Indore True Crime . पत्नी और सासससुर ने अशोक गाठे के खिलाफ जो काररवाई की थी, उस के बदले में एक सिपाही हो कर अशोक गाठे ने जो किया, क्या वह ठीक था 

मध्य प्रदेश के शहर इंदौर की कृष्णाबाग कालोनी के रहने वाले मंशाराम पगारे सुबहसुबह घर के बाहर कुर्सी पर बैठे अखबार पढ़ रहे थे, तभी उन का दामाद सिपाही अशोक गाठे उन के सामने आ कर खड़ा हो गया. उन्होंने अखबार से नजर हटा कर उस की ओर देखा. वह पुलिसवर्दी में थ्रीनौटथ्री रायफल लिए खड़ा था. दुआसलाम किए बगैर ही अशोक ने थोड़ी तेज आवाज में पूछा, ‘‘वर्षा कहां है?’’

वर्षा मंशाराम पगारे की बड़ी बेटी थी, जिस की शादी उसी के साथ हुई थी. वह अपनी पत्नी के बारे में पूछ रहा था. लेकिन उस ने जिस तरह अकड़ कर पत्नी के बारे में पूछा था, उस से मंशाराम को उस का इरादा ठीक नहीं लगा. इस की एक वजह यह भी थी कि अशोक गाठे के संबंध पत्नी से ही नहीं, सासससुर से भी ठीक नहीं थे. इसीलिए मंशाराम ने दामाद के सवाल का कोई जवाब नहीं दिया.

ससुर के जवाब न देने पर अशोक गाठे को गुस्सा आ गया और उस ने रायफल की नाल मंशाराम पगारे की ओर घुमा कर गोली चला दी. अशोक गाठे द्वारा चलाई गई गोली मंशाराम पगारे के गाल को छू कर निकल गई. उन का चेहरा लहूलुहान हो गया और वह कुर्सी से गिर पड़े. उस समय सुबह के यही कोई साढ़े 6, 7 बज रहे थे.

उस समय मंशाराम पगारे की पत्नी गौराबाई चाय बना कर पति के लिए ला रही थीं. गोली चलने की आवाज सुन कर वह चाय का प्याला ले कर तेजी से बाहर आ गईं. पति को जमीन पर पड़ा देख कर वह घबरा गईं. लेकिन वह मामला समझ पातीं, उस के पहले ही अशोक गाठे ने उन पर लगातार 2 गोलियां दाग दीं. गोलियां लगते ही गौराबाई के हाथ से चाय का प्याला दूर जा गिरा और वह खुद जमीन पर गिर कर छटपटाने लगीं.

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