UP Love Story. कत्थक करने वाले गौरव शर्मा को जब उस के दोस्त ने कहा कि वह उसे बिलकुल लड़कियों जैसा लगता है और उसे उस से प्यार ही नहीं हो गया है, बल्कि वह उस से निकाह करना चाहता है तो गौरव सचमुच सैक्स चेंज करा कर अपने उस प्रेमी के लिए लड़की बन गया और अपना नाम आशना रख लिया.

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के रहने वाले गौरव शर्मा का जन्म ऐसे परिवार में हुआ था, जो कत्थक घराने के रूप में मशहूर है. उस के छोटे से परिवार में मातापिता के अलावा छोटी बहन मंदाकिनी है.

परिवार ही नृत्य कला के लिए समर्पित था, इसलिए भाईबहन में भी बचपन से ही नृत्य कला के प्रति गहरा लगाव पैदा हो गया था. इसी का नतीजा था कि बहुत जल्दी दोनों नृत्यकला में पारंगत हो कर रंगमंचों पर अपना जलवा बिखेरने लगे थे.

गौरव ने लखनऊ के इंदिरा कला विश्वविद्यालय से नृत्यकला में ‘गोल्ड मैडलिस्ट’ की उपाधि हासिल की. इस के बाद अपनी प्रतिभा के दम पर देशविदेश में अनेक समारोहों में भाग ले कर प्रसिद्धि के साथसाथ खूब धन भी कमाया.

उन की बहन मंदाकिनी शर्मा अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने मुंबई चली गईं, जहां कम समय में उन्होंने नई अभिनेत्रियों के बीच अपना मुकाम हासिल कर लिया. इस समय वह ‘सब टीवी’ चैनल पर प्रसारित होने वाले धारावाहिक ‘चिडि़याघर’ में अभिनय कर रही हैं.

बात तब की है, जब गौरव 21 साल के थे, चूंकि वह एक जानेमाने व्यक्तित्व थे और सार्वजनिक जीवन जी रहे थे, इसलिए फेसबुक पर उन्होंने अपना एकाउंट बना रखा था.

सेलिब्रिटी होने की वजह से उन के देश में ही नहीं, विदेशों में भी तमाम दोस्त थे. इस के अलावा वह नएनए दोस्त बनाते भी रहते थे. ऐसे में ही पाकिस्तान के रिजवान की फ्रैंड रिक्वैस्ट आई तो उन्होंने उसे स्वीकार कर के उसे भी दोस्तों की लिस्ट में शामिल कर लिया.

रिजवान पाकिस्तान के सिंध प्रांत का रहने वाला था. उस के परिवार में मातापिता के अलावा 4 भाई थे. भाइयों में वह सब से छोटा था. एमए करने के बाद वह पीएचडी कर रहा था. उसे शास्त्रीय संगीत और नृत्य से गहरा लगाव था, इसलिए उस ने गौरव से दोस्ती की थी.

शुरूशुरू में तो दोनों के बीच फेसबुक के माध्यम से छोटीमोटी बातें होती रहीं, लेकिन जब रिजवान को पता चला कि गौरव शास्त्रीय संगीत एवं नृत्य कला का अच्छा जानकार है और उस ने सूफी काव्य एवं भारतीय शास्त्रीय संगीत एवं नृत्य पर 2 किताबें लिखी हैं तो वह अपनी रुचि के अनुसार, कत्थक डांस और सूफिज्म पर गौरव से लंबीलंबी चैटिंग ही नहीं करने लगा, बल्कि फोन नंबर ले कर फोन पर भी बातें करने लगा.

फोन पर बातें होने लगीं तो दोनों ही एकदूसरे की रुचि, पढ़ाईलिखाई के बारे में ही नहीं, घरपरिवार और यहां तक कि सोच के बारे में भी जान गए.

फिर तो एक समय ऐसा आ गया, जब कोई भी दिन ऐसा नहीं जाता, जिस दिन गौरव और रिजवान की बातें न होतीं. बातें करतेकरते ही दोनों में ऐसा लगाव हो गया और उन के बीच इतने करीबी रिश्ते बन गए कि वे एकदूसरे से हंसीमजाक ही नहीं करने लगे, बल्कि अंतरंग बातें भी करने लगे.

गौरव चूंकि कत्थक करता था, इसलिए उस का बातचीत करने का ढंग थोड़ा लड़कियों जैसा था, जो उस के बातचीत में झलकता भी था. उस के ये हावभाव और अदाओं ने रिजवान के मन में उस की छवि कुछ और ही बना दी.

रिजवान उसे लड़की ही नहीं समझने लगा, बल्कि यह बात उस ने एक दिन बातचीत के दौरान कह भी दी, ‘‘गौरव, तुम्हारे द्वारा अपलोड की गई वीडियो में तुम्हारा नृत्य देख कर यही लगता है कि तुम लड़का नहीं, लड़की हो. नृत्य करते समय तुम मुझे बहुत अच्छे लगते हो.’’ ‘‘सच?’’ गौरव ने हंसते हुए कहा.

‘‘हां, एकदम सच कह रहा हूं. अब तो मेरे दिल और दिमाग में तुम्हारी छवि लड़के की नहीं, बल्कि लड़की की बन गई है. तुम नृत्य करते समय मुझे लड़का नहीं, लड़की लगते हो, जो अब मेरी आंखों के सामने हर समय नाचता रहता है. समझ में नहीं आता है कि मुझे यह क्या हो गया है.’’ रिजवान ने गंभीरता से कहा.

रिजवान ने यह बात जिस तरह कही थी, उस में प्यार की अजीब सी कसक थी. उस की इस कसक ने गौरव को कुछ इस तरह प्रभावित किया कि उसे महसूस होने लगा कि सचमुच वह लड़का नहीं, लड़की है. इस के बाद तो रिजवान उसे लड़की के रूप में संबोधित कर के बात करने लगा. बातचीत के दौरान कभीकभी वह प्यार से उसे बेगम कह देता तो गौरव विरोध करने के बजाय खुश हो जाता.

समय के साथ दोनों की चाहत बढ़ती गई. गौरव के प्यार में पागल रिजवान ने एक दिन कहा, ‘‘गौरव, तुम से बातें करते समय अब दिल की धड़कनें बढ़ जाती हैं. अब तुम से मिलने का मन हो रहा है.’’ ‘‘अरे मियां, अभी से इतनी बेचैनी. जब मैं तुम्हारे पास होऊंगी, तब क्या होगा?’’ गौरव ने कहा. ‘‘तुम से बातचीत में ही जब इतनी बेचैनी हो रही है, मिलने पर तो न जाने क्या होगा.’’

रिजवान की इस बात पर गौरव ने हंसते हुए कहा, ‘‘परेशान होने की कोई बात नहीं, कल स्काइप चैट पर हम दोनों आमनेसामने होंगे, जी भर कर देख लेना.’’

अगले दिन गौरव और रिजवान ने स्काइप पर चैट की तो दोनों ने पहली बार एकदूसरे को देखा और बातचीत की. रिजवान की चाहत भरी बातें सुनसुन कर गौरव अभिभूत हो उठा तो गौरव का हंसमुख चेहरा एवं उस की कातिल अदाएं देख कर रिजवान ठगा सा रह गया. उसे लगा कि गौरव को लड़की के रूप में मान कर प्यार करने में उस ने कोई गलती नहीं की है.

इस के बाद आकर्षण और प्यार तेजी से बढ़ने लगा. उन्हें एक अजीब सी तड़पन महसूस होने लगी. तड़प कुछ ज्यादा ही बढ़ गई तो रिजवान ने गौरव को फोन कर के कहा, ‘‘गौरव, मैं तुम से निकाह करना चाहता हूं.’’ ‘‘रिजवान अचानक तुम्हें यह क्या हो गया?’’ हैरानी से गौरव ने कहा.

‘‘जब से मैं ने तुम्हें देखा है, तब से मेरा दिल अब मेरे काबू में नहीं है. पल भर की भी दूरी सहन नहीं हो रही है. अगर सीमा की बात न होती तो मैं अपना घरपरिवार छोड़ कर अभी तुम्हारे पास चला आता.’’ रिजवान ने दिल की बात व्यक्त करते हुए कहा.

‘‘हम दोनों के बीच यह रिश्ता कैसे संभव हो सकेगा रिजवान, क्योंकि हम दोनों ही लड़के हैं?’’ ‘‘कुछ भी हो, मैं तुम से अटूट प्यार करता हूं, जिसे तुम्हें स्वीकार करना पड़ेगा. यही नहीं, निकाह की बात भी तुम्हें माननी पड़ेगी.’’ रिजवान ने दिल की बात कह दी.

प्रेमी की तड़पन का अहसास करते हुए गौरव ने किसी परिणाम की चिंता किए बगैर आखिर कह दिया, ‘‘मुझे तुम से निकाह कबूल है.’’

इस के बाद तो रिजवान और गौरव का बातचीत करने का तरीका बदल गया. अब वे पतिपत्नी की तरह बातें करने लगे. रिजवान के मनोभावों में क्या परिवर्तन आया, इस का तो पता नहीं, लेकिन गौरव के अंदर छिपी नारी तेजी से विकसित होने लगी. वह सचमुच खुद को स्त्री समझने लगा.

दोनों के दिलों को एकदूसरे के प्यार का प्रबल प्रवाह बेकाबू करने लगा. उन्हें एक पल की भी दूरी बरदाश्त नहीं थी. लेकिन सीमा की मजबूरी उन्हें अलग किए थी. उन्होंने निकाह का निर्णय ले लिया था, लेकिन इस के लिए गौरव का लड़की होना जरूरी था, क्योंकि एक लड़के से लड़के की शादी सामाजिक रूप से तो अपराध है ही, कानूनी रूप से भी अपराध है.

रिजवान ने जब यह बात गौरव से कही तो वह एकबारगी असहज हो उठा, लेकिन रिजवान के प्यार में पागल गौरव ने अपना अस्तित्व त्याग कर खुद को स्त्री बनाने का फैसला कर लिया. इस के बाद गौरव इंटरनेट द्वारा सैक्स चेंज करवाने की जानकारियां जुटाने लगा.

इंटरनेट से उसे जो जानकारियां मिलीं, उस से वह घबरा गया, क्योंकि पूरी तरह लड़की बनने के लिए 3 बड़े औपरेशन कराने पड़ते हैं और हर औपरेशन के बाद 2 से 3 महीने का बैडरेस्ट लेना पड़ता है. उस के बाद शारीरिक एवं मानसिक रूप से लड़की बनने के लिए हार्मोंस चिकित्सा शुरू होती है. यह सब करने में करीब डेढ़ साल लग जाते हैं. उस के बाद ही कहीं एक पुरुष स्त्री बन पाता है.

पूरी प्रक्रिया जान कर गौरव ने रिजवान को फोन कर के पूरी बात बताई तो उस ने कहा, ‘‘एकदूसरे को पाने के लिए किसी न किसी को अपने वजूद की कुर्बानी तो देनी ही होगी. अगर तुम लड़की नहीं बन सकते तो मैं लड़की बन जाता हूं.’’

रिजवान के इस प्यारभरे समर्पण ने गौरव के हृदय को झकझोर दिया. उसे लगा, एक आदमी उस के लिए अपनी पहचान और अस्तित्व कुर्बान करने को तैयार है तो वह वैसा क्यों नहीं कर सकता. उस ने कहा, ‘‘रिजवान, प्यार का रिश्ता समर्पण की ऐसी मजबूत डोर होती है कि एक प्रेमी अपने प्यार के लिए हंसतेहंसते जान दे सकता है तो मैं गौरव से आशना बन कर तुम्हें पाने की कोशिश जरूर करूंगा.’’

इस के बाद गौरव ने लड़की बनने की तैयारी शुरू कर दी. इस काम में सब से पहले उसे मातापिता से अनुमति लेनी थी. यह काम इतना आसान नहीं था. क्योंकि उस की मां उस की शादी के लिए लड़की देख रही थीं. ऐसे में अगर वह सीधे मांबाप से इस बारे में कहता तो उन्हें गहरा सदमा लग सकता था. उस ने मातापिता से सीधे बात करने के बजाय अपनी बहन मंदाकिनी के माध्यम से बात करना उचित समझा.

गौरव मंदाकिनी के पास मुंबई गया और उस से लड़की बनने की बात कही तो वह हैरान रह गई. उस ने उसे डांटते हुए कहा, ‘‘भैया, तुम्हारा दिमाग खराब हो गया है क्या? प्रकृति ने जब तुम्हें लड़का बनाया है तो तुम लड़की क्यों बनने जा रहे हो?’’

‘‘एक लड़के के रूप में मैं घुटघुट कर जी रहा हूं. मेरा शरीर भले लड़के का है, लेकिन मन से मैं खुद को लड़की महसूस करता हूं. इसलिए मैं चाहता हूं कि इस काम में तुम मेरी मदद करो, जिस से मैं सुकून से जी सकूं.’’

गौरव ने अपने अंतर्मन की वेदना बहन से व्यक्त करते हुए आगे कहा, ‘‘मेरे नृत्य करते समय जब लोग कहते हैं कि मैं एकदम लड़की की तरह नृत्य करता हूं तो उन की इस बात पर पता नहीं क्यों मुझे बेहद खुशी होती है. यही वजह है कि जब मैं एकांत में होता हूं तो खुद से पूछता हूं कि मैं लड़का हूं या लड़की? समझ में नहीं आता कि मैं क्या हूं.

‘‘अकसर मैं महसूस करता हूं कि मेरे पुरुष रूपी शरीर में स्त्री रूपी आत्मा कैद है. मेरा बचपन तो नासमझी में किसी तरह कट गया, लेकिन जब से मैं समझदार हुआ हूं, तब से मेरे भीतर छिपी लड़की अपनी पहचान के लिए तड़प रही है. मैं इस डर से अपने अहसासों एवं अरमानों का गला घोंटता आ रहा हूं कि कहीं मन की चाहत मुझे परिवार और समाज से अलग न कर दे.’’

गौरव ने मंदाकिनी से मन की पीड़ा ही नहीं व्यक्त की, बल्कि पाकिस्तान के रहने वाले रिजवान से अपने प्यार की बात भी बता कर कहा कि वह उसे बेहद प्यार करता है और उसे अपनी बीवी के रूप में देखना चाहता है. जब वह उसे प्यार से बेगम कहता है तो उसे अजीब सी छटपटाहट होने लगती है.

इस स्थिति में वह कुढ़कुढ़ कर जी रहा है. अब वह पुरुष शरीर से मुक्त हो कर स्त्री के रूप में जीना चाहता है, इसलिए वह मातापिता को समझा कर उस की दिली तमन्ना पूरी करने में उस की मदद करे. क्योंकि वह एक स्त्री है. इसलिए वह उस की पीड़ा को अच्छी तरह समझ सकती है. अगर उस ने उस की पीड़ा की अनदेखी की तो वह खुद के लिए कुछ भी कर सकता है.

मंदाकिनी ने गौरव की भावनाओं को गहराई से समझा और अहसास किया. उसे लगा कि गौरव जो कह रहा है, वह दिल से कह रहा है. उस की मजबूरी को समझते हुए उस ने कहा, ‘‘भैया, तुम लड़की बनने की प्रक्रिया शुरू करो, मैं मातापिता को मना लूंगी और जरूरत पड़ने पर तुम्हारी आर्थिक मदद भी करूंगी.’’

मंदाकिनी ने मातापिता को मनाने की जिम्मेदारी ले ली तो गौरव अपना सैक्स चेंज कराने के लिए डा. मिथलेश मित्रा और डा. अभ्या से मिला. डा. मिथलेश मित्रा ने उसे बताया कि 9 महीने के अंतराल में 3 मेजर औपरेशन होंगे, जिस से पूरी तरह से लड़की होने में करीब डेढ़ साल का समय लगेगा. इस में करीब 8 लाख रुपए का खर्च आएगा.

उसी बीच शरीर में बदलाव लाने के लिए किसी अच्छे डाक्टर की जरूरत पड़ेगी. हार्मोंस ट्रीटमैंट एक्सपर्ट डाक्टर स्ट्राजन एवं प्रोजेस्ट्रान नामक हार्मोंस थैरेपी से लगभग एक साल तक उस का इलाज करेगा और लड़कियों की तरह रहना सिखाएगा. इस कठिन प्रक्रिया से गुजरने के बाद ही वह पूरी तरह से लड़की बन सकेगा.

चूंकि गौरव मानसिक रूप से लड़की बनने को तैयार था, इसलिए उस की सहमति पा कर डाक्टरों ने उसे लड़की बनाने की तैयारी शुरू कर दी. अगस्त, 2014 में डाक्टरों ने गौरव का पहला औपरेशन किया. तीसरा और अंतिम औपरेशन 10 अक्तूबर, 2015 को कर के डाक्टरों ने गौरव को आशना बना दिया.

हार्मोंस ट्रीटमेंट शुरू होते ही उस में लड़कियों वाले गुण आने लगे. धीरेधीरे उस का शरीर लड़कियों की तरह हो गया. आज गौरव एक खूबसूरत लड़की लगता है. उस के मातापिता ने भी उसे लड़की के रूप में स्वीकार कर लिया. आशना बने गौरव को अब अपने रिजवान का इंतजार है.

दूसरी ओर रिजवान भारत आने की तैयारी कर रहा है. उस का कहना है कि वीजा मिलते ही वह भारत आएगा. अब देखना यह है कि इन दोनों प्रेमियों का सपना कब पूरा होता है. UP Love Story

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