पुणे जाने के बाद बृजेश और एकता ने कैटरिंग का काम शुरू किया. शुरूशुरू में उन के लिए यह काम कठिन था लेकिन धीरेधीरे सब ठीक हो गया. उन की और परिवार की मेहनत से थोड़े ही दिनों में उन का यह कारोबार चल निकला. उन्होंने पुणे की कई आईटी कंपनियों में अपनी एक खास जगह बना ली थी.
उन कंपनियों के खाने के डिब्बों की जिम्मेदारी उन के ऊपर आ गई थी. उन के खाने में जो टेस्ट था, वह किसी और के डिब्बों में नहीं था.
काम बढ़ा तो पैसा आया और पैसा आया तो उन के परिवार का रहनसहन बदल गया. उन्होंने पुणे के पौश इलाके की धनदीप बिल्डिंग में 3 फ्लैट किराए पर ले लिए. 2 फ्लैट बिल्डिंग की पहली मंजिल पर थे तो एक दूसरी मंजिल पर था. दूसरी मंजिल के फ्लैट को उन्होंने अपना बैडरूम बनाया. पहली मंजिल का एक फ्लैट उन्होंने अपने दोनों बच्चों और पिता के लिए रखा.
दूसरे फ्लैट को उन्होंने खाने का मेस बना लिया. मेस में काम करने के लिए नौकर और नौकरानी भी रख ली थी, जो खाना बनाने और टिफिन तैयार करने का काम किया करते थे. सुबह की चायनाश्ता पूरा परिवार साथसाथ नीचे वाले फ्लैट में करता था.
बृजेश के शादीशुदा होने की जानकारी जब संध्या पुरी को हुई तो उस के पैरों तले से जमीन खिसक गई. क्योंकि वह बृजेश को दिलोजान से चाहती थी. उस ने सपने में भी नहीं सोचा था कि जिस शख्स पर उस ने अपना तन, मन और धन सब कुछ न्यौछावर कर दिया, वह 2 बच्चों का बाप है.
संध्या को इस का बहुत दुख हुआ. वह ऐसे धोखेबाज को सबक सिखाना चाहती थी, लेकिन वह दिल्ली से फरार हो चुका था.
संध्या हार मानने वालों में से नहीं थी. उस ने निश्चय कर लिया कि वह बृजेश भाटी को ढूंढ कर ही रहेगी. इस के लिए भले ही उस के कितने भी पैसे खर्च हो जाएं. लिहाजा वह अपने स्तर से बृजेश को तलाशने लगी.
उस की कोशिश रंग लाई. उसे फरवरी 2017 में पता चल गया कि बृजेश इस समय पुणे में अपने परिवार के साथ रह रहा है. वह उस के पास पुणे चली गई. वहां वह उस के घर वालों से भी मिली. पहले तो बृजेश ने संध्या को पहचानने से इनकार कर दिया लेकिन जब उस ने अपने तेवर दिखाए तो वह लाइन पर आ गया.
संध्या ने जब शादी की बात कही तो उस ने शादी करने से इनकार कर दिया. उस समय बृजेश की पत्नी एकता ने संध्या को बुरी तरह बेइज्जत कर के घर से निकाल दिया था.
इस से नाराज और दुखी हो कर संध्या दिल्ली लौट आई. बृजेश को सबक सिखाने के लिए उस के खिलाफ उत्तम नगर थाने में बलात्कार और धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज करवा दी. रिपोर्ट दर्ज हो जाने के बाद दिल्ली पुलिस ने बृजेश भाटी को पुणे से गिरफ्तार कर तिहाड़ जेल भेज दिया. करीब डेढ़ महीने जेल में रहने के बाद वह जमानत पर बाहर आ गया तो संध्या पुरी ने उस से अपनी कार और पैसों की मांग शुरू कर दी.
इस पर बृजेश भाटी के परिवार वालों और संध्या पुरी में जम कर तकरार हुई थी. तब संध्या ने धमकी दी कि अगर उस की कार और पैसे वापस नहीं मिले तो पूरे परिवार को नहीं छोड़ेगी. भाटी परिवार ने इसे संध्या पुरी की एक कोरी धमकी समझा था.
बृजेश भाटी से छली जा चुकी संध्या पुरी ने भाटी परिवार को सबक सिखाने का फैसला कर लिया. वह उसे साकार करने में जुट गई थी. वह जिस तरह तड़प रही थी, उसी तरह धोखेबाज बृजेश को भी तड़पते देखना चाहती थी. इस काम में उस के एक जानपहचान वाले शख्स ने उस की मदद की. उस ने संध्या को आपराधिक प्रवृत्ति वाले शिवलाल उर्फ शिवा बाबूलाल राव से मिलवाया.
पकड़ में आई हत्या कराने वाली प्रेमिका
संध्या पुरी बृजेश भाटी की पत्नी एकता भाटी की हत्या कराना चाहती थी. इस के लिए उस ने शिवलाल उर्फ शिवा को मोटी सुपारी दी. सुपारी लेने के बाद शिवा अपने बेटे मुकेश उर्फ मोंटी राव के साथ पुणे पहुंच गया.
पुणे आ कर दोनों ने पहले बृजेश भाटी के घर की पूरी रेकी की और घटना के दिन उन्होंने पुणे मार्केट से एक मोटरसाइकिल चुरा ली और सुबहसुबह आ कर एकता भाटी को अपना निशाना बना कर वहां से भाग निकले. वे शहर से बाहर निकल जाना चाहते थे. लेकिन पुलिस के सक्रिय होने से वह पुणे में ही रह गए थे.
उन्हें पता था कि पुणे से शाम साढ़े 5 बजे दिल्ली के लिए झेलम एक्सप्रैस जाती है. इसी ट्रेन से उन्होंने दिल्ली भाग जाना उचित समझा, इसलिए शाम 4 बजे तक उन्होंने सारसबाग के एक होटल में समय बिताया.
फिर वे प्लेटफार्म नंबर 3 पर खड़ी झेलम एक्सप्रैस में चढ़ने को हुए तो उन का सामना पुलिस से हो गया. शिवलाल ने शक होने पर गोली चला दी, जिस से इंसपेक्टर गजानंद पवार घायल हो गए.
शिवलाल उर्फ शिवा बाबूलाल राव और मुकेश उर्फ मोंटी राव से पूछताछ करने के बाद क्राइम ब्रांच की एक टीम संध्या पुरी को गिरफ्तार करने दिल्ली निकल गई. 26 नवंबर, 2018 को दिल्ली में उत्तम नगर पुलिस की सहायता से संध्या पुरी को भी गिरफ्तार कर लिया. पुलिस संध्या को पुणे ले गई.
पूछताछ के बाद संध्या पुरी ने पूरी कहानी बता दी.॒पुलिस ने संध्या पुरी, शिवलाल और उस के बेटे मुकेश उर्फ मोंटी को कोर्ट में पेश कर के यरवदा जेल भेज दिया. कथा लिखे जाने तक तीनों अभियुक्त जेल में बंद थे. आगे की जांच चंदन नगर थानाप्रभारी राजेंद्र मुलिक कर रहे थे.
–कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित


