True Crime Story: औरत अगर चरित्रहीन हो तो   बसेबसाए घर उजड़ जाते हैं. एक नहीं, कई जिंदगियां बरबाद हो जाती हैं. ऐसे में औरत तो परेशान होती ही है, ससुराल के ही नहीं,  मायके वाले भी दुखी होते हैं. मुराद अली से मेरी अच्छी दोस्ती थी. उस दिन वह अपने साथ अपने दोस्त नादिर अली को ले कर मेरे पास आया था. वह बड़ा परेशान था. मेरे पूछने

पर मुराद अली ने बताया, ‘‘वाकया नादिर अली के बड़े भाई कादिर अली के साथ हुआ है. इन दोनों भाइयों की खालिद रोड पर साझे में टायरों की काफी बड़ी दुकान है. कल कादिर अली को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है.’’

‘‘किस जुर्म में गिरफ्तार किया है?’’ मैं ने पूछा तो वह बोले, ‘‘उन्हें उन की एक्स वाइफ के कत्ल के इलजाम में गिरफ्तार किया गया है. फिलहाल वह रिमांड पर पुलिस कस्टडी में हैं.’’

‘‘कादिर अली की एक्स वाइफ के बारे में कुछ बताइए?’’ मैं ने नादिर अली से पूछा.

‘‘उस का नाम लुबना था. उस औरत ने भाईसाहब को जिंदगी भर दुख दिए और मरने के बाद भी उन्हें मुसीबत में डाल गई. तलाक भी एक तरह से उस ने जबरदस्ती लिया. उस ने एक ऐसा नाटक खेला था कि भाई को मजबूरन उसे तलाक देना पड़ा. बाद में तलाक को कानूनी हैसियत भी मिल गई. यह सब एक सोचीसमझी साजिश के तहत हुआ था. बेहद मक्कार और शातिर औरत थी वह.’’ नादिर अली ने नफरत से कहा.

‘‘तलाक वाली बात कितना अरसा पहले की है?’’

‘‘यह मई चल रहा है, तलाक जनवरी में हुआ था. भाई अच्छेखासे अपनी बेटी आरिफा के साथ रह रहे थे कि यह आफत गले पड़ गई.’’

‘‘आरिफा अपनी मरजी से बाप के साथ रह रही थी?’’

‘‘हां, उन की बेटी आरिफा 15 साल की है, वह बेटी की वजह से मजबूर थे. इसलिए अपनी बीवी लुबना की आवारगी और ज्यादती को जहर की तरह गले उतारते रहे. लेकिन जब लुबना ने सारी हदें पार कर दीं, वह भी सिर्फ भाई से जान छुड़ाने के लिए तो उन्होंने भी देर नहीं की और उस शातिर औरत को अपनी जिंदगी से बाहर का रास्ता दिखा दिया. उन की बेटी आरिफा काफी समझदार है, वह मां की चालों और चरित्रहीनता को समझ गई थी. इसलिए उस ने खुद बाप के साथ रहने का फैसला किया था.’’

मुराद अली ने थोड़ा रुक कर कहा, ‘‘वकील साहब, तलाक वाली रात उन के घर में जिस तरह का तमाशा हुआ था, उस ने आरिफा को पूरी तरह मां के खिलाफ कर दिया था. उस ने बड़े सही वक्त पर सही फैसला लिया था.’’

‘‘तलाक का मंसूबा और तलाक वाली रात हुए ड्रामे की बात मैं कुछ समझ नहीं पाया. यह एक नहीं, दो बातें हैं?’’ मैं ने पूछा तो नादिर अली ने हिचकिचाते हुए कहा, ‘‘बताने में शरम आ रही है, पर आप भाई का केस लड़ रहे हैं, इसलिए बताना जरूरी है. ज्यादा डिटेल तो मैं नहीं जानता, पर मुझे जो पता है, बताए देता हूं.’’

उस ने बताया, ‘‘लुबना काफी दिनों से इस कोशिश में थी कि भाई उसे छोड़ दें, ताकि वह मनमाने ढंग से अय्याशी कर सके, पर भाईजी उस की हर ज्यादती सहते रहे. यह देख कर वह नीचता पर उतर आई और उस ने भाई के लिए एक जाल बुना. वह अपनी इंसानी कमजोरी के चलते उस में फंस गए और फिर उन के पास तलाक के सिवा कोई रास्ता नहीं बचा.’’

‘‘जब कोई औरत छुटकारा पाने के लिए साजिश रचती है तो उस के पीछे कोई न कोई मकसद तो होना चाहिए. उस का क्या मकसद था?’’ मैं ने पूछा तो वह उत्तेजित हो कर बोले, ‘‘मकसद था जनाब, बड़ा बेशरमी भरा मकसद था. वह मेरे भाई की बीवी होने के बावजूद एक गैर इंसान से ताल्लुक बनाए हुए थी. उस से शादी करना चाहती थी. उस मरदूर का नाम जमाल बेरी है.

‘‘भाई को जब इस बात का पता चला तो उन्हें बहुत गुस्सा आया. उन्होंने उसे रोकने की कोशिश की तो वह नएनए हथकंडे अपनाने लगी, ताकि भाई तंग आ कर उसे छोड़ दें. जब पानी सिर से गुजर गया तो मजबूरन उन्हें लुबना को तलाक देना पड़ा. तलाक पाने के लिए उस ने घर की मुलजिमा रशना का इस्तेमाल किया था.’’

‘‘यानी लुबना ने भाई से तलाक ले कर जमाल से शादी कर ली. इस तरह उस का मकसद पूरा हो गया?’’

‘‘नहीं, पिछले दिनों उन की मंगनी की खबर सुनी थी, अगर वह जिंदा रहती तो शादी भी हो जाती.’’ नादिर अली ने कहा.

कुछ और बातें पता कर के मै ंने फीस ली और उन्हें तसल्ली दे कर विदा कर दिया. पुलिस ने मुलजिम कादिर अली को अदालत में पेश कर के 7 दिनों का रिमांड लिया था. शाम को मैं थाने पहुंच गया. कादिर अली को देख कर मैं चौंका, क्योंकि उस का चेहरामोहरा नािदर अली से काफी मिलता था, उम्र में वह जरूर 2-4 साल बड़ा रहा होगा. वह उदास और परेशान था. यह जान कर कि मैं उन का वकील हूं, उन्होंने कहा, ‘‘बेग साहब, मैं बैठेबिठाए इस मुसीबत में फंस गया हूं, मेरा कहीं कोई कसूर नहीं है.’’

‘‘आप को पूरा यकीन है कि आप पूरी तरह निर्दोष हैं?’’

‘‘जी हां, वकील साहब, मुझे जानबूझ कर फंसाया गया है, मैं बेकसूर हूं.’’

‘‘अगर आप बेकसूर है तो आप जरूर इस केस से बाइज्जत बरी हो जाएंगे, यकीन रखिए. अगले 20 मिनट तक मैं उन से केस से संबंधित सवालजवाब करता रहा. उन्होंने मुझे कई सनसनीखेज बातें बताईं. वकालतनामे पर साइन ले कर मैं ने उन्हें सारी बातें समझा दीं कि वह पुलिस वालों की कोई पेशकश कबूल न करें और न ही उन की कोई मांग मानें. बस मजबूती से अपने बयान पर टिके रहें.’’

रिमांड खत्म होने के बाद पुलिस ने अदालत में चालान पेश कर दिया. इसी पेशी पर मैं ने अपने वकालतनामे के साथ मुलजिम की जमानत की अरजी पेश कर दी, ‘‘जनाबेआला, मेरा मुवक्किल एक बाइज्जत शहरी है. उस का रिकौर्ड बिलकुल साफ है. उसे इस केस में जबरन फंसाया गया है. उस की जमानत की अरजी मंजूर की जाए.’’

इस्तेगासा के वकील ने कहा, ‘‘वारदात के वक्त मुलजिम को मकतूल के फ्लैट में जाते और आते देखा गया था. इस का एक गवाह भी मौजूद है. साथ ही मौकाएवारदात पर मुलजिम की मौजूदगी के निशान भी पाए गए हैं. जबकि कुछ अरसा पहले मुलजिम के मकतूल के ताल्लुकात खतम हो चुके थे?’’

इसी तरह बहस चलती रही. कत्ल के मुलजिम को जमानत वैसे भी मुश्किल से मिलती है, इसलिए बहुत जोर देने पर भी कादिर अली की जमानत नहीं हो सकी. अदालत ने 15 दिनों बाद की तारीख दे कर मुलजिम को जेल भेज दिया. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, लुबना की मौत 9 मई की रात 8 से 9 बजे के बीच हुई थी. एक तेजधार वाला खंजर उस के सीने में उतार दिया गया था. मौत की वजह वही खंजर था. जब उस पर हमला किया गया था, वह नशे में थी. मारने से पहले उसे कोई ऐसी नशीली दवा दी गई थी, जिस से नींद आती है. मेरे पास 15 दिनों का समय था. मैं ने दौड़भाग कर के सार सबूत जुटा लिए, जो आप को अदालती काररवाही के दौरान पता चलेंगे.

अगली पेशी पर अदालत की काररवाही शुरू हुई तो जज ने जुर्म पढ़ कर सुनाया. मेरे मुवक्किल ने कत्ल के जुर्म से साफ इनकार कर दिया. इस के बाद मुलजिम का बयान दर्ज किया गया. वकील ने जिरह शुरू की, ‘‘मकतूल, जो पहले तुम्हारी बीवी थी और तुम्हारे व्यवहार से बहुत परेशान थी?’’

वह कुछ और पूछता मेरे मुवक्किल ने कहा, ‘‘वह मेरी बीवी जरूर थी, लेकिन मेरे व्यवहार से बिलकुल परेशान नहीं थी.’’

‘‘उस ने तुम से परेशान हो कर ही सहारा ढूंढ़ कर तलाक लिया था?’’

‘‘उस ने मुझ से तलाक जरूर लिया था, पर व्यवहार मेरा नहीं, उस का खराब था. वह मुझ से ठीक से बात तक नहीं करती थी, मेरे जज्बातों और मेरी जरूरतों की उसे जरा भी परवाह नहीं थी. जवान बेटी के सामने मैं उसे कुछ कह भी नहीं सकता था, इसलिए उस की हर ज्यादती चुपचाप बरदाश्त करता रहा. लेकिन जब पानी सिर के ऊपर से गुजर गया तो मुझे अपना रास्ता अलग करना पड़ा. जब तक वह मेरी बीवी थी, मैं ने उस पर अंधा यकीन किया. मैं जमाल को उस का बौस समझता रहा. मुझे तो बाद में पता चला कि उस का जमाल से अफेयर चल रहा था और वह उस से शादी करना चाहती थी.’’

वकील इस्तेगासा ने जख्मों पर नमक छिड़कते हुए कहा, ‘‘इस का मतलब यह सच है कि तुम्हारी बीवी का जमाल से इश्क चल रहा था और वह जल्दी ही उस से शादी करना चाहती थी. उन की मंगनी भी हो गई थी. उस की मौत से तो तुम्हें खुशी हुई होगी?’’

‘‘इस में खुश होने की क्या बात है? जो औरतें अपना घर उजाड़ कर गलत राह पर चलती हैं, उन का यही अंजाम होता है. मुझे बिलकुल नहीं पता कि उस का किस ने, क्यों और कैसे कत्ल किया?’’

‘‘क्या तुम 9 मई यानी कत्ल वाली रात मकतूल के फ्लैट पर उस से मिलने नहीं गए थे?’’

‘‘रात को नहीं, शाम 7 बजे 5 मिनट के लिए मैं उस के फ्लैट पर उस की अमानत लौटाने गया था. वह अमानत क्या थी, यह मैं बताना नहीं चाहता.’’

इस्तेगासा वकील ने 2-4 सवाल और पूछ कर अपनी जिरह खत्म कर दी.

अब मेरी बारी थी. मुझे इस तरह से सवाल करने थे कि कादिर अली की बेगुनाही साबित हो जाए. मैं ने पूछा, ‘‘आप की शादी को कितना अरसा हुआ होगा, क्या आप दोनों में शुरू से ही अनबन थी?’’

‘‘मेरी शादी को 16 साल हो गए हैं. शुरू में तो सब ठीक रहा. इधर 2, ढाई साल से लुबना के व्यवहार में बदलाव आना शुरू हुआ था. वह मुझ से दूर रहने लगी थी और ज्यादा से ज्यादा समय घर से बाहर गुजारने लगी थी. उस ने मेकअप आर्टिस्ट की हैसियत से एक आर्ट एकेडमी जौइन कर ली.’’

‘‘कैसी आर्ट एकेडमी, क्या इस में आप की मरजी शामिल थी?’’

‘‘वह आर्ट एकेडमी ऐक्टिंग, मौडलिंग, संगीत आदि की ट्रेनिंग दे कर शौकीन लोगों को अदाकार बनाती है. उस का नाम है परफौरमैंस. लुबना ‘परफौरमैंस’ में मेकअप आर्टिस्ट के रूप में काम करने लगी थी. जबकि यह मुझे बिलकुल पसंद नहीं था. पर उस की लगातार जिद के आगे मैं मजबूर था.

इस की वजह यह थी कि मै ंने सुन रखा था कि ऐसी जगहों पर बहुत ज्यादा आजादी और बेशरमी होती है, वहां सारे गलत काम होते हैं. काश मैं ने इजाजत न दी होती.’’

‘‘क्या यह वही एकेडमी है, जिस का मालिक जमाल बेरी है?’’

‘‘जी हां, परफौरमैंस का मालिक जमाल ही है.’’

‘‘इस का मतलब यह हुआ कि लुबना का अफेयर अपने बौस से चल रहा था और आप से तलाक के बाद उस ने उस से मंगनी कर ली थी.’’

‘‘जी हां, परफौरमैंस की नौकरी के बाद ही लुबना बदल गई और मेरी जिंदगी में यह तबाही आई.’’

‘‘दोनों शादी करते, उस के पहले ही लुबना का कत्ल हो गया. अब मैं कुछ निजी सवाल पूछना चाहता हूं, जो बहुत जरूरी हैं, आप उन पर माइंड मत कीजिएगा. मकतूल और जमाल के अफेयर के बारे में आप को पता था?’’

‘‘नहीं, यह मुझे बहुत बाद में तब पता चला कि जब वह तलाक के लिए ड्रामा करने लगी यह सारी चाल जमाल के लिए चली गई थी.’’

‘‘क्या लुबना रात को देर से घर आती थी?’’

‘‘वह अकसर एकेडमी से रात को घर आती थी. मैं ने बहुत समझाया, लेकिन उस पर कोई असर नहीं हुआ. मैं ने उसे एकेडमी छोड़ने को कहा तो उस ने साफ मना कर दिया. इधर वह मेरी कोई बात नहीं मानती थी.’’

‘‘इस का मतलब मकतूल आप को शौहर नहीं मानती थी? आप ने उसे सख्ती से नहीं रोका?’’

‘‘कैसे रोकता? उस ने मुझे धमकी दी कि अगर ज्यादा रोकटोक की तो वह आर्ट एकेडमी में ही रहने लगेगी. उस समय मेरी बेटी भी मां की हमदर्द थी.’’

‘‘क्या आप अपनी बीवी की धमकी से डर गए थे?’’

‘‘जी, मैं शरीफ आदमी हूं. ऐसे हथकंडों से डर गया था. वैसे भी हम अजनबियों की तरह एक छत के नीचे रह रहे थे.’’

‘‘क्या आप दोनों के बीच मियांबीवी वाला रिश्ता नहीं रह गया था? जहां तक मुझे जानकारी है कि आप दोनों के बैडरूम अलगअलग थे?’’

‘‘आप ठीक कह रहे हैं. हमारे बीच मियांबीवी वाला रिश्ता खत्म हो चुका था. 2, ढाई साल से हमारे बैडरूम भी अलगअलग थे. लुबना मुझे शौहर नहीं मानती थी. मैं ने कभी उस के करीब जाना चाहा तो उस ने बेरुखी से झिड़क दिया. अब उसे मेरी निकटता की कोई जरूरत नहीं रह गई थी. हमारे बीच प्यारमोहब्बत का कोई रिश्ता नहीं बचा था. उस ने साफ कह दिया था कि वह मुझ से नफरत करती है. गुस्सा तो मुझे बहुत आता था, लेकिन बेटी की वजह से मैं खामोश रहता था. मैं उसे तलाक दे कर आजाद नहीं छोड़ना चाहता था.’’

‘‘फिर ऐसा क्य हुआ कि आप ने उसे तलाक दे दिया?’’

‘‘लुबना ने परफौरमैंस एकेडमी में स्टार बनने आई एक लड़की रशना को हमारे घर में केयरटेकर के रूप में रखवा दिया. रशना काफी खूबसूरत और जवान थी. पर वह उन लोगों में से थी, जो अपनी मंजिल पाने के लिए कुछ भी कर सकते हैं.

‘‘लुबना ने शायद उस से कहा था कि अगर वह कुछ दिनों तक उस के घर पर काम करेगी तो वह उसे स्टार बना देगी. यह मुझे बाद में पता चला कि लुबना उसे अपना ‘खास मकसद’ पूरा करने के लिए योजना बना कर हमारे घर लाई थी.

‘‘यह सब मुझे पता नहीं था. मैं तो उसे केयरटेकर ही समझता रहा. खैर मैं उसे रखने के सख्त खिलाफ था, लेकिन लुबना का कहना था कि वह एकेडमी में बहुत मसरूफ रहती है, इसलिए घर की देखभाल के लिए किसी का होना जरूरी है. उस ने जिद कर के रशना को रखवाया था.’’

मैं ने देखा, जज बड़ी दिलचस्पी से कादिर अली की बरबादी की दास्तान सुन रहे थे. इस्तेगासा वकील भी औब्जेक्शन कहना भूल सा गया था. अदालत में भी खामेशी और उत्सुकता थी.

कादिर अली ने बात आगे बढ़ाई, ‘‘रशना 25 साल की खूबसूरत व स्मार्ट लड़की थी, वह कपड़े भी स्टाइल वाले पहनती थी. लुबना ने उसे मेकअप करने में भी एक्सपर्ट कर दिया था. वह लुबना द्वारा तैयार की गई स्क्रिप्ट के अनुसार कदमदरकदम बढ़ रही थी. उसे आए महीना भी नहीं गुजरा था कि एक दिन वह अपने मकसद में कामयाब हो गई.

‘‘लुबना ने जानबूझ कर आरिफा को अपनी बहन के घर भेज दिया था. उस रात मैं और रशना घर में अकेले थे. लुबना एकेडमी से लौटी नहीं थी. रशना ने आकर्षित करने वाला खुला लिबास पहना था और जानबूझ कर वह बारबार मेरे करीब आने की कोशिश कर रही थी. मैं भी इंसान हूं, कोई फरिश्ता नहीं. बीवी के साथ को तरसा हुआ था. जब एक भूखे इंसान के सामने सजीसजाई थाली रख दी जाए तो वह कहां तक खुद को रोकेगा? उसे लालच आ ही जाएगा.’’

‘‘आप सही कह रहे हैं, एक तो आप अपनी बीवी की बेरुखी के सताए थे, दूसरी तरफ प्यार भरे इसरार पर आप का फिसलना कुदरती था.’’ मैं ने उसे स्पोर्ट किया.

‘‘लुबना ने मुझे बदनाम व रुसवा करने का पूरा मंसूबा बना लिया था. वह हम दोनों को रंगेहाथों पकड़ना चाहती थी. संयोग था कि मैं उस दलदल में फंसने से बच गया. वह मेरे एकदम करीब आ गई थी, लेकिन अचानक मेरा जमीर जाग उठा, मैं ने जैसे ही झटके से उस से अलग हुआ, उसी समय लुबना चुपके से आ कर चीखनेचिल्लाने लगी.

‘‘हम दोनों बुरी तरह से बौखला उठे. बाद में पता चला कि रशना का बौखलाना भी ऐक्टिंग था. वह लुबना के पास जा कर कहने लगी, ‘‘साहब मुझ से जबरदस्ती कर रहे थे. सही वक्त पर आ कर आप ने मुझे बचा लिया?’’

लुबना ने फटाफट फोन कर के 6-7 लोगों को बुला लिया. आने वालों में उस की बहनें, आरिफा, एकेडमी का उस का असिस्टैंट उबेद जामी और रशना का बूढ़ा शराबी बाप भी शामिल था. लुबना चीखचीख कर कह रही थी, ‘‘मैं ऐसे चरित्रहीन आदमी के साथ कतई नहीं रह सकती. मुझे अभी तलाक चाहिए.’’

‘‘उस के साथ अन्य लोग भी मुझे ही बुराभला कहने लगे. मैं लुबना के खेल को समझ गया था, इसलिए मैं ने उसे उसी समय तलाक दे दिया. मेरी बेटी आरिफा भी मां की चाल समझ गई थी, क्योंकि रशना को उस ने जिद कर के घर में रखवाया था, इसलिए आरिफा ने भी मेरे साथ रहने का फैसला किया.’’

‘‘तो यह है आप की दुखभरी कहानी, जिस ने आप की जिंदगी बरबाद कर दी. लुबना को आप ने तलाक दे दिया, आरिफा आप के साथ रहने लगी, लेकिन रशना का क्या हुआ?’’ मैं ने पूछा.

‘‘मैं ने उसे उसी समय घर से निकाल दिया. अब वह कहां है, मुझे मालूम नहीं.’’

मेरे सवालों से सारा मामला अदालत के सामने आ गया था. रशना के उस शर्मनाक ड्रामे में जमाल और लुबना की मिलीभगत थी, जिस की स्क्रिप्ट जमाल ने लिखी थी और डायरेक्शन लुबना का था.

मैं ने जिरह आगे बढ़ाई, ‘‘कादिर अली साहब, आप ने जनवरी में लुबना को तलाक दिया, उस के एक, डेढ़ महीने बाद ही उस ने मंगनी कर ली. मई में उस का कत्ल हो गया. इस से एक बात यह सामने आती है कि कोई ऐसा था, जो लुबना और जमाल की शादी से खुश नहीं था या वह खुद लुबना में रुचि ले रहा था. मंगनी के बाद उस ने नाराज हो कर उस का कत्ल कर दिया. यह सब तलाश करना पुलिस और अदालत का काम है.

‘‘आप ने इस्तेगासा की जिरह में बताया था कि आप कत्ल की शाम लुबना को उस की अमानत लौटाने गए थे. क्या आप उस के फ्लैट पर गए थे, जहां वह आप से अलग होने के बाद रह रही थी? वह फ्लैट जमाल बेरी का है, जहां वह अकसर लुबना से मिलने आया करता था. आप मुझे यह बताइए कि आप उस की कौन सी अमानत लौटाने गए थे?’’

‘‘वकील साहब, आप पूछ रहे हैं तो मुझे बताना ही पड़ेगा. एक दिन मैं सफाई कर रहा था तो मुझे मेज की दराज से एक ब्राउन रंग का लिफाफा मिला, जिस में लुबना के कुछ कागजात थे. साथ ही 20 हजार रुपए का एक क्रौस किया चेक था, जो मैं ने ही लुबना को एक बार दिया था. मै ंने यह बात आरिफा को बताई तो उस ने कहा कि वह ब्राउन लिफाफा चेक समेत लुबना तक पहुंचा देना चाहिए. इसलिए मैं उस शाम आरिफा और उस की दोस्त सबा के साथ लुबना के फ्लैट पर गया और उसे लिफाफा दे कर 5 मिनट में लौट आया.’’

‘‘क्या आरिफा और उस की दोस्त भी तुम्हारे साथ लुबना के फ्लैट पर गई थीं?’’

‘‘नहीं, आरिफा और उस की दोस्त नीचे गाड़ी में बैठी थीं. मैं नहीं चाहता था कि मांबेटी का सामना हो, इसलिए मैं उसे साथ नहीं ले गया था.’’

‘‘क्या आप वहां से सीधे घर आ गए थे?’’

‘‘नहीं, दरअसल उस दिन रौयल होटल में पैंटिंग्स की नुमाइश लगी थी. मेरी बेटी आरिफा और उस की दोस्त सबा फाइन आर्ट की उस एग्जीविशन को देखना चाहती थीं, जिस का टाइम 7 से 10 बजे तक था.

चूंकि समय हो चुका था, इसलिए मैं फटाफट लुबना को लिफाफा दे कर नीचे आ गया और आरिफा तथा सबा को ले कर रौयल होटल चला गया. 7 बज कर 20 मिनट पर मैं होटल पहुंच गया था.’’

‘‘नुमाइश का समय 7 बजे से 10 बजे तक था. आप उन दोनों को छोड़ कर वापस आ गए होंगे?’’

‘‘नहीं साहब, उन की जिद पर मुझे भी उन के साथ पैंटिंग्स की एग्जीविशन देखनी पड़ी थी?’’

‘‘इस का मतलब आप वारदात के दिन शाम सवा सात बजे से 10 बजे तक रौयल होटल में नुमाइश देख रहे थे?’’

‘‘जी जनाब, उस दिन 7 बज कर 20 मिनट से रात 10 बजे तक मैं नुमाइश देखता रहा.’’

इस का मतलब उस दिन आप लुबना के फ्लैट से काफी दूर होटल रौयल में नुमाइश में थे?

‘‘जी जनाब.’’

इस के बाद मैं ने जिरह खत्म कर दी. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, लुबना का कत्ल 9 मई को रात 8 से 9 बजे के बीच हुआ था. जबकि उस वक्त मेरा क्लाइंट घटनास्थल से काफी दूर होटल रौयल में था. इसलिए वह कत्ल नहीं कर सकता था. एक हिसाब से केस यहीं खत्म हो जाना चाहिए था, पर अभी कई सवाल बाकी थे. इस्तेगासा का पहला गवाह अमजद था. उस की फ्लैट के सामने दरजी की दुकान थी. उस ने अपने बयान में कहा कि उस ने मुलजिम को मकतूल के फ्लैट में जाते और निकलते देखा था. 1-2 सवाल पूछ कर इस्तेगासा वकील ने अपनी जिरह खत्म कर दी.

अपनी बारी पर मैं ने उस से पूछा, ‘‘आप की दुकान मकतूल के फ्लैट के काफी करीब है, जैसा आप ने कहा है. क्या आप मकतूल और उस के मुलाकातियों को जानते थे?’’

‘‘मकतूल 3-4 महीने पहले ही वहां रहने आई थी. 1-2 बार वह मेरी दुकान पर भी आई थी. उन के मुलाकातियों में जमाल साहब को ही मैं ने देखा था.’’

‘‘क्या आप जमाल को जानते हैं?’’

‘‘जी, क्योंकि उस फ्लैट के मालिक वही हैं.’’

‘‘वारदात के दिन छुट्टी थी. सभी दुकानें बंद थी, फिर आप की दुकान कैसे खुली थी?’’

‘‘मुझे इमरजेंसी में शादी के कपड़े देने थे.’’

‘‘आप ने मुलजिम को बिल्डिंग में जाते देखा था, पर यह कैसे कह सकते हैं कि वह मकतूल के फ्लैट में ही गया था? क्या आप ने उस का पीछा किया था?’’

‘‘नहीं, मैं ने पीछा नहीं किया था. सभी कह रहे हैं कि वह मकतूल के फ्लैट में गया था, इसलिए मैं भी कह रहा हूं.’’

‘‘मैं सब की बात नहीं, आप की बात कर रहा हूं. आप को कैसे पता चला कि वह मकतूल के फ्लैट गया था?’’

‘‘मुझे यह बात जमाल बेरी साहब ने बताई थी कि मुलजिम का नाम कादिर अली है और वह मकतूल से मिलने उस के फ्लैट पर आया था.’’

‘‘यह बात जमाल ने आप को कब बताई थी?’’

‘‘वारदात वाले दिन रात साढ़े 10 बजे. वह आए और फ्लैट में गए. घबरा कर वापस आए और मुझे बताया कि लुबना को किसी ने खंजर घोंप कर मार दिया है. इस के बाद कादिर अली का हुलिया और गाड़ी की पहचान बता कर पूछा कि इस तरह का कोई आदमी तो नहीं आया था? मैं ने ‘हां’ कहा तो उन्होंने कहा कि उसी कादिर अली ने लुबना का कत्ल कर दिया है.’’

उस ने इस बात को माना कि जमाल ने उसे तफ्सील से बताया तो उस ने ‘हां’ कहा था. अगली पेशी पर मामले की जांच करने वाला अफसर फजल शाह था. मैं ने पूछा, ‘‘आप को वारदात की खबर कब और किस ने दी थी?’’

‘‘मुझे जमाल बेरी ने रात 11 बजे वारदात की खबर दी थी. इस के बाद मैं करीब पौने 12 बजे मकतूल के फ्लैट पर पहुंचा था.’’

‘‘उस समय जमाल वेरी फ्लैट पर मौजूद था?’’

‘‘जी हां, जमाल वहां मौजूद था और उस ने टेलर अमजद को भी रोक रखा था.’’

‘‘क्या यह सच है कि जमाल ने ही आप से कहा था कि कादिर अली ने ही यह हत्या की है?’’

‘‘जी हां, जमाल ने ही कादिर अली की तरफ इशारा किया था. फिर मैं ने अमजद का बयान लिया. उस ने भी कहा कि कादिर अली को मकतूल के फ्लैट में जाते उस ने देखा था. टाइम का सही अंदाजा उसे नहीं था.’’

‘‘क्या आप यह बताना चाहेंगे कि जमाल बेरी ने यह कैसे तय कर लिया कि कत्ल कादिर अली ने ही किया था, क्या उस के पास कोई ठोस सबूत था?’’

‘‘जी हां, मकतूल के पास एक ब्राउन लिफाफा रखा मिला था, जिस में कादिर अली का दिया 20 हजार का चेक था.’’

‘‘यह वही लिफाफा तो नहीं, जिस की जिक्र मेरी जिरह में आ गया है?’’

‘‘जी हां, वह वही लिफाफा था.’’

‘‘जब आप वहां पहुंचे तो आप ने क्या देखा?’’

‘‘मकतूल बिस्तर पर मरी पड़ी थी. उस के सीने में खंजर घोंपा हुआ था. लगता था, उस ने बचने के लिए कोई संघर्ष नहीं किया था. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार उस ने नशे की कोई दवा ली थी. सब चीजें अपनी जगह पर सुरक्षित थीं.’’

‘‘खंजर पर फिंगरप्रिंट मिले थे?’’

‘‘नहीं, मुलजिम ने चालाकी से प्रिंट साफ कर दिए थे.’’

‘‘कमरे के किसी हिस्से में भी मुलजिम के फिंगरप्रिंट नहीं मिले?’’

‘‘जी नहीं, कमरे में कहीं अंगुलियों के निशान नहीं मिले.’’

‘‘क्या कमाल की बात है. मुलजिम के पास इतना समय था कि अंगुलियों के निशान साफ कर वह समय पर रौयल होटल भी पहुंच गया.’’

‘‘हो सकता है, आप का क्लाइंट झूठ बोल रहा हो? वह वहां ज्यादा देर रुका हो.’’

‘‘एक बात सोच कर बताइए, आप के सामने मुलजिम ने दुखभरी कहानी सुना दी, सारे हालात बता दिए कि किस वजह से किस परिस्थिति में तलाक हुआ. क्या इस सब के बाद भी आप यह उम्मीद करते हैं कि मकतूल फ्लैट का दरवाजा खोल कर मुलजिम को अपने बैडरूम में ले जाएगी. जिस से वह सख्त नफरत करती थी, कभी नहीं ले जाएगी न? इस का मतलब साफ है कि जिस ने मकतूल का कत्ल किया है, वह उस का भरोसे का आदमी था. वह उसे तनहाई में अपने बैडरूम में ले गई. मेरा मुवक्किल वह आदमी नहीं हो सकता. आप क्या कहते हैं?’’

‘‘तो फिर ऐसा शख्स कौन हो सकता है?’’

‘‘यह पता लगाना आप का काम है, मेरा काम खत्म हुआ.’’

अगली पेशी पर विटनेस बौक्स में मकतूल का मंगेतर आर्ट एकेडमी का मालिक जमाल बेरी था.

इस्तगासा वकील की जिरह में कोई खास बात निकल कर सामने नहीं आई. जमाल बेरी ने जो बातें अपने बयान में कही थीं, वही रिपीट हुईं. उस के बाद मैं ने जिरह शुरू की. पहले मैं ने उस की मंगेतर की मौत पर दुख का इजहार किया. उस के बाद पूछा, ‘‘आप ने परफौरमैंस एकेडमी खोलने से पहले इस का कोई कोर्स किया था?’’

‘‘मैं ने कोई कोर्स तो नहीं किया, पर मैं स्टेज करता था और इस का तजुर्बा रखता हूं.’’

‘‘यानी आप के पास अच्छी तालीम है, क्या आप दीन, खुदा और रसूल पर भी यकीन रखते हैं?’’

‘‘हां खुदा रसूल पर पूरा यकीन रखता हूं.’’

‘‘इस के बावजूद आप ने मुलजिम की अच्छीभली शादीशुदा जिंदगी में दरार पैदा कर दी और उस की बीवी से ऐसी मोहब्बत बढ़ाई कि उन के बीच लड़ाईझगड़े करवा कर रशना वाली साजिश रच कर लुबना का तलाक करवा दिया. यही नहीं, एक बेगुनाह इंसान पर झूठे इलजाम लगवा दिए. ये बातें खुदा को सख्त नापसंद है. आप ने किसी का घर उजाड़ कर गुनाह नहीं किया?’’

‘‘मैं क्या कर सकता था. लुबना मुझ से बहुत ज्यादा मोहब्बत करती थी. मैं भी उसे चाहने लगा था. मोहब्बत में अंधे हो कर यह सब होता गया. वह मुझ से जल्द शादी करना चाहती थी और मकतूल की मुजरिम से जान छुड़ाने के लिए यह सब करना जरूरी था.’’

परेशानी और शर्मिंदगी उस के चेहरे पर साफ झलक रही थी. वह काफी स्मार्ट और शानदार पर्सनाल्टी का मालिक था. मैं ने जिरह आगे बढ़ाई, ‘‘जमाल साहब, वारदात के दिन आप मकतूल के पास कब पहुंचे थे?’’

‘‘रात के करीब साढ़े 10 बजे मैं वहां पहुंचा था.’’

‘‘जब आप मकतूल के फ्लैट पर पहुंचे तो क्या हुआ था, क्या आप ने डोरबैल बजाई थी?’’

‘‘मैं ने डोरबैल बजाई, पर कोई नतीजा नहीं निकला. उस के बाद मैं ने हैंडल घुमाया तो दरवाजा खुल गया.’’

‘‘आप ने अंदर दाखिल हो कर आवाज दी होगी, जवाब न मिलने पर आप परेशान हो कर बैडरूम में गए होंगे, जहां वह अपने बैड पर मरी पड़ी थी, ऐसा ही हुआ था न?’’

‘‘जी हां, ऐसा ही हुआ था.’’

‘‘जब आप वहां पहुंचे थे तो आप की मंगेतर को मरे डेढ़, 2 घंटे हो चुके थे. इस का मतलब साफ है कि आप कातिल नहीं हैं? अब मैं मुलजिम की बेगुनाही की तरफ आता हूं. वारदात वाले दिन शाम 7 बजे मुलजिम मकतूल के फ्लैट पर ब्राउन लिफाफा देने गया था, जिस में एक चैक भी था. यह ब्राउन लिफाफा वही है, जिस की वजह से मुलाजिम पर कातिल होने का शक किया जा रहा है? आप ने टेलर अमजद से पूछताछ की और पुलिस के आने पर आप ने कादिर अली को कातिल की तरह पेश कर दिया. मैं गलत तो नहीं कह रहा?’’

‘‘नहीं, आप ठीक कह रहे हैं, हालात ऐसे ही पेश आए थे. मुझे यही लगा था.’’

‘‘आप एक आर्ट एकेडमी चला रहे हैं तो आप को रौयल होटल में होने वाली आर्ट एग्जीबिशन के बारे में पता ही रहा होगा?’’

‘‘जी हां, मुझे इन्वीटेशन भी मिला था, पर मेरा डिनर मकतूल के साथ तय था, इसलिए मैं वहां नहीं जा सका.’’

‘‘मुलजिम अपनी बेटी आरिफा और उस की दोस्त सबा के साथ शाम साढ़े 7 बजे से साढ़े 10 बजे तक एग्जीबिशन में था. एक मशहूर आर्टिस्ट शाहिद निजामी पूरे वक्त उस के साथ थे. वह उस की वहां मौजूदगी के गवाह हैं. जरूरत पड़ने पर उन्हें गवाही के लिए बुलाया जा सकता है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक मकतूल का कत्ल 8 बजे और 9 बजे के बीच हुआ था. इस अरसे मेरा मुवक्किल नुमाइश में था, इसलिए यह कहना बेवकूफी है कि उस ने मकतूल का कत्ल किया है.’’

‘‘अगर उस ने कत्ल नहीं किया तो कातिल कौन हो सकता है?’’ जमाल ने उलझ कर पूछा.

‘‘आप का जवाब देने से पहले मैं इस केस के इंक्वायरी अफसर से सवाल करना चाहूंगा.’’

जज ने फौरन इजाजत दे दी. मैं ने आईओ से पूछा, ‘‘आप ने वारदात की जगह से जो फिंगरप्रिंट्स उठाए हैं, उस का रिकौर्ड आप के पास होगा? आप यह बताएं कि वहां किनकिन लोगों के निशान आप को मिले हैं?’’

‘‘हम ने 3 लोगों के फिंगरप्रिंट्स उठाए हैं. एक मकतूल लुबना, दूसरे उस के मंगेतर जमाल और तीसरे के बारे में कुछ पता नहीं चल सका है.’’ उस ने शर्मिंदगी से कहा.

‘‘मैं दावे से कह सकता हूं कि तीसरे नंबर के फिंगरप्रिंट्स जिन का पता नहीं चल सका, वह कातिल के हैं और कातिल तक मि. जमाल पहुंचाएंगे.’’

‘‘मैं… मैं कैसे?’’ वह हकलाया.

मैं ने जमाल से पूछा, ‘‘मि. जमाल, क्या आप किसी ऐसी लड़की या औरत के बारे में जानते हैं, जो आप से शादी करना चाहती है?’’

‘‘मेरी नजर में ऐसी कोई लड़की नहीं है.’’

‘‘कोई ऐसा शख्स है, जो मकतूल को बहुत पसंद करता था और उस से शादी करना चाहता था? एकेडमी में कोई ऐसा है, जिस की मकतूल से दोस्ती थी?’’

‘‘मेरी जानकारी में बस उबेद ऐसा शख्स है, जिस की लुबना से अच्छी बनती थी. उस वक्त लुबना से मेरी मंगनी नहीं हुई थी. मैं कैसे ऐतराज कर सकता था?’’

‘‘आप की मंगनी पर उस का क्या रिएक्शन था?’’

‘‘मेरी मंगनी के बाद वह एकदम बुझ सा गया था.’’

‘‘इस का मतलब मंगनी से उसे दुख पहुंचा था?’’

‘‘हो सकता है.’’

‘‘क्या यह वही उबेद है, जिसे लुबना ने रशना वाले ड्रामे के दिन फोन कर के घर बुलाया था?’’

‘‘जी हां, वही है. लौट कर उस ने मुझे बताया था कि काम हो गया.’’

‘‘यानी मुलजिम ने मकतूल को तलाक दे दिया?’’

‘‘जी हां, उस का यही मतलब था.’’

मैं ने अपना रुख जज की तरफ कर के कहा, ‘‘जनाब, अब तक की अदालती काररवाही मेरे मुवक्किल को बेगुनाह साबित करने को काफी है. फिर भी अदालत को निर्णय लेने में आसानी हो, मैं अगली पेशी पर मुलजिम की बेटी आरिफा उस की दोस्त सबा और आर्टिस्ट शाहिद निजामी को गवाही में पेश करूगा. आईओ साहब से रिक्वेस्ट है कि वह उबेद जामी के फिंगरप्रिंट्स जल्द हासिल कर के तीसरे नामालूम फिंगरप्रिंट्स से मिलाएं तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा?’’

जज ने आईओ और पुलिस को हिदायत दी कि उबेद को शामिल तफतीश किया जाए और अगली पेशी पर उसे हाजिर किया जाए. पुलिस ने बड़ी मुस्तैदी से उसी दिन उबेद को शामिल तफतीश कर के उस के फिंगरप्रिंट्स तीसरे नंबर के नामालूम फिंगरप्रिंट्स से मिलाए तो सारा मामला साफ हो गया. फिंगरप्रिंट्स के नमूने से उबेद के फिंगरप्रिंट्स मैच हो गए. पहले तो उबेद पुलिस को इधरउधर घुमाता रहा, जुर्म से इनकार करता रहा, पर जब पुलिस ने हाथ कड़े किए तो उस ने सच उगल दिया.

उबेद ने इकरारे जुर्म कर लिया कि लुबना को उसी ने सीने में खंजर घोंप कर मौत की नींद सुलाया था. यह कत्ल उस ने दास्ताने पहन कर किया था, इसलिए खंजर पर फिंगरप्रिंट नहीं आए थे. दूसरी जगहों पर फिंगर प्रिंट्स पाए गए थे. उबेद के बयान के मुताबिक, लुबना डबल गेम खेल रही थी. पहले तो वह उबेद से हंसतीबोलती रही, उस से दोस्ती बढ़ाती रही. जब उबेद उस की मोहब्बत में डूब गया तो जमाल को अपनी ओर आकर्षित देख कर वह उस की तरफ मुड़ गई. वह एकेडमी का मालिक था और उबेद से ज्यादा स्मार्ट था. मगर वह उबेद का सब्जबाग दिखाती रही. दोनों अपनीअपनी जगह पर लुबना को माशूका पा कर खुश थे. वह बारीबारी दोनों को खुश करती रही. दोनों यही समझते रहे कि वह बस उस के साथ सीरियस है.

अपने शौहर यानी कादिर अली से तलाक हासिल करने के बाद उस ने खुल्लमखुल्ला अपना फैसला जमाल के हक में दे दिया और उस के दिए हुए फ्लैट में रहने लगी. बाद में उस से मंगनी भी कर ली. उबेद को दुख भी हुआ और गुस्सा भी आया कि वह उसे इतने दिनों तक उल्लू बनाती रही. उस ने पुलिस को बयान देते हुए कहा, ‘‘मैं मोहब्बत में अपनी यह हार बिलकुल बरदाश्त नहीं कर पाया. वह मुझ से बड़ा प्यार जताती थी. मैं ने उल्लू बन कर उसे महंगेमहंगे तोहफे दिए थे. उस का धोखा मेरे दिल को लग गया. मैं ने तय कर लिया कि मैं बदला जरूर लूंगा.

‘‘मैं ने उसे बुझे दिल से मंगनी की मुबारकबाद दी. फिर कुछ दिन गुजरने के बाद मैं ने लुबना से रिक्वैस्ट की कि अपनी मोहब्बत मैं भूल जाऊंगा, बस वह एक घंटा तनहाई में मेरे साथ गुजारे. इस के बाद मैं उन की जिंदगी से दूर हो जाऊंगा. उसे पुरानी मोहब्बत का वास्ता दिया तो वह मान गई. हम ने जिंदगी के बहुत सारे रंगीन लम्हे साथ बिताए थे. उन्हीं की यादों को ताजा करते हुए उस ने मेरी बात मान ली.’’

आईओ ने पूछा, ‘‘तो तुम ने एक खास मकसद के लिए उस से मुलाकात की और चुपचाप वापस चले आए. यह नशे का क्या मामला था?’’

‘‘वारदात वाले दिन लुबना ने 8 बजे बुलाया था. और यह जता दिया था कि 9 बजे के पहले चले जाना होगा. मैं पूरी तैयारी के साथ उस के फ्लैट पर ठीक 8 बजे पहुंच गया. उस ने मेरे लिए चाय बनाई. मैं ने नजर बचा कर उस की चाय में नींद की गोलियां डाल दीं. चाय पी कर वह सिरदर्द की शिकायत करने लगी. मैं ने उसे सहारा दे कर उस के बैडरूम में ले जा कर बैड पर लिटा दिया. मेरी दी हुई दवा ने असर दिखाना शुरू कर दिया था. वह अपने होश में नहीं रही तो मैं ने अपने लिबास में छिपाया खंजर निकाला और दास्ताने पहन कर खंजर का घातक वार उस दगाबाज औरत के सीने पर कर दिया.’’

उबेद अपने जुर्म, अपने बदले की दास्तान सुना रहा था. उस के एकएक लफ्ज में नफरत की चिनगारियां निकल रही थीं, ‘‘वह बेवफा औरत इसी लायक थी. ऐसी दगाबाज औरतें ऐसे ही अंजाम की हकदार होती हैं. मुझे अपने किए पर कोई दुख, कोई पछतावा नहीं है. बस दुख इस बात का है कि मैं पकड़ा गया. हालांकि चाय के खाली कप मैं अपने साथ ले गया था, ताकि पुलिस को मुझ तक पहुंचने का कोई सुराग न मिले. लेकिन मेरी बदनसीबी की मैं पकड़ा गया.’’

उबेद के इकबाले जुर्म के बाद मेरे मुवक्किल की बेगुनाही पक्की हो गई और अगली पेशी पर आरिफा, सबा व शाहिद निजामी की गवाही के बाद कादिर अली बाइज्जत बरी हो गया. True Crime Story

 

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