Crime News : प्यार में चाल – दबाव में आकर किया कत्ल

Crime News : बिल्हौर मार्ग पर एक कस्बा है ककवन. इसी कस्बे से सटा एक गांव है नदीहा धामू. यहीं पर रामदयाल गौतम अपने परिवार के साथ रहता था. उस के परिवार में पत्नी कुसुमा के अलावा 2 बेटे सर्वेश, उमेश तथा 2 बेटियां राधा व सुधा थीं.रामदयाल गांव का संपन्न किसान था. उस का बेटा सर्वेश गांव में डेयरी चलाता था. संपन्न होने के कारण जातिबिरादरी में रामदयाल की हनक थी.

रामदयाल की छोटी बेटी सुधा 10वीं कक्षा में पढ़ रही थी, जबकि बड़ी बेटी ने 12वीं पास कर के पढ़ाई छोड़ दी थी. रामदयाल उसे पढ़ालिखा कर मास्टर बनाना चाहता था, लेकिन राधा के पढ़ाई छोड़ देने से उस का यह सपना पूरा नहीं हो सका. पढ़ाई छोड़ कर वह मां के साथ घरेलू काम में मदद करने लगी थी. गांव के हिसाब से राधा कुछ ज्यादा ही सुंदर थी. जवानी में कदम रखा तो उस की सुंदरता में और निखार आ गया. उस का गोरा रंग, बड़ीबड़ी आंखें और कंधों तक लहराते बाल, हर किसी को अपनी ओर आकर्षित कर लेते थे. अपनी इस खूबसूरती पर राधा को भी नाज था.

यही वजह थी कि जब कोई लड़का उसे चाहत भरी नजरों से देखता तो वह इस तरह घूरती मानो खा जाएगी. उस की इन खा जाने वाली नजरों से ही लड़के डर जाते थे.लेकिन आलोक राजपूत राधा की इन नजरों से जरा भी नहीं डरा था. वह राधा के घर से कुछ ही दूरी पर रहता था. आलोक के पिता राजकुमार राजपूत प्राइमरी स्कूल में अध्यापक थे. लेकिन रिटायर हो चुके थे. उन की एक बेटी तथा एक बेटा आलोक था. बेटी का वह विवाह कर चुके थे.

पिता के रिटायर हो जाने के बाद घरपरिवार की जिम्मेदारी आलोक पर आ गई थी. बीए करने के बाद वह नौकरी की तलाश में था. लेकिन जब नौकरी नहीं मिली तो उस ने अपनी खेती संभाल ली थी. इस के अलावा उस ने घर में किराने की दुकान भी खोल ली थी. इस से उसे अतिरिक्त आमदनी हो जाती थी. राधा के भाई सर्वेश की आलोक से खूब पटती थी. आसपड़ोस में रहने की वजह से दोनों का एकदूसरे के घर भी आनाजाना था. आलोक जब भी सर्वेश के घर आता था, राधा उसे घर के कार्यों में लगी नजर आती थी. वैसे तो वह उसे बचपन से देखता आया था, लेकिन पहले वाली राधा में और अब की राधा में काफी फर्क आ गया था.

पहले जहां वह बच्ची लगती थी, अब वही जवान होने पर ऐसी हो गई थी कि उस पर से नजर हटाने का मन ही नहीं होता था.एक दिन आलोक राधा के घर पहुंचा तो सामने वही पड़ गई. उस ने पूछा, ‘‘सर्वेश कहां है?’ ‘‘मम्मी और भैया तो कस्बे में गए हैं. कोई काम था क्या?’’ राधा बोली.

‘‘नहीं, कोेई खास काम नहीं था. बस ऐसे ही आ गया था. सर्वेश आए तो बता देना कि मैं आया था.’’‘‘बैठो, भैया आते ही होंगे.’’ राधा ने कहा तो आलोक वहीं पड़ी चारपाई पर बैठ गया.  आलोक बैठा तो राधा रसोई की ओर बढ़ी. उसे रसोई की ओर जाते देख आलोक ने कहा, ‘‘राधा, चाय बनाने की जरूरत नहीं है. मैं चाय पी कर आया हूं.’’

‘‘कोई बात नहीं, मैं ने अपने लिए चाय भी चढ़ा रखी है. उसी में थोड़ा दूध और डाल देती हूं.’’ कह कर राधा रसोेई में चली गई.थोड़ी देर बाद वह 2 गिलासों में चाय ले आई. एक गिलास उस ने आलोक को थमा दिया, तो दूसरा खुद ले कर बैठ गई. चाय पीते हुए आलोक ने कहा, ‘‘राधा, बुरा न मानो तो मैं एक बात कहूं.’’

‘‘कहो.’’ उत्सुक नजरों से देखते हुए राधा बोली.‘‘अगर तुम जैसी खूबसूरत और ढंग से घर का काम करने वाली पत्नी मुझे मिल जाए तो मेरी किस्मत ही खुल जाए.’’ आलोक ने कहा.आलोक की इस बात का जवाब देने के बजाय राधा उठी और रसोई में चली गई. उसे इस तरह जाते देख आलोक को लगा, वह उस से नाराज हो गई है, इसलिए उस ने कहा, ‘‘राधा लगता है मेरी बात तुम्हें बुरी लग गई. मेरी बात का कोई गलत अर्थ मत लगाना. मैं ने तो यूं ही कह दिया था.’’

इतना कह आलोक वहां से चला गया. लेकिन इस के बाद वह जब भी सर्वेश के घर जाता, मौका मिलने पर राधा से 2-4 बातें जरूर करता. उन की इस बातचीत पर घरवालों को कोई ऐतराज भी न था. क्योंकि मोहल्ले के नाते रिश्ते में दोनों भाईबहन लगते थे. गांवों में तो वैसे भी रिश्तों को काफी अहमियत दी जाती है. लेकिन आलोक और राधा रिश्तों की मर्यादा निभा नहीं पाए. मेलमुलाकात और बातचीत से आलोक के दिलोदिमाग पर राधा की खूबसूरती और बातव्यवहार का ऐसा असर हुआ कि वह उसे अपनी जीवनसंगिनी बनाने के सपने देखने लगा. लेकिन अपने मन की बात वह राधा से कह नहीं पाता था.

वह सोचता था कि कहीं राधा बुरा मान गई और उस ने यह बात घर वालों से बता दी तो वह मुंह दिखाने लायक नहीं रह जाएगा. लेकिन यह उस का भ्रम था. राधा के मन में भी वही सब था, जो उस के मन में था.जब दोनों ओर ही चाहत के दीए जल रहे हों तो मौका मिलने पर उस का इजहार भी हो जाता है. ऐसा ही राधा और आलोक के साथ भी हुआ. फिर एक दिन उन्होंने अपने मन की बात जाहिर भी कर दी.

दोनों के बीच प्यार का इजहार हो गया तो उन का प्यार परवान चढ़ने लगा. आए दिन होने वाली मुलाकातों ने दोनों को जल्द ही करीब ला दिया. वे भूल गए कि उन का रिश्ता नाजुक है. आलोक राधा के प्यार के गाने गाने लगा. इस तरह दोनों मोहब्बत की नाव में सवार हो कर काफी आगे निकल गए. राधा और आलोक के बीच नजदीकियां बढ़ीं तो मनों में शारीरिक सुख पाने की कामना भी पैदा होने लगी. इस के बाद मौका मिला तो दोनों सारी मर्यादाएं तोड़ कर एकदूसरे की बांहों में समा गए. इस के बाद तो उन्हें जब भी मौका मिलता, अपनी हसरतें पूरी कर लेते.

इस का नतीजा यह निकला कि कुछ दिनों बाद ही दोनों गांव वालों की नजरों में आ गए. उन के प्यार के चर्चे पूरे गांव में होने लगे. उड़तेउड़ते यह खबर राधा के पिता रामदयाल के कानों में पड़ी तो सुन कर उस के पैरों तले से जमीन खिसक गई. उसे एकाएक विश्वास नहीं हुआ कि आलोक उस की इज्जत पर हाथ डाल सकता है. वह तो उसे अपने बेटों की तरह मानता था.यह सब जान कर उस ने राधा पर तो पाबंदी लगा ही दी, साथ ही आलोक से भी कह दिया कि वह उस के घर न आया करे.

बात इज्जत की थी, इसलिए राधा के भाई सर्वेश को दोस्त की यह हरकत अच्छी नहीं लगी. उस ने आलोक को समझाया ही नहीं, धमकी भी दी कि अगर उस ने अब उस की बहन पर नजर डाली तो वह भूल जाएगा कि वह उस का दोस्त है. इज्जत के लिए वह किसी भी हद तक जा सकता है. इस के बाद उस ने राधा की पिटाई भी की और उसे समझाया कि उस की वजह से गांव में सिर उठा कर चलना दूभर हो गया है. वह ठीक से रहे अन्यथा अनर्थ हो जाएगा. रामदयाल जानता था कि बात बढ़ाने पर उसी की बदनामी होगी, इसलिए बात बढ़ाने के बजाय वह पत्नी व बेटों से सलाह कर के राधा के लिए लड़के की तलाश करने लगा. इस बात की जानकारी राधा को हुई तो वह बेचैन हो उठी.

एक शाम वह मौका निकाल कर आलोक से मिली और रोते हुए बोली, ‘‘घर वाले मेरे लिए लड़का ढूंढ रहे हैं. जबकि मैं तुम्हारे अलावा किसी और से शादी नहीं करना चाहती.’’ ‘‘इस में रोने की क्या बात है? हमारा प्यार सच्चा है, इसलिए दुनिया की कोई ताकत हमें जुदा नहीं कर सकती.’’ राधा को रोते देख आलोक भावुक हो उठा. वह राधा के आंसू पोंछ उस का चेहरा हथेलियों में ले कर उसे विश्वास दिलाते हुए बोला, ‘‘तुम मुझ पर भरोसा करो, मैं तुम्हारे साथ हूं. मेरे रोमरोम में तुम्हारा प्यार रचा बसा है. तुम्हें क्या लगता है कि तुम से अलग हो कर मैं जी पाऊंगा, बिलकुल नहीं.’’

उस की आंखों में आंखें डाल कर राधा बोली, ‘‘मुझे पता है कि हमारा प्यार सच्चा है, तुम दगा नहीं दोगे. फिर भी न जाने क्यों मेरा दिल घबरा रहा है. अच्छा, अब मैं चलती हूं. कोई खोजते हुए कहीं आ न जाए.’’

‘‘ठीक है, मैं कोई योजना बना कर तुम्हें बताता हूं.’’ कह कर आलोक अपने घर की तरफ चल पड़ा तो मुसकराती हुई राधा भी अपने घर चली गई.रामदयाल राधा के लिए लड़का ढूंढढूंढ कर थक गया, लेकिन कहीं उपयुक्त लड़का नहीं मिला. इस से राधा के घर वाले परेशान थे, वहीं राधा और आलोक खुश थे. इस बीच घर वाले थोड़ा लापरवाह हो गए तो वे फिर से चोरीछिपे मिलने लगे थे.

एक दिन सर्वेश ने खेतों पर राधा और आलोक को हंसीमजाक करते देख लिया तो उस ने राधा की ही नहीं, आलोक की भी पिटाई की. इसी के साथ धमकी भी दी कि अगर फिर कभी उस ने दोनों को इस तरह देख लिया तो अंजाम अच्छा न होगा.सर्वेश ने आलोक की शिकायत उस के घर वालों से की तो घर वालों ने उसे भरोसा दिया कि वे आलोक को समझाएंगे. इस के बाद सर्वेश घर आ गया. इधर शाम को आलोक घर पहुंचा तो पिता राजकुमार ने टोका, ‘‘सर्वेश उलाहना देने आया था. तुम्हारी शिकायत कर रहा था कि तुम उस की बहन के पीछे पड़े हो. सच्चाई क्या है?’’

‘पिताजी, मैं और राधा एकदूसरे से प्यार करते हैं और शादी करना चाहते हैं.’  ‘‘तुम्हारा दिमाग फिर गया है क्या? जो उस लड़की से शादी करना चाहते हो. क्या तुम्हें मालूम नहीं कि राधा दूसरी जाति की है और हम राजपूत हैं. यदि तुम ने उस से ब्याह रचाया तो समाज में हम मुंह दिखाने लायक नहीं बचेंगे. बिरादरी के लोग हमारा हुक्कापानी बंद कर देंगे. इसलिए कान खोल कर सुन लो, उस लड़की से तुम्हारा रिश्ता हरगिज नहीं हो सकता. भूल जाओ उसे.’’ राजकुमार ने कहा.

पिता की फटकार और स्पष्ट चेतावनी से आलोक परेशान हो उठा. उस का एक दोस्त छोटू उर्फ नीलू था. उस ने इस बारे में छोटू से बात की तो उस ने उस के पिता की बात को जायज ठहराया और राधा से संबंध तोड़ लेने का सुझाव दिया.आलोक ने अपनी मां का दिल टटोला तो उस ने भी साफ कह दिया कि जिस दिन राधा की डोली उस के घर आएगी, उसी दिन उस की अर्थी उठेगी. मां की इस धमकी से आलोक कांप उठा. उस पर सवार राधा के प्यार का भूत उतरने लगा. मातापिता और दोस्त की नसीहत उसे भली लगने लगी. अत: उस ने निश्चय किया कि वह राधा से दूरी बनाएगा और प्यारमोहब्बत की बात नहीं करेगा. अब उस ने राधा से ब्याह रचाने की बात दिमाग से निकाल दी.

इस के बाद जब कभी आलोक का सामना राधा से होता, तो वह उस से बेमन से मिलता. बेरुखी से बात करता. न होंठों पर मुसकराहट, न चेहरे पर दमक होती. राधा नजदीकियां बढ़ाने की पहल करती, तो वह मना कर देता.फोन पर भी उस ने बात करना एक तरह से बंद ही कर दिया था. राधा दस बार फोन करती तो वह मुश्किल से एक बार रिसीव करता, उस पर भी ज्यादा बात न करता और फोन कट कर देता.

आलोक के इस रूखे व्यवहार से राधा परेशान हो उठी. उसे शक होने लगा कि आलोक किसी दूसरी लड़की के चक्कर में तो नहीं पड़ गया. अत: वह आलोक पर शादी के लिए दबाव डालने लगी. वह जब भी मिलती या फोन पर बात करती तो शादी की ही बात करती. इधर कुछ समय से राधा आलोक को धमकाने भी लगी थी कि यदि उस ने शादी नहीं की तो वह पुलिस में उस की शिकायत कर देगी, तब उसे जेल भी हो सकती है. 24 अगस्त, 2020 की शाम 4 बजे राधा घर से गायब हो गई. वह देर शाम तक घर वापस नहीं लौटी तो रामदयाल को चिंता हुई. उस ने अपने बेटे सर्वेश व उमेश को साथ लिया और रात भर उस की खोज करता रहा.

लेकिन राधा का कुछ भी पता न चला. रामदयाल को शक हुआ कि कहीं आलोक उसे भगा तो नहीं ले गया. वह आलोक के घर पहुंचा, तो आलोक घर पर ही मिला.26 अगस्त की सुबह गांव का ही किसान विमल अपने खेत पर पानी लगाने पहुंचा तो उस ने अपने खेत की मेड़ के पास पीपल के पेड़ के नीचे राधा का शव देखा. उस ने खबर राधा के घर वालों को दी. उस के बाद तो रामदयाल के घर में रोनापीटना शुरू हो गया.

घर के सभी लोग घटनास्थल पहुंच गए. लाश मिलते ही आलोक का परिवार घर से गुपचुप तरीके से फरार हो गया.रामदयाल गौतम ने थाना ककवन पुलिस को सूचना दी तो थानाप्रभारी अमित कुमार मिश्रा पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए. उन की सूचना पर एसपी केशव कुमार चौधरी तथा एएसपी अनूप कुमार आ गए. पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया. उस के गले में दुपट्टा था. इस से अंदाजा लगाया गया कि राधा की हत्या दुपट्टे से गला घोंट कर की गई होगी. उस की उम्र 19 वर्ष के आसपास थी.

घटनास्थल पर मृतका का पिता रामदयाल तथा भाई सर्वेश मौजूद थे. पुलिस अधिकारियों ने उन दोनों से पूछताछ की तो सर्वेश ने उन्हें बताया कि उस की बहन की हत्या गांव के आलोक व उस के दोस्त छोटू ने की है. पूछताछ के बाद पुलिस अधिकारियों ने राधा के शव को पोेस्टमार्टम हेतु माती स्थित अस्पताल भिजवा दिया तथा थानाप्रभारी अमित मिश्रा को आदेश दिया कि वह मुकदमा दर्ज कर आरोपियों को शीघ्र गिरफ्तार करें. आदेश पाते ही अमित कुमार मिश्रा ने मृतका के भाई सर्वेश की तहरीर पर भादंवि की धारा 302/201 के तहत आलोक व छोटू के खिलाफ रिपोेर्ट दर्ज कर ली और उन्हें गिरफ्तार करने में जुट गए. इस के लिए उन्होंने मुखबिरों को भी लगा दिया.

29 अगस्त, 2020 की रात 10 बजे अमित कुमार मिश्रा ने मुखबिर की सूचना पर आलोक व छोटू को ककवन मोड़ से गिरफ्तार कर लिया. उन्हें थाना ककवन लाया गया. थाने पर जब दोनों से पूछताछ की गई तो उन्होंने राधा की हत्या का जुर्म कबूल कर लिया. पूछताछ में आलोक ने बताया कि राधा उस पर शादी का दबाव बना रही थी, जबकि वह राधा से शादी नहीं करना चाहता था. उस ने जब पुलिस में शिकायत दर्ज करने की धमकी दी, तो उस ने राधा को ही मिटाने की योजना बनाई. इस में उस ने अपने दोस्त छोटू को शामिल कर लिया.

योजना के तहत उस ने 24 अगस्त की शाम 4 बजे राधा को खेतों पर बुलाया फिर उसी के दुपट्टे से उस का गला घोंट दिया. 30 सितंबर, 2020 को पुलिस ने अभियुक्त आलोक राजपूत व छोटू को कानपुर देहात की माती कोर्ट में पेश किया, जहां से दोनों को जिला जेल भेज दिया गया.Crime News

Patna News : ‘हावड़ा पटना लव ऐक्सप्रैस’ वाया फेसबुक

Patna News : ‘तुम क्या काम करते हो? तुम्हारा घर कहां है?’ लड़की ने अपने फेसबुक फ्रैंड के चैट बौक्स में मैसेज डाला.

लड़के ने तुरंत जवाब दिया, ‘तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो. मेरा घर पटना में है. तुम कहां रहती हो?’

लड़की ने भी पलट कर जवाब दिया, ‘मैं कोलकाता में रहती हूं. तुम भी मुझे काफी अच्छे लगते हो.’

लड़के ने मैसेज टाइप किया, ‘कोलकाता में कहां रहती हो? मैं तुम से मिलना चाहता हूं. हमारा मिलन कैसे होगा? मैं तुम्हारे बगैर जिंदा नहीं रह सकता हूं.’

लड़की ने लिखा, ‘‘मैं हावड़ा में रहती हूं. मैं भी तुम्हारे बिना जिंदगी की सोच नहीं सकती हूं….’’

इस तरह की मुहब्बत से भरी चैटिंग का सिलसिला चलता रहा. इस के बाद उन दोनों ने एकदूसरे का मोबाइल फोन नंबर मांगा. दोनों के बीच बातचीत का सिलसिला भी चल पड़ा. उन दोनों की मुहब्बत इतनी परवान चढ़ी कि वे मिलने के लिए बेताब हो उठे. दोनों मिले भी. शादी भी कर ली. उस के बाद लड़की के साथ जो कुछ घटा, वह रूह कंपा देने वाला था.

दरअसल, पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले की रहने वाली 22 साल की लड़की सुलेखा को फेसबुक और ह्वाट्सऐप के जरीए बिहार के एक लड़के आसिफ से दोस्ती हुई. सोशल साइटों के जरीए शुरू हुई उन की प्रेमकहानी इस कदर परवान चढ़ने लगी कि लड़की अपने फेसबुकिया आशिक से मिलने पटना पहुंच गई.

मुहब्बत की आस में हावड़ा से पटना पहुंची सुलेखा को पटना में उस के प्रेमी से छलावा और ब्लैकमेलिंग के सिवा कुछ नहीं मिला. प्रेम में पागल उस लड़की ने अपने बदमाश प्रेमी को काफी समझाने की कोशिश की, पर बात नहीं बनी. प्रेमी की खातिर लड़की ने अपना धर्म भी बदलवा लिया, पर उस के बाद भी उस के हाथ कुछ नहीं आया. थकहार कर उस ने पुलिस और अदालत का दरवाजा खटखटाया.

सुलेखा ने 13 जून, 2016 की रात को पटना के महिला थाने में दुष्कर्म, धोखेबाजी और साइबर क्राइम का मामला दर्ज कराया. इस में उस ने पटना के फुलवारीशरीफ के हारुननगर के रहने वाले आसिफ के साथसाथ 5 लड़कों को आरोपी बनाया.

इस लड़की की शिकायत मिलने के बाद छापामारी कर पुलिस ने 2 लड़कों रिजवी और फैज को गिरफ्तार कर लिया. सुलेखा ने बताया कि अप्रैल, 2015 में उसे फुलवारीशरीफ के एक लड़के का फोन आया और उस के बाद ह्वाट्सऐप पर भी मैसेज आए. दोनों फेसबुक फ्रैंड थे. उस ने बताया कि उसे किसी काम से पटना आना था, तो उस ने अपने फेसबुक फ्रैंड को फोन किया. वह उस से मिलने मीठापुर महल्ले में आया. सुलेखा मीठापुर के ही ‘सौरभगौरव’ होटल में ठहरी हुई थी.

होटल में बातचीत और नाश्ते के दौरान आसिफ ने सुलेखा की कोल्ड ड्रिंक में नशीली चीज मिला दी. जब वह बेहोश हो गई, तो उस लड़के ने उस के साथ बलात्कार किया और उस का वीडियो भी बना लिया. इस के बाद वह सुलेखा को वीडियो दिखा कर उसे ब्लैकमेल करने लगा.

ब्लैकमेलिंग से परेशान सुलेखा 28 जनवरी, 2016 को पटना आई और लड़के से मिल कर मामले को खत्म करने की कोशिश की.

आसिफ ने उस से शादी करने का भरोसा दे कर अपने जाल में फिर फंसा लिया. उस ने उसे पटना कालेज के पास के एक गर्ल्स होस्टल में ठहराया. उस के बाद गांधी मैदान के आसपास के पार्क में उस का जबरन धर्म बदलवा कर निकाह कराया गया.

निकाह के बाद वे दोनों एनआईटी कालेज के पास नफीस कालोनी में रहने लगे. सुलेखा को लगा कि अब आसिफ सुधर गया है और उस की जिंदगी पटरी पर लौट आई है.

कुछ दिनों तक तो सबकुछ ठीकठाक चला, पर 15-16 दिनों के बाद ही आसिफ फिर अपने पुराने रंग में आ गया. निकाह के 25 दिनों के बाद अचानक आसिफ गायब हो गया. उस ने अपना मोबाइल फोन भी स्विच औफ कर दिया.

सुलेखा ने 5 दिनों तक अपने शौहर के आने का इंतजार किया, लेकिन जब वह कई दिनों तक नहीं लौटा, तो सुलेखा आसिफ के फुलवारीशरीफ वाले घर पर पहुंच गई.

पहले तो आसिफ के घर वालों ने उसे जलील किया और चले जाने को कहा. जब वह आसिफ से मिलने और उस के ही घर में रहने की जिद पर अड़ी रही, तो लड़के के भाई ने उसे अपने दोस्त के मकान में किराए पर रहने का इंतजाम करा दिया.

सुलेखा ने बताया कि उस के बाद उसे यह कह कर जलील किया जाता था कि उस ने सही तरीके से इसलाम नहीं अपनाया है. अच्छी तरह से सीखने के लिए उसे एक मदरसे में रख दिया गया. वहां भी उस के साथ बदसलूकी की गई. जब वह पेट से हुई, तो जबरन उस का बच्चा गिरा दिया गया.

14 जून, 2016 को अदालत में सुलेखा का बयान दर्ज कराया गया. आसिफ और उस के दोस्तों के खिलाफ किसी के धर्म को ठेस पहुंचाने के लिए धारा 295/ए, पेट गिराने के लिए धारा 313, मारपीट के लिए धारा 323, बंधक बनाने के लिए धारा 344, बलात्कार के लिए धारा 376, नशा कराने के लिए धारा 328, हत्या करने की धमकी देने के लिए धारा 387, धोखाधड़ी करने के लिए धारा 420, धोखे से शादी करने के लिए धारा 496 और धमकी देने के लिए धारा 506 के तहत केस दर्ज किया गया है.

तारतार यह फेसबुकिया प्यार

बिहार के भागलपुर शहर की रहने वाली सीमा (बदला हुआ नाम) बनारस के चेतगंज के इंटर कालेज में पढ़ती थी. पढ़ाई के दौरान ही फेसबुक के जरीए उस की दोस्ती रोहित नाम के लड़के से हुई. वह बनारस के धोरौया थाने के लोहरिया गांव का रहने वाला था.

फेसबुक के जरीए ही रोहित ने सीमा को बताया कि वह ‘मनमोहिनी’ नाम की फिल्म बना रहा है. उस ने सीमा को अपनी फिल्म में हीरोइन बनने का लालच दिया. इस के बाद उन दोनों के बीच चैटिंग शुरू हो गई.

जब वे दोनों चैटिंग के जरीए गहरे दोस्त बन गए, तो एक दिन सीमा रोहित से मिलने पहुंच गई. रोहित ने स्क्रीन टैस्ट के बहाने उस के जिस्म को खूब सहलाया और उस से लिपटने की कोशिश की.

सीमा को उस की हरकत पसंद नहीं आई और वह वहां से जाने लगी. रोहित ने उसे समझाया कि फिल्मों में काम करने के लिए बहुतकुछ करना पड़ता है और बहुतकुछ सहना भी पड़ता है. इस के बाद रोहित ने उस से कहा कि पटना में शूटिंग होनी है, इसलिए वह पटना में उस से मिले.

पटना पहुंचने से पहले सीमा ने रोहित से फोन पर बात की और ठहरने का ठिकाना पूछा. रोहित ने उसे एक होटल का पता बताया. पटना पहुंच कर सीमा उसी होटल में ठहरी.

सीमा को यह पता नहीं चला कि कब उसे गहरी नींद लग गई. कुछ देर बाद रोहित उस के कमरे में पहुंचा और उस के जिस्म से खेलने लगा. उस ने सीमा के साथ बलात्कार किया और उस की वीडियो फिल्म भी बना ली.

रोहित ने उसे धमकाया कि अगर वह किसी को कुछ बताएगी, तो उस की ब्लू फिल्म इंटरनैट पर डाल दी जाएगी. सीमा रोतेबिलखते बनारस लौट गई.

सीमा की तकलीफों का यहीं खात्मा नहीं हुआ. इस के बाद रोहित फोन कर के बताई हुई जगह पर आने के लिए उस पर दबाव बनाने लगा.

सीमा ने उस की बात नहीं मानी, तो उस ने उस के साथ बलात्कार के वीडियो को इंटरनैट पर डाल दिया. रोहित ने सीमा को इस बारे में बता भी दिया.

सीमा ने तुरंत चेतनगंज थाने में रोहित के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी. पुलिस ने रोहित को वाराणसी कैंट स्टेशन से गिरफ्तार कर लिया. अब रोहित जेल की हवा खा रहा है और पुलिस उस के पुराने रिकौर्ड को खंगालने में लगी हुई है. Patna News

UP News : दूसरी औरत के जाल में फंसा इदरीस

UP News : मुरादाबाद से करीब 30 किलोमीटर दूर स्थित कस्बा कांठ के मोहल्ला पट्टीवाला के रहने वाले कारोबारी इदरीस 11 जनवरी, 2018 को गायब हो गए. दरअसल, इदरीस की कांठ में ही कपड़ों की सिलाई की फैक्ट्री है. उन की फैक्ट्री में सिले कपड़े कई शहरों के कारोबारियों को थोक में सप्लाई होते हैं.

11 जनवरी को वह प्रतापगढ़ और सुलतानपुर के कारोबारियों से पेमेंट लेने के लिए घर से निकले थे. जब भी वह पेमेंट के टूर पर जाते तो फोन द्वारा अपने परिवार वालों के संपर्क में रहते थे. घर से निकलने के 2 दिन बाद भी जब उन का कोई फोन नहीं आया तो उन की पत्नी कनीजा ने बड़े बेटे शहनाज से पति को फोन कराया तो इदरीस का फोन स्विच्ड औफ मिला. शहनाज ने अब्बू को कई बार फोन मिलाया, लेकिन हर बार फोन बंद ही मिला. इस पर कनीजा भी परेशान हो गई.

इदरीस की फैक्ट्री के रिकौर्ड में उन सारे कारोबारियों के नामपते व फोन नंबर दर्ज थे, जिन के यहां फैक्ट्री से तैयार माल जाता था. चूंकि इदरीस प्रतापगढ़ और सुलतानपुर के लिए निकले थे, इसलिए शहनाज ने प्रतापगढ़ और सुलतानपुर के कारोबारियों को फोन कर के अपने अब्बू के बारे में पूछा. कारोबारियों ने शहनाज को बता दिया कि इदरीस उन के पास आए तो थे लेकिन वह 11 जनवरी को ही पेमेंट ले कर चले गए थे. पता चला कि दोनों कारोबारियों ने इदरीस को 5 लाख रुपए दिए थे. यह जानकारी मिलने के बाद इदरीस के घर वाले परेशान हो गए. सभी को चिंता होने लगी.

इदरीस ने जानपहचान वाले सभी लोगों को फोन कर के अपने अब्बू के बारे में पूछा लेकिन उसे उन के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली. तभी कनीजा शहनाज के साथ प्रतापगढ़ पहुंच गईं. वहां के एसपी से मुलाकात कर उन्होंने पति के गायब होने की बात बताई. एसपी ने इदरीस का फोन सर्विलांस पर लगवा दिया. इस से उस की अंतिम लोकेशन अमरोहा जिले के गांव रायपुर कलां की पाई गई. यह गांव अमरोहा देहात थाने के अंतर्गत आता है. प्रतापगढ़ पुलिस ने उन्हें अमरोहा देहात थाने में संपर्क करने की सलाह दी.

society

30 जनवरी, 2018 को शहजाद और कनीजा थाना अमरोहा देहात पहुंचे. उन्होंने इदरीस के गुम होने की जानकारी थानाप्रभारी धर्मेंद्र सिंह को दी. थानाप्रभारी ने शहनाज की तरफ से उस के पिता की गुमशुदगी दर्ज कर ली. शहनाज ने शक जताया कि उस के घर के सामने रहने वाली फरीदा और उस के पति आरिफ ने ही उस के पिता को कहीं गायब किया होगा.

रहस्य से उठा परदा

मामला एक कारोबारी के गायब होने का था, इसलिए थानाप्रभारी ने सूचना एसपी सुधीर यादव को दे दी. एसपी सुधीर यादव ने सीओ मोनिका यादव के नेतृत्व में एक जांच टीम गठित की. टीम में थानाप्रभारी धर्मेंद्र सिंह, एसआई सुनील मलिक, डी.पी. सिंह, महिला एसआई संदीपा चौधरी, कांस्टेबल सुखविंदर, ब्रजपाल सिंह आदि को शामिल किया गया. पुलिस ने सब से पहले इदरीस के मोबाइल फोन की काल डिटेल्स निकाली तो पता चला कि इदरीस के घर के सामने रहने वाली फरीदा ने 13 जनवरी को इदरीस के मोबाइल पर 50 बार काल की थी. शहनाज ने भी फरीदा और उस के पति पर शक जताया था, इसलिए पुलिस को भी फरीदा पर शक हो गया.

पुलिस ने फरीदा और उस के पति आरिफ को पूछताछ के लिए उठा लिया. उन दोनों से पुलिस ने इदरीस के बारे में सख्ती से पूछताछ की. पुलिस की सख्ती के आगे फरीदा और उस के पति ने स्वीकार कर लिया कि उन्होंने शहजाद की हत्या कर उस की लाश बशीरा के आम के बाग में दफन कर दी है.

थानाप्रभारी धर्मेंद्र सिंह ने इदरीस का कत्ल हो जाने वाली बात एसपी को बता दी. यह जानकारी पा कर एसपी सुधीर कुमार थाना अमरोहा देहात पहुंच गए. उन की मौजूदगी में थानाप्रभारी ने अभियुक्तों को रायपुर कलां निवासी बशीरा के आम के बाग में ले जा कर खुदाई कराई तो इदरीस की लाश करीब 5 फीट नीचे दबी मिली.

पुलिस ने वह लाश अपने कब्जे में ले ली. जरूरी काररवाई कर के पुलिस ने इदरीस की लाश पोस्टमार्टम के लिए भेज दी. फरीदा और आरिफ ने पूछताछ के दौरान इदरीस की हत्या की जो कहानी बताई, वह अवैध संबंधों पर आधारित निकली—

इदरीस की कांठ में ही कपड़ों की सिलाई करने की फैक्ट्री थी. उस की फैक्ट्री में फरीदा नाम की महिला भी सिलाई करती थी. वह इदरीस के घर के सामने ही रहती थी. उस का पति साइकिल मरम्मत करता था. अन्य कारीगरों के मुकाबले इदरीस फातिमा का बहुत खयाल रखता था. इतना ही नहीं, वह अन्य कारीगरों से उसे ज्यादा पेमेंट करता था. इस मेहरबानी की वजह यह थी कि इदरीस फरीदा को चाहने लगा था. इदरीस की कोशिश रंग लाई और उस के फरीदा से प्रेम संबंध बन गए.

इदरीस और फरीदा दोनों ही बालबच्चेदार थे, जहां इदरीस के 5 बच्चे थे, वहीं फरीदा भी 2 बच्चों की मां थी. करीब डेढ़ साल से दोनों के नाजायज संबंध चले आ रहे थे. इसी दौरान फरीदा एक और बेटे की मां बन गई. इदरीस फरीदा के छोटे बेटे को अपना बेटा बताता था, इसलिए वह उस का कुछ खास ही खयाल रखता था. इदरीस फरीदा को बहुत चाहता था. वह चाहता था कि फरीदा जिंदगी भर के लिए उस के साथ रहे, इसलिए वह फरीदा पर निकाह करने का दबाव बना रहा था.

society

समझाने पर भी नहीं माने फरीदा और इदरीस

उधर इदरीस और फरीदा के प्रेमसंबंधों की जानकारी पूरे मोहल्ले को थी. फरीदा के पति आरिफ ने भी फरीदा को बहुत समझाया कि उस की वजह से परिवार की मोहल्ले में बदनामी हो रही है. वह इदरीस से मिलना बंद कर दे. उधर इदरीस के पिता बाबू ने भी इदरीस को समझाया कि वह क्यों अपनी घरगृहस्थी और कारोबार को बरबाद करने पर तुला है. फरीदा को भूल कर वह अपने परिवार पर ध्यान दे.

लेकिन इदरीस फरीदा के प्रेमजाल में ऐसा फंसा था कि उसे छोड़ने के लिए तैयार नहीं था. उस के सिर पर एक ही धुन सवार थी कि फरीदा अपने पति को तलाक दे कर उस के साथ निकाह कर ले. वह यही दबाव फरीदा पर लगातार बना रहा था, पर फरीदा ऐसा करने को मना कर रही थी. वह कह रही थी कि जैसा चला आ रहा है, वैसा ही चलता रहने दे.

घटना के करीब 15 दिन पहले जब रात में फरीदा के पास इदरीस का फोन आया तो फोन की घंटी बजने से आरिफ की नींद खुल गई. फरीदा लिहाफ के अंदर ही इदरीस से बातें करने लगी. किसीकिसी फोन के स्पीकर की आवाज इतनी तेज होती है कि पास का आदमी भी बातचीत सुन सकता है. फरीदा के पास भी ऐसा ही फोन था. वह अपने प्रेमी इदरीस से जो भी बात कर रही थी, वह आरिफ भी सुन रहा था. इदरीस उस से कह रहा था कि वह अपने पति आरिफ को ठिकाने लगवा दे. इस काम में वह उस की पूरी मदद करेगा. उस के बाद हम दोनों निकाह कर लेंगे.

अपनी हत्या की बात सुन कर आरिफ के होश उड़ गए. उस ने उस समय पत्नी से कुछ भी कहना मुनासिब नहीं समझा. सुबह होते ही आरिफ ने इस बारे में पत्नी से बात की. वह झूठ बोलने लगी. इस बात पर दोनों के बीच नोकझोंक भी हुई. इस के बाद आरिफ ने फरीदा को विश्वास में लिया और घरगृहस्थी का वास्ता दे कर कहा, ‘‘देखो फरीदा, इदरीस कितना गिरा हुआ आदमी है, वह मेरी हत्या कराने पर तुला है. अपने स्वार्थ में वह तुम्हारी भी हत्या करवा सकता है. तुम खुद सोच लो कि अब क्या चाहती हो. यहां रहोगी या उस के साथ?’’

फरीदा ने अपने बच्चों का वास्ता दे कर आरिफ से कहा, ‘‘मैं इसी घर में तुम्हारे और बच्चों के साथ रहूंगी. उस के साथ नहीं जाऊंगी.’’

बन गई कत्ल की भूमिका

आरिफ ने सोचा कि आज नहीं तो कल इदरीस उस के लिए नुकसानदायक साबित होगा, इसलिए उस ने तय कर लिया कि वह इदरीस को सबक सिखाएगा. इस काम में उस ने पत्नी फरीदा को भी मिला लिया. फरीदा ने पति को यह भी बता दिया कि इदरीस पार्टियों से पेमेंट लेने के लिए प्रतापगढ़ और सुलतानपुर गया हुआ है. इस पर आरिफ ने उस से कहा कि किसी बहाने से उसे बुला लो तो बाकी का काम वह कर देगा.

