Nagpur crime news. पूजा बार डांसर थी और आसिफ शेख चोरउचक्का. बीयर बार में दोनों की आंखें लड़ीं तो प्यार हो गया. तय हुआ कि दोनों अपनाअपना काम छोड़ कर ईमानदारी की जिंदगी गुजारेंगे. साथसाथ जीने के लिए दोनों ने शादी कर ली. आसिफ ने तो अपना वादा निभाया, लेकिन पूजा के कदम बहक गए. फलस्वरूप..
रोजाना की तरह उस दिन भी नागपुर के थाना इमामबाड़ा के सीनियर इंसपेक्टर आनंद नर्लेकर सुबह 8 बजे ही अपनी ड्यूटी पर आ गए थे. लगभग साढ़े 8 बजे किसी ने फोन कर के उन्हें सूचना दी कि थाना क्षेत्र की जाटवरोड़ी बस्ती स्थित शुक्ला आटा चक्की के पास वाले मकान से तेज बदबू आ रही है. पुलिस ले कर आ जाएं और जांच करें क्योंकि मकान का दरवाजा बंद है.
जाटवरोड़ी बदनाम बस्ती थी, वहां आए दिन लड़ाईझगड़े होते रहते थे, जिन से पुलिस परेशान रहती थी. लेकिन यह मामला किसी जघन्य अपराध की ओर इशारा कर रहा था. सीनियर इंसपेक्टर नर्लेकर ने ड्यूटी पर तैनात सब इंसपेक्टर मुकुंद कवाड़े को फोन पर मिली सूचना के बारे में बता कर रवानगी दर्ज कराई और पुलिस टीम के साथ जाटवरोड़ी स्थित बताई गई जगह पर जा पहुंचे.
जिस मकान से बदबू आ रही थी वहां तमाम लोग एकत्र थे. पुलिस लोगों को हटा कर दरवाजे तक पहुंची. दरवाजा बाहर से बंद था और उस पर ताला लटक रहा था. पुलिस ने आसपड़ोस के लोगों से पूछताछ की तो पता चला, उस मकान में आर्केस्ट्रा डांसर पूजा अपने पति के साथ किराए पर रहती थी. यह भी जानकारी मिली कि दोनों कुछ ही महीने पहले वहां रहने के लिए आए थे. एक पड़ोसी ने यह भी बताया कि पूजा की एक मौसेरी बहन लता कभीकभी उस के पास आतीजाती थी, जो कहीं आसपास ही रहती है.
कोई और चारा न देख आनंद नर्लेकर ने अपने साथ आई पुलिस टीम को दरवाजा तोड़ने का निर्देश दिया. दुर्गंध चूंकि काफी तेज थी इसलिए पुलिस कर्मियों ने नाक पर रुमाल बांध कर दरवाजा तोड़ा. अंदर का दृश्य दिल दहला देने वाला था.
कमरे के फर्श पर खून में डूबी एक लड़की की लाश पड़ी थी जिसे बेरहमी से कत्ल किया गया था. उस की हत्या संभवत: 2-3 दिन पहले की गई थी, इसी वजह से लाश में सड़न पैदा हो गई थी और बदबू आने लगी थी. मृतका की हत्या गला काट कर की गई थी.
मामला हत्या का था, इसलिए आनंद नर्लेकर ने इस की सूचना अपने वरिष्ठ अधिकारियों को दे दी. साथ ही पुलिस फोटोग्राफर और फारेंसिक टीम को भी मौकाएवारदात पर बुला लिया. सूचना मिलते ही अतिरिक्त पुलिस आयुक्त चंद्रकिशोर मीना भी वहां आ गए. उन के सामने ही फारेंसिक टीम ने अपनी काररवाई की. लोगों को शव दिखाया गया तो उन्होंने उस की शिनाख्त पूजा के रूप में की. इस बीच किसी तरह पूजा की मौसेरी बहन लता तक भी सूचना पहुंच गई थी और वह रोतेबिलखते वहां आ गई थी. उस ने भी लाश पूजा की ही बताई.
कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद पुलिस ने पूजा के शव को पोस्टमार्टम के लिए नागपुर मेडिकल कालेज भेज दिया. इस के बाद पुलिस पूजा की बहन लता को साथ ले कर थाने लौट आई.
लता से पूछताछ की गई तो उस ने बताया कि पूजा पहले मुंबई में रहती थी. वहीं पर उस ने आसिफ शेख नाम के एक युवक से शादी की थी. आसिफ मनचले स्वभाव का था और उस का चालचलन ठीक नहीं था. दोनों में अकसर झगड़ा और मारपिटाई होती थी जिस की वजह से पूजा उसे छोड़ कर नागपुर आ गई थी, लेकिन आसिफ यहां भी आ गया था. उस के आने के बाद यहां भी मुंबई जैसा माहौल बन गया था.
शुरुआती जांच और लता के बयान के बाद पूजा का पति आसिफ शेख शक के घेरे में आ गया. लेकिन हकीकत उस की गिरफ्तारी के बाद ही सामने आ सकती थी. आसिफ मुंबई में होगा या नहीं, इस बात की जानकारी लता को भी नहीं थी. लता के अनुसार आसिफ अपराधी प्रवृत्ति का था. ऐसे लोगों की गिरफ्तारी पुलिस के लिए किसी चुनौती से कम नहीं होती.
लता के बयान के बाद सीनियर इंसपेक्टर आनंद नर्लेकर ने अपने सहायकों के साथ मीटिंग कर के इस मामले के हर पहलू पर विचारविमर्श किया. तत्पश्चात उन्होंने इस की जांच की जिम्मेदारी सबइंसपेक्टर मुकुंद कवाड़े को सौंप दी. कवाड़े ने कांस्टेबल कृपाशंकर शुक्ला, प्रशांत साबरे, विनायक पाटिल और मूसासिंह को ले कर अपनी एक टीम बनाई और हत्या की जांच शुरू कर दी.
पुलिस को पता चला कि आसिफ नागपुर में रह कर कैटरर्स के साथ कैटरिंग का काम करता था. इस काम में कई लोगों से उस के करीबी संबंध बन गए थे. इसलिए पुलिस टीम ने सब से पहले नागपुर में अपनी जांच का केंद्रबिंदु उन लोगों को बनाया जिन से आसिफ के करीबी संबंध थे. इस का नतीजा भी जल्दी ही सामने आ गया. आसिफ ने अपने एक करीबी दोस्त से एक सप्ताह बाद नागपुर वापस आने की बात कही थी. उस ने यह भी कहा था कि पूजा को उसी ने मारा है.
अभी तक आसिफ संदेह के दायरे में था. इस के बाद पुलिस को पक्का यकीन हो गया कि पूजा का हत्यारा वही है. पुलिस ने उस के दोस्त की बातों को रिकौर्ड में शामिल कर के सरगर्मी से उस की तलाश शुरू कर दी.
जिस नंबर से आसिफ ने अपने दोस्त को फोन किया था, पुलिस ने जब उस की काल डिटेल्स निकलवा कर छानबीन की तो पता चला, वह काल मुंबई के थाना साकीनाका क्षेत्र में आने वाले जरीमरी इलाके से की गई थी.
इसी के आधार पर मुकुंद कवाड़े की पुलिस टीम ने मुंबई आ कर जरीमरी इलाके में आसिफ की तलाश की. लेकिन एक काल के आधार पर जरीमरी जैसे घनी आबादी वाले इलाके में एक आदमी को ढूंढ़ना संभव नहीं था. फलस्वरूप पुलिस टीम को खाली हाथ नागपुर लौटना पड़ा.
नागपुर लौट कर मुकुंद कवाड़े ने वह नंबर जिस से आसिफ ने फोन किया था, सर्विलांस पर लगा दिया. साथ ही नाकासाकी थाने की पुलिस को सचेत भी कर दिया. आसिफ का नंबर सर्विलांस पर डालने के 2 हफ्ते बाद मुकुंद कवाड़े को मनचाही सफलता मिल गई. उन्होंने 19 मई को साकी नाका पुलिस की मदद से आसिफ को जरीमरी इलाके से गिरफ्तार कर लिया. उसे 2 दिन तक साकीनाका पुलिस की कस्टडी में रखा गया. 22 मई को उसे नागपुर लाया गया.
नागपुर में पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के सामने उस से विस्तृत पूछताछ की गई तो पूजा की हत्या की पूरी जानकारी सामने आ गई.
28 वर्षीय आसिफ का पूरा नाम आसिफ इस्माइल शेख था. वह अपने मातापिता का इकलौता बेटा था. अधिक लाड़प्यार के कारण उस की आदतें बचपन से ही बिगड़ गई थीं. उस का पिता इस्माइल शेख आटो रिक्शा ड्राइवर था. वह साकी नाका विहार रोड और अंधेरी में आटो रिक्शा चलाता था. जबकि उस की मां सऊदी अरब में नर्स की नौकरी करती थी. व्यस्तता की वजह से इस्माइल शेख आसिफ का ज्यादा खयाल नहीं रख पाता था.
मांबाप के प्यार से वंचित आसिफ जैसेजैसे बड़ा होता गया वैसेवैसे उस के दिल से पिता का डर निकलता गया. कोई मार्गदर्शक न होने की वजह से वह अपनी ही बस्ती के रहने वाले कुछ आवारा और अपराधी प्रवृत्ति के लड़कों के संपर्क में रहने लगा.
फलस्वरूप वह कम उम्र में ही चरस, गांजा, हेरोइन और शराबशवाब का आदी हो गया. कभीकभी वह डांस बारों में जा कर वहां की डांसरों के साथ भी मौजमस्ती कर लेता था. अपने इन शौकों को पूरा करने के लिए वह चोरी और राहजनी जैसे अपराध किया करता था.
आसिफ जिस बीयर बार में कभीकभी बीयर पीने और डांस देखने जाता था, एक दिन अचानक उसी के डांस फ्लोर पर उस की नजर एक शोख चंचल हसीना से टकरा गईं. यह हसीना थी पूजा. वह उस डांसबार की सब से छोटी और सैक्सी बार डांसर थी.
कच्ची उम्र की पूजा अपनी सुंदरता और नृत्यकला के बल पर डांसबार में आने वाले सभी ग्राहकों को अपनी ओर आकर्षित कर लेती थी. लेकिन उस के पास वही लोग जा पाते थे जिन की जेब में मोटी रकम होती थी. पूजा भी पैसे वालों को ही भाव देती थी. ऐसी स्थिति में आसिफ की दाल कहां गलने वाली थी. वह छोटामोटा चोर था, उस के पास इतना पैसा नहीं होता था कि नोट दिखा कर पूजा का स्पर्श कर सके.
आसिफ ने जब से पूजा को देखा था, उस का दीवाना हो गया था, पूजा उस के दिलोदिमाग पर छा गई थी. वह सोतेजागते पूजा के ही सपने देखने लगा था. इस बीच उस ने कई बार पूजा के करीब जाने की कोशिश भी की थी. लेकिन पूजा उसे भाव नहीं देती थी.
जब आसिफ को लगा कि बिना पैसे के कुछ नहीं हो सकता तो उस ने पूजा के करीब जाने का रास्ता ढूंढ निकाला. उस ने उसी डांसबार में वेटर की नौकरी कर ली. वेटर की नौकरी के दौरान उसे पूजा के पास जाने और उस से बातचीत करने का मौका मिलने लगा. कुछ दिन बाद उसे धक्का तब लगा जब पूजा उस डांसबार को छोड़ कर चली गई.
दरअसल पूजा ने डांसबार में नौकरी अपनी मां के दबाव में की थी. जब उसे वहां का माहौल ठीक नहीं लगा तो उस ने डांसबार की नौकरी छोड़ दी और एक कैटरर के यहां नौकरी करने लगी. जब यह बात आसिफ को पता चली तो उस ने भी डांसबार की नौकरी छोड़ दी.
थोड़ी कोशिश के बाद उसे भी उसी कैटरर के यहां काम मिल गया. इस तरह वह फिर से पूजा के पास आ गया. धीरेधीरे उस ने पूजा से नजदीकियां बनानी शुरू कर दीं. फलस्वरूप दोनों के बीच दुखदर्द की बातें होने लगीं. इसी के चलते जल्दी ही दोनों के बीच अच्छीभली दोस्ती हो गई. इस से आसिफ खूब खुश था.
आसिफ सोचता था कि जिस तरह पूजा ने उस की दोस्ती स्वीकार की है, उसी तरह एक दिन वह उस के प्यार को भी स्वीकार कर लेगी. उसे अपना सपना सच होता नजर आ रहा था. अब वह पूजा के साथ हंसीमजाक भी करने लगा था और उस की छोटीबड़ी हर बात का ध्यान भी रखता था. कैटरिंग के काम में रात को कभी देर हो जाती थी तो वह पूजा को उस के घर भी छोड़ने जाता था.
पहले तो पूजा ने आसिफ की तरफ ज्यादा ध्यान नहीं दिया, लेकिन जब उस ने अपने प्रति आसिफ का लगाव देखा, तो वह भी उस की तरफ झुकने लगी. फिर धीरेधीरे उस के दिल में भी प्यार के अंकुर फूटने लगे. वह आसिफ की बातों का जवाब उसी की तरह देने लगी.
अब जब भी आसिफ उसे छोड़ने उस के घर आता तो वह उसे घर के अंदर बुला लेती. उसे चायनाश्ता कराती और उस के साथ बैठ कर बातें करती. बातोंबातों में जब आसिफ को यह अहसास हुआ कि पूजा भी उसे चाहने लगी है, तो आसिफ ने उस के सामने शादी का प्रस्ताव रख दिया. बात जब शादी की आई तो पूजा ने अपने प्रेमी से कुछ भी छुपाना उचित नहीं समझा. उस ने आसिफ को अपने बारे में सब कुछ सचसच बता दिया.
पूजा के पिता का नाम हनुमंत यादव था और मां का मंदा यादव. आसिफ के पिता की तरह हनुमंत यादव भी एक आटो रिक्शा ड्राइवर था. वह अपनी पत्नी मंदा के साथ हर तरह से खुश था. लेकिन मंदा खुश नहीं थी. वह महत्त्वाकांक्षी महिला थी.
वह चाहती थी कि उस के पास खूब पैसा हो और वह खूब ऐश करे, घूमेफिरे, होटलों में जाए. लेकिन यह सब तभी संभव था जब घर की आर्थिक स्थिति अच्छी होती. आटो रिक्शा की कमाई से घर का खर्चा ही बड़ी मुश्किल से चलता था.
पूजा के जन्म के बाद खर्चा बढ़ने से जब घर की आर्थिक स्थिति और बिगड़ गई तो मंदा ने अपनी इच्छाओं को पूरी करने के लिए डांस बार में बतौर डांसर काम करने का फैसला किया. जहां पर हनुमंत यादव और मंदा रहते थे वहां आसपास कई बार डांसर रहती थीं. मंदा ने उन्हीं की मदद से बीयर बारों और आर्केस्ट्रा में नाचने का काम शुरू कर दिया.
एक तो मंदा खूबसूरत और गुदाज बदन वाली महिला थी, दूसरे उस ने अपनी पढ़ाई के दौरान डांस सीखा था, सो लोग उसे और उस के डांस को पसंद करने लगे. धीरेधीरे वह लोगों की पसंदीदा डांसर बन गई. मंदा जब डांस फ्लोर पर डांस करती थी तो अपनी अदाओं से मनचलों का मन मोह लेती थी. फलस्वरूप उस के ऊपर पैसों की बरसात होने लगी.
इस काम से मंदा भी खुश थी और उस के ग्राहक भी. लेकिन मंदा का पति हनुमंत यादव खुश नहीं था. वह मंदा को इस काम के लिए मना करता था. उस के मना करने के बावजूद मंदा नहीं मानती थी.
मंदा के पास जब अच्छाभला पैसा आने लगा तो उस की पैसे की भूख बढ़ती गई. ज्यादा पैसा कमाने के चक्कर में मंदा ने नाचने के साथसाथ मनचलों के साथ बाहर जाना भी शुरू कर दिया. नतीजतन उस की देह महंगी ही सही, लेकिन दुकान बन कर रह गई.
जब यह बात हनुमंत यादव को पता चली तो उस ने मंदा पर पाबंदी लगानी शुरू कर दी. इस से मंदा और हनुमंत के बीच तकरार होने लगी. कुछ ही दिनों में यह तकरार इतनी बढ़ी कि दोनों में तलाक हो गया. तलाक के बाद मंदा ने हनुमंत यादव का घर छोड़ दिया. पूजा को वह अपने साथ ले आई थी. पति से अलग होने के बाद मंदा ने दूसरी शादी कर ली. दूसरे पति से मंदा एक बेटी और एक बेटे की मां बनी.
इस के बाद भी मंदा का स्वभाव और सोच वैसी की वैसी ही रही. वह अपनी मौजमस्ती में डूबी रहती थी. ऐसी हालत में रह कर पूजा ने किसी तरह अपनी पढ़ाई पूरी की. मंदा की उम्र ढलने लगी थी. अब उसे पहले जैसी आय भी नहीं होती थी. इसलिए उस की निगाहें जवान होती बेटी पर जमी थीं.
पूजा को हालांकि यह सब पसंद नहीं था, लेकिन मंदा ने उस के 16 साल की होते ही उसे डांसबार में भेज दिया. पूजा ने कई सालों तक डांस बारों में काम किया. पैसे के लिए वह मर्दों को लुभाती थी, लेकिन हर तरह के लालच देने के बावजूद वह किसी के साथ कहीं नहीं जाती थी.
पूजा ने अपनी जिंदगी की हकीकत आसिफ को बता दी. सुन कर आसिफ को अच्छा लगा. वह उस की बातों से इतना प्रभावित हुआ कि उस ने भी अपनी हकीकत उसे बता दी. साथ ही वादा भी किया कि अब वह अपनी पुरानी जिंदगी में कभी नहीं लौटेगा. हां दोनों ओर से थी, सो दोनों ने साथसाथ रहने का फैसला कर लिया.
पूजा ने अपनी मां का घर छोड़ दिया और आसिफ ने अपना. दोनों ने मुंबई स्थित साकी नाका की एक बस्ती में किराए का मकान ले लिया और लिव इन रिलेशनशिप में साथसाथ रहने लगे. पूजा और आसिफ के बीच एक ही रुकावट थी धर्म. लेकिन प्यार मजहब नहीं देखता. इस के लिए पूजा ने कह दिया कि उस के प्यार के लिए वह धर्म परिवर्तन भी कर लेगी. इस पर आसिफ ने कुछ धार्मिक औपचारिकताएं पूरी कर के उस का नाम अशरीफा रख दिया और उस से निकाह कर लिया. निकाह के बाद भी दोनों पूर्ववत प्यार से साथसाथ रहते रहे.
शादी के बाद कुछ महीने तो बड़े चैन से गुजरे, लेकिन बाद में आर्थिक तंगी सामने आ खड़ी हुई. वजह यह थी कि वे दोनों कैटरिंग के जिस काम से जुड़े थे, वह मौसमी शादियों और पार्टियों के बूते पर चलता था, जब शादियों का मौसम नहीं होता था तो दोनों की आय का स्रोत बंद हो जाता था. 2-4 पार्टियों के लिए काम मिल भी जाता तो उस से गुजारा नहीं होता था.
जब आर्थिक हालात बिगड़ते गए तो पूजा को फिर से डांस बार का रुख करना पड़ा. जबकि आसिफ कैटरिंग के काम से ही जुड़ा रहा. पूजा इस बार डांसबार में लौटी तो वह पहले वाली पूजा नहीं थी.
शादी के बाद वह काफी बदल गई थी. इस बार डांसबार में आ कर मां की तरह पूजा के भी कदम बहक गए. फलस्वरूप वह भी अपनी मां मंदा के रास्ते पर चल निकली.
शारीरिक सुख और पैसों की चाह में पूजा के कई पुरुष मित्र बन गए. जिन के साथ वह घूमनेफिरने और पार्टियों में जाने लगी. अब वह रात को अकसर नशे में घर लौटने लगी थी. आसिफ को यह बिलकुल पसंद नहीं था. जब वह पूजा को इस सब के लिए मना करता था तो वह उलटा जवाब देती थी.
इन बातों को ले कर पूजा और आसिफ में कभीकभी झगड़ा हो जाता था और बात मारपीट तक पहुंच जाती थी. एक बार तो आसिफ ने गुस्से में पूजा को इतना पीटा कि उस ने साकी नाका पुलिस थाने जा कर उस के खिलाफ शिकायत दर्ज करवा दी.
फलस्वरूप आसिफ को जेल जाना पड़ा. जब तक वह जमानत पर जेल के बाहर आया तब तक उस के प्रति पूजा का मन बदल चुका था. अब वह आसिफ के साथ नहीं रहना चाहती थी. वह उस का मोह छोड़ कर अपनी मौसी की लड़की लता के पास नागपुर चली गई.
लता भी नागपुर के बीयर बारों में आर्केस्ट्रा पर नाचने का काम करती थी. जाने से पहले पूजा ने जब लता को फोन कर के अपनी आप बीती बताई तो लता ने उसे नागपुर आने की सलाह दी. लता की सलाह पर पूजा नागपुर चली आई थी और लता के साथ बीयर बारों में काम करने लगी थी.
एक महीने बाद आसिफ ने पूजा से संपर्क कर के उस से माफी मांगी तो उस ने आसिफ को नागपुर बुला लिया. नागपुर आ कर आसिफ ने कैटरिंग का काम करना शुरू कर दिया. उस के नागपुर आने के बाद पूजा ने जाटवरोड़ी बस्ती में किराए का मकान ले लिया. आसिफ और वह उसी मकान में पतिपत्नी की तरह रहने लगे. इस के बावजूद पूजा का चालचलन वही रहा जो मुंबई में था. नागपुर में भी उस ने कई पुरुष मित्र बना लिए थे.
पूजा के पुराने रंगढंग देख कर आसिफ को बहुत दुख हुआ क्योंकि उस के लिए उस ने खुद को बिलकुल बदल लिया था. आसिफ ने पूजा को समझाने की कोशिश की लेकिन वह अपनी हरकतों से बाज नहीं आई. इस से आसिफ को उस से नफरत हो गई.
27 अप्रैल 2014 की रात उस नफरत की आग में घी डालने का काम उस पार्टी ने किया था जो पूजा के मकान की छत पर आयोजित की गई थी. यह पार्टी पूजा के एक दोस्त के बर्थडे की थी. पार्टी के लिए शराब और चिकन वगैरह की पूरी व्यवस्था की गई थी.
उस पार्टी में सारे लोग शराब पी कर आर्केस्ट्रा की धुन और हलकी पीली रोशनी के बीच एकदूसरे की बाहों में झूल रहे थे. पार्टी में आसिफ भी मौजूद था, जो पूजा की हर हरकत को देख रहा था. पूजा शराब के नशे में पार्टी में एक युवक की बाहों में अश्लीलता की हदें पार करते हुए झूल रही थी.
वह युवक उस के नाजुक अंगों से छेड़खानी कर रहा था. यह सब देख कर आसिफ का खून खौल रहा था. लेकिन वह मजबूर था क्योंकि वह युवक उस इलाके का माना हुआ बदमाश था. जब आसिफ से यह सब नहीं देखा गया तो वह पार्टी छोड़ कर नीचे चला आया और अपने बिस्तर पर लेट गया.
जब पार्टी खत्म हुई तो पूजा भी नीचे कमरे में गई और आसिफ के पास लेट कर सो गई. आसिफ उस वक्त जाग रहा था. उस की आंखों से नींद कोसों दूर थी. उस की आंखों में पूजा की बेवफाई घूम रही थी. उस के दिमाग में बैठा शैतान उस की सोचनेसमझने की शक्ति को लील गया था. ऐसी विश्वासघाती बीवी से तो अच्छा है, वह बिना उस के ही रहे, यह सोच कर आसिफ बिस्तर से उठा और कमरे में रखे कटर ब्लेड से एक झटके में पूजा का गला काट दिया.
गला कटते ही पूजा लड़खड़ा कर फर्श पर गिर पड़ी. उस का गला काटने के बाद आसिफ ने मकान के बाहर आ कर दरवाजा बंद किया और ताला लगा कर मुंबई चला गया. लेकिन मुंबई आने के बाद भी उस के मन में पूजा के प्रति नफरत खत्म नहीं हुई थी. इसीलिए उस ने हत्या करने के बाद भी नागपुर में रहने वाले अपने एक दोस्त को फोन कर के पूजा के बारे में पूछा. दरअसल उसे शंका थी कि कहीं वह जीवित न रह गई हो. उस की यही गलती उसे महंगी पड़ी और वह फोन काल से पकड़ा गया.
आसिफ इस्माइल शेख से विस्तृत पूछताछ के बाद जांच अधिकारी सब इंसपेक्टर मुकुंद कवाड़े ने उस के विरुद्ध भादंवि की धारा 302, 202 के तहत मुकदमा दर्ज कर उसे अदालत में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया. कथा लिखे जाने तक वह नागपुर जेल में बंद था. Nagpur crime news
— इसके बाद अदालती कार्रवाई में क्या हुआ यह ज्ञात नहीं है.
— 2014 में प्रकाशित






