Love Crime. मिस्ड काल से उपजे प्यार ने अंशु को माया के साथ शादी के बंधन में बांध दिया. लेकिन माया की हसरतें इस तरह बेलगाम हो चुकी थीं, जिन पर किसी का नियंत्रण नहीं रहा. इस का नतीजा यह हुआ कि…

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के गांव चंदुआ के रहने वाले रामऔतार के परिवार में चंदा देवी के अलावा एक बेटा और 2 बेटियां थीं. वह उत्तर प्रदेश पुलिस में होमगार्ड थे. इस के अलावा उन की गांव में थोड़ी सी पुश्तैनी जमीन थी, जिस पर खेतीबाड़ी कर के उन की घरगृहस्थी आराम से चल रही थी. रामऔतार अपनी बड़ी बेटी सुषमा के हाथ पीले कर चुके थे. मंझली बेटी माया भी शादी लायक हो गई थी. इसलिए अब उन्हें उस की शादी की चिंता होने लगी थी.

उन्होंने सोच रखा था कि एकदो साल में जैसे ही कोई सही लड़का मिलेगा, वह उस के हाथ भी पीले कर देंगे. माया अपनी बड़ी बहन से खूबसूरत तो थी ही, साथ ही वह स्वभाव से भी चंचल थी. उसे मोबाइल पर बातें करने का बड़ा शौक था.

3 साल पहले की बात है. एक दिन माया अपने मोबाइल पर वीडियो गेम खेल रही थी. तभी एक अनजान नंबर से मिस्डकाल आई. माया उस फोन नंबर को गौर से देखने लगी. जब वह नंबर उस की पहचान में नहीं आया तो उस ने यह जानने के लिए उस नंबर पर पलट कर फोन कर दिया कि कहीं वह नंबर इस के किसी परिचित का तो नहीं है?

बात करने पर पता चला कि वह नंबर बरेली के ही भौजीपुरा थाना के गांव सरौरा के महावीर उर्फ अंशु का था. अंशु ने माया को बताया कि वह अपने एक दोस्त का नंबर मिला रहा था लेकिन गलती से उस का नंबर लग गया था. इस के लिए अंशु ने उस से सौरी भी कहा. इस के बाद माया ने फोन काट दिया.

अंशु और माया की बात भले ही एकदो मिनट हुई थी, लेकिन इस बातचीत के बाद अंशु के दिल में हलचल मच गई थी. अंशु को माया का बात करने का अंदाज और आवाज पसंद आ गई थी. कई दिनों तक उस के दिलोदिमाग में वही बातें घूमती रहीं.

जब उस से नहीं रहा गया तो उस ने हिम्मत जुटा कर एक बार फिर माया को फोन लगा दिया. इस बार माया उस के नंबर को पहचान गई थी, इसलिए छूटते ही बोली, ‘‘इस बार तो नंबर गलती से नहीं लगा होगा, आप ने जानबूझ कर किया होगा?’’

अंशु ने सच स्वीकार कर लिया और वह उस की आवाज और बात करने के अंदाज की प्रशंसा करते हुए बोला, ‘‘जिस दिन से मैं ने आप की आवाज सुनी है, एक पल के लिए भी नहीं भुला पाया हूं. इसी वजह से हिम्मत जुटा कर आप को फोन किया है. कहीं आप को बुरा तो नहीं लगा?’’

‘‘नहीं, इस में बुरा लगने वाली क्या बात है?’’ माया ने तत्काल जवाब दिया.

बातचीत में अंशु ने उसे अपने बारे में बता कर उस की आवाज आदि की खूब तारीफ की. अपनी तारीफ भला किसे बुरी लगती है. माया को अपनी तारीफ अच्छी लगी. वह उस से खुल कर बात करने लगी.

पहली बार में दोनों का एकदूसरे से सिर्फ परिचय भर हुआ, लेकिन इस के बाद अंशु माया से अकसर बातें करने लगा. पहले तो उन के बीच इधरउधर की ही बातें होती रहीं, लेकिन जल्दी ही अंशु माया से मिलने की जिद करने लगा. तब माया ने गांव की एक शादी के मौके पर उसे मिलने के लिए बुला लिया. शादी के अवसर पर माया ने खूब श्रृंगार किया और अपना सब से सुंदर सूट पहन कर वहां पहुंची. अंशु भी अच्छे कपड़ों में आया था. माया की खूबसूरती देख कर उस की आंखें खुली की खुली रह गईं. माया इतनी सुंदर होगी, इस की उस ने कल्पना ही नहीं की थी.

अंशु पहली बार माया से मिल रहा था. लेकिन कुछ ही देर में दोनों ऐसे घुलमिल गए, जैसे वर्षों से एकदूसरे को जानते हों. माया को भी अंशु का स्वभाव अच्छा लगा. अंशु ने अपने बारे में बताया कि वह भौजीपुरा में एक आटा मिल में काम करता है. इस छोटी सी मुलाकात के बाद दोनों ही जल्दी दोबारा मिलने की बात कह कर एकदूसरे से अलग हो गए, क्योंकि उस शादी समारोह में माया के घर के और भी लोग आए थे.

माया के गांव के कुछ लोगों से अंशु की भी जानपहचान थी. उन लोगों से मिलने के बहाने वह उस के गांव बारबार आने लगा. मुलाकातों का यह सिलसिला लगभग एक साल तक चलता रहा. माया की मां चंदा को बेटी की इन हरकतों के बारे में पता चला तो वह चुपके से बेटी पर नजर रखने लगी. आखिर एक दिन उस ने माया से पूछ लिया कि वह फोन पर लंबीलंबी बातें किस से करती है? माया ने बात को छिपाने की बहुत कोशिश की, मगर चंदा उस की बातों में नहीं आई.

माया को अपने दिल के राज मां को बताने ही पड़े. उधर अंशु ने भी घर में बता दिया था कि वह चंदुआ गांव की माया से प्यार करता है और शादी भी उसी से करेगा. आखिर दोनों के घर वाले उन की शादी करने के लिए तैयार ही नहीं हो गए, धूमधाम से उन की शादी कर दी. यह बात करीब 2 साल पहले की है. चूंकि शादी दोनों की मनमरजी से हुई थी, इसलिए दोनों ही खुश थे.

उन की जिंदगी की गाड़ी अपनी रफ्तार से आगे बढ़ने लगी. करीब एक साल बाद माया ने बेटे को जन्म दिया, जिस का नाम अंश रखा गया. बच्चे के आने के बाद उन का घर किलकारियों से गूंज उठा.

उन की जिंदगी में सब कुछ ठीक चल रहा था. एक दिन अंशु भौजीपुरा से अपने घर लौटा तो उस ने देखा कि माया फोन पर किसी से हंसहंस कर बातें कर रही है. पहले तो उस ने इस बात पर ध्यान नहीं दिया, लेकिन माया तल्लीन हो कर जिस अंदाज में बातें कर रही थी, उस से उस के कान जरूर खड़े हो गए थे.

माया बातों में इस कदर खोई थी कि उसे पति के घर लौटने का पता ही नहीं चला. अचानक अंशु माया के सामने आ कर खड़ा हो गया. पति को समाने पा कर माया के होश फाख्ता हो गए. उस ने तुरंत फोन काट दिया. अंशु ने माया से पूछा कि किस से बातें कर रही थी तो माया ने सफेद झूठ बोलते हुए कहा कि वह चंदुआ की ही रहने वाली अपनी एक सहेली से बातें कर रही थी.

अंशु जान गया था कि वह झूठ बोल रही है. उस ने रात के समय इस मुद्दे पर बात बढ़ाना उचित नहीं समझा. लेकिन इस घटना के बाद वह पत्नी के फोन पर नजर रखने लगा. माया के मोबाइल पर जब भी फोन आता, वह कान लगा कर उस की बातें सुनता था.

एक बार अंशु ने पत्नी के फोन की काल लौग देखी तो उस में एक नंबर ऐसा मिला, जिस पर वह बारबार बातें करती थी. इस से अंशु का शक यकीन में बदल गया. अंशु ने यह भी महसूस किया कि उस नंबर पर माया जब भी बात करती है, उस के चेहरे पर मुसकान रहती है. यह देख कर वह जलभुन जाता था.

जब अंशु से नहीं रहा गया तो उस ने एक दिन माया को इशारे में समझाने की कोशिश की कि वह अपनी सहेलियों से बातें कर अपना समय फालतू में बरबाद करने के बजाय अपनी घरगृहस्थी में ध्यान दे तो ज्यादा अच्छा रहेगा. माया ने अंशु की चेतावनी सुनने के बाद कुछ दिनों तक तो सावधान रही, लेकिन फिर वह उसी पुराने ढर्रे पर चल पड़ी.

दरअसल, बात यह थी कि शादी के पहले से ही माया के प्रेमसंबंध गांव के कई युवकों से थे. इन में से सत्यवीर भी एक था. उस का घर माया के घर के पिछवाड़े ही था. सत्यवीर से वह गांव के खेतखलिहानों में मिला करती थी. माया के शादी के वक्त जब सत्यवीर को पता चला था कि माया की शादी किसी और लड़के से हो रही है तो उस ने अपनी तरफ से उस की शादी तोड़वाने की बहुत कोशिश की थी, मगर गांव के बड़े बुजुर्गों के दबाव के कारण वह अपने इरादे में सफल नहीं हो सका था.

शादी के एक साल तक तो माया ने सत्यवीर को भुला दिया. मगर सत्यवीर चाह कर भी उसे अपने दिल से नहीं निकाल सका. इस बीच एक बार जब वह मायके आई तो सत्यवीर माया से अपने पुराने संबंधों की दुहाई दे कर फिर से बातचीत करने की जिद करने लगा.

माया अपने पुराने आशिक के दिल को नहीं तोड़ना चाहती थी. लिहाजा फिर से उन के प्रेमिल संबंध बदस्तूर कायम हो गए. माया अब 2 नावों की सवारी कर रही थी. शायद वह सोच रही थी कि उस के पति अंशु को उस के और सत्यवीर के प्रेमसंबंधों की जानकारी कभी नहीं होगी.

उधर अंशु को माया के ऊपर शक तो हो ही गया था. लेकिन वह यह नहीं जान पाया कि पत्नी का चक्कर उस के मायके के ही सत्यवीर के साथ चल रहा है.

माया जबतब मायके जाने लगी तो अंशु ने माया की हकीकत जानने के लिए कमर कस ली. एक बार जब वह मायके गई तो उस के बाद बिना बताए वह भी पीछेपीछे गांव चंदुआ पहुंच गया. लेकिन वह अपनी ससुराल में न जा कर गांव में ही एक परिचित के यहां रुका.

मायके पहुंचते ही माया की हसरतों को जैसे पंख लग गए. वह सत्यवीर से खेतों व पास के जंगल में मिलने लगी. सत्यवीर से मिलने का रास्ता खुला तो गांव के दूसरे आशिकों से भी मिलने में माया ने गुरेज नहीं किया. उस की इन हरकतों से पूरा गांव वाकिफ था.

अंशु को भी इस बारे में पता चल गया. उस ने कई बार चुपचाप माया को सत्यवीर से मिलते देख भी लिया था. तब उसे पता चला कि पत्नी क्या गुल खिला रही है और वह बारबार मायके क्यों आती है. माया से मिले बिना ही वह अपने घर लौट आया. जब माया मायके से वापस आई तो अंशु ने उस की काली करतूतों का चिट्ठा खोल कर सामने रख दिया. इस बार माया सफाई देने के बजाय चुप रही. उस ने उसे फिर से चेतावनी दी कि वह अपनी हरकतों से बाज आ जाए नहीं तो वह अपने परिवार की इज्जत के लिए कोई भी कदम उठा सकता है.

अंशु ने अपने सासससुर से भी माया की हरकतों की शिकायत की. उन्होंने भी माया को समझाने का भरोसा दिया. लेकिन वह उसे समझा नहीं पाए. माया जब शादी से पहले ही उन की बातों को नहीं सुनती थी तो अब भला क्या सुनती. बहरहाल माया में कोई सुधार नहीं आया. इस बात पर माया और अंशु के बीच लगभग हर रोज ही झगड़ा होने लगा.

इसी बीच माया के छोटे भाई रमाशंकर की शादी 24 अप्रैल, 2016 को होनी तय हो गई. एक दिन पहले 23 अप्रैल को तिलक होना था. अपने एकलौते भाई की शादी की खबर मिलने पर माया अपने बेटे अंश के साथ 11 अप्रैल को ही मायके पहुंच गई.

बाद में पहुंचने की बात कह कर अंशु घर पर रुक गया था. माया के मायके में पहुंचते ही सत्यवीर को उस से मिलने का सुनहरा मौका हाथ लग गया. मजे की बात तो यह थी कि उस के साथ उस का पति नहीं आया था. मौका निकाल कर माया और सत्यवीर एकदूसरे से मिल कर अपने इश्क की याद ताजा करने लगे.

उसी दौरान अंशु को चंदुआ गांव के भगवानदास की बेटी अनीता की 22 अप्रैल, 2016 को होने वाली शादी में शामिल होने का न्यौता मिला.

अंशु अनीता की शादी में शामिल होने के लिए रात 8 बजे चंदुआ गांव पहुंच गया. इस बार भी वह अपनी ससुराल न जा कर सीधे भगवानदास के घर पहुंचा और शादी के कार्यक्रम में शामिल होने के बाद अपनी ससुराल गया. थका हुआ होने के कारण उस ने पत्नी से कहा कि वह जल्द सोना चाहता है.

उस रात गरमी बहुत थी, इसलिए माया ने उस का बिस्तर छत पर लगा दिया. अपने सभी संबंधियों से मिलने के बाद अंशु अपने बिस्तर पर सोने चला गया. लेटते ही उसे नींद ने अपने आगोश में समेट लिया. माया भी आंगन में बिछी चारपाई पर लेट गई.

आधी रात को अंशु की नींद खुली तो उसे प्यास लगी. पानी पीने के लिए जैसे ही वह छत से उतर कर आंगन में आया तो वहां उस ने जो कुछ देखा, उसे देख कर उस का गुस्सा सातवें आसमान पर जा पहुंचा. सामने चारपाई पर माया के साथ उस का प्रेमी सत्यवीर आपत्तिजनक हालत में लेटा था. सत्यवीर को देख कर अंशु ने तेज आवाज में उसे ललकारा.

सत्यवीर हमेशा अपने साथ एक तमंचा रखता था. खतरा देख कर उस ने भागने के बजाय अंशु पर तमंचा तान दिया. अंशु में पता नहीं कहां से इतनी हिम्मत आ गई कि वह सत्यवीर के पास तमंचा होने के बावजूद उस से भिड़ गया. दोनों में हाथापाई हुई तो इस हाथापाई में अंशु ने सत्यवीर से तमंचा छीन लिया.

पलट कर उस ने सत्यवीर को मारना चाहा, लेकिन सत्यवीर अपनी जान बचा कर भागने में सफल हो गया. प्रेमी के साथ रंगेहाथों पकड़ी गई माया सिर झुकाए उस के सामने चारपाई पर बदहवास हालत में बैठी थी. अंशु को माया के चेहरे से भी नफरत हो गई थी.

दांत पीसते हुए उस ने माया की तरफ फायर झोंक दिया. गोली माया के सीने पर जा कर लगी और वह वहीं ढेर हो गई. इस के बाद अंशु उस ओर भागा, जिधर सत्यवीर भागा था. लेकिन रात के अंधेरे में उसे कुछ नजर नहीं आया. फिर अंशु रात में ही ससुराल से फरार हो गया.

आधी रात को गोली चलने की आवाज सुन कर माया के पिता रामऔतार और मां चंदा देवी तथा घर पर मौजूद दूसरे मेहमान वहां आ पहुंचे. आंगन में चारपाई पर माया की खून से सनी लाश पड़ी थी. वहां का खौफनाक मंजर देख कर सब का कलेजा मुंह को आ गया.

सत्यवीर को वहां आते या वहां से जाते किसी ने नहीं देखा था. उसे तो माया ने फोन कर के चुपके से बुलाया था. माया का पति अंशु वहां से गायब था. इसलिए लोगों ने यही सोचा कि किसी बात को ले कर माया और अंशु में कहासुनी हुई होगी और गुस्से में अंशु माया का कत्ल कर वहां से फरार हो गया होगा.

थोड़ी ही देर में गांव के लोगों का मजमा लग गया. माया की हत्या क्यों हुई, इस बात से सभी अनजान थे. रहस्य से परदा अंशु ही उठा सकता था कि आखिर 2 घंटे में ऐसा क्या अनर्थ हो गया कि बात माया के कत्ल तक पहुंच गई.

थोड़ी देर में गांव का प्रधान भी वहां पहुंच गया. रात 1 बज कर 10 मिनट पर उस ने माया के कत्ल की सूचना थाना हाफिजगंज में फोन कर के दे दी. थोड़ी ही देर में थानाप्रभारी धर्मेंद्र कुमार के नेतृत्व में पुलिस का अमला वहां पहुंच गया. थानाप्रभारी ने लाश का निरीक्षण करने के बाद उसे पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी भेज दी.

अगली सुबह रामऔतार थाना हाफिजगंज पहुंचे और बेटी माया की हत्या का आरोप अपने दामाद महावीर उर्फ अंशु के ऊपर लगाते हुए उस के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने को कहा. उन की तहरीर पर थानाप्रभारी ने अंशु के खिलाफ भादंवि की धारा 302 के तहत मुकदमा दर्ज करा दिया.

महावीर उर्फ अंशु की तलाश में पुलिस उस के गांव सरौरा पहुंची तो वह घर पर नहीं मिला. 24 अप्रैल, 2016 को धर्मेंद्र कुमार ने एक मुखबिर की सूचना पर अंशु को दिबनापुर हाल्ट के पास से गिरफ्तार कर लिया.

थाने ला कर जब उस से पूछताछ की गई तो अंशु ने माया की हत्या का जुर्म स्वीकार करते हुए पूरी कहानी बता दी. पुलिस ने अंशु की निशानदेही पर माया की हत्या में प्रयुक्त सत्यवीर का तमंचा उस के घर में रखे संदूक से बरामद कर लिया.

अगले दिन महावीर को न्यायालय में पेश करने के बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

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