Family Crime News : यूट्यूबर कंचन पर निहंगों का चाबुक

Family Crime News : लुधियाना की कंचन कुमारी सोशल मीडिया पर कमल कौर भाभी के नाम से मशहूर थी. उस के रील्स की सनसनी गजब की थी. लाखों फालोअर्स पंजाब से ले कर विदेशों तक के थे. हर रील पर मिले कमेंट में तारीफों के पुल बंधे होते थे तो भद्दी गालियां और धमकियां तक होती थीं. उस का कत्ल हो गया. उसे किस ने और क्यों मारा? आखिर क्या हुआ, जो इस कत्ल से हंगामा भारत से ले कर यूएई तक मच गया? पढ़ें, इस कहानी में सब कुछ.

पंजाब की बेहद फेमस इंफ्लुएंसर कमलजीत कौर उर्फ कंचन कुमारी की पहचान ‘कमल कौर भाभी’ के  रूप में थी. वह पिछले 7 सालों से सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्म पर सनसनी बनी हुई थी. उस के ओनलीफैंस पर भी सब्सक्राइबर्स थे, जहां वह अपने वीडियो पोस्ट करती थी. बात दिसंबर 2024 की है. उसे उस के अश्लील वीडियो के लिए अर्श डल्ला नाम के व्यक्ति की धमकी मिली. उस ने चेतावनी दी कि अश्लील वीडियो बनाना बंद करे, वरना उसे जान से हाथ धोना पड़ेगा.

जबकि लुधियाना के लक्ष्मण नगर में अपनी मम्मी के साथ रह रही 27 वर्षीया कमलजीत कौर द्वारा  वीडियो बनाना रोजीरोटी से जुड़ा था. इस से वह पैसे कमाती थी. घर चलता था. परिवार को मदद मिलती थी. वह छोटेबड़े दुकानदारों के लिए प्रचार का काम करती थी. उन के सामान का वीडियो बना कर अपने सोशल मीडिया चैनल पर डालती थी. बदले में उन से पैसे मिलते थे. उस के द्वारा मौडलिंग में पहनी जाने वाली सैक्स अपील की ड्रेस, अदाएं आदि पर आपत्ति थी. इस तरह के कंटेंट बनाने वाली वह अकेली नहीं थी. पंजाब में कई लड़कियां सोशल मीडिया पर मौडलिंग कर पैसा कमाती हैं. उन्हें वीडियो शूट करने या फिर प्रमोशन के लिए बुलाया जाता है. क्लाइंट की जरूरत के मुताबिक वे वीडियो शूट करने  के लिए एक शहर से दूसरे शहर जाती रहती हैं.

कमलजीत कौर को जब से जान से मारने की धमकी मिली थी, तब से वह परेशान रहने लगी थी. वह वीडियो बनाने के लिए मना करने वालों से दुखी थी. उसे जानने वाले लोग उसे शालीनता की नसीहत देते थे. अपने सिख समुदाय की गरिमा का पाठ पढ़ाते हुए उस के वीडियो को गलत बताते थे, जबकि उस के वीडियो उन्हें भी पसंद थे. जून के पहले सप्ताह में 3 तारीख को उस ने खिन्न मन से इंस्टाग्राम पर एक वीडियो अपलोड किया था. उस पर हिंदी और अंगरेजी में कैप्शन लिखा था, ‘नो इमोशन, नो लव, नो एफ. ओनली डाउट, डाउट, डाउट इज लेफ्ट!’

इस पर 3,800 से ज्यादा कमेंट्स आए थे. कुछ में ‘वाहेगुरु’ कह कर शोक जताया गया तो कुछ में गुस्सा और सामाजिक टिप्पणियां की गईं. उस के बाद से वह एकांत में खो गई थी. उस की चंचलता और चपलता को मानो किसी की नजर लग गई हो. उसे उदास देख कर खाने के टेबल पर उस की मम्मी पूछ बैठीं, ”क्या बात है, तुम इतनी गुमसुम क्यों हो? किसी ने फिर कुछ कहा?’’

”कुछ नहीं मम्मी.’’

”क्या सब्सक्राइबर कम हो गए?’’

”नहीं.’’

”तो क्या बात है? मम्मी को नहीं बताएगी… किसी ने फिर धमकी दी? भाई ने कुछ कहा?’’ कमलजीत की मम्मी उस की चुप्पी तोडऩे का प्रयास करती रहीं.

”प्लीज मम्मा! मुझे कल एक इवेंट पर जाना है. उस की तैयारी करनी है.’’ कमलजीत धीमी आवाज में बोली.

”चलो अच्छा है, तुम पिछले 6 दिनों से घर में पड़ी थी… वैसे कहां जाना है?’’

”बठिंडा.’’

”संभल कर जाना.’’ मम्मी बोलीं.

अगले रोज 9 जून, 2025 को सुबह में ही कमलजीत कौर अपने घर से मम्मी को कह कर निकली थी कि वह एक प्रमोशनल इवेंट के लिए बठिंडा जा रही है. उस रोज शाम तक उस की मम्मी से फोन पर बात होती रही, किंतु रात होने तक उस का फोन बंद हो गया. मम्मी ने उस पर ध्यान नहीं दिया, किंतु जब देर रात तक वापस नहीं लौटी, तब उन को उस की चिंता सताने लगी. उन्होंने अपने बेटे को काल कर अपनी चिंता बताई. बेटे ने भी इसे गंभीरता से नहीं लिया. उस ने कहा, ”आ जाएगी.’’

अगले रोज 10 जून को भी कमलजीत घर नहीं लौटी. उस रोज सुबह से ही उस का फोन बंद आ रहा था. मम्मी ने अपने बेटे और बेटी को भी इस बारे में बताया. फिर उन्होंने अपनी जानपहचान वालों से संपर्क कर कमल के बारे में पता लगाने की कोशिश की, लेकिन उस का कोई पता नहीं चला

इंस्टाक्वीन की कार में मिली लाश

11 जून, 2025 की रात को एक समाजसेवी संस्था के कार्यकर्ताओं ने पाया कि बठिंडाचंडीगढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित आदेश मैडिकल यूनिवर्सिटी की पार्किंग में खड़ी कार में से तेज दुर्गंध फैल रही है. उन्होंने पास जा कर देखा. कार के शीशे बंद थे और उस की पिछली सीट पर एक महिला का शव पड़ा था. उस से ही तेज बदबू फैल रही थी. उन्होंने घटना की सूचना बठिंडा कैंट थाने को दी. कैंट थाने के एसएचओ दलजीत सिंह पूरी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और अज्ञात महिला के शव की शिनाख्त के लिए जांच शुरू की.

