Love Obsession Murder. देवेन जैसी सोच वाले लड़कों की हमारे समाज में कोई कमी नहीं है, जो हंसबोल कर बातचीत कर लेने वाली लड़कियों के बारे में सोच लेते हैं कि वह उन से प्यार करने लगी हैं. धीरेधीरे वह उन्हें अपनी प्रौपर्टी समझने लगते हैं. लेकिन जब हकीकत सामने आती है तो वह उन लड़कियों के सब से बड़े दुश्मन बन जाते हैं. फिर उन का हश्र किंजल जैसा ही होता है.
महाराष्ट्र के जनपद पालघर की तहसील बसई विरार पश्चिम के बोलीज नाका स्थित गोल्डन ओके इमारत में रहने वाले दीपक शाह की 17 साल की बेटी किंजल 18 जुलाई, 2016 की सुबह कालेज जाने के लिए घर से निकली लेकिन वह अपने समय पर घर लौट कर नहीं आई, तो घर वाले परेशान हो उठे. जवान बेटी का मामला था, इसलिए जैसेजैसे समय बीत रहा था, घर वालों की बेचैनी बढ़ती जा रही थी. इस की एक वजह यह भी थी कि उस का मोबाइल स्विच्ड औफ था.
हैरानपरेशान घर वाले रात 10 बजे तक नातेरिश्तेदारों, जानपहचान वालोें तथा उस की सहेलियों से पता करते रहे, जब कहीं से उस के बारे में कुछ पता नहीं चला तो घर वालों के मन में किसी तरह की अनहोनी को ले कर तरहतरह के विचार आने लगे. उस की मां का तो रोरो कर बुरा हाल था.
तमाम प्रयासों के बाद भी जब किंजल के बारे में कुछ पता नहीं चला तो उस के पिता दीपक शाह ने रात साढ़े 10 बजे कुछ लोगों के साथ थाना विहार अरनाला में जा कर किंजल की गुमशुदगी दर्ज करा दी.
गुमशुदगी दर्ज होते ही थानाप्रभारी के.डी. कोल्हे ने इस मामले की जांच एएसआई दत्तप्रसाद शेडगे को सौंप दी. साथ ही उन की मदद के लिए हैडकांस्टेबल आर.डी. वेलधर, मंदार दलवी, मुकेश नाईक और रविंद्र सांगने की एक टीम बना कर सौंप दी.
जांच की जिम्मेदारी मिलते ही दत्त प्रसाद शेडगे ने सब से पहले तो अपने मुखबिरों को सक्रिय किया, उस के बाद किंजल की फोटो जनपद के सभी थानों को भेज कर संदेश भेज दिया कि अगर उस के बारे में कहीं से कोई जानकारी मिले तो सूचित करे.
दत्तप्रसाद शेडगे यह काररवाई कर ही रहे थे कि औटो चालक ओमप्रकाश उर्फ ओम भाई ने आ कर उन्हें बताया कि रोज की तरह वह अपने बच्चे को स्कूल छोड़ कर लौट रहा था. तभी उस ने तो बोलीज नाका स्थित लोक प्रभात लेबर सोसायटी के शौचालय की दीवार से एक लड़की को सटे बैठे देखा. वह उस के पास गया तो पता चला कि वह मर चुकी थी.
वह जींस शर्ट पहने हुई थी. उस ने उस मृत युवती का जो हुलिया बताया, वह किंजल से मिलताजुलता था, इसलिए शेगड़े ने इस की जानकारी थानाप्रभारी के.डी. कोल्हे के साथसाथ कंट्रोलरूम को दे कर किंजल के घर वालों को बुलाया और उन्हें ले कर घटनास्थल पर पहुंच गए.
लाश देखते ही किंजल के घर वाले दहाड़े मार कर रोने लगे. इस से साफ हो गया कि लाश किंजल की थी. घर वालों को शांत करा कर पुलिस ने लाश और घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण करने के बाद घटनास्थल की सारी काररवाई निबटा कर लाश को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया.
चूंकि घटनास्थल से किंजल की हत्या का कोई सबूत नहीं मिला था, इसलिए पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार करने लगी. पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई तो पता चला किंजल की मौत पानी में डूबने से हुई थी. लेकिन हैरान करने वाली बात यह थी कि मरने के बाद उस के साथ शारीरिक संबंध बनाया गया था. इस से यह अंदाजा लगाया गया कि किसी ने उसे पानी में डुबा कर मारा था. उस के बाद लाश के साथ दुष्कर्म किया गया था. इस से पुलिस को मामला एकतरफा प्रेम का लगा.
दत्तप्रसाद शेडगे ने इंसपेक्टर के.डी. कोल्हे के निर्देशन में जांच आगे बढ़ाई. किंजल के घर वालों से पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि किंजल की दोस्ती देवेन से थी. लेकिन जब देवेन ने दोस्ती को ज्यादा समझ लिया तो किंजल ने उस से दूरी बनानी शुरू कर दी. इस के बावजूद वह उस का पीछा कर उसे परेशान करता रहा. किंजल की शिकायत पर घरवालों ने उसे डांटा भी था.
घर वालों से देवेन के बारे में पता चलने पर पुलिस उस की गिरफ्तारी के बारे में सोच ही रही थी कि वह थाना नालासोपारा तुसींज के थानाप्रभारी प्रकाश विराजदार की गिरफ्त में आ गया. उन्होंने औपचारिक पूछताछ कर के उसे थाना विहार असाला पुलिस के हवाले कर दिया. दरअसल देवेन के पिता उसे ले कर थाना नालासोपारा तुसींज पहुंच गए थे. उन्होंने प्रकाश बिराजदार को घटना के बारे में बता कर उसे उन के हवाले कर दिया.
दत्तप्रसाद शेडगे द्वारा की गई पूछताछ में देवेन ने अपना अपराध स्वीकार करते हुए किंजल की हत्या की जो कहानी बताई, वह कुछ इस प्रकार थी—
24 वर्षीय देवेन उर्फ देवेंद्र दिनकर भोसले का बेटा था. वह पालघर बसई विरार में एस्टेट एजेंट का काम करते थे. देवेन उनका एकलौता बेटा था. लाड़प्यार की वजह से वह दसवीं से आगे नहीं पढ़ सका. पढ़ाई छोड़ कर वह पिता के कारोबार में मदद करने लगा. कुछ दिनों बाद उसे मुंबई के प्रसिद्ध होटल ताज इंटरनेशनल में वेटर की नौकरी मिल गई. वहां उसे वेतन तो ठीकठाक मिलता ही था, टिप से भी अच्छी कमाई हो जाती थी.
देवेन जिस सोसायटी में रहता था, उसी के सामने वाली सोसायटी में किंजल भी अपने परिवार के साथ रहती थी. उस के पिता दीपक शाह की किताबों की दुकान थी. किंजल के परिवार में मां के अलावा एक बड़ी बहन थी. वह मुंबई के उपनगर मुलुंड के एसएनडीटी कालेज से बीकौम कर रही थी.
किंजल जितनी सुंदर थी, इतनी ही चंचल और आधुनिक विचारों वाली भी थी. इसलिए वह किसी से भी बातचीत में नहीं झिझकती थी. एक दिन देवेन की नजर किंजल पर पड़ी तो वह उसे देखता ही रह गया. इसी पहली नजर में वह उस का दीवाना हो गया. उस के बारे में पता कर के देवेन ने उस के करीब जाने की कोशिश की तो जल्दी ही उसे सफलता भी मिल गई. दोनों में बातचीत ही नहीं होने लगी बल्कि दोनों मिलनेजुलने भी लगे. इस का नतीजा यह निकला कि दोनों के संबंध गहराने लगे. दोनों साथसाथ घूमनेफिरने भी लगे.
यह सिलसिला अभी कुछ ही दिनों तक चला था कि दोनों में खटपट हो गई. दरअसल देवेन किंजल को दिल की गहराई से प्रेम करने लगा था और उसे ले कर तरहतरह के सपने देखता था. वह उस से शादी करना चाहता था, जबकि किंजल के मन में ऐसा कुछ नहीं था. वह उसे सिर्फ अपना दोस्त मानती थी. उसे उस के मन की बात की जानकारी भी नहीं थी. इसीलिए किंजल अपने अन्य दोस्तों से भी हंसते हुए मिलती थी. किंजल के इस व्यवहार से देवेन जलभुन जाता था. वह किंजल को उन से मिलने और बातें करने से रोकता ही नहीं था, बल्कि उसे डांटता भी था.
किंजल को यह नागवार गुजरता था, इसलिए उस ने कई बार देवेन को समझाया भी कि उस की सोसायटी ही ऐसी है. लेकिन देवेन किंजल की कोई बात सुनने को तैयार ही नहीं था. कई बार समझाने पर देवेन के व्यवहार में कोई बदलाव नहीं आया तो किंजल उस से दूरी बनाने लगी. उस ने उस से मिलनाजुलना भी कम कर दिया.
लेकिन देवेन के व्यवहार में कोई बदलाव नहीं आया. वह किंजल से मिलने की कोशिश ही नहीं करता, उस पर मिलने के लिए दबाव भी बनाता था. उस के इस व्यवहार से परेशान किंजल कुछ दिनों तक तो चुप रही, लेकिन जब परेशान हो गई तो उस ने देवेन की शिकायत घर वालों से कर दी.
दीपक शाह ने देवेन के घर वालों से उस की शिकायत तो की ही, खुद भी उसे आड़े हाथों लेते हुए किंजल से दूर रहने को कहा.
लेकिन देवेन पर न घर वालों की शिकायत का फर्क पड़ा, न उन लोगों के डांटनेफटकारने और चेतावनी देने का. उस ने किंजल के चक्कर में अपनी नौकरी तक छोड़ दी. वह उस की एक झलक पाने के लिए पूरापूरा दिन उस के आने वाले रास्ते पर बैठा रहता.
दिनकर भोसले ने बेटे की हरकत से परेशान हो कर वह मकान छोड़ दिया और नाला सोपारा के मोरेश्वर की एकविरा सोसायटी में मकान ले कर रहने लगे. उन का सोचना था कि किंजल से दूर हो कर वह धीरेधीरे सुधर जाएगा. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. वह किंजल को भूल नहीं पाया और उस से मिलने उस की सोसायटी पहुंच जाता था. जबकि किंजल ने उस से पूरी तरह दूरी बना ली थी.
11 जुलाई, 2016 को किंजल कांदीवली, मुंबई में रहने वाली अपनी एक सहेली के यहां पार्टी में शामिल होने गई. उस का पीछा करते हुए देवेन भी वहां पहुंच गया. पार्टी में किंजल को एक लड़के से हंसहंस कर बातें करते देख देवेन उस से लड़ने लगा. किंजल को यह काफी बुरा लगा. देवेन को बुराभला कहते हुए किंजल से कहा कि वह उस से मिलने की कौन कहे, उस की शक्ल तक नहीं देखना चाहती.
किंजल ने जिस तरह पार्टी में देवेन का अपमान किया था, उसे बहुत बुरा लगा था. अपना यह अपमान उस से बरदाश्त नहीं हुआ और मन ही मन उस ने किंजल को सबक सिखाने का फैसला कर लिया. इस के सप्ताह भर बाद वह किंजल से मिला और उस से माफी मांगते हुए कहा, ‘‘उस दिन पार्टी में मैं ने तुम्हारे साथ जो हरकत की, उस के लिए मैं माफी मांगता हूं. अब मैं तुम से कभी नहीं मिलूंगा. यह शहर ही छोड़ कर चला जाऊंगा. लेकिन शहर छोड़ कर जाने से पहले मैं एक दिन तुम्हारे साथ गुजारना चाहता हूं. उस के बाद मैं तुम से कभी नहीं मिलूंगा.’’
पहले तो किंजल ने उन के साथ जाने से इनकार कर दिया, लेकिन देवेन के काफी निवेदन करने पर उस ने सोचा कि एक दिन की ही तो बात है, इस के बाद तो उस से हमेशा के लिए पीछा छूट जाएगा. अपनी मौत से अनभिज्ञ किंजल उस के साथ जाने को तैयार हो गई.
इस के बाद देवेन औटो से उसे विरार लोकल स्टेशन ले गया. वहां से वह बसई गया, जहां पूरे दिन इधरउधर घूमता रहा. शाम 4 बजे वह औटो से सलाव स्थित तुंगारेश्वर मंदिर गया, जहां दर्शन कर के वह उसे तालाब की ओर ले गया. वह उसे पानी में डुबो कर मारना चाहता था, जिस से उस के खिलाफ कोई सबूत न मिले. प्यार भरी बातें करते हुए वह किंजल को तालाब के किनारे ले गया और धक्का मार कर उसे तालाब में गिरा दिया.
किंजल को पानी में डूबते देख वहां आए सैलानी चिल्लाते हुए उस की ओर दौड़े तो वह भी तालाब में कूद गया और किंजल को बचाने का नाटक करते हुए उसे पानी में डुबो दिया. किंजल के पेट में पहले ही काफी पानी चला गया था, वह बेहोश हो चुकी थी. बेहोशी की हालत में वह उसे पानी से बाहर लाया और वहां उसे अस्पताल जे जाने के बहाने औटो में बैठा कर चल पड़ा.
सही बात तो यह थी कि किंजल की मौत हो चुकी थी. लेकिन यह बात न उस ने भीड़ को जाहिर होने दी और न औटो वाले को पता चलने दी. लोक प्रभाव सोसायटी के पास पहुंच कर उस ने औटो रुकवाया और किंजल को उतार लिया.
उस समय रात के 10 बज चुके थे. सोसायटी के आधे से ज्यादा लोग सो चुके थे. वह किंजल को उठा कर सोसायटी के अंदर ले गया. उस समय काफी तेज बरसात हो रही थी. बरसात से बचने के लिए वह किसी जगह की तलाश करने लगा तो उसे एक मकान में ताला लगा दिखाई दिया.
देवेन ने उस मकान का निरीक्षण किया तो उस की एक खिड़की खुली दिखाई दी. वह किंजल को उसी खिड़की से अंदर ले आया. किंजल को मौत के घाट उतार कर भी उस के मन को शांति नहीं मिली तो उस ने अपने अपमान और बेरुखी का बदला लेने के लिए उस के साथ दुष्कर्म किया.
अब वह लाश को ठिकाने लगाने के बारे में सोचने लगा. सुबह 3 बजे उस ने किंजल के उतारे हुए कपड़े पहनाए और जिस खिड़की से अंदर गया था, उसी से बाहर आ कर सोसायटी के कंपाउंड में बने लेबर शौचालय के पास दीवार के सहारे बैठा दिया और उस का पर्स तथा रुमाल वहीं झाडि़यों में फेंक कर अपने घर चला गया.
घर आ कर उस का गुस्सा शांत हुआ तो उसे अपने किए पर पछतावा होने लगा. दुखी हो कर उस ने सारी बात अपने पिता को बताई तो वह बेचैन हो उठे. वह जानते थे कि बेटे ने जो किया है, वह बड़ा अपराध है. एक न एक दिन पुलिस उस तक पहुंच ही जाएगी. पुलिस उन के घर आए, उस से पहले ही उन्होंने उसे ले जा कर पुलिस के हवाले कर दिया.
पूछताछ के बाद दत्तप्रसाद शेडगे ने देवेन के खिलाफ अपराध संख्या 115/2016 पर भादंवि की धारा 302, 377, 376, 201 के तहत मुकदमा दर्ज कर उसे वसई की अदालत में मैट्रोपौलिटन मजिस्ट्रेट श्रीमती घोरे के समक्ष पेश किया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. Love Obsession Murder
—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित






