Bangalore Crime News: प्यार का खौफनाक अंत. प्रपोजल के बहाने प्रेमी को जिंदा जलाया

Bangalore Crime News: प्यार करने वाले रिश्तों में तकरार होना आम बात है, लेकिन कभीकभी यही तकरार इतना खतरनाक रूप ले लेती है कि इंसान बदले की आग में कुछ भी कर बैठता है. एक ऐसा ही दिल दहला देने वाला मामला सामने आया, जिस ने हर किसी को सोचने पर मजबूर कर दिया. यहां एक प्रेमिका ने प्यार के नाम पर ऐसा खौफनाक खेल खेला, जिस की कल्पना करना भी नमुमकिन है. प्रपोजल के बहाने उसने अपने ही प्रेमी को जिंदा जला दिया.

यह सनसनीखेज घटना कर्नाटक के बेंगलुरु शहर से जुड़ी बताई जा रही है. 27 साल की प्रेरणा ने अपने प्रेमी किरण को एक खास सरप्राइज देने के बहाने घर बुलाया. घर में उस समय कोई और मौजूद नहीं था, जिस का फायदा उठाते हुए उस ने पूरी साजिश को अंजाम दिया. शुरुआत में सब कुछ सामान्य लगा, लेकिन धीरेधीरे हालात डरावने होते चले गए.

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बताया जाता है कि प्रेरणा ने किरण की आंखों पर पट्टी बांध दी और उस के हाथपैर कुरसी से कस कर बांध  दिए. जब किरण ने इस का विरोध किया तो उस ने इसे ‘फारेन स्टाइल प्रपोजल’ कहकर उसे भरोसे में लिया. प्यार में भरोसा करने वाले किरण को जरा भी अंदाजा नहीं था कि अगले ही पल उसकी जिंदगी खत्म होने वाली है.

कुछ ही देर बाद प्रेरणा ने उस पर पेट्रोल डाल दिया और आग लगा दी. बंधे होने की वजह से किरण खुद को बचा नहीं सका और मौके पर ही उस की दर्दनाक मौत हो गई. यह पूरी घटना इतनी भयावह थी कि जिस ने भी सुना, उस की रूह कांप उठी. जांच में सामने आया कि दोनों करीब एक साल से रिलेशनशिप में थे और एक ही टेलीकाम कंपनी में काम करते थे, लेकिन पिछले कुछ समय से उन के रिश्ते में खटास आ गई थी.

प्रेरणा इस बात से नाराज थी कि किरण उसे नजरअंदाज कर रहा था और शादी से बच रहा था. यही नाराजगी धीरेधीरे खतरनाक साजिश में बदल गई. घटना के बाद प्रेरणा ने पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की और कहा कि वह बाथरूम में थी, बाहर आ कर उस ने किरण को आग में जलता हुआ पाया. लेकिन जांच के दौरान यह कहानी ज्यादा देर तक नहीं टिक सकी. सीसीटीवी फुटेज और अन्य सबूतों ने सच्चाई उजागर कर दी.

पुलिस के मुताबिक, घर में पहले से पेट्रोल मौजूद था, जिस से साफ है कि हत्या की योजना पहले ही बना ली गई थी. सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि आरोपी ने इस पूरी घटना का वीडियो भी अपने मोबाइल में रिकौर्ड किया. जब किरण आग में जल रहा था, तब भी वह वीडियो बनाती रही, जो इस अपराध की निर्दयता को साफ दिखाता है.

फिलहाल पुलिस ने प्रेरणा को हिरासत में ले कर पूछताछ शुरू कर दी है. शुरुआती जांच में यह स्पष्ट हो चुका है कि हत्या उसी ने की है. अब पुलिस इस मामले के हर पहलू को खंगाल रही है, ताकि इस खौफनाक वारदात के पीछे की पूरी सच्चाई सामने लाई जा सके. Bangalore Crime News

Mumbai Crime Story: एक विवाहिता की खूनी लव स्टोरी

Mumbai Crime Story: सलमान से प्यार होने के बाद संगीता को स्वप्निल कांटे की तरह चुभने लगा था. उस ने इस कांटे को निकालने के लिए सलमान से कहा तो अपराध करने से पहले उस ने यह भी नहीं सोचा कि उस के पत्नीबच्चों का क्या होगा…

स्वप्ननगरी के नाम से मशहूर मुंबई से लगा महाराष्ट्र का एक जिला है रायगण. इसी जिले की तहसील पनवेल के गांव न्हावा शेवा में नामदेव पाटील का छोटा सा परिवार रहता था. उन की पत्नी की मौत हो चुकी थी. समुद्र के किनारे बसा यह गांव सुप्रसिद्ध इंटरनेशनल बंदरगाह के पास है, जिस से यहां से प्रतिदिन पचासों मालवाहक जहाज देशविदेश आतेजाते हैं.

28 वर्षीय स्वप्लिन नामदेव पाटील का एकलौता बेटा था. करीब 7 साल पहले सन 2008 में स्वप्लिन का विवाह नवी मुंबई स्थित नेरुल के रहने वाले स्वर्गीय मारुती गायकवाड की एकलौती बेटी संगीता गायकवाड़ के साथ हुआ था. पतिपत्नी एकदूसरे से खुश थे. दोनों के 2 बच्चे थे, 5 वर्षीया अक्षरा और 4 वर्षीय जिविक. बच्चे पास के ही एक इंगलिश स्कूल में पढ़ते थे.

स्वप्लिन पाटील उरण स्थित ओएनजीसी में अस्थाई कर्मचारी के रूप में काम करता था. वहां से उसे इतना वेतन मिल जाता था कि उस के परिवार का खर्च आराम से चल सके. वह सुबह अपनी मोटरसाइकिल से ड्यूटी पर जाता था और शाम को 8-9 बजे तक घर लौट आता था.

संगीता सुबह पति को नाश्ता कराने और औफिस भेजने के बाद बच्चों को तैयार कर के स्कूल भेजती थी. संगीता सुंदर तो थी ही, महत्त्वाकांक्षी और फैशनपरस्त भी थी. उसे पत्नी के रूप में पा कर स्वप्निल बहुत खुश था. स्वप्निल और संगीता के वैवाहिक जीवन के 7 साल बड़े मजे में गुजर गए. लेकिन वक्त ने धीरेधीरे रंग बदलना शुरू किया.

1 दिसंबर, 2015 की सुबह लगभग 7 बजे नवी मुंबई के नेरुल थाने के कांस्टेबल कांकड़ अपने इलाके की गस्त कर के थाने लौट रहे थे, तभी उन्हें खबर मिली कि नेरुल के सेक्टर 14 के रामलीला मैदान परिसर में बुरी तरह घायल एक युवक पड़ा है. यह खबर पुलिस कंट्रोल रूम से प्रसारित हुई थी. खबर सुन कर जब कांस्टेबल कांकड़ घटनास्थल पर पहुंचे, तब तक वहां लोगों की भीड़ लग चुकी थी.

घायल युवक के माथे और सिर में गंभीर चोटों के निशान थे, जिन से निकला खून बह कर आसपास फैल गया था. घायल युवक के सिर के पास ही एक बड़ा सा पत्थर पड़ा था, जिस पर खून के निशान थे. इस से पता चलता था कि युवक को उसी पत्थर से मार कर घायल किया गया था. कांस्टेबल कांकड़ ने वहां लगी भीड़ को हटा कर घायल युवक का निरीक्षण किया तो उन्हें लगा कि घायल युवक धीरेधीरे सांस ले रहा है. कांकड़ विलंब किए बिना 2 लोगों के साथ घायल युवक को नेरुल के डाक्टर डीवाई पाटील अस्पताल ले गए. लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका. निरीक्षण के बाद डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.

यह जानकारी नेरुल पुलिस थाने के वरिष्ठ महिला पुलिस इंसपेक्टर संगीता शिंदे अल्फांसो को मिली तो उन्होंने इसे गंभीरता से लिया और तत्काल सहायक इंसपेक्टर नागराज मजगे, असिस्टैंट इंसपेक्टर जगवेंद्र सिंग राजपूत, अर्जुन गायकवाड़, सबइसंपेक्टर नितिन शिंदे, कांस्टेबल पोपट पावरा, जालिंदर कोली, गणेश वनकर और गणेश खेड़कर को साथ ले कर डाक्टर डीवाई अस्पताल पहुंच गई. पहले उन्होंने अस्पताल के डाक्टरों से मृतक के बारे में पूछताछ की. उस के बाद मृतक के कपड़ों की तलाशी ली. तलाशी में मृतक की जेब से कुछ कागज निकले, जिन में मृतक का पहचान पत्र और एक विजिटिंग कार्ड भी था. पहचान पत्र में मृतक का नाम और पता लिखा था.

विजिटिंग कार्ड पर लिखे फोन नंबर पर फोन करने से पता चला कि वह विजिटिंग कार्ड मृतक के मामा जितेंद्र म्हात्रे का था. पुसिल ने म्हात्रे को तुरंत डाक्टर डीवाई अस्पताल पहुंचने को कहा. विजिटिंग कार्ड के पीछे भी एक नंबर लिखा था. उस नंबर पर फोन किया गया तो वह नंबर मृतक के चचेरे भाई सत्यवान पाटील का निकला. मृतक का नाम स्वप्निल पाटील था. पुलिस ने सत्यवान को भी अस्पताल पहुंचने को कह दिया. जितेंद्र म्हात्रे और सत्यवान पाटील ने डाक्टर डीवाई पाटील अस्पताल पहुंच कर स्वप्निल को जिस हालत में देखा, उस से उन के होश उड़ गए. उन्होंने यह खबर स्वप्निल के घर वालों को दे दी.

पुलिस अभी सत्यवान और जितेंद्र म्हात्रे से स्वप्निल के बारे में पूछताछ कर रही थी कि मृतक का सारा परिवार अस्पताल पहुंच गया. स्वप्निल की लाश देख कर पूरा परिवार छाती पीटपीट कर रोने लगा. जितेंद्र म्हात्रे और सत्यवान ने उन्हें जैसेतैसे संभाला. आवश्यक पूछताछ के बाद पुलिस ने स्वप्निल की लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. इस के बाद घटनास्थल का निरीक्षण कर के पुलिस थाने लौट आई.

थाने लौटते वक्त पुलिस स्वप्निल के मामा जितेंद्र म्हात्रे और सत्यवान को अपने साथ थाने ले आई थी. पुलिस ने उन्हीं दोनों की तहरीर पर अज्ञात हत्यारों के विरुद्ध स्वप्निल की हत्या का मुकदमा दर्ज कर के जांच शुरू कर दी. शुरुआती पूछताछ में संगीता शिंदे अल्फांसो को यह मामला काफी रहस्यमय लगा. इसलिए उन्होंने इस केस की जांच खुद ही करने का फैसला लिया.

पारिवारिक परिस्थितियों के बारे में गहराई से पूछताछ करने पर मृतक के मामा जितेंद्र म्हात्रे ने संगीता शिंदे को बताया कि उन्हें जिस व्यक्ति पर संदेह है, उस का नाम महेश ठाकुर है. कुछ सालों पहले महेश ठाकुर और स्वप्निल की पत्नी संगीता के बीच चक्कर था. संगीता का चरित्र कुछ ठीक नहीं था, इस बात को ले कर महेश ठाकुर और स्वप्निल के बीच जोरदार झगड़ा हुआ था. उस समय स्वप्निल ने महेश ठाकुर को काफी मारापीटा था. पिटने के बाद महेश ठाकुर ने स्पप्निल को देख लेने की धमकी दी थी.

संगीता शिंदे ने सोचा भी नहीं था कि इस गंभीर मामले की जांच आगे बढ़ाने के लिए इतनी जल्दी राह मिल जाएगी. उन्होंने तुरंत अपने सहायकों को आदेश दिया कि महेश ठाकुर और संगीता को पूछताछ के लिए थाने ले आएं. उन के आदेश पर पुलिस टीम दोनों को थाने ले आई. थाने पर दोनों से अलगअलग पूछताछ की गई. महेश ठाकुर से हुई पूछताछ में वह तो निर्दोष लगा, लेकिन संगीता से थोड़ी सख्ती के साथ पूछताछ की गई तो उस ने बताया कि बीते दिन स्वप्निल अपने दोस्त सलमान के साथ बैठा शराब पी रहा था. तब यह बात उस ने उसे फोन कर के बताई थी. इस से ज्यादा वह कुछ नहीं जानती.

इस पूछताछ के बाद पुलिस ने सलमान के बारे में जानकारी एकत्र की, साथ ही उस का मोबाइल नंबर ले कर रजिस्ट्रेशन फार्म निकलवाया. रजिस्ट्रेशन फार्म से उस का पता मिल गया. सलमान की गिरफ्तारी के लिए इंसपेक्टर संगीता शिंदे अल्फांसो ने सबइंसपेक्टर नितिन शिंदे के नेतृत्व में एक पुलिस टीम को उस के पते पर भेज दिया. 4 दिसंबर, 2015 को सबइंसपेक्टर नितिन शिंदे ने अपनी टीम के साथ कराड़ शहर जा कर सरगम लौज में छिपे बैठे सलमान और उस के साथी शाहिद सुतार को गिरफ्तार कर लिया. जब पुलिस टीम उन्हें मुंबई लाई तो संगीता शिंदे ने उन से पूछताछ की.

लेकिन दोनों ने खुद को निर्दोष बताया. संगीता शिंदे ने उन की जुबान खुलवाने के लिए उन्हें जांच टीम के हवाले कर दिया. दोनों पुलिस टीम को गुमराह करते हुए खुद को निर्दोष बताते रहे. इस के बाद पुलिस ने उन्हें अदालत पर पेश कर के रिमांड लिया और पूछताछ शुरू की. आखिर पुलिस को दोनों के साथ थोड़ी सख्ती करनी पड़ी, साथ ही उन्हें यह भी बता दिया गया कि संगीता पुलिस हिरासत में है और उस ने सब कुछ बता दिया है. पुलिस का यह दांव काम कर गया.

बचाव का कोई रास्ता न देख दोनों ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया. उन दोनों की अपराध स्वीकारोक्ति के बाद एक खूनी लव स्टोरी का सच सामने आया. 21 वर्षीय सलमान शेख जिला सतारा के कराड़ शहर स्थित सांई बाबा नगर में अपने दादादादी, 2 छोटे भाई, बहन, मां और पत्नी कश्मीरा के साथ रहता था. बड़ा होने के बावजूद यह परिवार हर तरह से सुखी और संपन्न था. सलमान के पिता का कराड़ शहर में दूध का कारोबार था. उन के पास अच्छी नस्ल की काफी भैंसें थीं.

सलमान उन का बड़ा बेटा था. लाडप्यार में पलाबढ़ा सलमान आठवीं से आगे नहीं पढ़ पाया था. जवान होते ही पिता ने उस की शादी अपने एक रिश्तेदार की बेटी कश्मीरा से कर दी थी, साथ ही उसे अपने कारोबार में भी लगा लिया था. सलमान शराब और शबाब का शौकीन था. जब तक उस की पत्नी उस के साथ रहती थी, तब तक वह ठीक रहता था. उस के जाते ही वह इधरउधर मुंह मारने लगता था. उस के ठिकाने होते थे कराड़ के होटल और लौज.

स्वप्निल और संगीता से सलमान की मुलाकात कुछ महीने पहले कराड़ के सरगम लौज में हुई थी. दरअसल स्वप्निल और संगीता पिकनिक मनाने कराड़ गए थे. उन दिनों सलमान की पत्नी कश्मीरा गर्भवती होने की वजह से अपने मायके गई हुई थी. सलमान मन बहलाने के लिए उस लौज में ठहरा था. सलमान ने संगीता को देखा तो वह उसी के सपने देखने लगा. 2 बच्चों की मां होने के बावजूद संगीता के सौंदर्य में कोई कमी नहीं आई थी. यही वजह थी कि उस का दूधिया बदन पहली ही नजर में सलमान की आंखों में समा गया था.

संगीता की नजदीकी पाने के लिए सलमान ने उस के पति स्वप्निल से दोस्ती गांठ ली. दरअसल स्वप्निल शराब का शौकीन था. जाहिर है, पीनेपिलाने वालों से दोस्ती करना बड़ा आसान होता है. पहला दांव चलते हुए सलमान उस का हमप्याला बन गया. एक टेबल पर साथसाथ पीने के बाद सलमान ने स्वप्निल के सामने प्रस्ताव रखा कि वह गाइड बन कर उन लोगों को शहर की सभी खासखास जगहों पर घुमाएगा. उस ने ऐसा ही किया भी.

स्वप्निल सलमान के व्यवहार का कायल हुआ तो संगीता उस के व्यक्तित्व की. कराड़ छोड़ते समय स्वप्निल और सलमान दोनों गर्मजोशी से गले मिले. दोनों ने अपनाअपना मोबाइल नंबर पहले ही एकदूसरे को दे दिया था. सलमान ने बातोंबातों में संगीता का नंबर भी हासिल कर लिया था. सलमान को स्वप्निल का ड्यूटी टाइम पता था. वह संगीता को ऐसे समय फोन करने लगा, जब उस का पति घर पर नहीं होता था. धीरेधीरे संगीता भी उस की बातों में रुचि लेने लगी. नतीजा यह हुआ कि दोनों एकदूसरे से खुलते गए और औपचारिकताएं पीछे छूटती गईं. सलमान जबतब संगीता को कराड़ आने का आमंत्रण देता रहता था. लेकिन स्वप्निल की वजह से संगीता का कराड़ जाना संभव नहीं था.

धीरेधीरे स्थिति यह आ गई कि संगीता की जिंदगी में भले ही स्वप्निल था, पर सपनों में सलमान था. अधर में फंसी संगीता चिड़चिड़ी हो गई थी. अब उस की पति से भी आए दिन तकरार होने लगी थी. तकरार होती तो कभीकभी वह अपने मायके नेरुल चली जाती. वहां बहाना कर के वह कराड़ चली जाती, जहां सलमान उस के ठहरने, खानेपीने का इंतजाम करता. नतीजा यह हुआ कि दोनों के बीच अनैतिक संबंध बन गए. जब संगीता कराड़ से वापस लौटती तो सलमान उसे 5-10 हजार रुपए भी दे देता था. अब तक संगीता पूरी तरह बदल चुकी थी. उस ने पति, बच्चों और ससुर की परवाह करना छोड़ दिया था. उस के ख्वाबों में केवल सलमान बसता था. वह मन ही मन दोनों की तुलना करती तो स्वप्निल से सलमान ही बेहतर नजर आता.

दूसरी ओर सलमान और संगीता के संबंधों के बारे में स्वप्निल को कोई जानकारी नहीं थी. बहरहाल सलमान की वजह से स्वप्निल और संगीता के बीच दूरियां बढ़ती गईं. इन दूरियों को बढ़ाने में स्वप्निल की शराब पीने की लत भी एक वजह बनी. जल्दी ही वह समय भी आया, जब संगीता स्वप्निल से पीछा छुड़ाने के बारे में सोचने लगी. संगीता और सलमान के बीच की दूरियां कम करने में संगीता की मां श्वेता गायकवाड का भी हाथ था. दरअसल संगीता अपने मायके नेरुल जाती थी तो उस की मां उसे पूरी छूट दे देती थी. इस का लाभ उठाते हुए संगीता सलमान के पास कराड़ चली जाती थी.

इस घटना के कुछ दिनों पहले सलमान के यहां बेटा पैदा हुआ. खुशी के इस मौके पर सलमान ने स्वप्निल, संगीता और उस की मां श्वेता को भी बुलाया. तीनों आए भी. मौका देख कर सलमान ने संगीता की मां श्वेता के खूब कान भरे. उस ने शिकायती लहजे में कहा कि स्वप्निल न केवल शराबी है, बल्कि संगीता को मारतापीटता भी है. अगर कुछ नहीं किया गया तो वह किसी दिन संगीता की हत्या कर सकता है.

करोड़ से लौटने के बाद संगीता और उस की मां श्वेता ने स्वप्निल से पीछा छुड़ाने के लिए एक खतरनाक योजना बनाई. योजना के अनुसार, संगीता स्वप्निल के साथ घर लौट आई. उस के और सलमान के बीच पहले की ही तरह बातें होती रहीं. एक दिन बातोंबातों में संगीता ने सलमान के पुरुषार्थ को ललकारते हुए कहा, ‘‘मैं तुम्हें मर्द तभी समझूंगी, जब तुम हम दोनों के बीच आए कांटे को निकाल फेंकोगे. इस के बाद ही हम सुख से रह सकेंगे.’’

प्रेमिका के ये शब्द सलमान के लिए पत्थर की लकीर बन गए. वह उसी दिन से अपने और संगीता के बीच से स्वप्निल को हटाने के बारे में सोचने लगा. लेकिन स्वप्निल को वह अकेले मौत के घाट नहीं उतार सकता था. इस के लिए उस ने अपने बचपन के दोस्त शाहिद सुतार और कराड़ शहर की सुपर मार्केट के रहने वाले मल्हारी उर्फ मल्या उर्फ हनुमंत गंजुले से बात की. उस ने उन्हें अपनी और संगीता की लव स्टोरी बताई, साथ ही 60 हजार रुपए का लालच भी दिया. एक तो दोस्ती, दूसरे पैसों का लालच. उस के दोनों दोस्त उस की मदद करने के लिए तैयार हो गए.

फूलप्रूफ योजना तैयार करने के बाद सलमान शेख ने घटना के एक दिन पहले स्वप्निल को फोन कर के कहा कि वह उस से मिलने के लिए नेरुल, नवी मुंबई आ रहा है. उस ने साढ़े 4 बजे का समय भी बता दिया. उस के आने की बात सुन कर स्वप्निल खुश हो गया. योजना के अनुसार, सलमान और उस के दोस्त कराड़ से बस पकड़ कर पहले कोल्हापुर नाका पहुंचे और फिर वहां से दूसरी बस से सुबह साढ़े 4 बजे नवी मुंबई के उपनगर नेरुल पहुंच गए. नेरुल पहुंच कर सलमान ने एसएमएस से अपने पहुंचने की जानकारी संगीता को दे दी.

इस के बाद सलमान ने स्वप्निल को फोन किया, लेकिन उस ने उस का फोन नहीं उठाया. उस के कई बार फोन करने के बाद भी स्वप्निल ने जब फोन नहीं उठाया तो तीनों संगीता की मां श्वेता के घर चले गए. इन लोगों ने श्वेता को अपनी पूरी योजना बताई.

श्वेता ने चायपानी पिलाने के बाद उन्हें वहां से जाने को कह दिया, क्योंकि उन के वहां रुकने से किसी को शक हो सकता था. सलमान अपने दोस्तों के साथ नेरुल स्टेशन चला गया. वहां प्लेटफार्म पर बैठ कर तीनों ने एक घंटा बिताया. इस बीच मल्हारी उर्फ मल्या कुछ देर के लिए अपने एक रिश्तेदार से मिलने के लिए भी गया. सुबह करीब 8 बजे सलमान के पास स्वप्निल का फोन आया. उस ने समय से न पहुंच पाने के लिए माफी मांगी. इस के बाद अपनी पत्नी संगीता को फोन कर के कहा कि वह सलमान से मिलने नेरुल जा रहा है. फिर वह कुछ ही मिनटों में नेरुल रेलवे स्टेशन पहुंच गया.

अपनी योजना को पूरा करने के लिए सलमान और उस के दोस्त स्वप्निल की मोटरसाइकिल पर बैठ गए. सलमान ने नेरुल की पहाडि़यां देखने की इच्छा जाहिर की तो स्वप्निल उन्हें नेरुल की पहाडि़यों पर ले गया. लेकिन वहां इन लोगों को स्वप्निल को मारने का मौका नहीं मिला. दिन के उजाले में खतरा था. इसलिए समय बिताने के लिए ये लोग वापस नेरुल रेलवे स्टेशन आ गए. स्वप्निल ने सलमान के दोनों दोस्तों को स्टेशन पर छोड़ा और उन्हें वहीं रुकने के लिए कह कर वह सलमान के साथ घर आ गया. उस वक्त स्वप्निल के पिता नामदेव सो रहे थे. संगीता ने दोनों को खाने के लिए दालचावल दिया.

खाना खाने के बाद वे लगभग 12 बजे घर से निकल गए. वहां से दोनों सीधे पामबीच तालाब पर गए, जहां काफी बच्चे और नौजवान बैठ कर खेल रहे थे. दोनों वहीं पर आराम से बीते दिनों की बातें करने लगे. बातों ही बातों में स्वप्निल ने बीयर पीने की इच्छा जाहिर की. लेकिन सैलरी न आने के कारण स्वप्निल की जेब खाली थी. सलमान उस के लिए एक बोतल बीयर ले आया. स्वप्निल ने पामबीच पर बैठेबैठे बीयर खत्म कर दी. उस के बाद दोनों नेरुल रेलवे स्टेशन गए, जहां सलमान के दोनों दोस्त उन का इंतजार कर रहे थे. स्वप्निल ने अपनी मोटरसाइकिल पार्किंग में खड़ी कर दी.

इस के बाद चारों दोस्त लोकल ट्रेन पकड़ कर वाशी रेलवे स्टेशन आए. वहां से इन लोगों ने औटो लिया और सागर विहार बार पहुंचे, जहां स्वप्निल ने बीयर मांगी. लेकिन बीयर पीने के बाद भी उसे इतना नशा नहीं हुआ कि सलमान और उस के दोस्त उसे आराम से मौत के घाट उतार सकते. 2 बीयर पीने के बाद स्वप्निल शराब मांगने लगा. सलमान और उस के साथी यही चाहते थे. सलमान और उस के साथी अपना काम निकालने के लिए वाशी मौल गए. वहां जा कर सब ने अपने लिए बीयर और स्वप्निल के लिए शराब खरीदी. शराब ले कर वे फिर नेरुल रेलवे स्टेशन आ गए.

वहां से चारों दोस्त नेरुल के सेक्टर 14 के रामलीला मैदान चले गए. सब बीयरशराब का मजा लेने लगे. तब तक सुबह के 5 बजे गए थे. मैदान सुनसान था. सलमान ने स्वप्निल को अपनी बातों में उलझाए रखा. उसी बीच मौका देख कर मल्हारी उर्फ माल्या पेशाब करने के लिए उठा और पास ही पड़ा एक बड़ा सा पत्थर ला कर स्वप्निल के सिर पर पटक दिया. इस के बाद बारीबारी से सभी ने स्वप्निल के सिर पर पत्थर मारे और उसे मरा समझ कर वहां से उस की मोटरसाइकिल ले कर नेरुल स्टेशन आ गए. नेरुल स्टेशन पर उस की मोटरसाइकिल छोड़ कर वे ट्रेन द्वारा सीवीडी बेलापुर आए. वहां उन्होंने अपने खून सने कपड़े बदले और कराड़ चले गए.

मल्हारी उर्फ मल्या अपने घर चला गया. सलमान और शाहिद सुतार दोनों सरगम लौज में जा कर छिप गए, जहां से पुलिस ने उन्हें पकड़ा था. सलमान और शाहिद सुतार के बयानों के आधार पर पुलिस ने छापा मार कर मल्हारी उर्फ माल्या, संगीता, उस की मां श्वेता को भी गिरफ्तार कर लिया. पुलिस ने सलमान शेख, शाहिद सुतार, मल्हारी उर्फ मल्या, संगीता और श्वेता से विस्तृत पूछताछ करने के बाद उन के विरुद्ध भादवि की धारा 302, 120बी के तहत केस दर्ज किया और फिर उन्हें अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया. Mumbai Crime Story

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Hindi Crime Story: दोहरा खेल

Hindi Crime Story: जवेरिया, मैं समझ गया कि तुम मेरे साथ दोहरा खेल खेल रही हो. लेकिन मैं ने तुम्हें अहसास नहीं होने दिया कि मुझे सब पता है. कुछ भी हो, तुम मेरी मोहब्बत हो ना, चाहे तुम इस बात को समझो या न समझो.

दरवाजा खोलते ही वह मुझे देख कर पीछे हट गई. मेरे होंठों पर एक व्यंग्य भरी मुसकान थी. शायद मेरी इस मुसकराहट ने उस के होश गुम कर दिए थे. मैं ने विनम्रता से पूछा, ‘‘क्या बात है, मुझे पहचाना नहीं?’’

‘‘जव्वाद घर पर नहीं हैं.’’ उस ने एकदम से कहा.

‘‘कोई बात नहीं, मैं उस का इंतजार कर लूंगा.’’ मैं ने उसी तरह मुसकराते हुए कहा, ‘‘मेरा खयाल है कि मैं तुम्हारे लिए कोई अजनबी नहीं हूं, बल्कि तुम्हें भले ही याद न हो, लेकिन मुझे याद है कि कभी हम दोनों ने बहुत अच्छे दिन गुजारे हैं.’’

‘‘फैसल प्लीज, मैं बहुत अच्छी और शांति की जिंदगी जी रही हूं. मुझे परेशान मत करो.’’ उस ने कहा.

‘‘यह तो कोई बात नहीं हुई, मैं इतने दिनों के बाद तुम से मिलने आया हूं और तुम इस तरह रुखाई से बात कर रही हो. और कुछ नहीं तो कम से कम कुछ देर अपने घर में बैठा कर एक प्याली चाय ही पिला दो?’’ मैं ने कहा.

वह कुछ सोचती रही. शायद उसे लगा कि मेरी बात माने बगैर कोई रास्ता नहीं है तो वह एक तरफ हटते हुए बोली, ‘‘आओ, अंदर आ जाओ.’’

अंदर आ कर मैं ने इधरउधर देखते हुए कहा, ‘‘बहुत खूब, बहुत खूबसूरत घर है, साजसज्जा भी बड़ी अच्छी कर रखी है.’’

‘‘यह सब जव्वाद की मेहनत का नतीजा है.’’ उस ने कहा.

‘‘हां, लेकिन मुझे पता है कि यह मेहनत किस तरह की है.’’ मैं ने सोफे पर बैठते हुए कहा, ‘‘तुम भी बैठो.’’

लेकिन वह मेरे सामने उसी तरह खड़ी रही.

‘‘अरे हां, याद आया,’’ मैं ने कहा, ‘‘पहले भी तुम मेरे सामने इसी तरह खड़ी रहती थीं और मैं तुम्हारा हाथ थाम कर तुम्हें अपने पास बैठा लेता था. सही कहा न?’’

‘‘नहीं… नहीं, अच्छा मैं बैठ जाती हूं.’’ उस ने कहा और जल्दी से सामने वाले सोफे पर बैठ गई. इस के बाद उस ने सिर झुका कर कहा, ‘‘फैसल, अब मैं शादीशुदा हूं. यह घर मेरी जन्नत है. मैं जव्वाद के साथ एक बढि़या जिंदगी जी रही हूं.’’

‘‘मैं कहां तुम्हारी बढि़या जिंदगी को खराब कर रहा हूं,’’ मैं ने कहा, ‘‘मैं तो तुम दोनों से मिलने आया हूं. इधर से जा रहा था, सोचा तुम दोनों से मिलता चलूं.’’

‘‘कहीं जा रहे थे क्या?’’

‘‘हां, मैं यह शहर ही नहीं, देश ही छोड़ कर जा रहा हूं,’’ मैं ने कहा, ‘‘अब यहां मेरा है ही क्या, सिवाय यादों के, जो इस शहर में बिखरी हैं. वे यादें मुझे कदमकदम पर गुजरे दिनों की याद दिलाती हैं. इसलिए मेरा यहां से चाले जाना ही ठीक है.’’

मेरे सामने जो औरत बैठी थी, वह आज भी उतनी ही सुंदर थी, जितनी 5 साल पहले थी. लगता ही नहीं था कि वह शादीशुदा है और उस की शादी को 5 साल बीत गए हैं. 5 साल यानी 5 सदियां… जवेरिया और उस के पति जव्वाद के लिए भले ही 5 साल हों, लेकिन मेरे लिए तो यह समय 5 सदियों के बराबर था. दुख, दर्द और अपमान से भरा. नासूर की तरह तकलीफ देती ये 5 सदियां, जिन्हें मैं ने जेल में इन्हीं दोनों की वजह से गुजारी थीं. इस के लिए पूरी तरह जव्वाद जिम्मेदार था.

‘‘जव्वाद बहुत ज्यादा मोहब्बत करने वाला शौहर साबित हुआ है,’’ जवेरिया की आवाज ने मुझे चौंका दिया, ‘‘वह मुझ से और अपनी बेटी से बहुत ज्यादा प्यार करता है.’’

‘‘हां, मैं ने सुना है कि तुम एक बच्ची की मां बन गई हो,’’ मैं ने कहा, ‘‘कहां है तुम्हारी बच्ची?’’

‘‘कमरे में है,’’ जवेरिया ने कहा, ‘‘उस की तबीयत कुछ ठीक नहीं है, इसलिए उसे सुला दिया है.’’

‘‘यह तुम ने अच्छा किया. नाम क्या है उस का?’’ मैं ने पूछा.

‘‘आलिया,’’ जवेरिया ने कहा, ‘‘वह देखो, उस की तसवीर.’’ उस ने कार्निस की तरफ इशारा किया.

कार्निस पर एक बच्ची की तसवीर एक बड़े फ्रेम में मढ़ी रखी थी. बहुत प्यारी बच्ची थी, बिलकुल अपनी मां की तरह, जो आज भी पहले की ही तरह सुंदर थी.

कुछ ही सालों में जैसे दुनिया बदल गई थी. पहले जवेरिया मेरे साथ हुआ करती थी, मेरा प्यार थी. मैं ने उस से मोहब्बत की थी. उस की इच्छाओं का सम्मान किया था. मेरा अपना कारोबार था. उस में जव्वाद हिस्सेदार था. जिंदगी हंसीखुशी से गुजर रही थी. सब कुछ एक निश्चित दायरे में बढि़या चल रहा था. जवेरिया मेरी मोहब्बत थी. हम दोनों बहुत जल्दी एक होने जा रहे थे.

पार्टनर होने के साथसाथ जव्वाद मेरा दोस्त भी था. जवेरिया कभीकभी मेरे औफिस भी आ जाती थी, जहां जव्वाद से भी उस की मुलाकात हो जाती थी. हम तीनों हंसतेमुसकराते किसी अच्छे से होटल में लंच के लिए जाते. लंच के बाद मैं जव्वाद की तरफ देखता, ‘‘यार जव्वाद.’’

‘‘मैं समझ गया.’’ वह नकली गुस्से से कहता, ‘‘तुम दोनों अब कहीं झक मारने जा रहे हो. ठीक है, मैं औफिस जा रहा हूं.’’

इसी तरह गुजर रही थी जिंदगी. तब मैं ने सोचा भी नहीं था कि इस खूबसूरत जिंदगी में अचानक एक भयानक मोड़ आ जाएगा. अचानक उस दिन मुझे अंदाजा हुआ कि मैं कितना बेवकूफ आदमी था, जो मैं ने आंखें बंद कर के अपने दोस्त जव्वाद पर भरोसा कर लिया था. उस ने अंदर ही अंदर मेरी जड़ें खोखली कर दी थीं. उस ने अपने हथकंडों से न सिर्फ कारोबार पर बल्कि जवेरिया पर भी कब्जा कर लिया था. जब मुझे होश आया, तब तक बहुत देर हो चुकी थी. जब मुझे यह सब पता चला तो मैं गुस्से से पागल हो गया. मैं जव्वाद को जान से मार देता, लेकिन उस ने मेरे खिलाफ पहले ही पुलिस में रिपोर्ट लिखवा दी थी, जिस की वजह से मेरे ऊपर झूठा मुकदमा दायर हो गया और मुझे 5 साल की सजा हो गई.

जेल में मुझे पता चला कि किस तरह जव्वाद और जवेरिया ने मेरी पीठ में खंजर घोंपा था. मेरे जेल जाने के बाद जव्वाद और जवेरिया ने शादी कर ली थी. उस वक्त मेरे दिल पर क्या गुजरी होगी, इस का अंदाजा कोई दूसरा नहीं लगा सकता. 5 साल बाद मैं जेल से बाहर आया तो अपने संबंधों की बदौलत मैं ने जल्द ही काफी दौलत और ताकत हासिल कर ली. जब जवेरिया और जव्वाद के बारे में पता किया तो लोगों ने बताया कि अपना सारा कारोबार बेच कर वे लाहौर चले गए हैं. शायद उन का सोचना था कि मेरी नजरों से बच जाएंगे. लेकिन मैं ने उन्हें खोज ही लिया. मेरे परिचित लाहौर में भी थे. उन्होंने ही मुझे उन का पता बता दिया था. और अब मैं जवेरिया के घर उस के सामने बैठा था.

जवेरिया, जिस की जुल्फें कभी मेरे कंधों पर बिखरी रहती थीं, मेरे साथ जिंदगी गुजारने की बातें करती थी, वही जवेरिया मुझे तबाह कर के मेरे सामने सहमी बैठी थी.

‘‘तुम लोग क्या समझते थे कि मैं तुम लोगों को ढूंढ़ नहीं पाऊंगा.’’ मैं ने उस की ओर देखते हुए कहा.

‘‘फैसल, जो हुआ, अब उसे भूल जाओ.’’

‘‘भूल जाऊं?’’ मैं ने तड़प कर कहा, ‘‘कितने आराम से तुम ने यह बात कह दी. मैं भूल जाऊं कि तुम ने प्यार के झूठे वादे किए, जव्वाद के साथ मिल कर तुम ने मुझे धोखा दिया. धोखे से मेरे कारोबार पर कब्जा कर लिया. झूठे इल्जाम लगा कर मुझे जेल भिजवा दिया. चलो, मैं यह सब भूल भी जाता हूं, लेकिन मेरे उन 5 सालों का क्या होगा, जो तुम्हारी और जव्वाद की मक्कारी और बेरहमी की वजह से मैं ने जेल में काटे हैं. कहां से आएंगे 5 साल? मुझे उन 5 सालों का हिसाब दे सकती हो?’’

मुझे गुस्से में देख कर जवेरिया परेशान हो गई. वह जानती थी कि मैं जो कुछ कह रहा हूं, वह झूठ नहीं है. वाकई वही सब हुआ था, जो मैं उस से कह रहा था. वह रोने लगी, लेकिन मुझे उस पर तरस नहीं आया, क्योंकि ये उस की मक्कारी के आंसू थे. मैं गुस्से से बोला, ‘‘बंद करो अपना यह रोनाधोना. तुम्हारे आंसू अब मुझ पर असर नहीं करेंगे.’’

‘‘तो तुम्हीं बताओ, हम लोग तुम्हारे लिए क्या करें?’’ उस ने कहा, ‘‘हमारे पास जो कुछ भी है, वह तुम ले लो.’’

‘‘तुम्हारे पास अपना क्या है? तुम्हारे पास जो कुछ भी है, वह सब मेरा ही है.’’

‘‘तो फिर तुम यहां क्यों आए हो, क्या चाहते हो हम लोगों से?’’

‘‘मैं… मैं तुम्हारी सब से कीमती चीज लेने आया हूं.’’ मैं ने कहा, ‘‘और वह चीज जब तुम्हारे पास से चली जाएगी, तब तुम्हें पता चलेगा कि तुम ने मेरे साथ कैसी बेवफाई की है.’’

‘‘क्या मतलब?’’ वह बुरी तरह से घबरा कर बोली.

‘‘तुम्हारी बच्ची,’’ मैं ने ठहरे हुए अंदाज में कहा, ‘‘मैं उसे अपने साथ ले जा रहा हूं.’’

‘‘नहीं, तुम यह नहीं कर सकते.’’ जवेरिया रोने लगी.

‘‘मुझे कौन रोकेगा?’’ मैं हंस पड़ा, ‘‘तुम्हारा शौहर जव्वाद. तुम्हें शायद पता नहीं कि इस वक्त वह मेरे आदमियों के कब्जे में है. इसीलिए वह अभी तक घर नहीं आया.’’

‘‘नहीं, खुदा के लिए ऐसा मत करो.’’ उस ने मेरे सामने हाथ जोड़ कर रोते हुए कहा, ‘‘तुम ऐसा जुल्म नहीं कर सकते.’’

‘‘यह तुम कह रही हो?’’ मैं उठ कर खड़ा हो गया, ‘‘बताओ, किस कमरे में है तुम्हारी बच्ची?’’

‘‘मैं अपनी जान दे दूंगी, लेकिन बच्ची तक नहीं जाने दूंगी.’’ जवेरिया दीवार बन कर मेरे सामने खड़ी हो गई. उस वक्त उस की हालत पागलों जैसी हो गई थी, ‘‘अगर तुम ने मेरी बच्ची को हाथ भी लगाया तो मैं तुम्हें जान से मार दूंगी.’’

मैं ने उस का हाथ पकड़ा और घसीट कर एक किनारे खड़ी कर दिया. मैं भी उस वक्त पागल हो रहा था. मैं उन दोनों का माफ करने को बिलकुल तैयार नहीं था. वे दोनों नरमी बरतने लायक थे भी नहीं. मैं जवेरिया को नजरअंदाज कर के उस कमरे में दाखिल हो गया, जहां सामने एक सुंदर बैड पर एक बच्ची चादर ओढ़े सो रही थी. मैं ने झटके से चादर खींच ली, लेकिन मेरे कदम पीछे हट गए. उस चादर के नीचे कोई बच्ची नहीं, बल्कि एक बड़ी सी गुडि़या लेटी थी.

जवेरिया भी मेरे पीछे कमरे में आ गई थी. उस ने मेरा हाथ पकड़ कर कहा, ‘‘नहीं, तुम मेरी बच्ची को कुछ नहीं करोगे, उसे कोई नुकसान नहीं पहुंचाओगे.’’

मैं ने झल्ला कर पूछा, ‘‘कहां है तुम्हारी बच्ची?’’

‘‘यही तो है,’’ उस ने मेरा हाथ छोड़ कर उस गुडि़या को उठा लिया और सीने से लगाती हुई बोली, ‘‘तुम्हें क्या मालूम, यही तो है हमारी बेटी. हम ने इसे सीने से लग रखा है और तुम इसे नुकसान पहुंचाने चले आए. मैं तुम्हें जान से मार दूंगी. तुम इस का कुछ नहीं बिगाड़ सकते.’’

‘‘तुम शायद पागल हो गई हो,’’ मैं ने कहा, ‘‘रबर की इस बेजान गुडि़या को अपनी बच्ची कह रही हो?’’

‘‘खबरदार, जो इसे बेजान गुडि़या कहा,’’ उस ने गुडि़या को आराम से बिस्तर पर लिटाते हुए कहा, ‘‘हम दोनों इसी को देखदेख कर जिंदा हैं और तुम इसे बेजान कह रहे हो. किसी मां की ममता का मजाक उड़ाते तुम्हें शर्म नहीं आती.’’

मैं चुप रहा. कुछ देर बाद रोते हुए उस ने कहा, ‘‘फैसल, वाकई हम लोगों ने तुम्हें धोखा दिया था, जुल्म किया था तुम्हारे साथ. इस का अहसास हम दोनों को परेशान करता था.’’

‘‘जब तुम्हें इस बात का अहसास हो गया था तो मुझे छुड़ाने के लिए कोई कदम क्यों नहीं उठाया?’’ मैं ने पूछा.

इस के बाद मैं ड्राइंगरूम में आ कर बैठ गया. जवेरिया भी गोद में गुडि़या ले कर मेरे सामने बैठ गई. उस ने कहा, ‘‘शर्मिंदगी की वजह से. हमें तुम से डर भी था. दूसरी बात यह कि तब तक बहुत देर हो चुकी थी. तुम सजा पा कर जेल जा चुके थे. इसलिए हम चाह कर भी तुम्हारी कोई मदद नहीं कर सके. हमें एक डर यह भी था कि अगर हम लोगों ने पुलिस के पास जा कर सच्ची बात बता दी तो हमें भी लपेट लिया जाएगा.’’

‘‘इसीलिए तुम दोनों खामोश रहे?’’

‘‘हां,’’ जवेरिया ने कहा, ‘‘हम ने सारा कारोबार बेच दिया और सारा कुछ समेट कर लाहौर आ गए. हम ने सोचा था कि हम यहां किसी तरह तुम से छिप कर रह लेंगे.’’ इतना कह कर वह खामोश हो गई. उस समय वह मुझे पुरानी जवेरिया लग रही थी, वही पुरानी मासूमियत उस के चेहरे पर झलक रही थी.

‘‘और इस बच्ची का क्या किस्सा है?’’ मैं ने गुडि़या की तरफ इशारा कर के पूछा.

‘‘शायद हमारे लिए यही वह सजा है, जो हमें मिलनी चाहिए. शादी के पहले साल ही बेटी पैदा हुई. हम दोनों बस उसी के हो कर रह गए. इस तरह 2 साल बीत गए. लेकिन उस के बाद एक रात वह सोतेसोते उठ कर शोर करने लगी कि पुलिस वाले उसे पकड़ कर ले जा रहे हैं. यह बात सुन कर हम परेशान हो गए. हम ने उस का बहुत इलाज कराया, लेकिन वह हमें छोड़ कर इस दुनिया से चली गई. शायद पुलिस उसे ले जाने में कामयाब हो गई.’’ कह कर जवेरिया रोने लगी.

‘‘और यह गुडि़या…?’’ मैं ने पूछा.

‘‘यह उसी की गुडि़या थी.’’ जवेरिया ने कहा, ‘‘वह इसी को ले कर सोया करती थी. उस की मौत के बाद हम लोग तो पागल हो गए थे. हमारा सब कुछ लुट चुका था. शायद यह कुदरत का इंतकाम था. हम ने तुम्हें पुलिस के हवाले किया था और कुदरत ने हमारी बेटी को अपनी पुलिस के हवाले कर दिया, ताकि हम जिंदगी भर रोतेतड़पते रहें.’’

‘‘मेरे साथ विश्वासघात करने से पहले तुम दोनों ने यह बात जान ली होती?’’ मैं ने कहा.

‘‘हां, हम ने ऐसा सोचा भी नहीं था.’’ जवेरिया धीरे से बोली, ‘‘उस के बाद हमारी बेटी कई बार ख्वाबों में आई. वह यही कहती थी, ‘अम्मी, मैं हूं ना, मैं गुडि़या की शक्ल में हूं. आप उस से प्यार करें.’ बस, वह दिन और आज का दिन. हम इसी गुडि़या को अपने सीने से लगा कर रखते हैं. जव्वाद की भी यही हालत है, जो मेरी है.’’

‘‘हूं,’’ मैं ने गहरी सांस ले कर कहा, ‘‘मैं तुम दोनों को सजा देने के लिए आया था, लेकिन समझ में नहीं आ रहा कि तुम्हें क्या सजा दूं, क्योंकि सजा तो तुम्हें मिल ही रही है.’’

‘‘अब हम तुम्हारे सामने हैं फैसल,’’ जवेरिया ने कहा, ‘‘तुम जो मुनासिब समझो, वह कर सकते हो.’’

‘‘तुम्हारी सजा यही है कि मैं तुम्हारी यह गुडि़या तुम से छीन लूं.’’

‘‘नहीं, ऐसा बिलकुल मत करना,’’ वह रोती हुई बोली, ‘‘हम इस के बिना नहीं रह सकते, हम मर जाएंगे.’’

मैं ने कहा, ‘‘यह सजा तो मैं दूंगा ही. तुम दोनों को मैं माफ नहीं कर सकता.’’

‘‘तुम मेरी बेटी को कहां ले जाओगे, क्या करोगे इस का?’’

‘‘मैं इसे अपने साथ कहीं और ले जाऊंगा. किसी और शहर नहीं, किसे दूसरे देश,’’ मैं ने कहा, ‘‘इस के बाद तुम दोनों इस के लिए तड़पते रहोगे, बेचैन और परेशान होते रहोगे.’’

वह गिड़गिड़ाती हुई बोली, ‘‘मैं तुम्हारे हाथ जोड़ती हूं, तुम हमें माफ कर दो.’’

‘‘बकवास मत करो,’’ मैं ने आगे बढ़ कर गुडि़या छीनते हुए कहा, ‘‘अब तुम इस के बगैर जिंदा रहने की कोशिश करो. और हां, अब तुम जव्वाद की चिंता बिलकुल मत करना, वह आ जाएगा. मेरे आदमी उसे छोड़ देंगे.’’

जवेरिया रोती रही और मैं गुडि़या ले कर बाहर आ गया. इस के कई महीने बाद मैं इस कहानी का अंतिम भाग लिख रहा हूं. शायद जवेरिया इस कहानी को पढ़ सके और उसे यह अहसास हो सके कि उस की बेवफाइयों और दगाबाजियों के बावजूद मैं ने उस के साथ कितनी और कैसी वफा की है? कितना प्यार किया है उस से? मैं उस की गुडि़या ले कर चला आया था. मगर मैं जानता था कि यह सब झूठ है, बकवास है. वह मुझे फिर धोखा दे रही है. एक बड़ा धोखा, क्या जबरदस्त प्लानिंग की थी उन दोनों ने.

शादी के एक साल बाद वाकई उन दोनों के यहां एक बच्ची पैदा हुई थी. बहुत प्यारी सी… लेकिन उस की मौत नहीं हुई थी. वह बिलकुल ठीक थी. जव्वाद ने उसे अपनी एक मौसी के यहां फैसलाबाद भेज दिया था, जहां वह बड़े आराम से रह रही थी. जव्वाद और जवेरिया हर समय इस बात को ले कर चिंतित रहते थे कि बाहर आते ही मैं उन से बदला लूंगा. मुझे बच्चों से बहुत प्यार है, खासतौर पर लड़कियों से. मैं किसी बच्ची को तकलीफ में नहीं देख सकता था. इसीलिए मुझे भावनात्मक रूप से ब्लैकमेल करने का जवेरिया ने नाटक किया. उस ने यह गुडि़या पहले से ही खरीद रखी थी.

जवेरिया, तुम ने मुझे बेवकूफ नहीं बनाया, बल्कि मैं तो मोहब्बत के हाथों वैसे ही बिक चुका था, मैं तो वैसे ही तुम्हारी दुनिया से निकल जाता, फिर मेरे साथ यह दोहरा खेल खेलने की क्या जरूरत थी? एक बात और बता दूं, तुम दोनों को शायद इस बात पर हैरानी होगी कि मुझे इस गुडि़या वाली योजना के बारे में कैसे पता चला? जव्वाद का अपनी एक मौसी के घर, जो फैसलाबाद में रहती है, ज्यादा आनाजाना था. जव्वाद तुम्हारे घर आने से पहले मैं फैसलाबाद गया था. तुम्हारी मौसी ने बताया कि तुम दोनों कुछ दिनों के लिए अपनी बच्ची इन के यहां छोड़ गए हो.

जवेरिया, मैं ने वहीं तुम्हारी बेटी को देखा था और उसे देर तक खिलाया भी था.  कुछ भी हो, तुम मेरी मोहब्बत हो ना, चाहे तुम इस बात को समझो या न समझो. बहरहाल, मैं तुम्हारी दुनिया से जा रहा हूं. तुम खुश रहो, मुझे और क्या चाहिए. और हां, अपनी बेटी को वापस ले आना. अब मैं कभी तुम्हारे घर नहीं आऊंगा. तुम्हें अब मुझ से कोई खतरा नहीं है. मैं ने तुम्हें और जव्वाद को माफ कर दिया है. Hindi Crime Story

True Crime Hindi: अच्छा सिला दिया तूने मेरे प्यार का

True Crime Hindi: नेहा मौडलिंग के जरिए बौलीवुड में एंट्री के लिए स्ट्रगल कर रही थी. लेकिन दोस्त से पति बने प्रिंस ने उसे प्यार का ऐसा सिला दिया कि…

दक्षिणपूर्वी दिल्ली के हरिनगर कालोनी की रहने वाली 21 वर्षीय नेहा मिश्रा मुंबई में रह कर मौडलिंग कर रही थी. वह कई छोटीमोटी ऐड फिल्मों में काम कर चुकी थी और बौलीवुड फिल्मों में एंट्री पाने के लिए स्ट्रगल कर रही थी. अपने घर वालों को बताए बिना उस ने करीब 5-6 महीने पहले दिल्ली के रीयल एस्टेट कारोबारी प्रिंस तेवतिया से एक मंदिर में शादी कर ली थी. लेकिन शादी के बाद नेहा को यह बात अपने घर वालों को बतानी ही पड़ी. बेटी के फैसले पर प्रदीप मिश्रा आहत तो हुए लेकिन उन्होंने सोचा कि जब बेटी ने प्रिंस को अपनी मरजी से चुना है तो उस की खुशी की खातिर उन्होंने उस की पसंद पर अपनी सहमति की मुहर लगा दी. इस के बाद प्रिंस तेवतिया ने भी नेहा के घर आना शुरू कर दिया.

करीब 3 महीने पहले नेहा की तबीयत खराब हो गई तो वह मुंबई से पिता के यहां दिल्ली आ गई थी. उस से मिलने के लिए प्रिंस उस के यहां जाता रहता था. 16 अप्रैल, 2015 को भी वह नेहा के यहां गया था. 2 दिनों से वह नेहा के यहां ही था. 17-18 अप्रैल की रात को नेहा और प्रिंस एक कमरे में सोए हुए थे जबकि नेहा के मातापिता और भाईबहन दूसरे कमरे में सो रहे थे. आधी रात के बाद हुई तेज आवाज से प्रदीप मिश्रा की नींद खुल गई. वह आवाज गोली चलने जैसी थी. उन्होंने पत्नी रोमा को भी जगा दिया. वह आवाज उन की बेटी नेहा के कमरे से आई थी, इसलिए उन की घबराहट बढ़ गई.

दोनों पतिपत्नी बेटी के कमरे की तरफ जाने ही वाले थे कि तभी बेटी के कमरे का दरवाजा खुल गया. उस का पति प्रिंस दरवाजा खोलते हुए बाहर निकला. वह घबराया हुआ था. इस से पहले कि प्रदीप मिश्रा उस के कमरे से आई गोली चलने जैसी आवाज के बारे में उस से पूछते, प्रिंस खुद ही बोल पड़ा, ‘‘मैं ने नेहा को गोली मार दी है.’’

इतना सुनते ही प्रदीप और उन की पत्नी के जैसे होश ही उड़ गए. वह तेज कदमों से बेटी के कमरे में गए. उन्होंने देखा तो नेहा बेड पर पड़ी थी और उस के पेट के निचले हिस्से से खून निकल रहा था. रोमा मिश्रा ने बेटी को हिलायाडुलाया. उस में कोई हलचल नहीं दिखी तो वह जोरजोर से रोने लगीं. बेटी की हालत देखते ही प्रदीप मिश्रा आटोरिक्शा बुलाने के लिए तेजी से निकल गए ताकि उसे जल्द अस्पताल पहुंचाया जा सके. तभी प्रिंस भी घायल नेहा को दोनों बाहों में थामे चौथी मंजिल से नीचे उतर आया. रोमा के रोने की आवाज सुन कर पड़ोसी भी जाग गए थे. वे भी अपनेअपने घरों से गली में आ गए थे. सभी लोग आपस में कानाफूसी कर रहे थे. कोई भी यह नहीं समझ पा रहा था कि आखिर पति ने नेहा को गोली क्यों मारी?

कुछ ही देर में प्रदीप मिश्रा एक आटोरिक्शा वाले को बुला लाए. प्रदीप मिश्रा और उन की पत्नी आटो में बैठ गए और बेटी को उन्होंने अपनी गोद में लिटा लिया. वे उसे एम्स के ट्रामा सेंटर के लिए ले कर चल पड़े जबकि प्रिंस तेवतिया ने उन से यह कह दिया कि वह अपनी कार से ट्रामा सेंटर पहुंच रहा है. नेहा के पेट से खून रिस रहा था. खून रोकने के लिए प्रदीप ने उस के घाव पर एक कपड़ा भी रख दिया था ताकि खून रुक सके. पत्नी को आटो में लिटाने के बाद प्रिंस अस्पताल नहीं गया बल्कि वहां से फरार हो गया. उधर प्रदीप मिश्रा घायल बेटी को ले कर ट्रामा सेंटर पहुंचे तो डाक्टरों को यह पुलिस केस लगा. इसलिए अस्पताल प्रशासन ने इस की सूचना ट्रामा सेंटर बिल्डिंग में ही स्थित पुलिस चौकी में दे दी.

चूंकि यह मामला दक्षिणपूर्वी दिल्ली के सनलाइट थानाक्षेत्र का था, इसलिए पुलिस चौकी से सूचना थाने को दे दी गई. थाने में सूचना मिलते ही एसआई शैलेंद्र सिंह कांस्टेबल सुरेंद्र सिंह को ले कर ट्रामा सेंटर पहुंच गए. वहां डाक्टर नेहा के इलाज में जुटे थे. नेहा मिश्रा की हालत नाजुक बनी हुई थी. वह उस समय बयान देने की स्थिति में नहीं थी. वहां पर उस के पिता प्रदीप मिश्रा मौजूद थे. उन्होंने अपने दामाद द्वारा नेहा को गोली मारने वाली बात पुलिस को बता दी. उन्होंने यह भी बता दिया कि वह गोली मार कर फरार हो गया है. एसआई शैलेंद्र सिंह ने पूरी जानकारी से थानाप्रभारी ओमप्रकाश लेखवाल को अवगत करा दिया.

थानाप्रभारी सब से पहले घटनास्थल पर गए जहां नेहा की छोटी बहन और भाई मिला. जिस कमरे में नेहा को गोली मारी गई थी, उसे उन्होंने बाहर से बंद कर दिया, जिस से वहां कोई भी आजा न सके और उस कमरे का कोई सुबूत नष्ट न हो. क्राइम इनवैस्टीगेशन टीम को भी घटना की सूचना दे कर मौके पर बुला लिया. टीम ने मौके से सुबूत इकट्ठे किए. पुलिस को घटनास्थल से कारतूस के 2 खोखे भी मिले. घटनास्थल की आवश्यक काररवाई निपटाने के बाद थानाप्रभारी एक पुलिसकर्मी को मौके पर छोड़ कर नेहा का बयान लेने के लिए खुद एम्स ट्रामा सेंटर चले गए.

अस्पताल में जो डाक्टर नेहा का इलाज कर रहे थे, उन्होंने थानाप्रभारी को बताया कि गोली नेहा के पेट के निचले हिस्से में लगी है. उस का काफी मात्रा में खून निकल चुका है और अभी भी गोली उस के शरीर में है. हालत में सुधार आने के बाद ही वह बयान दे सकेगी. नेहा के पिता प्रदीप मिश्रा ने थानाप्रभारी को भी बता दिया कि नेहा को गोली उस के पति प्रिंस तेवतिया ने ही मारी थी और वह गोली मार कर फरार हो गया. प्रदीप मिश्रा ने उन्हें प्रिंस का पता भी बता दिया था. थाने लौट कर थानाप्रभारी ने प्रदीप मिश्रा की तरफ से प्रिंस तेवतिया के खिलाफ जान से मारने की नीयत से गोली मारने का केस दर्ज कर लिया. अगली सुबह इलैक्ट्रौनिक मीडिया में मौडल को पति द्वारा गोली मारने की खबर प्रमुखता से प्रसारित हुई तो जिले के पुलिस अधिकारी भी हरकत में आ गए.

डीसीपी मंदीप सिंह रंधावा ने थानाप्रभारी ओमप्रकाश लेखवाल की अध्यक्षता में एक पुलिस टीम बनाई. टीम में सराय कालेखां चौकी के इंचार्ज ललित कुमार, एसआई शैलेंद्र सिंह, हेडकांस्टेबल विपिन सांगवान, विनोद, गोपाल, कांस्टेबल देवेंद्र, प्रवीण आदि को शामिल किया गया. टीम का निर्देशन न्यू फ्रैंड्स कालोनी के एसीपी अनिल यादव को सौंपा गया. टीम के ऊपर अभियुक्त प्रिंस की गिरफ्तारी का दबाव बढ़ रहा था. पुलिस ने दिल्ली के दक्षिणपुरी की गली नंबर-10 स्थित उस के घर पर दबिश दी. लेकिन वहां पर प्रिंस के बजाय रमेश नाम का व्यक्ति मिला. उस ने बताया कि यह मकान प्रिंस के पिता श्यामलाल तेवतिया ने 5-6 साल पहले उसे बेच दिया था. मकान बेच कर वे कहां चले गए, इस का उसे कुछ पता नहीं.

प्रिंस ने नेहा को यही बताया था कि वह दक्षिणपुरी की गली नंबर-10 के मकान नंबर-217 में रहता है. जबकि उस के पिता उस मकान को कई साल पहले बेच चुके थे. आखिर प्रिंस ने अपनी पत्नी से इतना बड़ा झूठ क्यों बोला था, यह बात पुलिस नहीं समझ पाई. पुलिस के पास प्रिंस तेवतिया का फोटो था ही. उस फोटो के माध्यम से पुलिस ने स्थानीय लोगों से पूछताछ की. इस तफ्तीश में पुलिस को चौंकाने वाली जानकारी मिली. पुलिस को पता चला कि प्रिंस रीयल एस्टेट का कारोबारी और आपराधिक प्रवृत्ति वाला है. उस के खिलाफ दिल्ली के अंबेडकरनगर थाने में कई मुकदमे दर्ज हैं.

साल 2010 में उस ने एक व्यक्ति की चाकू मार कर हत्या कर दी थी. इस की वजह सिर्फ यह थी कि उस की प्रिंस के पिता श्यामलाल से कहासुनी हो गई थी और उस ने श्यामलाल को थप्पड़ मार दिया था. उस थप्पड़ के बदले उसे मौत मिली. हत्या के इस केस में प्रिंस जेल गया. 2014 में जेल से आने के बाद वह आयानगर में रहने वाले बदमाश रोहित चौधरी के संपर्क में आया. फिर उस के साथ ही अपराध करने लगा. रोहित थाना महरौली में एक हत्या के मामले में वांछित है. बाद में प्रिंस बदमाशों के बीच शूटर के नाम से मशहूर हो गया. वह अपने पास अकसर पिस्टल रखता था.

बताया जाता है कि प्रिंस गुस्सैल स्वभाव का है. छोटीछोटी बात पर वह अपना आपा खो बैठता है. बात इसी साल की है. एक बार वह अपनी कार से कहीं जा रहा था. हौर्न बजाने के बावजूद भी एक कार वाले ने उसे साइड नहीं दी तो कुछ देर बाद उस ने ओवरटेक कर के उस कार वाले पर गोली चला दी. इत्तफाक से वह गोली उसे नहीं लगी. इस मामले की रिपोर्ट अंबेडकरनगर थाने में दर्ज करा दी गई थी. पुलिस को पता चला कि प्रिंस तेवतिया का फेसबुक पर भी एकाउंट है. फेसबुक खंगालने पर पुलिस को यह जानकारी मिली कि उस की जितेश नाम के एक शख्स के साथ अच्छी दोस्ती है. जितेश भी आपराधिक प्रवृत्ति का है. जितेश स्नैचिंग और लूटपाट करता था.

बताया जाता है कि अपने केसों की सुनवाई के सिलसिले में जितेश का अकसर साकेत कोर्ट जाना लगा रहता था. वहीं पर एक वकील की शालिनी नाम की असिस्टैंट से जितेश की अच्छी जानपहचान हो गई थी. बाद में दोनों में दोस्ती हो गई. इन की दोस्ती की खबर जितेश की पत्नी को हुई तो उसे बहुत बुरा लगा. उस ने पति को समझाया कि वह शालिनी से न मिले. लेकिन जितेश नहीं माना तो एक दिन वह पति को ले कर शालिनी के घर पहुंच गई और उसे खरीखोटी सुनाते हुए हाथापाई भी की. जब बात बढ़ गई तो जितेश ने हवाई फायर भी किया. जितेश और अन्य के खिलाफ इस मामले की रिपोर्ट थाना अंबेडकरनगर में दर्ज हुई.

इसी जांच की कड़ी में पुलिस को यह भी पता चला कि मार्च, 2015 में प्रिंस ने मालवीय नगर क्षेत्र में किसी को गोली मारी थी. इस घटना के बाद वह अपने दोस्त जितेश के साथ ही कहीं रह रहा था. प्रिंस ने अपना मोबाइल फोन भी स्विच्ड औफ कर रखा था इसलिए यह पता नहीं लग पा रहा था कि वह कहां रह रहा है. किसी तरह पुलिस को जितेश का मोबाइल नंबर मिल गया. उस मोबाइल की लोकेशन से पता चला कि वह रोहिणी सेक्टर-7 में कहीं रह रहा है. पुलिस टीम रोहिणी सेक्टर-7 पहुंच गई. सर्विलांस टीम के सहयोग से जांच करतेकरते पुलिस टीम इस सेक्टर के जी-21/326 फ्लैट पर पहुंच गई. उस फ्लैट में 2 लड़के मिले.

पुलिस के पास केवल प्रिंस का ही फोटोग्राफ था, उसी के आधार पर यह पता लगा कि उन दोनों में से प्रिंस कोई नहीं है. जितेश को वह नहीं जानती थी. उन दोनों लड़कों में से कोई जितेश तो नहीं है, जानने के लिए पुलिस ने उन दोनों से ही सख्ती से पूछताछ की. लेकिन उन में से कोई भी जितेश नहीं निकला. पुलिस ने उन लड़कों को प्रिंस तेवतिया का फोटो दिखाया तो उन्होंने तुरंत कहा कि एक लड़का और लड़की के साथ यह इसी ब्लौक में अकसर दिखाई देता है. उस ने यह भी बताया कि इन के पास एक मारुति रिट्ज कार भी है. यह जानकारी पा कर पुलिस को थोड़ी तसल्ली हुई.

जितेश के फोन की लोकेशन और इन दोनों लड़कों से मिली जानकारी के बाद पुलिस को इतना तो यकीन हो गया था कि प्रिंस सेक्टर-7 के जी ब्लौक में ही कहीं रहता है. उन लड़कों से उस रिट्ज कार का नंबर भी मिल गया, जिस से ये लोग आतेजाते थे. पुलिस सादे कपड़ों में थी. वह उसी ब्लौक में अलगअलग गलियों में खड़े हो कर रिट्ज कार संख्या डीएल3सी 4302 के आने का इंतजार करने लगी. शाम के समय हेडकांस्टेबल विनोद ने उक्त नंबर की कार एक गली में आती हुई देखी तो उस ने फोन द्वारा इस की सूचना दूसरी गली में तैनात थानाप्रभारी ओमप्रकाश लेखवाल को दे दी. हेडकांस्टेबल विनोद ने कार का पीछा किया तो वह कार फ्लैट नंबर जी-20/30 के पास आ कर रुक गई. उस कार से 2 युवक और एक युवती उतर कर फ्लैट में दाखिल हो गए.

कुछ ही देर में पूरी पुलिस टीम उस फ्लैट के पास आ गई. टीम ने उस फ्लैट में दबिश दी तो वहां से 2 युवक और एक युवती मिले.  पूछताछ में उन युवकों ने अपने नाम प्रिंस तेवतिया व जितेश बताए. उन के साथ जो युवती मिली वह जितेश की पत्नी थी. पुलिस ने तीनों को हिरासत में ले लिया. पूछताछ के लिए पुलिस उन्हें थाने ले आई. यह 20 अप्रैल, 2015 की बात है. चूंकि जितेश और उस की पत्नी थाना अंबेडकरनगर के एक केस में वांछित थे इसलिए उन्हें हिरासत में लेने की सूचना अंबेडकरनगर थाने को दी तो वहां की पुलिस जितेश और उस की पत्नी को कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर के अपने साथ ले गई. थानाप्रभारी ओमप्रकाश लेखवाल ने एसीपी अनिल यादव की मौजूदगी में प्रिंस तेवतिया से मौडल नेहा मिश्रा को गोली मारने की बाबत पूछताछ की तो इस घटना के पीछे की एक दिलचस्प कहानी सामने आई.

नेहा मिश्रा दक्षिणपूर्वी दिल्ली के थाना सनलाइट कालोनी के हरिनगर में रहने वाले प्रदीप मिश्रा की बड़ी बेटी थी. नेहा के अलावा प्रदीप मिश्रा के एक बेटा और एक बेटी और थी. कैटरिंग का काम करने वाले प्रदीप मिश्रा मूलरूप से उड़ीसा के जिला भद्रक के गांव उलग के रहने वाले थे. काफी दिनों पहले वह काम की तलाश में दिल्ली आए थे. दिल्ली आ कर उन्होंने हलवाई का काम किया. बाद में वह कैटरिंग के धंधे से जुड़ गए. काम जम गया तो वे अपनी पत्नी रोमा को भी दिल्ली ले आए. उन के 3 बच्चे हुए जिन में 2 बेटियां और 1 बेटा था. प्रदीप मिश्रा साधनसंपन्न थे इसलिए वह अपने तीनों बच्चों को एक नामी प्राइवेट स्कूल में पढ़ा रहे थे.

बड़ी बेटी नेहा जितनी खूबसूरत थी, पढ़ाई में भी उतनी ही तेज थी. नेहा के फिगर की उस की सहेलियां बड़ी तारीफ करती थीं. वे उसे दीपिका पादुकोण कह कर बुलाती थीं. अपनी तारीफ पर नेहा भी इतराए बिना नहीं रहती थी. नेहा को फिल्में और टीवी देखने का बहुत शौक था. वह जब भी कोई फिल्म या नाटक देखती तो टीवी या सिल्वर स्क्रीन पर आने की लालसा करती. उस की यह चाहत दिनोंदिन बढ़ती ही जा रही थी. वह फिल्मों या टीवी धारावाहिकों में काम करने के सपने देखने लगी. मगर उस के लिए यह काम आसान नहीं था. क्योंकि उस के नातेरिश्तेदारों या परिचितों में कोई ऐसा व्यक्ति नहीं था, जिस से उसे अपनी मंजिल पाने में सहयोग मिल सके.

अब उसे एक ही रास्ता दिखाई दे रहा था, वह रास्ता था मौडलिंग का. वह जानती थी कि तमाम हीरोइनें मौडलिंग के जरिए ही बौलीवुड में पहुंच कर अपना मुकाम हासिल कर चुकी हैं. इसलिए 10+2 परीक्षा पास करने के बाद उस ने अपने मन की बात अपने घर वालों को बताई और उन की अनुमति के बाद वह अपनी एक जानकार के साथ दिल्ली की एक मौडलिंग एजेंसी चली गई. नेहा का चेहरा फोटोजेनिक था.  इसलिए फोटोग्राफर ने फोटो शूट के लिए उसे 2 दिन बाद आने को कहा. 2 दिन बाद नेहा फिर से उस स्टूडियो में पहुंची तो फोटोग्राफर ने उस के कई फोटो खींचे. वहां हुए अपने फोटोसेशन के फोटो देख कर नेहा को अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हो रहा था. फोटोग्राफर ने फोटो में उस का जो व्यक्तित्व उभारा था, उसे देख कर वह दंग रह गई.

वह फोटो देख कर नेहा का आत्मविश्वास जागा. उसे लगा कि उस का चेहरा और फिगर कई हीरोइनों से काफी अच्छी और आकर्षक है. दिल्ली में मौडलिंग के दौरान ही उस की मुलाकात अर्पित नाम के एक प्रोड्यूसर से हुई जो मुंबई में काम करता था और दिल्ली आताजाता रहता था. अर्पित का मुंबई में एक स्टूडियो भी था. नेहा का फोटोजेनिक चेहरा देख कर अर्पित बेहद खुश हुआ. उस ने नेहा को अपनी मुंहबोली बहन बनाया. उस ने नेहा से कहा कि तुम जैसी खूबसूरत लड़कियों की जरूरत तो मुंबई में है. कोशिश करने पर वहां तुम्हें कहीं न कहीं काम मिल ही जाएगा. नेहा भी तो यही चाहती थी. उस के कहने पर वह मुंबई चली गई.

मुंबई में अर्पित ने नेहा का पोर्टफोलियो तैयार किया. इस के बाद उस के पोर्टफोलियो तमाम म्यूजिक व ऐड कंपनियों को भेजे. इस का नतीजा यह निकला कि एक ऐड कंपनी में नेहा को काम करने का मौका मिल गया. वह कंपनी सूरत की कई साड़ी कंपनियों के ऐड तैयार करती थी. नेहा को पहली बार किसी व्यावसायिक विज्ञापन में काम करने का मौका मिला था. इसलिए उस ने पूरे मन लगा कर काम किया. इस के बाद उसे एकदो ऐड फिल्में और मिलीं तथा उस ने कई रियलिटी शो में भी भाग लिया. अब नेहा बहुत खुश थी. उसे लग रहा था कि इसी तरह उसे काम मिलता रहा हो सिल्वर स्क्रीन पर चमकने का उस का सपना जल्द ही पूरा हो जाएगा. अर्पित भी उस के लिए बहुत मेहनत कर रहा था. वह उसे एकता कपूर के बालाजी प्रोडक्शन के एक सीरियल में कोई ढंग का रोल दिलाने की कोशिश कर रहा था.

