Love Crime. रीना पटेल 4 साल की थी, जब उस के पेरेंट्स की मौत हो गई थी. तब उस की मौसी ने उस की देखभाल की. 16 साल की उम्र में रीना को अपने मौसेरे भाई अरुण पटेल से प्यार हो गया. तभी मौसी ने रीना की शादी कमलेश से कर दी. 13 साल बाद वह पति को छोड़ कर अलग रहने लगी. तभी उस की लाइफ में फिर से पहला प्रेमी अरुण आ गया. अरुण के साथसाथ रीना फेसबुक फ्रेंड वीरू उर्फ पप्पू जाट के साथ मौजमस्ती करने लगी. दूसरे प्रेमी वीरू ने रीना को अपने इशारों पर नचाना चाहा, लेकिन…

पिछले 2 सालों से अरुण रीना पटेल पर लाखों रुपए लुटा चुका था, परंतु उसे इस बात का मलाल था कि रीना अपने पुराने आशिक वीरू से मिलना नहीं छोड़ रही थी. अरुण ने अब रीना से साफ कह दिया था कि वह वीरू से न तो फोन पर बात करेगी और न ही उसे घर पर आने देगी. रीना भी मन से यही चाहती थी कि वीरू उस से न मिले, परंतु वह मजबूर थी. दरअसल, वीरू अपने सच्चे प्यार का वास्ता दे कर रीना से मिलनाजुलना बंद नहीं कर रहा था.

रीना ने अरुण से इसी बात का जिक्र करते हुए कहा, ”अरुण, मैं तुम्हें जान से ज्यादा प्यार करती हूं. वीरू को यहां आने के लिए मना भी करती हूं, लेकिन वह मुझे ब्लेकमैल करने की धमकी देता है. मैं डरती हूं कि कहीं समाज में मेरी बदनामी न हो जाए.’’

”मैं भी उसे कई बार बोल चुका हूं, मगर वह अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा. यदि तुम सचमुच उस से मिलना नहीं चाहती तो उसे रास्ते से ही हटा देते हैं. न रहेगा बांस और न बजेगी बांसुरी.’’ अरुण ने रीना से कहा.

”मगर कैसे? क्या उसे रास्ते से हटाना इतना आसान है? वह रेत खदान का ठेका लेने वाले ठेकेदार से जुड़ा है.’’

”तुम इस की फिक्र मत करो, तुम पर केवल मेरा हक है. तुम तो फोन कर के उसे घर बुलाओ, इस बार हम उस का काम तमाम कर देंगे.’’ अरुण ने रीना के गाल पर अपने होंठ रखते हुए कहा.

”अरुण तुम्हारे दिमाग में जो भी प्लानिंग है, मुझे भी बताओ. हो सकता है, मैं भी तुम्हारी मदद कर सकूं.’’ रीना ने अपनी बांहें उस के गले में डालते हुए कहा.

”रीना इस बार वो जब घर आएगा, हम लोग उस का मर्डर कर देंगे.’’ अरुण बोला.

”वीरू हट्टाकट्टा नौजवान है, उसे मारना हम दोनों के बस की बात नहीं है. और फिर मारने के बाद उस की लाश को कहां ठिकाने लगाएंगे?’’ रीना ने आशंका जताई.

”मेरा एक जिगरी दोस्त हरनाम है, जो मेरा रिश्तेदार भी है. वीरू को मारने और लाश को ठिकाने लगाने में वह हमारी पूरी मदद करेगा.’’ अरुण ने प्लान समझाते हुए कहा.

”लाश कहां फेंकेंगे, कहीं पुलिस के हत्थे पड़ गए तो न घर के रहेंगे न घाट के.’’ रीना चिंतित हो कर बोली.

”हम वीरू का सिर लाठियों से फोड़ देंगे, जिस से वह जल्दी मर जाएगा. उस के बाद रात में लाश को कार की डिक्की में रख कर यहां से दूर नैशनल हाइवे पर चलेंगे और किसी ऐसी सुनसान जगह पर फेंक देंगे कि महीनों तक कोई उस लाश तक नहीं पहुंच पाएगा.’’ अरुण ने पूरा प्लान समझाते हुए कहा.

29 साल की रीना पटेल नरसिंहपुर जिले के नगर साईंखेड़ा के जानकी विहार कालोनी में रहती थी, जबकि 32 साल का वीरू जाट राजस्थान के भीलवाड़ा का रहने वाला था. रीना के प्यार में वह इस कदर फिदा था कि उस से मिलने 900 किलोमीटर का फासला तय कर के साईंखेड़ा पहुंच गया.

29 अप्रैल, 2026 को शाम के समय वीरू जैसे ही रीना के घर पहुंचा तो रीना ने उस की खूब आवभगत की. रीना के प्यार में पागल वीरू को इस बात की भनक तक नहीं थी कि उस की माशूका ने आज उसे ठिकाने लगाने का जाल बुन रखा था.

रीना ने लंबे सफर से आए वीरू को जैसे ही घर के अंदर कमरे में चलने का इशारा किया तो इस खयाल से वीरू खुशी से झूम उठा कि आज रीना के साथ वह खूब मौजमस्ती कर सारी थकान उतार देगा.

वीरू जैसे ही कमरे के अंदर पहुंचा, वहां पहले से मौजूद अरुण और हरनाम ने बेसबाल के डंडों से उस के सिर पर ताबड़तोड़ प्रहार कर दिए.

कुछ ही पलों में वह जमीन पर गिर पड़ा और उस के प्राणपखेरू उड़ गए. वीरू की मौत से पूरे कमरे में खून फैल चुका था. बैड पर रीना के 10 साल के बेटे एकांश की नोटबुक पड़ी थी. कुछ खून के छींटे उस नोटबुक पर भी आ गए थे.

तीनों ने मिल कर खून साफ किया और वीरू के हाथपैरों को बांध कर मुंह पर पट्टी चिपका दी और एक बड़े बोरे में लाश को भर कर उस नोटबुक को भी उसी बोरे में डाल दिया और उसे रस्सी से सिल दिया.

बेलखेड़ी गांव का हरनाम अरुण की बुआ का बेटा था. उस ने अपने गांव के कन्हैया नाम के दोस्त को भोपाल चलने के बहाने रात में ही साईंखेड़ा बुला लिया. उन्होंने बोरे में रखी लाश को अपनी एसयूवी कार की डिक्की में रखा और रात के 12 बजे ताला डाल कर घर से निकल पड़े.

करीब 200 किलोमीटर का फासला तय करने के बाद रायसेन जिले के बाड़ी इलाके में सुनसान जगह पर एक पुल पर कार रोकी. इस के बाद उन्होंने कार की डिक्की से बोरे को निकाला और उसे पुल से नीचे गिरा दिया.

लाश फेंकने के बाद पहले भोपाल, फिर इटारसी, उस के बाद मुंबई के कल्याण, फिर अंत में उज्जैन में रहते रहे.

रीना पटेल नरसिंहपुर जिले की साईंखेड़ा तहसील के एक गांव की रहने वाली है. रीना जब मां के गर्भ में थी, तभी उस के पापा की सड़क हादसे में मौत हो गई थी. जन्म के कुछ महीने बाद ही मम्मी दूसरी शादी कर राजस्थान चली गई और बाद में उस ने आत्महत्या कर ली.

महज 4 साल की उम्र में पेरेंट्स का साया छिनने के बाद रीना पटेल की परवरिश सड़ूमर गांव में रहने वाली उस की मौसी ने की. किशोरावस्था में उस की नजदीकियां मौसी के बेटे अरुण पटेल से बढ़ीं. परिवार वालों ने दोनों को आपत्तिजनक हालत में देख लिया तो बदनामी के डर से 16 साल की उम्र में ही उस की शादी कर दी गई.

रीना की शादी 2013 में साईंखेड़ा तहसील के खैरी गांव में हुई थी. कमलेश सीधासादा युवक था, उस के पापा का देहांत हो चुका था. इसलिए अपने हिस्से की 6 एकड़ जमीन पर वह खेतीबाड़ी करने लगा. रीना की ख्वाहिशें बड़ी थीं और उसे गांव का रहनसहन रास नहीं आता था.

कमलेश और रीना से एक बेटे का जन्म हो चुका था, मगर उन के दांपत्य की गाड़ी पटरी से उतर चुकी थी. शादी के बाद रीना करीब 13 साल पति के साथ रही. फिर वह पति से अलग रहने लगी और साईंखेड़ा में किराए के मकान में शिफ्ट हो गई.

रीना का पति कमलेश जब कभी अपने बेटे से मिलने आता तो वह इस का विरोध करती और कई बार तो वह अपने बेटे को भी इस बात के लिए पीट देती थी.

इसी दौरान बचपन का प्रेमी यानी उस का मौसेरा भाई अरुण पटेल दोबारा उस की जिंदगी में लौटा. अरुण उस पर इस कदर फिदा था कि उस ने रीना के नाम करीब एक करोड़ रुपए की एफडी कराई, 50 लाख रुपए का मकान दिलाया और आधा किलो सोना भी दिया. महंगी एसयूवी कार, आईफोन और लग्जरी लाइफ का इंतजाम भी किया.

अरुण एक फाइनेंस कंपनी चलाता था. उस के पास काफी पुश्तैनी जायदाद थी. जब रीना पति से अलग हुई तो अरुण उस के पास साईंखेड़ा आनेजाने लगा और उन का प्रेम फिर से परवान चढऩे लगा.

अरुण की भी शादी हो चुकी थी, मगर पत्नी से उस की अनबन रहने से वह मायके में रह रही थी. अरुण की 2 बेटियां हैं, उस का अपनी पत्नी से तलाक हो गया है. एक बेटी उस के पास रहती थी, जबकि दूसरी बेटी उस की पत्नी के पास.

अरुण ने भोपाल में जीएस फाइनेंस नाम की कंपनी खोल रखी थी, जिस का औफिस गाडरवारा के आचार्य नगर में भी था. अरुण जरूरतमंद लोगों को एक से 10 लाख तक का लोन ऊंची ब्याज दरों पर बांट कर मोटी कमाई कर रहा था और रीना का खर्च भी वही उठा रहा था. रीना को उस ने साईंखेड़ा के जानकी विहार कालोनी में आलीशान मकान भी खरीद कर दे रखा था.

रीना 29 साल की थी. वह अपने पति से अलग हो कर अपने 10 साल के बच्चे के साथ रहती थी. गांव में लोग उसे अलग नजरों से देखते थे. उसे सजनासंवरना और सोशल मीडिया पर घंटों बिताना पसंद था.

वह फेसबुक पर फोटो डालती, गांव की औरतें उसे ताने मारतीं लेकिन रीना को इन बातों की परवाह नहीं थी. शायद उस के एकाकीपन ने ही उसे सोशल मीडिया की चमकदार दुनिया में धकेल दिया था.

रीना को रील बनाने का बहुत शौक था और वह इंस्टाग्राम, फेसबुक पर दिनरात अपना समय व्यतीत करती थी. इंस्टाग्राम  पर उस की रील्स देख कर राजस्थान के भीलवाड़ा का रहने वाला वीरू उर्फ पप्पू जाट उसे लाइक और कमेंट करता था.

लाइक और कमेंट का यह सिलसिला दोनों को नजदीक ले आया. फोन पर लंबीलंबी बातों के बीच दोस्ती जल्द ही प्यार में बदल गई. वीरू जाट भी शादीशुदा और एक बच्चे का बाप था, इस के वावजूद वह रीना की रील्स का दीवाना हो गया. वीरू रेत के कारोबार से जुड़ा था और अकसर उस का मध्य प्रदेश आनाजाना होता था.

एक दिन वीरू रीना से मिलने नरसिंहपुर जिले के साईंखेड़ा आ गया. रात का वक्त था. रीना भी अपने फेसबुक फ्रेंड को सामने पा कर खुश थी और वीरू ने जब रीना को अपनी नजरों के सामने देखा तो अपने आप को रोक नहीं सका.

वीरू रीना को बांहों में भरते हुए बोला, ”रीना, तुम वाकई बहुत खूबसूरत हो और मैं खुशनसीब हूं जिसे तुम्हारा साथ मिला.’’

”थोड़ा सब्र करो वीरू, अभी तो रात बाकी है. सब कुछ यहीं लुटा दोगे क्या?’’ रीना ने अपने आप को वीरू से छुड़ाते हुए कहा.

”मगर तुम्हें देख कर नहीं लगता कि तुम एक बच्चे की मां हो. तुम्हारे पति की तो मति मारी गई थी जो जन्नत की हूर को पहचान नहीं पाया.’’ वीरू उस के माथे को चूमते हुए बोला.

”वीरू, मुझे अपने पति को छोडऩे का कोई गम नहीं है, अब मुझे तुम्हारे जैसा कद्रदान जो मिल गया है.’’ रीना ने अपने होंठों को वीरू के होंठों पर रखते हुए कहा.

उस के बाद प्यारभरी बातों का सिलसिला उन्हें बैडरूम में ले आया और दोनों दो जिस्म एक जान हो गए.

इस के बाद तो अकसर ही वीरू का रीना से मिलनाजुलना होने लगा. कालोनी में रहने वाले पड़ोसियों ने तो वीरू को रीना के घर 15-15 दिनों तक रहते देखा. दोनों पतिपत्नी जैसे रहते थे.

भोपाल-जबलपुर नैशनल हाइवे-45 के जंगलों के बीच से गुजरती सड़क पर रात का सफर किसी डरावनी फिल्म के दृश्य का अहसास कराता है. पहाडिय़ों के बीच सांप की तरह मुड़ता नागिन मोड़ और नीचे गहरी खाई, ऊपर घना अंधेरा और चारों तरफ फैला घना जंगल. ट्रक ड्राइवर भी उस इलाके से गुजरते वक्त अनजाने डर से हौर्न बजाने लगते हैं.

7 मई, 2026 की सुबह उसी जगह ने ऐसा राज उगला, जिस ने पूरे मध्य प्रदेश को हिला दिया. सुबह करीब 7 बजे वन विभाग का एक गार्ड अश्विनी तिवारी रोज की तरह गश्त पर निकला था. जिस ओर उस के कदम बढ़ रहे थे, वहां हवा में तेज बदबू घुली हुई थी.

पहले उसे लगा कि शायद कोई जंगली जानवर मरा होगा, लेकिन जैसे ही उस ने खाई की तरफ झांका तो नीचे एक सफेद बोरा पड़ा था. अज्ञात आशंका के चलते उस का गला सूख गया. कांपते हाथों से उस ने तुरंत ही पुलिस थाना बाड़ी को सूचना दी.

कुछ ही देर में बाड़ी थाना पुलिस के टीआई राजेश तिवारी मौके पर पहुंच गए. सायरन की आवाज जंगल में गूंज रही थी. टीआई राजेश तिवारी अपनी टीम के साथ नीचे खाई में उतरे. बदबू इतनी भयानक थी कि कई पुलिसकर्मियों ने मुंह पर कपड़ा बांध लिया.

जब बोरे को खोला गया तो वहां मौजूद हर किसी की सांसें कुछ सेकेंड के लिए थम सी गईं. बोरे के अंदर एक युवक का शव था, जिस के हाथपैर बंधे हुए थे और मुंह पर मोटी टेप चिपकी हुई थी.

पूरा शरीर पूरी तरह सड़ चुका था, जिस के चलते चेहरे की पहचान मुश्किल लग रही थी. साफ जाहिर हो रहा था कि हत्यारों ने पूरी योजना बना कर मर्डर कहीं और कर के पहचान मिटाने की कोशिश में लाश को यहां फेंका है.

लाश के पास कोई ऐसा सामान नहीं मिला, जिस के जरिए लाश की शिनाख्त की जा सके.

फारेस्ट गार्ड अश्विनी कुमार तिवारी की सूचना पर अज्ञात हत्यारों के खिलाफ बीएनएस की धारा 103 (1), 238 (ए) के तहत रिपोर्ट दर्ज कर ली गई.

लाश का पंचनामा बनाते समय पुलिस टीम की नजर उसी बोरे से निकले एक पुराने थैले पर पड़ी. इस थैले को खोला तो उस में जूते, कंघी और एक बच्चे की होमवर्क वाली नोटबुक रखी हुई थी. थैले पर नरसिंहपुर जिले के साईंखेड़ा की एक रेडिमेड कपड़े की दुकान गोयल कलेक्शन का नाम प्रिंट था और होमवर्क कौपी पर अंगरेजी में एकांश पटेल नाम लिखा हुआ था. इसी पर कौपी को चैक करने वाले जीशान अग्रवाल के सिग्नेचर भी थे.

बाड़ी पुलिस को मिली यह नोटबुक इस लाश की गुत्थी सुलझाने के लिए एक अहम सबूत लग रही थी. रायसेन जिले के एसपी आशुतोष गुप्त के निर्देश पर एसडीओपी नीलम चौधरी ने टीआई राजेश तिवारी को इस नोटबुक की तहकीकात करने का निर्देश दिया.

टीआई राजेश तिवारी ने एक टीम नरसिंहपुर जिले के साईंखेड़ा भेजी. इस टीम ने साईंखेड़ा पुलिस के सहयोग से गोयल कलेक्शन के संचालक अभिषेक अग्रवाल से पूछताछ की तो उन्होंने कौपी चैक करने वाले जीशान अग्रवाल के बारे में बताया.

16 साल का जीशान अग्रवाल दसवीं क्लास पास होने के बाद कालोनी के बच्चों को ट्यूशन पढ़ाता था. पुलिस टीम सादे लिबास में जीशान से मिली और उस नोटबुक के बारे में पूछा तो जीशान ने बड़ी ही मासूमियत से कहा, ”यह नोटबुक आप को कहां मिली, यह तो रीना आंटी के बेटे एकांश की है. मैं उसे ट्यूशन पढ़ाता हूं और इस में मेरे सिग्नेचर भी हैं.’’

जीशान के बालमन को पुलिस ने यह आभास ही नहीं होने दिया और इस नोटबुक की तहकीकात पूरी कर ली. उस के बाद साईंखेड़ा की जानकी विहार कालोनी के बाशिंदों से पुलिस ने रीना के संबंध में पूछताछ की तो लोगों ने रीना पटेल का मकान बता दिया.

पुलिस टीम जब उस मकान पर पहुंची तो उस पर ताला लटका हुआ था. पड़ोसियों ने बताया कि पिछले 7-8 दिनों से यह मकान बंद है और इस में रहने वाली रीना कहीं बाहर गई हुई है. पड़ोसियों से मिले रीना के मोबाइल नंबर पर जब कौल किया गया तो वह बंद आ रहा था.

पुलिस के शक की सूई अब पूरी तरह से रीना पर केंद्रित हो गई थी. साइबर सेल की मदद से रीना की कौल डिटेल निकलवाई गई तो पता चला कि रीना की बात राजस्थान के भीलवाड़ा निवासी वीरू जाट से 29 अप्रैल, 2026 तक हुई थी.

बाड़ी पुलिस थाने की एक टीम जिस में एसआई संजय यादव, हैडकांस्टेबल जितेंद्र सिंह राजपूत, कांस्टेबल रमाकांत गुर्जर शामिल थे, रीना की तलाश हेतु उज्जैन भेजा गया.

पुलिस टीम ने हार नहीं मानी और रीना के मोबाइल की लोकेशन ट्रेस कर उज्जैन पहुंच गई और एक होटल से रीना, अरुण और हरनाम को खोज निकाला.

पहले तो वे पुलिस को गुमराह करते रहे, मगर पुलिस की सख्ती के आगे उन्होंने घुटने टेक दिए. पुलिस टीम के सामने रीना ने कबूला कि वीरू जाट की हत्या कर उन्होंने ही लाश को बोरे में भर कर रायसेन जिले में सिरवारा ब्रिज के नीचे खाई में फेंका था.

रीना पटेल करीब 13 साल तक पति के साथ रही और उन का एक बेटा भी हुआ, मगर अरुण से संपर्क खत्म नहीं हुआ. कुछ ही साल बाद वह पति को छोड़ कर साईंखेड़ा में किराए के मकान में रहने लगी.

एक सामान्य खेतीकिसानी करने वाले परिवार के अरुण ने तब तक आर्थिक रूप से अपने आप को मजबूत कर लिया था.

अरुण भोपाल की जीएस फाइनेंस कंपनी का डायरेक्टर था. अरुण ने रीना के लिए करीब 50 लाख रुपए का मकान साईंखेड़ा में बनवाया और उस के नाम करीब एक करोड़ रुपए की फिक्स डिपौजिट भी बैंक में कराई. आधा किलो वजन के सोने की ज्वैलरी भी अरुण ने रीना को दिलाई थी.

इतना ही नहीं, रीना को उस ने 20 लाख रुपए की एक महंगी एसयूवी कार, एक लाख रुपए का आईफोन भी दिलाया था. लग्जरी लाइफ रीना की पहचान बन गई थी और इन्हीं ज्वैलरी, आइफोन और कार के साथ वह रील बनाती थी

मोबाइल फोन ने पढ़ेलिखे नौजवानों की जिंदगी को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिस के चलते वे रियल लाइफ के बजाय रील लाइफ को ही सच मानने लगे हैं. रीना और वीरू की नजदीकियां भी इसी रील लाइफ के कारण बढ़ीं, मगर अंत भी दुखद रहा.

अपने पहले प्रेमी के साथ मिल कर दूसरे प्रेमी की हत्या कराने की आरोपी रीना पटेल की कहानी किसी फिल्मी क्राइम थ्रिलर से कम नहीं है.

रीना के होश संभालने से पहले ही बचपन में पेरेंट्स का साथ छूट गया तो उस की मौसी ने उस का लालनपालन किया. कच्ची उम्र में वहीं मौसी के बेटे अरुण से प्यार हो गया और बाद में यही रिश्ता एक जघन्य अपराध की वजह बन गया.

रायसेन के एसपी आशुतोष गुप्त ने 10 मई, 2026 को प्रैस कौन्फ्रैंस कर घटना का खुलासा किया और एएसपी कमलेश कुमार खरपूसे एवं एसडीओपी (बाड़ी) नीलम चौधरी के मार्गदर्शन में एसएचओ (बाड़ी) इंसपेक्टर राजेश तिवारी, एसआई संजय यादव, विनीता विश्वकर्मा, एएसआई मोहन यादव, सुरेंद्र सिसोदिया, हैडकांसटेबल जितेंद्र राजपूत, प्रेम सिंह दांगी, रीना पूर्वी, राजेंद्र यादव, कांस्टेबल रमाकांत पटेल, रामूसिंह, देवेंद्र की सराहनीय भूमिका के लिए इनाम देने की घोषणा की.

आरोपियों की गिरफ्तारी के समय रीना का बेटा एकांश भी उस के साथ था, जिसे बाद में उस के बड़े पापा (ताऊ) की कस्टडी में सौंपा गया. चारों आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया.

—कथा में एकांश और जीशान परिवर्तित नाम हैं.

और कहानियां पढ़ने के लिए क्लिक करें...