Firozabad Robbery Murder Case. आकाश और उस के साथियों ने किराएदार बन कर घर में कदम रखा, लेकिन उन के इरादे सिर छिपाने के नहीं, बल्कि मौत का सौदा करने के थे. भरोसे की आड़ में ऐसा खूनी खेल रचा कि शांत मोहल्ला दहल उठा. आखिर दिल दहला देने वाली वारदात के पीछे उन का क्या मकसद था?
उत्तर प्रदेश के जिला फिरोजाबाद के मक्खनपुर में स्टेशन रोड पर 48 वर्षीय सरोज देवी अकेले ही अपने मकान में रहती थीं. उन के पति रामवकील स्वास्थ्य विभाग में फार्मासिस्ट थे. लगभग 10 साल पहले उन की मौत हो गई थी.
सरोज देवी रोजाना की तरह शाम के समय पड़ोस की महिलाओं के साथ डेयरी से दूध लेने जाती थीं, लेकिन 23 जुलाई, 2026 को वह दूध लेने नहीं आईं. पड़ोसी महिलाओं ने फोन किया तो रिंग जाती रही, लेकिन फोन नहीं उठा. अगले दिन 24 जुलाई की सुबह पड़ोसन पूजा गुप्ता ने फिर से फोन किया तो उन का नंबर स्विच्ड औफ आने पर उन्हें चिंता हुई.
तब उन्होंने उन के मकान पर जा कर देखा तो बाहर से ताला लगा हुआ था. मकान पर जो ताला सरोज लगाती थीं, उस की जगह नया ताला लगा था. सरोज देवी जब कहीं जाती थीं तो अपनी परिचित सहेलियों को जानकारी जरूर देती थीं.
इस के बाद सरोज देवी के बेटे अभय प्रताप उर्फ सिद्धांत, जो खैरगढ़ सीएचसी में नौकरी करता है, को सूचना दी. पूजा गुप्ता ने कहा, ''सिद्धांत, तुम्हारी मम्मी का मोबाइल स्विच्ड औफ जा रहा है. मकान पर ताला लगा है. तुम जल्दी से घर आ जाओ.’’






