मुंबई की ग्लोबल सिटी विरार वेस्ट के गोकुल, राऊत सोसायटी की गोकुल एंपायर इमारत में 40 साल की शिल्पी वर्मा अपने 50 साल के पति सरवेंद्र वर्मा और 20 साल की एकलौती बेटी के साथ रहती थी. सरवेंद्र वर्मा एक कंपनी में मैनेजर थे तो बेटी पढ़ाई कर रही थी. 2 फरवरी, 2016 को शिल्पी सहेली नूपुर श्रीवास्तव के साथ विरार के एक मौल से शौपिंग कर के लौट रही थी, तभी पुराने विभा कालेज और केएफसी रेस्टोरैंट के बीच उन की कार एक आदमी से टकरा गई.
उस आदमी की उम्र 30-35 साल रही होगी. टक्कर लगते ही वह आदमी जमीन पर गिर पड़ा. इस हादसे से शिल्पी और नूपुर घबरा गईं. दोनों सहेलियां अपनी गलती के लिए माफी मांगतीं, उस के पहले ही वह आदमी उठ कर कार का बोनट पीटते हुए चिल्ला कर कहने लगा, ‘‘आप लोग आंखें बंद कर के कार चलाती हैं. आप लोगों को सड़क पर चलने वाला आदमी दिखाई नहीं देता?’’ नूपुर और शिल्पी ने सौरी कहा तो वह आदमी और जोर से चिल्लाया, ‘‘आप के सौरी कह देने से मेरी टांग ठीक हो जाएगी क्या? चलिए आप लोग चल कर मेरी टांग का इलाज कराइए. उस के बाद जाइए.’’
यह कह कर वह आदमी कार का पिछला दरवाजा खोल कर कार के अंदर बैठ गया. शिल्पी और नूपुर उस आदमी को कुछ पैसे दे कर अपना पीछा छुड़ाना चाहती थीं, पर वह नहीं माना. जब उस आदमी ने देखा कि वहां भीड़ इकट्ठा हो रही है तो उस ने शिल्पी को डांट कर कार आगे बढ़ाने को कहा.
शिल्पी उसे ले कर कुछ दूर गई होगी कि उस आदमी ने रूमाल में छिपी रिवौल्वर जैसी कोई चीज दिखाते हुए कहा, ‘‘मैं जैसा कहूं तुम वैसा ही करो, वरना मैं तुम दोनों को गोली मार दूंगा.’’ ‘‘नहीं, आप को ऐसा कुछ भी करने की जरूरत नहीं है.’’ शिल्पी ने गिड़गिड़ाते हुए कहा, ‘‘आप जैसा कहेंगे, मैं वैसा ही करूंगी.’’ इस के बाद वह आदमी जैसे कहता रहा, शिल्पी उसी तरह कार चलाती रही. करीब 2 घंटे तक वह उस आदमी के कहे अनुसार नवनिर्माण ग्लोबल सिटी की सड़कों पर कार को घुमाती रही. करीब 5 बजे उस की कार विरार के डोंगर पाड़ा रोड़ पर पहुंची तो कार का अगला टायर फट गया और कार बिजली के खंभे से टकरा गई.
कार रुक गई तो उस आदमी ने दोनों महिलाओं को कार से नीचे उतारा और एक औटो रुकवा कर उस में शिल्पी को बैठा कर नूपुर को इस तरह धक्का दिया कि वह जमीन पर गिर पड़ी. वह उठ पाती, उस के पहले ही वह शिल्पी को ले कर चला गया. फिल्मी स्टाइल में घटी इस घटना से नूपुर हैरान थी. उस ने शोर भी मचाया, पर लोगों के इकट्ठा होने तक वह आदमी शिल्पी को ले कर चला गया था. नूपुर ने जब यह बात शिल्पी के घर जा कर उस के पति सरवेंद्र वर्मा और बेटी को बताई तो दोनों परेशान हो उठे. उस समय तक रात के साढ़े 8 बज चुके थे.
वे नूपुर श्रीवास्तव को साथ ले कर थाना आगासी अरनाला पहुंचे और असिस्टैंट इंसपेक्टर संदीप शिवले को सारी बात बता कर शिल्पी वर्मा के अपहरण का मुकदमा दर्ज करा दिया. मामला एक संभ्रात परिवार की महिला के अपहरण का था, इसलिए संदीप शिवले ने तुरंत घटना की जानकारी एसपी शारदा राऊत, एएसपी श्रीकृष्ण कोकाटे और डीएसपी नरसिंह भोसते के अलावा पुलिस कंट्रोल रूम को दे कर थाने में मौजूद स्टाफ को मामले की जांच में लगा दिया.
आमतौर पर अपहरण जैसे मामले पैसों के लिए या दुश्मनी में किए जाते हैं. शुरू में पुलिस को यही लगा कि यह अपहरण भी पैसे के लिए किया गया होगा, इसलिए पुलिस अपहर्त्ता के फोन का इंतजार करने लगी. लेकिन जब अगले दिन तक अपहर्त्ता का कोई फोन नहीं आया तो संदीप शिवले को लगा कि यह अपहरण पैसे के लिए नहीं किया गया. इस में कोई और ही बात है.
वह इस मामले का हल ढूंढ ही रहे थे कि मीडिया ने इस मामले को हवा दे दी, जिस की वजह से पुलिस जांच में तेजी आ गई. संदीप शिवले ने हैडकांस्टेबल मंदार दलवी, आर.डी. बेलधर, मुकेश पवार, अमोल तटकरे, प्रियंका पाटिल, योगिता भोईर और अमोल कांटे की एक टीम बना कर ग्लोबल सिटी की सड़कों पर लगे सारे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज देखने को कहा. इस से उस औटो के बारे में पता चल गया, जिस से शिल्पी को ले जाया गया था.
औटो वाले से पूछताछ की गई तो उस ने बताया कि दोनों को उस ने बसई के परिजात गेस्टहाउस के पास छोड़ा था. वे हड़बड़ी में अपना एक मोबाइल फोन उस के औटो में ही छोड़ गए थे. उस ने गलती मानते हुए कहा कि उस मोबाइल का सिम निकाल कर उस में अपना सिम डाल कर वह उस का उपयोग करने लगा था. लेकिन उस ने पुलिस को हैरान करने वाली बात यह बताई कि उस के औटो से जो महिला और आदमी गए थे, वे औटो में पतिपत्नी जैसा व्यवहार कर रहे थे, जबकि उस से कहा जा रहा कि आदमी ने महिला का अपहरण किया था.
उन के बातव्यवहार से उसे अपहरण जैसा कुछ नहीं लग रहा था. इस से संदीप शिवले को शिल्पी का चरित्र संदिग्ध लगा. लेकिन शिल्पी की उम्र को देखते हुए उन के मन में एक बार यह भी आया कि औटो वाले को भ्रम भी तो हो सकता है, उन्होंने सरवेंद्र वर्मा और उन की बेटी को थाने बुला कर औटो वाले को मिला मोबाइल दिखाया तो उन्होंने बताया कि यह मोबाइल शिल्पी का ही है.
