Kannauj Husband Murder Case: रंजना का सोचना था कि ब्रजेश के न रहने पर वह प्रेमी नमन के साथ मौज से जिंदगी गुजारेगी, लेकिन पति की हत्या करने के बाद उस का यह सपना पूरा नहीं हुआ क्योंकि अब वह प्रेमी के साथ जेल में है.
कन्नौज के थाना गुरुसहायगंज के थानाप्रभारी अशोकधर पांडेय अपने कमरे में बैठे थाने आए लोगों की परेशानियां सुन रहे थे, तभी कस्बा जलालाबाद के मोहल्ला पठकाना के रहने वाले विमलचंद ने उन्हें एक तहरीर दी. तहरीर के अनुसार वह खेतीकिसानी करते थे. उन के 2 बेटे, ब्रजेश और महेश थे, जिन की वे शादी कर चुके थे. बड़ा बेटा ब्रजेश अलग मकान बना कर अपने बीवीबच्चों के साथ रहता था.
सुबह 7 बजे के आसपास विमलचंद को पता चला कि ब्रजेश की हत्या कर दी गई है. उन्होंने उस के घर जा कर देखा तो उस की लाश घर के पीछे खेतों में पड़ी थी. उन्हें शक था कि उन के पड़ोसी ने उस की हत्या कर के लाश वहां ले जा कर फेंक दी है. पड़ोसी ने ब्रजेश की हत्या क्यों की, जब इस बारे में अशोकधर पांडेय ने पूछा तो उन्होंने कहा, ‘‘पड़ोसियों से मेरी जमीन को ले कर रंजिश चल रही है. इसीलिए साजिश रच कर उन्होंने ही मेरे बेटे की हत्या कर लाश खेतों में फेंक दी है.’’
विमलचंद्र की तहरीर पर अशोकधर पांडेय ने उन के 3 पड़ोसियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करा कर मामले की जांच के लिए सहयोगियों के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए, चूंकि मुकदमा शक के आधार पर लिखाया गया था, इसलिए हत्यारों तक पहुंचने और उन के खिलाफ पक्के सबूत जुटाने के लिए उन्होंने फोरैंसिक टीम और डौग स्क्वायड को मौके पर बुला लिया था.
लाश को सुंघा कर कुत्ते को छोड़ा गया तो वह दौड़ कर मृतक ब्रजेश के घर में घुस गया. घर के अंदर उस ने एक जगह को सूंघा और फिर एक बाल्टी के पास जा कर उसे सूंघ कर भौंकने लगा. पुलिस को समझते देर नहीं लगी कि ब्रजेश की हत्या उसी के घर में की गई है.
फोरैंसिक टीम ने उस स्थान की और बाल्टी में भिगोए कपड़ों की जांच की तो उस स्थान पर ही नहीं, बाल्टी में भीग रहे कपड़ों पर भी खून के छींटे मिले. इस से साफ हो गया कि ब्रजेश की हत्या उसी के घर में की गई थी और हत्या में उस की पत्नी रंजना भी शामिल थी.
पुलिस ने घटनास्थल की काररवाई निपटा कर लाश को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भिजवा दिया और हत्या का खुलासा करने के लिए मृतक की पत्नी को ले कर थाने आ गई. थाने में रंजना से पूछताछ की जाने लगी. काफी कोशिशों के बाद भी जब उस ने कुछ नहीं बताया तो पुलिस ने उसे घेरने के लिए मृतक ब्रजेश, रंजना और ब्रजेश के छोटे भाई महेश के मोबाइल नंबरों की काल डिटेल्स निकलवा कर गहराई से समीक्षा की.
रंजना की काल डिटेल्स में एक नंबर ऐसा मिला, जिस पर उस की दिन में कईकई बार लंबीलंबी बातें होती थीं. पुलिस ने उस नंबर की भी जांच की तो पता चला कि वह नंबर ब्रजेश के पड़ोस में रहने वाले नमन दुबे का था. पूछताछ में जानकारी मिली कि नमन दुबे का मृतक के घर काफी आनाजाना था, रंजना को ले कर कई बार ब्रजेश और नमन में कहासुनी भी हुई थी.
इस के बाद पुलिस ने नमन दुबे को ले कर रंजना से पूछताछ शुरू की तो वह ज्यादा देर तक सच को नहीं छिपा सकी और पति की हत्या का अपना अपराध स्वीकार कर के हत्या के पीछे की पूरी कहानी सुना दी, जो इस प्रकार थी.
करीब 9 साल पहले रंजना का विवाह ब्रजेश पाठक से हुआ था. शादी के बाद वह ब्रजेश के 2 बच्चों चिंटू और मिंटू की मां बनी. लेकिन उस के लिए परेशानी यह थी कि ब्रजेश का चालचलन ठीक नहीं था. वह मोहल्ले में गुंडई तो करता ही था, नियमित शराब भी पीता था.
ब्रजेश की अपने पड़ोसी नमन दुबे से खूब पटती थी. दोनों एकदूसरे के लिए जान तक देने की कसमें खाते थे. शायद यही वजह थी कि जब 5 साल पहले ब्रजेश एक हत्याकांड में जेल चला गया तो नमन ने ब्रजेश के बीवीबच्चों की जितनी हो सकती थी मदद तो की ही, उस के मुकदमे की पैरवी भी की. यही वह समय था, जब नमन रंजना के काफी करीब आ गया.
नमन की शादी नहीं हुई थी. शक्लसूरत और कदकाठी से वह ठीकठाक था. इन्हीं वजहों से नमन रंजना को अच्छा लगता था. वह जब भी रंजना के घर आता, रंजना उस का खूब खयाल रखती. उस के हावभाव से जल्दी ही नमन को उस के मन की बात का पता चल गया. इस का नतीजा यह निकला कि दोनों के बीच अवैध संबंध बन गए.
शारीरिक सुख मिलने की वजह से नमन रंजना का दीवाना बन गया. यही नहीं, वह उसे अपनी बनाने के लिए सारे संबंधों और समाज की मर्यादाओं को ताक पर रख कर उस पर पति की तरह अधिकार भी जताने लगा. यह रंजना को अच्छा भी लगता था. इस की वजह यह थी कि नमन ब्रजेश से सुंदर ही नहीं, स्वभाव से भी अच्छा था.
समय तेजी से गुजरता गया. करीब एक साल पहले ब्रजेश जमानत पर छूट कर घर आ गया. नमन से मिलने में कोई परेशानी न हो, रंजना नमन से बच्चों को ट्यूशन पढ़वाने लगी. इस तरह ब्रजेश की अनुपस्थिति में दोनों का मिलनाजुलना होता रहा. इस तरह का काम कितना भी छिपा कर क्यों न किया जाए. एक न एक दिन उजागर हो ही जाता है.
जब ब्रजेश को रंजना और नमन के संबंधों का पता लगा तो उस ने बच्चों का ट्यूशन ही नहीं छुड़वा दिया, बल्कि नमन के घर आनेजाने और रंजना से बातचीत करने पर भी पाबंदी लगा दी. नमन और रंजना का मिलनाजुलना बंद हो गया तो दोनों ही एकदूसरे से मिलने के लिए बेचैन रहने लगे. रंजना से नहीं रहा गया तो पति गैरमौजूदगी में वह नमन को चोरी से बुलाने लगी.
लेकिन यह बात भी ब्रजेश से ज्यादा दिनों तक छिपी नहीं रही. इस बात को ले कर वह अक्सर रंजना की पिटाई करने लगा. रंजना तमाम मारपीट के बावजूद नमन को भुला नहीं पा रही थी. यही वजह थी कि वह पति और घर छोड़ कर नमन के साथ भागने के बारे में सोचने लगी. यह बात उस ने प्रेमी को बताई तो वह रंजना को कस्बे से दूर ले जाने की योजना बनाने लगा.
योजना के तहत वह खटीमा गया और वहां नौकरी कर ली. वह वहां गृहस्थी बनाने लगा कि रंजना के आने पर उसे किसी तरह की परेशानी न हो. लेकिन रंजना से दूर रह कर उस का मन नहीं लग रहा था. वही हाल रंजना का भी था, इसलिए दोनों की मोबाइल फोन पर लंबीलंबी बातें होती रहती थीं.
नमन और रंजना फोन पर ही अपनेअपने मन की पीड़ा व्यक्त करते रहते थे. रंजना उसे भगाने के लिए कहती तो वह उसे आश्वासन देता कि सारी व्यवस्था होते ही वह उसे उस नरक से निकाल लाएगा. नमन रंजना से मिलने के लिए बेचैन रहता था. उसे जब भी छुट्टी मिलती, वह घर आ कर रंजना से मिलने की कोशिश में लगा रहता.
जैसे ही रंजना को मौका मिलता यानी ब्रजेश घर से कहीं बाहर जाता, वह फोन कर के नमन को बुला लेती. इस तरह नमन और रंजना का मिलनाजुलना होता रहा.
9 मई को भी नमन घर आया तो रंजना को फोन करने लगा. लेकिन रंजना फोन उठा ही नहीं रही थी. अगले दिन दोपहर में उस ने फोन उठाया तो नमन ने कहा, ‘‘यार, मैं कल से फोन कर रहा हूं, तुम फोन क्यों नहीं उठा रही हो?’’
‘‘कैसे फोन उठाऊं, ब्रजेश कल से घर से निकला ही नहीं. अभी जैसे ही घर से बाहर गया है, मैं ने फोन उठा लिया.’’ रंजना ने कहा. ‘‘मैं तुम से मिलना चाहता हूं रंजना.’’ नमन ने कहा. ‘‘पागल हो गए हो क्या, वह घर के बाहर ही टहल रहा है.’’ ‘‘लेकिन मेरा मन तुम से मिलने के लिए व्याकुल है.’’ ‘‘चिंता मत करो, जैसे ही वह कहीं जाएगा, मैं तुम्हें फोन कर दूंगी…’’ रंजना ने कहा.
नमन फोन काट कर रंजना के फोन का बेसब्री से इंतजार करने लगा. रात 8 बजे के करीब रंजना ने फोन कर के बताया कि ब्रजेश शराब पीने ठेके पर गया है और दोनों बच्चे छत पर सोने चले गए हैं, वह आ जाए.
नमन तुरंत उस के घर जा पहुंचा. लेकिन दोनों कपडे़ उतार कर बैड पर लेटे ही थे कि ब्रजेश आ गया. उस ने दरवाजा खटखटाया. उसे घर के अंदर अलग सी हलचल महसूस हुई तो उस के कान खडे़ हो गए.
दरवाजा खटखटाने पर भी न खुला और न अंदर से कोई आवाज आई तो उसे संदेह हुआ. वह दरवाजे को पीटते हुए रंजना का नाम ले कर चिल्लाया, ‘‘दरवाजा क्यों नहीं खोल रही, जल्दी से दरवाजा खोल, वरना तोड़ दूंगा.’’
नमन को अंदर के कमरे में छिपा कर रंजना ने दरवाजा खोला और रसोई में जा कर बर्तनों को इधरउधर करते हुए खाना बनाने का नाटक करने लगी.
संदेह के आधार पर टौर्च ले कर ब्रजेश इधरउधर देखने लगा तो अंदर के कमरे में उसे नमन दुबका मिल गया. ब्रजेश उस का कालर पकड़ कर गालियां देते हुए घसीट कर बाहर लाया.
‘‘रंजना ने फोन कर के मुझे बुलाया था, इसलिए डर के कारण मैं कमरे में आ कर छिप गया.’’ नमन ने कहा. ‘‘मेरी गैरमौजूदगी में तू रंजना के साथ गुलछर्रे उड़ाने आया था न?’’ कह कर ब्रजेश नमन की लातघूसों से पिटाई करने लगा.
तभी रंजना ने किचन से बाहर आ कर कहा, ‘‘नमन, इस ने हमें रंगेहाथों पकड़ लिया है, इसलिए इसे खत्म कर दो, वरना यह हमें मार देगा.’’
रंजना का इतना कहना था कि नमन ने ब्रजेश को उठा कर पटक दिया और उस का गला पकड़ कर दबा दिया. ब्रजेश छटपटाने लगा तो रंजना ने उसे पकड़ लिया. कुछ देर छटपटा कर ब्रजेश मर गया.
बृजेश की लाश को ठिकाने लगाने के पहले नमन ने चाकू से उस का पुरुषांग काट कर अंडकोश पर कई लात मारे, जिस से ब्रजेश के शरीर से निकला खून उस के कपड़ों पर तो लग ही गया, वहीं खड़ी रंजना की साड़ी पर भी खून के छींटे पड़ गए. इस के बाद लाश को उठा कर वह घर के पीछे खेतों में फेंक आया.
लाश को ठिकाने लगा कर रात करीब 2 बजे नमन खून से सने कपड़े बैग में ले कर निकल रहा था तो कस्बे के किसी आदमी ने उसे देख लिया. चूंकि वह बैग लिए था, इसलिए उसे लगा कि वह चोर है. वह आदमी चोरचोर चिल्लाया तो वह भागा.
रंजना द्वारा अपराध स्वीकार करने के बाद पुलिस ने नमन को भी गिरफ्तार कर लिया. पूछताछ में नमन ने भी अपना अपराध स्वीकार कर लिया.
पूछताछ के बाद थाना गुरुसहायगंज पुलिस ने दोनों पर ब्रजेश की हत्या का मुकदमा दर्ज कर 12 मई को अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया.
दोनों ही अपने किए की सजा भोग रहे हैं. रंजना ने पति को मरवा कर नमन के साथ मौज करने का जो सपना देखा था, जेल जाने के बाद वह अधूरा ही रह गया. वही हाल नमन का भी हुआ.






