Youngest Long Distance Swimmer. किसी को नहीं लगता था कि 9 साल की श्रद्धा तैर कर कानपुर से इलाहाबाद के संगम तक की 280 किलोमीटर की दूरी तय कर लेगी, लेकिन उस ने साहस से काम ले कर ऐसा कर दिखाया.

उत्तर प्रदेश के नगर कानपुर के जाजमऊ स्थित सिद्धनाथ घाट पर 25 मार्च, 2014 को रोज की अपेक्षा कुछ ज्यादा ही भीड़ थी. उस भीड़ में मीडिया वाले भी शामिल थे. वहां आए सभी लोगों को नन्ही जलपरी श्रद्धा शुक्ला का इंतजार था.

10 बजे के आसपास 9 साल की एक बच्ची सिद्धनाथ मंदिर से अपने घर वालों के साथ गंगा तट की ओर बढ़ी तो भीड़, ‘गंगा मइया की जय, भारत माता की जय’ के जयकारे लगाने लगी.

वही थी नन्ही जलपरी श्रद्धा, जो भीड़ के बीच से गुजर कर घाट के किनारे खड़ी नाव पर सवार हो गई. भीड़ जयकारों के साथ हाथ हिला कर उस का स्वागत कर रही थी.

दरअसल वह कानपुर से इलाहाबाद स्थित संगम तक 280 किलोमीटर तैर कर विश्व रिकौर्ड बनाने जा रही थी. इसीलिए लोग उस के स्वागत में वहां इकट्ठा हुए थे.

9 साल की एक बच्ची के लिए 280 किलोमीटर तैरना आसान नहीं था. इसलिए लोग हैरान थे. किसी को विश्वास नहीं हो रहा था कि यह छोटी सी बच्ची तैरते हुए इतनी लंबी दूरी तय कर लेगी. लेकिन श्रद्धा को ही नहीं, उस के घर वालों को पूरा विश्वास था कि वह अपना लक्ष्य पूरा कर के ही घर लौटेगी.

ठीक साढ़े 10 बजे श्रद्धा को अपनी यात्रा शुरू करनी थी, इसलिए समय होते ही उस ने  मातापिता और दादा का आशीर्वाद लिया और घाट पर खड़ी भीड़ को हाथ हिलाते हुए गंगा में छलांग लगा दी. नन्हेनन्हे हाथों से पतवार की तरह गंगा की लहरों को चीरते हुए वह लक्ष्य की ओर बढ़ने लगी.

सुरक्षा की दृष्टि से 4 गोताखोर श्रद्धा के साथ तैरते हुए चल रहे थे. पहले दिन श्रद्धा बेहद उत्साह के साथ लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रही थी.

कानपुर के ढोड़ीघाट के पास एक विशालकाय नाला गंगा में मिलता है. इस नाले से शहर का गंदा एवं तीक्ष्ण रसायन वाला पानी बह कर आता है.

यह पानी गंगा के जल को बुरी तरह से प्रदूषित करता है. श्रद्धा जैसे ही ढोड़ीघाट पर पहुंची, नाले के रसायन युक्त गंदे पानी से उस के शरीर की कोमल त्वचा पर छाले पड़ गए. शरीर पर तेज जलन होने लगी, फिर भी श्रद्धा ने हिम्मत नहीं हारी और आगे बढ़ती रही.

शाम साढ़े 6 बजे तक श्रद्धा ने लगभग 10 किलोमीटर की दूरी तय की. रात में आराम करने की व्यवस्था उन्नाव के बक्सर घाट स्थित चंदिका देवी मंदिर में थी. वहां उस का भव्य स्वागत हुआ. रात मंदिर में गुजार कर श्रद्धा 26 मार्च की सुबह थोड़ा जल्दी उठी और चायनाश्ता कर के फिर गंगा की लहरों से खेलने लगी.

श्रद्धा का दूसरे दिन का सफर काफी रोमांचकारी रहा. वह भीटा गांव के पास पहुंची तो घोड़े के आकार वाली हजारों स्विस मछलियों ने उसे घेर लिया. उन्हें देख कर श्रद्धा को घेर कर चल रहे गोताखोर सतर्क हो गए. स्विस मछलियों के झुंड ने श्रद्धा को इस तरह घेर लिया कि उसे आगे बढ़ना मुश्किल लगने लगा. गोताखोर उन्हें भगाने का लगातार प्रयास कर रहे थे. लेकिन मछलियों के झुंड के आगे वे खुद को बेबस पा रहे थे.

उन मछलियों की वजह से श्रद्धा की तैरने की गति बेहद धीमी हो गई थी. गोताखोर उन हिंसक मछलियों से श्रद्धा को बचा कर आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे थे. लेकिन तमाम सतर्कता के बावजूद किसी मछली ने सुरक्षा घेरा तोड़ कर श्रद्धा के पैर में कांटा चुभो दिया.

श्रद्धा एकदम से चीख उठी. मछली के कांटा चुभोने से श्रद्धा को बुखार आ गया. इस के बावजूद वह लक्ष्य की ओर बढ़ती रही. लेकिन बुखार ने जब उसे बेदम कर दिया तो वह मानिकपुर में रुक गई. डाक्टर को बुला कर उस का इलाज कराया गया. उस का बुखार उतरने में 2 दिन लग गए.

डाक्टर की सलाह पर श्रद्धा का यह काफिला 28 मार्च की सुबह एक बार फिर इलाहाबाद के संगम की ओर चल पड़ा. भुजवा गांव के पास नागा साधुओं ने इस काफिले को रोक लिया. दरअसल नागा साधु श्रद्धा का स्वागत करना चाहते थे. नागाओं की जिद पर श्रद्धा को उन के आश्रम में जा कर भोजन करना पड़ा.

नागाओं की वजह से उस दिन श्रद्धा मात्र 40 किलामीटर ही तैर पाई. वह श्रृंगवेरपुर पहुंची तो सूरज डूब चुका था. उस के काफिले ने रात वहीं बिताई. वहां के एक आश्रम में सभी के खानेपीने और आराम करने की व्यवस्था की गई थी.

5वें दिन सुबह 10 बजे श्रद्धा गंगा में उतरी. श्रृंगवेरपुर से कौशांबी तक गंगा में पानी बेहद कम था, जिस से उसे तैरने में काफी परेशानी हो रही थी. कम पानी की वजह से उस दिन भी वह मात्र 40 किलोमीटरर ही तैर पाई.

कौशांबी में श्रद्धा मल्लिका आश्रम में ठहरी. छठवें दिन सुबह ही वह इलाहाबाद की ओर चल पड़ी. शाम साढ़े 6 बजे के करीब श्रद्धा इलाहाबाद पहुंची. वह शास्त्री पुल पार कर रही थी, तभी यमुना के तेज बहाव की वजह से वह बह गई. रात के अंधेरे में उस के अचानक गायब हो जाने से साथ चल रहे लोग सन्न रह गए.

गोताखोर श्रद्धा को ढूंढ़ते हुए तेज धार की ओर बढ़े. काफी आगे जाने पर श्रद्धा शास्त्री पुल की कोठी नंबर 5 के पास विपरीत धारा में तैरते हुए संगम की मुख्य धारा में आने की कोशिश करते हुए दिखाई दी. उसे देख कर गोताखोरों की जान में जान आई.

कड़ी मेहनत कर के श्रद्धा तेज बहाव से मुक्त हो कर संगम की ओर बढ़ी. वह धीरेधीरे लक्ष्य की ओर बढ़ रही थी. करीब साढ़े 7 बजे वह संगम पर पहुंची. वहां तमाम सामाजिक संगठनों के सदस्य उस के स्वागत में फूलमालाएं लिए खड़े थे.

अपने लक्ष्य को पा कर श्रद्धा के चेहरे पर प्रसन्नता, उत्साह और संतोष झलक रहा था. इस तरह गंगा में 280 किलोमीटर की दूरी तैर कर तय करने वाली श्रद्धा शुक्ला ने तैराकी की दुनिया में एक नया रिकौर्ड बना डाला था.

9 साल की उम्र में लगभग 60 घंटे में 280 किलोमीटर तैरना कोई छोटामोटा काम नहीं था. यही वजह थी कि श्रद्धा के पिता ने सभी साक्ष्यों को ईमेल द्वारा गिनीज बुक औफ वर्ल्ड रिकौर्ड में दर्ज कराने के लिए दावा भेज दिया है.

अगर उस का नाम गिनीज बुक औफ वर्ल्ड रिकौर्ड में दर्ज हो जाता है तो श्रद्धा दुनिया की सब से कम उम्र की सब से अधिक दूरी की तैराक बन जाएगी.

श्रद्धा के पिता ललित कुमार शुक्ला कानपुर में कैंट में मेसकर घाट के पास रहते हैं. वह ठेकेदारी करते हैं. उन के परिवार में पत्नी वंदना के अलावा बेटा राजेंद्र तथा बेटी श्रद्धा है. भाईबहन कानपुर के सेंट मैरी स्कूल में पढ़ते हैं. श्रद्धा चौथी में पढ़ रही है.

ललित कुमार के पिता मुन्नूलाल शुक्ला रोजाना सुबहशाम गंगास्नान के लिए जाते थे. श्रद्धा 2 साल की थी, तभी से दादा के साथ गंगा घाट तक जाने लगी. दादा गंगास्नान करने लगते तो वह किनारे बैठ कर पानी में खेलती रहती.

श्रद्धा थोड़ी बड़ी हुई तो मुन्नूलाल शुक्ला उसे गहरे पानी में ले जा कर तैराकी की ट्रेनिंग देने लगे. दादा के प्रयास से वह जल्दी ही तैरना सीख गई. 3 साल की उम्र में ही वह तैराकी के करतब दिखाने लगी तो शहर में वह नन्ही जलपरी के रूप में मशहूर हो गई.

6 साल की उम्र में श्रद्धा ने 22 अगस्त, 2011 को गोलाघाट से मेसकर घाट तक करीब डेढ़ किलोमीटर की दूरी तैर कर तय की. इस प्रदर्शन के लिए उसे भारतीय शहीद स्मारक पुरस्कार मिला.

सावनभादौं में गंगा की धारा का उफान देख कर बड़ोंबड़ों की हिम्मत जवाब दे जाती है. उस स्थिति में 4 सितंबर, 2011 को श्रद्धा ने शुक्लागंज से अग्रसेन व्यायामशाला तक तैर कर लगभग 6 किलोमीटर की दूरी तय की.

उस के इस साहसी और अद्भुत प्रदर्शन के लिए पूर्व पंचायती राज्यमंत्री स्वामीप्रसाद मौर्य ने उसे चित्रगुप्त अवार्ड से सम्मानित किया था. तब उस का नाम प्रदेश में चर्चा में आया.

इस के बाद 29 सितंबर को उस ने शुक्लागंज पुल से जाजमऊ पुल तक लगभग 7 किलोमीटर की दूरी तैर कर तय की. श्रद्धा इसी तरह दूरी बढ़ाती रही. उस ने तब सब को हैरान कर दिया, जब मात्र 65 मिनट में उस ने 10 किलोमीटर की दूरी तैर कर तय की.

छोटी सी उम्र में तैराकी के अद्भुत करतब की वजह से श्रद्धा को समयसमय पर अवार्ड और नकद पुरस्कार मिलते रहे. केंद्रीय कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल से उसे ‘इंदिरा प्रियदर्शिनी अवार्ड’ मिला तो भाजपा विधायक सतीश महाना ने उसे ‘कानपुर रत्न सम्मान’ से सम्मानित किया.

पूर्व विधायक लाल सिंह तोमर और कैंट विधायक रघुनंदन सिंह भदौरिया ने उसे 5-5 हजार रुपए के नकद इनाम दिए हैं. उर्जिता महिला सशक्तीकरण संस्थान ने उसे बारहवीं तक पढ़ाने की जिम्मेदारी ली है.

सेंट मैरी स्कूल ने उसे सम्मानित तो किया ही है, 5 हजार रुपए का नकद इनाम भी दिया है. सोसाइटी योग ज्योति इंडिया एवं हरिद्वार के मानव सेवा आश्रम ने भी उस के अदम्य साहस के लिए उसे पुरस्कृत किया है.

श्रद्धा आज भी अपने दादा मुन्नूलाल शुक्ला के दिशानिर्देशन में गंगा के तेज बहाव में सुबहशाम 6 घंटे तक तैराकी का नियमित अभ्यास करती है.

उस की इच्छा है कि वह तमाम प्रतियोगिताओं में भाग ले कर देशविदेश में अपने शहर का नाम रोशन करे. Youngest Long Distance Swimmer

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