Cyber Crime. ब्यूटीफुल दुलहनियों के चक्कर में शादी को बेताब 7,693 लोग 1.11 करोड़ लुटा कर अपने को ठगा महसूस कर रहे हैं. छत्तीसगढ़ के रायगढ़ की अजब ठगी की गजब स्टोरी में जानें कि हजारों लोग शादी के चक्कर में रुपए खर्च करने के बाद भी कुंआरे कैसे रह गए?

काफी प्रयास के बाद भी विनीत की शादी नहीं हो पा रही थी. अच्छी नौकरी के साथ तनख्वाह भी ठीक थी. इस के बावजूद अब तक उसे कोई ढंग की लड़की नहीं मिली थी, जिसे वह अपनी जीवनसंगिनी बना सके. उस के एक दोस्त ने उसे सलाह दी कि वह मैट्रिमोनियल साइट पर ट्राई कर के देख ले. शायद कोई अच्छी लड़की मिल जाए.

अपने दोस्त का सुझाव विनीत को ठीक लगा. इस के बाद उस ने अच्छी मैट्रिमोनियल साइट की तलाश शुरू कर दी. शीघ्र ही उसे छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में लोक सेवा केंद्र निधि परिवहन सुविधा केंद्र के बारे में जानकारी मिली.

यह भी पता चला कि यह केंद्र लड़कों की शादी भी कराता है. उस ने केंद्र के नंबर पर संपर्क किया. दूसरी ओर से एक लड़की की मधुर आवाज आई. उस ने गुड मौर्निंग करते हुए फोन करने की बाबत पूछा.

इस पर विनीत ने बताया कि पता चला है कि आप की मैट्रिमोनियल साइट के जरिए शादी के लिए योग्य लड़कियों की जानकारी उपलब्ध कराई जाती है.

इस पर उस लड़की ने बताया, ”आप ने सही सुना है. हमारे पास शादी योग्य, सुंदर यानी हर तरह की लड़कियों की जानकारी है. हम लड़कियों को दिखाने के बाद पसंद आने पर उन के साथ मीटिंग भी कराते हैं. इस के लिए आप को सब से पहले हमारे केंद्र पर अपना रजिस्ट्रैशन कराना होगा.’’

उस ने आगे बताया, ”इस के लिए आप को रजिस्ट्रैशन शुल्क के तौर पर 1000 रुपए (एक हजार रुपए) जमा कराने होंगे. आप के बायोडेटा व पसंद के अनुसार आप को लड़की की फोटो भेजी जाएगी. इस के बाद आगे की काररवाई की जाएगी.’’

विनीत ने बताए अनुसार अपने बायोडेटा के साथ यूपीआई के जरिए एक हजार रुपए भेज कर शादी के लिए अपना रजिस्ट्रैशन इस केंद्र पर करा लिया.

कुछ दिनों तक कोई जवाब न मिलने पर विनीत ने केंद्र को फोन किया. इस पर लड़की के साथ मीटिंग कराने के लिए फीस जमा करने को कहा. विनीत ने यह फीस भी जमा कर दी. लेकिन काफी समय बीत जाने के बाद भी केंद्र से न तो किसी लड़की की फोटो भेजी गई और न प्रत्यक्ष रूप से दिखाया गया और न ही कोई मीटिंग कराई.

इस के बाद केंद्र के नंबर पर फोन करने पर फोन ही नहीं उठाया गया. जब काफी प्रयासों के बाद भी केंद्र ने उस का फोन नहीं उठाया, तब उसे शक हुआ कि उस के साथ फ्रौड किया गया है. वह अपने को ठगा सा महसूस करने लगा.

इस के बाद विनीत ने बिना देर किए कोतवाली रायगढ़ में शिकायत दर्ज कराई. पुलिस को विनीत से पहले भी कोतवाली के क्षेत्र दारोगा पारा में चल रहे इस मैट्रिमोनियल केंद्र के खिलाफ शिकायतें मिल चुकीं थीं, लेकिन पुुलिस लोक सेवा केंद्र समझ कर अब तक चुप बैठी थी.

अब पुलिस समझ गई कि युवकों को शादी के नाम पर इस केंद्र द्वारा ठगा जा रहा है. साइबर ठगी की आशंका के चलते पुलिस ने बिना देर किए साइबर टीम के साथ मिल कर 13 अप्रैल, 2026 की दोपहर मेंं दारोगा पारा क्षेत्र स्थित लोक सेवा केंद्र निधि परिवहन सुविधा केंद्र पर छापा मारा.

पुलिस इस केंद्र में जब पंंहुची तो पुलिस को देखते ही वहां हड़कंप मच गया. पुलिस केंद्र में अंदर तक घुस गई. केंद्र के बाहरी हिस्से में जहां लाइसैंस आदि बनाने का काम होता था, वहीं अंदर कई पार्टीशन बनाए गए थे, जहां कौल सेंटर संचालित होते थे.

सेंटर पर 12 से अधिक लड़कियां लैपटाप पर काम करते हुए मिलीं. पुलिस ने केंद्र से फरजी लाइसैंस, मुहरें जो डाक्टरों, सचिव व पार्षदों आदि की थीं, के साथ ही कई डायरियां, कौपियां बरामद कीं, जिन में देश के विभिन्न राज्योंं के लोगों के नंबर दर्ज थे.

लोक सेवा केंद्र की आड़ में फरजीवाड़े का काम धड़ल्ले से चलाया जा रहा था. केंद्र में बाहर से लाइसैंस और दस्तावेज बनाने का काम दिखाया जाता था, जबकि अंदर अलगअलग कमरों में फरजी दस्तावेज तैयार किए जाते थे.

वहीं वीडियो एडिटिंग और कौल सेंटर भी संचालित किया जा रहा था, जहां काम करने वाली युवतियों के माध्यम से लोगों को शादी के नाम पर फंसा कर उन से रुपए वसूले जाते थे. पुलिस को देखते ही कई लड़कियों ने अपने दुपट्टों से चेहरोंं को छिपा लिया.

शादी के लिए लालायित युवकों को जाल में फंसाने के लिए काल सेंटर पर कार्यरत लड़कियों को  कमीशन बेस पर टारगेट दिया जाता था. लड़कियों ने पुलिस को बताया कि उन्हें 10 से 20 फीसदी तक कमीशन मिलता था.

इस काल सेंटर पर कार्यरत लड़कियों को कार्य करने से पहले बाकायदा उन्हें शादी की चाहत रखने वाले युवकों को अपने जाल में फंसाने के लिए उन्हें खास ट्रेनिंग दी जाती थी कि कैसे युवकों से बात करनी है. कैसे शिकार का भरोसा जीतना है. कैसे धीरेधीरे कैसे उस की जेब से पैसा निकलवाने हैं?

पहली बातचीत में कैसे अपनापन दिखा कर भरोसा बनाया जाता है. इस के बाद शादी के नाम पर रजिस्ट्रैशन फीस जमा करा कर लड़की की एडिटेड तसवीर दिखा कर उस के परिवार से मिलाने व बातचीत के नाम पर अलगअलग किस्तों में पैसा मांगा जाता था. सेंटर पर कुछ लड़कियां फरजी दुलहन बन कर युवकों से बातचीत भी करती थीं.

इस फरजी केंद्र का मास्टरमाइंड कपिल गर्ग था. पहले कपिल लोक सेवा केंद्र के जरिए आरटीओ से जुड़ा काम करता था. जब उस की आईडी निरस्त हो गई, तब इस शातिर ने यह फरजी नेटवर्क खड़ा किया. उस के साथ महिला हिमांशु मेहर और अन्य सहयोगी लंबे समय से इस फरजी काल सेंटर को चला कर लोगों की मेहनत की गाढ़ी कमाई को लूटने का काम कर रहे थे. कपिल ने बताया कि वह अब तक 3 शादियां करा चुका है. यानी 3 साल में 3 शादियां.

ये लोग जब युवकों से पैसे मिल जाते, तब अचानक संपर्क तोड़ दिया जाता. यहां तक कि शादी तक तय हो जाने का भरोसा दिला कर गायब हो जाते थे, तब लोग अपने को ठगा महसूस करते.

कहावत है कि खुद अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारना. जांच में पता चला कि जिन युवकों की शादी नहीं हो रही थी, इस कारण वे मैट्रिमोनियल साइट की तरफ रुख करते दूसरी तरफ उन से ठगी की जा रही थी.

छापे की जानकारी पर कई पीडि़त वहां पहुंच गए, उन्होंने पुलिस को बताया कि शादी कराने के नाम पर उन से ठगी की गई है. केंद्र के लोग यूपीआई के जरिए पैसे डलवाते रहे, लेकिन पीडि़तों के पास किसी लड़की का फोन तक नहीं आया, न तसवीर भेजी गई.

यही बात उन के गले की हड्ïडी बन गई. जब कौल सेंटर ने  बात करने का सिलसिला तोड़ दिया, तब उन के अपराध का घड़ा फूट गया. वरना अभी कितने दिन तक यह साइबर फ्रौड का सिलसिला चलता रहता, पता नहीं. जिस ने भी यह बात सुनी, हैरानी व्यक्त की.

लोक सेवा केंद्र की आड़ में किए जा रहे साइबर फ्रौड करने के आरोप में पुलिस ने 2 मास्टरमाइंड समेत 26 आरोपियों को अरेस्ट किया है. इन में एक दरजन से अधिक लड़कियां शामिल हैं. सभी लड़कियों की उम्र 18 से 22 साल के बीच थी.

पुलिस ने केंद्र से 55 मोबाइल, 13 लैपटाप व 2 प्रिंटर, डायरियां, मुहरें, फरजी लाइसेंस आदि बरामद किए.

केंद्र द्वारा अब तक देशभर के 7,693 लोगों से एक करोड़ 11 लाख रुपए की ठगी की जा चुकी है. यह केंद्र पिछले 3 साल से चल रहा था. गिरोह यूट्यूब चैनल, फरजी प्रोफाइल और कौल सेंटर के जरिए लोगों को शादी के नाम पर फंसाता था.

केंद्र द्वारा जरूरतमंदों से रजिस्ट्रैशन फीस, मीटिंग फीस जैसे बहानों से यूपीआई के जरिए रकम वसूली जाती थी, रकम वसूलने के बाद उन्हें किसी प्रकार की जानकारी या लड़की नहीं दिखाई जाती थी.

बढ़ती उम्र के साथ कई लोग शादी को ले कर चिंता करने लगते हैं. वहीं कई लोग शादी के लिए बेताब रहते हैं. ऐसे में वो अकसर मैट्रिमोनियल साइट का रुख करते हैं, लेकिन कई बार छोटीमोटी वैवाहिक वेबसाइट बना कर लोगों को ठग भी लिया जाता है.

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में साइबर ठगी का यह मामला सामने आया है, यहां फरजी मैट्रिमोनियल साइट के नाम पर चल रहे एक बहुत बड़े साइबर ठगी गिरोह का पुलिस ने परदाफाश किया है, जहां पर लड़कियां शादी के लिए बेचैन युवाओं से फरजी दुलहन बन कर बात करती थीं. दूल्हा बनने के चक्कर में उन की जेब खाली करा लेती थीं.

पुलिस ने इस संबंध में 2 मास्टरमाइंड सहित 26 मैरिज माफियाओं को गिरफ्तार किया है. यह गिरोह इतना शातिर था कि इस ने 3 साल में अब तक शादी का झांसा दे कर देश भर के 7,693 लोगों को अपना निशाना बनाया और उन से लगभग एक करोड़ 11 लाख रुपए ठग लिए.

जांच में पता चला कि रायगढ़ के दारोगा पारा स्थित केंद्र के बाहर लोक सेवा केंद्र का बोर्ड लगा था, ताकि किसी को शक न हो, लेकिन अंदर असल में एक अवैध कौल सेंटर संचालित किया जा रहा था.

केंद्र में कार्यरत लड़कियां डायरी में दर्ज लोगों के मोबाइल पर पहले फोन कर संपर्क करतीं थीं. मार्क करती थीं कि कौन फोन पर संंपर्क कर रहा है कौन नहीं. उन्हें शादी का झांसा दे कर जाल में फंसाती थीं. यदि उस नंबर से उन्हें कोई रेस्पांस नहीं मिलता था तो डायरी से उस का नाम काट दिया जाता था.

गिरोह फरजी जीमेल आईडी, मोबाइल नंबर और यूट्यूब चैनलों के जरिए नकली प्रोफाइल बना कर लोगों से संपर्क करता था. इस के बाद रजिस्ट्रैशन फीस, मीटिंग फीस और अन्य बहानों ये यूपीआई के माध्यम से रकम वसूली जाती थी.

रायगढ़ के एसएसपी शशि मोहन सिंह ने जानकारी दी कि साइबर फ्रौड का बड़ा रैकेट चल रहा था. केंद्र द्वारा युवकों को रजिस्ट्रैशन के बाद सुंदर लड़कियों की तसवीर दिखाई जाती थी, जब वह चंगुल में फंस जाता था तब उस से और धनराशि वसूली जाती थी.

पुलिस ने रिकौर्डिंग भी सुनी है, कैसे युवकों को ये लड़कियां चंगुल में फंसाती थीं. पुलिस व साइबर पुलिस ने मिल कर इस संगठित साइबर गिरोह का परदाफाश कर मास्टरमाइंड कपिल शर्मा, महिला संंचालिका हिमांशु मेहर समेत 26 आरोपियों को गिरफ्तार कर उन के खिलाफ धारा 319(2), 336(3), 336(4), 338, 340(2), 61(2), 112(2), 316(2), 318(4), बीएनएस और आईटी ऐक्ट की धारा 66सी, 66डी के तहत केस दर्ज किया गया. जांच में पीडि़तों और ठगी की रकम बढ़ सकती है, इस संबंध में जांच जारी है.

दारोगा पारा क्षेत्र स्थित लोक सेवा केंद्र निधि परिवहन सुविधा केंद्र पर छापा मारने के दौरान पुलिस को पता चला कि इस केंद्र की आड़ में 2 सहयोगी केंद्र भी कार्यरत थे. इन में ‘शांति देवी सोसायटी औफ एजूकेशन’ व ‘निकाह’ नाम से सेंटर संचालित थे.

शांति देवी सोसायटी के बोर्ड पर स्वर्णिम भविष्य के लिए छत्तीसगढ़ शासन से मान्यता प्राप्त कौशल विकास योजना अंतर्गत नि:शुल्क प्रवेश. इस के साथ ही बोर्ड पर प्रवेश के लिए आवश्यक दस्तावेजों में आधार कार्ड, 10वीं, 12वीं की अंकसूची, 6 फोटो, मोबाइल नंबर आदि मांगे गए थे.

पुलिस इन की भी गहनता से जांच कर रही है. शांति देवी सोसायटी की संचालिका हिमांशु मेहर थी. पुलिस ने उसे भी गिरफ्तार किया है.

ग्राहकों के मोबाइल नंबर देश के विभिन्न अखबारों में छपे वैवाहिक कौलम से ले कर उन्हें डायरियों और कौपियों में दर्ज किया जाता था. फिर उन्हें फोन किया जाता था. शादी के इच्छुक लोगों से मैरिज ब्यूरो के नाम पर सब से पहले रजिस्ट्रैशन फीस जो एक हजार रुपए से स्टार्ट होती थी, ले कर रजिस्ट्रैशन किया जाता था. इतना ही नहीं, ये लोग अखबारों में मैरिज ब्यूरो के नाम से अपना विज्ञापन भी प्रकाशित कराते थे.

साइबर फ्रौड करने के आरोप में गिरफ्तार सभी 26 आरोपियों, जिन में लड़कियां व लड़के शामिल थे, को पुलिस द्वारा 14 अप्रैल, 2026 को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से सभी को जेल भेज दिया गया.

भारत में 2025 में साइबर फ्रौड के लगभग 22.24 लाख मामले दर्ज किए गए, जिन में 20 हजार करोड़ रुपए से अधिक की ठगी हुई. प्रमुख फ्रौड में 75 फीसदी से अधिक निवेश/ट्रेडिंग घोटाले डिजिटल अरेस्ट, शादी कराने के नाम पर ठगी और एपीके फाइलें शामिल हैं. जिन का 45 फीसदी स्रोत कंबोडिया, म्यांमार और लाओस हैं. यदि आप के साथ ठगी की कोई घटना होती है तो तत्काल साइबर क्राइम में रिपोर्ट दर्ज कराएं.

—कथा में विनीत काल्पनिक नाम है.

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