प्यार के लिए मां की हत्या की हाइटेक साजिश – भाग 4

जब अंजलि वनखंडी मंदिर पर अकेली रह गईं. प्रखर ने बेटी के वाट्सएप से उन को मैसेज भेज कर जंगल में अंदर बुला लिया. बेटी के मोह में वह बिना कुछ सोचेसमझे जंगल में पहुंच गईं. वहां प्रखर ने उन्हें पीछे से पकड़ लिया और शीलू ने उनके ऊपर ताबड़तोड़ चाकू से वार किए.

इस के बाद प्रखर ने चाकू ले कर वार कर उन्हें मौत के घाट उतार दिया. हत्या के बाद लाश को घसीट कर गड्ढे में फेंक दिया. इसी बीच जब अंजलि को तलाशते हुए उदित मंदिर पर दोबारा पहुंचे, तब प्रखर ने शीलू से कहा कि इसे भी निपटा देते हैं. लेकिन अंजलि की हत्या के बाद दोस्त शीलू की हिम्मत जबाव दे गई थी. उस ने कहा कि 2-2 हत्याओं से हडक़ंप मच जाएगा और हम पकड़े जाएंगे. तब दोनों वहां से फरार हो गए.

पढ़ाईलिखाई की उम्र में प्रखर किसी पेशेवर अपराधी की तरह सोच रहा था. फिल्में देख कर प्रखर अपना तेज दिमाग चला रहा था. अपनी प्रेमिका की मां की हत्या के बाद वह पिता उदित को भी मौत की नींद सुलाना चाहता था ताकि करोड़पति की इकलौती बेटी को वह अपने प्रेमजाल में फंसा कर उस की पूरी संपत्ति पर कब्जा कर ले.

वह ऐशोआराम की जिंदगी जीना चाहता था. उस ने कंचन से कहा कि वह इंटर करने के बाद दिल्ली आ जाए, आगे की पढ़ाई में वह उस की मदद करेगा. हम लोग करिअर बनाने के बाद शादी करेंगे. वह कोई बड़ा बिजनैस करेगा. बिजनैस कर उसे खुश रखेगा.

कंचन ने पुलिस को बताया कि जब उस के मातापिता घर पर नहीं होते थे तो उस समय प्रखर किसी लडक़ी को साथ ले कर उस के घर आता था. उस समय बाबा दादी अपने कमरे में होते थे. लडक़ी साथ होने से वे शक भी नहीं करते थे.

प्रखर को अंजलि की हत्या 5 जून, 2023 को करनी थी, लेकिन उस दिन उस की बाइक फिसल गई जिस से वह चोटिल हो गया था. फिर 7 जून को हत्या की योजना बनाई गई.

मां का समझाना बेटी को रास नहीं आया

प्रखर ने ऐसा चक्रव्यूह तैयार किया, जिस से कंचन बाहर नहीं निकल पाई. कंचन को लगा कि प्रखर से ज्यादा प्यार करने वाला कोई उसे नहीं मिल सकता. महज 6 महीने की दोस्ती एक बड़ी वारदात का सबब बन गई. अंजलि बेटी को समझा रही थी कि यह उम्र प्यार करने की नहीं पढऩे की है. लडक़े झूठ बोल कर ऐसे ही लड़कियों को अपने प्यार के जाल में फंसाते हैं, लेकिन कंचन कुछ सुनने को तैयार नहीं थी.

प्रखर में सारे ऐब थे. वह सिगरेट और शराब भी पीता था. इस बात की जानकारी कंचन को भी थी. इस पर कंचन मां से यह कहती कि यह तो कामन बात है. लडक़े बाहर पार्टी करेंगे तो ड्रिंक तो आम बात है. स्कूल तक में बच्चे ई-सिगरेट बैग में ले कर आते हैं. कोई बुरा नहीं मानता. कंचन हत्यारोपी अपने प्रेमी प्रखर का शुरू से अंत तक बचाव करती रही.

एसएचओ आनंद कुमार शाही ने गिरफ्तार दोनों आरोपियों से पूछताछ करने के बाद प्रखर गुप्ता को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया. जबकि कंचन को 13 जून को किशोर न्यायालय के समक्ष पेश किया गया. कोर्ट में उस के बयान भी दर्ज कराए गए. वहां से उसे महिला बालिका संरक्षण गृह, गाजियाबाद भेज दिया गया.

क्रिप्टोकरैंसी में पैसा लगाता था प्रखर

आरोपी प्रखर से पुलिस पूछताछ में पता चला कि वह क्रिप्टोकरैंसी में भी पैसा लगाता था. उसे घाटा हो गया था. इस पर उस ने पैसा लगाना बंद कर दिया था. वह कंचन का शोषण कर रहा था. इस के साक्ष्य मिले हैं. मोबाइल में फोटो हैं. ये कब और कहां खींचे, किशोरी ने बताया है. अब वह प्रेमी के खिलाफ बोलने को तैयार है. कंचन ने पुलिस को जो बयान दिए, उस में प्रखर से संबंध की बात कही है.

मैडिकल रिपोर्ट के आधार पर आगे की काररवाई की जाएगी. इस आधार पर केस में पोक्सो ऐक्ट और शोषण की धारा भी लग जाएंगी. पुलिस ने आरोपी प्रखर की कुंडली खंगालने के साथ ही उस के दोस्तों और शिक्षकों से भी उस के बारे में पूछताछ की. इस में पता चला कि प्रखर बिगड़ैल है. रोजाना बाइक पर घूमने निकलता है. ब्रांडेड कपड़े पहनता है. लड़कियों को प्रभाव में ले कर उन से दोस्ती करता है.

इस के लिए वह हर हथकंडा अपनाता है. दोस्ती के बाद अपनी मंहगी बाइक पर उन्हें घुमाता था. इस कारण लड़कियां प्रभावित हो जाती थीं. उस ने कई लड़कियों से दोस्ती कर रखी थी. लेकिन कंचन उस के ज्यादा नजदीक थी.

बेटी अपनी मां अंजलि की हत्या में शामिल थी. इस बात की जानकारी होने पर परिजनों ने उस से दूरी बना ली है. एक तरफ कारोबारी उदित बजाज ने अपनी पत्नी को खो दिया तो दूसरी तरफ इकलौती बेटी पर पुलिस काररवाई कर रही है.

पुलिस की पूछताछ के दौरान कोई भी परिजन उस से मिलने नहीं गया. महिला पुलिसकर्मी ही कंचन के पास बैठी रही.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित. कथा में कंचन परिवर्तित नाम है.

समस्या समाधान के नाम पर ठगी

42 वर्षीय इंदरजीत कौर अकसर बीमार रहती थी. तमाम डाक्टरों से उस का इलाज चला, लेकिन कोई खास फायदा नहीं हुआ. उस के पिता हरवंश सिंह एक सरकारी मुलाजिम थे. बेटी को ले कर वह बड़ा परेशान रहते थे. इंदरजीत कौर के अलावा उन के 2 बेटे भी थे.

हरवंश सिंह दक्षिणी दिल्ली के नेहरूनगर में परिवार के साथ रहते थे. छोटा परिवार होने के बावजूद वह हमेशा परेशान रहते थे. उन की यह परेशानी बेटी इंदरजीत कौर को ले कर थी. अब तक शादी के बाद उसे ससुराल में होना चाहिए था, लेकिन बीमारी की वजह से उस की शादी नहीं हो पाई थी. इस के अलावा दूसरी परेशानी बड़े बेटे को ले कर थी, जो शादी के 8 सालों बाद भी बाप नहीं बन पाया था. तीसरी परेशानी छोटे बेटे को ले कर थी, जो अभी तक बेरोजगार था.

इंदरजीत कौर पिता को अकसर समझाती रहती थी कि वह चिंता न करें, सब ठीक हो जाएगा. लेकिन वह ङ्क्षचता से उबर नहीं पा रहे थे. परिवार की जिम्मेदारी एक तरह से इंदरजीत ही संभाले थी. हरवंश सिंह सेवानिवृत्त हुए तो फंड के उन्हें जो 15 लाख रुपए मिले, उन में से 12 लाख रुपए उन्होंने इंद्रजीत के नाम जमा करा दिए थे. इस पर बेटों ने कोई ऐतराज नहीं किया था.

रिटायर होने के कुछ ही महीने बाद हरवंश सिंह की मौत हो गई थी. उन के मरने के 4 महीने बाद ही उन की पत्नी की भी मौत हो गई. 4 महीने में ही मांबाप दोनों की मौत हो जाने से इंदरजीत को गहरा सदमा लगा था. उन के मरने के बाद घर की पूरी जिम्मेदारी उसी पर आ पड़ी थी.

हरवंश सिंह ने अपना एक फ्लैट कुसुमा को किराए पर दे रखा था. उन के मरने के बाद इंदरजीत ने वह फ्लैट खाली कराना चाहा तो उस ने फ्लैट खाली करने से साफ मना कर दिया, जिस का मुकदमा रोहिणी कोर्ट में चल रहा है.

इंदरजीत शारीरिक रूप से तो परेशान थी ही, मानसिक तौर पर भी परेशान रहने लगी थी. उस के छोटे भाई की उम्र 36 साल हो चुकी थी, उस की अभी तक न तो नौकरी लगी थी और न ही शादी हुई थी. उस की समझ में नहीं आ रहा था कि इन परेशानियों से कैसे निजात पाया जाए.

6 सितंबर को इंदरजीत के मोबाइल फोन पर एक एसएमएस आया, जिस में लिखा था, ‘जानिए कैसे होगा आप की समस्या का समाधान? नौकरी, व्यापार में घाटा, शादी, शिक्षा, स्वास्थ्य, प्यार में असफलता, शौतन से छुटकारा, मुठकरनी आदि समस्याओं के समाधान की 100 प्रतिशत गारंटी.’

इंसान तमाम तरह की परेशानियों से घिरा हो और कोशिश करने के बावजूद उस की मुश्किलें कम न हो रही हों तो इस तरह के मैसेज में उसे समस्याओं का हल दिखाई देने लगेगा. मैसेज के अंत में एक फोन नंबर भी दिया था. मैसेज पढऩे के बाद इंदरजीत ने सोचा कि क्यों न वह एक बार उस फोन नंबर पर बात कर के देखे. शायद यहां उस की समस्याएं हल ही हो जाएं. इसी उम्मीद में इंदरजीत ने अपने फोन से मैसेज में दिए नंबर 012048823333 पर फोन किया.

दूसरी ओर से फोन रिसीव किया गया तो उस ने अपनी सारी समस्याओं के बारे में विस्तार से बता दिया. उधर से बाबा त्यागी, जिस ने फोन उठाया था, भरोसा दिया कि उस की समस्या का समाधान तो हो जाएगा, लेकिन वह एक घंटे बाद दोबारा करे. बाबा त्यागी ने दोबारा बात करने के लिए दूसरा फोन नंबर दे दिया था.

इंदरजीत कौर ने एक घंटे बाद बाबा द्वारा दिए नंबर पर फोन किया तो उधर से बाबा त्यागी ने कहा, “बच्चा, हम ने अपनी गद्दी पर बैठ कर अपने ईष्ट से बात कर ली है, पता चला है कि तुम परेशानियों से घिरी पड़ी हो.”

“हां बाबा, आप बिलकुल सही कह रहे हैं.” इंदरजीत ने कहा.

“तुम्हारे ऊपर दुष्ट प्रेतात्माओं के साथ एक भयानक जिन्न कब्जा जमाए है, इसी वजह से तुम्हारी तबीयत ठीक नहीं रहती. बच्चा अगर तुम ने इन से छुटकारा पाने का कोई उपाय नहीं किया तो तुम्हारे घर में जल्दी ही 3 मौतें और हो सकती हैं.” तांत्रिक ने कहा.

“मौतेंऽऽ,” इंदरजीत कौर ने घबरा कर पूछा, “किसकिस की?”

“तुम्हारे बड़े भाईभाभी और छोटे भाई की,” बाबा ने कहा, “अगर तुम इस कहर से बचना चाहती हो तो तुम्हें तुरंत पूजा करवानी होगी.”

“पूजा में कितना खर्च आएगा बाबा?”

“यही कोई 80-90 हजार रुपए.”

घर की परेशानियों से छुटकारा के लिए इंदरजीत तैयार हो गई. उस ने कहा, “ठीक है बाबा, मैं पूजा कराने को तैयार हूं. आप तैयारी कीजिए. बताइए, पैसे ले कर कहां आना है?”

“तुम्हें मेरे पास आने की कोई जरूरत नहीं है. मैं तुम्हें आईसीआईसीआई बैंक का एक एकाउंट नंबर बता रहा हूं. तुम उसी में पैसे जमा कर के मुझे फोन कर दो. इस के बाद मैं पूजा शुरू कर दूंगा.” कह कर तांत्रिक ने आईसीआईसीआई बैंक का एकाउंट नंबर मैसेज कर दिया.

अगले दिन यानी 7 सितंबर को इंदरजीत कौर ने आईसीआईसीआई बैंक के एकाउंट में 80 हजार रुपए जमा करा कर तांत्रिक को फोन कर दिया. तांत्रिक ने बताया था कि पूजा श्मशान में होगी और पूरे 3 दिनों तक चलेगी.

पैसे जमा कराए एक महीने से ज्यादा हो गया, लेकिन इंदरजीत कौर को कोई फायदा नजर नहीं आया. उस ने बाबा को फोन किया तो फोन बाबा के बजाय उन के किसी चेले ने उठाया. उस का नाम सुनील कुमार था. उस ने कहा, “अभी तो बाबा पूजा करने उज्जैन गए हैं, वहां से एक महीने बाद लौटेंगे.”

इंदरजीत कौर ने 2 बार फोन किया तो दोनों बार फोन सुनील ने ही रिसीव किया. उस ने दोनों बार वही बताया. इस के बाद उस ने जब भी फोन किया, फोन सुनील ने ही रिसीव किया. हर बार उस ने वही बहाना बना दिया.

आखिर एक दिन बाबा ने फोन रिसीव किया. उस ने कहा, “कहो बच्चा, कैसे हो?”

“बाबा, मैं जैसी पहले थी, वैसी ही अभी भी हूं. मुझे कोई फर्क नजर नहीं आया.” इंदरजीत ने कहा.

“मैं तुम्हें फोन करने वाला था,” बाबा ने कहा, “मुझे लगा था कि दुष्ट आत्माएं काबू में आ गई होंगी, लेकिन वे इतनी दुष्ट हैं कि उन्हें काबू करने के लिए हमें बड़ी पूजा करनी पड़ेगी. अगर यह पूजा न की गई तो तुम्हारे यहां होने वाली मौतों को रोका नहीं जा सकता.”

इंदरजीत कौर बुरी तरह घबरा गई. वह अपने घर को उजड़ता नहीं देखना चाहती थी, इसलिए उस ने पूछा, “बाबा, बड़ी पूजा में कितना खर्च आएगा?”

“यही कोई एक लाख 30 हजार रुपए.” बाबा ने कहा.

इंदरजीत कौर ने अगले दिन अपने भारतीय स्टेट बैंक के खाते से एक लाख 30 हजार रुपए निकाल कर श्री शिवसेना समिति धार्मिक संस्थान के खाते में जमा करा दिए.

एक सप्ताह बीत गया, लेकिन इंदरजीत कौर की एक भी समस्या का समाधान नहीं हुआ. उस ने बाबा को फोन किया तो फोन सुनील ने रिसीव किया. उस ने बताया कि बाबा अभी श्मशान में शव साधना कर रहे हैं.

एक दिन बाद बाबा त्यागी ने खुद इंदरजीत कौर को फोन कर के कहा, “मैं ने जो शव साधना की है, उस से दुष्ट आत्माएं तो हमारी गिरफ्त में आ गई हैं, लेकिन वह जिन्न अभी काबू में नहीं आया है. उस के लिए हमें एक विशेष तरह का अनुष्ठान करना होगा, जिस के लिए कामाख्या मंदिर से गुरुजी को बुलाना होगा. गुरुजी श्मशान में 11 दिनों तक अनुष्ठान करेंगे.”

“बाबा आप को जो भी करना है, जल्दी कीजिए. इस में कितना खर्च आएगा, यह बता दीजिए.”

“इस अनुष्ठान में करीब 3 लाख रुपए खर्च हो जाएंगे.” बाबा त्यागी ने कहा.

“मैं कल ही 3 लाख रुपए आप के खाते में जमा करा दूंगी.” उस ने कहा और अगले दिन 3 लाख रुपए बाबा के बैंक खाते में जमा करा दिए.

अब तक इंदरजीत पूजा के नाम पर करीब 9 लाख रुपए बाबा के बताए बैंक खाते में जमा करा चुकी थी. पैसे जमा कराने के अगले दिन ही बाबा त्यागी ने फोन कर के कहा, “बेटा गजब हो गया, जो गुरुजी श्मशान में अनुष्ठान कर रहे थे, उन पर जिन्न ने हमला कर दिया. वह मरणासन्न हालत में हैं. उन का इलाज नहीं कराया गया तो उन की मौत हो सकती है. अगर उन की मौत हो गई तो इस का पाप तुम्हें ही लगेगा.”

“इस के लिए मुझे क्या करना होगा बाबा?”

“गुरुजी के इलाज के लिए संजीवनी बूटी मंगानी होगी, जिस पर 2 लाख रुपए का खर्च आएगा.”

इंदरजीत कौर अब तक पूजा के नाम पर 12 लाख रुपए तांत्रिक बाबा त्यागी के खाते में जमा करा चुकी थी. लेकिन फायदा कुछ नहीं हुआ था, इसलिए उसे शक होने लगा था कि कहीं वह किसी ठग के जाल में तो नहीं फंस गई है. इसलिए उस ने 2 लाख रुपए जमा करा दिए.

इंदरजीत कौर का छोटा भाई अपना कोई कारोबार शुरू करना चाहता था. उसे 8 लाख रुपए की जरूरत थी. उसी बीच उस ने बहन से ये रुपए मांगे तो उस ने रुपए बाबा त्यागी के खाते में जमा कराने की बात बता कर पैसे देने से मना कर दिया.

बहन की बात सुन कर छोटा भाई हैरान रह गया. उस ने अपना सिर पीट कर कहा, “पढ़ीलिखी होने के बावजूद दीदी तुम उस ढोंगी के जाल में कैसे फंस गईं? कम से कम मुझे तो बता देतीं. 3 साल से बाबा तुम्हें ठग रहा है और तुम ने कभी मुझ से चर्चा तक नहीं की.”

“क्या करूं भाई, उस ने मुझे इतना डरा दिया था कि मैं किसी से कुछ कह नहीं सकी.” कह कर इंदरजीत रोने लगी तो भाई ने उसे समझाते हुए कहा, “दीदी, तुम्हें अब पुलिस के पास जा कर उस ठग के खिलाफ रिपोर्ट लिखानी होगी. 12 लाख रुपए भले ही वापस न मिलें, लेकिन कम से कम उसे अपने किए की सजा तो मिलेगी.”

छोटे भाई की बात इंदरजीत कौर की समझ में आ गई. 24 नवंबर की शाम वह भाई के साथ थाना लाजपतनगर पहुंची और वहां मौजूद थानाप्रभारी रमेश कुमार कक्कड़ को पूरी बात बताई. इस के बाद इंदरजीत कौर की तहरीर पर थानाप्रभारी ने भादंवि की धारा 420/384/506134 के तहत मुकदमा दर्ज करा कर डीसीपी मंदीप सिंह रंधावा को पूरे वाकये से अवगत करा दिया.

एक पढ़ीलिखी महिला को जिस तरह से एक तांत्रिक ने ठगा था, उस से डीसीपी को लगा कि ढोंगी तांत्रिक बेहद शातिर है. उस तांत्रिक को गिरफ्तार करने के लिए उन्होंने एसीपी एस.के. केन के नेतृत्व में एक जांच टीम गठित कर दी, जिस में थानाप्रभारी रमेश कुमार कक्कड़, इंसपेक्टर मानवेंद्र सिंह, प्रवीण कुमार, एसआई अमित भाटी, हैडकांस्टेबल सुधाकर, कांस्टेबल नीरज, संतोष, सुधीर आदि को शामिल किया गया.

इंदरजीत कौर के पास बाबा त्यागी का केवल फोन नंबर था. रमेश कुमार कक्कड़ ने उस ठग तांत्रिक को इंदरजीत के माध्यम से ही घेरने की योजना बनाई. उन्होंने इंदरजीत से बाबा त्यागी को फोन कराया. बाबा ने फोन उठाया तो इंदरजीत ने कहा,

“बाबा, अभी तक मुझे कोई फायदा नहीं हुआ. आप कुछ ऐसा कीजिए कि हमारे सारे दुख मिट जाएं. मैं इस के लिए कुछ भी करने को तैयार हूं.”

“कामाख्या मंदिर वाले गुरुजी ने अनुष्ठान पूरा करने के बाद मुझे बताया था कि जिन्न और आत्माएं काबू में आ गई हैं. लेकिन जब तक तुम्हारे पिता का पिंडदान रामेश्वरम में नहीं कराया जाता, तब तक समस्याएं बनी रहेंगी.”

“तो फिर आप यह भी करवा दीजिए.”

“इस के लिए 33 ब्राह्मïणों को यज्ञ के लिए रामेश्वरम ले जाना होगा. ब्राह्मïणों का किराया, यज्ञ आदि पर कुल 1 लाख 80 हजार रुपए का खर्च आएगा.”

“ठीक है, मैं कल ही यह रकम दे दूंगी. लेकिन इस बार रकम बैंक में जमा नहीं करा सकती. क्योंकि मैं जब भी वहां पैसे जमा कराने जाती हूं, बैंक वाले पूछते हैं कि तुम इतनी बड़ीबड़ी रकम इस खाते में क्यों जमा कराती हो?” इंदरजीत कौर ने कहा.

बाबा त्यागी ने यूनियन बैंक औफ इंडिया का खाता नंबर दे कर उस में पैसे जमा कराने को कहा. इंदरजीत कौर थानाप्रभारी के कहे अनुसार काम कर रही थी. उन्होंने पैसे जमा कराने से मना किया तो शाम को बाबा त्यागी को फोन कर के इंदरजीत ने कहा, “बाबा, मैं बैंक में पैसे जमा कराने गई थी, बैंक वाले कह रहे थे कि इस खाते में 25 हजार रुपए से ज्यादा जमा नहीं कराए जा सकते. इसलिए आप कल अपना कोई आदमी भेज दीजिए, मैं उसे पूरे पैसे दे दूंगी.”

“ठीक है, कल सुबह मेरा आदमी तुम्हारे घर पहुंच जाएगा. तुम अपना पता मैसेज कर दो. लेकिन वह जिस टैक्सी से जाएगा, उस का किराया तुम्हें ही देना होगा.” बाबा त्यागी ने कहा.

“यही ठीक रहेगा. आप उन्हें भेज दीजिए. मैं उन्हें किराए के पैसे भी दे दूंगी.” कह कर इंदरजीत कौर ने फोन काट दिया.

25 नवंबर की सुबह थानाप्रभारी टीम के साथ आम कपड़ों में इंदरजीत कौर के घर के आसपास लग गए. सुबह 9 बजे के करीब एक टैक्सी इंदरजीत कौर के घर के सामने आ कर रुकी. टैक्सी से एक लडक़ा उतरा और इंदरजीत कौर के घर की डोरबैल बजा दी. इंदरजीत कौर ने दरवाजा खोला. युवक ने अपना नाम सुनील कुमार बताया.

इंदरजीत कौर उसे ड्राइंगरूम में ले आई. थानाप्रभारी अंदर ही बैठे थे. इंदरजीत ने उसे पानी पिलाया तो उस ने कहा, “मैडम, पैसे जल्दी दे दीजिए. बाबा ने मुझे जल्दी बुलाया है. अभी हमें पूजा का सामान वगैरह भी खरीदना है.”

इंदरजीत कौर ने अपने पर्स से थानाप्रभारी के हस्ताक्षर किए 5 हजार रुपए निकाल कर सुनील को देते हुए कहा, “पहले तुम टैक्सी के किराए के पैसे ले लो, बाकी के पैसे अभी दे रही हूं.”

पैसे गिन कर जैसे ही सुनील ने अपनी जेब में रखे, थानाप्रभारी ने उसे पकड़ लिया. इशारा करने पर मकान के बाहर मौजूद पुलिसकर्मी भी अंदर आ गए. सुनील को पूछताछ के लिए थाने लाया गया.

थाने में हुई पूछताछ में सुनील कुमार ने जो बताया, उस के बाद पुलिस ने उसी दिन उत्तर प्रदेश के महानगर गाजियाबाद की कालोनी राजनगर स्थित एक मकान में छापा मारा. वहां का नजारा देख कर पुलिस हैरान रह गई. वहां इस तरह के लोगों को फंसाने के लिए एक काल सेंटर चल रहा था. अलगअलग 12 केबिन बने थे, जिन में 5 लडक़े और 7 लड़कियां बैठी थीं.

पुलिस को देख कर सभी के होश उड़ गए. उन्हीं के बीच एक भव्य औफिस बना था, जिस में शेष नारायण दुबे और पवन कुमार पांडेय नाम के 2 लोग बैठे थे. सुनील की निशानदेही पर पुलिस ने उन दोनों को हिरासत में ले लिया. इस के अलावा काल सेंटर में काम करने वाले लडक़ेलड़कियों को भी पूछताछ के लिए थाने लाया गया.

थाने में हुई पूछताछ में पता चला कि ठगी का यह सारा मायाजाल शेष नारायण दुबे उर्फ बाबा त्यागी का रचा था.

32 वर्षीय शेष नारायण दुबे गाजियाबाद की इंदिरापुरम कालोनी में रहने वाले रामबहादुर दुबे का बेटा था. रामबहादुर पंडिताई करते थे. पिता की देखादेखी शेष नारायण कोई ऐसा काम करना चाहता था, जिस में कम खर्च में अच्छी आमदनी हो.

उस ने अपने करीबी रिश्तेदार पवन कुमार पांडेय और सुनील कुमार से बात की तो उन्होंने तंत्रमंत्र के नाम पर ठगी का कारोबार करने की सलाह दी. इस के बाद शेषनारायण को बाबा त्यागी बना कर कारोबार शुरू भी कर दिया गया. इन्होंने शहर के राजनगर में एक कमरा किराए पर लिया, जिस में उन्होंने दरजन भर कंप्यूटर लगा कर लड़कियों व लडक़ों को नौकरी पर रख लिया.

इस के बाद मोबाइल कंपनी से हजारों ग्राहकों के फोन नंबर और पते हासिल किए. उन में से रोजाना कुछ नंबरों पर कालसेंटर द्वारा समस्याओं के समाधान के मैसेज भेजे जाने लगे. हर कोई किसी न किसी समस्या से ग्रस्त होता ही है, इसलिए अंधविश्वासी लोग मैसेज में दिए फोन नंबर पर समस्या के समाधान के लिए फोन करने लगे. ये लोग उन्हें परिवार के सदस्यों की मौत का भय दिखा कर बैंक खाते में मोटी रकम जमा करवाने लगे.

दिल्ली के लाजपतनगर के नेहरूनगर की रहने वाली इंदरजीत कौर को भी इन्होंने उस के भाइयों व भाभी की मौत का भय दिखा कर 12 लाख रुपए ठग लिए थे. पूछताछ में पता चला कि ये लोग अब तक करीब 3 सौ लोगों को इसी तरह ठग चुके हैं.

इन के कालसेंटर पर नौकरी करने वाले लडक़ेलड़कियों को पुलिस ने हिदायत दे कर छोड़ दिया. शेष नारायण दुबे उर्फ बाबा त्यागी, पवन कुमार पांडेय और सुनील कुमार को 26 नवंबर को न्यायालय में पेश कर के जेल भेज दिया गया है.

पुलिस ने इन के कालसेंटर को सील कर दिया है. कथा लिखे जाने तक इन में से किसी की भी जमानत नहीं हुई थी.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

प्रेम में डूबी जब प्रेमलता

प्यार के लिए मां की हत्या की हाइटेक साजिश – भाग 3

पुलिस उसे आरोपी न बना सके, इसलिए प्रखर ने अपनी ओर से सब कुछ किया. कंचन का वाट्सऐप व अपना इंस्टाग्राम दोस्त शीलू के मोबाइल में इंस्टाल किए. उस से अंजलि को मैसेज भेज रहा था. प्रखर को पता था कि पुलिस उस के मोबाइल की काल डिटेल्स खंगालेगी, लोकेशन देखेगी. उस की और कंचन की लोकेशन अलग आएगी. काल डिटेल्स में बातचीत नहीं निकलेगी, इसलिए वह इंस्टाग्राम पर काल कर रहा था. यदि पुलिस उस के इंस्टा प्रोफाइल की डिटेल्स निकालेगी तो भी कुछ नहीं मिलेगा. बातचीत के लिए शातिर प्रखर ने दूसरा प्रोफाइल बनाया था.

प्रखर के मुंह से यह सुन कर उस की मां भी दंग रह गई. पहले उसे लग रहा था कि प्रखर हत्या जैसी घटना नहीं कर सकता. जब अपनी आंखों के सामने बेटे को सच उगलते देखा तो वह बोली, “प्रखर, तुम ने सभी की जिंदगी बरबाद कर दी. मैं ने अपनी हैसियत से ज्यादा अच्छे ढंग से तुम्हें पाला. यदि किसी से प्यार था तो मुझे तो बताता. प्यार के लिए कोई इस तरह अपराधी नहीं बनता है.”

पुलिस ने उसी दिन दबिश दे कर गंजडुंडवारा निवासी शीलू को गिरफ्तार कर लिया. दोनों का आमना सामना कराया गया. दोनों हत्यारोपियों की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त चाकू, बाइक और खून से सना अंगोछा (गमछा) भी पुलिस ने बरामद कर लिया.

प्रखर के बाबा व पिता की हो चुकी है हत्या

सनसनीखेज वारदात को अंजाम देने वाले प्रखर गुप्ता की कहानी भी कम चौंकाने वाली नहीं है. वह मूलरूप से उत्तर प्रदेश के कासगंज के कस्बा गंजडुंडवारा का रहने वाला है. कई साल से अपनी मां व हाईस्कूल पास छोटे भाई के साथ आगरा में रह रहा था. दयालबाग सौ फुटा रोड स्थित अपर्णा रिवर व्यू अपार्टमेंट में किराए पर फ्लैट ले रखा है.

उस के बाबा की रंजिश में हुत्या हुई थी. पिता विष्णुरत्न गुप्ता भी हत्या के मामले में पहले जेल गए थे. जेल से बाहर आने के बाद विरोधियों ने 2013 में उन की भी हत्या कर दी. उस समय प्रखर 11 साल का था. मां आगरा में संजय पैलेस में एक कंपनी में काम करती है. 21 वर्षीय प्रखर ने इंटर तक पढ़ाई की है. उस ने मां से कहा कि अब वह व्यापार करेगा. उस की जिद पर मां ने 2 लाख रुपए की बाइक दिलाई थी.

कच्ची उम्र के प्यार की सनसनीखेज कहानी—

कारोबारी बजाज दंपत्ति अपनी इकलौती बेटी कंचन को एक निजी स्कूल में पढ़ा रहे थे. मां अंजलि बेटी की पढ़ाई पर काफी ध्यान दे रही थीं. पुलिस पूछताछ में पता चला कि कंचन का स्कूल में एक दोस्त है कुशल. प्रखर कुशल का दोस्त था.

कुशल ने ही उस की प्रखर से पहचान कराई थी. प्रखर ने कंचन से दोस्ती ही झूठ बोल कर की थी. उस ने बताया था कि वह डीयू (दिल्ली यूनिवर्सिटी) में ग्रैजुएशन का छात्र है. वह जिम भी जाता है. गांव में खेती है और मां नौकरी करती है.

पहली ही मुलाकात में कंचन उस से प्रभावित हो गई. अपनी कीमती बाइक पर प्रखर कंचन को स्कूल छोडऩे व लेने जाने लगा. यह सब कंचन को बहुत अच्छा लगता. धीरेधीरे उन की दोस्ती प्यार में बदल गई. ये बात जनवरी, 2023 की है.

मार्च के महीने में कंचन अपने घर से बिना बताए प्रखर के साथ बाहर घूमने चली गई थी. कई घंटे बाद घर लौटी. वापस लौट कर आई तो मां बहुत नाराज हुई. पूछा कहां गई थीं, किस के साथ गई थीं? इस घटना के बाद मां ने उस का मोबाइल भी चैक किया और सोशल मीडिया प्लेटफार्म खंगाला.

मोबाइल में अंजलि ने प्रखर के साथ उस के फोटो देख लिए तो उन्होंने घर में बहुत क्लेश किया. पूछा, “ये लडक़ा कौन है?”

तब कंचन ने बताया कि उस का दोस्त प्रखर गुप्ता है. यह सुन कर मां ने उसे डांटा. फोन पर प्रखर से भी बात की और बेटी से दूर रहने को कहा. मां की सख्ती के चलते करीब एक महीने प्रखर उस से मिल नहीं पाया था. चोरीछिपे केवल फोन पर बातचीत होती थी.

बेटी के आपत्तिजनक फोटो देख कर परेशान थीं अंजलि

घटना से 20 दिन पहले अंजलि को कंचन की प्रखर के साथ फिर से दोस्ती की भनक लग गई थी. उन्होंने बेटी से इस संबंध में बात की तो बेटी ने कहा कि प्रखर उस से बहुत प्यार करता है. अंजलि ने कंचन के मोबाइल में प्रखर के साथ उस के आपत्तिजनक फोटो देख लिए थे. फोटो देख कर अंजलि परेशान हो गई.

उन्हें लगा कि यदि बेटी को काबू में न रखा गया तो वह समाज में बजाज परिवार की नाक कटा देगी. उन्होंने बेटी पर पहरा बैठा दिया. फोन काल से ले कर हर चीज पर नजर रखी जाने लगी. कुछ दिन सब कुछ ठीक रहा, लेकिन इस के बाद वह फिर से प्रखर को चोरीछिपे फोन करने लगी. उन का प्रेम प्रसंग जारी रहा. जब मां को यह बात पता चली तो उन्होंने बेटी के न मानने पर प्रखर को पोक्सो एक्ट में जेल भिजवाने की धमकी दी.

यह भी कहा कि नाबालिग का बयान कोई मायने नहीं रखता है, इन फोटो व चैट से ही प्रखर को जेल जाना पड़ेगा. यह बात कंचन ने अपने बौयफ्रैंड प्रखर को बता दी. जेल जाने की बात से प्रखर परेशान हो गया. उसे लगा कि यदि वह जेल चला जाएगा तो कारोबारी की इकलौती बेटी को पाने का उस का सपना अधूरा रह जाएगा. उस का प्यार उस से छिन रहा था. प्रेमिका पर लगाई जा रही बंदिशों से वह आजिज आ चुका था. जेल जाने के डर से प्रखर ने अंजलि बजाज की हत्या की योजना बनाई.

अंजलि बजाज की हत्या के लिए प्रखर को एक साथी की तलाश थी. वह अकेले अंजलि की हत्या नहीं कर सकता था. वह अपने गांव गंजडुंडवारा गया और वहां 10 दिन रुका. इस बीच उस का दोस्त शीलू मिला. वह घर में खाली बैठा था. उस से बातचीत की और उसे 10 हजार रुपए का लालच दिया. उस से कहा कि स्कूल में झगड़ा हो गया है एक को सबक सिखाना है.

शीलू इस के लिए तैयार हो गया. वह शीलू को 3 जून को आगरा बुला लाया. दोनों आईएसबीटी के पास एक होटल में ठहरे. वहां 2 दिन रुकने के बाद दोनों सिकंदरा स्थित होटल में आ गए.

कंचन ने बहाने से बुलाया था मां को

साजिश के तहत कंचन 7 जून को अपने शास्त्रीपुरम स्थित घर से दोपहर में निकल कर पार्क में जा कर छिप गई. थोड़ी देर बाद उस ने अपनी मां अंजलि को फोन कर बताया कि वह अपने बौयफ्रैंड के साथ जा रही है. यदि आखिरी बार मिलना है तो मिल लो. यह सुन कर अंजलि घबरा गईं.

थोड़ी देर बाद बेटी ने वाट्सएप पर लोकेशन भेजी. लोकेशन ककरैठा स्थित वनखंडी महादेव मंदिर की थी. बेटी ने प्रेमी के साथ जाने का नाटक कर मां को वनखंडी मंदिर पर भेज दिया. लेकिन अंजलि के साथ पति उदित को देख कर प्रखर ने कंचन को फोन से मैसेज भेज कर दोनों को अलग करने को कहा. इस पर कंचन ने पिता को फोन कर स्वयं को ले जाने की बात कह कर मंदिर पर मां से अलग कर हत्यारों के सामने भेज दिया. जबकि खुद पार्क में छिपने के बाद मां और पिता को भ्रमित करने के बाद घर आ गई.

प्यार के लिए मां की हत्या की हाइटेक साजिश – भाग 2

पुलिस की शुरुआती जांच में शक ये उठा कि आखिर अंजलि अपने घर से चल कर मंदिर पर पहुंची लेकिन जंगल में क्यों गईं?

इस की जांच के लिए पुलिस ने उन के फोन की वाट्सएप चैट निकाली. इस से पता चला कि अंजलि की बेटी के फोन से ही मैसेज आया था. जिस में लिखा था कि वो अपने दोस्त के साथ ककरैठा जंगल में महादेव मंदिर के पास है. इस कारण अंजलि कंचन की तलाश में उस जंगल में चली गई थीं. अब पुलिस को यहीं से शक हो गया कि अंजलि मर्डर केस में उन की ही बेटी का कुछ न कुछ हाथ तो जरूर है या फिर उसे ब्लैकमेल किया जा रहा था.

मां को 47 बार काल किया था कंचन ने

पुलिस ने जब बेटी व मां के मोबाइलों की काल डिटेल्स निकाली, तब जांच से पता चला कि घटना वाले दिन 7 जून को कंचन ने अपनी मां अंजलि व एक अन्य नंबर पर दोपहर 2.20 बजे से 3.56 बजे तक 47 बार फोन किया. पुलिस यह जान गई थी कि कुछ तो है, जो कंचन छिपाना चाहती है. एसएचओ आनंद कुमार शाही का ऐसा अनुमान था कि कंचन ने ही अपनी मां को हत्यारोपियों के सामने तक भेजा था.

शीलू के मोबाइल में चला रहा था इंस्टाग्राम व वाट्सऐप

पुलिस ने प्रखर गुप्ता के मोबाइल नंबर की काल डिटेल्स निकलवाई. पुलिस यह देखना चाहती थी कि प्रखर 7 जून को कहां था. रिपोर्ट से पता चला कि घटना वाले दिन यानी 7 जून को दोपहर 12 बजे तक प्रखर आगरा में ही था. इस के बाद उस का मोबाइल बंद हो गया था.

पुलिस को जांच में पता चला कि अंजलि पति के साथ जब मंदिर पर पहुंची थीं और गायब हुई थीं, इस समयावधि में प्रखर गुप्ता का तो नहीं लेकिन एक अन्य मोबाइल नंबर उस समय वनखंडी महादेव मंदिर के पास मौैजूद था. यानी वारदात के समय मृतका अंजलि और उस गुमनाम मोबाइल की लोकेशन एक ही जगह पर थी. दोनों ही फोन एक ही टावर से जुड़े थे.

पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि यह नंबर कासगंज के गंजडुंडवारा के रहने वाले शीलू का था. पता चला कि वह प्रखर गुप्ता का दोस्त है. शीलू के मोबाइल में प्रखर गुप्ता का इंस्टाग्राम अकाउंट व कंचन का वाट्सऐप एकाउंट चल रहा था. कंचन ने अपने प्रेमी प्रखर को अपना वाट्सऐप एक्सेस दे कर उस से लोकेशन भी शेयर करा दी. वह मां अंजलि को लोकेशन भेज कर अपने पास बुलाता गया, जबकि अंजलि समझ रही थी कि बेटी अपनी लोकेशन भेज रही है. इसी झांसे में वह हत्यारों के पास पहुंच गई. पुलिस ने शीलू के घर पर दबिश दी, लेकिन वह नहीं मिला.

केदारनाथ की कह कर निकला था घर से

प्रारंभिक जांच के बाद पुलिस ने कंचन के प्रेमी प्रखर गुप्ता की तलाश शुरू की. वह घर से फरार मिला. पुलिस शुक्रवार 9 जून, 2023 की रात को उस के घर पहुंची थी. मां से प्रखर के बारे में पूछा. उस ने बताया कि बेटा तो 3 दिन से बाहर है. केदारनाथ जाने की कह कर घर से निकला था.

यह सुन कर पुलिस का शक और गहरा गया. जबकि उस की लोकेशन बुधवार 7 जून दोपहर 12 बजे तक शहर में ही थी. इस खुलासे के बाद पुलिस ने प्रखर की तलाश में सर्विलांस की मदद ली. सुराग मिलने पर टीम उत्तराखंड और दिल्ली भेजी गईं.

अंजलि के लापता होने से हत्या तक की घटना सस्पेंस फिल्म की पटकथा जैसी है. शातिर प्रखर गुप्ता ने हत्या से पहले पूरी तरह शोध कार्य किया था कि पुलिस कैसे पकड़ती है? पुलिस से कैसे बचना है? गहन मंथन करने के बाद हाईटेक साजिश रची गई थी. फोटो में बाइक के नंबर से पुलिस को प्रखर के बारे में पूरी जानकारी व उस का पता मिल गया था. उस के बाद कडिय़ां आपस में जुड़ती चली गईं. पुलिस ने तब दबिश देनी शुरू कर दी.

गिरफ्तारी के बाद भी डरा नहीं प्रखर

पुलिस को इस मर्डर केस की साजिश का परत दर परत खुलासा करने में 3 दिन लगे. 11 जून को खंदारी के पास से पुलिस ने 21 वर्षीय प्रखर गुप्ता को गिरफतार कर लिया. पुलिस ने प्रखर से पूछताछ शुरू की तो उस ने कहा पुलिस तो रस्सी का सांप बना देती है. निर्दोष को फंसाती है. कोर्ट तो सबूत मांगता है. हत्यारोपी के मुंह से ये बातें सुन कर पुलिस सन्न रह गई.

पुलिस से डरने के बजाए हत्यारोपी प्रखर पुलिस पर हावी था. उस ने झूठीसच्ची कहानी गढ़ कर पुलिस को घंटों घुमाया. फिल्मों, वेब सीरीज, सीरियलों को देख कर प्रखर ने जो सीखा था, वह पूरा ज्ञान पुलिस पर उड़ेल दिया. कोर्ट में बात करेंगे.

वह टूट नहीं रहा था. कहने लगा, कहां हैं उस के फिंगरप्रिंट, लोकेशन और आला कत्ल, अंजलि का मोबाइल? सबूत हों तो दिखाओ. वह पुलिस के सामने फिल्म ‘दृश्यम’ का अजय देवगन बन गया था.

इस के बाद पुलिस ने भी पैंतरा बदला और प्रखर के सामने उस की मां व छोटे भाई को ले कर आई. कहा कि तुम्हारे साथ मां और भाई भी जेल जाएंगे. इतना सुनते ही प्रखर टूट गया. उस ने कहा कि अंजलि को शीलू ने मार दिया, उस ने कुछ नहीं किया. उस ने तो बात करने के लिए बुलाया था. वह घटना के समय शीलू के साथ था.

कंचन भी प्रखर को निर्दोष बताने लगी. उस ने भी कहा कि मां को शीलू ने ही मारा है. इस पर शीलू ने कहा कि वह प्रखर को जानता है. वह गांव से उसे बहाने से बुला कर लाया था. हम दोनों ने मिल कर हत्या की है. इस में कंचन का भी हाथ है. प्रखर और उस की प्रेमिका दोनों झूठ बोल रहे हैं. पुलिस द्वारा सबूत दिखाने पर आखिर प्रखर ने अंजलि की हत्या करने का जुर्म कुबूल कर लिया.

प्यार में कराई मां की हत्या

प्रखर बोला, “हां, उस ने अंजलि बजाज को मारा है. क्या करता, उस का प्यार उस से छिन रहा था. उस के सपने चूरचूर हो रहे थे. उन्हें पता चल गया था कि कंचन से उस का करीबी रिश्ता जुड़ चुका है. वह अंजलि बजाज को नहीं मारता तो वह उसे पोक्सो एक्ट में जेल भिजवा देती.

“कंचन भले ही कोर्ट में कहती रहती कि वह उस से प्यार करती है, तब भी उसे जेल जाना पड़ता क्योंकि नाबालिग की बात कोई मायने नहीं रखती.”

उस ने पुलिस को बताया कि हत्या में उस ने अपने गांव के दोस्त शीलू की मदद ली थी. हत्या से पहले उस ने व शीलू ने शराब भी पी थी ताकि अंदर से हिम्मत आ जाए.

दोस्ती में विश्वास की हत्या

दीपक कई दिनों से घरवालों से पहले की तरह ज्यादा बात नहीं कर रहा था. इस बात को उस की मां राजबाला अच्छे से समझ रही थीं. उन्होंने उस से कई बार  परेशानी की वजह जाननी भी चाही लेकिन वह कोई न कोई बहाना बना कर मां की बात टाल जाता था.

एक दिन दोपहर के समय दीपक घर लौटा तो राजबाला ने उस से बड़े प्यार से कहा, ‘‘क्या बात है बेटा, मैं कई दिनों से देख रही हूं कि आजकल तू किसी से ज्यादा बात भी नहीं करता और खोयाखोया सा रहता है.’’

‘‘नहीं मां, कोई खास बात नहीं है.’’ दीपक ने टालने वाले अंदाज में कहा. फिर वह विषय को बदलते हुए बोला, ‘‘मां मुझे तेज भूख लगी है. खाना लगा दो.’’

राजबाला ने भी सोचा कि जब यह खाना खा लेगा उस के बाद परेशानी की वजह बूझेगी. बेटे को खाना लाने के लिए रसोई में चली गईं और खाना परोस कर उसे दे दिया. दीपक ने खाना खाना अभी शुरू ही किया था कि उस के मोबाइल की घंटी बजी. दीपक ने मोबाइल स्क्रीन पर देखा तो वह नंबर उसे अनजाना लगा. इसलिए काल रिसीव करने के बजाय काट दी.

उस ने एकदो निवाले ही खाए थे कि फोन की घंटी फिर बजी. फोन उसी नंबर से था जिस से कुछ पल पहले आया था. दीपक झुंझला रहा था कि पता नहीं कौन है, जो ठीक से खाना भी नहीं खाने दे रहा. झुंझलाहट में उस ने काल रिसीव की.

दूसरी ओर से न मालूम किस की आवाज आई कि उसे सुनने के बाद उस का गुस्सा उड़न छू हो गया और बोला, ठीक है, मैं थोड़ी देर बाद पहुुंचता हूं.’’ कह कर फोन काट दिया.

उस समय राजबाला वहीं बैठी थीं. उन्होंने बेटे से मालूम भी किया कि किस का फोन था लेकिन दीपक ने नहीं बताया. फोन पर बात करने के बाद दीपक ने फटाफट खाना खाया और घर से बाहर की ओर निकल गया.

‘‘तू, मेरा मोबाइल लाने वाला था, क्या हुआ?’’ जाते समय मां ने पीछे से आवाज लगाई.

‘‘मम्मी, मुझे ध्यान है. आज वो भी ले लूंगा. पैसे मेरे पास ही हैं.’’ कह कर दीपक चला गया. यह बात 11 फरवरी की है.

दोपहर को घर से निकला दीपक जब देर शाम तक घर नहीं लौटा, तो राजबाला को चिंता हुई. उन्होंने उस का फोन मिलाया तो वह भी बंद आ रहा था, उन का बड़ा बेटा नितिन उस समय अपने काम पर गया हुआ था. राजबाला ने फोन कर के सारी बात नितिन को बता दी.

कुछ देर बाद वह भी घर आ गया. घर पहुंच कर नितिन ने सभी संभावित जगहों पर दीपक की तलाश की, लेकिन देर रात तक भी कोई नतीजा सामने नहीं आया. जवान बेटे के गायब हो जाने पर घर के सभी लोग परेशान थे. पिता जसवंत अग्रवाल थाना मुरादनगर पहुंचे और थानाप्रभारी को 25 वर्षीय बेटे दीपक अग्रवाल के गायब होने की जानकारी दी.

पुलिस ने भी सोचा कि दीपक कोई नासमझ तो है नहीं जो कहीं खो जाएगा. यारदोस्तों के साथ कहीं चला गया होगा और 2-4 दिन में घूमघाम कर लौट आएगा. यही सोच कर पुलिस ने उस की गुमशुदगी को गंभीरता से नहीं लिया. लेकिन दीपक के मांबाप के दिलों पर क्या गुजर रही थी. इस बात को केवल वे ही महसूस कर रहे थे. बेटे की चिंता में एकएक दिन बड़ी मुश्किल से गुजर रहा था.

जसवंत अग्रवाल थाने के चक्कर लगातेलगाते परेशान हो रहे थे मगर पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी थी. इस के 3 दिन बाद 14 फरवरी को मुरादनगर पुलिस को सूचना मिली कि एनटीपीसी के जंगलों के पास खुर्रमपुर गांव के रहने वाले टीटू के गन्ने के खेत में एक लाश पड़ी है. यह इलाका थाना मुरादनगर क्षेत्र में ही आता है इसलिए खबर मिलते ही थानाप्रभारी अवधेश प्रसाद उस जगह पर पहुंच गए जहां लाश पड़ी होने की सूचना मिली थी.

उन्होंने देखा कि खेत में 25-30 साल के युवक की खून से लथपथ लाश पड़ी थी. जितनी तादाद में वहां खून फैल कर जम चुका था, उस से लग रहा था कि उस की हत्या वहीं पर की होगी. उस के गले पर गोली का निशान दिख रहा था.

निरीक्षण में पता चला कि हत्यारों ने उस की पहचान मिटाने के लिए उस के चेहरे और लिंग को जला दिया था. इस से ऐसा लगा कि मारने वालों को उस से गहरी खुन्नस रही होगी. लाश विकृत अवस्था में थी, थानाप्रभारी ने वहां मौजूद लोगों से लाश की शिनाख्त करानी चाही लेकिन कोई भी उसे नहीं पहचान सका.

चूंकि मामला मर्डर का था इसलिए थानाप्रभारी ने जिले के आलाअधिकारियों को भी यह सूचना दे दी, तो जिले से एसएसपी और एसपी (आरए) भी घटनास्थल पर पहुंच गए. लाश और घटनास्थल का मुआयना करने के बाद उन्होंने वहां मौजूद लोगों से बात की और थानाप्रभारी को कुछ निर्देश दे कर चले आए. थानाप्रभारी अवधेश प्रसाद ने लाश का पंचनामा करने के बाद उसे पोस्टमार्टम के लिए गाजियाबाद में हिंडन स्थित मोर्चरी भेज दिया.

हत्या के इस मामले की जांच थाना प्रभारी अवधेश प्रसाद ने शुरू कर दी. थानाप्रभारी के सामने सब से बड़ी समस्या यह थी कि लाश की शिनाख्त न होने की वजह से उन्हें ऐसा कोई क्लू नहीं मिल पा रहा था, जिस से जांच आगे बढ़ सके. फिर उन्होंने इस काम में मुखबिरों को भी लगा दिया. इस से पहले कि उन्हें अज्ञात लाश के बारे में कहीं से कोई क्लू मिलता उन का वहां से तबादला हो गया.

इधर जसवंत अग्रवाल अपने लापता बेटे का पता लगवाने के लिए थाने के चक्कर लगाते रहे. पुलिस ने टीटू के गन्ने के खेत से जिस अज्ञात युवक की लाश बरामद की थी उस के बारे में भी जसवंत को कुछ नहीं बताया. जबकि अज्ञात लाश का हुलिया जसवंत के गायब बेटे दीपक से मिलताजुलता था.

जसवंत अग्रवाल ने भी हिम्मत नहीं हारी. उस ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के सामने अपना दुखड़ा रोया. इस का नतीजा यह निकला कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के आदेश पर मुरादनगर के नए थानाप्रभारी ने 19 फरवरी को दीपक की गुमशुदगी के मामले को भांदंवि की धारा 364 के तहत दर्ज कर लिया और इस मामले की जांच के लिए एक पुलिस टीम बनाई गई. टीम में एसआई राजेश शर्मा, कांस्टेबल पुष्पेंद्र, कुंवर पाल, अवश्री आदि को शामिल किया गया.

सबइंस्पेक्टर राजेश शर्मा ने सब से पहले दीपक के मोबाइल फोन की काल डिटेल्स निकलवाई. इस से पता चला कि दीपक के मोबाइल पर आखिरी काल जिस नंबर से आई थी, वह नंबर एक पीसीओ का था. पुलिस ने उस पीसीओ के मालिक का पता लगा कर उसे पूछताछ के लिए थाने बुलवा लिया.

उस से पूछा गया कि 11 फरवरी को दोपहर के समय उस के यहां से किस ने काल की थी. उस के पीसीओ पर रोजाना तमाम लोग काल करने आते हैं. उन में से कुछ परिचित होते हैं, कुछ अपरिचित. अब 8-10 दिन पहले दोपहर को किनकिन लोगों ने बात की. उस के लिए यह बताना आसान नहीं था. उस से पूछताछ में कोई सफलता नहीं मिली तो पुलिस ने उसे घर भेज दिया.

पुलिस को गन्ने के खेत से मिली लाश के बारे में भी कोई जानकारी नहीं मिल रही थी. हत्या के इस केस की तरह पुलिस टीम को दीपक के अपहरण के बारे में भी कोई सुराग न मिला तो पुलिस ने इस मामले को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया. थाने के चक्कर लगातेलगाते जसवंत भी थकहार गए.

7-8 महीने बीत गए पुलिस न तो उस अज्ञात लाश की ही शिनाख्त करा पाई और न ही दीपक के बारे में पता लगा पाई. इसी दौरान नए थानाप्रभारी रामप्रकाश शर्मा से जसवंत अग्रवाल ने मुलाकात की और बेटे का पता लगाने की अपील की.

थानाप्रभारी दीपक ने फोन की काल डिटेल्स का अध्ययन किया. जांच करने पर उन्हें यह पता चला कि दीपक की दोस्ती मोहित शर्मा नाम के एक युवक से थी. वह कृष्णा कालोनी में रहता था. वह एक अपराधी किस्म का व्यक्ति था. उस से खिलाफ थाना मुरादनगर में ही हत्या और आर्म्स एक्ट के तहत 2 मुकदमे दर्ज थे. जबकि दीपक एक शरीफ लड़का था.

अब थानाप्रभारी के दिमाग में यह बात घूम गई कि एक अपराधी के साथ दीपक का क्या रिश्ता हो सकता है? उन्हें लग रहा था कि तफ्तीश अब कुछ आगे बढ़ सकती है. उन्होंने मोहित शर्मा के फोन की काल डिटेल्स निकलवाई.

इस का अध्ययन करने पर पता चला कि मोहित 2 और फोन नंबरों पर ज्यादा बातें करता था. जिन नंबरों पर उस की ज्यादा बातें होती थीं. जांच में वह शशि और लक्ष्मण नाम के शख्स के पाए गए, जोकि मुरादनगर में ही रहते थे. उन दोनों के खिलाफ भी थाना मुरादनगर में कई मुकदमे दर्ज थे.

पुलिस ने मोहित शर्मा, शशि और लक्ष्मण को पूछताछ के लिए थाने बुलवा लिया. तीनों से दीपक के बारे में मालूमात की तो उन्होंने दीपक के बारे मे अनभिज्ञता जताई. जिस दिन मोहित गायब हुआ था उस दिन की इन तीनों के मोबाइल फोनों की लोकेशन जांची तो वह कहीं और की पाई गईं. इस से पुलिस को वे बेकुसूर लगे. उन के खिलाफ कोई सुबूत न मिला तो पुलिस ने तीनों को छोड़ दिया.

थानाप्रभारी ने दीपक के फोन की काल डिटेल्स का फिर से अध्ययन किया. उन्होंने पाया कि जिन नंबरों पर दीपक की अकसर बात होती थी उन में से एक नंबर दीपक के गुम होने के बाद से लगातार बंद आ रहा था. अब पुलिस ने यह पता लगाने की कोशिश की कि जिस फोन में वह नंबर चल रहा था. उस में अब कौन सा नंबर चल रहा है.

फोन के आईएमईआई नंबर के सहारे थानाप्रभारी को इस काम में सफलता मिल गई. उस फोन में जो नंबर चल रहा था वह कनक नाम की एक लड़की की आईडी पर लिया गया था. पुलिस ने कनक को पूछताछ के लिए थाने बुलवा लिया.पू छताछ में पता चला कि वह दीपक की दोस्त है लेकिन उस ने दीपक के बारे में कोई भी जानकारी होने से इंकार कर दिया. जब सिम बदलने की वजह पूछी तो वह कोई उचित जवाब ना दे सकी और घबराहट में इधरउधर देखने लगी.

थानाप्रभारी को लगा कि दाल में जरूर कुछ काला है, इसलिए उस से मनोवैज्ञानिक तरीके से पूछताछ की तो वह अधिक देर ना टिक सकी और बोली कि दीपक अब इस दुनिया में नहीं है. उस के दोस्तों मोहित, लक्ष्मण और शशि ने उस की हत्या कर दी है.

कनक ने जिन लोगों के नाम बताए थे पुलिस ने उन के ठिकानों पर दविशें डालीं लेकिन वे फरार हो चुके थे और उन्होंने अपने मोबाइल फोन भी बंद कर दिए थे. फिर पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर 29 दिसंबर को तीनों को पाइपलाइन रोड से हथियार सहित गिरफ्तार कर लिया. उन सभी से पूछताछ करने पर ऐसे 2 मामलों का खुलासा हो गया जो पिछले 9 महीने से पुलिस के गले की फांस बने हुए थे. उन से पूछताछ के बाद दीपक की हत्या की जो कहानी सामने आई वह इस प्रकार निकली.

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले का एक थाना है मुरादनगर. मुरादनगर की ही कृष्णा कालोनी में जसवंत अग्रवाल अपने परिवार के साथ रहते थे. उन के परिवार में पत्नी राजबाला के अलावा 4 बच्चे थे. 2 बेटे व 2 बेटियां. बेटियों की शादी वह अपनी नौकरी के दौरान ही कर चुके थे. बेटा नितिन फरीदाबाद में स्थित प्राइवेट कंपनी में नौकरी करता था. जबकि छोटे बेटे दीपक को फरीदाबाद में जूतों की दुकान खुलवा दी थी.

कुछ समय बाद ही दीपक का मन इस दुकान से उचट गया, तो अपने घर वालों से बात कर के वह औनेपौने दामों में दुकान का सारा सामान बेच कर अपने घर मुरादनगर आ गया. दीपक मुरादनगर में ही रह कर कोई ऐसा काम करना चाहता था जिस से अच्छी आमदनी हो. मुरादनगर में ही कनक नाम की एक लड़की रहती थी उसी से जफर और लक्ष्मण के अवैध संबंध थे.

दीपक की लक्ष्मण और जफर से दोस्ती थी. इसलिए उसे कनक के अवैध संबंधों की जानकारी थी. चूंकि कनक के कदम बहक चुके थे, इसलिए उस ने दीपक से भी नजदीकी बना ली थी. बाद में उस ने लक्ष्मण और जफर को किनारे कर के 25 वर्षीय दीपक से अवैध संबंध बना लिए.

लक्ष्मण और जफर ने जब प्रेमिका की तरफ से बेरुखी महसूस की तो उन्होंने इस की वजह खोजनी शुरू कर दी. तब उन्हें पता चला कि इस की असली वजह दीपक है. यानी दीपक ने उन के प्यार में सेंध लगा दी है. ऐसे विश्वासघाती दोस्त को उन्होंने सबक सिखाने की योजना बना ली और तय कर लिया कि वह उसे ठिकाने लगा कर ही रहेंगे, इस योजना में उन्होंने अपने एक और दोस्त शशि को भी शामिल कर लिया.

फरीदाबाद की जूतों की दुकान बंद कर के दीपक बेरोजगार हो गया था. घर का खर्चा उस का बड़ा भाई नितिन ही चला रहा था. दीपक अकसर अपने कामधंधे को ले कर तनाव में रहने लगा था. इस बात को घर वाले भी महसूस कर रहे थे.

योजनानुसार 11 फरवरी को मोहित ने पीसीओ से दीपक को फोन किया और एक जरूरी काम का बहाना कह कर घर से बुला लिया. बाइक पर बिठा कर वह उसे एनटीपीसी के जंगल में ले गया. वहां पहले से ही लक्ष्मण, शशि के साथ जफर भी मौजूद था. इन सभी ने पहले वहां बैठ कर जम कर शराब पी. जब दीपक को अधिक नशा हो गया तो वे उसे पास ही के गन्ने के खेत में ले गए.

वहां पहुंचते ही जफर ने उस की गरदन पर  तमंचा सटा कर गोली चला दी. गोली लगते ही दीपक नीचे गिर गया. कुछ देर बाद उस की मौत हो गई. पहचान मिटाने के लिए उन्होंने उस के चेहरे और गुप्तांग पर पैट्रोल डाल कर आग लगा दी और वहां से चले गए. इस से पहले उन्होंने उस की जेब में रखे 10 हजार रुपए निकाल लिए. वह पैसे उस की मां ने फोन खरीदने के लिए दिए थे.

दीपक की हत्या के बाद जफर और शशि ने बिजनौर के पास दिल्ली के एक कार ड्राइवर से 2 लाख रुपए लूट लिए. विरोध करने पर उन्होंने उस की हत्या कर दी. बाद में जब यह मामला खुला तो बिजनौर पुलिस ने जफर और शशि को गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया.

कुछ समय बाद शशि जमानत पर बाहर आ गया. जबकि जफर की जमानत नहीं हो सकी. उन से पूछताछ के बाद पता चला कि पुलिस ने 14 फरवरी को खुर्रमपुर के टीटू के खेत से जो अज्ञात लाश बरामद की थी, वह दीपक अग्रवाल की ही थी.

हत्याकांड की हर बिखरी कड़ी अब जुड़ चुकी थी. सो सभी अभियुक्तों से पूछताछ के बाद उन्हें भादंवि की धारा 364, 302, 201, 34, 120बी के तहत गिरफ्तार कर गाजियाबाद की जिला अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें डासना जेल भेज दिया गया.

पुलिस हत्या में शामिल चौथे अभियुक्त जफर को अदालत में प्रार्थना पत्र दे कर, ट्रांजिट रिमांड पर लाने की तैयारी कर रही थी.

—कथा पुलिस सूत्रों एवं जनचर्चा पर आधारित. कनक परिवर्तित नाम है

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मां के प्रेम का जब खुला राज

प्यार के लिए मां की हत्या की हाइटेक साजिश – भाग 1

आगरा के शास्त्रीपुरम के ए ब्लौक स्थित भावना एरोमा कालोनी निवासी कारोबारी उदित बजाज 7 जून, 2023 की रात 9 बजे थाना सिकंदरा पहुंचे. वे बहुत घबराए हुए थे. उन्होंने एसएचओ आनंद कुमार शाही को पत्नी के लापता होने की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि उन की 40 वर्षीय पत्नी अंजलि बजाज अपराह्नï 3 बजे यमुना किनारे ककरैठा में वनखंडी महादेव मंदिर में पूजा कर ने गई थीं. लेकिन अब तक वापस नहीं आई हैं. उन का मोबाइल भी स्विच्ड औफ जा रहा है.

सूचना पर पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज कर ली. मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने रात में ही अंजलि की तलाश शुरू कर दी. एसएचओ आनंद कुमार शाही पुलिस टीम के साथ वनखंडी महादेव मंदिर जा पहुंचे. उन्होंने मंदिर के चप्पेचप्पे में अंजलि को तलाश किया, लेकिन अंजलि बजाज का कोई सुराग नहीं मिला.

उदित बजाज का आगरा में जूते के धागे का काम है. संजय पैलेस में उन की दुकान है. परिवार में इकलौती 15 वर्षीय बेटी कंचन के अलावा उदित के वृद्ध मातापिता साथ रहते हैं. दूसरे दिन पुलिस ने पति उदित बजाज से पूछताछ की. कारोबारी उदित ने बताया कि वह पत्नी के साथ मंदिर कार से गए थे. कंचन भी घर से कहीं चली गई थी. उस का फोन आया, उस ने बताया, पापा वह सिकंदरा में हाईवे पर अमर उजाला के पास खड़ी हैं, आप मुझे ले जाओ. पत्नी को मंदिर पर छोड़ कर वह बेटी को लेने पहुंचे.

रास्ते में कंचन का फोन आ गया कि वह घर पहुंच गई है. अब आने की जरूरत नहीं है. उस ने अपनी दादी से भी बात करा दी. उदित एक बार झुंझलाए भी फिर वे पत्नी को लेने के लिए वापस मंदिर पहुंचे लेकिन वहां पत्नी नहीं मिली. उदित को लगा कि पत्नी अकेले घर चली गई होंगी.

वह घर आए तो वहां पत्नी नहीं थीं. पत्नी का मोबाइल लगातार स्विच्ड औफ आ रहा था. वह एक बार फिर मंदिर पहुंचे, अंजलि को काफी तलाश किया, लेकिन वह नहीं मिलीं. परिचितों व रिश्तेदारों के यहां भी पता किया लेकिन कोई सुराग नहीं लगा. पत्नी के न मिलने पर वह घबरा गए. शाम तक इंतजार किया इस के बाद ही वे रात में थाने पहुंचे थे.

वनखंडी के जंगल में मिली अंजलि की लाश

पत्नी के लापता होने के दूसरे दिन यानी 8 जून को एक व्यक्ति का पुलिस के पास फोन आया. उस ने बताया कि वनखंडी मंदिर के पास जंगल में एक महिला की लाश पड़ी है. सूचना पर पुलिस वनखंडी महादेव मंदिर पहुंची. ये मंदिर यमुना किनारे स्थित है. मंदिर से यमुना करीब 700 मीटर की दूरी पर है. मंदिर के आसपास जंगल है.

वनखंडी महादेव मंदिर से करीब 900 मीटर दूर ककरैठा के जंगल में रास्ते के बराबर में बने गड्ढे में नाले के पास एक महिला की लाश पड़ी थी. उदित बजाज ने गुमशुदी दर्ज कराते समय अपनी पत्नी की फोटो भी पुलिस को दी थी. पुलिस ने फोटो से मिलान किया तो वह लाश अंजलि बजाज की ही निकली.

अंजलि की हत्या किसी धारदार हथियार से की गई थी. गरदन और पेट पर गहरे घाव थे. पुलिस ने आशंका व्यक्त की कि अंजलि की चाकू से गोद कर हत्या की गई थी. देखने से लग रहा था कि हत्या के बाद लाश को घसीट कर नाले के पास गड्ढे में फेंक कर हत्यारा मृतका का मोबाइल ले कर फरार हो गया.

सूचना पर डीसीपी विकास कुमार भी घटनास्थल पर पहुंच गए. उन्होंने लाश व घटनास्थल का निरीक्षण किया. फोरैंसिक टीम को बुलाया गया. शव को घसीटने के निशान व मृतका की एक चप्पल भी घटनास्थल पर मिली थी. लाश मिलने पर पति उदित बजाज को सूचना दी गई. उदित ने घटनास्थल पर पहुंच गए लाश की शिनाख्त अपनी पत्नी अंजलि बजाज के रूप में की. पत्नी का शव देखते ही वे फूटफूट कर रोने लगे. पुलिस ने मौके की जरूरी काररवाई निपटा कर लाश को मोर्चरी भेज दिया.

अब अंजलि की गुमशुदगी का मामला कत्ल के मामले में भादंवि की धारा 302/34/120बी में तब्दील हो चुका था. अंजलि बजाज हत्याकांड के खुलासे के लिए डीसीपी विकास कुमार के निर्देशन में पुलिस की 6 टीमें बनाईं. टीम में एसओजी (सिकंदरा) आनंद कुमार शाही, एसआई सत्येंद्र सिंह, जितेंद्र प्रताप सिंह, सर्विलांस प्रभारी सचिन धामा, सर्विलांस प्रभारी (नगर जोन) अंकुर मलिक के अलावा एसओजी और स्वाट टीम को भी शामिल किया गया.

पुलिस ने कारोबारी उदित बजाज के निवास शास्त्रीपुरम और वनखंडी मंदिर के बीच 9 किलोमीटर के फासले में लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच का काम शुरू कर दिया. मंदिर के पास से जिस रहस्यमय तरीके से अंजलि गायब हुई थी और जिस तरह से उन की हत्या की गई थी, उस से साफ था कि किसी ने यह काम पूरी तैयारी से किया है. आखिर वो हत्यारा कौन हो सकता है?

पुलिस को लगा कि अंजलि की हत्या कारोबारी दुश्मनी के चलते तो नहीं की गई, लेकिन इस के लिए पुलिस को पुख्ता सबूतों की जरूरत थी. पुलिस ने पति उदित बजाज के मोबाइल काल की जांच की, लेकिन उन्हें कोई शक वाली बात नजर नहीं आई.

घूमफिर कर कंचन पर जा रहा था शक

पुलिस को शक हो रहा था कि कहीं उदित बजाज ने ही पत्नी की हत्या कर ये सब नाटक नहीं किया. पुलिस ने उदित से सवालजवाब भी किए. उन्होंने पुलिस को सच्चाई बता दी. उन की बात सुन कर पुलिस को उन की बेटी कंचन पर शक हुआ. बेटी कभी मंदिर तो कभी हाईवे पर मां और पिता को क्यों बुला रही थी? कारोबारी उदित बजाज की 15 वर्षीय बेटी कंचन इस समय 11वीं कक्षा में पढ़ रही है.

पुलिस ने उस से पूछताछ की तो वह घबरा गई और फूटफूट कर रोने लगी. घर वालों व पुलिस ने किसी तरह किशोरी को शांत कराया. उस ने बताया कि मां की हत्या के बारे में उसे कुछ नहीं पता. पुलिस ने कंचन का मोबाइल चैक किया. सोशल मीडिया प्रोफाइल और गैलरी में एक युवक के साथ फोटो मिले. कंचन से पूछा गया, “ये कौन है?”

उस ने कहा, “यह प्रखर गुप्ता है.”

पुलिस ने उस के फोन की गैलरी में एकएक फोटो को खंगाला. एक फोटो में कंचन युवक के साथ बाइक पर बैठी थी, बाइक का नंबर दिखाई दे रहा था. पुलिस ने उस नंबर को चैक किया. प्रखर गुप्ता निवासी दयालबाग, आगरा का नाम और पता निकल कर आ गया.

तब पुलिस को कुछ आशंका हुई. पूछा, “यह तुम्हारा ब्यायफ्रैंड है?”

इस पर कंचन ने मना कर दिया. प्रखर के साथ उस के तमाम फोटो देख कर पुलिस को शक तो होने लगा था, लेकिन पुलिस ने बड़ी खामोशी से प्रखर गुप्ता के बारे में जानकारी करनी शुरू कर दी. इस के बाद पुलिस इस हत्याकांड की कडियां जोडने में जुट गई.

वाट्सएप चैट में छिपा हत्या का राज

कंचन का मोबाइल पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया. मोबाइल से कंचन ने चैट्स और काल हिस्ट्री डिलीट कर दी थी. पुलिस उन्हें रिकवर कर रही थी. पूछताछ के लिए पुलिस कंचन को थाने ले गई. जब पुलिस की जांच आगे बढऩे लगी तो सभी के होश उडऩे लगे.

घटना की जानकारी होने पर उदित के बुजुर्ग मातापिता भी हिल गए. बाबा दादी को नातिनी की चिंता सताने लगी. परिजनों की खुशहाल जिंदगी में अचानक भूचाल आ गया था. किसी की समझ में नहीं आ रहा था कि अब क्या करें. सभी प्रार्थना कर रहे थे कि काश! कंचन घिनौनी साजिश का हिस्सा न निकले. यदि ऐसा हुआ तो उन का बेटा उदित अकेला रह जाएगा. पतिपत्नी ने बेटी को ले कर बड़ेबड़े सपने संजो कर रखे थे.

कारोबारी उदित बजाज की पत्नी अंजलि की मौत अत्यधिक खून बह जाने के कारण हुई थी. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बताया गया कि अंजलि की छाती और पेट पर चाकू से प्रहार किए गए थे. इस से यह अनुमान लगाया गया कि अंजलि ने हत्यारे से अपने बचाव का प्रयास किया इसी दौरान उसे चोट लगी थी.

नाजायज रिश्ते में पति की बलि