Crime Story: फोरैंसिक साइंस की पढ़ाई कर चुकी अमृता चौधरी यूपीएससी की पढ़ाई कर रहे रामकेश मीणा के प्यार में इतना डूब चुकी थी कि वह उस के साथ लिवइन रिलेशन में रहने लगी. इसी दौरान रामकेश ने उस के आपत्तिजनक स्थिति के वीडियो बना लिए थे. इन दोनों के बीच वीडियो डिलीट करने का मुद्दा ऐसा बवाल बना कि…
सुबह का वक्त था. मुरादाबाद की एक गैस एजेंसी पर गैस सिलेंडर लेने वालों की अच्छीखासी भीड़ लगी हुई थी. सुमित कश्यप ग्राहकों की गैस कौपी में एंट्री कर के अपने नौकर को इशारे से कह रहा था, ”इन्हें गैस का सिलेंडर दे दो.’’ नौकर सिलेंडर देने का काम कर रहा था.
दिन के 11 बजे तक सुमित और उस के नौकर को सांस लेने की फुरसत नहीं मिली. साढ़े 11 बजे के करीब भीड़ खत्म हुई तो सुमित ने लंबी सास भर कर कहा, ”सर्दी में भी पसीना आ गया है बनवारी. जा, अब चाय बनवा कर ले आ. हां, चाय में अदरक अच्छे से डलवाना और देख बिसकुट भी लेते आना.’’
”ठीक है भैया.’’ सुमित से 50 रुपए का नोट लेते हुए बनवारी बोला और एजेंसी से बाहर निकल गया. जैसे बनवारी बाहर निकला था, वैसे ही उलटे पांव लौट आया. सुमित कुरसी पर कमर सीधी करने के लिए पीछे झुका ही था कि फिर सीधा हो गया.
”क्या हुआ? तू वापस क्यों आ गया? क्या चाय की दुकान बंद है?’’
”अभी मैं वहां पहुंचा ही कहां हूं भैया, वो बात यह है कि बाहर एक युवती आप को पूछ रही है.’’
”सिलेंडर लेने आई होगी, अंदर भेज दे उसे.’’ सुमित ने लापरवाही से कहा.
”सिलेंडर नहीं चाहिए उसे, वह तो आप को पूछ रही है कि क्या आप एजेंसी में आए हैं. आप की पहचान वाली लगती है.’’
”अंदर भेज दे, देखूं कौन है.’’ सुमित ने कहा और कुरसी पर ठीक से बैठ गया.
बनवारी बाहर निकल गया. थोड़ी देर में ही अंदर एक 20-21 साल की खूबसूरत युवती ने प्रवेश किया. सुमित उसे देखते ही हैरानी से कुरसी छोड़ कर खड़ा हो गया.
”त… तुम यहां!’’ सुमित के मुंह से हैरत भरा स्वर निकला, ”आज तुम इधर का रास्ता कैसे भूल गई?’’
”क्या मेरा आना तुम्हें अच्छा नहीं लगा है सुमित’’ लड़की ने गंभीर स्वर में पूछा.
”अच्छा क्यों नहीं लगा अमृता. हां, तुम्हें देख कर मुझे गहरा आश्चर्य हो रहा है. तुम ने मुझ से ब्रेकअप कर लिया था, फिर अचानक तुम्हें मैं कैसे याद आ गया?’’
”मैं बहुत परेशानी में हूं सुमित,’’ युवती जिस का नाम अमृता चौधरी था, बहुत गंभीर स्वर में बोली.
”ओह!’’ सुमित मुसकराया, ”तभी मैं तुम्हें याद आया हूं अमृता! चलो, अब आ गई हो तो बैठो और बताओ तुम्हें किस परेशानी ने आ घेरा है?’’
”बात थोड़ा राज वाली है. मैं एकांत में ही तुम्हें बताऊंगी.’’ अमृता ने धीरे से कहा, ”क्या हम कहीं बाहर नहीं चल सकते सुमित?’’
सुमित ने कुछ क्षण सोचा फिर बोला, ”लंबे ब्रेकअप के बाद तुम मेरे पास आई हो अमृता. मैं तुम्हारी परेशानी सुनूंगा और उसे हल भी करने की कोशिश करूंगा. पहले तुम बैठ जाओ. मेरे साथ चायनाश्ता करो, फिर हम बाहर चलेंगे.’’
”ठीक है.’’ अमृता ने कहा और कुरसी पर बैठ गई.
थोड़ी ही देर में बनवारी चायबिस्कुट ले कर आ गया. बह चाय ज्यादा ले कर आया था. उस ने 3 कपों में चाय डाली और सुमित तथा अमृता को दी. बिसकुट भी उस ने एक प्लेट मे खोल कर रख दिए.
”लो अमृता, चाय पिओ.’’ सुमित ने कप उठा कर अमृता की तरफ बढ़ाया. अमृता ने चाय ले ली और पीने लगी.
ऐसे बना खूनी प्लान
बनवारी दूर जा बैठा था. चाय पी लेने के बाद सुमित ने उठते हुए कहा, ”बनवारी, मैं बाहर जा रहा हूं. कोई ग्राहक आए तो संभाल लेना.’’
”ठीक है भैया,’’ बनवारी ने सिर हिलाया.
सुमित अमृता को ले कर गैस एजेंसी से बाहर आ गया. उस ने अपनी बाइक निकाली और अमृता को बिठा कर एक पार्क में आ गया.
यहां ज्यादा भीड़भाड़ नहीं थी. कुछ प्रेमी जोड़े पेड़ों के नीचे या बेंच पर बैठे नजर आ रहे थे. सुमित एक पेड़ के नीचे आ कर बैठ गया. यहां दूरदूर तक सन्नाटा था.
”बताओ अमृता, तुम्हें क्या परेशानी है?’’ सुमित ने अमृता के गंभीर चेहरे पर नजरें जमाते हुए पूछा
”सुमित, मैं तुम से कुछ नहीं छिपाऊंगी.’’ अमृता का स्वर गंभीर था.
”ये पुरानी बातें हैं अमृता. छोड़ो, वह बताओ जिस के लिए तुम्हें एकांत चाहिए था.’’

”वही बता रही हूं सुमित. मैं ने अपनी कालेज की पढ़ाई के कारण तुम से किनारा किया था, लेकिन तुम से जुदा हो कर मैं किसी दूसरे लड़के के प्रेमजाल में फंस गई. मैं जिस लड़के से प्यार करने लगी थी, उस के प्यार में मैं इतना पागल हो गई कि उस के साथ लिवइन रिलेशन में रहने लगी.’’
कुछ क्षण चुप रहने के बाद अमृता ने गहरी सांस ली, ”सुमित, मैं तुम से कुछ नहीं छिपाऊंगी. उस लड़के के साथ मेरे संबंध भी बन गए और यही गलती मुझ से ऐसी हुई कि मैं आज परेशान खड़ी हूं.’’
”क्या तुम उस लड़के के बच्चे की मां बनने वाली हो अमृता?’’ सुमित ने अनुमान लगाते हुए पूछा.
”अरे नहीं. यह बात नहीं है सुमित, उस हरामजादे ने हमारे बीच बने अंतरंग क्षणों की वीडियो बना ली. वह वीडियो मेरे मांगने पर भी मुझे नहीं दे रहा है. जब भी मैं उस से वीडियो डिलीट करने या मुझे देने की बात करती हूं, वह टालमटोल करता है. मुझे अब उस से डर लगने लगा है. वह मेरी वीडियो द्वारा कहीं मुझे ब्लैकमेल न करने लगे.’’
”मामला गंभीर है अमृता,’’ सुमित लंबी सांस भर कर बोला, ”तुम्हारी बात से साफ दिखाई दे रहा है वह तुम्हें कभी न कभी अच्छी तरह बदनाम करेगा या तुम से रुपए ऐंठेगा.’’
”यही तो डर मेरी नींद उड़ाए हुए है सुमित, मैं तुम से इसीलिए मिलने आई हूं. तुम किसी भी तरह मुझे यह वीडियो दिलवा दो. मैं जिंदगी भर तुम्हारा अहसान मानूंगी.’’
”यह इतना सरल काम नहीं है अमृता, इस के लिए तुम्हारे उस पार्टनर के हाथपांव तोडऩे पड़ेंगे मुझे. जरूरत पड़ी तो उस की हत्या भी करनी पड़ सकती है.’’ सुमित कुछ सोचने के बाद गंभीर स्वर में बोला.
”खत्म कर दो उसे. मेरा अब उस से मोह भंग हो गया है सुमित. वह मरेगा, तभी अब मुझे सुकून मिलेगा. वह वीडियो जो उस ने अपने कंप्यूटर की हार्डडिस्क में डाल रखी है, मुझे वह हार्डडिस्क कुछ भी कर के मिलनी चाहिए.’’
”ठीक है, तुम मुझे अपना मोबाइल नंबर दे जाओ. मैं कुछ करता हूं.’’
अमृता ने अपना मोबाइल नंबर सुमित को दे दिया.
इस के बाद उन दोनों के बीच आगे की प्लानिंग बनती रही, फिर अमृता को ले कर सुमित कश्यप मुरादाबाद बस अड्ïडा के लिए निकल गया. क्योंकि अमृता को वहां से बस पकड़ कर दिल्ली जाना था.
आग ऐसे बनी काल
5 अक्तूबर की आधी रात बीत गई थी. अब 6 अक्तूबर का दिन शुरू हो गया था, जो गांधी विहार वालों के लिए सनसनी ले कर आया.
रात करीब 3 बजे के आसपास ई ब्लौक 60 नंबर के फ्लैट के सामने रहने वाले एक सज्जन बाथरूम करने इसी समय उठे थे तो उन्होंने अपने वाशरूम की खिड़की से ई-60 नंबर वाले फ्लैट की चौथी मंजिल पर आग की ऊंचीऊंची लपटें उठती देखीं तो घबरा कर अपने घर से बाहर आ गए और जोरजोर से चिल्लाने लगे, ”आग लग गई है… आग लग गई है.’’
उन के चीखने पर कई घरों के खिड़की और दरवाजे खुल गए. लोग अपने घरों से बाहर आ गए. मोहल्ले में हल्ला मच गया. और भी घरों में जाग हो गई. आग लगी है का शोरगुल जोरजोर से उभरने लगा. ई-60 नंबर के फ्लैट के निचले तलों पर रहने वाले भी जाग गए और गली में आ कर ऊपरी मंजिल पर लगी भयानक आग को देख कर सहम गए.
किसी ने फायर बिग्रेड को फोन कर दिया था. करीब 15-20 मिनट में दमकल की गाडिय़ों की घंटियां वातावरण में सुनाई देने लगीं. दमकल की गाडिय़ां उस क्षेत्र के पास पहुंची ही थीं कि आग लगने वाली चौथी मंजिल के फ्लैट में जोरदार धमाका हुआ. इस के बाद आग और तेजी से भड़क उठी. आग की लपटें आसमान छूती नजर आने लगीं.
”लगता है, कमरे में सिलेंडर फट गया है.’’ भीड़ में कई स्वर उभरे, ”अरे इस में तो एक लड़का रहता है कोई रामकेश नाम का स्टूडेंट है, जो सिविल सर्विस परीक्षा की तैयारी कर रहा है. मेरी एकाध बार उस से बात हुई है.’’
एक व्यक्ति दुखी स्वर में बोला, ”बेचारा, पता नहीं कहीं गया हुआ है क्या. घर का सारा सामान जल गया है.’’
”गया है या घर में ही था,’’ दूसरा व्यक्ति बोला, ”उस के साथ तो एक लड़की भी रहती देखी है मैं ने. उस की रिश्तेदार होगी. एकदो दिन से तो मैं ने उसे नहीं देखा है.’’ एक अन्य युवक बोला.
तभी फायर ब्रिगेड की गाडिय़ां वहां आ गई. दमकलकर्मी जल्दी से गाडिय़ों से बाहर कूदे और फिर अपने काम में लग गए. आग बुझाने के लिए पानी का प्रेशर पाइपों द्वारा फेंका जाने लगा. कुछ देर में वहां तिमारपुर थाने की पुलिस वैन भी आ गई. इस में थाने के एसएचओ प्रवीण कुमार, एसआई दीपक शर्मा, एसआई मोहित उज्जवला, हेडकांस्टेबल राहुल, टिंकू यादव, कांस्टेबल मनोज और महिला कांस्टेबल रजनी थे.
थोड़ी देर में उस फ्लैट की आग पर काबू पा लिया गया. दमकलकर्मी अपने इंचार्ज के साथ उस ऊपरी मंजिल पर पहुंचे तो वहां का दृश्य बहुत भयावह और दिल को झकझोर देने वाला था. पूरे कमरे में एक युवक के शरीर के चीथड़े बिखरे हुए थे. सिलेंडर फटने से उस कमरे का सामान भी चारों तरफ बिखरा पड़ा था. मानव न मांस की सड़ांध वहां भयंकर रूप से फैली पड़ी थी.