जांच में गाड़ी की पहचान नहीं हो पाई. पुलिस ने घटनास्थल से कार को कब्जे में लिया, जिस पर लुधियाना का नंबर था, लेकिन पुलिस को उस के नकली नंबर होने का शक हुआ. शव 3 से 4 दिन पुराना लग रहा था. सूचना मिलने पर एसपी (सिटी) नङ्क्षरदर सिंह भी मौके पर पहुंच गए. वहां की काररवाई पूरी करने के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेज दिया गया. गाड़ी में मिले सामान की जांच की गई, जिस से मृतका का नाम कंचन कुमारी पता चला. उस की पहचान सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर के रूप में हुई. पता चला कि गाड़ी में मिली लाश ‘इंस्टाक्वीन’ कमल कौर भाभी की थी. उस के घर का फोन नंबर भी पुलिस को मिल गया तो फेमिली वालों को घटना की सूचना दे दी गई.

कमल कौर भाभी की मौत की खबर थोड़ी देर में सोशल मीडिया पर वायरल हो गई. जिस ने भी सुना, हैरान रह गया. दूसरी तरफ बठिंडा की पुलिस इस की तहकीकात में जुट गई थी. तुरंत सीसीटीवी कैमरे खंगाले गए. पुलिस की 5 टीमें बनाई गईं. शुरुआती जांच में अस्पताल की सिक्योरिटी ने बताया कि गाड़ी 10 जून से वहां पार्किंग में खड़ी थी. बदबू आने पर कार के पास गए तो गाड़ी अंदर से लौक मिली. इस के बाद पुलिस को जानकारी दी गई. पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की कि गाड़ी वहां कौन लाया था? क्या कमलजीत कौर खुद गाड़ी चला कर आई थी या फिर उस की हत्या कर कोई और उसे गाड़ी के अंदर छोड़ कर चला गया था?

जांच में पुलिस को उस आडियो के बारे में पता चला, जिस में करीब 7 महीने पहले विदेश में बैठे आतंकी अर्श डल्ला द्वारा उसे जान से मारने की धमकी दी थी. इसी बीच कमल कौर भाभी की हत्या मामले में नया मोड़ तब आ गया, जब एक शख्स ने सोशल मीडिया पोस्ट कर इस हत्या की जिम्मेदारी ली. हत्या की जिम्मेदारी लेने वाला वह व्यक्ति अमृतपाल सिंह मेहरों था. उस ने लिखा, ‘खालसा कभी भी महिलाओं पर हमला नहीं करता है, लेकिन जब एक महिला ने हमारे तख्तों पर हमला किया तो उसे मार दिया गया. कंचन, जिस ने सिख इतिहास और संस्कृति को बदनाम करने के लिए ‘कौर’ नाम का दुरुपयोग किया था, को सजा दी गई है.’

यानी कि कंचन कुमारी उर्फ कमलजीत कौर की हत्या के बाद अमृतपाल सिंह मेहरों ने एक वीडियो पोस्ट की, जिस में इस काररवाई के पीछे का कारण बताया गया. उस ने सबूत के तौर पर कंचन का एक अश्लील वीडियो दिखाया. अमृतपाल सिंह मेहरों ने अन्य इंस्टाग्राम यूजर्स को ऐसी सामग्री पोस्ट न करने की भी चेतावनी दी. मेहरों ने धमकी देते हुए कहा कि अगर ऐसे लोग ऐसा करना बंद नहीं करते तो उन का भी यही हाल होगा. उस ने कहा कि जब तक वह जिंदा है, वह पंजाब में ऐसी अश्लील सामग्री फैलने नहीं देगा.

जल्द ही इंस्टाक्वीन कमल कौर भाभी की हत्या के मामले में बठिंडा पुलिस ने 2 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया. इस बारे में बठिंडा की एसएसपी अमनीत कौंडल ने खुलासा किया कि उन के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है. अलगअलग टीमें बना कर जांच शुरू कर दी. जांच के दौरान पता चला कि इस हत्याकांड का मुख्य साजिशकर्ता जसप्रीत सिंह है, जिस ने अपना नाम अमृतपाल सिंह मेहरों बताया था. वह 7-8 जून को कंचन के घर भी गया था, लेकिन कंचन घर पर नहीं मिली थी. वह कंचन को 9 जून को प्रमोशन के बहाने अपने साथ कार में ले गया था.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक कमल कौर की हत्या बीती 9 व 10 जून, 2025 की मध्यरात्रि को की गई थी. अमृतपाल मेहरों ने अपने साथियों जसप्रीत सिंह और निमरतजीत सिंह के साथ मिल कर कंचन कुमारी की कार में गला घोंट कर हत्या कर दी थी. इस के बाद उस का शव भुच्चो स्थित आदर्श मैडिकल कालेज और अस्पताल की पार्किंग में कार छोड़ कर फरार हो गए थे. वही कार 11 जून की शाम को बरामद हुई थी. पुलिस ने जांच में पाया कि कंचन की सोशल मीडिया पोस्टों को ले कर सिख समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का हवाला दे कर यह हत्या की गई थी, इसे ‘अनधिकृत नैतिक पुलिसिंग’ (मोरल पुलिसिंग) करार दिया गया.

पता चला कि रंजीत ने ही मेहरों को अमृतसर पहुंचाने में मदद की थी. साथ ही उसे अमृतसर छोडऩे में सहायता करने वाले पांचवें आरोपी की पहचान और बाकी फरार आरोपियों की गिरफ्तारी की जानी थी. आरोपी रंजीत सिंह तरनतारन का रहने वाला है और निहंग पंथ से जुड़ा बताया जा रहा है. उस की गिरफ्तारी के लिए विभिन्न ठिकानों पर दबिश दी गई.

