सपना का अधूरा सपना – भाग 1

फिरोजाबाद की नवनिर्मित कालोनी सुदामानगर के रहने वाले कुंवरपाल सिंह यादव के जानवरों के लगातार रंभाने  से पड़ोसियों का ध्यान उन की ओर गया. इस की वजह यह थी कि वे इस तरह रंभा रहे थे, जैसे उन्हें कई दिनों से चारापानी न मिला हो. उन के रंभाने से परेशान हो कर पड़ोसी कुंवरपाल के घर गए तो पता चला कि घर में बाहर से ताला बंद है.

कुंवरपाल का इस तरह ताला बंद कर के घर छोड़ कर जाना हैरान करने वाला था. क्योंकि उन्होंने तमाम गाएं और भैंसें पाल रखी थीं, इसलिए उन्हें छोड़ कर वह पूरे परिवार के साथ कहीं नहीं जा सकते थे. लोगों को किसी अनहोनी की आशंका हुई तो कालोनी के 2 लड़के कुंवरपाल के बगल वाले घर की सीढि़यों से चढ़ कर छत के रास्ते उन के घर जा पहुंचे.

नीचे कमरे में उन्होंने जो देखा, उन की चीख निकल गई. एक कमरे में पड़े तखत पर एक लाश पड़ी थी. लड़कों ने उसे पहचान लिया, वह कुंवरपाल की बड़ी बेटी सपना की लाश थी. उस के दोनों हाथों में नंगा तार बंधा था, जिस का दूसरा छोर स्विच बोर्ड के पास नीचे फर्श पर पड़ा था. देखने से ही लग रहा था कि उसे करंट लगा कर मारा गया था.

उन लड़कों के चीखने से बाहर खड़े लोग समझ गए कि अंदर कोई अनहोनी घटी है. जब लड़कों ने बाहर आ कर पूरी बात बताई तो उन्हें थोड़ा राहत महसूस हुई कि घर के बाकी लोग जहां भी हैं, सुरक्षित हैं. फिर भी लोगों के मन में आशंका तो थी ही, इसलिए तरहतरह की बातें होने लगीं.

जिस ने भी कुंवरपाल की बेटी सपना की हत्या के बारे में सुना, उस के घर की ओर भागा. यह इलाका फिरोजाबाद की उत्तर कोतवाली के अंतर्गत आता था, इसलिए सूचना पा कर कोतवाली प्रभारी शशिकांत शर्मा एसएसआई के.पी. सिंह, एसआई अर्जुनलाल वर्मा, सिपाही धर्मेंद्र सिंह, श्यामसुंदर और उमेशचंद को साथ ले कर कुंवरपाल के घर आ पहुचे.

कोतवाली प्रभारी शशिकांत शर्मा ताला तोड़वा कर कुछ लोगों के साथ घर के अंदर पहुंचे तो तखत पर पड़ी लाश देख कर हैरान रह गए. क्योंकि लाश देख कर ही लग रहा था कि लड़की की हत्या करंट लगा कर बड़ी बेरहमी से की गई थी. उन्होंने फोटोग्राफर बुला कर घटनास्थल की और लाश की फोटोग्राफी कराई. इस के बाद लाश का बारीकी से निरीक्षण शुरू किया. मृतका की गर्दन पर करंट लगाने के निशान साफ नजर आ रहे थे. दाएं हाथ की अंगुली में तो करंट लगाने से छेद हो गया था.

मामला हत्या का था, इसलिए कोतवाली प्रभारी शशिकांत शर्मा ने घटना की जानकारी अपने उच्चाधिकारियों को दे दी. घर के अन्य लोग गायब थे, इसलिए पुलिस को संदेह हो रहा था कि कहीं इस हत्या में घर वालों का ही हाथ तो नहीं है. क्योंकि ऐसा कहीं से नहीं लग रहा था कि मृतका के घर में अकेली होने पर बाहर के लोगों ने आ कर उस की हत्या की हो. क्योंकि वहां न तो लूटपाट का कोई निशान था, न दुष्कर्म का. पुलिस ने लाश को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा कर कुंवरपाल के मकान को सील कर दिया. यह 26 जुलाई, 2014 की घटना थी.

उसी दिन शाम 5 बजे के आसपास फिरोजाबाद के ही लोहियानगर का रहने वाला अभिनय राणा जिलाधिकारी विजय करन आनंद के आवास पर अपने कुछ साथियों के साथ पहुंचा. जिलाधिकारी से मिल कर उस ने बताया कि सुदामानगर में जिस लड़की की हत्या हुई है, वह उस की पत्नी सपना थी. उस की हत्या उस के पिता कुंवरपाल यादव ने पत्नी उर्मिला यादव तथा 2 सालों नंदकिशोर और राधाकिशन के साथ मिल कर की थी.

अभिनय राणा ने सपना को पत्नी बताया ही नहीं था, बल्कि पत्नी होने के तमाम सुबूत भी जिलाधिकारी को दिए थे. सुबूत देख कर जिलाधिकारी को समझते देर नहीं लगी कि यह औनर किलिंग का मामला है. उन्होंने तुरंत अभिनय राणा की तहरीर पर कोतवाली प्रभारी शशिकांत शर्मा को सपना की हत्या का मुकदमा दर्ज करने का आदेश कर दिया था.

अभिनय राणा जिलाधिकारी आवास से सीधे उत्तर कोतवाली पहुंचा और जिलाधिकारी के आदेश वाली तहरीर तथा सारे सुबूत कोतवाली प्रभारी शशिकांत शर्मा के सामने रख दिए तो उस तहरीर और सुबूतों के आधार पर उन्होंने अभिनय राणा की पत्नी सपना की हत्या का मुकदमा उस के पिता कुंवरपाल सिंह यादव, मां उर्मिला यादव तथा दोनों मामाओं, नंदकिशोर और राधाकिशन के नाम दर्ज करा कर मामले की जांच की जिम्मेदारी खुद संभाल ली.

नामजद मुकदमा दर्ज होते ही अभियुक्तों की तलाश में कोतवाली प्रभारी शशिकांत शर्मा ने अपनी टीम के साथ लगभग दर्जन भर जगहों पर छापे मारे, लेकिन एक भी अभियुक्त उन के हाथ नहीं लगा. वह मुखबिरों के साथसाथ सर्विलांस की भी मदद ले रहे थे. लेकिन सभी अभियुक्तों के मोबाइल बंद थे, इसलिए उन्हें सर्विलांस का कोई फायदा नहीं मिल रहा था.

घटना से पूरे 15 दिनों बाद रक्षाबंधन के अगले दिन यानी 11 अगस्त को किसी मुखबिर से शशिकांत शर्मा को कुंवरपाल के बारे में पता चल गया कि वह कहां छिपा है. फिर क्या था, शशिकांत शर्मा ने अपने सहयोगियों एसएसआई के.पी. सिंह, एसआई अर्जुनलाल वर्मा, सिपाही धर्मेंद्र सिंह, उमेशचंद और श्यामसुंदर के साथ रात 2 बजे छापा मार कर कुंवरपाल सिंह यादव को गिरफ्तार कर लिया.

कुंवरपाल राजनीतिक पहुंच वाला आदमी था. उस ने अपनी इस पहुंच के बल पर पुलिस पर दबाव बनाने की कोशिश भी की, लेकिन उस की एक नहीं चली. उस ने जिसे भी फोन किया, उस ने उस समय किसी भी तरह की मदद करने से मना कर दिया. इस तरह उस की गिरफ्तारी के बाद उस की जानपहचान का कोई भी नेता उस के काम नहीं आया.

थाने ला कर कुंवरपाल से पूछताछ शुरू हुई. जाहिर सी बात है, कोई भी जल्दी से यह नहीं स्वीकार करता कि उस ने अपराध किया है. कुंवरपाल भी झूठ बोलता रहा. लेकिन पुलिस के पास उस के हत्यारे होने के तमाम सुबूत थे. इसलिए उन्हीं सुबूतों के बल पर पुलिस ने उस से स्वीकार करा लिया कि सपना की हत्या उसी ने की थी.

इस के बाद कुंवरपाल ने सपना की हत्या की जो कहानी सुनाई, वह कंपा देने वाली थी. उस के द्वारा सुनाई गई कहानी और अभिनय राणा द्वारा सुनाई गई कहानी को मिला कर सपना की हत्या की जो कहानी सामने आई, वह कुछ इस तरह थी.

उत्तर प्रदेश के जिला फिरोजाबाद की नवनिर्मित कालोनी सुदामानगर के रहने वाले कुंवरपाल सिंह यादव की बड़ी बेटी सपना के जवानी में कदम रखते ही वह नौजवानों का सपना बन गई थी. उस की उम्र का वह हर नौजवान उस का सपना देखने लगा था, जिस ने उसे एक बार देख लिया था.

लेकिन हर किसी का सपना कहां पूरा होता है. पूरा होता भी कैसे, सपना अकेली थी, जबकि उस का सपना देखने वाले तमाम नौजवान थे. जवान और खूबसूरत सपना यादव जल्दी ही सहपाठियों की ही नहीं, कालेज के तमाम नौजवानों के दिल की धड़कन बन चुकी थी.

यही नहीं, कालोनी और जिस रास्ते से वह आतीजाती थी, उस रास्ते के भी तमाम नौजवान उसे हसरतभरी नजरों से ताकते थे. उसे देखने वाला हर नौजवान उस की नजदीकी के लिए बेताब रहने लगा था. सपना का सपना देखने वाले भले ही तमाम लोग थे, लेकिन उन में से कोई भी सपना का सपना नहीं था. उस का सपना तो कोई और ही था.

फरेब के जाल में फंसी नीतू – भाग 1

लाश की हालत देख कर पुलिस वाले तो दूर की बात कोई भी आम आदमी बता देता कि हत्यारा या हत्यारे मृतका से किस हद तक नफरत करते होंगे. साफ लग रहा था कि हत्या प्रतिशोध के चलते पूरी नृशंसता से की गई थी और युवती के साथ बेरहमी से बलात्कार भी किया गया था.

मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ को जोड़ते जिला शहडोल के ब्यौहारी थाने के इंचार्ज इंसपेक्टर सुदीप सोनी को भांपते देर नहीं लगी कि मामला उम्मीद से ज्यादा गंभीर है. 25 मार्च की सुबहसुबह ही उन्हें नजदीक के गांव खामडांड में एक युवती की लाश पड़ी होने की खबर मिली थी. वक्त न गंवा कर सुदीप सोनी ने तुरंत इस वारदात की खबर शहडोल से एसपी सुशांत सक्सेना को दी और पुलिस टीम ले कर खामडांड घटनास्थल की तरफ रवाना हो गए.

गांव वाले जैसे उन के आने का ही इंतजार कर रहे थे. पुलिस टीम के आते ही मारे उत्तेजना और रोमांच के उन्होंने सुदीप को बताया कि लाश गांव से थोड़ी दूर आम के बगीचे में पड़ी है. पुलिस टीम जब आम के बाग में पहुंची तो लाश देखते ही दहल उठी. ऐसा बहुत कम होता है कि लाश देख कर पुलिस वाले ही अचकचा जाएं.

लाश लगभग 24 वर्षीय युवती की थी, जिस की गरदन कटी पड़ी थी. अर्धनग्न सी युवती के शरीर पर केवल ब्लाउज और पेटीकोट थे. ब्लाउज इतना ज्यादा फटा हुआ था कि उस के होने न होने के कोई माने नहीं थे. दोनों स्तनों पर नाखूनों की खरोंच के निशान साफसाफ दिखाई दे रहे थे.

पेटीकोट देख कर भी लगता था कि हत्यारे चूंकि उसे साथ नहीं ले जा सकते थे इसलिए मृतका की कमर पर फेंक गए थे. युवती के गुप्तांग पर जलाए जाने के निशान भी साफसाफ नजर आ रहे थे. गाल पर दांतों से काटे जाने के निशान देख कर शक की कोई गुंजाइश नहीं रह गई थी कि मामला बलात्कार और हत्या का था.

खामडांड छोटा सा गांव है जिस में अधिकतर पिछडे़ और आदिवासी रहते हैं इसलिए पुलिस को लाश की शिनाख्त में दिक्कत पेश नहीं आई. लाश के मुआयने के बाद जैसे ही सुदीप सोनी गांव वालों से मुखातिब हुए तो पता चला कि मृतका का नाम नीतू राठौर है और वह इसी गांव के किसान बाबूलाल राठौर की बहू और रामजी राठौर की पत्नी है.

सुदीप ने तुरंत उपलब्ध तमाम जानकारियां सुशांत सक्सेना को दीं और उन के निर्देशानुसार जांच की जिम्मेदारी एसआई अभयराज सिंह को सौंप दी. चूंकि लाश की शिनाख्त हो चुकी थी इसलिए पुलिस के पास करने को एक ही काम रह गया था कि जल्द से जल्द कातिल का पता लगाए.

कागजी काररवाई पूरी कर  के नीतू की लाश पोस्टमार्टम के लिए भेज दी गई. नीतू की हत्या की खबर उस के मायके वालों को भी दे दी गई थी जो मऊ गांव में रहते थे. मौके पर अभयराज सिंह को कोई सुराग नहीं लग रहा था. अलबत्ता यह बात जरूर उन की समझ में आ गई थी कि कातिल उन की पहुंच से ज्यादा दूर नहीं है. छोटे से गांव में मामूली पूछताछ में यह उजागर हुआ कि नीतू के घर में उस के ससुर बाबूलाल और पति रामजी के अलावा और कोई नहीं है.

नीतू और रामजी की शादी अब से कोई 4 साल पहले हुई थी. बाबूलाल का अधिकांश वक्त खेत में ही बीतता था और इन दिनों तो फसल पकने को थी इसलिए दूसरे किसानों की तरह वह खाना खाने ही घर आता था. फसल की रखवाली के लिए वह रात में सोता भी खेत पर ही था.

इसी पूछताछ में जो अहम जानकारियां पुलिस के हाथ लगीं उन में से पहली यह थी कि रामजी एक कम बुद्धि वाला आदमी है और आए दिन नीतू से उस की खटपट होती रहती थी. दूसरी जानकारी भी कम महत्त्वपूर्ण नहीं थी कि 2 साल पहले 2016 में इन पतिपत्नी के बीच जम कर झगड़ा हुआ था. झगड़े के बाद नीतू मायके चली गई थी और उस ने ससुर व पति के खिलाफ दहेज प्रताड़ना का मामला दर्ज कराया था, पर बाद में सुलह हो जाने पर नीतू वापस ससुराल आ गई थी.

ब्यौहारी थाने में पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर लिया और नीतू का शव उस के ससुराल वालों को सौंप दिया. दूसरे दिन ही उस का अंतिम संस्कार भी हो गया. पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला कि उस की हत्या धारदार हथियार से गला काट कर की गई थी.

ये जानकारियां अहम तो थीं लेकिन हत्यारों तक पहुंचने में कोई मदद नहीं कर पा रही थीं. गांव वाले भी कोई ऐसी जानकारी नहीं दे पा रहे थे जिस से कातिल तक पहुंचने में कोई मदद मिलती.

नीतू के अंतिम संस्कार के बाद पुलिस ने उस के मायके वालों से पूछताछ की तो उन्होंने सीधेसीधे हत्या का आरोप बाबूलाल और रामजीलाल पर लगाया. उन का कहना था कि शादी के बाद से ही बापबेटे दोनों नीतू को दहेज के लिए मारतेपीटते रहते थे. लेकिन नीतू की हत्या जिस तरह हुई थी उस से साफ उजागर हो रहा था कि हत्या बलात्कार के बाद इसलिए की गई थी कि हत्यारा अपनी पहचान छिपा सके. वैसे भी आमतौर पर दहेज के लिए हत्याएं इस तरह नहीं की जातीं.

रामजी राठौर के बयानों से पुलिस वालों को कुछ खास हासिल नहीं हुआ, क्योंकि बातचीत करने पर ही समझ आ गया था कि यह मंदबुद्धि आदमी कुछ भी बोल रहा है. पत्नी की मौत का उस पर कोई खास असर नहीं हुआ था. अभयराज सिंह को वह कहीं से झूठ बोलता नहीं लगा. मंदबुद्धि लोगों को गुस्सा आ जाए तो वे हिंसक भी हो उठते हैं पर इतने योजनाबद्ध तरीके से हत्या करने की बुद्धि उन में होती तो वे मंदबुद्धि क्यों कहलाते.

बाबूलाल से पूछताछ की गई तो उस ने अपने खेत पर व्यस्त होने की बात कही. लेकिन हत्या का शक बेटे रामजी पर ही जताया. इशारों में उस ने पुलिस को बताया कि रामजी चूंकि पागल है इसलिए गुस्से में आ कर पत्नी की हत्या कर सकता है.

बाबूलाल ने अपनी बात में दम लाते हुए यह भी कहा कि मुमकिन है कि नीतू रामजी के साथ सोने से इनकार कर रही हो, इसलिए रामजी को उसे मारने की हद तक गुस्सा आ गया हो और इसी पागलपन में उस ने नीतू की हत्या कर डाली हो.

रेपिस्ट बाप ठहराया गुनहगार

17 जुलाई, 2023 को मुरादाबाद पोक्सो कोर्ट प्रथम की अदालत में कुछ ज्यादा ही गहमागहमी थी. उस दिन अब से 5 साल पहले गांव रतनपुर कलां निवासी रीना नाम की महिला ने थाना मझोला, मुरादाबाद में 19 जून, 2018 को अपने पति बलवीर उर्फ राजेश के खिलाफ उस की 11 साल की बेटी के साथ लगातार बलात्कार करने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी.

17 जून, 2023 को उक्त केस का फैसला विशेष न्यायाधीश (पोक्सो ऐक्ट) कोर्ट नंबर (1) डा. केशव गोयल की अदालत में इस बहुचर्चित केस का फैसला आना था. उस दिन अदालत खचाखच भरी हुई थी. अदालत परिसर में वकीलों, पुलिस वालों व मीडिया का जमावड़ा था. न्यायाधीश डा. केशव गोयल ने जैसे ही कोर्ट रूम में प्रवेश किया तो वहां उपस्थित लोगों, वकीलों, पुलिस वालों ने उन्हें खड़े हो कर सम्मान दिया. न्यायाधीश ने लोगों को बैठने का इशारा करते हुए कुरसी पर बैठते ही आदेश दिया कि अदालत की काररवाई शुरू की जाए.

न्यायाधीश का आदेश मिलते ही सरकारी वकील मनोज वर्मा व अभिषेक भटनागर ने दलील देते हुए एक स्वर में कहा, “मी लार्ड, हम अदालत में 6 गवाहों को प्रस्तुत कर चुके हैं, जिन के बयानों से साफ जाहिर है कि अदालत के कटघरे में खड़ा व्यक्ति बलवीर उर्फ राजेश ने ही अपनी सगी बेटी नीलम, जिस की उम्र घटना के समय 11 साल थी, के साथ बलात्कार किया व लगातार करता रहा. इस घिनौने कृत्य वाले व्यक्ति को कठोरतम सजा दी जाए. ऐसा व्यक्ति समाज में रहने लायक नहीं है, इस को कितनी भी बड़ी सजा दी जाए वह कम है.”

बचाव पक्ष के वकील शमशाद अहमद ने कहा, “मी लार्ड, मेरे मुवक्किल को झूठा फंसाया जा रहा है. मामला 2 करोड़ रुपए से संबंधित है. मेरे मुवक्किल ने अपना पुश्तैनी मकान व खेती की जमीन बेच कर 2 करोड़ रुपए अर्जित किए थे. पत्नी रीना उन्हें हड़पना चाहती थी. रीना को जब पैसा नहीं दिया गया तो उस ने झूठा केस करा दिया.”

वकील शमशाद अहमद ने अदालत को भरोसा दिलाते हुए कहा, “वह निर्दोष है व शादीशुदा है. उस के परिवार के पालनपोषण का पूरा दायित्व उस पर है. उसे कम से कम सजा दी जाए.”

इस का विरोध करते हुए सरकारी वकील मनोज वर्मा व अभिषेक भटनागर ने अदालत को बताया, “मी लार्ड, अभियुक्त बलवीर उर्फ राजेश की बड़ी बेटी नीलम का बयान ही अहम है, जिस ने अपने साथ हुई दङ्क्षरदगी के विषय में बयान दर्ज करवाया है कि उस के साथ क्या हुआ है.

“धारा 164 के तहत पीडि़ता के बयान, पीडि़ता की मां रीना का शपथ पत्र, मौखिक बयान थाना मझोला की कांस्टेबल नीतू चौधरी का मौखिक बयान शपथ पत्र, मुरादाबाद जिला चिकित्सालय की मुख्य चिकित्सा अधीक्षिका (सीएमएस) डा. सुनीता द्वारा मौखिक बयान का शपथ पत्र, एएचएम इंटर कालेज रतनपुर के टीचर जावेद खान का बयान व शपथ पत्र कि पीडि़ता लडक़ी कक्षा- 6 तक स्कूल में पढ़ी थी, उस की जन्म तिथि 5 जनवरी, 2009 है.

“मी लार्ड, ये सारे सबूत आरोपी को सजा दिलाने के लिए अहम हैं. इसलिए आरोपी बलवीर उर्फ राजेश को कठोरतम सजा दी जाए.”

जज ने बलवीर को सुनाई सजा

वकीलों की बहस सुनने के बाद विशेष न्यायाधीश डा. केशव गोयल ने कहा कि अदालत में पेश किए गए तमाम सबूतों, गवाहों के बयानों और दोनों पक्षों के वकीलों की जिरह के बाद अदालत आरोपी बलवीर उर्फ राजेश को दोषी ठहराती है.

उन्होंने भादंसं की धारा-6 पोक्सो ऐक्ट के तहत उसे 20 वर्ष कैद की सजा के अलावा 80 हजार रुपए का जुरमाना भी लगाया. उन्होंने कहा कि अर्थदंड अदा न किए जाने की स्थिति में मुजरिम को 1 माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा. धारा 376 (भादंसं) का आरोप उक्त दंडादेश में समाहित माना जाएगा.

भादंवि की धारा 323 में उसे 6 माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी. अर्थदंड की 80 हजार की धनराशि में से 60 हजार रुपए पीडि़ता को दिए जाएंगे. सभी सजाएं साथसाथ चलेंगी. उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व में जिला कारागार में बिताई गई अवधि उपरोक्त दंड में समायोजित की जाएगी.

मुलजिम बलवीर उर्फ राजेश मूलत: उत्तर प्रदेश के जिला मुरादाबाद के थाना पाकबड़ा के अंतर्गत रतनपुर कलां कस्बे का निवासी है. उस का विवाह गांव हजरत नगर गढ़ी की रीना से हुआ था. शादी के बाद बलवीर उर्फ राजेश 4 बच्चों का पिता बना, जिन में 2 बेटियां तथा 2 बेटे हैं. बलवीर शुरू से ही आपराधिक प्रवृत्ति का था.

घटना से 5 साल पहले बलवीर की छोटी बेटी सीमा का जब जन्म हुआ था, तब रीना ने बलवीर की बुआ की बेटी कमलेश को घरेलू कामकाज के लिए बुला लिया था. बलवीर ने नाबालिग कमलेश के साथ बलात्कार किया, जिस कारण रतनपुर कलां कस्बे में रोष व्याप्त हो गया. समाज ने बलवीर का हुक्कापानी बंद कर दिया था.

शर्मिंदगी के कारण रीना अपनी छोटी बेटी को ले कर अपने मायके हजरत नगर गढ़ी आ गई थी. बलवीर को कस्बे के लोगों ने लानतें देनी शुरू कीं. बलवीर जब बदनाम होने लगा तो उस ने रतनपुर कलां कस्बे से अपना मकान व खेती की जमीन जिस का मूल्य करीब 2 करोड़ रुपए था, बेच कर 2 बेटों व बड़ी बेटी नीलम को ले कर मुरादाबाद के थाना मझोला के अंतर्गत कांशीराम कालोनी में आ कर रहने लगा था. उस समय नीलम की उम्र 11 साल थी.

बड़ी बेटी से किया रेप

एक दिन बलवीर खूब शराब पी कर घर आया था. उस ने अपनी बड़ी बेटी नीलम को अपनी हवस का शिकार बना डाला. नीलम के दोनों भाई छोटे नासमझ थे. पिता के डर की वजह से नीलम ने यह बात किसी को नहीं बताई. इस के बाद तो बलवीर नीलम के साथ रोजाना ही बलात्कार करता रहा. जब कभी नीलम ने विरोध करती तो वह उस के साथ मारपीट करता था. नीलम जब रोतीचिल्लाती कहती कि मुझे मेरी मां के पास ले चलो तो वह अकसर उस के साथ मारपीट करता था.

अब बलवीर को यह एहसास हो गया कि मामला अगर खुल गया तो क्या होगा. बेटी नीलम ने यदि मोहल्ले वालों को बता दिया तो उसे जेल जाना पड़ सकता है. बलवीर अपने 2 बेटोंव बेटी नीलम के अलावा सगी बुआ की बेटी कमलेश के साथ रहता था. कमलेश उस के साथ पत्नी की तरह रहती थी. उस के कुकर्मों का भेद न खुले, इस के लिए उस ने गजरौला जिला अमरोहा के पास कांकाठेर में एक मकान खरीद लिया और उस में जा कर शिफ्ट हो गया था. वहां पर भी वह अपनी बेटी नीलम को अपनी हवस का शिकार बनाता रहा.

पिता के दुष्कर्म से नीलम जब ज्यादा ही परेशान हो गई तो एक दिन वह अपने पिता से भिड़ गई. जोरजोर से चिल्लाने लगी तो बलवीर की कथित पत्नी कमलेश ने उसे खाने में चूहेमार दवा मिला कर खिला दी. इस के बाद उस की हालत बिगड़ गई तो उसे उल्टी दस्त होने लगे.

जहर उल्टी दस्तों में निकल गया. जब नीलम नौरमल हुई तो भेद खुलने के डर से बलवीर ने उस से कहा कि ठीक है, हम तुम्हें तुम्हारी मम्मी के पास ले चलेंगे. लेकिन तू इस बात का ध्यान रखना कि बलात्कार की बात अगर किसी को बताई तो मैं तेरे दोनों भाइयों की हत्या कर दूंगा.

नीलम ने वादा कर लिया कि वह किसी को नहीं बताएगी. फिर फरवरी 2018 में बलवीर अपनी बेटी नीलम को थाना पाकबड़ा के आगे गांव गुमसानी के पास छोड़ कर चला गया. गांव गुमसानी में नीलम की बुआ पनवेश्वरी का घर था, वह वहां पर चली गई थी. इस की सूचना पनवेश्वरी ने नीलम की मां रीना को दी. सूचना मिलते ही वह अपनी बेटी नीलम को ले कर अपने मायके हजरत नगर गढ़ी चली आई.

गांव में रीना का खर्च उस के भाई उठा रहे थे. बेटी नीलम ने मां को बताया कि पहले पापा बलवीर मुरादाबाद की कांशीराम नगर कालोनी में रहते थे, अब वह गजरौला के गांव कांकाठेर में रह रहे हैं.

रीना ने बेटी से कहा कि देखो, तुम लोग अब बड़े हो रहे हो. अब अपनी जरूरत का सामान जब बांधो और चलो, तुम्हारे पापा बलवीर के पास चलते हैं. वहीं पर हम सभी रहेंगे.

इतना सुनते ही नीलम फफकफफक कर रोने लगी और बोली, “मम्मी, मैं वहां पर अब कभी नहीं जाऊंगी.”

बेटी को इस तरह रोता देख मां रीना बोली, “बेटी, क्या बात है?”

तब नीलम ने रोते हुए बताया कि पापा उस के साथ गंदा काम करते हैं. रोजाना शराब पी कर आना व मेरे साथ रोजाना गंदा काम करना उन की आदत में शुमार था.

इतना सुनते ही रीना गश खा कर जमीन पर गिर गई और बेहोश हो गई. जब उसे होश आया तो उस ने सीने पर पत्थर रख कर बेटी नीलम से कहा, “मैं अब उसे कभी माफ नहीं करूंगी.”

रीना अपनी बेटी को ले कर मुरादाबाद मोहल्ला खुशहालपुर अपने रिश्तेदार करतार सिंह के पास पहुंची. करतार सिंह एक जानेमाने वकील थे. रीना और ऊषा ने सारी बातें उन्हें बताईं. बात सुन कर उन का भी सिर शर्म से झुक गया. उन्होंने एसएसपी के नाम रीना की तरफ से एक प्रार्थना पत्र दिया.

पत्र पढ़ कर तत्कालीन एसएसपी हेमराज मीणा भी स्तब्ध रह गए. बोले समाज में यह क्या हो रहा है इंसान भी अब जानवर बन चुका है. उन्होंने रीना के प्रार्थना पत्र पर लिखा कि तुरंत इन की रिपोर्ट दर्ज कर इस व्यक्ति को गिरफ्तार कर जेल की सलाखों में पहुंचाया जाए.

मशक्कत के बाद बलवीर चढ़ा पुलिस के हत्थे

उस समय थाना मझोला के एसएचओ विकास सक्सेना थे. उन्होंने तुरंत ही बलवीर के खिलाफ मुकदमा लिख कर पहले मुरादाबाद के कांशीराम कालोनी में दबिश दी. पता चला कि वह वहां से मकान खाली कर गजरौला के कांकाठेर में मकान खरीद कर रह रहा है. पुलिस ने कांकाठेर गांव में दबिश दी तो वह पहले ही मकान में ताला डाल कर कथित पत्नी कमलेश व दोनों बेटों के साथ फरार हो गया था.

कांकाठेर गांव में वह अपना नाम बदल कर रह रहा था. उस ने अपना नाम राजेश बता रखा था. पता चला कि बलवीर उर्फ राजेश ने कुछ समय पहले वैगनआर गाड़ी खरीदी थी. वह अपने परिवार के साथ उस गाड़ी से फरार हो गया था.

पुलिस ने उस का फोन नंबर सर्विलांस पर लगा रखा था. पुलिस को उस की लोकेशन राजस्थान में मिली थी. पुलिस ने राजस्थान में छापा मारा तो वहां से भी फरार हो चुका था. अब उस की लोकेशन पंजाब व हरियाणा की आ रही थी.

वकील करतार सिंह भी पुलिस के साथ उसे पकड़वाने में मदद कर रहे थे. पुलिस को गाड़ी की जरूरत थी, लेकिन रीना के पास इतना पैसा नहीं था कि वह कोई गाड़ी किराए पर ले कर पंजाब हरियाणा जा सके. तब एसएचओ विकास सक्सेना ने अपने पास से 5 हजार रुपए दिए, 5 हजार रुपए रीना के वकील करतार सिंह ने दिए. 10 हजार रुपए में इन्होंने टैक्सी स्टैंड से गाड़ी बुक कर पंजाब व हरियाणा की खाक छानते रहे.

बलवीर उर्फ राजेश अपनी लोकेशन लगातार बदल रहा था. पता चला कि वह पंजाब हरियाणा से भाग कर अमरोहा आ गया था. पुलिस ने उस की लोकेशन ट्रेस कर गजरौला जिला अमरोहा से उसे गिरफ्तार कर लिया था. पूछताछ करने पर उस ने आसानी से अपना अपराध स्वीकार कर लिया था. बेटी नीलम ने अदालत को अपनी आपबीती 164 के बयान में बताई. कोर्ट में यही बयान अहम माना गया.

20 जून, 2018 को जिला अस्पताल की मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. सुनीता पांडेय ने पीडि़ता नीलम का मैडिकल परीक्षण किया. डा. सुनीता पांडेय ने अपने शपथ में कहा कि उस दिन थाना मझोला की कांस्टेबल वंदना, उस की मां रीना नीलम को ले कर अस्पताल आई थीं. पीडि़ता पूरे होशोहवास में थी.

पीडि़ता शादीशुदा नहीं थी, उस की माहवारी 10 दिन पहले हुई थी. पीडि़ता के सैक्स आर्गन्स पूरी तरह से विकसित थे. डा. सुनीता पांडेय द्वारा पीडि़ता की योनि के द्रव की स्लाइड बनाई गई थी. उस को पैथोलौजिस्ट के पास जीवित शुक्राणु के लिए भेजा था.

आयु के लिए रेडियोलौजिस्ट के पास एक्सरे के लिए रेफर किया. पीडि़ता के आंतरिक प्राइवेट पाट्र्स पर भी कोई चोट के निशान नहीं थे. हाइमन पुराना फटा जुड़ा हुआ था, यह रिपोर्ट डा. सुनीता पांडे के द्वारा तैयार की गई थी. साक्ष्य के रूप में अदालत ने इसे माना जो अभियुक्त को सजा सुनाने में अहम रहा.

इस मामले में सजा दिलवाने में कोर्ट के 2 कोर्ट मोहर्रिर महेश व पूनम का अहम रोल रहा. इन्होंने गवाहों की समय से कोर्ट में गवाही करवाई, जिस में अभियुक्त को 20 साल का कारावास हो सका.

सजा सुनाए जाने के बाद पुलिस ने मुजरिम बलवीर उर्फ राजेश को हिरासत में लेने के बाद मुरादाबाद की जिला जेल पहुंचा दिया.

—कथा में कमलेश व नीलम परिवर्तित नाम है.

प्रेमी के लिए सिंदूर मिटाया

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से करीब पंद्रह किलोमीटर दूर सुखी सेवनिया थाने के टीआई वी.बी.एस. सेंगर थाना परिसर में ही मौजूद विश्राम कक्ष में आराम के लिए गए थे. वे नींद की आगोश में जाते उस से पहले थाने में एक बदहवास हालत में महिला आई. उस ने अपना नाम अनीता कुशवाह बताया. वह थाना क्षेत्र की एकता नगर कालोनी में रहती थी.

उस ने बताया कि वह महाशिवरात्रि पर्व मनाने के लिए रायसेन में स्थित अपने मायके गई थी. वहां से लौट कर आई तो घर पर पति बबलू कुशवाह नहीं मिला.

यह सुनकर टीआई भी विचलित हुए. क्योंकि वे बबलू कुशवाह को जानते थे. वह ग्राम सचिव था और अकसर कालोनी की समस्याओं या परेशानियों को ले कर थाने आताजाता था. उन्हें भी खटका और अनहोनी की आशंका को सोचते हुए बिना देरी उस की पत्नी अनीता कुशवाह की शिकायत पर 21 फरवरी, 2023 की दोपहर लगभग डेढ़ बजे गुमशुदगी दर्ज कर ली.

इस के अलावा लापता व्यक्ति के संबंध में तहरीर को ले कर की जाने वाली काररवाई शुरू कर दी गई. टीआई ने तुरंत ही इलाका भ्रमण में निकले एसआई टिंकू जाटव को फोन कर के एकता नगर में जा कर पड़ताल करने के आदेश दिए. वह अपने हमराह हवलदार रामेश्वर और मनोहर राय के साथ मौके पर पहुंच गए. वहां वे मामले की तफ्तीश करते तब तक पीछे से अनीता कुशवाह भी रिपोर्ट दर्ज कराने के बाद घर आ चुकी थी.

सुराग ऐसा मिला कि पुलिस को परेशान करने वाली कडिय़ां जुड़ती चली गईं

अनीता कुशवाह से एसआई टिंकू यादव ने उस के पति बबलू कुशवाह के बारे में कुछ जानकारी लेनी चाही, जैसे उस के करीबी दोस्त, दुश्मन, उठनेबैठने वाले लोगों के नाम आदि. पत्नी ने बताया कि बबलू कुशवाह भोपाल शहर के कबाडख़ाने में रेलवे बर्थ के फरनीचर को बनाने का काम करता था. कई अन्य सवालों पर अनीता कुशवाह ने कोई ठोस मदद पुलिस को नहीं की.

इस के बाद पुलिस ने एकता नगर कालोनी की गलियों में ही पड़ताल का दायरा बढ़ाया. यह कालोनी भोपाल शहर से विस्थापित कर के बसाए गए परिवारों की थी. इस में एक घर उस के 2 छोटे भाइयों सोनू कुशवाह और मोनू कुशवाह का भी था. इस के अलावा एक अन्य गली में उस की मां कमला बाई का भी मकान था. सभी मकानों में एक विशेष बात यह थी कि केवल बबलू कुशवाह का मकान पूरी तरह से बना था, बाकी मकान अर्ध निर्मित थे.

पता चला कि नजदीक ही सेना का सामरिक महत्त्व वाला संस्थान है, जिस कारण एकता नगर में किसी भी मकान को पक्का बनाने की अनुमति नहीं दी जाती थी. बबलू कुशवाह पहले आ गया था, इस कारण ही उस का मकान ठीक तरह से बना था.

इन्हीं छोटीछोटी बातों के बीच पुलिस को पता चला कि बबलू कुशवाह की एकता नगर में रहने वाले असलम खान से नहीं बनती थी. पुलिस संदेह के आधार पर असलम खान को तलाशते हुए उस के पास पहुंची. वह मिल गया और पुलिस उसे पूछताछ के लिए तुरंत थाने ले आई.

लाश तक पहुंचने में पुलिस को आया पसीना

सुखी सेवनिया भोपाल देहात क्षेत्र में आने वाला थाना है. इस के बाद दूसरा जिला लग जाता है. कई गांव और बस्तियां दूरदूर बनी हैं. शुरुआती जांच और असलम खान को थाने में ले कर आतेआते रात हो चली थी. असलम खान पहले तो पुलिस के सामने नहीं टूटा. इसी बीच हवलदार मनोज राय ने मामले की जांच कर रहे एसआई टिंकू जाटव के कान में आ कर एक चौंका देने वाली जानकारी दी.

उस ने बताया कि असलम खान के लापता हुए बबलू कुशवाह की पत्नी अनीता के साथ अवैध संबंध हैं. इन्हीं कारणों से एक साल पहले दोनों के बीच जम कर विवाद भी हुआ था. यह बात हवलदार मनोज राय को बबलू कुशवाह के आसपास रहने वाले लोगों से पता चली थी. यह पता चलते ही टिंकू जाटव सख्त हुए और मनोवैज्ञानिक तरीके से असलम खान से पूछताछ की तो उस ने अपना गुनाह कुबूल कर लिया.

उस ने स्वीकार कर लिया कि बबलू कुशवाह की उस ने हत्या कर दी है. उस की लाश पुलपातरा नाले के पास छिपा दी है. हत्या की बात सुनते ही पूरे थाने में हडक़ंप मच गया. टीआई ने यह जानकारी एसडीओपी मंजु चौहान और एसपी (देहात) किरणलता केरकेट्टा को भी दी. मामला संवेदनशील भी था, क्योंकि मारने वाला दूसरे धर्म का असलम खान था. मामला सांप्रदायिक रंग न ले, उस से पहले ही पुलिस असलम खान को ले कर उस जगह पर पहुंची, जहां उस ने लाश को ठिकाने लगाया था.

लाश पुलपातरा नाले के पास सफेद पौलीथिन में लिपटी हुई थी. उस पर हरी घास कुछ इस तरह से बिछा दी थी ताकि शक न हो. घटनास्थल के नजदीक से काफी बदबू भी आ रही थी.

लाश बरामद होने के बाद पुलिस ने मौके पर बबलू कुशवाह के छोटे भाई सोनू कुशवाह को भी बुला लिया था. उस ने उस लाश की शिनाख्त अपने भाई बबलू कुशवाह के रूप में की. उस समय रात काफी हो चली थी इसलिए सुबह होते ही पुलिस ने फोरैंसिक टीम बुला ली थी.

पत्नी ने मिटाए थे घर में फैले सबूत

बबलू कुशवाह की लाश मिलने की खबर स्थानीय लोगों के अलावा मीडिया वालों को मिल चुकी थी. डा. सुनील गुप्ता की अगुवाई में फोरैंसिक टीम सबूत जुटाने में लगी थी. मृतक के सिर पर चोट, गले में धारदार हथियार के जख्म पाए गए. इस बारे में टीआई ने असलम खान से पूछा कि उस ने हत्या कहां की थी तो असलम ने कहा कि उस के ही घर पर.

इस के बाद एफएसएल की टीम सबूत जुटाने के लिए बबलू कुशवाह के घर पर गई. यहां फोरैंसिक टीम ने सबूत जुटाने का प्रयास किया तो वह हैरान हो गई. एफएसएल अधिकारियों को भी अहसास हो गया था कि यह सामान्य हत्याकांड नहीं है. क्योंकि जहां केमिकल डाल कर सबूत जुटाने का प्रयास किया जाता वहां भारी मात्रा में फिनायल से पोछा लगा मिलना पाया जाता. यह पोछा भी कुछ दिन पहले कई बार लगाया गया था.

हालांकि घर में ही रखी सिलाई मशीन पर खून के छींटे मिले. इस के अलावा दीवार पर खून के नमूने मिले. अब पुलिस का यहां से एक बार फिर माथा ठनका और यकीन हो गया कि असलम खान ने अब तक पूरी कहानी नहीं बताई है. उसे थाने ले जा कर पुलिस ने सख्ती बरती. वह बोला तो पुलिस के पैरों तले से जमीन खिसकती चली गई.

उस ने बताया कि कत्ल में एकदो नहीं बल्कि कई लोग शामिल थे. असलम खान ने रहस्य उजागर करते हुए बताया कि हत्याकांड को बबलू कुशवाह की पत्नी अनीता कुशवाह के इशारों पर अंजाम दिया गया. दिन, तारीख और समय का चुनाव भी उस ने ही तय कर के दिया था.

नाबालिग चाकू नहीं मार सका तो छीन कर असलम ने गले में घोंपा

असलम खान ने बताया कि अनीता कुशवाह के साथ उस का प्रेम प्रसंग पिछले 2 साल से था. यह बात बबलू कुशवाह को पता चल गई थी. लेकिन एकता नगर में उस की राजनीतिक पहुंच थी. उस ने एक साल पहले ही पत्नी को उस से मोबाइल पर बातचीत करते हुए रंगेहाथों पकड़ लिया था. जिस के बाद उस ने कहा था कि वह उस की 3 बेटियों को छोड़ कर असलम खान के साथ रहने चली जाए.

पति को यह बात पता चलने के बाद घर में अकसर छोटीछोटी बातों में कलह हुआ करती थी. जिस की जानकारी अनीता कुशवाह असलम को भी देती थी क्योंकि वह उस से बेहद प्यार करती थी और पति की रोज की कलह से निजात चाहती थी.

फिर उस ने पति की हत्या की योजना बनाई कि वह महाशिवरात्रि वाले दिन मायके रायसेन में पूजा का बहाना बना कर चली जाएगी. वह अपने साथ तीनों बेटियों को भी ले जाएगी. लेकिन जाने से पहले वह घर के पिछले दरवाजे का गेट खोल देगी. अनीता कुशवाह ने ही पति के घर आने का समय भी बता दिया था.

जिस के बाद असलम खान अपने साथ 14 साल के एक नाबालिग को ले कर गया. वह नाबालिग भी बबलू कुशवाह से रंजिश रखता था. दरअसल, एक बार उस का बबलू के बच्चों के साथ विवाद हो गया था. उस वक्त बबलू कुशवाह ने उस को चांटा मार दिया था. इसलिए वह भी उस को चाकू का एक वार अंधेरे में मारना चाहता था.

असलम खान ने पूछताछ में बताया कि बबलू कुशवाह जैसे ही घर में घुसा तो उस ने लोहे की रौड से जोरदार प्रहार किया. अचानक हुए हमले से वह शोर मचाने या विरोध करने की सोच ही नहीं सका. तभी उस को पेट पर कुछ चुभने जैसा अहसास हुआ. सामने वह नाबालिग था, जिस को उस ने तमाचा मारा था.

असलम खान ने देखा कि बबलू नाबालिग को देख चुका है. इस के बाद उस ने यह बोल कर उस से चाकू छीन लिया कि ऐसे नहीं मारते. फिर उस ने उस से चाकू ले कर चाकू का जोरदार प्रहार बबलू कुशवाह की गरदन पर कर दिया. इस के बाद एकएक कर के कई वार उस पर किए. खून के फव्वारे फूटते ही बबलू कुशवाह मौके पर ढेर हो गया.

नईम खान ने निभाई असलम से दोस्ती

बबलू कुशवाह की हत्या करने के बाद असलम खान ने इस की जानकारी रायसेन जिले में बैठी अनीता कुशवाह को फोन पर दी. प्रेमी द्वारा पति की हत्या कराने पर अनीता बहुत खुश हुई. इस के बाद असलम एकता नगर में ही रहने वाले दोस्त नईम खान के पास पहुंचा. दोनों अकसर साथ बैठ कर शराब पीते थे. वह भी अनीता कुशवाह के संबंधों की जानकारी रखता था.

असलम खान ने बताया कि उस ने बबलू कुशवाह को मार दिया है. लाश को ठिकाने लगाना है, जिस के लिए वह मदद चाहता है. नईम खान कबाड़े का काम करता था. जिस कारण वह घर पर कबाड़ा एक जगह रखने के लिए भक्कू जो प्लास्टिक का बड़ा बोरा होता है उस को दिया.

इस के बाद नईम खान की बाइक से असलम खान दोबारा पिछले दरवाजे के रास्ते बबलू के घर में घुसा. लाश को प्लास्टिक के बोरे में भरने के बाद पुलपातरा नाले पर ले गया. यहां वह अकसर मछलियां पकडऩे आता था. इस जगह पर कोई आताजाता नहीं है, यह उसे पता था.

नाले में लाश फेंकने के बाद असलम खान ने उस को हरी घास से ढंक दिया. ताकि किसी व्यक्ति को वहां कुछ पड़े होने का अहसास न हो. फिर दोनों घर आ कर चैन की नींद यह सोच कर सो गए कि अब उस की प्रेमिका और उस के बीच दीवार बनने वाला पति नहीं आएगा.

सबूत मिटाने के बाद गुमशुदगी दर्ज कराने पहुंची पत्नी

जिस दिन बबलू कुशवाह की हत्या हुई उस दिन महाशिवरात्रि थी. इस कारण जगहजगह शिव बारात निकल रही थी. जिस में प्रसाद के रूप में कई जगह भांग का वितरण किया जाता है. इसी कारण लोगों को ज्यादा हलचल होने पर भी आभास नहीं होगा, यह सोच कर अनीता कुशवाह ने योजना बनाई थी.

अनीता की शादी नाबालिग अवस्था में हुई थी. वह कभी भी मायके नहीं जाती थी. लेकिन योजना के तहत उस दिन उसे मायके जाना पड़ा था. लाश को ठिकाने लगाने के बाद अनीता कुशवाह को फिर फोन पहुंचा था. इस बार असलम खान ने उस को योजना बताई. उस ने कहा कि घर जा कर वह सबूत मिटाए और एक दिन बाद थाने पहुंच कर पति की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराए.

अनीता कुशवाह ने पूरे घर को अच्छी तरह से फिनायल से साफ किया. हालांकि वह सारे सबूत नहीं मिटा सकी और सीखचों के पीछे जा पहुंची. पुलिस ने बबलू कुशवाह मर्डर केस के आरोपियों असलम खान, नईम खान और अनीता कुशवाह को गिरफ्तार कर लिया. असलम खान और नाबालिग के खिलाफ हत्या, नईम खान के खिलाफ सबूत मिटाने में सहयोग और अनीता कुशवाह के खिलाफ साजिश रचने का मामला 22 फरवरी, 2023 को दर्ज कर लिया.

पूरी परतें खंगालने के बाद 23 फरवरी को आरोपियों को अदालत में पेश किया गया. जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया, जबकि नाबालिग को बाल न्यायालय में पेश कर बाल सुधार गृह भेजा गया.

बबलू कुशवाह की 3 बेटियां थीं, जिस में बड़ी बेटी 14 तो दूसरी 12 और तीसरी 9 साल की थी. उन्हें बाल कल्याण समिति के सामने पेश किया गया. क्योंकि पिता की हत्या के आरोप में मां जेल चली गई थी. अब उन की परवरिश कौन करेगा, यह बाल कल्याण समिति तय करेगी.

न्यूज एंकर सलमा सुलताना मर्डर मिस्ट्री – भाग 3

जांच के दरमियान रौबिंसन गुडिय़ा को यह जानकारी मिली कि यूनियन बैंक औफ इंडिया की कोरबा शाखा से सलमा ने लोन लिया हुआ था, बैंक से पता करने पर जानकारी मिली कि उस के लोन की ईएमआई तो लगातार मधुर साहू द्वारा जमा करवाई जा रही है.

उन्हें कुछ बातें अपने आप में शंक पैदा करने वाली महसूस हुईं. उन्होंने सलमा सुलताना की गुमशुदगी को एक चुनौती के रूप में लिया. इस मामले को ले कर जांच को आगे बढ़ाना शुरू कर दिया. उन्होंने कुछ लोगों के बयान लिए तो उन्हें यह महसूस हुआ कि मामला किसी रहस्यमयी हत्या का है और घटना का परदाफाश किया जा सकता है.

क्योंकि 21 अक्तूबर, 2018 के बाद सलमा का फेसबुक, इंस्टाग्राम अकाउंट बंद हो गया था. उस में कोई पोस्ट नहीं थी और मनोवैज्ञानिक तथ्य यह है कि कोई भी बौद्धिक या सामाजिक व्यक्ति, जो पत्रकारिता और सार्वजनिक जीवन में है, इस तरह सोशल मीडिया से अचानक गायब नहीं हो सकता.

इधर सलमा का इतने लंबे समय तक गायब रहना अपने आप में कई सवाल खड़े कर रहा था कि आखिर सलमा गई कहां या फिर किसी ने उस की हत्या कर दी है.

आईपीएस रौबिंसन गुडिय़ा ने कोरबा में तैनाती होने के बाद न्यूज चैनल में काम कर रही एंकर सलमा सुलताना से जुड़े गवाहों के बयान एक बार फिर से लेने शुरू किए. बयान लेने के दौरान 2 महिला सविता और कोमल और 3 पुरुषों के कथन में विरोधाभास महसूस किया गया.

इन सब से सख्ती से पूछताछ करने पर 21 अक्तूबर, 2018 एलआईजी 17 शारदा विहार में मधुर साहू एवं कौशल श्रीवास के द्वारा सलमा सुलताना का गला घोट कर हत्या करने और उस की लाश को अतुल शर्मा की मदद से भवानी मंदिर के पास सडक़ किनारे दफनाए जाने की बात सामने आई.

सविता ने भी पुलिस को अपने बयान में बताया कि उस ने खुद मधुर साहू और कौशल श्रीवास को सलमा की हत्या करते देखा था, यही कारण है कि मधुर ने उसे अपने यहां नौकरी पर रखा हुआ था. उस ने यह सब घटना कोमल को बता दी थी, जिस के कारण मधुर साहू दोनों को अपने यहां काम पर रखने को मजबूर था.

इस के बाद जैसे ही पुलिस मधुर साहू के गंगा श्री जिम, अमरैया पारा पहुंची तो पता चला कि वह फरार हो चुका है. उस का सहयोगी कौशल श्रीवास भी गायब मिला. पुलिस ने अतुल शर्मा से पूछताछ कर अपने तौर तरीके से जांच को आगे बढ़ाना शुरू किया. उस ने बताया कि मधुर साहू ने उस के नाम पर भी बैंक से लोन दिलवा कर पैसा अपने पास रख लिया था. इसी तरह कुछ लोगों के साथ और भी जालसाजी की है, जिस की शिकायत आईटीआई थाने में की गई है.

5 साल बाद ऐसे खुली मर्डर मिस्ट्री

आईपीएस जांच अधिकारी रौबिंसन गुडिय़ा ने अतुल शर्मा को अपने विश्वास में लिया और थोड़े से ही पुलिसिया दबाव में उस ने सारी हकीकत बयान कर दी. वह पुलिस से मधुर साहू के संदर्भ में इधरउधर की बातें तो खुल कर करने लगा था, मगर जैसे ही रौबिंसन गुडिय़ा ने सलमा सुलताना के बारे में सवाल किया तो वह घबराया और बोला कि वह सलमा को नहीं जानता है.

मगर जब कड़ी से कड़ी मिलने लगी तो उसे स्वीकार करना पड़ा कि वह सलमा सुलताना की हत्या के बाद उस के शव को दफनाने में मददगार बना था. अब मुख्य आरोपियों की तलाश जारी थी. पुलिस को यह जानकारी मिली थी कि दोनों आरोपी मधुर साहू और उस का कर्मचारी कौशल श्रीवास दिल्ली में छिपे हुए हैं. बीचबीच में वह अपने परिचितों से बात कर रहे हैं और रुपए मंगा रहे हैं.

इसी बीच जून 2023 महीने में जहां सलमा की लाश दफनाई गई थी, पुलिस को शुरुआती पूछताछ में मिली जानकारी के बाद सस्पेक्टेड जगह के आसपास में सेटेलाइट डेटा, थर्मल इमेजिंग एवं ग्राउंड पेनेट्रेशन राडार मशीन और भूवैज्ञानिक की मदद से मृत देह अस्थियों के बारे में पता करने का प्रयास शुरू किया गया.

अभी वहां कोरबा से बिलासपुर को जोडऩे वाला नैशनल हाईवे बन चुका है. इसलिए पुलिस को सफलता नहीं मिल पाई. यह कथा लिखे जाने तक सलमा सुलताना के शव की अस्थियां पुलिस को बरामद नहीं हुई थीं. अब पुलिस ने तीनों आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद स्पष्ट किया कि चिह्नित जगह पर आगे की काररवाई न्यायालय के आदेश के बाद शुरू की जाएगी. क्योंकि जहां इन्होंने लाश दफनाई थी, वहां अब हाईवे बन चुका है.

पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर 14 अगस्त, 2023 को आरोपी मधुर साहू और कौशल श्रीवास को उस समय कोरबा जिले के कटघोरा बाईपास से गिरफ्तार कर लिया, जब वह कोरबा की तरफ आ रहे थे.

26 वर्षीय सलमा सुलताना की हत्या के आरोपी 37 वर्षीय मधुर साहू निवासी साबिन अमरैया पारा, 17 शिवाजी नगर, कोरबा, कौशल श्रीवास (29 वर्ष) निवासी साकिन दर्री सिंचाई विभाग, थाना दर्री, जिला कोरबा एवं अतुल शर्मा (26 वर्ष) निवासी साकिन दर्री जिला कोरबा को भादंवि की धारा 302, 201, 34 के तहत गिरफ्तार कर तीनों से पूछताछ की गई.

पुलिस ने मधुर साहू की कार सीजी12ए वी1615 और लैपटौप जिस में कई संदिग्ध वीडियो और फोटोग्राफ्स मिले हैं, जांच के लिए जब्त कर लिया गया. पुलिस को दिए गए बयान में तीनों ने हत्या की बात स्वीकार कर ली. आईपीएस अधिकारी रौबिंसन गुडिय़ा द्वारा 5 साल पहले हुए हत्याकांड का खुलासा करने की पुलिस अधिकारी ही नहीं पब्लिक भी सराहना कर रही है.

रोचक तथ्य यह भी है कि सलमा सुलताना की बौडी को बातचीत में ‘जिमी की बौडी’कहने वाले ये तीनों आरोपी आखिरकार पुलिस के सामने सच बताने को विवश हो गए और अंतत: पुलिस ने मधुर साहू के पालतू डौगी जिमी को भी बरामद कर लिया.

इस से स्पष्ट हो गया कि जिम्मी जिंदा था और वे बातचीत में जिस जिम्मी का उल्लेख करते थे. दरअसल, वह सलमा सुलताना का जिक्र हुआ करता था. तीनों को पूछताछ के बाद 15 दिनों के पुलिस पुलिस रिमांड पर ले लिया. कथा लिखने तक पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही थी.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

17 साल बाद खुला मर्डर मिस्ट्री का राज

न्यूज एंकर सलमा सुलताना मर्डर मिस्ट्री – भाग 2

सलमा सुलताना कुछ दिन अपने पिता एम.डी. मानिक के कुसमुंडा स्थित आवास में रहने के बाद जब वापस 21 अक्तूबर, 2018 को अपनी स्कूटी से जब मधुर साहू के आवास एलआईजी 17 शिवाजी नगर पहुंची तो देखा नजारा पहले जैसा नहीं है.

भीतर के कमरे में मधुर और किसी लडक़ी की आवाज सुनाई दी. दोनों बातें कर रहे थे. यह सुनना था कि सलमा सुलताना मानो आसमान से जमीन पर गिर पड़ी. उस की आंखों के आगे मधुर और उस के प्रेम संबंधों के दृश्य घूमने लगे. वह कितना प्यार करती है मधुर से, मगर यह तो छिपा रुस्तम निकला.

मधुर साहू ने बड़ी चतुराई के साथ सलमा के नाम यूनियन बैंक औफ इंडिया से 7.50 लाख रुपए लोन ले कर वहां वह पैसा अपने पास रख लिया था. उस ने वादा किया था कि सलमा के भाई को जिम में पार्टनर रखेगा. अब वह उस से भी मुंह चुरा रहा था.

अब धीरेधीरे मधुर की असलियत उस के सामने खुलती चली जा रही थी. पहले शादीशुदा होना फिर कई लड़कियों के साथ उस के संबंध और फोन पर बातचीत ने सलमा के सामने प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया था. लेकिन उस दिन तो वह प्रत्यक्ष रूप से देख रही थी कि उस के साथ कमरे के भीतर कोई लडक़ी है.

यह सब देख कर उस का मिजाज बिगड़ गया और उस ने अधिकारपूर्वक मधुर को बाहर बुलाया. जब मधुर साहू कमरे से बाहर आया तो सलमा ने नाराज होते हुए कहा, “यह सब क्या हो रहा है, तुम मुझे धोखा दे रहे हो.”

इतना सुन कर मधुर साहू मुसकराया और बोला, “तुम मेरे साथ शादी करने का सपना देखना भूल जाओ और हां, संबंध रखना हो तो बात दूसरी है.”

“तुम ने मेरे साथ क्या वादा किया था, वह भूल गए क्या?” सलमा ने पूछा.

“वादे तो होते ही हैं तोडऩे के लिए, मैं तो कह रहा हूं न, अब शादी ब्याह की बात भूल जाओ और सुन लो मैं किसी एक बंधन में नहीं रह सकता.”

“तुम मेरे साथ धोखा नहीं कर सकते, तुम जानते नहीं, मैं कौन हूं.” सलमा ने उसे धमकाया.

इस बीच कमरे से लडक़ी बाहर आ गई और दोनों को देखते हुए वह वहां से बाहर चली गई.

“देखो सलमा, मैं शादी करने की स्थिति में नहीं हूं. मैं शादीशुदा हूं, यह तुम जान चुकी हो. हां, साथ रहो, मेरे लायक जो भी बात हो बता देना, मैं हमेशा तुम्हारे साथ रहूंगा.”

सलमा का उसी की चुनरी से घोंटा गला

दोनों आपस में बात कर रहे थे और दोनों के बीच गरमागरमी बढ़ती चली गई. इसी दरमियान गुस्से में आ कर के मधुर साहू ने सलमा को थप्पड़ जड़ दिया. इस से सलमा बिफर पड़ी.

मधुर साहू एक हृष्टपुष्ट शख्स था. वह सलमा पर भारी पड़ रहा था. इसी समय दूसरे कमरे से उस का सहयोगी कौशल श्रीवास आ गया. मधुर के धोखे को देख कर सलमा ने आंसू बहाते हुए कहा, “तुम ने तो मेरी जिंदगी बरबाद कर दी. मैं ने तुम पर विश्वास किया था, अब मैं किसी को मुंह दिखाने के काबिल भी नहीं रही.”

यह कह कर के वह जाने लगी तो मधुर साहू ने उस का रास्ता रोक लिया और बोला, “देखो, मेरे सामने नौटंकी मत करो. तुम्हारे कदम मुझे ठीक नहीं लग रहे हैं.”

मधुर की मंशा को समझ कर सलमा बोली, “तुम्हें मेरे एप्रोच के बारे में मालूम नहीं है, मैं तुम्हें बरबाद कर दूंगी, जेल भिजवा दूंगी. मेरी एक शिकायत पर पुलिस तुम्हें उठा कर ले जाएगी.”

“अच्छा तो फिर तुम पुलिस के पास कभी जा ही नहीं पाओगी.” यह कहते हुए मधुर की आंखों में एक अलग ही चमक आ गई थी. उस ने सलमा का गला दबोच लिया और मारपीट करने के बाद उस की चुनरी से उस का गला दबाता चला गया. पास खड़े कौशल श्रीवास ने चीखतीछटपटाती सलमा के पांव पकड़ लिए थे.

थोड़ी ही देर में सलमा सुलताना वहां मृत पड़ी थी. यह दृश्य मधुर साहू के यहां नौकरानी का काम करने वाली सविता ने देख लिया था. उसे रुपए का लालच और पुलिस का डर दिखा कर के दोनों ने चुप रहने के लिए मना लिया. फिर देर रात मधुर और कौशल अपने एक सहयोगी अतुल शर्मा के साथ कार सीजी12ए वी1615 में सलमा के शव को रूमगढ़ा ले गए और उन्होंने शव को ‘जिमी की बौडी’ कह कर संबोधित करने का कोडवर्ड बना लिया. जिमी मधुर का पालतू डौगी था.

यह सब मधुर साहू ने इसलिए किया ताकि आगे कभी बातचीत मोबाइल पर हो तो कोई इस कोडवर्ड को समझ न सके. वहां खेत में सलमा के शव को ठिकाने लगाने की नाकामी के बाद कोरबा दर्री मुख्य सडक़ पर कोहडिय़ा, भवानी मंदिर के पास सडक़ किनारे गड्ढे में डाल कर ऊपर से मिट्टी डाल कर दफन कर दिया.

इस बीच सलमा के घर वालों ने उस की कोई खोजखबर नहीं ली. सलमा की बिंदास जीवनशैली को देख कर वे मानते रहे कि वह अपने पत्रकारिता के कार्य में व्यस्त है. मगर 20 जनवरी, 2019 को सलमा सुलताना के पिता एम.डी. मानिक का इंतकाल हो गया. पिता के अंतिम संस्कार में सलमा का मौजूद नहीं होना रिश्तेदारों को हैरानपरेशान कर रहा था. और यह चर्चा का सबब बन गया कि आखिर सलमा कहां चली गई है.

इस के बाद घर वालों ने सलाहमशविरा कर के कुसमुंडा थाने में सलमा सुलताना की गुमशुदगी दर्ज कराई. पुलिस ने कुछ लोगों के बयान दर्ज किए और कोई जानकारी नहीं मिलने पर फाइल बंद कर दी.

आईपीएस रौबिंसन गुडिय़ा ने खोली फाइल

घटना को 4 साल से ज्यादा बीत गए. इस दौरान कोरबा में आईपीएस व एसपी (सिटी) राबिन्सन गुडिय़ा आए. उन की नजर सलमा की गुमशुदगी की फाइल पर पड़ी. जब उन्होंने सलमा के फोटोग्राफ पढ़े और लोगों के बयान देखे तो महसूस हुआ कि सलमा के साथ कुछ अनहोनी हो गई है. इस के बाद उन्होंने इस की खोजखबर लेनी शुरू कर दी.

एक दिन खुद आईपीएस रौबिंसन गुडिय़ा कुसमुंडा स्थित सलमा सुलताना के घर जा पंहुचे और घर वालों से बातचीत की. यहां उस के भाई और अन्य लोगों ने जो जानकारी दी, उस के आधार पर उन्होंने जांच को गति दी. रौबिंसन गुडिय़ा को पता चला कि 21 अक्तूबर को सुबह सलमा घर से निकली थी. वह स्कूटी ले कर गई थी, मगर घर में बताया नहीं था.

इसलिए 22 तारीख को जब स्कूटी के चोरी की शंका से रिपोर्ट लिखाने की बात की जाने लगी तो यह खबर जिम संचालक मधुर साहू को हो गई, उस दिन रिपोर्ट लिखवा दी गई कि स्कूटी चोरी चली गई है. मगर दूसरे दिन सविता और कोमल ने आ कर के स्कूटी को वापस रख दिया था. उन्होंने बताया कि सलमा पुणे महाराष्ट्र चली गई है और अब वह वहीं काम करेगी.

 

न्यूज एंकर सलमा सुलताना मर्डर मिस्ट्री – भाग 1

सलमा सुलताना जब मधुर साहू के अमरैया पारा, कोरबा स्थित जिम पहुंची तो वह किसी दूसरे कमरे में कुछ कर रहा था. उस के एक कर्मचारी ने आ कर जब उसे बताया कि एक पत्रकार सिटी न्यूज चैनल से आप का इंटरव्यू लेने आई है तो मधुर साहू ने कुछ सोचते हुए कहा, “उसे मेरे चैंबर में बैठाओ, मैं अभी आता हूं.”

थोड़ी देर में जब वह केबिन में पहुंचा तो एक तीखे नाकनक्श की आकर्षक युवती को अपने चैंबर में देखा तो देखता ही रह गया. उस के मुंह से शब्द ही नहीं फूट रहे थे. मधुर उस की सुंदरता पर उसी समय मर मिटा था. मधुर को सामने खड़ा देख सलमा सुलताना ने उसे ऊपर से नीचे तक देखा और प्रोफेशनल तरीके से मुसकराते हुए कहा, “मैं सिटी न्यूज चैनल से आई हूं. आप से मिलने…”

यह सुनते ही मधुर ने मुसकराते हुए कहा, “आप का बहुत बहुत स्वागत है, बताइए आप की क्या सेवा कर सकता हूं.”

सलमा ने एक रहस्यमय मुसकराहट बिखेरते हुए कहा, “दरअसल, हमारे केबल चैनल में एक नया विशेष शो शुरू किया जा रहा है, मैं उसी सिलसिले में आप का इंटरव्यू लेने के लिए आई हूं.”

यह सुन कर मधुर बहुत खुश हुआ. इस से पहले कभी भी उस का कोई इंटरव्यू किसी चैनल पर नहीं आया था. उस ने अपनी कुरसी पर बैठ कर सलमा सुलताना की ओर देखते हुए कहा, “आप का शुभ नाम जान सकता हूं, प्लीज?”

सलमा सुलताना बोली, “जी, मैं सलमा सुलताना हूं. हमारे चैनल हैड के पास आप के जिम की खूब तारीफ पहुंच रही है, इसीलिए मैं आप के यहां इंटरव्यू के लिए आई हूं.”

“मेरा इंटरव्यू. मैं कोई विशेष तो नहीं हूं और आज से पहले कभी कोई पत्रकार मुझ से मिलने भी नहीं आया है. खैर, आप आई हैं तो आप का स्वागत है.”

सलमा सुलताना बला की खूबसूरत थी. उस की सुंदरता का जलवा कुछ ऐसा था कि मधुर साहू मुश्किल से कुछ कह पा रहा था.

“कुछ नहीं, आप को बस अपने काम के बारे में अच्छे से बताना है ताकि हमारे दर्शक आप के जिम की गतिविधियों को देख कर के अपने स्वास्थ्य के प्रति और जागरूक हो जाएं.” सलमा सुलताना ने सहज रूप से समझाया.

“अच्छी बात है. आप सवाल पूछिए मैं जवाब देने का प्रयास करूंगा.” मधुर साहू ने सलमा की आंखों में देखते हुए बमुश्किल कहा.

इस के बाद सलमा ने कैमरे पर मधुर साहू का एक अच्छा सा इंटरव्यू ले लिया. मधुर साहू ने भरसक प्रयास किया कि सलमा को अच्छे से जवाब दे दे और उसे प्रभावित कर दे, क्योंकि उसे देखने के बाद उसे कुछ ऐसा महसूस हुआ मानो सलमा सुलताना के सामने और जितनी भी उस की गर्लफ्रैंड हैं, सभी फेल हैं.

सलमा जैसी बला की खूबसूरत कमसिन लडक़ी उस ने आज तक नहीं देखी थी. उसे ऐसा लगा कि ऊपर वाले ने मानो सलमा को सिर्फ उसी के लिए ही बनाया और आज खुद उस के पास इंटरव्यू के लिए भेज दिया है.

इंटरव्यू के बाद सलमा उस से विदा लेने लगी तो मधुर साहू ने कहा, “मैडम, आप सौभाग्य से पहली दफा मेरे यहां आई हैं. आप कुछ चायनाश्ता कर के ही जाएं.”

लाख मना करने के बाद भी मधुर ने नाश्ता और उस के लिए कोल्डड्रिंक मंगवा ली. इस दौरान उन के बीच इधरउधर की बातें होती रहीं.

जब मधुर साहू का साक्षात्कार स्थानीय चैनल पर प्रसारित हुआ तो उसे देख कर उस की खुशी का ठिकाना नहीं था. सब से बड़ी बात यह हुई कि कई दिनों तक लोग उस के साक्षात्कार का जिक्र करते रहे, लोग उस की और उस के गंगा श्री जिम की बड़ी प्रशंसा करते रहे थे. चैनल पर उस के इंटरव्यू के प्रसारण के बाद शहर में उस की वैल्यू और काम अचानक बढ़ गया.

यह देख कर उस ने पत्रकार सलमा सुलताना को एक दिन काल किया और कहा, “मैडम, आप ने तो कमाल कर दिया, मुझे कहां से कहां पहुंचा दिया.”

यह सुन कर के सलमा उस की भावना को तुरंत भांप गई. मगर अनजान बनते हुए बोली, “अरे भला क्या हो गया! कुछ गलती हो गई क्या मुझ से.”

“कैसी बात कर रही हैं, आप मेरा मजाक बना रही हैं क्या. अरे भाई, मैं तो आप का शुक्रगुजार हूं, जो आप ने एक ही इंटरव्यू ले कर के मुझे कहां से कहां पहुंचा दिया, लोकप्रिय बना दिया है मुझे.”

सलमा सुलताना यही तो सुनना चाहती थी. वह खिलखिला कर हंसती हुई बोली, “मेरा चैनल ऐसा ही है जिस की रिपोर्टिंग कर दे, वह हीरो बन जाता है.”

“मगर मेरा खयाल कुछ और है. सच तो यह है कि आप जिस का भी इंटरव्यू लेंगी, वह दुनिया भर में छा जाएगा.” मधुर साहू ने सलमा की प्रशंसा करते हुए आगे कहा, “सलमा, आप का शुक्रिया. मगर मैं आप से कुछ आग्रह करना चाहता हूं, अगर आप बुरा न मानें तो…” कुछ रहस्यमय भाव से मधुर साहू ने अब अपना जाल फेंका.

“कहिए, मैं आप की और क्या खिदमत कर सकती हूं.”

“आप बुरा न मानें तो मुझे शाम को समय दे दीजिए, मैं कुछ…” सुलताना भी मधुर के बात व्यवहार से प्रभावित हो चुकी थी. वह सहसा शाम को कौफी हाउस में मिलने के लिए तैयार हो गई.

मधुर साहू के प्यार में डूब चुकी थी सलमा

छत्तीसगढ़ की औद्योगिक नगरी कोरबा अपने विशाल कल कारखानों, कोयला खदानों, भारत अल्युमिनियम कंपनी लिमिटेड वेदांता और नेशनल थर्मल पावर कारपोरेशन देश की नवरत्न कंपनी जिस के विद्युत उत्पादन से महाराष्ट्र, गोवा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान जगमगाते हैं, के कारण एशिया भर में प्रसिद्ध है. कोरबा को लघु भारत भी कहा जाता है, जहां केरल, आंध्र प्रदेश, दिल्ली, असम, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, बिहार जैसे अनेक राज्यों से लोग आ कर के अपनीअपनी भूमिका निभाते हुए विभिन्न कंपनियों में कार्यरत हैं और जीवनयापन कर रहे हैं.

यहां कुसमुंडा कोयला खदान में असम से आ कर 4 दशक से ड्राइवर के रूप में नौकरी करते हुए एम. डी. मानिक सेवानिवृत्त हो चुके थे. उन की 2 बेटियों के अलावा एक बेटा सुलेमान है. बड़ी बेटी शबनम का विवाह ओडिशा में हो गया था. उन की छोटी बेटी सलमा सुलताना बचपन से ही पढ़ाईलिखाई में आगे रहती थी. पढ़ाई के बाद मन में कुछ बनने की उमंग के साथ सलमा एक स्थानीय न्यूज चैनल में एंकर बन गई और धीरेधीरे अपनी पहचान बना रही थी.

इसी दरमियान उस की पहचान मधुर साहू जिम संचालक से हुई और दोनों देखते ही देखते दोनों एकदूसरे के आकर्षण में बंधते चले गए. सलमा एक भोलीभाली सरल स्वभाव की युवती थी. मधुर साहू के दिखावे और चिकनीचुपड़ी बातों से वह प्रभावित होती चली गई. धीरेधीरे वह घर वालों से काम की व्यस्तता बता कर के मधुर साहू के साथ लिवइन रिलेशन में कोरबा के शिवजी नगर में रहने लगी.

घर वाले जब पूछते तो वह कहती मैं सहेली की यहां रह रही हूं. सलमा सुलताना मधुर साहू को दिलोजान से चाहती थी. इतना ही नहीं, दोनों ने शादी करने का फैसला तक कर लिया था, लेकिन सलमा जब उस से जल्द शादी करने को कहती तो मधुर बहाना बना कर टाल जाता था और आगे चल कर सलमा सुलताना के जीवन में कुछ ऐसा घटनाक्रम घटित हो गया, जिस की कल्पना नहीं की जा सकती.

17 साल बाद खुला मर्डर मिस्ट्री का राज – भाग 3

जांच के शिकंजे में आ ही गए जनार्दन नायर

इस के बाद नायर साहब को बुलाया गया. एक बार उन से फिर अपना वही बयान दोहराने के लिए कहा गया, जिसे उन्होंने 26 मई, 2006 को पत्नी रमादेवी की हत्या के बाद दिया था. नायर साहब को अपना बयान दोहराने में भला क्या ऐतराज होता. उन्होंने अपना पूरा बयान इंसपेक्टर सुनील राज के सामने दोहरा दिया.

इस के बाद जब उन्हें उस दरवाजे के पास ले जाया गया, जिसे सुनील राज ने तैयार कराया था तो वह दरवाजा देख कर चौंके.

इस के बाद सुनील राज ने कहा, “यह दरवाजा भी ठीक उसी तरह है, जैसे आप के घर में लगा था. उस के ऊपर वाली जाली भी उतने ही अंतर पर लगी है. उस में अंदर जो कुंडी लगी थी, ठीक ही वैसी कुंडी उसी जगह लगी है, जहां आप के घर के दरवाजे में लगी थी. पत्नी की हत्या वाले दिन आप ने जिस तरह जाली से हाथ डाल कर दरवाजा खोला था, उसी तरह आज यहां हाथ डाल कर कुंडी खोलिए.”

नायर साहब ने हाथ डाल कर अंदर लगी कुंडी खोलने की बहुत कोशिश की, पर कुंडी खोलने की कौन कहे, उन का हाथ कुंडी तक भी नहीं पहुंचा. पुलिस ने देखा, जाली से हाथ डालने पर उन के हाथ और कुंडी के बीच करीब एक फुट का अंतर था.

नायर साहब कुंडी नहीं खोल पाए. इंसपेक्टर समझ गए कि यह दरवाजा उतनी ऊंचाई से खुल ही नहीं सकता. इस का मतलब रमादेवी का पति झूठ बोल रहा है. इसलिए अब उन्हें हत्या का शक उसी पर होने लगा. पुलिस ने उन्हें घर जाने के लिए कह दिया.

इस के बाद इंसपेक्टर सुनील राज ने फोरैंसिक रिपोर्ट की जांच की. इस से उन्हें चौंकाने वाली जानकारी मिली. दरअसल, रमादेवी जब मृत मिली थीं, तब उन के हाथों में बाल मिले थे, जो किसी आदमी के थे. जिसे पुलिस ने कब्जे में ले कर जांच के लिए भेज दिया था. लेकिन उस की डीएनए रिपोर्ट 4 साल बाद आई थी.

चूंकि हत्या के इस मामले में पुलिस को पूरा यकीन था कि हत्या उसी मजदूर ने की है, इसलिए पुलिस यही सोचती रही कि जब वह मजदूर मिलेगा, तब उस का डीएनए करा कर इस रिपोर्ट से मिलाया जाएगा.

जनार्दन नायर ही निकले पत्नी के हत्यारे

सुनील राज ने डीएनए रिपोर्ट निकलवाई और चूंकि अब रमादेवी के पति जनार्दन नायर शक के घेरे में आ गए थे, इसलिए उन का डीएनए सैंपल लिया और जांच के लिए भिजवा दिया. इस के बाद जो डीएनए रिपोर्ट आई, उस में रमादेवी की हत्या का रहस्य खुल गया. क्योंकि रमादेवी के हाथों में मिले बालों का डीएनए जनार्दन के डीएनए सैंपल से मैच कर गया था.

इस का मतलब हत्या के समय रमादेवी ने दोनों हाथों से पकड़ कर, जिस आदमी के बाल खींचे थे, वह आदमी मजदूर चुटला मुथु नहीं, खुद उस का पति जनार्दन नायर था. इस के बाद पुलिस ने 75 साल के जनार्दन नायर को गिरफ्तार कर लिया.

पूछताछ में उन्होंने पत्नी की हत्या का अपना अपराध स्वीकार भी कर लिया. इस तरह 17 सालों बाद रमादेवी का असली कातिल गिरफ्तार हो गया, जिस ने हाईकोर्ट तक में अपील की थी कि उस की पत्नी के कातिल को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए.

अब आइए यह जानते हैं कि जनार्दन ने अपनी पत्नी का कत्ल क्यों और कैसे किया था.

जनार्दन नायर को अपनी पत्नी रमादेवी के चरित्र पर शक था. उन्हें लगता था कि उन के औफिस जाने के बाद उस के घर लडक़े आते हैं, जिन से उन की पत्नी के गलत संबंध हैं. इसी शक को ले कर पतिपत्नी में अकसर लड़ाईझगड़ा होता रहता था.

घटना वाले दिन यानी 26 मई, 2006 को भी इसी बात को ले कर दोनों में झगड़ा हुआ था. पतिपत्नी में मारपीट होने लगी थी. दोनों ही एकदूसरे को पीट रहे थे. इसी मारपीट में रमादेवी ने दोनों हाथों से जनार्दन नायर के बाल पकड़ कर खींचे तो नायर साहब ने घरेलू चाकू से हमला कर के उन की हत्या कर दी थी. इस के बाद चुपके से घर से निकल गए थे. लेकिन हत्या के समय रमादेवी के हाथों की मुट्ठी में पति के जो बाल थे, वे उसी तरह मुट्ठी मे दबे रह गए थे.

क्राइम थ्रिलर फिल्मों से मिला बचने का आइडिया

पत्नी की हत्या करने के कई घंटे बाद जनार्दन नायर घर वापस आए तो दरवाजा अंदर से बंद नहीं था. उन्होंने सब से झूठ बोला था. दरवाजा खोल कर वह घर में घुसे और उस के बाद पत्नी की हत्या होने का शोर मचा दिया.

पुलिस से बचने के लिए उन्होंने दरवाजा बाहर से खोलने वाली कहानी गढ़ ली. संयोग से पड़ोस की एक महिला ने मजदूर वाली कहानी सुना दी, जिस से पुलिस का पूरा ध्यान उसी मजदूर चुटला मुथु की ओर चला गया और नायर साहब बच गए.

पुलिस ने नायर साहब से पूछा कि जब वह खुद ही कातिल थे, तब वह धरनाप्रदर्शन कर के कातिल को पकडऩे के लिए पुलिस पर दबाव क्यों बना रहे थे?

जवाब में जनार्दन नायर ने कहा, “धरनाप्रदर्शन तो मैं ने पड़ोसियों के कहने पर किया था. अगर मैं वैसा न करता तो पड़ोसी मेरे ऊपर शक करने लगते.”

“तो फिर हाईकोर्ट क्यों चले गए?” इंसपेक्टर सुनील राज ने पूछा.

“यह आइडिया मुझे क्राइम थ्रिलर फिल्मों से मिला था. दरअसल, कुछ लोगों को शक होने लगा था कि पत्नी की हत्या कहीं मैं ने तो नहीं की है? इसलिए मुझे लगा कि अगर मैं कातिल को पकडऩे के लिए कुछ नहीं करता तो इन लोगों का शक विश्वास में बदल जाएगा. अगर मैं कोर्ट में अपील कर दूंगा तो इन लोगों को लगेगा कि मजदूर ने ही रमादेवी की हत्या की है.”

लेकिन जनार्दन नायर के इसी कदम ने उन्हें गिरफ्तार करवा दिया. अंत में उन्होंने कहा भी कि उन्हें पता था कि एक न एक दिन वह जरूर पकड़े जाएंगे, लेकिन पकड़े जाने में इतना समय लगेगा, यह उन्होंने नहीं सोचा था.

पूछताछ के बाद पुलिस ने उन्हें अदालत में पेश किया, जहां से वह अपनी सही जगह जेल पहुंच गए हैं, जहां उन्हें बहुत पहले पहुंच जाना चाहिए था.

17 साल बाद खुला मर्डर मिस्ट्री का राज – भाग 2

चुटला मुथु की तलाश में केरल पुलिस तमिलनाडु भी गई थी. वहां से भी उसे निराश हो कर ही लौटना पड़ा था. पुलिस अपना काम कर रही थी, पर सफलता न मिलने से लोगों को यही लग रहा था कि पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी है. जबकि पुलिस अधिकारी हत्या के इस केस को हल करने के लिए नईनई टीमें बना कर नए जांच अधिकारी नियुक्त कर किसी भी तरह से हत्यारे को गिरफ्तार करना चाहते थे. लेकिन कोई भी हत्यारे तक पहुंच नहीं सका.

इस के बाद जनार्दन नायर ने अधिकारियों से मांग की कि जब थाना पुलिस कुछ नहीं कर पा रही है तो इस मामले की जांच क्राइम ब्रांच से कराई जाए. इस के बाद यह मामला क्राइम ब्रांच को सौंप दिया गया. क्राइम ब्रांच ने भी इस मामले में अपने नजरिए से जांच शुरू की. पर वह भी कुछ नहीं कर पाई.

इस की वजह यह थी कि सभी उसी मजदूर को कातिल मान रहे थे और उस का कुछ पता नहीं चल रहा था. जो भी नया अधिकारी आता, फाइल देखता, दोचार दिन इधरउधर करता, उस के बाद रमादेवी मर्डर केस की फाइल फिर नीचे दब जाती. इसी तरह समय बीतता गया. गांव वालों का धरनाप्रदर्शन और घेराव भी कुछ नहीं कर पाया था.

जनार्दन नायर पहुंचे हाईकोर्ट

साल बीततेबीतते कुछ लोगों को शक होने लगा था कि रमादेवी की हत्या उस के पति जनार्दन नायर ने तो नहीं की है. दबी जुबान से लोग यह बात कहने भी लगे थे. यह नायर साहब के लिए परेशान करने वाली और अपमानित करने वाली बात थी.

ऐसे में ही अचानक इस मामले में एक नया मोड़ आ गया. साल 2007 में हत्या में मारी गई रमादेवी के पति जनार्दन नायर केरल हाईकोर्ट पहुंच गए. उन्होंने हाईकोर्ट से अपील की कि उन की पत्नी की हत्या के मामले में कातिल का पता लगाने के लिए जांच में तेजी लाई जाए. इस मामले में थाना पुलिस की तो छोड़ो, स्पैशल क्राइम ब्रांच भी कुछ नहीं कर सकी. एक साल बीत जाने के बाद भी न तो कोई सुराग मिला है और न कातिल का पता चल सका.

इस के बाद हाईकोर्ट ने क्राइम ब्रांच को फटकार लगाई. क्राइम ब्रांच ने जांच में तेजी लाई. पर फिर बात उसी मजदूर पर जा कर अटक गई थी, क्योंकि उस के बारे में कुछ पता ही नहीं चल रहा था. जब भी नया अफसर आता, अनसुलझे मामलों की फाइल निकलवाता तो उस में रमादेवी हत्याकांड की भी फाइल निकलती. फाइल पढ़ता, अपने शागिर्दों को इधरउधर दौड़ाता और महीने, 2 महीने बाद शांत हो जाता. इसी तरह एकएक कर के 17 साल बीत गए.

इन 17 सालों में रमादेवी हत्याकांड मामले की जांच क्राइम ब्रांच की 15 टीमों ने की. ये सभी टीमें रमादेवी की हत्या के लिए उसी मजदूर को जिम्मेदार मान रही थीं और उसी को खोज रही थीं. जबकि उस मजदूर का कुछ पता नहीं चल रह रहा था. जबकि उस की तलाश में ये टीमें तमिलनाडु, बिहार और उत्तर प्रदेश तक जा चुकी थीं.

रमादेवी हत्याकांड की फाइल कभी खुलती तो कभी धूल खाती पड़ी रहती. कोई पुलिस अधिकारी थोड़ी बहुत कोशिश कर लेता तो कोई उसे देख कर ऐसे ही रख देता. इसी तरह समय बीतता रहा. इस फाइल को धक्के खाते पूरे 17 साल बीत गए.

17 साल में बदल गए 15 जांच अधिकारी

इसी साल जुलाई में क्राइम ब्रांच में एक नए अधिकारी आए इंसपेक्टर सुनील राज. उन्होंने जब पुरानी फाइलें ले कर देखना शुरू किया तो उन्हें रमादेवी हत्याकांड की फाइल में कुछ ज्यादा ही रुचि जागी. उन्होंने पूरी फाइल को ध्यान से पढ़ा. उन्होंने देखा कि इस पर हाईकोर्ट का भी और्डर है, पर अभी तक इस में कुछ हुआ नहीं है.

जिन जिन अधिकारियों ने इस मामले की जांच की थी, उन सब की टिप्पणियां पढ़ीं. सभी ने उसी मजदूर चुटला मुथु को दोषी मान कर उसी की तलाश की बात की थी. पर उस का कुछ पता नहीं चला था. इंसपेक्टर सुनील राज ने तय किया कि वह इस मामले की जांच अपने हिसाब से करेंगे.

उन्होंने हत्या के इस मामले को अपने नजरिए से देखा और इस की जांच शुरू से करने का विचार किया. उन्हें लगा कि रमादेवी का हत्यारा वह मजदूर नहीं, कोई और ही है. क्योंकि दरवाजा अंदर से बंद था तो मजदूर ने हत्या कैसे की थी?

हत्या करने के बाद मजदूर जब बाहर आ गया तो उसे अंदर से दरवाजा बंद करने की क्या जरूरत पड़ी? कोई भी हत्या करने के बाद घटनास्थल से जल्दी से जल्दी भागना चाहेगा न कि बाहर खड़े हो कर अंदर से दरवाजा बंद करने की कोशिश करेगा?

इंसपेक्टर सुनील ने लीक से हट कर की जांच

सुनील राज पहले अफसर थे, जिन्होंने मजदूर को बाहर कर के इस मामले में सोचना शुरू किया. क्योंकि उन्हें लगा कि वह मजदूर इस घटना के बाद दोबारा दिखाई नहीं दिया. इस तरह की कोई दूसरी घटना भी नहीं घटी. जब उन्होंने सोचा कि हम यह मान कर चलें कि मजदूर कातिल नहीं है, कातिल कोई और भी सकता है तो इस के लिए सब से पहले उन्हें यह साबित करने के लिए सबूत की जरूरत थी.

यही सब सोच कर उन्होंने इस घटना की जांच हत्या होने वाले दिन से शुरू करने का निश्चय किया. उन्होंने सब से पहले उन बयानों का ध्यान से अध्ययन किया, जो पहले दिन जनार्दन नायर और उन के पड़ोसियों ने दिए थे. फिर मुखबिरों की खोज के बारे में अध्ययन किया.

सारे बयानों को पढऩे के बाद सुनील राज का ध्यान जनार्दन नायर के बयान पर गया, जिस में उन्होंने कहा था कि उस दिन वह पूरा दिन औफिस में थे. शाम को घर लौटे तो घर की कुंडी अंदर से बंद थी. कई बार आवाज देने पर भी दरवाजा नहीं खुला तो उन्हें लगा कि पत्नी को कुछ हो तो नहीं गया. तब दरवाजे के ऊपर लगी जाली से हाथ डाल कर उन्होंने अंदर लगी कुंडी खोली और दरवाजा खोल कर अंदर गए तो अंदर पत्नी की लाश पड़ी थी.

उन्हें जनार्दन नायर के बयान में ही कुछ झोल नजर आया. उन के मन में आया कि वह जा कर उस जाली और दरवाजे को देखें कि क्या जाली से हाथ डाल कर अंदर से कुंडी खोल कर दरवाजा खोला जा सकता है? लेकिन जब वह पोलाद गांव स्थित जनार्दन के घर पहुंचे तो पता चला कि वहां तो वह पुराना घर गिरवा कर नया घर बन गया है.

यह उन के लिए एक खराब अनुभव था. क्योंकि जब दरवाजा और वह जाली ही नहीं है तो वह यह कैसे पता करें कि जाली से हाथ डाल कर दरवाजा खुल सकता था या नहीं? उन्हें गहरा धक्का लगा कि यह क्या मामला है. वह वापस आ गए और फाइल में लगी क्राइम सीन की सारी तसवीरें निकलवाईं.

अलगअलग ऐंगल से ली गई एकएक तसवीर को वह ध्यान से देखने लगे. उन्होंने दरवाजे और जाली वाली तसवीरों पर कुछ ज्यादा ही गौर किया. दरवाजे की ऊंचाई और उस के ऊपर लगी जाली को ध्यान से देखा. इस के बाद नायर साहब के पड़ोसियों को बुला कर दरवाजे, जाली और घर के बारे में विस्तार से चर्चा की.

इस के बाद उन्होंने पुलिस वालों से कहा कि एक बिलकुल इसी तरह का दरवाजा, जाली और दीवार तैयार कराओ, जिस की लंबाई, चौड़ाई और ऊंचाई वैसी ही होनी चाहिए, जैसी जनार्दन नायर के घर में लगे दरवाजे, जाली और दीवार की थी. साहब का आदेश होते ही पुलिस वाले काम पर लग गए.

एक खाली प्लौट पर वैसी ही दीवार बनाई गई, जिस में ठीक उतना ही लंबा, चौड़ा और ऊंचा लकड़ी का दरवाजा लगवाया गया, जैसा नायर साहब के घर में लगा था. फोटो से देख कर वैसी ही, उतनी ऊंचाई पर जाली भी लगवाई गई. फोटो में कुंडी भी थी. दरवाजे में ठीक वैसी ही और उसी जगह कुंडी भी लगवाई गई, जहां फोटो में लगी थी.