ब्लडी डैडी : बेटी ने खोया अपना आपा

दिसंबर का महीना था. रात के 12 बज रहे थे. ठंड भी ज्यादा थी, जिस के कारण मुंबई जैसे व्यस्त महानगर को भी ठंड ने अपनी आगोश में ले लिया था. लोग अपने घरों में रजाई, कंबल में सो रहे थे. कुछ अभी सोने की तैयारी में लगे थे.

मुंबई का ही एक इलाका है मीरा रोड. मीरा रोड में ही एक बंगला था शांति विला. जहां अभी लोग इतनी रात को ठंड के कारण रजाई में दुबके हुए थे, वहीं शांति विला के एक कमरे में अभी भी बहुत हलचल मची हुई थी.

16 साल की एक लड़की जिस का नाम कृति था, अपने हाथ में लिए चाकू से एक आदमी पर बदहवास अपनी पूरी ताकत लगा कर वार पे वार किए जा रही थी, जिस से खून के छींटे उस के चेहरे और कपड़ों पर फव्वारे की तरह आ रहे थे.

उसी कमरे में एक आलीशान पलंग भी था, जिस पर 14 साल की एक लड़की जिस का नाम नयना था, इन बातों से बेखबर बेसुध अभी भी सो रही थी. जबकि खून के छींटे उस के भी कपड़ों पर गिर रहे थे. खून की कुछ बूंदें उस के चेहरे पर भी आ गई थीं.

कृति इतनी बेसुध हो कर सामने वाले इंसान को चाकू घोंपती जा रही थी कि उसे जरा भी आभास नहीं हुआ था कि वह आदमी तो कब का मर चुका है. मगर वह अभी भी उस के पूरे जिस्म पर चाकू से अनगिनत जख्म बनाए जा रही थी. पता नहीं उसे उस आदमी से कितनी नफरत थी, जो वह उसे छलनी बना रही थी.

जब कृति के अंदर का गुस्सा कुछ कम हुआ तो वह रुक कर जोरजोर से सांसें लेने लगी. मगर जैसे ही उस की नजर खून से रंगे अपने हाथों और कपड़ों पर पड़ी तो पता नहीं क्या सोच कर वह जोरजोर से चीखने लगी.

पास के पलंग पर नयना अभी भी कमरे में हो रहे खूनखराबे से अनजान कुंभकरण की नींद सो रही थी. ऐसा लग रहा था, मानो वह नींद की गोली खा कर सो रही हो.  पलंग के पास ही फर्श पर उस मृत आदमी का जिस्म खून से लथपथ पड़ा था. उस के शरीर पर एक महंगा नाइट गाऊन था.

शांति विला के चारों ओर ऊंची चारदीवारी थी. चारदीवारी और मकान के बीच में 25 से 30 फीट का फासला था. जिस के कारण कृति के रोनेचिल्लाने की आवाज आसपास के घरों एवं फ्लैटों में नहीं के बराबर ही जा रही थी. वैसे भी जाड़े की रात में लोग ज्यादा ओढ़ढांक कर सोते हैं.

कृति के चीखने एवं जोरजोर से रोने की आवाज सुन कर नयना की नींद आखिर टूट ही गई. वह हड़बड़ा कर झट से उठ कर बैठ गई.

सामने का दृश्य देख कर उस के होश उड़ गए. कृति नयना की बड़ी बहन थी. और कमरे में मृत पड़ा इंसान कोई और नहीं बल्कि दोनों का पिता गजेंद्र मेहरा था. कृति ने अभी अपने ही डैडी का खून किया था.

आखिर उस ने अपने ही डैडी का इतनी बेरहमी से कत्ल क्यों किया था? नयना के दिमाग में भी ऐसे ही अनगिनत सवाल उमड़ रहे थे.

‘‘दीदी, यह तुम ने क्या किया? तुम ने अपने ही हाथों से डैडी का खून…’’

‘‘नयना, यह इंसान हमारा डैडी नहीं था, बल्कि डैडी के वेश में छिपा हुआ एक जालिम भेडि़या था. जिस की घिनौनी हरकतों के बारे में सिर्फ सोच कर ही रूह कांप जाती है. दुनिया में इस से ज्यादा कमीना और गिरी हुई सोच वाला बाप कोई नहीं होगा.’’ कृति अपने अंदर की धधकती हुई  ज्वालामुखी को शांत करती हुई बीच में ही बोल पड़ी थी.

‘‘दीदी, तुम ऐसा क्यों बोल रही हो? मुझे पूरी बात बताओ, आखिर हुआ क्या था?’’  नयना अपनी बड़ी बहन कृति के पास आ कर उस के कंधे पर धीरे से हाथ रखते हुए बोली.

कृति अभी भी गुस्से पर काबू पाने की कोशिश कर रही थी. कृति फर्श से धीरे से उठ कर पलंग पर आ कर बैठ गई. पीछे से नयना भी उसी के बगल में बैठ गई.

उन के डैडी गजेंद्र मेहरा, जोकि मुंबई के एक बहुत बड़े बिजनैसमैन थे, की लाश अभी भी वैसे ही फर्श पर खून से लथपथ पड़ी थी.

‘‘नयना, हर एक इंसान के बरदाश्त और धैर्य करने की सीमा एक न एक दिन टूट ही जाती है. आखिर इंसान तो इंसान ही होता है न. यह मरा हुआ हम दोनों का डैडी, मगर पता नहीं अब मैं इसे किस नाम से पुकारूं, पापी पापा, ब्लडी डैडी, कुकर्मी बाप या पता नहीं और क्याक्या उपमा दूं इसे. मुझ जैसी बेटी ऐसे कुकर्मी बाप को कुछ भी कहेगी, कम ही होगा. काश! ऐसा डैडी किसी का न हो.’’ कृति अपने चेहरे पर जमाने भर के कठोर भाव लाते हुए बोली.

‘‘नयना, आज मैं ने जो काम किया है न, वह मुझे बहुत पहले ही कर देना चाहिए था. कम से कम मुझ जैसी बेटी की उस का अपना सगा बाप ही इज्जत तो नहीं लूटता.’’

कृति की बात सुन कर नयना के पैरों तले की जमीन जैसे खिसक गई.

‘‘दीदी, यह तुम क्या कह रही हो, डैडी ने तुम्हारी…’’

‘‘हां, एक बार नहीं बहुत बार. आज यह कमीना बाप तुम्हारी भी इज्जत लूटने इस कमरे में आया था. तुम्हें आज इस ने दूध में नींद की गोलियां मिला कर दी थीं, ताकि तुम बेफिक्र हो कर सो जाओ और यह कुकर्मी अपनी हवस आराम से मिटा ले. मगर आज मेरी सहनशक्ति की सीमा टूट गई और मैं ने इसे मार दिया.’’

यह सुन कर नयना पर तो मानो पहाड़ ही टूट कर गिर पड़ा.

‘‘ये मैं क्या सुन रही हूं, यह इंसान जिसे आज तक मैं अपना डैडी समझती आ रही थी, वह इतना घिनौना और ब्लडी था. इसे तो अब डैडी कहने में भी शर्म आ रही है. दुनिया की कोई भी बेटी कभी ऐसे डैडी की कल्पना भी नहीं कर सकती है.’’ नयना भी गुस्से में मृत पड़े अपने डैडी को खा जाने वाली निगाहों से देखती हुई बोली.

‘‘दीदी, आज तुम मुझे पूरी बात बताओ. आखिर यह इंसान ऐसा कर क्यों रहा था? ’’

‘‘नयना, पता नहीं इस कुकर्मी बाप के कत्ल के इल्जाम में मुझे फांसी होगी या उम्रकैद की सजा. लेकिन मैं सीने में सच्चाई रूपी बोझ को दबाए नहीं मरना चाहती हूं. इसलिए आज मैं तुम को पूरी बात बताऊंगी.’’

कृति ने एक लंबी सांस ली. उस समय रात के एक बज रहे थे. ठंड अधिक होने के कारण बाहर श्मशान सा सन्नाटा पसरा हुआ था. कृति उसी समय अपनी बहन को पूरी बात विस्तार से बताने लगी.

कृति ने कहा कि जानती हो नयना, यह शांति विला मां की मां यानी नानी के लिए नाना ने ही बनवाया था. शांति नानी का ही नाम था. मां अपने मम्मीपापा की इकलौती संतान थीं. इसलिए नानानानी के मरने के बाद यह घर और उन की पूरी जायदाद मां को ही मिली थी.

मां बचपन से ही बहुत जिद्दी थीं. उन्होंने कालेज में अपने साथ पढ़ने वाले एक गरीब परिवार के युवक गजेंद्र मेहरा यानी हम दोनों के इस कुकर्मी बाप से अपने मम्मीपापा से झगड़ा कर के शादी की थी. नानानानी को भी अंत में अपनी इकलौती बेटी की जिद के आगे झुकना ही पड़ा था.

शुरूशुरू में तो सब कुछ ठीक रहा. नाना ने भी अपना सारा बिजनैस डैडी को सौंप दिया था. डैडी भी मन लगा कर बिजनैस की अच्छी तरह से देखभाल कर रहे थे.

शादी के 2 साल बाद मेरा और मेरे जन्म के 2 साल बाद तुम्हारा जन्म हुआ था. तुम्हारे जन्म के एक साल बाद ही एक कार दुर्घटना में नानानानी मर गए थे. नानानानी के मरते ही पता नहीं क्यों डैडी का स्वभाव एकदम से बदल गया था. अब वह बातबात पर मां से झगड़ा करने लगे थे. फिर भी मां हम दोनों की खातिर सब कुछ चुपचाप सहती जा रही थी.

उधर डैडी की हरकतें दिनप्रतिदिन और बदलती जा रही थीं. अब वह काम के बहाने अकसर घर से रात में भी बाहर ही रहने लगे थे. जबकि ये सब झूठ था. उन का अपनी ही सेक्रेटरी के साथ चक्कर चल रहा था और वो रात उसी के पास गुजारते थे.

जब मां को इस बात का पता चला तो उन्होंने गुस्से में डैडी से तलाक के लिए कोर्ट में अरजी दी. सारा कारोबार एवं यह घर भी मां के नाम पर ही था और मां यदि डैडी से तलाक ले लेतीं तो वह कंगाल बन कर सड़क पर आ जाते. इसीलिए वह किसी भी हालत में तलाक नहीं लेना चाहते थे. इस के लिए उन्होंने अपनी पूरी ताकत लगा दी थी. पैसे से वकील और जज को खरीद कर बारबार तलाक की अरजी को नामंजूर करवा दे रहे थे.

तारीख दर तारीख सिर्फ सुनवाई की तिथि बढ़ रही थी. देखते ही देखते तलाक के लिए कोर्ट का चक्कर लगाते मां को 7 साल बीत गए. फिर भी तलाक पर कोर्ट का कोई फैसला नहीं हुआ.

इसी बीच मां का बिना तलाक लिए ही दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया. मगर अब हमें लगता है कि नाना, नानी और मां को भी डैडी ने ही पूरी प्लानिंग के साथ सिर्फ जायदाद हड़पने के लिए मरवा दिया था.

यह सुनातेसुनाते कृति की आखों से फिर आंसू निकलने लगे. जबकि नयना ध्यान से पूरी बात सुन रही थी. उस ने कहा, ‘‘डैडी के साथ आए दिन होने वाले झगड़े के कारण ही शायद मां ने हम दोनों बहनों को बोर्डिंग स्कूल में पढ़ने को भेज दिया था. जिस के कारण ही हम दोनों आज तक घर के सारे हालात से अनजान थे. मां को शायद अपने मरने का भी आभास हो गया था, इसीलिए उन्होंने अपनी सारी जायदाद मेरे नाम कर दी थी.

‘‘यह जायदाद बाद में जब तुम्हारी भी उम्र 20 साल की हो जाओगी तो इस में से आधी तुम्हारे नाम हो जाएगी. इसीलिए डैडी मां के मरते ही मुझे तुरंत हौस्टल से अपने पास बुला लिया था, ताकि वो मुझ से बहलाफुसला कर सारी जायदाद अपने नाम करवा सके.’’ कहतेकहते फिर से कृति सिसकने लगी.

‘‘जानती हो नयना, मुझे मां की एक दोस्त जाह्नवी आंटी ने सारी बातें मेरे घर आने के ठीक अगले ही दिन बता दी थीं. इसीलिए मुझे डैडी की सारी सच्चाई और उन की काली करतूतों का पता चल गया था. अब तो मुझे भी उन से नफरत हो गई थी. तभी उन के लाख कोशिश के बावजूद भी मैं जायदाद उन के नाम नहीं की थी.

‘‘इस के बाद ही डैडी का घिनौना चेहरा मेरे सामने उजागर हुआ था. मेरा घर से निकलना बंद करवा दिया गया था. मुझे तुम से फोन पर डैडी अपने सामने बैठा कर ही बात करवाते थे. उस के बाद फिर मुझे कमरे में भूखेप्यासे बंद कर दिया जाता था.

‘‘इस पर भी जब इस जालिम बाप का दिल नहीं भरा तो वह जायदाद को जबरदस्ती अपने नाम करवाने के लिए मुझे मारनेपीटने भी लगा था. मगर मैं ने भी फैसला कर लिया था कि जीते जी मां की अमानत को इस निर्दयी इंसान के नाम कभी नहीं लिखूंगी.’’

कृति ने रुक कर एक लंबी सांस ली और कहा, ‘‘नयना, इस के बाद तो इंसानियत की सारी मर्यादाएं ही टूट गईं, जब यह बेशर्म बाप अपनी ही बेटी की अस्मत रोज तारतार करने लगा.’’

उस की बात सुन कर नयना दंग रह गई. वह बोली, ‘‘दीदी, इस इंसान को तो डैडी कहते हुए भी अब शर्म आ रही है. आखिर कोई इंसान इतना घिनौना काम कैसे कर सकता है? क्या आज आदमी के अंदर की इंसानियत एकदम खत्म हो गई है, जो उसे अपनी बेटी को भी हवस का शिकार बनाने में जरा भी शर्म और ग्लानि महसूस नहीं हो रही थी.’’

नयना का क्रोध भी सारी बातें सुन कर सातवें आसमान पर पहुंच गया था.

‘‘नयना, पूरी बात सुनोगी तो तुम भी दंग रह जाओगी. तुम को भी हौस्टल से यहां इसीलिए इस जालिम ने बुलाया था, ताकि यह तुम्हें भी अपनी हवस का शिकार बना कर मुझे जायदाद अपने नाम लिखने को मजबूर कर सके.’’  कहतेकहते कृति नयना से लिपट कर जोरजोर से रोने लगी.

‘‘नयना, अब इस दुनिया में तुम्हारे सिवाय मेरा था ही कौन. मैं खुद तो रोज तिलतिल कर मर ही रही थी, आखिर तुम्हें भी कैसे यह जिल्लत भरी जिंदगी जीने देती, इसीलिए मैं ने इस जालिम इंसान का खून कर दिया.’’

कृति नयना से लिपटी रोती हुई अपने दिल की भड़ास निकाले जा रही थी. बीचबीच में नयना भी रोती हुई अपनी बहन को सांत्वना दे रही थी.

रात के सन्नाटे को चीरती हुई दोनों बहनों की सिसकियां धीरेधीरे संपूर्ण वातावरण में फैलने लगी थीं, मगर उसे कोई सुनने वाला नहीं था.

आज दौलत के चक्कर में इंसान की इंसानियत इतनी गिर गई है कि उसे अपने खून के रिश्ते भी नहीं दिख रहे. शायद सच में वह ब्लडी डैडी ही था.

अगली सुबह खुद कृति ने ही पुलिस को फोन कर के पिता की हत्या की सूचना दे दी. पुलिस ने घटनास्थल पर पहुंच कर गजेंद्र मेहरा के शव को बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया.

पुलिस ने हत्या की आरोपी कृति को हिरासत में ले कर बाल न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे बाल सुधार गृह भेज दिया गया. बाल सुधार गृह से कृति को 2 साल बाद रिहा कर दिया गया. इस के बाद कृति और नयना ने मिल कर एक्सपोर्ट बिजनैस शुरू कर दिया. दोनों बहनें अब अपने बीते हुए कल को भूल चुकी हैं.     द्य

प्यार में कुलांचें भरने की फितरत – भाग 4

खोजी कुत्ता शव को सूंघ कर भौकता हुआ शराब ठेके तक गया. वहां वह चक्कर लगाता रहा. उस के बाद वापस आ गया. पुलिस ने शराब ठेका मालिक दिनेश गुप्ता से पूछताछ की तथा शराब ठेके पर सीसीटीवी के फुटेज भी खंगाले. इस में एक संदिग्ध ललित के घर में घुसते नजर आया. लेकिन सीसीटीवी कैमरा दूर लगा होने व अंधेरे के चलते फुटेज स्पष्ट नहीं हो सकी.

पुलिस अधिकारी अभी जांच कर ही रहे थे कि मृतका के पिता कालीचरन व मां जयदेवी घटनास्थल पर आ गई. बेटी का शव देख कर वे फफक पड़े. पुलिस अधिकारियों ने उन दोनो को धैर्य बंधाया और उन से बेटी की हत्या के संबंध में पूछताछ की.

सौतेली बेटी ने दिया सुराग

कालीचरन ने बताया कि उन की बेटी सरोजनी की हत्या दामाद ललित के छोटे भाई राजेश व उस की पत्नी अंजू देवी ने की है. दामाद व राजेश के बीच संपत्ति को ले कर कई बार विवाद हुआ था. संपत्ति के लालच में ही राजेश व अंजू ने मिल कर सरोजनी की हत्या की है.

पुलिस अधिकारियों ने ललित की 12 वर्षीय बेटी अनन्या से पूछताछ की तो उस ने बताया कि बगल में रहने वाले चाचा राजेश व चाची अंजू की मम्मीपापा से नहीं पटती थी. कुछ माह पहले दोनों में संपत्ति को ले कर विवाद हुआ था.

उस ने बताया जब से मम्मी (सौतेली मां सरोजनी) ब्याह कर घर आई थी, चाचाचाची खुश नहीं थे. छोटीछोटी बात पर झगड़ा करने की कोशिश करते थे. उन्होंने बाबा को भी पापा के खिलाफ कर दिया था.

चाची ने कुछ दिन पहले मम्मी से कहा था कि तुम्हारे घर पर दीपक जलाने वाला नहीं बचेगा. चाहे जितना बड़ा मकान बना लो, इस में राज करने वाला कोई नहीं बचेगा.

चाची ने एक बार मम्मी को बहुत मारा था. पापा और चाचा में भी कई बार लड़ाई हो चुकी है. शक है कि चाचाचाची ने ही मम्मी की हत्या की है.

हालांकि जब ललित पासवान से पुलिस अफसरों ने पूछताछ की तो उस ने स्वीकार किया कि उस की अपने छोटे भाई राजेश से नहीं पटती है. लेकिन वह हत्यारा नहीं हो सकता. उन दोनों की नाराजगी का फायदा कोई तीसरा भी उठा सकता है. लेकिन वह तीसरा व्यक्ति कौन हो सकता है, इस की जानकारी उसे भी नहीं है.

पूछताछ के बाद पुलिस अधिकारियों ने सरोजनी के शव को पोस्टमार्टम के लिए लाला लाजपतराय अस्पताल भिजवा दिया. उस के बाद एसएचओ योगेश कुमार सिंह को आदेश दिया कि वह इस मामले की गहन पड़ताल करें और हत्यारों को गिरफ्तार करें.

आदेश पाते ही योगेश कुमार सिंह ने जांच शुरू कर दी. चूंकि मृतका के पिता कालीचरन तथा ललित की बेटी अनन्या ने राजेश व उस की पत्नी अंजू पर हत्या का शक जाहिर किया था. अत: उन्होंने उन दोनों को हिरासत में ले लिया. थाने में उन से सख्ती से पूछताछ की. लेकिन वे दोनों खुद को बेकुसूर बताते रहे.

उन्होंने लड़ाईझगड़ा व संपत्ति विवाद की बात तो स्वीकार की, पर हत्या जैसे जघन्य अपराध से साफ इनकार कर दिया. योगेश कुमार सिंह को लगा कि ये दोनों दोषी नहीं हैं. उन्होंने उन दोनों को सशर्त थाने से घर भेज दिया.

एसएचओ योगेश कुमार सिंह को अभी तक मृतका का मोबाइल फोन बरामद नहीं हुआ था. उन्होंने मृतका सरोजनी के मोबाइल फोन नंबर की काल डिटेल्स निकलवाई. जिस से पता चला कि 29 अक्तूबर को शाम 4 से रात 12 बजे के बीच एक नंबर पर 3 बार तथा दूसरे नंबर पर एक बार बात हुई.

जिस नंबर पर 3 बार बात हुई थी, उस की जानकारी जुटाई गई तो पता चला वह नंबर तुलसियापुर (विधनू कस्बा) निवासी अंकुर श्रीवास्तव के नाम दर्ज है. दूसरा नंबर जिस पर एक बार बात हुई, वह नंबर राजू निवासी मेन रोड (विधनू) के नाम था.

अंकुर ने उगल दी सच्चाई

अब अंकुर व राजू पुलिस के रडार पर आ गए. पुलिस ने खबरियों को उन की टोह में लगा दिया. अंकुर तो पुलिस के हाथ नहीं लगा, लेकिन राजू हाथ आ गया.

राजू ने बताया कि उस ने रात 12 बजे सरोजनी को फोन किया था. लेकिन उस ने बात करने से नानुकुर की और फोन बंद कर दिया. उस के बाद क्या हुआ, उसे पता नहीं. सरोजनी की हत्या में उस का कोई हाथ नही है. वह बेकसूर है. श्री सिंह को भी लगा कि वह निर्दोष है. अत: सशर्त उसे थाने से जाने दिया.

2 नवंबर, 2022 की सुबह 5 बजे एसएचओ योगेश कुमार सिंह ने अंकुर श्रीवास्तव को समाधि पुलिया के पास से नाटकीय ढंग से गिरफ्तार कर लिया. जब उस से सरोजनी की हत्या के संबंध में पूछा गया तो वह साफ मुकर गया.

लेकिन सख्ती करने पर वह टूट गया और उस ने हत्या का जुर्म कुबूल कर लिया. इस के बाद एसपी (आउटर) तेजस्वरूप सिंह ने आननफानन प्रैसवार्ता की और सरोजनी हत्याकांड का खुलासा कर दिया. अंकुर श्रीवास्तव ने बताया कि सरोजनी से उस के नाजायज संबंध थे. 29 अक्तूबर को जब ललित अपनी बेटी अनन्या के साथ ससुराल चला गया तो पति के जाने की जानकारी सरोजनी ने उसे दी. उस के बाद उस की 2-3 बार सरोजनी से फोन पर बात हुई. उस के बुलाने पर वह रात 11 बजे उस के घर पहुंच गया.

दोनों के बीच प्रेमालाप शुरू हो गया. उस ने प्रणय निवेदन किया तो नानुकुर के बाद वह राजी हो गई. वह चारपाई पर पहुंचा ही था कि इसी समय सरोजनी के मोबाइल फोन पर किसी की काल आई. सरोजनी ने उस से ‘हां, नहींनहीं, अभी मत आना’ कह कर बात की फिर फोन बंद कर दिया.

अंकुर ने बताया कि जब उस ने फोन के बारे में पूछा तो वह बहाने बनाने लगी. तभी उसे गुस्सा आ गया और वह उस की छाती पर सवार हो गया. उस ने उस का टेंटुआ दबा कर पूछा, ‘‘बता, फोन किस का था?’’

जान पर बन आई तो सरोजनी ने बता दिया कि फोन राजू मैकेनिक का था. यह सुनते ही अंकुर के तनबदन में आग लग गई. वह जान गया कि उस का टांका राजू से भी भिड़ा है.

उस ने सरोजनी से कहा कि वह विश्वासघातिनी है. पहले पति को धोखा दे कर उस से संबंध बनाए. अब उसे धोखा दे कर राजू के साथ रंगरलियां मनाना चाहती है. आज तुझे विश्वासघात की सजा जरूर मिलेगी. इस के बाद उस ने उस का गला कस दिया. फिर वह रसोई में गया और मीट काटने वाले चाकू से उस का गला रेत दिया. हत्या के बाद उस के शव को चारपाई के नीचे छिपा दिया. बाथरूम में जा कर खून सने हाथ व चाकू को धोया. उस के बाद कमरे का दरवाजा बाहर से बंद किया, फिर रात के अंतिम पहर में घर से बाहर आ गया.

कोई देख कर पहचान न ले, इस के लिए उस ने गमछा मुंह पर लपेट लिया. सरोजनी के मोबाइल फोन को तोड़ कर उस ने विधनू नहर में फेंक दिया. इस के बाद वह फरार हो गया. लेकिन पुलिस से बच न सका और पकड़ा गया.

चूंकि अंकुर श्रीवास्तव ने हत्या का जुर्म कुबूल कर लिया था, अत: एसएचओ योगेश कुमार सिंह ने मृतका के पति ललित पासवान की तहरीर पर आईपीसी की धारा 302 के तहत अंकुर श्रीवास्तव के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली और उसे विधिसम्मत गिरफ्तार कर लिया. 4 नवंबर, 2022 को थाना विधनू पुलिस ने हत्यारोपी अंकुर श्रीवास्तव को कानपुर कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जिला जेल भेज दिया गया.

कथा लिखने तक अनन्या अपने पिता के साथ रह रही थी. प्यार पाने की उस की तमन्ना अधूरी ही रह गई. क्योंकि जब वह मात्र 5 साल की थी, तब जन्म देने वाली मां के प्यार से वंचित हो गई और अब जब वह थोड़ी बड़ी हो कर 12 साल की हुई तो सौतेली मां का प्यार भी छिन गया.      द्य

-कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित. कथा में अनन्या नाम परिवर्तित है.

मां-बाप के हत्यारे संदीप जैन को सजा-ए-मौत – भाग 4

बापबेटे में लंबे वक्त से मनमुटाव, झगड़े और संपत्ति को ले कर विवाद होता रहता था. रावतमल जैन ने इस का हल यह निकाला कि उन्होंने संदीप को अब रुपए देने बंद कर दिए. पैसे न मिलने से संदीप तिलमिला गया. वह साड़ी की दुकान चला रहा था, लेकिन उस से इतनी आमदनी नहीं होती थी कि वह अपनी जरूरतें पूरी कर सके. वह तनाव में रहने लगा.

संदीप पिता को समझने लगा दुश्मन

इस का असर यह हुआ कि वह पिता को अपना सब से बड़ा दुश्मन मानने लगा. एकांत में वह यही सोचता था, ‘यदि उस के पिता जिंदा रहेंगे तो वह पैसेपैसे को मोहताज हो जाएगा. उसे अपने पिता की पूरी संपत्ति का मालिक बनना है तो पिता को रास्ते से हटाना ही होगा.’

यह बात उस के दिमाग में बैठ गई. अब वह अपने पिता को रास्ते से हटाने के लिए तरहतरह की योजनाएं बनाने लगा.

अंत में उस ने ठोस योजना बना कर हत्या करने के लिए रिवौल्वर की तलाश शुरू कर दी. किसी से मालूम हुआ कि देशी कट्टे, पिस्तौल बेचने वाला भगत सिंह गुरुदत्ता है. संदीप भगत से जा कर मिला. गुरुदत्ता अग्रसेन चौक, दुर्ग में ही रहता था. संदीप ने उस से एक लाख 35 हजार रुपए में देशी रिवौल्वर और कारतूस खरीद लिए.

योजनानुसार संदीप ने अपनी पत्नी संतोष कुमारी को बेटे के साथ 27 दिसंबर, 2017 को अपनी ससुराल दल्ली राजहरा, जिला बालोद भेज दिया. संदीप ने 31 दिसंबर की रात को ही चौकीदार रोहित देशमुख को घर से जाने के लिए कह दिया. चौकीदार रात को उन के घर की चौकसी करता था. संदीप ने उस से कहा कि उस की मां और पिताजी कहीं रिश्तेदारी में 2 दिन के लिए जा रहे हैं, वह खुद ही घर की देखभाल कर लेगा. चौकीदार रोहित के जाने के बाद संदीप के लिए रास्ता साफ था.

रात को वह ऊपरी मंजिल पर रहा और मौका तलाश करता रहा. पूरी रात गुजर गई, तब सुबह साढ़े 5 बजे संदीप नीचे पिता रावतमल के कमरे में दबेपांव आ गया. उस के पिता फ्रैश होने के लिए बाथरूम में गए थे. संदीप ने अपनी मां के कमरे की बाहर से कुंडी लगा दी, उस के पिता बाथरूम से गैलरी में आए तो संदीप ने उन की पीठ में 2 फायर कर दिए. रावतमल गोली लगते ही लहरा कर गिरे.

गोली की आवाज से सूरजी देवी जाग गईं और चिल्लाने लगीं. संदीप डर कर ऊपरी मंजिल पर भाग गया. मां उसे फोन कर रही थीं, उस ने काल अटेंड नहीं की. कुछ देर बाद वह यह देखने के लिए नीचे आया कि स्थिति क्या है. उस की मां कमरे में बंद थीं और अपने नाती सौरभ गोलछा को फोन लगा कर कुछ बता रही थीं.

संदीप ने मां का मुंह बंद करने के लिए उस के कमरे का दरवाजा खोला और मां के सीने में 3 फायर झोंक दिए. मां नीचे गिर कर तड़पने लगीं तो संदीप वहां से भाग निकला.

कुछ ही देर मे सूरजी देवी का नाती सौरभ गोलछा वहां आया तो कमरे में नानानानी के शव देख कर घबरा गया. उस ने तुरंत पुलिस को काल कर के इस हत्याकांड की जानकारी दे दी. सुबहसुबह नए साल पर 2-2 कत्ल की सूचना मिलने पर पुलिस सकते में आ गई.

कोतवाली थाने के तत्कालीन एसएचओ भावेश साव अपने अधिकारियों को इस घटना की सूचना देने के बाद घटनास्थल पर आ गए.

सौरभ गोलछा के अलावा पासपड़ोस के लोग घटनास्थल पर मौजूद थे. एसएचओ ने दोनों लाशों का बारीकी से निरीक्षण किया. वहां पर 14 कारतूस और 2 खाली कारतूस के खोखे पड़े थे. उन्हें कब्जे में ले लिया गया.

यह हत्या दुर्ग के जानेमाने समाजसेवी रावतमल जैन की हुई थी, उन की पत्नी को भी गोलियां मारी गई थीं. थोड़ी देर में पुलिस आईजी दीपांशु काबरा, तत्कालीन एसपी अमरेश मिश्रा, एडिशनल एसपी शशिमोहन सिंह, डीएसपी एस.एस. शर्मा आदि घटनास्थल पर आ गए.

संदीप के खिलाफ मिले ठोस सबूत

आसपास पूछताछ की गई. सौरभ गोलछा वहां आने वाला पहला इंसान था. उस ने अपने मामा संदीप जैन पर शक जाहिर किया. पड़ोसियों से भी यही मालूम हुआ कि संपत्ति के लिए संदीप अपने पिता रावतमल से लड़ाई करता था.

पुलिस की नजर में संदीप का नाम आने पर उसे संदेह के घेरे में ले कर जांच शुरू कर दी गई.

रावतमल जैन और सूरजी देवी की लाशें पंचनामा बना कर पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दी गईं.

आईजी दीपांशु काबरा ने पूरी रणनीति बना कर तत्कालीन एसपी अमरेश मिश्रा के निर्देशन में एडिशनल एसपी शशिमोहन सिंह की अगुवाई में एक टीम गठित कर दी, जिस में एसएचओ भावेश साव, इंसपेक्टर एस.आर. पठारे, आर.डी. मिश्रा, जांच इकाई के एएसआई नारायण सिंह व अन्य पुलिसकर्मियों को शामिल कर के संदीप जैन की तलाश शुरू कर दी गई.

पुलिस ने पूरे शहर की नाकाबंदी कर दी. संदीप जैन के मोबाइल नंबर को सर्विलांस पर लगा दिया गया.

दिन चढ़ने तक पूरे दुर्ग में समाजसेवी रावतमल जैन और उन की पत्नी सूरजी देवी की हत्या की खबर आग की तरह फैल गई. मीडिया जगत ने इस कांड को उछालना शुरू कर दिया. पुलिस मामले को जल्द से जल्द हल कर के मीडिया को शांत करना चाहती थी. पुलिस की मुस्तैदी के कारण 4 घंटे में ही संदीप जैन को धर दबोचा गया.

उसे थाने में ला कर कड़ी पूछताछ शुरू हुई तो उस ने अपना जुर्म स्वीकार करते हुए बताया कि उस के पिता बातबात पर उसे संपत्ति से बेदखल करने की धमकी देते रहते थे. उस की मनपसंद शादी पिता की रूढि़वादी विचारधारा के कारण नहीं हो पाई.

पिता की इस बात से भी उसे चिढ़ थी कि वह अपनी पूजा के लिए नौकर से शिवनाथ नदी से जल मंगवाते थे, जबकि उन के घर में साफ पानी का नल लगा था. उन्होंने कुछ समय से उसे खर्चा देना भी बंद कर दिया था, इसी से परेशान हो कर उस ने पिता को गोली मार दी. मां को वह मारना नहीं चाहता था, लेकिन उस ने घटना की सूचना फोन से अपने नाती को देनी चाही तो मैं ने उन्हें भी गोलियों से भून दिया.

मीडिया ने यह शोर मचाया कि पुलिस ने अपनी पीठ थपथपाने के लिए निर्दोष संदीप जैन को गिरफ्तार किया है. पुलिस ने संदीप जैन को रिमांड पर ले कर उसे हथियार देने वाले भगतसिंह गुरुदत्ता और सहयोगी शैलेंद्र सागर को गिरफ्तार किया तो संदीप को निर्दोष बताने वालों के मुंह बंद हो गए.

संदीप जैन की पत्नी संतोष, भांजा सौरभ गोलछा, चौकीदार रोहित देशमुख, ड्राइवर राजू सोनवानी पुलिस के मुख्य गवाह बने.

संदीप को जेल भेज कर इस मामले की चार्जशीट कोर्ट में लगाई गई. 5 साल बाद आखिर अपने जन्मदाता की हत्या करने वाले संदीप जैन को मृत्युदंड की सजा सुना दी गई.

एक लोक अभियोजक बालमुकुंद चंद्राकर के अनुसार कोर्ट ने अपने फैसले में लिखा है कि ऐसे अपराधों को गंभीरतापूर्वक और कठोरता से हतोत्साहित किया जाना उचित होगा, जिस से समाज में ऐसे अपराध और ऐसे अपराधी पनप न सकें या ऐसे अपराध करने की हिम्मत कोई व्यक्ति न कर सके.

सजा सुनाए जाने के बाद पुलिस ने तीनों मुजरिमों को हिरासत में ले लिया और उन्हें जेल भेज दिया.    द्य

—कथा अधिवक्ताओं से की गई बातचीत पर आधारित

हत्यारी पत्नी सपना : कानपुर में मारा पति और ससुर को – भाग 4

ऋषभ रात 8 बजे अपने दोस्त मनीष के साथ चकरपुर पंचायत घर पहुंच गया. उस ने स्कूटी पंचायत घर के बाहर खड़ी कर दी. कुछ देर बाद राजकपूर भी सत्येंद्र सिंह को साथ ले कर बाइक से चकरपुर पहुंच गया. वहां उन दोनों ने सूआ से ऋषभ की स्कूटी पंक्चर कर दी.

रात 10 बजे ऋषभ और मनीष खापी कर शादी समारोह के बाहर आए तो देखा कि उन की स्कूटी का पहिया पंक्चर है. पंक्चर बनवाने के लिए वे स्कूटी पैदल ही हाईवे तक लाए.

वे जैसे ही शिवा होटल की तरफ चले तभी घात लगाए बैठे राजकपूर व सत्येंद्र सिंह ने ऋषभ पर चापड़ से कातिलाना हमला कर दिया. ऋषभ की गरदन व कंधे पर गहरी चोट लगी और वह वहीं खून से लथपथ हो कर गिर पड़ा.

मनीष ने थाना सचेंडी पुलिस को सूचना दी तो एसएचओ प्रद्युम्न सिंह पुलिस दल के साथ आ गए. उन्होंने घायल अवस्था में ऋषभ को हैलट अस्पताल में भरती कराया. मनीष की सूचना पर सपना भी अस्पताल पहुंच गई और रोनेपीटने का नाटक करने लगी.

कुछ समय बाद ऋषभ को होश आया तो सपना ने उसे कानपुर के चर्चित मधुराज नर्सिंग होम में भरती करा दिया. रात में राजकपूर ने सपना को मैसेज भेजा कि काम हो गया. जवाब में सपना ने मैसेज किया कि वह तो बच गया.

दूसरे रोज सपना ने अपने पड़ोसी रामकिशन विश्वकर्मा के खिलाफ पति पर जानलेवा हमला करने की रिपोर्ट दर्ज करा दी. सपना ने एसएचओ प्रद्युम्न सिंह को बताया कि रामकिशन विश्वकर्मा से उस का पैसों के लेनदेन को ले कर विवाद चल रहा है. इसी रंजिश में उस ने हमला करवाया है.

ससुर की तरह पति ऋषभ को भी निपटा दिया लेकिन…

ऋषभ लगभग 3 दिन तक मधुराज नर्सिंगहोम में रहा. उस के बाद उसे छुट्टी मिल गई. सपना ऋषभ को घर ले आई. ऋषभ की जान बच गई तो उस ने पति को मारने के लिए बी प्लान तैयार किया. इस प्लान में उस ने प्रेमी राजकपूर व मैडिकल स्टोर संचालक सुरेंद्र सिंह को शामिल किया.

उस ने जिस तरह दवा में ओवरडोज दे कर ससुर को मारा था, उसी तरह पति को भी मारने का जतन करने लगी. सपना ने ऋषभ को दवा की ओवरडोज देनी शुरू कर दी. ऋषभ शुगर का भी मरीज था, फिर भी सपना ने उसे ग्लूकोज का इंजेक्शन लगवा दिया.

मैडिकल स्टोर संचालक सुरेंद्र सिंह यादव सपना का आशिक था. वही सपना को ऐसी घातक दवाएं मुहैया करा रहा था. जिस से उस के पति ऋषभ की किडनी तथा लीवर में संक्रमण फैल जाए और उस की मौत हो जाए. मौत के इस खेल में सपना का प्रेमी राजकपूर भी सहयोग कर रहा था.

3 दिसंबर, 2022 को ऋषभ की हालत बिगड़ी तो सपना ने प्रेमी राजकपूर को वाट्सऐप मैसेज भेजा कि ऋषभ की हालत बिगड़ रही है. उस की समझ में नहीं आ रहा है कि वह क्या करे.

इस पर राजकपूर ने जवाब भेजा कि वह ऋषभ को ले कर किसी अस्पताल भागे, इलाज का नाटक करे जिस से सभी को लगे कि उस की बीमारी से मौत हुई है. इस के बाद सपना ऋषभ को ले कर हैलट अस्पताल गई, जहां उस की मौत हो गई.

चूंकि 5 दिन पहले ऋषभ पर जानलेवा हमला हुआ था और उस की पत्नी सपना ने पड़ोसी रामकिशन के खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज कराई थी, इसलिए शक के आधार पर एसएचओ प्रद्युम्न सिंह ने ऋषभ के शव का पोस्टमार्टम कराया. लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट चौंकाने वाली थी.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ऋषभ की मौत प्राणघातक हमले में आई चोटों से नहीं, बल्कि लीवर और किडनी में संक्रमण होने से हुई थी.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट की जानकारी एसएचओ ने पुलिस अधिकारियों को दी तो डीसीपी (पश्चिम) विजय ढुल तथा एसीपी (पनकी) निशंक शर्मा घटनास्थल पर मौकामुआयना करने पहुंचे. इस के बाद उन्होंने ऋषभ की संदिग्ध मौत की जांच हेतु एक पुलिस टीम गठित कर दी.

इस गठित पुलिस टीम ने अपनी जांच ऋषभ पर हुए हमले से शुरू की. सर्विलांस के जरिए जब टीम ने हाईवे घटनास्थल पर घटना के समय एक्टिव मोबाइल नंबरों को खंगाला तो पता चला, वहां पर आरोपी रामकिशन विश्वकर्मा का मोबाइल एक्टिव नहीं था, लेकिन 2 अन्य संदिग्ध नंबर एक्टिव थे.

पुलिस टीम ने उन नंबरों की काल डिटेल्स का मिलान मृतक ऋषभ की पत्नी सपना की काल डिटेल्स से किया तो पता चला कि एक नंबर पर सपना की बात होती थी. घटना के कुछ देर बाद ही उस से सपना को काल गई थी.

पुलिस ने उस नंबर की छानबीन की तो वह रायपुर (नर्वल) निवासी राजकपूर का निकला. पुलिस ने जब राजकपूर की छानबीन की तो पता चला कि वह सपना का प्रेमी है. सपना के उस से शादी के पहले से प्रेम संबंध है.

शक के आधार पर पुलिस ने सपना और राजकपूर को पकड़ा और सख्ती से पूछताछ की तो दोनों टूट गए और ऋषभ की हत्या का जुर्म कुबूल कर लिया.

सपना ने बताया कि उस ने पति की हत्या के लिए 3 लाख की सुपारी प्रेमी राजकपूर को दी थी. उस ने अपने कर्मचारी सत्येंद्र सिंह के साथ ऋषभ पर हमला किया था. लेकिन जब उस की जान बच गई तो उस ने पति को दवा की ओवरडोज दे कर मार दिया. दवाइयां उसे आशा मैडिकल स्टोर संचालक सुरेंद्र सिंह यादव ला कर देता था.

सपना के बयान के आधार पर पुलिस टीम ने सत्येंद्र सिंह व सुरेंद्र सिंह को भी उन के घरों से गिरफ्तार कर लिया. राजकपूर व सत्येंद्र की निशानदेही पर पुलिस टीम ने हमले में प्रयोग किया चापड़, बाइक तथा सूआ बरामद कर लिया.

एसएचओ प्रद्युम्न सिंह ने ऋषभ की हत्या का खुलासा करने तथा आरोपियों को पकड़ने की जानकारी डीसीपी (वेस्ट) विजय ढुल को दी तो उन्होंने प्रैसवार्ता आयोजित कर ऋषभ की हत्या का खुलासा किया. उन्होंने खुलासा करने वाली टीम को 50 हजार रुपए ईनाम देने की घोषणा भी की.

चूंकि आरोपियों ने हत्या का जुर्म कुबूल कर लिया था, अत: एसएचओ प्रद्युम्न सिंह ने भादंवि की धारा 302 के तहत सपना, राजकपूर, सत्येंद्र सिंह व सुरेंद्र सिंह के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर सभी को विधिसम्मत गिरफ्तार कर लिया.

10 दिसंबर, 2022 को पुलिस ने सभी आरोपियों को कानपुर कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जिला जेल भेज दिया गया.   द्य

-कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

बीवी ने मरवाया अमीर पति को – भाग 4

अपनी योजना के मुताबिक पूनम अपने बच्चों के साथ 29 जनवरी, 2023 की सुबह बिंदकी कस्बा वाले घर आ गई. पूनम अपने प्रेमी अविनाश के संपर्क में थी और अमित की हर गतिविधि की जानकारी उसे मोबाइल फोन पर दे रही थी.

दिन कोलाहल में बीत गया. रात 8 बजे पूनम ने पति अमित व बच्चों के साथ खाना खाया. इस बीच पूनम ने किसी को आभास नहीं होने दिया कि वह कितने खतरनाक मंसूबे ले कर मुंबई से आई है.

खाना खाने के बाद पूनम मकान दूसरी मंजिल पर पहुंची. वहां एक कमरे में उस ने 10 वर्षीय बेटे व 8 वर्षीया बेटी को लिटा दिया तथा दूसरे कमरे में पूनम अमित के साथ लेट गई. कुछ देर बाद अमित तो खर्राटे मार कर सो गया, लेकिन पूनम की आंखों से नींद कोसों दूर थी.

पूनम फोन पर अविनाश के संपर्क में थी. रात 12 बजे के बाद शेरा अपने साथी केशव, मोहित, शीलू व अंशुल के साथ लोडर पर सवार हो कर आ गए और अमित के घर के आसपास छिप गए.

अविनाश व रामखेलावन पहले ही बाइक से पहुंच गए थे और रेकी कर रहे थे. रात एक बजे पूनम दूसरी मंजिल से उतर कर नीचे आई. उस ने मुख्य दरवाजा धीरे से खोल कर अपने जीजा रामखेलावन व प्रेमी अविनाश को घर के अंदर कर लिया.

अविनाश ने फोन कर सुपारी किलर अंकित उर्फ शेरा तथा उसके साथियों को भी घर के अंदर बुला लिया. फिर सधे कदमों से सभी दूसरी मंजिल पर पहुंच गए, जहां अमित गहरी नींद सो रहा था.

अंकित सिंह उर्फ शेरा ने अपने बैग से लोहे का छोटा सब्बल निकाला और अमित के सिर पर भरपूर वार किया. अमित चीख न सके, इसलिए मोहित, अंशुल ने उस का मुंह दबोच लिया और शीलू तथा अविनाश ने पैर दबोच लिए. पूनम पति की छाती पर सवार हो गई. शेरा ने जहां अमित के सिर पर कई प्रहार किए, वहीं केशव ने नुकीली चीज से अमित का गला छेद डाला. अमित कुछ देर तड़पा, उस के बाद ठंडा हो गया.

अमित की हत्या के बाद शेरा और उस के साथी तो फरार हो गए, लेकिन पूनम का जीजा व प्रेमी अविनाश कुछ देर तक कमरे में रुके रहे. उन्होंने पूनम के हाथ रस्सी से बांधे फिर दरवाजे की कुंडी बाहर से लगा कर वे दोनों भी फरार हो गए.

सुबह 4 बजे पूनम जोरजोर से चीखने लगी और दरवाजा पीटने लगी. उस की आवाज सुन कर सास माधुरी देवी व ननद अनीता पूनम के कमरे के बाहर पहुंचीं. दरवाजे की कुंडी बाहर से लगी थी.

कुंडी खोल कर दोनों कमरे के अंदर पहुंचीं तो उन के मुंह से चीख निकल गई. सामने पलंग पर अमित की लाश खून से लथपथ पड़ी थी. माधुरी ने बहू के हाथ से रस्सी खोली और पूछा, ‘‘अमित की हत्या किस ने की?’’

पूनम रोते हुए बोली, ‘‘सासू मां, मुझे पता नहीं कि उन की हत्या किस ने की. कुछ लोग आए, उन्होंने इन के सिर पर वार कर मार डाला. विरोध करने पर उन्होंने मेरे हाथ बांध दिए और दरवाजे की कुंडी बाहर से बंद कर फरार हो गए.’’

अमित का शव देख कर मांबेटी पछाड़ें मार कर रो पड़ीं. दूसरे कमरे में सो रहे बच्चे सुरक्षित थे.

पुलिस जांच में पूनम आई निशाने पर

सुबह का उजाला फैलते ही अमित की हत्या की खबर जंगल की आग की तरह पूरे बिंदकी कस्बे में फैल गई. कुछ देर में वहां भीड़ जुट गई. थाना बिंदकी पुलिस को खबर लगी तो एसएचओ शमशेर बहादुर सिंह भारी पुलिस बल के साथ महाजनी गली में अमित गुप्ता के मकान पर पहुंच गए.

उन की सूचना पर कुछ ही देर बाद एसपी राजेश कुमार सिंह व सीओ परशुराम भी आ गए. उन्होंने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया और मृतक की मां व पत्नी से पूछताछ की. घटनास्थल पर मृतक का ममेरा भाई अभय मौजूद था.

पुलिस अधिकारियों ने अभय से पूछताछ की तो उस ने बताया कि नानी ने उसे फोन पर बताया था कि अमित की किसी ने हत्या कर दी है. तब वह यहां आया. उसे शक है कि अमित की हत्या में उस की पत्नी पूनम का हाथ है. मृतक की मां माधुरी देवी ने भी पूनम पर ही शक जाहिर किया.  मृतक के 10 साल के बेटे ने भी बताया कि मम्मीपापा में अकसर लड़ाई होती रहती थी. पुलिस अधिकारियों ने पूनम से पूछताछ की तो वह आंसू बहाने लगी. बारबार बयान भी बदल रही थी. शक होने पर पुलिस ने पूनम को हिरासत में ले लिया और शव को निरीक्षण के बाद पोस्टमार्टम हाउस फतेहपुर भेज दिया.

थाना बिंदकी पर पुलिस अधिकारियों ने जब पूनम से सख्ती से पूछताछ की तो वह टूट गई और पति की हत्या करने की बात कुबूल कर ली. उस ने हत्यारों के नाम भी बता दिए.

हत्या का भेद खुलते ही पुलिस ने ताबड़तोड़ छापा मार कर अंकित सिंह उर्फ शेरा और उस के साथी केशव व अंशुल को गिरफ्तार कर लिया. भोर पहर में साड़ चौराहे से पूनम के प्रेमी अविनाश उर्फ उमेंद्र को भी गिरफ्तार कर लिया लेकिन पूनम का जीजा रामखेलावन, मोहित तथा शीलू पुलिस को चकमा दे कर फरार हो गए. गिरफ्तार किए गए सभी आरोपियों ने हत्या का जुर्म कुबूल किया.

हत्यारोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने आलाकत्ल लोहे का सब्बल मय बैग, 315 बोर के 2 तमंचे, 2 जिंदा कारतूस, 3 अदद मोबाइल फोन, 2 बाइकें, एक पिकअप (लोडर) यूपी78 एफटी 8157 तथा 30 हजार रुपया नकद बरामद किया.

अमित हत्याकांड का खुलासा होते ही एसपी राजेश कुमार सिंह ने पुलिस लाइन में प्रैसवार्ता की और केस की पूरी जानकारी दी.

एसएचओ शमशेर बहादुर सिंह ने मृतक की मां माधुरी देवी को वादी बना कर धारा 302 आईपीसी के तहत पूनम, अविनाश उर्फ उमेंद्र, रामखेलावन, अंकित सिंह उर्फ शेरा, मोहित, अंशुल, केशव व शीलू के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली.

3 फरवरी, 2023 को सभी आरोपियों को फतेहपुर की जिला अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया.

कथा लिखने तक शीलू, मोहित व रामखेलावन फरार थे. पुलिस उन को तलाश रही थी. मृतक के दोनों बच्चे अपनी दादी के संरक्षण में थे.       द्य

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

दर्द ने बढ़ाया हौसला

खूबसूरत आतिया साबरी एक अजीब सजा से रूबरू हो रही थी. शौहरबीवी के रिश्तों के उस के जज्बातों पर वक्त के साथ बंदिश लग चुकी थी. यह रिश्ता अब ऐतबार के काबिल भी नहीं रह गया था. रिश्तों की डोर पूरी तरह टूट चुकी थी और जिंदगी गमजदा हो गई थी. लेकिन वह अपनी 2 मासूम बेटियों की मुसकराहटों व शरारतों से खुश हो कर गम को हलका करने की कोशिश करती थी.

21 अगस्त, 2017 की शाम को आतिया के चेहरे पर भले ही चिंता की लकीरें थीं, लेकिन आंखों में उम्मीदों के चिराग रोशन थे. उसे देख कर पिता मजहर हसन ने बेटी के नजदीक आ कर पूछा, ‘‘क्यों परेशान है आतिया? तेरे इरादे नेक हैं और तू इंसाफ के लिए लड़ रही है. देखना तुम लोगों की मुहिम जरूर रंग लाएगी.’’

‘‘सोचती तो मैं भी यही हूं. आप तो जानते हैं, यह लड़ाई मैं सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि उन बहनों के लिए भी लड़ रही हूं, जो 3 तलाक के बाद जिल्लत की जिंदगी जी रही हैं. मैं सोचती हूं कि किसी को भी तलाक का ऐसा दर्द न झेलना पड़े.’’

‘‘जो होगा, ठीक ही होगा. बस, उम्मीद का दामन थामे रहो.’’ मजहर ने बेटी को समझाया तो आतिया की आंखों में चमक आ गई.

‘‘मुझे पूरी उम्मीद है अब्बू, अदालत औरतों के हक में फैसला दे कर इस 3 तलाक से निजात दिला देगी. कल का दिन शायद मेरे लिए खुशियां ले कर आए.’’ आतिया ने आत्मविश्वास भरे लहजे में कहा.

अब्बू से थोड़ी देर बात कर के आतिया सोने के लिए अपने कमरे में चली गई. उस की 2 मासूम बेटियां सादिया व सना तब तक सो चुकी थीं.

आतिया उत्तर प्रदेश के शहर सहारनपुर के नई मंडी कोतवाली के मोहल्ला आली की रहने वाली थी. वह तलाक पीडि़ता थी और उस ने इंसाफ के लिए देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर रखी थी. वह देश की उन 5 मुसलिम महिलाओं में से एक थी, जो 3 तलाक के खिलाफ जंग लड़ते हुए सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गई थीं.

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उन के मामलों पर लंबी सुनवाई हुई थी और फैसले के लिए 22 अगस्त की तारीख तय की गई थी. 5 जजों की संविधान पीठ को मुसलिम धर्म में शरीयत कानून के तहत दिए जाने वाले 3 तलाक पर फैसला सुनाना था. इस तरह के तलाक के खिलाफ देशभर में मुसलिम महिलाओं की लगातार आवाजें उठ रही थीं.

अगले दिन अदालत ने अपना फैसला सुनाया तो आतिया और उस के परिवार की खुशियों का ठिकाना नहीं रहा. अदालत ने अपने ऐतिहासिक फैसले में 3 तलाक की 14 सौ साल पुरानी प्रथा को संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघन करार देते हुए खारिज कर दिया था. जजों की संविधान पीठ ने इस प्रथा को कुरान-ए-पाक के बुनियादी सिद्धांतों के खिलाफ और शरीयत कानून का उल्लंघन बताया.

आतिया को इसलिए और भी खुशी हुई थी, क्योंकि वह भी इस लड़ाई का एक हिस्सा थी. दरअसल, उस की जिंदगी दुख के पहाड़ से टकराई थी. उस ने कभी सोचा भी नहीं था कि जिस शख्स को ताउम्र उस का साथ देना था, वह एक दिन उसे अकेला छोड़ देगा. आतिया अपनी मां मुन्नी व 3 बड़े भाइयों की लाडली थी.

आतिया विवाह के लायक हुई तो उस के घर वालों को उस के विवाह की चिंता हुई. वे चाहते थे कि उस का विवाह किसी अच्छे घर में हो, ताकि उस की जिंदगी खुशियों से आबाद रहे. उस के पिता मजहर मूलरूप से हरिद्वार जिले के सुलतानपुर गांव के रहने वाले थे. करीब 25 साल पहले वह सहारनपुर आ कर बस गए थे. उन के नातेरिश्तेदार वहीं आसपास रहते थे.

मजहर मियां ने रिश्ते की तलाश भी वहीं शुरू कर दी. खोजबीन के बाद उन्होंने बेटी का रिश्ता हरिद्वार के खानपुर थाना क्षेत्र के गांव जसोदरपुर निवासी सईद अहमद के बेटे वाजिद अली के साथ तय कर दिया. सारी बातें तय होने के बाद 25 मार्च, 2012 को उन्होंने आतिया का निकाह वाजिद के साथ कर दिया.

निकाह के बाद आतिया की जिंदगी खुशियों से भर गई. उस ने अपने भविष्य को ले कर तमाम ख्वाब देखे थे. एक साल बाद उस ने बेटी को जन्म दिया. यह उस का पहला बच्चा था. इस से सभी को खुश होना चाहिए था, लेकिन आतिया को पहली बार अहसास हुआ कि बेटी के जन्म से न सिर्फ उस का पति, बल्कि ससुराल के अन्य लोग भी खुश नहीं थे. वे लोग बेटे के ख्वाहिशमंद थे.

आतिया ससुराल वालों के रवैये पर हैरान तो थी, लेकिन उस ने सोचा कि यह सब वक्ती बातें हैं, जो वक्त के साथ खत्म हो जाएंगी. एक साल कब बीत गया, पता ही नहीं चला. आतिया दोबारा गर्भवती हुई. इस बार उस के ससुराल वालों को भरोसा था कि बेटा ही होगा. एक दिन वाजिद ने कहा भी, ‘‘मुझे उम्मीद है कि इस बार तुम बेटे को ही जन्म दोगी?’’

उस की बात सुन कर आतिया को हैरानी हुई. उस ने जवाब में कहा, ‘‘तुम जानते हो वाजिद, यह सब इंसान के हाथ में नहीं होता. लड़का हो या लड़की मैं दोनों में कोई फर्क महसूस नहीं करती. बच्चे गृहस्थी के आंगन के फूल होते हैं.’’

उस की बात पर वाजिद ने नाखुशी जाहिर करते हुए कहा, ‘‘तुम्हारी सोच चाहे जो भी हो, लेकिन मैं बेटे की ख्वाहिश रखता हूं.’’

आतिया बहस नहीं करना चाहती थी. लिहाजा वह खामोश हो गई. लेकिन वह मन ही मन परेशान थी कि यह किस तरह की सोच है, जो बेटियों से परहेज किया जाता है. अपने शौहर की सोच उसे अच्छी नहीं लगी.

सन 2015 में आतिया ने एक और बेटी को जन्म दिया. इस पर उस की ससुराल में जैसे तूफान आ गया. कोई भी इस बात से खुश नहीं था. न उस का शौहर और न उस के घर वाले. आतिया ने सोचा कि वक्त के साथ सब ठीक हो जाएगा, लेकिन यह उस की भूल थी. सभी लोग उसे ताना मारने लगे. उन के तेवर भी बदल चुके थे.

इस के बाद ससुराल वाले दहेज को ले कर भी आतिया को ताना देने लगे थे. आतिया को सब से बड़ा झटका उस दिन लगा, जब वाजिद ने उस से तल्ख लहजे में कहा, ‘‘बेटी को जन्म दे कर तूने मेरे कंधे झुका दिए हैं.’’

उस की बात पर आतिया को गुस्सा आ गया. उस ने पलट कर जवाब दिया, ‘‘कैसी बात कर रहे हैं आप? कहीं अपने बच्चों के जन्म से भी किसी के कंधे झुकते हैं? आप को खुश होना चाहिए कि 2 बेटियों के पिता हैं. हम इन्हें पढ़ालिखा कर काबिल बनाएंगे.’’

‘‘यह सब ख्याली बातें हैं आतिया, तुम मेरी बात नहीं समझोगी.’’

‘‘मैं आप की सारी बातें समझती हूं.’’ आतिया ने भी तल्खी से जवाब दिया.

‘‘तुम्हें जो सोचना है, सोचती रहो. लेकिन सच यह है कि सिर बेटों से ही ऊंचा होता है.’’

आतिया की सोच और भावनाओं का किसी पर कोई असर नहीं हुआ. फलस्वरूप वक्त के साथ घर में कलह बढ़ती गई. पति की तानेबाजियों ने तल्खियों को और भी बढ़ा दिया. छोटीछोटी बातों पर कई बार विवाद बढ़ता तो आतिया के साथ मारपीट भी हो जाती. पानी सिर से ऊपर जाने लगा था.

आतिया ने ये बातें अपने मायके वालों को बताईं तो उन्होंने उसे सब्र से काम लेने की सलाह दी. लेकिन जब यह आए दिन की बात हो गई तो आतिया के मातापिता ने जा कर वाजिद व उस के घर वालों को समझाने की कोशिश की. इस से कुछ दिनों तक तो सब ठीक रहा, लेकिन जल्दी ही जिंदगी फिर से पुराने ढर्रे पर आ गई.

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धीरेधीरे आतिया की परेशानियों का सिलसिला बढ़ता गया. 12 नवंबर, 2015 को आतिया के साथ हद दर्जे तक मारपीट की गई. उस की तबीयत खराब होने लगी तो उसे उस के हाल पर छोड़ दिया गया. उसे यहां तक कह दिया गया कि वह चाहे तो ससुराल छोड़ कर जा सकती है.

अब आतिया को अपनी जान का खतरा महसूस होने लगा था. उसे जहर दे कर मारने की साजिश की जा रही थी. इसलिए अगले दिन वह दोनों बेटियों के साथ मायके चली आई. उस की हालत देख कर घर में सभी को धक्का लगा. आतिया ने आपबीती सुनाई तो उन्हें लगा कि बेटी जिंदा बच गई, यही बड़ी बात है.

आतिया को अस्पताल में भर्ती करा दिया गया. वह मानसिक व शारीरिक कमजोरी से उबर आई तो उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई. आतिया के साथ ज्यादती हुई थी, इसलिए उस ने पुलिस में जाने का मन बना लिया. ऐसा ही उस ने किया भी. उस ने स्थानीय थाने में अपनी ससुराल वालों के खिलाफ मारपीट व दहेज उत्पीड़न की तहरीर दे दी.

चंद रोज ही बीते थे कि आतिया की जिंदगी में भूचाल आ गया. वाजिद ने 10 रुपए के स्टांप पेपर पर लिख कर तलाकनामा भिजवा दिया. तलाक की तारीख 2 नवंबर लिखी गई थी. दरअसल, ससुराल पक्ष के लोगों को पता चल चुका था कि आतिया पुलिस में शिकायत दर्ज करा रही है, इसलिए उन्होंने चालाकी बरतते हुए तारीख पहले की लिखी थी.

आतिया को उम्मीद नहीं थी कि नौबत यहां तक आ जाएगी. वह महिलाओं को तलाक देने की मुसलिम धर्म की इस परंपरा के खिलाफ थी. वाजिद ने बेटियां पैदा होने और दहेज के लिए उसे सताया और फिर छुटकारा पाने के लिए एकतरफा तलाक भी भेज दिया.

धार्मिक कानून ऐसे तलाक को मान्यता देता था, इसलिए आतिया चाह कर भी कुछ नहीं कर सकती थी. जबकि वह इस तरह की तलाक प्रक्रिया के खिलाफ थी. मामूली बातों पर दिए जाने वाले तलाक के किस्से वह सुनती आई थी. सारे हक मर्द के पास थे. वह जब चाहे, बीवी को अपनी जिंदगी से निकाल सकता था.

आतिया ने सोच लिया था कि वह खामोश नहीं बैठेगी, बल्कि अपने उत्पीड़न और तलाक के खिलाफ आवाज उठाएगी. उधर पुलिस ने उस की तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया. दिसंबर महीने में पुलिस ने आतिया के पति व ससुर को गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया. आतिया ने दोनों मासूम बेटियों में खुशियां ढूंढीं और तलाक को चुनौती देने की ठान ली.

आतिया का एक भाई रिजवान सामाजिक कार्यकर्ता था और फरीदी विकास समिति नामक संस्था चलाता था. उस ने भी इस लड़ाई में आतिया का साथ दिया. आतिया तलाक के खिलाफ थी, यह बात नातेरिश्तेदारों और समाज के लोगों को पता चली तो उन्होंने उसे मजहब का वास्ता दे कर समझाया. लेकिन आतिया उन की बात मानने को तैयार नहीं थी.

आतिया के मातापिता व घर वालों को भी लोगों ने समझाने की कोशिश की. लेकिन उन की नजर में आतिया कुछ गलत नहीं कर रही थी. उस की जिंदगी जिस तरह दोराहे पर आ गई थी, उस से वह भी आहत थे और इंसाफ चाहते थे.

आतिया ने ऐसी महिलाओं से मिलना शुरू किया, जो तलाक पीडि़ता थीं. उन की कहानियां उसे विचलित कर जाती थीं. उस ने मुसलिमों के बड़े धार्मिक केंद्र दारुल उलूम देवबंद में पति के तलाक के खिलाफ अर्जी लगाई. लेकिन उन्होंने तलाक को जायज ठहराया और धार्मिक कानून का हवाला भी दिया.

दरअसल, वाजिद वहां से अपने दिए तलाक के बारे में पहले ही फतवा ले चुका था. इस के बावजूद आतिया यह सब मानने को तैयार नहीं थी. क्योंकि उसे धोखे से तलाक दिया गया था. सारे हक एकतरफा थे यानी उस की रजामंदी के कोई मायने नहीं थे.

खास बात यह थी कि वाजिद इस बीच दूसरा निकाह भी कर चुका था. जब दारुल उलूम देवबंद से भी उसे निराशा मिली तो उस ने समाज से टकराते हुए 3 तलाक की परंपरा को बदलने के लिए न्यायालय की दहलीज तक पहुंचाने का मंसूबा बना लिया. 3 तलाक का मुद्दा देश के कई हिस्सों में बहस को जन्म दे रहा था और मुसलिम महिलाएं इस परंपरा के खिलाफ खड़ी हो रही थीं.

आतिया ने दिसंबर, 2016 में सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाल दी, जिसे स्वीकार कर लिया गया. 3 तलाक एक बड़ा मुद्दा बना ही हुआ था और कुछ याचिकाएं पहले से ही अदालत में थीं. देश के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ था, जब मुसलिम महिलाओं ने 3 तलाक के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया था.

सुनवाई पर आतिया अदालत जाती रही. 3 तलाक का मामला चूंकि संवेदनशील और धार्मिक था, इसलिए सुनवाई के लिए अलगअलग धर्म के 5 जजों का समूह बना कर उन्हें 3 तलाक की सुनवाई और फैसले का जिम्मा दिया गया. इस के बाद ही अदालत ने सभी मामलों को जोड़ कर एक साथ सुनवाई कर के 22 अगस्त को फैसला सुना दिया.

आतिया कहती है कि अदालत के फैसले के बाद मुसलिम महिलाओं के लिए आजादी के दरवाजे खुल गए हैं. मामूली बातों पर भी तलाक को हथियार बना कर औरत से छुटकारा पाने की मनमानी वाली मानसिकता से उन्हें निजात मिलेगी और उत्पीड़न बंद होगा.

आतिया अपने पिता के घर रह रही है. वह अपनी बेटियों को पढ़ालिखा कर आगे बढ़ाना चाहती हैं. उस के पिता कहते हैं, ‘मैं ने बेटी के दर्द को करीब से महसूस किया है. समाज में किसी और बेटी के साथ नाइंसाफी न हो, इस लड़ाई का यही मकसद था.’

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अगले दिन ही तलाक

झारखंड के हजारीबाग में एक गांव है चितरपुर. 8 जून, 2012 को इस गांव की फातिमा सुरैया का निकाह बादमगांव के कैफी आलम से हुआ था.

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फातिमा का कहना है कि निकाह के समय 2 लाख रुपए नकद, 6 लाख रुपए के जेवरात और 2 लाख रुपए का अन्य सामान दहेज में दिया गया था. शादी के एक साल बाद फातिमा एक बेटी की मां बनी. उस के जन्म के 6 माह बाद फातिमा से कहा गया कि वह अपने मायके से 5 लाख रुपए लाए, उसे जमीन खरीदनी है.

वह पैसा लाई भी, लेकिन कैफी आलम ने जमीन अपने नाम खरीद ली. इस के कुछ दिनों बाद वह फातिमा के मायके वालों से 2 लाख रुपए की और मांग करने लगा. पैसे नहीं मिले तो ससुराल वाले सुरैया को प्रताडि़त करने लगे. सुरैया फिर भी सहती रही.

23 अगस्त को सब कुछ ठीक था. सुबह को सुरैया ने पति के साथ नाश्ता भी किया. लेकिन शाम को वह घर आया तो अचानक तीन बार तलाक कह कर उसे बेटे के साथ घर से निकाल दिया, साथ ही कहा भी, ‘थाना कोर्टकचहरी जहां भी जाना हो, जाओ.’

सुरैया अपने मायके चली गई. मायके वालों ने कैफी और उस के घर वालों को समझाने की काफी कोशिश की. लेकिन बात नहीं बनी. वे लोग रांची के अंजुमन कमेटी में गए, लेकिन कमेटी ने 20 दिनों बाद निर्णय लेने की बात कही.

आखिर सुरैया ने थाना कड़कागांव में अपने ससुर फकरे आलम, सास रोशन परवीन, ननद सुबैया आलम और ननदोई परवेज मलिक के खिलाफ दहेज के लिए प्रताडि़त करने की रिपोर्ट दर्ज करा दी. फैसला तो एक दिन पहले ही आ गया था. अब शायद सुरैया को राहत मिले.

3 तलाक के चक्कर में जान तक लगा दी दांव पर

जिला बरेली के आंवला क्षेत्र के गांव कुड्डा की रहने वाली 3 तलाक पीडि़ता अजरुन्निसा जिल्लत की जिंदगी से इतनी तंग आ गई थी कि 12 मई, 2017 को उस ने जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर आत्मदाह की कोशिश की. उस ने अपने ऊपर मिट्टी का तेल डाल लिया था, गनीमत यह रही कि आग लगाने से पहले वहां मौजूद सिपाहियों ने उसे बचा लिया.

घटना से 4 महीने पहले ही अजरुन्निसा का निकाह बरेली के सीबीगंज निवासी तौफीक से हुआ था. शादी के बाद से तौफीक उस पर गलत काम के लिए दबाव डाल रहा था. वह नहीं मानी तो तौफीक उस के साथ मारपीट करने लगा. इस से भी उस का मन नहीं भरा तो शादी के 2 महीने बाद उस ने 3 बार तलाक कह कर अजरुन्निसा को घर से निकाल दिया.

इस के बाद अजरुन्निसा ने न्याय के लिए थाने से ले कर अधिकारियों तक के यहां गुहार लगाई. धर्म के ठेकेदारों के पास भी गई, पर हर जगह निराशा ही मिली. अंतत: उस ने आत्मदाह करने का फैसला किया. बहरहाल, वह बच तो गई, पर उसे न्याय कहीं से नहीं मिला. सर्वोच्च न्यायालय का फैसला आने के बाद भी वह न्याय की मुंतजिर है.

रौंग नंबर करके शादीशुदा को फांसा – भाग 5

आईओ केतन सिंह ने अपने तेवर सख्त कर लिए, ‘‘हेमा, सुरेश को तुम ने ही पीटा है. अब सच बता दो वरना मैं दूसरा रास्ता अपनाऊंगा. तुम्हारे मुंह से सच्चाई उगलवाने के लिए मुझे सख्ती करनी पड़ेगा.’’

सख्ती का नाम सुनते ही हेमा टूट गई. उस ने रोते हुए कहा, ‘‘सुरेश को मैं ने ही लालतघूंसों से पीटा था साहब.’’

‘‘क्यों?’’

‘‘वह हमारे प्यार के रास्ते में बाधा बन गया था…’’

‘‘किस से प्यार करती हो तुम?’’ आईओ केतन सिंह ने उसे घूरते हुए पूछा.

‘‘सचिन से.’’

‘‘कहां रहता है सचिन?’’

‘‘मथुरा के वृंदावन में,’’ हेमा ने बताया, ‘‘कल वह मेरे साथ था, उस ने और मैं ने सुरेश को जबरन शराब पिलाई थी. फिर उस के मुंह में रुमाल ठूंस कर उसे लातघूसों से इतना मारा कि वह मर गया.’’

‘‘तो मरे हुए पति को ले कर तुम अस्पताल गई थी अपनी पड़ोसनों के साथ?’’

‘‘जी साहब, मैं सोच रही थी पड़ोसन साथ ले कर चलूंगी तो पुलिस शक नहीं करेगी मुझ पर. मुझे मालूम था डाक्टर सुरेश को मरा घोषित कर देंगे, तब मैं उस की लाश ले कर लौट आऊंगी. सभी को लगेगा ज्यादा शराब पीने से सुरेश की मौत हो गई है.’’

‘‘सचिन इस वक्त कहां है?’’

‘‘वह कल ही वृंदावन चला गया था.’’

‘‘उसे बुलाओ यहां. उस से कहो, पुलिस ने सुरेश की लाश का क्रियाकर्म कर दिया है. उन्हें शक नहीं हुआ है, तुम दिल्ली आ जाओ. उसे कहां बुलाना है, यह मैं बता देता हूं. तुम्हारे फोन से सचिन से बात करो, वैसे ही जैसे पहले करती थी.’’

आईओ ने हेमा को समझा दिया. फिर सचिन को मंडावली की मेन मार्केट में आ कर मिलने को कह दिया. हेमा ने सचिन को फोन किया और बड़ी सादगी और प्यार से उस से वही कहा जो आईओ ने समझाया था. उसे शाम तक मंडावली आने के लिए कह कर हेमा ने फोन काट दिया.

आईओ ने उस का फोन कब्जे में ले लिया. सचिन को आने में 2-3 घंटे लग सकते थे. हेमा से इस बीच सचिन से मिलने की पूरी कहानी सुनी गई.

प्रेमी के साथ मिल कर मिटा दिया सिंदूर

हेमा ने बताया कि सचिन एक रौंग नंबर की काल करने के दौरान उस से जुड़ा. वह उस से मिलने दिल्ली आने लगा. उन में पहले दोस्ती हुई, फिर प्यार. प्यार के दौरान ही उस के सचिन से शारीरिक संबंध भी बन गए.

सचिन के जवानी भरे जोश पर वह मर मिटी. उस ने सचिन को अपने घर के पास ही किराए पर कमरा दिला दिया और सुरेश की गैरमौजूदगी में उस के साथ गुलछर्रे उड़ाने लगी.

धीरेधीरे यह बात सुरेश को पता चली तो वह उन के प्यार का विरोध करने लगा. वह हेमा से लड़ता था और उसे गंदीगंदी गालियां देता था. पिटाई भी करने लगा था. इस से वह उसे रास्ते से हटाने के लिए सोचने लगी.

हेमा ने सचिन के साथ सुरेश को मारने के लिए 4 दिसंबर, 2022 का दिन चुना. सचिन पहले ही यहां से कमरा छोड़ कर वृंदावन चला गया था.

4 दिसंबर को वह दिल्ली आया. हेमा ने 2 बोतल शराब मंगवा कर रखी हुई थी. फिर पति सुरेश को कल काम पर नहीं जाने दिया. बच्चों को खेलने के लिए भेज कर उस ने दरवाजा बंद कर लिया.

हेमा और सचिन ने सुरेश को जबरन पकड़ कर शराब पिलाई. जब वह नशे में धुत हो गया तो उस के मुंह में रुमाल ठूंस कर दोनों ने लातघूसों से सुरेश को इतना मारा कि वह मर गया.

हेमा अपना जुर्म कुबूल कर चुकी थी. शाम को उसे पुलिस वैन में बिठा कर मंडावली की मेन मार्केट में लाया गया और एक रेस्टोरेंट के सामने खड़ा करवा कर उसे उस का मोबाइल दे दिया गया ताकि वह सचिन की काल अटेंड कर सके.

पुलिस की टीम दूर जा कर इधरउधर खड़ी हो गई. शाम को जब सचिन मंडावली आ कर हेमा से मिला तो हेमा ने पुलिस द्वारा समझाया गया इशारा कर दिया. पुलिस टीम ने सचिन को कुछ ही मिनटों में काबू कर लिया. वह सारा माजरा समझ गया.

उसे थाने लाया गया तो उस ने बगैर सख्ती किए कुबूल कर लिया कि हेमा के साथ मिल कर उस ने सुरेश की हत्या की थी. पुलिस टीम ने दोनों को विधिवत गिरफ्तार कर लिया.

दूसरे दिन उन्हें अदालत में पेश कर के एक दिन के रिमांड पर लिया गया. वह रुमाल जो सुरेश के मुंह में ठूंसा गया था, कब्जे में लिया गया. शराब की बोतलों पर हेमा की अंगुलियों के निशान मिल गए थे. सबूत इकट्ठा करने के बाद पुलिस ने उन्हें फिर न्यायालय में पेश कर के जेल भेज दिया.   द्य