सौफ्ट पोर्न’ जैसी अश्लील बताईं रील्स

कमल कौर की लाइफ बेहद लग्जरी थी. वह एक निजी बैंक में नौकरी करती थी, लेकिन कोरोना काल के दौरान उस ने नौकरी छोड़ दी थी. नौकरी छोडऩे के पीछे की वजह जो भी हो, वह महंगे कपड़े पहनने की शौकीन थी और अकसर बड़े होटलों व सैलून में जाती थी. वह सोशल मीडिया पर अकसर शौपिंग और जीवनशैली से जुड़ी रील्स पोस्ट करती थी. कई बार वह महिलाओं के अंडरगारमेंट्स पर भी कंटेंट बना कर पोस्ट करती थी. कंचन की कुछ रील्स में वह बारबार जस्सी नाम का जिक्र करती थी. यह जस्सी कौन है, इस पर भी पुलिस जांच कर रही है. साथ ही कंचन की काल डिटेल्स की भी गहराई से जांच की जा रही है, जिस से कुछ संदिग्ध नंबरों की सूची तैयार की जा रही है. उस की बहन नीतू ने बताया कि कमलजीत ही घर का पूरा खर्च उठाती थी.

उस का कमल कौर भाभी नाम का सोशल मीडिया पर वेरिफाइड अकाउंट था. इस में उस के 1,351 से अधिक तरहतरह के वीडियो पोस्ट थे. उन की वीडियो के दीवाने किस कदर थे, इस का अंदाजा सहज लगाया जा सकता है. इंस्टाग्राम पर 4.27 लाख फालोअर्स थे, जिन की संख्या उस की मौत के बाद और बढ़ गई. यूट्यूब पर उस के 2.39 लाख सब्सक्राइबर थे और फेसबुक पर 7.7 लाख फालोअर्स. उस के कुछ वीडियो निहंग संप्रदाय के कुछ कट्टरपंथियों को फूटी आंख नहीं सुहाते थे. उन्हें उन में अश्लीलता नजर आई थी. हाल की पोस्ट्स में वह कार में अपने भतीजों के साथ मस्ती करती दिखी या किसी गाने पर डांस कर रही होती है.

उस का कंटेंट कभीकभी पीजी-रेटेड लेवल पर इशारों वाला होता था— जैसे कि डीप नेक ड्रेस पहन कर पोज करना या शाट्र्स पहन कर घूमना. लेकिन अब कुछ डिलीट हो चुकी पोस्ट्स इस से भी आगे ‘सौफ्ट पोर्न’ को दर्शाती थीं, जिन्हें कुछ लोग देसी ओनलीफैंस जैसा मानते हैं.

ओनलीफैंस (OnlyFans) लंदन, यूनाइटेड किंगडम में इंटरनेट कंटेंट की वेबसाइट है. इस सेवा का उपयोग मुख्य रूप से वैसे यौनकर्मी यानी सैक्सवर्कर करते हैं, जो अश्लील कंटेंट बनाते हैं. इस वेबसाइट पर पोस्ट किए जाने वाले कंटेंट यूजर्स द्वारा बनाए जाते हैं, जिस से उन की मासिक सदस्यता राशि, टिप और हर बार देखने के लिए ‘पे पर व्यू’ के जरिए आमदनी होती है. ओनलीफैंस का उपयोग मुख्यरूप से अश्लील सामग्री बनाने वालों द्वारा किया जाता है.

कमल कौर अकसर ऐसे परिधानों में नजर आती थी, जिन्हें पंजाब के रुढि़वादी मानकों के हिसाब से सही नहीं माना जाता. कमल कौर सिर्फ ध्यान खींचने के लिए ऐसा नहीं कर रही थी. यह उस के पेड सब्सक्राइबरों और फेसबुक पर ‘कस्टम वीडियो’ के जरिए एक बिजनैस की रणनीति थी. उल्लेखनीय है कि एडल्ट एंटरटेनमेंट का बाजार बहुत बड़ा है. इस की वैश्विक वैल्यू 71.95 बिलियन डालर है और 2034 तक इस के 100 बिलियन डालर पार करने का अनुमान है. भारत में इस का कोई सटीक आंकड़ा भले ही नहीं है, लेकिन स्टेटिस्टा के मुताबिक हर महीने 1.5 करोड़ भारतीय ओनलीफैंस पर लौगिन करते हैं, जहां यूजर्स अपने सब्सक्राइबरों के लिए विशेष तरह के कंटेंट पोस्ट करते हैं. भारत में अश्लील कंटेंट पोस्ट करना गैरकानूनी है, लेकिन ऐसा कंटेंट इंटरनेट पर आम है.

बताते हैं कि इसी में कमल कौर के वीडियो होते थे, जो मेहरों की नजर में सिख संप्रदाय की नैतिकता के खिलाफ था. कमल की हत्या के बाद मेहरों ने एक वीडियो बयान में कहा, ”तो क्या हुआ अगर वो मारी गई? अच्छा हुआ मारी गई. असल में उसे 5-7 साल पहले ही मार देना चाहिए था.’’

मेहरों के वीडियो में कमल कौर के कुछ पुराने वीडियो के क्लिप्स जोड़े गए हैं. एक में वह कहती है, ”गंदी बात करनी है तो काल करो.’’

दूसरे में वह चमकीला का एक गाना बजाते हुए शावर ले रही है. एक और में वह अपनी प्यूबिक हेयर शेव करने की बात कर रही है. मेहरों के अनुसार इसी तरह की वीडियो ने कमल कौर की हत्या करने के लिए मजबूर किया.

मेहरों का कहना है, ”मुझे फर्क नहीं पड़ता कि मैं सही हूं या गलत. मुझे पंजाबी पीढ़ी को बचाना है, अगर पंजाब की धरती पर ऐसा कोई और वीडियो बना तो देख लेना!’’

कमल कौर भाभी की हत्या मामले में बठिंडा की एसएसपी अमनीत कोंडल ने बताया कि मुख्य आरोपी निहंग अमृतपाल सिंह मेहरों हत्या के कुछ घंटे बाद ही विदेश भाग गया था. पकड़े गए आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि कमल कौर की हत्या के बाद अमृतपाल अपने साथी रणजीत सिंह और एक अज्ञात व्यक्ति के साथ उन की कार में बैठ कर सीधा अमृतसर के एयरपोर्ट गया और वहां से 10 जून की सुबह सवा 9 बजे फ्लाइट पकड़ कर यूएई भाग गया. इस की पुष्टि अमृतपाल के पासपोर्ट की डिटेल निकालने पर हो गई. उस के बाद पंजाब पुलिस ने अमृतपाल का लुकआउट सर्कुलर जारी कर दिया है. उस के सभी सोशल मीडिया अकाउंट बैन करवा दिए हैं.

आरोपी के खिलाफ जारी हुआ लुकआउट सर्कुलर

अमृतपाल ने विदेश जाने के बाद भी पंजाब के अन्य सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स को धमकियां दी हैं. इन में अमृतसर की इंफ्लुएंसर दीपिका लूथरा और तरनतारन की इंफ्लुएंसर प्रीत जट्टी को भी जान से मारने की धमकी मिली है. सिमरनजीत प्रीत जट्टी गांव बाणियां की रहने वाली है. इसी नाम से उन का सोशल मीडिया अकाउंट है, जिस में वह पोस्ट डालती है. शनिवार 14 जून, 2025 को उस ने एसएसपी कार्यालय जा कर शिकायत की कि विदेशी नंबरों से उसे जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं. उस का कहना था कि उस ने अभी तक कोई ऐसी आपत्तिजनक वीडियो बना कर पोस्ट नहीं की है.

सिमरनजीत के लिखित बयान के आधार पर एसपी (आई) अजयराज सिंह ने सब डिविजन गोइंदवाल साहिब के डीएसपी अतुल सोनी को जांच के आदेश दे दिए. इसी तरह दूसरे सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर दीपिका लूथरा को निहंग अमृतपाल सिंह मेहरों ने ईमेल पर भी जान से मारने की धमकी दी थी. मेल से मिली इस धमकी में आतंकी संगठन बब्बर खालसा भी लिखा है. अमृतसर पुलिस साइबर सेल ने मेहरों के खिलाफ केस दर्ज करने के बाद दीपिका की सुरक्षा में पुलिसकर्मियों को तैनात कर दिया गया है. जिस ईमेल और मोबाइल नंबरों से धमकियां मिलीं, उन की भी जांच की जा रही है.

दीपिका लूथरा को वीडियो जारी कर कहा गया कि पार्किंग सिर्फ बठिंडा में नहीं होती और हर बार लाश मिले, यह भी जरूरी नहीं. उस के मन में खौफ का माहौल है. अमृतपाल सिंह मेहरों के नाम का डर ऐसा फैल गया कि सोशल मीडिया पर पोस्ट करने वाले कई इंफ्लुएंसर अब पंजाब पुलिस की शरण में हैं. धमकी के बाद अमृतसर पुलिस के साइबर सेल ने अमृतपाल सिंह मेहरों के खिलाफ साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता की धारा 308, 79, 351 (3), 324 (4) और आईटी एक्ट की धारा 67 के तहत मामला दर्ज किया है.

अमृतसर के पुलिस आयुक्त गुरप्रीत सिंह भुल्लर के अनुसार दीपिका लूथरा की शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया गया है और उन्हें आवश्यक सुरक्षा मुहैया करा दी गई है. उन के घर के बाहर पुलिस का पहरा लगा दिया गया है. लगातार मिल रही धमकियों के चलते उन्होंने अपना सोशल मीडिया अकाउंट बंद कर दिया है. अमृतसर की एक युवा कंटेंट क्रिएटर दीपिका लूथरा ने धीरेधीरे फेसबुक और इंस्टाग्राम पर अपनी पहचान बनाई थी. वह अमृतसर और आसपास के जिलों में किसी कपड़ों के शोरूम या नए कैफे जैसे छोटे हाइपरलोकल ब्रांड्स का प्रचार कर के अतिरिक्त कमाई करती है.

इसलिए जब फरवरी के आखिरी सप्ताह में उसे तरनतारण के चीमा कलां गांव में एक नए मोबाइल फोन स्टोर का प्रचार करने के लिए काल आया तो यह उस के लिए कोई असामान्य बात नहीं थी. क्लाइंट ने एडवांस में 2 हजार रुपए भी भेजे. 2 मार्च, 2024 को वह तय जगह पर पहुंची, लेकिन यह एक बुरा सपना बन गया. लूथरा और उस के कैमरा परसन को कथित तौर पर अमृतपाल सिंह मेहरों और उस के साथियों ने बंधक बना लिया. उन की कार को लौक कर दिया गया, ताकि वे वहां से निकल न सकें और उन्हें घुटनों के बल बैठ कर माफी मांगने के लिए मजबूर किया गया.

लूथरा ने इस वारदात के बारे में पुलिस को बताया, ”7-8 लोग नीले (निहंग कपड़ों) में वहां मौजूद थे. उन्होंने मेरा फोन और कार की चाबियां छीन लीं और मेरा फोन चैक करने लगे. वे मेरी पोस्ट की गई कंटेंट को ले कर मुझ पर चिल्ला रहे थे.’’

माहौल को जल्दी शांत करने के लिए लूथरा ने वादा किया कि वह अपने पेज पर ‘डबल मीनिंग’ यानी अश्लील संकेत वाले पोस्ट करना बंद कर देगी, लेकिन उन लोगों ने इस पर जोर दिया कि वह अपनी पूरी सोशल मीडिया पर मौजूदगी हटा दे. यह उस के लिए संभव नहीं था, क्योंकि यही उस की आमदनी का जरिया है.

लूथरा ने कहा, ”उस ने भीड़ के बीच सड़क पर अपनी कृपाण रखी और मुझे कहा कि मैं उस पर झुक कर माफी मांगूं, पंजाब की जनता से माफी मांगूं कि मैं कैसी कंटेंट पोस्ट कर रही हूं. मैं ने लिखित रूप में भी माफी मांगी. मैं ने पूरा सहयोग किया, फिर भी उन की धमकियां बंद नहीं हुईं.’’

पंजाब पुलिस और साइबर सेल की काररवाई में अमृतपाल के ब्लौक किए गए इंस्टाग्राम हैंडल्स में amritpalsinghmehron, amritpalsingh_mehron, amritpal.singh.mehron ¥æñÚU kaum.de.rakhe हैं. ये 4 इंस्टाग्राम हैंडल्स मौजूदा समय में भारत में नहीं देखे जा सकते हैं.

इस से पहले मार्च 2023 में भी अमृतपाल के फेसबुक और इंस्टाग्राम पर आरोप लगा था, जिस में उस का व्यक्तिगत और संगठनात्मक द्मड्डह्वद्व.स्रद्ग.ह्म्ड्डद्मद्धद्ग अकाउंट शामिल था. साथ ही उसे टिंडर पर भी एक प्रोफाइल के आरोप में जांच के दायरे में लाया गया है. पंजाब पुलिस ने मई 2025 में टिंडर से उस के अकाउंट (स्थान, आईपी, चैट हिस्ट्री) की जानकारी मांगी थी.

मुसलिम से सिख बना था अमृतपाल

पंजाब पुलिस की निगाह में वही कमल कौर भाभी की हत्या का मास्टरमाइंड बताया जाता है. उस के बारे में छानबीन करने पर कई चौंकाने वाले खुलासे हुए. जांच में सामने आया है कि निहंग अमृतपाल मेहरों पहले से सिख नहीं था, बल्कि वह मुसलमान था. और तो और, भारतपाक बंटवारे के वक्त अमृतपाल के पूर्वज पाकिस्तान से भारत आए थे. अमृतपाल ने करीब 12 साल पहले पूरे परिवार समेत सिख धर्म अपना लिया था. 30 वर्षीय अमृतपाल सिंह मेहरों मोगा जिले के गांव मेहरों का रहने वाला है. उस ने 12वीं तक की स्कूली पढ़ाई की है, लेकिन 2014 में उस ने मोगा की आईटीआई से डीजल मैकेनिक का डिप्लोमा किया है.

उस का पूरा परिवार इसी गांव में रहता है. उस के परिवार में मातापिता और एक बड़ा भाई भी है. स्थानीय लोगों का कहना है कि अमृतपाल के अपने फेमिली वालों के साथ अच्छे संबंध नहीं हैं. उस का एक बड़ा भाई परिवार से अलग रहता है. अमृतपाल की एक शादीशुदा बहन है, जो अपनी ससुराल में रहती है. वह वर्ष 2022 में शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) के टिकट पर तरनतारन के धर्मकोट से विधानसभा का चुनाव भी लड़ चुका है. चुनाव के दौरान उस पर लुधियाना में पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडि़ंग को धमकाने के आरोप में मामला भी दर्ज किया गया था.

अमृतसर में मूर्तियों को नुकसान पहुंचाने के मामले में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 427 के तहत उस के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था. इस के अलावा बरनाला जिले के धनौला थाने में उस के खिलाफ धारा 323 (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना), 341 (गलत तरीके से रोकना), 506 (आपराधिक धमकी), 148 (दंगा करने के लिए हथियारों से लैस होना), और 149 (गैरकानूनी जमावड़े के लिए जिम्मेदारी) सहित अन्य धाराओं के तहत मामले दर्ज हैं.

‘कौम दे राखे’ नामक कट्टरपंथी संगठन का मुखिया अमृतपाल सिंह मेहरों को संयुक्त अरब अमीरात से भारत लाने की प्रक्रिया पुलिस ने तेज कर दी है. बठिंडा पुलिस ने ब्यूरो औफ इन्वेस्टिगेशन को एक विस्तृत रिपोर्ट सौंप कर मेहरों के प्रत्यर्पण की औपचारिक मांग की है.

पुलिस ने 17 जून को स्थानीय अदालत से उस के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट भी हासिल कर लिया. एसएसपी अमनीत कोंडल का कहना है कि उन्होंने ब्यूरो औफ इन्वेस्टिगेशन (बीओआई) को जो पत्र भेजा है, उस में हत्या और आरोपी की भूमिका से जुड़ी तमाम जानकारियां दी गई हैं. यह पत्र इंटरपोल की मदद से उस की विदेश में गिरफ्तारी के लिए महत्त्वपूर्ण साबित होगा. इस के बावजूद पंजाब और हरियाणा के कई धार्मिक नेताओं और सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स ने मेहरों के पक्ष में बयान दिए हैं, लेकिन उन के खिलाफ अब तक कोई काररवाई नहीं की गई है.

जबकि कथा लिखे जाने तक इस मामले में 5 लोगों को आरोपी बनाया गया है. जसप्रीत सिंह और निमरतजीत सिंह को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. एक अन्य आरोपी रंजीत सिंह तरनतारन का रहने वाला है, फरार था. उस के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी कर दिया गया है. पता चला है कि रंजीत ने ही मेहरों को अमृतसर पहुंचाने में मदद की थी.

लाखों फालोअर्स, लेकिन क्रियाकर्म में सिर्फ 3 लोग

सोशल मीडिया पर चमकने वाली कमल कौर के कत्ल के साथसाथ हैरान करने वाली एक बात और सामने आई. वह यह कि उन के अंतिम संस्कार के मौके पर केवल 3 लोग ही आए, जबकि इंस्टाग्राम पर लाखों फालोअर्स थे और उस की आकस्मिक मौत की खबर सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हुई थी. यानी कि लाखों चहेतों में से एक ने भी मशहूर कमल भाभी को अंतिम विदाई नहीं दी. बेरहमी से हत्या के बाद कमल कौर को पूरे मोहल्ले, यहां तक कि अपने परिवार ने भी ठुकरा दिया. अब कोई उस से जुडऩा नहीं चाहता. कोई भी उस की हत्या की निंदा नहीं करना चाहता.

उस का शव लुधियाना स्थित पुश्तैनी घर नहीं लाया गया. उस का अंतिम संस्कार बठिंडा में ही कर दिया गया. भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 103 (हत्या), 238 (लापता होना), और 61(2) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई. उस के अंतिम संस्कार के मौके सिर्फ उस का भाई, बहन और मम्मी ही शामिल हुए थे. उन्होंने मृतका का अंतिम संस्कार जनसेवा संस्था की सहायता से बठिंडा के श्मशान घाट में किया गया. वैसे उस की हत्या के सिलसिले में गिरफ्तार आरोपी सिख युवा हैं. बताते हैं कि आरोपियों ने अश्लील वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट करने को ले कर कमल कौर की हत्या की थी.

उन का आरोप है कि कमल कौर इंस्टाग्राम पर विवादित और अश्लील रील बनाती थी और वह अपनी मम्मी के साथ रहती थी. वह अकसर सोशल मीडिया पर लाइव आ कर परिवार के सदस्यों को गालियां देती थी. Family Crime News

 

 

Social Crime Story : काल बन गई सुहागरात

Social Crime Story : 45 वर्षीय टीचर इंद्रकुमार तिवारी द्वारा कथावाचक अनिरुद्धाचार्य के सामने अपनी शादी होने की बात कहने का वीडियो बड़ी तेजी से वायरल हो गया था. इस का नतीजा यह निकला कि उन के पास देवरिया से शादी का प्रस्ताव गया. वह बहुत खुश हुए. उन की शादी हो भी गई, लेकिन सुहागरात से पहले उन के साथ जो हुआ, उस की कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था.

इंद्रकुमार तिवारी अपने घर पर दोपहर का खाना खा कर आराम कर रहे थे, तभी उन के मोबाइल की घंटी बजी. जैसे ही इंद्रकुमार ने काल रिसीव की, दूसरी तरफ से आवाज आई, ”हैलो, इंद्रकुमार तिवारीजी बोल रहे हैं क्या?’’

”जीहां, मैं इंद्रकुमार ही बोल रहा हूं, कहिए क्या काम है?’’ इंद्रकुमार ने जबाव दिया.

”देखिए, मैं उत्तर प्रदेश के देवरिया से संदीप तिवारी बोल रहा हूं. अपनी बहन खुशी के विवाह के लिए आप से मिलना चाहता हूं.’’ संदीप तिवारी ने कहा.

”आप अपनी बहन का फोटो और बायोडाटा भेज दीजिए, फिर इस के बाद आगे देखा जाएगा. संयोग बना तो रिश्ता बन सकता है.’’ इंद्रकुमार ने जवाब दिया.

”फोटो तो मैं भेज दूंगा, लीजिए मेरी बहन खुशी से बात कर लीजिए.’’ यह कह कर संदीप ने खुशी को मोबाइल पकड़ा दिया.

”हैलो, मैं खुशी बोल रही हूं. मैं ने आप का एक वीडियो सोशल मीडिया पर देखा था, जिस में आप अनिरुद्धाचार्यजी से अपनी शादी के संबंध में बात कर रहे थे. वीडियो देख कर मैं आप के व्यक्तित्त्व से बहुत प्रभावित हुई और अपने भाई से शादी के बारे में बात की तो इन्होंने आप का मोबाइल नंबर खोज कर आप से बातचीत कर ली.’’

 

”अच्छा, मुझे जान कर बहुत खुशी हुई कि आप मुझ से शादी करना चाहती हैं, मगर हम गांव में रहने वाले गेस्ट टीचर हैं, थोड़ीबहुत खेतीबाड़ी भी है. मेरे परिवार में मेरे अलावा और कोई नहीं है. क्या यह सब जान कर भी तुम्हें रिश्ता मंजूर है?’’ इंद्रकुमार ने कहा.

”मैं भी ग्रैजुएट हूं, जनरल कोटा की वजह से कहीं नौकरी नहीं मिली तो घर संभाल रही हूं. मैं घर के सभी काम कर लेती हूं. मेरे भी मम्मीपापा नहीं हैं. मेरे भाई ही मेरी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. माली हालत भी ठीक नहीं है. मेरी तरफ से तो हां है, बाकी फैसला भैया के हाथ है. लीजिए, भैया को फोन दे रही हूं. इन से बात कर लीजिए.’’ इतना कहते ही फोन संदीप तिवारी को दे दिया.

”हां तिवारीजी, मैं खुशी की फोटो आप को भेजता हूं और यदि आप की सहमति हो तो मैं आप से मिलने आ जाऊंगा.’’ संदीप तिवारी बोला.

”हां भाई, यहां आ कर मेरा घरद्वार जरूर देख लीजिए. आखिर आप की बहन की जिंदगी का सवाल है.’’ इंद्रकुमार ने सहमति देते हुए कहा. यह बात 17 मई, 2025 की है.

इंद्रकुमार तिवारी की उम्र करीब 45 साल हो चुकी थी, मगर उन की शादी नहीं हो पा रही थी. ऐसे में शादी का रिश्ता आते ही इंद्रकुमार का मन खुशी से उछल रहा था. गांव में थोड़ीबहुत जमीनजायदाद और सरकारी स्कूल में 14 हजार रुपए की नौकरी इंद्रकुमार की गुजरबसर के लिए काफी थी, मगर आसपास के इलाकों में कोई उन्हें लड़की ब्याहने को तैयार नहीं था. आसपड़ोस के लोग भी इंद्रकुमार की शादी में बांधा बने हुए थे, इस लिहाज से इंद्रकुमार ने लड़की वालों को जब घर बुलाया तो उन्होंने अपने चचेरे भाइयों तक को खबर नहीं दी थी.

26 मई, 2025 को खुशी का रिश्ता ले कर संदीप तिवारी मध्य प्रदेश के जबलपुर पहुंचा और अपनी बहन खुशी के कुछ और फोटो मोबाइल में दिखाए. इंद्रकुमार को लड़की पसंद थी, इसलिए बातचीत के बाद दोनों तरफ से शादी पक्की हो गई. बातचीत के दौरान तय हुआ कि उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में 5 जून, 2025 को खुशी के साथ इंद्रकुमार का विवाह होगा. इंद्रकुमार ने संदीप तिवारी को शगुन के रूप में 1100 रुपए भी दिए. इस के बाद संदीप जबलपुर से वापस लौट गया.

इंद्रकुमार शादी तय होने से इतना खुश थे कि वह अपनी शादी में सब कुछ लुटाने को तैयार थे. यही वजह थी कि इंद्रकुमार ने अपनी एक एकड़ जमीन गिरवी रख कर करीब डेढ़ लाख रुपए जुटा कर मझौली कस्बे के ही एक सुनार से गहने बनवाए. कुछ पुश्तैनी आभूषण भी उस के पास थे. सोनेचांदी के गहने के साथ कुछ कैश ले कर वह 2 जून को गोरखपुर रवाना हो गए. 3 जून को वह गोरखपुर के एक होटल में रुके. उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में 5 जून को एक होटल में खुशी के साथ उन की शादी कराई गई.

इंद्रकुमार ने शादी के बाद 5 जून को ही खुशी के साथ अपना फोटो अपने फेमिली वालों और पड़ोसियों को भेजते हुए कहा था कि विवाह के बाद दुलहन को ले कर 6 जून को गांव वापस आ जाएंगे, लेकिन 5 जून को विवाह के फोटो भेजने के बाद से ही इंद्रकुमार का फोन स्विच्ड औफ हो गया.

अनिरुद्धाचार्य से लगाई थी शादी कराने की गुहार

सरकारी स्कूल में गेस्ट टीचर के रूप में नौकरी करने वाले इंद्रकुमार तिवारी मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले के छोटे से गांव पड़वार के रहने वाले थे. वह गांव में अकेले ही रहते थे. उन के पास 3 एकड़ जमीन थी. इंद्रकुमार ने बचपन में ही अपने मांबाप को खो दिया था. इंद्रकुमार से छोटे 4 भाई उन्हीं पर आश्रित थे. समय के साथ 3 भाइयों की बीमारी की वजह से मृत्यु हो गई. इंद्रकुमार के साथ एक छोटा भाई अभी भी रहता है, लेकिन वह भी कुछ करने में सक्षम नहीं है. उस की सारी जिम्मेदारी भी इन्हीं के ऊपर थी.

इंद्रकुमार सुबह जल्दी उठ कर खाना बना कर खेत चले जाते थे और वहां से आने के बाद स्कूल जाते थे और शाम को फिर खेत जा कर काम करते थे और रात को खाना बना कर भाई को भी खिलाते थे. इस तरह से उन का जीवन संघर्ष से भरा था. कथावाचक अनिरुद्धाचार्य भी इसी गांव के रहने वाले हैं. 2025 में 3 से 10 मई तक रिमझा गांव में अनिरुद्धाचार्य के प्रवचनों का आयोजन किया गया था. इसी दौरान शिक्षक इंद्रकुमार तिवारी इस शिविर में शामिल हुए थे. शिविर में उन्हें भी अनिरुद्धाचार्य से सवाल करने का मौका मिला था. तब उन्होंने माइक लेते हुए उन से सवाल पूछा, ”महाराजजी, मेरी शादी कब होगी?’’

”क्या करते हो तुम? कुछ कामधंधा करते हो कि नहीं?’’ अनिरुद्धाचार्य ने पूछा.

”महाराजजी,  मैं गांव के सरकारी स्कूल में गेस्ट टीचर हूं. मेरे पास 18 एकड़ जमीन है, अच्छी प्रौपर्टी है, लेकिन मेरी शादी नहीं हो पा रही है.’’ इंद्रकुमार ने अनिरुद्धाचार्य को बताया.

”कितनी उम्र हो गई है तुम्हारी?’’

”महाराजजी, 45 साल का हो गया हूं.’’

”तो फिर क्या जरूरत है शादी की, साधु बन जाओ और लोगों का कल्याण करो.’’ चुटकी लेते हुए अनिरुद्धाचार्य ने कहा.

”महाराजजी, मेरा वंश कैसे चलेगा, इसलिए शादी करना जरूरी है.’’

”लोगों को पता है कि तुम्हारे पास 18 एकड़ जमीन है?’’

”हां महाराजजी, इस के बावजूद भी  कोई लड़की शादी के लिए राजी नहीं है.’’ इंद्रकुमार बोले.

”अब जब लड़कियों को पता चलेगा तो तुम से शादी करने को जरूर राजी होंगी.’’ अनिरुद्धाचार्य ने दिलासा देते हुए कहा.

बाद में सवालजवाब का वीडियो सोशल मीडिया पर भी खूब वायरल हुआ था. इसी वीडियो को देख कर खुशी और कौशल ने इंद्रकुमार से शादी के लिए संपर्क किया था. मझौली से इंद्रकुमार के जाने के बाद पड़ोसी सुरेंद्र तिवारी ने अगले दिन 6 जून को इंद्रकुमार को फोन किया तो एक महिला ने फोन रिसीव करते हुए कहा, ”अभी वो बात नहीं कर पाएंगे, सो रहे हैं.’’

जब  दोबारा फोन करने पर पूछा गया तो वह महिला इंद्रकुमार से बात कराने की बात को टालती रही. जब इंद्रकुमार का फोन स्विच्ड औफ बताने लगा तो चचेरे भाइयों ने मझौली थाने में 8 जून को इंद्रकुमार की गुमशुदगी दर्ज करा दी. चचेरे भाइयों को इंद्रकुमार की खोजबीन करतेकरते लगभग 20 दिन बीत चुके थे. इसी दौरान पुलिस ने परिजनों को बताया कि उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में एक 40-45 साल के व्यक्ति का शव मिला है.

दरअसल, 6 जून, 2025  को उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के हाटा कोतवाली क्षेत्र के सुकरौली गांव में मझना नाले के पास झाडिय़ों में एक व्यक्ति की लाश मिली थी. लाश खून से सनी हुई थी और गले में चाकू फंसा हुआ था. लाश मिलने की सूचना बकरी चराने वाली महिलाओं ने पुलिस को दी थी. शव की शिनाख्त नहीं होने पर पुलिस ने उस का विवरण सेंट्रल पोर्टल पर अपलोड किया. इस के बाद मध्य प्रदेश के जिला जबलपुर की मझौली पुलिस ने कुशीनगर पुलिस से संपर्क साधा और इंद्रकुमार के फेमिली वालों को ले कर एक टीम कुशीनगर रवाना हो गई. कुशीनगर जा कर जब पुलिस ने शव की शिनाख्त कराई तो वह शव इंद्रकुमार तिवारी का ही निकला.

शव की पहचान इंद्रकुमार के रूप में होने के बाद कुशीनगर पुलिस मोबाइल काल डिटेल्स, सर्विलांस और मुखबिरों की मदद से हत्याकांड का परदाफाश करने में जुट गई. इंद्रकुमार के पड़ोसी और चचेरे भाई के मोबाइल में मिली फोटो से पुलिस ने शादी करने वाली खुशी और संदीप तिवारी की तलाश शुरू कर दी. इस के लिए 400 सीसीटीवी कैमरों और 700 वाहनों को खंगालने के बाद  कुशीनगर पुलिस ने घटना का परदाफाश कर दिया.

पुलिस ने इस मामले में गोरखपुर, झंगहा के मीठाबेल गांव की साहिबा बानो उर्फ खुशी तिवारी, बिछिया कालोनी में रहने वाले देवरिया, गौरीबाजार स्थित सांडा के मूल निवासी संदीप तिवारी उर्फ कौशल कुमार गौर तथा झंगहा के सोनबरसा स्थित कोनी के रहने वाले शमसुद्दीन अंसारी को तितला गांव के पास ढाबे से गिरफ्तार कर लिया. हत्यारोपियों से जब सख्ती से पूछताछ की गई तो उन्होंने इंद्रकुमार की हत्या कर शव को झाडिय़ों में फेंकने का जुर्म स्वीकार कर लिया. घटना में प्रयुक्त चाकू भी बरामद हो गया है.

काल बन गई सुहागरात

पुलिस पूछताछ में यह बात भी सामने आई कि हत्या की मास्टरमाइंड खुशी तिवारी का असली नाम साहिबा बानो है और अपने आप को खुशी का भाई बताने वाला संदीप उस का प्रेमी कौशल गौर था. जिन्होंने ङ्क्षहदू नाम रख कर और उसी नाम का फरजी आधार कार्ड बनवा कर इंद्रकुमार को ठगने का प्लान  तैयार किया था. 5 जून को गोरखपुर मंडल के जिला कुशीनगर के कसया इलाके में एक होटल बुक हुआ. वहीं इंद्रकुमार तिवारी और खुशी तिवारी की शादी कराई गई. जयमाला पहनाई गई, मांग में सिंदूर भरा गया, फोटो और वीडियो शूट कर शादी को वैधता देने की कोशिश की गई.

 

इंद्रकुमार इस रिश्ते को ले कर पूरी तरह आश्वस्त थे. लेकिन सुहागरात की रात जब इंद्रकुमार अपनी नईनवेली दुलहन के साथ एक नई जिंदगी शुरू करने की उम्मीद में होटल के कमरे में थे, उसी रात उन की पत्नी और उस के प्रेमी ने मौत की पटकथा पूरी कर ली. इंद्रकुमार तिवारी ने बड़े अरमानों के साथ अपनी होने वाली दुलहन खुशी तिवारी की मांग में सिंदूर भरा. जयमाला पहनाई, तसवीरें खिंचवाईं, वीडियो शूट हुआ. हर पल को उन्होंने अपने नए जीवन की शुरुआत मान कर जी लिया. उन्हें क्या पता था कि यही पल उन की जिंदगी का आखिरी पल साबित होगा. शादी की तमाम रस्मों के बाद सुहागरात की तैयारी चल रही थी.

इंद्रकुमार तिवारी अपनी नईनवेली दुलहन के साथ भविष्य के सपनों में खोए हुए थे. एक तरफ वह शादी के सपनों में खोए थे तो दूसरी तरफ साहिबा बानो उर्फ खुशी तिवारी और संदीप तिवारी उर्फ कौशल साजिश को अंजाम तक पहुंचाने की तैयारी में जुटे थे. खुशी तिवारी ने इंद्रकुमार से शादी से पहले ही एक हलफनामा बनवाया, जिस में लिखा गया कि इंद्रकुमार की मृत्यु के बाद उन की 18 एकड़ जमीन की मालिक खुशी और उस का भाई संदीप (असल में प्रेमी कौशल) होंगे. इंद्र ने इस पर भरोसे से इसलिए दस्तखत  कर दिए कि शादी के बाद उस की प्रौपर्टी की असली वारिस खुशी ही तो होगी.

सुहागरात से ठीक पहले, जब होटल में रात का भोजन होना था तो खुशी ने अपने प्रेमी कौशल के साथ मिल कर पनीर राइस में नींद की गोलियां मिला दीं. खाना खाने के करीब घंटे भर बाद इंद्रकुमार जैसे ही बेहोश हुए, खुशी तिवारी ने अपने प्रेमी कौशल और ड्राइवर शमसुद्दीन अंसारी के साथ मिल कर इंद्रकुमार को कार में डाला और कुशीनगर के एक सुनसान इलाके में ले जा कर चाकू से गोदगोद कर बेरहमी से हत्या कर दी. इस के बाद शव को झाडिय़ों में फेंककर तीनों फरार हो गए.

इंद्रकुमार घर पर वह यही बोल कर निकले थे कि 4-5 दिन में बहू ले कर गांव वापस आ जाएंगे. शादी के लिए उन्होंने अपने हिस्से के जेवर और पैसे भी ले लिए थे. पड़ोसियों ने भी उन्हें समझाया कि किसी को पैसों का लालच दे कर शादी मत करो, लेकिन उन की आंखों पर पट्टी बंधी हुई थी. पुलिस की पूछताछ में यह बात भी सामने आई है कि कौशल और साहिबा का प्लान टीचर को तुरंत मारने का नहीं था. उन का इरादा था कि शादी के बाद खुशी टीचर के साथ मध्य प्रदेश के गांव में जाएगी और वहां कुछ दिन उन के साथ रहेगी. फिर इंद्रकुमार की हत्या कर उन्हें ठिकाने लगा दिया जाएगा, ताकि किसी को शक न हो और इंद्रकुमार की विधवा होने के नाते पूरी प्रौपर्टी उसी की हो जाएगी.

मगर बात तब बिगड़ गई, जब साहिबा ने अपने नाम पर जमीन का हलफनामा बनवाने के लिए इंद्रकुमार से जमीन के कागजात मंगवाए. कागजात देख कर पता चला कि टीचर के पास 18 एकड़ नहीं, सिर्फ 3 एकड़ ही जमीन है. इस के बाद खुशी और कौशल ने टीचर की लूट के बाद हत्या का प्लान बना लिया. हलफनामे पर साइन करने के बाद इन लोगों ने इंद्रकुमार तिवारी की हत्या कर दी.

इंद्रकुमार को मारने के बाद खुशी उस का सेलफोन इस्तेमाल कर रही थी. जब पुलिस ने जांचपड़ताल के बाद इंद्र के नंबर पर काल किया तो वह बंद मिला, जिस से पुलिस को शक हुआ. फोन की लोकेशन ट्रेस करते हुए पुलिस खुशी तक पहुंची. खुशी से पूछताछ के बाद केस की सारी परतें खुलती चली गईं. फिलहाल तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है. कौशल गौर और साहिबा बानो गोरखपुर के रहने वाले हैं. दोनों के प्रेम प्रसंग की वजह से इन के घर वालों ने भी इन से नाता तोड़ लिया था. इसलिए दोनों देवरिया में रहने लगे. यहां कौशल मजदूरी करता था और किराए के कमरे में साहिबा के साथ पतिपत्नी के रूप में रहता था.

साहिबा बानो और उस के प्रेमी ने देखा कि इंद्रकुमार के पास जमीन के साथसाथ नौकरी भी है और वह विवाह करने के लिए परेशान है. इसी बात का फायदा उठाते हुए दोनों ने फरजी शादी कर उस का धन हड़पने की योजना बनाई. सब से पहले साहिबा बानो ने इंद्रकुमार पर प्रभाव डालने और खुद को उस का सजातीय बताने के लिए खुशी तिवारी नाम से फरजी आधार कार्ड बनवाया. इस के बाद सोशल मीडिया पर खुशी तिवारी नाम से ही अपना अकाउंट बना कर इंद्रकुमार से चैटिंग शुरू की. जिस से इंद्रकुमार जल्द ही उस के झांसे में आ गए.

एसपी संतोष कुमार मिश्रा ने 27 जून को प्रैस कौन्फ्रेंस कर केस का खुलासा किया. पुलिस ने महिला समेत तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया.