New York Governor Scandal. वेश्यागमन में फंसे गवर्नर इलियट को न उन की पत्नी ने माफ किया और न अदालत ने. पत्नी ने तलाक दे दिया था तो अदालत ने भी उन्हें 2 साल की सजा सुनाई थी.
न्यू यार्क के आलीशान होटल मेफ्लावर का वह कमरा काफी दिनों से क्रिस्टीन के नाम से बुक था. पूरे दिन बंद रहने वाले उस कमरे का दरवाजा रात 9 बजे के बाद खुलता तो उस में 22-23 साल की एक खूबसूरत युवती घुसती. उस के बाद उस कमरे में एक अधेड़ पुरुष आता. इस के बाद कमरे का दरवाजा बंद होता तो सुबह का उजाला होने के कुछ पहले ही खुलता.
रात में कमरे का दरवाजा बंद होने से ले कर सुबह खुलने तक उस गलियारे में, जिस में वह कमरा था, पूरी तरह सन्नाटा पसरा रहता था. किसी को भी उस गलियारे से गुजरने की इजाजत नहीं थी. गलियारे में होटल के सिक्योरिटी गार्ड ही नहीं, राज्य के पुलिसकर्मी भी मुस्तैदी से तैनात रहते थे. यह सुरक्षा ऐसी होती थी कि आदमी तो क्या, परिंदा भी पर नहीं मार सकता था.
उस कमरे में कौन आता है, यह होटलकर्मियों को भी पता नहीं होता था. उन्हें होटल मैनेजमेंट की ओर से सख्त आदेश था कि वे पता करने की कोशिश भी न करें कि उस कमरे में कौन आता है. होटल के कुछ अधिकारियों को बस इतना पता था कि वह कमरा क्रिस्टीन के नाम से बुक था, जिस में केवल ग्राहक नंबर 9 के ही जाने की इजाजत थी.
क्रिस्टीन कौन थी और उस के कमरे में आने वाला ग्राहक नंबर 9 कौन था? यह कभी किसी ने जानने की कोशिश नहीं की. अगर कोई जानता भी था तो उस में किसी से कुछ कहने की हिम्मत नहीं थी. इस से सभी को यही लगता था कि वह कोई वीवीआईपी आदमी ही है. तभी लड़की और ग्राहक नंबर 9 के कमरे में आने के बाद उस गलियारे में खामोशी पसर जाती है. लेकिन राज कोई भी हो, दीवारें उसे अधिक दिनों तक राज नहीं रख पातीं. ऐसा ही कुछ यहां भी हुआ.
रात में बंद हो कर सुबह खुलने वाले कमरे का राज उजागर हुआ तो पूरे न्यूयार्क में हड़कंप मच गया. अटकलों का ऐसा तूफान आया कि उस पर विराम लगने का कोई जरिया ही नजर नहीं आ रहा था.
किसी भी तरह यह चर्चा थमने का नाम नहीं ले रही थी. थमती भी कैसे, मीडिया उस में प्राण जो फूंक रहा था. रहीसही कसर राजनीतिक गलियारों की हलचल पूरी कर रही थी. यह सन 2007 के मध्य की बात थी.
न्यूयार्क के गवर्नर इलियट स्पिट्जर के बैंक खाते से लगातार एक क्लब को मोटी रकम ट्रांसफर हो रही थी. यह क्लब वीआईपी लोगों को कालगर्ल उपलब्ध कराता था. इसीलिए सरकारी जांच एजेंसी ‘इंटरनल रिवेन्यू सर्विस’ को जांच पर लगा दिया गया. कुछ ही महीनों में इस जांच एजेंसी ने ऐसे महत्त्वपूर्ण तथ्य जुटा लिए, जिन के उजागर होते ही राजनैतिक गलियारों में जलजला आ गया.
मामला चरित्रहीनता का था, इसलिए इस मुद्दे पर रिपब्लिकन सांसद इलियट के विरुद्ध महाभियोग लाने की मांग करने लगे. मामला काफी गंभीर था, इसलिए अमेरिकी सरकार ने अपनी इज्जत बचाने के लिए इलियट को इस्तीफा देने पर मजबूर कर दिया. लेकिन मामला इतने पर भी शांत नहीं हुआ और इसे अदालत तक पहुंचा दिया गया.
मामला गवर्नर से जुड़ा था, इसलिए अमेरिकी राजनीति में तूफान आना लाजिमी था. इस मामले में आगे क्या हुआ, यह जानने से पहले आइए थोड़ा इलियट के बारे में जान लें तो ज्यादा ठीक रहेगा.
10 जून, 1959 को न्यूयार्क में जन्मे इलियट के पिता रीयल टाइकुन बर्नाड स्पिट्जर और मां एनी स्पिट्जर न्यूयार्क के एक कालेज में अंगे्रजी के प्रोफेसर थे. संस्कारी मातापिता से इलियट को भी अच्छे संस्कार मिले थे. घर में शिक्षा का माहौल था, इसलिए इलियट ने प्रिंसटन हावर्ड ला स्कूल से 1986 के आसपास ला की पढ़ाई पूरी की.
ला की पढ़ाई के दौरान ही इलियट की मुलाकात सिल्डा वाल से हुई. उन के विचार आपस में मेल खाए तो जल्दी ही दोनों में दोस्ती हो गई. और फिर यह दोस्ती जल्दी ही प्यार में बदल गई. जहां सिल्डा इलियट की कुशाग्र बुद्धि, आकर्षक व्यक्तित्व के साथसाथ मिलनसार स्वभाव से प्रभावित थी, वहीं इलियट सिल्डा की खूबसूरती, शालीनता और सुलझे हुए व्यक्तित्व का कायल था.
इलियट और सिल्डा का यह प्यार न उन की पढ़ाई में बाधा बना न तरक्की में, बल्कि यह एकदूसरे की ताकत बन कर उभरा. यही वजह थी कि 17 अक्टूबर, 1987 को दोनों ने प्रेमविवाह कर लिया. संयोग से उन का दांपत्य भी हमेशा खुशहाल रहा. इसी का नतीजा था कि दोनों 3 बेटियों के मातापिता बने.
ईमानदारी से पारिवारिक जिम्मेदारी का निर्वाह करते हुए इलियट ने पढाई भी जारी रखी. डाक्टरेट करने के बाद वह पौल, विस, रिफलिंड, बार्कटन और गारिसन जैसी विख्यात ला कंपनियों को अपनी सेवाएं देने लगे. सिल्डा को समाजसेवा में रुचि थी, इसलिए उस ने बच्चों के उत्थान के लिए एक संस्था की स्थापना की. ला कंपनियों में काम करते हुए इलियट ने एम. मोगींथु के साथ जुड़ कर आर्गेनाइज्ड क्राइम को खत्म करने की मुहिम शुरू कर दी.
सन 1992 में इलियट को लगभग असंभव सी लगने वाली कामयाबी उस समय मिली, जब उन्होंने मैनहट्टन शहर के गारमेंट और ट्रेकिंग किंग कहे जाने वाले गाम्बिनो परिवार की सफल इनवैस्टीगेशन कर कई राज फाश किए.
इलियट को हार पसंद नहीं थी. कामयाबी उन के कदम चूम रही थी. इलियट ने स्काडीन, आर्य, स्लेट, मिगहार, कोस्टांटाइन और पार्टनर जैसी नामीगिरामी ला कंपनियों में अहम पद पर अपनी सेवाएं दीं. 1998 में इलियट ने एक और बुलंदी हासिल की. उन्होंने रिपब्लिकन पार्टी के डेनिस वाक्को को मात दे कर न्यूयार्क स्टेट के अटार्नी जनरल के अहम ओहदे को हासिल कर लिया.
इस पद पर रहते हुए इलियट ने सफेदपोश लोगों के आपराधिक मामले, सिक्योरिटी धोखाधड़ी, इंटरनेट फ्रौड जैसे अपराधों पर बड़ी कुशलता से लगाम लगाई. उन्होंने कंप्यूटर चिप फिक्सिंग, इन्वेस्टमेंट बैंक स्टौक प्राइस और म्युचुअल फंड फ्रौड (सन 2003 में) के कई सनसनीखेज मामलों की बारीकी से जांच कर खुलासा किया. इसी कड़ी में इलियट ने कई मिलियन डौलर का गबन करने वाले न्यूयार्क स्टौक एक्सचेंज के चेयरमैन रिचर्ड ग्रास्सो के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया.
अपनी योग्यता और अच्छे कामों की वजह से इलियट ने अमेरिकी सरकार के वकील का रुतबे वाला पद हासिल कर लिया. इस के बाद रिपब्लिकन पार्टी के नेता के रूप में अपनी पहचान कायम कर राजनीति में दखल देनी शुरू कर दी. इस का उन्हें फायदा भी मिला.
एक जनवरी, 2007 को इलियट को न्यूयार्क का 54वां गवर्नर चुन लिया गया. इलियट अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति विल क्लिंटन के भी नजदीकी माने जाते थे. वह उन की पत्नी हिलेरी क्लिंटन के सहायक भी रह चुके थे. उन्होंने राष्ट्रपति चुनाव के दौरान सीनेटर बाराक ओबामा के चुनाव जीतने में अहम भूमिका निभाई थी.
ऐसी ऊंची पहुंच रखने वाले और न्यूयार्क के गवर्नर के पद पर आसीन इलियट पर अगर चरित्रहीनता का आरोप लगे तो यह तूफान मचने वाली ही बात थी. सरकारी पैसा का दुरुपयोग और वह भी वेश्यागमन के लिए, हड़कंप तो मचेगा ही.
जांच एजेंसी इंटरनल रिवेन्यू सर्विस ने अदालत में पुख्ता सबूत पेश किए थे. इलियट के बैंक खाते से 45 हजार डौलर से भी अधिक की रकम उस कालगर्ल सप्लाई करने वाले क्लब के नाम ट्रांसफर हुई थी. क्लब ने उस रकम का आधा हिस्सा क्रिस्टीन नामक कालगर्ल के नाम ट्रांसफर किया था. यह रकम उसे ग्राहक नंबर 9 को दी गई सेवाओं के बदले दी गई थी, जबकि ग्राहक नंबर 9 का नाम था इलियट स्पिट्जर, जो न्यूयार्क का गवर्नर था.
अदालत में पेश साक्ष्यों से पता चला कि फरवरी, 2008 की रात वाशिंगटन के होटल मेफ्लावर में इलियट ने क्रिस्टीन के साथ रात गुजारी थी. होटल का वह कमरा क्रिस्टीन के नाम से बुक था, जिस में केवल ग्राहक नंबर 9 यानी इलियट के ही जाने की इजाजत थी. उस के होटल में रहने तक सरकारी सुरक्षाकर्मियों को भी वहां तैनात किया जाता था.
इन्हीं सुबूतों के आधार पर देहव्यापार क्लब चलाने वाले चार लोगों को गिरफ्तार किया गया. उन से पूछताछ की गई तो उन्होंने तमाम सनसनीखेज तथ्य उजागर किए. जिस क्रिस्टीन नामक कालगर्ल को 18 महीनों में अपने बैंक खाते से हजारों डौलर ट्रांसफर करने का आरोप इलियट पर था, उस कालगर्ल का असली नाम एशले अलेक्जेंड्रा डुपे्र था. उस की उम्र 22 साल थी.
एशले उर्फ क्रिस्टीन 17 साल की उम्र में न्यू जर्सी से न्यूयार्क आई थी और गर्ल्स गोन वाइल्ड क्लब से जुड़ गई थी. इस क्लब को जो फ्रांसिस चलाता था. यह क्लब रंगीनमिजाज अमीरजादों के लिए हर साल टूर का आयोजन करता था. क्लब की अपनी बस थी, जिस में सभी तरह की सुखसुविधाओं की व्यवस्था थी. सफर के दौरान ही बस में शराब और डांस की पार्टी चलती थी, जिस में एक कमउम्र और हसीन लड़की डांस करते हुए अपने शरीर के एकएक कपड़े उतारती थी.
शराब और हुस्न की खुमारी में डूबे मर्द उस के नुमायां हुए अंगों को छूछू कर लुत्फ लिया करते थे. इस कार्यक्रम की बाकायदा वीडियोग्राफी होती थी. जब लड़की पूरी तरह निर्वस्त्र हो जाती थी तो सिलसिलेवार एक से दूसरे मर्द की बांहों में मचलती थी. इस के बाद सब से अधिक कीमत देने वाले मर्द को उस हसीना के साथ देहसुख हासिल करने का मौका मिलता था.
यह क्लब एक अश्लील पत्रिका भी निकालता था, जिस में लड़की के निर्वस्त्र ही नहीं, आपत्तिजनक फोटो भी छापे जाते थे.
सन 2003 में अपने 18वें जन्मदिन पर एशले उर्फ क्रिस्टीन ने उस हसीन लड़की की भूमिका अदा की थी, जिस की एकएक कर के मर्दों की बांहों में झूमते हुए कपड़े उतारने की वीडियो रिकौर्डिंग की गई थी. यह टूर मिआमी का था. इस टूर में अंग प्रदर्शन करने और पत्रिका के लिए अश्लील व मर्दों के साथ अंतरंग संबंधों के पोज देने की एवज में एशले को लाखों डौलर मिले थे.
इसी के बाद एशले मशहूर कालगर्ल बन गई थी. तभी उस का नाम एशले से क्रिस्टीन रख दिया गया था. वह देहव्यापार के किंग डेनिस हाफ नीवेडा के मूनलाइट बन्नी राय वेश्यालय की शोभा बनी तो उस के साथ रात गुजारने के लिए महंगे विज्ञापन प्रकाशित कराए गए.
क्रिस्टीन अब नामीगिरामी हस्तियों की रातें रंगीन करने के लिए एक रात के हजारों डौलर लेने लगी. उस ने संगीतकार के रूप में भी अपनी उपस्थिति दर्ज करवा दी थी. न्यूयार्क के गवर्नर इलियट स्पिट्जर भी उस के खास ग्राहकों की लिस्ट में शामिल थे, जिन्हें ग्राहक नंबर 9 नाम दिया गया था.
ऊंची हस्तियों की पसंदीदा कालगर्ल होने के नाते इस क्लब ने क्रिस्टीन को एक बार फिर 2008 के टूर के लिए चुना था, जिस के लिए 10 लाख डौलर का कौन्ट्रैक्ट उस ने साइन किया था.
मगर इस टूर के आयोजन से पहले ही 6 मार्च, 2008 को न्यूयार्क पुलिस ने इंटरनल रेवेन्यू सर्विस के इस खुलासे के बाद कि न्यूयार्क के गवर्नर इलियट ने मशहूर कालगर्ल क्रिस्टीन को कुछ रातों के लिए सरकारी खजाने का दुरुपयोग कर के खरीदा था तो देहव्यापार रैकेट चलाने वाले चार लोगों के साथ कालगर्ल क्रिस्टीन को भी गिरफ्तार कर लिया गया था.
10 मार्च को यह खबर मीडिया की सुर्खी बनी तो संसद में जलजला आ गया. इस के बाद 12 मार्च, 2008 को इलियट स्पिट्जर ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया. मगर मामला इतने में कहां शांत होने वाला था. मामला अदालत तक जा पहुंचा.
इलियट ने अपने मैनहट्टन स्थित औफिस से बयान दिया था कि उन का किसी कालगर्ल या देहव्यापार रैकेट से कभी कोई संबंध नहीं रहा, उन्हें बेवजह फंसाया जा रहा है. उन्होंने अपनी पत्नी सिल्डा वाल स्पिट्जर से भी माफी मांगते हुए कहा था कि वैसे तो उन्होंने कभी कोई गलत काम नहीं किया, फिर भी वह अपने दांपत्य को सुधारने का प्रयास करेेंगे.
मगर उन्हें न उन की पत्नी ने माफ किया था और न ही अदालत ने. कुछ समय बाद ही उन की पत्नी ने उन्हें तलाक दे दिया था. अदालत में यह मामला लंबा चला. दिसंबर, 2011 में उन्हें अदालत ने मुजरिम करार देते हुए सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोप में 2 साल की जेल और 50 हजार पाउंड के जुर्माने की सजा सुनाई.
22 सितंबर, 2013 को समय अवधि से पूर्व ही इलियट जेल से रिहा हो गए. लेकिन अब उन का सब कुछ खत्म हो चुका था. न पत्नी और बच्चे थे, न राजनैतिक कैरियर. वह इज्जत भी नहीं रही. अब उन के पास सिर्फ तनहाई और रुसवाई के अलावा कुछ नहीं था. New York Governor Scandal






