Ghaziabad crime. हर तरह से सुखी और संपन्न धीरज पत्नी प्रीति को बहुत प्यार करता था. इसीलिए उस ने उस की बेवफाई को भी माफ कर दिया था. इस के बावजूद प्रीति ने खुद को नहीं संभाला और वरुण के प्यार में पड़ कर पति को मरवा कर अपनी गृहस्थी तो बरबाद की ही, बच्चों को भी अनाथ कर दिया.

विश्वास की डोर मजबूत हो तो पतिपत्नी के रिश्तों में प्यार और समर्पण बढ़ जाता है. यह एक ऐसा बंधन है, जिसे कई बार एकदूसरे की गलतियों को नजरअंदाज कर के भी निभाया जाता है. जब 2 दिल रिश्ते की खुशी से लबरेज होते हैं तो इस से गृहस्थी के आंगन में खुशियों के फूल अपनी खुशबू बिखेरते हैं.

धीरज और उस की पत्नी प्रीति का रिश्ता भी कुछ ऐसा ही था. कभी उन के विश्वास की कश्ती लड़खड़ाई तो उन्होंने कोशिश कर के उसे संभाल लिया. समाज की नजर में धीरज और प्रीति भौतिक सुविधाओं के बीच सरल और खुशहाल जिंदगी जी रहे थे. लेकिन कई बार जो दिखता है, वैसा होता नहीं, और जो होता है, वह प्रत्यक्ष दिखाई नहीं देता. किस के मन में क्या चल रहा है, इस बात को कोई नहीं जानता.

एक दिन शाम को धीरज घर आया तो वह शराब तो पिए हुए ही था, काफी परेशान भी था. यह कोई नई बात नहीं थी. प्रीति उस की इस आदत से भी वाकिफ थी और परेशानी से भी. 37 वर्षीय धीरज उत्तर प्रदेश के जिला गाजियाबाद शहर से सटे गांव सदरपुर के रहने वाले जगबीर सिंह का बेटा था. उस ने शहर के पौश एरिया संजयनगर में फ्लैट ले रखा था, जिस में पत्नी और 3 बच्चों के साथ रहता था.

उस के जुड़वां बेटे और एक बेटी थी. गांव और शहर के बीच चूंकि ज्यादा दूरी नहीं थी, इसलिए गांव से उस का प्रतिदिन का नाता था. इस की एक वजह यह भी थी कि उस का गांव से सटा काफी बड़ा फार्महाउस था, जिस में उस ने धीरज एसोसिएट्स के नाम से औफिस बना रखा था. उस औफिस में वह पिता के साथ बैठता था.

इस परिवार की गिनती समृद्ध लोगों में होती थी. कुछ साल पहले इस परिवार की जमीनों को सरकार ने विकास के लिए अधिग्रहीत कर लिया था तो मुआवजे के रूप में करीब 7 करोड़ रुपए मिले थे. धीरज ने इस रकम को जमीन की खरीदफरोख्त में लगा कर प्रौपर्टी का कारोबार शुरू कर दिया था. आवासों के निर्माण में भी उस ने पैसा लगा रखा था. इस के अलावा वह ब्याज पर भी रुपए देता था. यह सारा काम वह फार्महाउस के औफिस में बैठ कर करता था.

चूंकि उस का ब्याज पर रुपए देने का भी काम था, इसलिए उस का तमाम लोगों से लेनदेन था. लेनदेन के इसी काम ने उसे परेशान कर रखा था. लेनदेन की ही वजह से कई लोगों से उस का विवाद चल रहा था. उसी वजह से उस दिन वह परेशान था. प्रीति ने उसे प्यार से समझाते हुए कहा, ‘‘धीरज, इस तरह परेशान होने से काम नहीं चलेगा, परेशानी का हल ढूंढो.’’

‘‘समझ में नहीं आता कि क्या करूं, उलझनें बहुत बढ़ गई हैं.’’

‘‘तुम्हारे पीछे पूरा परिवार है धीरज. मैं बहुत डरती हूं. ईश्वर न करे कभी तुम्हें कुछ हो गया तो हम लोगों का क्या होगा.’’ प्रीति ने चिंता में डूब कर कहा तो धीरज ने उसे आश्वस्त किया, ‘‘ऐसा कुछ नहीं है प्रीति. समय के साथ सब ठीक हो जाएगा.’’

जिन लोगों पर धीरज के रुपए बकाया थे, प्रीति ने उन के नाम पूछे तो उस ने बता दिए. कुछ देर सोचने के बाद प्रीति धीरज का हाथ अपने हाथों में ले कर प्यार से बोली, ‘‘मेरे कहने से तुम एक काम करोगे?’’

‘‘क्या?’’ धीरज ने पूछा.

‘‘मोबाइल पर अपनी एक वीडियो बनाओ, जिस में कहो कि इन लोगों पर आप के रुपए बाकी हैं, जो देने में आनाकानी कर रहे हैं. तुम उन से रुपए मांगते हो तो वे तुम्हें धमकाते हैं. ऐसे अगर तुम्हें कभी कुछ होता है तो वही लोग उस के लिए जिम्मेदार होंगे. यह वीडियो उन लोगों को दिखा भी देना. एक तो इस से वे डर कर रहेंगे, दूसरे तुम्हारे रुपए भी जल्दी लौटा देंगे.’’

प्रीति की यह बात धीरज को काफी हद तक ठीक लगी. इसलिए धीरज इस के लिए तैयार हो गया. प्रीति ने उसे समझा भी दिया कि वीडियो में उसे क्याक्या कहना है. इस के बाद प्रीति ने मोबाइल कैमरा रेडी कर के अलमारी पर टिका दिया तो धीरज ने वीडियो मैसेज तैयार कर लिया. दोनों ने उस मैसेज को ध्यान से देखा और सुना.

मात्र 1 मिनट 13 सैकेंड के इस मैसेज में धीरज ने कहा था, ‘‘मैं धीरज चौधरी अपने पूरे होशोहवास में कह रहा हूं कि 5 लोगों पर मेरे करीब 4 करोड़ रुपए बकाया हैं. वे मुझे मेरे रुपए देना नहीं चाहते. मैं जब भी उन से रुपए मांगने जाता हूं, वे लोग मारने की धमकी देते हैं. ऐसे में अगर वे लोग मुझे मारते हैं तो मैं सरकार से दरख्वास्त करता हूं कि उन लोगों को सख्त से सख्त सजा दी जाए, जिस से मेरे परिवार को इंसाफ मिल सके.’’

वीडियो में 5 लोगों के नाम भी धीरज ने बता दिए थे. उस के ऐसा करने से प्रीति को बहुत खुशी हुई. वह किसी विजेता की तरह हंसते हुए बोली, ‘‘अब तुम्हें फिक्र करने की बिलकुल जरूरत नहीं है. अब वे लोग आराम से रुपए लौटा देंगे.’’

उस वीडियो को प्रीति ने अपने मोबाइल में भी ट्रांसफर कर लिया. यह जून, 2016 के दूसरे सप्ताह की बात थी. इस वीडियो को बनाए अभी कुछ दिन ही बीते थे कि राजबीर चौधरी के परिवार में एक अनहोनी हो गई.

26 जून की रात के तकरीबन 9 बजे का वक्त था. धीरज अपने पिता के साथ हर खतरे से बेखबर औफिस में बैठा टीवी देख रहा था. उसी समय एक मोटरसाइकिल आ कर उस के औफिस से थोड़ी दूरी पर रुकी. उस मोटरसाकिल पर 3 लोग सवार थे. मोटरसाइकिल से उतर कर वे तेजी से चलते हुए धीरज के औफिस के बाहर पहुंचे.

औफिस का दरवाजा एल्युमीनियम का था, जिस के आधे हिस्से में शीशा लगा था. दरवाजे पर पहुंच कर तीनों ने पिस्टल निकाली और दरवाजे को धक्का दे कर तोड़ दिया. उस का शीशा चकनाचूर हो कर बिखर गया. कोई कुछ समझ पाता, उस से पहले ही उन्होंने धीरज को टारगेट कर के ताबड़तोड़ गोलियां चलानी शुरू कर दीं.

अचानक हुए इस हमले से धीरज और उस के पिता के होश उड़ गए. दोनों हमलावरों को धक्का दे कर शोर मचाते हुए वह बाहर की ओर भागे. लेकिन अब तक उन्हें कई गोलियां लग चुकी थीं. हमलावरों ने पीछे से भी गोलियां चलाईं. दोनों भाग नहीं सके और घायल हो कर जमीन पर गिर पड़े. वारदात को अंजाम दे कर हमलावर जिस मोटरसाइकिल से आए थे, उसी से भाग गए.

