Bride Turned Killer. अंजलि उर्फ अंजू सांसी ने अपने जीवन का 18वां वसंत देखा ही था कि उसी दौरान वह संजय उर्फ संजू को दिल दे बैठी, लेकिन बीकौम करते ही फेमिली वालों ने उस का विवाह करोड़पति परिवार के आशीष कुमार सांसी के साथ कर दिया. ससुराल में सारी सुखसुविधाएं होने के बावजूद ऐसा क्या हुआ कि इस नव विवाहिता ने पति आशीष की हत्या करा दी?

अंजू की शादी का समाचार सुन कर संजू को गहरा आघात सा लगा. उस ने अंजू से मिल कर कहा, ”तुम ने प्यार तो मुझ से किया था, मगर शादी किसी और से कैसे कर सकती हो?’’

यह सुन कर अंजू आंखों में भर आए आंसुओं को पोंछते हुए बोली, ”संजू, मैं किसी गैरमर्द से शादी करने को मजबूर हूं, मगर इतना जान लो कि शादी के बाद भी मैं तुम को ही चाहती रहूंगी. मैं घर वालों का मन रखने के लिए शादी कर रही हूं. शादी के बाद भी मैं पहले की तरह तुम से मिलती रहूंगी. मेरे दिल में सिर्फ तुम रहोगे.’’

इस पर संजू बोला, ”पिछले 7 सालों से हम दोनों एकदूसरे को दिलोजान से प्यार करते आ रहे हैं, फिर अचानक तुम्हारी शादी का सुना तो मेरा दिल बैठा जा रहा था. ऐसे में मैं तुम्हारे मन की बात जानने आया था.’’

”संजू, मैं फिर कह रही हूं कि अंतिम सांस तक सिर्फ तुम से ही प्यार करती रहूंगी. अब मैं शादी के बाद मिलूंगी, मगर फोन पर मैं तुम से बात करती रहूंगी. तुम अपना खयाल रखना.’’ यह कह कर अंजू  उर्फ अंजलि ने प्रेमी संजू उर्फ संजय से विदा ली और घर चली गई.

30 अक्तूबर, 2025 को अंजू की आशीष के साथ शादी हो गई. आशीष की सुंदरता की पूरे इलाके में चर्चा हरेक जुबान पर थी. अंजू की सहेलियां कह रही थीं, ”अंजू, तेरे तो भाग्य खुल गए. पढ़ालिखा, हैंडसम, करोड़पति जीवनसाथी जो तुम्हें मिला है.’’

मगर अंजू को तो इस की कोई खुशी नहीं थी. वह तो अपने प्रेमी संजू से बिछुडऩे के गम में डूबी थी. शादी के बाद दुलहन अंजू सांसी मायका सादुल शहर छोड़ कर ससुराल  केएलएम आ गई, जहां पर नई दुलहन का भव्य सत्कार हुआ. शादी की तमाम रस्में हुईं. सुहागरात भी हो गई. 16 सदस्यों के संयुक्त परिवार वाले ससुराल में अंजू ने सब का मन जीत लिया.

गोरे रंग, कजरारे नैनों एवं छरहरी काया की अंजू को जिस ने भी देखा, उस की तारीफ किए बिना न रह सका. चंद दिनों में अंजू पूरे परिवार की चहेती बन गई. आशीष भी योग्य जीवनसंगिनी पा कर बेहद खुश था.

शादी के कुछ दिनों बाद अंजू ने अपने पति से कहा, ”आशीष, मैं एमकौम की पढ़ाई करना चाहती हूं. क्या तुम मुझे पढऩे के लिए श्रीगंगानगर भेजोगे?’’

यह सुन कर आशीष बोला, ”अंजू , तुम शहर में अकेली कैसे रहोगी? मैं तुम्हें शहर अकेले पढऩे नहीं भेज सकता. तुम यहीं रह कर पढ़ सकती हो.’’

”अगर तुम मुझे शहर अकेले पढऩे नहीं भेजना चाहते तो कोई बात नहीं, मैं मायके में रह कर पढ़ लूंगी.’’ अंजू ने मिन्नत करते कहा.

आशीष बोला, ”शादी के बाद मायके में रह कर पढऩा मुझे ठीक नहीं लगता. अगर पढऩा है तो यही ससुराल में रह कर पढ़ाई कर सकती हो.’’

अंजू ने पति को हर तरह से समझाने की कोशिश की, मगर आशीष ने जब मना कर दिया तो अंजू अंदर ही अंदर पति पर बहुत गुस्सा हुई. अंजू की योजना थी कि वह पति को पढ़ाई के बहाने मना लेगी और पढ़ाई के बहाने श्रीगंगानगर में अपने प्रेमी संजू उर्फ संजय के साथ गुलछर्रे उड़ाती फिरेगी, लेकिन उस की योजना पर पानी फिर गया.

इस के बावजूद वह मौका मिलने पर प्रेमी संजू से फोन पर बात कर सारी बात बता देती थी. अंजू के इश्क में दीवाना संजू भी गिनगिन कर दिन काट रहा था. प्रेमिका अंजू से मिलने के लिए वह तड़प रहा था.

अंजू शादी के बाद 1-2 बार अपने मायके सादुल नगर हो आई थी, लेकिन वह प्रेमी से मिल न सकी थी. वे दोनों एकदूसरे से मिल नहीं पाए तो मिलने को बेचैन हो गए थे. ऐसे में अंजू ने आशीष से नववर्ष पर मायके जाने का अनुरोध किया.

पति की अनुमति पर दिसंबर 2025 माह में अंजू ससुराल से मायके चली गई. इस की सूचना उस ने प्रेमी संजू को दे दी तो वह अंजू से मिला. दोनों ने तय किया कि आशीष ही उन के प्यार में रुकावट बना हुआ है, इसलिए उन्होंने आशीष कुमार सांसी की हत्या की साजिश रची.

अंजू ने बताया, ”आशीष डिनर के बाद मेरे साथ टहलने निकलता है. वह एक घंटा करीब टहल कर वापस घर पर आता है. हमें उस को इसी दौरान मारना पड़ेगा. उस की हत्या के बाद हमारे पहने हुए गहने और मोबाइल ले कर तुम भाग जाना. मैं पुलिस को हादसे एवं लूट की कहानी बता दूंगी. लूट में मौत होने पर किसी को हम पर शक भी नहीं होगा और मामला ठंडा होने पर हम दोनों शादी कर लेंगे. कैसा लगा मेरा प्लान?’’ अंजू ने हंसते हुए कहा तो एक बार संजू के बदन में झुरझुरी सी दौड़ गई. वह बोला, ”यह काम मुझ से अकेले तो नहीं होगा.’’

वह आगे बोली, ”अरे यार, तुम्हें अकेले नहीं मारना है. अपने खास 1-2 दोस्तों को दोस्ती का वास्ता दे कर साजिश में शामिल करना है और उस का काम तमाम करना है. बाकी मैं संभाल लूंगी.’’

पति की हत्या की योजना बनाने के बाद अंजू अपनी ससुराल चक 01 केएलएम गांव आ गई.

30 जनवरी, 2026 को अंजू और संजू ने मोबाइल पर बात कर रात में आशीष को रास्ते से हटाने की योजना को अमलीजामा पहनाने का निर्णय ले लिया था.

30 जनवरी को संजय उर्फ संजू ने अपने मौसेरे भाई रोहित उर्फ रौकी को सादुल शहर से रावला, श्रीगंगानगर बुला लिया. संजू अपने दोस्त बादल को पदमपुर जाने के बहाने साथ ले आया और रोहित से रावला में मिला. वहां से तीनों संजू की बाइक पर अंधेरा घिरने पर रात करीब 8 बजे आशीष की ढाणी से करीब 250 मीटर दूर सड़क के पास झाडिय़ों में छिप कर बैठ गए. संजू ने वाट्सऐप पर मैसेज कर अंजू को इस की जानकारी दे दी.

