Delhi Murder Case. रेस्तरां वाली मुलाकात के बाद मुसकान ने अपने प्रेमी आकिब से पूरी तरह मुंह मोड़ लिया था. इतना ही नहीं, उस ने आकिब का फोन नंबर ब्लौक कर दिया था. अब वह अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे रही थी, लेकिन आकिब को उस का यह कदम इतना बुरा लगा कि…
मुसकान औटो से उतरी, औटो वाले को पर्स से निकाल कर किराया दिया और फिर अनमने भाव से सामने नजर आ रहे रेस्तरां की तरफ बढ़ गई. यह रेस्तरां उत्तम नगर में स्थित था.
21 बसंत देख चुकी मुसकान बेहद शोख और चंचल थी. उसे कुदरत ने जैसे फुरसत में गढ़ा था. एकएक अंग सांचे में ढला प्रतीत होता था. गोल चेहरा, तीखी नाक, पतले संतरे की फांक जैसे होंठ, नशीली आंखें और गठा हुआ शरीर, जो जवानी के उफान पर था.
मुसकान खूबसूरत थी, इसलिए जवानी की दहलीज पर आते ही उस का झुकाव मौडलिंग की ओर हो गया था. वह छोटेमोटे ऐड करती थी. उस को खुद पर यकीन था कि एक दिन वह रुपहले परदे पर भी नजर आएगी, जहां शोहरत और दौलत दोनों ही कलाकार की झोली में होते हैं.
वह डीयू की छात्रा थी. स्नातक की पढ़ाई कर रही थी. 18 से 21 वर्ष की उम्र बहुत नाजुक होती है, यहां आ कर मन में हसरतें उमडऩे लगती हैं, दिल सीने से फिसलने को बेताब रहता है. इसी उम्र में आ कर युवा वर्ग को प्यार का रोग लग जाता है.
मुसकान का भी यही हाल था. उस के भी कदम बहक गए थे. उसे भी किसी से प्यार हो गया था, लेकिन जितनी तेजी से उस पर प्यार का रंग चढ़ा था, उतनी ही तेजी से वह रंग फीका भी पडऩे लगा था. इस फीके पड़ते प्यार का रंग रेस्तरां में नजर आने वाला था, जिस की ओर मुसकान के कदम धीरेधीरे बढ़ रहे थे. उस के दिल में अजीब सी हलचल थी. चेहरे के भाव मन में उठ रहे तरहतरह के खयालों के कारण रहरह कर बदल रहे थे. उस के पैर रेस्तरां तक आतेआते बहुत भारी हो गए थे.
रेस्तरां में आ कर उस ने इधरउधर नजरें दौड़ाईं. उसे एक टेबल पर वह युवक नजर आ गया, जिस के लिए वह यहां आई थी.
यह 24 साल का हैंडसम युवक था. इस की गठी हुई देह इस बात की ओर इशारा कर रही थी कि यह जिम जाने का शौकीन है.
मुसकान उस की टेबल की तरफ बढ़ गई. टेबल के पास आ कर उस ने हायहैलो नहीं की, सीधा सा सवाल कर दिया, ”तुम ने मुझे यहां क्यों बुलाया है आकिब?’’
”लडऩे के मूड में आई हो क्या मुसकान?’’ आकिब गंभीर स्वर में बोला ”बैठ जाओ, हम बैठ कर बातें कर लेते हैं.’’
मुसकान अनमने भाव से बैठ गई. आकिब की ओर देख कर उस ने रूखे स्वर में पूछा ”बताओ, मुझे यहां क्यों बुलाया है तुम ने आकिब?’’
”तुम मुझ से नाराज हो मुसकान. मुझे तुम से यही जानना है मुसकान कि इस के पीछे क्या कारण है. तुम तो मुझ से बहुत प्यार करती रही हो और करती हो.’’ आकिब अभी भी गंभीर था.
”प्यार करती थी आकिब, उम्र ही ऐसी थी कि मैं प्यार जैसे फिजूल के लफड़े में पड़ गई, मुझे अपने करिअर की तरफ ध्यान देना चाहिए था.’’ मुसकान बहुत गंभीर हो गई थी.
”तुम ग्रैजुएशन कर रही हो. बस लड़कियों के लिए इतना पढऩा ही मैं बहुत समझता हूं मुसकान.’’ आकिब बहुत सुलझे हुए अंदाज में बोल रहा था, ”मैं तुम से शादी के बाद कोई नौकरी थोड़ी करवाऊंगा, मैं तुम्हारी जरूरतों का खुद खयाल रखने के लिए काम करूंगा. इतना कमाऊंगा कि हर खुशी तुम्हारी झोली में डाल सकूं.’’
”यह तुम्हारे खयालात हैं आकिब.’’ मुसकान धीरे से बोली, ”तुम से पहले भी कह चुकी हूं और अब फिर कह रही हूं कि मैं तुम से शादी नहीं करना चाहती.’’
”लेकिन क्यों मुसकान? आखिर मेरे प्यार में तुम्हें कहां कमी नजर आ रही है कि तुम मेरे साथ शादी करने में ऐतराज कर रही हो?’’ आकिब की आवाज में तड़प थी.
”आकिब, इसे लड़कपन का प्यार समझ कर भूल जाने का प्रयास करो. मुझे अब अपना करिअर बनाने दो. मैं शादी नहीं करना चाहती.’’ मुसकान ने दृढ़ स्वर में कहा और कुरसी से खड़ी हो गई.
”मुसकान हमारी मोहब्बत डेढ़ साल पुरानी है. मैं ने टूट कर तुम्हें प्यार किया है, तुम्हारी हर जरूरतों को पूरा किया है. तुम मुझ से इस तरह किनारा करोगी तो मैं जीते जी मर जाऊंगा.’’ आकिब अब जैसे रो ही पडऩे वाला हो, वह भर्राए स्वर में गिड़गिड़ाया, ”मुझे तड़पने के लिए रास्ते में मत छोड़ो मुसकान, तरस खाओ मुझ पर.’’
”कोई किसी के लिए नहीं मरता आकिब. जो मरते भी हैं तो वह कायर होते हैं. हम दोनों डेढ़ साल एकदूसरे को प्यार करते रहे. क्या हम एकदूसरे को सच्चा दोस्त मान कर अब अपना करिअर नहीं बना सकते? तुम कुछ बनोगे तो मुझे खुशी होगी. प्यार में उलझने से जिंदगी नहीं संवरा करती. समझो और आगे बढ़ो, मुझे भी अपनी जिंदगी में आगे बढऩे दो. अब मैं चलती हूं. घर पर मम्मी मेरे लिए परेशान हो रही होंगी.’’ मुसकान कह कर तेजी से रेस्तरां के दरवाजे की तरफ बढ़ गई.
आकिब उस के पीछे दौड़ा. कौन सुन रहा है, कौन देख रहा है, इस की परवाह उसे नहीं थी. वह पागलों की तरह मुसकान के पीछे आ कर गिड़गिड़ाता रहा, ”मुझे बीच मझधार में मत छोड़ो मुसकान, मैं मर जाऊंगा. तुम मेरी जिंदगी हो, तुम मेरी मोहब्बत हो.’’
मुसकान सुन कर अनसुना करती हुई सड़क पर आ गई. उस ने आते हुए एक औटो को हाथ दिया और उस में बैठते हुए बोली, ”तिलक नगर चलो.’’
औटो उसे ले कर आगे बढ़ गया. आकिब भीगी आंखों से अपनी मोहब्बत को जाता हुआ देखता रहा. उस के दिल में दर्द था, तड़प थी. यही दर्द और तड़प आशिक को एक दिन गलत कदम उठाने को उकसा देते हैं. मुसकान के इस आधेअधूरे प्यार का भी ऐसा ही हश्र हुआ.
रेस्तरां वाली मुलाकात के बाद मुसकान ने आकिब की ओर से पूरी तरह मुंह मोड़ लिया था.
आकिब का फोन नंबर उस ने ब्लौक कर दिया. उस से चैटिंग बंद कर दी. सोशल मीडिया पर भी वह अब कोई पोस्ट नहीं डालती थी. वह अब अपनी पढ़ाई की ओर ध्यान लगा रही थी.
इधर आकिब मुसकान की मोहब्बत भुला नहीं पा रहा था. वह उसे नएनए नंबरों से फोन करने की कोशिश करता था. भूल से मुसकान यदि अनजानी कौल उठा लेती थी तो आकिब की आवाज सुनते ही कौल काट देती थी. इस से आकिब और तड़प जाता था.
मुसकान की राहों में वह पागलों की तरह खड़ा रहता, वह नजर आ जाती तो उस का पीछा करता. अकेली होती तो अपने प्यार की भीख मांगता. मुसकान नजरअंदाज करती हुई आगे बढ़ जाती. आकिब से बचने के लिए वह सहेलियों का साथ पकडऩे लगी थी.
26 अगस्त, 2026 की शाम को मुसकान घर पर अकेली थी. वह अपने मोबाइल में फेसबुक देखने में मग्न थी. उस की मम्मी छोटे भाई आकाश के साथ बाजार गई हुई थी.
अचानक मुसकान के इंस्टाग्राम पर आकिब ने लाइव आ कर मुसकान को जान से मारने की धमकी दी. मुसकान ने इसे गंभीरता से नहीं लिया.
वह जानती थी आकिब ऐसी पागलों वाली हरकतें करता रहता है. कुछ दिन पहले जब मुसकान का सोशल मीडिया ऐप खुला हुआ था. आकिब ने धमकी दी थी कि ‘यदि तुम शादी के लिए हां नहीं करोगी तो मैं अपनी जान दे दूंगा.’ उस ने कहा किया नहीं था. मुसकान ने उस दिन से मोबाइल पर सोशल मीडिया ऐप भी लौक कर दिया था.
इंस्टाग्राम की धमकी को मुसकान ने आकिब का पागलपन समझा, लेकिन इस धमकी देने के डेढ़ घंटे बाद आकिब उस के घर में आ गया.
”तुम यहां तक आ गए आकिब!’’ मुसकान पलंग से उठते हुए गुस्से से बोली.
”हां. मैं आज फैसला करने आया हूं मुसकान.’’ आकिब कठोर स्वर में बोला, ”मुझे बताओ तुम मुझ से शादी करोगी या नहीं?’’
”नहीं, कभी नहीं!’’ मुसकान का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया, ”तुम यह सवाल मुझ से कितनी बार करोगे?’’
”यह आखिरी बार है मुसकान.’’ आकिब ने कहने के बाद जेब में रखा खुला चाकू निकाला और मुसकान के सोचनेसमझने से पहले ही उस पर ताबड़तोड़ चाकू के वार करने लगा.
मुसकान उस का विरोध करने लगी, लेकिन पेट में हुए 2-3 वार में ही वह निढाल पड़ गई. गुस्से में पागल आकिब उस पर वार पर वार करता रहा. मुसकान खून में नहा गई, उस की चीखें गले में ही फंस गईं, आंखें भय और पीड़ा से सिकुड़ गईं. वह धराशाई हो कर फर्श पर गिर पड़ी.
आकिब तब घबरा कर भाग निकला.
करीब पौने 7 बजे मुसकान के यहां काम करने वाली सहायिका घर में आई तो वह मुसकान की मां को पुकारती हुई मुसकान के कमरे तक आ गई. कमरे में नजर पड़ते ही वह चीखती हुई घर से बाहर भागी, ”खून… दीदी का खून हो गया… खून हो गया…’’ उस की चीखपुकार सुन कर आसपड़ोस के लोग भाग कर दरवाजे पर आ गए.
2-4 पड़ोसी अंदर घुसे. अंदर खून से नहाई हुई मुसकान को देख कर उन लोगों ने तुरंत आपस में बात की.
पड़ोसी विजय इस परिवार के बहुत करीब था. उस ने खून में लथपथ मुसकान को उठाया और बाहर ले आया. एक औटो द्वारा वह और 2-3 अन्य लोग मुसकान को ले कर जनकपुरी के अमर लीला अस्पताल पहुंच गए.
स्ट्रेचर पर डाल कर मुसकान को वे लोग अंदर एमरजेंसी में ले आए. डौक्टरों ने तुरंत मुसकान को चैक किया. उन्होंने मुसकान को मृत घोषित कर दिया.
घर में काम करने वाली सहायिका ने मुसकान को चाकू मारने की सूचना मुंबई में उस की बड़ी बहन को फोन द्वारा दे दी. उस ने यह खबर चंडीगढ़ में अपनी छोटी बहन को दे दी.
किसी ने तिलक नगर पुलिस को मुसकान के साथ हुई वारदात की जानकारी दे दी थी. वहां से तुरंत तिलक नगर थाने की पुलिस मौका ए वारदात पर पहुंच गई.
पुलिस को मालूम हुआ कि मुसकान को पासपड़ोस के लोग जनकपुरी के अमर लीला अस्पताल ले गए हैं तो पुलिस की वैन अमर लीला अस्पताल पहुंच गई. डौक्टर मुसकान को मृत घोषित कर चुके थे, इसलिए पुलिस ने मुसकान के शव को अपने कब्जे में ले लिया और जांच शुरू कर दी.
यहां जौइंट पुलिस कमिश्नर सुमन गोयल भी सूचना मिलने पर पहुंच गई थीं. उन्होंने पुलिस के आला अफसरों से बात की और दिशानिर्देश दिए.
पुलिस वारदात की जांच करने के लिए घटनास्थल पर आ गई थी. यहां पर फोरैंसिक टीम को भी बुला लिया गया, जिन्होंने बड़ी बारीकी से यहां से साक्ष्य एकत्र करने शुरू कर दिए.
पुलिस ने पासपड़ोस से वारदात से जुड़ी जानकारी जुटानी शुरू की, तब तक मुसकान की मम्मी और भाई आकाश घर लौट आए थे. घर में बेटी के साथ घटी घटना की बात सुन कर मुसकान की मम्मी दहाड़े मार कर रो पड़ी. छोटा भाई आकाश भी रोने लगा.
पड़ोसी विजय ने बताया कि वह घर में टीवी देख रहा था. किसी महिला की चीखपुकार सुन कर बाहर आया तो मालूम हुआ मुसकान को किसी ने चाकू मार दिया है. अंदर जा कर देखा तो मुसकान खून में लथपथ पड़ी थी.
कुछ लोगों की मदद से वह मुसकान को तुरंत डौक्टरी सहायता दिलवाने के वास्ते जनकपुरी के अमर लीला अस्पताल ले कर भागा. वहां डौक्टरों ने मुसकान को मृत घोषित कर दिया.
उस ने यह भी बताया कि मुसकान के पिता पवन शर्मा का 2007 में निधन हो गया था. उन की पत्नी कमलेश शर्मा ने बड़ी मेहनत से अपने बच्चों की परवरिश की. इन के 4 बच्चे हुए. 2 बेटियां ब्याह दी गई थीं. इन में से सब से बड़ी मुंबई में है. एक चंडीगढ़ में ब्याही गई है.
मुसकान और इकलौता बेटा आकाश मम्मी के साथ ही रह रहा था. मुसकान डीयू से स्नातक (ग्रैजुएशन) कर रही थी. उस का कत्ल हो गया है. आकाश पढ़ रहा है. कमलेश शर्मा नर्स का काम करती हैं.
”क्या उन को किसी पर संदेह है, उन्होंने घर में किसी को आतेजाते देखा है?’’ इस पर विजय ने इंकार में सिर हिला दिया. किसी दूसरे पड़ोसी के पास भी इस बात का कोई जवाब नहीं था.
सामान्य होने पर मुसकान की मम्मी ने हत्यारे के विषय में पुलिस को बताया कि आकिब उर्फ इमरान नाम का युवक मुसकान को तंग करता था. वह उन की बेटी मुसकान का पीछा करता था और उस पर शादी करने का दबाव भी बना रहा था. उन्हें आकिब पर ही शक है कि उन की बेटी की हत्या उसी ने की है. उस ने पहले भी अपराध कर रखे हैं, वह बदमाश है.
आकाश का भी कहना था कि उस की बहन की हत्या आकिब उर्फ इमरान ने ही की है. उसे आकिब पर ही शक है.
पुलिस के सामने हत्यारे का नाम निकल कर सामने आ रहा था, लेकिन सिर्फ इसी आधार पर वह आकिब पर हाथ नहीं डाल सकते थे. उस के खिलाफ ठोस आधार होना आवश्यक था.
जौइंट पुलिस कमिश्नर सुमन गोयल ने हत्यारे की पहचान करने और उसे पकडऩे के लिए पुलिस थाना तिलक नगर के अलावा स्पैशल स्टाफ और एएटीएस की एक संयुक्त पुलिस टीम बना दी. इस टीम का दायित्व श्री राजेश कुमार (एसीपी- औपरेशंस), इंसपेक्टर राजेश कुमार मयूर (स्पैशल स्टाफ, वेस्ट डिस्ट्रिक्ट) और इंसपेक्टर मुकेश मीना (इंचार्ज एएटीएस वेस्ट) संभाल रहे थे.
इस पुलिस टीम में एसआई गजेंद्र, हैडकांस्टेबल नंद किशोर (एएटीएस वेस्ट) और स्पैशल स्टाफ से हैडकांस्टेबल जितेंद्र, दिनेश, देवेंद्र कुमार, दिनेश, कांस्टेबल दिनेश, एसआई नरेश अहलावत, एसआई संजीत राणा, इंसपेक्टर राजेश कुमार मौर्या को शामिल किया गया.
इस संयुक्त पुलिस टीम ने घटनास्थल से अपनी जांच शुरू की. यहां लगे सीसीटीवी कैमरे चैक किए गए. मुसकान के घर के सामने लगे एक सीसीटीवी में सफेद शर्ट में एक युवक पौने 6 बजे मुसकान के घर में प्रवेश करता और सवा 6 बजे घर से निकल कर भागता नजर आया.
सीसीटीवी कैमरे से वह फुटेज निकाल कर देखने पर युवक का चेहरा साफसाफ नजर आने लगा. इसे आकाश और उस की मां ने पहचान कर बताया कि यही आकिब उर्फ इमरान है.
अब शक की कोई गुंजाइश नहीं रह गई थी. मुसकान का कातिल पुलिस टीम के सामने था.
आकाश द्वारा उन्हें बताया गया कि आकिब उर्फ इमरान डब्ल्यूजेड-2ए/1 चौखंडी, तिलक नगर में रहता है.
मुसकान मर्डर केस को अपराध संख्या 328/2026 को अंडर सेक्शन 103 (1) बीएनएस तिलक नगर थाने में दर्ज कर लिया गया. इस में हत्यारे का नाम आकिब उर्फ इमरान लिखा गया.
पुलिस टीम आकिब के घर चौखंडी पहुंची. वहां उस का पिता जावेद अख्तर मिला. इमरान घर से गायब था. पुलिस उस के पिता जावेद अख्तर को उठा कर थाने ले आई. थाने में उस के रिश्तेदारों के पतेठिकाने और आकिब के खास दोस्तों के विषय में पूछताछ की गई. सब कुछ नोट कर के पुलिस टीमें इन जगहों पर छापेमारी करने लगीं.
डीसीपी हरेश्वर वी. स्वामी ने संयुक्त टीम को 4 भागों में बांट दिया था. इस टीम को आसपास के थाने भी सपोर्ट कर रहे थे.
आकिब के 4 राज्यों में जा कर छिपने की आशंका थी. वह यूपी, हरियाणा, उत्तराखंड और दिल्ली में हो सकता था. पुलिस टीमें हर संभावित जगहों पर उसे तलाश कर रही थीं.
कौल डिटेल्स और सीसीटीवी फुटेज की मदद से उस पर तकनीकी निगरानी रखी जा रही थी. टेक्निकल सर्विलांस की मदद भी ली जा रही थी, लेकिन उस का कहीं सुराग नहीं मिल रहा था.
इधर 27 अगस्त, 2026 को मुसकान का शव परिजनों को सौंप कर पुलिस ने कड़ी सुरक्षा के बीच तिलक नगर के श्मशान घाट पर मुसकान का अंतिम संस्कार करवा दिया. इस बीच दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल (जहां मुसकान का पोस्टमार्टम करवाया गया) से ले कर श्मशान घाट तक पुलिस ने कड़ी सुरक्षा कर दी थी.
मुसकान तिलक नगर में ओल्ड महावीर में रहती थी. चूंकि उस की हत्या में आकिब उर्फ इमरान का नाम सामने आ रहा था, इसलिए हिंदू संगठन इस पर कड़ा विरोध दर्ज करवा रहे थे. उन की मांग थी कि जिहादी आकिब उर्फ इमरान को गिरफ्तार कर के कोर्ट में पेश किया जाए और ऐसे सिरफिरे व्यक्ति को फांसी की सजा दिलवाई जाए. पुलिस पर पूरा दबाव बनता जा रहा था. इलाके में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था कर दी गई थी.
पुलिस टीमें इमरान को जल्द से जल्द पकडऩे के लिए हाथपैर मार रही थीं, लेकिन इमरान न जाने कहां जा कर छिप गया था.
आखिर पुलिस को उस की मौजूदगी की सूचना मिल ही गई. थाना राजौरी गार्डन में चेकिंग के दौरान 27 अगस्त, 2026 की रात लगभग 11 बजे हैडकांस्टेबल जितेंद्र (स्पैशल स्टाफ) को मालूम हुआ कि इमरान रघुबीर नगर के नाला रोड पर मौजूद है.
इस सूचना के मिलते ही पुलिस की 2 टीमें बना कर आकिब उर्फ इमरान को नाला रोड पर दोनों ओर से घेरने की योजना बना ली गई.
इस वक्त रात के 11 बजे का समय था. नाला रोड सुनसान और अंधेरे में डूबा हुआ था. चांद की मद्धिम रोशनी में रास्ता हलका और अस्पष्ट नजर आ रहा था.
पुलिस की 2 टीमें बना कर पुलिस वाले सावधानी से आगे की तरफ बढ़े. आकिब को शायद इस की भनक लग गई. उस के पास भागने का कोई रास्ता नहीं बचा था. वह अपने बचाव का रास्ता तलाशने में लगा था.
पुलिस ने उसे ललकारा, ”आकिब, भागने की कोशिश मत करना. तुम्हें दोनों ओर से पुलिस ने घेर लिया है, सरेंडर कर दो.’’
आकिब की ओर से इसी बीच फायरिंग शुरू हो गई. पुलिस ने अपना बचाव करते हुए जवाबी फायर किए. आकिब की तरफ से पुलिस पर 4 फायर किए गए और पुलिस ने 7 राउंड गोलियां चलाईं.
हैडकांस्टेबल नंद किशोर और हैडकांस्टेबल जितेंद्र की ओर से किए गए फायर में से आकिब के पैरों में 3 गोलियां लगीं. वह नीचे गिर पड़ा. तब पुलिस ने उसे काबू में कर लिया. उस के दोनों पैरों में गोलियां लगी थीं. पुलिस ने उसे अस्पताल पहुंचाया.
पुलिस दल के लिए यह बड़ी कामयाबी थी. मुसकान पर किए गए खूनी हमले के बाद 24 घंटे में आकिब को गिरफ्तार कर लिया गया था.
वह राजौरी गार्डन इलाके में मुठभेड़ में काबू किया गया था. उस के खिलाफ राजौरी गार्डन थाने में अंडर सेक्शन 221/132/109(1) बीएनएस और आम्र्स एक्ट 25/27 दर्ज की गई.
पुलिस पूछताछ में यह भी जानकारी सामने आई कि उस के खिलाफ 2018 में तिलक नगर थाने में एफआईआर नंबर 385/2018 अंडर सेक्शन 323/341/354/354डी/509/34 आईपीसी और सेक्शन 8 पोक्सो एक्ट के तहत एक केस तथा एफआईआर नंबर 225/2021 अंडर सेक्शन 308 आईपीसी के तहत दूसरा केस पहले भी दर्ज हो चुका है.
आकिब उर्फ इमरान जिम ट्रेनर का काम करता था. वह 12वीं क्लास पढ़ा हुआ था. उस का पिता जावेद अख्तर वशिष्ठ हौस्पिटल चौखंडी में मुंशी का काम करता है. उस के 4 भाई और 2 बहनें हैं.
वह जिस जिम में ट्रेनर का काम करता था, उस का नाम ‘सेवन जोन’ है. इसी जिम में मुसकान सुबह की शिफ्ट में अपनी फिटनैस के वास्ते जाती थी. उस की दोस्ती इसी जिम में इमरान से डेढ़ साल पहले हुई थी. यह दोस्ती धीरेधीरे प्यार में बदल गई थी.
दोनों एकदूसरे से मोहब्बत में बहुत कसमेवादे खाते थे. लेकिन जब आकिब उर्फ इमरान मुसकान पर शादी का दबाव बनाने लगा तो मुसकान ने उस से किनारा करना शुरू कर दिया.
इमरान उसे अपना बनाने की धुन में इतना पागल हो चुका था कि मुसकान के बारबार शादी से इंकार करने और दूरी बनाने से वह चिढ़ गया.
उसे लगने लगा कि मुसकान उस से किनारा कर के किसी दूसरे युवक से प्यार करने लगी है.
परेशान हो कर उस ने अंत में मुसकान की हत्या करने का मन बना लिया और 26 अगस्त, 2026 को जब मुसकान घर में अकेली थी, घर में घुस कर उस की बेरहमी से चाकू से गोद कर हत्या कर दी.
पुलिस उस को इलाज के बाद कोर्ट में पेश कर के जेल भेजने का मन बना चुकी है. उस के खिलाफ पुख्ता सबूत एकत्र किए जा रहे हैं ताकि उसे सख्त से सख्त सजा दिलवाई जा सके. Delhi Murder Case