गोलियों की आवाज और शोरशराबा सुन कर वहां मौजूद धीरज के चाचा सुंदरपाल और कुछ अन्य लोग दौड़ कर आ गए. बापबेटे को खून से लथपथ देख कर सभी के पैरों तले से जमीन खिसक गई. आननफानन में गाड़ी में डाल कर उन्हें सर्वोदय अस्पताल ले जाया गया. लेकिन अस्पताल पहुंचने के पहले ही धीरज की सांसों की डोर टूट चुकी थी. उसे 6 गोलियां लगी थीं. 65 वर्षीय जगबीर के पैर में 3 गोलियां लगी थीं, उन का उपचार शुरू कर दिया गया.

इस घटना से धीरज के घर में कोहराम मच गया. इस सनसनीखेज घटना की सूचना पुलिस को मिली तो स्थानीय थाना कविनगर के थानाप्रभारी अशोक सिसौदिया पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए. सूचना पा कर एसएसपी बी.एस. इमेनुएल, एसपी (सिटी) सलमान ताज और सीओ मनीष मिश्रा भी घटनास्थल पर पहुंच गए.

औफिस में सीसीटीवी कैमरे लगे थे. पुलिस ने उन की रिकौर्डिंग हार्डडिस्क को अपने कब्जे में ले लिया. इस के बाद पुलिस अस्पताल पहुंची. माहौल काफी गमगीन था, इसलिए पुलिस औपचारिक पूछताछ ही कर सकी. धीरज की पत्नी प्रीति का रोरो कर बुरा हाल था. हत्या को ले कर लोगों में नाराजगी भी थी. पुलिस ने घर वालों को सांत्वना दी. औपचारिक पूछताछ में प्रीति ने रोते हुए कहा था, ‘‘सर, मुझे पता है कि धीरज को किन लोगों ने मारा है. उन्हें पहले ही शक था, इसलिए उन्होंने एक वीडियो बना रखी थी.’’

इस के बाद प्रीति ने धीरज द्वारा रिकौर्ड किया गया एक वीडियो पुलिस के हवाले करते हुए हाथ जोड़ कर गिड़गिड़ाते हुए कहा, ‘‘सर, मेरा सुहाग उजाड़ने वाले जालिम किसी भी तरह बचने नहीं चाहिए.’’

वीडियो से एक बात साफ हो गई कि धीरज को अपनी हत्या का शक पहले से ही था. यह अहम सबूत था. पुलिस ने धीरज के चाचा सुंदरपाल की ओर से उन लोगों के खिलाफ हत्या और हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज कर लिया, जिन के नाम धीरज ने कुछ दिनों पहले बनाई गई वीडियो फिल्म में लिए थे.

हत्यारों को पकड़ने के लिए पुलिस टीम का गठन कर दिया गया. क्राइम ब्रांच की टीम को भी मदद के लिए लगा दिया गया. पुलिस ने सीसीटीवी रिकौर्डिंग भी देखी, लेकिन अंधेरा होने के चलते उस में कुछ स्पष्ट दिखाई नहीं दे रहा था. उस से कोई मदद नहीं मिल सकी. पुलिस ने नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास शुरू कर दिए.

अगले दिन पुलिस ने 2 आरोपियों को हिरासत में ले लिया. पुलिस ने उन से पूछताछ शुरू की तो वे वारदात से मुकर गए. धीरज के उन के ऊपर रुपए बकाया थे, यह बात बिलकुल सही थी, लेकिन हत्या में उन्होंने अपना हाथ होने से साफ मना कर दिया. पुलिस ने सबूतों और गवाहों के आधार पर उन की घटना के समय की गतिविधियों की जांच की तो पता चला कि वे सच बोल रहे थे.

हालांकि धीरज ने काफी अहम सबूत छोड़ा था, पर हकीकत में वैसा नहीं था. पुलिस अधिकारी सोच में पड़ गए. उन्होंने सच्चाई का पता लगाने के लिए कई लोगों से पूछताछ की तो पता चला कि धीरज हत्या के प्रयास और एक अन्य मामले में जेल जा चुका था. पुलिस को लगा कि कहीं किसी ऐसी ही रंजिश की वजह से तो उस की हत्या नहीं की गई. पुलिस ने जांच की दिशा मोड़ दी. पुलिस ने धीरज और प्रीति के मोबाइल नंबरों की काल डिटेल्स निकाल कर जांच की तो जो जानकारी मिली, वह थोड़ा हैरान करने वाली थी.

दरअसल घटना से थोड़ी देर पहले प्रीति ने अपने पति धीरज को फोन किया था. उस के बाद उस ने एक अन्य नंबर पर फोन किया था. पुलिस ने उस नंबर के बारे में पता किया तो वह किसी वरुण नाम के व्यक्ति का था. इस में हैरान करने की बात यह थी कि वरुण के मोबाइल की लोकेशन वारदात के समय की घटनास्थल की ही मिली थी.

पुलिस ने वरुण के बारे में पता किया तो जानकारी मिली कि वह धीरज के मामा का बेटा है और पहले वह उस का काम संभालता था. लेकिन कुछ महीने पहले धीरज ने उसे हटा दिया था. पुलिस शक के आधार पर ही काम करती है. पुलिस ने वरुण और प्रीति की काल डिटेल्स का गहराई से अध्ययन किया तो पता चला कि दोनों के बीच रोजाना कईकई बार लंबीलंबी बातें हुआ करती थीं. इस से प्रीति और वरुण शक के दायरे में आ गए. मामला प्रेमप्रसंग का लगा.

पुलिस ने शक के आधार पर 29 जून, 2016 को वरुण और प्रीति को हिरासत में ले कर पूछताछ शुरू की. शुरू में उन का कहना था कि इस हत्या से उन का कोई वास्ता नहीं है, लेकिन पुलिस ने जब काल डिटेल्स और वरुण के फोन की लोकेशन सामने रख कर पूछताछ की तो दोनों ने ही हारे जुआरी की तरह हथियार डाल दिए.

इस के बाद उन्होंने जो बताया, उस से हत्याकांड से तो परदा उठा ही, साथ ही एक खुफिया रिश्ते और साजिश से भी परदा उठ गया. धीरज की हत्या में प्रीति की प्रमुख भूमिका थी. हत्या की वजह और उस की शातिराना अंदाज में तैयार की गई योजना जान कर पुलिस भी हैरान रह गई. हत्याकांड की पृष्ठभूमि में बेवफाई, नफरत और बेलगाम हसरतों में उलझी हैरान करने वाली कहानी निकल कर सामने आई.

धीरज की जिंदगी में किसी चीज की कमी नहीं थी. उस का परिवार खुशहाल था. उस के पास दौलत थी. उस का प्रौपर्टी और ब्याज का कारोबार था. धीरज के सगे मामा का बेटा था वरुण, जो जिला अलीगढ़ के थाना टप्पल के गांव मोर का रहने वाला था.

वरुण बेरोजगार था और अकसर धीरज से कोई नौकरी दिलाने को कहता था. धीरज ने सोचा कि अगर वह उस के काम को संभाल ले तो उसे रोजगार मिल ही जाएगा और उसे भी एक भरोसेमंद आदमी मिल जाएगा. उस के बहुत से काम ऐसे थे, जिस के लिए गैरों पर भरोसा नहीं किया जा सकता था. उस ने वरुण को बुला कर अपने पास रख लिया.

धीरेधीरे वरुण धीरज के कामों में हाथ बंटाने लगा. उस के आने से धीरज को काफी आराम हो गया. चूंकि उस से धीरज का सगा रिश्ता था, इसलिए वह धीरज के परिवार के साथ उसी के घर पर रहता था. धीरज काम के सिलसिले से अकसर बाहर जाता रहता था.

प्रीति खूबसूरत भी थी और जवान भी. घर में साथ रहने से उस की वरुण से नजदीकियां बढ़ती गईं. एक तो दोनों का रिश्ता ऐसा था, दूसरे वरुण जवान और स्मार्ट था. दोनों के दिल मिले तो एक दिन ऐसा भी आया, जब वे रिश्तों की मर्यादा भूल गए.

सामाजिक और नैतिक, दोनों ही दृष्टि से उन की राह गलत थी, लेकिन उन का यह रिश्ता चोरीछिपे चलता रहा. इस की भनक किसी को नहीं लग सकी. वरुण को बहन की शादी में रुपयों की जरूरत पड़ी. उस ने यह बात धीरज से कही तो उस ने वादा किया कि वह 6 लाख रुपए उसे दे देगा.

धीरज ने वादा जरूर कर लिया, लेकिन उस ने रुपए दिए नहीं. इस से वरुण को धीरज से नफरत हो गई. लेकिन उस ने अपनी इस नफरत को कभी उस पर जाहिर नहीं होने दिया. सन 2015 में हत्या के प्रयास और एक अन्य मामले में धीरज फिरोजाबाद और बुलंदशहर जिलों की जेल चला गया. उस के जेल जाने के दौरान वरुण एवं प्रीति और आजाद हो गए. वरुण धीरज के साथ उसी के फ्लैट में रहता था. इस के बावजूद दोनों का यह रिश्ता छिप नहीं सका. घर वालों को उन पर शक हो गया. धीरज 19 फरवरी को जमानत पर जेल से बाहर आया. जब उसे इस बात का पता चला तो उसे दोनों पर काफी गुस्सा आया.

उस ने प्रीति को जम कर फटकार लगाई और वरुण को लताड़ते हुए कहा, ‘‘मुझे तुम से ऐसी उम्मीद नहीं थी वरुण. तुम ने जिस थाली में खाया, उसी में छेद किया. अब मैं तुम्हें और बरदाश्त नहीं कर सकता. यहीं से मुझ से हमेशा के लिए अपना रिश्ता खत्म समझो.’’

इस के बाद धीरज ने वरुण को अपने पास से हटा दिया. उस ने गलती मान कर माफी मांगने की कोशिश की, लेकिन धीरज ने उस की एक नहीं सुनी. धीरज ने घर से निकाल दिया तो वरुण अलग किराए पर कमरा ले कर रहने लगा. दूसरी ओर प्रीति ने अपने किए पर गलती तो मान ली थी, लेकिन उस के दिल में वरुण बना रहा.

शक को ले कर घर में कलह होने लगती है तो वह जल्दी से शांत नहीं होती. धीरज और प्रीति के बीच तनाव बना रहने लगा. एक दिन नाराज हो कर वह मायके चली गई. वह पति से वादा तो करती रही कि उस का वरुण से अब कोई संबंध नहीं है, लेकिन मोबाइल फोन से अकसर उस की बातें होती रहती थीं.

पतिपत्नी में विवाद बढ़ा तो मामला थाने तक पहुंच गया. पुलिस ने काउंसलिंग कर के मामला सुलझाया. आखिर प्रीति आ कर धीरज के साथ रहने लगी. घर की सुखशांति के लिए प्रीति को गलती से तौबा कर के खुद को सुधार लेना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ.

वरुण और प्रीति एकदूसरे को न सिर्फ चाहते थे, बल्कि साथसाथ रहना चाहते थे. यही वजह थी कि दोनों न सिर्फ फोन पर बातें करते थे, बल्कि मौका मिलने पर रिश्तों की मर्यादा को तारतार करते थे. वरुण का दूर का एक रिश्तेदार था जयदीप सिरोही, जो गाजियाबाद के आर.के.पुरम में रहता था.

जयदीप ने धीरज को 2 प्रतिशत ब्याज की दर पर डेढ़ करोड़ उधार दे रखे थे. धीरज ने इस रुपए को अधिक ब्याज पर अन्य लोगों को उधार दे रखा था. उस का भी धीरज के औफिस और फ्लैट पर पहले से आनाजाना था. धीरज के जेल जाने के दौरान भी जयदीप उस के फ्लैट पर आता रहता था.

उसी बीच उसे वरुण और प्रीति के रिश्तों के बारे में पता चल गया था. वरुण चूंकि उस का रिश्तेदार था, इसलिए वह इस राज को सीने में दफन किए रहा. जयदीप धीरज से अपने रुपए लौटाने के लिए कह रहा था. चूंकि धीरज ने रुपए दूसरे लोगों को दे रखे थे, जो उसे वापस नहीं कर रहे थे, इसलिए वह जयदीप के पैसे लौटा नहीं पा रहा था, जिस की वजह से दोनों के बीच मनमुटाव हो गया था.

एक दिन वरुण और जयदीप बैठे थे तो जयदीप ने चिंता जाहिर करते हुए कहा, ‘‘धीरज को मैं ने रुपए तो दे दिए, लेकिन अब मुझे लगता है कि मुझ से बहुत बड़ी गलती हो गई. कहीं मेरी यह रकम डूब न जाए.’’

‘‘वह आप को धोखा भी दे सकता है, क्योंकि उस ने मेरी बहन की शादी में वादा करने के बावजूद रुपए नहीं दिए थे. वादा कर के मुकर जाना उस की आदत में शुमार है.’’ वरुण ने कहा.

यह कह एक तरह से वरुण ने आग में घी डालने का काम किया था. उस का मकसद प्रीति को हासिल करना था, जबकि जयदीप हर सूरत में अपनी रकम वापस चाहता था. जयदीप पारखी था. उसे पता था कि वरुण और प्रीति को धीरज फूटी आंख नहीं सुहा रहा है. उस ने कहा, ‘‘अगर तुम लोग चाहो तो एक रास्ता निकल सकता है, जिस से तुम और प्रीति न सिर्फ एक हो जाओगे, बल्कि उस की प्रौपर्टी भी तुम्हारी हो जाएगी.’’

वरुण खुद भी ऐसा ही चाहता था. इसलिए उस ने कहा, ‘‘लेकिन यह सब इतना आसान नहीं है.’’

‘‘आसान हम कर देंगे, लेकिन तुम्हें प्रौपर्टी का आधा हिस्सा मुझे देना होगा, ताकि मेरे उधार दिए रुपयों की भरपाई हो जाए.’’

वरुण ने हामी भर ली.

एक दिन उस ने यह बात प्रीति को बताई तो वह खुशीखुशी अपना सुहाग उजाड़ने को तैयार हो गई. इस के बाद तीनों ने बैठ कर योजना बनाई. हत्या का शक प्रीति और वरुण पर न जाए, इस का रास्ता भी खोजना जरूरी था. प्रीति और वरुण आपराधिक सीरियल देखने के शौकीन थे. उन्होंने एक अनोखा आइडिया वहीं से चुरा लिया. प्रीति को पता था कि रुपयों को ले कर धीरज का कुछ लोगों से विवाद चल रहा है. उस ने बड़े प्यार से पति से उन्हीं लोगों के खिलाफ बतौर सबूत वीडियो तैयार करा लिया. प्रीति के प्यार और शराब के नशे में वह समझ नहीं पाया कि इस के पीछे उस की कोई साजिश हो सकती है. धीरज को क्या पता था कि यही वीडियो उस की मौत का सबब बनने वाला है.

हत्या की फूलप्रूफ योजना बना कर जयदीप और वरुण ने शूटर मोनू को रुपयों का लालच दे कर अपने साथ मिला लिया. अवैध हथियारों का इंतजाम भी उन्होंने कर लिया. इस के बाद वरुण, जयदीप और मोनू योजना को अंजाम देने की फिराक में रहने लगे. 26 जून की रात प्रीति ने धीरज को फोन कर के पूछा, ‘‘कहां हैं आप, अभी तक घर नहीं आए?’’

‘‘मैं पापा के साथ औफिस में बैठा हूं, करीब एक घंटे बाद आऊंगा.’’ धीरज ने खुद के औफिस में होने की जानकारी दी तो प्रीति ने वरुण को फोन कर के कहा, ‘‘अभी वह औफिस में बैठा है. चाहो तो तुम लोग अपना काम कर सकते हो.’’

इशारा मिलते ही जयदीप, वरुण और मोनू मोटरसाइकिल पर सवार हो कर फार्महाउस पहुंच गए और गोलियां चला कर वापस आ गए. उन के निशाने पर धीरज था, न कि उस के पिता. लेकिन भगदड़ के दौरान धीरज के पिता को भी पैर में गोलियां लग गईं. हत्या के बाद प्रीति ने दुखी होने का सफल अभिनय किया. योजना के अनुसार उस ने धीरज का वीडियो पुलिस को दे दिया. वीडियो चूंकि सही था, लिहाजा पुलिस शुरुआत में भटक गई. पुलिस शायद निर्दोषों को ही सलाखों के पीछे पहुंचा देती, लेकिन जांच में उन्होंने खुद के निर्दोष होने के पहले सबूत दे दिए, जिस से इन सब की योजना फेल हो गई.

पुलिस ने वरुण की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त 9 एमएम की 2 पिस्टलें, 4 कारतूस और मोटरसाइकिल बरामद कर ली. इस के बाद वरुण और प्रीति को मीडिया के सामने पेश कर के इस सनसनीखेज हत्याकांड का खुलासा किया. उसी दिन दोनों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. जल्दी ही पुलिस ने शूटर मोनू को भी गिरफ्तार कर लिया, लेकिन कथा लिखे जाने तक जयदीप को गिरफ्तार नहीं किया जा सका था. फरार जयदीप की तलाश की जा रही थी.

प्रीति ने समय रहते अगर खुद को संभाल लिया होता तो शायद ऐसी नौबत नहीं आती. उस ने अपनी गृहस्थी तो बरबाद की ही, बच्चों को भी अनाथ कर उन के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए.  Ghaziabad crime

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

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