मुट्ठी भर उजियारा : क्या साल्वी सोहम को बेकसूर साबित कर पाएगी? – भाग 1

अहमदाबाद में इंजीनियरिंग पढ़ने आई साल्वी ने कई पीजी देखे, पर उसे एक भी पसंद नहीं आया. किसी में सुबह का नाश्ता नहीं मिलता था तो कहीं किराया उस के अनुरूप नहीं था. जो पीजी उसे पसंद आता, वह उस के कालेज से कई किलोमीटर दूर पड़ता था. देखते भालते आखिरकार उसे एक पीजी मिल ही गया जो उस के कालेज से नजदीक भी था और उस के अनुरूप भी.

‘‘यहां तुम्हें साढ़े 8 हजार में 2 शेयरिंग वाला रूम मिलेगा. इन्हीं पैसों में तुम्हें सुबह का नाश्ता, दोपहर और रात के खाने के अलावा लौंड्री की भी सुविधा मिलेगी.’’ पीजी की मालकिन मनोरमा ने कहा.

‘‘जी मैडम,’’ साल्वी बोली.

‘‘यह मैडम मैडम नहीं चलेगा, दीदी बोलो मुझे, जैसे यहां की सारी लड़कियां बोलती हैं.’’ मनोरमा ने कहा, ‘‘और हां, एक महीने का भाड़ा एडवांस डिपौजिट करना पड़ेगा.’’

‘‘ठीक दीदी, मैं कल ही सारे पैसे दे दूंगी.’’ साल्वी बोली.

‘‘हूं…और एक बात, रात के 9 बजे के बाद पीजी से बाहर रहना मना है. बहुत हुआ तो साढ़े 9 बजे तक, उस से ज्यादा नहीं, समझी? वैसे कोई बौयफ्रैंड का चक्कर तो नहीं है न?’’ मनोरमा ने पूछा तो साल्वी ने ‘न’ में सिर हिला दिया.

‘‘वैरी गुड, वैसे कहां से हो तुम? हां, तुम्हारा कोई लोकल गार्जियन है?’’

‘‘जी, मैं पटना से हूं और मेरा कोई लोकल गार्जियन नहीं है दीदी,’’ अपने आप को खुद में समेटते हुए साल्वी ने कहा.

‘‘ठीक है तो फिर…’’ कह कर मनोरमा मुसकरा दी.

वैसे तो मनोरमा 44-45 साल की थी, पर उस ने अपने आप को इतना मेंटेन कर रखा था कि 30-32 से ज्यादा की नहीं लगती थी. देखने में भी वह किसी हीरोइन से कम नहीं लगती थी. ठाठ तो ऐसे कि पूछो मत. इतना बड़ा घर, 2-2 गाडि़यां, नौकरचाकर सब कुछ था उस के पास.

होता भी क्यों न, मनोरमा के पति का अमेरिका में अपना बिजनैस था. एक बेटा भी था जो मैंगलूर रह कर पढ़ाई कर रहा था. जब भी मौका मिलता, बाप बेटा मनोरमा से मिलने आ जाते थे. मनोरमा का भी जब मन होता, उन से मिलने चली जाती थी.

मनोरमा से बात कर के साल्वी अपने कमरे में पहुंची तो वहां उस की रूममेट निधि मिली. निधि ने मुसकरा कर साल्वी का स्वागत किया. आपसी परिचय के बाद निधि ने पूछा, ‘‘साल्वी, तुम कहां से हो?’’

‘‘जी, मैं पटना से.’’ साल्वी ने जवाब दिया.

‘‘ओह, और मैं इंदौर से.’’ कह कर निधि मुसकराई तो साल्वी भी मुसकरा दी.

‘‘यहां पढ़ने आई हो या नौकरी करने?’’ निधि ने सवाल किया.

‘‘जी, यहां के एक कालेज से मैं इंजीनियरिंग करने आई हूं और आप?’’ साल्वी बोली.

‘‘मैं नौकरी करती हूं,’’ निधि ने कहा.

साल्वी के साथ सोहम नाम का एक लड़का भी बीटेक कर रहा था. उस के साथ साल्वी की अच्छी दोस्ती हो गई थी. अच्छी दोस्ती होने का एक कारण यह भी था कि दोनों बिहार से थे. साल्वी ने जब यह बात अपने मम्मी पापा को बताई तो जान कर उन्हें बहुत अच्छा लगा कि चलो इतने बड़े अनजान शहर में कोई तो है अपने राज्य का.

सोहम ने ही साल्वी को बताया था कि उस से बड़ी उस की 2 बहनें हैं, जिन की अभी शादी होनी बाकी है. उस के पापा रेलवे में फोरमैन हैं और किसी तरह अपने परिवार का पालनपोषण कर रहे हैं. पिता को सोहम से उम्मीद है कि एक न एक दिन वह अपने घर की गरीबी जरूर दूर करेगा और उन का सहारा बनेगा.

‘‘लेकिन तुम्हारी पढ़ाई के खर्चे? वह सब कैसे हो पाता है?’’ साल्वी ने पूछा.

‘‘वैसे तो मेरा इस कालेज में मेरिट पर एडमिशन हुआ है, लेकिन फिर भी एडमिशन के वक्त पापा को जमीन का एक टुकड़ा बेचना पड़ा था, जो उन्होंने दीदी की शादी के लिए रखा था. फिर भी रहनेखाने के लिए भी तो पैसे चाहिए थे न, इसलिए मैं ने पार्टटाइम नौकरी कर ली. उस से मेरे पढ़ने और रहने खाने के खर्चे निकल जाते हैं.’’ सोहम ने चेहरे पर स्माइल लाते हुए बताया.

सोहम के बारे में जानने के बाद साल्वी उस से बहुत प्रभावित हुई, क्योंकि आज से पहले वह उस के बारे में इतना ही जान पाई थी कि वह बहुत बड़बोला और मस्तीखोर लड़का है. लेकिन आज उसे पता चला कि कालेज के बाद वह अपने दोस्तों के साथ टाइम पास नहीं करता, बल्कि कहीं पार्टटाइम नौकरी पर जाता है.

‘‘हैलो,’’ साल्वी के आगे चुटकी बजाते हुए सोहम ने पूछा, ‘‘कहां खो गईं मैडम?’’

‘‘मैडम!’’ अपने मोबाइल पर नजर डालते हुए साल्वी चौंक कर उठ खड़ी हुई.

‘‘मैडम से याद आया कि साढ़े 9 बजे के बाद पीजी से बाहर रहना मना है और देखो 10 बजने जा रहे हैं. अब मैं चलती हूं.’’

‘‘अरे 10 बज गए तो क्या हो गया? कौन सा आसमान फट गया? चलो, मैं तुम्हें पीजी तक छोड़ आता हूं और तुम्हारी उस मैडम से भी मिल लूंगा. वैसे भी तुम्हारा पीजी यहां पास में ही तो है.’’ कह कर सोहम उस के साथ चल दिया.

पीजी के नजदीक पहुंचते ही साल्वी ने उस से कहा, ‘‘सोहम, अब तुम यहां से लौट जाओ क्योंकि मनोरमा मैडम ने मुझे सख्त हिदायत दी है कि कोई लड़का पीजी के आसपास भी दिखाई नहीं देना चाहिए.’’ कह कर जैसे ही वह मुड़ी, मनोरमा मैडम बालकनी से उसे ही घूर रही थीं.

मैडम को देखते ही साल्वी घबरा गई. घबराहट के मारे उस की जुबान तालू से चिपक गई तो सोहम नीचे से बोला, ‘‘नमस्ते मैडम, हम एक ही कालेज में पढ़ते हैं इसलिए हमारी दोस्ती हो गई. वैसे भी मैं यहीं पास में ही रहता…’’ बोलते बोलते सोहम की भी घिग्घी बंध गई, जब मनोरमा की घूरती हुई नजर उस पर आ टिकी.

‘‘तुम ने तो कहा था कि तुम्हारा कोई बौयफ्रैंड नहीं, फिर?’’ मनोरमा साल्वी को घूरते हुए बोली.

‘‘नहीं दीदी, आप जैसा समझ रही हैं, वैसा कुछ भी नहीं है. हम लोग बस दोस्त हैं.’’ किसी तरह साल्वी बोल पाई.

‘‘देखो, बौयफ्रैंड रखना गलत बात नहीं है पर झूठ मुझे पसंद नहीं और वक्त तो देखो. वैसे लड़का अच्छा है.’’ कह कर मनोरमा मुसकराई तो दोनों की जान में जान आई.

‘‘कोई बात नहीं, तुम भी अंदर आ जाओ.’’ हुक्म मिलते ही सोहम भी साल्वी के पीछे लग गया.

‘‘साल्वी, तुम तो कहती थीं कि तुम्हारी मैडम बड़ी सख्त है, पर ये तो बड़ी रहमदिल है.’’ सोहम ने फुसफुसाते हुए कहा तो साल्वी ने उसे कोहनी मार कर चुप करने को कहा. यह करते हुए मनोरमा ने उसे देख लिया.

वह बोली, ‘‘क्या बातें हो रही हैं?’’

‘‘कुछ नहीं दीदी, यह कह रहा था कि अब मैं चलता हूं और कुछ नहीं.’’ साल्वी ने सोहम को इशारे से जाने के लिए कहा.

‘‘अरे इस में क्या है, आया है तो बैठने दो थोड़ी देर.’’ मनोरमा बोली.

सोहम यहां कब से है, कहां रहता है, किस चीज की पढ़ाई कर रहा है और उस के घर में कौनकौन हैं. यह सब जानने के बाद मनोरमा उस से काफी इंप्रैस हुई. फिर वह अपने बारे में भी बताने लगी, ‘‘तुम्हारी ही उम्र का मेरा भी एक बेटा है, जो मैंगलूर में मैडिकल की पढ़ाई कर रहा है.’’

धीरेधीरे सोहम की भी मनोरमा मैडम से अच्छी बनने लगी. अब वह जब भी वक्त मिलता बेधड़क मनोरमा मैडम के घर चला आता.  मनोरमा को भी उस का आना अच्छा लगता था. कुछ न कुछ छोटे मोटे काम, जो भी मनोरमा कहती, वह इसलिए कर दिया करता, क्योंकि कहीं न कहीं उस में उसे अपनी मां की छवि दिखाई देती थी.

फिर मनोरमा भी तो उसे अपने बेटे की तरह ही समझती थी. मनोरमा ने उस से यह भी कहा था कि वह उस के लिए एक अच्छी नौकरी देखेगी, जहां उसे ज्यादा सैलरी मिले और उस की पढ़ाई में भी हर्ज न हो. शायद इस लोभ से भी वह मनोरमा का कोई भी काम, जो वह कहती, हंसतेहंसते कर देता था.

जब सोहम का मनोरमा के यहां आनाजाना बढ़ गया तो एक दिन साल्वी बोली, ‘‘सोहम, क्या बात है, आजकल मनोरमा मैडम से बड़ी पट रही है तुम्हारी. कहीं कोई लोचा तो नहीं. देखो, उस औरत को कम मत समझना. मुझे तो वो बड़ी शातिर दिखती है और वैसे भी बिना अपने फायदे के वह किसी की भी मदद नहीं करती.’’

‘‘तुम लड़कियां भी न, कितनी बेकार की कहानियां बनाती हो. कितना अच्छा तो व्यवहार है उस का और तुम कहती हो कि बड़ी सख्त है.’’ कह कर सोहम ठहाका लगा कर हंसने लगा.

‘‘अच्छा छोड़ो ये सब बातें. चलो, आज हम कहीं बाहर खाना खाते हैं.’’

‘‘हांहां चलो, वैसे भी पीजी का खाना खा खा कर बोर हो गई हूं. मगर पैसे मैं दूंगी.’’ साल्वी बोली.

‘‘हां, ठीक है.’’

इस के बाद दोनों ने एक अच्छे होटल में जा कर खाना खाया. कुछ देर बातें कीं. फिर अपनेअपने रास्ते चल दिए. दोनों ऐसा अकसर छुट्टी के दिन करते थे. दोनों की छुट्टी बड़े मजे से गुजर जाती थी. इन की दोस्ती और पढ़ाई का भी हंसते खेलते एक साल चुटकियों में निकल गया. अब दूसरे साल का एग्जाम भी नजदीक था, सो सोहम और साल्वी अपनी अपनी पढ़ाई में जुट गए.

फिर क्यों? : दीपिका की बदकिस्मती – भाग 3

तुषार ने 4-5 दिनों में पेपर तैयार कर के दीपिका को दिए तो वह धर्मसंकट में पड़ गई कि सिग्नेचर करूं या न करूं. इसी उधेड़बुन में 3 दिन बीत गए तो घर में झाड़ूपोंछा लगाने वाली सरोजनी अचानक उस से बोली, ‘‘मेमसाहब, सुना है कि आप बैंक से लोन ले कर तुषार बाबू को देंगी?’’

‘‘तुम्हें किस ने बताया?’’ दीपिका ने हैरत से पूछा.

‘‘कल आप के घर से काम कर के जा रही थी तो बरामदे में तुषार बाबू और उस की मां के बीच हुई बात सुनी थी. तुषार बाबू कह रहे थे, ‘चिंता मत करो मां. लोन ले कर दीपिका रुपए मुझे दे देगी तो उसे घर में रहने नहीं दूंगा. उस पर तरहतरह के इल्जाम लगा कर घर से बाहर कर दूंगा.’’

सरोजनी चुप हो गई तो दीपिका को लगा उस के दिल की धड़कन बंद हो जाएगी. पर जल्दी ही उस ने अपने आप को संभाल लिया. सरोजनी को डांटते हुए कहा, ‘‘बकवास बंद करो.’’

सरोजनी डांट खा कर पल दो पल तो चुप रही. फिर बोली, ‘‘कुछ दिन पहले मेरे बेटे की तबीयत बहुत खराब हुई थी तो आप ने रुपए से मेरी बहुत मदद की थी. इसीलिए मैं ने कल जो कुछ भी सुना था, आप को बता दिया.’’

वह फिर बोली, ‘‘मेमसाहब, तुषार बाबू से सावधान रहिएगा. वह अच्छे इंसान नहीं हैं. उन की नजर हमेशा अमीर लड़कियों पर रहती थी. उन्होंने आप से शादी क्यों की, मेरी समझ से बाहर की बात है. इस में भी जरूर उन का कोई न कोई मकसद होगा.’’

शक घर कर गया तो दीपिका ने अपने मौसेरे भाई सुधीर से तुषार की सच्चाई का पता लगाने का फैसला किया. सुधीर पुलिस इंसपेक्टर था. सुधीर ने 10 दिन में ही तुषार की जन्मकुंडली खंगाल कर दीपिका के सामने रख दी.

पता चला कि तुषार आवारा किस्म का था. प्राइवेट जौब से वह जो कुछ कमाता था, अपने कपड़ों और शौक पर खर्च कर देता था. वह आकर्षक तो था ही, खुद को ग्रैजुएट बताता था. अमीर घर की लड़कियों को अपने जाल में फांस कर उन से पैसे ऐंठना वह अच्छी तरह जानता था.

दीपिका को यह भी पता चल चुका था कि उस से 50 लाख रुपए ऐंठने का प्लान तुषार ने अपनी मां के साथ मिल कर बनाया था.  मां ऐसी लालची थी कि पैसों के लिए कुछ भी कर सकती थी. उस ने तुषार को दीपिका से शादी करने की इजाजत इसलिए दी थी कि तुषार ने उसे 2 लाख रुपए देने का वादा किया था. विवाह के एक साल बाद तुषार ने अपना वादा पूरा भी कर दिया था.

तुषार पर दीपिका से किसी भी तरह से रुपए लेने का जुनून सवार था. रुपए के लिए वह उस के साथ कुछ भी कर सकता था.  तुषार की सच्चाई पता लगने पर दीपिका को अपना अस्तित्व समाप्त होता सा लगा. अस्तित्व बचाने के लिए कड़ा फैसला लेते हुए दीपिका ने तुषार को कह दिया कि वह बैंक से किसी भी तरह का लोन नहीं लेगी.

तुषार को बहुत गुस्सा आया, पर कुछ सोच कर अपने आप को काबू में कर लिया. उस ने सिर्फ  इतना कहा, ‘‘मुझे तुम से ऐसी उम्मीद नहीं थी.’’

कुछ दिन खामोशी से बीत गए. तुषार और उस की मां ने दीपिका से बात करनी बंद कर दी.

दीपिका को लग रहा था कि दोनों के बीच कोई खिचड़ी पक रही है. पर क्या, समझ नहीं पा रही थी.

एक दिन सास तुषार से कह रही थी, ‘‘दीपिका को कब घर से निकालोगे? उस ने तो लोन लेने से भी मना कर दिया है. फिर उसे बरदाश्त क्यों कर रहे हो?’’

‘‘उस से तो 50 लाख ले कर ही रहूंगा मां.’’ तुषार ने कहा.

‘‘पर कैसे?’’

‘‘उस का कत्ल कर के.’’

उस की मां चौंक गई, ‘‘मतलब?’’

‘‘मुझे पता था कि फरजी कागजात पर वह लोन नहीं लेगी. इसलिए 7 महीने पहले ही मैं ने योजना बना ली थी.’’

‘‘कैसी योजना?’’

‘‘दीपिका का 50 लाख रुपए का जीवन बीमा करा चुका हूं. उस का प्रीमियम बराबर दे रहा हूं. उस की हत्या करा दूंगा तो रुपए मुझे मिल जाएंगे, क्योंकि नौमिनी मैं ही हूं.’’

तुषार की योजना पर मां खुश हो गई. कुछ सोचते हुए बोली, ‘‘अगर पुलिस की पकड़ में आ जाओगे तो सारी की सारी योजना धरी की धरी रह जाएगी.’’

‘‘ऐसा नहीं होगा मां. दीपिका की हत्या कुछ इस तरह से कराऊंगा कि वह रोड एक्सीडेंट लगेगा. पुलिस मुझे कभी नहीं पकड़ पाएगी. बाद में गौरांग का भी कत्ल करा दूंगा.’’

कुछ देर चुप रह कर तुषार ने फिर कहा, ‘‘दीपिका की मौत के बाद अनुकंपा के आधार पर बैंक में मुझे नौकरी भी मिल जाएगी. फिर किसी अमीर लड़की से शादी करने में कोई परेशानी नहीं होगी.’’

दीपिका ने दोनों की बात मोबाइल में रिकौर्ड कर ली थी. मांबेटे के षडयंत्र का पता चल गया था. अब उस का वहां रहना खतरे से खाली नहीं था.

इसलिए एक दिन वह बेटे गौरांग को ले कर किसी बहाने से मायके चली गई. सारा घटनाक्रम मम्मीपापा को बताया तो उन्होंने तुषार से तलाक लेने की सलाह दी. दीपिका तुषार को सिर्फ तलाक दे कर नहीं छोड़ना चाहती थी. बल्कि वह उसे जेल की हवा खिलाना चाहती थी. यदि उसे यूं छोड़ देती तो वह फिर से किसी न किसी लड़की की जिंदगी बरबाद कर देता.

फिर थाने जा कर दीपिका ने तुषार के खिलाफ रिपोर्ट लिखाई. सबूत में मोबाइल में रिकौर्ड की गई बातें पुलिस को सुना दीं. तब पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर तुषार को गिरफ्तार कर लिया. कुछ महीनों बाद ही दीपिका ने तुषार से तलाक ले लिया. इस के बाद पापा ने उसे फिर से शादी करने का सुझाव दिया.

शादी के नाम का कोई ठप्पा अब दीपिका नहीं लगाना चाहती थी. पापा को समझाते हुए बोली, ‘‘मुझे किस्मत से जो मिलना था, मिल चुका है. फिलहाल जिंदगी से बहुत खुश भी हूं. फिर शादी क्यों करूं. आप ही बताइए पापा कि इंसान को जीने के लिए क्या चाहिए? खुशी और संतुष्टि, यही न? बेटे की परवरिश करने से जो खुशी मिलेगी, वही मेरी उपलब्धि होगी. फिर मैं बारबार किस्मत आजमाने क्यों जाऊं?’’

पापा को लगा कि दीपिका सही रास्ते पर है. फिर वह चुप हो गए.

फिर क्यों? : दीपिका की बदकिस्मती – भाग 2

5 दिन बाद दीपिका जब कुछ सामान्य हुई तो मां ने उसे समझाते हुए गर्भपात करा कर दूसरी शादी करने की सलाह दी.

कुछ सोच कर दीपिका बोली, ‘‘मम्मी, गलती मैं ने की है तो बच्चे को सजा क्यों दूं. मैं ने फैसला कर लिया है कि मैं बच्चे को जन्म दूंगी. उस के बाद ही भविष्य की चिंता करूंगी.’’

दीपिका को ससुराल आए 20 दिन हो चुके थे तो अचानक तुषार आया. वह बोला, ‘‘मुझे विश्वास है कि तुम बदचलन नहीं हो. तुम्हारे पेट में मेरे भाई का ही अंश है.’’

‘‘जब तुम यह बात समझ रहे थे तो उस दिन अपना मुंह क्यों बंद कर लिया था, जब सभी मुझे बदचलन बता रहे थे?’’ दीपिका ने गुस्से में कहा.

‘‘उस दिन मैं तुम्हारे भविष्य को ले कर चिंतित हो गया था. फिर यह फैसला नहीं कर पाया था कि क्या करना चाहिए.’’ तुषार बोला.

दीपिका अपने गुस्से पर काबू करते हुए बोली, ‘‘अब क्या चाहते हो?’’

‘‘तुम से शादी कर के तुम्हारा भविष्य संवारना चाहता हूं. तुम्हारे होने वाले बच्चे को अपना नाम देना चाहता हूं. इस के लिए मैं ने मम्मीपापा को राजी कर लिया है.’’

औफिस और मोहल्ले में वह बुरी तरह बदनाम हो चुकी थी. सभी उसे दुष्चरित्र समझते थे. ऐसी स्थिति में आसानी से किसी दूसरी जगह उस की शादी होने वाली नहीं थी, इसलिए आत्ममंथन के बाद वह उस से शादी के लिए तैयार हो गई.

दीपिका बच्चे की डिलीवरी के बाद शादी करना चाहती थी, लेकिन तुषार ने कहा कि वह डिलीवरी से पहले शादी कर के बच्चे को अपना नाम देना चाहता है. ऐसा ही हुआ. डिलीवरी से पहले उन दोनों की शादी हो गई.

जिस घर से दीपिका बेइज्जत हो कर निकली थी, उसी घर में पूरे सम्मान से तुषार के कारण लौट आई थी. फलस्वरूप दीपिका ने तुषार को दिल में बसा कर प्यार से नहला दिया और पलकों पर बिठा लिया. तुषार भी उस का पूरा खयाल रखता था. घर का कोई काम उसे नहीं करने देता था. काम के लिए उस ने नौकरी रख दी थी. तुषार का भरपूर प्यार पा कर दीपिका इतनी गदगद थी कि उस के पैर जमीन पर नहीं पड़ रहे थे.

डिलीवरी का समय हुआ तो बातोंबातों में तुषार ने दीपिका से कहा, ‘‘तुम अपने बैंक की डिटेल्स दे दो. डिलीवरी के समय अगर मेरे एकाउंट में रुपए कम पड़ जाएंगे तो तुम्हारे एकाउंट से ले लूंगा.’’

दीपिका को उस की बात अच्छी लगी. बैंक की पासबुक, डेबिट कार्ड और ब्लैंक चैक्स पर दस्तखत कर के पूरी की पूरी चैकबुक उसे दे दी.

नौरमल डिलीवरी से बेटा हुआ तो उस का नाम गौरांग रखा गया. 6 महीने बाद तुषार ने हनीमून पर शिमला जाने का प्रोग्राम बनाया तो दीपिका ने मना नहीं किया.  वहां से लौट कर आई तो बहुत खुश थी. तुषार का अथाह प्यार पा कर वह विक्रम को भूल गई थी.

गौरांग एक साल का हो गया था. फिर भी दीपिका ने तुषार से डेबिट कार्ड और दस्तखत किए हुए चैक्स वापस नहीं लिए थे. इस की कभी जरूरत महसूस नहीं की थी. तुषार ने उस के अंधकारमय जीवन को रोशनी से नहला दिया था. ऐसे में भला वह उस पर अविश्वास कैसे कर सकती थी.

जरूरत तब पड़ी, जब एक दिन दीपिका के पिता को बिजनैस में कुछ नुकसान हुआ और उन्होंने उस से 3 लाख रुपए मांगे. तब दीपिका ने पिता का एकाउंट नंबर तुषार को देते हुए कहा, ‘‘तुषार, मेरे एकाउंट से पापा के एकाउंट में 3 लाख रुपए ट्रांसफर कर देना.’’

इतना सुनते ही तुषार ने दीपिका से कहा, ‘‘डार्लिंग, तुम्हारे एकाउंट में रुपए हैं कहां. मुश्किल से 2-4 सौ रुपए होंगे.’’

दीपिका को झटका लगा. क्योंकि उस के एकाउंट में तो 12 लाख रुपए से अधिक थे. आखिर वे पैसे गए कहां.

उस ने तुषार से पूछा, ‘‘मेरे एकाउंट में उस समय 12 लाख रुपए से अधिक थे. इस के अलावा हर महीने 40 हजार रुपए सैलरी के भी आ रहे थे. सारे के सारे पैसे कहां खर्च हो गए?’’

तुषार झुंझलाते हुए बोला, ‘‘कुछ तुम्हारी डिलीवरी में खर्च हुए, कुछ हनीमून पर खर्च हो गए. बाकी रुपए घर की जरूरतों पर खर्च हो गए. तुम्हारे पैसों से ही तो घर चल रहा है. मेरी सैलरी और पापा की पेंशन के पैसे तो शिखा की शादी के लिए जमा हो रहे हैं.’’

तुषार का जवाब सुन कर दीपिका खामोश हो गई. पर उसे यह समझते देर नहीं लगी कि उस के साथ कहीं कुछ न कुछ गलत हो रहा है.  डिलीवरी के समय उसे छोटे से नर्सिंगहोम में दाखिल किया गया था. उस का बिल मात्र 30 हजार रुपए आया था. हनीमून पर भी अधिक खर्च नहीं हुआ था. जिस होटल में ठहरे थे, वह बिलकुल साधारण सा था. उन का खानापीना भी सामान्य हुआ था.

जो होना था, वह हो चुका था. उस पर बहस करती तो रिश्ते में खटास आ जाती. लिहाजा उस ने भविष्य में सावधान रहने की ठान ली.

तुषार से अपनी बैंक पास बुक, चैकबुक और डेबिट कार्ड ले कर उस ने कह दिया कि वह घर खर्च के लिए महीने में सिर्फ 10 हजार रुपए देगी. सैलरी के बाकी पैसे गौरांग के भविष्य के लिए जमा करेगी और शिखा की शादी में 2 लाख रुपए दे देगी.  दीपिका के निर्णय से तुषार को दुख हुआ, लेकिन वह उस समय कुछ बोला नहीं.

अगले दिन ही दीपिका ने बैंक से ओवरड्राफ्ट के जरिए पैसे ले कर अपने पिता को दे दिए. पर उन्हें यह नहीं बताया कि तुषार ने उस के सारे रुपए खर्च कर दिए हैं.

कुछ दिनों तक सब कुछ सामान्य रहा. उस के बाद अचानक तुषार ने उस से कहा, ‘‘मैं ने नौकरी छोड़ दी है.’’

‘‘क्यों?’’ दीपिका ने पूछा.

‘‘बिजनैस करना चाहता हूं. इस के लिए तैयारी कर ली है, पर तुम्हारी मदद के बिना नहीं कर सकता.’’

‘‘तुम्हारी मदद हर तरह से करूंगी. बताओ, मुझे क्या करना होगा?’’ दीपिका ने पूछा.

‘‘तुम्हें अपने नाम से 50 लाख रुपए का लोन बैंक से लेना है. उसी रुपए से बिजनैस करूंगा. मेरा कुछ इस तरह का बिजनैस होगा कि लोन 5 साल में चुकता हो जाएगा.’’

‘‘इतने रुपए का लोन मुझे नहीं मिलेगा. अभी नौकरी लगे 5 साल ही तो हुए हैं.’’

‘‘मैं ने पता कर लिया है. होम लोन मिल जाएगा.’’

‘‘होम लोन लोगे तो बिजनैस कैसे करोगे. इस लोन में फ्लैट या कोई मकान लेना ही होगा.’’ दीपिका ने बताया.

‘‘इस की चिंता तुम मत करो. मैं ने सारी व्यवस्था कर ली है. तुम्हें सिर्फ होम लोन के पेपर्स पर दस्तखत कर बैंक में जमा करने हैं.’’

‘‘मैं कुछ समझी नहीं, तुम करना क्या चाहते हो. ठीक से बताओ.’’

तुषार ने अपनी योजना दीपिका को बताई तो वह सकते में आ गई. दरअसल तुषार ब्रोकर के माध्यम से फरजी कागजात पर होम लोन लेना चाहता था. इस में उसे 3 महीने बाद पूरे रुपए कैश में मिल जाता. बाद में ब्रोकर अपना कमीशन लेता. दीपिका ने इस काम के लिए मना किया तो तुषार ने उसे अपनी कसम दे कर कर अंतत: मना लिया.

फिर क्यों? : दीपिका की बदकिस्मती – भाग 1

विक्रम से शादी कर दीपिका ससुराल आई तो खुशी से झूम उठी. यहां उस का इतना भव्य  स्वागत होगा, इस की उस ने कल्पना भी नहीं की थी.  सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक ससुराल में रस्में चलती रहीं. इस के बाद वह कमरे में आराम करने लगी.

शाम करीब 4 बजे कमरे में विक्रम आया और दीपिका से बोला, ‘‘मेरा एक दोस्त बहुत दिनों से कैंसर से जूझ रहा था. उस के घर वालों ने फोन पर अभी मुझे बताया है कि उस का देहांत हो गया है. इसलिए मुझे उस के घर जाना होगा.’’

दीपिका का ससुराल में पहला दिन था, इसलिए उस ने पति को रोकने की बहुत कोशिश की लेकिन विक्रम उसे यह समझा कर चला गया, ‘‘तुम चिंता मत करो, देर रात तक वापस आ जाऊंगा.’’

विक्रम के जाने के बाद उस की छोटी बहन शिखा दीपिका के पास आ गई और उस से कई घंटे तक इधरउधर की बातें करती रही. रात के 9 बजे दीपिका को खाना खिलाने के बाद शिखा उस से यह कह कर चली गई कि भाभी अब थोड़ी देर सो लीजिए. भैया आ जाएंगे तो फिर आप सो नहीं पाएंगी.

ननद शिखा के जाने के बाद दीपिका अपने सुखद भविष्य की कल्पना करतेकरते कब सो गई, उसे पता ही नहीं चला.

दीपिका अपने मांबाप की एकलौती बेटी थी. उस से 3 साल छोटा उस का भाई शेखर था. वह 12वीं कक्षा में पढ़ता था. पिता की कपड़े की दुकान थी. ग्रैजुएशन के बाद दीपिका ने नौकरी की तैयारी की तो 10 महीने बाद ही एक बैंक में उस की नौकरी लग गई थी.

2 साल नौकरी करने के बाद पिता ने विक्रम नाम के युवक से उस की शादी कर दी. विक्रम की 3 साल पहले ही रेलवे में नौकरी लगी थी. उस के पिता रिटायर्ड शिक्षक थे और मां हाउसवाइफ थीं.  विक्रम से 3 साल छोटा उस का भाई तुषार था, जो 10वीं तक पढ़ने के बाद एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करने लगा था. तुषार से 4 साल छोटी शिखा थी, जो 11वीं कक्षा में पढ़ रही थी.

पति के जाने के कुछ देर बाद दीपिका गहरी नींद सो रही थी, तभी ननद शिखा उस के कमरे में आई. उस ने दीपिका को झकझोर कर उठाया. शिखा रो रही थी. रोतेरोते ही वह बोली, ‘‘भाभी, अनर्थ हो गया. विक्रम भैया दोस्त के घर से लौट कर आ रहे थे कि रास्ते में उन की बाइक ट्रक से टकरा गई. घटनास्थल पर उन की मृत्यु हो गई. पापा को थोड़ी देर पहले ही पुलिस से सूचना मिली है.’’

यह खबर सुनते ही दीपिका के होश उड़ गए. उस समय रात के 2 बज रहे थे. क्या से क्या हो गया था. पति की मौत का दीपिका को ऐसा गम हुआ कि वह उसी समय बेहोश हो गई.

कुछ देर बाद उसे होश आया तो अपने आप को उस ने घर के लोगों से घिरा पाया. पड़ोस के लोग भी थे. सभी उस के बारे में तरहतरह की बातें कर रहे थे. कोई डायन कह रहा था, कोई अभागन तो कोई उस का पूर्वजन्म का पाप बता रहा था.  रोने के सिवाय दीपिका कर ही क्या सकती थी. कुछ घंटे पहले वह सुहागिन थी और कुछ देर में ही विधवा हो गई थी. खबर पा कर दीपिका के पिता भी वहां पहुंच गए थे.

अगले दिन पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने विक्रम का शव घर वालों को सौंप दिया था. तेरहवीं के बाद दीपिका मायके जाने की तैयारी कर रही थी कि अचानक सिर चकराया और वह फर्श पर गिर कर बेहोश हो गई. ससुराल वालों ने उठा कर उसे बिस्तर पर लिटाया. मेहमान भी वहां आ गए.

डाक्टर को बुलाया गया. चैकअप के बाद डाक्टर ने बताया कि दीपिका 2 महीने की प्रैग्नेंट है. पर वह बेहोश कमजोरी के कारण हुई थी.

2 सप्ताह पहले ही तो दीपिका बहू बन कर इस घर में आई थी तो 2 महीने की प्रैग्नेंट कैसे हो गई. सोच कर सभी लोग परेशान थे. दीपिका के पिता भी वहीं थे. वह सकते में आ गए.

दीपिका को होश आया तो सास दहाड़ उठी, ‘‘बता, तेरे पेट में किस का पाप है? जब तू पहले से इधरउधर मुंह मारती फिर रही थी तो मेरे बेटे से शादी क्यों की?’’

दीपिका कुछ न बोली. पर उसे याद आया कि रोका के 2 दिन बाद ही विक्रम ने उसे फोन कर के मिलने के लिए कहा था. उस ने विक्रम से मिलने के लिए मना करते हुए कहा, ‘‘मेरे खानदान की परंपरा है कि रोका के बाद लड़की अपने होने वाले दूल्हे से शादी के दिन ही मिल सकती है. मां ने आप से मिलने से मना कर रखा है.’’

विक्रम ने उस की बात नहीं मानी थी. वह हर हाल में उस से मिलने की जिद कर रहा था. तो वह उस से मिलने के लिए राजी हो गई.

शाम को छुट्टी हुई तो दीपिका ने मां को फोन कर के झूठ बोल दिया कि आज औफिस में बहुत काम है. रात के 8 बजे के बाद ही घर आ पाऊंगी. फिर वह उस से मिलने के लिए एक रेस्टोरेंट में चली गई. उस दिन के बाद भी उन के मिलनेजुलने का कार्यक्रम चलता रहा. विक्रम अपनी कसम दे दे कर उसे मिलने के लिए मजबूर कर देता था. वह इतना अवश्य ध्यान रखती थी कि घर वालों को यह भनक न लगे.

एक दिन विक्रम उसे बहलाफुसला कर एक होटल में ले गया. कमरे का दरवाजा बंद कर उसे बांहों में भरा तो वह उस का इरादा समझ गई. दीपिका ने शादी से पहले सीमा लांघने से मना किया लेकिन विक्रम नहीं माना. मजबूर हो कर उस ने आत्मसमर्पण कर दिया.

गलती का परिणाम अगले महीने ही आ गया. जांच करने पर पता चला कि वह प्रैग्नेंट हो गई है. विक्रम का अंश उस की कोख में आ चुका था. वह घबरा गई और उस ने विक्रम से जल्दी शादी करने की बात कही.

‘‘देखो दीपिका, सारी तैयारियां हो चुकी हैं. बैंक्वेट हाल, बैंड वाले, बग्गी आदि सब कुछ तय हो चुके हैं. एक महीना ही तो बचा है. घर वालों को सच्चाई बता दूंगा तो तुम ही बदनाम होगी. तुम चिंता मत करो. शादी के बाद मैं सब संभाल लूंगा.’’

जब सास उसे तरहतरह के ताने देने लगी तो दीपिका ने आखिर चुप्पी तोड़ दी. उस ने सभी के सामने सच्चाई बता दी. पर उस का सच किसी ने स्वीकार नहीं किया. सभी ने उस की कहानी मनगढ़ंत बताई.

आखिर अपने सिर बदचलनी का इलजाम ले कर दीपिका मातापिता के साथ मायके आ गई.  वह समझ नहीं पा रही थी कि अब क्या करे. भविष्य अंधकारमय लग रहा था. होने वाले बच्चे की चिंता उसे अधिक सता रही थी.

अकेले लोकेश ने की 25 करोड़ की चोरी

अकेले लोकेश ने की 25 करोड़ की चोरी – भाग 4

शिवा को ले कर छत्तीसगढ़ पुलिस टीम दिल्ली पुलिस टीम के साथ भिलाई के लिए रवाना हो गई. एसपी 2 सिपाहियों की कस्टडी में लोकेश राव को साथ ले कर अपने औफिस लौट आए.

भिलाई के स्मृति नगर के एक किराए के कमरे में लोकेश श्रीवास बड़े इत्मीनान से पलंग पर लेटा आराम कर रहा था. इस कमरे तक पुलिस पहुंच जाएगी, उसे जरा भी अनुमान नहीं था. पुलिस ने उसे कस्टडी में ले लिया. लोकेश श्रीवास और शिवा चंद्रवंशी को छत्तीसगढ़ की रायपुर के न्यायिक मजिस्ट्रैट की अदालत में पेश किया गया.

इंसपेक्टर विष्णु दत्त ने डीसीपी को फोन कर लोकेश श्रीवास के पकड़े जाने की खबर दे दी. डीसीपी के आदेश पर निजामुद्ïदीन थाने के एसआई जितेंद्र रघुवंशी रायपुर पहुंच गए. उन्होंने चोरी के आरोपी लोकेश श्रीवास की औपचारिक गिरफ्तारी और ट्रांजिट रिमांड तथा उस से जब्त किए गए आभूषणों को अपने कब्जे में लेने के लिए कोर्ट में दरख्वास्त की.

अदालत ने लोकेश श्रीवास की 72 घंटे की ट्रांजिट रिमांड मंजूर कर ली तथा लोकेश श्रीवास से जब्त संपत्ति भी जांच अधिकारी को सौंप दी.

अदालत में दुर्ग के एसीपी संजय कुमार धु्रव भी मौजूद थे. उन्होंने दिल्ली से आए इंसपेक्टर विष्णु दत्त और इंसपेक्टर दिनेश कुमार तथा निजामुद्दीन थाने के एसआई जितेंद्र रघुवंशी की कस्टडी में महाचोर लोकेश श्रीवास को दिल्ली के लिए रवाना कर दिया.

चोरी के तरीके से पुलिस भी रह गई दंग

दिल्ली में लोकेश श्रीवास को थाना निजामुद्दीन लाया गया तो उसे देखने के लिए वहां भारी भीड़ जमा हो गई थी. डीसीपी राजेश देव, इंसपेक्टर विष्णुदत्त, इंसपेक्टर दिनेश कुमार, निजामुद्दीन थाने के एसएचओ परमवीर, एसआई जितेंद्र रघुवंशी और स्पैशल स्टाफ के इंसपेक्टर राजेंद्र डागर के सामने शातिर चोर लोकेश श्रीवास एकदम शांत खड़ा था. उस के चेहरे से नहीं लग रहा था कि 25 करोड़ की चोरी करने के बाद पकड़े जाने पर उसे खौफ हो.

वह पहले कितनी ही बार पकड़ा गया था, इसलिए उसे इस बार भी कस्टडी का कोई डर नहीं था. डीसीपी राजेश देव ने लोकेश श्रीवास के चेहरे पर नजरें गड़ा कर पूछा, ‘‘छत्तीसगढ़ में रहते हो. तुम्हें यहां दिल्ली में उमराव सिंह ज्वेलर्स की जानकारी किस ने दी?’’

‘‘साहब, मैं अकेले ही काम करने में विश्वास रखता हूं. मैं ने आज एक जितनी भी चोरियां की हैं, अकेले ही की हैं. मैं इस बार बड़ा हाथ मारना चाहता था. मुझे मालूम है कि बड़े ज्वेलर्स महानगरों में ही होते हैं. मैं ने दिल्ली का चुनाव किया. दिल्ली में बड़े ज्वेलर्स कहांकहां पर हैं, इस के लिए मैं ने गूगल पर सर्च किया.

‘‘दिल्ली के कितने ही ज्वेलर्स के नाम मेरे सामने आए. मैं चोरी के लिए इन में से किसी एक को टारगेट करना चाहता था. मैं 9 सितंबर, 2023 को सुबह करीब 11 बजे दिल्ली आया. 10 से 12 सितंबर तक चांदनी चौक में रहा और गूगल पर सर्च किए गए ज्वेलर्स की दुकानों पर जा कर उन की भोगोलिक स्थिति को चेक करता रहा. मुझे भोगल का उमराव सिंह ज्वेलर्स चोरी के लिए सब से आसान टारगेट लगा. क्योंकि इस के पास जो इमारत थी, उस में कई परिवार रहते थे. उस की सीढिय़ों से छत पर पहुंचा जा सकता था.’’

कुछ क्षण को चुप होने के बाद लोकेश श्रीवास ने आगे कहना शुरू किया, ‘‘मैं ने उमराव सिंह ज्वेलर्स की रेकी की. पास की इमारत से छत पर जा कर देखा. मुझे किसी ने भी नहीं टोका. शायद वहां रहने वाले लोग यही सोच रहे थे कि मैं किसी परिवार का मेहमान हूं. मैं ने उमराव सिंह ज्वेलर्स की दुकान में जा कर अंदर का मुआयना किया और फिर अपनी योजना को अंतिम टच देने लगा.

‘‘12 सितंबर को मैं मथुरा-वृंदावन चला गया. मंदिरों में दर्शन करने के बाद 15 सितंबर को दिल्ली लौट आया. 17 सितंबर को मैं ने कश्मीरी गेट बस अड्ïडे से बस पकड़ी और मध्य प्रदेश चला गया. 21 सितंबर को मैं बस से साढ़े 7 बजे शाम को दिल्ली के सराय काले खां आया और सवा 9 बजे जंगपुरा पहुंचा और एक होटल में ठहरा.

‘‘22 से 23 सितंबर तक मैं ने चोरी में इस्तेमाल होने वाले औजार एकत्र किए. मैं ने जीबी रोड से 1300 रुपए में कटर मशीन खरीदी. चांदनी चौक से मैं ने 100 रुपए का हथौड़ा खरीदा. मैं पेंचकस और प्लास अपने घर से लाया था. मैं ने ये औजार 23 सितंबर की रात को उमराव सिंह ज्वेलर्स की छत पर ले जा कर छिपा दिए.

‘‘24 सितंबर को भोगल मार्किट से मैं ने कोल्डड्रिंक, चौकलेट, बिसकुट, ड्राईफ्रूट, केक आदि सामान खरीद कर अपने बैग में रख लिया. फिर 24 सितंबर की रात 11 बजे मैं पास की इमारत की सीढिय़ों द्वारा छत पर पहुंचा. वहां से ज्वैलरी शोरूम की छत पर उतरा.

‘‘वहां परछत्ती में ग्रिल का दरवाजा था, जिस पर ताला लगा था. मैं ने ग्रिल काट कर अंदर जाने का रास्ता बनाया और इत्मीनान से सीढिय़ां उतर कर नीचे शोरूम में पहुंच गया. मुझे मालूम था कि सोमवार को मार्केट की छुट्टी रहती है. मेरे पास 25 तारीख की शाम तक का समय था.

‘‘मैं ने सब से पहले सीसीटीवी की तारें काटी, फिर आराम से सो गया. सुबह फ्रैश होने के बाद नाश्ता किया और स्ट्रांगरूम की दीवार काटने लगा. दीवार में अंदर जाने का रास्ता बन गया तो मैं ने अंदर जा कर लौकर का दरवाजा भी कटर से काट डाला और उस में रखे सोनेहीरों के सारे आभूषण बैग में भर लिए.’’

‘‘वहां से तुम्हें नकदी रुपया भी मिला होगा?’’ एसआई जितेंद्र ने पूछा.

‘‘हां, अलमारी में 5 लाख रुपए कैश था. वह भी मैं ने अपने बैग में भर लिया. मैं दुकान से 7 बजे बाहर निकला और छत पर आ कर पास वाली इमारत से नीचे आ गया.’’

‘‘यहां से तुम ने आटो किया और कश्मीरी गेट गए, जहां से तुम ने 8.40 बजे की छत्तीसगढ़ जाने वाली बस पकड़ ली.’’ डीसीपी ने कहते हुए लोकेश श्रीवास को घूरा, ‘‘इतना मोटा हाथ मारने के बाद तुम ने सरकारी बस में धक्के खाने का मन क्यों बनाया था?’’

लोकेश श्रीवास मुसकराया, ‘‘मैं ने अभी तक करोड़ों रुपए की चोरियां की हैं साब, लेकिन मुझ में अमीरों वाले ठाठ नहीं आए. मैं साधारण कपड़े पहनता हूं, साधारण ही रहता हूं क्योंकि दिखावा करने वाला अकसर लोगों की नजरों में आ जाता है. सरकारी बस में मैं ने लंबा सफर इसीलिए किया कि मुझे साधारण यात्री समझा जाए, कोई मुझ पर शक न करे.’’

‘‘यह शिवा और लोकेश राव तुम्हारे साथी रहे हैं चोरी के काम में…’’

‘‘नहीं साब!’’ लोकेश श्रीवास ने बात काटी, ‘‘मैं अकेला ही सारे काम को अंजाम देता हूं. वे छोटेमोटे चोर हैं, जेलों में उन से मेरी जानपहचान बनी. मैं ने दिल्ली में बड़ी चोरी करने की बात शिवा को बता दी थी और किराए पर कवर्धा में एक कमरा भी ले कर शिवा को वहां ठहरा दिया था. कवर्धा पहुंच कर मैं ने चोरी का माल वहां के कमरे में छिपा दिया. मुझ से गलती यह हुई कि मैं ने तरस खा कर लोकेश राव को सोने की एक चेन पहनने को दे दी थी और भिलाई चला गया.’’

लोकेश श्रीवास द्वारा जुर्म कबूल करने के बाद डीसीपी ने प्रैस कौन्फ्रैंस कर लोकेश श्रीवास की उमराव सिंह ज्वेलर्स के यहां से 25 करोड़ की चोरी करने की पूरी कहानी बताते हुए उस से 18 किलो आभूषण और 12 लाख रुपए बरामद करने की जानकारी दी.’’

महावीर प्रसाद जैन ने शातिर चोर लोकेश श्रीवास को 4 दिन में ही छत्तीसगढ़ जा कर गिरफ्तार करने वाली पुलिस टीम का आभार प्रकट करते हुए कहा, ‘‘मैं ने तो उम्मीद ही छोड़ दी थी कि कुछ मिलेगा, लेकिन दिल्ली पुलिस ने ज्वैलरी और नकदी बरामद कर मेरे अंदर चेतना जगा दी. मैं दिल से इन्हें धन्यवाद देता हूं.’’

पुलिस ने सुपर चोर लोकेश श्रीवास को न्यायालय में पेश कर दिया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया.

अकेले लोकेश ने की 25 करोड़ की चोरी – भाग 3

सुपर चोर की पत्नी चलाती है ब्यूटीपार्लर

32 वर्षीय लोकेश श्रीवास छत्तीसगढ़ राज्य के कवर्धा शहर में कैलाश नगर इलाके में रहता था. परिवार में मांबाप, पत्नी रमा और 2 बेटियां क्रमश: 11 वर्ष और 6 वर्ष है.

लोकेश श्रीवास का मकान तीनमंजिला है. वह अपने घर में कम ही रहता है. उस का ज्यादातर वक्त छत्तीसगढ़ और दूसरे राज्यों की जेलों में ही कटता है. लोकेश की पत्नी रमा मकान के निचले हिस्से में ब्यूटीपार्लर चलाती है. मकान का एक हिस्सा रमा ने किराए पर दे रखा है, जिस से वह अपने घर का खर्च चलाती है.

लोकेश श्रीवास शातिर चोर है, यह पत्नी रमा को शादी के बहुत बाद में पता चला था. लोकेश ने उसे कभी नहीं बताया कि वह क्या काम करता है. जब घर के दरवाजे पर आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना, ओडिशा, छत्तीसगढ़ के दुर्ग, भिलाई की पुलिस लोकेश को दबोचने के लिए आने लगी और घर में लोकेश श्रीवास द्वारा छिपा कर रखा गया चोरी का माल बरामद होने लगा तो रमा को पता चला कि उस का पति शातिर चोर है.

लोकेश श्रीवास पहले एक सैलून में बाल काटने का काम करता था. उस के ख्वाब ऊंचे थे. बाल काटते वक्त उस का ख्वाब होता था कि उस के हाथ में सोने का कंघा, सोने की कैंची और सोने का उस्तरा हो, जिस से वह देश के प्रधानमंत्री के बाल काटे.

प्रधानमंत्री तक तो उस की पहुंच संभव नहीं थी, लेकिन अपने सुनहरे ख्वाब पूरे करने के लिए उस ने 20 मई, 2006 को एक ज्वेलरी शोरूम में चोरी की. लाखों के गहने हाथ लगे तो लोकेश श्रीवास ने चोरी को ही अपना धंधा बना लिया.

लोकेश श्रीवास ने आंध्र प्रदेश के विजय नगर शहर में एक ज्वेलरी शोरूम में 6 किलोग्राम सोने के आभूषणों की चोरी की. तेलंगाना स्टेट में एक ज्वेलर के यहां 4 किलोग्राम, ओडिशा में 500 ग्राम, भिलाई के बजाज ज्वेलर के यहां से 17 लाख के आभूषणों पर हाथ साफ किया. सन 2019 में लोकेश श्रीवास ने भिलाई के आनंद नगर में पारख ज्वेलर के यहां से 15 करोड़ के आभूषण चोरी किए.

19 और 25 अगस्त, 2023 को बिलासपुर में मास्टरमाइंड लोकेश श्रीवास ने एक ही रात में 10 ज्वेलरी शोरूम को अपना निशाना बनाया था.

लोकेश श्रीवास को विभिन्न राज्यों की पुलिस ने कितनी ही बार पकड़ कर चोरी का माल बरामद किया. उसे जेल की सलाखों में भी डाला, लेकिन वह किसी न किसी तिकड़म से अपनी जमानत करवा लेता और बाहर आ कर फिर से किसी ज्वेलरी शोरूम को निशाना बनाता.

उस ने 5 साल पहले चोरी के माल से 60 हजार की पल्सर मोटरसाइकिल खरीदी और 60 लाख रुपए से जिम खोला था, लेकिन वहां के कलेक्टर अमरीश कुमार शरण ने जिम को सील करा कर लोकेश श्रीवास को जिलाबदर कर दिया.

चूंकि उस वक्त देश में लोकसभा चुनाव होने वाले थे और लोकेश श्रीवास सैकड़ों चोरियां कर के पुलिस रिकौर्ड में अपना एक अलग ही क्रिमिनल रिकौर्ड दर्ज करवा चुका था, इसलिए उसे जिलाबदर करना बहुत जरूरी था.

शातिर मास्टरमाइंड चोर लोकेश श्रीवास इतनी चोरियां करने के बाद भी चैन से नहीं बैठा. छत्तीसगढ़ से 11 सौ किलोमीटर की दूरी तय कर के वह देश की राजधानी दिल्ली आया और 25 सितंबर, 2023 को उस ने साउथईस्ट दिल्ली के थाना निजामुद्दीन क्षेत्र के भोगल मार्केट में स्थित उमराव सिंह ज्वेलर्स के शोरूम में लगभग 25 करोड़ के आभूषणों पर हाथ साफ कर दिया. यह लोकेश श्रीवास द्वारा अब तक की गई चोरियों में सब से बड़ी चोरी मानी जा रही थी.

इसी सुपर चोर लोकेश श्रीवास को गिरफ्त में लेने के लिए दिल्ली पुलिस के इंसपेक्टर विष्णुदत्त और इंसपेक्टर दिनेश कुमार छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में एसपी संतोष सिंह के औफिस में पहुंचे थे.

शातिर चोर के बारे में उस के साथी से मिला सुराग

एसपी संतोष सिंह ने शातिर चोर लोकेश श्रीवास की पूरी हिस्ट्री दोनों को बताते हुए कहा, ‘‘इंसपेक्टर, कमाल की बात यह है कि लोकेश श्रीवास अकेले ही चोरियां करता है. हम ने उस से इस विषय में पूछा था. उस का कहना था कि अकेले चोरी करने में वह अधिक सुविधा महसूस करता है. गैंग बना कर चोरी की जाए तो कोई न कोई गैंग का साथी बड़बोलेपन में फंसा सकता है. एक आदमी फंसा तो समझो सारा गैंग पकड़ में आया, इसलिए मैं जो करता हूं अपने हिसाब से अकेला ही करता हूं.’’

‘‘कमाल की बात है सर. दिल्ली में उमराव सिंह ज्वेलरी शोरूम में जिस हिसाब से दीवार और लौकर काटा गया है, वह एक व्यक्ति का काम नहीं लगता.’’ इंसपेक्टर विष्णुदत्त ने हैरानी से कहा.

‘‘वह अकेले लोकेश श्रीवास के ही शातिर दिमाग और हाथों का कमाल होगा. आप देख लेना, जब वह पकड़ में आएगा, तब वह यही कहेगा, मैं ने दिल्ली के उमराव सिंह ज्वेलर्स के यहां अकेले ही 25 करोड़ के आभूषणों पर हाथ साफ किया था.’’

‘‘वह पकड़ में कैसे आएगा सर?’’ विष्णुदत्त बोले, ‘‘क्या हमें उस के कवर्धा वाले घर पर रेड करनी चाहिए?’’

‘‘वह वहां नहीं मिलेगा.’’ एसपी संतोष सिंह बोले, ‘‘दिल्ली से उमराव सिंह ज्वेलर्स के यहां चोरी करके वह छत्तीसगढ़ वाली बस में बैठा है, यह मुझे आप के डीसीपी राजेश देव ने बताया था. तभी मैं ने लोकेश श्रीवास को दबोचने के लिए पुलिस को अलर्ट कर दिया था. पुलिस ने बिलासपुर आने वाली बस और उस के कबीर नगर के घर पर दबिश दी, लेकिन वह नहीं मिला.

‘‘बस से वह पहले ही उतर गया था, इस की सीसीटीवी कैमरों से फुटेज मिल गई है. हम यह मान कर चल रहे हैं कि लोकेश श्रीवास छत्तीसगढ़ वाली बस से बिलासपुर आया है, लेकिन सुरक्षा के मद्देनजर वह बसअड्ïडे तक आने से पहले ही रास्ते में उतर गया. उस की तलाश यहां की पुलिस कर रही है. उसे जल्द ही पकड़ लिया जाएगा.’’

अभी एसपी संतोष सिंह ने अपनी बात खत्म की ही थी कि उन का लैंडलाइन फोन बजने लगा. उन्होंने रिसीवर उठा कर कान से लगाया, ‘‘हैलो.’’

‘‘सर, यहां पर लोकेश राव चोर अभीअभी आंध्रा पुलिस के हाथ लगा है. उस ने गले में मोटी सोने की चेन पहन रखी है. पूछताछ में उस ने बताया है कि यह चेन उसे लोकेश श्रीवास ने दी है.’’

‘‘ओह!’’ एसपी संतोष सिंह खुशी से उछल पड़े, ‘‘तब तो लोकेश राव यह भी जानता होगा कि लोकेश श्रीवास कहां है?’’

‘‘बेशक जानता होगा. उस से पूछताछ की जा रही है, आप कवर्धा आ जाइए सर, मैं कवर्धा थाने से बात कर रहा हूं.’’

‘‘हम आते हैं.’’ एसपी संतोष सिंह उठते हुए बोले.

उन्होंने रिसीवर क्रेडिल पर रख दिया और वह इंसपेक्टर विष्णुदत्त और इंसपेक्टर दिनेश कुमार से मुखातिब हुए, ‘‘चलिए, लोकेश श्रीवास हाथ आने ही वाला है.’’

इंसपेक्टर विष्णुदत्त और इंसपेक्टर दिनेश कुमार ने कुरसी छोड़ दी. वह एसपी संतोष सिंह के साथ कक्ष से बाहर की ओर बढ़ गए. पुलिस का एक दस्ता भी उन के साथ था.

अकेले ही चुरा ले गया 25 करोड़ की ज्वेलरी

कवर्धा पुलिस थाने में कुरसी पर बैठा वह पतलादुबला व्यक्ति लोकेश राव था. लोकेश श्रीवास के नाम से मिलताजुलता नाम. काम छोटीमोटी चोरियां करना. उस ने आंध्र प्रदेश में चोरी की थी. वहां की पुलिस उस की तलाश में कवर्धा आई तो वह हत्थे चढ़ गया.

उस वक्त वह गले में सोने की मोटी चेन पहने था. पूछने पर उस ने बताया कि लोकेश श्रीवास उसे जानता है, उस ने अभी दिल्ली में किसी ज्वेलरी शोरूम में मोटा हाथ मारा है, खुश हो कर उस ने सोने की चेन उसे उपहार में दी है.

लोकेश राव से पुलिस लोकेश श्रीवास के ठिकाने का पता मालूम कर रही थी, लेकिन वह बारबार एक ही बात कह रहा था कि वह लोकेश श्रीवास का ठिकाना नहीं जानता.

‘‘तुम अपने किसी दूसरे साथी का नामपता जानते हो, जो तुम्हारी तरह ही चोरियां करता हो?’’ इंसपेक्टर विष्णुदत्त ने उसे घूरते हुए पूछा.

‘‘हां, मेरा एक दोस्त है शिवा चंद्रवंशी, वह भी मेरी तरह चोर है.’’

‘‘शिवा चंद्रवंशी कहां रहता है?’’

‘‘वह कबीर धाम में रह रहा है, वहां उस ने किराए का कमरा ले रखा है.’’

‘‘चलो, हमें शिवा से मिलवाओ,’’ इंसपेक्टर विष्णुदत्त ने कहा.

लोकेश राव इस के लिए न नहीं कह सका. वह सभी को अपने साथ ले कर कबीर धाम में शिवा के कमरे पर पहुंच गया. उस वक्त शिवा सो रहा था. अधिकारियों ने उसे सोते हुए ही दबोचा तो वह हड़बड़ा कर उठ बैठा. पुलिस को देख कर वह कांपने लगा.

‘‘तुम लोकेश श्रीवास को जानते हो, यह लोकेश राव ने हम से कहा है. बताओ, इस वक्त लोकेश श्रीवास कहां है?’’ इंसपेक्टर दिनेश कुमार ने अंधेरे में तीर चलाया.

‘‘व.. वह भिलाई के स्मृतिनगर में है…’’ शिवा चंद्रवंशी ने हकलाते हुए बताया.

‘‘वह तुम से कब मिला था?’’

‘‘कल वह दिल्ली से मोटा माल ले कर आया था. यह कमरा उस ने पहले ही किराए पर ले लिया था ताकि माल यहां छिपा सके.’’

शिवा के मुंह से यह रहस्य उजागर होते ही पुलिस टीम ने कमरे की तलाशी लेनी शुरू कर दी. तकिए, रजाई गद्दों और पलंग में छिपा कर रखे गए सोनेहीरों के आभूषणों को पुलिस ने बरामद किया. 19 लाख रुपया कैश भी बरामद हुआ.

यह आभूषण अनुमान से 18-19 किलोग्राम वजन के थे और इन की कीमत करोड़ों में आंकी जा सकती थी. यह आभूषण उमराव सिंह ज्वेलर्स के शोरूम से चुराए गए हैं या कहीं और से, यह लोकेश श्रीवास ही बता सकता था.

अकेले लोकेश ने की 25 करोड़ की चोरी – भाग 2

पुलिस टीमें जुटीं जांच में

डीसीपी राजेश देव ने फिगरप्रिंट एक्सपर्ट और तेजतर्रार इंसपेक्टर विष्णु दत्त और इंसपेक्टर दिनेश को भी वहां बुला कर जांच में लगा दिया. स्पैशल स्टाफ के इंसपेक्टर राजेंद्र डागर वहां आ गए. दुकान में 6 सीसीटीवी कैमरे थे, जिन की तार चोरों ने काट दी थी.

उन कैमरों की फुटेज कब्जे में ले ली गई. पड़ोस की इमारत में रहने वालों से पूछताछ की गई. इमारत में कई परिवार रहते थे. उन लोगों का कहना था कि उन्होंने ज्वेलरी शोरूम के आसपास किसी को संदिग्ध हालत में घूमते नहीं देखा, न उन लोगों ने ज्वेलरी शोरूम में घुसे चोरों के द्वारा अंदर की गई तोडफ़ोड की आवाजें सुनीं. चोर ज्वेलरी शोरूम में कब और कैसे घुसे, वे नहीं जानते.

पुलिस ने अनुमान लगाया कि चोर इसी इमारत की सीढिय़ों से इमारत की छत पर पहुंचे. वहां से ज्वेलरी शोरूम की इमारत पर आए और सीढ़ी के ग्रिल दरवाजे का ताला तोड़ कर ग्राउंड फ्लोर पर आ गए. उन्होंने यह काम सोमवार को किया, क्योंकि उस दिन साप्ताहिक अवकाश के कारण शोरूम बंद था.

उन्हें सोमवार का दिन और रात का पूरा वक्त स्ट्रांगरूम की दीवार तोड़ कर लौकर तक पहुंचने के लिए मिला. उन्होंने कटर से लौकर भी काट डाला और सारे आभूषण ले कर चले गए.

पुलिस की कई टीमें इस हाईप्रोफाइल चोरी का सुराग तलाशने में जुटी थीं. साइबर सेल टैक्निकल सर्विलांस पर काम कर रही थी. काल डिटेल्स खंगालने का भी काम जारी था.

छत्तीसगढ़ पुलिस से मिला सुराग

चोरों ने ज्वेलरी शोरूम में लगे सीसीटीवी कैमरों की वायर अंदर घुसते ही काट डाली थी, लेकिन वायर काटने से पहले की एक व्यक्ति की तसवीर सीसीटीवी फुटेज में कैद हो गई थी. उस व्यक्ति का हुलिया ज्यादा स्पष्ट नहीं था और पुलिस के लिए उसे पहचान पाना भी आसान नहीं था, लेकिन जांच में जुटी पुलिस टीम ने हिम्मत नहीं हारी.

दूसरे दिन भोगल एरिया में लगे सीसीटीवी कैमरों को खंगालते वक्त पुलिस को एक फुटेज में उसी कदकाठी के एक व्यक्ति की तसवीर मिली, जैसी ज्वेलरी शोरूम में मिली थी. इस में उस व्यक्ति का चेहरा साफसाफ दिखाई पड़ रहा था. फोटो के सहारे पुलिस इस व्यक्ति का क्रिमिनल रिकौर्ड खंगालने में जुट गई.

दिल्ली के किसी भी थाने में इस व्यक्ति का फोटो नहीं था. हां, उस फोटो के जरिए गूगल पर इंटरस्टेट चोरों का रिकौर्ड खंगाला गया तो यह छत्तीसगढ़ के मशहूर चोर लोकेश श्रीवास के रूप में दर्ज मिला.

Inspector rajender and Jitender raghuvanshi

एसआई जितेंद्र ने स्पैशल स्टाफ के इंसपेक्टर राजेंद्र डागर, इंसपेक्टर विष्णु दत्त से विचारविमर्श किया. तीनों ने यह तय किया कि छत्तीसगढ़ पुलिस से इस लोकेश श्रीवास की पूरी जानकारी मालूम की जाए.

वह अभी छत्तीसगढ़ पुलिस को फोन करने वाले ही थे कि छत्तीसगढ़ के बिलासपुर थाने से एक एसआई की काल एसआई जितेंद्र के मोबाइल पर आ गई. उस सबइंसपेक्टर ने कहा, ‘‘जितेंद्रजी, हम यहां रुटीन चेकिंग के लिए निकले थे. हमें आज लोकेश राव नाम का एक चोर हाथ लगा. यह लोकेश राव छोटीमोटी चोरियां करता है. एक चोरी के मामले में आंध्र प्रदेश की पुलिस को उस की तलाश थी.

‘‘इस चोर का कहना है, मुझ जैसे छोटे चोर को क्यों पकड़ते हो, दिल्ली में शातिर चोर लोकेश श्रीवास ने बड़े ज्वेलरी शोरूम पर हाथ साफ किया है, उसे पकड़ो तो जानूं. मैं यह जानना चाहता हूं क्या दिल्ली में कोई बड़ा ज्वेलरी शोरूम लूटा गया है?’’

‘‘हां. कल यहां उमराव सिंह ज्वेलर्स के यहां 25 करोड़ के आभूषणों पर उसी लोकेश श्रीवास ने हाथ साफ कर दिया है.’’ एसआई जितेंद्र ने बताया, ‘‘हमें भोगल मार्किट में एक व्यक्ति संदिग्ध अवस्था में घूमता सीसीटीवी फुटेज में मिला है. गूगल पर सर्च करने से वह व्यक्ति शातिर चोर लोकेश श्रीवास ही निकला. वह आटो में सवार हो कर ज्वेलरी शोरूम से गया है, हम आटो का पता लगवा रहे हैं. आप ने हमारा विश्वास पक्का किया है. इस जानकारी के लिए आप का धन्यवाद. जल्द ही हम छत्तीसगढ़ आ सकते हैं.’’

‘‘वेलकम जितेंद्रजी. यहां हम आप का पूरा सहयोग करेंगे.’’ कहने के बाद एसआई ने एक मोबाइल नंबर जितेंद्र रघुवंशी के वाट्सऐप पर भेज दिया. और कहा, ‘‘यह लोकेश श्रीवास का मोबाइल नंबर है. आप इस से लोकेश की लोकेशन ट्रेस कर सकेंगे.’’

उधर से नंबर मिलते ही एसआई जितेंद्र ने लोकेश श्रीवास का मोबाइल नंबर सर्विलांस सेल के पास भेज दिया, ताकि इस नंबर की लोकेशन मालूम हो सके. इधर पुलिस की एक टीम उस आटो का पता तलाशने में जुट गई. जांच में उस आटो के मालिक का पता मिल गया.

पुलिस उस आटो मालिक के घर पहुंच गई. उसे लोकेश श्रीवास की फोटो दिखा कर पूछा गया कि कल रात इसे उमराव सिंह ज्वेलर्स के पास से बिठा कर कहां उतारा?

आटो वाले ने तुरंत बताया, ‘‘वह सवारी मुझे एक हजार रुपया भाड़ा दे गई थी, इसलिए याद है. मैं ने उसे कश्मीरी गेट बसअड्ïडे पर उतारा था.’’

पुलिस के 4 सिपाही साथ ले कर इंसपेक्टर विष्णुदत्त, इंसपेक्टर दिनेश और निजामुद्दीन थाने के एसआई जितेंद्र कश्मीरी गेट बसअड्डा पहुंच गए.

यहां हर स्टेट की ओर जाने वाली बसों के टर्मिनल पर सीसीटीवी कैमरे लगे थे. इंसपेक्टर दिनेश के इशारे पर पुलिस टीम ने सीसीटीवी कैमरों की फुटेज देखनी शुरू की तो उन्हें वह व्यक्ति छत्तीसगढ़ जाने वाली एक बस में सवार होता दिखाई दे गया. सर्विलांस टीम ने भी पुष्टि कर दी कि इस फोन नंबर की लोकेशन छत्तीसगढ़ में शो हो रही है. इस से पूरी तरह स्पष्ट हो गया था कि मास्टरमाइंड चोर लोकेश श्रीवास ही है.

इंसपेक्टर विष्णु दत्त ने डीसीपी राजेश देव को यह जानकारी दे दी और बिलासपुर के एसआई के फोन की बात भी बता दी. डीसीपी पूरी संतुष्टि करना चाहते थे. उन्होंने लोकेश श्रीवास की तसवीर छत्तीसगढ़ पुलिस के पास फ्लैश करवा दी. वहां से जो कुछ बताया गया, उस से जांच में जुटी पुलिस टीम की बांछें खिल गईं.

पता चला कि वह व्यक्ति छत्तीसगढ़ के क्रिमिनल रिकौर्ड में दर्ज है. उस का नाम लोकेश श्रीवास उर्फ गोलू है. उम्र 32 साल. जानकारी मिली कि वह अब तक दरजनों ज्वेलरी शोरूम को अपना निशाना बना चुका है.

छत्तीसगढ़ पुलिस ने उसे कई बार पकड़ कर जेल में डाला था, लेकिन न जाने कैसे यह शातिर चोर अपनी जमानत करवा कर जेल से बाहर आ जाता है. फिलहाल वह छत्तीसगढ़ पुलिस की कस्टडी में नहीं था. छत्तीसगढ़ पुलिस एक ज्वेलर के यहां हुई चोरी के केस में लोकेश श्रीवास को तलाश कर रही थी.

डीसीपी राजेश देव ने इस जानकारी पर राहत की सांस ली. लोकेश श्रीवास एक शातिर चोर है और उसी ने दिल्ली के भोगल इलाके में उमराव सिंह ज्वेलर्स के शोरूम में 25 करोड़ की ज्वेलरी पर हाथ साफ किया था. चूंकि वह छत्तीसगढ़ गया था, इसलिए डीसीपी को उम्मीद थी कि लोकेश श्रीवास को छत्तीसगढ़ में पकड़ा जा सकता है.

उन्होंने नारकोटिक्स सेल के इंसपेक्टर विष्णुदत्त शर्मा और इंसपेक्टर दिनेश कुमार को फ्लाइट से छत्तीसगढ़ जाने का आदेश दे दिया. दोनों इंसपेक्टर छत्तीसगढ़ पुलिस की मदद से लोकेश श्रीवास को तलाश कर के गिरफ्तार करने के लिए छतीसगढ़ रवाना हो गए. स्पैशल स्टाफ के इंसपेक्टर राजेंद्र डागर को सर्विलांस विभाग में रह कर लोकेश श्रीवास के मोबाइल काल पर नजर रखनी थी.

अकेले लोकेश ने की 25 करोड़ की चोरी – भाग 1

पत्नी रमा को शादी के बहुत दिनों बाद ही यह बात पता चली कि उस का पति लोकेश श्रीवास एक शातिर चोर है. लोकेश ने उसे कभी नहीं बताया कि वह क्या करता है. जब घर के दरवाजे पर आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना, ओडिशा, छत्तीसगढ़ के दुर्ग, भिलाई की पुलिस उस के पति को दबोचने के लिए आने लगी और घर में पति द्वारा छिपा कर रखा गया चोरी का माल बरामद होने लगा तो रमा को पता चला कि उस का पति शातिर चोर है.

लोकेश श्रीवास पहले एक सैलून में बाल काटने का काम किया करता था. उस के ख्वाब ऊंचे थे. बाल काटते वक्त उस का ख्वाब होता था कि उस के हाथ में सोने का कंघा, सोने की कैंची और सोने का उस्तरा हो, जिस से वह देश के प्रधानमंत्री के बाल काटे. प्रधानमंत्री तक तो उस की पहुंच संभव नहीं थी, लेकिन अपने सुनहरे ख्वाब पूरे करने के लिए उस ने 20 मई, 2006 को एक ज्वेलरी शोरूम में चोरी की. लाखों के गहने हाथ लगे तो लोकेश श्रीवास ने चोरी को ही अपना धंधा बना लिया.

लोकेश श्रीवास ने आंध्र प्रदेश के विजय नगर शहर में एक ज्वेलरी शोरूम में 6 किलोग्राम सोने के आभूषणों की चोरी की. तेलंगाना स्टेट में एक ज्वेलर के यहां 4 किलोग्राम, ओडिशा में 500 ग्राम, भिलाई के बजाज ज्वेलर के यहां से 17 लाख के आभूषणों पर हाथ साफ किया. सन 2019 में लोकेश श्रीवास ने भिलाई के आनंद नगर में पारख ज्वेलर के यहां से 15 करोड़ के आभूषण चोरी किए.

19 और 25 अगस्त, 2023 को बिलासपुर में मास्टरमाइंड लोकेश श्रीवास ने एक ही रात में 10 ज्वेलरी शोरूम को अपना निशाना बनाया था.

लोकेश श्रीवास को विभिन्न राज्यों की पुलिस ने कितनी ही बार पकड़ कर चोरी का माल बरामद किया. उसे जेल की सलाखों में भी डाला, लेकिन वह किसी न किसी तिकड़म से अपनी जमानत करवा लेता और बाहर आ कर फिर से किसी ज्वेलरी शोरूम को निशाना बनाता.

दिल्ली में स्थित थाना निजामुद्दीन के भोगल में स्थित उमराव सिंह ज्वेलर्स का शोरूम 25 सितंबर, 2023 को साप्ताहिक अवकाश की वजह से बंद था. 26 सितंबर को शोरूम के मालिक महावीर प्रसाद जैन सुबह 10 बजे दुकान पर पहुंचे तो वहां पूरा स्टाफ आ चुका था. सभी गपशप कर रहे थे.

मालिक को कार से उतरता देख उन्होंने अपने मालिक को अभिवादन किया. मुसकरा कर उन का अभिवादन स्वीकार करते हुए महावीर प्रसाद जैन ने बैग से चाबियों का गुच्छा निकाल कर एक कर्मचारी की तरफ बढ़ा दिया.

उस कर्मचारी ने शोरूम के ताले खोले और एक अन्य कर्मचारी के सहयोग से दुकान का शटर उठाया तो धूल का गुबार दुकान के भीतर से निकल कर दोनों से टकराया. दोनों धूल को हाथ से हटाने का प्रयास करते हुए बुरी तरह खांसने लगे.

‘‘इतनी धूल शोरूम में कहां से आ गई?’’ महावीर प्रसाद जैन हैरानी से बोले.

‘‘कल शोरूम बंद था न मालिक, इस की वजह से अंदर धूल जमा हो गई होगी.’’ एक कर्मचारी ने अपनी राय प्रकट की.

‘‘एक दिन में इतनी धूल दुकान में थोड़ी इकट्ठा हो जाएगी, जरा अंदर जा कर देखो तो…’’

महावीर प्रसाद जैन कह ही रहे थे, उस से पहले ही एक युवा कर्मचारी हाथों से धूल हटाने की कोशिश करता हुआ शोरूम में घुस गया था. वह धूल के गुबार में किसी तरह आंखें जमाने में कामयाब हुआ तो उस के गले से चीख निकल गई.

वह चीखता हुआ बाहर भागा, ‘‘मालिक अंदर स्ट्रांग रूम की दीवार टूटी हुई है…’’

‘‘क्… क्या कह रहे हो?’’ महावीर प्रसाद घबरा कर बोले और जल्दी से शोरूम में घुस गए.

शोरूम में धूल ही धूल भरी हुई थी. अंधेरा भी था.

अन्य स्टाफ के लोग भी अंदर आ गए थे. धूल और अंधेरे के कारण कुछ देख पाना संभव नहीं था.

एक कर्मचारी ने समझदारी दिखाते हुए लाइट्स और एग्जास्ट फैन चालू कर दिए. थोड़ी देर में दुकान की धूल छंटी तो रोशनी में उन्होंने जो कुछ देखा, वह उन के होश उड़ाने के लिए काफी था. स्ट्रांगरूम की दीवार को तोड़ कर खिडक़ी जैसा रास्ता बना दिया गया था. फर्श पर ईंटों और सीमेंट का मलबा पड़ा था.

यह रास्ता क्यों बनाया गया होगा, इस का अनुमान लगाते ही महावीर प्रसाद चीखे, ‘‘स्ट्रांगरूम का लौक खोलो और लौकर चेक करो.’’

स्ट्रांगरूम का दरवाजा खोला गया तो अंदर रखा लौकर टूटा हुआ था, उस में रखे सोने और हीरों के आभूषण गायब थे. बड़ी दुकानों में सुरक्षा की दृष्टि से मजबूत स्ट्रांगरूम का निर्माण करवाया जाता है. दुकान बंद होने से पहले सारे आभूषण स्ट्रांगरूम के लौकर में रख दिए जाते हैं.

24 सितंबर रविवार को जब दुकान बंद की गई थी, महावीर प्रसाद ने अपने सामने सारे आभूषणों को स्ट्रांगरूम के लौकर में रखवाया था. अब वह लौकर खाली था. उस का मजबूत दरवाजा काट कर किसी ने सारे आभूषणों की चोरी कर ली थी.

महावीर प्रसाद खाली लौकर देखते ही गश खा कर गिर पड़े. अन्य कर्मचारियों के होश फाख्ता हो गए थे, उन की समझ में कुछ नहीं आ रहा था. अपने मालिक को बेहोश हो कर गिरता देख कर वे संभले. 2-3 कर्मचारी उन्हें उठा कर बाहर के हाल में लाए और चेहरे पर पानी के छींटे मार कर उन्हें होश में लाने का प्रयास करने लगे.

थोड़े प्रयास से महावीर प्रसाद होश में आ कर उठ बैठे. उन्होंने सब से पहले मोबाइल निकाल कर पुलिस कंट्रोल रूम को अपने यहां हुई चोरी की जानकारी दे दी.

मजबूत लौकर टूटने पर पुलिस हुई हैरान

भोगल का थाना क्षेत्र निजामुद्दीन था. कंट्रोल रूम से थाने को उमराव सिंह ज्वेलर्स के यहां लौकर तोड़ कर आभूषण चोरी चले जाने की सूचना दी गई तो थोड़ी देर में ही निजामुद्दीन के एसएचओ परमवीर और एसआई जितेंद्र रघुवंशी मय स्टाफ के उमराव सिंह ज्वेलर्स शोरूम पर पहुंच गए.

एसएचओ और एसआई जितेंद्र रघुवंशी ने दुकान में चोरों द्वारा तोड़ी गई स्ट्रांगरूम की डेढ़ फुट मोटी दीवार को देखा तो उन्हें बड़ा ताज्जुब हुआ. यह काम 1-2 घंटे का नहीं हो सकता था. लौकर का लोहे का मजबूत दरवाजा भी काटा गया था. इस में भी काफी समय लगा होगा.

पुलिस का मानना था कि चोर रात भर ज्वेलरी शोरूम में रहे हैं और उन्होंने इत्मीनान से यह चोरी की है. उमराव सिंह ज्वेलर्स की दुकान ग्राउंड फ्लोर पर थी. यह 4 मंजिला इमारत में ऊपर के 3 मंजिल पर आवासीय फ्लैट हैं. पूरी छानबीन करने के बाद यह अनुमान लगाया गया कि चोर पड़ोस की छत से शोरूम की छत पर आए. ऊपर ग्रिल दरवाजे में मजबूत ताला था, उसे तोड़ कर वह सीढियों के रास्ते शोरूम में घुसे और आभूषणों पर हाथ साफ कर दिया.

एसएचओ और एसआई शोरूम के मालिक महावीर प्रसाद जैन के पास आए. वह पत्थर की मूरत बने बैठे थे. उन का चेहरा पसीने से तरबतर था.

‘‘इस चोरी का आप को कैसे पता चला?’’ एसआई जितेंद्र रघुवंशी ने सवाल किया.

‘‘सुबह हम ने जैसे ही शोरूम खोला तो अंदर धूल का गुबार भरा था. एग्जास्ट चलाने से जब धूल छंटी, तब हम ने स्ट्रांगरूम की दीवार को टूटा हुआ पाया. स्ट्रांगरूम का दरवाजा खोल कर देखा गया तो लौकर का दरवाजा भी कटा मिला, उस में रखे सारे आभूषण गायब हैं सर.’’

‘‘आप के अनुमान से चोरों ने कितने मूल्य के आभूषण चोरी किए हैं?’’

‘‘लौकर में लगभग 25 करोड़ के आभूषण थे, सभी चोरी कर लिए गए हैं. 5 लाख रुपए का कैश था, उसे भी चोर ले गए हैं.’’

‘‘25 करोड़ की चोरी!’’ एसएचओ परमवीर का मुंह खुला का खुला रह गया. एसआई जितेंद्र रघुवंशी भी इतनी बड़ी चोरी की जानकारी पा कर चौंक गए कि यह किसी मामूली चोर का काम नहीं हो सकता.

SHO Paramveer Dhaiya

इस की जानकारी एसएचओ परमवीर ने उच्चाधिकारियों को दी तो जिले से ले कर पुलिस हैडक्वार्टर तक के अधिकारी हरकत में आ गए. अधिकारियों की गाडिय़ां उमराव सिंह ज्वेलर्स शोरूम की ओर दौड़ पड़ीं.

साउथईस्ट जिले के डीसीपी राजेश देव भी खबर पा कर तुरंत उमराव सिंह ज्वेलर्स शोरूम पर आ गए. उन्होंने शोरूम में जा कर बड़ी बारीकी से चोरों द्वारा की गई चोरी की वारदात का निरीक्षण किया.

स्ट्रांगरूम की 3 ओर की दीवारें लोहे की थीं, एक दीवार मोटे सरिया और कंक्रीट से बनाई गई थी. चोरों ने कंक्रीट की दीवार को तोड़ कर अंदर जाने का रास्ता बनाया था. वे छत के रास्ते से नीचे दुकान में उतरे थे. लौकर भी कटर से काट दिया गया था.

umrao-singh-showroom-chori

स्ट्रांगरूम में लोहे की बड़ीबड़ी 2 तिजोरियां भी रखी थीं, लेकिन चोरों ने उन के साथ छेड़छाड़ नहीं की. क्योंकि स्ट्रांगरूम के अंदर ही भारी मात्रा में सोने और हीरे के आभूषण मिल गए थे. स्ट्रांगरूम भी अलमारी जैसा था. उस में कई किलोग्राम चांदी के भी आभूषण थे, लेकिन चोर उन आभूषणों को नहीं ले गए.

देश की सब से उलझी मर्डर मिस्ट्री : हड्डी के स्क्रू से खुला राज