अंजू रात के खाने के बाद पति आशीष के साथ हर रोज की तरह टहलने निकल गई. आशीष का चचेरा भाई अंकित भी अपनी बीवी के साथ टहलने गांव 01 केएलएम से आशीष की ढाणी तक हर रोज जाता था. 30 जनवरी को भी अंकित पत्नी के साथ डिनर के बाद टहलने निकला. रास्ते में आशीष एवं उस की पत्नी अंजलि उर्फ अंजू मिल गए.

थोड़ी देर टहलने के बाद अंकित और उस की पत्नी वापस घर लौट गए. आशीष भी पत्नी के साथ गांव से ढाणी की तरफ वापस लौटने लगा. उसी समय अचानक झाडिय़ों से संजू, रोहित और बादल निकले और सड़क पर टहलते आशीष को दबोच लिया.

आशीष कुछ समझ पाता, उस से पहले संजू ने बेसबाल के बैट से आशीष पर हमला कर दिया. संजू के साथी भी आशीष पर टूट पड़े. आशीष के सिर पर वार किए तो वह गिर पड़ा. उसी वक्त वहां पर चुपचाप खड़ी पति की मौत का तमाशा देख रही अंजू ने गिरे हुए पति के नाक के पास हाथ रख कर जांचा कि मर गया या नहीं.

पति की सांस चैक करने के बाद अंजू ने कहा, ”लगता है कि ये मर गया.’’

मगर संजू को भरोसा नहीं हुआ. वह किसी भी हाल में आशीष को जिंदा नहीं छोडऩा चाहता था. ऐसे में संजू ने अपने मफलर से आशीष का गला भी घोंट दिया.

उस समय सड़क पर आवागमन न के बराबर था. इसी का फायदा उठा कर उन्होंने आसानी से आशीष की हत्या कर दी.

वारदात के बाद अंजू ने अपने कानों के झुमके एवं आशीष का मोबाइल फोन संजू को दे कर कहा कि अब तुम लोग यहां से भाग जाओ. मैं सब संभाल लूंगी. तब बाइक से तीनों आरोपी भाग गए.

उन के जाने के बाद अंजू भी योजनानुसार आशीष के पास सो गई और बेहोश होने का नाटक करने लगी. थोड़ी देर बाद रात करीब साढ़े 9 बजे चक 01 केएलएम गांव निवासी तोलाराम, जो डीजे संचालक है,  वहां से गुजरा तो उस ने सड़क पर एक आदमी और एक महिला को पड़े देखा तो उस ने उस ने मोबाइल की टौर्च जला कर रोशनी की तो वे दोनों कोई और नहीं, बल्कि उस के पड़ोसी आशीष और उस की पत्नी थे. तब तोलाराम ने इस की खबर आशीष के घर पर दी.

सूचना मिलते ही आशीष के फेमिली वाले भागेभागे मौके पर पहुंचे. आशीष और उस की पत्नी को देख कर लग रहा था कि उन्हें किसी वाहन ने टक्कर मारी होगी. फेमिली वालों ने घटना की खबर रात पौने 10 बजे  थाना रावला पुलिस को दी और घायल आशीष और अंजू को रावला के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) ले कर गए, जहां पर डौक्टरों ने देखते ही आशीष कुमार सांसी को मृत घोषित कर दिया. बेहोश अंजू को बीकानेर रेफर कर दिया.

तब तक थाना रावला के एसएचओ बलवंत राम मेघवाल रावला सीएचसी पहुंच गए थे. उन्होंने घटना की जानकारी ली और पुलिस के साथ अंजू को बीकानेर के पीबीएम अस्पताल रेफर किया. अंजू को बीकानेर ले जा कर उस का उपचार शुरू किया गया. मृत आशीष के शव को कब्जे में ले कर पुलिस ने मोर्चरी में रखवा दिया.

रावला थाने की पुलिस टीम घटनास्थल  पर पहुंची और घटनास्थल को सुरक्षित किया. अभी तक इस घटना के घटित होने का कारण पता नहीं था. उन्हें टहलने के दौरान किसी अज्ञात वाहन ने टक्कर मारी थी या कारण कुछ और था, यह अंजू के होश में आने पर पता चलता. पहली नजर में लग रहा था कि मामला हिट एंड रन का था.

सीआई बलवंत राम ने घटना की खबर आला अधिकारियों को दी तो अनूपगढ़ क्षेत्र के डीएसपी प्रशांत कौशिक भी घटनास्थल पर पहुंचे और घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया. सिंगल रोड पर हादसा पुलिस के गले नहीं उतर रहा था.

31 जनवरी को श्रीगंगानगर जिला की एसपी डा. अमृता दुहन भी एफएसएल टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचीं और जांचपड़ताल की. फोरैंसिक टीम ने साक्ष्य एकत्रित किए.

एसपी डा. अमृता दुहन को मामला संदिग्ध लगा. उन्होंने डीएसपी प्रशांत कौशिक एवं सीआई बलवंत राम से कहा कि मामले की सही तरीके से जांच करें. मामला संदिग्ध है. हादसा है या हत्या, इस की हर पहलू से जांच की जाए.

आशीष की मौत की खबर पा कर उस के घर में कोहराम मच गया. जिस घर में 3 महीने पहले शहनाइयों की गूंज थी, वहां पर मातम पसरा था.

पुलिस को जांच में पता चला कि गांव चक 01 केएलएम में रहने वाला आशीष (27) जो एक निजी स्कूल में टीचर था, अपनी पत्नी अंजू के साथ रात के खाने के बाद टहलने निकला था. कुछ देर बाद खबर आई कि एक अज्ञात वाहन ने आशीष को टक्कर मार दी है और लुटेरों ने अंजू के गहने लूट लिए हैं. लुटेरे आशीष का मोबाइल भी साथ ले गए हैं. पुलिस को मामला शुरुआत में हिट एंड रन और लूटपाट का लग रहा था. पुलिस हरेक एंगल से जांच कर रही थी. इस कि रिपोर्ट वजीरचंद सांसी ने दर्ज कराई थी.

आशीष के शव का मैडिकल बोर्ड गठित कर पोस्टमार्टम करवाया और शव परिजनों को सौंप दिया. परिजनों ने आशीष का अंतिम संस्कार कर दिया. उधर, बीकानेर रेफर की गई अंजू को 31 जनवरी को होश आ गया डौक्टरों ने जांच कर बताया कि अंजू को एक खरोंच तक नहीं आई है. अंजू को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई.

पुलिस को जब डौक्टरों ने बताया कि अंजू को खरोंच तक नहीं आई है, तब पुलिस का माथा ठनका. पुलिस ने अंजू से पूछताछ की. अंजू ने रटीरटाई कहानी सुनाई, ”हम टहल कर घर वापस लौट रहे थे, तभी एक कार ने आशीष को टक्कर मार दी. कार से 4-5 लोग उतरे और गहने, मोबाइल ले कर फरार हो गए. वह भी बेहोश हो गई थी.’’

अंजू के बयान पुलिस के गले नहीं उतर रहे थे. मृतक आशीष के सिर पर चोटों के निशान स्पष्ट दिख रहे थे. खैर, पुलिस को आशीष की पोस्टपार्टम रिपोर्ट मिली तो वह चौंकी. रिपोर्ट में मृतक के सिर पर गंभीर चोट और गला घोंटने के निशान मिले थे. आशीष की पीट कर एवं गला घोंट कर हत्या की गई थी.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने पर पुलिस का शक सीधा अंजू पर गया. अगर आशीष की हत्या की गई थी तो अंजू इसे एक्सीडेंट में मौत क्यों बता रही थी. कहीं आशीष की हत्या में उस की पत्नी अंजू तो शामिल नहीं, यह सवाल खड़ा हो गया था. तब पुलिस ने अंजू से फिर से एक बार पूछताछ की.

अंजू के बयानों में विरोधाभास था. एसपी डा. अमृता दुहन ने आशीष की पोस्टमार्टम रिपोर्ट देखी तो कहा कि मामला दुर्घटना में मौत का नहीं. मामला सीधा हत्या का है. हत्या में अंजू भी शामिल है. ऐसा लगता है.

एसपी अमृता दुहन ने आशीष कुमार सांसी हत्याकांड की जांच रावला थाना के सीआई बलवंत राम मेघवाल को करने का निर्देश दिया.

जांच हाथ में आते ही सीआई बलवंत राम ने मृतक की संदिग्ध पत्नी अंजू के मोबाइल की कौल डिटेल्स निकलवाई. इसे जब खंगाला गया तो पता चला कि वह किसी संजय उर्फ संजू सांसी से लगातार संपर्क में थी. अंजू दिन में कई बार संजू से बातें करती थी.

पुलिस ने ऐसे में संजय उर्फ संजू को श्रीगंगानगर से हिरासत में लिया और उस से पूछताछ की. संजू पुलिस को देखते ही समझ गया कि उस का भांडा अब फूट गया है, इसलिए उस ने आशीष की हत्या करने का जुर्म कुबूल कर हत्या में शामिल अपने साथियों के नाम भी बता दिए.

पुलिस ने संजू के साथियों रोहित उर्फ रौकी निवासी सादुल शहर, बादल उर्फ सिद्धार्थ सांसी निवासी श्रीगंगानगर एवं अंजलि उर्फ अंजू को हिरासत में ले लिया. पूछताछ में चारों आरोपियों अंजू, संजू, रोहित एवं बादल ने आशीष की साजिश रच कर हत्या करने एवं हत्या को हादसा और लूट दिखाने का जुर्म कुबूल कर लिया.

हत्या का जुर्म स्वीकार करने पर थाना रावला में दर्ज आशीष के एक्सीडेंट में मौत के प्रकरण में साजिश के तहत हत्या कर सबूत नष्ट करने की धाराओं में मामला दर्ज कर आरोपियों के नाम दर्ज किए गए. आरोपियों के हत्या का जुर्म कुबूल करने पर उन्हें 3 फरवरी, 2026 को विधिवत गिरफ्तार कर लिया. इस  के बाद उन से डीएसपी प्रशांत कौशिक और सीआई बलवंत राम ने कड़ी पूछताछ की.

आरोपियों से विस्तृत पूछताछ के लिए उन्हें 4 फरवरी, 2026 को घड़साना कोर्ट में पेश कर रिमांड पर मांगा. न्यायिक मजिस्ट्रैट ने आरोपी अंजलि उर्फ अंजू को 2 दिन के पुलिस रिमांड पर भेजा, वहीं अन्य तीनों आरोपियों संजय उर्फ संजू, रोहित उर्फ रौकी और बादल उर्फ  सिद्धार्थ को 5 दिन के पुलिस रिमांड पर दिया.

रिमांड के दौरान आरोपियों ने आशीष हत्याकांड का जो खुलासा किया, उस के आधार पर जो खूनी कहानी सामने आई, वह इस प्रकार निकली—

राजस्थान के जिला श्रीगंगानगर के थाना रावला के अंतर्गत पडऩे वाले गांव चक 01 केएलएम में रामरख सांसी अपने परिवार के साथ रहता है. रामरख के परिवार में पत्नी रूपा देवी के अलावा 4 बेटे थे. चारों बेटों में आशीष सबसे छोटा था. इस गांव से लगभग एक किलोमीटर दूर खेत में ढाणी बना कर रामरख एवं उस का छोटा भाई रामचंद्र एक ही घर में रहते थे. रामचंद्र सरकारी शिक्षक था. रामचंद्र के 2 बेटियां हैं, बेटा नहीं है. ऐसे में परिवार से सलाह ले कर रामचंद्र ने बड़े भाई रामरख के सब से छोटे बेटे आशीष को 4 साल पहले गोद ले लिया था.

रामरख खेतीकिसानी कर के परिवार पालता था. रामरख का एक भाई वजीरचंद गांव में अपने परिवार के साथ रहता था. आशीष पढ़ाई में होशियार था. उस का सपना था सरकारी नौकरी हासिल करना. परिवार ने उसे पढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी.

आशीष ने जूलौजी से एमएससी की पढ़ाई की थी. इस समय आशीष श्रीगंगानगर से बीएड प्रथम वर्ष की वह पढ़ाई कर रहा था. आशीष के लिए रिश्ता खोजा जाने लगा. आशीष 27 साल का हो चुका था. रामरख सांसी ने अपने परिवार वालों एवं रिश्तेदारों से आशीष के योग्य लड़की ढूंढने को कहा.

आशीष की चाची ने सादुल शहर (जिला चुरु) में रहने वाली अपनी भतीजी अंजलि उर्फ अंजू का रिश्ता सुझाया. अंजू के पापा का 12 साल पहले निधन हो चुका था. 2 भाई 2 बहनों में सब से छोटी अंजू श्रीगंगानगर में पढ़ाई कर रही थी. अंजू ने बीकौम कर लिया था. वह एमकौम प्राइवेट रूप से कर रही थी. अंजू पढ़ीलिखी एवं सुंदर थी. अंजू गरीब परिवार से थी. उस का जब करोड़पति घर से रिश्ता आया तो अंजू के चाचा रवि कुमार ने रिश्ता पक्का कर दिया. अंजू की आशीष से सगाई कर दी गई.

अंजू जब श्रीगंगानगर कालेज की पढ़ाई करने गई तो साल 2017 में उस की मुलाकात एक शादी में श्रीगंगानगर शहर स्थित जगदंबा कालोनी के रहने वाले संजय उर्फ संजू सांसी से हुई. संजू उस शादी में वेटर का काम कर रहा था. उस शादी में अंजू भी शरीक हुई थी.

संजू जब वेटर की सर्विस दे रहा था तो उस की नजर अंजू पर पड़ी. अंजू अपनी सहेलियों के साथ एक तरफ टेबल पर बैठी थी. संजू ने अंजू को देखा तो वह उस के पास पहुंचा और बोला, ”बताइए क्या लाऊं?’’

उस का व्यवहार और पर्सनैलिटी देख कर अंजू बहुत प्रभवित हुई. उस ने संजू की तरफ देखा और पूछा, ”क्या नाम है और कहां रहते हो?’’

सुन कर संजू तपाक से बोला, ”संजू नाम है मेरा और यहीं जगदंबा कालोनी में रहता हूं.’’

”लगता है पढ़ेलिखे हो.’’ अंजू ने पूछा तो संजू बोला, ”सिर्फ दस्तखत करना आता है. स्कूल का मुंह तक नहीं देखा.’’

यह सुन कर अंजू बोली, ”मेरा नाम नहीं पूछोगे? मैं बता देती हूं अंजू नाम है. सादुल शहर से यहां पढऩे आई हूं.’’

इस तरह दोनों की इस पहली मुलाकात में वे खुल चुके थे. अंजू उन दिनों 16 बसंत देख चुकी थी. वह ताजे गुलाब सी खिली हुई थी. संजू भी बांका जवान था. किशोर उम्र में वैसे भी एकदूसरे के प्रति आकर्षण कुछ ज्यादा ही होता है. संजू ने उस शादी में खूब मनुहार कर के अंजू को खूब खिलायापिलाया. इस से अंजू बहुत खुश हुई. उस ने संजू का मोबाइल नंबर ले लिया.

अंजू के पास उन दिनों मोबाइल फोन नहीं था. फिर भी वह किसी से फोन मांग कर संजू से बात करने लगी. दोनों सांसी समाज से थे, रिश्तेदारी भी थी. संजू उस मुलाकात के बाद अंजू के कालेज तक भी पहुंचने लगा. दोनों एकांत में मिलने लगे. प्यार का इजहार भी हो गया. अंजू और संजू प्रेमपथ पर साथसाथ चलने लगे.

अंजू कालेज की छुट्टियां होने पर गांव सादुल शहर चली जाती थी. अंजू का जब कुछ दिन दीदार नहीं होता तो संजू भी सादुलशहर अपनी मौसी के घर चला जाता. मौसी का घर और अंजू का घर एक ही कालोनी में थे. संजू अपने मौसेरे भाई रोहित उर्फ रौकी के साथ अंजू से मिलने चला जाता.

अंजू और संजू का इस तरह प्यार परवान चढ़ता रहा. दोनों ने साथ जीनेमरने की कसमें खाईं और जीवन भर साथ निभाने का वादा किया.

इस तरह सब कुछ ठीक चल रहा था कि अंजू की आशीष से सगाई हो गई और शादी की तारीख भी तय हो गई. 30 अक्तूबर, 2025 को आशीष दूल्हा बन कर गया और अंजू को ब्याह कर ले आया. संजू को पता चला तो वह मन मसोस कर रह गया.

संजू जानता था कि एक अनपढ़ बेरोजगार के साथ बीकौम तक पढी़लिखी लड़की का विवाह कौन करेगा?

साल 2023 में अशोक गहलोत सरकार ने राजस्थान की गरीब महिलाओं को स्मार्ट फोन दिए थे. अंजू को भी इस स्कीम में सरकार ने मोबाइल दिया था. उस मोबाइल से वह संजू से वाटसऐप कौल के जरिए संपर्क में रहती थी. अंजू अपने प्रेमी संजू से शादी करना चाहती थी, मगर उस की हिम्मत न हुई घर वालों को बताने की. बस यही कारण था कि न चाहते हुए भी वह आशीष से शादी कर बैठी.

शादी के चंद दिन ही बीते थे कि अंजू का पति से मनमुटाव हो गया. दोनों एकदूसरे को पसंद नहीं करते थे. अंजू के काम में पति मीनमेख निकालता रहता था. यह अंजू को अच्छा नहीं लगता था. किसी तरह वह निभा रही थी.

अंजू को संजू की याद सताती थी, जिस से वह प्यार करती थी. वह उस का हो न सका था, इस का उसे मलाल था. पति की नोंकझोंक एवं टोकने से नाराज अंजू अपने पति से नफरत करने लगी थी. वह नाराज हो कर गत दिसंबर 2025 में मायके चली गई थी. फिर पहली जनवरी, 2026 को संजू ने अपना जन्मदिन उस के साथ मनाया. उसी रोज अंजू ने पति से निजात दिलाने की बात प्रेमी से कही.

संजू ने अंजू से भाग कर शादी करने का सुझाव दिया तो अंजू ने मना करते हुए कहा, ”अगर मेरे साथ जिंदगी बिताना चाहते हो तो मेरे पति को रास्ते से हटाने में मदद करो. आशीष की मौत के बाद मैं तुम्हारे साथ शादी कर लूंगी. अब तुम्हें तय करना है कि मेरे साथ जीवन बिताना है या नहीं.’’

तब संजू ने कहा, ”मैं तुम्हारा प्यार पाने के लिए कुछ भी कर सकता हूं.’’

इस के बाद दोनों ने आशीष को रास्ते से हटाने का प्लान बना लिया और योजना बना कर उसे ठिकाने लगा दिया.

पूछताछ पूरी होने एवं रिमांड खत्म होने पर आरोपी अंजलि उर्फ अंजू को 6 फरवरी, 2026 को घड़साना कोर्ट में पेश कर बीकानेर सेंट्रल जेल भेजा गया. वहीं 5 दिन का रिमांड खत्म होने पर पुलिस ने आरोपियों संजय उर्फ संजू, रोहित उर्फ रौकी एवं बादल उर्फ सिद्धार्थ को 9 फरवरी, 2026 को घड़साना कोर्ट में न्यायिक मजिस्ट्रैट के समक्ष पेश किया, जहां से तीनों आरोपियों को जेल भेज दिया गया. Bride Turned Killer

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