Chandigarh crime. सुखदीप कौर की अच्छीभली गृहस्थी थी. अपना घर, बच्चे और कमांडो पति. लेकिन फेसबुक पर बने एक एनआरआई यार के चक्कर में पड़ कर उस ने अपना सब कुछ तो गंवाया ही, जेल भी जाना पड़ा…
5 मार्च, 2016 को दोपहर बाद करीब साढ़े 7 बजे एक महिला थाना मौलीनगर पहुंची. वह थाने में मौजूद एसआई गुरविंदर से बोली ‘‘सर, मेरा नाम सुखदीप कौर है और मैं रायपुर खुर्द कालोनी में रहती हूं. मेरे पति जसवीर सिंह पंजाब पुलिस में कमांडो हैं. इस समय उन की ड्यूटी मोहाली के फेज-2 स्थित कमांडो कौंप्लैक्स में है. वह परसों सुबह साढ़े 4 बजे अपनी ड्यूटी के लिए निकले थे, पर अभी तक वहां नहीं पहुंचे. उन के पास 2 मोबाइल फोन थे, दोनों ही स्विच्ड औफ आ रहे हैं.’’
एसआई गुरविंदर सिंह ने सुखदीप कौर से उस के पति के बारे में कुछ और जानकारी ली. उस के पति का हुलिया आदि पता कर के उन्होंने जसवीर सिंह की गुमशुदगी दर्ज कर ली.
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सुखदीप कौर से बात करने के बाद एसआई गुरविंदर सिंह को कुछ अजीब सा लगा. पति के गायब होने पर जिस तरह महिलाएं परेशान हो जाती हैं, ऐसी कोई चिंता उस के चेहरे पर नहीं थी. एसआई ने यह बात थानाप्रभारी बलदेव कुमार को बताई.
मामला विभाग के ही एक कामांडो के गायब होने का था, इसलिए थानाप्रभारी सुखदीप कौर से बात करने के लिए उस के घर जा पहुंचे. बातचीत में सुखदीप कौर ने बताया कि शायद कोई अनजान व्यक्ति उस के पति को गुमराह कर के अपने साथ ले गया है. बातचीत में उस ने कई बार अपने बयान भी बदले. इस से बलदेव कुमार को सुखदीप कौर की बातों पर शक होने लगा.
मौजूदा स्थिति में सुखदीप कौर पर न तो किसी तरह की सख्ती की जा सकती थी और न ही उसे हिरासत में लिया जा सकता था. क्योंकि अभी तक पुलिस के पास उस के खिलाफ कोई सबूत नहीं था. दूसरे वह शिकायतकर्ता थी, जिस की बातों पर विश्वास कर के ही पुलिस को हकीकत पता लगानी थी. पुलिस ने कमांडो जसवीर सिंह की तलाश शुरू कर दी. उस की फोटो के साथ उस की गुमशुदगी अखबारों में और टीवी पर प्रसारित करवा दी गई.
केस से संबंधित अपनी दीगर काररवाई को आगे बढ़ाते हुए थानाप्रभारी बलदेव कुमार ने अपने एक खास मुखबिर को सुखदीप कौर के पीछे लगा दिया. मुखबिर ने उन्हें जल्दी ही रिपोर्ट दे दी. उस ने बताया कि जसवीर सिंह और सुखदीप कौर की शादी 18 साल पहले हुई थी.
शादी के समय सुखदीप 16 साल की थी. शादी के 2 साल बाद उस ने एक बेटे को जन्म दिया. कुछ दिनों बाद पता नहीं क्यों दोनों के बीच झगड़ा रहने लगा. बीवी से झगड़ा होने के बाद जसवीर कईकई दिनों तक घर नहीं आता था. सुखदीप कौर ने अपने लड़के को उस की ननिहाल छोड़ा दिया था.
यह जानकारी मिलने के बाद थानाप्रभारी ने सुखदीप को थाने बुलवा कर उस से पूछताछ की तो उस ने इस की वजह यह बताई कि उस के पति के एक विधवा औरत से अवैधसंबंध थे. इतना ही नहीं, वह उस से शादी भी करना चाहता था. इसी वजह से वह उस से झगड़ा करके उस से पीछा छुड़ाना चाहता था.
पुलिस की काररवाई अभी बीच में थी कि सुखदीप कौर ने एसएसपी डा. सुखचैन सिंह गिल से मिल कर थाना पुलिस के खिलाफ शिकायत कर दी कि उस के मामले में पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी है. उस ने यह भी कहा कि उस के पति को गुम हुए कई दिन हो गए हैं, लेकिन थाने वालों ने रिपोर्ट तक दर्ज नहीं की है. उस ने साफ शब्दों में कहा कि किसी ने उस के पति का अपहरण कर लिया है.
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इस के बाद 16 मार्च, 2016 को सुखदीप कौर की तहरीर पर थाना मौलीजागरां में अज्ञात के खिलाफ अपहरण का मामला दर्ज कर लिया गया.
एसएसपी डा. सुखचैन सिंह गिल ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे जल्दी हल करने के लिए एक विशेष टीम का गठन कर दिया. इस टीम में इंसपेक्टर बलदेव कुमार, सीआईए इंसपेक्टर रंजीत सिंह, एसआई गुरनाम सिंह, तेजिंदर सिंह और सिपाही शम्सुद्दीन के अलावा महिला कांस्टेबल रेखा को शामिल किया गया.
पुलिस ने अपने मुखबिरों से सुखदीप कौर के बारे में पता लगवाया तो जानकारी मिली कि उस का चरित्र ठीक नहीं था. वह पति से लड़झगड़ कर उसे घर से बाहर निकाल देती थी. इतना ही नहीं, कई दफा वह उस से तलाक भी मांग चुकी थी. एक बात और सुखदीप ने बताई थी कि जसवीर शराब पी कर उस की पिटाई करता था, जबकि सच्चाई यह सामने आई कि वह शराब पीता ही नहीं था.
ये जानकारियां मिलने के बाद पुलिस ने सुखदीप पर शिकंजा कसने की तैयारी शुरु कर दी. जाने कैसे उसे इस की भनक लग गई. इस से पहले कि पुलिस उस पर हाथ डालती, वह भूमिगत हो गई. कुछ दिनों इधरउधर छिपने के बाद सुखदीप को अहसास हो गया कि पुलिस की गिरफ्त से खुद को ज्यादा दिनों तक नहीं बचा पाएगी. इसलिए वह आत्मसमर्पण करने की सोचने लगी.
इलाके के एक सम्मानित व्यक्ति के साथ 18 मार्च को थाने पहुंच कर उस ने इंसपेक्टर बलदेव कुमार के सामने आत्मसमर्पण कर दिया. उस ने स्वीकार कर लिया उस ने ही अपने साथियों की मदद से पति को अगवा करा कर उस की हत्या करा दी थी. बाद में लाश को खुर्दबुर्द कर दिया गया था.
पुलिस ने जब सुखदीप से विस्तार से पूछताछ की तो उस ने जसवीर सिंह की हत्या की जो कहानी बताई, वह इस प्रकार निकली—
जसवीर सिंह एक सीधासादा और साधारण इंसान था, जबकि सुखदीप तेजतर्रार थी. वह घर वालों की मर्जी से जसवीर के पल्ले बंध जरूर गई थी, लेकिन वह उस से किसी तरह से संतुष्ट नहीं थी. लिहाजा शादी के कुछ अरसा बाद ही वह उस से नफरत करने लगी थी.
जसवीर सिंह के रिश्ते का एक भतीजा साहिब सिंह अकसर उस के घर आताजाता था. साहिब सिंह एक कालेज से बीसीए कर रहा था. करीब 5 साल पहले उस के पिता राजेंदर सिंह का देहांत हो गया था. वह दिलेर किस्म का था और उस के पास खेती की 4 एकड़ जमीन थी. वह हमेशा बनठन कर रहता था. एक दिन सुखदीप ने पति के व्यवहार आदि के बारे में उसे बताया तो वह प्यारभरी बातें कर के सांत्वना देने लगा.
सुखदीप को साहिब सिंह का यह अंदाज बहुत अच्छा लगा और वह उस की ओर आकर्षित हो गई. धीरेधीरे दोनों एकदूसरे के करीब होते गए. उसी दौरान उन के बीच जिस्मानी ताल्लुकात भी बन गए. लेकिन एक दिन जसवीर ने दोनों को आपत्तिजनक हालत मे देख लिया. सुखदीप डर गई. पर पति ने उस से कहा कुछ नहीं. इस के बावजूद सुखदीप और साहिब सिंह को इस बात का डर सता रहा था कि जसवीर कहीं यह बात उन के मांबाप से न कह दे. लेकिन उस ने किसी से कुछ नहीं कहा.
सुखदीप को सोशलसाइट पर नएनए दोस्त बनाने का शौक था. करीब 3-4 साल पहले फेसबुक के माध्यम से उस की दोस्ती हरजीत सिंह से हो गई थी, जो बठिंडा के गांव गंगा का रहने वाला था और बहरीन में नौकरी करता था. फेसबुक पर दोनों आपस में खूब चैटिंग किया करते थे. धीरेधीरे इन की दोस्ती प्यार में बदल गई. सुखदीप ने हरजीत को खुद को अविवाहित बताते हुए अपनी असली उम्र भी छिपाई हुई थी. यों भी देखने में वह अपनी उम्र से कम ही लगाती थी.
दोनों की फोन पर अकसर घंटों बातें हुआ करती थीं. सुखदीप उस से शादी कर के विदेश में बस जाना चाहती थी. हरजीत भी उस से शादी के लिए तैयार हो गया था. एक एनआरआई की बीवी बन कर सुखदीप विदेश में सैटल हो जाना चाहती थी. सुखदीप का एक और फेसबुक फ्रैंड था, हरजिंदर सिंह उर्फ राजू. सुखदीप ने उस से भी खुद को अविवाहित बताया था.
हरजिंदर से भी वह फोन पर बातें किया करती थी, पर उस के साथ प्यार जैसा कोई चक्कर नहीं था. एक दिन सुखदीप ने हरजिंदर को हरजीत से शादी करने की बात बता दी. इस काम में उस ने हरजिंदर से मदद भी मांगी. सुखदीप ने उस से कहा कि वह उस का भाई बन कर हरजीत के गांव चले और वहां उस के मातापिता से उस की और हरजीत की शादी की बात पक्की करा दे. हरजीत ने सुखदीप के बारे में पहले ही अपने घर वालों को बता दिया था.
हरजिंदर उस की मदद करने को तैयार हो गया. सुखदीप उसे अपना भाई बना कर हरजीत के गांव पहुंच गई. हरजीत ने बहरीन से फोन कर के इस बारे में पहले ही अपने पिता नक्षत्र सिंह को सब बता दिया था. वह पहले ही हां करने को तैयार बैठे थे. सुखदीप ने नक्षत्र सिंह के यहां ऐसा व्यवहार किया कि उन लोगों ने उसे अपनी बहू के रूप में पसंद कर लिया.
सुखदीप ने उसी समय हरजिंदर के माध्यम से तजवीज रखवाई कि हरजीत की फोटो के साथ सगाई कर दी जाए. ऐसा ही किया गया. हरजीत के परिवार वालों ने सुखदीप और उस के कथित भाई हरजिंदर को अच्छाखासा शगुन दे कर विदा किया.
पूछताछ के वक्त सुखदीप ने पुलिस को बताया कि इस के बाद उस की व हरजीत की रोजाना फोन पर बातें होने लगी थीं. यह दिसंबर, 2015 की बात है. आगे की योजना यह थी कि हरजीत मार्च, 2016 में भारत आएगा और उसी वक्त वह और सुखदीप शादी कर लेगा.
सगाई हो जाने के बाद सुखदीप बेहद खुश हुई. अब समस्या यह थी कि उस का पति जसवीर सिंह इस काम में अड़ंगा डाल सकता था. फिर वह साहिब सिंह और उस के संबंधों के बारे में भी सब को बता सकता था. इसलिए इस कांटे को निकाल फेंकना बहुत जरूरी हो गया था. इस बारे में उस ने साहिब सिंह से मिल कर जसवीर की हत्या करने की योजना बना डाली.
इस काम के लिए 5 लाख रुपए देने का वादा कर के उस ने साहिब को 1 लाख रुपए एडवांस भी दे दिए. साहिब सिंह ने इस काम के लिए अपने 2 साथियों जगतार सिंह उर्फ मनप्रीत उर्फ टिंग और गुरजिंदर सिंह से बात की. 22 वर्षीय जगतार पटियाला के गांव शमदू में रहता था. वह गरीब परिवार से था और एक संस्थान से होटल मैनेजमेंट का कोर्स कर रहा था.
गुरजिंदर पटियाला के ही गांव नीलपुर का रहने वाला था. यह भी पटियाला के एक कालेज से बीटैक कर रहा था. उस के घर में केवल मां और बहन थी, जो किसी तरह मेहनत मजदूरी कर के गुजरबसर कर रही थीं. ये दोनों 50-50 हजार रुपए के लालच में साहिब सिंह का साथ देने के लिए तैयार हो गए.
योजना बना कर 2 मार्च, 2016 की सुबह सुखदीप और साहिब सिंह राजपुरा के एक मैडिकल स्टोर से नींद की गोलियां ले आए. योजना के अनुसार सुखदीप ने अपने पति जसवीर के खाने में नींद की गोलियां पीस कर मिला दीं. खाना खाते वक्त जसवीर केवल अंडरवीयर में था. खाना खाने के थोड़ी देर बाद ही जसवीर बेसुध हो कर तख्त पर सो गया.
आधी रात के बाद साहिब सिंह अपने दोस्त सविंदर सिंह की लांसर कार नंबर सीएच 03 जे 9141 पर अपने 2 साथियों के साथ आ गया. उन्होंने जसवीर के हाथपैर बांध कर उसे एक कंबल में लपेटा और कार की डिक्की में बंद कर दिया. सुखदीप ने यह कहते हुए जसवीर की कमीज और पैंट उन के हवाले कर दी कि रास्ते में जसवीर को कपड़े पहना देंगे. तीनों कार ले कर वहां से चले गए.
सुबह के वक्त वापस आ कर साहिब सिंह ने सुखदीप को बताया कि उन्होंने राजपुरा के पास गांव मडोली से निकलने वाली भाखड़ा नहर में जसवीर को फेंक दिया है. जसवीर की वरदी उस का पर्स व 2 मोबाइल घर पर थे. सुखदीप कौर ने ये चीजें साहिब सिंह को देते हुए कहीं फेंक आने को कहा. जिस से लगे कि जसवीर अपना सामान ले कर ड्यूटी पर गया था. साहिब सिंह ने ऐसा ही किया. उस ने सामान वाला बैग रायपुर के जंगल में फेंक दिया. लाश और सामान ठिकाने लगाने के बाद लौटते समय दोनों दोस्तों को रास्ते में उतार कर वह अपने दोस्त की कार लौटा आया.
सुखदीप से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर के कोर्ट में पेश किया और 3 दिनों के पुलिस रिमांड पर ले कर केस से संबंधित सबूत इकट्ठा किए.
इस दौरान पुलिस ने इस बात की जानकारी भी हासिल कर ली थी कि कमांडो जसवीर सिंह की हत्या करने और लाश ठिकाने लगाने में सुखदीप का किन लोगों ने साथ दिया था. पुलिस उन्हें तलाश करने लगी. इस के बाद साहिब सिंह और उस के दोनों दोस्तों को पुलिस ने संदिग्ध अवस्था में देखा. पुलिस को देखते ही वे फायर करते हुए भागने लगे, लेकिन पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर लिया. फिर इन्हें न्यायालय में पेश कर पटियाला की केंद्रीय जेल भेज दिया.
मौलीजागरां पुलिस को पता चला तो तीनों को प्रोडक्शन वारंट पर चंडीगढ़ ले आई और इन से कमांडो जसवीर की हत्या की बावत पूछताछ की. तीनों ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया.
पूछताछ के दौरान पुलिस ने अभियुक्तों की निशानदेही पर जसवीर की वरदी, उस का पर्स, दोनों सैलफोन व कपड़ों के अलावा वह लांसर कार भी बरामद कर ली, जिस से लाश फेंकी गई थी. जसवीर का शव नहर के किनारे पर खुले में पड़ा मिला. शव की चमड़ी धूप से तप कर लाल हो गई थी.
उधर एनआरआई हरजीत सिंह के घर वालों को जब सुखदीप की करतूत और असलियत की खबर लगी तो सब ने माथा पीट लिया.
पुलिस रिमांड की समाप्ति पर सुखदीप कौर, साहिब सिंह, जगतार सिंह व गुरजिंदर सिंह को फिर से अदालत पर पेश कर के न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया. केस के विवेचनाधिकारी इंसपेक्टर बलदेव कुमार ने इन चारों के खिलाफ आरोप पत्र तैयार कर अदालत में दाखिल कर दिया. Chandigarh crime
कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित






