प्यार की वो आखिरी रात

कातिल प्रेम पुजारी

प्यार की वो आखिरी रात – भाग 4

प्यार की थी वो आखिरी रात

रात 9 बजे के पहले ही दीपक जागेश्वर मंदिर परिसर पहुंच गया और बरखा की काल आने का इंतजार करने लगा. इधर बरखा व घर के अन्य सदस्य खाना खा कर आए ही थे सो सब सोने चले गए. बरखा, उस के दोनों बच्चे, बहन व मां एक कमरे में लेट गए. जबकि उस के पिता दूसरे कमरे में.

रात 10 बजे तक सभी गहरी नींद में सो गए. लेकिन बरखा को नींद कहां थी. वह छत पर जा कर चहलकदमी करने लगी. छत पर स्थित कमरे की भी उस ने साफसफाई कर दी थी.

रात करीब साढ़े 10 बजे बरखा ने दीपक को काल की और घर के दरवाजे पर आने को कहा. फोन पर बतियाते बरखा और दीपक दरवाजे पर आए. बरखा ने दरवाजा खोल कर दीपक को घर के अंदर कर लिया. इस के बाद वह दीपक को छत पर बने कमरे में ले आई. यहां दोनों ने पहले शारीरिक भूख मिटाई, फिर आपस में बतियाने लगे.

दीपक बोला, “बरखा, मैं तुम से बेइंतहा प्यार करता हूं. तुम्हारे बिना अब नहीं रह सकता. तुम मेरे साथ भाग चलो. हम दोनों अपनी नई दुनिया बसा लेंगे. इस बार हम इतनी दूर जाएंगे, जहां कोई हमें खोज न पाएगा.”

“दीपक अब यह सब संभव नहीं. अब मैं एक नहीं 2 बच्चों की मां हंू. छोटा बेटा बस 9 महीने का है. उसे छोड़ कर मैं तुम्हारे साथ नहीं जा सकती. फिर भागने से 2 परिवारों की इज्जत भी मिट्टी में मिल जाएगी. मेरा तुम्हारा मिलन जैसे आज हुआ है, वैसा आगे भी होता रहेगा. मैं भी तुम्हारे लिए तड़पती रहती हूं. तुम सदा हमारे दिल में रहते हो.”

“लेकिन मुझे अब छिपछिप कर मिलना पसंद नहीं है. तुम्हें मेरे साथ आज ही चलना होगा. नहीं चली तो अनर्थ हो जाएगा.”

“क्या अनर्थ हो जाएगा. मुझे मार डालोगे क्या?” बरखा गुस्से से बोली.

“हां, मैं तुझे मार डालूंगा और खुद को भी मिटा लूंगा,” दीपक भी गुस्से से भर उठा.

बरखा ने दीपक की बात को मजाक समझा और हंसने लगी. इस पर दीपक का गुस्सा और बढ़ गया. उस ने उस का गला पकड़ा और कसने लगा. बरखा बेहोश हुई तो दीपक ने जेब से चाकू निकाल लिया और बरखा का गला रेत दिया.

प्रेमिका की हत्या करने के बाद दीपक चला गया. प्रेमिका के घर से दीपक गुरुदेव चौराहे पर आया. यहां से आटो पर बैठ कर झकरकटी आया. अब तक वह ग्लानि व पकड़े जाने के डर से घबराने लगा था. कुछ देर वह झकरकटी पुल के नीचे रेल लाइन के किनारे बैठा रहा फिर देर रात रेल से कट कर आत्महत्या कर ली.

मायके में लहूलुहान मिली बरखा

इधर रात लगभग 12 बजे बरखा का मासूम छोटा बेटा जाग गया. भूख से वह रोने लगा तो सरला की आंखें खुल गईं. उस ने छोटी बेटी कल्पना को जगा कर कहा कि देखो बरखा कहां है? उस का बच्चा भूख से रो रहा है.

कल्पना बरखा को खोजती छत पर गई तो वहां कमरे में बरखा की खून से तरबतर लाश देख कर वह चीख पड़ी. उस की चीख सुन कर सरला वहां पहुंची फिर उस का पति ओमप्रकाश सैनी. दोनों बेटी का शव देख कर अवाक रह गए.

ओमप्रकाश सैनी ने पहले बरखा के पति कृष्णकांत को मौत की सूचना दी फिर थाना नवाबगंज पुलिस को बेटी की हत्या की खबर दी. सूचना पाते ही एसएचओ प्रमोद कुमार पांडेय पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर आ गए. उन की सूचना पर पुलिस कमिश्नर बी.पी. जोगदंड, एडिशनल डीसीपी (सेंट्रल) आरती सिंह तथा एसीपी (कर्नलगंज) मो. अकलम भी घटनास्थल आ गए.

पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया. मृतका बरखा की उम्र 30 वर्ष के आसपास थी. उस की हत्या चाकू जैसे किसी नुकीले हथियार से की हुई लग रही थी. घटनास्थल से पुलिस को मृतका का मोबाइल फोन मिला, जिसे अधिकारियों ने अपनी सुरक्षा में ले लिया.

अब तक मृतका का पति कृष्णकांत तथा उस के मातापिता भी आ गए थे. पुलिस अधिकारियों ने मृतका के माता पिता तथा पति से पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि रात 9 बजे तक सब कुछ सामान्य था. उस के बाद सब सो गए. आशंका है कि रात में बदमाश लूटपाट के इरादे से घुसे, शायद बरखा जाग गई तो उन्होंने उस का गला रेत दिया. पूछताछ के बाद अधिकारियों ने शव को पोस्टमार्टम के लिए लाला लाजपत राय अस्पताल भिजवा दिया.

रेलवे लाइनों में मिली दीपक गुप्ता की लाश

ओमप्रकाश सैनी के घर के ठीक सामने जागेश्वर मंदिर है. वहां सीसीटीवी कैमरे लगे थे. पुलिस अधिकारियों ने फुटेज चैक किए तो रात करीब साढ़े 10 बजे एक युवती फोन पर बतियाते घर से बाहर निकलते दिखाई दी. दूसरी तरफ एक युवक घर में प्रवेश करते दिखा. इस के बाद रात 11:35 पर वही युवक घर से बाहर जाते दिखा.

यह फुटेज ओमप्रकाश सैनी व कृष्णकांत को दिखाया गया तो उन्होंने बताया कि फोन पर बतियाती युवती उन की बेटी बरखा है. कृष्णकांत ने बताया कि फोन पर बतियाते दिख रहा युवक उस की पत्नी बरखा का प्रेमी दीपक गुप्ता है, जो उस के पड़ोस में रहता है.

इंसपेक्टर प्रमोद कुमार ने बरखा के फोन से दीपक को काल की तो जीआरपी थाने के एक सिपाही ने काल रिसीव की. उस ने बताया फोन धारक ने रेल से कट कर आत्महत्या की है. उस का शव अज्ञात में पोस्टमार्टम हाउस भेजा जा चुका है. दीपक के पिता विमल गुप्ता से शव की शिनाख्त कराई गई तो उन्होंने शव को तुरंत पहचान लिया.

पुलिस ने बरखा और दीपक के मोबाइल फोन की काल डिटेल्स निकलवाई तो पता चला कि मरने से पहले दोनों के बीच 23 बार बात हुई थी. पिछले 2 महीने में दोनों के बीच 500 बार बात मोबाइल फोन पर हुई थी. जांचपड़ताल से स्पष्ट था कि दीपक ने ही पहले प्रेमिका की हत्या की फिर खुद रेल से कट कर आत्महत्या कर ली.

मृतका बरखा के पति कृष्णकांत ने पत्नी की हत्या की रिपोर्ट दीपक के खिलाफ दर्ज कराई. लेकिन दीपक द्वारा भी आत्महत्या कर लेने से पुलिस ने इस मामले को बंद कर दिया.

कथा संकलन तक मृतका के दोनों बच्चे नानानानी के पास पल रहे थे. कृष्णकांत को अपने बच्चों की चिंता सता रही थी. वह उन का पालनपोषण स्वयं करना चाहता है. इस के लिए उस के मांबाप भी राजी हैं.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

प्यार की वो आखिरी रात – भाग 3

दीपक और बरखा हद से ज्यादा डूब चुके थे प्यार में

धीरेधीरे समय बीतता रहा. दीपक के दिल में प्रेमिका बनी बरखा के प्रति चाहत और बढ़ गई. यह चाहत उस रोज और बढ़ गई, जब बरखा ने एक रोज अंतरंग क्षणों में दीपक से कहा कि उस के पति और मोहल्ले वालों को उन के प्यार की भनक लग गई है. इस से पहले कि उन के प्यार पर पहरे लगा दिए जाएं, उन दोनों को भाग कर अपनी नई दुनिया बसा लेनी चाहिए.

“पर भाभी यह कैसे हो सकता है?” दीपक सोच में पड़ गया.

“क्या तुम मुझ से प्यार नहीं करते?” बरखा दीपक से लिपट कर उस का मुंह चूमने लगी.

“प्यार तो अपनी जान से ज्यादा करता हूं तुम्हें भाभी.”

“तो अब यह तुम जानो कि मुझे पाने के लिए तुम्हें क्या करना चाहिए. बस इतना जान लो कि मैं तुम्हारे बगैर नहीं रह सकती. अगर तुम मुझे न मिले तो जमाने के तानों से तंग आ कर मैं अपनी जान भी दे दूंगी. फिर मेरे मुर्दा शरीर से प्यार करते रहना.”

“ऐसा मत बोलो भाभी. तुम चली गईं तो मैं ही जी कर क्या करूंगा,” दीपक ने जवाब दिया.

कृष्णकांत को दीपक और बरखा के रिश्तों के बारे में आए दिन कुछ न कुछ सुनने को मिल रहा था, अत: वह भी उस पर शक करने लगा था. उस का शक तब और बढ़ गया, जब उस के साथी कर्मचारी ने शराब पीने के दौरान सारी सच्चाई बयां कर दी.

उस ने कहा, “कृष्णकांत, तुम्हारी बीवी बदचलन है. वह तुम्हारे दोस्त दीपक के साथ रंगरेलियां मनाती है. उस पर लगाम कसो वरना वह तुम्हें छोड़ कर उस के साथ भाग जाएगी.”

कृष्णकांत को सहकर्मी की बात कड़वी तो लगी, लेकिन नकार न सका. शक होने पर वह बरखा पर नजर रखने लगा. उन्हीं दिनों एक रोज कृष्णकांत ने भी बरखा को अपने ही घर में दीपक के साथ रंगरेलियां मनाते पकड़ लिया. दीपक तो भाग गया, पर बरखा कहां जाती. कृष्णकांत ने उसे खूब जलील किया.

पत्नी की इस बेवफाई से आहत कृष्णकांत ने बरखा को ऊंचनीच समझाने का प्रयास किया. वह नहीं समझी तो कृष्णकांत ने लातों से उस की खबर लेना शुरू कर दी. कृष्णकांत ने सोचा था कि शायद मार खा कर बरखा रास्ते पर आ जाए. लेकिन उस पर इस का असर उलटा ही हुआ. वह कृष्णकांत से और अधिक नफरत करने लगी.

पतिपत्नी के संबंध कसैले हुए तो घर में क्लेश का वातावरण बन गया. राजकुमार ने बेटे से हाल समाचार पूछा तो उस ने पिता को बता दिया कि उन की बहू कभी भी उन की इज्जत को धूल में मिला सकती है. बहू का सच जान कर राजकुमार को भी गहरा दुख हुआ.

प्रेमी के संग हो गई फरार

कृष्णकांत को जिस बात की आशंका थी, वही हुआ. एक रोज बरखा सचमुच उस की इज्जत को पैरों तले रौंदते हुए अपने आशिक दीपक के साथ भाग गई. 10 वर्षीय बेटे को भी वह अपने साथ नहीं ले गई. बेटे का मोह भी उसे बांध न सका. उस रोज कृष्णकांत घर आया तो उस का बेटा मयंक घर में गुमसुम बैठा था. पूछने पर उस ने बताया कि मम्मी दीपक अंकल के साथ बाजार गई हैं. अटैची में सामान भी ले गई हैं. कृष्णकांत तब सब कुछ समझ गया.

कृष्णकांत ने बरखा के भाग जाने की खबर अपने मातापिता तथा बरखा के घर वालों को दी. खबर पाते ही बरखा के पिता ओमप्रकाश सैनी तथा कृष्णकांत के पिता राजकुमार और मां सुनीता आ गई. राजकुमार ने 4 घर दूर रहने वाले विमल गुप्ता से मुलाकात की और उन के बेटे दीपक के बारे में पूछा. विमल गुप्ता ने पहले तो कुछ भी बताने से मना कर दिया, लेकिन जब उन्होंने रिपोर्ट दर्ज कराने की धमकी दी तो विमल गुप्ता ने बेटे का ठिकाना बता दिया.

लगभग एक सप्ताह बाद किसी तरह ओमप्रकाश सैनी व राजकुमार बरखा को शिवराजपुर कस्बे से समझाबुझा कर घर ले आए. दीपक भी साथ था. घर में सैनी समाज के खास लोगों को बुलाया गया. उस के बाद पंचायत हुई. पंचायत में तय हुआ कि दीपक बरखा से मिलने घर नहीं आएगा. बरखा इज्जत से घर में रहेगी. कृष्णकांत बरखा का पूरा खयाल रखेगा. उस के साथ किसी तरह की मारपीट व बदसलूकी नहीं करेगा.

बरखा और कृष्णकांत ने पंचायत के लोगों की बात मान ली. उस के बाद कृष्णकांत बरखा के साथ रहने लगा. बरखा के सासससुर भी साथ रहने लगे. बरखा सासससुर की निगरानी में रहने लगी तो उस का अपने प्रेमी दीपक से मिलनाजुलना बंद हो गया. अब वह जब भी घर से बाहर निकलती तो सास उस के साथ रहती.

दूसरे बेटे के जन्म के बाद नहीं छोड़ा प्रेमी को

समय बीतता रहा. अगस्त 2022 में बरखा ने दूसरे बेटे को जन्म दिया. दूसरे बेटे के जन्म से एक बार फिर से घर में खुशियां लौट आईं. खुशी इस बात की भी थी कि 10 वर्ष बाद बरखा ने फिर से बेटे को जन्म दिया था. इस खुशी में राजकुमार ने समाज के लोगों को दावत दी.

दूसरे बेटे के जन्म के बाद कृष्णकांत को लगा कि बरखा अपने आशिक दीपक को भूल गई है, लेकिन यह उस की भूल थी. बरखा के दिल में अब भी दीपक बसा हुआ था. वह उस के लिए तड़पती भी थी. अपनी तड़प वह फोन के माध्यम से मिटाती थी. बरखा को जब भी मौका मिलता, वह दीपक से बतिया लेती थी और अपनी लगी बुझा लेती थी. दीपक भी बरखा के लिए बेचैन था, लेकिन उस का मिलन नहीं हो पाता था.

27 मई, 2023 को बरखा के अशोक नगर निवासी मामा संजय की तेरहवीं थी. इस कार्यक्रम में शामिल होने बरखा अपने पति कृष्णकांत के साथ अशोक नगर पहुंच गई. यहां उस की मां सरला तथा पिता ओमप्रकाश सैनी भी आए हुए थे. दिन भर मामा के घर जमावड़ा बना रहा.

शाम को कृष्णकांत ने बरखा से घर चलने को कहा तो उस ने कहा कि वह मातापिता के साथ नवाबगंज जा रही है. कल वह घर आ जाएगी. इस के बाद वह अपने दोनों बच्चों के साथ नवाबगंज चली गई और कृष्णकांत अपने घर चला गया.

इधर दीपक को पता चला कि बरखा मामा के यहां गई है तो उस ने फोन पर बरखा से बात की और जीटी रोड स्थित हनुमान मंदिर पर मिलने को कहा. लेकिन बरखा ने उस की बात यह कह कर नहीं मानी कि वह पति और मातापिता की निगरानी में है. इस के बाद कई बार दीपक ने फोन किया और बरखा के संपर्क में बना रहा.

शाम 5 बजे दीपक ने बरखा को फोन किया तो उस ने बताया कि वह मायके नवाबगंज जा रही है. इस पर दीपक ने कहा, “बरखा, आज अगर हमारा मिलन तुम से न हुआ तो मैं अपनी जान दे दूंगा. मैं बहुत दिनों से तुम्हारे लिए तड़प रहा हूं. अब मुझ से रहा नहीं जाता.”

जवाब में बरखा ने कहा, “तुम जान देने की बात मत करो. तुम जागेश्वर मंदिर परिसर आ जाओ. फोन पर संपर्क बनाए रखना. मैं तुम्हारी इच्छा पूरी करने की पूरी कोशिश करूंगी. मेरी काल का इंतजार करना. कोई जल्दबाजी न करना.”

कातिल प्रेम पुजारी – भाग 3

प्रीति के घरवालों ने मनोज को खूब समझाने की कोशिश की, लेकिन उस की शंका का समाधान नहीं हुआ. धीरेधीरे मनोज ने प्रीति या उस के घर वालों से कोई संपर्क नहीं किया. वह उन का फोन तक नहीं उठाता था. जवान बेटी अपने बच्चे को ले कर मायके में रह रही थी, इस से प्रीति के पिता की समाज में बदनामी हो रही थी.

प्रीति के पिता ने परेशान हो कर कटनी पुलिस थाने में मनोज के खिलाफ दहेज उत्पीडऩ की शिकायत कर दी और रिपोर्ट दर्ज हो गई. मनोज को रिश्तेदारों ने समझाया, “किसी तरह प्रीति से राजीनामा कर लो मनोज, नहीं तो दहेज अधिनियम के तहत तुम्हें जेल में चक्की पीसनी पड़ेगी.”

जेल जाने के डर से मनोज प्रीति को साथ ले जाने के लिए तैयार हो गया. दोनों फिर से भोपाल में साथ रहने लगे थे. मनोज के खिलाफ प्रीति ने जो दहेज उत्पीडऩ का केस लगाया था, प्रीति ने उस में राजीनामा नहीं किया था. मनोज कई बार कह चुका था कि हम साथ रह रहे हैं, सब ठीक है फिर तुम केस वापस क्यों नहीं ले लेती.

इस बीच प्रीति अपने परिवार में रम चुकी थी. उस का तीसरा बच्चा भी हो चुका था. प्रीति अपने प्रेम संबंधों को भुला नहीं पाई थी, उस के घर रामनिवास का आनाजाना फिर से शुरू हो चुका था. इधर रामनिवास की पत्नी शालिनी को भी पति के प्रीति से नाजायज संबंधों की जानकारी हो गई थी. रामनिवास की पत्नी शालिनी के मन में भी शंका पैदा हो गई कि उस के पति और प्रीति के बीच कुछ चल रहा है. इसे ले कर शालिनी का अपने पति से आए दिन झगड़ा होता था.

दोनों परिवार आपस में रिश्तेदार थे, इस के बावजूद दोनों परिवारों में मनमुटाव इतना बढ़ गया था कि वे आपस में दुश्मन बन चुके थे और किसी भी हद तक जाने तैयार थे. फिर से मामला बिगड़ते देख प्रीति ने रामनिवास से बातचीत बंद कर दी थी. वह उस का फोन भी नहीं उठाती थी.

रामनिवास को लगता था कि प्रीति का अब किसी और से अफेयर चल रहा है. इस कारण वह उस से दूरियां बना रही है. प्रीति की वजह से शालिनी के परिवार में कलह होने लगी थी और शालिनी प्रीति से नफरत करने लगी थी. रामनिवास ने प्रीति को सबक सिखाने का प्लान बना लिया था.

प्रेमिका से पीछा छुड़ाने में पत्नी ने दिया साथ

पुलिस पूछताछ में पता चला कि प्रीति की हत्या की वजह रामनिवास के प्रीति के साथ प्रेम संबंध थे. रामनिवास ने अपना जुर्म कबूल करते हुए बताया कि उस का और प्रीति का अफेयर चल रहा था. पिछले कुछ दिनों से उस ने मुझ से बात करनी बंद कर दी थी. मुझे शक था कि शायद उस का किसी और से अफेयर चलने लगा है. इसी बात को ले कर हमारे बीच झगड़ा हुआ और मैं ने उसे सबक सिखाने के लिए उस की हत्या करने का फैसला ले लिया.

5 अगस्त, 2023 की दोपहर को रामनिवास ने पत्नी शालिनी से कहा, “चलो, आज मनोज के घर चलते हैं और प्रीति से मिल कर मामले को सुलझा लेते हैं. तुम्हारे मन में जो भी शंका है, वह दूर हो जाएगी.”

शालिनी झटपट चलने को तैयार हो गई, लेकिन मनोज के मन में कुछ और चल रहा था. उस ने पहले से ही एक चाकू खरीद कर अपने पास रख लिया था. उस दिन बारिश हो रही थी तो रेनकोट पहन कर और मुंह पर नकाब बांध कर दोनों प्रीति के घर जाने के लिए तैयार हुए. रेनकोट में दोनों को पहचानना मुश्किल था. शालिनी ने जब उस से पूछा, “ये नकाब की क्या जरूरत है?”

तो मनोज ने कहा, “वैसे ही हमारा क्लेश चल रहा है, लोग हमारे बारे में तरहतरह की बातें करते हैं तो हमें छिप कर ही जाना चाहिए.”

इस के बाद रामनिवास ने अपनी पहचान के चंदन नाम के आटो वाले को फोन लगा कर कहा, “चंदन, तुम जल्दी से आटो ले कर आ जाओ, हमें छोला मंदिर तक जाना है.”

दोपहर का वक्त था, चंदन खाना खा कर घर से निकलने ही वाला था जैसे ही रामनिवास का फोन आया वह बोला, “हां पंडितजी, 5 मिनट में आटो ले कर पहुंच जाऊंगा.”

आटो में बैठ कर दोनों भानपुर इलाके के लीलाधर कालोनी में पहुंच गए. रामनिवास ने चंदन को प्रीति के घर से दूर वाली गली में खड़ा किया और उसे वहीं रुकने को कहा. दोनों आटो से उतरे और सीधे प्रीति के घर पहुंच गए. करीब आधे घंटे बाद शालिनी और रामनिवास उसी आटो में बैठ कर घर वापस आ गए.

रामनिवास की पत्नी शालिनी मिश्रा ने पुलिस को बताया, “सुबह मेरे पति ने मुझे अपने साथ प्रीति के घर चलने के लिए कहा था. उन्होंने मुझे सलवार सूट के साथ ग्लव्स, काला चश्मा और नीले जूते दिए, फिर कहा कि हम प्रीति के पास चल रहे हैं. उस से बातचीत कर के सब प्रौब्लम सौल्व कर लेंगे. ऐसे चलेंगे तो लोग पहचान लेंगे, इसलिए कवर हो कर चलना पड़ेगा.”

शालिनी ने आगे बताया, “मुझे मेरे पति और प्रीति के अफेयर की जानकारी थी और इसे ले कर घर में हर दिन झगड़ा होता रहता था. मैं प्रीति से पति का पीछा छुड़ाना चाहती थी, इसलिए उन के साथ चली गई. मुझे पता नहीं था कि मेरे पति उस की हत्या करने के मकसद से जा रहे हैं. जब हम वहां पहुंचे और मेरे पति ने उस पर वार करना शुरू कर दिए, ऐसे में मुझे उन का साथ देना पड़ा. वहीं पर प्रीति का एक डेढ़ साल का बच्चा भी था, मैं ने बस उसे ही संभाला था. इस के अलावा मैं ने और कुछ नहीं किया.”

पुलिस ने प्रीति की हत्या के आरोप में 35 वर्षीय रामनिवास मिश्रा, और उस की पत्नी 30 वर्षीया शालिनी को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें भोपाल जेल भेज दिया गया. नाजायज संबंधों की खातिर प्रीति अपनी जान से हाथ धो बैठी और उस के बच्चे बिन मां के रह गए. जबकि प्रेम में पागल पुजारी रामनिवास मिश्रा को अपनी पत्नी के साथ जेल की चारदीवारी में कैद होना पड़ा.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

प्यार की वो आखिरी रात – भाग 2

एक रोज दोपहर को दीपक ईरिक्शा ले कर बाजार जा रहा था कि उसे बरखा दिखाई दी. उस ने ईरिक्शा रोक दी. बरखा नजदीक आई तो दीपक ने उसे छेड़ा, “भाभी, क्या भैया को छोड़ कर जा रही हो? बहुत जल्दी में दिख रही हो.”

“तुम्हारे भैया को छोड़ कर भागूंगी तो तुम्हारे साथ न.” बरखा ने बिना संकोच के कहा और उस की ईरिक्शा पर बैठ गई, “चलो, भगा ले चलो मुझे.”

“कहां?” दीपक अब सकपका गया.

“बस निकल गई हवा. बड़े आए भाभी का खयाल रखने वाले. चलो, मुझे बाजार तक छोड़ दो.” बरखा ने उसे टहोका मारा. उस रोज बाजार में बरखा ने शौपिंग की तो दीपक ने उसे इंप्रेस करने के लिए अपनी तरफ से उसे एक अच्छी सी साड़ी खरीदवा दी. फिर एक रेस्तरां में उसे बढिय़ा सा नाश्ता भी कराया.

वापसी में भी दीपक उसे साथ ले कर आया, इस दौरान दोनों काफी खुल चुके थे. दीपक ने दबे स्वर में बरखा को यह जता दिया था कि वह उसे बेइंतहा चाहता है. बरखा अपनी कटीली अदाओं से उसे घायल करती हुई मुसकराती रही.

मोहल्ले से कुछ दूर बरखा को उतारते हुए दीपक बोला, “भाभी, आज मैं ने तुम्हारी इतनी सेवा की, उस की मेवा भी मिलेगी क्या?”

“एक घंटे बाद घर आ जाना, चाय पिला दूंगी.”

“सिर्फ चाय?”

“तो दूध पी लेना,” बरखा ने कामुक आंखों से दीपक की आंखों में झांका और गहरी सांस लेते हुए अपने वक्षों को तान दिया, मानो वह कह रही हो कि इन्हें पी लेना.

दीपक घर पहुंचा. उस ने कपड़े बदले फिर मां से बहाना कर के घर से निकल गया. वह जानता था कि बरखा इस वक्त घर पर अकेली होगी. कृष्णकांत रात 9 बजे के पहले घर नहीं आता था. दीपक उसी रोज बरखा को पा लेना चाहता था, अत: वह बरखा के घर की ओर चल पड़ा.

बरखा ने दीपक को पलंग पर बिठाया. फिर मुसकराते हुए पूछा, “क्या पिओगे देवरजी, चाय या दूध..?”

“यह दूध,” दीपक ने उस की कलाई थामते हुए उस के स्तनों की तरफ इशारा किया.

“हाय दैय्या, कितने बेशरम हो तुम.” बरखा ने लाज का नाटक किया, लेकिन दीपक ने उसे खींच कर गोद में गिरा लिया और उस के वक्ष सहलाने लगा.

“देवरजी, तुम मुझे अच्छे लगते हो,” बरखा ने उस के हाथों के ऊपर हाथ रखते हुए कहा, “पर मैं तुम्हें यह दूध तभी पिलाऊंगी, जब तुम हमेशा इन के वफादार रहने की कसम खाओगे.”

“तुम्हारी कसम बरखा भाभी, तुम्हें कभी दगा नहीं दूंगा,” दीपक ने अपने सिर पर हाथ रख कर कसम खाई.

दीपक गुप्ता से हो गए अवैध संबंध

बरखा प्यासी औरत थी. उस की नजर दीपक की जवानी पर थी. दीपक ही उस की प्यास बुझा सकता था. उस का पति कृष्णकांत उस की पेट की भूख तो मिटा सकता था, पर तन की भूख नहीं. अत: उस ने एक कामुक सीत्कार भरी और बोली, “मैं पहले दरवाजा बंद कर लूं.”

दीपक ने उसे छोड़ा तो वह दरवाजा बंद कर आई. वह जैसे ही पलंग के पास आई, दीपक ने उसे बांहों में भर लिया और पलंग पर लुढक़ गया. उस के बाद तो कमरे में सीत्कार की आवाजें आने लगीं. कुछ देर बाद दोनों अलग हुए तो उन के चेहरे पर पूर्ण संतुष्टि के भाव थे.

उस रोज बरखा जहां शादी के समय दिए गए सभी वचन भूल गई और पति के साथ विश्वासघात कर बैठी, वहीं दीपक ने दोस्ती को दरकिनार कर दोस्त की पीठ में इज्जत का छुरा घोंप दिया. वह भूल गया कि बरखा उस के दोस्त की पत्नी है.

अवैध संबंधों का सिलसिला एक बार शुरू हुआ तो वक्त के साथ बढ़ता ही गया. दोनों को जब भी मौका मिलता, वे एकदूसरे में समा जाते. बरखा अब दीपक के साथ सैरसपाटा करने भी जाने लगी. दीपक बरखा को ईरिक्शा पर बैठा कर रमणीक स्थल मोतीझील ले जाता. वहां की मखमली घास पर बैठ कर दोनों घंटों तक प्यार भरी बातें करते. फिर झील में नाव पर बैठ कर खूब मस्ती करते. पति के वापस आने के पहले वह घर लौट आती थी.

दीपक का कृष्णकांत के घर आनाजाना बढ़ा तो अड़ोसपड़ोस के लोगों के कान खड़े हो गए. कई लोगों ने बरखा को दीपक के साथ बाजार में भी साथ देखा था, सो वे भी कानाफूसी करने लगे थे. कृष्णकांत को बात पता चली तो उस का माथा ठनका. उस ने बरखा से कहा तो कुछ नहीं, लेकिन उस पर शक करने लगा.

बरखा पति के सामने बनी सतीसावित्री

एक रोज कृष्णकांत सुबह काम पर गया, लेकिन दोपहर को ही वापस लौट आया. उस समय बरखा घर पर ही थी. कृष्णकांत यह सोच कर घर वापस आया था कि बरखा के साथ प्यार भरे कुछ लम्हे बिताएगा, लेकिन ज्यों ही वह अपने कमरे में दाखिल होने को हुआ, बरखा की आवाज उस के कानों से टकराई, “उस के साथ मेरा विवाह हो गया तो क्या हुआ? मेरा जिस्म और मेरी आत्मा तुम्हारे ही रहेंगे. हमें कोई रोक नहीं सकता.”

कृष्णकांत के कानों में मानो किसी ने पिघला हुआ शीशा डाल दिया हो. उस का चेहरा गुस्से से लाल हो गया. मारे गुस्से और नफरत के उस के जबड़े भिंच गए. दरवाजे को धकेलते हुए वह कमरे में दाखिल हुआ तो उसे अचानक सामने पति को देख कर बरखा के चेहरे का रंग उड़ गया.

कृष्णकांत उसे घूरते हुए दहाड़ा, “बताओ कौन है वह, जिस से तू फोन पर बातें कर रही थी. जरूर वह तेरा आशिक ही होगा.”

बरखा चुपचाप कृष्णकांत की बात सुनती रही. उस के चेहरे पर ग्लानि या क्षोभ के कोई भाव नहीं थे. बजाय झुकने के बरखा सख्त लहजे में बोली, “तुम्हें यह जानना है न कि मैं किस से बातें कर रही थी तो जान लो, मैं अपनी सहेली से बात कर रही थी. अगर यकीन न हो, तो ये लो फोन और नंबर मिला कर कर लो उस से बात.” कह कर उस ने फोन पति को पकड़ा दिया.

बरखा ने जिस आत्मबिश्वास के साथ यह सब कहा था, उस से कृष्णकांत को लगा कि वह सच बोल रही है. उसे लगा कि पूरी बात जाने बिना उस ने बेकार में पत्नी पर शक किया. यही नहीं, उस ने बरखा से माफी मांगी और उसे मनाने लगा.

बरखा के जब से दीपक के साथ जिस्मानी संबंध बने थे, तब से उस ने पति को भुला ही दिया था, लेकिन उस दोपहर जब माफी मांगने के बाद कृष्णकांत ने बरखा से प्यार भरी बातें की और उसे अपनी बांहों में भरा तो वह पति को समर्पित हो गई. कृष्णकांत खुश था कि आज उस ने बीवी को पा लिया है, पर वह यह नहीं जानता था कि बीवी ने उस के शक को दूर करने के लिए उस के समक्ष जिस्म की गिरह खोली थी.

कातिल प्रेम पुजारी – भाग 2

प्रीति को मंहगा पड़ा पुजारी से प्रेम

भोपाल की छोला मंदिर पुलिस की पूछताछ में प्रीति की सनसनीखेज हत्या करने के पीछे की जो कहानी सामने आई ,वह एक शादीशुदा युवक के दूसरी शादीशुदा महिला से प्रेम संबंधों की कहानी थी.

भोपाल के भानपुर इलाके में छोला मंदिर की लीलाधर कालोनी निवासी 38 साल के मनोज शर्मा की शादी प्रीति से सन 2014 में हुई थी. 28 साल की प्रीति कटनी जिले की रहने वाली थी. दोनों की उम्र में 10 साल का अंतर था. दरअसल, प्रीति की कमर की हड्डी बाहर निकली (उभरी) हुई थी, इस वजह से उस का रिश्ता नहीं हो पा रहा था.

जब भी कोई रिश्ते की बात चलती तो प्रीति के परिवार से जलने वाले लोग उस के खिलाफ लडक़े वालों को भडक़ा देते. लोग अकसर यही कहते कि उस की कमर की हड्डी निकली हुई है, वह कभी मां नहीं बन पाएगी. कभी कहते कि वह पति को सुख नहीं दे पाएगी.

इस बीच प्रीति के लिए भोपाल के मनोज का रिश्ता आया. प्रीति में शारीरिक रुप से कमजोरी थी और मनोज की पहली पत्नी उसे छोड़ चुकी थी. दोनों ने अपनी कमियों के चलते इस रिश्ते को स्वीकार कर लिया और 2014 में उन की शादी हो गई.

मनोज भोपाल में अपने बड़े भाई फूलचंद्र के साथ ही रहता था. जब शादी हुई तो प्रीति भी इस परिवार का हिस्सा बन गई. सब कुछ ठीक चल रहा था. इस बीच मनोज और प्रीति के 2 बच्चे भी हो गए. मनोज के घर उस की बुआ के बेटे के साले रामनिवास मिश्र का आनाजाना शुरू हुआ. रामनिवास दुर्गा मंदिर में पुजारी था. दोनों लगभग हमउम्र थे तो दोनों की ठीकठाक पटती थी.

देवरभाभी का रिश्ता होने की वजह से उन के बीच हंसीमजाक चलती रहती थी. मनोज ने कभी इस नजदीकी को प्रेम प्रसंग की दृष्टि से नहीं देखा, अलबत्ता यही सोचा कि रिश्तेदारी में हंसीठिठोली चलती रहती है. इसी बात का फायदा रामनिवास ने उठाया. मनोज की माली हालत भी इतनी अच्छी नहीं थी कि वह प्रीति को खुश रख पाता. प्रीति का मन भी अपने से उम्र में 10 साल बड़े मनोज से हट चुका था.

शादीशुदा रामनिवास मंदिर में पुजारी था, उस के मंदिर में रोज अच्छी खासी रकम चढ़ावे के रूप में आती थी, जिसे वह प्रीति पर लुटाने लगा था.

एक दिन दोपहर के वक्त मंदिर के पूजापाठ से लौट कर रामनिवास ने प्रीति के दरवाजे पर दस्तक दी तो प्रीति उस समय बाथरूम से नहा कर निकली थी. उस ने अंदर से आवाज देते हुए कहा, “कौन है? आ रही हूं.”

बाहर से कोई आवाज न मिली तो प्रीति समझ गई कि रामनिवास होगा. प्रीति ने जैसे ही दरवाजा खोला तो सामने प्रीति के रूप सैंदर्य को देख कर रामनिवास अपना आपा खो बैठा. प्रीति झीने गाउन में थी, जिस में से उस के उभार दिखाई दे रहे थे. उस के खुले हुए बाल और पहनावे ने प्रीति की खूबसूरती में चारचांद लगा दिए थे.

मनोज उस समय अपने काम पर निकल गया था और प्रीति के बच्चे स्कूल गए हुए थे. मौके की नजाकत देखते ही रामनिवास दिल की बात जुबां पर लाते हुए प्रीति से बोला, “भाभी, तुम तो गजब ढा रही हो, तुम्हें देख कर तो अच्छेअच्छों का ईमान डोल जाए.”

अपनी खूबसूरती की तारीफ सुनते हुए प्रीति बोली, “इतनी खूबसूरत होती तो तुम्हारे भैया पलकों पर बिठाते मुझ को.”

“क्या कह रही हो भाभी, मुझे तो यकीन ही नहीं होता है कि मनोज भैया तुम्हारी खूबसूरती पर नहीं मरते. मेरा बस चले तो मैं इस जवानी पर अपना सब कुछ लुटा दूं.” रामनिवास प्रीति का हाथ अपने हाथों में लेते हुए बोला.

“बस एक तुम्हीं तो हो जो मेरी भावनाओं को समझते हो,” प्रीति प्यार से बोली.

रामनिवास ने प्रीति का रुख भांपते ही उसे बाहों में भर लिया और प्रीति के होठों पर अपने होंठ धर दिए. प्रीति के शरीर की तपिश से रामनिवास अपने आप पर काबू नहीं कर सका. उस ने प्रीति को गोद में उठाया और कमरे में पड़े पलंग पर लिटा दिया. वह एकएक कर के प्रीति के जिस्म के कपड़ों को हटाता गया. दोनों वासना के तूफान में गहरे तक बह गए. शारीरिक भूख जब शांत हुई तो अपनेअपने कपड़े ठीक करते हुए वो कमरे से बाहर निकले. इस के बाद जो दोनों के प्रेमालाप का यह सिलसिला शुरू हुआ तो वह लगातार चलता रहा.

पति ने नाता तोड़ा

मगर कहते हैं कि इश्क और मुश्क छिपाए नहीं छिपते. दोनों के प्रेम संबंधों की भनक आखिरकार मनोज के कानों तक पहुंच ही गई. मनोज को आसपास रहने वाले किराएदारों और कुछ हितैषी पड़ोसियों ने बताया कि तुम्हारे घर से निकलते ही रामनिवास यहां अकसर आता रहता है. मनोज के एक मित्र ने मनोज को आगाह करते हुए कहा, “दोस्त, भाभी और रामनिवास को ले कर कालोनी में तरहतरह की चर्चाएं हो रही हैं, तुम्हें बहुत सावधान रहने की जरूरत है.”

अपनी पत्नी के प्रेम संबंधों की जानकारी लगते ही मनोज के मन में शंका पैदा हो गई. मनोज ने प्रीति को प्यार से समझाते हुए कहा, “प्रीति, तुम्हें पता है कि कालोनी में तुम्हारे और रामनिवास के बारे में किस तरह की बातें की जा रही हैं? रामनिवास का रोजरोज घर पर आना ठीक नहीं है.”

इतना सुनते ही प्रीति आवेश में आ गई और पति को उलाहना देते हुए बोली, “तुम मुझ पर बेवजह शक कर रहे हो. रामनिवास तुम्हारी बुआ का लडक़ा है, आखिर उसे घर आने से तुम क्यों नहीं रोकते.”

मनोज ने रामनिवास को भी समझाने की कोशिश की तो उस ने मनोज को यही भरोसा दिलाया कि पड़ोसियों ने प्रीति को नीचा दिखाने के लिए झूठ में ही यह कहानी गढ़ ली, उन के बीच ऐसा कुछ भी नहीं है.

रामनिवास और प्रीति के अंतरंग संबंधों ने अब मनोज और उस की पत्नी के बीच के विश्वास की डोर को तोड़ दिया था. इस बात को ले कर अकसर दोनों के बीच झगड़ा होने लगा. जब प्रीति दूसरी बार प्रेग्नेंट हुई तो प्रीति ने चहकते हुए मनोज को बताया, “मैं फिर से मां बनने वाली हूं.”

मगर मनोज के चेहरे पर कोई खुशी नहीं झलकी. मनोज ने प्रीति पर लांछन लगाते हुए कहा, “तुम्हारे पेट में जो बच्चा पल रहा है, वह मेरा खून नहीं है. यह बच्चा रामनिवास के पाप की निशानी है.”

प्रीति ने भी मनोज को खरीखोटी सुनाते हुए साफ कह दिया, “तुम्हें यकीन न हो तो डीएनए टेस्ट करवा लो, अगर ये बच्चा तुम्हारा नहीं हुआ तो मुझे जो चाहे सजा देना.”

पतिपत्नी के बीच के संबंध इस कदर दरक चुके थे कि जब प्रीति का सातवां महीना चल रहा था, तभी एक दिन मनोज और प्रीति के बीच झगड़ा हो गया और मनोज ने प्रीति को घर से निकाल दिया. प्रीति मायके पहुंच गई. प्रीति के घरवालों ने मनोज को समझाने का बहुत प्रयास किया, मगर मनोज प्रीति को अपनाने को कतई तैयार नहीं हुआ.

कातिल प्रेम पुजारी – भाग 1

5 अगस्त, 2023 के दोपहर के करीब साढ़े 12 बजे का वक्त था. मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के छोला मंदिर इलाके की लीलाधर कालोनी में रहने वाले लोग अपने रोजमर्रा के कामों में व्यस्त थे, तभी किसी महिला की चीखपुकार की आवाज सुनते ही आसपास रहने वाले लोगों का ध्यान उस तरफ गया. अफरातफरी के बीच में कुछ लोग एक मकान की तरफ बढ़े.

इसी बीच महिला की चीखों की आवाज सुन कर आसपास के दूसरे मकानों में रहने वाले किराएदार भी आ गए. महिला के चीखनेचिल्लाने की आवाज एक मकान की ऊपरी मंजिल से आ  रही थी. लिहाजा लोग बाहर की सीढिय़ों के सहारे छत पर पहुंच गए और उस घर के दरवाजे को बाहर से पीटने लगे.

कुछ ही देर बाद जैसे ही दरवाजा खुला तो 2 नकाबपोश महिलाओं ने चाकू दिखाते हुए रौबदार आवाज में कहा, “खबरदार कोई आगे आया तो जान से मार देंगे.”

एक महिला के हाथ में खून से सना चाकू देखते ही वहां मौजूद लोग दहशत में आ गए और उन्हें रास्ता देते हुए दरवाजे से हट गए. मौका देखते ही दोनों नकाबपोश महिलाएं चाकू लहरा कर फरार हो गईं. कुछ लोग उन दोनों महिलाओं के पीछेपीछे दौड़े, मगर तब तक वे नजरों से ओझल हो गईं. कुछ लोगों ने घर के अंदर जा कर देखा तो उन की आंखें फटी की फटी रह गईं.

घर के अंदर करीब 28-30 साल की महिला लहूलुहान पड़ी हुई थी, उस का नाम प्रीति शर्मा था. उस के पास ही एक साल का बच्चा जोरजोर से रो रहा था. कमरे में पहुंची एक बुजुर्ग महिला बच्चे को अपनी गोद में ले कर चुप कराने का प्रयास करने लगी.

प्रीति शर्मा के पूरे शरीर पर जगहजगह गहरे घाव के निशान थे. पूरा कमरा खून से लाल हो गया था. घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत फैल गई. आसपास रहने वाले लोगों ने मनोज और उस के बड़े भाई फूलचंद को घटना की सूचना दी तो दोनों ही घर पहुंच गए. घर का नजारा देख कर उन के होश उड़ गए.

मनोज के बड़े भाई फूलचंद ने छोला मंदिर थाने में फोन कर के सूचना दी तो थाना इंचार्ज उदयभान सिंह भदौरिया तत्काल ही दलबल के साथ लीलाधर कालोनी के उस मकान में पहुंच गए, जहां महिला की बेरहमी से हत्या की गई थी.

प्रीति गंभीर अवस्था में बिस्तर पर पड़ी हुई थी. उस के पूरे शरीर पर चाकू से गोदने के निशान थे. खून के छींटों से पूरे कमरे की दीवारें रंगी थीं. गद्ïदा खून से पूरा भीग चुका था. जमीन पर एक टूटा चाकू पड़ा हुआ था. प्रीति को तत्काल पीपुल्स अस्पताल ले जाया गया, जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.

छोला मंदिर थाना पुलिस ने आसपास रहने वाले लोगों से पूछताछ की तो पता चला कि प्रीति अपने पति मनोज शर्मा और अपने 3 बच्चों के साथ रहती थी. प्रीति का पति मनोज चौक बाजार में एक ज्वैलर्स की दुकान पर काम करता है.

2 बच्चे सुबह स्कूल चले गए थे और पति चौक बाजार अपनी दुकान पर काम के लिए चला गया था. प्रीति दोपहर में अपने घर के काम निपटा रही थी, उसी समय सलवारसूट पहन कर आई 2 महिलाओं ने घर के अंदर घुस कर दरवाजा बंद कर लिया और प्रीति कुछ समझ पाती कि दोनों ने प्रीति पर चाकुओं से हमला कर दिया.

घटनास्थल पर प्रीति के मकान में किराए पर रहने वाले लोगों ने बताया कि 2 महिलाएं सलवारसूट पहने मकान में आती दिखाई दी थीं. उन्होंने काला चश्मा, नकाब, हाथों में ग्लव्स और नीले जूते पहने थे. जब वो गेट के पास आईं तो लोगों को लगा कि कोई परिचित होंगी, लेकिन पलभर में वो बाउंड्री के अंदर आ गईं और सीढिय़ों पर चढ़ते हुए ऊपर छत पर पहुंच गईं. अंदर घुसते ही उन्होंने गेट अंदर से बंद कर लिया, तभी अचानक ऊपर से जोरजोर से चीखने की आवाज आने लगी.

घटना के करीब एक साल पहले तक मनोज शिवनगर में अपने बड़े भाई के मकान के एक हिस्से में रहता था. बाद में भाई की मदद से लीलाधर कालोनी में उस का मकान बन गया, जिस में नीचे 6 किराएदार रहते थे और ऊपर की मंजिल पर मनोज अपनी पत्नी प्रीति और तीनों बच्चों के साथ रहता था. मनोज के 8 साल और 3 साल के 2 बेटे घटना के समय स्कूल गए हुए थे.

हत्यारे की दाढ़ी और सिर पर लंबी चोटी से हुई पहचान

प्रीति पर चाकू से हमला करने के बाद जब रेनकोट पहने हुए दोनों महिलाएं भाग रही थीं, तभी एक किराएदार दीपेश ने सलवार सूट पहने हमलावार के पीछे भागने की कोशिश की, तभी उस ने देखा था कि उन में से एक हमलावर का हलका सा नकाब हटा तो देखा कि वो महिला नहीं पुरुष है और उस के चेहरे पर घनी दाढ़ी, सिर के पीछे लंबी सी चोटी है. दीपेश इतना देख ही पाया था कि चाकू दिखाते हुए भाग गया. पुलिस की पड़ताल ने यहीं से नया मोड़ ले लिया.

पुलिस की पूछताछ में लोगों ने हत्यारे की जो पहचान बताई, वो सुनने के बाद प्रीति के पति मनोज शर्मा का माथा ठनका और उस ने टीआई भदौरिया से कहा, “सर, हत्यारा रामनिवास मिश्रा हो सकता है.”

“यह रामनिवास कौन है?” टीआई उदयभान सिंह भदौरिया ने मनोज से पूछा.

“सर, रामनिवास हमारा रिश्तेदार है, वो मेरी बुआ के लडक़े का साला है. यहीं शीतला माता मंदिर के पास रहता है और दुर्गा माता मंदिर का पुजारी है. वही दाढ़ीमूंछ रखता है और उस के सिर पर लंबी चोटी भी है और उस के बाल भी बड़े हैं.”

“लेकिन वो क्यों प्रीति की हत्या करेगा, साफसाफ बताओ. उस के साथ प्रीति का कोई चक्कर तो नहीं था,” टीआई बोले.

“सर, जब मैं घर पर नहीं होता था, तभी अकसर वह मेरे घर आया करता था. ऐसा मुझे मेरे किराएदार बताया करते थे. मैं तो सुबह बच्चों को स्कूल छोड़ कर काम पर चला जाता था. हमारे जाने के बाद घर में केवल एक साल का बेटा और प्रीति ही रहते थे.” मनोज ने खुलासा करते हुए कहा.

आटो वाले से मिला सुराग

पुलिस ने इलाके के सीसीटीवी फुटेज की जांच की तो घटना के समय एक आटो में 2 नकाबपोश रेनकोट पहने नजर आए. सीसीटीवी में आटो घर के बगल वाली गली में आता हुआ दिखाई दिया. इस के बाद नकाब पहने ये दोनों हमलावर प्रीति के घर की तरफ जाते और फिर भाग कर आते दिखाई दिए. पुलिस ने आटो का नंबर ट्रेस किया और उसे खोज निकाला. पता चला कि आटोवाला चंदन नाम का युवक था.

चंदन ने पूछताछ में पुलिस को बताया, “सर, मैं एक स्टूडेंट हूं, खर्च चलाने के लिए आटो भी चलाता हूं. पुजारी रामनिवास से मेरी पहचान मंदिर में हुई थी. उन को कहीं भी जाना होता था तो मुझे ही बुलाते थे. 5 अगस्त की सुबह करीब 10-11 बजे रामनिवास ने मुझे फोन कर कहा कि लीलाधर कालोनी तक चलना है. आटो ले कर आ जाओ.

“जब मैं आटोरिक्शा ले कर उन के घर गया तो दोनों पतिपत्नी बाहर निकले. दोनों ने रेनकोट पहन रखा था. मैं ने ध्यान नहीं दिया. मैं दोनों को लीलाधर कालोनी ले कर आया. उन्होंने लीलाधर कालोनी के एक घर से थोड़ी दूरी पर पीछे की साइड आटो रुकवा दिया और कहा कि हम 5 मिनट में आते हैं. इस के बाद करीब 10-15 मिनट बाद वो आए तो मैं ने देखा कि उन के हाथों और कपड़ों पर खून लगा था. मेरे पूछने पर उन्होंने बताया कि कुछ लड़ाई झगड़ा हो गया है. इस के बाद मैं ने उन्हें उन के घर छोड़ दिया था.”

चंदन के इतना बताते ही पुलिस समझ गई कि ये हत्या रामनिवास और उस की पत्नी ने ही की है. इस आधार पर पुलिस ने रामनिवास मिश्रा की तलाश शुरू कर दी. 7 अगस्त को रामनिवास का फोन नंबर निकाल कर उस की लोकेशन ट्रेस की तो रामनिवास न्यू मार्केट के आसपास था. कई घंटे उस की तलाश की. इस दौरान रामनिवास ने दाढ़ी और मूंछ मुंडा ली थी. यही कारण था कि पुलिस और उस के मुखबिर भी उसे पहचान नहीं पा रहे थे.

आखिरकार शाम होतेहोते पुलिस ने उसे पकड़ लिया. उस के चेहरे पर नाखून के निशान थे. पुलिस ने उस से पूछा तो उस ने अपना नामपता गलत बताया. पुलिस उसे ले कर आई और पूछताछ करने लगी तो काफी देर तक वो पुलिस को छकाता रहा.

इस के बाद पुलिस ने रामनिवास का मोबाइल खंगाला तो पता चला कि किसी चंदन नाम के शख्स के उस के पास हत्या की वारदात से पहले और बाद में फोन आए थे. वो हत्या करने से साफ मना करता रहा. जब पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की तो उस ने पत्नी के साथ मिल कर प्रीति शर्मा की हत्या करने का जुर्म कुबूल कर लिया. इस के बाद पुलिस ने रामनिवास की पत्नी शालिनी को भी गिरफ्तार कर लिया.

प्यार की वो आखिरी रात – भाग 1

कानपुर शहर का नवाबगंज मोहल्ला कई मायनों में अपनी पहचान बनाए हुए है. एक तो यह पुराना कानपुर के नाम से जाना जाता है. दूसरे गंगा नदी पर बना गंगा बैराज अपनी अद्भुत छटा बिखेरता है. अटल घाट पर बैठ कर लोग कलकल बहती गंगा की लहरों का लुत्फ उठाते हैं. नौका विहार का आनंद भी लेते हैं.

सैकड़ों की संख्या में यहां लोग रोजाना आते हैं. नवाबगंज का जागेश्वर मंदिर भी बहुत प्रसिद्ध है. यहां हर साल सावन के अंितम सोमवार को दंगल का आयोजन किया जाता है, जिस में पुरुष और महिला पहलवान भाग लेते हैं. दंगल को देखने भारी भीड़ उमड़ती है.

इसी जागेश्वर मंदिर के ठीक सामने ओम प्रकाश सैनी अपने परिवार के साथ रहते थे. उन के परिवार में पत्नी सरला के अलावा 3 बेटियां थीं. ओमप्रकाश सैनी फूलों का व्यवसाय करते थे. उन की पत्नी सरला जागेश्वर मंदिर परिसर में फूल बेचने का काम करती थी. पतिपत्नी मिल कर इतना कमा लेते थे, जिस से परिवार का खर्च मजे से चलता था. बड़ी बेटी कुसुम जवान हुई तो उन्होंने उस का विवाह संतोष के साथ कर चुके थे.

मंझली बेटी बरखा थी. वह अपनी अन्य बहनों से ज्यादा खूबसूरत थी. जवानी की दहलीज पर कदम रखते ही उस की खूबसूरती में और निखार आ गया था. हाईस्कूल की परीक्षा पास करने के बाद वह आगे भी पढऩा चाहती थी, लेकिन सरला ने उस की पढ़ाई बंद करा दी और घरेलू काम में लगा दिया. बरखा बनसंवर कर मंदिर परिसर स्थित फूलों की दुकान पर अपनी मां के साथ बैठती तो अनेक युवकों की निगाहें उसे घूरतीं. चंचलचपल बरखा किसी को अपने पास नहीं फटकने देती थी.

बरखा के जवान होने पर वह उस के लिए उचित लडक़े की तलाश में जुट गए. उन्होंने परिचय के साथ बरखा का नाम सैनी समाज के सामूहिक विवाह रजिस्टर में भी दर्ज करा दिया. लंबी भागदौड़ के बाद उन की तलाश कृष्णकांत पर जा कर खत्म हुई.

बरखा ने सुहागरात को ही फेल कर दिया था पति

कृष्णकांत के पिता रामकुमार सैनी कानपुर शहर के यशोदा नगर मोहल्ले में रहते थे. सैनिक चौराहे पर उन का निजी मकान था. वैसे वह मूल निवासी सकरापुर (बिधनू) के थे. वहां उन का पुश्तैनी मकान और कुछ खेती की जमीन है. रामकुमार के परिवार में पत्नी सुनीता के अलावा एक बेटी शिखा तथा बेटा कृष्णकांत था. शिखा की वह शादी कर चुके थे, जबकि कृष्णकांत अभी कुंवारा था. कृष्णकांत इलैक्ट्रिशियन था. वह क्षेत्र की एक दुकान पर काम करता था.

ओमप्रकाश सैनी ने जब कृष्णकांत को देखा तो वह उस के आचारविचार से प्रभावित हुए. अच्छा घरवर देख कर ओमप्रकाश ने अपनी बेटी बरखा का रिश्ता उस के साथ तय कर दिया. फिर 22 दिसंबर, 2009 को बरखा का विवाह कृष्णकांत सैनी के साथ धूमधाम से कर दिया.

शादी के बाद बरखा कृष्णकांत की दुलहन बन कर ससुराल आई तो उस ने अपने बात व्यवहार से पति और सासससुर का दिल जीत लिया. सुंदर व सुशील बहू पा कर जहां सासससुर खुश थे. सब खुश थे, लेकिन बरखा खुश नहीं थी. उस ने जिस सजीले पति को सपने में संजोया था, कृष्णकांत वैसा नहीं था. वह साधारण रंगरूप वाला, दुबलापतला तथा कम बोलने वाला इंसान था. बरखा ने सुहागरात में ही जान लिया था कि उस का पति पौरुषहीन है. उसे सदैव शारीरिक सुख के लिए तड़पना पड़ेगा.

दिन बीतते रहे. लगभग डेढ़ साल बाद बरखा ने एक बेटे को जन्म दिया, जिस के जन्म से घर की खुशियां और बढ़ गईं. मयंक के जन्म से रामकुमार व उन की पत्नी भी गदगद थी. उन्होंने इस खुशी को साझा करने के लिए सैनी समाज के लोगों को भोज कराया.

बरखा को घर में वैसे तो सब सुख था, लेकिन पति सुख से वंचित रहती थी. कृष्णकांत सुबह 9 बजे घर से निकलता, फिर रात 9 बजे ही घर आता. वह कभी शराब के नशे में धुत हो कर घर लौटता तो कभी बेहद थकाहारा. कभी खाना खाता तो कभी बिना खाए ही चारपाई पर पसर जाता. बरखा रात भर करवटें बदलती रहती और गीली लकड़ी की तरह सुलगती रहती. वह हर रात अरमानों को खाक करती और भाग्य को कोसती. इसी तरह समय बीतता रहा.

पति के दोस्त पर जम गई निगाह

कृष्णकांत का एक दोस्त था दीपक गुप्ता. उस के घर से 4 घर छोड़ कर वह रहता था. दीपक के पिता विमल गुप्ता की घर के बाहर पान की दुकान थी. कृष्णकांत भी उस की दुकान पर पान मसाला खाने जाता था. दुकान पर ही कृष्णकांत की उस की दोस्ती दीपक गुप्ता से हुई थी. समय के साथ उन की दोस्ती गहरी हुई तो दीपक का उस के घर आनाजाना शुरू हो गया. दीपक गुप्ता ई रिक्शा चलाता था. उस की कमाई अच्छी थी. वह बनसंवर कर रहता था.

चूंकि दीपक कृष्णकांत का दोस्त था, इसलिए घर के कामों के लिए वह ज्यादातर उसे ही भेजता था. घर के कामों के साथसाथ दीपक बरखा के छोटेमोटे निजी काम भी कर दिया करता था. दीपक बरखा की हमउम्र था. इसी आनेजाने में ही दीपक की नजरें बरखा के गदराए यौवन पर जम गईं.

फिर तो जब भी उसे मौका मिलता, वह बरखा से ऐसा मजाक करता कि वह शर्म से लाल हो उठती. औरतों को मर्दों की नजरें पहचानने में देर नहीं लगती. बरखा ने भी दीपक की नजरों से उस का इरादा भांप लिया था. बरखा प्यासी औरत थी. इसलिए उस ने दीपक की मजाक का कोई विरोध नहीं किया.

बरखा हसीन तितली थी. होंठों पर हमेशा लुभावनी मुसकान सजाए रखना उस का शगल था. उस का मस्त यौवन और उस की कटीली अदाएं दीपक के दिल पर छुरियां चलाती थीं. चूंकि दोस्ती व मोहल्ले के नाते बरखा दीपक की भाभी थी, अत: उन के बीच कुछ ज्यादा ही हंसीमजाक हो जाता था.

बरखा ने जब से घर की जिम्मेदारी संभाली थी, तब से राजकुमार व उन की पत्नी बहू से बेफिक्र हो गए थे. वह घर का भार बहू को सौंप कर अपने पैतृक गांव सकरापुर रहने लगे. वे कभीकभार ही बेटेबहू के पास आते थे, और कुछ दिन रुक कर फिर वापस चले जाते थे. सासससुर के न रहने से बरखा एकदम आजाद हो गई थी. उसे रोकनेटोकने वाला कोई नहीं था.

प्रेमी के लिए सिंदूर मिटाया

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से करीब पंद्रह किलोमीटर दूर सुखी सेवनिया थाने के टीआई वी.बी.एस. सेंगर थाना परिसर में ही मौजूद विश्राम कक्ष में आराम के लिए गए थे. वे नींद की आगोश में जाते उस से पहले थाने में एक बदहवास हालत में महिला आई. उस ने अपना नाम अनीता कुशवाह बताया. वह थाना क्षेत्र की एकता नगर कालोनी में रहती थी.

उस ने बताया कि वह महाशिवरात्रि पर्व मनाने के लिए रायसेन में स्थित अपने मायके गई थी. वहां से लौट कर आई तो घर पर पति बबलू कुशवाह नहीं मिला.

यह सुनकर टीआई भी विचलित हुए. क्योंकि वे बबलू कुशवाह को जानते थे. वह ग्राम सचिव था और अकसर कालोनी की समस्याओं या परेशानियों को ले कर थाने आताजाता था. उन्हें भी खटका और अनहोनी की आशंका को सोचते हुए बिना देरी उस की पत्नी अनीता कुशवाह की शिकायत पर 21 फरवरी, 2023 की दोपहर लगभग डेढ़ बजे गुमशुदगी दर्ज कर ली.

इस के अलावा लापता व्यक्ति के संबंध में तहरीर को ले कर की जाने वाली काररवाई शुरू कर दी गई. टीआई ने तुरंत ही इलाका भ्रमण में निकले एसआई टिंकू जाटव को फोन कर के एकता नगर में जा कर पड़ताल करने के आदेश दिए. वह अपने हमराह हवलदार रामेश्वर और मनोहर राय के साथ मौके पर पहुंच गए. वहां वे मामले की तफ्तीश करते तब तक पीछे से अनीता कुशवाह भी रिपोर्ट दर्ज कराने के बाद घर आ चुकी थी.

सुराग ऐसा मिला कि पुलिस को परेशान करने वाली कडिय़ां जुड़ती चली गईं

अनीता कुशवाह से एसआई टिंकू यादव ने उस के पति बबलू कुशवाह के बारे में कुछ जानकारी लेनी चाही, जैसे उस के करीबी दोस्त, दुश्मन, उठनेबैठने वाले लोगों के नाम आदि. पत्नी ने बताया कि बबलू कुशवाह भोपाल शहर के कबाडख़ाने में रेलवे बर्थ के फरनीचर को बनाने का काम करता था. कई अन्य सवालों पर अनीता कुशवाह ने कोई ठोस मदद पुलिस को नहीं की.

इस के बाद पुलिस ने एकता नगर कालोनी की गलियों में ही पड़ताल का दायरा बढ़ाया. यह कालोनी भोपाल शहर से विस्थापित कर के बसाए गए परिवारों की थी. इस में एक घर उस के 2 छोटे भाइयों सोनू कुशवाह और मोनू कुशवाह का भी था. इस के अलावा एक अन्य गली में उस की मां कमला बाई का भी मकान था. सभी मकानों में एक विशेष बात यह थी कि केवल बबलू कुशवाह का मकान पूरी तरह से बना था, बाकी मकान अर्ध निर्मित थे.

पता चला कि नजदीक ही सेना का सामरिक महत्त्व वाला संस्थान है, जिस कारण एकता नगर में किसी भी मकान को पक्का बनाने की अनुमति नहीं दी जाती थी. बबलू कुशवाह पहले आ गया था, इस कारण ही उस का मकान ठीक तरह से बना था.

इन्हीं छोटीछोटी बातों के बीच पुलिस को पता चला कि बबलू कुशवाह की एकता नगर में रहने वाले असलम खान से नहीं बनती थी. पुलिस संदेह के आधार पर असलम खान को तलाशते हुए उस के पास पहुंची. वह मिल गया और पुलिस उसे पूछताछ के लिए तुरंत थाने ले आई.

लाश तक पहुंचने में पुलिस को आया पसीना

सुखी सेवनिया भोपाल देहात क्षेत्र में आने वाला थाना है. इस के बाद दूसरा जिला लग जाता है. कई गांव और बस्तियां दूरदूर बनी हैं. शुरुआती जांच और असलम खान को थाने में ले कर आतेआते रात हो चली थी. असलम खान पहले तो पुलिस के सामने नहीं टूटा. इसी बीच हवलदार मनोज राय ने मामले की जांच कर रहे एसआई टिंकू जाटव के कान में आ कर एक चौंका देने वाली जानकारी दी.

उस ने बताया कि असलम खान के लापता हुए बबलू कुशवाह की पत्नी अनीता के साथ अवैध संबंध हैं. इन्हीं कारणों से एक साल पहले दोनों के बीच जम कर विवाद भी हुआ था. यह बात हवलदार मनोज राय को बबलू कुशवाह के आसपास रहने वाले लोगों से पता चली थी. यह पता चलते ही टिंकू जाटव सख्त हुए और मनोवैज्ञानिक तरीके से असलम खान से पूछताछ की तो उस ने अपना गुनाह कुबूल कर लिया.

उस ने स्वीकार कर लिया कि बबलू कुशवाह की उस ने हत्या कर दी है. उस की लाश पुलपातरा नाले के पास छिपा दी है. हत्या की बात सुनते ही पूरे थाने में हडक़ंप मच गया. टीआई ने यह जानकारी एसडीओपी मंजु चौहान और एसपी (देहात) किरणलता केरकेट्टा को भी दी. मामला संवेदनशील भी था, क्योंकि मारने वाला दूसरे धर्म का असलम खान था. मामला सांप्रदायिक रंग न ले, उस से पहले ही पुलिस असलम खान को ले कर उस जगह पर पहुंची, जहां उस ने लाश को ठिकाने लगाया था.

लाश पुलपातरा नाले के पास सफेद पौलीथिन में लिपटी हुई थी. उस पर हरी घास कुछ इस तरह से बिछा दी थी ताकि शक न हो. घटनास्थल के नजदीक से काफी बदबू भी आ रही थी.

लाश बरामद होने के बाद पुलिस ने मौके पर बबलू कुशवाह के छोटे भाई सोनू कुशवाह को भी बुला लिया था. उस ने उस लाश की शिनाख्त अपने भाई बबलू कुशवाह के रूप में की. उस समय रात काफी हो चली थी इसलिए सुबह होते ही पुलिस ने फोरैंसिक टीम बुला ली थी.

पत्नी ने मिटाए थे घर में फैले सबूत

बबलू कुशवाह की लाश मिलने की खबर स्थानीय लोगों के अलावा मीडिया वालों को मिल चुकी थी. डा. सुनील गुप्ता की अगुवाई में फोरैंसिक टीम सबूत जुटाने में लगी थी. मृतक के सिर पर चोट, गले में धारदार हथियार के जख्म पाए गए. इस बारे में टीआई ने असलम खान से पूछा कि उस ने हत्या कहां की थी तो असलम ने कहा कि उस के ही घर पर.

इस के बाद एफएसएल की टीम सबूत जुटाने के लिए बबलू कुशवाह के घर पर गई. यहां फोरैंसिक टीम ने सबूत जुटाने का प्रयास किया तो वह हैरान हो गई. एफएसएल अधिकारियों को भी अहसास हो गया था कि यह सामान्य हत्याकांड नहीं है. क्योंकि जहां केमिकल डाल कर सबूत जुटाने का प्रयास किया जाता वहां भारी मात्रा में फिनायल से पोछा लगा मिलना पाया जाता. यह पोछा भी कुछ दिन पहले कई बार लगाया गया था.

हालांकि घर में ही रखी सिलाई मशीन पर खून के छींटे मिले. इस के अलावा दीवार पर खून के नमूने मिले. अब पुलिस का यहां से एक बार फिर माथा ठनका और यकीन हो गया कि असलम खान ने अब तक पूरी कहानी नहीं बताई है. उसे थाने ले जा कर पुलिस ने सख्ती बरती. वह बोला तो पुलिस के पैरों तले से जमीन खिसकती चली गई.

उस ने बताया कि कत्ल में एकदो नहीं बल्कि कई लोग शामिल थे. असलम खान ने रहस्य उजागर करते हुए बताया कि हत्याकांड को बबलू कुशवाह की पत्नी अनीता कुशवाह के इशारों पर अंजाम दिया गया. दिन, तारीख और समय का चुनाव भी उस ने ही तय कर के दिया था.

नाबालिग चाकू नहीं मार सका तो छीन कर असलम ने गले में घोंपा

असलम खान ने बताया कि अनीता कुशवाह के साथ उस का प्रेम प्रसंग पिछले 2 साल से था. यह बात बबलू कुशवाह को पता चल गई थी. लेकिन एकता नगर में उस की राजनीतिक पहुंच थी. उस ने एक साल पहले ही पत्नी को उस से मोबाइल पर बातचीत करते हुए रंगेहाथों पकड़ लिया था. जिस के बाद उस ने कहा था कि वह उस की 3 बेटियों को छोड़ कर असलम खान के साथ रहने चली जाए.

पति को यह बात पता चलने के बाद घर में अकसर छोटीछोटी बातों में कलह हुआ करती थी. जिस की जानकारी अनीता कुशवाह असलम को भी देती थी क्योंकि वह उस से बेहद प्यार करती थी और पति की रोज की कलह से निजात चाहती थी.

फिर उस ने पति की हत्या की योजना बनाई कि वह महाशिवरात्रि वाले दिन मायके रायसेन में पूजा का बहाना बना कर चली जाएगी. वह अपने साथ तीनों बेटियों को भी ले जाएगी. लेकिन जाने से पहले वह घर के पिछले दरवाजे का गेट खोल देगी. अनीता कुशवाह ने ही पति के घर आने का समय भी बता दिया था.

जिस के बाद असलम खान अपने साथ 14 साल के एक नाबालिग को ले कर गया. वह नाबालिग भी बबलू कुशवाह से रंजिश रखता था. दरअसल, एक बार उस का बबलू के बच्चों के साथ विवाद हो गया था. उस वक्त बबलू कुशवाह ने उस को चांटा मार दिया था. इसलिए वह भी उस को चाकू का एक वार अंधेरे में मारना चाहता था.

असलम खान ने पूछताछ में बताया कि बबलू कुशवाह जैसे ही घर में घुसा तो उस ने लोहे की रौड से जोरदार प्रहार किया. अचानक हुए हमले से वह शोर मचाने या विरोध करने की सोच ही नहीं सका. तभी उस को पेट पर कुछ चुभने जैसा अहसास हुआ. सामने वह नाबालिग था, जिस को उस ने तमाचा मारा था.

असलम खान ने देखा कि बबलू नाबालिग को देख चुका है. इस के बाद उस ने यह बोल कर उस से चाकू छीन लिया कि ऐसे नहीं मारते. फिर उस ने उस से चाकू ले कर चाकू का जोरदार प्रहार बबलू कुशवाह की गरदन पर कर दिया. इस के बाद एकएक कर के कई वार उस पर किए. खून के फव्वारे फूटते ही बबलू कुशवाह मौके पर ढेर हो गया.

नईम खान ने निभाई असलम से दोस्ती

बबलू कुशवाह की हत्या करने के बाद असलम खान ने इस की जानकारी रायसेन जिले में बैठी अनीता कुशवाह को फोन पर दी. प्रेमी द्वारा पति की हत्या कराने पर अनीता बहुत खुश हुई. इस के बाद असलम एकता नगर में ही रहने वाले दोस्त नईम खान के पास पहुंचा. दोनों अकसर साथ बैठ कर शराब पीते थे. वह भी अनीता कुशवाह के संबंधों की जानकारी रखता था.

असलम खान ने बताया कि उस ने बबलू कुशवाह को मार दिया है. लाश को ठिकाने लगाना है, जिस के लिए वह मदद चाहता है. नईम खान कबाड़े का काम करता था. जिस कारण वह घर पर कबाड़ा एक जगह रखने के लिए भक्कू जो प्लास्टिक का बड़ा बोरा होता है उस को दिया.

इस के बाद नईम खान की बाइक से असलम खान दोबारा पिछले दरवाजे के रास्ते बबलू के घर में घुसा. लाश को प्लास्टिक के बोरे में भरने के बाद पुलपातरा नाले पर ले गया. यहां वह अकसर मछलियां पकडऩे आता था. इस जगह पर कोई आताजाता नहीं है, यह उसे पता था.

नाले में लाश फेंकने के बाद असलम खान ने उस को हरी घास से ढंक दिया. ताकि किसी व्यक्ति को वहां कुछ पड़े होने का अहसास न हो. फिर दोनों घर आ कर चैन की नींद यह सोच कर सो गए कि अब उस की प्रेमिका और उस के बीच दीवार बनने वाला पति नहीं आएगा.

सबूत मिटाने के बाद गुमशुदगी दर्ज कराने पहुंची पत्नी

जिस दिन बबलू कुशवाह की हत्या हुई उस दिन महाशिवरात्रि थी. इस कारण जगहजगह शिव बारात निकल रही थी. जिस में प्रसाद के रूप में कई जगह भांग का वितरण किया जाता है. इसी कारण लोगों को ज्यादा हलचल होने पर भी आभास नहीं होगा, यह सोच कर अनीता कुशवाह ने योजना बनाई थी.

अनीता की शादी नाबालिग अवस्था में हुई थी. वह कभी भी मायके नहीं जाती थी. लेकिन योजना के तहत उस दिन उसे मायके जाना पड़ा था. लाश को ठिकाने लगाने के बाद अनीता कुशवाह को फिर फोन पहुंचा था. इस बार असलम खान ने उस को योजना बताई. उस ने कहा कि घर जा कर वह सबूत मिटाए और एक दिन बाद थाने पहुंच कर पति की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराए.

अनीता कुशवाह ने पूरे घर को अच्छी तरह से फिनायल से साफ किया. हालांकि वह सारे सबूत नहीं मिटा सकी और सीखचों के पीछे जा पहुंची. पुलिस ने बबलू कुशवाह मर्डर केस के आरोपियों असलम खान, नईम खान और अनीता कुशवाह को गिरफ्तार कर लिया. असलम खान और नाबालिग के खिलाफ हत्या, नईम खान के खिलाफ सबूत मिटाने में सहयोग और अनीता कुशवाह के खिलाफ साजिश रचने का मामला 22 फरवरी, 2023 को दर्ज कर लिया.

पूरी परतें खंगालने के बाद 23 फरवरी को आरोपियों को अदालत में पेश किया गया. जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया, जबकि नाबालिग को बाल न्यायालय में पेश कर बाल सुधार गृह भेजा गया.

बबलू कुशवाह की 3 बेटियां थीं, जिस में बड़ी बेटी 14 तो दूसरी 12 और तीसरी 9 साल की थी. उन्हें बाल कल्याण समिति के सामने पेश किया गया. क्योंकि पिता की हत्या के आरोप में मां जेल चली गई थी. अब उन की परवरिश कौन करेगा, यह बाल कल्याण समिति तय करेगी.