Kanpur Crime Case. साढ़ू का भाई होने के नाते धरमपाल सिंह प्रकाश का बड़ा मानसम्मान करते थे. घर आनेजाने में जब प्रकाश को लगा कि धरमपाल के पास बहुत पैसा है तो उस ने उन से पैसा वसूलने के लिए उन के एकलौते बेटे का अपहरण  कर हत्या कर दी. लेकिन जिस पैसे के लिए उस ने यह सब किया, क्या वह उसे मिला?

कानपुर दक्षिण के मोहल्ला किदवईनगर के वाई-1 ब्लौक में रहने वाली कुसुमलता का 11 साल का बेटा आशुतोष उर्फ आशु श्वेता द्विवेदी के यहां से ट्यूशन पढ़ कर नहीं लौटा तो उन्होंने अपनी बेटी तान्या को उस के बारे में पता करने भेजा. पता चला कि आशुतोष पढ़ने तो गया था, लेकिन पेनपेंसिल भूल जाने की बात कह कर उन के यहां से निकला तो लौट कर नहीं आया.

तान्या ने यह बात मां को बताई तो कुसुमलता घबरा गईं, क्योंकि ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था. आशुतोष इतनी देर कभी घर के बाहर नहीं रहा था. उन्होंने तुरंत पति को फोन कर के घर आने को कहा. उन के पति धरमपाल सिंह पंजाब नेशनल बैंक की चकेरी शाखा में मैनेजर थे. अब तक आशुतोष के गायब होने की खबर पूरे मोहल्ले में फैल चुकी थी, इसलिए उन के घर मोहल्ले वालों की भीड़ लग गई.

धरमपाल सिंह जैसे ही घर पहुंचे, उन के मोबाइल फोन की घंटी बजी. उन्होंने फोन रिसीव किया तो दूसरी ओर से कहा गया, ‘‘मैनेजर साहब, मेरी बात ध्यान से सुनिए. मैं ने तुम्हारे बेटे आशुतोष का अपहरण कर लिया है. अगर अपने बेटे की सहीसलामत वापसी चाहते हैं तो 25 लाख रुपए का इंतजाम कर लीजिए.’’

इतना कह कर फोन काट ही नहीं दिया गया, बल्कि बंद कर दिया गया. आशुतोष के अपहरण की बात सुन कर सभी घबरा गए. कुसुमलता तो जोरजोर से रोने लगी. धरमपाल ने पत्नी को धैर्य बंधा कर 100 नंबर पर फोन कर के घटना की सूचना दी तो थोड़ी ही देर में थाना नौबस्ता के थानाप्रभारी राजीव द्विवेदी, इंसपेक्टर अजय प्रताप सिंह, सीओ (गोविंदनगर) विशाल पांडेय तथा एसपी (दक्षिण) संजय कुमार यादव पुलिस बल के साथ धरमपाल सिंह के घर आ पहुंचे. यह 8 जून, 2016 की शाम की बात है.

पुलिस पूरी रात धरमपाल सिंह, उन के घर वालों तथा आशुतोष को ट्यूशन पढ़ाने वाली श्वेता द्विवेदी से पूछताछ करती रही. पुलिस ने धरमपाल सिंह के घर और श्वेता द्विवेदी के घर के बीच लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी देखी. फुटेज में सिर्फ सफेद रंग की एक एसेंट कार जरूर दिखाई दी, लेकिन अपहर्ताओं के बारे में कोई जानकारी हासिल नहीं हो सकी.

अपहर्ताओं ने रात सवा 7 बजे तथा साढ़े 11 बजे भी फोन कर के धरमपाल को धमकाते हुए फिरौती की रकम मांगी, लेकिन यह नहीं बताया कि रकम कब, कहां और कैसे पहुंचानी है. अगले दिन सुबह सवा 10 बजे अपहर्ताओं ने फोन कर के धरमपाल से कहा कि मीडिया और पुलिस को सूचना दे कर उन्होंने ठीक नहीं किया. अब वह अंजाम भुगतने को तैयार रहें. यह सुन कर धरमपाल रो पड़े.

पुलिस अधिकारियों ने उन्हें धैर्य बंधाते हुए कहा कि वह अपहर्ताओं की धमकी से बिलकुल न डरें. पुलिस उन के बेटे को सहीसलामत वापस लाएगी. इस के बाद धरमपाल की तहरीर पर थाना नौबस्ता में आशुतोष के अपहरण का मुकदमा अज्ञात अपहर्ताओं के खिलाफ दर्ज कर लिया गया.

आशुतोष के अपहरण की खबर अखबारों की सुर्खियां बनीं. एक बैंक अधिकारी के बेटे के अपहरण का मामला था, इसलिए एसएसपी शलभ माथुर ने आशुतोष को सहीसलामत बरामद करने तथा अपहर्ताओं को गिरफ्तार करने के लिए एक हाईटेक पुलिस टीम बनाई, जिस में शहर के 4 एसपी, 6 सीओ और 30 तेजतर्रार दारोगाओं को शामिल किया गया. टीम के सहयोग के लिए एसटीएफ, क्राइम ब्रांच एवं सर्विलांस टीम को भी लगाया गया.

इस पुलिस टीम ने घर वालों, ट्यूशन पढ़ाने वाली श्वेता द्विवेदी से जहां घंटों पूंछतांछ की, वहीं सर्विलांस टीम अपहर्ताओं के उस नंबर के बारे में पता करने लगी, जिस से फिरौती के लिए फोन किए गए थे.

पता चला कि सिम शिवली से फर्जी आईडी पर लिया गया था और पहले दिन फोन फतेहपुर से किया गया था. दूसरे दिन जो फोन किया गया था, उस की लोकेशन किसाननगर के आसपास की थी. पुलिस ने मेहनत तो बहुत की, लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला.  अपहर्ताओं ने फर्जी आईडी से सिम और मोबाइल खरीदे थे, इसलिए पुलिस ने अकबरपुर कस्बा स्थित प्री ऐक्टिवेटेड सिम के डिस्ट्रीब्यूटर सर्वेश कम्युनिकेशन के मालिक सर्वेश उर्फ अनुज को थाने ला कर ऐसे रिटेलरों के बारे में जानकारी ली, जिन्हें उस ने प्री ऐक्टिवेटेड सिम दिए थे.

इस के बाद पुलिस ने उन सभी रिटेलरों को थाने ला कर पूछताछ की तो उन में से एक रिटेलर बंटी उर्फ रोहित सिंह, जिस की अकबरपुर में माती रोड पर संजयनगर में बंटी टेलीकौम के नाम से दुकान थी, उस ने पुलिस को कुछ लोगों के नाम बताए, जिन्हें उस ने प्री ऐक्टिवेटेड सिम दिए थे.

उन में से एक प्रकाश भी था, जो धरमपाल के साढ़ू का भाई था और अकबरपुर कोतवाली के पास एक दारोगा के मकान में किराए पर अपनी पत्नी रौनक के साथ रहता था. पुलिस ने उस से भी पूछताछ की. लेकिन कोई सुराग न मिलने की वजह से उसे छोड़ दिया.

इस की एक वजह यह भी थी कि घर वालों ने उस पर शक जाहिर नहीं किया था. इसी तरह 5 दिन बीत गए, पुलिस कुछ नहीं कर सकी. इस बीच अपहर्ताओं ने फोन करने बंद कर दिए, जिस से उन तक पहुंचना और कठिन हो गया. लेकिन शलभ माथुर रातदिन एक किए हुए थे.

धरमपाल सिंह, उन की पत्नी कुसुमलता और बेटियों का रोरो कर बुरा हाल था. अब उन का पुलिस से विश्वास उठने लगा था. दिन बीतने के साथ कुसुमलता की मानसिक हालत बिगड़ती जा रही थी. अब तक मिली असफलता से पुलिस को लगा कि धरमपाल का कोई करीबी अपहरण में शामिल है, जो हमदर्दी जता कर धरमपाल के घर से पलपल की जानकारी ले रहा है.

जब पुलिस ने इस बारे में धरमपाल तथा उन के घर वालों से पूछताछ की तो पता चला कि कुसुमलता की बहन सुमनलता का देवर प्रकाश और उस की पत्नी रौनक रोज हमदर्दी जताते हुए कभी सुमनलता से तो कभी धरमपाल की बेटियों से पुलिस काररवाई के बारे में पता करते थे.

दरअसल, कुसुमलता का बहनोई सिद्धार्थ, जो बीएसएफ में था, आशुतोष के अपहरण की खबर पा कर 3 दिन पहले कानपुर आ गया था. वह पत्नी सुमनलता के साथ धरमपाल के घर ही ठहरा था. प्रकाश और रौनक भाभी सुमनलता को फोन कर के हमदर्दी जताते हुए घर की गतिविधियों तथा पुलिस काररवाई के बारे में पता कर लेते थे.

प्रकाश और रौनक पर पुलिस को शक हुआ तो पुलिस ऐक्शन में आ गई. 17 जून, 2016 की सुबह साढ़े 3 बजे पुलिस टीम ने थाना अकबरपुर कोतवाली पुलिस तथा एसपी (देहात) पुष्पांजलि की मदद से प्रकाश के घर छापा मारा. पुलिस फोर्स देख कर प्रकाश कांप उठा और डर की वजह से उस ने दरवाजा नहीं खोला. पुलिस दरवाजा तोड़ कर प्रकाश और उस की पत्नी रौनक को गिरफ्तार कर अकबरपुर कोतवाली ले आई.

अकबरपुर कोतवाली में जब पुलिस ने प्रकाश और रौनक से पूछताछ की तो डर की वजह से प्रकाश ने पैसों के लिए आशुतोष का अपहरण करने और उस के द्वारा पहचान लिए जाने पर उस की हत्या करने का अपना अपराध स्वीकार कर लिया. उस ने बताया कि अपहरण और हत्या के इस मामले में उस की पत्नी रौनक, गौरैयापुर निवासी उस की महिला मित्र संध्या की मां सुनीता, दोस्त शेरा, विशाल और अतीक शामिल थे. गौरैयापुर के प्रधान रामबाबू को भी इस अपहरण की जानकारी थी और उस ने मदद भी की थी.

आशुतोष की हत्या हो जाने की बात सुन कर पुलिस सकते में आ गई. इस के बाद पुलिस टीम ने प्रकाश की निशानदेही पर शेरा और विशाल को अकबरपुर की पुलिस लाइन के एक क्वार्टर से तथा सुनीता को गौरैयापुर स्थित उस के घर से गिरफ्तार कर लिया. जबकि अतीक और ग्रामप्रधान रामबाबू घर से फरार हो गए थे, इसलिए पकड़े नहीं जा सके.

पूछताछ में प्रकाश, शेरा और विशाल ने बताया कि उन लोगों ने 10 जून को ही आशुतोष की गला घोंट कर हत्या कर दी थी और शव को बलाई के जंगल के पास एक पुलिया के नीचे फेंक दिया था. उन की पोल न खुल जाए, इसलिए रात में उस पर पैट्रोल डाल कर जला दिया था, जो जलने से बच गया था, उसे समेट कर सेंगुर नदी में फेंक दिया था.

पुलिस अभियुक्तों को ले कर 20 किलोमीटर दूर बलाई के जंगल के पास स्थित पुलिया पर पहुंची तो वहां जलाए जाने के निशान मिले. वहां एक लीटर की प्लास्टिक की बोतल भी मिली, जिस में पैट्रोल लाया गया था. फौरेंसिक टीम ने जलाए जाने के स्थान से मिट्टी का नमूना सुरक्षित कर लिया.

इस के बाद पुलिस ने अपहरण व हत्या में प्रयुक्त प्रकाश की एसेंट कार तथा मोटरसाइकिल बरामद कर ली. उस के घर से टूटा हुआ वह मोबाइल फोन और सिम भी बरामद कर लिए गए, जिन का उपयोग फिरौती मांगने के लिए किया गया था.

इस के बाद पुलिस अभियुक्तों को थाना नौबस्ता ले आई. चूंकि अभियुक्तों ने अपराध स्वीकार कर लिया था, इसलिए पुलिस ने प्रकाश, शेरा, विशाल, अतीक, रामबाबू, रौनक तथा सुनीता के खिलाफ आशुतोष के अपहरण एवं हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया. प्रकाश द्वारा बेटे के अपहरण और हत्या की जानकारी मिलने पर धरमपाल सिर पकड़ कर बैठ गए. जब उन्होंने पत्नी से कहा कि अब वह उन के आशु को वापस नहीं ला सकते तो यह सुन कर कुसुमलता बेहोश हो कर गिर पड़ी. इस के बाद तो घर में कोहराम मच गया.

पासपड़ोस के लोग भी आ गए. चीखपुकार सुन कर सब समझ गए कि आशुतोष की हत्या हो चुकी है. वहां आए सभी लोगों की आंखें नम हो गईं. पुलिस जांच एवं अभियुक्तों के बयानों के आधार पर आशुतोष के अपहरण और हत्या की जो कहानी सामने आई, वह इस प्रकार थी—

कानपुर (दक्षिण) में थाना नौबस्ता का एक मोहल्ला है किदवाईनगर. इसी मोहल्ले के वाई-1 ब्लौक में धरमपाल सिंह अपने परिवार के साथ रहते थे. उन के परिवार में पत्नी कुसुमलता के अलावा 3 बेटियां और एकलौता बेटा आशुतोष उर्फ आशु था. धरमपाल सिंह पंजाब नेशनल बैंक की चकेरी शाखा में मैनेजर थे. उन की आर्थिक स्थिति काफी ठीकठाक थी.

आशुतोष 3 बेटियों के बाद पैदा हुआ था, इसलिए वह घर भर का दुलारा था. धरमपाल सिंह खुद पढ़ेलिखे थे, इसलिए वह बेटे आशुतोष को भी पढ़ालिखा कर किसी काबिल बनाना चाहते थे.

यही वजह थी कि उन्होंने आशुतोष का एडमीशन क्षेत्र के चर्चित सुभाष पब्लिक स्कूल में कराया था. इस साल वह छठवीं में पढ़ रहा था. पड़ोस में रहने वाली श्वेता द्विवेदी के घर वह ट्यूशन भी पढ़ने जाता था.

कुसुमलता की छोटी बहन सुमनलता की शादी कानपुर देहात के कस्बा अकबरपुर के रहने वाले धनीराम के बेटे सिद्धार्थ के साथ हुई थी. सिद्धार्थ बीएसएफ में नौकरी करते थे. धनीराम कानपुर देहात पुलिस लाइन में हैड कांस्टेबल थे. वह रिटायर हुए तो कानपुर के जरौली में मकान बनवा कर रहने लगे.

उन के 5 बेटों में प्रकाश सब से छोटा था. वह उन का बिगड़ैल बेटा था. उस का मन पढ़ाई में कम खुराफात में ज्यादा लगता था. उस ने जैसेतैसे इंटर पास कर के पढ़ाई छोड़ दी. इसी बीच उस की मुलाकात रौनक से हुई.

रौनक कस्बा अकबरपुर के मोहल्ला नयागंज की रहने वाली थी. उन की यह मुलाकात प्यार में बदली तो सन 2013 में घर वालों की मर्जी के बिना दोनों ने प्रेमविवाह कर लिया. इस बात से नाराज हो कर धनीराम ने प्रकाश को घर से निकाल दिया. वह अकबरपुर आ गया और अंबेडकरनगर में रामऔतार संखवार का मकान किराए पर ले कर रौनक के साथ रहने लगा.

दोनों ही महत्वाकांक्षी थे, इसलिए पैसों के लिए वे जुआ और सट्टे का धंधा करने के साथसाथ ब्याज पर भी पैसे देने लगे. कुछ समय बाद प्रकाश पुरानी गाडि़यों के खरीदनेबेचने का भी धंधा करने लगा. उस के पास स्वयं की एसेंट कार और मोटरसाइकिल थी. वह ठाठबाट से रहता था, इसलिए आसपड़ोस के लाग उसे सभ्य और धनाढ्य समझते थे.

रिश्तेदारी होने की वजह से प्रकाश और रौनक बैंक मैनेजर धरमपाल के घर भी आतेजाते थे. चूंकि प्रकाश बहन का देवर था, इसलिए कुसुमलता दोनों का खूब आदरसत्कार करती थी. आतेजाते आशुतोष भी प्रकाश और रौनक से घुलमिल गया था. वह उसे चाचू कहता था.

जनवरी, 2016 में धरमपाल ने प्रकाश से कुछ पैसा जमीन में इनवैस्ट करने को कहा तो उस ने अकबरपुर में उन्हें 6 लाख रुपए में एक प्लौट दिला दिया. इस से प्रकाश को लगा कि धरमपाल के पास बहुत पैसा है. उन से कैसे पैसा वसूला जाए, इस बात पर प्रकाश ने विचार किया तो उस के दिमाग में आया, क्यों न धरमपाल के 11 साल के बेटे आशुतोष का अपहरण कर फिरौती वसूली जाए.

इस के लिए उस ने अपने साथी शेरा, विशाल, अतीक, सुनीता और रौनक से बात की तो सभी साथ देने को तैयार हो गए. शेरा और विशाल पुलिस लाइन स्थित सर्विस क्वार्टर में रहते थे, क्योंकि इन के पिता वहां नौकरी करते थे. हीरागंज निवासी अतीक प्रकाश का बचपन का दोस्त था. वह उस के साथ गाडि़यों की खरीदफरोख्त का काम करता था.

गौरैयापुर निवासी सुनीता को प्रकाश ने 50 हजार रुपए देने का वादा किया था, जिस से वह बच्चे को अपने घर में रखने को राजी हो गई थी. इस के बाद अतीक और प्रकाश ने अपने दोस्त बंटी से 3 सिम और 3 चाइना मौडल हैंडसेट मोबाइल फोन ढाई हजार में खरीदे. सारी तैयारी कर के प्रकाश ने जून के प्रथम सप्ताह में धरमपाल के घर की रेकी शुरू कर दी.

वह पता लगाने लगा कि धरमपाल घर से कब निकलते हैं, कब वापस आते हैं? आशुतोष घर से कब ट्यूशन पढ़ने जाता है. उस समय उस के साथ कौन होता है? रेकी करने के बाद 7 जून को प्रकाश शेरा और अतीक के साथ अपनी एसेंट कार से आया और आशुतोष के ट्यूशन जाने वाले रास्ते पर खड़ा हो गया. लेकिन उस दिन आशुतोष ट्यूशन पढ़ने गया ही नहीं, जिस से उस की योजना फेल हो गई.

8 जून, 2016 की शाम को भी 3 बजे प्रकाश अपने साथी शेरा और विशाल के साथ एसेंट कार से आया और आशुतोष के ट्यूशन पढ़ने जाने वाले रास्ते पर खड़ा हो गया. लगभग साढ़े चार बजे आशुतोष अपनी बहन के साथ आता दिखाई दिया. बहन उसे श्वेता द्विवेदी के घर छोड़ कर चली गई. तान्या के जाने के कुछ देर बाद आशुतोष घर की ओर भागता दिखाई दिया तो प्रकाश और उस के साथियों ने उसे पकड़ कर कार में डाला और भाग निकले.

गाड़ी में बैठते ही आशुतोष ने कार चला रहे प्रकाश को पहचान कर कहा, ‘‘चाचू, हमें कहां ले जा रहे हो?’’

प्रकाश मुंह पर अंगौछा बांधे था, इस के बावजूद आशुतोष के पहचान लेने पर प्रकाश, शेरा और विशाल सन्न रह गए. उसी समय उन्होंने उसे मौत के घाट उतारने का निश्चय कर लिया. अकबरपुर पहुंचने के पहले ही शेरा और विशाल ने 3 बार धरमपाल को फिरौती के लिए फोन किया. अगले दिन अतीक ने मुंबइया स्टाइल में धरमपाल को फोन कर के धमकाया.

प्रकाश ने रात को आशुतोष को अपने घर रखा. आशुतोष ने उस से पूछा कि वह उसे वहां क्यों लाया है तो प्रकाश ने कहा, ‘‘तुम्हारे पापा से कुछ पैसे लेने हैं. वह पैसे ले कर आएंगे तो तुम्हें ले जाएंगे.’’

प्रकाश की इस बात से आशुतोष संतुष्ट हो गया. रौनक ने उसे खाना दिया, लेकिन उस ने खाना नहीं खाया, केवल बिस्कुट और चिप्स खाए. 9 जून को प्रकाश ने आशुतोष को अपने साथियों की मदद से अपनी महिला मित्र संध्या की मां सुनीता के घर गौरैयापुर पहुंचा दिया. उस ने सुनीता से कहा था कि वह आशुतोष को परेशान नहीं करेगी.

ग्रामप्रधान रामबाबू को बच्चे के संबंध में जानकारी हुई तो उस ने विरोध किया. लेकिन अपहर्ताओं ने उसे लालच दे कर जुबान बंद रखने के लिए राजी कर लिया. पुलिस की तेजी देख कर प्रकाश और उस के साथियों को पकड़े जाने का डर सताने लगा तो उन्होंने मासूम आशुतोष की हत्या करने का निश्चय कर लिया.

10 जून की दोपहर प्रकाश, शेरा, विशाल और अतीक गौरैयापुर पहुंचे और आशुतोष को अपनी एसेंट कार में बैठा कर अकबरपुर की ओर चल पड़े. कार में बैठते ही आशुतोष रोने लगा तो प्रकाश ने उसे थप्पड़ मार दिया. इस पर उस ने कहा, ‘‘मुझ क्यों रहे हो चाचू? आप जितना पैसा कहेंगे, मैं पापा से दिलवा दूंगा.’’

इस पर भी प्रकाश का दिल नहीं पसीजा और उसी समय चलती कार में विशाल ने आशुतोष के गले में दुपट्टा डाल कर कस दिया तो उस की मौत हो गई.

इस के बाद लाश ले जा कर बलाई के जंगल की पुलिया के नीचे फेंक दिया. लाश को नष्ट करने के लिए रात में पैट्रोल डाल कर जला दिया और राख ले जा कर सेंगुर नदी में फेंक दिया. प्रकाश ने सिम और मोबाइल तोड़ कर अपने घर में छिपा दिए.

जहां लाश जलाई गई थी, वहां से कुछ दूरी पर पुलिस को एक खोपड़ी मिली है. पुलिस को लगा कि यह खोपड़ी आशुतोष की हो सकती है. लेकिन एक्सरे रिपोर्ट में खोपड़ी किसी 30 साल के आदमी की निकली. पुलिस खोपड़ी का डीएनए टेस्ट कराना चाहती है. अगर डीएनए टेस्ट धरमपाल से मिल गया तो अभियुक्तों को सजा दिलाने में पुलिस को मदद मिलेगी.

पूछताछ एवं सारे साक्ष्य जुटा कर 18 जून को थाना नौबस्ता पुलिस ने अभियुक्तों प्रकाश, शेरा, विशाल, रौनक और सुनीता को कानपुर की अदालत में पेश किया, जहां से सभी को जिला जेल भेज दिया गया. कथा लिखे जाने तक अभियुक्त अतीक, रामबाबू फरार थे.  Kanpur Crime Case

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

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