Gopinath Munde Death. गोपीनाथ मुंडे भाजपा के कद्दावर नेता ही नहीं बल्कि एक ऐसा चेहरा थे जो काफी हद तक स्वर्गीय प्रमोद महाजन की कमी पूरी कर रहे थे. भाजपा उन के नेतृत्व में महाराष्ट्र विधानसभा का चुनाव लड़ना चाहती थी, लेकिन उन की आकस्मिक मौत ने इस समीकरण को बदल दिया...  

26 मई, 2014 को नरेंद्र मोदी राष्ट्रपति भवन के खुले प्रांगण में राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी के समक्ष भारत के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ले चुके थे. उसी दिन उन के मंत्रीमंडल के 45 मंत्रियों ने भी शपथ ली. भाजपा और उन के समर्थकों में ही नहीं बल्कि देश भर में खुशी का माहौल था. अगले ही दिन सभी मंत्रियों को विभाग भी बांट दिए गए. महाराष्ट्र की बीड लोकसभा सीट से जीत कर आए महाराष्ट्र के लोकप्रिय नेता गोपीनाथ मुंडे को केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री बनाया गया था.

गोपीनाथ मुंडे प्रधानमंत्री द्वारा सौंपी गई जिम्मेदारी से खुश भी थे और उत्साहित भी. लेकिन केंद्र सरकार में ग्रामीण विकास मंत्री जैसा महत्वपूर्ण पद मिलने के बाद भी मुंडे अपनी पृष्ठभूमि को भूले नहीं थे. यही वजह थी कि जब उन्होंने मंत्री पद संभाला तो मंत्रालय के अधिकारियों और मीडियाकर्मियों से कहा, ‘‘मैं 400 लोगों की आबादी वाले गांव में पैदा हुआ, पला बढ़ा. मैं ने पंचायत से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की. मुझे खुशी है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुझे इस लायक समझ कर गांवों के उत्थान की जिम्मेदारी सौंपी. मैं जमीनी लोगों से जुड़ कर इस जिम्मेदारी का निर्वहन करना चाहता हूं, बस मुझे आप सब का साथ और सहयोग चाहिए.’’

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