Hindi Stories: अवध के नवाब नसीरूद्दीन हैदर अय्याश तो थे ही, तोताचश्म भी थे. उन की रंगीन नजरें बांदियों से बेगमों तक फिसलती रहती थीं...

अवध के दूसरे नवाब नसीरूद्दीन हैदर जितने अय्याश और आशिकमिजाज थे,उतने ही तोताचश्म भी थे. वह कब किस से निगाहें फेर लें और कब किस को सिर पर बैठा लें, किसी को नहीं मालूम. उन की इसी फितरत ने जहां सैकड़ों मामूली औरतों को शाही हरम में पहुंचा दिया था, वही उन की निगाह पलटते ही कितनी ही बेगमें कनीजों से भी बदतर जिंदगी जीने या फिर मौत से दामन जोड़ने को मजबूर हो गई थीं. हजारों बेगमें होने के बावजूद नसीरूद्दीन बेऔलाद थे. उन दिनों नवाब के दिलोदिमाग पर बेगम मलिका जमानी की हुकूमत थी.

 

नसीरूद्दीन ने मलिका जमानी के नाम अवध के बैसवारा परगना की जागीर लिख दी थी. इस जागीर की सालाना आमदनी 6 लाख रुपए थी. मलिका जमानी नसीरूद्दीन हैदर के दिल पर इस कदर छा गई थी कि उस के इशरों पर दरबार के दस्तूर करवटें बदलते थे. हर रात नवाब मलिका जमानी के महल में ही गुजारा करते थे. यही कारण था कि अवध की सब बेगमों पर मलिका जमानी का दबदबा था. एक रात जब नवाब उस की ड्योढ़ी में दाखिल हुए तो वह कुछ परेशान थे. उन के हाथों में 50 लाख रुपए का एक रुक्का था. मलिका जमानी ने बड़ी अदा से उन की परेशानी का सबब जानना चाहा, ‘‘हुजूरेआलम की तबीयत कुछ नासाज नजर आती है. क्या हम वजह जान सकते हैं?’’

‘‘कोई खास वजह नहीं बेगम, बस यूं ही...’’ नसीरूद्दीन ने कहा.

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