चूंकि अर्पित नेहा का कैरियर बनाने में लगा था इसलिए नेहा उसे अपने सगे भाई से भी ज्यादा महत्त्व देती थी. वह बीचबीच में अपने घर दिल्ली भी आती रहती थी. दिल्ली आ कर वह अपने पुराने दोस्तों से भी मिलती थी. उन के साथ वह खूब हंसीठिठोली करती थी. उसी दौरान अपनी एक दोस्त की मार्फत उस की मुलाकात प्रिंस तेवतिया नाम के युवक से हुई. प्रिंस तेवतिया के पिता मूलरूप से उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के निलोखेड़ा गांव के रहने वाले थे. वह दिल्ली विकास प्राधिकरण में नौकरी करते थे. प्रिंस के अलावा उन के एक बेटा और एक बेटी थी. 23 साल का प्रिंस भी हैंडसम था. वह प्रौपर्टी खरीदने व बेचने का धंधा करता था. इस धंधे में उसे अच्छीखासी कमाई हो जाती थी, जिस से वह बनठन कर रहता था.

इस के अलावा वह आपराधिक प्रवृत्ति का भी था. उस के ऊपर हत्या, हत्या का प्रयास, मारपीट आदि के कई मुकदमे चल रहे थे. गुस्सैल स्वभाव का प्रिंस अकसर अपने साथ रिवाल्वर रखता था. छोटी सी बात पर ही वह गोली चला देता था. इसलिए वह अपने दोस्तों के बीच शूटर के नाम से जाना जाता था. नेहा प्रिंस से मिल कर बहुत प्रभावित हुई. पहली मुलाकात में ही दोनों ने एकदूसरे को अपने फोन नंबर दे दिए थे. जब भी उन्हें मौका मिलता वे फोन पर बातें करते थे. बातों ही बातों में उन की दोस्ती और गहरी होती गई. नेहा जब भी मुंबई से आती, प्रिंस के साथ कार से सैरसपाटे करती थी. इसी दौरान वे एकदूसरे के बेहद करीब पहुंच गए. वे एकदूसरे को दिलोजान से चाहने लगे.

प्रिंस की तरफ प्यार के कदम बढ़ाने से पहले नेहा उस के बैकग्राउंड के बारे में कुछ नहीं जानती थी. उस की नजरों में तो प्रिंस एक शरीफ व होनहार युवक था. तभी तो उस ने अपना दिल उस के हवाले कर दिया था. उसे लगा कि प्रिंस के साथ उस की लाइफ हंसीखुशी से कटेगी इसलिए उस ने अपने मीत को प्रियतम बनाने का फैसला कर लिया. प्रिंस भी उसे दिलोजान से चाहता था. कुछ दिनों तक उन के प्यार की गाड़ी ऐसे ही चलती रही. दोनों ही शादी करना चाहते थे इसलिए उन्होंने एक मंदिर में शादी कर ली. यह बात 5-6 महीने पहले की है. नेहा ने इस शादी की खबर अपने घर वालों तक को नहीं दी थी.

चूंकि वह मौडलिंग के पेशे से जुड़ी थी इसलिए उस ने प्रिंस से कह दिया था कि वह शादी वाली बात प्रचारित न करे ताकि उस के प्रोफेशन पर कोई फर्क न पड़े. पत्नी की बात को ध्यान में रखते हुए प्रिंस ने शादी की बात अपने घर वालों के अलावा किसी को नहीं बताई. नेहा का लक्ष्य हिंदी फिल्मों में एंट्री पाना था, इसलिए वह शादी के बाद अकसर मुंबई में ही रहती थी. उस का जल्दीजल्दी दिल्ली आना संभव नहीं था. प्रिंस के सामने अब एक ही रास्ता बचा था कि वह खुद भी मुंबई जाए. लेकिन उस के लिए ऐसा संभव नहीं था क्योंकि दिल्ली में उस का कारोबार जमाजमाया था. पत्नी के मुंबई रहने पर वह उस से मिलने के लिए बेचैन रहता था.

करीब 3 महीने पहले नेहा की तबीयत खराब हो गई तो वह अपने पिता के यहां दिल्ली आ गई थी. उसी दौरान उस ने अपनी मां को बता दिया था कि उस ने दिल्ली के प्रिंस तेवतिया से शादी कर ली है. यह सुन कर रोमा चौंक गईं. उन्होंने बात पति को बताई तो उन्हें भी आघात पहुंचा. जवान बेटी पर नाराज होने के बजाय उन्होंने उस से इतना जरूर कहा कि शादी से पहले कम से कम वह प्रिंस के बारे में उन्हें बता तो देती. जांचनेपरखने के बाद वह फिर सामाजिक रीतिरिवाज से शादी कर देते. नेहा मुंह लटकाए ऐसे ही बैठी रही, वह कुछ नहीं बोली.

खैर, जो होना था हो चुका था. इस में अब वह कुछ नहीं कर सकते थे. इस के बाद प्रिंस ने भी उनके यहां आना शुरू कर दिया. प्रिंस नहीं चाहता था कि नेहा मौडलिंग करे इसलिए वह बारबार मुंबई से दिल्ली लौटने के लिए कहता था. वह चाहता था कि नेहा उस के घर पर ही रहे लेकिन अपने कैरियर को ध्यान में रखते हुए नेहा ऐसा करने को तैयार नहीं थी. एक दिन नेहा ने प्रिंस के फोन की मेमोरी खंगाली तो उस में अनेक मैसेज ऐसे मिले जो लड़कियों या महिलाओं द्वारा भेजे गए थे. इस बारे में नेहा ने प्रिंस से पूछा तो उस ने बताया कि वह उस की दोस्त हैं. लेकिन नेहा को शक हो गया कि प्रिंस के उन के साथ जरूर ही दूसरी तरह के रिश्ते होंगे. यानी नेहा के दिमाग में शक के कीड़े ने जन्म ले लिया. प्रिंस ने लाख सफाई दी लेकिन नेहा कहां मानने वाली थी.

प्रिंस 16 अप्रैल, 2015 को भी हरिनगर में स्थित नेहा के घर गया. 2 दिन वह वहीं रहा. 17-18 अप्रैल की रात को उस ने नेहा के कमरे में शराब पी. फिर खाना खाने के बाद वह सोने के लिए नेहा के कमरे में चला गया. घर के बाकी लोग दूसरे कमरे में सो गए. आधी रात तक नेहा और प्रिंस बातें करते रहे. उसी दौरान प्रिंस ने नेहा से कहा, ‘‘नेहा, मैं तुम से कई बार कह चुका हूं कि तुम मौडलिंग छोड़ दो. लेकिन तुम मेरी बात मान ही नहीं रही.’’

‘‘देखो प्रिंस, मैं बौलीवुड में एंट्री करने के लिए स्ट्रगल कर रही हूं. मुझे मुंबई में जम जाने दो, फिर तुम भी वहीं रहना.’’ नेहा बोली.

‘‘नहीं, मुझे यह सब पसंद नहीं है. मुझे मालूम है कि फिल्मों में काम करने की ख्वाहिश लिए कितनी लड़कियां मुंबई जाती हैं और उन्हें वहां क्याक्या करना पड़ता है. फिल्मों में काम मिलना इतना आसान नहीं होता, जितना तुम समझ रही हो. मेरा काम ठीकठाक चल रहा है इसलिए तुम यह सब छोड़ कर मेरे घर चलो. मैं तुम्हें किसी तरह की परेशानी नहीं होने दूंगा.’’ प्रिंस ने समझाया. लेकिन नेहा पर तो दूसरी तरह का भूत सवार था. इसलिए उस ने साफ कह दिया कि वह मौडलिंग हरगिज नहीं छोड़ेगी. दोनों के बीच बात बढ़ी तो नेहा ने कह दिया, ‘‘मेरे मुंबई में रहने पर तुम्हें कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि तुम्हारे कई लड़कियों से संबंध हैं.’’

‘‘जिस तरह तुम मेरे लिए कह रही हो उसी तरह तुम्हारे भी कई बौयफ्रैंड हैं. तुम भी उन के साथ मटरगश्ती करती होगी इसलिए मुंबई नहीं छोड़ना चाहती.’’ प्रिंस ने भी आरोप लगाया.

‘‘तुम्हें इस तरह की फालतू बकवास करते हुए शर्म नहीं आती. मैं इस तरह की लड़की नहीं हूं जैसा तुम सोच रहे हो.’’ नेहा ने उसे झिड़का.

‘‘अब तुम यह बताओ कि तुम मेरे घर चलोगी या नहीं.’’ पिं्रस ने गुस्से में पूछा तो नेहा ने भी गुस्से में कह दिया, ‘‘नहीं, मैं अभी न तो मौडलिंग छोड़ूंगी और न ही तुम्हारे घर जाऊंगी.’’

प्रिंस गुस्से में तमतमाया हुआ था. उस ने पैंट से पिस्तौल निकाला और नेहा पर गोली चला दी. गोली नेहा के पेट के निचले हिस्से में लगी. उस ने उस पर दूसरी गोली चलानी चाही तभी नेहा ने हिम्मत कर के उस की पिस्तौल छीनने की कोशिश की. उसी दौरान ट्रिगर दब गया और गोली छत पर जा लगी. कुछ ही पल में नेहा के पेट से खून बहने लगा. उस की आंखों के सामने अंधेरा छाने लगा और वह बेड पर गिर कर बेहोश हो गई. उधर गोली की आवाज सुन कर दूसरे कमरे में सो रहे प्रदीप मिश्रा की नींद टूट गई. उन्होंने पत्नी रोमा को जगाया. चूंकि गोली की आवाज नेहा के कमरे की ओर से आई थी, इसलिए वह उस के कमरे की तरफ भागे.

उधर प्रिंस ने गुस्से में अपनी पत्नी को गोली मार तो दी, लेकिन उस की हालत देख कर वह घबरा गया था. उस ने जल्दी से दरवाजा खोला तो सामने खड़े अपने सासससुर को नेहा को गोली मारने वाली बात बता दी. यह बात सुन कर प्रदीप मिश्रा और उन की पत्नी तेज कदमों से बेटी के कमरे में गए तो बिस्तर पर लहूलुहान पड़ी बेटी को देख कर वे घबरा गए. तभी प्रदीप मिश्रा दौड़ेदौड़े आटो बुलाने के लिए निकल पड़े तो प्रिंस बांहों में नेहा को उठा कर चौथी मंजिल से नीचे ले गया. जैसे ही प्रदीप आटो लाए, उस ने नेहा को आटो में लिटा दिया और खुद वहां से फरार हो गया.

प्रिंस से पूछताछ के बाद पुलिस ने उस के खिलाफ भादंवि की धारा 307 और 25, 27, 54, 59 आर्म्स एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर के 21 अप्रैल, 2015 को साकेत कोर्ट में पेश कर एक दिन के पुलिस रिमांड पर लिया. रिमांड अवधि में उस की निशानदेही पर वारदात में प्रयुक्त पिस्तौल और एक जीवित कारतूस बरामद किया. इस के बाद उसे 22 अप्रैल को महानगर दंडाधिकारी अशोक कुमार की कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया. उधर एम्स ट्रामा सेंटर में भरती नेहा की हालत सीरियस बनी हुई थी. डा. कुट्टी शारदा विनोद की टीम ने 20 अप्रैल को उस का औपरेशन कर पेट से गोली निकाली. इस के बाद धीरेधीरे उस की हालत में सुधार होता गया तो 28 अप्रैल, 2015 को उसे अस्पताल से डिस्चार्ज कर घर भेज दिया.

इस हादसे के बाद नेहा मिश्रा बेहद डरीसहमी हुई है. जिस प्रिंस को उस ने अपना सब कुछ मान लिया था, उस से उसे ऐसा दर्द मिलने की उम्मीद नहीं थी. पुलिस द्वारा जब नेहा को प्रिंस की आपराधिक पृष्ठभूमि की जानकारी मिली तो वह चौंक गई. अब नेहा को अपने फैसले पर पछतावा हो रहा है. मामले की तफ्तीश थानाप्रभारी ओमप्रकाश लेखवाल कर रहे हैं. True Crime Hindi

—कथा पुलिस सूत्रों व नेहा के बयान पर आधारित. कथा में शालिनी व अर्पित परिवर्तित नाम हैं.

 

UP News: मोहब्बत की बुनियाद पर रची साजिश

UP News: सना ने प्यार की बुनियाद रखी तो थी प्रेमी सौरभ सक्सेना के साथ, लेकिन महत्त्वाकांक्षाओं ने उस के कदम खुरशीद आलम की तरफ मोड़ दिए. फिर सना ने सौरभ को रास्ते से हटाने के लिए खुरशीद के साथ मिल कर ऐसी साजिश रची कि…

मुरादाबाद शहर की रामगंगा विहार फेज-2 कालोनी का रहने वाला सौरभ सक्सेना रोज की तरह 6 फरवरी, 2015 को भी सुबह साढ़े 6 बजे मौर्निंग वौक के लिए घर से निकला. वह घूमटहल कर घंटे-2 घंटे में घर लौट आता था, लेकिन उस दिन वह 2-3 घंटे तक नहीं लौटा तो पिता के.सी. सक्सेना  ने यह जानने के लिए उसे फोन लगाया कि वह कहां है और अब तक घर क्यों नहीं लौटा? लेकिन उस का फोन बंद था. घर वालों ने सौरभ के दोस्तों को फोन किया तो पता चला कि वह उन के पास भी नहीं गया. उस का कहीं पता न चलने पर घर वाले परेशान हो गए.

सौरभ ने कुछ दिनों पहले ही आशियाना मोहल्ले में स्थित बौडी फ्यूल फिटनेस एकेडमी जिम जाना शुरू किया था. यह बात उस के बड़े भाई गौरव को पता थी. सौरभ जिम गया था या नहीं, यह जानने के लिए वह वहां गया तो उस के गेट पर ताला लटका मिला. वहां से वह निराश हो कर घर लौट आया. दोपहर के समय के.सी. सक्सेना के फोन पर सौरभ का फोन आया तो वह खुश हुए कि बेटे का फोन आ गया. उन्होंने जैसे ही हैलो कहा, दूसरी ओर से कहा गया, ‘‘पापा, मैं इस समय नवीननगर में हूं.’’

इस के बाद दूसरी तरफ से फोन काट दिया गया. के.सी. सक्सेना उस आवाज को सुन कर हैरान थे, क्योंकि वह आवाज सौरभ की नहीं थी. वह सोच में पड़ गए कि आखिर कौन है, जो सौरभ बन कर बात कर रहा है. उसी दिन सौरभ के फोन से हिमांशु के फोन पर भी फोन आया था कि उस के पास पापा का फोन तो नहीं आया था? हिमांशु सौरभ का दोस्त था. वह आवाज सुन कर हिमांशु भी चौंका था, क्योंकि वह आवाज सौरभ की नहीं थी. हिमांशु ने यह बात सौरभ के पिता के.सी. सक्सेना को बता दी थी. के.सी. सक्सेना अब और ज्यादा परेशान हो गए कि उन का जवान बेटा न जाने कहां है और उस के फोन से न जाने कौन बात कर रहा है? वह अपने परिचितों को ले कर थाना सिविल लाइंस पहुंचे और बेटे की गुमशुदगी दर्ज करा दी.

सौरभ की चिंता में उस के घर वाले रात भर परेशान रहे. अगले दिन के.सी. सक्सेना एसएसपी लव कुमार से मिले. मामले की गंभीरता को समझते हुए एसएसपी ने उसी समय एसपी (सिटी) प्रदीप गुप्ता को अपने औफिस में बुलवाया और इस मामले में आवश्यक काररवाई करने को कहा. के.सी. सक्सेना ने एसपी (सिटी) प्रदीप गुप्ता को विस्तार से पूरी बात बता कर कहा कि जिस शख्स ने सौरभ के फोन से बात की थी, वह उस शख्स को नहीं जानते. उन्होंने पुलिस को यह भी बताया कि उन की किसी से कोई रंजिश वगैरह भी नहीं है. जिस समय के.सी. सक्सेना के फोन पर सौरभ के फोन से बात की गई थी, उस समय उस की लोकेशन कहां थी, यह जानने के लिए एसपी (सिटी) प्रदीप गुप्ता ने सौरभ के फोन की काल डिटेल्स निकलवाने के साथ उस के फोन नंबर को सर्विलांस पर लगवा दिया.

एसपी (सिटी) के निर्देश पर सिविल लाइंस के सीओ मोहम्मद इमरान ने सौरभ की काल डिटेल्स का अध्ययन किया तो पता चला कि 6 फरवरी को उस के फोन से दोपहर एक बजे के करीब मुरादाबाद शहर के ही पीली कोठी इलाके से बात की गई थी. इसी के साथ एक फोन नंबर ऐसा भी मिल गया, जिस से सौरभ के मोबाइल पर 6 फरवरी को सुबह 6 बज कर 25 मिनट पर बात की गई थी. उसी नंबर से 26 जनवरी, 2015 से 7 फरवरी, 2015 तक सौरभ के मोबाइल पर 6 बार बात हुई थी. यह फोन नंबर यूनिनार कंपनी का था.

यूनिनार कंपनी का यह फोन नंबर पुलिस के शक के दायरे में आ गया. मोहम्मद इमरान ने यूनिनार कंपनी के इस फोन नंबर की भी काल डिटेल्स निकलवाई. इस में पुलिस को चौंकाने वाली यह जानकारी मिली कि इस नंबर से केवल सौरभ के मोबाइल पर ही बातें की गई थीं. इस से पुलिस को यह समझने में देर नहीं लगी कि यह नंबर केवल सौरभ से बात करने के लिए ही लिया गया था. अब पुलिस यह जानने में लग गई कि यूनिनार कंपनी का यह नंबर किस के नाम से लिया गया था. पुलिस को यूनिनार कंपनी से जो जानकारी मिली, उस से पता चला कि वह नंबर रेलवे हरथला कालोनी के दुकानदार मुन्ना पहाड़ी से खरीदा गया था. नंबर लेते समय 2-2 आईडी प्रूफ लगे थे.

ताज्जुब की बात यह थी कि दोनों आईडी पर अलगअलग लोगों के फोटो लगे थे. एक आईडी संभल के किसी आदमी की थी तो दूसरी मुरादाबाद के आदमी की थी. दोनों ही पतों पर पुलिस टीमें भेजी गईं, लेकिन दोनों पते फरजी निकले. इस से पुलिस की जांच जहां की तहां रुक गई. कहीं से कोई सुराग मिले, इस के लिए पुलिस टीम फिर से यूनिनार के उस फोन नंबर की काल डिटेल्स खंगालने लगी. पता चला कि इस नंबर की 3 दिन पहले की लोकेशन आशियाना इलाके की थी. सीओ मोहम्मद इमरान ने के.सी. सक्सेना से पूछा कि आशियाना इलाके में सौरभ का कोई परिचित तो नहीं रहता? इस पर उन्होंने बताया कि आशियाना इलाके के बौडी फ्यूल फिटनेस एकेडमी नाम के जिम में सौरभ जाता था.

सौरभ के गायब होने का राज कहीं इस जिम में तो नहीं छिपा, यह जानने के लिए मोहम्मद इमरान बौडी फ्यूल फिटनेस एकेडमी नाम के उस जिम में पहुंचे. वहां जिम संचालक खुरशीद आलम और जिम की रिसैप्शनिस्ट सना उर्फ सदफ मिली. उन्होंने दोनों से सौरभ के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि सौरभ उन के जिम में आता तो था, लेकिन 6 फरवरी से वह जिम नहीं आ रहा है. उन से बात करने के बाद सीओ साहब अपने औफिस लौट आए. कई दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस को सौरभ के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली थी. उस का मोबाइल फोन बंद था. सौरभ अगवानपुर के एक इंटर कालेज से इंटरमीडिएट की पढ़ाई कर रहा था. मोहल्ले में और कालेज में उस के जो भी नकदीकी दोस्त थे, पुलिस ने उन सब से पूछताछ की. उन से भी सौरभ के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली.

11 फरवरी, 2015 को मुरादाबाद के ही थाना मझोला के अंतर्गत आने वाले भोला सिंह की मिलक के पास नाले में एक ड्रम देखा गया. ड्रम का आधा भाग पानी में डूबा था और आधा पानी के ऊपर दिखाई दे रहा था. शक होने पर किसी ने इस की सूचना थाना मझोला पुलिस को दे दी. मझोला पुलिस ने मौके पर पहुंच कर उस ड्रम को नाले से निकलवाया तो उस में से प्लास्टिक के बोरे में बंद एक युवक की लाश निकली. वह युवक ट्रैक सूट और स्पोर्ट्स शूज पहने था. मझोला पुलिस ने लाश का हुलिया बताते हुए इस बात की सूचना वायरलैस द्वारा जिला पुलिस कंट्रोलरूम को दे दी.

सिविल लाइंस के थानाप्रभारी ने वायरलैस की यह सूचना सुनी तो वह चौंके, क्योंकि लाश का जो हुलिया बताया गया था, वही हुलिया उन के क्षेत्र के गायब युवक सौरभ सक्सेना का था. थानाप्रभारी ने फोन कर के तुरंत सौरभ के पिता को थाने बुलाया और उन्हें ले कर भोला सिंह की मिलक के पास उस जगह पहुंच गए, जहां ड्रम में लाश मिली थी. जैसे ही के.सी. सक्सेना ने लाश देखी, वह दहाड़ें मार कर रोने लगे. क्योंकि वह लाश उन के 19 वर्षीय बेटे सौरभ की ही थी. उस का सिर फूटा हुआ था. उस के मुंह में एक लंगोट ठूंसा हुआ था और दूसरे लंगोट से उस की नाकमुंह को कवर करते हुए गले को बांधा गया था. देख कर ही लग रहा था किसी भारी चीज से उस के सिर पर कई वार किए गए थे. सौरभ की हत्या की खबर मिलते ही उस के घर में कोहराम मच गया. परिवार के लोग और संबंधी रोतेबिलखते घटनास्थल पर पहुंच गए.

सूचना मिलने के बाद एसएसपी लव कुमार और अन्य पुलिस अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए थे. जरूरी काररवाई के बाद पुलिस ने लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. 11 फरवरी की शाम को ही डाक्टरों के एक पैनल ने सौरभ सक्सेना की लाश का पोस्टमार्टम किया. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार सौरभ की हत्या करीब 5 दिनों पहले की गई थी यानी जिस दिन वह गायब हुआ था, उस के कुछ घंटे बाद ही उसे मार दिया गया था. हत्यारों ने लोहे की रौड जैसी किसी भारी चीज से उस के सिर पर 18 वार किए थे. वार इतनी ताकत से किए गए थे कि उस के सिर की हड्डियां तक टूट गई थीं. इस के बाद सिर को बुरी तरह कुचला गया था. डाक्टरों ने मौत की वजह हेड इंजरी बताया था.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट पढ़ने के बाद पुलिस ने अनुमान लगाया कि हत्यारों ने सौरभ के मुंह में लंगोट ठूंस कर दूसरे लंगोट से जिस तरह उस की नाक और मुंह को बांधा था, हत्या करने वालों की संख्या 2 से अधिक रही होगी. ऐसा उन्होंने इसलिए किया होगा, ताकि उस की चीख न निकल सके. यह सब किस ने किया था, यह पता लगाना पुलिस के लिए आसान नहीं था. लाश के पास ऐसा कोई सुबूत नहीं मिला था, जिस से हत्यारों तक जल्दी पहुंचा जा सके. लंगोट और ड्रम के सहारे पुलिस ने जांच आगे बढ़ाने की कोशिश शुरू की. सब से पहले पुलिस ने के.सी. सक्सेना से पूछा कि सौरभ लंगोट बांधता था क्या?

‘‘नहीं, वह घर पर कभी लंगोट नहीं बांधता था. हो सकता है कि जिम में एक्सरसाइज करते समय लंगोट बांधता रहा हो.’’ के.सी. सक्सेना ने बताया तो सीओ मोहम्मद इमरान के नेतृत्व में एक पुलिस टीम एक बार फिर आशियाना कालोनी स्थित जिम बौडी फ्यूल फिटनेस एकेडमी पहुंची. उस जिम के बाईं ओर रेड सफायर नाम का बैंक्वेट हाल था. उस के बाहर सीसीटीवी कैमरे लगे थे. जिम के दाईं ओर एक अस्पताल था, उस के बाहर भी सीसीटीवी कैमरे लगे थे. 6 फरवरी को सौरभ जिम में आया था या नहीं, यह बात सीसीटीवी फुटेज से पता लग सकती थी. पुलिस ने बैंक्वेट हाल और अस्पताल के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज देखी तो उस में 6 फरवरी की सुबह सौरभ एक लड़की के साथ जिम की तरफ आता दिखाई दिया.

सौरभ के भाई गौरव ने उस लड़की को तुरंत पहचान कर बताया कि यह लड़की उस के घर में काम करने वाली नौकरानी की बेटी सना उर्फ सदफ है. यह बौडी फ्यूल फिटनेस जिम में नौकरी करती है. फुटेज देखने के बाद पुलिस को इस बात पर हैरानी हुई कि जिम संचालक खुरशीद आलम और सना ने उस से यह झूठ क्यों बोला कि 6 फरवरी को सौरभ जिम नहीं आया था. जबकि फुटेज में वह सना के साथ जिम में जाता दिखाई दिया था. पुलिस टीम खुरशीद आलम के जिम पहुंची. सीओ मोहम्मद इमरान को देखते ही खुरशीद घबरा गया. उस से बात किए बिना ही पुलिस ने जिम की तलाशी ली तो वहां उसी तरह के लंगोट टंगे हुए मिले, जिस तरह के मृतक सौरभ के मुंह और गरदन पर बंधे मिले थे. उसी दौरान खुरशीद ने मोहम्मद इमरान से पूछा, ‘‘सर, सौरभ के हत्यारों का कुछ पता चला?’’

‘‘देखो, अभी पता चल जाएगा,’’ कह कर उन्होंने एक थप्पड़ खुरशीद आलम के गाल पर जड़ दिया.

खुरशीद को ऐसी उम्मीद नहीं थी. वह हक्काबक्का रह गया. उस के मुंह से कोई जवाब नहीं निकला. सीओ ने पूछा, ‘‘तुम लोगों ने सौरभ को क्यों मारा?’’

रिसैप्शनिस्ट सना उर्फ सदफ यह देख कर घबरा गई. सीओ के निर्देश पर महिला पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया. दोनों को हिरासत में ले कर इमरान मोहम्मद ने उन से सौरभ की हत्या के बारे में पूछताछ की तो उन्होंने स्वीकार कर लिया कि सौरभ की हत्या उन्होंने ही इसी जिम में की थी. उन्होंने उस की हत्या की जो कहानी बताई, वह इस प्रकार थी. मुरादाबाद महानगर के सिविल लाइंस में है एक कालोनी रामगंगा विहार फेज-2. इसी कालोनी में के.सी. सक्सेना अपनी पत्नी अलका सक्सेना और 3 बच्चों के साथ रहते थे. बच्चों में बेटा गौरव, सौरभ और बेटी साक्षी थी. के.सी. सक्सेना प्रथमा बैंक में शाखा प्रबंधक थे और उन की पोस्टिंग महानगर से 10 किलोमीटर दूर पाकबड़ा शाखा में थी. अपने छोटे परिवार के साथ वह हंसीखुशी से रह रहे थे.

पढ़ाई पूरी करने के बाद बड़ा बेटा गौरव सक्सेना चड्ढा ग्रुप के मुरादाबाद स्थित वेब मौल में नौकरी करने लगा था, जबकि सौरभ अभी अगवानपुर के एक कालेज से 12वीं की पढाई कर रहा था. के.सी. सक्सेना के यहां किसी तरह की आर्थिक समस्या नहीं थी. लेकिन वह शारीरिक रूप से अस्वस्थ थे. वह हार्ट पेशेंट थे. उन की 2 बार हार्ट सर्जरी हो चुकी थी. उन के साथसाथ उन की पत्नी अलका भी अकसर बीमार रहती थीं. जिस से उन्हें घर के काम करने और खाना बनाने में परेशानी होती थी. घर के काम करने और खाना बनाने के लिए उन्होंने शबनम को रख लिया था.

शबनम रामगंगा विहार की ही ईडब्ल्यूएस कालोनी में रहने वाले मोहम्मद इमरान की पत्नी थी. मोहम्मद इमरान टूव्हीलर मैकेनिक था और उस की 2 बीवियां थीं. शबनम उस की दूसरी बीवी थी. कभीकभी शबनम अपनी बेटी सना उर्फ सदफ को भी ले आती थी. सना के.सी. सक्सेना की बेटी साक्षी की ही उम्र की थी, इसलिए उन दोनों में दोस्ती हो गई थी. सना भी पढ़ाई कर रही थी. कभी शबनम को के.सी. सक्सेना के यहां आने में देर हो जाती तो सौरभ बाइक से उस के घर पहुंच जाता और उसे बाइक पर बैठा कर ले आता. शबनम की बेटी सना जवान और सुंदर थी. वह महानगर के ही दयानंद डिग्री कालेज से बीए की पढ़ाई कर रही थी.

घर आनेजाने की वजह से सौरभ और सना के बीच दोस्ती हो गई. धीरेधीरे यही दोस्ती प्यार में बदल गई. प्यार जब परवान चढ़ा तो उन के बीच जिस्मानी संबंध भी बन गए. हालांकि दोनों के सामाजिक स्तर में जमीनआसमान का अंतर था. इस के अलावा वे अलगअलग धर्मों से भी थे, फिर भी उन्होंने शादी कर के जिंदगी भर साथ रहने की कसमें खाईं. काफी दिनों तक उन के संबंधों की भनक किसी को नहीं लगी. सना सौरभ पर शादी के लिए दबाव डालने लगी तो वह बोला, ‘‘सना, हमारे और तुम्हारे बीच सब से बड़ी बाधा धर्म की है. तुम मुसलिम हो और मैं हिंदू.’’

सौरभ की बात पूरी होने से पहले ही सना ने कहा, ‘‘यह तुम क्या कह रहे हो सौरभ? यह बात तो तुम्हें पहले सोचनी चाहिए थी.’’

‘‘सना, तुम नाराज मत होओ. देखो, जब तक बड़े भाई गौरव की शादी नहीं हो जाती, तब तक इस बारे में घर वालों से बात करना बेकार है. गौरव की शादी के बाद मैं घर वालों को समझाने की कोशिश करूंगा.’’ सौरभ ने सना को सममझाया.

झूठी दिलासा के सहारे 3 साल गुजर गए. सना मन ही मन यही सपना संजोए बैठी थी कि सौरभ से शादी करने के बाद वह ऐश की जिंदगी जिएगी. लेकिन प्रेमी के झूठे वादों से उसे अपने सपने धूमिल होते नजर आ रहे थे. इसलिए उस ने सौरभ से दूरी बनानी शुरू कर दी.

सना पढ़ीलिखी खूबसूरत युवती थी. उसे अब अपने भविष्य की चिंता सताने लगी. अपने पैरों पर खड़ी होने के लिए उस ने नौकरी तलाशनी शुरू कर दी. कोशिश करने पर उसे महानगर में कांठ रोड पर स्थित एक जिम में रिसैप्शनिस्ट की नौकरी मिल गई. बाद में वह उसी जिम में ट्रेनर हो गई. वहां नौकरी पर लगे उसे कुछ ही दिन हुए थे कि उसे पता चला कि आशियाना कालोनी में बौडी फ्यूल फिटनेस एकेडमी नाम का एक नया जिम खुला है और वहां रिसैप्शनिस्ट की जगह खाली है. यह खबर मिलते ही वह नौकरी के लिए उस जिम में पहुंच गई, ताकि वहां उसे ज्यादा तनख्वाह मिल सके. वहां उस की बात बन गई. यानी बौडी फ्यूल जिम में उसे रिसैप्शनिस्ट व महिला ट्रेनर की नौकरी मिल गई. यह जिम हरथला कालोनी के रहने वाले खुरशीद आलम का था.

जब लोगों को पता चला कि जिम में महिला ट्रेनर भी है तो वहां महिलाओं ने भी आना शुरू कर दिया, जिस से जिम की आमदनी बढ़ने लगी. दिन भर जिम में साथ रहने की वजह से सना और खुरशीद एकदूसरे के काफी नजदीक आ गए. उन के बीच शारीरिक संबंध भी बन गए. खुरशीद की बांहों में जाने के बाद सना सौरभ को भूल चुकी थी. वह खुरशीद के साथ ही बाइक पर घूमती. चूंकि दोनों एक ही धर्म के थे, इसलिए खुरशीद ने सना से शादी का वादा किया. उधर जब सौरभ को सना और खुरशीद के संबंधों के बारे में पता चला तो उसे बहुत दुख हुआ. उस ने इस बारे में सना से फोन पर बात करनी चाही, लेकिन सना ने उस का फोन रिसीव नहीं किया. जबकि इस से पहले उस की सना से फोन पर कभीकभार बात हो जाया करती थी.

तब सौरभ उस से मिलने के लिए बौडी फ्यूल फिटनेस एकेडमी जिम जाने लगा. इतना ही नहीं, वह सना पर जिम की नौकरी छोड़ने के लिए दबाव भी बनाने लगा. लेकिन सना ऐसा करने को तैयार नहीं थी. सौरभ के बारबार जिम जाने पर खुरशीद को शक हो गया. खुरशीद ने सना से सौरभ के बारे में पूछा. तब सना ने खुरशीद को सौरभ के साथ रहे अपने संबंधों के बारे में बता दिया. उस ने यह भी बता दिया कि सौरभ उस पर जिम से नौकरी छोड़ने को कह रहा है. सना ने सौरभ से जिम आने से मना करते हुए कहा कि बेहतर यही होगा कि वह उसे भूल जाए. पर सौरभ उसे भूलने को तैयार नहीं था. उस ने कहा कि वह उस के बिना जिंदा नहीं रह सकता. इतना ही नहीं, उस ने सना को धमकी भी दे दी कि अगर उस ने खुरशीद से शादी कर ली तो वह उस के अश्लील फोटो इंटरनेट पर डाल देगा.

इस धमकी से सना डर गई. उस ने फोटो वाली बात खुरशीद को बता कर इस का कोई वाजिब हल निकालने को कहा. खुरशीद सना के प्यार में पागल था. वह उस पर अंधाधुंध पैसे खर्च कर रहा था. अकसर सना के साथ घूमनेफिरने से उस के धंधे पर भी असर पड़ना शुरू हो गया था. उस का लगातार नुकसान हो रहा था, जिस से वह लोगों का कर्जदार भी हो गया था. पिछले 2 महीने से उस ने सना की तनख्वाह और बिल्डिंग का किराया भी नहीं दिया था. लगातार हो रहे घाटे से वह परेशान रहने लगा था. खुरशीद ने एक दिन अपनी परेशानी सना को बताई और कहा कि वह कोई ऐसा काम करना चाहता है, जिस में एक ही झटके में लाखों रुपए आ सकें.

सना ने सौरभ के घरपरिवार के बारे में खुरशीद को पहले ही बता दिया था. इसलिए दोनों ने प्लान बनाया कि अगर सौरभ का अपहरण कर लिया जाए तो उस के घर वालों से लाखों रुपए की फिरौती मिल सकती है. क्योंकि उस के पिता बैंक में मैनेजर हैं. खुरशीद का बचपन का एक दोस्त था निहाल जैदी. निहाल जैदी के पिता सैयद अली आजम जैदी व खुरशीद के पिता निजामुद्दीन अंसारी दोनों ही रेलवे में टीटीई थे और एक साथ मुरादाबाद मंडल में रह चुके थे. दोनों के घर वालों का एकदूसरे के यहां आनाजाना था. इसीलिए खुरशीद और निहाल जैदी में गहरी दोस्ती थी.

सैयद अली आजम जैदी मूलरूप से मुफ्तीगंज लखनऊ के रहने वाले थे. रिटायर होने के बाद वह लखनऊ चले गए थे. निहाल जैदी आवारा किस्म का था, इसलिए घर वालों ने उसे घर से निकाल दिया था. लखनऊ से वह अपने दोस्त खुरशीद के पास चला आया और उसी के साथ ही रह रहा था. निहाल जैदी भी जिम का काम देखता था. सना और खुरशीद ने निहाल को भी अपनी योजना में शामिल कर लिया था. तीनों ने योजना बनाई थी कि सौरभ का अपहरण कर उस के घर वालों से 10 लाख रुपए की फिरौती वसूल कर उसे ठिकाने लगा देंगे. योजना को सुरक्षित ढंग से अंजाम देने के लिए खुरशीद ने फरजी आईडी पर एक सिम खरीदा. यह सिम उस ने महानगर की ही रेलवे हरथला कालोनी के दुकानदार मुन्ना पहाड़ी से खरीदा था. उस सिम को उस ने अपने फोन में डालने के बजाय इस के लिए एक चाइनीज फोन खरीदा.

इस के बाद सौरभ को झांसे में लेने की जिम्मेदारी सना को सौंप दी गई. सना ने 26 जनवरी, 2015 से इसी नए नंबर से सौरभ से बात करनी शुरू कर दी. सौरभ ने फिर उस से नौकरी छोड़ने की बात कही. 26 जनवरी को सना ने सौरभ को फोन कर के कहा था, ‘‘सौरभ, मैं काम छोड़ने को तैयार हूं, लेकिन खुरशीद ने 2 महीने से मेरी तनख्वाह नहीं दी है. ऐसा करो, तुम भी जिम जौइन कर लो. हम यहीं पर मिलते रहेंगे और जैसे ही मेरी तनख्वाह मिल जाएगी, मैं नौकरी छोड़ दूंगी.’’

यह बात सौरभ की समझ में आ गई और उस ने बौडी फ्यूल फिटनेस एकेडमी जौइन कर ली. यह बात घटना से 4 दिन पहले की थी. जिम जाने की बात उस ने अपने बड़े भाई गौरव को बता दी थी. 6 फरवरी, 2015 को सुबहसुबह सौरभ के मोबाइल पर सना का फोन आया, ‘‘सौरभ, तुम अभी तक जिम नहीं आए. जल्दी आ जाओ. इस समय यहां कोई नहीं है.’’

‘‘बस, मैं थोड़ी देर में पहुंच रहा हूं.’’ सौरभ ने कहा.

सौरभ मौर्निंग वौक के लिए निकलता था. इस के बाद वह उधर से ही जिम चला जाता था. लेकिन उस दिन उस का फोन आने पर वह सीधा जिम चला गया था. जिम के पास सना उस का पहले से ही इंतजार कर रही थी. उसे देखते ही सौरभ खुश हो गया. सना ने गर्मजोशी से उस का स्वागत किया और उसे अपने साथ जिम ले गई. जिम में पहुंच कर सना ने कहा, ‘‘सौरभ, तुम चेंजिंग रूम में कपड़े बदल लो, मैं यहीं बैठी हूं. सौरभ चेंजिंग रूम में गया तो वहां पहले से ही खुरशीद और निहाल जैदी मौजूद थे. दोनों ने उस की पिटाई शुरू कर दी. सौरभ चीखने लगा तो उन्होंने जिम में रखा एक लंगोट उस के मुंह में ठूंस दिया और दूसरा उस के मुंह और नाक में लपेट कर गले में बांध दिया.

इस के बाद भी वह हाथपैर चलाने लगा तो खुरशीद ने लोहे की रौड से उस के सिर पर कई वार कर दिए, जिस से उस का सिर फट गया और खून बहने लगा. इस के बाद सौरभ उन का मुकाबला नहीं कर सका और जमीन पर गिर गया. उधर सना ने डेक बजा कर उस की आवाज तेज कर दी थी, जिस से सौरभ चीखचिल्लाहट की आवाज बाहर किसी को सुनाई नहीं दी. खुरशीद और निहाल ने देखा कि सौरभ मर गया है तो उन्होंने सना को बुला लिया. सना ने कहा कि किसी भी हालत में अब यह जिंदा नहीं बचना चाहिए. वह एक सीरिंज में बाथरूम में रखा तेजाब भर लाई और तेजाब का इंजेक्शन उस के सीने में लगा दिया.

तीनों को लगा कि सौरभ मर गया है तो उन्होंने उस की लाश पहले से ला कर रखे पौलीथिन के एक बैग में भर दी. अब उन के सामने समस्या यह थी कि वह लाश को ठिकाने लगाने के लिए बाहर कैसे ले जाएं. हरथला में ही खुरशीद के बहनोई नदीम रहते थे. उन का वहीं पर एक कौनवेंट स्कूल था. उन्होंने ही खुरशीद को यशवीर चौधरी का बड़ा हौल किराए पर दिलवाया था, जिस का किराया 20 हजार रुपए महीना था. लाश ठिकाने लगाने के लिए तीनों ने एक प्लान तैयार कर लिया. प्लान के अनुसार खुरशीद अकेला जिम से चला गया और अपने एक परिचित की माल ढोने वाली छोटी टाटा मैजिक गाड़ी ले आया.

जिम के बराबर वाली इमारत में यशवीर चौधरी का प्रौपर्टी डीलिंग का औफिस था. उन्होंने जिम के बाहर माल ढोने वाली टाटा मैजिक गाड़ी देखी तो उन्हें लगा कि कहीं ऐसा तो नहीं कि खुरशीद उन का किराया दिए बिना हौल खाली कर के जा रहा है. क्योंकि खुरशीद ने उन का 2 महीने का किराया नहीं दिया था, इसलिए जब उन्होंने जिम के सामने गाड़ी खड़ी देखी तो खुरशीद से पूछा. तब खुरशीद ने बताया कि दौड़ने वाली मशीन खराब हो गई है, उसे ठीक कराने ले जाना है. खुरशीद, सना और निहाल ने मिल कर एक इलैक्ट्रौनिक मशीन जिम से निकाल कर उस गाड़ी में रख दी. उसे खुरशीद व निहाल ले कर चले गए.

करीब आधे घंटे बाद खुरशीद और निहाल जैदी उस मशीन को ले कर वापस आ गए. वह अपने साथ एक ड्रम भी ले आए थे. वह ड्रम एक निर्माणाधीन इमारत से लाए थे. मशीन और ड्रम को वह जिम में ले गए. उस ड्रम में उन्होंने सौरभ की लाश डाल दी. फिर उस ड्रम को उसी टाटा मैजिक गाड़ी में रख लिया. पुन: गाड़ी देख कर मकान मालिक यशवीर चौधरी ने खुरशीद से ड्रम के बारे में पूछा तो उस ने बताया कि कुछ मशीनों के पार्ट्स खराब हो गए हैं. इस ड्रम में वही खराब पार्ट्स हैं, जिन्हें सही करा कर लाना है. यशवीर चौधरी को उस पर विश्वास नहीं हुआ तो उस ने खुरशीद के बहनोई नदीम को फोन किया, जिन की जमानत पर चौधरी ने उसे कमरा किराए पर दिया था.

नदीम ने भी उसे यही बताया कि उस की कुछ मशीनें खराब हो गई हैं. नदीम के कहने पर यशवीर चौधरी को विश्वास हो गया. वह अपने औफिस में बैठ कर पार्टी से बात करने लगे. खुरशीद, सना और निहाल लाश वाला ड्रम गाड़ी में रख कर निकल गए और जिम में ताला लगा दिया. वहां से खुरशीद सीधे हरथला स्थित अपने बहनोई के स्कूल पहुंचा. स्कूल के कंप्यूटर लैब में उस ने लाश वाला ड्रम रखवा दिया. बहनोई को भी उस ने यही बताया कि ड्रम में मशीनों के पुरजे हैं. अगले दिन 7 फरवरी, 2015 की रात को वह टाटा मैजिक गाड़ी से वह उस ड्रम को ले कर निकल गया और उसे भोला सिंह की मिलक के पास नाले में फेंक आया. लाश ठिकाने लगा कर वह अपने घर चला गया. डर की वजह से उन्होंने घर वालों को फिरौती के लिए फोन नहीं किया.

सना और खुरशीद से पूछताछ के बाद पुलिस ने तीसरे अभियुक्त निहाल जैदी की तलाश शुरू कर दी. पता चला कि वह लखनऊ भाग गया है. एक पुलिस टीम निहाल जैदी की तलाश में लखनऊ भेजी गई, लेकिन वह वहां भी नहीं मिला. पुलिस ने सना और खुरशीद को मुरादाबाद के एसीजेएम प्रथम की अदालत में पेश किया, जहां से दोनों को जेल भेज दिया गया. कथा लिखे जाने तक तीसरा अभियुक्त निहाल जैदी गिरफ्तार नहीं हो सका था. UP News

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित