Love Triangle Murder. कौशल दीपाली नाम की जिस लड़की से प्यार करता था, उसी पर कौशल के जिगरी दोस्त गोलू की भी नजर थी. फिर दीपाली को हासिल करने के लिए गोलू ने कौशल के साथ जो साजिश रची, उस ने दोस्ती को ही कलंकित कर डाला.
कौशल करीब एक बजे जब औफिस से घर लौटा तो बहुत खुश था. वजह यह थी कि 5 दिन बाद उस का जन्मदिन था और उस की प्रेमिका दीपाली ने उस के इस जन्मदिन को यादगार तरीके से मनाने का ऐलान किया था. दीपाली ने उस के जन्मदिन को यादगार बनाने का वायदा करते हुए कहा था कि जन्मदिन के आयोजन का सारा खर्चा वह खुद उठाएगी. जन्मदिन की पार्टी में करीब 100 लोगों को बुलाया जाना तय हुआ था. मेहमानों में दीपाली और कौशल के दोस्तों और उन के परिवार वालों के साथसाथ कुछ चुनिंदा रिश्तेदारों को भी बुलाए जाने की बात थी.
दीपाली और कौशल एक ही गांव में रहते थे. अलगअलग बिरादरी के होने के बावजूद कौशल के घरवालों ने चूंकि दीपाली को अपनी बहू बनाने की अनुमति दे दी थी इसलिए उन्हें बेटे के दीपाली से मिलने पर कोई एतराज नहीं था.
कौशल ने ये बात अपनी मां मनोरमा को बताई तो वे भी बहुत खुश हुईं. क्योंकि उन्हें बच्चों की खुशी में ही अपनी खुशी दिख रही थी. मां ने कौशल के लिए खाना परोसा. खाना खाने के करीब घंटा भर बाद कौशल के मोबाइल पर दीपाली की काल आई. दीपाली ने फोन अपनी मां के फोन से किया था. उस ने जगह बता कर शाम को उसे मिलने के लिए बुलाया था. चूंकि दीपाली ने शाम को मिलने के लिए कहा था, इसलिए कौशल यह सोच कर किसी और से मिलने के लिए चला गया कि 1-2 घंटे में घर लौट आएगा.
कौशल ने 1-2 घंटे में घर लौटने की बात कही थी, लेकिन वह कई घंटे तक वापस नहीं लौटा. जब उसे घर से निकले घंटों हो गए तो घर वालों ने सोचा कि वह उधर से उधर ही दीपाली से मिलने चला गया होगा.
जब कई घंटे गुजर गए तो मनोरमा ने यह जानने के लिए कि कौशल इस समय कहां है, छोटे बेटे गगन से उसे फोन करने को कहा. गगन जब भाई को फोन मिलाने को हुआ तो मोबाइल फोन के डिसप्ले पर उस की नजर ठहर गई. शाम को करीब 5 से 6 बजे के बीच उस के मोबाइल पर कौशल की 5 मिसकाल आई थीं. जिस वक्त मिस काल आई थीं उस समय गगन सो रहा था. सोने से पहले उस ने फोन साइलेंस मोड पर कर दिया था. मनोरमा उस वक्त सब्जी खरीदने गई थीं.
आखिर ऐसा क्या हुआ कि भाई ने 5 काल कीं, यह सोच कर गगन ने तुरंत कौशल को फोन मिलाया. लेकिन उस का फोन स्विच्ड औफ था. गगन ने कई बार नंबर मिलाया. लेकिन हर बार उसे कौशल का फोन स्विच्ड औफ मिला.
गगन ने यह बातें मां को बताईं तो वे भी चिंतित हो उठीं. उन्होंने फौरन दीपाली को फोन लगा कर कौशल के बारे में पूछा, तो दीपाली ने बताया, ‘‘आंटी, मैं खुद आप को फोन कर के कौशल के बारे में पूछने वाली थी. उसे शाम को मुझ से मिलने आना था, लेकिन वह नहीं आया और फोन भी बंद कर रखा है.’’
‘‘बेटी वो तो दोढाई बजे का घर से गया हुआ है. मैं तो सोच रही थी कि तुम्हारे पास ही होगा. पता नहीं कहां है और फोन भी बंद कर रखा है.’’ मनोरमा ने कहा.
‘‘आंटी तुम चिंता मत करो मैं उस के दोस्तों को फोन कर के देखती हूं. कोई खबर मिलेगी तो आप को बताऊंगी.’’ कह कर दीपाली ने बात खत्म कर दी.
देखतेदेखते रात के 9 बज गए. कौशल के पिता लाखन पुरी भी घर लौट आए थे लेकिन कौशल अभी तक नहीं लौटा था. परिवार के लोगों ने उस के कुछ दोस्तों से पूछताछ की और उसे संभावित जगहों पर तलाशा लेकिन कौशल का कोई पता न चला.
दीपाली भी इधरउधर फोन कर के कौशल का पता लगाने में जुटी थी, लेकिन उस के बारे में कोई जानकारी न मिलने से वह भी परेशान थी. कौशल को तलाशते हुए रात का एक बज गया. घर वाले उस के आने का इंतजार करते रहे. बीचबीच में वे उस के मोबाइल पर फोन मिलाने की कोशिश भी करते रहे लेकिन हर बार उस का मोबाइल बंद मिला.
कौशल के बारे में कोई जानकारी न मिलने से पूरा घर रात भर परेशान रहा. सुबह होने पर कौशल के घर वालों के अलावा उस के यारदोस्त और सगे संबंधी उस की खोज में घर से निकल गए. दोपहर तक खोजबीन करने के बाद भी जब कौशल के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली तो घरवालों को किसी अनहोनी की आशंका नजर आने लगी. वे लोग रिपोर्ट लिखाने थाना सिकंदरा पहुंच गए.
लाखन पुरी की बात सुनने के बाद थानाप्रभारी ने कौशल की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कर ली. साथ ही इस की सूचना अपने वरिष्ठ अधिकारियों को भी दे दी. यह 23 नवंबर, 2013 की बात है. चूंकि कौशल के लापता होने के बाद उस के घर वालों के पास फिरौती के लिए कोई काल नहीं आई थी, इसलिए पुलिस को उस के अपहरण की संभावना कम ही दिखाई दे रही थी.
लव ऐंगल को ध्यान में रखते हुए उन्होंने लाखन पुरी से पूछा कि कहीं कौशल का किसी लड़की के साथ कोई चक्कर वगैरह तो नहीं चल रहा था.
इस पर लाखन पुरी ने बताया कि गांव की ही रहने वाली दीपाली और कौशल एकदूसरे को बहुत प्यर करते थे और वे शादी भी करना चाहते थे. हम लोग तो इस शादी के लिए तैयार थे लेकिन दीपाली के घरवाले कौशल को नहीं चाहते थे.
पुलिस ने दीपाली और उस के मांबाप से पूछताछ की तो उन्होंने साफ कह दिया कि कौशल के बारे में कोई जानकारी नहीं है. पुलिस ने कौशल के फोन की काल डिटेल्स निकलवाई तो पता चला कि कौशल की अंतिम बात दीपाली की मां से हुई थी. इसी आधार पर पुलिस का शक एक बार फिर दीपाली के घरवालों पर आ कर टिक गया.
पुलिस ने कौशल के मांबाप और भाइयों से एक बार फिर बात की. मगर इस बार भी उन से कौशल के बारे में कुछ पता नहीं चल सका. वे सब खुद को बेकुसूर बताते रहे. पुलिस को जब कौशल के बारे में कहीं से कोई सुराग नहीं मिला तो उस ने भी इस मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया.
उधर कौशल के मातापिता ने अपने बेटे के रहस्यमय ढंग से गायब होने में उस की प्रेमिका दीपाली के परिजनों का ही हाथ बताते हुए उच्चस्तरीय जांच के लिए आईजी आशुतोष पांडेय, डीआईजी विजय सिंह मीणा, एसएसपी (आगरा) शलभ माथुर से मुलाकात की.
वर्ष 2013 बीत चुका था. मनोरमा को उम्मीद थी कि नए साल 2014 में उन का बेटा कौशल जरूर घर लौट आएगा. इसी उम्मीद पर उन का एकएक दिन गुजर रहा था.
इसी बीच 9 जनवरी, 2014 को मनोरमा के मोबाइल फोन की घंटी बजी. उन्होंने जब स्क्रीन पर नंबर देखा तो उन के चेहरे पर मुसकान तैर गई क्योंकि वह नंबर कौशल का ही था. उन्होनें फोन रिसीव किया तो दूसरी तरफ से आवाज आई, ‘‘मम्मी मुझे बचा लो. दीपाली के मांबाप ने मुझे बंधक बना कर रखा है. ये लोग मुझे मार कर जंगल में गाड़ने की बात कर रहे हैं.’’
‘‘बेटा तू चिंता न कर…’’ मनोरमा बेटे से बस इतना ही कह पाई थीं कि दूसरी ओर से फोन कट गया. अपने बेटे से बात कर के मनोरमा को इस बात की तसल्ली हो गई कि वह सहीसलामत है. लेकिन उन्हें कौशल की आवाज बदलीबदली लग रही थी. लेकिन उन्होंने यह सोच कर इस बात पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया कि पिछले 50 दिनों से कैद में रहने की वजह से वह डरा सहमा हुआ होगा. इसीलिए उस की आवाज में घबराहट थी.
बेटे से बात करने के बाद उन्होंने यह खबर फौरन अपने पति लाखन पुरी को फोन कर के दे दी और उन्हें घर बुला लिया. लाखन पुरी पत्नी को ले कर थाने जा पहुंचे. अब तक सिकंदरा के थानाप्रभारी बदल चुके थे. उन की जगह नए थानाप्रभारी तेजबहादुर यादव आए थे. उन्हें कौशल के लापता होने वाले मामले की ज्यादा जानकारी नहीं थी. लेकिन जब उन्हें लाखन पुरी से पूरी बात पता चली तो उन्होंने इस मामले में देर करना उचित नहीं समझा. वह पुलिस टीम के साथ दीपाली के घर पहुंच गए. लेकिन वह यह देख कर हैरान रह गए कि उस के घर में सबकुछ सामान्य था.
दीपाली के पिता रोजाना की तरह अपने औफिस गए हुए थे. थानाप्रभारी ने घर के लोगों से इस संबंध में पूछताछ की तो सब चौंके. उन्हें लग रहा था कि कोई उन के साथ बड़ी साजिश कर रहा है. अपनी संतुष्टि के लिए पुलिस ने उन के घर का कोनाकोना छान मारा, लेकिन कौशल वहां नहीं मिला.
खैर पुलिस पूछताछ कर थाने लौट आई. पुलिस ने दीपाली के पिता के मोबाइल फोन की 9 जनवरी की लोकेशन की जांच की तो उस दिन की लोकेशन उन के दफ्तर की ही मिली.
पुलिस के सामने अब सवाल यह था कि कौशल का फोन आया कहां से था. पुलिस ने कौशल के फोन की भी काल डिटेल्स निकलवाई तो पता चला कि जिस समय मनोरमा के मोबाइल पर उस का फोन आया था उस समय उस की लोकशन बोदला क्षेत्र की थी और मनोरमा से बात करने के बाद वह फोन बंद कर दिया गया था.
कौशल ने बोदला में कहां से फोन किया था, सही जानकारी हासिल करना पुलिस के लिए आसान नहीं था. घूमफिर कर पुलिस के शक की सुई दीपाली के घरवालों पर ही घूम रही थी.
थानाप्रभारी तेज बहादुर यादव ने कौशल के फोन को इलेक्ट्रौनिक सर्विलांस पर लगवा दिया. और उस से यह पता लगाने की कोशिश की कि जिस फोन से मनोरमा के पास फोन आया था वह उस का आईएमईआई नंबर क्या था. और अब उस आईएमईआई नंबर के फोन में कौन सा सिम काम कर रहा है.
इस जांच में पुलिस को पता चला कि जिस मोबाइल से मनोरमा के पास फोन आया था अब उस फोन में दूसरे नंबर का सिम एक्टिव है. वह नया नंबर हासिल करने के बाद पुलिस को यह जानकारी मिली कि वह नया नंबर कैलाश मोड़ पर रहने वाले विजय गोस्वामी के नाम से खरीदा गया था.
पुलिस विजय गोस्वामी के पास पहुंची तो वह घर पर ही मिल गया. पुलिस ने उस से कौशल के बारे में पूछताछ की तो उस ने बताया, ‘‘मुझे कौशल के बारे में कुछ नहीं पता और न ही मैं ने उस की मां को कोई फोन किया था, 2-3 दिन पहले गोलू मुझ से फोन जरूर ले गया था. फिर घंटे भर बाद उस ने मुझे फोन दे दिया था. अब यह नहीं पता कि उस ने मेरे फोन से कहांकहां फोन किए थे.’’
‘‘यह गोलू कौन है?’’ थानाप्रभारी ने पूछा.
‘‘गोलू और हम कौशल के ही दोस्त हैं. और वैसे कौशल रिश्ते में गोलू का भतीजा लगता है. वो भी कैलाश गांव में ही रहता है.’’ विजय गोस्वामी ने बताया.
इन लोगों से बात कर के पुलिस यह जानना चाहती थी कि कौशल कहां है. इसलिए वह तुरंत गोलू के घर पहुंच गई, लेकिन वह घर से फरार मिला. पुलिस को उस पर शक हो गया. अब विजय ही पुलिस के शिकंजे में था.
पुलिस ने जब उस से सख्ती से मालूमात की तो उस ने ऐसा सच उगला कि पुलिस भी चौंक गई और कौशल के घर में रोनापीटना शुरू हो गया. उस ने बताया कि अपने दोस्त चूड़ामणि शर्मा और सुंदर के साथ मिल कर उस ने कौशल की हत्या कर के उस की लाश जंगल में डाल दी है.
पुलिस ने उसी दिन उस की निशानदेही पर चूड़ामणि शर्मा और सुंदर को भी उन के घरों से गिरफ्तार कर लिया और लाश बरामद करने के लिए उन्हें कैलाश गांव से सटे जंगल में ले गई.
थाना प्रभारी ने कौशल की हत्या और अभियुक्तों को गिरफ्तार करने की बात उच्चाधिकारियों को बताई तो पुलिस क्षेत्राधिकारी (हरिपर्वत) समीर सौरभ भी कैलाश गांव के जंगल में पहुंच गए. पुलिस टीम तीनों अभियुक्तों को ले कर जंगल में लाश तलाशती रही. लेकिन लाश नहीं मिली.
चूंकि उन्होंने हत्या तकरीबन 50 दिन पहले की थी, इसलिए इस बात की उम्मीद लगाई जा रही थी कि लाश को जंगली जानवर खा गए होंगे. लाश के अस्थिपंजर तलाशने के लिए पुलिस 14 घंटों तक जंगल की खाक छानती रही लेकिन पुलिस को कौशल की लाश या अस्थिपंजर नहीं मिला. पुलिस टीम परेशान थी कि जब इन्होंने लाश यहां डाली थी तो कम से कम उस का कुछ सुबूत तो यहां मिलना चाहिए था.
पुलिस को लगा कि कहीं ऐसा तो नहीं कि इन लोगों ने लाश को कहीं और ठिकाने लगा दिया हो और ये गुमराह करने की कोशिश कर रहे हों, इसलिए पुलिस ने लाश के बारे में तीनों अभियुक्तों से एक बार फिर अलगअलग पूछताछ की तो पता चला कि उन्होंने कौशल की हत्या करने के बाद लाश जंगल में फेंकी नहीं थी, बल्कि गड्ढा खोद कर दबा दी थी.
उन की निशानदेही पर पुलिस ने उसी जंगल में एक जगह खुदाई कराई तो गड्ढे में एक कंकाल मिला. गड्ढे में पड़े जूते और घड़ी देख कर उस के घरवालों ने कंकाल की शिनाख्त कौशल के रूप में कर ली.
कौशल का कंकाल पाए जाने की सूचना पूरे कैलाश गांव में आग की तरह फैल गई. जिस ने भी सुना उस के होश उड़ गए कि जिन दोस्तों पर कौशल आंखें मूंद कर विश्वास करता था, आखिर वे उस के हत्यारे क्यों बन गए? यह खबर सुन कर लोगों में गुस्सा बढ़ रहा था. सैकड़ों लोग जंगल में पहुंचने लगे.
भीड़ कहीं आक्रोशित न हो जाए, इसलिए पुलिस ने जल्द ही आवश्यक काररवाई कर कौशल के कंकाल को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया और थाने में दर्ज उस की गुमशुदगी को हत्या की धारा में तब्दील कर दिया. इस की जांच थानाप्रभारी तेजबहादुर यादव को सौंप दी गई.
थानाप्रभारी ने विजय गोस्वामी, चूड़ामणि शर्मा और सुंदर से थाने में पूछताछ की तो कौशल की हत्या की एक दिलचस्प कहानी सामने आई.
उत्तर प्रदेश के आगरा जिले के थाना सिकंदरा के तहत आता है कैलाश गांव. यह गांव नैशनल हाईवे-2 के किनारे बसा हुआ है. यूं तो यहां सभी जातिधर्म के लोग रहते हैं लेकिन गांव में ब्राह्मणों की संख्या अधिक है. इन्हीं ब्राह्मणों में से एक लाखन पुरी का परिवार भी था. लाखन पुरी के परिवार में पत्नी के अलावा 2 बेटे और 2 बेटियां थीं. बड़ा बेटा कौशल बीकौम करने के बाद एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी कर रहा था. जबकि छोटा गगन पुरी अभी पढ़ रहा था.
छोटा परिवार था. इसलिए उन के परिवार में किसी तरह की समस्या नहीं थी. लेकिन पिछले कुछ सालों से उन के सामने एक ऐसी समस्या खड़ी हो गई कि पूरी बिरादरी में उन की किरकिरी हो रही थी.
बात करीब 5-6 साल पुरानी है. जब कौशल नवीं कक्षा में पढ़ रहा था. उसी कक्षा में दीपाली प्रजापति नाम की एक लड़की भी पढ़ती थी. वह सिकंदरा रोड पर स्थित लक्ष्मी पैलेस वाली गली में नवनिर्मित कालोनी में रहती थी. कौशल के मुकाबले दीपाली पढ़ने में होशियार थी. उस के पिता यूपी रोडवेज में नौकरी करते थे. साथ पढ़तेपढ़ते कौशल की दीपाली से दोस्ती हो गई थी. जैसेजैसे वे जवानी की दहलीज पर चढ़े तो उन की दोस्ती प्यार में बदल गई.
कौशल के अलावा दीपाली को क्लास के कई और लड़के भी चाहते थे लेकिन जब उन्होंने देखा कि दीपाली का झुकाव पूरी तरह से कौशल की तरफ हो गया है तो वे सब कौशल से मन ही मन नफरत करने लगे. कौशल उन की नजरों में खटक गया था.
इंटरमीडिएट पास करने के बाद कौशल ने आर.बी.एस. कालेज में दाखिला ले लिया वहीं दीपाली ने अपने पास के ही कालेज में.
बेशक दोनों के कालेज बदल गए थे लेकिन दिलों की दूरियां नहीं बढ़ी थीं. वे पहले की ही तरह मिलते रहे. शहर का हर सिनेमा हाल, मौल, पार्क आदि दोनों के प्यार के चश्मदीद बन चुके थे. विजातीय होने के बावजूद भी वे विवाह करने का फैसला ले चुके थे.
इसी तरह लुकाछिपी से उन का प्यार परवान चढ़ता गया लेकिन जब एक दिन दीपाली के घरवालों ने अपनी आंखों से कौशल को अपने ही घर में देख लिया तो उन की आंखें खुली की खुली रह गईं.
बात करीब दोढाई साल पहले की है. एक रोज दीपाली को छोड़ कर उस के घर के सभी लोग 2 दिन के प्रोग्राम पर कहीं जाने के लिए घर से निकले थे. दीपाली ने घर वालों के साथ न जाने का कोई बहाना बना दिया था. घर वालों के चले जाने के बाद वह बहुत खुश हुई. उस ने अपने प्रेमी के साथ मस्ती करने का प्रोग्राम बनाया और उसे फोन कर के अपने घर पर बुला लिया.
उस समय घर में उन दोनों के अलावा और कोई नहीं था. इसलिए एकांत देख वे हदें पार करने लगे. उधर दीपाली के घर वाले जब स्टेशन पर पहुंचे तो उन की ट्रेन छूट गई. मायूस हो कर जब वे घर लौटे तो उन्होंने मुख्य दरवाजा बंद पाया. उन्होंने यही सोचा कि दीपाली अकेली है इसलिए उस ने दरवाजा बंद कर लिया होगा. लेकिन उन्हें क्या पता कि अंदर वह क्या गुल खिला रही है.
उन्होंने दरवाजा खटखटाया. दरवाजा खटखटाने की आवाज सुन कर कौशल और दीपाली का सारा प्यार उड़नछू हो गया. दोनों ने फटाफट कपड़े पहने. दीपाली ने जैसे ही दरवाजा खोला, सामने घर वालों को देख कर वह सन्न रह गई. अंदर कमरे में उस का प्रेमी कौशल बैठा था. वह घबरा रही थी कि आज उस की चोरी पकड़ी जाएगी.
दीपाली के पिता और भाई ने जब कमरे में कौशल को बैठा देखा तो उन का खून खौल गया. वे उसे जानते ही थे. उन्होंने उस की जमकर पिटाई की और आइंदा दीपाली की तरफ आंख न उठाने की हिदायत भी दी, साथ ही दीपाली को भी बहुत डांटा.
कौशल ने पिटाई की यह बात अपने परिजनों को नहीं बताई. मगर एक रोज उस ने दीपाली से शादी करने की बात अपनी मां से बता दी. चूंकि दीपाली उन की बिरादरी की नहीं थी, इसलिए मां ने पहले तो उस से शादी करने को मना कर दिया लेकिन जब कौशल ने जिद की तो उन्होंने इस बारे में पति से बात की. फिर बेटे की इच्छा को देखते हुए उन्हें हामी भरने के लिए मजबूर होना पड़ा.
कौशल के घर वाले तो तैयार हो गए लेकिन दीपाली के घरवाले आर्थिक रूप से ज्यादा संपन्न थे इसलिए उन्होंने दीपाली से साफ कह दिया कि वह कौशल से उस की शादी हरगिज नहीं करेंगे. वे उस की शादी अपनी ही बिरादरी के लड़के से करेंगे.
दीपाली ने यह बात कौशल को बताई तो कौशल के मातापिता ने तय कर लिया था कि वे इस बारे में दीपाली के घर वालों से बात कर के शादी के लिए राजी करेंगे. लाखन पुरी और मनोरमा दीपाली के परिजनों से बात करते कि इस से पहले कौशल रहस्यमय तरीके से गायब हो गया.
थानाप्रभारी तेज बहादुर यादव ने विजय गोस्वामी, चूड़ामणि और सुंदर से विस्तार से पूछताछ की तो ये मामला आगे भी खुलता चला गया.
दीपाली एक संपन्न परिवार से थी इसलिए वह कौशल की आर्थिक मदद भी कर दिया करती थी. ये बात कौशल के कुछ अजीज दोस्तों को पता चली तो वे भी कौशल से नफरत करने लगे थे. इन्हीं में थे चंद्रवीर उर्फ गोलू, कैलाश और विजय गोस्वामी. ये सब एक ही एज ग्रुप के थे. गोलू रिश्ते में कौशल का चाचा लगता था और वह उस के साथ ही कालेज में पढ़ता था. विजय गांव के नाते कौशल का ममेरा भाई था. विजय के पिता को मनोरमा ने मुंहबोला भाई बना रखा था.
ये दोनों भले ही उस के संबंधी थे लेकिन उन्होंने उस की प्रेमिका दीपाली पर डोरे डालने शुरू कर दिए थे. प्रेमी के दोस्त होने की वजह से दीपाली इन लोगों से बातचीत भी कर लेती थी. इस से ये लोग समझते थे कि वह उन में दिलचस्पी ले रही है. इसी गलतफहमी ने गोलू का ध्यान भटका दिया.
गोलू को लगने लगा था कि यदि उस के और दीपाली के बीच में कौशल न रहे तो दीपाली पके फल की तरह उस की झोली में आ टपकेगी. अब वह यही सोचने लगा कि कौशल को रास्ते से कैसे हटाया जाए? इस बारे में उस ने अपने दोस्त विजय गोस्वामी से बात की तो वह दोस्ती के नाते गोलू का साथ देने को तैयार हो गया.
अपने मंसूबे को पूरा करने के लिए गोलू अब कौशल के साथ ज्यादा रहने लगा था. उस की बाइक में पैट्रोल भरवा कर इधरउधर घूमता. और उसे ठिकाने लगाने का वह मौका ढूंढ़ने लगा.
इसी बीच अमित सोनी नाम के एक फोटोग्राफर से कौशल का झगड़ा हो गया. बताया जाता है कि कौशल ने अमित से कुछ रुपए उधार लिए थे. बारबार कहने के बाद भी वह उस के पैसे नहीं लौटा पा रहा था. 7 अक्तूबर, 2013 को अमित सोनी ने उस से अपने पैसों का फिर तकादा किया तो कौशल को बारबार तकादा करना अच्छा नहीं लगा और उस ने अमित सोनी के गाल पर तमाचा जड़ दिया.
यह बात अमित को बहुत बुरी लगी. गोलू ने मौके का फायदा उठाते हुए अमित को भी कौशल के प्रति भड़का कर उसे इस का बदला लेने को उकसाया. अमित ने कह दिया कि वह कौशल से बदला लेने के लिए कुछ भी करने को तैयार है. फिर क्या था, गोलू ने अमित को भी अपनी योजना में शामिल कर लिया.
22 नवंबर, 2013 को जब कौशल घर से खाना खा कर किसी से मिलने निकला तो उसे रास्ते में कैलाश मोड़ से पहले पड़ने वाले जंगल के पास चंद्रवीर उर्फ गोलू, अमित सोनी, विजय गोस्वामी, चूड़ामणि और सुंदर मिले. सभी उसे बातों में लगा कर जंगल में ले गए.
उन लोगों ने वहां पर शराब पीने का प्रोग्राम बना लिया. कौशल उन की योजना से अनजान था. दोस्तों ने शराब मंगा कर जंगल में बैठ कर ही पीनी शुरू कर दी. वे जानबूझ कर कौशल को ज्यादा शराब पिला रहे थे. शराब पीतेपीते शाम के 5 बज चुके थे. सभी लोगों ने नशे में धुत कौशल को एक तरफ बिठा दिया.
फिर योजना का अंतिम चरण पूरा करने के लिए वे वहां से उठ गए. उसी दौरान कौशल ने अपने भाई गगन को फोन मिला कर यह बताना चाहा कि वह देर से घर आएगा लेकिन गगन फोन को साइलेंट मोड में कर के सो रहा था और उस की मां बाजार गई हुई थीं. इसलिए कई बार फोन करने के बाद भी गगन को भाई का फोन आने की पता न लगी. चूड़ामणि और सुंदर वहां से अपने घर चले आए थे.
करीब सवा 5 बजे गोलू ने पास में ही पड़े एक डंडे से कौशल के सिर पर वार किया. डंडा लगते ही उस का सिर फट गया और खून बहने लगा. उसी समय उन सभी ने उसे लातघूंसों व डंडे से पीटना शुरू कर दिया. ज्यादा नशे में होने की वजह से कौशल अपना बचाव भी नहीं कर पाया. और उन की पिटाई से उस ने दम तोड़ दिया.
कौशल की हत्या करने के बाद जल्दीजल्दी गोलू, अमित और विजय ने पहले से खोद कर रखे गड्ढे में कौशल की लाश डाल कर उस के ऊपर मिट्टी डाल दी. उस के मोबाइल को स्विच औफ कर के गोलू ने अपने पास रख लिया. इस के बाद सभी घर लौट कर अपनी दिनचर्या में ऐसे जुट गए मानो उन्होंने कुछ किया ही न हो.
उधर जब देर रात तक कौशल घर नहीं लौटा तो उस की खोजबीन शुरू हुई और अगले दिन उस की गुमशुदगी भी दर्ज करा दी. गोलू और उस के साथी पुलिस काररवाई पर नजरें रखे हुए थे.
शुरू के कुछ हफ्ते तो मामला ठंडा रहा लेकिन जब कौशल के परिजनों ने पुलिस के आला अधिकारियों से मिल कर अपने बेटे को खोजने की गुजारिश की तो गोलू, विजय और अमित सोनी डर गए. उन्हें लगा कि अब वे बच नहीं पाएंगे. तब उन्होंने पुलिस की जांच को भ्रमित करने के लिए कौशल के फोन से उस की सिम निकाल कर वह सिम विजय गोस्वामी के फोन में डाल ली.
वे इस मामले में दीपाली के घरवालों को फंसाना चाहते थे. इसलिए विजय ने दीपाली के घर के पास पहुंच कर उसी फोन से कौशल की मां के पास फोन किया. उस ने खुद को कौशल बताया था और कहा था कि दीपाली के घर वालों ने उसे कैद कर रखा है. उस ने फोन दीपाली के घर के पास से इसलिए किया कि काल डिटेल्स में फोन की लोकेशन से पुलिस भी समझ जाए कि काल दीपाली के घरवालों ने ही की होगी.
मनोरमा को फोन कर के ये लोग फिर से निश्चिंत हो गए कि शक की सुई अब दीपाली के घर वालों की तरफ ही घूम जाएगी. लेकिन विजय गोस्वामी के फोन के आईएमईआई नंबर ने उन्हें पुलिस की गिरफ्त तक पहुंचा ही दिया.
पुलिस ने विजय गोस्वामी, अमित सोनी व चंद्रवीर उर्फ गोलू को कौशल की हत्या कर लाश छिपाने के आरोप में गिरफ्तार कर उन्हें न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया. कथा लिखे जाने तक सभी अभियुक्त जेल की सलाखों के पीछे थे. अन्य अभियुक्तों की तलाश में पुलिस जुटी थी. Love Triangle Murder
— इसके बाद अदालती कार्रवाई में क्या हुआ यह ज्ञात नहीं है.
— 2014 में प्रकाशित






