Bihar Crime: सनकी आशिक से रहें अलर्ट

Bihar Crime: 18 वर्षीय आरती वरमाला के समय बेहद खुश थी. स्टेज पर जैसे ही उस ने अपने मंगेतर के गले में जयमाला डाली, उसी दौरान किसी ने उस के पेट में सटा कर गोली मार दी. एक झटके में ही 2 परिवारों की खुशियां जयमाला के टूटे फूलों की तरह बिखर गईं…ऐसा क्यों हुआ? किस ने किया? पढ़ें, इस सिरफिरे प्रेमी की कहानी में…

वैसे तो बिहार के शहर बक्सर के जर्रेजर्रे में आज भी वीरता का गौरवशाली इतिहास बोलता है. अंगरेजों से लोहा लेने वाली बंदूकों की आवाज की गूंज की कहानियां भी सुनीसुनाई जाती हैं. किंतु विवाह के मौके पर लोगों का बारात में बंदूक ले कर आना और आतिशबाजी की तरह आसमानी फायर करना सामान्य बात है. बक्सर के चौसा नगर पंचायत में 24 फरवरी, 2026 को नंद चौधरी के घर पर उन की 18 वर्षीय बेटी आरती की बारात आने वाली थी. रात के 10 बज चुके थे. घर पूरी तरह रोशनी से नहाया हुआ था. आवागमन के मुख्य रास्ते पर करीब 250 मीटर की दूरी तक और अगलबगल की गलियों में एलईडी बल्ब, ट्यूबलाइट्स और तेज रोशनी वाले वैपर लाइट की दिन के उजाले जैसी रोशनी फैली हुई थी.

वहां घर के लोगों का आनाजाना हो रहा था. बच्चे भी अपनी धुन में खेलकूद रहे थे. घर के पास में ही एक चौड़ी जगह पर जयमाला का इंतजाम किया गया था. इस के लिए एक किनारे पर टेंट के नीचे मंच सजा दिया गया था. उस पर मुश्किल से 8-10 लोग खड़े हो सकते थे. मंच के सामने कुछ कुरसियां लगाई जा चुकी थीं. वहां की भी सजावट जबदरस्त थी. फूलों की सजावट साथसाथ चौंधिया देने वाली रंगीन रोशनी से गजब का माहौल बन गया था.

घर के लोग बारात आने का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे. हालांकि बलिया से आई बारात जनमासे में पहुंच चुकी थी. बारातियों को नाश्ता वगैरह भी करवाया जा रहा था. उन के तैयार हो कर निकालने की भी लगभग तैयारी हो चुकी थी. बारातियों में से एक व्यक्ति ने उस की कमान संभाल ली थी और सभी को जल्द कमरे और हौल से बाहर निकलने को कह रहे थे. कुछ इसी तरह का माहौल दुलहन के कमरे में भी बना हुआ था. ब्यूटी पार्लर द्वारा सजीधजी दुलहन अपनी सहेलियों और रिश्तेदारों से घिरी बैठी थी. उस की सुंदरता की तरीफें हो रही थीं. हंसीमजाक भी चल रही थी, जबकि घर में विवाह के मुख्य कर्ताधर्ता इस शादी के कार्यक्रम को तेजी से बढ़ाने में लगे हुए थे.

महिलाओं को द्वार पर जल्द बारात लगाए जाने का इंतजार था. वे बारातियों के स्वागत की थाली सजाए हुए थीं. थाली का दीपक बुझने नहीं पाए, इस के लिए साथ में माचिस भी रखी थी. उन में दूल्हे के साथ पारंपरिक रस्में निभाने की उत्सुकता थी. महिलाओं ने इस के लिए अपनेअपने काम बांट लिए थे. इसी बीच एक बुजुर्ग महिला बोली, ”अरे तुम सब यहीं हंसीठिठोली करती रहोगी, बाहर जा कर पता तो करो…बारात जनमासे से निकली भी है या अभी वहीं सज रही है?’’

”आंटी, बारात निकल चुकी है…बैंड की तेज आवाज सुनाई दे रही है.’’ दुलहन की एक सहेली बोली.

”ठीक है, दुलहन को छत पर ले जा, उसे बारात दिखा कर तुरंत ले आना…’’ महिला बोली.

”दुलहन को क्या आंटी?’’ सहेली ने प्रश्न किया.

”अरे, यह भी एक रस्म है…दुलहन को अपनी बारात देखने से उस के लिए शुभ होता है.’’

”अच्छा तो यह बात है…ठीक है आंटी… अरे, चलोचलो, दुलहन को ले चलते हैं छत पर…’’ यह कहती हुई लड़कियां दुलहन को छत पर ले गईं. वहां वे छत के मुंडेर के किनारे जा जा कर खड़ी हो गईं.

तब तक बैंडबाजे की आवाज काफी तेज हो चुकी था. इस का मतलब था कि बारात दरवाजे के नजदीक पहुंच चुकी थी.

घर की बड़ीबुजुर्ग महिलाएं हाथों में दीपबाती का थाल लिए हुए दूल्हे के स्वागत के लिए सजी गाड़ी के पास पहुंच गई थीं. कुछ मिनटों में ही दूल्हे की आरती और पूजन की रस्म अदायगी हो गई. दूल्हे को पास ही मंच पर ले जाया गया. इसी बीच एक महिला ने आवाज लगाई, ”दुलहन को जल्दी से ले कर आओ, जयमाला करनी है.’’

बैंड की तेज आवाज में कौन, क्या बोल रहा है, ठीक से किसी को समझ में नहीं आ रहा था. किंतु उपस्थित लोग इशारेइशारे में वहां के स्वागतसत्कार का काम निपटा रहे थे. फेमिली वालों की तरफ के लड़के बारातियों की आवभगत कर रहे थे. उन्हें कोल्डड्रिंक और नाश्ता परोसा रहे थे, जबकि घर की कुछ लड़कियां और औरतें दूल्हे के आसपास मंच पर जा पहुंची थीं. वे एक लय के साथ विवाह गीत में बारातियों के लिए गालियां गाए जा रही थीं.

दुलहन जैसे ही घर के मुख्य दरवाजे से अपनी सहेलियों के साथ बाहर निकली, फोटाग्राफर और वीडियोग्राफर की लाइटें उस ओर फोकस हो गईं. तेज रोशनी में दुलहन का चेहरा और भी निखरा हुआ दिखने लगा था. वह धीरेधीरे मंच की ओर नजाकत के साथ चलती हुई दूल्हे के पास पहुंच चुकी थी. उन्हें दुल्हे के बगल में बिठाने से पहले जयमाला की रस्म निभानी थी, सो वह घर की 2 लड़कियों के साथ खड़ी हो गई थी. उन के सामने दूल्हा भी आ कर खड़ा हो गया था. उन के साथ भी कुछ लड़के थे. संभवत: वे उन के दोस्त और रिश्तेदार थे.

आरती – जयमाला के समय प्रेमी की गोली का शिकार

दोनों के हाथों में जयमाला पकड़ा दी गई थी. जयमाला पहनाने की पहल दुलहन की तरफ से की गई. उस की एक सहेली ने हाथ में वरमाला को अच्छी तरह पकडऩे को कहा, ”दूल्हा लंबा है, एक झटके में पैर उचका कर माला डाल देना. हम लोग भी तुम्हें सहारा देख थोड़ा उठा देंगे.’’

दुलहन ने इशारे में गरदन हां में हिला दी. एक सहेली बोली, ”लड़के वालो! रेडी हो जाओ… ठीक से जयमाला पकड़ लो…पहले दुलहन माला पहनाएगी, उस के बाद दूल्हे को माला पहनाना है. हां, कोई गड़बड़ी नहीं होनी चाहिए.’’

”आप जैसी खूबसूरत साली हो, तब तो गड़बड़ी हो कर ही रहेगी.’’ दूल्हे का एक दोस्त चुटकी लेते हुए बोला और लड़कियों की तरफ अपना हाथ बढ़ा दिया.

”जो कुछ बोलना है, मुंह से बोल लो… हमें टच करने की कोशिश भी नहीं करना!’’

”साली हो कर इतनी सख्ती ठीक नहीं है.’’

”क्या ठीक, क्या नहीं वह सब बाद में करना पहले लड़के को और पास लाओ!’’ लड़की बोली और दुलहन को एक कदम आगे बढ़ा कर वरमाला के लिए इशारा कर दिया.

दुलहन ने वरमाला दूल्हे की गरदन में डालने के हाथ उठाया, लेकिन यह क्या, दूल्हे को 2 लड़कों ने पैर पकड़ कर काफी ऊंचा उठा दिया… और दुलहन हाथ में वरमाला पकड़े ठगी सी उसे देखती रह गई.

”चालाकी खेलते हैं. अभी मैं भी दिखाती हूं. फेल करती हूं तुम्हारी चालाकी.’’

इसी बीच मंच पर लड़के वालों की तरफ से हलचल मच गई…’’अरेअरे, तू कौन है भाई? बारात का तो नहीं लगता. और…और यहां पिस्टल ले कर कैसे घुस गया दूल्हादुलहन के बीच में? फायरिंग करनी है, तो नीचे जा कर हवाई फायरिंग कर न! यहां जयमाला की रस्म होने दे.’’ दूल्हे का एक दोस्त नाराजगी के साथ बोला.

”मैं तो यहीं फायरिंग करूंगा…तू रोक सकता है तो रोक ले!’’ मंच पर अचानक चढ़ आया युवक भी उसी के लहजे में आक्रोश के साथ बोला और अपनी पिस्टल उस की ओर तान दी.

”अरे…अरे भाई! मजाक मत कर यार, गोली चल जाएगी…हटा ले इसे सामने से!’’ दूल्हे के साथ खड़ा दूसरा लड़का बोल पड़ा.

पिस्टल ताने लड़के ने उस की तरफ से पिस्टल हटा ली, किंतु अगले पल उस ने दुलहन आरती को निशाना बना लिया था. उस की यह हरकत स्टेज पर मौजूद सभी को अटपटी लगी. कई लोगों ने एक सुर में विरोध किया. बैंडबाजे और डेक स्पीकर की आवाज में सभी पिस्टल थामे लड़के को चिल्ला कर बोले जा रहे थे. इसी बीच कब गोली चलने की आवाज आई किसी को पता ही नहीं चला… मंच पर अफरातफरी मच गई. दुलहन वहीं गिर गई थी…उसे गोली लग गई थी.

जयमाला के समय दुलहन आरती की गोली मार कर हत्या का प्रयास करने वाला सिरफिरा आशिक दीनबंधु

यह क्या हो गया? क्या हो गया दुलहन को?… उठाओ जल्दी…! अगले पल वह लड़का वहां से फरार हो गया था. मंच पर जयमाला के फूल बिखर गए थे. एक पल में गोली चलने की बात फैल गई. कुछ लोगों ने तुरंत दुलहन को हाथ और पैरों से टांग कर गाड़ी में डाला और अस्पताल ले गए. तुरंत अस्पताल में भरती कराया गया, जहां उस की हालत नाजुक बनी हुई है. पेट से खून निकल रहा था. अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में डौक्टर जांच करने लगे. तब तक मुफस्सिल थाने की पुलिस भी वहां पहुंच चुकी थी. कानूनी काररवाई शुरू कर दी गई. पुलिस को डौक्टर से मालूम हुआ कि दुलहन को  पेट में सटा कर गोली दागी गई थी.

गोली मारते ही वैवाहिक कार्यक्रम में हड़कंप मच गया. शादी की खुशियां चीखपुकार में बदल गईं. दुलहन आरती को गंभीर हालत में वाराणसी रेफर कर दिया गया. गोली शरीर के नाजुक हिस्से में लगी थी, जिस से उस की स्थिति चिंताजनक बन गई थी. जबकि गोली मारने वाला युवक फरार हो गया था. इस मामले को मुफस्सिल थाना क्षेत्र में दर्ज कर लिया गया. बाराती और ग्रामीण भी जान बचाने के लिए इधरउधर भाग गए थे. पुलिस ने इस घटना के बारे में स्थानीय लोगों और विवाह में आए लोगों से पूछताछ की.

बारात उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के सुलेमानपुर गांव से आई थी. पूरे विधिविधान के साथ विवाह की रस्मों के दरम्यान यह घटना हो गई. पूछताछ में मालूम हुआ कि अचानक जयमाला के मंच पर चढ़ आया युवक पड़ोस का ही दीनबंधु था. उस ने दुलहन को निशाना बना कर गोली चलाई थी. स्थानीय लोगों के अनुसार यह मामला प्रेम प्रसंग से जुड़ा बताया गया. आरोपी युवक आरती का पड़ोसी था और दोनों के बीच पहले से संबंध होने की चर्चा गांव में थी. कुछ लोगों ने बताया कि आरती की शादी तय होने से युवक नाराज था और इसी रंजिश में उस ने यह खौफनाक कदम उठाया.

पुलिस ने जांच में इस जानकारी को नोट कर लिया. सवाल था कि घटना पूर्व नियोजित थी या अचानक गुस्से में अंजाम दी गई. मुफस्सिल थाना पुलिस द्वारा मौके पर छानबीन के बाद रिपोर्ट दर्ज कर ली. पुलिस ने समारोह स्थल से साक्ष्य जुटाए और प्रत्यक्षदर्शियों से पूछताछ पूरी हो जाने के बाद फरार आरोपी की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी करने लगी. इस सनसनीखेज घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया था. ग्रामीणों में आक्रोश साफ देखा देखा जा रहा था. लोग कानूनव्यवस्था पर सवाल उठा रहे थे. वहीं दुलहन की फेमिली पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था. शादी की खुशियां पल भर में मातम में बदल गई थीं. इस का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगा था. यूट्यूबर अपनेअपने अंदाज में वारदात का विवरण दे रहे थे.

दरअसल, सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में दूल्हादुलहन स्टेज पर मौजूद दिखे और पूरा घर शादी की खुशियां मनाता नजर आ रहा था. इतने में जयमाला लाई जाती है और दू्ल्हादुलहन को दी जाती है, जैसे ही रस्म की बारी आती है वैसे ही एक सिरफिरा स्टेज पर आता है और दुलहन पर पिस्टल से फायर कर देता है. दुलहन को गोली लग जाती है. सभी दुलहन को संभालने लगते हैं. मेहमानों के होश उड़ जाते हैं. दुलहन भी बेहोश होकर वहीं स्टेज पर गिर जाती है. हैरान करने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो चुका था.

दुलहन की बारात लौट गई थी. बारात में आए लोगों की प्रतिक्रिया भी जले पर नमक छिड़कने जैसी ही थी. दूल्हे का कहना का कहना था कि अगर पहले पता होता तो वो कभी नहीं आते. घायल दुलहन का भी एक वीडियो आने से पता चल चुका था कि उसे गोली मारने वाला सिरफिरा आशिक दीनबंधु था. वह लंबे से उस के पीछे पड़ा था. पुलिस उस की गिरफ्तारी में जुट गई थी.

जल्द ही आरोपी दीनबंधु गिरफ्तार भी कर लिया गया. जब उस की क्राइम हिस्ट्री की जांच की, तब पाया गया कि शराब तस्करी के मामले में 2021 में वह जेल जा चुका था. उस से पुलिस के लिए यह जानना भी आवश्यक था कि उस के पास हथियार कैसे आए और गोली मारने के पीछे उस की असली मंशा क्या थी? क्या यह सिर्फ प्रेम प्रसंग का मामला था या इस के पीछे कोई और भी कारण था?

आरती के फादर नंद मल्लाह का कहना है कि वह एकतरफा प्यार करता था. लड़की उसे पसंद नहीं करती थी, इसलिए उस ने गोली मार दी. उन्होंने बताया कि आरोपी एक बार पहले भी उन की बेटी की शादी तुड़वा चुका है.

जब शादी तय हुई थी, तब आरोपी ने लड़के के घर वालों को धमकाया था. धमकी से डर कर लड़के वालों ने वह रिश्ता तोड़ दिया था. इस के बाद गांव वालों ने पंचायत बिठाई थी. लड़के को गांव से बाहर भेज दिया गया वह उस पर नजर बनाए हुए था. पुलिस ने आरोपी दीनबंधु के पास से पिस्टल भी बरामद कर ली गई थी. एसपी शुभम आर्य ने बताया कि पूछताछ के दौरान आरोपी ने स्वीकार किया है कि वह एक से अधिक गोली मारना चाहता था, लेकिन पिस्टल फंस जाने के कारण वह दोबारा गोली नहीं चला सका. उस के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी में हत्या या हत्या के प्रयास की बीएनएस की धारा 109 लगाई गई. भारतीय कानून के तहत किसी व्यक्ति को जान से मारने की कोशिश एक गंभीर अपराध माना जाता है.

इस मामले में दुलहन आरती का बयान भी महत्त्वपूर्ण था. उस ने गिरतेगिरते कहा था, ”दीनबंधु ने मुझे गोली मार दिया है.’’

गोली लगने के बाद आरती को तुरंत बक्सर सदर अस्पताल ले जाया गया. वहां उस की हालत गंभीर बताई गई, जिस के बाद आरती को वाराणसी के बीएचयू में रेफर कर दिया गया. दीनबंधु ने पुलिस को बताया कि वह और आरती एक ही मोहल्ले में पलेबढ़े. बचपन में दोनों साथ खेलते थे. जब आरती सिर्फ 6 साल की थी, तब उस के परिवार ने उसे बाहर खेलने से मना कर दिया. इस के बाद वक्त का ऐसा पहिया घूमा कि अगले 15 सालों तक दीनबंधु ने आरती की झलक तक नहीं देखी. वह बस उस की यादों के सहारे बड़ा हुआ.

साल 2024 में दीनबंधु ने आरती को पहली बार सलवारसूट में देखा तो उसे लगा कि यही वो लड़की है जिस के साथ वह अपनी पूरी जिंदगी बिताना चाहता है. दीनबंधु ने हिम्मत जुटाई और अपने दोस्तों के उकसाने पर आरती का पीछा किया. उस ने बीच सड़क पर आरती को रोक कर अपने प्यार का इजहार किया और शादी का प्रस्ताव रखा, लेकिन आरती ने साफसाफ न कह दिया.

उस के बाद उस के दिल और दिमाग में जो हलचल हुई, उस बारे में दीनबंधु ने कहा कि आरती की न सुनने के बाद उसे लगा कि अब पूरी दुनिया खत्म हो गई है. एक बार न सुनने के बाद भी वो लगातार आरती को मनाने की कोशिश करता रहा. उसे लगा कि शायद उस के पुराने आपराधिक रिकौर्ड की वजह से आरती उसे पसंद नहीं कर रही है.

जब उसने दोबारा कोशिश की, तो आरती ने दोटूक शब्दों में कह दिया, ”मैं तुम जैसे लड़के से कभी शादी नहीं करूंगी.’’

आरती की यही बात उस के दिल में सूई की तरह चुभ गई और उस के प्यार को एक जिद में बदल दिया. आरती की शादी एक साल पहले कहीं तय हुई थी. यह खबर सुनते ही वह आपा खो बैठा. वह सीधे लड़के वालों के घर पहुंच गया और उन्हें जान से मारने की धमकी दी. डर के मारे लड़के वालों ने शादी तोड़ दी. इस हरकत से आरती के पापा ने समाज के सामने दीनबंधु के फेमिली वालों को काफी खरीखोटी सुनाई. बेइज्जती से तंग आ कर दीनबंधु के फादर ने उसे काम करने के लिए पंजाब भेज दिया, ताकि वह सुधर जाए, पर उस का दिमाग आरती में ही अटका था.

पंजाब में बैठ कर भी दीनबंधु अपने दोस्तों के जरिए आरती की हर हलचल पर नजर रखे हुए था. उसे पता चला कि अगस्त 2025 में आरती की शादी दोबारा तय हो गई है. यह सुनते ही उस के सिर पर खून सवार हो गया. वह पंजाब से 1300 किलोमीटर दूर उत्तर प्रदेश के गहमर गांव पहुंचा. यह गांव गाजीपुर जिले में गंगा किनारे स्थित है. इसे सैनिकों का गांव भी कहा जाता है. यहां के लगभग हर घर से सेना में जवान हैं. यहां के एक परिचित से उस ने 32 हजार रुपए में एक पिस्टल खरीदी.

22 फरवरी, 2026 को वह चुपचाप अपने गांव पहुंचा और घर जाने के बजाय दोस्त के कमरे पर रुका, ताकि किसी को भनक नहीं लगे. फिर आरती की शादी के रोज वो स्टेज के पास गया और उसे गोली मार दी. उस ने सोचा कि आरती उस की नहीं तो किसी की नहीं हो सकती. संयोग से उस की घटनास्थल पर मौत नहीं हो सकी और उसे गंभीर हालत में अस्पताल में भरती करवा दिया गया. कथा लिखे जाने तक आरती का औपरेशन सफल हो गया था, लेकिन खतरा बना हुआ था. वह बोलने से असमर्थ थी.

आरती के पापा इस घटना से काफी आहत हैं. वह कहते हैं कि अभी भी उन की बेटी बोल नहीं पा रही है और डौक्टर की निगरानी में है. उस की सर्जरी हुई थी, उस के 12 घंटे बाद होश आया था. हम ने शादी के लिए भी काफी कर्ज लिया था और अब इलाज में भी कर्ज ले कर ही पैसा बहा रहे हैं. मुझे पैसों की चिंता नहीं है, मैं बस यह चाहता हूं कि आरोपी के खिलाफ सख्त काररवाई हो. Bihar Crime

 

 

Hindi Short Stories : सिरफिरे आशिकों से बचना जरूरी मोहब्बत हुई खूनी

Hindi Short Stories : 18 वर्षीय महक जैन दिल्ली यूनिवर्सिटी से बीए (आनर्स) इंगलिश की पढ़ाई कर रही थी. पहली जून 2025 को वह कालेज जाने के लिए घर से निकली थी, उसी दिन 22 वर्षीय अर्शकृत सिंह ने संजय वन में चाकू से गोद कर उस की हत्या कर दी. कौन है अर्शकृत सिंह और उस ने महक की हत्या क्यों की? पढ़ें, लव क्राइम की यह कहानी.

प्रीति जैन दोपहर से ही बहुत परेशान थी. उस की छोटी 18 वर्षीय बहन महक जैन सुबह अपने कालेज के लिए गई थी. उस ने 10 बजे प्रीति को फोन किया था कि वह जल्दी घर लौट आएगी. हमेशा महक एकडेढ़ बजे घर वापस आ जाती थी, लेकिन अब दोपहर बाद के 3 बजने को आ गए थे, महक का कोई अतापता नहीं था. उस का फोन भी बंद आ रहा था. प्रीति के लिए यही चिंता की बात थी. उसे मालूम था कि महक कभी भी अपना फोन स्विच्ड औफ नहीं करती थी, उस के फोन की बैटरी भी फुल रहती थी, इसलिए महक का फोन बंद होने की वजह वह नहीं समझ पा रही थी.

घड़ी की सूइयां जैसेजैसे आगे सरक रही थीं, प्रीति के दिल की धड़कनें वैसेवैसे बढ़ती जा रही थीं. कुछ सोच कर उस ने अर्शकृत सिंह को फोन लगाया. घंटी बजने के साथ ही अर्शकृत ने फोन उठा लिया, ”हैलो प्रीति. कैसी हो?’’ अर्शकृत के स्वर में अपनापन था.

”मैं ठीक हूं अर्श, मुझे महक के लिए बात करनी है, वह कहां पर है?’’ प्रीति ने गंभीर स्वर में पूछा.

”मुझे क्या मालूम प्रीति, मैं तो उस से 2 दिन से नहीं मिला हूं.’’ अर्शकृत ने बताया.

”बनो मत अर्श, परसों तुम ने महक का पीछा किया था.’’ प्रीति गुस्सा हो कर बोली, ”महक ने यह बात मुझे खुद बताई थी.’’

”ओह!’’ अर्श ने बड़े इत्मीनान से कहा, ”मैं क्यों महक का पीछा करूंगा प्रीति. हो सकता है जिस रास्ते से मैं जा रहा था, महक उसी रास्ते पर मुझ से आगे रही हो और उसे लगा कि मैं उस का पीछा कर रहा हूं तो यह उस की गलतफहमी रही है.’’

”चलो छोड़ो, अब ठीकठीक बता दो महक कहां है. प्लीज बता दो, मुझे और मम्मी को बहुत टेंशन हो रही है.’’

”मैं ने कहा न प्रीति, मैं महक के विषय में कुछ नहीं जानता, तुम उस की किसी सहेली से मालूम करो.’’ अर्श ने कहने के बाद अपनी तरफ से फोन काट दिया.

प्रीति ने गहरी सांस ली. उसे पूरा विश्वास था कि अर्शकृत महक के बारे में जरूर जानता होगा, लेकिन अर्श की ओर से इंकार कर देने के बाद प्रीति की चिंता और ज्यादा बढ़ गई.

वह अंदर मम्मी मधु जैन के कमरे में आ गई. उस वक्त मधु जैन फोन पर अपने पति राकेश जैन से बात कर रही थी. प्रीति को आया देख कर उस ने पूछा, ”कुछ पता लगा महक का?’’

”नहीं मम्मी. मैं ने अर्श से भी पूछा है, वह कह रहा है कि उस ने महक को नहीं देखा है.’’ प्रीति ने बताया.

”हे मालिक!’’ मधु परेशान स्वर में बोली, ”कहां रह गई यह लड़की आज. रोज तो दोपहर में ही घर आ जाती थी, कभी रुकना होता था तो फोन कर के बता भी देती थी. आज तो उस का मोबाइल भी स्विच्ड औफ आ रहा है. तेरे पापा को बताया तो वह भी परेशान हो गए हैं, वह घर लौट रहे हैं.’’

प्रीति कुछ नहीं बोली. वह सोफे पर सिर झुका कर बैठ गई. मधु उस के पास आ गई. उस के कंधे पर हाथ रख कर बोली, ”तूने उस की सहेलियों से मालूम किया है?’’

”मेरे पास महक की 3 सहेलियों के नंबर हैं, मैं तीनों से मालूम कर चुकी हूं. उन्होंने आज महक को कालेज के अंदर भी नहीं देखा है मम्मी.’’

”अगर महक कालेज ही नहीं गई तो फिर सुबहसुबह कहां चली गई?’’ मधु का स्वर भीगने लगा. उन की आंखें गीली हो गईं. प्रीति की भी आंखें भर आईं.

करीब आधे घंटे बाद राकेश जैन घर आ गए. पत्नी और बेटी को रोता देख कर वह विचलित हो गए. दोनों को ढांढस बंधाते हए वह बोले, ”रोओ मत. मैं कालेज जा कर देखता हूं.’’

”कालेज तो वह पहुंची ही नहीं है पापा.’’ प्रीति ने रोते हुए बताया, ”उस की एक सहेली ने यह बात बताई है.’’

”ओह!’’ राकेश जैन घबरा गए, ”फिर तो शायद रास्ते में ही महक के साथ कोई अनहोनी हुई होगी. मैं देखता हूं जा कर.’’ राकेश जैन ने कहा और जैसे ही उन्होंने बाहर जाने के लिए कदम बढ़ाया, उन का फोन बजने लगा.

”शायद महक का फोन है.’’ आशा भरे स्वर राकेश जैन के मुंह से निकले. उन्होंने मोबाइल निकाला तो उस पर एक नया नंबर देख कर चौंके.

मोबाइल की घंटी बज रही थी. उन्होंने उस नंबर की काल को रिसीव कर लिया, ”हैलो! मैं राकेश जैन बोल रहा हूं.. आप?’’

”मैं सुरजीत सिंह बोल रहा हूं.’’ दूसरी ओर से बोलने वाला बहुत घबराया हुआ लगा, ”आप की बेटी महक ने मेरे बेटे अर्शकृत पर अपने दोस्तों से हमला करवाया है.’’

”क्या बकवास कर रहे हैं आप?’’ राकेश जैन क्रोध से चीख पड़े, ”मेरी बेटी ऐसा क्यों करेगी?’’

”यह तो अपनी बेटी से पूछना तुम. मेरा बेटा अर्शकृत पीतमपुरा के प्राइवेट अस्पताल में घायल पड़ा है. यदि मेरे बेटे को कुछ हुआ तो मैं महक को जेल की चक्की पिसवा दूंगा राकेश जैन.’’ सुरजीत भी गुस्से में चीख पड़ा और उस ने फोन काट दिया.

”क्या हुआ जी?’’ मधु घबरा कर बोली, ”क्या किया महक ने?’’

”उस आवारा लड़के अर्श के बाप का फोन था. कह रहा था कि महक ने उस के बेटे अर्श पर अपने दोस्तों के द्वारा हमला करवाया है, उस का बेटा अर्श अस्पताल में है.’’

”बकवास कर रहे हैं अर्श के डैडी. महक इतनी शांत स्वभाव की है. वह भला अर्श पर क्यों हमला करवाएगी.’’ प्रीति सोफे से उठते हुए बोली.

”वह कहां है यह तो पूछते आप अर्श के डैडी से.’’ मधु जैन परेशान हो कर बोली, ”उन्हें फिर फोन लगाओ.’’

राकेश जैन ने कुछ देर पहले उन के मोबाइल पर आए नंबर को रिडायल किया. दूसरी तरफ से फोन सुरजीत सिंह ने ही अटेंड किया, ”हां बोलो.’’

”महक कहां है?’’

”मुझे नहीं मालूम.’’ सुरजीत सिंह ऐंठ कर बोला.

”आप के बेटे पर महक ने कहां हमला करवाया है, वह जगह तो आप बता ही सकते हैं?’’

”महरौली में संजय वन के पास महक ने अपने दोस्तों के साथ मेरे बेटे को घेर कर चाकू मारे हैं. मैं छोड़ूंगा नहीं महक को,’’ सुरजीत ने कहने के बाद काल डिसकनेक्ट कर दी.

”महरौली के संजय वन में अर्श पर हमला हुआ है. सुरजीत का कहना है कि महक ने अपने दोस्तों के साथ वहां अर्श को घेरा था.’’ राकेश जैन ने बताया फिर प्रीति से बोले, ”तुम साथ चलो बेटी. हम संजय वन जा कर हकीकत मालूम करते हैं. वहां ऐसा कुछ हुआ होगा तो वहां के आसपास पटरी पर खोमचा लगाने वाले बता ही देंगे. महक का भी पता चल जाएगा.’’

”ठीक है पापा,’’ प्रीति ने कहा और तुरंत तैयार हो कर वह अपने पापा के साथ घर से निकल गई.

राकेश जैन ने बेटी प्रीति के साथ महरौली पहुंच कर संजय वन के आसपास पटरी लगाने वालों से वहां आज हुई किसी वारदात के विषय में पूछताछ की. किसी ने भी इस बात की पुष्टि नहीं की कि आज वहां किसी प्रकार की मारपीट या चाकूबाजी की घटना घटी है. सुबह से ही वहां का वातावरण और दिनों की तरह ही था.

”पापा. मुझे तो लगता है अर्श झूठ बोल रहा है. वह महक को फंसाना चाहता है.’’ प्रीति ने अपनी आशंका जाहिर की.

”इस के लिए महक का मिलना भी तो जरूरी है बेटी. वही बताएगी कि सच्चाई क्या है.’’

”मुझे तो अर्शकृत पर शक है. वह जानता है कि महक कहां है, लेकिन बता नहीं रहा है.’’

”हमें अर्शकृत से मिलना चाहिए बेटी.’’ राकेश जैन ने कहा.

”चलिए, हम पीतमपुरा चलते हैं. वह यदि किसी अस्पताल में होगा तो मालूम हो जाएगा, महक कहां है और उस ने कैसे हमला करवाया.’’ प्रीति बोली.

दोनों महरौली से पीतमपुरा के लिए निकले. रास्ते में ही राकेश जैन ने सुरजीत को फोन कर के मालूम कर लिया कि अर्शकृत किस अस्पताल में एडमिट है.

अस्पताल में राकेश जैन अपनी बेटी के साथ पहुंचे तो उन्हें अर्शकृत एक बैड पर पड़ा मिल गया. वह वहां अकेला था.

राजेश जैन ने देखा, उस के हाथों पर 1-2 जगह पट्टियां बंधी थीं. वह आराम से बैड पर लेटा हुआ था. उसे देख कर नहीं लग रहा था कि उस पर चाकुओं से जानलेवा हमला हुआ है. प्रीति को अपने पापा राकेश जैन के साथ देख कर उस ने जख्मी हाथ ऊपर उठा कर कहा, ”देख लो अपनी बेटी की करतूत. उस ने मुझ पर अपने दोस्तों से हमला करवाया है.’’

”महक कहां पर है?’’ राकेश जैन ने पूछा.

”मुझ पर हमला करवा कर भाग गई. कहां गई, मैं नहीं जानता.’’ अर्शकृत ने कहने के बाद चेहरा घुमा लिया.

कुछ सोच कर राकेश जैन बेटी प्रीति को साथ ले कर घर लौट आए. पत्नी से सलाह करने के बाद वह उसे साथ ले कर जहांगीरपुरी थाने पहुंच गए.

वहां उन्होंने एसएचओ सतविंदर सिंह को अपना परिचय दिया और बताया, ”सर, मैं जहांगीरपुरी के के-ब्लौक में अपनी पत्नी मधु और 2 बेटियों के साथ रहता हूं. मेरी छोटी बेटी दिल्ली यूनिवर्सिटी से ओपन लर्निंग कोर्स द्वारा इंगलिश आनर्स की पढ़ाई कर रही है. साथ ही वह मूलचंद में एक इंस्टीट्यूट से कोरियन लैंग्वेज भी सीख रही है.

”वह आज सुबह 8 बजे घर से यह कह कर निकली थी कि वह कालेज जा रही है. वह कालेज से एकडेढ़ बजे तक घर लौट आती थी. आज वह 3 बजे तक नहीं लौटी तो मधु और प्रीति ने उस के विषय में हर संभव जगह पर फोन कर के मालूम किया. चूंकि महक का फोन स्विच्ड औफ आ रहा था, उस की सहेलियों से और अर्शकृत से भी मालूम किया.

”महक की सहेली का कहना था कि महक आज कालेज नहीं आई. जबकि अर्श पहले कहता रहा कि वह महक से 2 दिन से नहीं मिला है, लेकिन सर वह सुबह से महक के विषय में जानता रहा है. क्योंकि…’’

”यह अर्शकृत कौन है?’’ एसएचओ ने पूछा.

”यह महक को एकतरफा प्यार करने वाला सिरफिरा आशिक है. हम ने उसे कितनी ही बार महक से न मिलने और महक को तंग न करने की हिदायत दी थी, लेकिन वह बाज नहीं आया. वह महक के पीछे घर तक भी पहुंचने लगा था सर.’’

”आप कह रहे हैं अर्श आज सुबह महक के साथ था, आप यह बात किस अनुमान से कह रहे हैं?’’

”सर, आज जब हम महक की खोजखबर में परेशान थे, मुझे अर्श के पिता का फोन आया कि अर्श पर महक ने अपने दोस्तों के साथ जानलेवा हमला करवाया है. जगह के बारे में पूछने पर हमें बताया गया कि महरौली के संजय वन के पास यह घटना घटी है. मैं अपनी बेटी के साथ संजय वन गया. वहां पूछताछ की तो मालूम हुआ वहां ऐसी कोई वारदात नहीं हुई.’’

”इस का मतलब अर्श झूठ बोल रहा है.’’

”कह नहीं सकते सर, मैं ने बेटी के साथ पीतमपुरा के प्राइवेट अस्पताल में जा कर अर्श से मुलाकात की. उस के हाथ पर मामूली जख्म है, जिस की पट्टी करवा कर वह अस्पताल के बैड पर आराम से पड़ा हुआ है. वह महक के विषय में कुछ भी नहीं बता रहा है.’’

”ठीक है, मैं अर्शकृत से मिलता हूं. असलियत क्या है वही बताएगा.’’ एसएचओ ने कहने के बाद मधु जैन के द्वारा महक के लापता होने का मामला दर्ज कर लिया और उन का फोन नंबर नोट कर के उन्हें थाने से वापस घर भेज दिया.

जहांगीरपुरी पुलिस ने उसी शाम अर्शकृत से पीतमपुरा के प्राइवेट अस्पताल में जा कर पूछताछ की. अर्शकृत ने पुलिस को यही बताया कि महक ने अपने 2 दोस्तों द्वारा उस पर चाकुओं से हमला करवाया है.

”यह घटना कहां पर घटी है, बताओगे मुझे?’’ एसएचओ सतविंदर सिंह ने उस के चेहरे पर नजरें जमा कर पूछा.

”महरौली के संजय वन में सर.’’

”महक वहां कैसे पहंची, क्या उसे तुम ने बताया था कि तुम महरौली में खड़े हो?’’

इस प्रश्न पर अर्शकृत अचकचा गया. उस ने चेहरा झुका कर धीरे से कहा, ”यह तो महक ही जाने सर.. मैं आज सुबह महरौली गया था.’’

”तुम पर जिन 2 युवकों ने हमला किया, उन्हें पहचानते हो? उन के नामपते नोट करवाओ मुझे.’’

”म… मैं उन्हें नहीं जानता. यह महक जानती होगी, वही उन्हें वहां पर लाई थी.’’

”क्या महक उस वक्त उन युवकों के साथ थी, जिन्होंने तुम पर चाकुओं से हमला किया?’’

”जी हां सर. तभी तो मैं कह रहा हूं, यह महक की ओर से मुझ पर कातिलाना हमला था.’’

”महक ने ऐसा क्यों किया, क्या तुम से उस की दुश्मनी रही है?’’

”कह नहीं सकता सर.’’

”मुझे तो बताया गया है तुम महक से प्यार करते थे, यदि ऐसा था तो कोई लड़की अपने प्रेमी पर हमला क्यों करवाएगी?’’ एसएचओ ने पूछा.

”यह तो सर, महक ही जाने.’’

”मैं बताता हूं.’’ एसएचओ सतविंदर सिंह ने अर्शकृत को जलती आंखों से घूरते हुए कहा, ”तुम महक के पीछे पड़े हुए थे. वह तुम्हें नहीं चाहती थी, लेकिन तुम उसे हर रोज तंग करते थे. इसी से नाराज हो कर उस ने तुम पर हमला करवाया है.’’

”जी, वह भी मुझे प्यार करती थी,’’ अर्शकृत जल्दी से बोला, ”वह मेरी किस बात पर नाराज हो गई, मैं नहीं जानता.’’

”तुम पर जानलेवा हमला हुआ. वे 2 युवक थे, फिर भी तुम्हारे एक ही हाथ पर मामूली सा जख्म हुआ. कहीं किसी पर चाकू चलाने में तो यह हाथ घायल नहीं हुआ है? महक भी सुबह से लापता है, सच्चाई क्या है, बताओगे मुझे?’’

अर्शकृत का चेहरा सफेद पड़ गया. वह अपने को संभाल कर तुरंत बोला, ”आप मुझ पर ही संदेह कर रहे हैं सर, मुझ पर जानलेवा हमला हुआ है, मैं जख्मी हूं… आप जाइए और संजय वन में घटनास्थल देखिए. मैं आराम करना चाहता हूं.’’

एसएचओ मुसकराते हुए खड़े हो गए और मन ही मन बड़बड़ाए, ”बेटा, मैं ने कच्ची गोलियां नहीं खेली हैं. तुम पर जानलेवा हमला नहीं हुआ है, तुम ने महक पर जानलेवा हमला किया है. हम संजय वन चेक कर लें, फिर तुम्हें हथकडिय़ां पहनाऊंगा.’’

एसएचओ सतविंदर सिंह उठ कर अपनी टीम के साथ अस्पताल से बाहर आ गए. अभी अंधेरा नहीं हुआ था. उन्होंने संजय वन जा कर देख लेना उचित समझा तो टीम के साथ महरौली निकल पड़े. महरौली में संजय वन पहुंच कर उन्होंने महक को तलाश किया. उन्हें संदेह था कि यदि अर्शकृत ने महक पर जानलेवा हमला किया होगा तो वह जीवित या मृत अंदर संजय वन में ही पड़ी मिलेगी. 2 घंटे तक अपनी टीम के साथ उन्होंने संजय वन में तलाशा, लेकिन महक उन्हें नहीं मिली.

अंधकार जमीन पर उतर आया था, इसलिए वह टीम के साथ थाने में लौट आए. एसएचओ सतविंदर सिंह ने यह जानकारी एसीपी प्रवीण कुमार को दी तो उन्होंने उन्हें यह केस महरौली थाने को देने के लिए कह दिया. यह दक्षिणी दिल्ली के थाना महरौली की घटना थी. इसलिए यहां की जांच का थाना महरौली ही पड़ता था. एसएचओ सतविंदर सिंह (जहागीरपुरी) ने सारी घटना की जानकारी महरौली थाने को दे कर महक की गुमशुदगी वाला केस उन को हैंडओवर कर दिया.

महरौली थाने में यह मामला बीएनएस की धारा 103 के तहत दर्ज कर के यहां के एसएचओ संजय कमार सिंह ने डीसीपी अंकित चौहान और एसीपी रघुबीर सिंह को पूरी घटना की जानकारी दे दी. उन्होंने एसएचओ संजय कुमार सिंह को यह मामला हल करने का दायित्व सौंप दिया. दूसरी सुबह वह पीतमपुरा के अस्पताल में 22 वर्षीय अर्शकृत से मिलने पहुंचे तो वह वहां से डिसचार्ज हो चुका था.

अस्पताल से उन्हें उस के घर का पता मिल गया. अर्शकृत के पिता सुरजीत सिंह, डब्ल्यूजेड-1552, रानी बाग, दिल्ली में रहते थे. पुलिस टीम वहां पहुंच गई. अर्शकृत को उम्मीद नहीं थी कि पुलिस घर के दरवाजे तक पहुंच जाएगी. पुलिस का सामना उस के पिता सुरजीत सिंह ने किया.

”आप मेरे दरवाजे किसलिए आए हैं?’’ सुरजीत सिंह ने रौब से पूछा.

”आप कौन हैं, हमें अर्शकृत से मिलना है.’’ एसआई विनोद भाटी ने कहा.

”मैं अर्शकृत का फादर हूं. आप अर्शकृत से क्यों मिलना चाहते हैं?’’

”महक के विषय में उस से कुछ पूछताछ करनी है, बुलाइए उसे बाहर.’’

”महक ने तो मेरे बेटे पर जानलेवा हमला करवाया है. आप महक से मिलिए…’’

”आप उसे बुलाते हैं या मैं पुलिस को अंदर भेजूं.’’ विनोद भाटी इस बार कड़क लहजे में बोले तो सुरजीत सिंह की ऐंठन कम हो गई. उस ने अर्शकृत को बाहर बुला लिया.

एसआई भाटी ने उस का हाथ पकड़ लिया और पुलिस वैन में ले आए. पुलिस टीम उसे ले कर महरौली थाने में आ गई.

”अर्शकृत, तुम ने बहुत नाटक कर लिया. अब यदि तुम ने सीधी तरह सच्चाई नहीं उगली तो मुझे सख्ती से पूछताछ करनी पड़ेगी.’’ एसएचओ संजय कुमार सिंह ने रौबदार आवाज में कहा, ”बताओ, महक कहां है?’’

”मैं ने उसे मार डाला है.’’ अर्शकृत सिर झुका कर बोला.

उस की बात पर पुलिस चौंक पड़ी. एसएचओ संजय कुमार सिंह ने गहरी सांस ली, ”महक की लाश कहां है?’’

”संजय वन में मैं ने छिपा दी है सर.’’ अर्शकृत ने बताया.

”चलो, हमें महक की लाश बरामद करवाओ.’’ एसएचओ सिंह ने कहा.

अर्शकृत को संजय वन ले जाने से पहले श्री सिंह ने महक के पिता राकेश जैन को महक की हत्या अर्शकृत द्वारा किए जाने की जानकारी दे दी.

अर्शकृत को पुलिस टीम अपने साथ ले कर संजय वन आ गई. इस समय एसएचओ संजय कुमार सिंह के साथ इंसपेक्टर (कानून एवं व्यवस्था) अनुराग सिंह और एसआई विनोद भाटी भी थे.

अर्शकृत पुलिस को संजय वन के उस कोने में ले गया, जहां ज्यादा पेड़पौधे और जंगली घास थी. महक की लाश अर्शकृत ने जंगली घास में छिपा रखी थी. उस की लाश खून से पूरी तरह सनी हुई थी, खून सूख चुका था. महक का चेहरा और शरीर का कुछ हिस्सा जला हुआ था. महक के शरीर पर कई जगह चाकू के गहरे घाव देखे जा सकते थे. उस की आंखें फटी पड़ी थीं. उस का गला भी घोंटा गया था.

संजय सिंह ने फोन कर के महक की लाश संजय वन में मिलने की जानकारी डीसीपी (दक्षिणी दिल्ली) अंकित चौहान और एसीपी रघुबीर सिंह को दे दी. उन्होंने घटनास्थल पर फोरैंसिक टीम को भी बुला लिया. आधे घंटे में उच्चाधिकारी और फोरैंसिक टीम संजय वन में आ पहुंचे. फोरैंसिक टीम अपने काम में लग गई. डीसीपी अंकित चौहान और एसीपी रघुबीर सिंह ने महक की लाश का निरीक्षण किया, फिर वह इंसपेक्टर संजय कुमार सिंह को कुछ निर्देश दे कर वहां से चले गए.

लाश की काररवाई पूरी कर के इंसपेक्टर संजय कुमार सिंह निपटे ही थे कि महक के मम्मीपापा और बड़ी बहन प्रीति वहां आ गए. अपनी फूल जैसी बेटी का चाकू से गोदा गया जिस्म और जला हुआ चेहरा देख कर मधु जैन और प्रीति दहाड़े मार कर रोने लगीं. राकेश जैन भी फफक कर रोने लगे. उन्हें सांत्वना देते हुए एसएचओ संजय कुमार सिंह ने कहा, ”महक की हत्या हो जाने का मुझे भी दुख है. महक का हत्यारा हमारी पकड़ में है. मैं कोशिश करूंगा, इसे फांसी का फंदा मिले.’’

”मैं भी चाहता हूं सर,’’ राकेश जैन भर्राए स्वर में बोले, ”इसे फांसी से कम सजा नहीं मिलनी चाहिए.’’

कागजी काररवाई करने के बाद महक का शव पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया गया. उस के परिजन भी मोर्चरी के लिए चले गए. अर्शकृत को ले कर पुलिस टीम थाने लौट आई.

पुलिस टीम ने संजय वन और बाहर लगे सभी सीसीटीवी चैक किए तो उन्हें अर्शकृत और महक संजय वन में जाते नजर आ गए. अर्शकृत के हाथ में बोतल भी दिखाई दे रही थी. उस से हत्या में प्रयुक्त चाकू भी बरामद कर लिया गया था. यह अर्शकृत के खिलाफ पुख्ता सबूत थे कि उस ने महक का कत्ल किया है.

थाना महरौली में डीसीपी अंकित चौहान की उपस्थिति में अर्शकृत से महक की हत्या करने का कारण पूछा गया तो उस ने बताया, ”मेरी पहचान महक से कालेज में हुई थी. महक ओपन लर्निंग द्वारा इंगलिश आनर्स की पढ़ाई कर रही थी. मैं बीकाम फस्र्ट ईयर का स्टूडेंट था. महक और मैं पहले हायहैलो करते रहे, फिर धीरेधीरे हम प्यार करने लगे. महक मेरे बुलाने पर कहीं भी आ जाती थी. वह मुझे बहुत प्यार करती थी, लेकिन उस के पेरेंट्स मुझे पसंद नहीं करते थे. उन्होंने कई बार मुझे धमकाया कि मैं महक से न मिलूं. उन्होंने महक को भी मुझ से दूर करने की कोशिश की और वे कामयाब हो गए.’’

अर्शकृत ने रुक कर लंबी सांस ली, फिर बोला, ”सर, मैं महक को बहुत प्यार करता था. वह मुझ से कटने लगी तो मुझे बहुत बुरा लगता था. मैं जानता था महक मेरी है, मेरे लिए ही उस ने धरती पर जन्म लिया है. मैं तब बहुत तड़पा, जब महक ने मुझ से बोलना छोड़ दिया. मैं ने महक से कई बार मिलने की कोशिश की तो वह नहीं मिली. उस के घर गया तो घर वालों ने मेरी बेइज्जती कर के मुझे महक से मिलने नहीं दिया. इस से मेरे अंदर महक के प्रति गुस्सा भरता चला गया.

”मैं ने 2 दिन पहले इरादा बनाया कि महक मेरी नहीं होगी तो किसी दूसरे की नहीं होगी. मैं ने कल पहली जून को पेट्रोल खरीद कर बोतल में भर लिया. चाकू मैं ने पहले ही खरीद लिया था. मैं ने सुबह महक को फोन कर के कहा कि वह एक बार मुझ से मिल ले, फिर बेशक मुझ से किनारा कर लेना.

”महक मान गई. मैं ने महक को महरौली संजय वन में बुलाया. मैं सुबह सवा 8 बजे संजय वन पहुंच गया. महक 10 बजे के बाद आई. मैं ने महक को फिर से दोस्ती करने के लिए कहा, लेकिन उस ने मना कर दिया. हमारी इसी बात पर लड़ाई हो गई. मैं महक को घसीट कर संजय वन के कोने में ले आया.

”मैं गुस्से में था. मैं ने महक पर चाकू से हमला किया, मैं ने कितने चाकू मारे मुझे नहीं मालूम. महक मर गई तो मैं ने उस का गला घोंटा, फिर पेट्रोल डाल कर उस का चेहरा जला दिया ताकि उस की पहचान न हो सके. मैं उस की लाश छिपा कर घर आ गया और फिर प्लान बना कर अस्पताल में एडमिट हो गया. मैं ने अपने पापा से कहा कि महक ने मुझ पर जानलेवा हमला किया है. मैं ने महक का कत्ल किया है. मैं कुबूल करता हूं.’’

अर्शकृत के कबूलनामे के बाद पुलिस ने उसे उसी दिन कोर्ट में पेश कर के जेल भेज दिया गया. कथा लिखने तक पुलिस उस के खिलाफ ठोस सबूत जुटा रही थी. Hindi Short Stories

 

 

 

Andhra Pradesh Crime : सगाई की खबर से भड़का प्रेमी, रची खौफनाक साजिश

आंध्र प्रदेश से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां एक प्रेमी अपनी प्रेमिका की सगाई की खबर सुन कर बौखला गया और गुस्से में आ कर दिल दहला देने वाली साजिश रच डाली. आइए, जानते हैं इस घटना की पूरी स्टोरी :

सिरफिरा प्रेमी

घटना आंध्र प्रदेश के अन्नमय्या जिले की है, जिस में एक सिरफिरे प्रेमी ने 22 साल की अपनी प्रेमिका पर चाकुओं से ताबड़तोड़ वार कर उसे बुरी तरह घायल कर दिया.

घटना के दिन प्रेमिका के मातापिता मवेशियों की देखभाल करने के लिए घर से बाहर थे. मौका देख कर सिरफिरा प्रेमी घर में घुस आया और प्रेमिका पर ताबड़तोड़ चाकू से हमला कर दिया. इतना ही नहीं उस ने बाथरूम साफ करने वाले एसिड से प्रेमिका को झुलसा भी दिया.

एसपी बी. कृष्णा राव ने बताया है कि 24 वर्षीय गणेश के साथ पीड़िता का प्रेमसंबंध चल रहा था. हालांकि कुछ समय बाद युवती की सगाई किसी और से हो गई, जिस के बाद प्रेमिका ने गणेश से कह दिया कि अब मैं इस रिश्ते को आगे नहीं रखना चाहती.

बात करने के बहाने बुला कर किया हमला

प्रेमिका ने प्रेमी को आखिरी बार बात करने के लिए अपने घर बुलाया, लेकिन बातचीत के दौरान दोनों में कहासुनी हो गई. इस के बाद गणेश गुस्से में आ गया और प्रेमिका पर चाकू से हमला कर दिया. हमला करने के बाद वह बाथरूम से एसिड ले आया और प्रेमिका के ऊपर डाल दिया, जिस से वह बुरी तरह झुलस गई.

आरोपी फरार, तलाश में जुटी पुलिस

प्रेमिका पर हमला करने के बाद आरोपी गणेश मौके से फरार हो गया. उसे अरेस्ट करने के लिए एक विशेष पुलिस टीम का गठन कर दिया गया है. टीम उस के छिपने के स्थान पर छापेमारी कर रही है.
वहीं घायल युवती को स्थानीय अस्पताल में प्राथमिक उपचार देने के बाद उसे बैंगलुरु रेफर कर दिया गया है. डाक्टरों का कहना है कि युवती के शरीर पर गहरे चाकू के गहरे घाव हैं और एसिड से झुलसने के कारण उस की हालत गंभीर बनी हुई है.

मुख्यमंत्री ने दिए शख्स पर काररवाई के आदेश

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने इस हमले की कठोर निंदा करते हुए आरोपी के खिलाफ सख्त काररवाई करने का निर्देश दिया है और यह आश्वासन दिया है कि राज्य सरकार पीड़िता और उस के परिवार के साथ खड़ी है. मगर, सवाल यह है कि सिर्फ इतना भर कह देने से पीड़िता का परिवार संतुष्ट हो जाएगा?