True Crime Story. रेहान सूफिया का पहला प्यार था, इसलिए शादी होने के बाद भी वह उसे नहीं भूल पाई थी. काफी दिनों बाद जब वह उस से मिली तो उस ने उस से पुराने वायदे की याद दिला कर साथ ले चलने को कहा. इस में जब सूफिया का पति रोड़ा बना तो सूफिया ने इस रोड़े को हटवाने में भी संकोच नहीं किया.
शकील गोश्त का कारोबारी था. वह लखनऊ के थाना मलीहाबाद के गांव फतेहपुर में अपने परिवार के साथ रहता था. वह कस्बों व गांवों में लगने वाली बाजारों में दुकान लगा कर गोश्त बेचता था. इस के अलावा वह और्डर मिलने पर भी गोश्त की सप्लाई करता था. खालों को वह लखनऊ के खदरा स्थित चमड़ा मंडी में जा कर बेच आता था.
15 जून, 2016 को वह खालें ले कर निकला तो बसअड्डे तक पहुंचाने उस का भाई अकील आया था. शकील को बस में बैठा कर वह लौट गया था. शकील जब भी खालें ले कर जाता था, दोपहर बाद 2-3 बजे तक घर लौट आता था. लेकिन उस दिन वह देर शाम तक भी घर नहीं लौटा तो घर वालों ने उस के मोबाइल पर फोन किया.
लेकिन शकील का फोन बंद था, इसलिए बात नहीं हो सकी. घर वाले परेशान हो गए. अकील ने शकील के मिलने वालों को फोन किए, पर कोई उस के बारे में कुछ नहीं बता सका. रात भी काफी हो चुकी थी. रात में उसे कहीं नहीं ढूंढा जा सकता था, इसलिए अकील ने अगले दिन भाई को ढूंढने खदरा जाने का फैसला किया.
अगले दिन यानी 16 जून को अकील भाई की खोज में फिर निकल पड़ा. खालमंडी में जा कर पता चला कि शकील मंडी में आया तो था, पर वहां से वह गया कहां, इस बारे में कोई नहीं बता सका. थकहार कर अकील भी घर लौट आया.
उसी दिन शाम को कुछ लोगों ने संडीला में निर्माणाधीन एक पुलिया के नीचे एक लाश पड़ी देखी. संडीला हरदोई जिले का वह कस्बा है, जो लखनऊ सीमा से लगा हुआ है. लाश मिलने की सूचना किसी ने फोन द्वारा संडीला कोतवाली को दे दी थी. सूचना पा कर थानाप्रभारी डी.पी. सिंह मय हमराहियों के मौके पर पहुंच गए.
उन्होंने पुलिया के नीचे से लाश निकलवाई. मृतक पुरुष था, उस की उम्र यही कोई 34-35 साल थी. निरीक्षण करने पर उस के गले पर दबाए जाने के निशान दिखाई दिए. इस का मतलब उस की हत्या गला दबा कर की गई थी. सूचना पा कर एएसपी (पूर्वी) बी.सी. दुबे और सीओ (संडीला) चरण सिंह भी आ गए थे.
किसी ने अकील को भी संडीला में पुलिया के नीचे लाश मिलने की जानकारी दे दी थी. पहले वह संडीला थाने गया, जहां उसे बताया गया कि अकील की लाश अभी घटनास्थल पर ही पड़ी है. वह घटनास्थल पर पहुंचा तो लाश देखते ही रोने लगा. उस ने लाश की पहचान अपने भाई शकील के रूप में कर दी. इस के बाद मौके की काररवाई पूरी कर के थानाप्रभारी ने लाश को पोस्टमार्टम के लिए जिला चिकित्सालय हरदोई भिजवा दिया.
डी.पी. सिंह ने अकील की तहरीर पर अज्ञात के खिलाफ हत्या कर लाश छिपाने का मुकदमा दर्ज करा दिया और इस केस की जांच शुरू कर दी. उन्होंने सब से पहले शकील की पत्नी सूफिया से बात की.
उस ने बताया कि उस दिन वह मोबाइल फोन अपने साथ नहीं ले गए थे. जबकि अकील यही समझ रहा था कि शकील मोबाइल ले गया है, इसलिए वह बारबार उसे फोन कर रहा था. सोफिया ने पति का मोबाइल बंद क्यों कर दिया था, यह बात पुलिस की समझ में नहीं आ रही थी.
शक होने पर पुलिस ने शकील के मोबाइल की काल डिटेल्स निकलवाई तो उस में एक नंबर ऐसा पाया गया, जिस पर रोजाना काफी देर तक बातें होती थीं. वह नंबर किसी रेहान का था. पुलिस ने अकील से रेहान के बारे में पूछा तो उस ने कहा कि वह और उस का परिवार किसी भी रेहान को नहीं जानता.
अकील का कहना था कि शकील का फोन उस के अलावा उस की पत्नी सूफिया के पास ही रहता था. वह भी उस फोन का इस्तेमाल करती थी. इस से पुलिस को यह मामला नाजायज संबंधों का नजर आया.
डी.पी. सिंह ने सूफिया से कुछ पूछना अभी मुनासिब नहीं समझा. क्योंकि घर में गमी का माहौल था. इस बीच उन्होंने रेहान के बारे में जानकारी जुटाई तो पता चला कि रेहान बाराबंकी जनपद के पिंडसावा गांव का रहने वाला था.
लेकिन इस समय वह लखनऊ के हसनगंज थाने के खदरा में रामलीला मैदान के पास किराए का कमरा ले कर रहता था. उस के पास खुद की एक एंबुलैंस थी, जो किसी निजी अस्पताल में लगा रखी थी. यह जानकारी पुलिस के लिए काफी थी.
उस की तलाश के लिए एक पुलिस टीम लखनऊ के खदरा स्थित उस के कमरे पर भेजी गई, पर वह कमरे पर नहीं मिला. पुलिस ने उस के पीछे मुखबिर लगा दिए. 20 जून को मुखबिर ने सूचना दी कि रेहान 2 साथियों के साथ अपनी एंबुलैंस से अतरौली रोड पर जा रहा है.
इस सूचना पर थानाप्रभारी डी.पी. सिंह पुलिस टीम के साथ वहां पहुंचे और टेढ़ी पुलिया के पास से उसे और उस के दोनों साथियों को हिरासत में ले लिया. उस के दोनों साथियों के नाम संदीप और नौशाद थे.
थाने ला कर जब रेहान से सख्ती से पूछताछ की गई तो उस ने आसानी से शकील की हत्या करने का अपराध स्वीकार कर लिया. उस ने बताया कि उस की हत्या में उस के 3 दोस्त नौशाद, संदीप और फुजैल भी शामिल थे. नौशाद और संदीप सिंह उस के साथ ही थे, जबकि तीसरा साथी फुजैल फरार था.
रेहान के बताए अनुसार, शकील की हत्या की साजिश में उस की पत्नी सूफिया का भी हाथ था. पुलिस सूफिया को भी गिरफ्तार कर के थाने ले आई. सभी से की गई पूछताछ में शकील की हत्या की जो कहानी सामने आई, वह इस प्रकार थी—
सूफिया राजधानी लखनऊ के थाना बख्शी का तालाब के रहने वाले मुन्ना की बेटी थी. मुन्ना गोश्त का व्यापारी था. उस के परिवार में पत्नी फरजाना और 3 बेटियां तथा 2 बेटे थे. इन में सब से बड़ी सूफिया थी. वह आठवीं तक पढ़ी थी, पर बातचीत से कतई नहीं लगता था कि वह कम पढ़ीलिखी है.
16 साल की उम्र में ही वह जवान दिखने लगी थी. उस की खूबसूरती पर मर मिटने वाले लड़कों की कमी नहीं थी. लेकिन उन में से कोई भी सूफिया को नहीं भाया. उस की नजरें हमेशा अपने सपनों के राजकुमार की तलाश में लगी रहती थीं. उसी दौरान उस की रेहान से आंखें चार हो गईं.
रेहान बाराबंकी जिले के थाना घुघतेल के गांव पिंडसावां के रहने वाले मोहम्मद ईशा का बेटा था. वह अपने 3 भाईबहनों में सब से बड़ा था. वह मिडिल क्लास से आगे नहीं पढ़ सका. उस ने कार चलानी सीख ली. इस के बाद वह ड्राइवर की नौकरी ढूंढने लगा. इस पर उस के दोस्तों ने उसे नौकरी के बजाय एक एंबुलैंस खरीद कर किसी अस्पताल में या किसी बड़े डाक्टर के यहां लगाने की सलाह दी.
रेहान को यह सलाह उचित लगी, क्योंकि इस में उसे ड्राइवर रखने की भी जरूरत नहीं थी. वह खुद गाड़ी चलाना जानता था. उस का यह भी खर्च बच रहा था.
किसी तरह पैसों का इंतजाम कर के रेहान ने एक एंबुलैंस खरीद ली. दौड़भाग कर के उस ने एंबुलैंस लखनऊ के एक अस्पताल में लगवा ली और लखनऊ के खदरा में रामलीला मैदान के पास किराए पर कमरा ले कर रहने लगा.
सूफिया के घर के पास ही रेहान की रिश्तेदारी थी. वह वहां आताजाता रहता था. इसी आनेजाने में रेहान ने सूफिया को देखा तो वह उसे कुछ इस तरह भा गई कि उस के दिल में बस गई. दूसरी ओर सूफिया को रेहान अच्छा लगा. दोनों में परिचय हुआ और कुछ बातें हुईं तो फिर उन की मुलाकातें होने लगीं. हर मुलाकात में दोनों एकदूसरे के करीब आते गए. एक दिन मौका मिलने पर रेहान ने प्यार का इजहार भी कर दिया.
दोनों का यह प्यार परवान चढ़ने लगा. एक दिन वह भी आ गया, जब दोनों के बीच की सारी दूरियां खत्म हो गईं. उन का मिलनेजुलने का यह सिलसिला चलता रहा. कहते हैं, प्यार को कितना भी छिपाने की कोशिश कीजिए, वह छिप नहीं पाता. यानी सूफिया के प्यार की भनक उस के घर वालों तक भी पहुंच ही गई.
सूफिया के पिता ने उसे खूब मारापीटा और घर से निकलने पर पाबंदी लगा दी. उस की शादी के लिए लड़का देखने लगे. लेकिन सूफिया ने रेहान के अलावा किसी अन्य से शादी करने से मना कर दिया.
मुन्ना ने उसे धमकी दी कि अगर उस ने उन का कहना नहीं माना तो वह उसे खत्म कर देंगे. बाप की इस धमकी से सूफिया डर गई और शादी के लिए राजी हो गई.
किसी ने मुन्ना को वली मोहम्मद के बेटे शकील के बारे में बताया. मुन्ना ने उस के बारे में पता किया तो उन्हें वह उपयुक्त लगा. जल्द ही रिश्ता पक्का कर के उन्होंने बेटी का निकाह शकील के साथ कर दिया. यह 8 साल पहले की बात है.
न चाहते हुए भी सूफिया को शकील से निकाह करना पड़ा था, ससुराल आ कर वह धीरेधीरे घरगृहस्थी में रम गई. निकाह के कारीब एक साल बाद वह एक बेटे की मां बनी, जिस का नाम अल्तमस रखा.
समय बीतता गया, लेकिन सूफिया रेहान को नहीं भूली. वैसे भी पहला प्यार आसानी से कहां भुलाया जाता है. वह जब भी मायके आती, उस की नजरें रेहान को ही ढूंढती रहती थीं. लेकिन सूफिया के निकाह के बाद रेहान ने रिश्तेदारी में आनाजाना छोड़ दिया था.
सूफिया ने उम्मीद का दामन नहीं छोड़ा. एक दिन उस की मुलाकात रेहान से हो ही गई. दोनों एकदूसरे को देख कर काफी खुश हुए. इस के बाद रेहान सूफिया को अपने कमरे पर ले गया, जहां दोनों ने अपनेअपने दिलों का हाल बयान किया. वे लंबे अरसे बाद मिले तो एकदूसरे की बांहों में समा कर मिलने का जश्न भी मनाया.
इस के बाद दोनों जबतब मिलने लगे. सूफिया बारबार मायके के बहाने लखनऊ नहीं जा सकती थी, इसलिए अब वह बीमारी का नाटक कर के दवा लेने के बहाने लखनऊ जाने लगी. वह अपने साथ बेटे अल्तमस को भी ले जाती थी. लेकिन अल्तमस अब 7 साल का हो गया था. सूफिया को डर लगा रहता था कि कहीं घर में कोई उस से बहलाफुसला कर न पूछ ले कि वह कहां जाती है, किस से मिलती है.
इस डर के बारे में उस ने रेहान को बताया तो उस ने मासूम अल्तमस को डराने के लिए उस का गला कुछ देर तक जोर से दबाए रखा, जिस से वह तड़प उठा. रेहान से छूट कर अल्तमस इतना डर गया कि अपनी मां सूफिया के सीने से जा लगा. रेहान ने उसे धमकी दी कि अगर उस ने घर में किसी को कुछ बताया तो वह उसे जमीन पर पटकपटक कर मार डालेगा.
दवा लेने के लिए सूफिया के लखनऊ जाने के चक्कर बढ़ने लगे तो शकील को उस पर शक हुआ. इस बात को ले कर शकील का सूफिया से रोज झगड़ा होने लगा. जिस में कई बार शकील सूफिया की पिटाई भी कर देता.
इस से सूफिया परेशान रहने लगी. इस से उस के दिमाग में एक बात अच्छी तरह बैठ गई कि रेहान को हमेशाहमेशा के लिए पाने के लिए शकील को रास्ते से हटाना जरूरी है. रोजरोज के झगड़े और मारपीट से वह वैसे भी तंग आ गई थी. इसलिए इस बारे में उस ने रेहान से बात की.
सूफिया ने यह भी कहा कि इस काम में यदि वह किसी की मदद लेना चाहे तो ले ले. वह शकील की हत्या के लिए एक लाख रुपए उसे देगी.
इस के बाद रेहान ने शकील की हत्या के लिए अपने 3 दोस्तों नौशाद, संदीप और फुजैल से बात की. तीनों ही हसनगंज थाने के अलगअलग मोहल्लों के रहने वाले थे. पैसों के लालच में तीनों शकील की हत्या करने को तैयार हो गए.
काम कैसे करना है, इस के लिए रेहान ने सभी के साथ बैठ कर योजना बनाई और उस योजना के बारे में सूफिया को बता दिया. 15 जून, 2016 को सुबह 10 बजे शकील बकरी की खालें बेचने के लिए बस से लखनऊ के लिए निकला तो शकील का मोबाइल सूफिया ने अपने पास रख लिया था.
उसी मोबाइल से उस ने रेहान को शकील के लखनऊ जाने के बारे में जानकारी दे दी. रेहान ने अपने तीनों साथियों को फोन कर के बुला लिया और एंबुलैंस में बैठा कर पक्के पुल पर पहुंच गया.
खालें बेचने के बाद शकील लौट रहा था तो उसे पक्के पुल पर रेहान दिख गया. शकील जैसे ही पास पहुंचा, रेहान ने उसे अपने साथियों की मदद से जबरन एंबुलैंस में बैठा लिया. रेहान ड्राइविंग सीट पर बैठा था तो नौशाद, संदीप और फुजैल शकील को दबोचे पीछे बैठे थे.
वे उसे लखनऊ से सिधौलीसीतापुर मार्ग पर ले गए. उन्होंने उस के गले में अंगौछा डाल रखा था. अंगौछे के दोनों सिरे 2 दोस्तों ने पकड़ रखे थे. उन्होंने शकील को धमकी दे रखी थी कि यदि शोर मचाया तो उसी अंगौछे से वे उस का गला घोंट देंगे.
देर शाम को वे उसे हरदोई के थाना संडीला ले गए, जहां उन्होंने शकील के गले में पड़े अंगौछे से गला कस कर उस की हत्या कर दी. इस के बाद वहीं एक पुलिया के नीचे उस की लाश को फेंक कर चले गए. शकील के अंगौछे को रेहान ने एंबुलैंस में ही छिपा दिया.
रेहान, संदीप, नौशाद और सूफिया से पूछताछ के बाद थानाप्रभारी डी.पी. सिंह ने शकील की हत्या में प्रयुक्त एंबुलैंस नंबर यूपी 32 ईएन 8981 को अपने कब्जे में ले लिया और उसी से हत्या में प्रयुक्त अंगौछा भी बरामद कर लिया.
पूछताछ और बरामदगी के बाद उन्होंने सभी को सीजेएम की अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया. कथा लिखे जाने तक फुजैल फरार था. पुलिस उस की गिरफ्तारी का प्रयास कर रही थी.






