Short love Story in Hindi: जानी जान का दुश्मन – क्या किया उमा के साथ

Short love Story in Hindi: राजवीर देखने में भले ही साधारण व्यक्ति था, लेकिन वह बातों का धनी था. अपनी लच्छेदार बातों से वह किसी का भी मन मोह लेता था. राजवीर मेवाराम की पत्नी उमा के खूबसूरत हुस्न का दीवाना था. उमा भी उस की जवांदिली पर लट्टू थी.

शाम का समय था. राजवीर घर आया तो उमा उस के लिए चाय बना लाई. चाय के साथ गरमागरम पकौड़े भी थे. पकौड़े राजवीर को बहुत पसंद हैं, यह बात उमा जानती थी. राजवीर चहक उठा, ‘‘भई वाह, ये हुई न बात.’’फिर एक पकौड़ा मुंह में रख कर स्वाद लेते हुए पूछ बैठा, ‘‘तुम मेरे दिल की बात कैसे जान गईं?’’
उमा मुसकराते हुए बोली, ‘‘जब हमारे दिल के साथसाथ शरीर भी एक हो चुके हैं तो दिल की बात एकदूसरे से कैसे छिपी रह सकती है.’’

‘‘वाकई तुम्हारी यह बात बिलकुल सही है. देखो, तुम्हारी चाय का रंग भी तुम्हारे रंग जैसा है. लगता है जैसे चाय में तुम ने अपने हुस्न का रंग मिला दिया हो. चाय का स्वाद भी तुम्हारे जैसा मीठा है. पकौड़े भी तुम्हारे जिस्म के अंगों की तरह गर्म और स्वादिष्ट है.’’अपने हुस्न की तारीफ का यह अंदाज उमा को अच्छा लगा. वह राजवीर से सट कर उस की आंखों में आंखें डाल कर बोली, ‘‘जो कुछ मेरे पास है, उस पर तुम्हारा ही तो अधिकार है.’’

राजवीर ने उस की दुखती रग को छेड़ते हुए कहा, ‘‘तुम्हारे खूबसूरत जिस्म पर तो तुम्हारे पति मेवाराम का सर्वाधिकार है. लोग भी उस के ही अधिकार को स्वीकृति देंगे.’’‘‘वह तो सिर्फ नाम का पति है. बीवी की जगह शराब की बोतल को सीने से लगाए घूमता है, मुझे बिस्तर पर तड़पने के लिए छोड़ देता है. वैसे भी शराब ने उस के शरीर को इतना खोखला कर दिया है कि उस में शबाब के उफनते तटबंधों की गरमी शांत करने का माद्दा नहीं बचा.’’‘‘तुम्हारी हसीन चाहतों की कसौटी पर मैं खरा उतरा हूं कि नहीं?’’ कह कर राजवीर ने उमा के दिल की बात जाननी चाही.

मन के भंवर में डूबी उमा के कानों में राजवीर की बात पहुंची तो एकाएक उस के चेहरे पर खुशी की लहर दौड़ गई, वह बोली, ‘‘तुम ने मेरे हुस्न की बगिया को अपने प्रेम की बरसात से ऐसा सींचा है कि रोमरोम खिल कर महकने लगा है. तुम्हारे जोश की तो मैं कायल हूं. तुम्हारे साथ आनंदलोक की यात्रा करना सुखद अहसास होता है. मैं तो सोचसोच कर ही रोमांचित हो जाती हूं.’’ उमा बेबाकी से कहती चली गई.
‘‘तो फिर चलें आनंदलोक की यात्रा पर…’’ राजवीर ने उमा के गले में हाथ डाल कर उसे अपने बदन से सटाते हुए कहा. इस पर उमा ने मुसकरा कर मूक सहमति दे दी.

राजवीर उमा के कपोलों को चूमने के साथसाथ उस के होंठों का भी रसपान करने लगा. उमा ने शरमा कर अपना मुंह उस के सीने में छिपा लिया. साथ ही उस ने राजवीर के गले में बांहों का हार डाल दिया. फिर दोनों एकदूसरे में समा गए. आनंदलोक की यात्रा पूरी कर के दोनों एकदूसरे से अलग हुए. उन के शरीर पसीने से लथपथ थे, लेकिन चेहरों पर संतुष्टि के भाव थे.

जिला हरदोई के थाना कोतवाली हरपालपुर के अंतर्गत एक गांव है कूड़ा नगरिया. मेवाराम अपने परिवार के साथ इसी गांव में रहता था. परिवार में पत्नी उमा और 5 बेटियों के अलावा 2 बेटे अश्विनी और अंकुर थे. मेवाराम के पास खेती की जमीन थी, जिस की आय से उस के परिवार का गुजारा हो जाता था.

मेवाराम भागवत कथा करने का भी काम करता था. उस के काम में उस के बड़े भाई सेवाराम भी साथ देते थे. धार्मिक कार्यों में रमे रहने की वजह से मेवाराम पत्नी की शारीरिक जरूरतों पर ध्यान नहीं दे पाता था. वैसे भी वह 50 साल से ऊपर का हो गया था. थोड़ाबहुत दमखम था भी तो उसे धीरेधीरे शराब पी रही थी.
दूसरी ओर 7 बच्चे पैदा करने के बाद भी उमा के बदन की आग अभी तक सुलग रही थी. 45 साल की उम्र में उस ने खुद को टिपटौप बना रखा था. उस की खूबसूरती अभी तक कहर ढाती थी.

शरीर की आग ठंडी न हो तो इंसान में चिड़चिड़ापन आ जाता है, उसे कुछ भी अच्छा नहीं लगता. उमा के साथ भी ऐसा ही था. ऐसे में उस ने अपनी शारीरिक जरूरतों को पूरा करने के लिए दूसरा ठौर तलाशना शुरू कर दिया. उसे अपने सुख के साधन की तलाश थी. उस की तलाश खत्म हुई राजवीर पर.

वह भी कूड़ा नगरिया में ही रहता था. उस के पिता रामकुमार चौकीदारी का काम करते थे. 22 साल पहले राजवीर का विवाह कमला से हुआ था. उस से 3 बच्चे हुए. उस की शादी को अभी 6 साल ही बीते थे कि पति की रंगीनमिजाजी से परेशान हो कर कमला अपने 2 छोटे बच्चों को ले कर हमेशा के लिए मायके चली गई.

पत्नी के जाने के बाद राजवीर को शारीरिक सुख मिलना बंद हो गया. उमा की तरह वह भी शारीरिक सुख के लिए दूसरा ठौर ढूंढ रहा था. उस की नजर कई औरतों पर पड़ी, लेकिन उन में से उसे उमा ही मन भाई. उमा की कदकाठी और खूबसूरत देह राजवीर के दिलोदिमाग में उतर गई.

दूसरी ओर उमा भी राजवीर को पसंद करने लगी थी. जब दोनों सामने पड़ते तो एकदूसरे पर नजरें जम जातीं. आग दोनों तरफ लगी थी. दोनों को अपनी अंदरूनी तपिश का अहसास हो गया था.

एक दिन जब मेवाराम घर में नहीं था तो राजवीर उस के घर पहुंच गया. उस के आने का मकसद उमा से नजदीकियां बना कर उस का सान्निध्य पाना था. उमा को उस का आना अच्छा लगा. उस दिन दोनों काफी देर तक बातें करते रहे. न तो उन की बातें खत्म होने का नाम ले रही थीं और न ही उन का मन भर रहा था.
लेकिन जुदा तो होना ही था, दिल पर पत्थर रख कर राजवीर उमा से विदा ले कर घर आ गया. लेकिन दिल की चाहत फिर भी तनमन को बेचैन करती थी. यह ऐसी बेचैनी थी जो दोनों के दिलों को और करीब ला रही थी.

चिंगारी को जब तक हवा नहीं लगती, तब तक वह शोला नहीं बनती. उमा के मन में दबी चिंगारी को अब तक हवा नहीं लगी थी. लेकिन उस दिन राजवीर उस के पास आ कर दबी चिंगारी को एकाएक शोला बना गया था.

मुलाकातों का सिलसिला बढ़ा तो दोनों एकदूसरे से काफी खुल गए. राजवीर हंसीमजाक करते वक्त जानबूझ कर उमा के शरीर के नाजुक अंगों को छू लेता तो उमा के चेहरे पर मादक मुसकराहट उतर आती. राजवीर का शरीर भी झनझना जाता, दिल बेकाबू होने लगता.

आखिर एक दिन मुलाकात रंग ले ही आई. राजवीर के मन की बात होंठों पर आ गई. उस ने उमा के हाथों को अपने हाथ में ले कर कहा, ‘‘तुम बहुत सुंदर हो, उमा.’’

‘‘सचऽऽ’’ उमा ने उस की आंखों में आंखें डाल कर पूछा.

‘‘हां, तुम बहुत सुंदर हो.’’

‘‘कितनी?’’ उमा ने फुसफुसाते हुए पूछा.

‘‘चांद से भी…’’ इस के आगे वह कुछ नहीं कह सका. वह उस के बदन की गरमी से पिघलने लगा था.
राजवीर की बात सुन कर उमा के चेहरे पर चमक आ गई. राजवीर को नशीली मदमस्त निगाहों से देखते हुए वह उस से सट गई और उस के कानों में फुसफुसा कर बोली, ‘‘शादी कर लो, तुम्हें मुझ से भी सुंदर पत्नी मिल जाएगी.’’

उस की बातों ने आग में घी का काम किया. वह बोला ‘‘लेकिन फिर तुम तो नहीं मिलोगी.’’
‘‘अगर मैं मिल जाती तो तुम क्या करते..?’’ उमा ने शरारत में कहा और बदन को मोड़ कर नशीली अदा से अंगड़ाई ली. उसी वक्त राजवीर के हाथ उस के वक्षस्थल से टकरा गए.

उमा की कातिल अदा उसे पागल कर गई. वह बोला, ‘‘मैं तुम्हें जी भर कर प्यार करता.’’

‘‘कितना?’’ उमा ने उसे उकसाया तो राजवीर ने साहस जुटा कर उमा को अपनी बांहों में ले कर जोर से दबाते हुए कहा, ‘‘इतना.’’उमा ने राजवीर के अंदर दबी चिंगारी को हवा दे दी, ‘‘बस, इतना ही.’’

‘‘नहीं, इस से भी ज्यादा…और इतना ज्यादा.’’ कहने के साथ ही राजवीर ने उसे बांहों में लिए लिए पलंग पर लिटा दिया.

अपनी अतृप्त प्यास बुझाने की चाह में उमा ने उस का रत्ती भर विरोध नहीं किया. इस की जगह वह उसे और उकसाती रही. लोहार की धौंकनी की तरह चलती दोनों की तेज सांसें और उन के मिलन की सरगम ने कमरे में तूफान सा ला दिया. राजवीर के सामीप्य से उमा को एक अलौकिक सुख का आनंद मिला.

उमा को अपने पति मेवाराम का सामीप्य बिलकुल नहीं भाता था, लेकिन राजवीर को वह दिल से चाहने लगी. वह राजवीर के बारे में सोचने लगी कि क्यों न हमेशा के लिए उसी की हो कर रह जाए.
उस की यह सोच गलत नहीं थी, क्योंकि उस के भीतर मचलते जिस तूफान को उस का पति एक बार भी शांत नहीं कर पाया था, राजवीर ने उस तूफान को पहली मुलाकात में ही शांत कर दिया था.

फिर एकाएक उमा उसे बेतहाशा प्यार करने लगी. उस की आंखों से आंसुओं की अविरल धारा बह निकली. उसे रोते देख राजवीर घबरा गया. वह बोला, ‘‘यह तुम्हें क्या हो गया उमा? तुम पागल तो नहीं हो गईं?’’

‘‘नहीं राजवीर, आज मैं बहुत खुश हूं. तुम ने आज जो सुख, जो खुशी मुझे दी है, उसे मैं शब्दों में बयान नहीं कर सकती. आज तक इतना सुख, इतनी खुशी मुझे मेरे पति से नहीं मिली.

‘‘सुहागरात से मैं जिस सुख की कल्पना करती आ रही थी, आज तुम से मिल गया. उस रात जब वह कमरे में आए और मैं ने घूंघट की आड़ से देखा तो मंत्रमुग्ध सी देखती रह गई. भरेपूरे शरीर और उन की गहरी नशीली आंखों में मैं डूबती चली गई. मैं उन को और वह मुझे देर तक एकदूसरे को देखते रहे, फिर एकाएक उन के स्पर्श ने मेरी तंद्रा भंग कर दी.’’

थोड़ा रुक कर वह बोली, ‘‘वह आए और मेरी बांहों को पकड़ कर बैठ गए. फिर धीरे से घूंघट उठा दिया. कुछ देर वह सम्मोहित से मुझे देखते रहे. उन के होंठ मेरी ओर बढ़े और उन्होंने मेरे चेहरे को अपने हाथों में समेट लिया, फिर मेरे होंठों पर अपने तपते होंठ रख दिए. उन का स्पर्श पा कर मैं सिहर उठी.‘‘मैं लाज से दोहरी होती गई. मगर मेरा दिल कह रहा था कि वह इसी तरह हरकत करते रहें. उन्होंने बेझिझक मुझे सहलाना शुरू कर दिया, मेरे ऊपर जैसे नशा छा गया. मेरी आंखें धीरेधीरे बंद होती जा रही थीं और बदन अंगारों की तरह दहकने लगा था. फिर मैं भी उन का सहयोग करने लगी.

‘‘बंद कमरे में फूलों की सेज पर जैसे तूफान आ गया था. लेकिन थोड़ी देर में वह तूफान तो शांत हो गया लेकिन मैं फिर भी जलती रही. उस वक्त वह मेरे बदन पर ही नहीं, मेरे दिल पर भी बोझ लग रहे थे. उस का एक ही कारण था कि उन्होंने जो आग मुझ में लगाई थी, उसे बुझाए बिना निढाल हो गए थे.

‘‘पहली रात ही क्या, किसी भी रात वह मुझे सुख नहीं दे पाए. मेरे दुख का कारण वे रातें थीं, जो मैं ने उन के बगल में तड़पते और जलते हुए गुजारी थीं. हमारी जिंदगी जैसेतैसे कट रही थी. देखने वालों को लगता कि मैं बहुत खुश हूं, मगर वास्तविकता ठीक इस के विपरीत थी. मैं ठीक वैसे ही जल रही थी, जैसे राख के नीचे दबी चिंगारी.’’

इतना कह कर उमा ने दुखी मन से अपना चेहरा झुका लिया. राजवीर ने देखा तो उस से रहा न गया, ‘‘दुखी क्यों होती हो उमा, अब तो मैं तुम्हारी जिंदगी में आ गया हूं. मैं तुम्हारी चाहतों को पूरी करूंगा.’’
इस के बाद दोनों के बीच कुछ देर और बातें होती रहीं. फिर राजवीर वहां से चला गया.

उस दिन के बाद से उमा खुश और खिलीखिली सी रहने लगी. दोनों की चाहतें, जरूरतें एकदूसरे से पूरी होने लगीं. किसी को भी इस सब की कानोंकान खबर तक नहीं लगी.अब जब दोनों का मन होता, एक हो जाते. दोनों का यह खेल बेरोकटोक चलने लगा. देखतेदेखते 5 साल गुजर गए. रात में खेतों की रखवाली के लिए उमा खेत में बनी झोपड़ी में रुक जाती थी. उस के खेतों के बराबर में ही पड़ोसी गांव प्रतिपालपुर के राजेश (परिवर्तित नाम) का खेत था.

जब वह खेत पर होती तो राजेश से बातें करती रहती. दोनों एकदूसरे के खेतों में जानवर घुसने पर भगा देते थे. खेतों के मामले में दोनों पड़ोसी थे. पड़ोसी ही पड़ोसी के काम आता है. यह सब राजवीर ने देखा तो वह उमा पर शक करने लगा कि वह अब उस के बजाए राजेश में रुचि ले रही है. जब वह अपने पति के होते हुए उस से संबंध बना सकती है तो राजेश के साथ संबंध बनाने में उसे क्या दिक्कत होगी.

उस ने कई बार उमा को राजेश से काफी नजदीक हो कर बातें करते देखा तो उस ने समझ लिया कि दोनों के बीच नाजायज संबंध बन गए हैं. राजवीर को यह बात नागवार गुजरी. उस की प्रेमिका उस के होते हुए किसी और से संबंध रखे, यह उसे मंजूर नहीं था.

8 जनवरी, 2020 की शाम 4 बजे उमा खेतों की रखवाली के लिए गई. अगले दिन सुबह उस की लाश खेत में पड़ी मिली. गांव वालों के बताने पर उमा के बच्चे खेतों पर पहुंचे. मेवाराम भागवत कथा के लिए कहीं गया हुआ था, किसी ने इस घटना की सूचना हरपालपुर थाना कोतवाली को दे दी थी.

सूचना पा कर इंसपेक्टर भगवान चंद्र वर्मा पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए. मृतका के शरीर पर किसी प्रकार की चोट के निशान नहीं थे. लेकिन गले पर दबाए जाने के निशान थे.

निरीक्षण के बाद उन्होंने उमा के बच्चों व ग्रामीणों से पूछताछ की तो उन्होंने उस के प्रेमी राजवीर पर शंका जताई. इस के बाद पुलिस ने लाश पोस्टमार्टम के लिए भेज दी और उमा की बेटी मुसकान को ले कर थाने आ गए.

इंसपेक्टर वर्मा ने मुसकान की तरफ से लिखित तहरीर ले कर राजवीर के खिलाफ भादंवि की धारा 302 के तहत मुकदमा दर्ज करा दिया.राजवीर घर से फरार था. 13 जनवरी, 2020 की सुबह 5:20 बजे एक मुखबिर की सूचना पर इंसपेक्टर वर्मा ने राजवीर को गांव अर्जुनपुर के पास से गिरफ्तार कर लिया. पूछताछ में उस ने उमा की हत्या करने का जुर्म स्वीकार कर लिया.

8 जनवरी को उमा खेतों में खड़ी गेहूं की फसल की रखवाली के लिए गई थी. रात 8 बजे राजवीर उस के पास पहुंचा तो वह अकेली थी. राजेश से संबंध होने की बात कह कर वह उमा से भिड़ गया. वादविवाद होने पर दोनों में गालीगलौज होने लगी. इस पर राजवीर ने उमा को दबोच कर दोनों हाथों से उस का गला दबा दिया, जिस से उमा की मौत हो गई. उस के मरते ही राजवीर वहां से फरार हो गया.राजवीर की गिरफ्तारी के बाद इंसपेक्टर वर्मा ने आवश्यक कानूनी लिखापढ़ी कर के उसे न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया. Short love Story in Hindi

कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Apradh Ki Kahani : बेवफाई का बदला – माशूका ने आशिक का प्राइवेट पार्ट काट डाला

Apradh Ki Kahani : मध्य प्रदेश के आदिवासी बहुल जिले सीधी का एक गांव है नौगवां दर्शन सिंह, जिस में ज्यादातर आदिवासी या फिर पिछड़ी और दलित जातियों के लोग रहते हैं. शहरों की चकाचौंध से दूर बसे इस शांत गांव में एक वारदात ऐसी भी हुई, जिस ने सुनने वालों को हिला कर रख दिया और यह सोचने पर भी मजबूर कर दिया कि राजो (बदला नाम) ने जो किया, वैसा न पहले कभी सुना था और न ही किसी ने सोचा था. इस गांव का एक 20 साला नौजवान संजय केवट अपनी ही दुनिया में मस्त रहता था.

भरेपूरे घर में पैदा हुए संजय को किसी बात की चिंता नहीं थी. पिता की भी अच्छीखासी कमाई थी और खेतीबारी से इतनी आमदनी हो जाती थी कि घर में किसी चीज की कमी नहीं रहती थी.

बचपन की मासूमियत

संजय और राजो दोनों बचपन के दोस्त थे. अगलबगल में होने के चलते दोनों पर एकदूसरे के घर आनेजाने की कोई रोकटोक नहीं थी. 8-10  साल की उम्र तक दोनों साथसाफ बेफिक्र हो कर बचपन के खेल खेलते थे. चूंकि चौबीसों घंटे का साथ था, इसलिए दोनों में नजदीकियां बढ़ने लगीं और उम्र बढ़ने लगी, तो दोनों में जवान होने के लक्षण भी दिखने लगे. संजय और राजो एकदूसरे में आ रहे इन बदलावों को हैरानी से देख रहे थे. अब उन्हें बजाय सारे दोस्तों के साथ खेलने के अकेले में खेलने में मजा आने लगा था.

जवानी केवल मन में ही नहीं, बल्कि उन के तन में भी पसर रही थी. संजय राजो को छूता था, तो वह सिहर उठती थी. वह कोई एतराज नहीं जताती थी और न ही घर में किसी से इस की बात करती थी. धीरेधीरे दोनों को इस नए खेल में एक अलग किस्म का मजा आने लगा था, जिसे खेलने के लिए वे तनहाई ढूंढ़ ही लेते थे. किसी का भी ध्यान इस तरफ नहीं जाता था कि बड़े होते ये बच्चे कौन सा खेल खेल रहे हैं.

जवानी की आग

यों ही बड़े होतेहोते संजय और राजो एकदूसरे से इतना खुल गए कि इस अनूठे मजेदार खेल को खेलतेखेलते सारी हदें पार कर गए. यह खेल अब सैक्स का हो गया था, जिसे सीखने के लिए किसी लड़के या लड़की को किसी स्कूल या कोचिंग में नहीं जाना पड़ता. बात अकेले सैक्स की भी नहीं थी. दोनों एकदूसरे को बहुत चाहने भी लगे थे और हर रोज एकदूसरे पर इश्क का इजहार भी करते रहते थे. चूंकि अब घर वालों की तरफ से थोड़ी टोकाटाकी शुरू हो गई थी, इसलिए ये दोनों सावधानी बरतने लगे थे.

18-20 साल की उम्र में गलत नहीं कहा जाता कि जिस्म की प्यास बुझती नहीं है, बल्कि जितना बुझाने की कोशिश करो उतनी ही ज्यादा भड़कती है. संजय और राजो को तो तमाम सहूलियतें मिली हुई थीं, इसलिए दोनों अब बेफिक्र हो कर सैक्स के नएनए प्रयोग करने लगे थे. इसी दौरान दोनों शादी करने का भी वादा कर चुके थे. एकदूसरे के प्यार में डूबे कब दोनों 20 साल की उम्र के आसपास आ गए, इस का उन्हें पता ही नहीं चला. अब तक जिस्म और सैक्स इन के लिए कोई नई बात नहीं रह गई थी.

दोनों एकदूसरे के दिल के साथसाथ जिस्मों के भी जर्रेजर्रे से वाकिफ हो चुके थे. अब देर बस शादी की थी, जिस के बाबत संजय ने राजो को भरोसा दिलाया था कि वह जल्द ही मौका देख कर घर वालों से बात करेगा. उन्होंने सैक्स का एक नया ही गेम ईजाद किया था, जिस में दोनों बिना कपड़ों के आंखों पर पट्टी बांध लेते थे और एकदूसरे के जिस्म को सहलातेटटोलते हमबिस्तरी की मंजिल तक पहुंचते थे. खासतौर से संजय को तो यह खेल काफी भाता था, जिस में उसे राजो के नाजुक अंगों को मनमाने ढंग से छूने का मौका मिलता था. राजो भी इस खेल को पसंद करती थी, क्योंकि वह जो करती थी, उस दौरान संजय की आंखें पट्टी से बंधी रहती थीं.

शुरू हुई बेवफाई

जैसा कि गांवदेहातों में होता है, 16-18 साल का होते ही शादीब्याह की बात शुरू हो जाती है. राजो अभी छोटी थी, इसलिए उस की शादी की बात नहीं चली थी, पर संजय के लिए अच्छेअच्छे रिश्ते आने लगे थे. यह भनक जब राजो को लगी, तो वह चौकन्नी हो गई, क्योंकि वह तो मन ही मन संजय को अपना पति मान चुकी थी और उस के साथ आने वाली जिंदगी के ख्वाब यहां तक बुन चुकी थी कि उन के कितने बच्चे होंगे और वे बड़े हो कर क्याक्या बनेंगे.

शादी की बाबत उस ने संजय से सवाल किया, तो वह यह कहते हुए टाल गया, ‘तुम बेवजह चिंता करते हुए अपना खून जला रही हो. मैं तो तुम्हारा हूं और हमेशा तुम्हारा ही रहूंगा.’

संजय के मुंह से यह बात सुन कर राजो को तसल्ली तो मिली, पर वह बेफिक्र न हुई.

एक दिन राजो ने संजय की मां से पड़ोसनों से बतियाते समय यह सुना कि संजय की शादी के लिए बात तय कर दी है और जल्दी ही शादी हो जाएगी. इतना सुनना था कि राजो आगबबूला हो गई और उस ने अपने लैवल पर छानबीन की तो पता चला कि वाकई संजय की शादी कहीं दूसरी जगह तय हो गई थी. होली के बाद उस की शादी कभी भी हो सकती थी.

संजय उस से मिला, तो उस ने फिर पूछा. इस पर हमेशा की तरह संजय उसे टाल गया कि ऐसा कुछ नहीं है. संजय के घर में रोजरोज हो रही शादी की तैयारियां देख कर राजो का कलेजा मुंह को आ रहा था. उसे अपनी दुनिया उजड़ती सी लग रही थी. उस की आंखों के सामने उस के बचपन का दोस्त और आशिक किसी और का होने जा रहा था. इस पर भी आग में घी डालने वाली बात उस के लिए यह थी कि संजय अपने मुंह से इस हकीकत को नहीं मान रहा था.

इस से राजो को लगा कि जल्द ही एक दिन इसी तरह संजय अपनी दुलहन ले आएगा और वह घर के दरवाजे या खिड़की से देखते हुए उस की बेवफाई पर आंसू बहाती रहेगी और बाद में संजय नाकाम या चालाक आशिकों की तरह घडि़याली आंसू बहाता घर वालों के दबाव में मजबूरी का रोना रोता रहेगा.

बेवफाई की दी सजा

राजो का अंदाजा गलत नहीं था. एक दिन इशारों में ही संजय ने मान लिया कि उस की शादी तय हो चुकी है. दूसरे दिन राजो ने तय कर लिया कि बचपन से ही उस के जिस्म और जज्बातों से खिलवाड़ कर रहे इस बेवफा आशिक को क्या सजा देनी है. वह कड़कड़ाती जाड़े की रात थी. 23 जनवरी को उस ने हमेशा की तरह आंख पर पट्टी बांध कर सैक्स का गेम खेलने के लिए संजय को बुलाया. इन दिनों तो संजय के मन में लड्डू फूट रहे थे और उसे लग रहा था कि शादी के बाद भी उस के दोनों हाथों में लड्डू होंगे.

रात को हमेशा की तरह चोरीछिपे वह दीवार फांद कर राजो के कमरे में पहुंचा, तो वह उस से बेल की तरह लिपट गई. जल्द ही दोनों ने एकदूसरे की आंखों पर पट्टी बांध दी. संजय को बिस्तर पर लिटा कर राजो उस के अंगों से छेड़छाड़ करने लगी, तो वह आपा खोने लगा. मौका ताड़ कर राजो ने इस गेम में पहली और आखिरी बार बेईमानी करते हुए अपनी आंखों पर बंधी पट्टी उतारी और बिस्तर के नीचे छिपाया चाकू निकाल कर उसे संजय के अंग पर बेरहमी से दे मारा. एक चीख और खून के छींटों के साथ उस का अंग कट कर दूर जा गिरा.

दर्द से कराहता, तड़पता संजय भाग कर अपने घर पहुंचा और घर वालों को सारी बात बताई, तो वे तुरंत उसे सीधी के जिला अस्पताल ले गए. संजय का इलाज हुआ, तो वह बच गया, पर पुलिस और डाक्टरों के सामने झूठ यह बोलता रहा कि अंग उस ने ही काटा है. पर पुलिस को शक था, इसलिए वह सख्ती से पूछताछ करने लगी. इस पर संजय के पिता ने बयान दे दिया कि संजय को पड़ोस में रहने वाली लड़की राजो ने हमबिस्तरी के लिए बुलाया था और उसी दौरान उस का अंग काट डाला, जबकि कुछ दिनों बाद उस की शादी होने वाली है.

पुलिस वाले राजो के घर पहुंचे, तो उस के कमरे की दीवारों पर खून के निशान थे, जबकि फर्श पर बिखरे खून पर उस ने पोंछा लगा दिया था. तलाशी लेने पर कमरे में कटा हुआ अंग नहीं मिला, तो पुलिस वालों ने राजो से भी सख्ती की. पुलिस द्वारा बारबार पूछने पर जल्द ही राजो ने अपना जुर्म स्वीकारते हुए बता दिया कि हां, उस ने बेवफा संजय का अंग काट कर उसे सजा दी है और वह अंग बाहर झाडि़यों में फेंक दिया है, ताकि उसे कुत्ते खा जाएं.

दरअसल, राजो बचपन के दोस्त और आशिक संजय पर खार खाए बैठी थी और बदले की आग ने उसे यह जुर्म करने के लिए मजबूर कर दिया था. राजो चाहती थी कि संजय किसी और लड़की से जिस्मानी ताल्लुकात बना ही न पाए. यह मुहब्बत की इंतिहा थी या नफरत थी, यह तय कर पाना मुश्किल है, क्योंकि बेवफाई तो संजय ने की थी, जिस की सजा भी वह भुगत रहा है.

राजो की हिम्मत धोखेबाज और बेवफा आशिकों के लिए यह सबक है कि वह दौर गया, जब माशूका के जिस्म और जज्बातों से खेल कर उसे खिलौने की तरह फेंक दिया जाता था. अगर अपनी पर आ जाए, तो अब माशूका भी इतने खौफनाक तरीके से बदला ले सकती है. Apradh Ki Kahani

मीठा जहर : आखिर वह जांच कराने से क्यों घबरा रहा था ?

रविवार की सुबह 6 बजे अलार्म की आवाज ने मेरी नींद खोल दी. मेरा पार्क में घूमने जाने का मन तो नहीं था पर मानसी और वंदना के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के मजबूत इरादे ने मुझे बिस्तर छोड़ने की प्रेरणा दी.

करीब 4 महीने पहले वंदना के पति रोहित से मेरा परिचय एक पार्टी में हुआ था. वह बंदा ऐसा हंसमुख और जिंदादिल निकला कि उसी दिन से हम अच्छे दोस्त बन गए थे. जल्द ही मानसी और वंदना भी अच्छी सहेलियां बन गईं. फिर हमारा एकदूसरे के घर आनाजाना बढ़ता चला गया.

करीब 2 हफ्ते पहले रोहित को अपने एक सहयोगी दोस्त की बरात में शामिल हो कर देहरादून जाना था. तबीयत ढीली होने के कारण वंदना साथ नहीं जा रही थी.

‘‘मोहित, तुम मेरे साथ चलो. हम 1 दिन के लिए मसूरी भी घूमने चलेंगे.’’ सारा खर्चा मैं करूंगा. यह लालच दे उस ने मुझ से साथ चलने की हां करवा ली थी.

घूमने के लिए अकेले उस के साथ घर से बाहर निकल कर मुझे पता लगा कि वह एक खास तरह की मौजमस्ती का शौकीन भी है.

दिल्ली से बरात की बस चलने के थोड़ी देर बाद ही मैं ने नोट कर लिया था कि निशा नाम की एक स्मार्ट व सुंदर लड़की के साथ उस की दोस्ती कुछ जरूरत से ज्यादा ही गहरी है वे दोनों एक ही औफिस में काम करते थे.

‘‘इस निशा के साथ तुम्हारा चक्कर चल रहा है न?’’ रास्ते में एक जगह चाय पीते हुए मैं ने उसे एक तरफ ले जा कर पूछा.

‘‘मैं तुम्हें सच बात तभी बताऊंगा जब वापस जा कर तुम वंदना से मेरी शिकायत नहीं लगाओगे,’’ उस ने मेरी पीठ पर दोस्ताना अंदाज में 1 धौल जमा कर जवाब दिया.

‘‘तुम्हारा सीक्रेट मेरे पास सदा सेफ रहेगा,’’ मैं भी शरारती अंदाज में मुसकराया.

‘‘थैंकयू. आजकल इस शहंशाह की खिदमत यह निशा नाम की कनीज ही कर रही है. तुम्हारा भी इस की सहेली के साथ चक्कर चलवाऊं?’’

‘‘अरे, नहीं. ऐसे चक्कर चलाने में मेरी कोई दिलचस्पी नहीं है,’’ मैं ने घबरा कर जवाब दिया.

‘‘चक्कर मत चलाना पर हंसबोल तो लो उस रूपसी के साथ,’’ शरारती अंदाज में मेरी कमर पर 1 और धौल जमाने के बाद वह निशा और उस की सहेली की तरफ चला गया.

निशा की सहेली शिखा ज्यादा सुंदर तो नहीं थी पर उस में गजब की सैक्स अपील थी. यात्रा के दौरान वह बहुत जल्दी खुल कर मेरी दोस्त बन गई तो बरात में शामिल होने का मेरा मजा कई गुना बढ़ गया.

अगले दिन सुबह बरात के साथ वापस न लौट कर हम दोनों टैक्सी से मसूरी पहुंच गए. जिस होटल में हम रूके वहां निशा और शिखा को पहले से ही मौजूद देख कर मैं बहुत हैरान हो उठा.

‘‘इन दोनों के साथ मसूरी में घूमने का मजा ही कुछ और होगा,’’ ऐसा कह कर रोहित ने मेरे सामने पहली बार निशा को अपनी बांहों में भरा.

दोस्तों की सोच और व्यवहार का हमारे ऊपर बहुत प्रभाव पड़ता है. अपनी पत्नी मानसी को धोखा दे कर कभी किसी और लड़की के साथ चक्कर चलाने का विचार मेरे मन में नहीं आया था. यह रोहित की कंपनी का ही असर था कि शिखा के साथ की कल्पना कर मेरे मन में गुदगुदी सी होने लगी थी.

हम दिन भर उन दोनों साथ मसूरी में घूमे. रात को रोहित उन दोनों के कमरे में चला गया. फिर शिखा मेरे कमरे में आ गई.

रोहित के साथ मैं ने जो शराब पी थी उस के नशे ने मेरे मन की सारी हिचक और डर को गायब कर दिया. उस पल ये विचार मेरे मन में नहीं उठे कि मैं कोई गलत काम कर रहा हूं या मानसी को धोखा दे रहा हूं.

शिखा ने पूर्ण समर्पण से पहले ही अपने पर्स से 1 कंडोम निकाल कर मुझे थमा दिया. उस की इस हरकत से मुझे तेज झटका लगा. मेरे मन में फौरन यह विचार उठा कि वह कौलगर्ल है और फिर देखते ही देखते उस के साथ मौजमजस्ती करने का भूत मेरे सिर से उतर गया.

‘‘मेरा मन बदल गया है. प्लीज, तुम सो जाओ,’’ पलंग से उतर मैं बालकनी की तरफ चल पड़ा.

‘‘आर यू श्योर?’’ वह मुझे विचित्र सी नजरों से देख रही थी.

‘‘बिलकुल.’’

‘‘सुबह रोहित से किसी तरह की शिकायत तो नहीं करोगे?’’

‘‘अरे, नहीं.’’

‘‘ वैसे मन न माने तो मुझे कभी भी उठा लेना.’’

‘‘श्योर.’’

‘‘पैसे वापस मांगने का झंझट तो नहीं खड़ा करोगे?’’

‘‘नहीं,’’ उस के प्रोफैशनल कौलगर्ल होने के बारे में मेरा अंदाजा सही निकला.

अगली सुबह मेरी प्रार्थना पर शिखा हमारे

बीच यौन संबंध न बनने की बात रोहित व निशा को कभी न बताने के लिए राजी हो गई.

सुबह उठ कर रोहित ने आंखों में शरारती चमक भर कर मुझ से पूछा, ‘‘कैसा मजा आया मेरे यार? मसूरी से पूरी तरह तृप्त हो कर चल रहा है न?’’

‘‘बिलकुल,’’ मैं ने कुछ शरमाते हुए जवाब दिया तो उस के ऊपर हंसी का दौरा ही पड़ गया.

‘‘अपना इस मामले में नजरिया बिलकुल साफ है, दोस्त महीने में 1-2 बार मुंह का स्वाद बदल लो तो पत्नी से ऊब नहीं होती है.’’

‘‘तुम ठीक कह रहे हो, गुरूदेव.’’

‘‘चेले, एक बात साफ कह देता हूं. अगली बार ऐसी ट्रीट तुम्हारी तरफ से रहेगी.’’

‘‘श्योर, पर…’’

‘‘पर क्या?’’

‘‘मुझे इस रास्ते पर नहीं चलना हो तो तुम नाराज तो नहीं हो जाओगे न?’’

‘‘अब तो तुम्हारे मुंह खून लग गया है. तुम मेरे साथ मौजमस्ती करने निकला ही करोगे,’’ अपने इस मजाक पर उस का ठहाका लगा कर हंसना मुझे अच्छा नहीं लगा.

हम दोनों वापस दिल्ली आए तो पाया कि वंदना की तबीयत ज्यादा बिगड़ गई थी.

‘‘खांसीबुखार अभी भी था. रात से पेट भी खराब होने के कारण बहुत कमजोरी महसूस हो रही थी,’’ अपने रोग के लक्षण बताते हुए वंदना की आवाज बहुत कमजोर लगा रही थी.

‘‘तुम ने जरूर कुछ गड़बड़ खा लिया होगा,’’ रोहित ने उस का माथा चूमते हुए कहा.

‘‘आप मेरी खराब तबीयत को हलके में ले रहो हो…. आप को मेरी चिंता है भी या नहीं?’’ कहतेकहते वंदना रो पड़ी.

‘‘मैं आराम करने से पहले तुम्हें डाक्टर को दिखा लाता हूं.’’ रोहित का यह आदर्श पति वाला बदला रूप देख कर मैं ने मन ही मन उस के कुशल अभिनय की दाद दी.

वंदना की तबीयत सप्ताह भर के इलाज के बाद भी नहीं सुधरी तो मैं उन दोनों को अपने इलाके के नामी डाक्टर उमेश के पास ले गया.

डाक्टर उमेश ने वंदना की जांच करने के बाद कुछ टैस्ट लिखे और फिर गंभीर लहजे में रोहित से बोले, ‘‘एचआईवी का टैस्ट आप को भी कराना पड़ेगा.’’

डाक्टर की बात सुन कर वंदना ने जिस डर, गुस्से व नफरत के मिलेजुले भाव आंखों में ला कर रोहित को घूरा था, उस रोंगटे खड़े करने वाले दृश्य को मैं जिंदगी भर नहीं भूल सकूंगा.

मैं तो डाक्टर की बात सुन कर मन ही मन बहुत बुरी तरह से डर गया था. मैं ने उसी रात मन ही मन कभी न भटकने का वादा खुद से कर लिया. क्षणिक मौजमस्ती

के लिए अपनी व अपनों की जान को दांव पर लगाना कहां की समझदारी हुई?

रोहित और वंदना दोनों की एचआईवी की रिपोर्ट नैगेटिव आई थी. इस कारण उन के 3 साल के बेटे राहुल की एचआईवी जांच नहीं करानी पड़ेगी.

वंदना के लगातार चल रहे बुखारखांसी का कारण उसे टीबी हो जाना था. अंदाजा यह लगाया गया कि यह बीमारी उसे अपने ससुरजी से मिली थी, जिन का देहांत कुछ महीने पहले ही हुआ था.

यह देख कर मुझे बहुत अफसोस होता है कि रोहित ने पूरे घटनाक्रम से कोई सीख नहीं ली. कई बार शादी के बाद पतिपत्नी के रिश्ते बहुत ज्यादा मजबूत नहीं होते पर रोहित यह समझने को तैयार नहीं कि कौलगर्ल से संबंध बना कर अपनी व अपने जीवनसाथी की जिंदगी को दांव पर लगाना बहुत खतरनाक है.

आजकल वंदना से उस का बहुत झगड़ा होता है.

‘‘मैं इधरउधर मुंह मारने वाले इस इंसान को अपने साथ सोने का अधिकार अब कभी नहीं दूंगी.

मानसी से मुझे पता चला है कि वंदना अपने इस कठोर फैसले से हिलने को कतई तैयार नहीं है.

रोहित मुझ से मिलते ही वंदना की शिकायत करने लगता है, ‘‘वह मुझे अपने पास नहीं आने देती है. बेड़ा गर्क हो इस डाक्टर उमेश का जिस ने वंदना के मन में एचआईवी का वहम डाला. मेरी कमअक्ल पत्नी की जिद है कि मैं हर महीने उसे एचआईवी से मुक्त होने की रिपोर्ट ला कर दिखाऊं, नहीं तो अलग कमरे में सोऊं.’’

‘‘उस का डरना व गुस्सा करना अपनी जगह ठीक है. एचआईवी का संक्रमण तुम्हारी पत्नी को ही नहीं, बल्कि आने वाली संतान को भी यह खतरनाक बीमारी दे सकता है.’’

‘‘तुम्हें तो पता ही है कि इस मामले में मैं बचाव का पूरा ध्यान रखता हूं.’’

‘‘गलत काम करना पूरी तरह से छोड़ ही दो न.’’

‘‘तुम ऐसे दूध के धुले नहीं हो जो मुझे लैक्चर दो,’’ वह चिढ़ कर नाराज हो गया तो मैं ने चुप्पी साथ ली.

अब वंदना का स्वास्थ्य धीरेधीरे सुधर रहा था. वह अब हमारे साथ घूमने जाने लगी थी.

मैं ने मानसी के व्यक्तित्व को आकर्षक बनाने का जिम्मा अपने ऊपर ले लिया है. मोटापा कम करने के लिए मैं उसे सदा उत्साहित करता रहता हूं. नियमित रूप से ब्यूटीपार्लर जाया करे, ऐसी जिद भी मैं करने लगा हूं.

अलार्म की आवाज सुन कर मानसी उठना चाहती थी पर मैं ने उसे बांहों में कैद कर के अपनी छाती से लगा लिया. कुछ मिनट के रोमांस के बाद ही मैं ने उसे बिस्तर छोड़ने की इजाजत दी.

मानसी ने मेरे कान से मुंह सटा कर प्यार भरे स्वर में कहा, ‘‘आप बहुत बदल गए हो.’’

‘‘मुझ में आया बदलाव तुम्हें पसंद है न?’’ मैं ने शरारती लहजे में पूछा तो वह शरमाती हुई बाथरूम में चली गई.

मानसी की बात में सचाई है. उसे देखते ही मेरा मन भावुक हो जाता है. फिर उसे छाती से लगाए बिना मन को चैन नहीं मिलता है.

मौजमस्ती का शौकीन रोहित परस्त्री से यौन संबंध बनाने से बाज नहीं आ रहा है. मेरे लाख समझाने के बावजूद वह इस मीठे जहर के खतरे को देखना ही नहीं चाहता है.

जिस दिन उस की एचआईवी की रिपोर्ट पौजिटिव आ गई, उस दिन क्या वह बुरी तरह नहीं पछताएगा? उस जैसे जिंदादिल आदमी का एड्स का शिकार बन अपनी जिम्मेदारियां अधूरी छोड़ कर दुनिया से विदा हो जाना सचमुच एक बहुत बड़ी ट्रैजेडी होगी.

 

जब प्यार में आया ट्विस्ट – भाग 4

पूनम की नजदीकियां देवर के दोस्त अरुण से बढ़ीं तो पूनम को अरुण में वह सब खूबियां नजर आईं, जो वह चाहती थी. अरुण मजबूत कदकाठी और रौबीले चेहरे वाला आकर्षक युवक था. वह अच्छा पैसा कमाता था और दिल खोल कर खर्च करता था. इसलिए पूनम उस की ओर आकर्षित हो गई.

रोजरोज की मुलाकात से दोनों के बीच की दूरियां मिटती गईं और दोनों के बीच हंसीमजाक व शारीरिक छेड़छाड़ होने लगी. एक रोज पूनम को घर में अकेला पा कर अरुण ने शारीरिक छेड़छाड़ शुरू की तो पूनम भी खुद को रोक न पाई. इस के बाद तो मानो 2 जिस्मों के अरमानों की होड़ लग गई. जल्द ही हसरतें बेलिबास हो गईं और उन के बीच नाजायज संबंध बन गए.

अरुण ने संदीप की भाभी पूनम से संबंध बनाए तो वह अपनी प्रेमिका सीमा से दूरी बनाने की कोशिश करने लगा. सीमा को शक हुआ तो उस ने अरुण पर नजर रखनी शुरू कर दी. कुछ समय बाद ही सीमा को पता चल गया कि अरुण ने संदीप की भाभी पूनम से नाजायज रिश्ता बना लिया है. इस बात को ले कर सीमा और अरुण के बीच खूब बहस हुई. सीमा ने उसे खूब खरीखोटी सुनाई.

वर्ष 2018 में अरुण कुमार के मातापिता ने उस का विवाह शिवराजपुर कस्बा निवासी मंगली कुरील की बेटी नीतू से कर दिया. शादी के बाद नीतू अपने पति अरुण के साथ पनकी कलां में रहने लगी. एक साल बाद नीतू ने बेटे को जन्म दिया. बेटे के जन्म के बाद जहां नीतू खुश थी, वहीं उस के सासससुर भी खुशी से फूले नहीं समा रहे थे.

प्रेमी अरुण की शादी की जानकारी सीमा को हुई तो उस ने अरुण से सवालजवाब किए. खरीखोटी भी सुनाई. उस के बाद उस ने अरुण का साथ छोड़ दिया. हां, इतना जरूर था कि अरुण के फोन करने पर वह जबतब काल रिसीव कर लेती थी और बात कर लेती थी. शादी हो जाने के बाद भी अरुण ने अय्याशी का दामन नहीं छोड़ा था. गुपचुप तरीके से उस का शारीरिक मिलन पूनम से होता रहता था.

अरुण सीमा का पहला प्यार था, सो वह उसे भुला नहीं पा रही थी. इसी निराशा भरे माहौल में सीमा की मुलाकात संदीप कश्यप से हुई. संदीप सीमा का गम समझता था, सो उस का झुकाव सीमा की ओर हो गया.

सीमा को भी सहारा चाहिए था, इसलिए उस ने संदीप की दोस्ती कुबूल कर ली. जल्द ही दोस्ती प्यार में बदल गई. इस के बाद सीमा और संदीप के बीच शारीरिक रिश्ता भी बन गया.

सीमा अब अरुण से नफरत करने लगी थी, इसलिए उस की जिंदगी में जहर घोलने के लिए उस ने दूसरे प्रेमी संदीप के कान भरने शुरू कर दिए. सीमा ने बताया कि अरुण ने उस के साथ प्यार में छल किया है और गर्भ भी गिरवाया था.

सीमा ने कहा कि अरुण ने मेरे साथ ही विश्वासघात नहीं किया है, वह तुम्हारी पीठ में भी इज्जत का छुरा घोंप रहा है. उस के तुम्हारी भाभी पूनम से भी नाजायज संबंध हैं. पूनम भाभी भी उस की इतनी दीवानी है कि उन्होेंने 10 हजार रुपए तथा कुछ जेवर भी अरुण को दे दिए हैं.

सीमा की बात सुन कर संदीप को गुस्सा तो बहुत आया, लेकिन वह गुस्सा पी गया. उस ने सुनीसुनाई बातों पर विश्वास करना सही नहीं समझा. उस ने सच्चाई का पता लगाने के लिए सारी बात बड़े भाई पवन को बताई.

फिर दोनों ने मिल कर पूनम को ठोकपीट कर सारी सच्चाई उगलवा ली. पूनम ने नाजायज रिश्तों और रुपया-जेवर अरुण को देने की बात कुबूल कर ली.

इधर अरुण को सीमा और संदीप के रिश्तों की बात पता चली तो उस ने सीमा को समझाया कि वह संदीप से रिश्ता खत्म कर किसी अच्छे घर में शादी कर ले. साथ ही फोन पर संदीप को धमकाया कि वह सीमा से नाता तोड़ ले अन्यथा अंजाम अच्छा नहीं होगा.

अरुण की धमकी और भाभी के साथ नाजायज संबंधों ने संदीप की खोपड़ी घुमा दी. उस ने अरुण को सबक सिखाने की ठान ली. इस के बाद उस ने बड़े भाई पवन और चचेरे भाई अमित उर्फ गुड्डू के साथ मिल कर अरुण की हत्या की योजना बनाई. योजना के तहत संदीप ने देसी कट्टा और कारतूसों का भी इंतजाम कर लिया.

16 जुलाई, 2022 की दोपहर बाद संदीप ने अरुण को फोन किया और बताया कि किसान नगर में एक मकान की स्लैब पड़नी है. आ कर साइट देख लो. 15 हजार रुपया एडवांस भी मिल जाएगा. हम तुम्हें शराब ठेके पर मिलेंगे.

‘‘ठीक है, मैं जल्द ही आ रहा हूं. तुम इंतजार करो.’’ कह कर अरुण ने फोन काट दिया. उस के बाद अरुण पत्नी नीतू से काम की बात पक्की करने की बात कह कर घर से निकल गया.

शाम लगभग 4 बजे अरुण किसान नगर ठेके पर पहुंचा. उस समय वहां पर संदीप, उस का भाई पवन तथा चचेरा भाई अमित उर्फ गुड्डू मौजूद थे. संदीप ने बताया कि मकान बनवाने वाला गंगरौली गांव का रहने वाला है. वहीं बात पक्की होगी. अरुण झांसे में आ गया और संदीप के साथ चल दिया.

शाम ढलते अरुण, संदीप, पवन और अमित के साथ गंगरौली गांव के बाहर रिंद नदी किनारे एक खेत पर पहुंचा. वहां बैठ कर चारों ने शराब पी. अरुण को जानबूझ कर कुछ ज्यादा शराब संदीप ने पिलाई. अब तक अंधेरा छा गया था और चारों ओर सन्नाटा फैला था.

उचित मौका देख कर पवन और अमित ने अरुण को दबोच लिया फिर संदीप ने तमंचे से अरुण के सीने में गोली मार दी. अरुण की हत्या के बाद संदीप व उस के साथियों ने खेत में गड्ढा खोद कर शव को दफना दिया और सबूत मिटाने के लिए खेत की जुताई कर दी.

इधर जब अरुण घर वापस नहीं आया तो नीतू ने पति की गुमशुदगी थाना पनकी में दर्ज कराई. एसएचओ अंजन कुमार सिंह काल डिटेल्स के आधार पर जांच करने सपई गांव पहुंचे और शक के आधार पर अमित उर्फ गुड्डू को हिरासत में लिया. गुड्डू ने अरुण की हत्या का खुलासा किया और गड्ढे में दफन शव को बरामद कराया.

21 जुलाई, 2022 को पुलिस ने हत्यारोपी अमित कुमार उर्फ गुड्डू तथा संदीप कश्यप को कानपुर कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जिला जेल भेज दिया गया. तीसरे आरोपी पवन कश्यप ने अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया था.द्य

-कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित. कथा में सीमा नाम काल्पनिक है.

प्यार में हद पार करने का खतरनाक नतीजा

अगस्त, 2016 की सुबह मध्य प्रदेश के जिला ग्वालियर के थाना पुरानी छावनी के खेरिया गांव के अटल गेट के पास खेत में 24-25 साल के एक युवक की लाश पड़ी होने की सूचना गांव वालों ने पुलिस को दी तो अधिकारियों को सूचना दे कर थानाप्रभारी प्रीति भार्गव पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंच गईं. वह घटनास्थल और लाश का निरीक्षण कर रही थीं कि एसपी हरिनारायण चारी मिश्र और एएसपी दिनेश कौशल भी घटनास्थल पर पहुंच गए. घटनास्थल पर गांव वालों की भीड़ लगी थी. थानाप्रभारी प्रीति भार्गव ने लाश और घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद वहां मौजूद लोगों से लाश की शिनाख्त करानी चाही, लेकिन कोई भी मृतक को पहचान नहीं सका. इस से साफ हो गया कि मृतक वहां का रहने वाला नहीं था. मृतक की जेबों की तलाशी ली गई तो उस की पैंट की जेब से मोटरसाइकिल की चाबी मिली. लाश से थोड़ी दूरी पर एक मोटरसाइकिल खड़ी थी. पुलिस ने मृतक की जेब से मिली चाबी उस मोटरसाइकिल में लगाई तो वह स्टार्ट हो गई. इस से पुलिस को लगा कि इस मोटरसाइकिल से मृतक की शिनाख्त हो सकती है.

पुलिस ने मोटरसाइकिल जब्त कर अन्य तमाम काररवाई निपटा कर लाश को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया. लेकिन जब पुलिस ने आरटीओ औफिस से मोटरसाइकिल के बारे में पता किया तो पता चला कि वह मोटरसाइकिल विनयनगर, सेक्टर 3, पत्रकार कालोनी के रहने वाले संतोष किरार की थी.

पुलिस ने उस के घर जा कर पता किया तो घरवालों ने बताया कि संतोष एक अगस्त की सुबह अपनी मोटरसाइकिल से निकला है तो अब तक घर लौट कर नहीं आया है. इस से पुलिस को लगा कि खेत में पड़ी लाश संतोष की हो सकती है. लेकिन जब पुलिस ने वह लाश उस के पिता रामकिशोर को दिखाई तो उन्होंने बताया कि यह लाश उन के बेटे संतोष की नहीं है. इस के बाद पुलिस को लगा कि इस हत्याकांड में संतोष की कोई न कोई भूमिका जरूर है.

प्रीति भार्गव लाश की शिनाख्त कराने की कोशिश कर रही थीं कि शाम को थाना हजीरा के रहने वाले तुलसीराम पिछली शाम से गायब अपने बेटे की तलाश करतेकरते उन के पास आ पहुंचे. दरअसल, पिछली शाम को घर से निकला उन का बेटा शीतल न लौट कर आया था और न उस का फोन मिला था, तब परेशान हो कर वह थाना हजीरा में उस की गुमशुदगी दर्ज कराने पहुंच गए थे. वहां से जब उन्हें बताया गया कि थाना पुरानी छावनी पुलिस ने एक लड़के की लाश बरामद की है तो वह थाना पुरानी छावनी पहुंच गए थे. थाना पुरानी छावनी पुलिस ने तुलसीराम को बरामद लाश दिखाई तो वह फफकफफक कर रोने लगे. इस के बाद उन्होंने खेतों में मिली लाश की शिनाख्त अपने बेटे शीतल की लाश के रूप में कर दी थी.

प्रीति भार्गव ने हत्यारे का पता लगाने के लिए तुलसीराम से पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि उन की किसी से ऐसी दुश्मनी नहीं थी कि उन के बेटे की इस तरह हत्या कर दी जाती. उन से पत्रकार कालोनी के रहने वाले संतोष के बारे में पूछा गया तो उन्होंने उस के बारे में जानने से मना कर दिया. तुलसीराम के बताए अनुसार, उन की किराने की दुकान थी. दोपहर को दुकान पर उन का बेटा शीतल बैठता था. इस तरह वह पिता के कारोबार में हाथ बंटाता था.

पुलिस ने हत्याकांड के खुलासे के लिए जितने भी लोगों से पूछताछ की, उन में से कोई भी ऐसी बात नहीं बता सका, जिस से वह हत्यारे तक पहुंच पाती. प्रीति भार्गव की समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर शीतल खेरिया गांव क्यों गया? अगर वह संतोष के साथ वहां गया था तो उन के बीच ऐसा क्या हुआ कि संतोष ने उसे मौत के घाट उतार दिया? यह सब जानने के लिए पुलिस को संतोष की तलाश थी. आखिर आठवें दिन काफी मशक्कत के बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया. पुलिस पूछताछ में वह असलियत छिपा नहीं सका और उस ने शीतल की हत्या का अपना अपराध स्वीकार कर लिया. इस के बाद उस ने शीतल की हत्या की जो कहानी सुनाई वह हैरान करने वाली तो थी ही, साथ ही आज के युवाओं में स्त्रीसुख की जो लालसा उपजी है, उस की हकीकत बयां करने वाली थी. पत्रकार कालोनी का रहने वाला इलेक्ट्रिशियन संतोष 31 जुलाई, 2016 की शाम घर लौट रहा था तो रेलवे स्टेशन के बाहर सड़क पर खड़े एक युवक ने उसे हाथ दे कर रोक कर कहा, ‘‘भाई साहब, मैं यहां काफी देर से किसी सवारी का इंतजार कर रहा हूं, लेकिन कोई सवारी मिल नहीं रही है. अगर आप मुझे अपनी मोटरसाइकिल से लिफ्ट दे दें तो बड़ी मेहरबानी होगी.’’

संतोष ने उसे मोटरसाइकिल पर बैठा लिया. इस के बाद उस युवक ने अपना नाम शीतल बताते हुए कहा, ‘‘हजीरा के इंद्रनगर में मेरे पिता की किराने की दुकान है. मैं उसी पर बैठता हूं. लेकिन अब मेरा मन दुकान पर बैठने को नहीं होता, इसलिए मैं नौकरी खोज रहा हूं. इंटरव्यू देने ही मैं झांसी जा रहा था, लेकिन दुर्भाग्य से मेरी ट्रेन छूट गई.’’

‘‘कोई बात नहीं, यार, मैं तुम्हारी नौकरी यहीं लगवा दूंगा.’’ संतोष ने कहा. विजयनगर पहुंचतेपहुंचते दोनों में ऐसी दोस्ती हो गई कि उन्होंने पीनेपिलाने का प्रोग्राम बना डाला. फिर इस नई दोस्ती के नाम पर दोनों में एकदूसरे को शराब पिलाने की होड़ लग गई, जिस में करीब 500 रुपए खर्च हो गए. शराब के नशे ने अपना असर दिखाया तो संतोष ने जाने कितनी बार शीतल को भरोसा दिलाया कि जल्द ही वह उस की नौकरी ग्वालियर में लगवा देगा.

उसे यह शहर छोड़ कर कहीं दूसरी जगह जाना नहीं पड़ेगा. संतोष शीतल से बातें कर रहा था, तभी उस की प्रेमिका रेखा (बदला हुआ नाम) का उस के मोबाइल पर फोन आ गया. शीतल से उस की दोस्ती हो ही चुकी थी, इसलिए उस से बिना कुछ छिपाए वह रेखा से अश्लील यानी शारीरिक संबंधों की बातें करने लगा. संतोष रेखा से जो बातें कर रहा था, उन्हें सुनसुन कर शीतल उत्तेजित हो उठा. तब उस ने बिना किसी संकोच के संतोष से कहा, ‘‘कल तुम अपनी प्रेमिका से मिलने जा रहे हो न, मुझे भी कल उस से मिलवा दो.’’

‘‘तुम उस से मिल कर क्या करोगे?’’ संतोष ने कहा तो जरा भी झिझके बिना शीतल ने कहा, ‘‘जो तुम करोगे, वही मैं भी करूंगा.’’

इस पर संतोष नाराज होते हुए बोला, ‘‘रेखा ऐसी लड़की नहीं है. वह केवल मुझ से ही बातें करती है और केवल मुझ से उस के शारीरिक संबंध हैं.’’ उस समय तो संतोष ने शीतल को समझाबुझा कर उस के घर भेज दिया. लेकिन सुबह होते ही शीतल संतोष को फोन कर के कहने लगा कि वही उस का सच्चा दोस्त है. सिर्फ एक बार वह अपनी प्रेमिका से उसे भी मौजमजा ले लेने दे. यही नहीं, उस ने यहां तक पूछ लिया कि वह कितनी देर में रेखा को उस के पास भिजवा रहा है.

नए दोस्त के मुंह से सुबहसुबह प्रेमिका के बारे में ऐसी बातें सुन कर संतोष को गुस्सा आ गया. किसी तरह अपने गुस्से पर काबू पाते हुए उस ने कहा, ‘‘एक घंटे के भीतर तू मेरे घर आ जा, आज मैं तुझे रेखा से मिलवा ही देता हूं. तू भी याद करेगा कि कोई दोस्त मिला था.’’ शीतल के आने से पहले संतोष ने तय कर लिया था कि प्रेमिका पर बुरी नजर रखने वाले शीतल को अब वह जिंदा नहीं छोड़ेगा. जैसे ही शीतल उस के घर पहुंचा, वह उसे ले कर निकल पड़ा.

संतोष ने ठेके से शराब की 2 बोतलें खरीदीं और मोटरसाइकिल से शीतल को ले कर पुरानी छावनी की ओर चल पड़ा. वहां एक पेड़ के नीचे बैठ कर दोनों ने शराब पी. अपनी योजना के अनुसार संतोष ने शीतल को कुछ ज्यादा शराब पिला दी थी. शीतल को जैसे ही शराब का नशा चढ़ा, उस ने कहा, ‘‘चलो बुलाओ रेखा को. तुम ने उस के साथ बहुत मजा लिया है, आज मैं उस के साथ ऐसा मजा लूंगा कि वह भी याद करेगी.’’

संतोष रात से ही शीतल की इन बातों से जलाभुना बैठा था. उस ने पैंट की जेब में रखा चाकू निकाला और एक ही झटके में शीतल का गला रेत कर उस की हत्या कर दी. इस के बाद उस ने शराब की बोतल उठा कर एक ही सांस में पूरी शराब पी ली और शीतल की लाश को वहीं अटल गेट के पास एक खेत में छोड़ कर चला आया. मोटरसाइकिल वह इसलिए नहीं ला सका, क्योंकि उस की मोटरसाइकिल रास्ते में शीतल ने चलाने के लिए ले ली थी और उस की चाबी उस ने अपनी जेब में रख ली थी.

इसलिए शीतल की हत्या करने के बाद जब संतोष ने अपनी जेब में मोटरसाइकिल की चाबी देखी. चाबी न पा कर नशे में होने की वजह से उसे लगा कि चाबी कहीं गिर गई है. हड़बड़ाहट में वह गाड़ी वहीं छोड़ कर घर चला और घर से कानपुर चला गया. उसे उम्मीद थी कि पुलिस उस तक कभी नहीं पहुंच पाएगी. एक सप्ताह तक वह निश्चिंत हो कर कानपुर में रहा. लेकिन शायद उसे पता नहीं था कि अपराध चाहे कितनी भी चालाकी से क्यों न किया जाए, एक न एक दिन उस का राज खुल ही जाता है. पैसे खत्म होने के बाद संतोष पैसे लेने के लिए जैसे ही घर आया, थानाप्रभारी प्रीति भार्गव ने उसे पकड़ लिया. संतोष से पूछताछ में पता चला कि उस ने शीतल की हत्या जिस खेत में की थी, लाश वहां नहीं मिली थी.

पुलिस ने खेत की रखवाली करने वाले सोनू कुशवाह से पूछताछ की तो उस ने बताया कि उस ने लाश पड़ी देखी तो डर के मारे उस ने अपने रिश्तेदार सैकी कुशवाह की मदद से लाश ले जा कर खेरिया मोड़ पर अटल गेट के पास रमेश शर्मा के खेत में फेंक दी थी. पुलिस ने सोनू और सैकी को हिरासत में ले लिया. इन का दोष यह था कि इन्होंने लाश पड़ी होने की सूचना पुलिस को नहीं दी थी, इस के अलावा सबूत नष्ट किए थे. पूछताछ के बाद पुलिस ने तीनों को अदालत में पेश किया, जहां से सभी को जेल भिजवा दिया गया.

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

जब प्यार में आया ट्विस्ट – भाग 3

यौवन की दहलीज पर पहुंच चुकी सीमा का गोरा रंग, छरहरी काया और बड़ीबड़ी आंखें लड़कों के लिए आकर्षण का केंद्र थीं. उस के यौवन की चमक से लड़कों की आंखें चौंधिया रही थीं. वे उस के आगेपीछे मंडराने लगे थे. लेकिन सीमा किसी को घास तक नहीं डालती थी.

अरुण पहली ही मुलाकात में सीमा का दीवाना हो गया. इस के बाद वह उस के खयालों में डूबा रहने लगा. सीमा घर से खेतखलिहान जाती तो वह उस का पीछा करता.

कुछ ही दिनों में सीमा को भी एहसास हो गया कि वह उस का पीछा करता है. लेकिन उस ने इस का विरोध नहीं किया. कारण, उसे भी अरुण का प्यारभरी नजरों से निहारना अच्छा लगने लगा था.

सीमा उम्र के नाजुक मुकाम पर थी. इसलिए उस के दिल के दरवाजे पर अरुण ने दस्तक दे दी.

मोहब्बत वह एहसास है, जो बिना लफ्जों के भी अपनी मौजूदगी का अहसास करा देती है. उन के साथ भी ऐसा ही हुआ था. एक दिन मौका पा कर अरुण ने हिम्मत कर के सीमा से सीधे कह दिया, ‘‘सीमा, तुम मुझे अच्छी लगती हो, इसलिए मैं तुम से दोस्ती करना चाहता हूं.’’

अरुण की बात पर सीमा मुसकराते हुए बोली, ‘‘मैं ने सुना है कि अंजान लोगों से दोस्ती नहीं करनी चाहिए.’’

‘‘मैं अंजान कहां हूं. तुम मेरी बुआ के घर के पास रहती हो. मैं तुम्हें अच्छी तरह जानता हूं. रही बात मेरी तो अपने बारे में बताए देता हूं कि मेरा नाम अरुण है और मैं मकान बनवाने का ठेका लेता हूं. लोग मुझे ठेकेदार के नाम से भी जानते हैं,’’ अरुण ने कहा.

उस दिन के बाद दोनों के बीच बातों और मुलाकातों का सिलसिला चल निकला. दोनों बाहर मुलाकातें करते, घूमतेफिरते और इतने से भी मन नहीं भरता तो रात को फोन पर बतियाते.

बाद में अरुण ने सीमा के घर भी जाना शुरू कर दिया. लेकिन वह उस के घर यदाकदा और ऐसे वक्त पर घर जाता था, जब उस के पिता और भाई घर पर नहीं होते थे.

सीमा और अरुण का प्यार परवान चढ़ा तो दोनों शारीरिक मिलन को लालायित रहने लगे. आखिर जब उन से नहीं रहा गया तो दोनों सामाजिक मर्यादाओं को भूल गए और उन के बीच अवैध रिश्ता बन गया.

अवैध रिश्ता एक बार बना तो इस का दायरा बढ़ता ही गया. उन दोनों को जब भी मौका मिलता, अपनी शारीरिक भूख मिटा लेते.

कुछ समय बाद ही अवैध रिश्तों का अंजाम सामने आ गया. सीमा ने जब गर्भवती होने की जानकारी प्रेमी अरुण को दी तो उस के होश उड़ गए. सीमा ने शादी रचाने की बात अरुण से कही तो उस ने इंकार कर दिया. इस के बाद सीमा ने बदनामी से बचने के लिए अरुण की मदद से गर्भपात करा लिया.

सीमा बदनामी से तो बच गई, लेकिन उस के मन में यह बात घर कर गई कि अरुण उस से सच्चा प्यार नहीं करता. वह छलिया प्रेमी है. सीमा अब अरुण से दूरदूर रहने लगी.

अरुण उस की आर्थिक मदद कर तथा अपनी चिकनीचुपड़ी बातों में कभीकभी फंसा लेता था और उस से शारीरिक मिलन भी कर लेता था. नाराज होने पर अरुण ने सीमा को एक नया मोबाइल फोन भी दिया था.

इन्हीं दिनों अरुण कुमार की दोस्ती सपई गांव के संदीप व पवन कश्यप नाम के 2 सगे भाइयों से हो गई. संदीप कुंवारा था, जबकि पवन विवाहित था. पवन किसान था और उस का ज्यादातर समय खेतों पर ही बीतता था. संदीप बेरोजगार था. उस का खेतों पर भी मन नहीं लगता था.

संदीप और अरुण में दोस्ती हुई तो अरुण ने उसे भी अपने काम में लगा लिया. संदीप क्षेत्र में घूमता और नए बनने वाले मकानों की जानकारी अरुण को देता. अरुण को उस के जरिए जो ठेका मिलता, कमीशन के तौर पर कुछ रुपए वह संदीप को भी दे देता.

साथसाथ काम करने से अरुण और संदीप की गहरी दोस्ती हो गई थी. दोनों शराब के भी शौकीन थे. उन की जब भी शराब की महफिल जमती, पैसे अधिकतर अरुण ही खर्च करता था.

एक दिन संदीप ने अरुण को अपने घर दावत पर बुलाया. यहां अरुण की मुलाकात संदीप की भाभी पूनम से हुई. खूबसूरत पूनम को देख कर अरुण के दिल में हलचल मच गई. वह उसे हासिल करने के सपने संजोने लगा.

अरुण और संदीप साथ लाई बोतल खोल कर बैठ गए. बातें करते हुए अरुण शराब तो संदीप के साथ पी रहा था, लेकिन उस का मन पूनम में उलझा हुआ था. उस की नजरें भी लगातार उसी का पीछा कर रही थीं. अरुण को उस की खूबसूरती भा गई थी. जैसेजैसे नशा चढ़ता गया, वैसेवैसे उस की निगाहों में पूनम का शबाब नशीला होता गया.

शराब का दौर खत्म हुआ तो पूनम खाना परोस कर ले आई. खाना खा कर अरुण ने दिल खोल कर पूनम की तारीफ की. पूनम ने भी उस की बातों में खूब रस लिया. खाना खा कर अरुण अपने घर चला गया.

इस के बाद तो आए दिन संदीप के घर महफिल जमने लगी. इस महफिल में अब पूनम का पति पवन व संदीप का दोस्त अमित उर्फ गुड्डू भी शामिल होने लगा था. चूंकि पवन व अमित को मुफ्त में शराब पीने को मिलती थी और बोटी भी खाने को मिलती थी, सो वह अरुण के घर आने पर कोई ऐतराज न जताते थे.

अरुण अब पूनम से चुहलबाजी भी करने लगा था. पूनम भी उस की चुहलबाजी का बराबर जवाब देती थी. उस की आंखों में अरुण  को अपने लिए चाहत नजर आने लगी थी.

दरअसल, पूनम जब ब्याह कर ससुराल आई थी तो पति को देख कर उसे निराशा हाथ लगी थी. क्योंकि वह उस के सपनों का राजकुमार नहीं था.

उस का पति पवन एक सीधासादा इंसान था, जो अपने काम से काम रखता था और अपने परिवार में खुश था. पूनम की तरह वह न तो ऊंचे सपने देखता था और न ही उस की उड़ान ऊंची थी. उसे बनठन कर रहने का भी शौक नहीं था.

पूनम को पति का सीधापन बेहद अखरता था. वह चाहती थी कि उस का पति बनसंवर कर रहे. उसे मेला वगैरह घुमाने ले जाए, जबकि पवन को यह सब करना अच्छा नहीं लगता था. पवन की यह आदत पूनम को पसंद नहीं थी. लिहाजा उस का मन भटकने लगा. वह मौके की तलाश में थी.

जब प्यार में आया ट्विस्ट – भाग 2

थाने में जब उस से अरुण के बारे में पूछा गया तो वह साफ मुकर गया. उस ने अरुण को जाननेपहचानने से ही इंकार कर दिया. लेकिन जब उस पर सख्ती की गई तो वह टूट गया. उस के बाद अमित उर्फ गुड्डू ने जो कुछ पुलिस को बताया, उसे सुन कर पुलिस चकित रह गई.

अमित ने बताया कि अरुण कुमार अब इस दुनिया में नहीं है. संदीप व उस के भाई पवन ने 16 जुलाई, 2022 की शाम ही गोली मार कर उस की हत्या कर दी और शव को गंगरौली गांव के बाहर नदी किनारे खेत में दफन कर दिया था. किसी को शक न हो इसलिए खेत को ट्रैक्टर से जोत दिया था.

19 जुलाई, 2022 की सुबह 10 बजे एसएचओ अंजन कुमार सिंह पुलिस दल के साथ गंगरौली गांव स्थित उस खेत पर पहुंचे, जहां अरुण के शव को दफनाया गया था. अब तक युवक की हत्या कर शव को दफनाए जाने की खबर सपई व गंगरौली गांव में फैल गई थी, जिस से सैकड़ों लोग वहां आ गए थे. पुलिस की सूचना पर अरुण की पत्नी नीतू, भाई कुलदीप व पिता रामकुमार भी खेत पर मौजूद थे.

लगभग 12 बजे अमित कुमार उर्फ गुड्डू को पुलिस कस्टडी में खेत पर लाया गया. फिर उस की निशानदेही पर मिट्टी हटा कर शव को गड्ढे से बाहर निकाला गया. शव को देख कर कुलदीप व रामकुमार फूटफूट कर रोने लगे.

कुलदीप ने पुलिस को बताया कि शव उस के भाई अरुण कुमार का है. पति का शव देख कर नीतू भी दहाड़ मार कर रोने लगी. पुलिस ने किसी तरह उसे शव से दूर किया.

एसएचओ अंजन कुमार सिंह ने अरुण कुमार की हत्या किए जाने तथा शव को खेत से बरामद करने की जानकारी पुलिस अधिकारियों को दी तो एसीपी दिनेश कुमार शुक्ला, डीसीपी (क्राइम) सलमान ताज पाटिल तथा एसपी (कानपुर आउटर) तेजस्वरूप सिंह मौका ए वारदात आ गए.

पुलिस अधिकारियों ने बारीकी से शव का निरीक्षण किया. अरुण की उम्र 28 वर्ष के आसपास थी. उस की हत्या सीने पर गोली मार कर की गई थी. पुलिस अधिकारियों ने मृतक के घर वालों तथा हत्या के आरोप में पकड़े गए युवक अमित उर्फ गुड्डू से भी हत्या के संबंध में पूछताछ की.

शव निरीक्षण व पूछताछ के बाद पुलिस अधिकारियों ने एसएचओ अंजन कुमार सिंह को आदेश दिया कि वह शव को पोस्टमार्टम हाउस भेजें तथा रिपोर्ट दर्ज कर अन्य आरोपियों को गिरफ्तार करें. गिरफ्तारी में कोई प्रभावशाली व्यक्ति बाधा पहुंचाए तो उसे भी कानून की गिरफ्त में ले लें. किसी कीमत पर उसे बख्शा न जाए.

अधिकारियों का आदेश पाते ही अंजन कुमार सिंह ने शव को पोस्टमार्टम हेतु माती भेज दिया. इस के बाद थाने वापस आ कर मृतक की पत्नी नीतू की तहरीर पर आईपीसी की धारा 302/201 के तहत संदीप, अमित कुमार व पवन के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली.

अमित की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने ताबड़तोड़ काररवाई कर संदीप को भी गिरफ्तार कर लिया. संदीप की निशानदेही पर पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त तमंचा भी बरामद कर लिया. जिसे उस ने नदी किनारे झाडि़यों में छिपा दिया था. तीसरा आरोपी पवन पुलिस के हाथ नहीं आया.

चूंकि संदीप और अमित कुमार ने अरुण की हत्या का जुर्म कुबूल कर लिया था और संदीप ने हत्या में इस्तेमाल तमंचा भी बरामद करा दिया था, अत: एसएचओ अंजन कुमार सिंह ने उन दोनों को गिरफ्तार कर लिया. संदीप और अमित से की गई पूछताछ में त्रिकोण प्रेम की सनसनीखेज कहानी सामने आई.

उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर से करीब 20 किलोमीटर दूर एक कस्बा है-चौबेपुर. यह कस्बा गल्ला और पशु व्यवसाय के लिए जाना जाता है. यहां का पशु मेला दूरदराज के गांवों तक मशहूर है.

इसी चौबेपुर कस्बे से 5 किलोमीटर दूर बेला-बिधुना रोड पर एक गांव बसा है पसेन. हरेभरे पेड़ों के बीच बसा यह गांव अपनी अलग ही छटा बिखेरता है. इसी पसेन गांव में रामकुमार कुरील अपने परिवार के साथ रहते थे.

उन के परिवार में पत्नी कमला के अलावा 2 बेटे कुलदीप तथा अरुण थे. रामकुमार कुरील अपने खेत में सब्जियां उगाते थे और कस्बे में ले जा कर बेचते थे. सब्जी के इस व्यवसाय में उन्हें जो आमदनी होती थी, उसी से अपने परिवार का भरणपोषण करते थे.

रामकुमार कुरील चाहते थे कि उन के दोनों बेटे पढ़लिख कर सरकारी नौकरी करें. लेकिन उन की यह तमन्ना पूरी न हो सकी. कारण उन के दोनों बेटों का मन पढ़ाई में नहीं लगा और वे 10वीं कक्षा भी पास नहीं कर पाए.

पढ़ाई बंद करने के बाद कुलदीप तो पिता के काम में हाथ बंटाने लगा, लेकिन अरुण का मन गांव में नहीं लगा. वह गांव छोड़ कर कानपुर शहर आ गया. यहां वह मेहनतमजदूरी करने लगा. एक रोज अरुण की मुलाकात राजमिस्त्री राम अचल से हुई. वह उसी की जाति का था सो दोनों में खूब पटने लगी. राम अचल ने उसे राजमिस्त्री का काम सिखाया और उसे मजदूर से राजमिस्त्री बना दिया.

अरुण तेजतर्रार नौजवान था. उस ने राजमिस्त्री के साथसाथ मकान बनाने के ठेके भी लेने लगा. उस काम में उसे अच्छी आमदनी होने लगी.

कुछ समय बाद अरुण ने अपने भाई कुलदीप को भी गांव से बुला लिया. अब दोनों भाई कानपुर शहर के पनकी कलां मोहल्ले में किराए पर रहने लगे. अरुण ने 8-10 लोगों का एक समूह बना लिया. वे सभी उस के साथ काम करते थे.

अरुण कुमार अच्छा कमाने लगा तो उस का रहनसहन भी बदल गया. अब वह ठाटबाट से रहता और पिता के हाथों पर भी चार पैसा रखता.

अरुण की रिश्तेदारी कानपुर देहात जिले के सपई गांव में थी. वहां उस की बुआ ब्याही थी. बुआ के घर अरुण का आनाजाना लगा रहता था. बुआ उस की खूब आवभगत करती थी, सो वह उन से प्रभावित था.

बुआ के घर आतेजाते एक रोज अरुण की मुलाकात सीमा से हुई. सीमा का घर उस की बुआ के घर से कुछ दूरी पर था. उस के पिता रजोल किसान थे. 3 भाईबहनों में सीमा सब से बड़ी थी.

जब प्यार में आया ट्विस्ट – भाग 1

जैसेजैसे दिन ढलता जा रहा था, वैसेवैसे नीतू की चिंता भी बढ़ती जा रही थी. वह बारबार पति अरुण के मोबाइल फोन पर उस से संपर्क करने की कोशिश कर रही थी, लेकिन फोन बंद होने की वजह से संपर्क नहीं हो पा रहा था. दरअसल, अरुण घर से यह कह कर निकला था कि वह जरूरी काम से किसान नगर तक जा रहा है, घंटे-2 घंटे बाद वापस आ जाएगा.

लेकिन उसे गए 5 घंटे बीत गए थे और वह वापस नहीं आया था. उस का फोन भी बंद था, जिस से नीतू की धड़कनें बढ़ गई थीं. यह 16 जुलाई, 2022 की बात है.

अरुण जब रात 10 बजे तक घर वापस नहीं आया तो नीतू ने जेठ कुलदीप को फोन कर घर बुला लिया. नीतू ने पति के घर वापस न आने की बात कुलदीप को बताई तो उस के माथे पर भी बल पड़ गए. कुलदीप ने अरुण के कुछ खास दोस्तों से फोन पर संपर्क किया, लेकिन अरुण के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली. कुलदीप और नीतू रात भर जागते रहे और दरवाजे की तरफ टकटकी लगाए रहे.

सुबह हुई तो नीतू के अड़ोसपड़ोस वालों को भी जानकारी हुई कि अरुण बीती रात घर नहीं आया. पड़ोसियों ने नीतू को धैर्य बंधाया कि चिंता मत करो, अरुण जल्द ही घर वापस आ जाएगा, लेकिन नीतू को चैन कहां था. उस ने जेठ कुलदीप को साथ लिया और सुबह करीब 9 बजे थाना पनकी पहुंच गई.

थाने में उस समय एसएचओ अंजन कुमार सिंह मौजूद थे. नीतू ने उन्हें बताया कि वह पनकी कलां में अपने पति अरुण कुमार के साथ किराए के मकान में रहती है. उस के पति राजमिस्त्री हैं. कल दोपहर बाद किसी का फोन आने पर वह घर से चले गए थे. उस के बाद वापस घर नहीं आए. उसे किसी अनहोनी की आशंका है.

एसएचओ अंजन कुमार सिंह ने नीतू की बात गौर से सुनी. फिर शक के आधार पर अरुण की गुमशुदगी दर्ज कर ली तथा अरुण के बारे में कुछ खास जानकारी उस के भाई कुलदीप तथा नीतू से हासिल की. उन्होंने अरुण का मोबाइल फोन नंबर भी ले लिया. उस के बाद भरोसा दे कर नीतू को वापस घर भेज दिया.

अंजन कुमार सिंह ने अरुण की गुमशुदगी तो दर्ज कर ली, लेकिन उस का पता लगाने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई. इस की वजह यह थी कि अरुण कोई मासूम बच्चा तो था नहीं, जो उस के अपहरण की आशंका होती.

दूसरे वह राजमिस्त्री था. सोचा कि वह किसी अन्य राजमिस्त्री के घर जश्न में डूबा होगा. अकसर ऐसी दावतें होती रहती हैं. अरुण भी जश्न मना कर 1-2 दिन में अपने आप आ ही जाएगा.

लेकिन जब 2 दिन बीत जाने पर भी अरुण वापस घर नहीं आया तो पुलिस एक्टिव हुई. अंजन कुमार सिंह ने अरुण के मोबाइल फोन की काल डिटेल्स निकलवाई तो एक ऐसा नंबर सामने आया, जिस पर अरुण अकसर बात करता था.

इस मोबाइल नंबर के बारे में जानकारी जुटाई गई तो पता चला कि यह नंबर कानपुर देहात जिले के थाना गजनेर के सपई गांव की युवती सीमा का है.

एसएचओ अंजन कुमार सिंह तब पुलिस टीम के साथ सपई गांव पहुंचे और सीमा से पूछताछ की. सीमा ने बताया कि वह राजमिस्त्री अरुण कुमार को जानती है. अरुण की उस के गांव में रिश्तेदारी है. रिश्तेदार के घर आतेजाते उस की मुलाकात अरुण से हुई थी. मुलाकातें दोस्ती में बदलीं, फिर दोस्ती प्यार में बदल गई.

प्यार परवान चढ़ा तो उन के बीच की दूरियां भी खत्म हो गईं और उन का शारीरिक रिश्ता बन गया. लेकिन उन के प्यार में दरार तब पड़ी, जब अरुण ने उसे धोखा दे कर किसी और लड़की से शादी रचा ली. शादी के बाद उस ने अरुण से दूरियां बना ली थीं.

‘‘लेकिन तुम्हारी फोन पर तो उस से बात होती रहती थी,’’ एसएचओ ने सीमा से पूछा.

‘‘हां सर, फोन पर बात होती रहती थी,’’ सीमा ने जवाब दिया.

‘‘16 जुलाई, 2022 की दोपहर बाद क्या तुम ने अरुण से बात की थी?’’ अंजन कुमार सिंह ने पूछा.

सीमा कुछ क्षण सोचती रही फिर बोली, ‘‘सर, उस रोज मैं ने तो अरुण से बात नहीं की थी, लेकिन संदीप कश्यप ने मेरे फोन से अरुण से बात की थी. वह उसे मकान का ठेका और एडवांस पैसे दिलाने की बात कर रहा था.’’

‘‘यह संदीप कौन है? उस ने तुम्हारे फोन से अरुण को फोन क्यों किया?’’

‘‘सर, संदीप इसी गांव का रहने वाला है. हमारी उस से दोस्ती है. कभीकभी वह उस से मिलने घर आ जाता है. उस दिन वह उस से मिलने घर आया था. तभी उस ने उस के फोन से अरुण से बात की थी. अरुण की दोस्ती संदीप से है. उस का संदीप के घर आनाजाना बना रहता है. लेकिन सर, अरुण के विषय में आप मुझ से क्यों पूछ रहे हैं?’’ सीमा बोली.

‘‘इसलिए कि अरुण को किसी ने फोन कर बुलाया. उस के बाद अरुण घर नहीं पहुंचा. उसी का पता हम लगा रहे हैं.’’ अंजन कुमार सिंह ने सीमा को बताया.

यह सुनते ही सीमा ने सिर पकड़ लिया. उस के मन में तरहतरह की आशंकाएं उमड़ने लगीं.

सीमा ने जो जानकारी दी थी, उस से एक बात साफ थी कि मामला अवैध रिश्तों का है. और अवैध रिश्तों में कुछ भी संभव है. अत: संदीप कश्यप पुलिस की निगाह में चढ़ा तो एसएचओ अंजन कुमार सिंह उस के घर जा पहुंचे.

वह पुलिस जीप से जैसे ही उतरे, वैसे ही चबूतरे पर बैठा एक युवक तेजी से भागा. पुलिस ने पीछा कर कुछ दूरी पर उसे दबोच लिया.

उस युवक ने अपना नाम अमित कुमार कश्यप उर्फ गुड्डू निवासी गांव सपई जनपद कानपुर देहात बताया. दबिश में संदीप कश्यप तो नहीं मिला, लेकिन शक होने पर पुलिस अमित उर्फ गुड्डू को पूछताछ के लिए थाना पनकी ले आई.