एक ‘हाय’ से शुरू हुई बातचीत कब दोस्ती में बदली, दोस्ती कब प्यार के अहसास तक पहुंची और भरोसे का यही रिश्ता कब ठगी तथा ब्लैकमेलिंग के जाल में बदल गया, पता ही नहीं चला. डिजिटल दुनिया में किसी अनजान शख्स से जुडऩा जितना आसान है, उस की असली पहचान जानना उतना ही मुश्किल. यहां आकर्षक तसवीरों, मीठी बातों और सुनहरे भविष्य के वादों के पीछे ऐसा चेहरा छिपा हो सकता है, जो आप की भावनाओं को ही कमाई का जरिया बना ले…

उत्तर प्रदेश के जिला प्रयागराज का रहने वाला राहुल रात के करीब साढ़े 10 बजे अपने कमरे में बैठा मोबाइल चला रहा था. रोज की तरह वह सोशल मीडिया पर लोगों की प्रोफाइल देख रहा था. तभी एक डेटिंग ऐप पर उसे एक लड़की की प्रोफाइल दिखाई दी. तसवीर में वह लड़की बेहद आकर्षक लग रही थी. प्रोफाइल में लिखा था, ‘दोस्ती पर भरोसा हो तो बात कीजिए.’ राहुल उस लड़की की फोटो देखते हुए उसी के बारे में सोचता रहा, फिर ‘हाय’ लिख कर संदेश भेज दिया.

कुछ मिनट बाद जवाब आ गया, ”हैलो, आप कहां रहते हैं?’’

बस, यहीं से वह बातचीत शुरू हुई, जो आगे चल कर दोस्ती, फिर प्यार, जो होटल के कमरे तक पहुंच गया.

लड़की का नाम पल्लवी सिंह राजपूत था. वह भी उसी शहर यानी प्रयागराज में रहती थी. प्रयागराज वह पढऩे आई थी. इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से एमए करने के बाद वह प्रशासनिक नौकरी की तैयारी करना चाहती थी, लेकिन उसी बीच उस पर कुछ ऐसी परेशानी आई कि नौकरी के लिए पढ़ाई करने के बजाय वह लोगों को ठग कर पैसे कमाने के चक्कर में पड़ गई.

उस ने सोशल मीडिया और डेटिंग ऐप टिंडर के माध्यम से लड़कों से दोस्ती करना शुरू किया. राहुल से भी उस ने इसी ऐप के जरिए दोस्ती की थी. उस ने उसे बताया था कि वह भी उसी शहर की रहने वाली है. पहले सामान्य बातें हुईं. पढ़ाई, नौकरी, परिवार, पसंद नापसंद और नंबर का आदानप्रदान हो गया. फिर फोन पर दोनों की बातें होने लगीं. बातचीत से राहुल को लगा कि उसे एक अच्छी दोस्त मिल गई है.

लेकिन उसे यह पता नहीं था कि दूसरी ओर पल्लवी के लिए यह दोस्ती भावनाओं का रिश्ता नहीं, बल्कि एक सोचीसमझी योजना का पहला कदम थी. वह राहुल से लगातार बात करती रही.

कभी वह अपनी परेशानियां बताती तो कभी कहती कि वह बाकी लड़कों से अलग है. कुछ दिनों बाद उस ने राहुल से कहा, ”मैं आप पर पूरा भरोसा करने लगी हूं. इसलिए आप से मिलने का मन हो रहा है. क्या हम आमनेसामने मिल सकते हैं?’’

राहुल खुशी से उस से मिलने को तैयार हो गया. दोनों सिविल लाइंस स्थित एक कैफे में मिले.

मुलाकात के दौरान पल्लवी ने इस तरह बातें कीं कि राहुल को लगा कि उन के बीच दोस्ती से आगे भी कुछ होने वाला है. कई बार मिलने के बाद पल्लवी ने राहुल से किसी होटल के कमरे में मिलने की इच्छा व्यक्त की.

राहुल को भला क्यों ऐतराज होता. वह खुशीखुशी राजी हो गया. कमरा पल्लवी ने ही सिविल लाइंस के एक होटल में बुक किया था. उस ने राहुल को फोन किया तो वह वहां पहुंच गया. वहां जाते समय उसे क्या पता था कि होटल का यह कमरा इस पूरी कहानी का एक खतरनाक मोड़ बनने वाला है.

कमरे में कुछ समय बातचीत के बाद पल्लवी ने राहुल के साथ शारीरिक संबंध बनाए. राहुल को बड़ा मजा आया. उसे लगा कि पल्लवी बहुत अच्छी दोस्त है. कोई भी लड़की जल्दी इस काम के लिए तैयार नहीं होती.

पल्लवी से मिल कर खुशीखुशी वह अपने घर आ गया. राहुल बहुत खुश था. उसे लग रहा था कि उसे एक ऐसी दोस्त मिल गई है, जो फ्री में सारे सुख दे रही है. वह सोच रहा था कि अगले दिन वह उसे अपने कमरे पर बुलाएगी. होटल में पैसे खर्च करने की क्या जरूरत है. राहुल की प्रयागराज में मिठाई की बहुत बड़ी दुकान थी, जो बहुत चलती थी. कई लौज थे, जिस से लाखों रुपए किराया आता था.

अगले दिन राहुल पल्लवी को फोन करने की सोच ही रहा था कि उस का ही फोन आ गया. उसने कहा, ”तुम मुझ पर भरोसा करते हो न?’’

राहुल ने कहा, ”हां, क्यों?’’ ”ऐसे ही,’’ पल्लवी ने कहा, ”दरअसल, मुझे कुछ पैसों की जरूरत है. क्या आप दे सकते हैं?’’

पैसों की बात पर राहुल थोड़ा सकुचाया. वह सोच में पड़ गया कि पल्लवी न जाने कितने पैसे मांगेगी, पैसे लेने के बाद वापस करेगी भी या नहीं? क्योंकि ऐसी लड़कियां जल्दी पैसे लौटाती नहीं हैं. जब राहुल ने कोई जवाब नहीं दिया तो पल्लवी ने कहा, ”किस सोच में पड़ गए. मैं ने कुछ कहा है?’’

”कितने पैसे चाहिए?’’ राहुल ने धीरे से पूछा.

”मैं भीख नहीं मांग रही राहुलजी. मुझे एक लाख रुपए चाहिए. बोलिए कब दे रहे हो?’’ पल्लवी ने कहा.

”इतने रुपए कहां हैं मेरे पास.’’ राहुल बोला, ”मैं इतने रुपए तो नहीं दे सकता.’’

”रुपए तो तुम्हें देने होंगे. अगर तुम ने मेरी बात नहीं मानी तो तुम्हें बहुत बड़ी परेशानी हो सकती है.’’ पल्लवी ने धमकी भरे लहजे में कहा.

राहुल घबराया जरूर, फिर भी उस ने साहस करते हुए पूछा, ”क्या परेशानी हो सकती है?’’

पल्लवी ने उस के फोन पर होटल के कमरे में बने शारीरिक संबंध के वीडियो भेज कर कहा, ”अपना फोन देख कर बताओ, अगर ये बाहर या थाने में चले गए तो?’’

वीडयो देख कर राहुल के पैरों तले से जमीन खिसक गई. उस ने डरते हुए पूछा, ”इन का क्या करूं?’’

पल्लवी ने कहा, ”ये वीडियो अगर तुम्हारे परिवार या दोस्तों तक पहुंच गए या थाने में चले गए तो सोचो क्या होगा.’’

राहुल ने कांपती आवाज में पूछा, ”तुम चाहती क्या हो?’’ ”बस, पैसे, जितने मांगे हैं.’’

पल्लवी ने एक लाख रुपए की मांग की थी. राहुल ने बदनामी के डर से पैसे भेज दिए. उसे लगा कि मामला यहीं खत्म हो जाएगा. लेकिन यह तो शुरुआत थी. कुछ दिनों बाद फिर फोन आया, ”वीडियो मेरे पास अभी भी है.’’

राहुल ने कहा, ”मैं पैसे दे चुका हूं. अब और पैसे क्यों मांग रही हो?’’

”जब तक ये वीडियो मेरे पास रहेंगे, तुम्हें पैसे देने होंगे. अगर पैसे नहीं दिए तो वीडियो वायरल कर दूंगी.’’ पल्लवी ने धमकाया.

डरा कर ऐंठे लाखों रुपए

राहुल ने दोबारा पैसे भेज दिए. इस के बाद पल्लवी को यकीन हो गया कि उस का बनाया हुआ डर काम कर रहा है. इस के बाद मांग भी बढ़ती गई और रकम भी बढ़ती गई. कभी 5 लाख, कभी 10 लाख. कभी कहा जाता कि वीडियो किसी रिश्तेदार के पास चला गया है तो कभी धमकी दी जाती कि उसे सोशल मीडिया पर डाल दिया जाएगा या उस के खिलाफ रेप का मुकदमा दर्ज करा दिया गया तो.

राहुल लगातार पैसे देता रहा. पल्लवी की इस हरकत से राहुल को शक हुआ कि पल्लवी अकेली यह सब नहीं कर रही. उस के साथ कोई और है. जब भी वह पल्लवी से वीडियो हटाने की बात करता, उसे किसी दूसरे नंबर से फोन आता. सचमुच पल्लवी यह सब अकेली नहीं कर रही थी. उस के साथ 4 लोग और थे.

राहुल समझ चुका था कि वह एक बड़े जाल में फंस चुका है. उस ने अब तक अपनी जमापूंजी का एक बड़ा हिस्सा गंवा दिया था. एक दिन उस ने पल्लवी से कहा, ”मेरे पास अब पैसे नहीं हैं.’’

उस ने जवाब दिया, ”तो फिर बदनाम होने और जेल जाने के लिए तैयार रहो. तुम्हारा वीडियो तुम्हारी जानपहचान वालों और घर वालों को भेज रही हूं. इस के अलावा थाने में तुम्हारे खिलाफ रेप का मुकदमा भी दर्ज करा रही हूं.’’

उस रात राहुल सो नहीं सका. रात में ही उस ने तय कर लिया था कि डर कर पैसे देने के बजाय सुबह होते ही वह पुलिस के पास जाएगा.

राहुल थाना कर्नलगंज पहुंचा और अपनी पूरी कहानी कोतवाली प्रभारी को बता दी. उस ने पुलिस को डेटिंग ऐप पर हुई बातचीत, मोबाइल नंबर, बैंक खातों में किए गए भुगतान की रसीदें, चैट और धमकियों के स्क्रीनशौट भी सौंप दिए. पल्लवी बैंक में भी रुपए ट्रांसफर कराती थी और नकद भी लेती थी.

पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लिया. कोतवाली प्रभारी ने इस मामले की जांच सीनियर सबइंसपेक्टर राजेश तिवारी को सौंपी. उन्होंने पहले उन बैंक खातों की जानकारी जुटानी शुरू की, जिन में राहुल ने रकम भेजी थी. पता चला कि पैसा अलगअलग खातों में पहुंचा था, जिन्हें तुरंत निकाल लिया गया था.

पुलिस ने मोबाइल नंबरों और डिजिटल लेनदेन की कडिय़ां जोडऩी शुरू कीं. जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि इसी तरह की शिकायतें दूसरे युवकों से भी मिली थीं. अब मामला केवल राहुल की शिकायत तक सीमित नहीं था.

पुलिस ने आरोपी लड़की पल्लवी सिंह राजपूत की गतिविधियों पर नजर रखनी शुरू की. एक योजना के तहत राहुल से कहा गया कि वह आरोपी से बातचीत जारी रखे, लेकिन पुलिस की निगरानी में.

कुछ दिनों बाद पल्लवी ने फिर राहुल से संपर्क किया और रकम की मांग की. इस बार पुलिस पहले से तैयार थी. रकम देने के बहाने पल्लवी को कंपनी बाग में बुलाया गया. जैसे ही पल्लवी वहां पहुंची, पुलिस टीम ने उसे हिरासत में ले लिया.

हुआ गैंग का खुलासा

पूछताछ में पुलिस को कथित तौर पर कई मोबाइल फोन, सिम कार्ड और डिजिटल सामग्री के बारे में महत्त्वपूर्ण जानकारी मिली. पुलिस को उस ने अपने उन साथियों के नाम भी बताए, जो उस की इस काम में मदद करते थे. उन में 2 महिलाएं और 2 पुरुष थे. पुरुषों के नाम हैं मोहम्मद आलम और नूर आलम. दोनों सगे भाई थे. नूर आलम एक अपराध में डेढ़ साल जेल में भी रह चुका है. वह गिरोह के साथ मिल कर दबंगई करता था.

इस के बाद जांच का दायरा बढ़ता गया. पुलिस ने उन लोगों की तलाश शुरू की, पल्लवी और उस के साथियों ने जिन्हें ठगा था. पूछताछ में पता चला कि पल्लवी और उस के साथियों ने अब तक करीब 200 युवकों को अपने जाल में फांस कर 6 करोड़ रुपए ठगे थे.

पुलिस ने उस के कमरे से तलाशी में करोड़ों रुपए बरामद भी किए हैं. पुलिस अब उन युवकों को बुला कर बयान दर्ज कर रही है, जिन्हें पल्लवी और उस के साथियों ने अपना शिकार बनाया है. पल्लवी को तो पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. लेकिन उस के साथी फरार हैं. पुलिस उन की तलाश कर रही है.

पल्लवी ने लखनऊ के थाना विभूतिखंड और थाना सुशांत गोल्फ सिटी में कई लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज करा कर जेल भिजवाए हैं. जबकि वह खुद 14 मुकदमों में वांछित है. उस ने जेल में रह कर भी करोड़ों रुपए कमाए हैं.

पिछली मई में उस ने प्रयागराज के फाफामऊ में हाई वोल्टेज ड्रामा किया था. किसी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए वह पानी की टंकी पर चढ़ गई थी.

ऐसा नहीं है कि डेटिंग ऐप से लड़के ही ठगे जाते हैं. बहुत लड़कियां भी डेटिंग ऐप से पति या मित्र खोजने में फंस जाती हैं और धन तथा इज्जत दोनों गंवाती हैं. ऐसी ही लड़कियों में एक नोएडा की नंदिनी भी है.

नोएडा के सेक्टर-62 की रहने वाली नंदिनी अपने फ्लैट की बालकनी में खड़ी सामने फैली रोशनी को चुपचाप देख रही थी. रात के करीब साढ़े 10 बज रहे थे. नीचे सड़क पर गाडिय़ों की आवाजाही लगातार जारी थी, लेकिन नंदिनी के मन में एक अजीब सी खामोशी थी.

नंदिनी की उम्र 32 साल हो चुकी थी. अच्छे वेतन वाली बढिय़ा नौकरी थी. वह एक कंपनी में प्रोजेक्ट मैनेजर थी. उस का परिवार भी ठीकठाक था. मांबाप की ही नहीं, नंदिनी की भी सब से बड़ी चिंता यही थी कि उस के लिए कोई ठीकठाक लड़का मिल जाए.

इस उम्र में रिश्ते भी जल्दी नहीं मिलते, जो मिलते भी थे, किसी न किसी वजह से बात आगे नहीं बढ़ पाती थी. किसी की नौकरी पसंद नहीं आती थी तो कोई बहुत दूर रहता था. किसी का परिवार अत्यधिक अपेक्षाएं रखता तो कोई लड़का पहली बातचीत में ही ऐसा व्यवहार करता था कि नंदिनी को लगता था कि यह रिश्ता आगे चल कर परेशानी बन सकता है.

बातचीत के दौरान एक दिन उस की सहेली रिया ने कहा, ”आखिर तुम चाहती क्या हो, जो अभी तक कुंवारी बैठी हो?’’

”बस, ऐसा लड़का जो ईमानदार हो, समझदार हो और मुझे सम्मान दे.’’

रिया हंस कर बोली, ”तो फिर शादी वाला डेटिंग ऐप क्यों नहीं आजमाती? आजकल बहुत लोग वहीं से पार्टनर ढूंढ रहे हैं.’’

नंदिनी पहले हिचकिचाई. क्योंकि उसे औनलाइन रिश्तों पर बहुत ज्यादा भरोसा नहीं था. लेकिन कुछ दिनों बाद उस ने एक लोकप्रिय मैट्रिमोनियल डेटिंग प्लेटफार्म पर अपना प्रोफाइल बना लिया. प्रोफाइल में उस ने साफ लिखा था कि शादी के गंभीर उद्देश्य से मैं रिश्ता तलाश रही हूं.

आर्यन आ गया पसंद

कुछ ही दिनों में लोगों के संदेश आने लगे. किसी ने अपने फोटो के साथ महंगी कार दिखाई थी. कोई विदेश में नौकरी करता था. कोई खुद को बड़ा कारोबारी बता रहा था. नंदिनी ने कई लोगों से बात की. इस बातचीत में जल्द ही उस की समझ में आ गया कि इंटरनेट पर दिखाई देने वाली हर चीज सच नहीं होती.

प्रोफाइल में किसी की उम्र कम थी, लेकिन उस की बातों से लगता था कि वह उस से काफी बड़ा है. एक व्यक्ति ने खुद को सरकारी अधिकारी बताया था, लेकिन जब नंदिनी उस के काम के बारे में पूछती तो हर बार वह बात बदल देता था. नंदिनी ने इस तरह के कई लोगों को ब्लौक कर दिया था. उसे लगा कि शायद औनलाइन रिश्ते उस के लिए नहीं हैं.

लेकिन तभी उस की जिंदगी में एक ऐसा व्यक्ति आया, जिस ने शुरुआत में खुद को बिलकुल अलग महसूस कराया. उस का नाम था आर्यन. प्रोफाइल में उस की उम्र 34 साल थी. अपनी नौकरी उस ने एक प्रतिष्ठित कंपनी में बताई गई थी. फोटो में वह सूट पहने किसी औफिस के बाहर खड़ा था. प्रोफाइल पढ़ कर नंदिनी को लगा कि कम से कम यह आदमी गंभीर दिखाई देता है. तब उसे क्या पता था कि वह फोटो, नौकरी और नाम, तीनों फरेब थे.

आर्यन ने जो पहला संदेश भेजा था, वह बहुत साधारण था. उस ने लिखा था, ‘आप की प्रोफाइल पढ़ी. लगता है, आप रिश्ते को ले कर काफी गंभीर हैं. अगर आप सहज हों तो बात कर सकते हैं.’

नंदिनी ने उस के संदेश का जवाब दे दिया. फिर धीरेधीरे बातचीत शुरू हुई. पहले परिवार की बातें हुईं. फिर नौकरी, पसंदनापसंद, घूमने की जगहें और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा होने लगी.

आर्यन बहुत ध्यान से नंदिनी की बातें सुनता था. वह उस की छोटीछोटी बातों को याद रखता था. नंदिनी ने एक दिन बताया था कि उसे पहाड़ पसंद हैं. अगले दिन आर्यन ने संदेश भेजा कि अगर सब ठीक रहा तो शादी के बाद सब से पहले आप को मनाली ले कर जाऊंगा.

नंदिनी मुसकराई. उसे अच्छा लगा कि सामने वाला उस की बातों को महत्त्व देता है. एक दिन उस ने कहा, ”आप से बात कर के लगता है कि आप बाकी लोगों से काफी अलग हैं.’’

आर्यन का तुरंत जवाब आया, ”शायद इसलिए, क्योंकि मैं आप को समझना चाहता हूं, सिर्फ पसंद नहीं करना.’’

यह वाक्य नंदिनी के मन में उतर गया. अब दोनों रोज बात करने लगे. सुबह उठते ही आर्यन का संदेश आता, ‘गुड मार्निंग.’ रात को सोने से पहले, ‘आज बहुत थक गई होंगी. आराम कीजिए.’

नंदिनी को लगा कि शायद उसे वह व्यक्ति मिल गया, जिस की वह तलाश कर रही थी. लेकिन उसे एक बात खटकती थी कि उस ने अभी तक आर्यन को लाइव वीडियो कौल पर नहीं देखा था.

जब भी वह वीडियो कौल की बात करती, आर्यन कोई न कोई बहाना बना देता था कि औफिस में हूं. नेटवर्क खराब है. आज बहुत थक गया हूं. कल पक्का.

नंदिनी हर बार मान जाती. आखिर विश्वास धीरेधीरे ही बनता है. वह खुद भी यही सोचती थी, लेकिन उसे यह नहीं मालूम था कि आर्यन इसी विश्वास को हथियार बना रहा था. धीरेधीरे 3 सप्ताह बीत गए. एक दिन शाम को नंदिनी ने अचानक कहा, ”आज वीडियो कौल करते हैं.’’

आर्यन कुछ देर तक औनलाइन तो रहा, लेकिन उस ने कोई जवाब नहीं दिया. थोड़ी देर बाद संदेश आया कि अभी संभव नहीं है.

”क्यों?’’ नंदिनी ने पूछा. ”मैं अभी दोस्तों के साथ हूं.’’ ”तो 10 मिनट बाद कर लेना.’’  आर्यन ने कोई जवाब नहीं दिया.

थोड़ी देर बाद उस का फोन आया. आवाज में बनावटी परेशानी थी. उस ने कहा, ”नंदिनी, क्या तुम मुझ पर भरोसा नहीं करतीं?’’

नंदिनी चौंकी कि इस में भरोसे की क्या बात है. उस ने कहा, ”ऐसी कोई बात नहीं है. बस, मैं तुम्हें देखना चाहती हूं.’’ ”मैं तुम्हारी बात समझता हूं. लेकिन हर चीज अपने समय से होनी चाहिए.’’

बात यहीं खत्म हो गई. उस रात नंदिनी को पहली बार बेचैनी हुई. अगले दिन उस ने आर्यन से उस की नौकरी के बारे में कुछ और सवाल पूछे. उस ने पूछा, ”तुम्हारा औफिस किस इलाके में है?’’ ”गुरुग्राम में.’’ आर्यन ने कहा. ”कंपनी का नाम?’’ नंदिनी ने पूछा. आर्यन ने कंपनी का नाम बताया.

नंदिनी ने इंटरनेट पर कंपनी खोजने की कोशिश की. उसे कंपनी तो मिली, लेकिन आर्यन का नाम कहीं दिखाई नहीं दिया. उस ने खुद को समझाया कि जरूरी नहीं कि हर कर्मचारी की जानकारी इंटरनेट पर हो. संदेह वहीं दब गया.

कुछ दिनों बाद आर्यन ने अपने परिवार के बारे में भी कुछ बातें बताईं. बताया कि पिता नहीं हैं, मां बीमार रहती हैं और परिवार की जिम्मेदारी उसी पर है. उस की इन बातों से नंदिनी को उस से और अधिक सहानुभूति होने लगी. यही वह बातें थीं, जिस से भावनात्मक जाल और मजबूत हो गया.

एक दिन रात को लगभग 11 बजे आर्यन का संदेश आया कि वह बहुत बड़ी परेशानी में फंस गया है. नंदिनी ने तुरंत पूछा, ”क्या हुआ?’’ काफी देर तक कोई जवाब नहीं आया. फिर संदेश आया कि मां की तबीयत बहुत खराब है. नंदिनी ने घबरा कर पूछा, ”अस्पताल ले गए?’’ ”हां.’’ ”किस अस्पताल?’’

आर्यन ने एक अस्पताल का नाम बता दिया. कुछ देर बाद उस ने संदेश में लिखा, ”मेरे बैंक अकाउंट में अभी कुछ समस्या है. पेमेंट अटक गया है.’’

नंदिनी सोच में डूब गई. इसलिए कोई जवाब नहीं दे सकी. उसे चुप देख कर आर्यन का संदेश आया, ”अगर तुम मदद कर सको तो ठीक है, वरना किसी दूसरे से बात करूं?’’

नंदिनी के दिल की धड़कन तेज हो गई. उसे लगा कि संकट के समय में मदद करनी चाहिए. इसलिए उस ने पूछा, ”कितने?’’

आर्यन ने जो रकम बताई. नंदिनी के लिए वह बहुत बड़ी नहीं थी, लेकिन यहां सवाल पैसों का नहीं था.

सवाल यह था कि जिस आदमी से वह कभी मिली तक नहीं, वह आदमी उस से पैसे क्यों मांग रहा है? इसलिए नंदिनी ने पूछा, ”तुम्हारे दोस्त या परिवार में कोई नहीं है क्या?’’

आर्यन ने कहा, ”सभी कोशिश कर रहे हैं, लेकिन पैसे अभी तुरंत चाहिए. मैं तुम से सिर्फ मदद मांग रहा हूं. क्या तुम्हें मुझ पर इतना भी भरोसा नहीं?’’

यह वाक्य नंदिनी को अंदर तक चुभ गया. जिस आदमी के साथ वह पिछले कई सप्ताह से भविष्य के सपने देख रही है, क्या वह मुश्किल समय में उस की मदद भी नहीं कर सकती? उस ने पैसे भेजने का मन बना लिया. लेकिन तभी उस की सहेली रिया का फोन आ गया. नंदिनी ने उसे पूरी बात बताई तो उस ने कहा, ”मैं तुम से एक बात पूछूं?’’

”हां, पूछो.’’ ”क्या उस ने कभी तुम्हें वीडियो कौल किया है या उस ने कभी तुम्हारा वीडियो कौल उठाया है? नंदिनी ने कहा, ”नहीं.’’ ”क्या तुम उस से कभी मिली हो?’’ ”नहीं.’’ ”तो फिर जिस आदमी को तुम ने कभी देखा तक नहीं, उसे पैसे भेजने की इतनी जल्दी क्या है?’’ रिया ने कहा.

रिया का फोन कटने के बाद नंदिनी ने आर्यन का चैट बौक्स खोला. पहली बार उसे उस की सारी बातें अलगअलग नजर से दिखाई देने लगीं. अगले दिन नंदिनी ने आर्यन को फोन कर के कहा, ”पैसे भेजने से पहले मैं तुम से वीडियो कौल पर बात करना चाहती हूं.’’

नंदिनी की इस बात से आर्यन नाराज हो गया. उस ने कहा, ”तुम्हें मुझ पर भरोसा नहीं है.’’ ”भरोसा है, लेकिन मैं तुम्हें देखना चाहती हूं. बिना तुम्हें देखे मैं पैसे नहीं भेज सकती.’’ ”मां अस्पताल में हैं और तुम्हें वीडियो कौल की पड़ी है?’’ आर्यन गुस्से में बोला.

नंदिनी को उस का यह गुस्सा बुरा लगा. उस ने इस बार हार नहीं मानी. बोली, ”10 मिनट की ही तो बात है. बात कर लो.’’ आर्यन ने तुरंत फोन काट दिया. उस के बाद संदेश आया, ”तुम से ऐसी उम्मीद नहीं थी.’’

इस के बाद उस का फोन बंद हो गया. नंदिनी ने फोन किया तो फोन बंद था. अगले दिन भी फोन बंद था. तीसरे दिन आर्यन ने सिर्फ एक संदेश भेजा, ”तुम ने मेरा दिल तोड़ दिया.’’

समझ से लिया काम

इस के बाद उस ने बातचीत बंद कर दी. नंदिनी के मन में अनेक सवाल उठने लगे. अगर वह सच बोल रहा था तो वीडियो कौल पर बात करने से उसे इतनी परेशानी क्यों थी? उस ने आर्यन के भेजे फोटो को ध्यान से देखा. एक फोटो में पीछे कंपनी का लोगो दिखाई दे रहा था. नंदिनी ने उस कंपनी की वेबसाइट पर जा कर फोटो मिलाया.

उसे कुछ अजीब लगा. उस ने आर्यन की फोटो को इंटरनेट पर खोजा. कुछ देर बाद उस की आंखें फैल गईं. उस फोटो से मिलतीजुलती फोटो किसी दूसरे की सोशल मीडिया अकाउंट पर दिखाई दे रही थी. नाम अलग था. शहर अलग था. उम्र अलग थी. नंदिनी का माथा ठनका. उस ने आर्यन के बारे में और जानकारी जुटानी शुरू कर दी.

अब मामला केवल शक का नहीं रह गया था. नंदिनी ने अपने एक परिचित साइबर विशेषज्ञ की मदद ली. उस ने आर्यन द्वारा भेजे गए फोटो की जांच की. पता चला कि उस के द्वारा भेजे गए फोटो इंटरनेट पर पहले से मौजूद थे. एक फोटो किसी पुराने सोशल मीडिया प्रोफाइल से जुड़ी थी.

नंदिनी ने उस व्यक्ति का प्रोफाइल देखा, जिस का फोटो आर्यन इस्तेमाल कर रहा था. वह व्यक्ति तो दूसरे शहर में रहता था. उस का विवाह भी हो चुका था. यह सब जान कर नंदिनी के पैरों तले से जमीन खिसक गई. जिस आदमी से वह पिछले एक महीने से शादी के सपने देख रही थी, वह उस के सामने एक नकली पहचान ले कर आया था. उस ने आर्यन को फोन किया.

उस का फोन बंद था. उस ने दूसरे नंबर से फोन किया. फोन उठा. दूसरी ओर से वही आवाज थी, ”हैलो?’’ नंदिनी ने तुरंत कहा, ”आर्यन?’’

कुछ सेकेंड की चुप्पी के बाद फोन कट गया. नंदिनी समझ गई कि उस का शक सही था. अगले दिन उसे एक और संदेश मिला कि अगर उस ने यह बात किसी को बताई तो उस की सारी निजी बातें इंटरनेट पर डाल दी जाएंगी.

ठिकाने तक पहुंची जांच

नंदिनी उस की इस धमकी से डर गई. आर्यन ने बातचीत के दौरान उस से कई निजी फोटो और दस्तावेज मांगे थे. उस ने कुछ जानकारी साझा भी कर दी थी.

अब ठग का असली चेहरा सामने आ चुका था. वह केवल पैसे ही नहीं ऐंठना चाहता था. वह नंदिनी को डरा कर चुप भी कराना चाहता था. उस रात नंदिनी सो नहीं सकी. उस के मन में बारबार यही विचार आता रहा कि अगर उस ने शुरुआत में ही सावधानी बरती होती तो यह दिन देखने को न मिलता.

सवेरा होते ही उस ने अपने पापा को पूरी बात बताई. उन्हें गुस्सा भी आया और चिंता भी हुई. लेकिन उन्होंने बेटी को दोष नहीं दिया.

सिर्फ यही कहा कि गलती किसी पर भरोसा करने की नहीं है. गलती यह होगी कि अब डर की वजह से चुप बैठ जाओ. नंदिनी ने पुलिस में शिकायत करने का फैसला कर लिया.

उस ने सभी चैट सुरक्षित कर लिए. पैसे मांगने के संदेशों के स्क्रीनशौट लिए. फोन नंबर, बैंक खाते की जानकारी, प्रोफाइल लिंक, फोटो और बातचीत का पूरा रिकौर्ड सुरक्षित कर लिया. साइबर सेल में शिकायत दर्ज की गई. पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लिया.

पुलिस जांच में सामने आया कि आर्यन नाम का व्यक्ति अकेले ही यह सब काम कर रहा था. वह पढ़ालिखा बेरोजगार था. पढ़ाई पूरी करने के बाद जब उसे कहीं ढंग की नौकरी नहीं मिली तो उस ने इसी तरह सोशल मीडिया और डेटिंग ऐप के जरिए लड़कियों को शादी का झांसा दे कर ठगना शुरू कर दिया था.

पहले वह किसी भी लड़की से निजी जानकारी लेता था. उस के बाद बीमारी, दुर्घटना, व्यापार, टिकट, बैंक समस्या या किसी अन्य आपात स्थिति का बहाना बना कर पैसे मांगता था. अगर सामने वाला पैसे भेज देता तो अगला चरण शुरू हो जाता. और अगर वह मना करता तो भावनात्मक दबाव बनाता.

कभी कहता कि तुम्हें मुझ पर भरोसा नहीं है. कभी कहता कि मैं ने तुम्हें अपना समझा था. इस पर भी काम न बनता तो धमकी देता.

पुलिस ने डिजिटल सबूतों को जोडऩा शुरू किया. मोबाइल नंबर की जांच की. बैंक खातों की जानकारी हासिल की गई. जिस खाते में पैसे भेजने को कहा था, उस की गतिविधियां देखी गईं. पुलिस को पता चला कि रकम खाते में पहुंचने के बाद तेजी से दूसरे खाते में ट्रांसफर की जाती थी.

पुलिस ने एक स्थान पर छापा मारा. वहां से कई मोबाइल फोन, सिम कार्ड, बैंक खातों से जुड़े दस्तावेज और अलगअलग नामों से बनाए गए औनलाइन प्रोफाइलों की जानकारी मिली. पुलिस के सामने बैठे युवक को देख कर नंदिनी के मन में वही सवाल उठा कि क्या यही वह आदमी था, जिस से वह शादी करने के सपने देख रही थी?

पूछताछ में सामने आया कि वह डेटिंग और मैट्रिमोनियल प्लेटफार्म पर लड़कियों को निशाना बनाता था. वह आकर्षक प्रोफाइल बनाता था. बातचीत करता. भावनात्मक रिश्ता मजबूत करता, बाद में पैसे की मांग करता.

इस के बाद नंदिनी की समझ आया कि इंटरनेट पर किसी की फोटो देख कर उस व्यक्ति की पहचान तय करना कितना खतरनाक हो सकता है. उस ने पुलिस अधिकारी से पूछा, ”सर, मैं तो शादी के लिए एक अच्छा इंसान ढूंढ रही थी. क्या हर किसी पर शक करना पड़ेगा?’’

पुलिस अधिकारी ने कहा, ”हर किसी पर शक मत कीजिए. लेकिन हर किसी पर तुरंत विश्वास भी मत कीजिए. औनलाइन रिश्ते में भरोसा शब्दों से नहीं, समय के साथ दिखाई देने वाले व्यवहार से बनता है.’’

नंदिनी अब होशियार हो गई है. उस का सोशल मीडिया और डेटिंग ऐप से विश्वास उठ गया है.

डेटिंग ऐप पर प्यार या खतरा?

औनलाइन रिश्तों की दुनिया में भरोसा जरूरी है, लेकिन आंखें मूंद कर नहीं. बातचीत से ले कर पहली मुलाकात और पैसे के लेनदेन तक कुछ संकेत ऐसे होते हैं, जिन्हें नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है.

डेटिंग ऐप्स ने लोगों के लिए नए परिचय और संभावित जीवनसाथी तलाशना आसान किया है. हजारों किलोमीटर दूर बैठे 2 लोग कुछ ही दिनों में एकदूसरे के बेहद करीब महसूस करने लगते हैं. लेकिन यही सुविधा कई बार जोखिम भी बन जाती है. सामने वाला व्यक्ति वास्तव में वही है, जो वह अपने प्रोफाइल और बातचीत में दिखा रहा है, यह जरूरी नहीं.

कई मामलों में ठग फरजी पहचान बना कर पहले दोस्ती करते हैं, फिर भावनात्मक जुड़ाव पैदा करते हैं और अंत में आर्थिक मदद, निवेश या किसी दूसरी तरह की सहायता के नाम पर पैसे ऐंठने लगते हैं. इसलिए डेटिंग ऐप पर किसी नए व्यक्ति से जुड़ते समय आकर्षण से ज्यादा जरूरी है सावधानी.

किसी नए व्यक्ति से लगातार बातचीत होना अपने आप में गलत नहीं है, लेकिन अगर वह पूरे दिन केवल चैट करता रहे और आमनेसामने मिलने से बारबार बचता रहे तो सावधान होने की जरूरत है. इसी तरह वीडियो कौल से लगातार बचना भी संदेह पैदा कर सकता है.

अगर सामने वाला अपनी सोशल मीडिया प्रोफाइल छिपाता है, निजी या पारिवारिक जानकारी देने से बचता है तो जल्दबाजी में उस पर भरोसा नहीं करना चाहिए.

सब से बड़ा खतरा तब पैदा होता है, जब कोई व्यक्ति कुछ ही दिनों में ‘आई लव यू’ कहने लगे, शादी की बात करने लगे या बहुत जल्दी गहरे भावनात्मक संबंध स्थापित करने का दावा करे. वास्तविक रिश्तों में भरोसा समय के साथ मजबूत होता है. जरूरत से ज्यादा तेजी कई बार सोचीसमझी रणनीति भी हो सकती है.

रिश्तों में इस व्यवहार को ‘लव बौंबिंग’ कहा जाता है. इस में सामने वाला व्यक्ति शुरुआत में जरूरत से ज्यादा प्यार, ध्यान और तारीफ बरसाता है. वह लगातार संदेश भेज सकता है, हर समय जवाब की अपेक्षा कर सकता है और बहुत जल्दी भविष्य की योजनाएं बनाने लग सकता है.

किसी को पसंद करना स्वाभाविक है, लेकिन स्वस्थ रिश्ते में दोनों व्यक्तियों की सीमाओं और स्वतंत्रता का सम्मान होता है. जो व्यक्ति आप की ‘न’ को स्वीकार नहीं करता, वह आगे चल कर आप के लिए परेशानी का कारण बन सकता है.

किसी व्यक्ति को समझने के लिए पर्याप्त समय दें. कुछ दिनों की बातचीत के आधार पर जीवन का बड़ा फैसला न लें. नियमित बातचीत के दौरान उस के विचार, व्यवहार और दावों में समानता पर ध्यान दें. उस के सोशल मीडिया प्रोफाइल को देखें और प्रोफेशन, शिक्षा, परिवार तथा दूसरी महत्त्वपूर्ण जानकारियों को संभव हो तो अलगअलग स्रोतों से जांचें. केवल उस के बताए विवरण को अंतिम सत्य न मानें.

अपने परिवार या किसी भरोसेमंद मित्र को इस नए रिश्ते की जानकारी जरूर दें. पहली मुलाकात के बारे में भी उन्हें बताएं. औनलाइन मिले व्यक्ति से मिलने जाते समय किसी करीबी को अपनी लोकेशन शेयर करना सुरक्षा का महत्त्वपूर्ण कदम हो सकता है.

सब से जरूरी है कि हर महत्त्वपूर्ण बातचीत, विशेषकर पैसे मांगने, निवेश का प्रस्ताव देने या किसी संदिग्ध गतिविधि से जुड़ी चैट का रिकौर्ड और स्क्रीनशौट सुरक्षित रखें. बाद में विवाद या शिकायत की स्थिति में ये प्रमाण उपयोगी हो सकते हैं.

पहली मुलाकात हमेशा सार्वजनिक और भीड़भाड़ वाली जगह पर करना बेहतर है. संभव हो तो दिन के समय मिलें. अपनी यात्रा की व्यवस्था खुद रखें और परिवार या मित्र को बता कर जाएं कि आप कहां जा रहे हैं.

फोन पूरी तरह चार्ज रखें. सामने वाला यदि शराब या कोई अन्य नशीली चीज लेने का दबाव बनाए तो उसे स्वीकार न करें. पहली मुलाकात में उस के घर, होटल या किसी सुनसान निजी स्थान पर जाने से बचें.

सब से महत्त्वपूर्ण बात है अपने सहज बोध पर भरोसा करना. यदि सामने वाले का व्यवहार असहज, आक्रामक, दबावपूर्ण या संदिग्ध लगे तो मुलाकात खत्म कर के सुरक्षित स्थान पर लौटने में संकोच न करें.

औनलाइन रिश्तों में आर्थिक ठगी का एक आम तरीका भावनात्मक विश्वास हासिल करने के बाद पैसे मांगना है. कभी बीमारी, कभी पारिवारिक परेशानी, कभी नौकरी या यात्रा की समस्या और कभी निवेश में शानदार मुनाफे का लालच दे कर रकम मांगी जा सकती है.

किसी औनलाइन परिचित को पैसे ट्रांसफर न करें. बैंक खाते, कार्ड, ओटीपी, पासवर्ड या दूसरी वित्तीय जानकारी साझा न करें. आधार, पैन या पासपोर्ट जैसे महत्त्वपूर्ण दस्तावेजों की कौपी भी किसी अनजान व्यक्ति को न भेजें.

इसी तरह निजी फोटो साझा करना भी जोखिम भरा हो सकता है. फोटो का दुरुपयोग कर बाद में ब्लैकमेल या मानसिक दबाव बनाया जा सकता है. नया रिश्ता बनने पर उत्साह स्वाभाविक है, लेकिन उसे पूरी तरह गुप्त रखना जोखिम बढ़ा सकता है. कम से कम किसी भरोसेमंद व्यक्ति को इस की जानकारी होनी चाहिए. जब कोई व्यक्ति आप को परिवार और दोस्तों से दूर रखने या रिश्ता छिपाने के लिए मजबूर करे तो उस के इरादों पर विचार करना चाहिए.

डेटिंग ऐप पर मिलने वाला हर व्यक्ति ठग नहीं होता और हर औनलाइन रिश्ता खतरनाक भी नहीं है. लाखों लोग इन माध्यमों से अच्छे रिश्ते बनाते हैं. समस्या तब शुरू होती है, जब आकर्षण और भावनाओं के कारण हम चेतावनी के संकेतों को देखना बंद कर देते हैं.

रिश्ते की शुरुआत भरोसे से हो सकती है, लेकिन भरोसा हमेशा जांचपरख और समय के साथ मजबूत होना चाहिए. प्यार में सावधानी अविश्वास नहीं, बल्कि आत्मसुरक्षा है.

औनलाइन दोस्ती: भरोसा कायम रखना मुश्किल

डेटिंग ऐप और सोशल मीडिया ने नए लोगों से मिलने और रिश्ते बनाने का तरीका बदल दिया है. लेकिन एक शोध के मुताबिक, औनलाइन मिले पार्टनर्स के रिश्तों

में आमनेसामने बने रिश्तों की तुलना में भरोसा, संतुष्टि और भविष्य को ले कर स्पष्टता कम देखी गई है. खासकर लड़कियां औनलाइन मिले पार्टनर की नीयत को ले कर ज्यादा सतर्क रहती हैं. उन्हें कई बार यह आशंका रहती है कि सामने वाला व्यक्ति गंभीर रिश्ते की बजाय केवल कैजुअल रिलेशन या मौजमस्ती के लिए जुड़ा है.

नीदरलैंड की रेडबौड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने औनलाइन और औफलाइन बने रिश्तों के अंतर को समझने के लिए अमेरिकी और ब्रिटिश युवाओं पर अध्ययन किया. शोध में शामिल प्रतिभागियों को 2 समूहों में बांटा गया. एक समूह में वे लोग थे, जिन्होंने डेटिंग ऐप के जरिए पार्टनर तलाशा था, जबकि दूसरे समूह के लोगों की मुलाकात स्कूल, कालेज, पार्क या दोस्तों के माध्यम से आमनेसामने हुई थी.

अध्ययन में औनलाइन बने रिश्तों में पार्टनर्स के बीच संदेह और भरोसे की कमी ज्यादा पाई गई. ऐसे जोड़ों में भविष्य की योजना और रिश्ते को ले कर स्पष्टता भी अपेक्षाकृत कम थी. इस के विपरीत, आमनेसामने मुलाकात से शुरू हुए रिश्तों में सामाजिक स्वीकार्यता और रिलेशनशिप सैटिसफैक्शन अधिक देखा गया.

शोध में डेटिंग ऐप इस्तेमाल करने वाले पुरुषों और महिलाओं की प्राथमिकताओं में अंतर भी सामने आया. पुरुषों में कैजुअल दोस्ती या रिश्ते को आगे बढ़ाने से पहले उसे ‘एक्सप्लोर’ करने की प्रवृत्ति अधिक देखी गई, जबकि महिलाएं अपेक्षाकृत गंभीर रिश्ते की तलाश में ऐप का इस्तेमाल कर रही थीं. जब दोनों की अपेक्षाएं अलग होती हैं तो रिश्ता शुरू होने के बाद टकराव और असंतोष की स्थिति पैदा हो सकती है.

कम्युनिकेशन साइंटिस्ट डा. ए. वैन स्टेकेलेनबर्ग के अनुसार, औनलाइन डेटिंग में लोग अकसर पार्टनर खोजने की प्रक्रिया पर ज्यादा ध्यान देते हैं, लेकिन रिश्ते के संभावित परिणामों पर पर्याप्त विचार नहीं करते.

मैरिज फाउंडेशन के 2021 के एक सर्वे के मुताबिक, औनलाइन मिले शादीशुदा जोड़ों में करीब 12 प्रतिशत शुरुआती 3 सालों में अलग हो गए, जबकि आमनेसामने मिले जोड़ों में यह आंकड़ा करीब 2 प्रतिशत था. यानी शुरुआती वर्षों में अलगाव की आशंका औनलाइन मिले जोड़ों में लगभग 6 गुना अधिक बताई गई.

रिश्तों को ले कर इन चुनौतियों के बावजूद डेटिंग ऐप्स की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है. ‘बिजनैस औफ ऐप्स’ के आंकड़ों के मुताबिक दुनिया में 33 करोड़ से ज्यादा लोग डेटिंग ऐप्स का इस्तेमाल कर रहे हैं. भारत में कोविड के बाद इन ऐप्स के उपयोग में भी तेज वृद्धि हुई है. औनलाइन डेटिंग आज रिश्ते बनाने का आसान माध्यम जरूर है, लेकिन शोध यह संकेत देता है कि सिर्फ औनलाइन कनेक्शन को मजबूत रिश्ता मान लेना पर्याप्त नहीं है. रिश्ते को आगे बढ़ाने से पहले व्यक्ति की वास्तविक सोच, व्यवहार, अपेक्षाओं और भविष्य को ले कर उस की गंभीरता को समझना जरूरी है. Dating App Fraud

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