टेलर से बात करने के बाद पुलिस टीम नूरपूर बेहटा गांव पहुंच गई. वहां पता चला कि कल्लू का दूसरा नाम संतोष है. घर पर सब उसे कल्लू कहते थे. घर पर संतोष की पत्नी और पिता मिले. घर वालों को जैसे ही पता लगा कि संतोष का मर्डर हो गया है तो घर में कोहराम मच गया. सभी रोने लगे.
उस की पत्नी राजकुमारी ने सीधे आरोप लगाया कि उन की हत्या में रिंकी तिवारी और रिंकू मिश्रा का हाथ है. बाद में घर वाले भी मोर्चरी पहुंच गए. वहां राजकुमारी ने लाश की पहचान अपने पति संतोष उर्फ कल्लू के रूप में की.
चूंकि राजकुमारी ने पति की हत्या का आरोप रिंकू मिश्रा और रिंकी पर लगाया था, इसलिए लाश की शिनाख्त होने के बाद पुलिस ने उन्हें तलाशना शुरू कर दिया. एक सप्ताह की कड़ी मशक्कत के बाद पुलिस ने रिंकी तिवारी और रिंकू मिश्रा को हिरासत में ले लिया.
थाने ला कर जब उन से संतोष कुमार उर्फ कल्लू की हत्या के बारे में पूछताछ की गई तो उन्होंने आसानी से अपना जुर्म कुबूल कर लिया. उन्होंने संतोष की हत्या की जो कहानी बताई, वह रिश्तों की मर्यादा को तारतार करती नजर आई.
उम्र में दो गुने बड़े संतोष के साथ पतिपत्नी के संबंध निभाते रिंकी को यह पता चल चुका था कि संतोष के पास अब बहुत पैसा नहीं है. उस ने जिस मकसद से उस के साथ शादी की थी, वह मकसद उसे पूरा होता नजर नहीं आ रहा था. इसलिए वह धीरेधीरे संतोष से किनारा करने लगी थी. संतोष के प्रति उस की दिलचस्पी भी खत्म हो चुकी थी.
इस के अलावा रिंकू ने संतोष से एक लाख 60 हजार रुपए उधार लिए थे. संतोष ने जब उस से अपने पैसे मांगे तो वह पैसे लौटाने में आनाकानी करने लगा था. लगातार तकाजा करने से रिंकू भी परेशान रहने लगा था. इसी बीच रिंकू और रिंकी के बीच अवैध संबंध भी बन चुके थे. इस बात की भनक संतोष को लग चुकी थी. इसलिए संतोष ने रिंकू से कह दिया था कि उस के पैसे लौटाने के बाद वह ढाबा छोड़ कर चला जाए.
वहीं दूसरी तरफ रिंकी और रिंकू अपनी अलग योजना बना चुके थे. रिंकी ने रिंकू से कहा, ‘‘संतोष, अब तुम से अपने पैसे मांग रहा है. इस से बचने का एक ही रास्ता है कि उसे रास्ते से हटा दिया जाए.’’
‘‘पर तुम ने तो उस के साथ शादी की है.’’ रिंकू बोला.
‘‘मुझे क्या पता था कि वह कंगाल हो चुका है. मैं ने तो सुना था कि वह 50-60 लाख का आदमी है. रिंकू तुम्हें पता नहीं, अब वह हमारे ऊपर शक भी करने लगा है. उस ने मेरी नाक में दम कर रखा है. मैं उस से अब बहुत परेशान हो गई हूं.’’
‘‘कोई बात नहीं, हम उसे रास्ते से ही हटा देते हैं.’’ इतना कह कर रिंकू ने उसे अपनी बांहों में भर लिया.
योजना के मुताबिक 17 मार्च, 2014 की रात को रिंकू और संतोष ने साथ बैठ कर शराब पी. जब संतोष काफी नशे में हो गया तो रिंकू और रिंकी उसे लखनऊ-फैजाबाद रोड पर एक अधबने मकान में ले गए और रिंकू ने धक्का दे कर संतोष को गिरा दिया. ज्यादा नशे में होने की वजह से वह विरोध भी नहीं कर सका. उस के गिरते ही रिंकू उस के ऊपर चढ़ कर बैठ गया. उसी दौरान रिंकू ने मौजे से संतोष का गला घोंट दिया. उस की हत्या करने के बाद दोनों वहां से भाग निकले.
दोनों को पता था कि पुलिस लाश की शिनाख्त नहीं कर पाएगी. ऐसे में वह लोग बच जाएंगे लेकिन कमीज पर लगे लेवल के सहारे पुलिस हत्या के इस मामले को सुलझाने में सफल हो गई. दोनों अभियुक्तों से पूछताछ के बाद पुलिस ने उन्हें न्यायालय में पेश किया जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया.
शहरी चकाचौंध में फंस कर संतोष ने अपना घरपरिवार और खेती छोड़ कर शहर में रहना शुरू किया. यही चकाचौंध और बीवी से की गई बेवफाई उस की जान की दुश्मन बनी.
जेल जाते समय रिंकी और रिंकू खुद को बेकुसूर बता रहे थे. उन की सच्चाई को परखने का काम अदालत करेगी. जो लोग शहर की चकाचौंध देख कर, शहर की तरफ भागते हैं उन्हें देखना चाहिए कि शहरी आकर्षण में कुछ बुराइयां भी हैं.
—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित


