Hindi Crime Story. पिंकी का भरापूरा हंसताखेलता परिवार था, इस के बावजूद वह कुछ ऐसा चाहती थी, जो पति उसे नहीं दे पा रहा था. उसी की चाह में वह कुछ ऐसा कर बैठी, जिस की वजह से घरपरिवार तो उजड़ा ही, उसे जेल भी जाना पड़ा.

पिंकी जो चाहती थी, वह उसे नहीं मिला था. उस के सपने बड़े थे, ख्वाहिशें अथाह थीं. वह दुनिया की सारी खुशियों को जीवन में समेट लेना चाहती थी, लेकिन उस की शादी ऐसे आदमी से हो गई थी, जो फेरी लगा कर कपड़े बेचता था. इस के बाद उस के सपने, ख्वाहिशें और सारी खुशियां धराशाई हो गईं. उस की सारी उमंगों पर पानी फिर गया.

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उसे लगा कि इस दुनिया में हर आदमी को वह सब नहीं मिलता, जो वह चाहता है. यही सोच कर वह संतोष करने की कोशिश जरूर करती, लेकिन उस का मन बेचैन रहता. करीब 8 साल पहले उस की शादी आगरा के थाना बाह के गांव तेजसिंहपुरा के रहने वाले आशाराम के छोटे बेटे गौरीशंकर के साथ हुई थी.

2 भाइयों में गौरीशंकर छोटा था. शादी के बाद बड़ा भाई पत्नी के साथ अलग रहने लगा था, इसलिए मातापिता के साथ गौरीशंकर ही रह रहा था. उस की शादी के बाद घर में रौनक आ गई थी. बहू के आने से मातापिता काफी खुश थे. उन्होंने बहू को हाथोंहाथ लिया था. गौरीशंकर गांवगांव घूम कर कपड़े बेचता था. इस के अलावा पिता के साथ खेती भी करवाता था.

गौरीशंकर सीधासादा और मेहनती युवक था. अपना घर चलाने के लिए उस से जितनी मेहनत हो सकती थी, वह करता था, साथ ही पिंकी को भी खुश रखने की कोशिश करता था. वैसे एक मध्यमवर्गीय परिवार की औरत के पास जो होना चाहिए, वह सब पिंकी के पास था. लेकिन वह जो चाहती थी, वह वहां नहीं था. वह ऐसे लड़के से शादी करना चाहती थी, जो जीवन के सारे सुखों को उस के कदमों में डाल देता, लेकिन उसे ऐसा घर और वर नहीं मिला था. इसलिए इस बात को ले कर वह बेचैन रहती थी. यही वजह थी कि ससुराल वालों के प्रति उस का व्यवहार सम्मानजनक नहीं था.

शुरूशुरू में ससुराल वालों ने उसे काबू में करने की कोशिश की, लेकिन जब उन लोगों को लगा कि पिंकी पर काबू पाना उन के वश में नहीं है तो कलह से बचने के लिए वही लोग शांत हो गए. शादी के 2 सालों बाद पिंकी ने हिमांशु को जन्म दिया. बेटा होने के बाद पिंकी उसे पालने में व्यस्त हो गई. मां बनने की खुशी में वह अपनी कड़वाहट को भूलने की कोशिश करने लगी.

3 साल बाद दूसरा बेटा आदित्य पैदा हुआ तो उस ने इसी सब को जिंदगी का सत्य मान लिया और घरगृहस्थी तथा परिवार में मन लगाने लगी. अचानक बड़े बेटे हिमांशु की तबीयत खराब रहने लगी. डाक्टर को दिखाया गया तो पता चला कि उसे कोई बड़ी बीमारी है, जिस का इलाज यहां संभव नहीं है. डाक्टरों ने गौरीशंकर को सलाह दी कि वह उसे दिल्ली के एम्स अस्पताल ले जाए.

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गौरीशंकर पिंकी के साथ बेटे को दिल्ली के एम्स ले गया, जहां डाक्टरों ने बताया कि उस के दिल में छेद है. बेटे को इतनी बड़ी बीमारी है, यह जान कर दोनों परेशान हो उठे. क्योंकि उस के इलाज के लिए काफी पैसों की जरूरत थी. हिमांशु का इलाज एम्स से चलने लगा. इस के बाद घर का माहौल बीमार सा हो गया. बेटे की बीमारी से गौरीशंकर परेशान रहता था.

इलाज के लिए पैसों की जरूरत थी, जिस के लिए गौरीशंकर को और ज्यादा मेहनत करनी पड़ रही थी, इस के अलावा वह मानसिक तनाव में भी रहता था, क्योंकि उस के खर्च तो बढ़ ही गए थे, उसे लगता था कि बीमार हिमांशु का जिस तरह से ध्यान रखना चाहिए, पिंकी उस तरह से उस का ध्यान नहीं रखती. कभी यह बात वह पिंकी से कह देता तो वह उस से लड़ने लगती.

उसी बीच दिल का दौरा पड़ने से गौरीशंकर की मां की मौत हो गई. सास की मौत के बाद पिंकी आजाद हो गई. अब उस का जहां मन होता चली जाती, घर के काम छोड़ कर अड़ोसपड़ोस में घंटों बतियाती रहती. पत्नी की यह लापरवाही गौरीशंकर को परेशान जरूर करती थी, लेकिन कलह की वजह से वह कुछ कह नहीं पाता था.

इस बार पंचायत के चुनाव हुए तो गौरीशंकर के गांव में बीडीसी की महिला सीट थी. गांव वालों ने तेजतर्रार पिंकी से बीडीसी का चुनाव लड़ने को कहा तो वह तैयार हो गई, जबकि सीधासादा गौरीशंकर नहीं चाहता था कि पिंकी चुनाव लड़े. पर पत्नी की जिद के आगे उसे झुकना पड़ा.

आखिर पिंकी की सोई महत्वाकांक्षाएं जाग उठीं. पति ने हथियार डाल दिए तो उस ने बीडीसी का पर्चा भर दिया. वह चुनाव प्रचार में लग गई. घर के लोग तो उस का प्रचार कर ही रहे थे, गांव के भी तमाम लोग उस के प्रचार में लगे थे. पिंकी चुनाव में इस तरह व्यस्त हो गई कि उसे बीमार बेटे की जरा भी परवाह नहीं रह गई.

गौरीशंकर को यह बिलकुल पसंद नहीं था. वह उसे समझाता था कि वह चुनाव जीत भी जाएगी तो उसे कुछ नहीं मिलने वाला. इसलिए उसे अपने घरपरिवार पर ध्यान देना चाहिए. घरपरिवार बना रहेगा तो सभी पूछेंगे. अगर यह बिगड़ गया तो उसे कुछ नहीं मिलने वाला.

इस पर तुनक कर कहती, ‘‘तुम से मेरी खुशियां देखी नहीं जातीं, इसलिए इस तरह की बातें करते हो. हिमांशु की बीमारी कोई एक दिन की तो है नहीं, उसे ठीक होने में पता नहीं कितना समय लगेगा. अब उस के चक्कर में मैं अपनी खुशियों का गला तो नहीं घोंट सकती.’’

पिंकी चुनाव जीत गई. इस के बाद वह गांव की नेता बन गई. अब वह गांव वालों से घिरी रहने लगी, जिस से घरगृहस्थी की ओर से लापरवाह होती गई. गौरीशंकर परेशान रहता था कि वह अपना कामधंधा देखे या बच्चों को संभाले. पिंकी को अब पति की समस्याओं से कोई मतलब नहीं रह गया था.

डाक्टरों ने हिमांशु के औपरेशन की तारीख दे दी तो गौरीशंकर बेटे का औपरेशन कराने की तैयारी करने लगा, जबकि पिंकी अपनी नेतागिरी में लगी थी. आखिर गौरीशंकर ने एम्स में बेटे का औपरेशन करवा दिया. औपरेशन के बाद हिमांशु के लिए विशेष सावधानी की जरूरत थी, इसलिए गौरीशंकर खुद बेटे की देखभाल कर रहा था.

पंचायत चुनाव के बाद ब्लाकप्रमुख के चुनाव होने थे. पंचायत चुनाव में मरछौलीपुरा के उदयवीर ने पिंकी की काफी मदद की थी, इसलिए चुनाव के बाद भी वह उस के घर आताजाता था. ब्लाकप्रमुख का चुनाव लड़ रहे प्रत्याशी ने अपना समर्थन करने वाले बीडीसी सदस्यों को जयपुर भिजवा दिया, जहां सभी को एक होटल में ठहराया गया था.

वहां ठहरे सभी बीडीसी सदस्यों की खातिरदारी की जिम्मेदारी उदयवीर को सौंपी गई थी. होटल में रुकने के दौरान पिंकी और उदयवीर एकदूसरे के इतने करीब आ गए कि उन्होंने सारी मर्यादाओं का उल्लंघन कर डाला. कुछ दिनों तक जयपुर में रह कर ब्लाकप्रमुख के चुनाव के लिए पिंकी घर आ गई, लेकिन अब उस के रहनसहन और बातव्यवहार में काफी बदलाव आ गया था, जिसे महसूस कर के उस के ससुर आशाराम काफी चिंतित रहने लगे थे.

गौरीशंकर सुबह खापी कर फेरी लगाने निकल जाता तो उस के जाते ही उदयवीर आ जाता. उस का आनाजाना आशाराम और गौरीशंकर के बड़े भाई को बिलकुल पसंद नहीं था, इसलिए दोनों ने उदयवीर को घर आनेजाने से मना किया. इस पर उस ने बापबेटे को जान से मारने की धमकी दे दी. डर के मारे बापबेटे चुप रह गए.

पिंकी और उदयवीर की हरकतों से गांव वालों को लगा कि उन के बीच कुछ गलत है तो वे आशाराम पर दबाव डालने लगे कि वह उदयवीर को अपने घर आने से मना करे, क्योंकि इस से गांव की बदनामी तो होती ही है अन्य बहूबेटियों पर भी इस का गलत असर पड़ता है. लेकिन आशाराम उदयवीर को नहीं रोक सका, क्योंकि वह मजबूर था.

जब पानी सिर के ऊपर से गुजरने लगा तो आशाराम ने गौरीशंकर को सारी हकीकत बता दी. पत्नी की करतूतें सुन कर गौरीशंकर दंग रह गया. उसे पता नहीं था कि बात इतना आगे बढ़ गई है. गुस्से में उस ने पिंकी की जम कर पिटाई कर दी, क्योंकि उस की हकरतों से उसे पक्का विश्वास हो गया था कि गांव और घर वाले जो कह रहे हैं, वह सच है. उस के उदयवीर से जरूर गलत संबंध हैं.

अगले दिन गौरीशंकर ने उदयवीर को रोक कर कहा, ‘‘तुम जो कर रहे हो, वह ठीक नहीं है. अच्छा होगा कि तुम अपने काम से काम रखो. जिस दिन तुम मुझे मेरे घर पर मिल गए, मैं तुम्हें छोड़ूंगा नहीं.’’

‘‘भाई, तुम बेकार ही गुस्सा कर रहे हो. मैं तो तुम्हारे घर पिंकी की मदद करने आता था, बाकी मेरा कोई और मकसद नहीं था.’’ उदयवीर ने सफाई में कहा.

‘‘कुछ भी हो, मुझे तुम्हारा मेरे घर आनाजाना बिलकुल पसंद नहीं है, क्योंकि तुम्हारी वजह से गांव में हमारी बदनामी हो रही है. इसलिए तुम मेरे घर मत आया करो.’’ गौरीशंकर ने साफ शब्दों में कह दिया.

इस के बाद गौरीशंकर पत्नी पर नजर रखने लगा, साथ ही तनाव में भी रहने लगा. एक ओर बीमार बेटा था, दूसरी ओर बेलगाम पत्नी, जिस की हरकतों से पतिपत्नी के संबंधों में दरार आने लगी थी. इतना सब होने पर भी पिंकी नहीं मान रही थी. उसे जैसे ही मौका मिलता था, वह उदयवीर से फोन कर के बातें कर लेती थी.

बीडीसी सदस्य होने के बाद से पिंकी का मनोबल काफी हद तक बढ़ गया था. उसे लगता था कि गौरीशंकर उस के लिए न तो उपयुक्त जीवनसाथी है, न उस के लिए कुछ ऐसा कर सकता है, जो वह चाहती है. उस ने गौरीशंकर और उदयवीर में तुलना की तो जीवनसाथी के रूप में उसे उदयवीर ज्यादा उपयुक्त लगा.

इस के बाद पिंकी ने तय कर लिया कि अब वह गौरीशंकर को छोड़ कर उदयवीर के साथ रहेगी. उसे न परिवार की मर्यादा का खयाल करना है न पति और बच्चों का. अपने सुख की चाह में वह सब कुछ भूल गई. उस ने उदयवीर से बात भी कर ली. वह उसे साथ ले जाने को तैयार भी था.

पिंकी को अब उदयवीर के साथ जाने के लिए मौके की तलाश थी. 14 मार्च को गौरीशंकर को हिमांशु को ले कर एम्स जाना था. पिंकी को यह पता था, इसलिए उस ने अपने प्रेमी उदयवीर को यह बात बता दी. उस ने वादा भी कर लिया कि 14 मार्च को वह समय पर उस के घर पहुंच जाएगा. 14 मार्च की सुबह ही गोरीशंकर बेटे को ले कर दिल्ली चला गया. उस के जाने के थोड़ी देर बाद उदयवीर आ गया. उस समय आशाराम और गौरीशंकर का बड़ा भाई घर पर ही थे. पिंकी अपना बैग ले कर उदयवीर के साथ जाने लगी तो आशाराम ने पूछा, ‘‘तुम कहां जा रही हो?’’ ‘‘मैं कहीं भी जाऊं, तुम से क्या मतलब?’’

‘‘तुम मेरी बहू हो. इस आदमी के साथ कहां जा रही हो, यह पूछना मेरा फर्ज है और फिर तुम आदित्य को क्यों ले जा रही हो?’’

ससुर और जेठ की परवाह न करते हुए पिंकी बेटे को ले कर जाने लगी तो बापबेटे ने उसे रोकने की कोशिश की. इस पर उदयवीर ने बीच में आ कर कहा, ‘‘अगर तुम दोनों जिंदा रहना चाहते हो तो पिंकी के रास्ते से हट जाओ.’’

आखिर आशाराम और उन का बड़ा बेटा सामने से हट गया. पिंकी सब की परवाह किए बगैर बेटे को ले कर प्रेमी के साथ चली गई. आशाराम की समझ में नहीं आ रहा था कि गौरीशंकर लौट कर आएगा तो वह उस से क्या कहेंगे? रात को गौरीशंकर बेटे के साथ लौटा तो उस ने पिंकी को आवाज दे कर पानी मांगा. आशाराम पानी ले कर आए तो गौरीशंकर ने पूछा, ‘‘बापू, पिंकी कहां है?’’

आशाराम ने उसे पानी पीने को कहा तो वह समझ गया कि घर में जरूर कोई अनहोनी हुई है. पिंकी और आदित्य, दोनों ही घर में नहीं दिखाई दे रहे थे. उस का दिल धड़क उठा. उस ने कहा, ‘‘बापू बताइए न, पिंकी कहां गई?’’

आशाराम ने जब बताया कि पिंकी आदित्य को ले कर उदयवीर के साथ चली गई है तो पत्नी की इस बेशर्मी पर गौरीशंकर ने अपना सिर पीट लिया. उसे लगा, गांवसमाज को अब वह कौन सा मुंह दिखाएगा. उसे बदनामी का डर सताने लगा. वह चुपचाप उठा और बेटे को ले कर अपने कमरे में चला गया. आशाराम ने सोचा कि वह सुबह बेटे से बात करेगा कि अब आगे क्या किया जाए?

कमरे में आने के बाद गौरीशंकर ने हिमांशु से सो जाने को कहा तो पिता के चेहरे के हावभाव देख कर हिमांशु डर के मारे सो गया. गौरीशंकर काफी थका था. पत्नी की हरकत ने उसे क्षुब्ध कर दिया था. उसे अपना और हिमांशु का जीवन अंधेरे में डूबता नजर आने लगा. पत्नी के लिए जो नफरत थी, वह दिल में उतर आई. उसे लगा कि वह एक कमजोर और असहाय आदमी है, जिस के ऊपर अब सभी हंसेंगे.

पत्नी की इस हरकत से उसे अपना जीवन बेकार लगने लगा. इसलिए उसे लगा कि उसे मर जाना चाहिए. लेकिन मन में यह भी आया कि अगर वह मर गया तो हिमांशु का क्या होगा? अभी तो उस का लंबा इलाज चलना है. अगर इस का इलाज ठीक से नहीं कराया गया तो यह भी मर जाएगा. वह इस सोच में डूब गया कि ऐसे में उसे क्या करना चाहिए?

काफी सोचनेविचारने के बाद गौरीशंकर को लगा कि उसे भी मर जाना चाहिए और हिमांशु को भी. एडि़यां रगड़रगड़ और सिर नीचा कर के जीने से अच्छा मर जाना है. सब कुछ पल भर में खत्म हो जाएगा. यही सोच कर गौरीशंकर ने बसुला (लकड़ी काटने का औजार) उठाया और बेटे पर ऐसा घातक वार किया कि उसे चीखने तक का मौका नहीं मिला और मर गया.

बेटे को मार कर भला गौरीशंकर कैसे जिंदा रहता. उस ने छत से लटक रहे पंखे पर रस्सी बांधी और फंदा बना कर खुद भी झूल गया. एक ओर पिता ने बेटे को मार कर खुद भी जान दे दी थी तो दूसरी ओर पिंकी प्रेमी के साथ ऐश कर रही थी.

आशाराम सुबह 5 बजे ही उठ जाते थे. उन्हीं के साथ गौरीशंकर भी उठ जाता था. पर उस दिन गौरीशंकर नहीं उठा तो आशाराम को चिंता हुई. बेटे के कमरे के पास जा कर उन्होंने दरवाजा खटखटाया. कोई जवाब नहीं मिला. उन्होंने खिड़की से अंदर झांक कर देखा तो उन्हें जो कुछ दिखाई दिया, उसे देख कर वह गश खा कर गिर गए. हिमांशु खून से लथपथ जमीन पर पड़ा था, जबकि गौरीशंकर पंखे से लटक रहा था.

आशाराम जोर से चीखे तो पल भर में पूरा मोहल्ला इकट्ठा हो गया. जिस ने भी कमरे के अंदर झांका, उस का कलेजा मुंह को आ गया. इस घटना की सूचना पुलिस को दी गई तो थोड़ी ही देर में थाना बाह के थानाप्रभारी अजय यादव पुलिस बल के साथ पहुंच गए. दोनों लाशों को कब्जे में ले कर उन्होंने पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया.

इस के बाद मृतक गौरीशंकर के बड़े भाई की ओर से धारा 306 के अंतर्गत पिंकी और उदयवीर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया. पिंकी के मायके वालों को भी सूचना दे दी गई थी.

सूचना पा कर पिंकी के मांबाप आ गए थे. बेटी की करतूत से उन का भी सिर झुक गया था. उन्होंने फोन कर के पिंकी को घटना की सूचना दी तो वह सन्न रह गई.

पिंकी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि वह जो कुछ कर रही है, उस का इतना भयानक परिणाम होगा. उस के कारण पति बेटे को मार कर खुद भी जान दे देगा. पिंकी के सिर से आशिकी का नशा उतर चुका था. उस ने घर लौटने का फैसला कर लिया. वैसे भी वह कानून से कहां भाग सकती थी. उस के और उस के प्रेमी के खिलाफ मुकदमा दर्ज हो चुका था.

पिंकी आदित्य को ले कर घर लौट आई. उस का रोरो कर बुरा हाल था. अब उसे अपने किए पर पछतावा था या वह सब की सहानुभूति पाने के लिए यह नाटक कर रही थी, यह तो वही जाने, पर लोगों की नजरों में अब उस के लिए नफरत के अलावा कुछ नहीं था.

मांबाप ने भी उस की लानतमलामत करते हुए ससुराल वालों से कहा कि उन्होंने 8 साल पहले बेटी का हाथ उन के हाथों में दे दिया था. अब वे इसे जेल भेजें या घर में रखें, उन से कोई मतलब नहीं है. इस के बाद गांव वालों ने पिंकी को पकड़ कर पुलिस के हवाले कर दिया.

उस समय पिंकी रोरो कर यही कह रही थी कि उसी की वजह से उस के पति ने बेटे की हत्या कर के खुद आत्महत्या की है. वह उन की मौत की दोषी है, इसलिए अब वह भी नहीं जीना चाहती.

पिंकी के मातापिता का कहना था कि उन की बेटी ने जो अपराध किया है, उसे उस की सजा मिलनी ही चाहिए. उस ने जो किया है, उस से उन का सिर शर्म से झुक गया है. अब उन्हें उस से कोई सहानुभूति नहीं है. उस की ससुराल वाले चाहें तो उस की जमानत करा सकते हैं, लेकिन वे न उस की जमानत कराएंगे और न उस के मुकदमे की पैरवी करेंगे.

गौरीशंकर के बूढ़े पिता आशाराम की तो समझ में ही नहीं आ रहा था कि वह क्या करें. 3 साल के आदित्य को वह कैसे पालेंगे, जिस के बाप ने मां की वजह से आत्महत्या कर ली तो मां बाप को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में जेल में है. उस की महत्वाकांक्षाओं ने एक हंसताखेलता परिवार खत्म कर दिया, जहां शायद अब कभी खुशियां न आएं.

पुलिस ने पिंकी को तो गिरफ्तार कर लिया था, लेकिन उस का प्रेमी उदयवीर फरार है. पुलिस को उस की तलाश है. गिरफ्तार पिंकी को पुलिस ने अदालत में पेश कर दिया था, जहां से उसे जेल भेज दिया गया था. Hindi Crime Story

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