कमरे में पानी काफी भर गया था, जो धीरेधीरे नाली के पाइप से निकल कर कम होने लगा था. वहां कुछ भी सामान सही स्थिति में नहीं था. पहली ही नजर में देखने से समझा जा सकता था कि कमरे में आग लगने के बाद तेजी से फैली थी, फिर सिलेंडर फटने से वहां पर फंसा युवक जो शायद नींद में रहा होगा और निकल पाने में सफल न हो सका हो, उस के चीथड़े उड़ गए थे.
यह बहुत भयानक मंजर था. दमकलकर्मी अपने इंचार्ज के साथ थोड़ी देर में ही वापस नीचे आ गए और नीचे मौजूद तिमारपुर थाना इंचार्ज से दमकल इंचार्ज ने बात की.
”यह एक हादसा है श्रीमान. आग रात को कब लगी, वहां मौजूद युवक को शायद मालूम नहीं हुआ, वह धुएं से बेहोश हो गया होगा, फिर सिलेंडर फटने से इस के चीथड़े उड़ गए. आप मालूम कीजिए, वह युवक कौन है, जो इस कमरे में रहता रहा है.’’
”हां, आगे की ड्यूटी अब हमारी है.’’ एसएचओ प्रवीण कुमार बोले और अपने साथ एसआई मोहित उज्जवल तथा दीपक शर्मा को ले कर चौथी मंजिल पर आ गए. वह भयानक मंजर देख कर उन के भी रोंगटे खड़े हो गए. मानव मांस की दुर्गंध से उबकाई आने लगी, फिर भी मुंह पर रुमाल बांध कर उन्होंने वहां का बारीकी से मुआयना क्रिया.
युवक की मौत आग लगने से हुई या आग लगने के बाद धुएं से दम घुटने से हुई, अब यह बताने वाला वहां कोई नहीं था. हां, मौत के बाद वहां रखा सिलेंडर फटने से उस के शरीर के चीथड़े उड़ गए थे, यह समझा जा सकता था. वहां अधजला कंप्यूटर, किताबें कौपी और खानेपीने का सामान इधरउधर फैला पड़ा था. साथ में अटैच किचन भी काफी क्षतिग्रस्त हो गया था.
यह पढऩे वाला स्टूडेंट था. एसएचओ प्रवीण कुमार बोले, ”इस के विषय में मकान मालिक से मालूम कर के परिजनों को सूचित करना होगा. दीपक शर्मा, आप यह काम निपटाइए. मैं फोरैंसिक टीम को बुलवा कर यहां की काररवाई पूरी करवाता हूं. उज्जवल, आप फोरैंसिक टीम को फोन कर दीजिए.’’
”ओके सर.’’ एसआई मोहित उज्जवल ने कहा और वह जेब से फोन निकाल कर फोरैंसिक स्क्वायड को फोन मिलाने लगे.
इंसपेक्टर प्रवीण कुमार वहां से बालकनी में आ गए और उन्होंने इस घटना की जानकारी नार्थ जिले के डीसीपी राजा बांटिया और एसीपी शशिकांत गौड़ को दे दी. उन दोनों ने लाश की शिनाख्त करने और उस के परिजन को सूचना देने की हिदायत के साथ लाश को पोस्टमार्टम के लिए हिंदू राव हौस्पिटल भेजने की सलाह दे दी.
फोरैंसिक टीम वहां आधा घंटे में पहुंच गई और अपने काम में जुट गई. घटनास्थल से साक्ष्य जुटाने के बाद लाश के सभी हिस्सों को, जो कमरे में बिखर गए थे, समेट कर पोस्टमोर्टम के लिए हिंदू राव अस्पताल की मोर्चरी में भेज दिया गया.
सुबह तक यह भी पता हो गया कि इस कमरे में रहने वाले युवक का नाम रामकेश मीणा था, वह यहां किराए पर रह कर यूपीएससी की पढ़ाई कर रहा था.
मृतक निकला स्टूडेंट
मकान मालिक और आसपड़ोस से पूछताछ में मालूम हुआ कि रामकेश मीणा के साथ कुछ महीनों से अमृता नाम की लड़की भी रह रही थी. दोनों में क्या संबंध थे, यह तो कोई नहीं बता सका. हां, यह जरूर मालूम हुआ कि वह फोरैंसिक साइंस की बीएससी की पढ़ाई कर चुकी थी. अब उस ने फोरैंसिक साइंस में कंप्यूटर का कोर्स करने के लिए दाखिला लिया हुआ था. 2-3 दिन से वह कमरे में नजर नहीं आई थी. शायद वह अपने घर गई हुई थी.
आजकल युवा लड़केलड़कियों का लिवइन रिलेशन में रहने का नया फैशन चला हुआ है. इसलिए इंसपेक्टर प्रवीण कुमार ने बहुत गंभीरता से इस विषय को नहीं लिया. रामकेश मीणा मूलरूप से राजस्थान का रहने वाला था. परिवार में उस के मम्मीपापा के अलावा एक भाई है. उन्हें इस दुर्घटना की खबर भेज दी गई. पूरी काररवाई निपटा कर सुबह तिमारपुर थाने की पुलिस टीम वापस लौट आई.

सुबह थाना तिमारपुर के एसएचओ धूप में बैठे अखबार पढ़ रहे थे. तब उन के फोन की घंटी बजने जगी. फोन उन के कक्ष में लैंडलाइन पर था. इंसपेक्टर प्रवीण कुमार उठ कर कमरे में आ गए. उन्होंने रिसीवर उठा कर कहा, ”हैलो, मैं एसएचओ प्रवीण कुमार बोल रहा हूं. आप?’’
”गुड मार्निंग सर!’’ दूसरी ओर से गंभीर स्वर उभरा, ”मैं फोरैंसिक टीम का इंचार्ज भट्ट बोल रहा हूं. सर, कल रात को हम ने तिमारपुर के गांधी विहार में फ्लैट नंबर ई-60 में घटनास्थल का निरीक्षण किया था. आप भी तब वहां थे.’’
”हां, मुझे याद है, अभी मुश्किल से इस बात को 5 घंटे का समय ही बीता है. बोलिए, आप क्या कहना चाहते हैं?’’
”सर, मेरा और मेरी पूरी टीम का कहना है कि वह महज एक दुर्घटना वाला मामला नहीं है. उस युवक रामकेश मीणा की पूरी प्लानिंग के साथ हत्या की गई है.’’
इंसपेक्टर प्रवीण कुमार हैरानी से बोले, ”आप की जांच से क्या ऐसा साबित हो रहा है मिस्टर भट्ट?’’
”जी हां. तभी तो मैं ने पूरे विश्वास के साथ आप को फोन मिलाया है.’’
”आप को इस मामले में कहां पर शक हो रहा है. वह तो सीधासीधा आग लगने और उस में सिलेंडर ब्लास्ट होने का मामला था. मैं ने स्वयं देखा है. सिलेंडर फटने से युवक के शरीर के चीथड़े उड़ थे.’’
”यह तो मैं भी मान रहा हूं सर, किंतु मुझे यह हत्या का ही मामला लग रहा है. क्योंकि जो सिलेंडर रसोई घर में गैस चूल्हे से लगा होना चाहिए था, वह किचन से अटैच्ड कमरे में मिला है. आप सोचिए सिलेंडर का कमरे में क्या काम?’’
”ओह!’’ इंसपेक्टर प्रवीण कुमार ने उतावलेपन से कहा, ”मान गया मैं आप को भट्ट साहब, आप ने कितनी बारीकी से इस बात को पकड़ा है. यह बात हमारे किसी के दिमाग में नहीं आई. आप ठीक कह रहे हैं, कमरे में सिलेंडर किस मकसद से लाया गया. यदि चाय या अन्य किसी चीज को बनाने के लिए सिलेंडर को किचन से कमरे में लाना आवश्यक था तो उस के साथ गैस चूल्हा भी होना जरूरी था. वह तो किचन में ही दिखाई दे रहा था.’’
”यहीं से मुझे इस मामले में संदिग्ध होने की बू आने लगी थी. मैं ने अपना विचार अपनी टीम के साथ शेयर किया तो सभी को कहना पड़ा, यह सोचीसमझी हत्या की साजिश बुनी गई है. युवक यदि बेहोश था तो उस के चीथड़े उड़ाने का मकसद यह हो सकता है कि पहले युवक की हत्या की गई, फिर सिलेंडर ब्लास्ट कर के इसे दुर्घटना बनाने की प्लानिंग रची गई.’’
”आप का सोचना ठीक है. मैं डीसीपी साहब से बात कर के उस स्थान की फिर से जांच करने की इजाजत ले लेता हूं. फिर देखता हूं कि मामला क्या है.’’
”जी ठीक है.’’ भट्ट ने कह कर संपर्क काट दिया.
इंसपेक्टर प्रवीण कुमार ने तुरंत डीसीपी राजा बांटिया को फोन लगा कर उन्हें फोरैंसिक इंचार्ज श्री भट्ट के संदेह का कारण बताते हुए इस मामले में फिर से जांच करने की इजाजत मांगी. श्री राजा बांटिया ने उन्हें इजाजत देते हुए इस मामले को गंभीरता से देखने के लिए उन के सुपरविजन में एक टीम का गठन कर दिया.
साजिश का मिला सुराग
तिमारपुर थाने के एसएचओ प्रवीण कुमार के साथ ला ऐंड और्डर इंसपेक्टर पंकज तोमर, एसआई दीपक शर्मा, एसआई मोहित उज्जवल, हैडकांस्टेबल राहुल, रामरूप, टिंकू यादव, मनोज और महिला कांस्टेबल रजनी को टीम में शामिल किया गया. यह टीम एसीपी शशिकांत गौड़ के दिशानिर्देश पर काम करने के लिए नियुक्त की गई. टीम ने घटनास्थल पर जा कर जब बारीकी से वहां का निरीक्षण किया तो उन्हें श्री भट्ट की बात में दम नजर आया.
सिलेंडर कमरे में ब्लास्ट हुआ था और उस के टुकड़े कमरे में फैले हुए थे. कमरे की दीवारों का सिलेंडर ब्लास्ट होने से काफी क्षति पहुंची थी. उस का प्लास्टर जगहजगह से उखड़ गया था. टीम ने किचन में जा कर देखा, वहां चूल्हा अव्यवस्थित पड़ा था. उस के पाइप से रबड़ का पाइप लगा था, लेकिन रेगुलेटर निकाला हुआ था. कमरे में रेगुलेटर सिलेंडर के मुंह पर लगा देख लिया गया था. ब्लास्ट से मुंह वाला हिस्सा एक कोने में पड़ा था.
कमरे में उन्हें केरोसिन, शराब की गंध भी महसूस हो रही थी. कोर्स की किताबें अधजली कुछ बैड पर पड़ी थीं. कुछ कमरे में फैली दिख रही थीं. इंसपेक्टर पंकज तोमर ने कमरे को देख लेने के बाद कहा, ”यहां पर क्राइम सीन हुआ है. युवक की पहले हत्या की गई, फिर आग लगा कर यहां सिलेंडर छोड़ दिया गया, ताकि गरम होने पर यहां ब्लास्ट हो और यह हादसा लगे.
युवक के चीथड़े होने से उस के शव की जांच भी नहीं की जा सकती है. सब सोचीसमझी प्लानिंग के तहत हुआ है. हमें अब यह देखना है कि इस कमरे में घटना से पहले कौन आया था. यहां आसपास सीसीटीवी कैमरे होंगे तो यह मालूम हो जाएगा.
”चलिए सीसीटीवी कैमरों की तलाश करते हैं.’’ श्री प्रवीण कुमार ने कहा.
वह सब बाहर आ कर सीसीटीवी तलाश करने लगे. उन्हें गली में बिजली के पोल पर सीसीटीवी कैमरा लगा दिखाई दे गया. उस की फुटेज चैक की गई तो उन को ई-60 के फ्लैट के चौथी मंजिल की वीडियो मिल गई. रात 5 अक्तूबर को चौथी मंजिल पर रात लगभग साढ़े 8 बजे 2 व्यक्ति अंदर जाते नजर आए. इस के 39 मिनट बाद यानी 9 बज कर 9 मिनट पर एक युवक मुंह ढंक कर कमरे से बाहर निकलते दिखा.
फिर 6 अक्तूबर लगने पर 2.57 बजे 2 युवक कमरे से बाहर आते दिखे. इन्होंने मुंह ढंक रखे थे. इन में एक युवक लड़की की तरह दिखाई दिया. उस की चाल और शरीर की बनावट से ही ऐसा संदेह हुआ. इस के बाद कमरे में से आग की लपटें निकलती दिखाई देने लगीं. पुलिस टीम के सामने यह स्पष्ट हो गया कि 5 अक्तूबर की रात ही ई-60 की मंजिल 6 पर 3 लोग घुसे. एक जल्दी बाहर आ गया, 2 आग लगने से कुछ ही मिनट पहले मुंह ढक कर कमरे से निकले. कल रात यहां प्लानिंग रच कर युवक रामकेश मीणा की हत्या की गई.
यह मालूम हो चुका था कि रामकेश के साथ 3-4 महीने से अमृता चौहान नाम की युवती भी रह रही थी. वह इस घटना से 3 दिन पहले ही यहां से गायब हो गई थी और लौटी नहीं थी. पुलिस का शक उसी पर गहराया. उस का मोबाइल नंबर मकान मालिक से मिल गया. यह भी मालूम हो गया कि अमृता मुरादाबाद में पीतल नगरी की रहने वाली है और उस के पिता का नाम राजवीर सिंह है. पुलिस टीम ने अमृता का मोबाइल नंबर मिलाया तो वह स्विच्ड औफ आ रहा था. उस की 5 अक्तूबर की लोकेशन ट्रेस की गई तो वह रात को ई-60 की ही मिली. इस से अमृता संदेह के घेरे में आ गई.
श्री पंकज तोमर को वादी बना कर यह केस धारा 287/106 (1) बीएनएस के तहत दर्ज कर लिया गया. दोपहर को रामकेश के मम्मीपापा भी रोते हुए राजस्थान से दिल्ली आ गए. उन का भी यही कहना था कि उन का बेटा साहसी और निडर था, वह आत्महत्या नहीं कर सकता. उन के बेटे को मारा गया है. यह उसी लड़की का काम हो सकता है, जो उन के बेटे के साथ रहती थी.
बौयफ्रेंड का किया मर्डर
पुलिस ने अब सारा ध्यान अमृता पर केंद्रित कर दिया. उस को हिरासत में लेने के लिए पुलिस टीम मुरादाबाद भेजी गई. पुलिस ने उस के घर और रिश्तेदारियों में छापे मारे, लेकिन अमृता वहां नहीं थी. उस के दिल्ली के छतरपुर में छिपे होने की जानकारी मिलने पर छतरपुर में छापा डाला गया, लेकिन वह वहां से निकल कर कुछ समय पहले ही कहीं चली गई थी.
पुलिस उस की लोकेशन ट्रेस करने के लिए हाथपांव मारती रही, लेकिन उस ने अपना मोबाइल फोन औन नहीं किया. आखिर 18 अक्तूबर को उसे मुरादाबाद से गिरफ्तार करने में पुलिस कामयाब रही. उसे दिल्ली लाया गया और सख्ती से पूछताछ की गई. उस ने अपना अपराध स्वीकार करते हुए बताया कि उस ने रामकेश मीणा की हत्या करने के लिए अपने पूर्वप्रेमी सुमित कश्यप, निवासी मोहल्ला वाल्मीकि बस्ती, बंगला गांव, मुरादाबाद (उत्तर प्रदेश) की मदद ली थी.

”लेकिन हम ने ई-60 की चौथी मंजिल से 3 युवकों को कमरे से मुंह ढक कर निकलते देखा था. वह तीसरा कौन था और उन 3 में तुम कहां थी?’’ इंसपेक्टर प्रवीण कुमार में पूछा.
”तीसरा युवक संदीप कुमार था सर. इसे सुमित ने मुरादाबाद से ही बुलाया था. वह रामकेश की हत्या होते ही मुंह ढक कर निकल गया था. मैं और सुमित रात 2 बज कर 57 मिनट पर कमरे में आग लगाने के बाद निकले थे. मैं ने तब खुद को छिपाने के लिए रामकेश की पहन रखी थी.’’
इंसपेक्टर पंकज तोमर ने अमृता से पूछा, ”तुम्हें रामकेश की हत्या क्यों करनी पड़ी, तुम तो 4-5 महीने से उस के साथ लिवइन रिलेशनशिप में रह रही थी?’’
”सर, मैं ने फोरैंसिक साइंस में बीएससी की थी. मई में मैं रामकेश के संपर्क में आई तो वह मिलनसार और अच्छा लगा. हम में प्यार हो गया तो मैं रामकेश के कमरे में साथ आ कर रहने लगी. रामकेश ने द्वारका के एक कालेज से बीटेक किया था. इन दिनों वह यूपीएससी की तैयारी कर रहा था. वह आईएएस बनना चाहता था. मैं ने फोरैंसिक साइंस में कंप्यूटर कोर्स ले लिया था.

”एक साथ रहते हुए मेरे रामकेश से संबंध बन गए. उस ने न जाने कैसे अंतरंग क्षणों के वीडियो बना लिए थे. मुझे जब पता चला तो मैं ने उस से वे तमाम वीडियो डिलीट करने के लिए कहा, लेकिन उस ने नहीं की.
”बारबार कहने पर भी वह मुझे न तो हार्डडिस्क दे रहा था न वीडियो डिलीट कर रहा था. तब मैं गुस्से में अपने मुरादाबाद के पूर्वप्रेमी सुमित कश्यप से मिली. वह मुरादाबाद में गैस एजेंसी चलाता है. उस ने कहा कि वह रामकेश से किसी भी तरह हार्डडिस्क दिलवा देगा.

”मुझे अपने वीडियो चाहिए थे. बेशक इस के लिए रामकेश की हत्या भी करनी पड़े तो मैं करने को तैयार थी. मैं फोरैंसिक साइंस की पढ़ाई कर रही हूं. मुझे हत्या को हादसा कैसे दिखाया जाना है, मालूम था. मैं ने रामकेश की हत्या को खुद को सुरक्षित रखने के लिए कई क्राइम वेब सीरीज देखीं और पूरी प्लानिंग के साथ 5 अक्तूबर को सुमित कश्यप के साथ रामकेश के कमरे में गई. तब संदीप भी हमारे साथ था.
”सुमित और संदीप ने रामकेश को डरायाधमकाया, मारापीटा, लेकिन वह हार्डडिस्क देने को तैयार नहीं हुआ तो सुमित ने उस का गला घोंट दिया. संदीप यह देख कर भाग गया. सुमित और मैं ने रामकेश की लाश पलंग पर लिटा कर उस पर तेल, केरोसिन, घी, शराब और रामकेश के कोर्स की किताबें भी डाल दीं.

”सुमित किचन से सिलेंडर निकाल लाया. उस के रेगुलेटर को थोड़ा सा खोल कर गैस को रिसने के लिए छोड़ कर हम बाहर निकले. दरवाजे पर जाली लगी थी, उसे काट कर अंदर हाथ डाला गया और कुंडी अंदर से लगाई गई ताकि पुलिस सोचे रामकेश ने खुद को खत्म किया है. बाहर से ही कमरे में माचिस की तीली जला कर फेंकने के बाद मुंह ढक कर हम निकल भागे.’’
”वह हार्डडिस्क तुम्हें मिल गई, जिस के लिए तुम ने यह जुर्म किया है.’’ डीसीपी राजा बांटिया ने प्रश्न किया. वह बहुत देर से अमृता का बयान सुन रहे थे.
”हां सर, मैं ने कंप्यूटर से हार्डडिस्क निकाल ली थी. वहां से मैं ने रामकेश के ट्रौली बैग में रामकेश के 2 मोबाइल भी उठा कर रख लिए थे. मैं समझ रही थी कि पुलिस इसे हादसा ही मानेगी, किंतु मैं फंस गई. इतनी चालाकी के बाद भी.’’ अमृता ने गहरी निराशा के साथ कहा.
श्री प्रवीण कुमार ने चुटकी ली, ”अभी तुम्हारी फोरैंसिक साइंस की पढ़ाई अधूरी जो है अमृता, तुम ने अपना करिअर तो खराब किया ही, सुमित और संदीप जो मेहनत से एसएससी की तैयारी कर रहे थे और ग्रैजुएशन कर चुके हैं, उन की भी जिंदगी पर कालिख पोत दी है.

अमृता के बताए पते पर पुलिस ने छापे मार कर 21 अक्तूबर को मुरादाबाद से सुमित कश्यप (27 साल) और 23 अक्तूबर को 23 वर्षीय संदीप को गिरफ्तार कर लिया. अमृता से ट्रौली बैग, रामकेश की शर्ट और दोनों मोबाइल फोन पुलिस ने कब्जे में ले लिए. तीनों को सक्षम न्यायालय में पेश कर के 2 दिन की पुलिस रिमांड पर ले कर पूछताछ पूरी की गई, फिर उन्हें न्यायालय में पेश किया गया, जहां से तीनों को जेल भेज दिया गया.
अपने होनहार बेटे को खोने का गम लिए उस के पेरेंट्स बेटे का अंतिम संस्कार करने के बाद भारी मन से अपने घर राजस्थान लौट गए. Crime Story






