Chambal River Honor killing Case. औनर किलिंग के एक बेहद दर्दनाक मामले ने रिश्तों को शर्मसार कर दिया. 18 वर्षीय खुशी प्रेम प्रसंग में गर्भवती हो गई तो उस के पिता लखपत सिंह बघेल ने दामाद सुनील के साथ मिल कर अपनी गर्भवती बेटी की चंबल नदी में डुबो कर न सिर्फ हत्या कर दी, बल्कि उसे नदी में बहा दिया. इस के बाद पुलिस में बेटी की गुमशुदगी दर्ज करा कर अपराध छिपाने का प्रयास किया, लेकिन खौफनाक हत्याकांड की ऐसी सच्चाई सामने आई कि

”बेटी, अभी भी समय है. तुम खुद ही नदी में उतर जाओ और डूब कर मर जाओ, मेरे हाथों से यह अपराध मत कराओ.’’ लखपत सिंह ने यह कहते हुए बेटी को चंबल नदी में डूब कर आत्महत्या करने को कहा.

पापा की कांपती आवाज सुन कर नदी किनारे खड़ी युवती की आंखों से आंसू बह निकले. उस ने दोनों हाथ जोड़ दिए, ”पापाजी, मैं ने कोई अपराध नहीं किया. मेरे पेट में आप की ही नातिन या नाती पल रहा है. मुझे और उसे जीने दीजिए. मैं कहीं दूर चली जाऊंगी… आप की जिंदगी में कभी वापस नहीं आऊंगी.’’

कुछ क्षण के लिए सन्नाटा छा गया. दूर बहती चंबल नदी की लहरें मानो उस असहाय की पुकार सुन रही थीं, लेकिन उस के पापा के चेहरे पर दया नहीं, बल्कि समाज के डर की कठोर परछाई थीं.

लखपत सिंह के साथ खड़ा उस का दामाद सुनील चुपचाप मोबाइल का कैमरा संभाले पूरे घटनाक्रम का फोटो और वीडियो बनाने में लगा हुआ था.

”बहुत बोल लिया तुम ने…’’ पिता ने दांंत पीसते हुए कहा, ”आज अगर तुम्हें छोड़ दिया तो कल लोग मेरी तरफ अंगुली उठाएंगे, कहेंगे घर में कुंवारी लड़की प्रैग्नेंट हो गई और बाप को हवा तक नहीं लगी. लोग मेरा जीना दूभर कर देंगे. मैं बदनामी भरी जिदंगी नहीं जीना चाहता.’’

”तो क्या? लोगों के डर से अपनी बेटी को मार दोगे?’’ खुशी चीख पड़ी.

उस की आंखों से बेबसी के आंसुुओं की लगातार बारिश हो रही थी.

”तू ऐसे नहीं मानेगी,’’ कहते हुए अगले ही पल लखपत सिंह ने बेटी का हाथ कस कर पकड़ लिया.

वह पापा के हाथों से छूटने के लिए तड़पने लगी, ”पापा, ये मुझ से नहीं होगा.’’

लेकिन लखपत सिंह की पकड़ और मजबूत होती गई.

लखपत सिंह का दिल नहीं पसीजा. उस ने बेटी खुशी को नदी के बीच में ले जा कर अपने हाथों से डुबो दिया. एक बार तो बेटी ने पापा के हाथों से खुद को छुड़ाने की कोशिश की तो उस ने उस का गला दबा कर पानी में डुबो दिया. वह छटपटाती रही, लेकिन लखपत सिंह को रहम नहींं आया.

कुछ देर बाद चंबल नदी का पानी वैसे ही शांत था, जैसे वहां कभी कोई चीख गूंजी ही न हो. यह बात 29 जुलाई, 2026 को आगरा जिले के बसौनी थाना क्षेत्र स्थित चंबल नदी के बीहड़ क्षेत्र की है.

शातिर लखपत सिंह बघेल बेटी के नदी में डूब कर मरने का स्वांग करने वाले फोटो अपने मोबाइल से दामाद सुनील की मदद से पहले खिंचवा चुका था. उसे यकीन था कि इन फोटो की मदद से वह दिल्ली लौटने के बाद लोगों को बेटी खुशी के नदी में डूबने का विश्वास दिला देगा.

रची झूठी कहानी

इस के बाद दोनों ससुरदामाद वापस दिल्ली चले गए. 29 जुलाई, 2026 को बेटी को जिंदा जलसमाधि देने के बाद दिल्ली के तिगड़ी थाने में 52 वर्षीय लखपत सिंह बघेल ने अपनी 18 वर्षीय बेटी खुशी की गुुमशुदगी 30 जुलाई, 2026 को दर्ज करा दी, ताकि पुलिस को गुमराह किया जा सके.

पुुलिस ने लखपत सिंह बघेल से उस की बेटी के बारे में जानकारी ली. उस के रिश्तेदारों के बारे में पता किया. फिर खुशी को काफी तलाश किया, लेकिन उस का कोई पता नहीं चला. मोहल्ले में पूछताछ के बाद पता चला कि 28 जुलाई से खुशी लापता है. लखपत सिंह भी कुछ दिन दिखाई नहीं दिया था.

मोहल्ले में खुशी के अचानक लापता होने की चर्चा होने से लखपत सिंह बदनामी महसूस करने लगा. उस ने पड़ोसियों को बताया कि बेटी खुशी ने जहर खा कर आत्महत्या कर ली थी. उस ने उस का अंतिम संस्कार आगरा में ही कर दिया. अपने मोबाइल में जल प्रवाहित करने की तसवीरें भी दिखाईं, जिस से लोगों को शक हुआ.

शुरुआत में मामले को सामान्य बनाने की कोशिश की गई, लेकिन दक्षिण दिल्ली पुलिस की जांच में परिस्थितियां संदिग्ध लगीं. पुलिस को उस के बयान में कुछ विरोधाभास मिले, जिस के बाद जांच आगे बढ़ी तो मोबाइल लोकेशन, पूछताछ और अन्य साक्ष्यों ने पूरी साजिश की परतें खोलनी शुरू कर दीं.

एक पड़ोसी ने थाना तिगड़ी पुलिस को पूरा घटनाक्रम बताया. इस पर थाना तिगड़ी में पीसीआर कौल के आधार पर इंसपेक्टर शिव कुमार ने 31 जुलाई, 2026 को बीएनएस की धारा 103(1) (हत्या) और 238 (सबूत नष्ट करना) के तहत मामला दर्ज करने का निर्देश दिया.

रिपोर्ट दर्ज होने के बाद दिल्ली पुलिस ने पहली अगस्त, 2026 को लखपत सिंह को हिरासत में ले कर पूछताछ की. हालांकि पूछताछ में पहले तो वह पुलिस को इधरउधर की कहानी सुनाता रहा, लेकिन पुलिस द्वारा सख्ती किए जाने पर उस ने जो कहानी पुलिस को बताई, उसे सुन कर पुलिस हैरान रह गई.

खुला हत्या का राज

लखपत सिंह बघेल व उस के दामाद सुनील ने योजना बनाई थी कि दिल्ली वापस जाने पर लोग यदि खुशी के बारे में पूछेंगे तो फोटो दिखाएंगे. वह उन की बेगुनाही का सबूत होगा. पुलिस भी पकड़ेगी तो कहेंगे कि उन्होंने कुछ किया होता तो फोटो क्यों खींचते?

पुलिस की पड़ताल में कुछ ही देर में उन की पोल खुल गई. उन्होंने पुलिस के समक्ष बेटी खुशी की हत्या की बात कुबूल कर ली. लखपत सिंह के मोबाइल में फोटो और वीडियो भी मिल गए, जो 29 जुलाई को सुबह पौने 7 बजे खींचे गए थे. लखपत सिंह के मोबाइल की गैलरी से हत्या का पूरा सच सामने आ गया.

पूछताछ के दौरान लखपत ने अपने दामाद के साथ मिल कर वारदात को अंजाम देने की बात कुबूल कर ली. लखपत सिंह बघेल ने स्वीकार किया कि बेटी खुशी के गर्भवती होने की खबर मोहल्ले में फैलने के बाद समाज में होने वाली बदनामी के डर से उस ने बेटी की हत्या जैसा कदम उठाया.

इस के बाद लखपत के दामाद सुनील को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. जांच के दौरान पुलिस ने उस के मोबाइल फोन की लोकेशन और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की जांच की. इस से लखपत सिंह, उस की बेटी खुशी और दामाद सुनील के आगरा जाने की जानकारी सामने आई. पुलिस को लखपत सिंह के मोबाइल से मिली तसवीरों को भी जांच में शामिल किया गया.

हत्या को आत्महत्या का रूप देने के लिए चंबल नदी पर पहुंच कर पहले ऐसा माहौल बनाया गया कि खुशी नदी में आत्महत्या करने जा रही है. चंबल नदी पर ले जाने के बाद दोनों आरोपियों लखपत सिंह व सुनील ने खुशी के साथ खेल भी खेला. लखपत ने कहा कि वह मरने का नाटक करे ताकि लगे कि उस ने जहर खा कर जान दे दी है.

अपने पापा व जीजा के जोर देने पर खुशी ने जमीन पर लेट कर मरने का नाटक किया. इसी दौरान फोटो और वीडियो बनाए गए, ताकि बाद में उसे आत्महत्या बताया जा सके.

आरोपियों ने कथित तौर पर खुशी के आत्महत्या की झूठी कहानी गढ़ी और अपराध को छिपाने तथा जांच टीम को गुमराह करने के लिए नकली जल प्रवाह की तसवीरें दिखाईं.

लखपत ने बताया कि दिल्ली से दूर ले जा कर उस ने बेटी को आत्महत्या करने का विकल्प दिया था. मगर वह साहस नहीं जुटा सकी. कई बार पानी में डूबी, लेकिन कुछ देर बाद ही बाहर निकल आई.

यह देख कर उसे गुस्सा आ गया, तब वह बेटी को नदी के बीच खींचते हुए ले गया और अपने हाथों से गला दबा कर पानी में डुबो दिया. बेटी काफी देर तक छटपटाती रही, सांस लेने के लिए बाहर निकलने का प्रयास करती रही, लेकिन नाकाम रही.

पैर छू कर मांगी माफी

इस सनसनीखेज घटना का विचलित कर देने वाला हिस्सा तब सामने आया, जब लखपत सिंह ने बेटी को मारने के बाद उस के शव को चंबल की गहराई में फेंकने से पहले पुलिस व लोगों को गुमराह करने के लिए बेटी के पैर छू कर पूजापाठ करने व माफी मांगने का ढोंग कर पूरे प्रकरण की वीडियो व फोटो भी दामाद से खिंचवाए.

उस ने सोचा कि तिगड़ी (दिल्ली) से 250 किलोमीटर दूर ले जा कर बेटी की हत्या करने की किसी को कानोकान खबर नहीं होगी. चंबल में लाश को मगरमच्छ व घडिय़ाल खा जाएंगे. दिल्ली लौटने के बाद किसी को शक न हो, इसलिए बेटी की गुमशुदगी दर्ज करा दी. यही वीडियो और फोटो बाद में उस के खिलाफ ही सबूत बन गए.

जिस बेटी ने 8 साल पहले मम्मी की मौत के बाद पूरे घर को संभाला, उसी बेटी की सांसें लखपत ने चंबल के गहरे पानी में घोंट दीं. दक्षिणी दिल्ली की तिगड़ी बस्ती में एक अन्य जाति के किशोर से प्रेम और 4 माह का गर्भ पिता को नागवार गुजरा. झूठी शान की खातिर उस ने बेटी को धोखे से बसौनी के चंबल घाट ला कर हमेशा के लिए चुप करा दिया. इस तरह कोख में पल रहे अपने प्यार को बचाने के चक्कर में खुशी की जिंदगी चली गई.

मृतका खुशी की मम्मी की 8 साल पहले मृत्यु हो गई थी. बड़ी बहन शादीशुदा है. मंझला भाई पढ़ाई करता है. पापा लखपत सिंह बघेल की हलवाई व टेंट की दुकान है.

दिल्ली के तिगड़ी थाना क्षेत्र की खुशी अभी जवानी की दहलीज पर ही थी. उस के मन में भी दूसरे युवाओं की तरह सपने थे अपनी पसंद की जिंदगी जीने के, अपने भविष्य को संवारने के, लेकिन दिल पर किसी का अधिकार नहीं होता.

इसी दौरान उस की मुलाकात मोहल्ले में रहने वाले 17 वर्षीय एक किशोर से हुई. फिर खुशी के प्रेम संबंध उस किशोर से हो गए. पापा लखपत सिंह के काम पर चले जाने के बाद पड़ोस में रहनेे वाला प्रेमी किशोर घर पर आ जाता था. दोनों एकदूसरे का हाथ थामे घ्ंटों बतियाते.

प्रेम संबंधों के चलते खुशी खुद पर कंट्रोल नहीं रख सकी और प्रेमी के साथ शारीरिक संबंध भी बना लिए. इस का नतीजा यह हुआ कि वह गर्भवती हो गई.

समय बीतता गया, दोनों ने भविष्य के अनेक सपने देखे, लेकिन उन्हें अंदाजा नहीं था कि एक दिन यही रिश्ता पूरे परिवार में तूफान ला देगा.

घटना के समय खुशी 4 माह की गर्भवती थी. लखपत सिंह के परिवार में सब कुछ सामान्य दिखाई देता था, लेकिन घर की चारदीवारी के भीतर एक ऐसा तूफान उठ चुका था, जिस ने खुशबू की जिंदगी हमेशा के लिए छीन ली.

घटना से एक महीने पहले लखपत सिंह को बेटी के गर्भवती होने की जानकारी जैसे ही मिली, उस ने इसे अपनी प्रतिष्ठा पर धब्बा मान लिया. परिवार को बेटी की प्रेग्नेंसी मंजूर नहीं थी. लखपत ने बेटी से गर्भपात कराने के लिए कहा, लेकिन उस ने मना कर दिया.

इस के बाद लखपत नेे अपने दामाद सुनील के साथ मिल कर बेटी की हत्या की साजिश रची. योजना के तहत वह बेटी खुशी को इलाज के बहाने से ले कर आगरा स्थित अपने पुश्तैनी गांव लखनपुरा थाना

बसौनी पहुंचा और एक रिश्तेदार के घर ठहरा.

एक दिन अपने रिश्तेदार के यहां रुकने के बाद दूसरे दिन 29 जुलाई, 2026 की सुबह करीब साढ़े 6 बजे लखपत सिंह अपनी बेटी खुशी व दामाद सुनील के साथ दवा लेने के बहाने घर से निकल गया.

वे 5 किलोमीटर तक बीहड़ व ऊबडख़ाबड़ वाले रास्ते पर चल कर सुनसान इलाके में चंबल नदी के किनारे जा पहुंचे. बेटी को इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि जिस पिता पर उसे सब से अधिक भरोसा है, वही उस की जिंदगी का सब से बड़ा दुश्मन बन चुका है.

वहां पहुंच कर लखपत ने बेटी से पानी में डूब कर मरने को कहा. बेटी द्वारा मना करने पर लखपत ने दामाद के सहयोग से उसे बीच नदी में ले जा कर अपने हाथों से गला दबा कर पानी में डुबो दिया.

बेटी अपनी जान बचाने के लिए तड़पती रही, लेकिन उस के पापा और जीजा का दिल नहीं पसीजा. कुछ ही पलों में उस की सांसें थम गईं और उस के साथ उस के गर्भ में पल रहे मासूम की भी मौत हो गई. इस के बाद दोनों आरोपियों ने शव को चंबल नदी में बहा दिया.

चलाया सर्च अभियान

पूछताछ के बाद पुलिस ने लखपत सिंह व सुनील को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. 2 अगस्त, 2026 को दिल्ली पुलिस ने आरोपियों की न्यायालय से 5 दिन की कस्टडी रिमांड मांगी.

रिमांड मिलने पर 4 अगस्त को पुलिस लखपत सिंह बघेल को ले कर आगरा के थाना बसौनी क्षेत्र के अंतर्गत गांव लखनपुरा पहुंची. वहां पहुंच कर छानबीन की.

दिल्ली पुलिस की टीम जब उत्तर प्रदेश की सीमा पार कर के आगरा में चंबल नदी के बीहड़ों की ओर बढ़ी, तब तक यह मामला केवल एक गुमशुदगी का नहीं रह गया था. अब जांच अधिकारियों के सामने सब से बड़ा सवाल था, युुवती की लाश बरामद करने का.

बरसात का मौसम था. चंबल नदी अपने पूरे वेग से बह रही थी. नदी का पानी सामान्य दिनों की तुलना में कहीं अधिक गहरा और तेज था. बीहड़ों की खामोशी पूरे माहौल को और रहस्यमय बना रही थी. फिर शुरू हुआ खुशी की लाश का तलाशी अभियान.

जहां खुशी को नदी में डुबो कर मारा गया था, लखपत सिंह की निशानदेही पर लगातार दूसरे दिन भी वहां सर्च औपरेशन चलाया गया. शव की तलाश के लिए पीएसी के गोताखोरों और स्थानीय पुलिस की टीमों को भी लगाया गया. नदी के कई हिस्सों में तलाशी ली गई, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी. देर शाम तक युवती का कोई पता नहीं चल सका.

पुलिस का कहना है कि सर्च औपरेशन अभी जारी है. फिलहाल दिल्ली पुलिस, बसौनी पुलिस और पिनाहट पुलिस संयुक्त रूप से पूरे मामले की जांच में जुटी थी. पुलिस का कहना है कि शव की बरामदगी और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी काररवाई की जाएगी.

इस बहुचर्चित मामले पर वरिष्ठ पुलिस अधिकारी लगातार नजर बनाए हुए थे. आगरा के डीसीपी (पूर्वी जोन) अभिषेक अग्रवाल भी इस सर्च अभियान पर नजर बनाए हुए थे.

पहले दिन शव न मिलने पर बुधवार 5 अगस्त को दिल्ली पुलिस और आगरा पुलिस की संयुक्त टीम ने चंबल नदी में गोताखोरों और एक स्टीमर को तैनात कर पीडि़ता के शव की दोबारा तलाश श्ुारू की. चंबल में कांटा व जाल भी डाला गया, लेकिन खुशी का शव नहीं मिला.

मगरमच्छ का निवाला

एएसपी (पिनाहट) अनिल कुमार ने बताया कि चंबल नदी में बड़ी संख्या में घडिय़ाल और मगरमच्छ हैं. कई दिनों तक दिल्ली, आगरा, राजस्थान व मध्य प्रदेश की पुलिस द्वारा संयुक्त रूप से तलाशी अभियान चलाया गया, लेकिन शव नहीं मिला. इस से अनुमान लगाया जा रहा है कि मृतका खुशी का शव घडिय़ाल और मगरमच्छ का निवाला बनने की आशंका भी जताई जा रही है.

क्या आज भी परिवार की प्रतिष्ठा के नाम पर बच्चों की इच्छाओं को कुचल देना उचित है? क्या किसी गलती का समाधान अमूल्य जीवन छीन लेना हो सकता है? इज्जत वह नहीं जो समाज के डर से बचाई जाए, बल्कि वह है, जो बच्चों का हाथ सब से कठिन समय में भी न छोड़े. बेटियां परिवार की इज्जत पर लगा धब्बा नहीं होतीं, वे उसी परिवार की पहचान होती हैं. उन की गलतियों का समाधान मार्गदर्शन है, अपराध नहीं.

एक बेटी… जिस ने भविष्य के सपने देखे थे. एक अजन्मा शिशु… जिस ने इस दुनिया की पहली सांस भी नहीं ली. और एक परिवार… जो शायद जीवन भर उस दिन के फैसले की परछाई से बाहर नहीं निकल पाएगा.

चंबल नदी की लहरें आज भी उसी शांति से बहती हैं. बीहड़ों की हवाएं आज भी उसी तरह पेड़ों से टकराती हैं. समय आगे बढ़ गया, मौसम बदल गए, लेकिन उस दिन की खुशी की चीख आज भी उन बीहड़ों की खामोशी में जैसे कहीं दबी हुई महसूस होती है.

औनर किलिंग जैसे मामले गंभीर: हाई कोर्टइलाहाबाद

हाई कोर्ट ने आगरा के चर्चित औनर किलिंग के एक मामले में मृतका की बुआ और फूफा की अग्रिम जमानत की अरजी खारिज कर दी. हाईकोर्ट ने मुरारीलाल व अन्य की याचिका

की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि औनर किलिंग जैसे मामलों को बहुत गंभीरता से देखा जाना चाहिए. यह आदेश न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह ने दिया.

न्यायमूर्ति ने कहा कि अग्रिम जमानत असाधारण और विवेकाधीन राहत है, जिसे केवल विशेष परिस्थितियों में ही दिया जाना चाहिए. प्रथमदृष्टया रिकौर्ड पर ऐसा कोई आधार नहीं है, जिस से यह माना जाए कि आरोपियों के खिलाफ मामला नहीं बनता.

मारी गई युवती का युवक से प्रेम संबंध था, जिस का उस के फेमिली वालों ने विरोध किया. मलपुुरा थाने में दर्ज एफआईआर के मुताबिक घटना से एक दिन पहले 24 अक्तूबर, 2025 को युवती अंशू ने 29 सेकेंड का एक वीडियो भेज कर कहा था कि उस के फेमिली वाले उसे मारना चाहते हैं.

अगले दिन उस की हत्या कर शव कार से ले जा कर इटावा से सुनवारा गांव के पास यमुना में फेंक दिया गया. जांच के दौरान सहआरोपी और मृतका के पिता जो उत्तर प्रदेश के रिटायर्ड दरोगा हैं, की निशानदेही पर शव अस्थिपंजर के रूप में बरामद किया गया,

हड्डियों और बालों के नमूने डीएनए जांच के लिए एफएसएल आगरा भेजे गए. हाईकोर्ट में याची ने खुद को बेगुनाह बताते हुए कहा कि उन्हें केवल रिश्तेदार होने के कारण फंसाया गया और उन के खिलाफ प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं हैं.

उधर राज्य सरकार की ओर से पैरवी के दौरान कहा गया कि युवती ने मौत से पहले बनाए गए वीडियो में स्वयं दोनों का नाम लिया था और जांच में उन के यमुना पुल पर मौजूद होने के संकेत भी मिले हैं.

सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि जांच अभी शुरुआती चरण में है और आरोपी जांच में सहयोग भी नहीं कर रहे हैं, इसलिए इस समय अग्रिम जमानत देना जांच को प्रभावित कर सकता है.

बताते चलें कि युवती की परिजनों द्वारा गला घोंट कर हत्या करने की स्टोरी सत्यकथा फरवरी 2026 के अंक में ‘मोहब्बत पर पहरा कहां तक वाजिब’ शीर्षक से प्रमुखता से प्रकाशित की गई थी.

कोर्ट मैरिज की सजा मौत              

उत्तर प्रदेश के आगरा जिले के ही जैतपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत नहटौली गांव में आईटीबीपी जवान से प्रेम विवाह करने पर पिता विमल शर्मा ने पत्नी व बेटे के साथ  मिल कर अपनी 22 वर्षीय बेटी अंकिता शर्मा की गला घोंट कर हत्या कर दी.

बेटी ने नहटौली निवासी आईटीबीपी जवान अमित पचौरी से प्रेम विवाह कर लिया था. फेमिली वालों को इस की जानकारी 4 महीने बाद एक दिन अमित के लड़की के घर पर आने के बाद हुई.

शादी के बाद से अंकिता अपने मायके में ही रह रही थी, वह प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही थी. बिना बताए शादी कर लेने की बात मालूम होते ही अंकिता के फेमिली वाले उस के खिलाफ हो गए थे. घर में आए दिन झगड़ा हो रहा था.

2 अगस्त, 2026 की रात ग्रामीणों ने अंकिता के चीखने की आवाजें सुनी थी. ग्रामीणों ने तब दरवाजा भी पीटा था, लेकिन दरवाजा न खुलने पर ग्रामीणों ने पुलिस कंट्रोल रूम 112 नंबर पर फोन कर के पुलिस को सूचना दी.

पुलिस मौके पर आई तो अंकिता का शव मिला. पिता विमल ने कहा कि उस ने अकेले ही बेटी की हत्या की है, जबकि घर में मां सीता और भाई अंकुश शर्मा नहीं मिले.

ग्रामीणों का आरोप है कि तीनों ने मिल कर अंकिता की हत्या कर दी और मां और भाई हत्या के बाद घर से भाग गए. पिता को गिरफ्तार कर लिया गया था.   Chambal River Honor killing Case

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