Hindi Crime Story: प्रेमलता की अच्छीभली गृहस्थी थी, सरकारी नौकरी वाला पति था. लेकिन बबलू के प्यार और महत्त्वाकांक्षा में वह कुछ इस तरह उलझी कि अपने ही हाथों सुहाग उजाड़ कर गृहस्थी बरबाद कर दी.

अभी सुबह का उजाला भी ठीक से फैला नहीं था कि मैनपुरी कोतवाली के गेट से एक महिला अंदर घुसी. वह काफी अस्तव्यस्त और घबराई हुई लग रही थी,

इसलिए ड्यूटी पर तैनात संतरी ने आगे बढ़ कर पूछा, ‘‘कहो, कैसे आई?’’

‘‘साहब से मिलना है.’’

‘‘क्यों, क्या परेशानी है?’’ संतरी ने पूछा.

संतरी का इतना कहना था कि महिला रोने लगी. संतरी ने उसे चुप कराते हुए कहा, ‘‘साहब तो अभी आए नहीं हैं. तुम अपनी परेशानी बताओ. अगर कोई ज्यादा परेशानी वाली बात होगी तो मैं साहब से जा कर बता दूंगा.’’

‘‘मेरे पति ने रात में आत्महत्या कर ली है. उन की लाश घर में पड़ी है.’’ महिला ने सिसकते हुए कहा.

इस के बाद संतरी महिला को ड्यूटी पर तैनात मुंशी के पास ले गया और उसे पूरी बात बताई. मामला गंभीर था, इसलिए मुंशी ने संतरी से कोतवाली प्रभारी को सूचना देने के लिए कहा.

सूचना पा कर कुछ ही देर में कोतवाली प्रभारी मनोहर सिंह यादव आ गए. उन्होंने महिला को अपने कक्ष में बुला कर पूछा, ‘‘क्या नाम है तुम्हारा?’’

‘‘जी प्रेमलता, घर में सब पिंकी कहते हैं.’’

‘‘कहां से आई हो?’’

‘‘नगला कीरत से. वहीं अपने पति और बच्चों के साथ रहती थी.’’

‘‘पति का क्या नाम था?’’

‘‘गवेंद्र सिंह उर्फ नीलू.’’

‘‘बच्चे कितने हैं?’’

‘‘2, बेटा 8 साल का और बेटी 5 साल की है.’’

प्रेमलता जिस तरह टकरटकर मनोहर सिंह के सवालों का जवाब दे रही थी, उस से उन्हें उस पर संदेह हुआ. जिस औरत का पति मरा हो, वह इस तरह कतई बातें नहीं कर सकती. उन्होंने पूछा, ‘‘यह सब हुआ कैसे?’’

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