कहानी तब गहराई में परिवर्तित हुई, जब मुलायम सिंह यादव की मां मूर्ति देवी काफी बीमार रहने लगी थीं. मूर्ति देवी जी को एक बार इलाज के लिए लखनऊ के मैडिकल कालेज में भरती कराया गया था. साधना गुप्ता ने नर्सिंग का कोर्स कर रखा था.
अस्पताल में जब एक अप्रशिक्षित नर्स मुलायम सिंह यादव की माताजी मूर्ति देवी को गलत इंजेक्शन लगाने जा रही थी, तब उस वक्त वहां पर मौजूद साधना गुप्ता ने उस नर्स को तत्काल टोक कर रोक दिया और सही समय पर दखल दे कर मूर्ति देवी की जान बचा कर सब का दिल जीत लिया.
साधना गुप्ता के इस असीम समर्पण और सूझबूझ को देख कर मुलायम सिंह यादव के मन में साधना गुप्ता के प्रति सम्मान और प्रेम और अधिक गहरा हो गया था. इस के बाद साधना लगातार मुलायम सिंह यादव की मां मूर्ति देवी की सेवा करतेकरते उन की पसंदीदा भी बन गई थीं. उस के बाद मुलायम सिंह यादव साधना गुप्ता को अपने जीवन के लिए बहुत लकी मानने लगे थे.
वर्ष 1988-89 के दौर में जब दोनों के बीच रिश्ता प्रगाढ़ हुआ तो उसी दौरान साल 1989 में मुलायम सिंह यादव पहली बार उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य के मुख्यमंत्री बने. इस अभूतपूर्व राजनीतिक सफलता के बाद नेताजी मुलायम सिंह यादव का यह विश्वास और अधिक मजबूत हो गया कि साधना उन के भाग्य को चमकाने वाली साबित हो सकती हैं.
सालों तक दोनों का यह संबंध परदे के अंदर रहा, क्योंकि मुलायम सिंह यादव पहले से शादीशुदा थे. उन की पहली पत्नी मालती देवी (अखिलेश यादव की माताजी) थीं. समाज, राजनीति और परिवार के दबाव के कारण मुलायम सिंह यादव ने इस संबंध को लंबे समय तक गुप्त रखा. समाजवादी पार्टी के तत्कालीन दिग्गज नेता अमर सिंह ही ऐसे अकेले व्यक्ति थे, जो इस पूरी कहानी को जानते थे.
प्रेम कहानी रही राज
वर्ष 2003 में मुलायम सिंह यादव की पहली पत्नी मालती देवी का निधन हो गया, तब इस प्रेम संबंध को परिवार में स्वीकार कराने में अमर सिंह ने पुल का काम किया था, जिस के परिणामस्वरूप साल 2003 में मुलायम सिंह यादव ने साधना गुप्ता की आधिकारिक तौर पर अपने घर में पत्नी का स्थान दिया.
वर्ष 2007 में आय से अधिक संपत्ति के एक मामले में सुप्रीम कोर्ट/सीबीआई जांच के दौरान मुलायम सिंह यादव ने एक हलफनामा दायर किया था, जिस में उन्होंने कानूनी और सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि साधना गुप्ता उन की दूसरी पत्नी हैं और प्रतीक यादव उन के बेटे हैं.
इस तरह यह रिश्ता अस्पताल की एक घटना शुरू हो कर देश की सब से ताकतवर राजनैतिक चौखट तक पहुंचा, जो काफी लंबे इंतजार और टेढ़ेमेढ़े उतारचढ़ावों के बाद सार्वजनिक हो पाया था.
एक नई लव स्टोरी
प्रतीक यादव ने लखनऊ के प्रतिष्ठित सिटी मोंटेसरी स्कूल (सीएमएस) से अपनी शुरुआती और स्कूली शिक्षा प्राप्त की थी. स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय में दाखिला लिया और फिर उन्होंने वहां से बीकौम की डिग्री हासिल की. उस के बाद वह उच्च शिक्षा के लिए यूनाइटेड किंगडम चले गए, जहां पर उन्होंने ग्रेट ब्रिटेन की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी औफ लीड्स से एमबीए की डिग्री हासिल की.
उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव और प्रतीक यादव की लव स्टोरी किसी बौलीवुड स्टोरी से कम नहीं है. वे दोनों एक ही स्कूल में साथसाथ पढ़ते थे, लेकिन उन दोनों के बीच कभी कोई बातचीत या आपस में कोई मुलाकात नहीं हुई. इन दोनों की प्रेम कहानी वर्ष 2001 में स्कूल के दिनों से शुरू हुई थी.
इन दोनों प्रेमियों की पहली मुलाकात 2004 में एक कौमन फ्रेंड के जन्मदिन की पार्टी में हुई थी. उस समय प्रतीक 9वीं कक्षा में थे और अपर्णा बिष्ट लोरेटो कौन्वेंट स्कूल में 8वीं कक्षा की पढ़ाई कर रही थी.
उस दौर में मोबाइल फोन का प्रचलन काफी कम था, इसलिए प्रतीक ने जन्मदिन की पार्टी समाप्त होने के बाद अपर्णा बिष्ट से उन की ईमेल आईडी मांगी. अपर्णा भी पहली नजर में ही प्रतीक से प्रभावित हो गई थी, इसलिए उन्होंने अपनी ईमेल आईडी प्रतीक को तुरंत दे दी थी.
प्रतीक अब अपर्णा को लगातार ईमेल भेज कर उन्हें अपने दिल की बात बयां करने लगे थे. उस के कुछ दिनों के बाद जब अपर्णा बिष्ट ने अपने ईमेल का इनबौक्स चैक किया तो प्रतीक के मासूम और सादगी भरे संदेशों ने उन का दिल ही जीत लिया.
बातोंबातों में जब एक दिन प्रतीक ने अपर्णा को बताया कि उन के पिता उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव हैं तो अपर्णा को बिलकुल भी यकीन नहीं हुआ था.
इसलिए अपर्णा ने प्रतीक से मजाकिया अंदाज में कहा था कि उन के पिता भी तो देश के प्रधानमंत्री हैं. उस के बाद प्रतीक और अपर्णा लगभग 10-11 साल तक रिलेशनशिप में रहे थे.
अपर्णा बिष्ट मूलरूप से उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के डुंडा ब्लौक के सैंणी गांव के एक प्रतिष्ठित ठाकुर बिष्ट परिवार से ताल्लुक रखती थीं. उन का परिवार पिछले कई वर्षों से लखनऊ में रह रहा था. अपर्णा के पापा अरविंद सिंह बिष्ट एक अत्यंत वरिष्ठ और जानेमाने पत्रकार रहे हैं. अरविंद सिंह बिष्ट उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान राज्य सूचना आयुक्त के पद पर भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं, जबकि अपर्णा की मम्मी अंबी बिष्ट एक कामकाजी और प्रशासनिक पृष्ठभूमि से जुड़ी महिला हैं.
अंबी बिष्ट लखनऊ नगर निगम में वरिष्ठ अधिकारी के रूप में कार्यरत रही हैं. अपर्णा का एक छोटा भाई है, जिस का नाम अमन बिष्ट है.
प्रतीक और अपर्णा की इस प्रेम कहानी में मोड़ तब आया, जब दोनों को पढ़ाई के लिए विदेश जाना पड़ा. प्रतीक अपनी आगे की पढ़ाई के लिए ग्रेट ब्रिटेन चले गए और कुछ समय बाद अपर्णा भी मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी चली गईं. दोनों के बीच दोस्ती और प्रेम प्रगाढ़ होता चला गया.
प्रतीक और अपर्णा जब विदेश से अपनी पढ़ाई पूरी कर के लौटे तो उन्होंने अब शादी करने का फैसला कर लिया था. अब बारी थी अपने परिवारों को मनाने की. एक तरफ प्रतीक मुलायम सिंह यादव के बेटे थे तो दूसरी तरफ अपर्णा एक ब्यूरोक्रेट परिवार से ताल्लुक रखती थीं.
अपर्णा ने अपने परिवार को शादी के लिए मना लिया था, लेकिन मुलायम सिंह यादव पहले इस शादी के लिए तैयार नहीं थे.
मम्मी को किया राजी
अब प्रतीक ने अपर्णा से शादी करने के लिए अपनी मम्मी साधना गुप्ता को तैयार किया. प्रतीक की जिद के आगे साधना राजी हो गईं, जिस के बाद साधना गुप्ता ने ही मुलायम सिंह यादव को राजी किया. मुलायम सिंह यादव शुरुआत में थोड़ा झिझक रहे थे, लेकिन बेटे और पत्नी साधना की इच्छा और अमर सिंह के समझाने पर उन्होंने भी इस रिश्ते को अपनी मंजूरी दे दी थी.
इस के बाद प्रतीक और अपर्णा का विवाह 4 दिसंबर, 2011 को उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में स्थित सैफई महोत्सव पंडाल में भव्य रूप में संपन्न किया गया.
यह एक बेहद हाईप्रोफाइल शादी थी, जिस में राजनीति, बौलीवुड और व्यापार जगत की कई दिग्गज हस्तियां शामिल हुई थीं. बौलीवुड मेगास्टार अमिताभ बच्चन और जया बच्चन मुख्य आकर्षणों में से एक थे.
उद्योग जगत से जानेमाने मशहूर उद्योगपति अनिल अंबानी, सुब्रत राय और डालमिया ग्रुप के एस. डालमिया ने भी इस भव्य समारोह में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी, जबकि राजनीतिक जगत से अमर सिंह, गुड्ïडू राजा बुंदेला के अलावा केंद्र और उत्तर प्रदेश के कई पूर्व और वर्तमान मंत्रियों, सासदों और विधायकों ने भी इस शाही शादी में शिरकत की थी.
इस के अतिरिक्त यादव परिवार का पूरा कुनबा इस में शामिल रहा था. प्रतीक यादव के बड़े भाई अखिलेश यादव और भाभी डिंपल यादव पूरे समारोह में मेहमानों की आवभगत और वैवाहिक रस्मों को निभाते नजर आए थे.
मुलायम सिंह यादव के भाई शिवपाल यादव और उन का पूरा परिवार भी इस विवाह का मुख्य हिस्सा था. इस शाही विवाह की भव्यता और वीवीआईपी मेहमानों के विशाल जमावड़े के कारण उस दौरान इस की चर्चा देश भर की मीडिया में काफी दिनों तक रही थी.
राजनीति से दूर रहने वाले प्रतीक जिम और रियल एस्टेट का बिजनैस करते थे. प्रतीक जिम चलाने के साथ फिटनैस को ले कर भी काफी जागरूक थे. वे खुद तो अपनी फिटनैस का काफी ध्यान रखते थे, साथ ही सोशल मीडिया पर भी अकसर जिम और फिटनैस से जुड़े वीडियो शेयर कर आम लोगों को भी फिटनैस के लिए प्रेरित करते रहते थे.
प्रतीक ने वर्ष 2015 में लखनऊ में ‘आयरन कोर फिटÓ नाम से जिम का बिजनैस शुरू किया था. अब इस जिम की कई ब्रांच भी खुल चुकी हैं. इन जिमों में सभी उपकरण इटली और अमेरिका से मंगाए गए हैं, जिन में प्रत्येक क्लाइंट्स से करीब 35 हजार रुपए प्रतिवर्ष फीस ली जाती है.
प्रतीक जिम के अलावा फिटनैस ट्रेनिंग, प्रमोशन और कई ब्रांडों की ब्रांडिंग के लिए काम करने के साथसाथ रियल एस्टेट का कारोबार भी करते थे.
वर्ष 2024 में कई मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया था कि प्रतीक यादव की नेटवर्थ 5.5 करोड़ से 7 करोड़ रुपए तक की थी. उन की सालाना कमाई करीब डेढ़ करोड़ रुपए होने का अनुमान लगाया गया था.
हालांकि प्रतीक यादव की पत्नी अपर्णा यादव की ओर से दिए गए चुनावी हलफनामे में उन दोनों की चल और अचल संपत्ति करीब 23 करोड़ रुपए की बताई गई थी. जिम के साथसाथ प्रतीक को रियल एस्टेट के बिजनैस से भी काफी अच्छी कमाई होती थी.
प्रतीक को लग्जरी कारों का भी शौक था. उन के पास कई लग्जरी कारें थीं. इन कारों में 5 करोड़ रुपए की लैंबोर्गिनी कार भी शामिल थी. प्रतीक और अपर्णा की 2 बेटियां हैं, जिन की उम्र 13 और 7 वर्ष है.
राजनीति से थे दूर
पूरे परिवार के राजनीति में सक्रिय होने के बावजूद प्रतीक यादव खुद राजनीति से इतनी दूर क्यों थे? इस अहम सवाल का जवाब उन्होंने आज से 9 वर्ष पहले खुद ही दिया था.
प्रतीक ने कहा था कि राजनीति उन के लिए नहीं है. वर्ष 2017 में प्रतीक ने एक न्यूज चैनल के इंटरव्यू में साफसाफ अपना पक्ष प्रस्तुत किया था. उन्होंने कहा था कि न तो राजनीति उन के लिए है, न ही वे कभी राजनीति में आने की कल्पना कर सकते हैं.
जब प्रतीक से यह प्रश्न पूछा गया कि आप का पूरा परिवार राजनीति में सक्रिय है तो फिर आप ने राजनीति को अपना करिअर क्यों नहीं बनाया? इस प्रश्न का उत्तर देते हुए प्रतीक ने कहा था कि जब वे स्कूल में 11वीं कक्षा के छात्र थे, तब वे लखनऊ के कैंटोनमेंट में रोज दौडऩे के लिए जाया करते थे.
वहीं पर उन के स्कूल की प्रिंसिपल भी रहती थीं, जो अकसर उन्हें मिलती थीं और पूछा करती थी प्रतीक तुम आगे क्या करोगे? अब आगे पौलिटिक्स ही करोगे या और कुछ? तब वे अपनी प्रिंसिपल से साफसाफ कह देते थे कि वे राजनीति नहीं करेंगे, केवल बिजनैस करेंगे.
यह भी बताया जाता है कि वर्ष 2017 में जब मुलायम सिंह यादव और उन के बड़े बेटे अखिलेश के बीच राजनीतिक तनातनी चल रही थी और तब उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव होने वाले थे. उस समय प्रतीक यादव के राजनीति में आने की काफी संभावनाएं जताई जा रही थीं. तब भी प्रतीक यादव ने साफसाफ कहा था कि मेरी राजनीति में रुचि नहीं है. मैं बिजनैस करता हूं. यदि मेरी राजनीति में रुचि होती तो मैं पहले ही इस में कदम रख लेता.
प्रतीक यादव ने राजनीति में रुचि नहीं ली, लेकिन मुलायम सिंह यादव ने प्रतीक की पत्नी अपर्णा यादव को वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी में टिकट भी दे दिया था, लेकिन वे यह चुनाव हार गई थीं. अपर्णा बाद में सन 2022 में बीजेपी में शामिल हो गई थीं.
प्रतीक यादव और अपर्णा यादव के बीच तलाक की खबरें जनवरी 2026 में तब अत्यधिक सुर्खियों में आई थीं, जब प्रतीक यादव ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक बेहद चौंकाने वाला और काफी विवादित पोस्ट साझा किया था.
उन्होंने अपनी पत्नी अपर्णा को एक स्वार्थी महिला और ‘फैमिली डिस्ट्रायरÓ यानी कि परिवार को तोडऩे वाली बताया था. उन्होंने आरोप लगाया था कि अपर्णा ने उन के पारिवारिक रिश्तों को पूरी तरह से बरबाद कर दिया था.
उन्होंने लिखा था कि वह काफी लंबे समय से बहुत खराब मानसिक दौर और तनाव से गुजर रहे हैं, लेकिन उन की पत्नी अपर्णा को इस से कोई फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि उन्हें सिर्फ अपनी छवि, शोहरत और अपने राजनीतिक प्रभाव की चिंता है.
प्रतीक ने आगे लिखा कि यह शादी उन की जिंदगी का सब से गलत और दुर्भाग्यपूर्ण फैसला रहा था और उन्होंने घोषणा की थी कि वे जल्द ही इस रिश्ते से बाहर निकल रहे हैं और कानूनी रूप से तलाक लेने जा रहे हैं.
प्रतीक की इस भावुक और संवेदनशील पोस्ट के वायरल होते ही सोशल मीडिया और राजनीतिक जगत में हड़कंप मच गया था. शुरुआती विवाद के बीच अपर्णा यादव के भाई अमन बिष्ट ने मीडिया के सामने आ कर यह दावा पेश किया था कि प्रतीक यादव का सोशल मीडिया अकाउंट किसी ने हैक कर लिया है और ये सभी बातें प्रतीक यादव ने नहीं लिखी हैं.
हालांकि इस के तुरंत बाद प्रतीक यादव की ओर से एक और पोस्ट आई, जिस में उन्होंने हैकिंग की थ्योरी को खारिज करते हुए अपनी बात फिर से दोहराई थी. लेकिन इस भारी पारिवारिक ड्रामे और मीडिया कवरेज के लगभग 10 दिनों के बाद अचानक एक नया मोड़ आया.
प्रतीक यादव ने अपनी सभी पुरानी विवादित पोस्ट डिलीट कर दी थीं. उस के बाद उन्होंने अपर्णा यादव के साथ अपनी एक तसवीर साझा करते हुए एक नया संदेश लिखा, ‘आल इज गुड.Ó यानी सब ठीकठाक है. उन्होंने स्पष्ट किया कि राजनीतिक व्यस्तताओं और संवाद की कमी के चलते हमारे बीच कुछ गलतफहमियां पैदा हो गई थीं, जिन्हें अब सुलझा लिया गया है.
रियल एस्टेट में घाटा
प्रतीक यादव के आकस्मिक मौत के बाद अब उन के कारोबारी जीवन और उस से जुड़े विवाद को ले कर कई अहम जानकारियां सामने आ रही हैं. प्रतीक यादव पिछले कुछ समय से अपने कारोबार में लगातार हो रहे नुकसान को ले कर बेहद तनाव में थे.
प्रतीक ने 13 जुलाई, 2015 को लखनऊ के गौतमपल्ली थाने में चिनहट निवासी कारोबारी कृष्णानंद पांडेय, उन की पत्नी वंदना पांडेय और उन के पिता अशोक पांडेय के खिलाफ करोड़ों रुपए के निवेश विवाद में एफआईआर दर्ज करवाई थी.
इस शिकायत में प्रतीक ने आरोप लगाया था कि रियल एस्टेट निवेश के लिए उन्होंने करोड़ों रुपए दिए थे, लेकिन अब अपनी रकम वापस मांगने पर टालमटोल की जा रही है.
प्रतीक यादव ने आरोप लगाया था कि उन से जुड़े लोगों ने करोड़ों रुपए हड़प कर लिए थे और बाद में रंगदारी मांगने के साथ उन्हें झूठे मामलों में फंसाने और आडियो क्लिप वायरल कर बदनाम करने की अलग से धमकी दे रहे हैं.
हालांकि दूसरी तरफ कृष्णानंद पांडेय की ओर से भी पहले प्रतीक के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई थी, लेकिन विस्तृत जांच में उन की शिकायत गलत पाई गई. यह मामला काफी लंबे समय से जांच के दायरे में बताया जा रहा है.
वर्ष 2012 में समाजवादी पार्टी की सरकार बनने के बाद अपर्णा के भाई अमन बिष्ट ने करीब 17 कंपनियां रजिस्टर्ड करवाई थीं. इन में से 16 कंपनियों में वह डायरेक्टर या डेजिग्नेटेड डायरेक्टर के तौर पर जुड़े थे. इन में अधिकतर कंपनियां रियल एस्टेट कारोबार से संबंधित थीं, जबकि इन कंपनियों की कारोबारी जिम्मेदारी मुख्यरूप से प्रतीक यादव संभालते थे.
इस के अलावा प्रतीक यादव ने नोएडा में एक कारोबारी के साथ भी करोड़ों रुपए का निवेश किया था. जब उस कारोबारी ने पैसे लौटाने से इंकार कर दिया तो प्रतीक गहरे डिप्रेशन में चले गए थे.
सामने आई वसीयत
इन लगातार बढ़ते व्यावसायिक विवादों, वित्तीय संकट और कानूनी उलझनों ने प्रतीक के मानसिक स्वास्थ्य पर भी काफी गहरा असर डाला था. फिलहाल पुलिस सभी दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है.
अधिकारियों का कहना है कि विवेचना पूरी होने के बाद आगे की कानूनी काररवाई की जाएगी. इस के बाद प्रतीक और अमन बिष्ट के बीच में भी काफी दूरियां आने लगी थीं.
मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे प्रतीक यादव की मौत के बाद अब उन की वसीयत सामने आई है. इस कथित वसीयत के अनुसार प्रतीक ने अपनी करोड़ों की संपत्ति अपनी दोनों बेटियों के नाम कर दी है.
मीडिया और अन्य सूत्रों के हवाले से चल रही खबरों के मुताबिक इस कथित वसीयत में सब से चौंकाने वाली बात यह है कि इस वसीयत में उन की पत्नी और वर्तमान में भाजपा नेत्री अपर्णा यादव का न तो कहीं जिक्र है और न ही उन के नाम पर कोई संपत्ति की गई है.
इस वसीयत में बेटियों के लिए एक विशेष कानूनी शर्त रखी गई है. दोनों बेटियां इस संपत्ति से मिलने वाले लाभ तो प्राप्त कर सकती हैं, लेकिन बड़ी बेटी के 27 वर्ष की आयु को पूरी करने से पहले इस संपत्ति को बेचा नहीं जा सकेगा, तब तक ये पूरी की पूरी संपत्ति पूरी तरह से सुरक्षित रहेगी.
विस्तृत जांच करवाने की मांग कर के सब कुछ कह ही डाला था. इस में गनीमत यही रही थी कि प्रतीक यादव की पत्नी अपर्णा यादव असम में दौरे पर थीं, लखनऊ में नहीं थीं. यदि अपर्णा उस घड़ी लखनऊ में होतीं तो कई लोग उन को फंसाने के लिए लांछन लगाने के लिए किसी हद तक भी जा सकते थे.
अब सभी को प्रतीक यादव की विसरा रिपोर्ट का इंतजार है. जब तक एफएसएल की यह अंतिम रिपोर्ट आ नहीं जाती, तब तक पुलिस और डौक्टर्स प्रतीक यादव की मौत की अंतिम मैडिकल रिपोर्ट जारी नहीं करेंगे. High Profile Death Case






