Gold coin scam. वडोदरा का प्रभुभाई सोलंकी हरफनमौला ठग था. वह अमीर लोगों को सस्ते दाम पर सोने के सिक्के देने का लालच दे कर फंसाता था. एक दिन उस ने गुरुग्राम के कारोबारी विवेक से संपर्क किया और उन्हें ढाई करोड़ रुपए से ज्यादा का चूना लगा दिया. पढि़ए, इस कहानी में कि वह और उस के गैंग के लोग कैसे अमीरों को झांसा दे कर ठगी करते थे

गुरुग्राम की सब से पौश कालोनी सुशांत लोक में रहने वाले एक्सपोर्ट कारोबारी विवेक पचगांव चौक के पास पंक्चर होने के कारण अपनी कार की स्टेपनी बदल रहे थे. इसी दौरान देखने में बेहद साधारण और मजदूर तबके का लगने वाला एक आदमी वहां आया.

सहमते हुए वह विवेक के पास आया और हाथ जोड़ कर नमस्ते की, फिर हिचकिचाते हुए कुछ बोलतेबोलते रुक गया.

विवेक ने उस के हावभाव पढ़े तो समझ गए कि वह शायद उन से कुछ मदद चाहता है. सोचा, मजदूर आदमी है, शायद स्टेपनी बदलने में मदद करना चाहता होगा ताकि कुछ पैसा मिल सकें.

अंधे को क्या चाहिए दो आंखें. जरूरत उन्हें भी थी किसी की मदद की, लिहाजा बोले, ”क्या प्यारे पैसा चाहते हो… अगर चाहिए तो आओ, स्टेपनी बदल दो.’’

”नहीं…नहीं साहेब, वो बात नहीं है. हमें पैसे की तो जरूरत है, लेकिन स्टेपनी नहीं बदलना है, हम तो खुद ही जेसीबी चलाते हैं. अभी रेलवे लाइन के पास अपना खुदाई का काम चल रहा है.’’ विवेक समझ गए कि बात वो नहीं है जो वह समझ रहे थे.

”तो फिर क्या बात है, बताओ भाई मुझे स्टेपनी चेंज कर के आगे भी जाना है.’’ विवेक ने पूछा.

”बाबूजी, हम समझ नहीं पा रहे कि आप से कैसे कहें. दरअसल, आप की गाड़ी और आप की पर्सनैल्टी देखी तो आप को अमीर जान कर आप के पास एक बड़े काम की बात करने चला आया.’’

विवेक वैसे तो संपन्न आदमी थे ही, लेकिन अपनी पर्सनैल्टी और देखने से अमीर लगने की तारीफ सुन कर गदगद हो गए.

”अरे भाई, तुम ठीक ही समझे हो, लेकिन तुम अपनी बात बताओ, कौन सी काम की बात करना चाहते हो?’’ विवेक ने पूछा.

”वो साहेब, बात ये है कि किसी को बताना नहीं. आप के बस का हो तो कर लेना नहीं तो किसी से जिक्र नहीं करना.’’

सामने वाले मजदूर दिखने वाले व्यक्ति ने जब फिर से काम की बात करने की बजाय इधरउधर की बात की तो अब विवेक थोड़ा झल्ला गए.

”अरे यार, पहेलियां मत बुझाओ, सीधे काम की बात करो. ठीक है, मेरे काम की बात नहीं हुई तो किसी से जिक्र नहीं करूंगा, अब बोलो, क्या बात है?’’

”वो साहेब, दरअसल बात ये है कि हम रेलवे के पास जो खुदाई कर रहे हैं. उस खुदाई में हमें सोने के सिक्के मिले हैं. और सिक्के बहुत सारे हैं. समझ नहीं आ रहा उन को कहां और किस को बेचूं.

”पहले सोचा किसी सुनार को बेच दूं, लेकिन जब गहराई से सोचा तो इस में खतरा लगा. क्योंकि इन सुनारों की पुलिस से बड़ी सेटिंग होती है, कहीं वो हमें पकड़वा कर हमारा सारा माल न ऐंठ ले. इसीलिए सुनार को माल बेचने का इरादा छोड़ दिया.

”फिर सोचा, किसी बड़े आदमी को 2 पैसे सस्ते में दे देता हूं, खरीदने वाले को भी फायदा हो जाएगा और हमें भी ऐसी रकम मिल जाएगी कि हमारी जिंदगी बदल जाएगी. बाबूजी, अगर आप के पास पैसे की गुंजाइश है तो आप ही सोना खरीद लो. यकीन मानो, मैं बहुत सस्ते में दे दूंगा. आप को तो मालूम है कि आजकल सोने के भाव रोज चढ़ रहे हैं.’’

फेंका अपना जाल

जब उस शख्स ने सोने के सिक्कों की बात बता कर इतना सब कहा तो विवेक साधारण मजदूर से लगने वाले उस शख्स का मुंह ताकते रह गए. अब उन का ध्यान स्टेपनी बदलने की जगह उस की बातों पर आ गया.

अचानक उस इंसान में विवेक की दिलचस्पी बढ़ गई और उन्होंने पूछा, ”यह बताओ, तुम्हारा नाम क्या है?’’

”साब, मेरा नाम रवि है और मैं राजस्थान का रहने वाला हूं. आप चाहे तो मेरा आधार कार्ड भी देख सकते हैं. देखिए साब, किस्मत से मुझे यह खजाना मिला है और किस्मत से ही आप हम से मिल गए. बस, समझिए यह खजाना आप के ही हाथ लगा है.’’ अंजान शख्स, जिस ने अपना नाम रवि बताया था, उत्साह में बोलता चला गया.

”अरे नहीं…नहीं भई, आधार कार्ड दिखाने की कोई जरूरत नहीं है. हां, तुम कुछ कह रहे थे कि तुम को कोई सोने के सिक्के मिले हैं. कितने के होंगे ये सिक्के… मैं कैसे यकीन करूं और यकीन हो भी गया तो मुझे क्या फायदा होगा.’’ अब एक्सपोर्टर विवेक की उत्सुकता और उत्साह दोनों बढ़ गई थी. इसलिए उन्होंने रवि से दोटूक बात करनी शुरू कर दी.

”यह तो आप ने सौ टके की बात की है साहबजी. क्या मैं आप का नाम जान सकता हूं बाबूजी?’’ बात करतेकरते अचानक रवि ने विवेक से उन का नाम पूछा तो उन्होंने अपना नाम बता दिया.

तो रवि ने कहा, ”विवेकजी, आप ऐसा कीजिए, आप हम से एक सोने का सिक्का ले लीजिए. पहले इस को किसी सुनार से टेस्ट करा लीजिए, फिर लेनदेन की बात होगी. जहां तक आप के फायदे की बात है तो आप को मैं सिर्फ 35-40 लाख रुपए किलो ये सोने के सिक्के दे दूंगा. जहां तक मेरे पास सिक्कों की तादाद की बात है तो आप चिंता मत कीजिए साब, मेरे पास किस्मत से बहुत बड़ा खजाना हाथ लगा है.’’

”35-40 लाख कुछ ज्यादा नहीं हो जाएगा?’’ विवेक की आंखों के सामने अचानक बड़ा मुनाफा कमाने का लालच घूमने लगा. इसलिए उन्होंने बात को आगे बढ़ाते हुए रवि से कहा.

”अरे साहब, क्या बात कर रहे हैं? अभी आप बाजार भाव ही देख लीजिए, करीब डेढ़ करोड़ रुपए का एक किलो सोना है और मैं तो 40 लाख में दे रहा हूं यानी एकचौथाई से थोड़ा ही ज्यादा रेट में. वो तो मैं डाइरेक्ट किसी सुनार को बेचने का रिस्क नहीं ले रहा, इसलिए इतने कम दाम में दे रहा हूं.’’ रवि ने बाजार भाव बताते हुए कहा.

रवि की बात सुन कर विवेक कुछ देर शांत रहे. फिर विचार करने के बाद बोले, ”लेकिन अभी तो मुझे पता ही नहीं कि सिक्का असली सोने का है या नहीं? फिर मैं इतनी बड़ी रकम कैसे दे दूं. कम से कम 10 ग्राम सोने का ही 40 हजार तो लगेगा ही.’’

”मैं समझ गया साहब आप की चिंता. अरे साहब हम गरीब जरूर हैं, लेकिन हमें इंसान की पहचान है. आप भले इंसान हैं और हमें आप पर पूरा भरोसा है. आप को कोई पैसा नहीं देना है. आप पहले इस सिक्के को सुनार से चैक करा लीजिए, फिर इस का पैसा दे दीजिए. बस अपना मोबाइल नंबर और एड्रेस दे दीजिए और हमारा भी नंबर ले लीजिए. जब सिक्का चैक करा लें तो हमें फोन कर दीजिए.’’

कहते हुए रवि ने अपने थैले से सोने का एक सिक्का निकाल कर एक्सपोर्टर के हाथ में रख दिया और बोला, ”चलिए साहब, अब हम आप की स्टेपनी बदलवाने में आप की हेल्प कर देते हैं.’’

कहते हुए रवि ने विवेक की स्टेपनी बदलवानी शुरू कर दी और कुछ ही देर में स्टेपनी बदल गई तो रवि बोला, ”लीजिए साहब, हो गया आप का काम. अब हमें कल का इंतजार रहेगा. आप सुनार को सिक्का दे कर चैक करा लीजिए, फिर हमें फोन कर दीजिए. साहब, अगर सोना खरा निकला तो आगे का माल आप खरीदेंगे न? देखिए साहब, हम को थोड़ा जल्दी है, अगर आप नहीं खरीदेंगे तो हम कल के बाद यह माल किसी और को बेच देंगे.’’

”अरे रवि भाई, कैसी बात कर रहे हो…तुम्हें कहीं जाने की जरूरत नहीं, बस कल माल चैक करा लूं उस के बाद फोन करता हूं.’’ कहने के बाद विवेक ने सोने का सिक्का जेब में रखा और गाड़ी में बैठ कर चला गया.

रवि तब तक उस की गाड़ी देखता रहा, जब तक वह आंखों से ओझल नहीं हो गई. उस की आंखों में सुनहरे भविष्य के सपने तैरने लगे.

पहला सिक्का था असली

यह 13 फरवरी, 2026 की बात है, जब गुरुग्राम में यह अजीबोगरीब वाकया हुआ. यह सुखद संयोग था कि अगली सुबह ही एक्सपोर्टर विवेक एक सुनार के पास पहुंचे और उस ने बताया कि सोने का वह सिक्का 23 कैरेट का है.

विवेक की तो बांछें खिल गईं. उन के मन में रवि के लिए जो संदेह था, वह पूरी तरह दूर हो गया. उन्होंने उसी दिन रवि को फोन कर के बता दिया कि उस का दिया गया सोने का सिक्का एकदम खरा है. उन्होंने रवि को मिलने के लिए अपने आवास सुशांत लोक के पास एक पार्क में बुलाया.

रवि अपने 4 अन्य साथियों के साथ वहां पहुंचा और उस ने उन सभी का परिचय विवेक से कराते हुए बताया कि वे सब उस के साथी मजदूर हैं, जो जेसीबी की खुदाई का काम करते हैं. इन में 2 महिलाएं थीं, जिन का परिचय उस ने तेजू राठौर शांतिबेन सोलंकी के रूप में दिया. उन के अलावा 2 अन्य युवकों का परिचय मनीष और ईश्वर भाई के रूप में दिया.

परिचय के बाद विवेक ने पहले रवि को जांच में खरे पाए गए सोने के सिक्के का 40 हजार रुपए तोला के हिसाब से पेमेंट किया. उस के बाद डील यह तय हुई कि इस बार कम से कम 5 सिक्के रवि देगा, जिन की जांच दिल्ली में जा कर कराई जाएगी. साथ में विवेक के अलावा रवि और उस के सभी साथी भी जाएंगे.

रवि ने इस बार विवेक को 5 सोने के सिक्के दिए. उन की जांच कराने के लिए वे सब एक साथ विवेक की गाड़ी में ही बैठ कर दिल्ली के नांगलोई पहुंचे, जहां पंकज शर्मा नाम का ज्वैलर्स था. दिए गए सभी सिक्के चूंकि असली थे, इसलिए ज्वैलर्स ने बताया कि सोने के सिक्के 23 कैरेट शुद्धता के हैं.

इन सिक्कों का भी विवेक ने उसी दिन रवि को पेमेंट कर दिया. अब यह तय हुआ कि रवि के पास जो 10-11 किलो सिक्के थे, उन के बदले विवेक उसे 40 लाख रुपए प्रति किलो के हिसाब से रुपए देगा.

तय हुआ भाव

सब कुछ तय हो गया. सभी अपने रास्ते चले गए और विवेक इतनी बड़ी रकम के इंतजाम में लग गया. लेकिन रवि के पास जितने सोने के सिक्के थे, उस के बदले दी जाने वाली राशि का वह इंतजाम तो नहीं कर पाया. अलबत्ता उस ने उधार ले कर और अपनी मां के जेवर गिरवी रख कर बड़ी राशि का इंतजाम जरूर कर लिया. यह रिस्क उस ने इसलिए ले लिया, क्योंकि उसे पता था कि वह रातोंरात अमीर बनने वाला है.

विवेक ने रवि को उस के मोबाइल पर दोबारा फोन किया और दोनों में बातचीत हुई. विवेक ने रवि को सारा सोना ले कर गुरुग्राम में एक ऐसी जगह बुलाया, जहां वह आसानी से पहुंच सके. वहीं पर एक ज्वैलर था, जहां ज्वैलर्स शोरूम के बाहर उन की मुलाकात हुई. रवि के पास एक थैला था, जिस में करीब 10-12 किलो सोने के सिक्के थे.

सिक्के लेने से पहले विवेक ने फिर से सिक्कों की जांचपरख कराने की शर्त रखी तो रवि बोला, ”साहबजी, आप कितनी बार भी चैक कराओ, कोई खोट नहीं निकलेगा. हमारा माल एकदम खरा है.’’

लिहाजा उस ने थैले में हाथ डाल कर फिर से 5-6 सिक्के विवेक को दे दिए. विवेक ने उन्हें ज्वैलर्स से चैक कराया. ज्वैलरों ने इसे भी 23 कैरेट का बताया. अब शक की कोई गुंजाइश नहीं थी, लेकिन विवेक सिर्फ ढाई करोड़ रुपए का ही इंतजाम कर पाया था.

लिहाजा रवि ने कहा कि इस के बदले वह केवल 6 किलो सोना ही दे सकता है. लिहाजा उस दिन ढाई करोड़ रुपया नकद और 50 तोले के जेवर दे कर बदले में 6 किलो सोने के सिक्के ले लिए. तय हुआ कि अगले 15 दिन में जब वह बाकी पैसों का इंतजाम कर लेगा तो बाकी के सिक्के भी खरीद लेगा.

डील फाइनल हुई और विवेक 6 किलो सोने के सिक्के ले कर अपने घर सुशांत लोक आ गया और रवि भी अपने साथियों के साथ वापस लौट गया. यह 2 मार्च, 2026 की बात है.

इस के बाद विवेक किसी ऐसे जौहरी की तलाश में लग गए, जो इतना सारा सोना बाजार भाव में खरीद ले. हालांकि आज के दौर में सोनेचांदी की खरीद में ऐसा खरीदार मिलना आसान नहीं था. लेकिन कुछ दिन के बाद उसे एक परिचित की मदद से ऐसा ज्वैलर्स मिल गया, जो कम से कम 2 किलो सोना बाजार भाव से 5 हजार रुपए कम पर लेने के लिए तैयार हो गया. लेकिन वह सप्ताह में केवल 2 किलो सोने के सिक्के ही ले सकता था.

अमीर बनने के लिए विवेक ने बहुत बड़ी कुरबानी दी थी. उन्होंने अपना घर गिरवी रख दिया, मां के गहने रवि को दे दिए और ढाई करोड़ नकद का इंतजाम करने के लिए उन्होंने कई रिश्तेदारों और परिचितों से ब्याज पर पैसा ले लिया था, केवल इसीलिए कि उन्हें जो सोने के सिक्के मिलेंगे, उसे बाजार भाव पर बेच कर भारी मुनाफा कमा लेंगे.

ठगी का हुआ आभास

इसीलिए जिस सुनार से उन की सोना बेचने की बात हुई थी, 20 दिन बाद जब उसे 2 किलो सोने के सिक्के दिए तो वह सुनार भड़क उठा और विवेक से बोला, ”भाईसाहब, इतना गंदा मजाक करने के लिए आप को हम ही मिले थे क्या?’’

”क्यों भाईसाहब, क्या हुआ? मैं ने कौन सा मजाक कर दिया?’’

”अरे इसे मजाक नहीं तो और क्या कहेंगे. आप ने पीतल के सिक्कों पर सोने का पानी करवा कर हमें धोखा देने की कोशिश तो कर ही दी.’’ सुनार ने नाराज होते हुए कहा.

”क्या कहा? मैं ने आप को पीतल के सिक्के दे दिए? भाईसाहब, जरा ठीक से चैक कीजिए.’’ विवेक ने आश्चर्यचकित होते हुए कहा.

”विवेकजी, ये हमारा रोज का काम है. हम तो देखते ही बता देते हैं और आप का माल तो हम कई बार चैक कर चुके हैं. सारा माल पीतल का है.’’

सुनार का एकएक शब्द विवेक पर बिजली बन कर गिरा था. उस ने उसी वक्त रवि को फोन लगा कर बात करने की कोशिश की तो पता चला उस का नंबर बंद था.

विवेक को समझ नहीं आ रहा था कि उस के साथ ये ठगी हुई है या सुनार उसे बना रहा है. क्योंकि उस ने 3 बार सोने के सिक्के सुनारों को दिए, वे सही थे तो बाकी का माल पीतल का कैसे हो सकता है.

वह सुनार से अपना माल ले कर घर पर पहुंचा और इस के बाद उस ने अगले 2-3 दिन में 3-4 अन्य ज्वैलर्स से वे सिक्के चैक कराए तो पता चला कि सब पीतल के हैं. ऊपर से रवि का फोन भी बंद आ रहा था. वह समझ गए कि उन के साथ ठगी हो गई है वो भी बहुत बड़ी वाली.

अपने कुछ परिचितों को उन्होंने जब अपने साथ हुए घटनाक्रम से अवगत कराया तो उन्होंने विवेक को तत्काल पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी.

उन्होंने पुलिस से संपर्क करने का प्रयास किया तो आमतौर पर जैसा होता है, वैसा ही विवेक के साथ हुआ. पुलिस ने आनाकानी की और उन से कई तरह के ऐसे सवाल किए, जिस से उन के लिए मुसीबत खड़ी हो सकती थी. लिहाजा उन्होंने अपने एक दोस्त की मार्फत पुलिस कमिश्नर सिबाश कबीराज से मुलाकात कर उन्हें अपनी पीड़ा और साथ हुई ठगी के बारे में बताया.

सिबाश कबीराज अनुभवी पुलिस अधिकारी हैं. वह समझ गए कि उन के साथ किसी टटलू गिरोह ने ठगी की है. लिहाजा उन्होंने पहली अप्रैल को सब से पहले गुरुग्राम के सुशांत लोक थाने में अपराध संख्या 467 पर ठगी की धाराओं में मुकदमा पंजीकृत करवा कर इस मामले को जांच के लिए क्राइम ब्रांच को सौंप दिया.

पुलिस आयुक्त सिबाश कबीराज ने क्राइम ब्रांच के डीसीपी हितेश यादव को बुला कर खासतौर से इस बात की हिदायत दे दी कि इस मामले को हलके में न ले कर गंभीरता से जांच करें और ठगी की इस वारदात में जो लोग शामिल हैं, सिर्फ उन्हें गिरफ्तार ही नहीं करना है बल्कि सारा माल भी बरामद करना है, जिस की ठगी हुई है.

पुलिस की काररवाई

डीसीपी क्राइम ब्रांच हितेश यादव समझ गए कि पुलिस कमिश्नर इस मामले में गंभीर होने के साथ निजी रूप से रुचि भी ले रहे हैं. लिहाजा उन्होंने सेक्टर 43 में स्थित क्राइम ब्रांच की टीम के इंचार्ज नरेंद्र शर्मा को इस मुकदमे की जांच का जिम्मा सौंप दिया और यह भी बता दिया कि कमिश्नर साहब खुद इस मामले में दिलचस्पी ले रहे हैं.

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जांच अधिकारी इंसपेक्टर नरेंद्र शर्मा ने सब से पहले एक्सपोर्टर विवेक कुमार को अपने पास बुला कर उन से विस्तारपूर्वक रवि और उस के साथियों के बारे में जानकारी एकत्र की. उन्होंने विवेक से ठगी की वारदात का सिलसिलेवार ब्यौरा भी हासिल कर लिया.

इस के बाद क्राइम ब्रांच सेक्टर-43 की टीम ने विवेक के साथ जा कर उन सभी जगहों का दौरा किया, जहां उस से मुलाकात हुई थी. इस के बाद दिल्ली से ले कर गुरुग्राम तक पुलिस टीम ने सीसीटीवी फुटेज हासिल कर लिए. पुलिस ने विवेक से रवि का मोबाइल नंबर ले कर उस की सारी डिटेल्स हासिल कर ली.

सेक्टर-43 क्राइम ब्रांच ने जांच करते हुए तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर अगले कुछ ही दिन में रवि और उस के साथियों के बारे में बेहद अहम जानकारी हासिल कर ली. पुलिस ने रवि से कई बार बात करने वाले लोगों के नंबर से संपर्क साध कर ताबड़तोड़ लोगों से पूछताछ का सिलसिला शुरू कर दिया.

विवेक ने पूछताछ में बताया था कि रवि समेत बाकी लोगों की बातचीत से वे गुजराती लगते थे. इंसपेक्टर नरेंद्र शर्मा ने डीसीपी हितेश यादव के जरिए सीसीटीवी फुटेज से निकाले गए रवि और उस के साथियों के फोटो गुजरात पुलिस को भिजवा कर सहयोग करने के लिए कहा. क्योंकि उन्हें शक था कि हो सकता है उन का गुजरात से कोई लिंक हो.

पुलिस की अब तक की काररवाई रंग लाने लगी थी और 15 अप्रैल तक गुरुग्राम पुलिस की क्राइम ब्रांच ने कई तरह की जानकारी जुटा ली.

इस के बाद पुलिस की कई टीमों ने एक साथ दिल्ली, और गुजरात में छापेमारी की, जिस में ठगी की इस वारदात को अंजाम देने वाले रवि जिस का नाम प्रभुभाई सोलंकी है तथा उस के साथ मनीष कमलेश शाह (निवासी करेली बाग, जिला वड़ोदरा) और ईश्वर मारवाड़ी (निवासी रामदेव नगर खोडिय़ा नगर जिला वड़ोदरा) को गिरफ्तार कर लिया. इस के अलावा दिल्ली के नांगलोई निवासी पंकज शर्मा को भी गिरफ्तार किया गया. वह भी ठगी की वारदात में शामिल था. पंकज को दिल्ली व अन्य को वड़ोदरा से पकड़ा गया.

पूछताछ में पता चला कि प्रभुभाई सोलंकी इस गिरोह का सरगना है और चौथी पास है. गिरोह में शामिल अन्य गुर्गे भी अनपढ़ हैं.

पूछताछ में पता चला कि मूलरूप से गुजरात के वड़ोदरा में अजवा रोड स्थित कल्याण नगर सोसायटी निवासी 56 साल के प्रभुभाई सोलंकी के कई नाम छद्म नाम हैं. वह किसी को अपना नाम कल्पेश बताता, किसी को रवि तो किसी को सोलंकी प्रभु बताता था.

ठगी से कमाए करोड़ों

प्रभुभाई अकूत संपत्ति का मालिक है. उस ने अपनी सारी दौलत ठगी की वारदातों को अंजाम दे कर कमाई है. उस के गिरोह में 6 से 8 लोग हैं, जिन में से 5 एक्सपोर्टर विवेक के साथ की गई ठगी में भी शामिल थे.

सब से दिलचस्प बात यह थी कि प्रभुभाई सोलंकी को सोने के आभूषण पहनने का गजब शौक था. वह अपने गले में गोल्ड की मोटीमोटी चेन और हाथ की अंगुलियों में सोने की कई अंगूठियां पहनने का शौकीन है.

उसे गोल्ड की चीजें पहनने का कितना शौक है, इस का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पुलिस ने जब सोलंकी प्रभु को गिरफ्तार किया, तब भी उस ने शरीर पर जो सोना पहना था, उस का वजन करीब आधा किलो था, जिसे पुलिस ने जब्त कर लिया है.

जिस तरह की वारदात को उस ने अंजाम दिया था, उस तरीके को ये लोग टटलू कहते हैं. इसीलिए उन्हें टटलू गिरोह के नाम से जाना जाता है. प्रभु सोलंकी बेहद दिलफेंक और आशिकमिजाज प्रवृत्ति का था और उस ने 4 शादियां की हुई थीं. इसे राजनीति और फिल्मों का भी शौक है.

सोलंकी खुद को हरफनमौला ठग मानता था. जिंदगी में ठगी से पैसा कमा कर वह बड़ा आदमी बनना चाहता था. उस की तमन्ना थी कि वह एक फिल्म बनाए.

ठगी से कमाए गए पैसे से साल 2017 में उस ने ‘लव यू यार’ नाम की गुजराती कौमेडी फिल्म भी बनाई थी, जिस में नामचीन अभिनेता राजपाल यादव ने अभिनय किया था. इस फिल्म को प्रभु सोलंकी ने प्रोड्यूस किया था.

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यह फिल्म 2017 में रिलीज हुई थी. इस के निर्देशक थे हीरालाल खत्री, जबकि इस में प्रभु की हीरोइन थी आकांक्षा सोलंकी, जिस से बाद में प्रभु ने शादी कर ली.

इस कौमेडी और ड्रामा फिल्म में आकाश शाह, बिमल त्रिवेदी, रिधिमा भट्ट और जिग्नेश मोदी जैसे गुजराती कलाकार थे. यह फिल्म बहुत ज्यादा सफल तो नहीं हुई, लेकिन इस से प्रभु सोलंकी पर फिल्म निर्माता होने का टैग जरूर लग गया.

फिल्म बनाने के दौरान ही प्रभु भाई को फिल्म की हीरोइन आकांक्षा से प्यार हो गया और फिल्म खत्म होने के बाद दोनों ने शादी कर ली. प्रभु भाई ने आकांक्षा सोलंकी को चौथी पत्नी का दरजा दिया. फिल्म के अलावा प्रभु भाई को राजनीति का भी शौक था. वह कभी कांग्रेस में तो कभी एनसीपी में रहा.

प्रभु इलाके के नेताओं को चंदा देता था ताकि जरूरत पडऩे पर लोग उस के सर्मथन में आ सकें. वह अपने खर्चे पर अकसर दुर्गा पूजा और डांडिया का प्रोग्राम भी कराता था, जिस के लिए वह इलाके में काफी लोकप्रिय था. इसीलिए उस ने सोचा कि क्यों न वह अपनी पहली पत्नी पार्वती को चुनाव लड़वा कर अपना राजनीतिक वर्चस्व बनाए. इसीलिए उस ने नगर पालिका चुनाव में अपनी पत्नी पार्वती सोलंकी को कांग्रेस का टिकट दिलवा कर वड़ोदरा के वार्ड 6 से नामांकन भी भरवाया.

दिलचस्प बात यह है कि जिस दिन वह अपनी पत्नी का नामांकन भरवाने के लिए एसडीएम औफिस जा रहा था, गुरुग्राम पुलिस ने उसी दिन रवि उर्फ प्रभुभाई सोलंकी को गिरफ्तार कर लिया.

प्रभु सोलंकी की पहचान वडोदरा के प्रमुख राजनेता और व्यवसायी के रूप में थी. सोलंकी के खिलाफ महाराष्ट्र में 2 और गुजरात में 7 केस दर्ज हैं.

पुलिस ने उसे गिरफ्तार करने के बाद 2 करोड़ 30 लाख 5 हजार 700 रुपए की नकदी व 678 ग्राम सोना बरामद किया है. प्रभुभाई ने ठगी की कमाई से दिल्ली-मुंबई हाईवे पर एक होटल खरीदा था.

प्रभु भाई पहले अपने शिकार को 5-6 असली सोनेचांदी के सिक्के दिखा कर उन का विश्वास जीतता था. वह उन्हें सस्ते में देने का झांसा देता. जब लोग इन्हें ज्वैलर से चैक कराते तो वे असली निकलते थे. इस के बाद वह बड़ी मात्रा में सस्ते सोने का लालच दे कर मोटी रकम ऐंठ लेता था और बदले में पीतल के सिक्कों पर सोने का पानी चढ़ा कर दे देता था.

जब तक पीडि़त को ठगी का अहसास होता, तब तक वह फरार हो चुका होता था. पूछताछ में उस से खुलासा हुआ है कि नकली सोने के सिक्के दिल्ली के सुल्तानपुरी इलाके में तैयार किए जाते थे.

पुलिस ने ठगी के मास्टरमाइंड प्रभु सोलंकी की काली कमाई की जांच के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को भी पत्र लिखा है. क्योंकि सोलंकी प्रभुभाई गुलशनभाई उर्फ कल्पेश नाम के इस मास्टरमाइंड के पास कई प्रौपर्टी हैं और वह आलीशान जिंदगी जीता है. पुलिस को शक है कि ये संपत्तियां अपराध से कमाए गए पैसों से खरीदी गई हैं.

जांच और पूछताछ के दौरान पुलिस को पता चला कि 13 फरवरी को सोलंकी अपने 4-5 साथियों (जिन में 2 महिलाएं भी शामिल थीं) के साथ इनोवा क्रिस्टा में मुंबई जा रहा था, तभी उस ने दिल्लीगुडग़ांव एक्सप्रेसवे पर पचगांव चौक के पास विवेक को अपनी औडी कार ठीक करते हुए देखा.

मौका देख कर सोलंकी ने अपनी गाड़ी कुछ दूरी पर खड़ी कर दी. शिकार की तलाश में घूम रहे इस गैंग ने फटेपुराने कपड़े पहन कर पीडि़त से संपर्क किया और नाटक किया कि खुदाई के दौरान उन्हें खजाना (कुछ सोने के सिक्के) मिला है और वे उसे जल्दी बेचना चाहते हैं.

एक महिला ने सोलंकी की बहन होने का नाटक किया, जबकि बाकी साथियों ने उस के सहयोगी होने का दिखावा किया. पीडि़त का भरोसा जीतने के लिए आरोपियों ने पहले कुछ असली सिक्के दिए, जिन की जांच बिजनैसमैन विवेक ने कराई.

कई बार बातचीत के बाद गैंग ने बड़ी मात्रा में सिक्के बेचने का सौदा किया. उन्होंने 35-40 लाख रुपए प्रति किलोग्राम की कीमत बताई और ज्यादा मुनाफे का लालच दे कर विवेक को फंसाया.

एक्सपोर्टर विवेक को जब तक असलियत का पता चला, तब तक उन के 2.5 करोड़ रुपए और सोना जा चुका था. एक्सपोर्टर विवेक ने सस्ते में सोना खरीदने के लालच में रिश्तेदारों और दोस्तों से भारी कर्ज लिया और परिवार के सदस्यों के पुश्तैनी गहने भी बेच दिए ताकि वह उस खजाने को सस्ते दाम पर खरीद सके.

गुरुग्राम पुलिस उन 2 महिलाओं को गिरफ्तार कर पाती, उस से पहले ही राजस्थान पुलिस ने उन्हें धोखाधड़ी के एक दूसरे मामले में पकड़ लिया. दोनों अभी कोटा जेल में बंद हैं. आगे की जांच के लिए गुरुग्राम पुलिस उन्हें प्रोडक्शन वारंट पर गुरुग्राम लाई और उन्हें रिमांड पर ले कर पूछताछ की.

क्राइम ब्रांच ने दोनों महिलाओं के आपराधिक रिकौर्ड की जांच की तो पता चला कि आरोपी तेजू पर धोखाधड़ी करने के संबंध में 2 केस गुजरात में और एक केस राजस्थान में तथा आरोपी शांतिबेन पर धोखाधड़ी करने के संबंध में एक केस राजस्थान में दर्ज है.

दोनों महिला आरोपियों की पहचान तेजू गंगाराम राठौर (उम्र-45 वर्ष) निवासी गांव मोरटक्का, जिला खंडवा (मध्य प्रदेश) व सोलंकी शांतिबेन (उम्र-42 वर्ष) निवासी वाली नगरी पनसोबार जूना बाजार जिला वडोदरा (गुजरात) के रूप में हुई है.

प्रभुभाई सोलंकी ने एक्सपोर्टर विवेक की तरह ठगी की वारदात में कई बड़े लोगों को भी चूना लगाया था. उस ने फिल्मी सितारों तक को नहीं बख्शा.

सोलंकी की मुलाकात करीब 15 साल पहले खंडाला में एक फार्महाउस के पास आदित्य पंचोली से हुई थी. वह अचानक उसी अंदाज में उन के पास पहुंचा, जैसे विवेक के पास पहुंचा था. विवेक की तरह ही उन्हें भी धोखा दे कर 20 लाख रुपए ठग लिए. इसी तरह वह मुंबई के एक बीच पर सलीम खान के पीए से भी मिला और उन्हें 25 लाख रुपए का चूना लगाया था.

यह गैंग हाईवे पर अपने शिकार की रेकी करता था और महंगी कारों वाले लोगों को निशाना बनाता था, खासकर उन लोगों को जिन की गाडिय़ां खराब हो जाती थीं या जो उन की मरम्मत कर रहे होते थे.

सोलंकी मजदूर या जेसीबी औपरेटर बन कर शिकार के पास जाता था और दावा करता था कि उसे रेलवे लाइन या कंस्ट्रक्शन साइट के पास खुदाई के दौरान सोने के सिक्के मिले हैं, लेकिन पुलिस की काररवाई के डर से वह उन्हें खुलेआम बेच नहीं सकता.

शुरू में वह अपने थैले से कुछ असली सोने के सिक्के निकाल कर अपने शिकार को देता था, जिस से वह शिकार किसी सुनार से उन सिक्कों को चैक कराता तो वह खरा माल निकलते.

इस से लोगों का उस पर पूरा भरोसा बन जाता था. इस के बाद वह कहता कि मेरे पास बहुत सारा सोना है, सिर्फ 35 से 40 लाख रुपए किलो के भाव में दे दूंगा. आप करोड़पति बन जाएंगे. लालच में आ कर पीडि़त बड़ी रकम ले कर आ जाता था.

उस के बाद जब डील फाइनल होती तो मोटी रकम लेने के बाद वे नकली सिक्के (पीतल पर सोने का पानी चढ़ा हुआ) दे देता था और तुरंत वहां से गायब हो जाता था. कुछ सिक्के ले कर अपने पास रख लेते थे. मगर कुछ दोबारा चैक कराते तो पता चलता कि पूरा सौदा फ्रौड था. इस के बाद उन के होश उड़ जाते.

फिलहाल पकड़े गए सभी 6 आरोपी गुरुग्राम की भोंडसी जेल में बंद हैं. लेकिन अब गुरुग्राम पुलिस ने प्रभुभाई सोलंकी द्वारा काले कारनामों से एकत्र की गई अकूत संपत्ति की जांच के लिए ईडी को जानकारी दी है, जो अपनी जांच में पता लगाएगी कि उस ने गुजरात में जो अपार दौलत एकत्र की है और आलीशान होटल बनाया है वो ठगी से कमाई गई दौलत से है या नहीं.

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