सर्वेश के घर के आसपास ज्यादा मकान तो थे नहीं, इसलिए नेत्रपाल को उस के यहां आनेजाने में कोई परेशानी नहीं होती थी. साप्ताहिक छुट्टी के दिन तो पाकेश के ड्यूटी पर चले जाने के बाद नेत्रपाल पूरा दिन उसी के यहां पड़ा रहता. इस तरह यह सिलसिला काफी दिनों तक बिना किसी रोकटोक के चलता रहा.
एक दिन शाम को किसी वजह से पाकेश जल्दी घर आ गया. संयोग से नेत्रपाल उस समय उस के घर पर ही मौजूद था. तब सर्वेश ने पाकेश से उस का परिचय कराते हुए कहा, ‘‘यह नेत्रपाल हैं. हमारी कंपनी में सुपरवाइजर हैं. यह भी यहीं आसपास प्लौट खरीदना चाहते हैं. इन्हें मैं ने ही यह बगल वाला प्लौट दिखाने के लिए बुलाया था.’’
सर्वेश ने ऐसी चाल चली थी कि पाकेश को नेत्रपाल पर जरा भी शक नहीं हुआ. पाकेश शराब का आदी था. वह ड्यूटी से छूटने के बाद अकसर रास्ते में पड़ने वाले ठेके से शराब पी कर घर आता था. उस शाम सर्वेश ने नेत्रपाल से उस का परिचय कराया तो वह उस के लिए भी ठेके से शराब ले आया. दोनों ने साथसाथ बैठ कर शराब पी तो उन में दोस्ती हो गई.
पाकेश पहले से ही शराब पिए था, नेत्रपाल के साथ भी पी तो उसे इतना नशा हो गया कि वह बिना खाना खाए ही सो गया. बच्चे पहले ही सो चुके थे. जेठ मंदबुद्धि ही था, वह खाना खा कर बाहर निकल गया तो नेत्रपाल और सर्वेश ने इस मौके का लाभ अच्छी तरह उठाया.
उस रात नेत्रपाल समझ गया कि पाकेश को पत्नी से भी ज्यादा शराब से प्रेम है. इस के बाद उसे जब भी सर्वेश से एकांत में मिलना होता, वह शराब की बोतल ले कर पाकेश के घर पहुंच जाता. पाकेश शराब पी कर लुढ़क जाता तो उसे सर्वेश से एकांत में मिलने का मौका आराम से मिल जाता.
लेकिन एक दिन पाकेश ने नेत्रपाल को सर्वेश की छाती पर हाथ लगाते देख लिया तो नशे में होने की वजह से उसे एकदम से गुस्सा आ गया. वह नेत्रपाल और सर्वेश को भद्दीभद्दी गालियां देने लगा. नेत्रपाल समझ गया कि अब यहां रुकना ठीक नहीं है, इसलिए वह तुरंत चला गया.
इस के बाद नेत्रपाल ने पाकेश के रहते सर्वेश के घर आना बंद कर दिया. लेकिन एक दिन पाकेश ने दोनों को रंगेहाथों पकड़ लिया. तब पाकेश ने शराब पी कर सर्वेश की जम कर पिटाई की और इस के बाद उसे उस की मां के घर भेज दिया.
सर्वेश ने नेत्रपाल के सामने अपना दुखड़ा रोया तो उस ने हर हालत में उस का साथ देने का आश्वासन दिया. इसी के बाद दोनों ने अपने संबंधों के बीच रोड़ा बन रहे पाकेश को हटाने की योजना बना डाली. इस के लिए उन्होंने रक्षाबंधन वाला दिन तय किया. दोनों ने सलाह की कि उस दिन किसी भी कीमत पर पाकेश को ठिकाने लगा देना है.
योजना के अनुसार, सर्वेश ने पाकेश से रक्षाबंधन का त्यौहार मनाने के लिए गांव चलने को कहा. पाकेश जाना तो नहीं चाहता था, लेकिन पत्नी की जिद के आगे उसे जाना ही पड़ा. जेठ को भी वह गांव ले गई. रक्षाबंधन का त्यौहार मना कर वह पाकेश और बेटी को ले कर काशीपुर आ गई. घर वालों से उस ने बहाना बनाया कि रात को घर खाली छोड़ना ठीक नहीं है. जेठ और बेटे को उस ने गांव में ही छोड़ दिया था.
काशीपुर आने के बाद वह खाना बनाने को ले कर पाकेश से उलझ गई. उस ने कहा कि वह बुरी तरह से थकी है, इसलिए खाना नहीं बना सकती. पाकेश से उलझना भी उस की योजना में शामिल था. सर्वेश ने खाना बनाने से मना किया तो पाकेश उसे भद्दीभद्दी गालियां देते हुए घर से निकल गया. उस के जाते ही उस ने नेत्रपाल को फोन कर दिया.
योजना के अनुसार, उस दिन नेत्रपाल काशीपुर में ही रुका था. सर्वेश का संदेश मिलते ही वह उस के घर पहुंच गया. घर से निकल कर पाकेश सीधे ठेके पर गया और घर लौटा तो नशे में धुत था. पाकेश को देख कर नेत्रपाल दूसरे कमरे में छिप गया.
पाकेश के जाने के बाद सर्वेश ने जल्दीजल्दी रोटियां बना ली थीं. वापस आने पर सर्वेश ने उसे रोटियां खाने को दीं तो वह उसे गालियां देते हुए मारपीट करने लगा.
सर्वेश की पिटाई होते देख नेत्रपाल को गुस्सा आ गया. वह निकल कर बाहर आ गया और पाकेश को समझाने लगा. लेकिन नेत्रपाल को देख कर पाकेश का गुस्सा और बढ़ गया. वह सर्वेश को छोड़ कर नेत्रपाल को गालियां देने लगा. वह उसे मारने के लिए कोई औजार ढूंढ रहा था, तभी पहले से छिपा कर रखी लोहे की रौड उठा कर सर्वेश ने नेत्रपाल को थमा दी.
नेत्रपाल को लोहे की रौड थमा कर सर्वेश ने पाकेश को बांहों में दबोच लिया. नेत्रपाल ने इस मौके का लाभ उठाते हुए उस के सिर पर लोहे की रौड का जोरदार वार कर दिया. एक ही वार में वह जमीन पर गिर पड़ा. उस ने दूसरा वार किया तो पाकेश के गिरने की वजह से वह सर्वेश के सिर में लग गया. उस के सिर से भी खून रिसने लगा. लेकिन उस ने अपनी चोट पर ध्यान न दे कर बेहोश पड़े पाकेश को दबोच लिया तो नेत्रपाल ने उस का गला दबा दिया.
थोड़ी देर छटपटा कर पाकेश हमेशाहमेशा के लिए शांत हो गया. इस के बाद बचाव का तरीका समझा कर नेत्रपाल चला गया. सर्वेश सवेरा होने का इंतजार करने लगी.
वह पूरी रात यही सोचती रही कि यह बात वह घर वालों को कैसे बताएगी? सुबह उस ने फोन कर के जेठानी को किसी तरह सूचना भी दे दी और बचाव के लिए गढ़ी गई कहानी भी सुना दी, लेकिन वह खुद को पुलिस की नजरों से बचा नहीं सकी.
सर्वेश के बयान के बाद पुलिस ने नेत्रपाल को भी उस के मोबाइल फोन की लोकेशन के आधार पर गिरफ्तार कर लिया. पूछताछ में उस ने भी अपना अपराध स्वीकार करने के बाद वही पूरी कहानी दोहरा दी, जो सर्वेश सुना चुकी थी. नेत्रपाल और सर्वेश के अनुसार पाकेश को खत्म कर के दोनों शादी करना चाहते थे. लेकिन उन का यह सपना पूरा नहीं हो सका.
पूछताछ के बाद कोतवाली पुलिस ने नेत्रपाल और सर्वेश को अदालत में पेश कर के जेल भेज दिया था. मजे की बात यह थी कि इतना बड़ा अपराध कर के भी सर्वेश को जरा भी पछतावा नहीं था. जेल जाते समय उस ने मां से भी बात नहीं की थी. अब उस के दोनों बच्चे सलेमपुर में ब्याही उस की बहन मुन्नी के पास हैं. द्य
—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित


