बबिता का खूनी रोहन – भाग 4

रोहन के प्यार में डूबी बबीता अकसर उस से फोन पर लंबीलंबी बातें करती. रात में भी दोनों चोरीछिपे प्यार भरी बातें करते और दोनों वाट्सऐप पर भी एकदूसरे को मैसेज करते रहते थे. रोहन तो बबीता को काम कलाओं की अश्लील तस्वीरें तथा वीडियो तक वाट्सऐप पर भेजने लगा.

पहली जनवरी की रात की बात है. बबीता उस वक्त बाथरूम में थी. फोन बैड पर रखा था. उसी वक्त वाट्सऐप पर एक मैसेज का नोटिफिकेशन देख पति भीमराज ने फोन उठा कर देख लिया. संयोग से फोन में लौक नहीं लगा था.

मैसेज देखते ही भीमराज के पांव तले की जमीन जैसे खिसक गई, फोन में पड़े दरजनों अश्लील फोटो और वीडियो तथा चैट देख कर भीमराज का शरीर गुस्से से कांपने लगा. उस दिन भीमराज के सामने साफ हो गया कि उस की पत्नी के किसी युवक से नाजायज संबध हैं और उस ने युवक का नंबर लाइफ के नाम से अपने फोन में सेव किया हुआ है. उस रात भीमराज और बबीता के बीच इस बात को ले कर जम कर झगड़ा हुआ और भीमराज ने अपनी पत्नी की जम कर पिटाई कर दी.

बस इस के बाद तो यह आए दिन की बात हो गई. जब एक बार शक का कीड़ा दांपत्य जीवन में आ जाता है तो बसीबसाई गृहस्थी बिखर जाती है. लेकिन यहां तो शक नहीं एक सच्चाई थी, जो उजागर हो गई थी.

रोहन को घर बुलवा कर की पिटाई

कुछ रोज बाद भीमराज ने बबीता के साथ मारपीट कर उस से रोहन को फोन करवाया और उसे घर आने के लिए कहा. रोहन जब घर पहुंचा और वहां भीमराज को देखा तो समझ गया कि उस की पोल खुल चुकी है. भीमराज ने उस दिन रोहन की भी पिटाई कर दी और धमकी दी कि अगर उस ने बबीता का पीछा नहीं छोड़ा तो वह उसे जेल भिजवा देगा. जेल जाने के डर से उस समय रोहन अपमान का घूंट पी कर रह गया.

लेकिन इस के बाद भीमराज व बबीता में आए दिन झगड़े होने लगे. एक दिन इसी से आजिज आ कर बबीता ने रोहन से मुलाकात की और उस से कहा कि अगर वह उस से सच्चा प्यार करता है तो किसी भी तरह उसे भीमराज से छुटकारा दिला दे. उस ने रोहन से अपने पति की हत्या करने के लिए कहा. साथ ही वादा किया कि अगर वह ऐसा कर देगा तो वह उसे अपने साथ रख लेगी. उस का अपना मकान है. वह खुद भी कमाती है दोनों साथ मिल कर आगे की जिंदगी खुशी से बिताएंगे.

रोहन तो पहले से ही अपमान की आग में जल रहा था. बबीता के कहने पर रोहन आवेश में आ गया और उस ने बिना सोचेसमझे व अंजाम की परवाह किए भीमराज की हत्या की साजिश रच डाली. उस ने सब से पहले  एक पिस्तौल और कारतूस की व्यवस्था की. इस के बाद उस ने कई दिन तक बबीता से फोन पर जानकारी ले कर भीमराज की दिनचर्या का पता लगाना शुरू कर दिया और उस की रेकी करने लगा. बबीता उसे सब कुछ बताती रही कि वह कब घर से निकला है, कब और कहां जा रहा है.

रोहन ने 10 मार्च, 2021 का दिन चुना. उस दिन वह अपनी बाइक ले कर सुबह ही घर से निकल पड़ा. वह भीमराज के घर से करीब 3 किलोमीटर दूर हुडको प्लेस के पास भीमराज का इंतजार करने लगा.

दरअसल, भीमराज औफिस जाने से पहले यहां बने पार्क में घूमने जाता था. काफी देर तक वह भीमराज को मारने का मौका देखता रहा, लेकिन भीड़ ज्यादा होने के कारण उसे मौका नहीं मिला.

सुबह करीब साढ़े 8 बजे भीमराज पार्क से निकला और अपनी वैगनआर पार्किंग से निकाल कर घर की तरफ रवाना हो गया. रोहन भी बाइक से उस का पीछा करने लगा. कोई पहचान न ले, इसलिए उस ने हाथ में पकड़ा हेलमेट सिर पर लगा लिया और अपनी बाइक की दोनों नंबर प्लेटें थोड़ी मोड़ लीं ताकि कोई उस का नंबर न पढ़ सके.

रोहन को एंड्रयूजगंज में बिजलीघर के पास मौका मिला, जहां भीमराज की गाड़ी की स्पीड कम थी और उस ने वहां पिस्तौल निकाल कर उस की गरदन पर गोली मार दी.

रोहन से पूछताछ के बाद पूरी वारदात का खुलासा हो चुका था, इसलिए पुलिस ने हत्या की साजिश में शामिल भीमराज की पत्नी बबीता को भी गिरफ्तार कर लिया. बबीता ने भी पूछताछ में अपने जुर्म का इकबाल कर लिया और बताया कि अपनी उपेक्षा से तंग आ कर उस ने रोहन के साथ संबध बनाए थे और खुलासा होने पर जब भीमराज अकसर उस से मारपीट करने लगा तो तंग आ कर उस ने उसे रास्ते से हटाने की साजिश रची.

पुलिस ने आरोपी रोहन की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त पिस्तौल, 2 जिंदा कारतूस तथा महिंद्रा सेंटुरो बाइक भी बरामद कर ली. पुलिस ने जिस दिन रोहन व बबीता को गिरफ्तार किया, उसी दिन यानी 11 मार्च की शाम को इलाज के दौरान भीमराज की मौत हो गई.

डिफेंस कालोनी पुलिस ने मुकदमे में हत्या की धारा 302, 34 आईपीसी व आर्म्स एक्ट की धारा जोड़ कर दोनों अभियुक्तों को अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया. अधेड़ उम्र की बबीता ने अपनी से आधी उम्र के आशिक के साथ ऐश करने के सपने संजोए थे, अब वह उसी के साथ तिहाड़ जेल की सलाखों के पीछे पहुंच चुकी है.

अपना घर लूटा, पर मिली मौत – भाग 4

घर से निकलतेनिकलते शमिंदर बहन जसपिंदर से बोल कर गया था कि वह एक जरूरी काम से घर से शहर की ओर जा रहा है. उसे घर लौटते हुए दोपहर के 2 या 3 बज सकते हैं, तब तक मम्मी भी स्कूल से घर आ जाएंगी. तू इधरउधर कहीं मत जाना.

जसपिंदर कौर को पता था घर पर कोई नहीं है, घर पूरी तरह खाली है. अगर सही समय पर नहीं निकली तो कोई भी आ सकता है और भागने का प्लान मिस हो सकता है, इसलिए उस ने 11 बजे के करीब परमप्रीत को फोन किया कि तुम कहां हो, मैं आ रही हूं. उस ने यह नहीं बताया कि उस के पास 12 तोले सोने के गहने और 20 हजार रुपए कैश भी है. वह तो इन जेवरातों और रुपए से अपने जीवन के सुख प्रेमी के साथ खरीदने निकली थी.

बहरहाल, काल रिसीव करते हुए परम ने जसपिंदर को सुधार के जगरांव स्थित अखाड़ा पुल के पास पहुंचने को कहा. जसपिंदर उस के बताए स्थान पर 2 बजे के करीब पहुंची तो परम पोलो कार लिए उस के वहां पहुंचने का बेसब्री से इंतजार कर रहा था.

परमप्रीत था केवल तन का प्यासा भौंरा

जसपिंदर के पहुंचते ही परम ने कार का आगे का दरवाजा खोल दिया और वह उस में बैठ गई थी. कार में जसपिंदर के बैठते ही परम ने कार रायकोट की ओर मोड़ ली. परम को देख कर वह बहुत खुश थी.

पीछे मुड़ कर उस ने देखा तो कार की पिछली सीट पर परम का जिगरी दोस्त एकमप्रीत सिंह बैठा था. वह परमप्रीत का हमराज था. जसपिंदर से प्यार वाली बात उस ने बहुत पहले ही शेयर कर दी थी.

सफर के दौरान कुछ देर तक दोनों के बीच प्यार वाली बातें होती रहीं. इस बीच उस ने यह बता दिया कि वह घर से जेवरात और नकदी साथ ले कर हमेशाहमेशा के लिए घर छोड़ कर उस के साथ आ गई है, अब लौट कर दोबारा घर नहीं जाएगी.

यह सुन कर परमप्रीत को सांप सूंघ गया कि वह क्या कह रही है. रास्ते भर जसपिंदर परमप्रीत पर शादी के लिए दबाव बनाती रही. परमप्रीत की नीयत बदल गई थी. वह तो उस से दिखावे का प्यार करता था. उस का असल मकसद तो जसपिंदर का दैहिक सुख पाना था, जो वह कब से लगातार पा रहा था. परम ने परमप्रीत से शादी करने से साफतौर पर मना कर दिया.

प्रेमी परमप्रीत की बात सुन कर जसपिंदर का माथा घूम गया कि वह अब क्या मुंह ले कर वापस घर जाएगी. इस बात को ले कर दोनों के बीच कार के भीतर ही खूब झगड़ा हुआ. परम ने भी अपना आपा खो दिया था. उस ने चलती कार एक साइड और सुनसान जगह देख कर रोक दी.

इस के बाद गुस्से से पागल परम और एकमप्रीत ने उस की चुनरी से उस का गला घोट कर उसे मौत के घाट उतार दिया और उस के जेवरात और 20 हजार रुपए ले लिए थे.

परम ने सोचीसमझी योजना के तहत जसपिंदर से पीछा छुड़ा लिया था. कार को परम घंटों इधरउधर घुमाता रहा ताकि अंधेरा हो जाए और उस की लाश को ठिकाने लगा दिया जाए.

संध्या होते ही परम कार को ले कर अबोहर ब्रांच के नारंगवाल बिजली ग्रिड के पास सुनसान जगह पहुंचा. दोनों ने शव को नहर में यह सोच कर डाल दिया था कि बहते पानी के साथ उस की लाश कहीं दूर तक बह जाएगी और इसी के साथ राज राज ही रह जाएगा. नहर में शव फेंकने के बाद दोनों वापस अपनेअपने घर लौट आए और नारमल तरीके से रहते हुए रात का खाना खा कर सो गए.

पिता ने ही दी बेटों के अपराध की खबर

परम ने भले ही शव को नहर में फेंक कर उसे ठिकाना लगा दिया. लेकिन अगली सुबह वह एकमप्रीत के साथ यह देखने के लिए नहर पहुंचा कि लाश की पोजीशन क्या है? उस ने देखा, लाश जहां फेंकी थी, वहीं पड़ी है.

यह देख कर दोनों घबरा गए और उन्हें पकड़े जाने का डर सताने लगा. आननफानन में दोनों ने नहर से उस की लाश निकाली और कार में रख कर फार्महाउस सुधार पहुंचे.

परमप्रीत और एकमप्रीत इतना डर गए थे कि उन्हें समझ में नहीं आ रहा था कि अब वे क्या करें? किस से मदद मांगें? अब तो पुलिस उन्हें पकड़ ही लेगी. जब कुछ नहीं सूझा तो परमप्रीत ने अपने बड़े भाई भवनप्रीत सिंह उर्फ भवना को अपने फार्महाउस पर बुलाया.

भवनप्रीत अपने दोस्त हरप्रीत सिंह, जो मैसूरां का रहने वाला था, को साथ ले कर उस की कार में सवार हो कर अपने फार्महाउस पहुंचा.

परम ने बड़े भाई भवनप्रीत से कुछ भी नहीं छिपाया और पूरी बात सचसच बता दी थी कि कब, क्या और कैसे हुआ था? भाई की बात सुन कर भवनप्रीत और उस का दोस्त हरप्रीत सिर पकड़ कर बैठ गए कि इश्क के चक्कर में कितना बड़ा गुनाह कर बैठा है.

यह वक्त पछताने का नहीं था. परम आखिर उस का भाई था. कानून के फंदे से उसे अपने भाई को बचाना था. फिर चारों ने मिल कर लाश को पराली से जला देने की योजना बनाई और उन्होंने योजना को प्रभाव में लाया भी लेकिन पराली से लाश नहीं जली.

तब उन्होंने उसे दफनाने की योजना बनाई. फिर चारों ने मिल कर एक जेसीबी वाले को यह कह कर अपने फार्महाउस बुलाया था कि उस का घोड़ा मर गया है, उसे दफनाना है, चल कर वह गड्ढा खोद कर चला जाए.

जेसीबी वाले ने फार्महाउस पहुंच कर अपना काम किया और वहां से अपनी मजदूरी ले कर चला गया. फिर चारों ने मिल कर जसविंदर की अधजली लाश जमीन में दफना कर उस पर भारी मात्रा में नमक छिड़क कर उसे ढक दिया और उस पर शीशम और सागौन के पेड़ लगा दिए ताकि किसी को कुछ पता न चले.

लेकिन परम के पिता हरपिंदर ने ही बेटों की करतूतों का राज फाश करते हुए उन्हें उन के किए की सजा कानून से दिलवा कर एक सच्चा भारतीय होने का फर्ज अदा किया.

आज उन्हीं की बदौलत जसपिंदर कौर हत्याकांड के चारों आरोपी परमप्रीत सिंह, भवनप्रीत सिंह, एकमप्रीत सिंह और हरप्रीत सिंह अपने किए की सजा जेल की सलाखों के पीछे भुगत रहे हैं. पुलिस ने आरोपियों के पास से जेवरात और कुछ नकदी भी बरामद कर ली थी.     द्य

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

उम्मीदों से दूर निकला लिवइन पार्टनर – भाग 4

दिल्ली में उस ने प्रौपर्टी डीलिंग का काम शुरू किया, साथ ही वह पुरानी कारों की खरीदफरोख्त का बिजनैस भी करने लगा. दौलत बरसने लगी तो उसे शराबशबाब का शौक लग गया. नईनई लड़कियों को वह अपने बिस्तर पर लाने के लिए दोनों हाथों से खर्च करने लगा.

घर वाले उस के अय्याशी वाले शौक से अंजान थे. उन्हें इतना मालूम था कि मनप्रीत दिल्ली में अपने कारोबार से अच्छा कमा रहा है तो उन्होंने 2006 में उस की शादी कर दी. शुरूशुरू में मनप्रीत का दिल अपनी पत्नी में खूब लगा. पत्नी जब 2 बेटों की मां बन गई तो मनप्रीत को वह बासी और बेस्वाद लगने लगी. मनप्रीत की दिलचस्पी उस में खत्म हो गई. वह फिर अपने पुराने शौक की ओर लौट आया.

सन 2015 की गरमी का वह तपता महीना था. मनप्रीत किसी पार्टी के इंतजार में सड़क के किनारे अपनी कार में बैठा हुआ था, तब उस ने रेखा को पहली बार देखा था. एक ही नजर में रेखा उस के दिलोदिमाग पर छा गई थी.

उस रोज रेखा अपने काम पर लेट हो गई थी. वह तेजतेज कदमों से सड़क पर जा रही थी. गरमी से बेहाल पसीने से तर रेखा की बदहवासी पर न जाने क्यों मनप्रीत को तरस आ गया.

उस ने अपनी कार स्टार्ट की और रेखा के सामने ले आया. रेखा ठिठक कर रुक गई. मनप्रीत ने कार का दरवाजा खोल कर बेहिचक कहा, ‘‘कार में बैठ जाइए, मैं आप को उस जगह पहुंचा दूंगा, जहां पहुंचने के लिए आप बदहवास सी दौड़ी जा रही हैं.’’

रेखा ने उसे ध्यान से देखा था, जैसे वह यह जान लेना चाहती हो कि वह कोई मवाली या गुंडा तो नहीं है. रेखा को वह चेहरेमोहरे से शरीफ आदमी लगा, फिर भी उस ने अचकचा कर पूछा था, ‘‘आप मेरी मदद क्यों करना चाहते हैं?’’

‘‘क्योंकि आप परेशान हैं,’’ मनप्रीत ने जवाब दे कर हुक्म सा दिया, ‘‘चलिए, अब बैठ जाइए कार में.’’

रेखा न जाने क्या सोच कर कार में मनप्रीत के बराबर वाली सीट पर बैठ गई. कार आगे बढ़ी तो रेखा ने बड़ी सादगी से कहा, ‘‘मैं ने आप पर विश्वास किया है…’’

मनप्रीत ने हंसते हुए उस की बात काट दी, ‘‘डरिए मत, मैं आप को भगा कर नहीं ले जाऊंगा.’’

रेखा झेंप गई. मनप्रीत ने उसे वहां उतारा, जहां वह उतरना चाहती थी. रेखा ने कार से उतर कर मनप्रीत को धन्यवाद दिया तो वह मुसकरा पड़ा, ‘‘इस की कोई जरूरत नहीं, मैं ने इंसानियत के नाते आप की मदद की है.’’

रेखा के चेहरे पर मुसकान खिल गई. वह मुसकराती हुई अपनी फैक्ट्री की ओर चली गई.

उस दिन के बाद यह रोज का किस्सा बन गया. मनप्रीत उस वक्त अपनी कार ले कर उस जगह पहुंच जाता, जहां से रेखा सुबह 8 बजे से 9 बजे के बीच गुजरती थी. उस वक्त वह अपनी फैक्ट्री जाती थी.

 

मनप्रीत उसे कार में बिठाता और फैक्ट्री के सामने छोड़ आता. रेखा अब निस्संकोच मनप्रीत की कार में बैठने लगी थी. उस ने मनप्रीत की आंखों में अपने लिए चाहत देख देख ली थी. उस का भी झुकाव मनप्रीत की ओर होने लगा था.

थोड़े दिन बाद ही यह सिलसिला फैक्ट्री के दायरे से निकल कर दिल्ली के पिकनिक स्पौट की तरफ मुड़ गया.

मनप्रीत उसे कभी कुतुबमीनार ले कर जाता, कभी इंडिया गेट. अब वे दोनों एकदूसरे की चाहत बन गए थे. मनप्रीत रेखा पर दिल खोल कर खर्च करता. उसे बढि़या रेस्तरां में खाना खिलाता, कीमती गिफ्ट खरीद कर देता. रेखा उस का साथ पा कर बहुत खुश थी, उस की वे इच्छाएं, सपने पूरे होने लगे थे, जिसे वह खुली आंखों से देखती आई थी.

दोनों के प्यार का यह सिलसिला आहिस्ताआहिस्ता आगे बढ़ रहा था कि मनप्रीत उसे एक दिन झंडेवालान मंदिर में ले गया. पूजाअर्चना करने के बाद मंदिर के प्रांगण में उस ने रेखा का मुलायम हाथ अपने हाथ में ले कर गंभीर स्वर में कहा, ‘‘रेखा, जानती हो मैं तुम्हें यहां ले कर क्यों आया हूं?’’

‘‘मैं क्या जानूं, बताओ मुझे मां के द्वार पर क्यों ले कर आए हो?’’ रेखा ने पूछा.

‘‘मैं तुम्हें सच्चा प्यार करने लगा हूं रेखा. मैं तुम्हें अपने बहुत करीब रखना चाहता हूं. क्या तुम मेरा प्रस्ताव स्वीकार करोगी?’’

‘‘मनप्रीत, मुझे अपना बनाने से पहले तुम्हें मेरे बारे में जान लेना चाहिए, मैं कौन हूं, मेरा अतीत क्या है, तुम ने कभी यह नहीं पूछा.’’ रेखा ने बहुत गंभीर हो कर कहा, ‘‘पहले मेरे बारे में जान लो, फिर अपना फैसला सुनाना.’’

‘‘बताओ, आज मैं तुम्हारा अतीत जान लेता हूं.’’ मनप्रीत भी गंभीर हो गया.

‘‘मनप्रीत, मैं तलाकशुदा औरत हूं, मेरी एक 8 साल की बेटी भी है.’’

‘‘आज से वह तुम्हारी ही नहीं, मेरी भी बेटी बन गई है.’’ मनप्रीत रेखा की हथेली प्यार से दबाते हुए निर्णायक स्वर में बोला, ‘‘मैं कमरा तलाशता हूं, शाम को ही तुम वहां शिफ्ट हो जाओगी.’’

‘‘ओह मनप्रीत, तुम कितने अच्छे हो.’’ रेखा उस के चौड़े सीने पर अपना सिर टिका कर भावुक स्वर में बोली, ‘‘मेरे विश्वास को इसी तरह कायम रखना तुम.’’

‘‘हां, मैं तुम्हारे प्यार और विश्वास पर हमेशा खरा उतरूंगा, यह मेरा तुम से वादा है रेखा.’’ मनप्रीत ने पूरे विश्वास से कहा.

उसी शाम रेखा अपने नए मीत मनप्रीत के उस कमरे में सामान और अपनी बेटी नीतू के साथ शिफ्ट हो गई जो उस ने दिल्ली के गणेश नगर (तिलक नगर) में किराए पर लिया था.

उसी रात रेखा ने मनप्रीत की बाहों में खुद को सौंप कर अपना सब कुछ समर्पण कर दिया. एक सच्चे मर्द की तरह मनप्रीत 7 साल तक उसे और उस की बेटी को प्यार से निभाता रहा लेकिन फिर उस का व्यवहार बदलने लगा.

वह रेखा को खर्चा देने में आनाकानी करने लगा. उस की बेटी को बातबात पर डांटने लगा. शराब तो वह पहले भी पीता था, अब खूब पी कर घर आने लगा.

रेखा उस के रूखे व्यवहार से ऊबने लगी तो उस से झगड़ने लगी. बातबात पर वह मनप्रीत से लड़ती और मनप्रीत उसे लातघूंसे से पीट देता. गंदीगंदी गालियां देता. मां और अंकल मनप्रीत के रोजरोज के झगड़े से नीतू डिप्रैशन में आ गई. वह माइग्रेन का शिकार हो गई.

बतौर मनप्रीत अब रेखा उस के लिए बासी हो गई थी. वह उसे बोझ समझने लगा था. रेखा को वह जानबूझ कर उकसाने लगा, ताकि वह उस से लड़े और बदले में वह उसे प्रताडि़त कर सके.

वह चाहता था कि तंग आ कर रेखा खुद उस का पीछा छोड़ दे, लेकिन जब रेखा मार खा कर भी उस के घर को छोड़ने को तैयार नहीं हुई तो उस ने रेखा की हत्या करने का मन बना लिया.

30 नवंबर, 2022 की शाम को वह बाजार से तेज धार वाला चापड़ खरीद लाया. उस ने नशे की गोलियां भी खरीदीं ताकि रेखा की बेटी नीतू को गहरी बेहोशी में कर के वह रेखा की हत्या कर सके.

उस ने रात को नीतू को नशे वाली गोलियां खिला कर सोने के लिए उस के कमरे में भेज दिया. रेखा उस से कई दिनों से बात नहीं कर पा रही थी. खापी कर वह अपने बिस्तर पर सो गई. मनप्रीत रात गहराने का इंतजार करता रहा. जब आधी रात हुई तो उस ने चापड़ निकाल कर रेखा का गला काट दिया.

रेखा पर उसे इतना गुस्सा था कि उस ने तड़पती जिंदगी और मौत से जूझती रेखा पर चापड़ से ताबड़तोड़ वार करने शुरू कर दिए. जब रेखा का शरीर तड़प कर बेजान हो गया तो वह चापड़ छिपा कर कमरे से बाहर आ गया और रात भर दरवाजे के बाहर कुरसी पर बैठा रहा.

सुबह नीतू जाग कर बाहर आई तो वह डर गया. नीतू ने मां के विषय में पूछा तो उस ने कह दिया कि वह बाजार गई है. उस ने नीतू को डपट कर सोने के लिए भेज दिया. उजाला फैल गया था, कहीं उस के द्वारा रेखा को कत्ल करने का भेद न खुल जाए, इसलिए वह कमरे के दरवाजे पर ताला लगा कर वहां से चुपचाप सरक गया.

दिल्ली में पकड़े जाने का डर था,इसलिए वह अपनी कार से पटियाला के अपने गांव भाग गया, जहां से क्राइम ब्रांच की टीम ने उसे गिरफ्तार कर लिया.

मनप्रीत का बयान कलमबद्ध कर के उसे दूसरे दिन माननीय न्यायालय में पेश किया गया और 2 दिन के रिमांड पर ले लिया गया. रिमांड अवधि में मनप्रीत ने अपने कमरे के वाशरूम के रोशनदान में छिपा कर रखा वह चापड़ बरामद करवा दिया, जिस से उस ने रेखा का कत्ल किया था. चापड़ बड़ा और पैना था. उस से इस प्रकार का चापड़ खरीदने की बाबत पूछा गया तो उस ने बताया कि वह श्रद्धा मर्डर का तरीका यहां आजमाना चाहता था. जिस प्रकार आफताब ने श्रद्धा को मार कर उस के 35 टुकड़े किए थे, वह भी रेखा की लाश के टुकड़े कर के उन्हें जंगल में फेंकना चाहता था. यह चापड़ उस ने इसी मकसद से खरीदा था.

चापड़ को कब्जे में ले कर क्राइम ब्रांच ने मनप्रीत को थाना तिलक नगर को हैंडओवर कर दिया. थाने में मनप्रीत पर भादंवि की धारा 302 लगा कर केस दर्ज कर लिया.

मनप्रीत पर पहले भी 5-6 पुलिस केस दर्ज थे. जो मकान उस ने किराए पर लिया था, उस का वह किराया नहीं देता था. उस ने मकान पर भी अपना कब्जा जमा रखा था, जिस कारण उस का मकान मालिक से कोर्ट में विवाद चल रहा था.

पुलिस अब सब मामलों की पड़ताल कर के मनप्रीत के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी कर रही थी. कथा लिखे जाने तक मनप्रीत जेल की सलाखों के पीछे था.      द्य

—कथा पुलिस सूत्रों पर. नीतू और राकेश परिवर्तित नाम हैं. तथ्यों का नाट्य रूपातंरण किया गया है.