Indore Loot Case. दिनदहाड़े रेडीमेड कारोबारी के घर 50 लाख की लूट कर के बदमाशों ने इंदौर पुलिस को जो खुली चुनौती दी थी, उसे स्वीकार कर पुलिस ने महज 48 घंटे में रेडीमेड कारोबारी की नाबालिग नौकरानी और उस के आशिक सहित सभी दरजन पर बदमाशों को गिरफ्तार भी कर लिया और लूटा गया अधिकांश माल भी बरामद कर लिया.
साल के पांचवें महीने की पांचवी तारीख थी. इंदौर के थाना एरोड्रम के थानाप्रभारी बलजीत सिंह बिसेन दोपहर में लंच के बाद थाने आए ही थे कि व्यंकटेश नगर के रहने वाले नितिन बोथरा थाने आए. उन्होंने बलजीत सिंह को अपनी जो आपबीती सुनाई, उसे सुन कर वह हैरान रह गए.
47 वर्षीय नितिन का व्यंकटेश नगर में आलीशान बंगला था. वह रेडीमेड कपड़ों के व्यापारी थे. उन्होंने बताया कि सुबह वह पिता के साथ फैक्ट्री चले गए तो घर में केवल 2 ही लोग रह गए. एक उन की बूढ़ी मां कुसुम बोथरा और दूसरी 17 साल की नौकरानी रेनू. घर का गार्ड मान सिंह पवार दोपहर में खाना खाने अपने घर चला गया था.
उसी बीच दोपहर 1 बजे 4 लुटेरे उन के घर में घुसे और मां एवं नौकरानी के साथ मारपीट कर के कुछ नकदी और लूट ले गए. इस का पता उन्हें तब चला, जब वह लंच करने घर गए.
दिनदहाड़े हुई लूट की इस वारदात के बारे में सुन कर टीआई बलजीत सिंह बिसेन ने यह खबर अपने सीएसपी आर.एस. घुरैया एवं एसपी पश्चिम डी. कल्याण चक्रवर्ती को दी और खुद एसआई रामकेश शर्मा तथा पुलिस टीम को ले कर नितिन बोथरा के घर जा पहुंचे.
शुरुआती जांच में पुलिस ने महसूस किया कि लुटेरों ने वारदात के लिए वह समय चुना, जब दोपहर में गार्ड गेट पर नहीं था. लुटेरों को इस बात की भी जानकारी थी कि इन दिनों नितिन बोथरा की पत्नी मायके गई हुई हैं और उन की बेटी सहेलियों के साथ देहरादून. इसी वजह से दोपहर में नितिन की बूढ़ी मां घर पर अकेली थीं.
बलजीत सिंह बिसेन की टीम अभी जांच कर ही रही थी कि सीएसपी घुरैया और एसपी चक्रवर्ती भी नितिन के घर पहुंच गए. घटनास्थल का मुआयना करने के बाद पुलिस अधिकारियों ने हालात को देखते हुए फैसला लिया कि सब से पहले घर की नौकरानी और सिक्योरिटी गार्ड से पूछताछ की जाए, साथ ही यह भी तय किया गया कि इस मामले की जांच एसआई रामकेश शर्मा करेंगे.
जांच की जिम्मेदारी मिलते ही रामकेश शर्मा ने सब से पहले सिक्योरिटी गार्ड मान सिंह और घर की नौकरानी रेनू के बारे में पूछताछ की. नितिन बोथरा ने बताया कि दोनों उस के भरोसे के कर्मचारी थे.
लुटेरों ने जिस तरह सही समय घर पर धावा बोला था, उस से रामकेश शर्मा के मन में यह बात घर कर चुकी थी कि इस मामले में जरूर कोई ऐसा आदमी शामिल है, जिस के माध्यम से लुटेरों को यह बात पता चली थी कि नितिन बोथरा की बूढ़ी मां घर में अकेली हैं. इसी बात को ध्यान में रख कर रामकेश शर्मा ने अपनी जांच गार्ड मान सिंह और नौकरानी रेनू से पूछताछ से शुरू की.
गार्ड मान सिंह तो ज्यादा कुछ नहीं बता सका, लेकिन रेनू ने पुलिस को बताया कि लुटेरे 4 थे, जो मुंह पर नकाब बांधे थे. आते ही उन्होंने सब से पहले उस के साथ मारपीट की और उस के बाद मालकिन पर हमला कर दिया.
रेनू ने यह भी बताया कि वह लुटेरों को नहीं पहचानती, न ही उस का कोई परिचित इस घटना में शामिल है. लूट की इस घटना से उस का कोई लेनादेना नहीं है. बस, यहीं से रेनू पुलिस की निगाह में आ गई. इस की वजह यह थी कि रेनू उन सवालों के भी जवाब दे रही थी, जो उस से पूछे ही नहीं गए थे. दूसरे उस के शरीर पर चोट का भी कोई निशान नहीं था.
इस के बावजूद वह दिखाने के लिए ऐसे हावभाव कर रही थी, जैसे उसे काफी मारापीटा गया हो. पूछताछ के दौरान उस ने कई बार बेहोश होने का नाटक भी किया था. रेनू के इस तरह के रंगढंग सामने आने के बाद रामकेश शर्मा ने थानाप्रभारी को उस के बारे में पूरी जानकारी दी.
दरअसल, पुलिस ने जब नितिन की मां कुसुम बोथरा से घटना के बारे में पूछताछ की तो उन्होंने कुछ और ही बताया. उन की बताई कहानी रेनू से एकदम अलग थी. उन्होंने पुलिस को बताया था कि लुटेरे 4 थे, जिन्हें सामने आने पर वह पहचान सकती हैं. इस का मतलब था कि लुटेरे नकाब नहीं पहने थे. जबकि रेनू ने बताया था कि लुटेरों ने नकाब पहन रखे थे.
कुसुम बोथरा के अनुसार, घटना के समय रेनू पीछे कपड़े धो रही थी और इस दौरान कमरे में आई ही नहीं थी. जब लुटेरे भाग गए और कुसुम ने रेनू को सारी बात बताई, तब भी उस ने आसपास के लोगों को बुलाने में कोई उत्सुकता नहीं दिखाई. कुसुम ने खुद ही पड़ोस में रहने वाली अपनी एक रिश्तेदार को फोन कर के यह जानकारी दी.
लूट की घटना में अब रेनू के शामिल होने को ले कर कोई शक नहीं रह गया था. आर.एस. घुरैया के निर्देश पर महिला पुलिस को रेनू से पूछताछ की जिम्मेदारी सौंपी गई. रेनू ने पहले तो पुलिस को झांसा देने की भरपूर कोशिश की, लेकिन वह ज्यादा देर सच्चाई को छिपा नहीं सकी. अंत में उस ने लूट में शामिल होने की बात स्वीकार कर ली.
इस के उस ने लूट की पूरी कहानी सुना दी. यह लूट 50 लाख की थी. एरोड्रम थाना पुलिस ने मामले को सुलझाते हुए लूट में शामिल दीपक निवासी राजनगर, पवन निवासी राजनगर, राजा गोयल निवासी गणपुर, जिला धार, कपिल कानोरे निवासी रतनबाग, कान्हा निवासी राजनगर, गोलू ओझा निवासी आराधना नगर, रेनू और एक अन्य नाबालिग आरोपी को गिरफ्तार कर के उन के पास से 40 लाख रुपए की लूट का माल बरामद कर लिया गया. इन में नकदी भी थी और गहने भी.
अभियुक्त पवन ने लूट की रकम के अपने हिस्से के पैसों में से कुछ पैसे अपने भाई सुनील देपाले तथा दोस्त विजय सिमले को दे दिए थे. विजय ने अपने पैसों में से कुछ पैसे चचेरे भाई राकेश सिमले और जीजा गौतम लिनमपुरे को दे दिए थे. पुलिस ने उन चारों को भी लूट में शामिल होने का आरोपी मान कर गिरफ्तार कर लिया था. पूछताछ में लूट की पूरी कहानी कुछ इस तरह पता चली.
रेनू बचपन से ही राजनगर में रहने वाली अपनी मौसी के साथ रहती थी. उस की मौसी नितिन बोथरा के घर में नौकरानी थी. मौसी उसे अपने साथ काम पर ले जाती थी. इसी आनेजाने में रेनू कुसुम की चहेती बन गई थी. कुछ सालों बाद जब मौसी की तबीयत खराब रहने लगी तो बोथरा परिवार ने उन की जगह रेनू को काम पर रख लिया.
रेनू की मौसी की एक बेटी की शादी इंदौर में ही पवन देपाले से हुई थी. वह अकसर अपनी ससुराल आता रहता था. पवन के साथ उस का दोस्त दीपक भी अकसर आता रहता था. रेनू जब 13 साल की हुई थी, तभी दीपक ने उसे बहलाफुसला कर प्यार और सैक्स के सारे पाठ पढ़ा दिए थे.
इस सब में पवन देपाले भी उस की मदद कर रहा था. उसी बीच रेनू कुछ दिनों तक रवि नाम के अन्य लड़के के संपर्क में रही. जब उस से अलगाव हो गया तो सैक्स और प्यार की आदी हो चुकी रेनू फिर से दीपक के साथ जुड़ गई.
रेनू को बोथरा परिवार में भरपूर प्यार मिल रहा था. समयसमय पर नितिन की मां रेनू को कुछ न कुछ इनाम देती रहती थी. इस से दीपक और पवन अच्छी तरह समझ गए थे कि रेनू की मालकिन के पास काफी माल है. पवन के पास कोई स्थाई काम नहीं था. दीपक भी बेरोजगार था.
इसलिए जब दोनों ने मिल कर ढेर सारा पैसा कमाने कि योजना बनाई तो उन्हें लूट से अच्छा कोई दूसरा तरीका नजर नहीं आया. लूट की बात दिमाग में आई तो दीपक को अपनी माशूका की मालदार मालकिन की याद आई. इस के बाद दीपक और पवन ने रेनू को अपने साथ मिला कर लूट की योजना पर काम शुरू कर दिया.
इस के लिए सब से पहले दीपक ने रेनू के सामने शादी का प्रस्ताव रखा. रेनू तो पहले से ही राजी थी, लेकिन दीपक ने बात घुमा कर कही कि उस के घर वाले एक नौकरानी को अपने घर की बहू कभी नहीं बनाएंगे, इसलिए वह पैसों का इंतजाम कर रहा है.
पहले वह उस की नौकरी छुड़वा कर उसे अपना ब्यूटीपार्लर खुलवा देगा. उस के बाद उसे दुलहन बना कर अपने घर ले जाएगा.
‘‘ब्यूटीपार्लर खोलने के लिए तो काफी पैसा चाहिए, वह कहां से आएगा?’’ रेनू ने पूछा तो दीपक बोला, ‘‘कुछ न कुछ तो करना ही पड़ेगा.’’
कुछ दिनों तक बात पैसों के इंतजाम को ले कर अटकी रही. उस के बाद एक दिन दीपक ने एकांत में रेनू के साथ प्यार में डूबतेउतराते समय उस की मालकिन के घर में लूट की योजना उस के सामने रखी. लेकिन रेनू ने इस के लिए मना कर दिया. पर जब दीपक ने उसे इस लूट के बाद रईसी के सपने दिखाए, साथ ही मौसेरे बहनोई पवन ने भी दीपक की बात का समर्थन करते हुए उस पर साथ देने के लिए दबाव डाला तो वह राजी हो गई.
उस ने कह दिया कि जब मालकिन का घर खाली होगा, वह दीपक को खबर कर देगी. दूसरी तरफ इंदौर के बड़े रेडीमेड व्यापारी माने जाने वाले नितिन बोथरा के परिवार को इस खतरे का जरा भी आभास नहीं था कि सालों से उन के घर में बेटी की तरह रह रही रेनू उन का सब कुछ लुटवाने की योजना बना रही है.
नितिन के घर में कुल 6 लोग थे. नितिन, उन की पत्नी निर्मला, एक बेटा एवं बेटी, पिता कैलाशचंद और मां कुसुम. इन में से नितिन का बेटा दिल्ली में पढ़ रहा था. उन का एक छोटा भाई भी है विपिन, जो अमेरिका में इंजीनियर है और उस की पत्नी वहीं डाक्टर है.
घटना से कुछ दिनों पहले नितिन की बेटी देहरादून चली गई तो उन की पत्नी ने कुछ दिन इंदौर स्थित अपने मायके में रहने की योजना बनाई. घटना से 2 दिन पहले ही वह गुमाश्तानगर में अपने भैया के घर चली गईं. रेनू को यह अच्छा मौका लगा, क्योंकि नितिन और उन के पिता सुबह ही फैक्ट्री के लिए निकल जाते थे. उन के जाने के बाद घर में दिन भर कुसुम और रेनू ही रह जाती थी.
मेन गेट पर गार्ड मान सिंह रहता था, लेकिन उस का भी घर पास में ही था, इसलिए दोपहर को वह खाना खाने के लिए घर चला जाता था और एक घंटे से पहले नहीं लौटता था. दीपक और पवन उसी समय धावा बोलने के लिए अपने दोस्तों को ले कर नितिन के घर पहुंचे. संयोग से उस दिन चौकीदार घर पर मौजूद था, जिस की वजह से वे रैकी कर के ही वापस आ गए.
अगले दिन पवन अपने साथ 2 अन्य साथियों को ले कर नितिन के घर में दाखिल हो गया. उस समय कुसुम बाहर के कमरे में थीं, जबकि रेनू जानबूझ कर कपड़े धोने के बहाने पीछे चली गई थी. घर के अंदर 4 अंजान युवकों को देख कर कुसुम ने उन से पूछताछ की तो उन्होंने उन के सिर पर वार कर उन्हें घायल कर दिया.
इस के बाद उन लोगों ने घर में रखा मोबाइल, एक विदेशी कैमरा, कुछ नकदी तथा गहने समेटा और फरार हो गए. कुल माल 50 लाख का था. लुटेरों के जाने के बाद कुसुम ने पड़ोस में रहने वाले अपने भाई की बेटी हर्षिता को फोन पर पूरी घटना बताई तो वह भाग कर आई और उन्हें अस्पताल ले गई. उसी ने नितिन और अपने फूफाजी कैलाशचंद को फोन पर इस घटना की खबर दी.
इस लूट को अंजाम देने वाले जानते थे कि घटना के बाद पुलिस रेनू से पूछताछ करेगी. इसलिए उन्होंने पुलिस के सवालों के क्या जवाब देने हैं, रेनू को पहले ही सिखा दिया था. इसलिए थानाप्रभारी बलवीर सिंह बिसेन के निर्देश पर जब एसआई रामकेश शर्मा ने रेनू से पूछताछ शुरू की तो उस ने बिना सवाल किए ही पुलिस को वे सारे जवाब एक साथ दे दिए, जो दीपक और पवन ने उसे सिखाए थे.
बस, इसी से रेनू पुलिस के शक के दायरे में आ गई. रहीसही कसर उस समय पूरी हो गई, जब रेनू ने पुलिस को बताया कि लुटेरे नकाब पहन कर आए थे. जबकि घर की मालकिन कुसुम ने बताया था कि लुटेरे बिना नकाब के थे. इसी एक झूठ से रेनू को मुंह खोलना पड़ा और सच सामने आ गया.
—कथा पुलिस सूत्रों पर आधा