आरिफ के साले फरियाद को यह पता था कि इदरीस की वजह से उस की बहन के घर में तनाव रहता है, इसलिए आरिफ के कहने पर फरियाद भी इदरीस की हत्या के षडयंत्र में शामिल हो गया. उधर प्रतापगढ़ और सुलतानपुर के कारोबारियों से करीब 5 लाख रुपए का कलेक्शन कर के इदरीस 13 जनवरी को कांठ लौट रहा था. सफर में उस ने अपना फोन साइलेंट मोड पर लगा लिया था. फरीदा ने इदरीस से बात करने के लिए फोन किया पर इदरीस को इस का पता नहीं चला. फरीदा उसे लगातार फोन कर रही थी.

कांठ पहुंचने पर इदरीस ने जैसे ही अपना फोन देखा तो प्रेमिका की 50 मिस्ड काल देख कर चौंक गया. उसे लगा कि पता नहीं क्या बात है जो उस ने इतनी बार फोन मिलाया. इदरीस ने फरीदा को फोन कर के कहा, ‘‘फरीदा, मेरा फोन साइलेंट मोड पर था, इसलिए तुम्हारी काल के बारे में पता नहीं लगा. बताओ, क्या बात है?’’

society

‘‘मैं ने तय कर लिया है कि मैं आरिफ को तलाक दे कर तुम से निकाह करूंगी. इसी बारे में तुम से बात करना चाह रही थी.’’ फरीदा बोली, ‘‘मैं चाहती हूं कि तुम अभी कांठ बसअड्डे पर आ जाओ, वहीं पर हम बात कर लेंगे.’’

प्रेमिका के मुंह से अपने मन की बात सुन कर इदरीस खुश हो गया. उस ने कहा, ‘‘फरीदा, मैं कुछ देर में ही वहां पहुंच रहा हूं. तुम भी जल्द पहुंच जाना.’’

‘‘ठीक है, तुम आ जाओ, मैं वहीं मिलूंगी.’’ फरीदा बोली.

इदरीस थोड़ी देर में बसअड्डे पर पहुंच गया. फरीदा अपने पति के साथ वहां पहले से ही मौजूद थी. औपचारिक बातचीत के बाद फरीदा ने कहा, ‘‘रायपुर खास गांव में मेरे भाई के यहां खाने का इंतजाम है. वहां चलते हैं, वहीं बातचीत हो जाएगी.’’

इदरीस खानेपीने का शौकीन था. उस समय भी वह शराब पिए हुए था, इसलिए फरीदा के साथ रायपुर खास गांव जाने के लिए तैयार हो गया. जब वह वहां पहुंचा तो फरीदा के भाई फरियाद ने इदरीस का गर्मजोशी से स्वागत किया. उस ने चिकन बना रखा था. कुछ देर बातचीत के बाद फरियाद ने उस से खाना खाने को कहा तो शराब के शौकीन इदरीस ने शराब पीने की इच्छा जताई. इस पर फरियाद ने कहा कि यह सब घर पर संभव नहीं है. पीनी है तो कांठ बसअड्डे पर ठेका है, वहीं पर पी लेंगे.

इदरीस को मिली मौत की दावत

इदरीस बसअड्डे पर जाने के लिए तैयार हो गया. इदरीस और आरिफ फरियाद की मोटरसाइकिल पर बैठ कर कांठ बसअड्डे पहुंच गए. इदरीस ने पैसे दे कर एक बोतल रम मंगा ली. फरियाद एक बोतल रम और पकौड़े ले आया तो आरिफ बोला, ‘‘चलो, बाग में बैठ कर पिएंगे. उस के बाद खाना खाएंगे. वहीं बात भी हो जाएगी.’’

शराब की बोतल और पकौड़े ले कर तीनों मोटरसाइकिल से आम के बाग में पहुंच गए. बाग में बैठ कर तीनों ने शराब पी. योजना के अनुसार आरिफ व फरियाद ने कम पी और इदरीस को कुछ ज्यादा ही पिला दी थी. इदरीस जब ज्यादा नशे में हो गया तो आरिफ इदरीस से बोला, ‘‘देखो इदरीस भाई, तुम पैसे वाले हो. मैं छोटा सा एक साइकिल मैकेनिक हूं. मेरी तुम्हारी क्या बराबरी. तुम यह बताओ कि मेरा घर क्यों बरबाद कर रहे हो. तुम्हारी वजह से वैसे भी मोहल्ले में मेरी बहुत बदनामी हो गई है. अब तो पीछा छोड़ दो.’’

‘‘देखो आरिफ, तुम एक बात ध्यान से सुन लो. मैं फरीदा से बहुत प्यार करता हूं. अब फरीदा मेरी है. उसे मुझ से कोई भी अलग नहीं कर सकता. तुम्हें यह भी बताए देता हूं कि उस का जो 5 महीने का बच्चा है, वह मेरा ही है.’’

आरिफ भी नशे में था. यह सुनते ही उस का और फरियाद का खून खौल उठा. दोनों ने उस से कहा कि लगता है तू ऐसे नहीं मानेगा. इस के बाद दोनों ने इदरीस के गले में पड़े मफलर से उस का गला घोंट दिया, जिस से उस की मौत हो गई. इदरीस की हत्या करने के बाद उन्होंने उस की लाश मोटरसाइकिल से बाग के बीचोबीच ले जा कर डाल दी. तलाशी लेने पर इदरीस की जेब से 5 लाख रुपए और एक मोबाइल फोन मिला. दोनों ही चीजें उन्होंने निकाल लीं.

उस के बाद फरियाद घर से फावड़ा ले आया. आरिफ और फरियाद ने करीब 5 फुट गहरा गड्ढा खोद कर इदरीस की लाश दफन कर दी. लाश ठिकाने लगा कर वे अपने घर लौट गए. इदरीस की जेब से मिले पैसे दोनों ने आपस में बांट लिए. पुलिस ने फरीदा, उस के पति आरिफ के बाद फरियाद को भी गिरफ्तार कर लिया. उन की निशानदेही पर पुलिस ने 70 हजार रुपए, इदरीस का मोबाइल फोन और फावड़ा बरामद कर लिया.

पुलिस ने 11 फरवरी, 2018 को तीनों अभियुक्तों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया. कथा संकलन तक तीनों अभियुक्त जेल में बंद थे. UP News

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

UP Crime News : प्यार की वो आखिरी रात

UP Crime News :  25 मई, 2022 की रात करीब 3-साढ़े 3 बजे प्रयागराज में यमुनापार इलाके के चकहीरानंद मोहल्ले में पुलिस की कई गाडि़यां हूटर बजाते हुए एक के बाद एक देखते ही देखते प्रवेश करती गईं. गरमी की उमस से बेहाल मोहल्ले वालों को सुबह में गरमी से थोड़ी राहत मिली थी. सभी सोने का प्रयास कर रहे थे कि हूटर बजाती गाडि़यों से लोगों की नींद टूट गई. सभी गाडि़यां सुनील मिश्रा के घर के पास कर रुक गईं.

लोगों की नींद में खलल पड़ चुकी थी. सभी आश्चर्यचकित थे. अचरज से अपनेअपने मकानों की छतों पर खड़े हो कर एकदूसरे से आंखों ही आंखों में इशारे से मानो पूछ रहे हों, ‘‘आखिर इतनी सुबह भारी पुलिस फोर्स हमारे मोहल्ले में क्यों आई है? क्या कोई आतंकी सुनील मिश्रा के मकान में घुसा है? आखिर माजरा क्या है? अभी तो रात के 3-साढ़े 3 बजे हैं. लेकिन इतनी रात पुलिस की दस्तक क्यों?’’

इस तरह के तमाम विचार चकहीरानंद मोहल्ले में रहने वालों के मन में उमड़घुमड़ रहे थे. चूंकि इस समय गंगापार के हालात सही नहीं चल रहे थे. सामूहिक हत्याओं, नरसंहार से पूरा प्रयागराज जिला थर्रा उठा था, सो मोहल्ले वालों का यह सोचना लाजिमी था. बहरहाल, कुछ देर में ही इस सवाल का जवाब भी मिल गया. खुद सुनील मिश्रा ने पहले पुलिस की हेल्पलाइन नंबर 112 पर डायल कर के सूचना दी थी कि उस के घर में चोर घुस आया है, जिसे उस की बेटी अमायरा ने गोली मार दी है और मौके पर ही उस की मौत हो गई है. बेटी अमायरा भी बुरी तरह से घायल फर्श पर पड़ी तड़प रही है.

यह सूचना मिलते ही आननफानन में पुलिस नैनी थानाक्षेत्र में स्थित घटनास्थल पर पहुंची थी. जब पुलिस के जवानों ने सुनील मिश्रा के मकान में प्रवेश किया तो घटनास्थल का सीन देख कर सब सन्न रह गए.
छत की सीढि़यों के नीचे स्लैब पर सुनील मिश्रा की बेटी अमायरा घायल अवस्था में पड़ी तड़प रही थी. उस के हाथ और पेट में गोली लगी थी. रिवौल्वर भी उस की हथेली में था. छत पर 22-23 साल के एक नौजवान की लाश पड़ी थी. पुलिस अफसरों को देखते ही मकान मालिक सुनील मिश्रा और उस के घर के सदस्य गला फाड़फाड़ कर रोने लगे.

एसएसपी अजय कुमार एसपी सौरभ दीक्षित ने भी घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया. बहरहाल, घटनास्थल का क्राइम सीन कुछ अलग ही कहानी बयां कर रहा था और सुनील मिश्रा का कथन कुछ और. फिलहाल प्रारंभिक काररवाई करते हुए सुनील मिश्रा की घायल बेटी मृत युवक, जिस का नाम अरनव था, की डैडबौडी को फौरन जिला अस्पताल एसआरएन पहुंचाया गया. क्योंकि अमायरा की जान खतरे में थी और वह बुरी तरह से पेट पकड़ कर फर्श पर तड़प रही थी. एक गोली उस की हथेली में लगी थी तो दूसरी उस के पेट में फंसी हुई थी. अरनव की डैडबौडी का पोस्टमार्टम होना जरूरी था और अमायरा का प्राथमिक उपचार.

अब तक घटना की सूचना पा कर अरनव के परिजन भी चुके थे. जवान बेटे की लाश को जब पुलिस वाले पोस्टमार्टम के लिए भेज रहे थे तो उस के मातापिता, भाईबहन का रोरो कर बुरा हाल था. अरनव का घर सुनील मिश्रा के मकान से महज एक किलोमीटर की दूरी पर था. उपरोक्त घटना की सूचना जंगल की आग की तरह पूरे नैनी क्षेत्र और सोशल मीडिया के माध्यम से पूरे शहर में फैल चुकी थी. खैर, आगे की काररवाई करते हुए सब से पहले पुलिस को सूचना देने वाले अमायरा के पिता सुनील मिश्रा को ही थाने ला कर पूछताछ शुरू की गई.

सुनील मिश्रा के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे. वह फूटफूट कर अधिकारियों के सामने बस रोए जा रहा था. उसे ढांढस बंधाते हुए एसएसपी अजय कुमार ने कहा, ‘‘देखिए मिश्राजी, इस तरह रोनेधोने से काम नहीं चलेगा. आप की बेटी को गोली लगी है और वह जीवनमौत के बीच संघर्ष कर रही है. ईश्वर ने चाहा तो उस की जिंदगी बच जाएगी और सच्चाई भी सामने जाएगी.

‘‘पहले हमें आप यह बताइए कि आप ने क्या देखा था मृतक युवक कौन है? क्योंकि आप ही ने सब से पहले इस वारदात की सूचना पुलिस को मोबाइल से दी थी, इसलिए आप ने जो कुछ भी देखा हो उसे बता दीजिए ताकि हम अपराधियों तक पहुंच सकें.’’

अधिकारियों की बात सुन कर सुनील मिश्रा थोड़ा शांत हुआ और बोला, ‘‘साहब, मुझे नहीं मालूम कि मृत कौन है? यह किस का बेटा है और कहां का रहने वाला है. मेरे खयाल से यह लड़का चोरीचकारी की नीयत से मेरे घर में घुसा होगा, जिसे मेरी बेटी ने देख लिया होगा. वह किसी घटना को अंजाम देने में कामयाब हो पाता उस से पहले बेटी अमायरा ने मेरी रिवौल्वर से उस पर फायर कर दिया होगा. अपने बचाव के लिए मरने से पहले उस ने अमायरा से रिवौल्वर छीन कर उसे भी गोली मार दी.

‘‘उमस बहुत ज्यादा हो रही थी. मैं पानी पीने के लिए उठा था और गरमी से राहत के लिए ऊपर एसी वाले कमरे में जा रहा था, जहां घर के बाकी सदस्य सो रहे थे. तभी मैं ने देखा कि मेरी बेटी खून से लथपथ पड़ी फर्श पर तड़प रही थी. मैं भागते हुए छत पर गया तो देखा उस लड़के की लाश पड़ी थी. उस लड़के को मैं नहीं जानता. उसे मोहल्ले में भी कभी नहीं देखा.’’

पुलिस के लिए बड़ा ही दिलचस्प और संगीन मामला था. एसएसपी की दूरदृष्टि और पुलिसिया नजरिया कुछ और ही कह रही थी तथा सुनील मिश्रा का बयान कुछ और. कारण, अगर सुनील की बातों पर यकीन कर भी लिया जाए तो उस की बेटी अमायरा ने पहले ही किसी भी नीयत से उस के मकान में दाखिल युवक को अपने पिता की रिवौल्वर से जान से मार डाला था तो फिर उस के बाद अपने पेट और हथेली पर गोली मारने की क्या जरूरत थी. अब कातिल उन की निगाहों के सामने था, जो पूरे घटनाक्रम को छिपाने की साजिश बड़ी ही होशियारी से कर रहा था.

उस के परिवार के अन्य सदस्यों से भी पूछताछ की गई. सभी का कहना था कि उस समय सब लोग गहरी नींद में थे. फायरिंग सुनील मिश्रा की चीखपुकार सुन कर जागे थे.
सुनील मिश्रा से अधिकारियों ने दोबारा घुमाफिरा कर सवालों की झड़ी लगा दी तो वह पुलिस के सामने टूट गया और फूटफूट कर रोने लगा. भर्राए गले से बताया कि वह युवक उस की बेटी का प्रेमी अरनव है. उस की हत्या का जुर्म और बेटी पर गोली चलाने की बात सुनील मिश्रा ने स्वीकार कर ली.
शर्म और ग्लानि से भरे सुनील मिश्रा ने औनर किलिंग की जो कहानी पुलिस अधिकारियों को सुनाई, वह इस प्रकार निकली.

पेशे से ढाबा चलाने वाला सुनील मिश्रा अधिकतर घर से बाहर ही रहता था. उस का घूरपुर रोड परमिश्रा फैमिली रेस्टोरेंट ढाबाहै. परिवार में पत्नी के अलावा 2 बेटे और एक बेटी अमायरा. सुनील का अपने घर चकहीरानंद में महीने में एक बार ही आना होता था.

कथा में आगे बढ़ने से पहले अरनव के परिवार के बारे में संक्षिप्त जानकारी जरूरी है.

असमय ही प्रेम में फना हुए अरनव के पिता सत्यप्रकाश एलआईसी एजेंट हैं. पत्नी संध्या के अलावा 2 बेटे अरनव और विकास (बदला हुआ नाम) थे, जिन में अरनव की मौत हो चुकी है.
अरनव सिंह इस साल 12वीं कक्षा में नैनी के महर्षि विद्या मंदिर इंटर कालेज रामनगर में पढ़ता था. उस का घर पीएसी कालोनी स्थित नैनी क्षेत्र में है. अरनव के पिता मूलरूप से सुलतानपुर जिले के रहने वाले हैं. वह काफी सालों से इलाहाबाद यमुनापार इलाके में पूरे परिवार के साथ रह रहे थे.

दोनों के परिवार वाले अमायरा और अरनव की प्रेम कहानी से अनभिज्ञ थे. अरनव और अमायरा दोनों एक ही कक्षा में पढ़ते थे. किताबों के लेनदेन से उन का प्रेम परवान चढ़ा था. जिस के चलते अरनव को अपने प्राण गंवाने पड़े. सुनील मिश्रा का समय अकसर परिवार से दूर बाहर ही बीतता था. परिवार के भरणपोषण के लिए ढाबा चलाता था. काफी दिनों के बाद वह एक दिन पहले ही अपने घर आया था.
रात को मंगलवार का व्रत खोलने के बाद वह पत्नी के साथ बिना एसी वाले कमरे में सो रहा था. बच्चे एसी वाले कमरे में थे. उस रात गरमी बहुत ज्यादा थी.

गरमी से बेहाल पतिपत्नी एसी वाले कमरे में सोने के लिए गए तो देखा सभी बच्चे तो कमरे में सो रहे थे लेकिन अमायरा वहां नहीं थी. आखिर कहां गई होगी वह? सुनील बस यही सोच रहा था कि उसी समय कुछ खटपट की आवाज सुनाई दी.

बदहवास हालत में अमायरा कमरे में आई. उस की मां ने पूछा तो उस ने जवाब दिया कि पेट में हलका दर्द हो रहा है. इतना कहने के बाद वह फिर से पानी पीने जाने की बात कह कर कमरे से बाहर निकली.
अब तक सुनील मिश्रा को अमायरा पर शक हो चला था. आखिर वह उस का बाप था. जमाने के रंगढंग देख रहा था. उस ने एक बात गौर की थी, जब पतिपत्नी बच्चों के कमरे में सोने गए थे तो उस समय बेटी सीढि़यों से उतर कर कमरे में आई थी. आखिर इतनी रात गए वह छत पर क्या कर रही थी?

यह सवाल उस के जहन में बारबार घूम रही थी. जब वह पानी पीने का बहाना कर के कमरे से दोबारा निकली तो उस का रुख फिर से छत की ओर था. सुनील मिश्रा भी उस के पीछेपीछे छत की तरफ बढ़ा.
अमायरा को पिता के पीछेपीछे आने का अहसास हुआ तो उस ने पैर पकड़ लिए, ‘‘पापा, कहां जा रहे हैं?’’
उस समय वह बेहद घबराई हुई थी.

‘‘पर कोई नहीं है. चलिए, चल कर सोते हैं. आप थकेमांदे इतने दिनों बाद आए हैं चलिए कमरे में.’’

सुनील मिश्रा ने रोते हुए बताया, ‘‘साहब, मैं ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि बेटी जिसे मैं बहुत प्यार करता था, वह मेरी इज्जत खाक में मिला देगी. हकीकत तो यह है कि जब वह छत पर गई तो कुछ देर बाद मैं भी दबेपांव वहां गया. वह अपने प्रेमी के साथ आलिंगनबद्ध थी.

‘‘मुझे सारा माजरा समझ गया. क्योंकि मैं ने उसे रंगेहाथों आपत्तिजनक हालत में देख लिया था. मैं वह सीन देख करअब क्या बताऊं एक जवान बेटी का पिता क्या कर सकता है. अपनी बेटी को आपत्तिजनक अवस्था में देख कर आप खुद ही अंदाजा लगा सकते हैं.

‘‘मेरा शरीर गुस्से से थरथर कांपने लगा. खून खौल उठा था मेरा. मैं नीचे कमरे में आया और अपनी रिवौल्वर उठा ली. अमायरा ने मुझे रोकने की बहुत कोशिश की. लेकिन मैं उसे धकियाते हुए छत पर पहुंचा तो देखा वह लड़का छत पर उकड़ूं बैठा हुआ था.

‘‘मैं ने क्रोध में कर उस पर रिवौल्वर तानी तो बेटी ने फिर मेरे पैर पकड़ लिए. उस ने अरनव के जान की भीख मांगी तो मुझे और भी ज्यादा गुस्सा गया. गुस्से में मैं ने पहली गोली अमायरा पर ही चला दी. गोली उस के हाथों को छूते हुए निकल गई. वह गिर पड़ी. उस के बाद उस के प्रेमी अरनव को 2 गोलियां मारीं. फिर घूमा और एक गोली अमायरा पर दोबारा चलाई जो सीधे उस के पेट में जा कर लगी.

‘‘गोली चलने की आवाज से घर वाले भी जाग गए थे. वे बदहवास भागे आए. अब तक मैं ने खुद को भी खत्म करने का निर्णय ले लिया था. मैं ने रिवौल्वर अपनी कनपटी पर सटाई और ट्रिगर दबा दिया लेकिन बुलेट फंस गई. दोबारा ट्रिगर दबाना चाहा तब तक घर वालों ने मुझे पकड़ लिया.’’

बयान देते हुए वह फिर से फूटफूट कर रोने लगा क्योंकि वह अपनी बेटी अमायरा को बेटों से ज्यादा चाहता था. बड़ी मन्नतों से वह पैदा हुई थी. अमायरा सीए बनना चाहती थी, जिस के लिए उस ने कौमर्स विषय चुना था. वह उसे हर खुशी देना चाहता था. उस के सीए बनने के सपने को भी पूरा करना चाहता था. एक ओर जहां सुनील मिश्रा बेटी को बहुत प्यार करता था तो वहीं दूसरी ओर बेटी के पैर बहक गए. वह पिता की

गैरमौजूदगी में अपने प्रेमी अरनव से रोज मिलती थी और उस के मिलन में सहायक थी उस की बुआ की बेटी. वही घर वालों की आंखों में धूल झोंक कर कर दोनों का मिलन करवाती थी. बहरहाल, बेटी के विश्वासघात ने जहां उस के प्रेमी अरनव की जिंदगी छीन ली तो दूसरी ओर पिता का साया और विश्वास भी. अमायरा के नसीब में अब प्रेमी का प्यार है और ही पिता की सरपरस्ती. पुलिस ने कानूनी काररवाई करते हुए रिपोर्ट दर्ज कर सुनील मिश्रा को कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया है. द्य
कथा में अमायरा परिवर्तित नाम है. UP Crime News

Love Crime : प्रेमी को पति बनाने की जिद ने ली जान

Love Crime : 15 जुलाई, 2022 की सुबह थी. मोहल्ले में अब तक अधिकांश लोग जाग चुके थे. घर के सभी सदस्य उठ गए थे. लेकिन नगीना को अपनी बड़ी बेटी रुचि नहीं दिखाई दी तो उस ने आंगन में बैठे पति मनोज से पूछा, ‘‘रुचि बिटिया कहां है?’’

इस पर मनोज ने बताया कि ऊपर कमरे में सो रही है. अब तक नीचे नहीं उतरी है. उसे जगाने के लिए मां नगीना ने आवाज दी. लेकिन उस ने कोई जबाव नहीं दिया. इस पर मां जीना चढ़ कर पहली मंजिल पर बने कमरे में गई. दरवाजा धकेल कर जैसे ही कमरे में घुसी, उस के मुंह से चीख निकल गई. कमरे में खून फैला हुआ था. वहां रुचि मरी पड़ी थी. उस के ऊपर बोरी पड़ी हुई थी. रुचि की मौत की बात सुनते ही घर में कोहराम मच गया. चीखपुकार का शोर सुन कर आसपास के लोग भी आ गए. मनोज की जवान बेटी की अचानक मौत होने से मोहल्ले में सनसनी फैल गई. रुचि की लाश देख उस की मां और भाईबहन बिलखबिलख कर रो रहे थे. मोहल्ले की महिलाओं ने उन्हें किसी तरह संभाला.

पड़ोसियों ने हत्या की सूचना पुलिस को दे दी. घटना की जानकारी होते ही थानाप्रभारी नरेंद्र शर्मा, सीओ (सिटी) अभिषेक श्रीवास्तव पुलिस टीम के साथ वहां पहुंच गए और घटनास्थल का निरीक्षण किया. सूचना दिए जाने पर एसपी (ग्रामीण) डा. अखिलेश नारायण सिंह भी आ गए. फोरैंसिक टीम को भी वहां बुला लिया गया.

पूछताछ में पिता मनोज राठौर ने बताया कि रुचि ने अपने हाथ की नस काट कर आत्महत्या कर ली है. उस ने बताया कि वह उस की शादी के लिए लड़का तलाश रहा था. जबकि वह दूसरी जाति के युवक से प्रेम करती थी और उस से शादी करना चाहती थी. हम लोगों ने गैरबिरादरी के लड़के के साथ शादी करने से मना कर दिया था. इस बात से वह नाराज हो गई और उस ने हाथ की नस काट कर आत्महत्या कर ली.

इस पर एसपी (ग्रामीण) ने ऊपर बने कमरे में जा कर लाश का निरीक्षण किया. कमरे में लाश बोरे से ढकी थी. हालात कुछ संदिग्ध लगे. बोरा हटाया तो रुचि के गले के पास भी खून दिखाई दिया. गौर से देखने पर पता चला कि उस का गला भी कटा हुआ है. इस से स्पष्ट हो गया कि रुचि की हत्या की गई है. पिता की बातों से शक होने पर पुलिस ने बिना देर किए उसे हिरासत में ले लिया और उसे थाने ले गई. मनोज ही अपनी बेटी का हत्यारा था. इस बात पर किसी को भरोसा नहीं हो रहा था कि सीधासादा दिखने वाला मनोज इतनी बेरहमी से बेटी की हत्या कर सकता है. पड़ोसियों के साथ ही रिश्तेदार भी उसे कोस रहे थे.

इस बीच  फोरैंसिक टीम ने मौके से सबूत जुटाए. पुलिस ने मौके की काररवाई निपटाने के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी भिजवा दिया. पुलिस ने थाने पर ले जा कर मनोज से पूछताछ की. कुछ देर तो वह रुचि द्वारा अपने हाथ की नस काट कर आत्महत्या की बात पर टिका रहा, लेकिन पुलिस की सख्ती पर उस ने बेटी की हत्या का जुर्म कुबूल कर लिया. अपनी बेटी की हत्या का उसे कोई पछतावा नहीं था. बेटी के कत्ल के पीछे जो कहानी निकली, वह इस प्रकार थी—

उत्तर प्रदेश में कांच की नगरी के नाम से प्रसिद्ध फिरोजाबाद जनपद के थाना उत्तर के तिलक नगर इलाके में रहने वाला मनोज कुमार राठौर एक चूड़ी कारखाने में काम करता था. घर में पत्नी नगीना के अलावा 3 बेटियां और एक बेटा था. वैसे मनोज मूलरूप से मक्खनपुर थाना क्षेत्र के गांव अंगदपुर का रहने वाला है. उस के मातापिता और भाई गांव में ही रहते हैं. कुछ साल से वह तिलक नगर में अपना मकान बना कर परिवार के साथ रह रहा था.

मनोज का बायां हाथ लगभग 10 साल पहले थे्रशर मशीन में आ जाने से कट गया था. एक हाथ कटने के बाद भी मनोज परिवार के भरणपोषण के लिए चूड़ी कारखाने में काम करने लगा. परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी, इसलिए अब घर पर ही चूड़ी जुड़ाई का काम उस की पत्नी नगीना करने लगी थी. बड़ी बेटी रुचि 9वीं कक्षा में पढ़ रही थी. उस की पढ़ाई बंद करा कर उसे भी इसी काम में लगा दिया. वह चूडि़यों पर नग लगाने का काम करती थी. रुचि इस काम से अपना खर्चा भी निकाल लेती थी.

घटना से 6 महीने पहले की बात है. अपनी सहेली के जन्मदिन की पार्टी में शामिल होने रुचि उस के घर पहुंची थी. जन्मदिन में थाना एटा के ग्राम पिलुआ निवासी फोटोग्राफर सुधीर पचौरी फोटो खींच रहा था. रुचि ने भी उस से अपनी सहेली के साथ तरहतरह के पोजों में फोटो खिंचवाए. सुधीर उस का अनगढ़ सौंदर्य देख ठगा सा रह गया. रुचि को भी एहसास हो गया कि सुधीर उसे कैमरे की आंख से देख रहा है. जवानी की दलहीज पर पहुंची रुचि का दिल तेजी से धड़कने लगा था. इसी बीच फोटोग्राफर सुधीर और रुचि के बीच परिचय हो गया. घर आते समय रुचि ने सुधीर को अपना मोबाइल नंबर देने के साथ ही उस का नंबर भी ले लिया.

रुचि सोशल मीडिया पर भी थी. वे दोनों फेसबुक पर एकदूसरे से जुड़ कर बात करने लगे. सुधीर रहने वाला तो एटा क्षेत्र का था, लेकिन काम के संबंध में वह फिरोजाबाद में कमरा ले कर रहने लगा था. सोशल मीडिया के जरिए रुचि और सुधीर की दोस्ती कब प्यार में बदल गई, इस का दोनों को ही पता नहीं चला. इस बीच रुचि और सुधीर आपस में मिल भी लेते थे और अपने दिल का हाल भी एकदूसरे को बता देते थे. धीरेधीरे दोनों का प्यार परवान चढ़ने लगा. यहां तक कि दोनों ने शादी करने का फैसला तक ले लिया.

अब दोनों चोरीछिपे अकसर मिलने लगे थे. जब भी रुचि और सुधीर अकेले में मिलते, दोनों भविष्य के सपने संजोते. एक दिन रुचि ने सुधीर का हाथ अपने हाथ में लेते हुए कहा, ‘‘सुधीर, तुम मुझे कितना प्यार करते हो?’’

इस पर सुधीर ने कहा, ‘‘यह भी कोई पूछने की बात है. प्यार का कोई पैमाना तो होता नहीं है, जिस से मैं बता सकूं. लेकिन तुम यह सब क्यों पूछ रही हो?’’

रुचि राठौर समाज की थी जबकि सुधीर ब्राह्मण समाज से था. रुचि ने कहा, ‘‘सुधीर समाज से डर कर तुम मुझे भूल तो न जाओगे?’’

रुचि ने सुधीर से साफसाफ कह दिया कि वह जातपांत में विश्वास नहीं करती है, शादी करेगी तो उसी से अन्यथा अपनी जान दे देगी. इस पर सुधीर ने उस के होंठों पर हाथ रख उसे चुप कराते हुए कहा, ‘‘2 सच्चे प्रेमियों को मिलने से दुनिया की कोई ताकत नहीं रोक सकती. मैं तुम से सच्चा प्यार करता हूं और तुम्हारे ही साथ शादी करूंगा.’’

हालांकि दोनों की जाति (बिरादरी) अलगअलग थी. इस के बावजूद उन्होंने शादी करने का फैसला कर लिया था. प्रेमी युगल अपने भविष्य के सुखद सपने संजोते हैं, दिल कुछ और चाहता है और किस्मत कुछ और. रुचि और सुधीर भी सपने संजोने लगे. बेटी किसी लड़के के साथ प्यार की पींगें बढ़ा रही है, इस की जानकारी रुचि के घर वालों को नहीं थी. बल्कि इन सब बातों से बेखबर मनोज को जवान होती बेटी रुचि की शादी की चिंता सता रही थी. वह उस के लिए लड़का देखने लगा.

उस ने दिल्ली में एक लड़का देखा था. उस के परिवार से बात चल रही थी. इस की भनक जैसे ही रुचि को लगी तो उस ने पिता से कहा, ‘‘एक लड़का जो फोटोग्राफर है और अच्छा कमाता है, वह अपनी जाति का है. उस से मेरी शादी करा दो.’’

तब मनोज ने पत्नी नगीना से बात की. इस पर सभी लोग सुधीर से रुचि की शादी कराने को तैयार हो गए. निर्णय लिया कि शादी से पहले लड़का परिवार के अन्य सदस्यों को भी दिखा दिया जाए. करीब 2 महीने पहले मनोज और नगीना सुधीर को साथ ले कर परिवार के अन्य सदस्यों को दिखाने के लिए गांव अंगदपुर पहुंचे. यहां सभी को लड़का पसंद आ गया. बातचीत के दौरान सुधीर की अन्य जगह रिश्तेदारियों के संबंध में पूछने पर वह सही से बता नहीं सका. इस दौरान पता चला कि सुधीर उन की जाति का नहीं है. जबकि मनोज बेटी की शादी सजातीय लड़के से करना चाहता था, क्योंकि अभी रुचि से छोटी 2 बेटियां और थीं.

युवक के गैरबिरादरी का होने से रुचि के घर वाले इस शादी के लिए राजी नहीं हुए. रुचि ने पिता से सुधीर की जाति छिपाई थी. जाति छिपाने वाली बात से मनोज बेटी से नाराज हो गया और गुस्से में आ गया था. फिर भी उस ने पहले बेटी को समझाने की कोशिश की. यहां तक कि उस का दिल्ली में रिश्ता भी तय कर दिया. इस बात से रुचि चिढ़ गई. रुचि ने पिता द्वारा तय की गई शादी करने से इंकार कर दिया. रुचि पिता की इच्छा के खिलाफ अपने प्रेमी से मिलती और उस के साथ घूमने जाती रही. इसी बीच 11 जुलाई, 2022 को रुचि ने सुधीर को घर बुलाया. कुछ समय घर पर रहने के बाद वह दोस्त के घर जाने की बात कह कर चला गया. देर शाम सुधीर फिर से घर आया और रात को घर पर ही रुक गया.

देर रात रुचि और सुधीर को मनोज ने एक कमरे में बांहों में बांहें डाले बातचीत करते देख लिया. रात के समय एकांत में बैठ कर दोनों का बातचीत करना उसे अखर गया. उस ने इस बात का विरोध किया. रुचि को यह सब नागवार गुजरा. वह जिद पर अड़ गई. उस ने अपने पिता से कह दिया कि वह शादी करेगी तो सुधीर से और यदि आप ने विरोध किया तो वह सुधीर के साथ कोर्ट मैरिज कर लेगी. इस बात से परिवार में कलह रहने लगी.

बेटी की यह हरकत उसे नागवार गुजरी.  इस बात ने आग में घी का काम किया. 2 दिन से मनोज सो नहीं सका था. बेटी की हरकत  उस की आंखों के सामने बारबार घूम रही थी. उसे समाज में अपनी बदनामी का डर सता रहा था. तब उस ने एक खौफनाक निर्णय ले लिया. वह बाजार से एक आरी खरीद कर लाया और उसे घर में छिपा कर रख दिया. मनोज की योजना की भनक तक नगीना और घर के अन्य सदस्यों को भी नहीं लगी.

घर के निचले तल पर 3 कमरे और किचन है, वहीं ऊपरी मंजिल पर 2 कमरे हैं. गुरुवार 14 जुलाई, 2022 की रात को मनोज के परिवार के सभी सदस्य सो गए थे. नगीना दोनों बेटियों व बेटे के साथ कमरे में सो गई. उस ने रुचि को भी अपने साथ सोने को बुलाया था, लेकिन वह ऊपरी मंजिल पर बने अपने कमरे में सोने चली गई. जबकि मनोज जीने के सामने चारपाई पर लेट गया, लेकिन मनोज की आंखों से तो नींद उड़ चुकी थी. आधी रात के बाद मनोज दबे पांव अपनी चारपाई से उठा. उस समय कूलर चलने के कारण कमरे में सो रही पत्नी नगीना को कुछ पता नहीं चला. मनोज ने लाई हुई आरी उठाई और सीढि़यां चढ़ कर रुचि के कमरे में पहुंचा. उस समय वह गहरी नींद में सो रही थी.

मनोज ने सो रही रुचि के सिर पर पहले डंडे से प्रहार किया, जिस से वह अचेत हो गई. इस के बाद आरी से उस का गला रेत कर हत्या कर दी. हत्या को आत्महत्या का रूप देने के लिए मनोज ने रुचि की कलाई की नस भी काट दी. बेहोशी के कारण न तो रुचि चीख सकी और न अपना बचाव कर पाई. हत्या के बाद उस ने शव को बोरे से ढंक दिया. मनोज ने बेटी की हत्या करने के बाद खून से सने हाथों को धोया. बेटी का गला रेत कर सुकून की नींद सोता रहा. फिर सुबह के समय वह अपने गांव अंगदपुर गया और वहां रुचि के मोबाइल को रख कर वापस घर आ गया था.

यह जानकारी जब नगीना और मोहल्ले के अन्य लोगों को हुई तो सभी आश्चर्यचकित रह गए कि मनोज ने बेटी का कितनी चालाकी से कत्ल कर दिया और किसी को इस का अहसास तक नहीं हुआ कि एक बाप ऐसा कर सकता है. नगीना ने पति मनोज के खिलाफ बेटी की हत्या करने की रिपोर्ट दर्ज कराई. 15 जुलाई, 2022 को पुलिस ने मनोज की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त आरी बरामद कर ली. शनिवार 16 जुलाई को उसे न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया.

प्रेम विवाह के प्रति आज भी परिवार और समाज का दृष्टिकोण बदला नहीं है. खासकर 2 अलगअलग जातियों के पे्रमियों का मिलना तो और दुश्वार कर दिया जाता है. यही इस घटना में भी हुआ.Love Crime

Love Crime : सांप सीढ़ी वाले प्यार का भयानक अंजाम

Love Crime : उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के थाना हाईवे क्षेत्र स्थित नगला बोहरा में रिटायर्ड फौजी तेजवीर सिंह का घर है. वे फरीदाबाद में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करते हैं. शाम लगभग 5 बजे उन के घर का दरवाजा किसी ने खटखटाया. बोला शादी का कार्ड देना है. दरवाजा तेजवीर सिंह की बड़ी बेटी सोनम ने खोला. युवक शादी का कार्ड देने की बात कहता हुआ घर के अंदर आ गया. कार्ड के साथ मिठाई का डिब्बा भी था.

अनजान युवक को देख कर मां उस से कुछ पूछती, तब तक युवक ने तेजवीर सिंह की बेटी सोनम पर शादी के कार्ड में छिपा कर लाए चाकू से ताबड़तोड़ प्रहार करने शुरू कर दिए. जब बेटी को बचाने मां सुनीता बीच में आईं तो युवक ने उन पर भी चाकू से वार किए. घर में घुसते ही युवक ने खूनी होली खेली. शोर सुन कर आसपास के लोग जैसे ही घर की ओर दौड़े, युवक ने खुद के सीने व पेट पर भी कई चाकू मारे. इस से वह जख्मी हो गया और वहीं गिर गया. यह घटना 19 जून, 2022 की है.

घर में हुए इस खूनखराबे को देख कर सोनम की छोटी बहन और छोटे भाई की बुरी हालत हो गई. घर में चारों तरफ खून ही खून देख कर वे डर से कांपने लगे. सोनम की तो मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि मां सुनीता गंभीर रूप से घायल पड़ी थीं. फर्श पर युवती की लाश और पास में पड़े खून के धब्बे. ये वो तसवीर थी, जिस ने कृष्ण की नगरी मथुरा के मोहब्बत जैसे खूबसूरत शब्दों को उलट कर रख दिया था. इसी बीच जुटी भीड़ में से किसी ने थाना हाईवे पुलिस को घटना की सूचना दे दी. सूचना मिलते ही थानाप्रभारी अजय कौशल पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए.

पुलिस ने आननफानन में ग्रामीणों की मदद से घायल सुनीता और युवक को उपचार के लिए अस्पताल भिजवाया. घायल सुनीता को सिटी हौस्पिटल व आरोपी को जिला हौस्पिटल  में भरती कराया गया. बाद में युवक को आगरा के एस.एन. मैडिकल कालेज रैफर कर दिया गया. दोनों की हालत नाजुक थी. एसपी (सिटी) मार्तंड प्रकाश सिंह ने घटना के बाद जानकारी दी कि हमलावर युवक व मृतका की मां सुनीता की हालत गंभीर है. इसलिए दोनों से पूछताछ नहीं की जा सकी है. युवक की बैग में उस का आधार कार्ड मिला था.

इस बीच घटना की गंभीरता को देखते हुए थानाप्रभारी ने उच्चाधिकारियों को भी अवगत करा दिया. जानकारी मिलते ही एसपी (सिटी) मार्तंड प्रकाश सिंह, सीओ (रिफाइनरी) धर्मेंद्र चौहान घटनास्थल पर पहुंच गए. फोरैंसिक टीम को भी बुला लिया गया. पुलिस और फोरैंसिक टीम ने घटनास्थल से चाकू, मिठाई का डिब्बा और एक बैग बरामद किया. बैग में ट्रेन की टिकट, आईडी मिली. पुलिस ने इन सभी चीजों को अपनी कस्टडी में ले लिया. मौके की काररवाई निपटा कर पुलिस ने सोनम के शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया.

इस सनसनीखेज वारदात ने सभी को हिला कर रख दिया था. ग्रामीण तरहतरह की चर्चा कर रहे थे कि युवक कौन है? और उस की फौजी के परिवार से क्या दुश्मनी थी? यह केवल चर्चा थी. वास्तविक हकीकत किसी को नहीं पता थी. इस का पता हाईवे थाना पुलिस ही लगा सकती थी. घटना की सूचना पर फरीदाबाद  से फौजी तेजवीर सिंह मथुरा आ गए. उन की तहरीर पर थाना हाईवे पुलिस ने युवक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया.

इस बीच पुलिस ने अपने स्तर से जानकारी जुटाने के साथ ही परिजनों व अन्य से पूछताछ शुरू की. शुरुआती जांच में पता चला कि युवक की सोनम से फेसबुक पर दोस्ती हुई थी. आशंका व्यक्त की गई कि इकतरफा प्यार में युवक ने घटना को अंजाम दिया है. घायल युवक की पहचान उस के पास से मिले आधार कार्ड से हुई. 23 वर्षीय युवक शिवम कश्यप मुजफ्फरनगर के थाना नई मंडी के गांव ककुड़ा का रहने वाला था. पुलिस ने शिवम के घर वालों को भी घटना की जानकारी दी. इस पर शिवम के घर वाले भी देर रात आगरा के अस्पताल पहुंच गए.

रिटायर्ड फौजी तेजवीर सिंह के परिवार में पत्नी सुनीता के अलावा 2 बेटियां व एक बेटा है. इन में सब से बड़ी बेटी सोनम की उम्र 17 साल और छोटी की 16 साल थी. उन दोनों से छोटा बेटा था. सोनम रतनलाल फूल कटोरी सीनियर सेकेंडरी स्कूल में 9वीं कक्षा की छात्रा थी. तेजवीर सिंह चाहते थे कि उन की बेटी जिंदगी में कोई ऊंचा मुकाम हासिल करे. पुलिस ने मृतका की छोटी बहन व अन्य से गहनता से पूछताछ की. पुलिस की जांच और पूछताछ के बाद घटना के पीछे सोनम के कत्ल की जो कहानी सामने आई, वह चौंकाने वाली निकली. लूडो ऐप पर औनलाइन लूडो खेली जाती है. 3 साल पहले इस खेल में मुजफ्फरनगर के शिवम कश्यप उर्फ अवि की पहचान मथुरा निवासी 17 वर्षीय सोनम से हुई थी. खेलखेल में दोनों में दोस्ती हो गई.

दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं तो नोएडा में 2 बार सोनम और शिवम की मुलाकात भी हुई. दोनों ने एकदूसरे को अपनेअपने मोबाइल नंबर भी दे दिए. अब अकसर दोनों में बातें होने लगीं. छोटी बहन को अपनी बड़ी बहन सोनम की युवक से दोस्ती की बात पता थी. जब 2 युवा दिल मिलते हैं तो दिलों में मोहब्बत के तराने गूंजने लगते हैं. उन्हें खानापीना कुछ भी अच्छा नहीं लगता. बस दिल चाहता है कि वह अपने प्यार को हर पल सामने पाए. किशोरवय के इस प्यार में दोनों ही बह गए. बिना कुछ सोचेसमझे दोनों भविष्य के सपने संजोने लगे.

सोनम और युवक के बीच चल रहे मोहब्बत के इस खेल की जानकारी जब घर वालों को हुई तो मां सुनीता ने बचपन को पीछे छोड़ कर जवानी की दलहीज पर कदम रख चुकी बेटी सोनम को डांटते हुए युवक से बातचीत करने पर अंकुश लगा दिया. सोनम ने शिवम को हकीकत बताते हुए फिलहाल फोन न करने की बात कही.     मछली जैसे बिना पानी के तड़पती है, ऐसे ही सोनम और उस का प्रेमी शिवम उर्फ अवि तड़पने लगे. सोनम की मां द्वारा अपने प्यार पर बंदिश लगाने से वह भड़क गया. प्रेमी शादी का दबाव डाल रहा था. घर वालों के मना करने पर उस ने सोनम के घर वालों से बातचीत करने का निर्णय लिया.

अवि मुजफ्फरनगर के श्रीराम कालेज में बीसीए अंतिम वर्ष का छात्र है. उस के पिता दुकान करते हैं. घाटा होने से दुकान बंद हो गई. अवि के एक भाई और एक बहन भी है. उस ने अपने घर वालों को बताया कि वह एक नौकरी के संबंध में इंटरव्यू के लिए जा रहा है. शिवम सोनम की मां सुनीता से मिलने के लिए 19 जून, 2022 को मुजफ्फरनगर से सुबह साढ़े 8 बजे ट्रेन में सवार हो कर मथुरा के लिए चला था. उस ने चाकू मुजफ्फरनगर  से ही खरीद लिया था. वह शाम 5 बजे मथुरा पहुंचा और मथुरा के गोवर्धन चौराहे से उस ने मिठाई खरीदी थी.

शाम 6 बजे वह सोनम के घर पहुंचा था. अवि सोनम की मां से इस बारे में बातचीत करने और समझाने आया था. इसी बीच बहसबाजी में उस ने सोनम पर चाकू से वार किया. सोनम ने जब उसे रोकने का प्रयास किया तो अवि ने गुस्से में उस पर भी चाकू से वार कर दिया. जब सुनीता सोनम को बचाने आगे आईं तो उस ने चाकुओं से वार कर के सोनम व सुनीता को बुरी तरह से घायल कर सनसनीखेज वारदात को अंजाम दिया था. पकड़े जाने के डर से उस ने अपने आप को भी चाकू मार कर घायल कर लिया था.

सुनीता की कमर व पीठ पर 2 वार तथा सोनम की पीठ पर 3 वार चाकू से किए जो आरपार हो गए थे, जिस से सोनम का दिल व फेफड़े पूरी तरह फट गए. सोनम की मौत का कारण भी ताकत से किए गए चाकू के वार ही बने. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है. शिवम अपने घर से नौकरी का इंटरव्यू देने के बहाने निकला था. लेकिन उस के मन में क्या चल रहा है, कोई नहीं जानता था. घटना की जानकारी के बाद उस के घर वाले आगरा पहुंच गए. पुलिस कस्टडी में अवि का इलाज चल रहा था.

मथुरा में हुई इस सनसनीखेज घटना ने प्रेम के ढाई अक्षरों को ही दफन करदिया. कहते हैं कि इश्क अच्छोंअच्छों का दिमाग खराब कर देता है. दिल दहलाने वाली इस घटना ने कृष्ण की नगरी मथुरा के गांव बोहरा में खौफ पैदा कर दिया था. मृतका की छोटी बहन ने बताया कि फेसबुक के माध्यम से दोनों के बीच दोस्ती हुई थी, लेकिन घर वालों ने सोनम पर अंकुश लगा दिया था. इस के चलते सोनम ने प्रेमी अवि से बात करने से इंकार कर दिया. इसी से नाराज हो कर वह सोनम की हत्या कर खुदकुशी किए जाने के इरादे से शादी के कार्ड में चाकू छिपा कर कार्ड देने के बहाने घर में घुसा और हमला कर दिया. बीच में मां के आने पर उन्हें भी घायल कर दिया.

आजकल कई औनलाइन गेम्स खेलने वाली यह युवा पीढ़ी किस तरफ जा रही है, इस का ध्यान परिजनों को रखना चाहिए. औनलाइन गेम खेलने वालों की हरकतों में बदलाव दिख जाता है. युवा पीढ़ी की हरकतों पर परिवार को पैनी नजर रखनी चाहिए.घर का बच्चा कहां जा रहा है और क्या कर रहा है, सावधान रहते हुए कड़ी नजर रखी जाएगी तभी ऐसी सनसनीखेज घटनाओं से बचा जा सकता है.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Uttar Pradesh : नर्स का दगाबाज प्रेमी

Uttar Pradesh : नर्स विनीता को बाजार गए हुए काफी समय हो गया था. लेकिन अब तक वह वापस घर नहीं आई थी. पति विजय यादव को विनीता की चिंता होने लगी थी. उस ने फोन लगाया, लेकिन विनीता का मोबाइल स्विच्ड औफ आने पर उस की चिंता और बढ़ गई. उस ने सोचा कि वह शायद किसी सहेली या परिचित के घर चली गई होगी या उस के मोबाइल की चार्जिंग खत्म हो गई होगी. इसलिए फोन स्विच्ड औफ हो गया होगा.

धीरेधीरे समय बीतता गया और अब शाम का अंधेरा भी घिरने लगा था. यदि वह किसी जानने वाले के यहां गई होती तो उस के मोबाइल से अपने बारे में जानकारी तो दे ही सकती थी. यह सोचसोच कर विजय अब परेशान हो गया. उस ने कई जानकार लोगों के यहां फोन मिलाया लेकिन हर जगह से यही जवाब मिला कि विनीता उन के यहां नहीं आई है.

तब विजय ने आसपास स्थित बाजार जा कर भी पत्नी को तलाशा, लेकिन उसे निराशा ही मिली. सब तरफ से निराश होने के बाद विजय बिना देर किए आगरा के थाना एत्माद्दौला जा पहुंचा. यह बात 26 सितंबर, 2022 की है.

थाने पहुंच कर विजय ने एसएचओ विनोद कुमार से पत्नी विनीता यादव के गायब होने की बात बताई. विजय की शिकायत पर एसएचओ ने विनीता की गुमशुदगी दर्ज करा ली.

अगले दिन 27 सितंबर, 2022 को विजय के पास थाना एत्माद्दौला से फोन आया. विजय को तुरंत थाने आने के लिए कहा गया. विजय बिना देर किए थाने पहुंच गया.

वहां पहुंचने पर विजय को बताया गया कि बीती रात यमुनापार स्थित मंडी समिति ट्रांस यमुना कालोनी की सर्विस रोड पर एक घायल युवती मिली थी. उसे इलाज के लिए अस्पताल में भरती कराया गया, जहां उस की मौत हो गई. उस की लाश अस्पताल में है. उस युवती की शिनाख्त अभी नहीं हो पाई है. आप भी उसे एक बार जा कर देख लो.

यह सुन कर विजय घबरा गया और अस्पताल जा पहुंचा. उस ने जैसे ही शव को देखा तो वह फूटफूट कर रोने लगा.

उस ने पुलिस को बताया कि वह शव उस की पत्नी विनीता का है. शव की शिनाख्त हो जाने के बाद पुलिस ने जरूरी काररवाई निपटाई और शव का पोस्टमार्टम कराया. मृतका के शरीर पर चोटें एक्सीडेंट की निकलीं.

पोस्टमार्टम के बाद विनीता के शव को पति विजय ने अपनी सुपुर्दगी में ले कर उसी दिन उस का अंतिम संस्कार कर दिया.

कई दिनों से घर वालों की विनीता से बात नहीं हो पा रही थी, क्योंकि उस का मोबाइल फोन स्विच्ड औफ जा रहा था.

बात न होने पर उन्होंने उस के नर्सिंग होम में साथ काम करने वाले साथियों से बात की. तब उन्हें पता चला कि विनीता की सड़क दुघर्टना में मौत हो गई है. पति विजय ने उस का अंतिम संस्कार भी कर दिया है.

जब विनीता की मौत की जानकारी उस के घर वालों को हुई तो वे सन्न रह गए. पिता नवीन चंद्र घर के कुछ लोगों को ले कर पहली अक्तूबर को सिरसागंज से आगरा आ गए.

उन्होंने थाना एत्माद्दौला के एसएचओ विनोद कुमार से मुलाकात कर बताया कि उन की बेटी विनीता एक नर्सिंग होम में नर्स थी और नुनिहाई में किराए पर रहती थी. फिरोजाबाद जिले के नगला मोहन गांव के रहने वाले विजय यादव ने उसे अपने प्रेम जाल में फंसा लिया था. विनीता अविवाहित थी. वह विजय से शादी करना चाहती थी. उन्हें शक है कि विजय ने ही साजिश के तहत उन की बेटी की हत्या की है.

पुलिस इसे एक हादसा मान रही थी लेकिन घर वालों की शिकायत पर पुलिस को भी दाल में कुछ काला दिखाई दिया. सीओ (छत्ता) सुकन्या शर्मा के निर्देश पर एसएचओ विनोद कुमार ने शक के आधार पर घटना की जांच शुरू कर दी.

पुलिस ने विजय की काल डिटेल्स चैक की तो पाया कि वह जिस समय विनीता के गायब होने की बात कर रहा था, उस समय उस की मोबाइल पर विनीता से बात हुई थी. दोनों की फोन लोकेशन भी एक ही मिली.

यही नहीं, पुलिस ने सीसीटीवी कैमरे खंगाले. घटनास्थल के पास कोई कैमरा नहीं था. उस से पहले और बाद में लगे कैमरों में एक बोलेरो दिखाई दी. नंबर प्लेट से बोलेरो के मालिक का पता चला. मालिक का मोबाइल नंबर निकाला गया. उस नंबर की काल डिटेल्स चैक की गई तो उस में विजय यादव का नंबर मिला.

विजय ने जांच के दौरान जो बयान पुलिस को दिए थे, वे गलत निकले. गाड़ी और विजय की लोकेशन एक ही दिशा में थी, जिस से पुलिस को अहम सुराग मिला. छानबीन की गई तो विनीता के घर वालों के आरोप में सच्चाई नजर आई.

बोलेरो के नंबर और मालिक का पता चलने के बाद पुलिस को सारी सच्चाई का पता चल गया. पुलिस ने नर्स विनीता की हत्या का सनसनीखेज परदाफाश कर उस के शादीशुदा प्रेमी 28 वर्षीय विजय को 3 अक्तूबर को झरना नाला क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया.

पुलिस ने आरोपी विजय से सख्ती से पूछताछ की तो उस ने विनीता यादव की हत्या करने का जुर्म कुबूल करते हुए सारा राज उगल दिया. उस ने बताया कि इस वारदात में उस का दोस्त अंशुल भी शामिल था. उसी की बोलेरो से घटना को अंजाम दिया गया.

25 वर्षीय विनीता यादव मूलरूप से उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के सिरसागंज क्षेत्र की रहने वाली थी. वह आगरा के थाना हरिपर्वत स्थित दिल्ली गेट के एक नर्सिंग होम में नर्स थी. वह नुनिहाई में किराए पर रहती थी. वहीं फिरोजाबाद जिले के नगला मोहन क्षेत्र का रहने वाला 28 वर्षीय विजय यादव भी एक दूसरे अस्पताल में नर्सिंग स्टाफ था.

चूंकि विनीता और विजय एक ही कार्यक्षेत्र में जुड़े थे, एक दिन काम के दौरान दोनों की जानपहचान हो गई. साथसाथ काम करते रहने से दोनों में दोस्ती हो गई, जो प्यार में बदल गई. इस के बाद दोनों एकदूसरे से खुल कर मिलने लगे. मगर इस बात की खबर दोनों के घर वालों को नहीं लग सकी.

पिछले डेढ़ साल से विजय और विनीता लिवइन रिलेशन में रह रहे थे. विनीता ने अपने मकान मालिक को बता रखा था कि विजय उस का पति है. इस तरह विजय का जब मन होता, वह विनीता से मिलने उस के कमरे पर पहुंच जाता और 1-2 दिन रुक कर चला जाता था.

पहले विनीता का व्यवहार ठीक था. मगर कुछ महीनों से वह किसी और से फोन पर काफी लंबी बातें करने लगी. इस बात पर विजय को आपत्ति थी. मना करने पर वह झगड़ा करती थी और उसे जेल भिजवाने की धमकी देती थी.

विनीता शादी करने का उस पर लगातार दबाव भी बना रही थी. जबकि विजय पहले से ही शादीशुदा था. यह बात उस ने विनीता से छिपाई थी. उसे शक था कि विनीता उस से दूरी बना रही है. किसी और को पसंद करने लगी है. इसलिए उस ने विनीता को रास्ते से हटाने की साजिश दोस्त अंशुल के साथ रची.

विजय ने 26 सितंबर, 2022 को योजना को अमलीजामा देने के लिए अपने दोस्त अंशुल को फोन कर अपनी बोलेरो ले कर आने को कहा. इस के बाद विनीता को फोन कर मंडी समिति ट्रांस यमुना कालोनी की सर्विस रोड पर मिलने के बहाने से बुलाया.

विनीता पैदल वहां पहुंची थी. उस समय अंधेरा हो गया था. विजय और अंशुल बोलेरो में बैठे थे. विनीता को देखते ही वह पहचान गया.

उस के सड़क पर आते ही विजय ने अंशुल को इशारा किया. इशारा मिलते ही अंशुल ने बोलेरो से उसे तेज टक्कर मार दी ताकि किसी को शक न हो और लोगों को यह हादसा लगे. विनीता को कुचल कर विजय और उस का दोस्त अंशुल तेजी से बोलेरो को घटनास्थल से भगा ले गए.

लिवइन रिलेशन में रहने वाली नर्स प्रेमिका विनीता की हत्या के बाद विजय थाना एत्माद्दौला में उस की गुमशुदगी भी दर्ज कराने पहुंच गया था. इतना ही नहीं, अगले दिन शव की शिनाख्त अपनी पत्नी विनीता के रूप में कर उस का अंतिम संस्कार भी कर दिया.

26 सितंबर, 2022 की देर रात किसी राहगीर ने पुलिस को सर्विस रोड पर लहूलुहान हालत में एक युवती के पड़े होने की सूचना दी. पुलिस ने घटनास्थल पर पहुंचने के बाद उसे अस्पताल में भरती कराया. कुछ देर बाद ही युवती की मौत हो गई. पुलिस ने इसे सड़क हादसा माना था.

शातिर विजय यादव ने चालाकी दिखाते हुए 26 सितंबर को ही थाना एत्माद्दौला में विनीता की गुमशुदगी दर्ज करा दी थी. उस ने नर्स प्रेमिका की मौत को हादसा दर्शाने की भरपूर कोशिश की और किसी हद तक वह अपने मंसूबे में सफल भी हो गया था.

गुमशुदगी में विजय ने विनीता को अपनी पत्नी बताया था. दूसरी ओर पुलिस मृतका की शिनाख्त कराने का प्रयास कर रही थी. तभी पुलिस को पता चला कि विजय यादव नाम के युवक ने अपनी पत्नी की गुमशुदगी दर्ज कराई है.

तब पुलिस ने विजय को मृतक युवती की शिनाख्त करने के लिए थाने बुलाया. विजय का गुमशुदगी दर्ज कराना, विनीता को अपनी पत्नी बताना ही उस के गले की फांस बन गया और उस की सारी चालाकी धरी की धरी रह गई.

वहीं विनीता के घर वालों का आरोप था कि विजय अब भी झूठ बोल रहा है. विजय शादीशुदा है, उस ने झूठ बोल कर विनीता को अपने प्रेम जाल में फंसा लिया था. वह उसे शादी का झांसा दे कर उस की तनख्वाह भी रख लेता था. विनीता ने जब शादी के लिए विजय पर दबाव बनाया तो उस ने उस की हत्या कर दी.

कहानी लिखे जाने तक अंशुल की गिरफ्तारी नहीं हो सकी थी. पुलिस उस की सरगर्मी से तलाश कर रही है. विनीता की जिस बोलेरो से कुचल कर हत्या की गई थी, पुलिस ने उसे बरामद कर लिया.

पुलिस ने हत्यारे प्रेमी विजय यादव को न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया. अपने इश्क को खूनी अंजाम तक पहुंचाने वाला विजय अब सलाखों के पीछे कैद है.

नर्स विनीता की सनसनीखेज हत्या का पुलिस ने परदाफाश करने के बाद एसपी (सिटी) विकास कुमार ने एक प्रैस कौन्फ्रैंस आयोजित कर पूरी घटना की जानकारी दी.

विजय और अंशुल का जुर्म की दुनिया से कोई वास्ता नहीं था, लेकिन दोनों ने पेशेवर हत्यारों को भी मात दे दी थी. दोनों ने फूलप्रूफ मर्डर की प्लानिंग बड़ी होशियारी से की थी.

विजय यादव ने शातिरदिमाग से पुलिस को चकमा दे दिया था. लेकिन मृतका के घर वालों के शक जताने पर पुलिस ने मामले की छानबीन कर हत्यारे को दबोच लिया. इस तरह हत्या का राजफाश हो गया. Uttar Pradesh

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Delhi News : बुढ़ापे का इश्क – चंपा ने पूरी की मदन की इच्छा

Delhi News : संजय वर्मा का परिवार दिल्ली के हुमायूंपुर में रहता था, लेकिन उस के पिता मदनमोहन वर्मा रिटायरमेंट  के बाद उत्तरपूर्वी दिल्ली के भजनपुरा में अकेले ही रहते थे. पिता और पुत्र अपनीअपनी दुनिया में मस्त थे. 22 जुलाई, 2017 की सुबह भजनपुरा में मदनमोहन के पड़ोस में रहने वाले विजय ने संजय वर्मा को फोन कर के बताया, ‘‘आप के पिता के कमरे का कल सुबह से ताला बंद है. उन के कमरे से तेज बदबू आ रही है.’’

विजय की बात सुन कर संजय वर्मा को पिता की चिंता हुई. उन्होंने उसी समय पिता का नंबर मिलाया, तो उन का फोन स्विच्ड औफ मिला. फोन बंद मिलने पर उन की चिंता और बढ़ गई. इस के बाद वह भजनपुरा के सी ब्लौक स्थित अपने पिता के तीसरी मंजिल स्थित कमरे पर पहुंच गए. संजय को भी पिता के कमरे से तेज दुर्गंध आती महसूस हुई. उस के मन में तरहतरह की आशंकाएं आने लगीं. कहीं उन के साथ कोई अनहोनी तो नहीं घट गई, यह सोच कर उस ने अपने मोबाइल फोन से दिल्ली पुलिस के कंट्रोलरूम को फोन कर के पिता के बंद कमरे से आ रही बदबू की सूचना दे दी. यह क्षेत्र थाना भजनपुरा के अंतर्गत आता था, इसलिए पुलिस कंट्रोलरूम से यह सूचना थाना भजनपुरा को प्रेषित कर दी गई.

सूचना पा कर एएसआई हरकेश कुमार हैडकांस्टेबल सतेंदर कुमार को अपने साथ ले कर घटनास्थल के लिए रवाना हो गए. जैसे ही वह भजनपुरा के सी ब्लौक स्थित मकान नंबर 412 की तीसरी मंजिल पर पहुंचे, वहां बालकनी पर कुछ लोगों की भीड़ लगी दिखाई दी. उन्हीं के बीच संजय परेशान हालत में मिला.

एएसआई हरकेश कुमार को अपना परिचय देते हुए संजय ने बताया, ‘‘सर, मैं ने ही पीसीआर को फोन किया था.’’

जिस कमरे से बदबू आ रही थी, उस के बाहर ताला लगा था. इस से उन्होंने सहज ही अनुमान लगा लिया कि जरूर कोई अप्रिय घटना घटी है. इसलिए उन्होंने इस की जानकारी थानाप्रभारी अरुण कुमार को दे दी. कुछ ही देर में थानाप्रभारी अन्य स्टाफ के साथ वहां आ पहुंचे. कमरे के बाहर लटके ताले की चाबी संजय के पास नहीं थी, इसलिए पुलिस ने ताला तोड़ दिया. दरवाजा खुलते ही दुर्गंध का झोंका आया. पुलिस कमरे में दाखिल हुई तो पूरब दिशा की ओर की दीवार से सटे दीवान के अंदर एक अधेड़ आदमी की सड़ीगली लाश एक कार्टून में बंद मिली.

लाश देख कर संजय रोने लगा, क्योंकि वह लाश उस के पिता मदनमोहन वर्मा की थी. अरुण कुमार ने मौके पर क्राइम इनवैस्टीगेशन टीम को भी बुला लिया. क्राइम इनवैस्टीगेशन टीम का काम निपट गया तो पुलिस लाश का निरीक्षण करने लगी. मृतक के सिर के पीछे चोट का गहरा निशान था. दीवान के बौक्स में और उस के नीचे कमरे के फर्श पर खून फैला था, जो सूख चुका था. इस से अनुमान लगाया कि यह हत्या 2-3 दिन पहले की गई थी. कमरे में मौजूद सारा सामान अपनी जगह मौजूद था. इस से इस बात की पुष्टि हो गई कि हत्यारे का मकसद लूटपाट नहीं था.

हत्या क्यों की गई, यह जांच के बाद ही पता चल सकता था. पुलिस ने मौके की जरूरी काररवाई निपटाने के बाद लाश को पोस्टमार्टम के लिए जीटीबी अस्पताल भेज दिया. इस के बाद थाने आ कर अज्ञात हत्यारों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया. इस मामले की जांच अतिरिक्त थानाप्रभारी राजीव रंजन को सौंपी.

इंसपेक्टर राजीव रंजन ने इस हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने के लिए संभावित सुराग की तलाश में दोबारा घटनास्थल का निरीक्षण किया. उन्होंने मृतक के बेटे संजय वर्मा और वहां रहने वाले पड़ोसियों से काफी देर तक पूछताछ की. पड़ोसी विजय ने बताया कि उन्होंने आखिरी बार मदनमोहन वर्मा को 20 जुलाई की रात साढ़े 10 बजे कमरे के बाहर देखा था.

संजय ने उन्हें बताया था कि उस के पिता शुरू से ही अलग मिजाज के व्यक्ति थे. घर के लोगों में वह ज्यादा रुचि नहीं लेते थे. रिटायरमेंट के बाद बेटे और बहुओं के होते हुए भी वह यहां भजनपुरा में अलग रहते थे. उन की देखभाल करने नौकरानी चंपा आती थी. वह घर की साफसफाई, खाना बनाने के साथ उन के कपड़े भी धोती थी.

society

नौकरानी चंपा का जिक्र आते ही इंसपेक्टर राजीव रंजन उस में रुचि लेने लगे. उन्होंने विजय को थाने में बुला कर पुन: पूछताछ की. उन्होंने नौकरानी के स्वभाव और उस के मदनमोहन के यहां आने और घर जाने के समय के बारे में पूछा. विजय ने बताया कि चंपा मदनमोहन वर्मा के काफी करीब थी. जिस दिन से उन के दरवाजे के बाहर ताला लगा था, पिछली रात को नौकरानी चंपा के जवान बेटे प्रेमनाथ को एक अन्य लड़के के साथ मकान के नीचे टहलते देखा था.

इंसपेक्टर राजीव रंजन विजय से चंपा का पता हासिल कर वह करावलनगर स्थित उस के घर पहुंच गए. चंपा और उस का पति कल्लन घर पर ही मिल गए. इंसपेक्टर राजीव रंजन ने चंपा से पूछताछ की तो उस ने बताया, ‘‘कल सुबह मदनमोहन वर्मा के यहां काम करने गई थी, लेकिन कमरे का दरवाजा बंद होने के कारण लौट आई थी.’’

उस वक्त चंपा का बेटा प्रेमनाथ घर पर मौजूद नहीं था. राजीव रंजन चंपा से उस के बेटे का मोबाइल नंबर ले कर थाने आ गए. अगले दिन जब पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई तो पता चला कि मदनमोहन का पहले गला घोंटा गया था, उस के बाद में सिर पर घातक चोट पहुंचाई गई थी. इस से इंसपेक्टर राजीव रंजन सोचने लगे कि ऐसी क्रूर हरकत तो कोई दुश्मन ही कर सकता है. यह दुश्मन कौन हो सकता है?

जांच में पुलिस को पता चला था कि सरकारी नौकरी के रिटायर होने के बाद का सारा पैसा मदनमोहन के बैंक एकाउंट में जमा था. वह किसी से पैसा न तो उधार लेते थे और न ही किसी को देते थे. और तो और, बेटों को भी उन्होंने उस में से कोई रकम नहीं दी थी. राजीव रंजन ने चंपा के बेटे प्रेमनाथ का नंबर मिलाया तो वह स्विच्ड औफ मिला. इस से उन्हें उस पर शक हुआ. उस का नंबर सर्विलांस पर लगाने और काल डिटेल्स रिपोर्ट निकलवाने पर पता चला कि घटना वाली रात उस के फोन की लोकेशन उसी इलाके की थी, जहां मदनमोहन वर्मा रहते थे.

फिलहाल उस की लोकेशन उत्तर प्रदेश के मथुरा शहर की थी. प्रेमनाथ के बारे में गुप्तरूप से पता किया गया तो जानकारी मिली कि वह नशेड़ी होने के साथसाथ एक बार जेल भी जा चुका था. भजनपुरा थाने की एक पुलिस टीम प्रेमनाथ की तलाश में मथुरा भेजी गई. पुलिस टीम मथुरा पहुंची तो खबर मिली कि प्रेमनाथ दिल्ली चला गया है. पुलिस ने 24 जुलाई को मुखबिर की सूचना पर प्रेमनाथ को करावलनगर, दिल्ली के कजरी चौक से हिरासत में ले लिया.

थाने में जब उस से सख्ती से पूछताछ की गई तो उस ने स्वीकार कर लिया कि उसी ने अपने एक दोस्त के साथ मिल कर मदनमोहन वर्मा की हत्या की थी. उस ने हत्या की जो वजह बताई, वह इस प्रकार थी— मदनमोहन वर्मा सपरिवार दिल्ली के सफदरजंग एनक्लेव के पास हुमायूंपुर में रहते थे. उन का भरापूरा परिवार था. उन के परिवार में पत्नी यशोधरा के अलावा 3 बेटे और एक बेटी थी. बड़ा बेटा संजय वर्मा है, जो दिल्ली की एक प्राइवेट फर्म में नौकरी करता है.

मदनमोहन वर्मा मिंटो रोड स्थित गवर्नमेंट प्रैस में नौकरी करते थे. अच्छे पद पर होने की वजह से उन के घर की आर्थिक स्थिति ठीकठाक थी. घर में सब कुछ होने के बावजूद वह परिवार के सदस्यों में कम रुचि लेते थे. पत्नी यशोधरा से भी उन का रिश्ता बहुत अच्छा नहीं था. दांपत्य जीवन में पति की बेरुखी यशोधरा को हमेशा परेशान करती रही. वह चाहती थीं कि पति घरपरिवार की जरूरतों को समझें. बेटों के सुखदुख के मौके पर उन का साथ दें. पर उन की यह ख्वाहिश कभी पूरी नहीं हो सकी. आखिरकार पति की बेजा हरकतों और दांपत्य जीवन की कड़वाहट से तंग आ कर 4 साल पहले उन्होंने अपने कमरे में पंखे से लटक कर आत्महत्या कर ली.

उन की मौत के बाद मदनमोहन वर्मा ने घरेलू कामकाज के लिए नौकरानी चंपा को 9 हजार रुपए वेतन पर रख लिया. गोरे रंग और भरे बदन की चंपा की उम्र करीब 35 साल थी. वह सुबह 9 बजे उन के घर आती और सारा काम निपटा कर शाम को अपने घर चली जाती. चंपा के काम से घर के सारे सदस्य संतुष्ट थे. कभीकभार चंपा को रुपएपैसों की जरूरत होती तो मनमोहन उस की मदद कर देते थे. बाद में वह चंपा पर कुछ ज्यादा ही मेहरबान हो गए. वह उस से कुछ ज्यादा ही हमदर्दी जताने लगे. चंपा भी अपने मालिक के दयालु स्वभाव से खुश थी.

जिस दिन मदनमोहन औफिस से जल्दी घर आ जाते या उन की छुट्टी होती तो चंपा बहुत खुश रहती. वह पूरे दिन उन के आसपास ही मंडराती रहती. घर के सदस्यों को चंपा की ये हरकतें नागवार गुजरने लगीं. संजय ने चंपा से साफ कह दिया कि वह पापा के कमरे में ज्यादा न जाया करे. चंपा को नौकरी करनी थी, इसलिए उस ने संजय की बात मानते हुए उन के कमरे में आनाजाना कम कर दिया. मदनमोहन को इस बात का पता नहीं था कि चंपा को उन के  कमरे में आने के लिए रोक दिया गया है.

जब मदनमोहन को महसूस हुआ कि चंपा उन से दूर रहने लगी है तो एक दिन उन्होंने उस से पूछ लिया. तब चंपा ने बताया, ‘‘आप के बेटे और बहुओं की नाराजगी की वजह से मैं ने यह दूरी बनाई है.’’

चंपा की बात सुन कर मदनमोहन वर्मा को अपने परिवार वालों पर गुस्सा बहुत आया. वह अपने घर वालों के प्रति और कठोर हो गए. करीब 1 साल पहले जब वह रिटायर हुए तो उन्होंने घर में यह कह कर सब को चौंका दिया कि अब वह उन लोगों से अलग भजनपुरा में अकेले ही रहेंगे. उन्होंने भजनपुरा में किराए पर कमरा ले भी लिया. रिटायरमेंट के बाद उन्हें करीब 20 लाख रुपए मिले थे. इस में से उन्होंने अपने बेटों को कुछ भी नहीं दिया, जबकि तीनों बेटों और बहुओं को उम्मीद थी कि ससुर के रिटायरमेंट के बाद जो पैसे मिलेंगे, उस में से कुछ उन्हें भी मिलेंगे.

मदनमोहन का तुगलकी फैसला सुन कर बेटों ने उन्हें समझाने की कोशिश की, पर उन के दिमाग में तो कुछ और ही खिचड़ी पक रही थी. दरअसल, उन के दिमाग में चंपा का यौवन मचल रहा था. अब वह अपनी बाकी की जिंदगी चंपा के साथ गुजारना चाहते थे. चंपा की खातिर उन्होंने खून के सभी रिश्तेनातों को दूर कर दिया. इस उम्र में मदनमोहन के इस फैसले से उन के बेटों की कितनी बदनामी होगी, इस बात की भी उन्हें परवाह नहीं थी. उन्होंने किसी की एक नहीं सुनी और बेटों का साथ छोड़ कर भजनपुरा के सी-ब्लौक में कमरा ले कर अकेले रहने लगे.

चंपा भजनपुरा के पास स्थित करावलनगर में रहती थी. उस के परिवार में पति कल्लन के अलावा बेटे भी थे. मूलरूप से मथुरा का रहने वाला कल्लन कामचोर प्रवृत्ति का था. हरामखोर कल्लन बीवी की कमाई पर ऐश कर रहा था. जब कभी उसे पैसों की जरूरत होती, वह चंपा को ही मालिक से कर्ज मांगने के लिए उकसाता था. अब चंपा रोज सुबह मदनमोहन के भजनपुरा स्थित कमरे पर आती और सारा दिन वहां का काम निपटा कर शाम को घर जाती थी. कुछ दिनों तक तो ऐसे ही चला, पर जब वह रात में भी वह मदनमोहन के कमरे में रुकने लगी तो आसपड़ोस के लोगों के बीच उन के रिश्तों को ले कर तरहतरह की चर्चाएं होने लगीं.

कुछ लोगों ने उस के पति कल्लन को भी उस की हरकतों की जानकारी दी, पर कल्लन को तो पहले से ही सब कुछ पता था. इसलिए उस ने लोगों की बातों को अनसुना कर दिया. इस तरह चंपा और मदनमोहन मौजमस्ती करते रहे. धीरेधीरे चंपा के पड़ोसियों को भी पता चल गया कि चंपा ने किसी बुड्ढे को फांस लिया है. इस के बाद चंपा और मदनमोहन की चर्चा चंपा के मोहल्ले में होने लगी. चंपा का बेटा प्रेमनाथ 21 साल का हो चुका था. वह अब कोई बच्चा नहीं था, जो मोहल्ले के लोगों की बातों को न समझता.

कोईकोई तो उसे यह तक कह देता कि तेरे 2-2 बाप हैं. प्रेमनाथ कुछ करताधरता नहीं था. साथियों के साथ गांजा और कई अन्य नशे करता था. वह अपनी मां के मदनमोहन वर्मा की रखैल होने के ताने सुनसुन कर परेशान रहने लगा था. धीरेधीरे बात बरदाश्त से बाहर होती जा रही थी. एक दिन तो एक दोस्त ने उस पर तंज कसते हुए कहा, ‘‘अरे तुझे कामधंधे की क्या चिंता है, तेरे तो 2-2 बाप हैं. तुझे भला किस बात की कमी है?’’

दोस्त की यह बात प्रेमनाथ के कलेजे में नश्तर की तरह चुभी. जवानी का खून उबाल मारने लगा. उस ने अपने एक नाबालिग दोस्त सुमित (बदला हुआ नाम) को अपना सारा दर्द बताते हुए कहा, ‘‘सारे फसाद की जड़ बुड्ढा मदनमोहन वर्मा है. उसी के कारण लोग मुझे ताना देते हैं. अगर तुम मेरा साथ दो तो मैं आज ही उसे ठिकाने लगा दूं. इस उम्र की दोस्ती बड़ी खतरनाक होती है. दोस्त का दुख अपना दुख होता है. प्रेमनाथ की बात सुन कर सुमित उस का साथ देने को तैयार हो गया. 20 जुलाई, 2017 की रात दोनों दोस्त पूर्व नियोजित योजना के अनुसार, मदनमोहन के घर के आसपास तब तक चक्कर लगाते रहे जब तक कि वहां लोगों की लाइटें बंद नहीं हो गईं.

सड़क से मदनमोहन का कमरा साफ दिखाई देता था. जब मदनमोहन के पड़ोसी कमरा बंद कर के सोने चले गए तो दोनों नशा कर के सीढि़यों से तीसरी मंजिल स्थित मदनमोहन के कमरे के सामने पहुंच गए. उस रात अत्याधिक गरमी होने के कारण मदनमोहन ने कमरे का दरवाजा खोल दिया था. वह सोने की तैयारी में थे. वह प्रेमनाथ को जानते थे, क्योंकि 2-3 बार वह मां के साथ उन के कमरे पर आ चुका था. इतनी रात को प्रेमनाथ को अपने कमरे के बाहर देख कर मदनमोहन कांप उठे. हिम्मत जुटा कर उन्होंने उसे बाहर जाने के लिए को कहा. लेकिन प्रेमनाथ और सुमित ने 61 साल के मदनमोहन वर्मा को संभलने का मौका दिए बगैर साथ लाया अंगौछा उस की गरदन में लपेट कर दोनों ने पूरी ताकत से कस दिया.

मदनमोहन ने बचने के लिए हाथपांव मारे, लेकिन उन की कोशिश नाकाम रही. कुछ ही देर में उन की मौत हो गई. वह जीवित न बच जाएं, इसलिए प्रेमनाथ ने वहां पड़ा डंडा उठा कर उन के सिर पर मारा, जिस से सिर से खून बहने लगा. इतना करने के बाद उन्होंने लाश को कमरे में रखे एक कार्टून में बंद कर के उसे दीवान के बौक्स में रख दिया और बाहर आ गए. प्रेमनाथ ने दरवाजे में ताला लगाया और नीचे उतर कर दोनों फरार हो गए.

अतिरिक्त थानाप्रभारी राजीव रंजन ने पूछताछ के बाद प्रेमनाथ को 25 जुलाई को अदालत में पेश कर एक दिन के रिमांड पर लिया. रिमांड अवधि में उस से वह अंगौछा भी बरामद कर लिया गया, जिस से मदनमोहन वर्मा का गला घोंटा गया था. रिमांड अवधि समाप्त होने के बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. अगले दिन पुलिस ने उस के साथी सुमित को भी गिरफ्तार कर उसे बाल न्यायालय में पेश कर उसे बाल सुधार गृह भेज दिया. Delhi News

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Love Crime : अकाउंटेंट पर फेंका प्यार का जाल

Love Crime : मध्य प्रदेश के धार जिले में एक औद्योगिक इलाका है पीथमपुर. वहां हजारों की संख्या में छोटीबड़ी कंपनियां और फैक्ट्रियां हैं. उन में एमएसएमई की 1100 इकाइयों में करीब 40 हजार लोग काम करते हैं. इस कारण इलाके में काफी गहमागहमी बनी रहती है.

रोजगार के लिए दूसरे जिलों से आए हुए लोग भी वहां काम करते हैं. फाइनैंस कंपनियां भी हैं. यहीं पर स्थित एक बड़ी फाइनैंस कंपनी में काम करने वाला युवक रूपेश बिरला भी था. वह खरगोन के सेलदा गांव का निवासी था, लेकिन पीथमपुर में अपने परिवार के साथ रह रहा था. उस के 11 अक्तूबर, 2022 को शाम तक वापस घर नहीं लौटने पर घर वाले चिंतित हो गए थे. जब वह देर रात तक नहीं आया, तब उस के पिता पीथमपुर के सेक्टर-1 थाने गए.

उन्होंने उस वक्त थाने में मौजूद टीआई लोकेंद्र सिंह भदौरिया से बेटे के गायब होने की शिकायत की. टीआई भदौरिया ने उन से सुबह तक इंतजार करने को कहा, जबकि रूपेश के पिता ने अगवा कर उस की हत्या की आशंका जताई. भदौरिया ने उस वक्त रूपेश के पिता की शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया, क्योंकि इस तरह की शिकायतें वहां के लिए कोई नई नहीं थीं. उन्होंने किसी दोस्त के यहां उस के रात में ठहर जाने की बात कह कर पिता को थाने से भेज दिया.

उन के थाने से जाने के बाद भदौरिया सोच में पड़ गए कि आखिर उस के पिता ने रूपेश की हत्या की बात क्यों कही? उस के अपहरण के बारे में जिक्र क्यों किया? रूपेश एक बड़ी फाइनैंस कंपनी में वसूली का काम करता था, उस सिलसिले में कहीं उसे पहले से कोई धमकी वगैरह तो नहीं मिली. इन्हीं सवालों में उलझते हुए उस बारे में उन्होंने सुबह काररवाई करने का मन बना लिया. 12 अक्तूबर की सुबह कोई साढ़े 6 बजे का समय था.

भदौरिया अपने सहकर्मी को रात की शिकायत के बारे में कुछ आवश्यक निर्देश दे रहे थे, तभी एक युवती वहां आई. उसे देखते ही भदौरिया पहचान गए बोले,‘‘तुम तो वही हो न! क्या नाम बताया था?’’

‘‘जी राजी,’’ युवती बोली.

‘‘हां, तुम 2 दिन पहले भी आई थी. तुम्हारा केस तो दर्ज हो गया है. उस पर जल्द काररवाई भी शुरू होने वाली है. अब देखो, जिस के खिलाफ तुम ने छेड़छाड़ की शिकायत की है, वह कांग्रेस पार्टी का एक स्थानीय नेता है. इलाके का दबंग है. …और तुम उसी की कंपनी में अकाउंटेंट भी हो.’’ भदौरिया बोले.

‘‘हां सर, लेकिन आज मैं उस बारे में नहीं, बल्कि अपने प्रेमी को लापता किए जाने की शिकायत ले कर आई हूं.’’ राजी बोली.

‘‘प्रेमी? कभी तुम छेड़छाड़ की बात करती हो और अब तुम्हारा प्रेमी निकल आया?’’ भदौरिया ने सवाल किया.

‘‘जी सर, उसी प्रेमी के चलते तो मैं छेड़छाड़ की शिकार हुई. मुझे परेशान करने वाले मालिक आशिक पटेल को मालूम हो गया था कि मैं रूपेश बिरला से प्रेम करती हूं. तब उस ने मुझे नौकरी से भी निकाल दिया है. अब कहां वह मुझ से दुगनी से भी अधिक उम्र का शादीशुदा आदमी और कहां मेरा 25-26 साल का रूपेश,’’ राजी बोली.

‘‘क्या नाम बताया तुम ने, रूपेश बिरला?’’ भदौरिया ने पूछा.

‘‘हां, रूपेश बिरला. क्यों कोई बात है क्या?’’ राजी ने भी आश्चर्य से पूछा.

‘‘इस के लापता होने की शिकायत ले कर बीती रात उस के पिता आए थे. बताया कि वह एक फाइनैंस कंपनी में काम करता है?’’ भदौरिया बोले.

‘‘हांहां, वह फाइनैंस कंपनी में काम करता है. हम दोनों 3 साल से प्यार करते हैं. इसी साल शादी भी करने वाले हैं. लेकिन सर!’’

‘‘लेकिन क्या?’’

‘‘रूपेश को मेरे मालिक आशिक ने अगवा कर उस की हत्या करवा दी है.’’ राजी दावे के साथ बोली.

‘‘यह तुम इतने दावे के साथ कैसे कह सकती हो?’’ टीआई भदौरिया ने सवाल किया.

‘‘उस का मेरे पास यह सबूत है. देखिए मेरे मोबाइल में औडियो रिकौर्ड है, आप भी सुनिए.’’ यह कहती हुई राजी ने अपने मोबाइल की गैलरी से कुछ सेकेंड का औडियो प्ले कर दिया. औडियो सुन कर भदौरिया दंग रह गए. उस में आशिक पटेल की आवाज थी. वह राजी को धमकी देता हुआ बोल रहा था कि रूपेश से संबंध तोड़ ले, वरना वह उस के साथसाथ परिवार को भी खत्म कर देगा.’’

यह सुनने के बाद उन्होंने तुरंत आशिक के खिलाफ काररवाई करने की तैयारी शुरू कर दी. वह इतना तो समझ ही गए थे कि एक काररवाई से ही रात की शिकायत का भी समाधान निकल आएगा. उन्होंने राजी को किए गए काल की रिकौर्डिंग के हवाले से मामले को गंभीरता से लिया. उन्होंने इस की पूरी जानकारी धार के एसपी आदित्य प्रताप सिंह, एएसपी देवेंद्र पाटीदार एवं सीएसपी तरुणेंद्र बघेल को देने के बाद आरोपी आशिक पटेल को पूछताछ के लिए थाने बुलवाया. वास्तव में आशिक पटेल पर पुलिस के लिए हाथ डालना आसान नहीं था, लेकिन भदौरिया के पास पूछताछ के लिए एक छोटा सा सबूत मिल चुका था.

आशिक पटेल कांग्रेस का नेता था. उस के पिता अल्लानूर पटेल पूर्व में धन्नड़ के सरपंच भी रह चुके हैं. खुद आशिक भी मध्य प्रदेश असंगठित कामगार एवं कर्मचारी संघ का उपाध्यक्ष था. आशिक ने अपनी राजनीतिक पहचान का फायदा उठा कर सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण कर रखा था. उस पर तिमंजिला इमारत बना रखी थी, जिस में 250 कमरे थे, जो उस ने किराए पर दे रखे थे. अधिकतर किराएदार मजदूर वर्ग और कंपनियों में काम करने वाले छोटे कर्मचारी ही थे. उन पर वह अपना दबदबा बनाए रखता था.

किराए से उस की लाखों की कमाई होती थी और वहां रहने वालों को वोट बैंक के तौर पर इस्तेमाल कर राजनीतिक रुतबा बना रखा था. इन किराएदारों के दम पर नगर पालिका चुनावों में पार्षद की जीतहार तय करना उस के लिए आसान काम था. उस ने करीब 35 हजार वर्गफीट सरकारी जमीन पर कब्जा कर रखा था. आशिक पटेल की कंपनी में राजी नाम की एक युवती अकाउंटेंट का काम करती थी. वह बहुत सुंदर और होशियार थी. आशिक उस से प्यार करने लगा. हालांकि यह उस का एकतरफा प्यार ही था. कारण, राजी उस के बेटे की उम्र की थी और वह रूपेश बिरला से प्यार करती थी.

जब इस की जानकारी आशिक पटेल को हुई तब वह गुस्से से भर गया. भीतर ही भीतर जलभुन गया. रूपेश को तो कुछ कह नहीं सकता था, लेकिन राजी पर उस से संबंध खत्म करने के लिए दबाव जरूर बना सकता था. उस ने ऐसा ही किया. पहले उस ने राजी को बातों से समझाया, उस का वेतन दोगुना करने तक का लालच दिया. फिर भी राजी जब नहीं मानी, तब उस ने उसे धमकियां देनी शुरू कर दीं. ऊब कर राजी ने नौकरी छोड़ दी. उस के बाद तो आशिक और भी बौखला गया. एक दिन उस ने राजी को फोन किया. पहले तो उस ने राजी को प्यार से समझाने की कोशिश की. राजी ने सिरे से इंकार कर दिया. उस ने दोटूक जवाब दे दिया कि वह किसी भी सूरत में अपने प्रेमी को धोखा नहीं दे सकती.

यह सुनते ही आशिक गुस्से में आ गया और अपनी ताकत का हवाला देते हुए रूपेश को मरवा देने की धमकी दे डाली. संयोग से राजी ने मोबाइल में इस काल की रिकौर्डिंग कर ली थी. उसी काल के आधार पर पुलिस ने आशिक पटेल से सख्ती से पूछताछ की. जब पुलिस ने उसे रिकौर्डिंग सुनाई, तब उस ने रूपेश की हत्या करवाने की बात कुबूल कर ली. उस ने हत्याकांड को कैसे अंजाम दिया, इस की भी जानकारी दी. आशिक ने बताया कि रूपेश की हत्या में उस के 5 दोस्त भी शामिल थे.

उस की निशानदेही पर पुलिस ने उन पांचों आरोपियों को थाने ला कर पूछताछ की. आरोपियों ने बताया कि उन्होंने रूपेश के शव को कालोनी में नाले के किनारे दफना दिया था. शव जल्दी गल कर नष्ट हो जाए, इस के लिए लाश के ऊपर 15 किलोग्राम नमक डाला, मिट्टी और घासफूस डाल कर उस जगह को सीमेंट कंक्रीट से पक्का कर दिया था. मामले की तहकीकात पूरी होने के बाद एसपी आदित्य प्रताप सिंह ने सभी 6 आरोपियों अखिलेश मिश्रा, अंकुश दुबे, सुरेंद्र सिंह ठाकुर, कालू उर्फ दीपक मंडल, रवि मंडल, आशिक पटेल को गिरफ्तार कर उन के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया.

जैसे ही पुलिस और प्रशासन को मालूम हुआ कि आशिक पटेल रूपेश बिरला हत्याकांड का मास्टरमाइंड है, वैसे ही उस के ठिकाने पर प्रशासनिक काररवाई शुरू कर दी गई. इस सिलसिले में अवैध कब्जे की जमीन पर बनी बिल्डिंग पर बुलडोजर चला दिया गया. कुल 250 कमरे वाले 3 मंजिला इमारत को जमींदोज करने में 2 दिन लगे. प्रशासन ने नगर निगम से 10 जेसीबी और बड़ी पोकलेन मशीनें मंगवा कर अतिक्रमण तोड़ा. आशिक द्वारा कब्जाई जमीन की कीमत लगभग 10 करोड़ रुपए आंकी गई. बिल्डिंग तोड़े जाने से पहले सभी परिवारों को शिफ्ट किया गया. यह जिले की सब से बड़ी काररवाई थी.

मुख्य आरोपी आशिक पटेल के साम्राज्य को ध्वस्त करने के दरम्यान एक अन्य आरोपी अखिलेश मिश्रा की गुमटी को भी हटा दिया गया. पुलिस रिकौर्ड में आशिक पटेल के खिलाफ पहले भी एक हत्या समेत 5 अन्य मामले दर्ज थे. इस मामले की 2 दिनों के भीतर ही जांच पूरी होने पर एसपी आदित्य प्रताप सिंह ने सीएसपी तरुणेंद्र सिंह बघेल और टीआई लोकेश सिंह भदौरिया सहित पूरी टीम के काम की तारीफ की. Love Crime

Hindi Story : श्वेता और इंद्रनील की दोस्ती में रिश्ते का क्या हुआ आखिर अंजाम

Hindi Story : औफिस में लंच के समय श्वेता ने व्हाट्सऐप संदेश देखा ‘‘आज शाम 6 बजे,’’ श्वेता ने तुरंत उत्तर दे दिया. ‘‘ठीक है,’’ औफिस से 6 बजे श्वेता नीचे उतरी, इंद्रनील उस का इंतजार कर रहा था. दोनों पैदल समीप के मौल की ओर बातें करते हुए चल दिए जहां कौफीहाउस में एक कोने की सीट पर बैठ कर कौफी पीने लगे. इंद्रनील आज चुप था, वह श्वेता की ओर न देख कर विपरीत दिशा में देख रहा था.

‘‘क्या बात है इंद्रनील, उधर क्या देख रहे हो?’’

‘‘कुछ नहीं, बस यों ही.’’

‘‘चुप भी हो?’’

श्वेता के पूछने पर इंद्रनील चुप रहा.

‘‘कौफी भी नहीं पी रहे हो. टकटकी लगा कर उधर देखे जा रहे हो. कौन है वहां?’’

इंद्रनील ने अब श्वेता की ओर देखा और धीरे से कहा ‘‘श्वेता अब विदा होने का समय आ गया है.’’

‘‘समझी नहीं?’’

‘‘मैं दिल्ली छोड़ कर वापस कोलकाता जा रहा हूं,’’ इंद्रनील ने श्वेता की ओर पहली बार देखते हुए कहा.

‘‘क्या सदा के लिए?’’ श्वेता कुछ उदास हो गई.

‘‘हां तभी तुम से कह रहा हूं. शायद आज अंतिम बार मिलना हो, मैं कुल सुबह कोलकाता रवाना हो रहा हूं.’’

‘‘इतनी जल्दी?’’

‘‘हां सब अचानक से हो गया और निर्णय भी तुरंत ही लेना पड़ा.’’

‘‘श्वेता मैं ने नौकरी छोड़ दी है. आज मेरा अंतिम दिन था. सब को अलविदा कहा. बिना तुम से मिले कैसे जा सकता हूं. एक तुम ही तो हो जिस के साथ हर सुख और दुख सांझा किया है.’’

‘‘पहले बता देते?’’ श्वेता के इस प्रश्न पर इंद्रनील भावुक हो गया.

‘‘बस 10-12 दिनों में घटनाक्रम इतनी तेजी से घूमा कि तुम से बात नहीं कर सका.’’

‘‘कुछ बताओ, दिल पर पड़ा बोझ हलका हो जाएगा,’’ श्वेत ने इंद्रनील से कहा.

‘‘श्वेता पिछले महीने श्यामली की मृत्यु हो गई.’’

‘‘तुम ने बताया ही नहीं?’’

‘‘मुझे भी नहीं मालूम था. कोई 12 दिन पहले श्यामली की चाची ने अस्पताल में दोनों बच्चों सुब्रता और सांवली को मेरी मां के हवाले कर दिया. बच्चों की खातिर ही दिल्ली छोड़ कोलकाता जा रहा हूं,’’ कह कर इंद्रनील चुप हो गया.

इंद्रनील और श्वेता कौफी के घूंट पीते हुए अतीत में चले गए… श्वेता और इंद्रनील पिछले लगभग 10 वर्षों से मित्र हैं. दोनों की उम्र लगभग 40 के आसपास है. श्वेता 10 वर्ष पहले जब औफिस में काम करने पहली बार आईर् थी तब इंद्रनील के साथ वाली सीट पर बैठ कर काम करना आरंभ किया. साथसाथ बैठ कर काम करतेकरते दोनों घनिष्ठ मित्र बन गए. दोनों में एक बात समान थी कि दोनों उस समय तलाकशुदा थे.

श्वेता का एक 4 वर्ष का पुत्र जिस का नाम शौर्य था और अपने मातापिता के संग रह रही थी. इंद्रनील कोलकाता का रहने वाला था और वह भी तलाकशुदा था उस के 2 बच्चे थे 4 वर्षीय पुत्र सुब्रता और 2 वर्षीय पुत्री सांवली. तलाक के समय छोटे बच्चों की परवरिश मां को मिली. इंद्रनील कोलकाता से दिल्ली आ गया.

कभीकभी जब कोलकाता जाता तब बच्चों से मिलता. शुरूशुरू में बच्चों से मिलना लगा रहा फिर बच्चे भी कभीकभी मिलने वाले पिता से घुलमिल नहीं सके और इंद्रनील ने बच्चों से मिलना छोड़ दिया.

कुछ यही हाल श्वेता का भी था. वह शौर्य को अपने पिता के साए से दूर रखना चाहती थी और 2 वर्ष बाद दूर हो ही गया. श्वेता की समस्या उस का पुत्र था जिस कारण उस का दूसरा विवाह नहीं हुआ. उस के मातापिता तो दूसरा विवाह चाहते थे, लेकिन सामाजिक बेडि़यों ने एक बच्चे वाली मां का दूसरा विवाह नहीं होने दिया. इंद्रनील ने एक बार दूसरा विवाह करने की सोची, लेकिन पुराने कटु अनुभव ने उसे रोक लिया.

10 मिनट बाद पुरानी यादों के चलते नम आंखों के साथ वर्तमान में आ गए और  कौफीहाउस से बाहर मौल में चहलकदमी करने लगे. एक दुकान के अंदर श्वेता इंद्रनील के लिए शर्ट पसंद करने लगी और इंद्रनील श्वेता के लिए साड़ी पसंद करने लगा. एकदूसरे के लिए शायद अंतिम उपहार उन दोनों ने खरीदा था. आज कोई बात नहीं हो रही थी सिर्फ एकदूसरे की आंखों में आंखें डाल कर दिल की बात कह और सुन रहे थे. मौल से बाहर आने पर श्वेता ने शर्ट का पैकेट इंद्रनील को दिया, ‘‘इंद्र फिर कब मिलना होगा?’’

इंद्रनील ने साड़ी का पैकेट श्वेता को देते हुए जवाब दिया, ‘‘मुझे स्वयं नहीं मालूम… फोन करूंगा.’’

बाय कह कर इंद्रनील और श्वेता अपनेअपने घर की ओर चल दिए. इंद्रनील ने सुबह की गाड़ी पकड़नी थी, इसलिए उस ने सारा सामान पैक कर रखा था, लेकिन उस की आंखों से नींद नदारद थी… 10 वर्ष से उस की श्वेता से पहचान है. श्वेता से वह औफिस में ही मिलता था और औफिस से बाहर सिनेमा भी देखते थे, मौल भी घूमते थे और अकसर इंडिया गेट के लौन या पुराना किला के अंदर दीवार के साथ बैठ कर बातें करते थे.

इंद्रनील किराए के कमरे में रहता था और कभी भी श्वेता को अपने कमरे में ले कर नहीं गया. वह श्वेता पर किसी भी तरह का लांछन नहीं लगने देना चाहता था उस का मकान मालिक या पड़ोसी श्वेता और उस के रिश्ते पर कोई उंगली उठाए. ठीक उसी तरह वह कभी भी श्वेता के घर नहीं गया कि कहीं श्वेता का परिवार, रिश्तेदार, पड़ोसी उन की मित्रता को गलत समझें.

इन 10 वर्षों में उन दोनों का रिश्ता सिर्फ भावनात्मक ही रहा. वे दोनों कभी भी नहीं बहके और लक्ष्मण रेखा को नहीं लांघे. औफिस में उन की नजदीकियों पर सहकर्मी उपहास करते थे, लेकिन यह अधिक समय नहीं रहा क्योंकि 1 वर्र्ष बाद इंद्रनील ने नौकरी बदल ली और औफिस के बाद या अवकाश के समय ही मिलते थे. 10 वर्षों में इंद्रनील और श्वेता ने कई नौकरियां बदलीं, लेकिन एक अनोखा भावनात्मक रिश्ता मजबूत होता गया.

श्वेता की भी नींद नदारद थी. वह इंद्रनील के बारे में सोचती रही कि दोनों एकदूसरे के नजदीक होते हुए भी दूर रहे. एक खयालात, एक सोच लेकिन एक नहीं हुए. पिछले 10 वर्षों से वे दोनों कहें तो दोहरी जिंदगी जी रहे थे.

इंद्रनील कोलकाता चला गया और श्वेता औफिस के बाद उदास रहने  लगी. पुत्र शौर्य अब 14 वर्ष का हो गया है और पढ़ाई के साथ खेल में व्यस्त रहने लगा है. श्वेता रात को इंद्रनील के बारे में ही सोचती रहती और इंद्रनील श्वेता के बारे में सोचता रहता. इंद्रनील का पुत्र सुब्रता भी अब 14 वर्ष और पुत्री सांवली 12 की हो गई. इंद्रनील कई वर्षों से बच्चों से नहीं मिला था. तलाक के बाद श्यामली अपने मातापिता के संग रह रही थी, लेकिन वे श्यामली से पहले ही दुनिया से कूच कर चुके थे.

श्मामली की मृत्यु पर दोनों बच्चे अकेले रह गए. सड़क दुर्घटना के बाद अस्पताल में श्यामली ने अपने सासससुर को संदेश भिजवाया और बच्चों को अस्पताल में दादादादी को सुपुर्द कर के दुनिया छोड़ गई. मातापिता से सूचना मिलने पर इंद्रनील कोलकाता चला गया. अंतिम समय में श्यामली की आर्थिक स्थिति दयनीय थी और बहुत मुश्किल से गुजरबसर हो रहा था. स्कूल की फीस भी नहीं भरी थी.

इंद्रनील सोचने लगा कि  10 वर्ष पूर्व श्यामली ने तलाक पर एक मुश्त 10 लाख रुपए की रकम ली थी, यदि वह उस रकम को बैंक में फिक्स्ड डिपौजिट पर रखती तब आज इतनी दयनीय स्थिति नहीं होती.

इंद्रनील की कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करे. बच्चे उस के पास थे, लेकिन सहमे हुए क्योंकि वर्षों बाद अपने पिता से मिल रहे थे जिस की उन के मानसपटल पर कोई स्मृति शेष नहीं थी. इंद्रनील ने सब से पहले बच्चों की स्कूल फीस भरी और उन को स्कूल भेजना शुरू किया. श्यामली ने सड़क दुर्घटना के पश्चात अस्पताल में बच्चों को उन के पिता के बारे में बताया और दादादादी के सुपुर्द किया.

कोलकाता आए इंद्रनील को  1 महीना हो  गया. इस 1 महीने में श्वेता और इंद्रनील के बीच कोई बात नहीं हुई. श्वेता ने फोन करने की सोची, लेकिन संयम रखते हुए अपने हाथ खींच लिए. अब उस ने अपना समय पुत्र शौर्य के संग बिताना आरंभ किया. इंद्रनील अपने जीवन में तालमेल नहीं बैठा सका और एक दिन श्वेता को फोन कर ही दिया.

‘‘श्वेता कैसी हो?’’

‘‘तुम बताओ?’’

‘‘चलो एकदूसरे को अपना हाल बता देते हैं.’’

‘‘यह ठीक है इंद्रनील, जीवन का नया पड़ाव कैसा लग रहा है?’’

‘‘श्वेता इन परिस्थितियों के बारे में कभी सोचा नहीं था इसलिए हालात से समन्वय नहीं बन पा रहा है.’’

‘‘इंद्रनील जीवन अनिश्चिता से भरपूर है. भविष्य एक रहस्य है कि कल क्या होगा. हम ने विवाह किया तब यह नहीं सोचा था कि हमारा तलाक होगा लेकिन हुआ. जब हम ने उन परिस्थितियों को जीया तब अब भी जी सकते हैं. थोड़ा समय दिक्कत होती है फिर हम सब नई परिस्थितियों के आदी हो जाते हैं.’’

‘‘श्वेता तुम्हारी दार्शनिक बातें सुन कर मन का बोझ हलका हुआ कि हालात से समझौता करना ही पड़ता है.’’

‘‘इंद्रनील जीवन अपनेआप में ही समझौता है. हर पल समझौता करना होता है. अगर हम यह बात पहले समझ जाते तब हो सकता है कि तलाक ही नहीं होता लेकिन हुआ क्योंकि कहीं न कहीं हमारा अहम टकरा गया और हम पीछे नहीं हटे. जीवन के अनुभवों से ही हम सीखते हैं.’’

‘‘श्वेता मेरी समस्या बच्चों के साथ तालमेल की है. आज वर्षों बाद बच्चे साथ हैं, समझ नहीं आ रहा कि मैं उन के साथ कैसा व्यवहार करूं.’’

‘‘इंद्रनील बच्चे तो तुम्हारे अपने हैं बस अंतर सिर्फ इतना है कि तुम वर्षों बाद बच्चों से मिल रहे हो. समझ लो कि विदेश में रहते थे. अब वापस अपने घर आए हो.’’

‘‘श्वेता तुम तो उदाहरण भी ऐसे देती हो कि मेरे पास कोई उत्तर ही नहीं सिवा इस के कि तुम्हारे सुझाव पर अमल करूं.’’

‘‘इंद्रनील यह महिला दिमाग का कमाल है जो पुरुष दिमाग से सदा आगे रहता है.’’

फोन पर बात समाप्त होने पर शौर्य ने मां श्वेता से पूछा, ‘‘मम्मी किस के साथ बात कर रही थीं? बहुत लंबी बात हो गई?’’

‘‘शौर्य में इंद्रनील से बात कर रही थी. मेरे साथ औफिस में काम करते थे आजकल कोलकाता में रहते हैं. कई बार बात होती रहती है. इन का लड़का भी तुम्हारे जितना बड़ा है 14 वर्ष का.’’

‘‘इंद्रनील अंकल कभी घर नहीं आए… कभी देखा नहीं?’’

पुत्र के इस प्रश्न पर श्वेता को आश्चर्य हुआ कि आज  पहली बार शौर्य उस से ऐसा प्रश्न कर रहा है. अब वह बड़ा हो गया है और दुनिया की ऊंचनीच भी समझने लगा है. फिर चुटकी में अपने भावों को नियंत्रित करते हुए श्वेता ने शौर्य को समझाया कि हमारे औफिस में बहुत कर्मचारी हैं और मैं ने 4 कंपनियों में काम किया, वहां अनेक के साथ मेरी मित्रता रही, लेकिन मैं किसी के घर नहीं जाती थी क्योंकि तुम छोटे थे और औफिस के बाद तुम्हारे साथ समय बिताना मेरी प्राथमिकता रही है इसी कारण मैं किसी को अपने घर भी नहीं बुलाती थी क्योंकि तुम्हें मालूम है कि मेरा और तुम्हारे पापा का 10 वर्ष पूर्व तलाक हुआ था.

‘‘मैं ने तुम्हारी परवरिश को सब से बेहतर रखने की कोशिश की ताकि तुम्हें पिता की कमी महसूस न हो. अब तुम बड़े हो गए हो तुम चाहोगे तब मैं अपने मित्रों को भी घर बुलाऊंगी.’’

‘‘मम्मी मैं तो सिर्फ इसलिए पूछ रहा था क मेरे मित्र घर आते हैं तब आप के क्यों नहीं आते हैं?’’

‘‘वह इसलिए कि तुम मित्रों के संग पढ़ते हो, मेरे मित्र आएंगे तब सिर्फ गपशप होगी और तुम्हारी पढ़ाई में खलल होगा.’’

‘‘कभीकभी तो बुला सकती हो?’’

‘‘अब तुम चाहते हो तब इसी रविवार को अपने मित्रों के संग महफिल सजा दूंगी,’’ श्वेता ने मुसकराते हुए शौर्य से कहा तो शौर्य भी मुसकरा दिया.

खैर शौर्य की मंशा श्वेता समझ गई कि बच्चा अब स्याना हो गया है और रिश्तों के साथ मित्रता की भी अहमियत समझने लगा है. श्वेता ने अपनी तरफ से इंद्रनील को फोन नहीं किया. उसे शायद डर था कि शौर्य उस के इंद्रनील के साथ पवित्र रिश्ते को कहीं गलत न समझ ले कि उस की मां दोहरी जिंदगी जी रही है. उस ने रिश्ते पर पूर्णविराम लगा दिया. इंद्रनील कभीकभी श्वेता से फोन पर बात कर लिया करता था, वह सिर्फ अपने बच्चों से जुड़ने पर ही विमर्श करता था.

इंद्रनील ने कोलकाता में नौकरी कर ली और छुट्टी वाले दिन बच्चों के साथ रहता और उन के साथ घूमने जाता. श्वेता ने इंद्रनील को सलाह दी कि वह बच्चों को आर्थिक संरक्षण प्रदान करने के साथसाथ उन से भावनात्मक रूप से भी जुड़े. इंद्रनील छुट्टी वाले दिन बच्चों के साथ घूमने जाता. धीरेधीरे बच्चे इंद्रनील से जुड़ने लगे. इंद्रनील के बच्चों से जुड़ाव के बाद श्वेता ने इंद्रनील से फोन पर बात भी बंद कर दी.

1 वर्ष बाद सर्दियों की ठंड में श्वेता बालकनी में बैठ कर धूप सेंक रही थी. शौर्य की 10वीं की बोर्ड परीक्षा नजदीक थी. वह भी धूप में श्वेता के नजदीक बैठ कर पढ़ रहा था तभी डोरबैल बजी.

‘‘शौर्य जरा दरवाजा खोलना.’’

‘‘मम्मी मैं पढ़ रहा हूं, आप खोलिए.’’

श्वेता ने दरवाजा खोला, दरवाजे पर इंद्रनील अपने बच्चों सुब्रता और सांवली के संग खड़ा था. वह इंद्रनील को अचानक घर पर बिना किसी सूचना के अपने सामने देख कर अचंभित हो गई. उस का मुख खुला का खुला रह गया.

इंद्रनील ने चुप्पी तोड़ी, ‘‘श्वेता इन से मिलो, सुब्रता और सांवली.’’

‘‘आओ इंद्रनील,’’ श्वेता ने सब को बैठक में बैठा कर शौर्य को आवाज दी, ‘‘शौर्य देखो कौन आया है.’’

‘‘कौन है मम्मी?’’ शौर्य ने बालकनी से ही श्वेता से पूछा.

‘‘इंद्रनील अंकल.’’

इंद्रनील सुनते ही शौर्य बैठक में आ कर बड़ी आत्मीयता से सब से मिला.

सुब्रता और सांवली के एक प्रश्न पर श्वेता चुप रह गई, ‘‘आंटी आप ने पापा से फोन पर बात करना क्यों छोड़ दिया है?’’

श्वेता को इस प्रश्न का उत्तर मालूम था, लेकिन बच्चों को किस तरह से अपने मन की बात समझाए, उस की जबान पर शब्द नहीं आ रहे थे.

‘‘हां मम्मी आप इंद्रनील अंकल को अपने विचारों से अवगत कराती थीं और सुझावों से अंकल को बच्चों से एक कराया फिर क्या हुआ जो आप ने अंकल से बात करनी बंद कर दी?’’

शौर्य की बात का समर्थन करते हुए सुब्रता और सांवली ने भी श्वेता से प्रश्न पूछा, ‘‘आंटी आप के सुझाव और मार्गदर्शन से हम पापा से जुड़ सके और आप ही पापा से जुदा हो गईं. पापा हमारे सामने आप से फोन पर बात करते थे, इसलिए हमारे अनुरोध पर पापा हमें आप से मिलवाने दिल्ली आए हैं.’’

श्वेता ने बात बदलते हुए इंद्रनील से पूछा ‘‘कहां रुके हो?’’

‘‘कंपनी के गैस्टहाउस में रुका हूं. थोड़ा कंपनी का काम भी कर लूंगा और बच्चों के साथ दिल्ली भी घूम लूंगा.’’

बात को दूसरी तरफ घूमता देख सुब्रता और सांवली ने श्वेता को टोका, ‘‘आंटी आप

ने हमारे प्रश्न का उत्तर नहीं दिया.’’

‘‘हां मम्मी मैं भी इस प्रश्न का उत्तर चाहता हूं,’’ शौर्य ने भी मां से पूछा.

‘‘श्वेता मैं भी उत्तर चाहता हूं,’’ इंद्रनील ने भी श्वेता से पूछा.

2 मिनट तक श्वेता चुप रही फिर बोली, ‘‘इंद्रनील तुम तो उत्तर जानते हो. हम और तुम सिर्फ मित्र रहे, एक अच्छे मित्र की भांति हम ने आपस में सुख और दुख साझा किए. हमारी मित्रता इसलिए मजबूत रही क्योंकि हम दोनों तलाकशुदा थे और हमारे बच्चों की उम्र भी एकजैसी थी. जब मैं पहली बार औफिस में इंद्रनील से मिली तब इंद्रनील सुब्रता और सांवली से मिलते रहते थे और उसी तरह शौर्य अपने पिता से. छोटे बच्चों की अच्छी परवरिश हो और उन के मानसपटल पर हमारे तलाक का धब्बा न लगे यही हम दोनों का मुख्य उद्देश्य था.

‘‘श्यामली की मृत्यु के पश्चात जब सुब्रता और सांवली इंद्रनील के जीवन में वापस आए तब तुम किशोरावस्था में पदार्पण कर चुके थे और दुनिया की ऊंचनीच को समझने लगे थे. इस से पहले कि शौर्य मुझे गलत समझे मैं ने दूरी बनानी उचित समझी.’’

श्वेता का उत्तर इंद्रनील को मालूम था कि यही होगा, लेकिन तीनों बच्चे एकसाथ बोले, ‘‘आप मित्र बन कर रहो. मित्रता क्यों तोड़ते हो?’’

‘‘हमने कभी लक्ष्मणरेखा नहीं लांघी है.’’

‘‘हम लक्ष्मण रेख लांघने को नहीं कह रहे हैं. पुरानी मित्रता को कायम रखो.’’

शौर्य ने श्वेता का हाथ पकड़ कर इंद्रनील की ओर बढ़ाया तो सुब्रता ने इंद्रनील का हाथ श्वेता की ओर बढ़ाया.

‘‘सच्ची मित्रता कभी नहीं टूटती है,’’ सांवली ने श्वेता और इंद्रनील का हाथ एक करते हुए कहा.