Kashipur Blind Murder Case. कांति बेशक विकास से प्यार करती थी, लेकिन जब उस की दोस्ती मौडल जौनी से हुई तो वह भी मौडल बनने के सपने देखने लगी. तब उस ने विकास से दूरी बना ली. जबकि कांति की मम्मी विकास से ही शादी करने का दबाव उस पर डालने लगी. इस दबाव से नाराज हो कर एक दिन कांति ने अपना घर छोड़ दिया. इस के बाद जो हुआ

दिन भर की भीषण गरमी के बाद उस कालोनी के अधिकांश लोग राहत पाने के लिए अपनीअपनी छतों पर टहलने के लिए चले गए थे, लेकिन इतनी गरमी में खाना बनाना कांति की मजबूरी थी.

उस वक्त लाइट भी गुल थी, जिस की वजह से कांति हवा खाने के लिए घर के दरवाजे पर जा खड़ी हुई. चारों ओर घोर अंधेरा छाया था. मौका पाते ही विकास  उस के पास आ कर खड़ा हो गया. वह बोला, ”कांति, मैं तेरा बहुत देर से इंतजार कर रहा था, लेकिन तू मुझे कहीं भी दिखाई नहीं दी.’’

”विकास, मैं ने तुम से कितनी बार कहा कि तुम इस तरह से मुझ से मत मिला करो. मेरा तुम्हारे साथ कोई रिश्ता नहीं रह गया.’’ कहते हुए कांति ने विकास से कन्नी काटनी चाही, लेकिन विकास फिर भी उस के पीछे पड़ा हुआ था.

तभी कांति की मम्मी बिदुली भी घर से निकल कर बाहर आ गई थीं. वह बोली, ”क्या हुआ बेटा, तुम बाहर क्यों खड़ी हो? आओ, अंदर आओ. मुझे तुम से कुछ जरूरी बात करनी थी.’’

मम्मी की बात सुनते ही कांति कमरे में आ गई. उस के पीछेपीछे विकास भी घर के अंदर आ गया था. कमरे में आते ही विकास ने बिदुली से कहा, ”आंटी, इस कांति को अचानक क्या हो गया. इस से पहले यह हर वक्त मेरे लिए पलक बिछाए बैठी रहती थी, लेकिन अब यह न तो मुझ से कोई बात ही करना चाहती है और न ही मेरी तरफ एक फूटी आंख देखने को ही तैयार है. आखिरकार इस पर कौन सा भूत सवार हो गया, जो यह मुझे अपना दुश्मन समझने लगी?’’

”बेटा, मैं इसे समझासमझा कर हार चुकी हूं. इस पर आजकल जौनी के प्यार का भूत सवार हो चुका है. कहती है कि मुझे मौडल बन कर अपने सपने पूरे करने हैं. उन सपनों का राजकुमार वही है. वही मुझे जिंदगी की इस दलदल से बाहर निकाल सकता है.’’

जौनी का नाम सुनते ही विकास का दिमाग घूमने लगा.

‘उस जौनी के बच्चे ने तो मेरा जीना ही हराम कर दिया है. उस कमीने को सबक सिखाना ही पड़ेगा,’ विकास बुदबुदाने लगा.

”विकास, तुम्हें जो कुछ भी कहना है, मुझ से कहो, जौनी को कुछ भी कहने की जरूर नहीं.’’ कांति ने विकास को चेतावनी दी.

कांति जौनी के खिलाफ एक भी शब्द सुनने को तैयार न थी.

कांति की बात सुनते ही सामने बैठी उस की मम्मी उस के गाल पर 2-3 थप्पड़ जड़ते हुए बोली, ”देख, आज कान खोल कर सुन ले, अगर तेरी शादी होगी तो केवल विकास के साथ. आज के बाद इस घर में तूने जौनी का नाम भी लिया तो तेरी खैर नहीं.’’

उस की मम्मी ने एक तरह से उसे चेतावनी दे डाली थी.

मम्मी की धमकी सुन कांति ने उसी समय जौनी को फोन मिला दिया. वह उस से बोली, ”जौनी, मैं तुम्हें बहुत ही प्यार करती हूं. ये लोग आज मेरी जान लेने पर तुले हैं. इस दुनिया में एक तुम ही हो जो मुझे इस संकट से बचा सकते हो, अगर तुम नहीं आए तो मुझे मरा ही समझना.’’

कांति की बात सुनते ही जौनी ने उसे प्यार से समझाया, ”यह तुम्हारे घर का मैटर है कांति, पागल मत बनो. जैसे तुम्हारे घर वाले चाहते हैं, तुम वैसा ही करो. तुम्हारे घर के मामले में मैं कुछ भी नहीं कर सकता.’’

जौनी की बात सुनते ही कांति ने रोनाधोना शुरू कर दिया था. फिर उस ने रोते हुऐ जौनी से विनती की, ”प्लीज जौनी, केवल एक बार मेरे घर पर चले आओ. यहां पर कुछ अनहोनी होने वाली है.’’

कांति की बात सुनते ही बिदुली ने उस के हाथ से मोबाइल छीन कर नीचे पटक दिया. फिर वह कांति को बुरी तरह से मारनेपीटने लगी.

आज जो बिदुली के घर में हो रहा था, वह कोई नया नहीं था. आए दिन उस के घर में इस तरह का शोरशराबा होता ही रहता था. यही कारण था कि कोई भी मोहल्ले वाला उन के बीचबचाव में नहीं आता था. घर में बवाल होते देख विकास वहां से चुपचाप खिसक लिया.

उस के बाद कांति ने पुलिस कंट्रोल रूम का 112 नंबर डायल कर पुलिस की सहायता मांगी. उस वक्त तक जौनी कांति के पास पहुंच चुका था. कांति जौनी को साथ ले कर नजदीक के आईटीआई थाने जा पहुंची थी.

उधर पुलिस कंट्रोल रूम की सूचना पर आईटीआई थाना पुलिस कांति के घर पर पहुंच गई थी, लेकिन पुलिस को घर पर कोई नहीं मिला.

कांति ने थाने पहुंचते ही अपनी मम्मी और विकास के खिलाफ अपनी जान का खतरा बताते हुए लिखित तहरीर दी. इस के बाद वह अपने घर आ गई. जौनी भी कांति को उस के घर पर छोड़ कर अपने घर चला गया था. उस वक्त रात के 12 बज चुके थे.

उस रात कांति की आंखों से नींद कोसों दूर थी. अपनी मम्मी और विकास के तेवर देख कर उस का दिल बुरी तरह से घबरा रहा था. उस के बाद भी उस की मम्मी बिदुली ने उसे खरीखोटी सुनाई. बिदुली ने उसे खुली चुनौती दी थी, ”अगर तुझे इस घर में रहना है तो विकास के साथ ही शादी करनी पड़ेगी, वरना इस घर में तेरे लिए कोई जगह नहीं है.’’

मम्मी की बात सुनते ही कांति ने जौनी से वाट्सऐप पर चैटिंग कर उस से सहायता मांगी, लेकिन जौनी ने उस से साफ कह दिया कि इस समय मुझे बहुत तेज नींद आ रही है. प्लीज, अब मुझे तंग मत करो.

फिर भी उस ने जौनी से विनती की, ”प्लीज जौनी, मेरी कुछ हेल्प करो. मैं मरना नहीं चाहती. मैं जिंदगी में अपने परिवार वालों को कुछ कर के दिखाना चाहती हूं.’’

उस वक्त तक रात के 4 बज चुके थे. तभी कांति ने अपनी जिंदगी का आखिरी फैसला लिया और अपने बैग में अपनी जरूरत का कुछ सामान रखा और चुपके से घर से निकल गई, लेकिन फिर घर वापस नहीं आई.

20 अगस्त, 2026 को सुबह 6 बजे किसी ने पुलिस को फोन कर के बताया कि प्रतापपुर चौकी धनौरी क्षेत्र में सड़क के किनारे एक युवती की लाश पड़ी है.

यह सूचना पाते ही काशीपुर (ऊधमसिंह नगर) कोतवाल हरेंद्र चौधरी पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचे. चूंकि यह घटनास्थल प्रतापपुर पुलिस चौकी के अंतर्गत आता था. इस घटना की जानकारी मिलते ही प्रतापपुर चौकी प्रभारी कौशल भाकुनी भी घटनास्थल पर पहुंच गए. उस वक्त तक वहां पर काफी लोग इकट्ठा हो गए थे.

घटनास्थल पर पहुंचते ही पुलिस ने अपनी जांचपड़ताल की तो पता चला कि युवती के सिर पर गहरे चोट के निशान मौजूद थे, लेकिन घटनास्थल पर ऐसे कोई सबूत मौजूद नहीं थे, जिस से साबित हो सके कि उस का किसी वाहन से एक्सीडेंट हुआ हो.

सड़क किनारे पड़े युवती के शव को देख कर साफ जाहिर हो रहा था कि उसे कहीं दूसरी जगह पर मार कर घटनास्थल पर ला कर डाला गया था.

घटनास्थल की तहकीकात करने के बाद पुलिस ने उस की शिनाख्त कराई तो उस की पहचान काशीपुर के विशालनगर कालोनी निवासी बच्ची झा की बेटी कांति झा के रूप में हुई.

मृतका की पहचान होते ही उस के फेमिली वालों को उस की मृत्यु की सूचना दे दी गई. कांति की मौत की सूचना पाते ही उस के परिवार में कोहराम मच गया.

चूंकि मामला एक जवान युवती से जुड़ा था, इसलिए मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने फोरैंसिक टीम को भी मौके पर बुला लिया था. टीम ने घटनास्थल से सारे तथ्य जुटाए, ताकि इस केस का जल्दी खुलासा हो सके.

मृतका के फेमिली वालों के घटनास्थल पर पहुंचते ही पुलिस ने मृतका के संबंध में उन से जानकारी जुटाई. तब मृतका की मम्मी बिदुली झा ने पुलिस को बताया कि कांति रमपुरा निवासी जौनी के संपर्क में थी. उस रात भी जौनी ही उसे अपने साथ ले गया था और फिर उसे घर भी छोड़ गया था.

बिदुली ने पुलिस को यह भी बताया कि जौनी पिछले 7 महीने से उस की बेटी को मौडल बनाने का झांसा दे रहा था, जिस के कारण उस के परिवार में भी कलह रहने लगी थी. उस की बेटी हर वक्त उस के ही गुण गाती रहती थी. पिछली 5 जुलाई को कांति का जन्मदिन था. जन्मदिन में जौनी के आने से फिर से उस के घर में तनाव और विवाद पैदा हो गया था.

फेमिली वालों के बयान लेने के बाद पुलिस ने आगे की काररवाई करते हुए उस की लाश पोस्टमार्टम के लिए हल्द्वानी के राजकीय चिकित्सालय भेज दी.

इस घटना की जानकारी मिलते ही एएसपी स्वप्न किशोर सिंह, सीओ प्रशांत कुमार व एसएसपी अजय गणपति भी घटनास्थल पर पहुंच गए.

सभी अधिकारियों ने घटना का जायजा लिया. मृतका कांति के सिर पर गोली के निशान होने का अंदेशा होने पर शव का पोस्टमार्टम डौक्टरों के एक पैनल से कराने का फैसला लिया गया.

इस मामले में पुलिस ने मृतका की मम्मी बिदुली की शिकायत पर रमपुरा निवासी जौनी को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया, लेकिन जौनी से पूछताछ के दौरान इस मामले में कोई क्लू नहीं मिल पाया.

कारण था कि जौनी ही एक ऐसा शख्स था, जो कांति की हर तरफ से सहायता कर रहा था. वही उस के साथ आईटीआई थाने भी गया था.

उस के बाद वह उस को उस के घर पर छोड़ कर अपने घर वापस चला गया था. इस बात का प्रूफ पुलिस पहले ही सीसीटीवी कैमरे से निकाल चुकी थी. इस के बावजूद भी पुलिस ने उसे अपनी नजरबंदी में ही रखा.

उस के बाद पुलिस ने अपनी जांच का रुख विकास की ओर किया, क्योंकि मृतका के पापा बच्ची झा ने पुलिस को पहले ही बताया था कि विकास ने उस रात उस के साथ मारपीट भी की थी. पुलिस को आशा की एक किरण बंधी और शक के आधार पर उस के परिवार के साथ उसे पूछताछ के लिए बुला लिया.

सब से पहले पुलिस ने मृतका की मम्मी से पूछताछ की तो उस ने फिर से वही जौनी वाला राग अलापा, लेकिन इस मामले में मृतका के पापा बच्ची झा के बयान कुछ बदल गए थे.

इस मामले में उन्होंने पुलिस को जानकारी देते हुए बताया कि घटना वाली रात उस के सामने ही विकास ने उस की बेटी कांति के साथ मारपीट की थी. वह उस के साथ शादी करने के लिए उस पर दबाव बना रहा था, लेकिन कांति उस के साथ किसी भी कीमत पर शादी करने को तैयार नहीं थी.

इस जानकारी के मिलते ही पुलिस को लगा कि जरूर विकास ने शादी का दबाव बनाने के लिए उस के साथ जोरजबरदस्ती की होगी. जिस के न मानने पर उस की हत्या कर दी होगी.

इस जानकारी के बाद पुलिस ने विकास को एकांत में ले जा कर कड़ी पूछताछ करने का फैसला लिया, लेकिन पूछताछ के दौरान विकास ने भी साफ शब्दों में कहा कि वह उस के घर से जाने के बाद सीधा अपने घर चला गया था.

घर जाने के बाद उसे पता चला कि उस के एक दोस्त की तबियत खराब हो गई. फिर वह उस की खैरखबर लेने सरकारी अस्पताल चला गया था. उस के बाद कांति के साथ क्या हुआ, उसे कोई जानकारी नहीं.

विकास ने पुलिस के सामने जो कहानी गढ़ी थी, उस में कितनी सच्चाई थी, उस का पता लगाना पुलिस की जिम्मेदारी बन गई थी. विकास की सच्चाई जानने के लिए पुलिस ने सरकारी अस्पताल जा कर वहां पर लगे सीसीटीवी कैमरे चैक कराए तो विकास वहां पर कुछ लोगों के साथ खड़ा नजर आया. विकास को वहां पर देखते ही एक बार फिर से पुलिस की सोच पर पानी फिर गया.

पुलिस लगातार इस केस की गहराई तक जाने के लिए हाथपांव मारती रही, लेकिन कोई भी नतीजा सामने नहीं आया. फिर भी पुलिस ने इस ब्लाइंड मर्डर केस से जुड़े तमाम पहलुओं को खंगाला, साथ ही अलगअलग कोणों से अपनी जांच आगे बढ़ाई, लेकिन नतीजा शून्य ही रहा.

पुलिस समझ नहीं पा रही थी कि कांति की मौत किन परिस्थितियों में हुई और उस का शव इतनी दूर सड़क किनारे कैसे पहुंचा?

इस मामले में पुलिस एक साथ 3 युवकों को अपनी हिरासत में ले कर कड़ी पूछताछ कर रही थी. वहीं पुलिस मृतका की मम्मी के बदले बयानों में विरोधाभास आने से भी पूरी तरह से शंकित थी.

कांति काफी समय से बीमार चल रही थी. उस के मस्तिष्क में ट्यूमर बन गया था, जिस के कारण वह हमेशा बहकीबहकी बातें करती थी. घर की आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण उस का किसी अच्छे निजी अस्पताल में इलाज तक नहीं हो पा रहा था. उस के पापा बच्ची झा पहले से ही पैरालाइज्ड थे.

कई महीनों से बिदुली झा अपने मकान का किराया तक नहीं चुका पा रही थी. काफी समय से कांति का प्रेमी विकास उस के घर का खर्च उठाता आ रहा था, लेकिन कांति के जौनी के साथ संबंध हो जाने के बाद उस ने भी पूरी तरह से अपना हाथ खींच लिया था.

इस दौरान कांति का हरिद्वार में शादी के लिए रिश्ता भी तय हो गया था. जिस के बाद से ही विकास और कांति के बीच तनाव बढ़ गया था. ‘इन्हीं सब वजहों से ही कहीं फेमिली वालों ने ही तो उसे ठिकाने नहीं लगा दिया,’ पुलिस इन्हीं सभी तथ्यों को आधार मान कर उस के फेमिली वालों से भी जानकारी जुटाने में लगी हुई थी, लेकिन किसी भी तरह से पुलिस को कोई सफलता हाथ नहीं लगी.

इस घटना को पूरे 3 दिन बीत चुके थे, लेकिन मृतका के फेमिली वालों की तरफ से पुलिस को किसी तरह ही लिखित तहरीर नहीं दी गई थी. यह मामला प्रतापपुर थाना अंतर्गत आता था.

इस मामले में प्रतापपुर चौकी इंचार्ज कौशल भाकुनी की तरफ से अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी. तभी से कई पुलिस टीमें इस का खुलासा करने में लगी हुई थीं. यहां तक कि एसएसपी अजय गणपति स्वयं ही इस केस के खुलासे के लिए काशीपुर में डेरा डाले हुए थे.

जब पुलिस के काफी हाथपांव मारने के बाद भी कोई सफलता नहीं मिली तो पुलिस ने मृतका के घर से घटनास्थल तक लगे लगभग 200 से 250 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली. उन फुटेज और साक्ष्यों के आधार पर पुलिस की निगाहें एक डंपर संख्या यूके 15सीए 1437 पर जा कर ठहर गईं. इस डंपर से पुलिस को एक आशा बनी तो पुलिस ने उस के मालिक से पूछताछ की.

डंपर मालिक ने पुलिस को जानकारी देते हुए बताया कि घटना के समय डंपर राजू निवासी कचनालगुसाई, थाना आईटीआई चला रहा था. उस वक्त उस के साथ धनौरी पट्टी लक्ष्मीपुर निवासी सुमित भी मौजूद था.

इस जानकारी के बाद पुलिस ने मृतका और संदिग्धों के मोबाइल नंबरों की कौल डिटेल्स व लोकेशन खंगाली, लेकिन कौल डिटेल्स ने एक बार फिर से पुलिस को कशमकश में डाल दिया था.

कई नंबरों पर लंबी बातें होना पाई गईं तो कई से मृतका के मोबाइल पर रिचार्ज होना पाए गए थे, लेकिन घटना वाले दिन से ही मृतका का मोबाइल बंद होने के साथ ही गायब था. फिर भी पुलिस ने मृतका के मोबाइल पर एक बार फिर से डायल किया तो पुलिस को एक उम्मीद की रिंग सुनाई दी.

दूसरी तरफ से फोन उठा तो पुलिस ने पूछा, ”कौन बोल रहे हैं.’’

”सर, मैं छोटू ड्राइवर बोल रहा हूं.’’

”छोटू, तुम जिस मोबाइल से बात कर रहे हो, क्या यह तुम्हारा है?’’

”नहीं सर, यह मोबाइल मेरा नहीं है. यह मोबाइल मैं ने सड़क से उठाया था. सर, यह मोबाइल मेरे सामने ही राजू ड्राइवर ने सड़क पर फेंका था, जिसे मैं ने उठा लिया था. सर, पहले तो मैं ने सोचा कि यह मोबाइल खराब होगा, लेकिन जब मैं ने उठा कर देखा तो यह बिलकुल सही था.’’ छोटू ने एक ही सांस में पुलिस को सारी सच्चाई बता दी थी. इस सच्चाई के सामने आने के बाद पुलिस ने डंपर मालिक की मदद से दोनों आरोपियों को उन के घर से दबोच लिया.

आरोपियों को गिरफ्तार करते ही पुलिस ने उन से सख्ती से पूछताछ की तो दोनों ने अपना जुर्म कुबूल कर लिया.

आरोपी राजू और सुमित ने पुलिस को बताया कि 20 अगस्त, 2026 की सुबह वह अपने साथी सुमित के साथ खनिज लेने क्रेशर की ओर जा रहा था. चैती मोड़ के पास एक युवती ने हाथ दिया तो उन्होंने डंपर रोक कर उसे बैठा लिया. उस समय तक चारों तरफ अंधेरा पसरा था.

युवती को अकेला पा कर राजू की नीयत खराब हो गई. फिर उस ने डंपर सुमित के हवाले कर दिया और खुद युवती के पास जा कर बैठ गया. एकांत स्थान देख कर राजू ने युवती के साथ छेड़छाड़ करते हुए उस के साथ जोरजबरदस्ती करने की कोशिश की. अपने को असहाय मानते हुए युवती ने उस की शिकायत पुलिस में करने की बात कही, लेकिन इस के बाद भी वह नहीं माना.

उस के बाद युवती ने अपनी सुरक्षा के लिए राजू के हाथ में दांतों से काट लिया. युवती के द्वारा उस के हाथ में काटते ही वह बुरी तरह से चीखा और फिर उस ने गाड़ी में रखे लोहे के हुक से उस के सिर पर वार कर दिया, जिस के तुरंत बाद ही उस की मौत हो गई थी. इस के बाद उस ने उसे सड़क के किनारे फेंक दिया और क्रेशर से खनिज सामग्री भरने चले गए.

इस ब्लाइंड मर्डर केस के खुलते ही पुलिस ने अभियुक्तों की निशानदेही पर डंपर के अंदर से घटना में प्रयुक्त आलाकत्ल लोहे का हुक व बैग भी बरामद कर लिया. जिस के अंदर से युवती का आधार कार्ड, बैंक पासबुक व आयुष्मान कार्ड भी बरामद कर लिया. साथ ही पुलिस ने राजू के घटना के वक्त पहने हुए कपड़े भी बरामद कर लिए.

कांति हत्याकांड पुलिस के लिए एक ब्लाइंड मर्डर केस बन कर रह गया था. पूरे 72 घंटे गुजर जाने के बाद भी पुलिस इस मामले को सुलझाने में पूरी तरह से नाकाम हो चुकी थी. पुलिस हार मानने लगी थी कि इस केस की तह तक पहुंचने में समय लग सकता है, लेकिन एक डायल रिंग से मात्र 10 मिनट में ही यह केस खुल कर सामने आ गया.

पुलिस पूछताछ और फेमिली वालों के बयानों के आधार पर इस केस की जो कहानी उभर से सामने आई, वह किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं थी.

अब से कोई 22 साल पहले दरभंगा, बिहार निवासी बच्ची झा अपने परिवार के साथ रोजीरोटी की तलाश में उत्तराखंड के जिला ऊधमसिंह नगर के काशीपुर नगर में आ कर बसा था.

काशीपुर आने के बाद बच्ची झा ने अपने परिवार का लालनपालन करने के लिए स्थानीय पुरानी सब्जी मंडी में चौकीदारी की. कुछ सालों बाद बच्ची सिंह ने अपने बचत किए पैसों से काशीपुर के निझड़ा गांव में अपना छोटा सा मकान बना लिया.

बच्ची झा का 5 सदस्यों का परिवार था, जिस में पतिपत्नी के अलावा 2 बेटियां और एक बेटा था. बच्ची झा जैसेतैसे कर अपने परिवार का पालनपोषण कर रहा था, लेकिन उसी वक्त उस के परिवार पर एक मुसीबत आ पड़ी. वह लकवे की चपेट में आ गया.

बच्ची झा के बीमार पड़ते ही घर खर्च के लिए पैसों के लाले पड़ गए. उस समय बच्ची सिंह के बच्चे छोटे थे. घर का खर्च चलाने के लिए बिदुली को दूसरों के घरों में काम करने पर मजबूर होना पड़ा. जिस के सहारे उस ने अपनी दोनों बेटियों को पढ़ाने की कोशिश की. उसी आर्थिक तंगी के चलते बच्ची झा को अपना घर बेचने पर मजबूर होना पड़ा.

बिदुली की बड़ी बेटी देहरादून में प्राइवेट नौकरी करने लगी थी. उस का भाई पहले ही अपने परिवार से अलग हो कर किराए के मकान में रह रहा था.

अपना मकान बेचने के बाद बच्ची झा का परिवार काशीपुर के विशालनगर कालोनी में एक किराए का मकान ले कर रहने लगा. इस वक्त किराए के मकान में तीनों प्राणी मम्मीपापा और कांति ही जैसेतैसे कर अपनी गुजरबसर कर रहे थे. उस वक्त कांति ने भी अपनी पढ़ाई छोड़ दी और अपनी मम्मी के साथ वह भी काम पर जाने लगी थी.

बच्ची झा के किराए के मकान के सामने ही रहती थी विकास की बहन. विकास अकसर अपनी बहन से मिलने आताजाता रहता था. विकास कुमार थाना आईटीआई के अंतर्गत जसपुर खुर्द मालवा फार्म का रहने वाला था.

विकास टैक्सी चालक था. वह अकसर अपनी बहन के यहां भी टैक्सी से ही आता था. उसी आनेजाने के दौरान कांति विकास के संपर्क में आई. बाद में विकास ने उस के साथ दोस्ती कर ली.

दोस्ती होते ही दोनों ने एकदूसरे के मोबाइल नंबर भी ले लिए थे. कुछ ही दिनों में बिदुली और विकास की बहन के भी अच्छे संबंध हो गए थे. फिर उन्हीं मधुर संबंधों के कारण एकदूसरे के घर आनाजाना भी बढ़ गया था. कुछ ही दिनों के बाद कांति और विकास के बीच प्रेम प्रसंग चालू हो गया और जल्दी ही बात शादी तक भी जा पहुंची.

कांति ने हाईस्कूल पास किया था. उस की उम्र भी अभी 18 वर्ष ही हुई थी. वह अभी पूरी तरह से नादान ही थी.

विकास की आमदनी अच्छी थी. विकास  कांति के परिवार पर प्रभाव जमाने के लिए खुले हाथ से खर्च भी करने लगा था, जिस के कारण कांति की मम्मी को विकास कुछ ज्यादा ही पसंद आने लगा था. बाद में वह कांति की शादी उस के साथ करने के लिए भी तैयार हो गई थी. इस बात को सुन कर विकास भी बहुत खुश था.

उसी दौरान कांति की जिंदगी में जौनी नामक युवक की एंट्री हो गई. जौनी काशीपुर के रामनगर रोड स्थित रमपुरा गांव का रहने वाला था.

जौनी को मौडलिंग का शौक था. पहले वह गानों पर अभिनय व फोटोशूट कर रील बना कर फेसबुक और इंस्टाग्राम पर डालता था. उस के बाद उस ने मौडलिंग में अपना भाग्य आजमाया. धीरेधीरे उस ने मौडलिंग में अपने पैर जमा लिए. फिर वह मौडलिंग के लिए दिल्ली, पुणे और गोवा भी गया. कुछ ही दिनों में वह सोशल मीडिया पर छा गया.

एक दिन कांति इंस्टाग्राम पर रील देख रही थी. उसी दौरान उस के सामने जौनी की एक रैंप पर चलते हुए वीडियो सामने आ गई. उस की रील को देखते ही उस के मन में जौनी की चमकदमक वाली दुनिया घर कर गई. कांति ने उसी समय जौनी की आईडी पर जा कर उस की प्रोफाइल खोली तो वह उस की दीवानी हो गई.

उस की आईडी पर बहुत सी ऐसी रीलें पड़ी हुई थीं, जिस में उस ने तमाम अवार्ड जीत रखे थे. कांति उस के काम से बहुत ही प्रभावित हुई और फिर उस ने इंस्टाग्राम पर ही जौनी से संपर्क कर लिया. फिर उस ने अपनी जिंदगी को उन्मुक्त रूप से जीने की राह पर छोड़ दिया.

जौनी के संपर्क में आने के बाद कांति विकास से दूरी बनाने लगी थी. पहले तो बिदुली समझ नहीं पाई कि कांति को ये अचानक क्या हो गया, जो विकास से बात करने को तैयार नहीं, लेकिन एक दिन जब कांति जौनी को अपने घर ले कर पहुंची तो उस के घर में जैसे तूफान आ गया.

बिदुली ने कांति से उस के बारे में जानकारी ली तो उस ने सब कुछ साफसाफ बता दिया. उस ने अपनी मम्मी बिदुली से कह दिया कि वह उस के साथ रह कर मौडलिंग सीख रही है और जौनी विकास कुमार से कई गुना अच्छा है.

कांति की बात सुनते ही बिदुली हैरान रह गई. उस की समझ में कुछ नहीं आ रहा था कि वह कांति को किस तरह से समझाए. उस ने कांति को कई बार समझाने की कोशिश की भी की, लेकिन कांति उस की एक भी बात मानने को तैयार न थी. उस के बाद मांबेटी के बीच मनमुटाव पैदा हो गया.

बिदुली ने यह बात विकास को बताई तो उस के तनबदन में आग लग गई. विकास ने उसे पाने के लिए अब तक उस पर न जाने कितना रुपया लुटाया था, लेकिन कांति ने अपनी बेवफाई दिखाते हुए उसे दरकिनार कर दिया था.

विकास ने भी उसे कई बार समझाने की कोशिश की, लेकिन उस ने उस से भी साफ शब्दों में कह दिया कि वह उस के साथ शादी नहीं कर सकती.

घटना वाली रात बिदुली विकास को अपने घर के अंदर ले गई. जिस के दौरान ही रात के लगभग 11 बजे विकास और कांति के बीच जम कर मारपीट भी हुई. बिदुली विकास के पक्ष में खड़ी थी, जबकि उस के पापा बीमार पड़े होने के कारण कुछ कर नहीं पाते थे, लेकिन वह विकास से खुश नहीं थे.

उसी रात कांति कोई एक बजे अपने घर वापस आ गई थी, लेकिन उस के घर आते ही उस की मम्मी फिर से उस पर चढ़ बैठी. उस ने उसे फिर से मारापीटा तो कांति देर रात मौका पाते ही पड़ोसी की छत फांद कर घर से निकल गई. उस ने सोचा था कि वह घर से निकल कर सीधे जौनी के घर पहुंच जाएगी.

उस वक्त चारों तरफ सन्नाटा छाया हुआ था और सड़कें भी पूरी तरह से सूनी थीं. घर से निकलते ही उसे सामने से आता एक डंपर दिखाई दिया. उस ने डंपर को हाथ दिया तो वह रुक गया. फिर उस ने चारों ओर देखा और वह उस में सवार हो गई. उस के बाद उन दरिंदों ने अपनी हवस मिटाने की कोशिश में उसे मौत के घाट उतार दिया, लेकिन दरिंदे अपने मनसूबे में कामयाब नहीं हो पाए थे.

अपराधी चाहे कितना भी शातिर क्यों न हो, लेकिन पुलिस की पैनी नजर से वह किसी भी कीमत पर बच नहीं पाता. पुलिस ने सीसीटीवी, कौल डिटेल्स और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के विश्लेषण से आरोपियों तक पहुंचने में आखिरकार सफलता हासिल कर ही ली थी. इस केस के खुलते ही पुलिस ने सोमवार 24 अगस्त, 2026 को दोनों आरोपियों को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया. Kashipur Blind Murder Case

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