पुलिस ने बसई के परिजात गेस्टहाउस जा कर वहां के कर्मचारियों को शिल्पी का फोटो दिखा कर पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि यह महिला उन के गेस्टहाउस में अपने पति के साथ पिछले 3 दिनों से ठहरी थी. पुलिस के आने के कुछ घंटे पहले ही दोनों वहां से गए थे. पुलिस को जैसी उम्मीद थी कि दोनों ने गेस्टहाउस के रजिस्टर में अपना सही नामपता नहीं लिखा होगा, वह सच था. रजिस्टर में जो नामपता लिखा था, उस की जांच की गई तो वह झूठा पाया गया. इस के बाद जांच आगे बढ़ाने के लिए पुलिस ने शिल्पी के मोबाइल नंबर की काल डिटेल्स निकलवाई तो उस में एक नंबर ऐसा मिला, जिस पर 3 महीने पहले सिर्फ एक बार फोन किया गया था.
वह नंबर पुलिस को संदिग्ध लगा तो पुलिस ने उस नंबर के बारे में पता किया. पता चला कि वह नंबर आगरा के किसी अमरीश कुमार का था, लेकिन वह नंबर अब बंद हो चुका था. मुंबई पुलिस आगरा पहुंची तो पता चला अमरीश कुमार तो 3 महीने पहले दुबई चला गया था. पुलिस खाली हाथ लौट आई. इसी तरह 10 दिन बीत गए, पुलिस के हाथ कुछ नहीं लगा. 14 फरवरी, 2016 को मोबाइल के आईएमईआई नंबर की मदद से पुलिस पंजाब के लुधियाना शहर की एक दुकान पर पहुंची और वहां से शिल्पी और अमरीश कुमार को गिरफ्तार कर लिया.
अमरीश कुमार ने उस दुकान पर अपना मोबाइल फोन ठीक कराने के लिए दिया था. दोनों को मुंबई ला कर थाना आगासी पुलिस ने वसई की अदालत में मैट्रोपौलिटन मजिस्ट्रैट श्रीमती धारे के समक्ष पेश कर विस्तार से पूछताछ के लिए 3 दिनों के पुलिस रिमांड पर लिया. रिमांड के दौरान की गई पूछताछ में पता चला कि प्रेमी के साथ रहने के लिए शिल्पी ने खुद ही अपहरण का ड्रामा रचा था.
30 साल का अमरीश कुमार उत्तर प्रदेश के आगरा शहर का रहने वाला था. वह वहां के एक थ्री स्टार होटल में सेफ था. शिल्पी वर्मा से उस की जानपहचान कोई 4 साल पहले सोशल मीडिया फेसबुक के माध्यम से हुई थी. दोस्त बनने के बाद पहले दोनों के बीच फेसबुक द्वारा चैटिंग शुरू हुई, उस के बाद सीधे फोन से बात होने लगी. इस का नतीजा यह निकला कि दोनों में प्यार हो गया. उस समय शिल्पी पति और बेटी के साथ कोलकाता में रहती थी. उसे पता था कि शिल्पी उस से 10 साल बड़ी थी. इस के बावजूद अमरीश के प्यार में जरा भी कमी नहीं आई. मूलरूप से बिहार के पटना शहर की रहने वाली शिल्पी की शादी सन 1993 में दिल्ली के रहने वाले सरवेंद्र वर्मा के साथ हुई थी. सरवेंद्र कोलकाता में रहते थे, इसलिए वह भी पति के साथ वहीं रहने लगी थी. सरवेंद्र वहीं एक प्रतिष्ठित कंपनी में नौकरी करते थे.
पति के नौकरी और बेटी के स्कूल जाने के बाद शिल्पी घर में अकेली रह जाती तो बोर होने लगती. इस के अलावा न जाने क्यों पति और बेटी का व्यवहार भी उस के प्रति ठीक नहीं था. चैटिंग और बातचीत के बाद शिल्पी और अमरीश एकदूसरे के काफी करीब आ गए. बातचीत में उन के बीच मर्यादा की कोई सीमा नहीं रह गई थी. दोनों एकदूसरे से खुल कर बातें करने लगे थे. इस का नतीजा यह निकला कि दोनों मिलने के लिए बेचैन हो उठे. उन की यह बेचैनी तभी शांत हुई, जब अमरीश कोलकाता जा पहुंचा. शिल्पी ने अपनी दोनों बांहें फैला कर उस का स्वागत किया. जब तक अमरीश कोलकाता में रहा, शिल्पी ने उस का हर तरह से खयाल रखा. एक बार दोनों की मुलाकात हुई तो सिलसिला ही चल निकला. अमरीश को जब भी मौका मिलता, वह शिल्पी से मिलने कोलकाता पहुंच जाता. फिर तो दोनों साथसाथ रहने के सपने देखने लगे.
अपने इस सपने को पूरा करने के लिए शिल्पी जब सन 2013 में कोलकाता से पति और बेटी के साथ दिल्ली अपनी ससुराल आ रही थी तो दिल्ली पहुंचने से पहले ही गायब हो गई. 4 दिनों की अथक कोशिश के बाद पुलिस ने शिल्पी और अमरीश को उस के मोबाइल फोन के जरिए कानपुर के एक लौज से बरामद किया. शिल्पी की यह हरकत सरवेंद्र और उस के घर वालों को काफी नागवार लगी. अब वह शिल्पी को अपने साथ रखना नहीं चाहते थे, लेकिन रिश्तेदारों के समझाने पर उसे चेतावनी दे कर साथ रख लिया था. पर शिल्पी पर उन की चेतावनी का कोई असर नहीं हुआ. वह अमरीश को भूल नहीं पाई आौर मौका मिलने पर अमरीश से फोन पर बातें करती रही.
पत्नी की हरकतों से तंग आ कर सरवेंद्र ने सन 2015 में अपना ट्रांसफर मुंबई करा लिया. मुंबई में उन्हें विरार की नवनिर्माण ग्लोबल सिटी में रहने के लिए बढि़या फ्लैट मिला ही था, आनेजाने के लिए कार भी मिली थी. हर सुखसुविधा होने के बावजूद शिल्पी का मन नहीं लग रहा था. उस का मन तो अमरीश में बसा था. वह उस के साथ खुले आकाश में उड़ने के लिए तड़प रही थी. बापबेटी शिल्पी की हर गतिविधि पर नजर रख रहे थे, लेकिन उस की हरकतें बंद नहीं हुईं. वह किसी न किसी तरह अमरीश से बातें कर ही लेती थी. इस के लिए वह अलग मोबाइल रखती थी, जिस से वह सिर्फ अमरीश से ही बातें करती थी. मुंबई आने के बाद वह अमरीश से मिल नहीं पा रही थी,
इसलिए उस ने उस के साथ भाग जाने की योजना बनाई. इस बार वह उस के साथ इस तरह भागना चाहती थी कि घर वालों की तो छोड़ो, पुलिस उन तक न पहुंच सके. इसीलिए इस बार उस ने भागने को अपहरण के ड्रामे में बदल दिया. लेकिन इस बार भी वह मोबाइल नंबर के जरिए ही पकड़ी गई.
योजना के अनुसार, अमरीश ने 3 महीने पहले यह कह कर घर छोड़ दिया कि उसे दुबई में नौकरी मिल गई है. घर वालों से झूठ बोल कर वह पंजाब के शहर लुधियाना चला गया. वह शेफ का काम जानता ही था, इसलिए उसे वहां एक रेस्टोरेंट में नौकरी मिल गई. इस के बाद वह शिल्पी को भगाने की तैयारी करने लगा. शिल्पी को भगाने के 3 दिन पहले यानी 30 जनवरी को अमरीश लुधियाना से मुंबई पहुंचा तो शिल्पी उस के साथ भागने की तैयारी करने लगी. घर वालों को अमरीश के साथ भाग जाने का संदेह न हो, इस के लिए उस ने सीधे भागने के बजाय अपने अपहरण का ड्रामा रचा, जिस में वह सफल भी रही.
लुधियाना पहुंच कर अमरीश और शिल्पी निश्चिंत हो गए थे और देश छोड़ कर दुबई जाने की तैयारी कर रहे थे. लेकिन शिल्पी ने 3 महीने पहले जो गलती की थी, उसी की वजह से पुलिस ने उसे पकड़ लिया. शिल्पी और अमरीश कुमार ने किसी को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया था, वे बालिग भी थे, इसलिए उन पर कोई अपराध नहीं बनता था. लेकिन अपने अपहरण का ड्रामा रच कर उस ने पुलिस को गुमराह करने का अपराध किया था. इसलिए पुलिस ने उसी का मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया. चूंकि उन का यह अपराध जमानती था, इसलिए जल्दी ही उन की जमानतें हो गईं. जमानत होने के बाद शिल्पी ने पति के साथ जाने से मना कर दिया और प्रेमी अमरीश से विवाह कर के उसी के साथ रह रही है.
हत्या के लिए दी 2 लाख की सुपारी…
इरफान को एक दिन संगीता घर ले आई. उस ने ससुर कमलेश्वर और पति को बताया कि इरफान पहुंचा हुआ तांत्रिक है. वह सुजीत और अजीत की शराब छुड़वा देगा. शुरू में कमलेश्वर ने इरफान पर विश्वास किया. जब बारबार इरफान तंत्र क्रियाएं करने के बहाने उन के घर आने लगा तो कमलेश्वर और अजीत को बुरा लगने लगा. लेकिन वह इरफान को घर आने से नहीं रोक पाए.
सुजीत की हत्या से 20 दिन पहले भी संगीता ने इरफान को अपने घर बुलाया था. इरफान ने सुजीत की फोटो रख कर तांत्रिक क्रियाएं कीं. अजीत घर में था, उसे संगीता ने बुलाया लेकिन वह तांत्रिक अनुष्ठान में नहीं आया. इरफान ने सुजीत की पैंट सामने रख कर उस पर कुछ फेंका तो वह जलने लगी. इरफान ने विमला को विश्वास दिलाया कि आज के बाद सुजीत शराब को हाथ नहीं लगाएगा.
लेकिन ऐसा नहीं हुआ. सुजीत पहले की तरह शराब पी कर आता और बातबात पर विमला की पिटाई कर देता. इस से विमला पूरी तरह सुजीत की दुश्मन बन गई. उस ने जेठानी संगीता से कहा कि शराबी पति सुजीत की हत्या कराकर उसे छुटकारा दिलवा दे. वह इस के लिए लाख-2 लाख खर्च कर देगी.
संगीता ने इरफान को सुजीत की हत्या करने के लिए उकसाया तो उस ने 2 लाख रुपए की सुपारी मांगी. संगीता ने स्वीकार कर लिया. वह सुपारी देकर हत्या कराने को तैयार हो गई. विमला ने इरफान को पेशगी के 23 हजार रुपए दे दिए. तीनों ने एक दिन सिर जोड़ कर प्लान बनाया कि सुजीत को कैसे खत्म करना है.
सुजीत का एक दोस्त था नींबू. संगीता ने इरफान को नींबू से दोस्ती कर के सुजीत तक पहुंचने का रास्ता सुझाया. विमला ने अपने पति सुजीत का मोबाइल नंबर इरफान को दे दिया. इरफान ने नींबू से दोस्ती करने के लिए उस के पास आनाजाना शुरू कर दिया. वह नींबू के लिए शराब ले जाता था. धीरेधीरे नींबू ने इरफान की दोस्ती कुबूल कर ली.
22 जनवरी को इरफान ने नींबू से सुजीत को फोन करवाया कि उस का दोस्त आज शराब की दावत दे रहा है. उसे लेने वह घर आ रहा है. सुजीत शराब की दावत होने की बात से खुश हो गया. वह नींबू का इंतजार करने लगा. प्लान के अनुसार इरफान अपने एक साथी रामरतन के साथ उस के पास आ गया. उस ने बताया कि नींबू ने उसे लेने के लिए भेजा है.
“नींबू कहां पर है?’’ सुजीत ने पूछा.
“उसे बोतल खरीदने के लिए ठेके पर भेजा है. चलो, वह हमें ठेके पर मिल जाएगा.’’ रामरतन ने कहा. सुजीत फंस गया जाल में वह इको कार ले कर आए थे. सुजीत उस कार में बैठ गया. कार में पहले से ही पुष्पेंद्र, वतन सिंह और आरिफ बैठे हुए थे. इरफान के इशारे पर कार को वारहपत्थर के एक ढाबे पर ले गए. वहीं पर शराब का ठेका था. नींबू को देखने के बहाने से पुष्पेंद्र का साढ़ू रामरतन ठेके पर गया और 3 बोतल शराब खरीद लाया. उस ने एक बोतल में नशे की 15 गोलियां डाल दीं. ये गोलियां पुष्पेंद्र दातागंज के एक कैमिस्ट से पहले ही खरीद कर ले आया था और रामरतन को दे दी थी.
ढाबे पर आ कर बोतलें खोली गईं. ढाबे से चिकन खरीदा गया. उन्होंने पार्टी शुरू की. रामरतन ने सुजीत को उसी बोतल की शराब पिलाई, जिस में नशे की गोलियां मिलाई गई थीं. जब शराब पी कर सुजीत बेहोश हो गया तो वे लोग उसे कार में बिठा कर फरीदपुर की ओर ले गए. कार में ही बेसुध पड़े सुजीत की गला घोट कर हत्या कर दी गई.रात गहराने लगी थी. उन लोगों ने पचौली फाटक के पास रेलवे लाइन पर सुजीत की लाश को डाल दिया और अपनेअपने घर चले गए.
सुजीत की हाथ कटी लाश 23 जनवरी को थाना जलालाबाद की पुलिस ने बरामद की थी. थाना जलालाबाद में संगीता और विमला ने सुजीत की हत्या इरफान द्वारा करने की बात कुबूल कर ली थी. देवरानी जेठानी से पूछताछ करने के बाद थाने की पुलिस टीम ने हत्यारों की धरपकड़ के लिए उन के घरों पर दबिश दी तो इरफान, रामरतन, वतन सिंह उर्फ विनीत, पुष्पेंद्र उर्फ राहुल, संगीता, विमला को गिरफ्तार कर लिया. सभी पकड़ में आ गए. आरिफ इरफान का भाई है.
संगीता और विमला से मिलने वाले 2 लाख रुपए का लालच दे कर पुष्पेंद्र, वतन सिंह, आरिफ और रामरतन को इरफान ने सुजीत हत्याकांड में शामिल किया था. अब आरिफ को छोड़ कर सभी जेल में पहुंच गए थे. आरिफ की तलाश में पुलिस टीम छापेमारी कर रही थी. कथा लिखी जाने तक वह पकड़ में नहीं आया था.
—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित
एसएचओ सोलंकी ने उन के कंधे पर सहानुभूति से हाथ रख कर कहा, ‘‘हिम्मत रखिए, आप की दी गई जानकारी से ही हम हत्यारे तक पहुंच कर उसे फांसी के फंदे तक पहुंचा सकते हैं. आप इरफान पर शक जाहिर कर रहे हैं, मुझे उस का पता ठिकाना बताइए.’’
“मैं नहीं जानता साहब, जानता तो अभी तक उसे पकड़ कर सुजीत को लापता करने की वजह पूछ लेता. बड़ी बहू और छोटी बहू ने भी चुप्पी साध रखी है. वही इरफान तक आप को पहुंचा सकती हैं.’’
“ठीक है, मैं संगीता और विमला को थाने बुलवा लेता हूं. देखता हूं कितनी देर तक चुप्पी साध कर रह सकती हैं.’’ एसएचओ सोलंकी ने गंभीरता से कहा और कांस्टेबल सोनवीर, अंकित, अशोक और महिला कांस्टेबल ममता को एसआई चमन सिंह के साथ संगीता और विमला को थाने लाने के लिए भेज दिया. कमलेश्वर सिंह ने उन्हें अपने घर का पता बता दिया था. प्रवीण सोलंकी ने कमलेश्वर सिंह को अपने पास ही रोक लिया था. वह इरफान की उन के घर में घुसपैठ और बहुओं से उस की पहचान के पीछे की कहानी जान लेना चाहते थे.
एक घंटे में ही एसआई चमन सिंह के साथ गई पुलिस टीम कमलेश्वर सिंह की बहुओं संगीता और विमला को थाने ले कर आ गई. वे दोनों काफी डरी हुई लग रही थीं. अपने ससुर को थाने में बैठा देख कर वे दोनों समझ गईं कि ससुर ने उन के विषय में बहुत कुछ बता दिया है. एसएचओ सोलंकी ने दोनों को जलती आंखों से घूर कर देखते हुए कडक़ स्वर में पूछा, ‘‘मुझे मालूम हो गया है कि तुम ने इरफान के साथ साजिश रच कर सुजीत की हत्या करवा दी है.’’
संगीता ने थूक निगला, ‘‘यह झूठ है साहब, जरूर आप को हमारे ससुर ने हमारे खिलाफ उलटा सीधा भडक़ा दिया है.’’
“तुम्हारे ससुर ने अपना बेटा खोया है, तुम दोनों ने क्या खोया? सुजीत 3 दिन से घर नहीं लौटा, तुम दोनों को चिंता नहीं हुई?’’
“चिंता तो बहुत हुई है साहब, लेकिन मैं औरत जात हूं, अपने देवर को कहां जा कर ढूंढती.’’
“क्यों इरफान ने तुम्हें नहीं बताया कि उस ने तुम्हारे देवर सुजीत को पचोली गांव में ले जा कर मार डाला है. इरफान ने तो यह कुबूल कर लिया है कि तुम्हारे कहने पर ही उस ने हत्या की है.’’ थानाप्रभारी सोलंकी ने अंधेरे में तीर चलाया. संगीता के चेहरे का रंग उड़ गया. वह बौखला कर बोली, ‘‘मुझे तो विमला ने सुजीत को रास्ते से हटाने को कहा था साहब. इसी ने ऐसा करने के लिए इरफान को 2 लाख रुपए देना कुबूल किया था.’’
विमला को काटो तो खून नहीं. उस का चेहरा सफेद पड़ गया. वह जेठानी को फाड़ खाने वाली नजरों से देख कर चीख पड़ी, ‘‘तू खुद भी तो चाहती थी कि मेरा पति सुजीत मर जाए. तू अपने पति अजीत को भी इरफान के हाथों खत्म करवाने की फिराक में है, ताकि ससुर की जमीनजायदाद पर ऐश कर सके.’’
“मैं अकेली ऐश करूंगी, तू क्या नहीं करेगी?’’ संगीता भी चीख कर तैश में बोली, ‘‘सुजीत की जगह मैं तुझे मरवा देती तो क्लेश ही खत्म हो जाता.’’
जलालाबाद के सुजीत हत्याकांड का खुलासा अब हो चुका था. एसएचओ सोलंकी और अन्य पुलिस वाले दोनों देवरानीजेठानी द्वारा ही गुनाह कुबूल कर लेने पर मुसकरा रहे थे. उन दोनों को चुप करने के लिए लौकअप में अलगअलग बंद करवा दिया. कमलेश्वर लज्जित सिर झुकाए बैठे थे. दोनों बहुओं ने आज उन के घर की इज्जत को नीलाम कर दिया था. वह सिर उठा कर किसी से बात करने के काबिल नहीं रह गए थे.
लखनऊ जिले के गौसनगर गांव में निवास करता था ठाकुर कमलेश्वर सिंह. उस के पास पुश्तैनी जमीन तो थी ही, वह मैरिज लान का संचालन भी करता था. कमलेश्वर के परिवार में पत्नी के अलावा 3 बेटे अजीत, सुजीत और सुधीर थे. अजीत और सुजीत जवान हो कर पुश्तैनी काम में लग गए तो कमलेश्वर ने रूपापुर (जलालाबाद) के ठाकुर हरपाल सिंह की बेटी संगीता को अजीत के लिए और शाहजहांपुर के गांव लस्करपुर के ठाकुर चंद्रभाल की बेटी विमला को सुजीत के लिए पसंद कर लिया.
संगीता और तांत्रिक के अवैध संबंध ने बिगाड़ा खेल…
वह दोनों बेटों की शादी धूमधाम से कर के लाए तो उन की साख गांव गौसनगर में और ज्यादा बढ़ गई. वह सिर उठा कर गांव में शान से चलने लगे. उन्हें तब नहीं मालूम था कि एक दिन यही दोनों बहुएं उन के मुंह पर ऐसी कालिख पोतेंगी कि वह शरम से पानीपानी हो जाएंगे.
समय का पहिया घूमता रहा. संगीता 2 बेटों की मां बन गई और विमला ने भी 3 बच्चों को जन्म दे कर अपना परिवार पूरा कर लिया. 5-7 साल दोनों के परिवार खुशहाल रहे, लेकिन काम की थकान उतारने के नाम पर जब अजीत और सुजीत ने शराब पीनी शुरू की तो उन के घर में कलह शुरू हो गई. अजीत तो कम पीता था लेकिन सुजीत तो पियक्कड़ था. विमला उस से लड़ती तो ठाकुरों वाला रौब दिखाने के लिए सुजीत विमला को रुई की तरह धुन देता. संगीता पर भी अजीत हाथ छोडऩे लगा था, इस से वह भी दुखी रहने लगी थी.
एक दिन किसी पड़ोसन के कहने पर संगीता अपने पति अजीत और देवर सुजीत को सही राह पर लाने के लिए तथाकथित तांत्रिक इरफान से जा कर मिली. इरफान तंत्रमंत्र विद्या का जानकार था. उस ने दावा किया कि चुटकी बजाते ही उन की परेशानी दूर कर सकता है, ऐसा उस पड़ोसन ने बताया था. कभी उस पड़ोसन ने अपने पियक्कड़ पति को रास्ते पर लाने के लिए इरफान से तांत्रिक अनुष्ठान करवाया था. अनुष्ठान के बाद उस के पति ने पीना छोड़ दी थी.
संगीता अकेली ही जा कर इरफान से मिली और उसे अपनी समस्या बताई तो इरफान ने उसे पति और उस ने देवर का फोटो ले कर दूसरे दिन आने को कह दिया. संगीता दूसरे दिन पति अजीत और देवर सुजीत के फोटो ले कर तांत्रिक इरफान के पास गई तो उस ने अनुष्ठान के बहाने संगीता को हर वीरवार को अपने कार्यालय में बुलाना शुरू कर दिया.
इस बहाने वह संगीता से रुपएपैसे तो ऐंठता ही था, वह संगीता की सुंदरता पर मन ही मन मर मिटा था. 2 बच्चों की मां बन चुकी संगीता 35 वर्ष की हो गई थी, लेकिन अभी उस की जवानी उस पर कायम थी. जब इरफान उसे अनुष्ठान के नाम पर बहाने से छू लेता था तो संगीता की वासना अंगड़ाई लेने लगती थी. इमरान को शह देने के लिए वह उस से और सट जाती. इस से इरफान की हिम्मत बढ़ गई. एक दिन इरफान ने संगीता को बांहों में भरा तो संगीता ने कोई ऐतराज नहीं किया. फिर क्या था, संगीता के तांत्रिक से अवैध संबंध स्थापित हो गए.
23 जनवरी, 2023 की सुबह थाना जलालाबाद के लिए एक बुरी खबर ले कर आई. बरेली राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) की ओर से थाने में किसी ने फोन किया कि दिल्लीलखनऊ रेलवे ट्रैक के फरीदपुर स्टेशन के करीब पडऩे वाले पचोली गांव के फाटक के पास एक व्यक्ति का हाथ कटा शव पड़ा है. शायद वह किसी ट्रेन की चपेट में आ गया है.
थाना जलालाबाद उत्तर प्रदेश के जिला शाहजहांपुर में पड़ता है, इसलिए सूचना मिलते ही वहां के एसएचओ प्रवीण सोलंकी अपनी टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए. फाटक पचोली के करीब रेलवे लाइन की दाईं ओर एक व्यक्ति का शव पड़ा हुआ था. उस से कुछ दूरी पर उस का कटा हुआ हाथ भी पड़ा दिखाई दे रहा था. शव के पास फैला खून जम कर काला पड़ चुका था, इसी से एसएचओ ने अनुमान लगाया कि उस व्यक्ति की मौत करीब 7-8 घंटे पहले हुई है.
चूंकि रात को इधर कोई आया नहीं होगा, इस कारण यहां शव पड़े होने की जानकारी रात को नहीं मिल सकी. सुबह बरेली जीआरपी की गश्त करने वाली टीम इधर से गुजरी, तब यहां शव पड़े होने की जानकारी थाने में दी गई. एसएचओ सोलंकी ने शव का मुआयना किया. वह 34-35 वर्ष की उम्र का था, उस ने पैंट पहनी हुई थी. शव की जेबें टटोली गईं तो जेबों में से ऐसा कोई सामान नहीं मिला जिस से उस की पहचान हो सके. पैंटशर्ट पर किसी टेलर का लेबल भी नहीं था.
अब तक हलकी धूप निकल आई थी और पचोली गांव के लोग दिशामैदान के लिए रेलवे ट्रैक की तरफ आने लगे थे. जैसे ही उन्हें रेलवे लाइनों में किसी व्यक्ति की लाश मिलने की जानकारी हुई, वे वहां एकत्र होने लगे. खबर गांव में पहुंची तो पूरा गांव ही वहां उमड़ आया. इन में महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे भी थे. सभी की नजरें उस व्यक्ति के शव पर थीं. पुलिस ने उन से रेलवे लाइनों में पड़ी लाश को पहचानने के लिए कहा, लेकिन किसी ने भी उस व्यक्ति को नहीं पहचाना.
किसी भी तरीके से उस व्यक्ति की शिनाख्त न होने से एसएचओ प्रवीण सोलंकी ने आवश्यक काररवाई निपटा कर लाश पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दी. जलालाबाद थाने के एसएचओ प्रवीण सोलंकी के लिए सब से पहले उस व्यक्ति की शिनाख्त होनी जरूरी थी. उन्हें विश्वासथा कि कोई न कोई इस व्यक्ति की गुमशुदगी के लिए जरूर आएगा. अपनी ओर से सोलंकी ने आसपास के थानों में उस व्यक्ति के शव का फोटो वाट्सऐप से भेज कर उस की गुमशुदगी दर्ज होने के बारे में पूछा तो पता चला कि उन के यहां उस हुलिए के शख्स की गुमशुदगी दर्ज नहीं थी.
2 दिन बीत गए. प्रवीण सोलंकी उस वक्त ज्यादा परेशान हो गए, जब उन की मेज पर उस व्यक्ति की पोस्टमार्टम रिपोर्ट पहुंची. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बताया कि उस की हत्या गला दबा कर की गई थी. हत्या करने से पहले उसे शराब में नशे की गोलियां भी मिला कर दी गई थीं. एसएचओ अभी तक यही मान कर चल रहे थे कि वह व्यक्ति नशे में रेलवे ट्रैक पर आ गया था, किसी ट्रेन की चपेट में वह आया तो हाथ कट गया, वह बेहोश हो गया. अधिक खून बहा जिस से उस की मौत हो गई. लेकिन उस की पोस्टमार्टम रिपोर्ट से कहानी दूसरी ही सामने आई.
यह दुर्घटना नहीं, हत्या की सोचीसमझी साजिश थी. रात के अंधेरे में हत्यारा यह नहीं देख पाया कि उस ने उसे ट्रैक पर डाला है या साइड में. साइड में लाश होने की वजह से उस का एक हाथ ही कटा, पूरा शरीर नहीं. पुलिस ने अज्ञात हत्यारे के खिलाफ भादंवि की धारा 302, 201 और 120बी के तहत मामला दर्ज कर लिया.
एसपी (ग्रामीण) एस. आनंद ने इस मामले के खुलासे के लिए अपर पुलिस अधीक्षक संजीव कुमार वाजपेयी के निर्देशन में थाना जलालाबाद के एसएचओ प्रवीण सोलंकी को यह केस हल करने के लिए नियुक्त कर दिया. उन के नेतृत्व में एक टीम गठित कर दी गई, जिस में इंसपेक्टर चमन सिंह, खालिक खान, कांस्टेबल अंकित, सोनवीर, आशीष, विपिन कुमार, दीपेंद्र और सुमित कुमार को शामिल किया गया.
लाश की हो गई शिनाख्त…
2 दिन बीत गए, लेकिन उस अज्ञात लाश की शिनाख्त नहीं हो सकी थी. जब तक उस की शिनाख्त नहीं होती, जांच आगे नहीं बढ़ सकती थी. एसएचओ ने उस व्यक्ति की लाश के फोटो आसपास के गांव के आनेजाने वाले रास्तों पर चिपकवा दिए थे. उन की यह युक्ति काम कर गई. तीसरे दिन ही सुबह मोहल्ला गोसनगर निवासी कमलेश्वर सिंह ठाकुर अपने बेटे की तलाश में थाना जलालाबाद आ गए. वह काफी घबराए हुए थे.
एसएचओ के सामने आते ही कमलेश्वर सिंह रो देने वाले स्वर में बोले, ‘‘साहब, मैं लाश का फोटो देख कर यहां दौड़ा चला आया हूं. साहब, मेरा बेटा सुजीत 22 जनवरी, 2023 से लापता है. जो पोस्टर में लाश की फोटो लगाई गई है, वह मेरे बेटे सुजीत से मिलती है.’’
“हम ने लाश को मोर्चरी में रखवा रखा है, आप पहले लाश देख लीजिए. कई बार फोटो देख कर आंखें धोखा भी खा जाती हैं.’’ एसएचओ सोलंकी ने कहा और कमलेश्वर सिंह को कांस्टेबल अंकित के साथ मोर्चरी भेज दिया. मोर्चरी में जो लाश रखी गई थी, कमलेश्वर सिंह ने उस की पुष्टि अपने बेटे सुजीत के रूप में कर ली. लाश देख कर कमलेश्वर रोने लगे. सांत्वना देने के बाद कांस्टेबल अंकित उन्हें वापस थाने में ले आया. लाश की शिनाख्त हो जाने के बाद एसएचओ ने चैन की सांस ली. कमलेश्वर उस समय भी रो रहे थे.
बहू पर जताया हत्या का शक…
एसएचओ सोलंकी ने उन्हें पानी पीने को दिया. जब वह पानी पी चुके तो एसएचओ ने गंभीर स्वर में कहा, ‘‘मुझे आप के बेटे सुजीत की मौत का गहरा दुख है. उस की लाश हमें फरीदपुर के गांव पचोली के फाटक के पास रेलवे लाइन पर मिली थी.
क्या आप बताएंगे, सुजीत वहां क्या करने गया था?’’
कमलेश्वर सुन कर रुआंसे स्वर में बोले, ‘‘मेरे बेटे का पचोली गांव से कोई संबंध नहीं था साहब. हत्यारों ने उसे मार कर वहां रेलवे लाइन पर फेंका होगा.’’
“मुझे भी ऐसा ही शक है.’’ सोलंकी सिर हिला कर बोले.
“क्या आप को किसी पर शक है?’’
“हां साहब, मुझे इरफान और अपनी दोनों बहुओं पर शक है. मेरी छोटी बहू विमला अपने पति सुजीत को पसंद नहीं करती थी. तांत्रिक इरफान मेरी बड़ी बहू संगीता से अच्छी तरह परिचित है. वह तंत्रमंत्र जानता है. बड़ी बहू संगीता ने उसे कई बार घर बुला कर अपने पति अजीत और देवर सुजीत को वश में करने के लिए इरफान से तांत्रिक क्रियाएं करवाई थीं. 22 जनवरी, 2023 को इरफान के बुलाने पर ही सुजीत घर से गया था, वह वापस नहीं लौटा. लौटा है तो लाश के रूप में.’’ कह कर कमलेश्वर सुबकने लगे.
अपनी मां के गिर कर जख्मी होने और पड़ोसियों के कहने पर भी उन के उपचार में अनदेखी करने के संबंध में पूछे जाने पर रिंपल ने पुलिस को बताया, ‘‘मैं घबरा गई थी, क्योंकि मां के गिरने के कारण कमरे में जातेजाते ही उस की सांस चलनी बंद हो गई थी. लेकिन मैं ने सोचा कि शायद ऐसा गिरने के कारण हुआ होगा. रिश्तेदार मुझे इस के लिए दोषी ठहराएंगे, इसलिए जल्दबाजी में मैं ने उन्हें कुछ नहीं बताया. कुछ समय बाद ही मुझे पता चल गया कि वह मर चुकी है. फिर मैं ने लाश को ठिकाने लगाने का फैसला किया.’’
गूगल से मिली लाश के टुकड़े करने की जानकारी…
पुलिस द्वारा वीणा के मारे जाने की बात पूछे जाने पर रिंपल बारबार एक ही रट लगाती रही कि उस ने अपनी मां को नहीं मारा. वह जांच की शुरुआत के बाद से ही इस पर अडिग बनी हुई थी. उस का कहना था कि 27 दिसंबर, 2022 की सुबह जब उस की मां गिर गई थीं, तब वह सो रही थी. उठने के बाद जब मां उसे घर पर नहीं दिखीं, तब वह उन्हें देखने गई, उन्हें सीढिय़ों पर गिरा देखा था. इस तरह छानबीन और पूछताछ के बाद पुलिस इस नतीजे पर नहीं पहुंच पाई थी कि वीणा जैन की मौत दुर्घटनावश गिरने से हुई थी या रिंपल ने ही उन्हें धक्का दे कर गिरा दिया था. पुलिस के लिए यह जांच कर यह साबित करना कठिन था. कारण इस का कोई गवाह नहीं मिल पाया था.
लाश के टुकड़े किए जाने के बारे में पुलिस ने रिंपल से सख्ती के साथ पूछताछ की. इस पर रिंपल ने बताया कि उस ने अपनी मां के शरीर के टुकड़े करने के लिए गूगल की मदद ली थी. इस के बाद दुर्गंध मिटाने के लिए उस ने एयर फ्रैशनर, 100 बोतल परफ्यूम, चाय पत्ती और फिनाइल का इस्तेमाल किया था. वह लालबाग मार्केट से ही एक इलैक्ट्रिक मार्बल कटर भी खरीद लाई थी. पुलिस के मुताबिक, उस ने मार्बल कटर, चाकू और हंसिया से मां के शरीर के टुकड़े कर दिए. इस के बारे में उस ने जो कुछ बताया, वह काफी रोंगटे खड़े करने जैसा ही है.
बेदर्द बेटी रिंपल ने पहले अपनी मां की लाश के हाथों को शरीर से अलग किया. उस के बाद पैर और फिर जांघें काटीं. उस के बाद उस ने सिर धड़ से अलग किया और धड़ को एक बोरी में भर दिया. उस बोरी को उस ने अलमारी के अंदर रख दिया था. रिंपल की इन बातों को सुन कर कोई नहीं कह सकता कि वह बेटी है या कसाई. पड़ोसियों तक को दुर्गंध नहीं पहुंचे, इस के लिए एयर फ्रैशनर, चाय पत्ती और फिनाइल तक का इस्तेमाल किया.
रिंपल के इस बयान पर पुलिस यह मानने को तैयार नहीं थी कि उस ने अकेले इस वारदात को अंजाम दिया है. पुलिस को शक था कि जरूर उस ने कई लोगों की मदद ली होगी. हालांकि रिंपल ने अपना सारा पैसा काटने वाली मशीन पर ही खर्च कर दिया था. इस कारण वह चाल के ग्राउंड फ्लोर पर श्रीसाईं फूड सेंटर से उधार पर खाने का सामान मंगवाने लगी थी. इस की पुष्टि दुकानदार के वाट्सएप मैसेज से हुई.
पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद पुलिस जांच इस नतीजे पर पहुंची कि वीणा की मौत 27 दिसंबर, 2022 को ही हो गई थी. इस की डीसीपी (जोन 4) डा. प्रवीण मुंधे ने सभी जांच और बयानों के आधार पर पुष्टि की. फिर भी पुलिस को इस की पुष्टि करने वाले और सबूत नहीं मिले. यह भी पता नहीं चल पाया कि रिंपल को कटर और चाकू की सप्लाई किस ने की थी. पुलिस की नजर उस संदिग्ध पर भी गई, जो संभवत: रिंपल का बौयफ्रैंड था और लगातार उस के संपर्क में था. लाश ठिकाने लगाने का नहीं मिला मौका
उस का नाम बौबी अमजद अली (27) है. उस के बारे में पुलिस को पहले ही मालूम हो चुका था कि वह लालबाग में एक सैंडविच स्टाल चलाता है, लेकिन लखनऊ का रहने वाला था. वह 7 जनवरी को मुंबई से अपने होमटाउन चला गया था. उस की 7 मार्च, 2023 तक फोन काल के माध्यम से रिंपल से बातचीत होती रहती थी. कालाचौकी पुलिस 16 मार्च, 2023 को उसे यूपी से पकड़ कर मुंबई ले आई. उस से गहन पूछताछ के बाद उस ने स्वीकार लिया कि रिंपल की मां की लाश को ठिकाने लगाने के लिए छोटेछोटे टुकड़े बनाने में उस ने मदद की थी.
इस के बावजूद रिंपल लाश को ठिकाने लगाने में सफल नहीं हो पाई. क्योंकि चहलपहल भरी उस पुरानी चाल में सैंकड़ों परिवार रहते हैं और यह ठीक मुख्य सडक़ पर स्थित है. इस कारण चाल में और उस के आसपास हमेशा चहलपहल बनी रहती है. वहां आधी रात को ही थोड़ा सन्नाटा होता है, लेकिन सुबह 4 बजे ही चाल के बाहर चाय की दुकान खुल जाती है. यही कारण है कि रिंपल पकड़े जाने के भय से लाश ठिकाने लगाने के लिए मौका ढूंढती रह गई. आसपास के लोगों ने जब उस से मां के नहीं दिखाई देने के बारे में पूछा, तब उस ने मां के कानपुर चले जाने की बात बता दी.
हालांकि हैवान बेटी रिंपल के लिए मां की मौत और घर में ही लाश को छिपा कर रखना आसान नहीं था. उस की स्थिति विक्षिप्त जैसी होने लगी थी. उसे हमेशा यह डर सताता रहता था कि उसी इलाके में रहने वाले रिश्तेदार मिलने के लिए किसी भी समय आ सकते थे. पड़ोसियों ने पुलिस को पूछताछ में बताया कि रिंपल शाम को आम रास्ते से हट कर टहलती थी. अपना फोन कान से लगाए रहती थी, ताकि उसे लोग यही समझें कि वह अपनी मां से बात कर रही है.
इस हत्याकांड के पीछे का जो कारण सामने आया वह था मांबेटी के बीच अकसर होने वाली कहासुनी. वह मां से इस बात को ले कर अकसर झगड़ पड़ती थी कि उस के एचआईवी पीडि़त होने के कारण ही उसे ताने सुनने पड़ते हैं. लोग उसे एड्स पीडि़ता की बेटी के रूप में जानते हैं. यह उसे बहुत बुरा लगता था. वह एक तरह से सामाजिक कलंक का शिकार थी. यही ताना रिंपल अपनी मां को भी मारती रहती थी. वह अपनी मां को परिवार की एक कलंक औरत कहती थी. इस कारण मां के साथ उस के संबंध हमेशा तनावपूर्ण बने हुए थे.
वीणा के पति प्रकाश जैन की 2005 में एचआईवी पाजिटिव के बाद मृत्यु हो गई थी. जब वीणा परिवार के साथ विरार के पालघर में रहती थी. उस के बाद से ही सुरेश पौरवाल को कई बार मां और बेटी के बीच हस्तक्षेप करना पड़ा था. वह उन की देखभाल कर रहे थे. उन्हें पैसे और रहने के लिए जगह का इंतजाम कर दिया था. पुलिस ने जांच पूरी करने के बाद रिंपल को सेवरी में मैट्रोपोलिटन मजिस्ट्रैट की अदालत में 20 मार्च, 2023 को एस.एस. घरे के सामने पेश किया गया. वहां भी रिंपल वही बात दोहराती रही कि उस ने मां को नहीं मारा है, लेकिन क्राइम पैट्रोल देख कर लाश को ठिकाने लगाने का आइडिया लिया, जबकि यूट्यूब पर शव को सड़ाने का तरीका सीखा. कोर्ट से उसे और उस के प्रेमी बौबी अमजद अली को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.
विधवा वीणा जैन 55 साल की थीं. वह अपनी 24 वर्षीया बेटी रिंपल जैन के साथ मुंबई के लालबाग इलाके के पेरू कंपाउंड इब्राहिम कासिम चाल में रहती थीं. कालाचौकी थाना क्षेत्र में स्थित इस पुरानी चाल में छोटेछोटे कमरे बने थे. इलाके में रात के कुछ घंटों को छोड़ कर हमेशा आवाजाही बनी रहती है. दोनों वहीं पर बीते 8 साल से रह रही थीं. घर का खर्च उस के बड़े भाई सुरेश कुमार पौरवाल ने उठा रखा था. सुरेश अपने परिवार के साथ दूसरे इलाके में रहते थे.
उन्होंने ही वीणा के पति की मौत हो जाने के बाद छोटे से मकान में मांबेटी को अलग से रहने का इंतजाम किया था. इस की एक खास वजह थी. बताते हैं कि वीणा के पति एचआईवी पाजिटिव थे. इस से वीणा भी प्रभावित थीं. जो भी हो, वह सुरेश और बेटी रिंपल की देखरेख में थीं. सुरेश बीचबीच में उन से मिलने आते रहते थे, लेकिन फोन पर बहन या भांजी से रोजाना कम से कम एक बार तो बात जरूर कर लिया करते थे. बीचबीच में उन के बच्चे भी अपनी बुआ से मिल कर हालसमाचार ले लिया करते थे.
सब कुछ ठीकठाक चल रहा था, लेकिन बीते 3 माह से सुरेश अपनी बहन की सेहत को ले कर चिंतित और परेशान चल रहे थे. कारण, उन की वीणा से फोन पर भी बात नहीं हो पा रही थी. वह 2-3 बार हालसमाचार लेने के लिए उन के घर पर भी गए थे, लेकिन बहन से नहीं मिल पाए. जबकि उन्हें जानकारी मिली थी कि वह अपने कमरे में जाते वक्त सीढिय़ों से गिर पड़ी थीं और उन्हें थोड़ी चोट भी लग गई थी. इस बारे में उन्हें फोन पर भांजी रिंपल ने ही बताया था. साथ ही उस ने अपने मामा से कहा था कि चिंता की कोई बात नहीं है, मां की सेहत में सुधार है. वह उन्हें नियमित दवाइयां दे रही है. फिर भी सुरेश अपनी बीमार बहन को देखने के लिए बेचैन हो गए थे.
वह कई बार उस के घर गए, लेकिन उन्हें कभी घर का दरवाजा बाहर से बंद मिला तो कभी भांजी ने उन्हें दरवाजे के भीतर से ही यह कह कर वापस लौटा दिया कि मां अभी दवाई खा कर सो रही हैं या बाजार या फिर सत्संग आदि में गई हुई हैं.
3 महीने से नहीं हो पाई थी बहन से बात…
इस तरह से जब 3 माह होने को आए तब सुरेश ने अपने छोटे बेटे को लालबाग भेजा. वह 14 मार्च, 2023 को अपनी बुआ से मिलने उन के घर गया. दरवाजे के बाहर लगे कालबेल का स्विच दबाया तो कुछ देर तक अंदर से कोई आवाज नहीं आई. तब उस ने कुंडी खटखटाई. कुंडी के 2-3 बार खडक़ाने पर भी जब दरवाजा नहीं खुला, तब उस ने कुंडी तेजी से खडक़ानी शुरू की. इस के बाद रिंपल ने थोड़ा दरवाजा खोला. बाहर से रिंपल का सिर्फ आधा चेहरा ही दिख रहा था. बात करने में सहूलियत हो, इस के लिए वह एक सीढ़ी नीचे उतर आया.
“क्या बात है, कौन है? क्यों जोरजोर से कुंडी खटका रहे हो?’’ रिंपल ने भीतर से ही झांका और नाराज होती हुई बेरुखी के साथ बोली.
“दीदी, मैं हूं मैं. सुरेश पौरवाल का बेटा… आप का छोटा भाई दीदी.’’ किशोर उम्र का लडक़ा एक सांस में बोल गया.
“हांहां, तो क्या है? पहचान लिया, बोलो! जल्दी बताओ क्या बात है?’’ रिंपल रूखे अंदाज में बोली, लेकिन पूरा दरवाजा नहीं खोला.
“दीदी, बुआजी से मिलना है. उन को कुछ सामान देना है. पापा ने देने को बोला है,’’ लडक़ा बोला.
“क्यों मिलना है? क्या देना है? क्या करना है? पापा ने भेजा है…इसलिए!’’ रिंपल बोली.
“हां दीदी,’’ लडक़ा मासूमियत के साथ बोला.
“तुझे और कोई काम नहीं है क्या? स्कूल नहीं जाना है? यही काम रह गया है तुम्हारा? बुआजी से मिलना है… अरे मैं हूं न
यहां.’’ रिंपल दरवाजे के भीतर से बोलती रही. लडक़ा बाहर सकपकाया हाथ में एक थैला लिए खड़ा रहा. रिंपल ने अपनी बात पूरी की, ‘‘चलो, भाग जाओ यहां से. बुआजी अभी सो रही हैं. जा कर पापा को बता देना. मैं ऐसे ही बहुत परेशान हूं और तुम लोग मिलना है… मिलना है, कह कर परेशान करने के लिए चले आते हो.’’ कहती हुई रिंपल ने भीतर से दरवाजा बंद कर लिया. फटाक से कुंडी लगाए जाने की तेज आवाज बाहर तक सुनाई दी.
लडक़ा कुछ देर वहीं खड़ा रहा. आसपास लोगों को आताजाता देखता रहा. किस से क्या कहे, उलझन में था. फिर उस ने अपने पिता को फोन लगा दिया. उस की रिंपल से जिस तरह की बात हुई थी, उस ने सब कुछ ज्यों का त्यों बता दिया. जल्द ही पिता सुरेश भी वहां आ गए. उन्होंने भी दरवाजा खटखटाया. काफी देर बार रिंपल ने पहले की तरह ही थोड़ा सा दरवाजा खोला. भीतर से ही झांक कर डपटने के अंदाज में बोली, ‘‘फिर आ गया, यहीं बैठा है अभी तक? गया नहीं?’’ इसी बीच उस की नजर मामा पर पड़ी. वह बोलतेबोलते अचानक रुक गई.
“क्यों क्या हुआ… बच्चे को क्यों डांट रही हो? और पूरा दरवाजा क्यों नहीं खोल रही?’’ सुरेश भी उसे डांटने के अंदाज में बोले. मामा को डांटते देख कर वह सकपका गई. बोली, ‘‘जी…जी मामाजी, ऐसी कोई बात नहीं है? मां यहां है ही नहीं. वह तो 2 दिन हुए कानपुर चली गई है. पैरों की मालिश करवाने के लिए. मैं आप को बताने ही वाली थी. उन को हलका सा पैरालाइसिस का अटैक आ गया था.’’
“बेटा, इतनी बड़ी बात हो गई और मुझे अब बता रही हो, वह भी जब हम लोग मां से मिलने आए हैं? बहुत गैरजिम्मेदार हो. मैं तो पहले भी कई बार आया और तुम ने कुछ न कुछ बात बता कर दरवाजे से ही लौटा दिया. फोन पर भी बात नहीं करवाई, हमेशा बहाने बना देती हो. आखिर चल क्या रहा है तुम्हारे दिमाग में…’’ सुरेश बोले जा रहे थे और रिंपल भीतर से सुनती जा रही थी. उस के मुंह से सिर्फ ‘हां…हूं’ ही निकल रहा था.
इसी बीच सुरेश को कुछ सड़ांध की दुर्गंध महसूस हुई. उन्होंने तुरंत पूछा, ‘‘भीतर से ये सड़ी बदबू कैसी आ रही है? घर की साफसफाई ठीक से नहीं करती हो क्या?’’
रिंपल कुछ बोलती इस से पहले ही वहां खड़ा लडक़ा बोल पड़ा, ‘‘किसी मरे जानवर चूहे या बिल्ली की सड़ी दुर्गंध लगती है, भीतर देखना होगा.’’
“हांहां बेटा, चलो भीतर ही चल कर देखते हैं.’’ सुरेश बोलते हुए दरवाजे तक पहुंचने के लिए सीढिय़ां चढऩे लगे. तभी रिंपल ने दरवाजा खटाक से बंद कर लिया.
क्रमशः
राकेश ड्यूटी जाता तो कृष्ण आ जाता. कईकई घंटे दोनों बंद दरवाजे के पीछे रहते. उस दिन भी वह कृष्ण के साथ कमरे में बंद हो कर वासना का अनैतिक खेल खेल रही थी कि पति राकेश तबीयत खराब होने पर घर आ गया. पूजा ने कृष्ण को भाग निकलने में पूरी होशियारी दिखाई. यही नहीं, राकेश के आगे टेसुए बहा कर उस का गुस्सा भी शांत कर दिया. राकेश को लगा, उस ने खामखां पूजा पर शक किया, वह तो नेक, शरीफ और पतिव्रता है. वह शांत मन से ड्यूटी पर जाता रहा.
लेकिन पूजा और कृष्ण कुमार मीणा का प्रेम प्रसंग लोगों की नजरों से छिप न सका. एक दिन किसी जानकार ने उसे बताया कि उस की पत्नी पूजा किसी युवक के साथ इश्क लड़ाती घूम रही है, उस ने 2-3 बार पूजा को पार्क और एक होटल में देखा है. यह सुन कर राकेश को लगा कि जैसे किसी ने उसे बीच चौराहे पर नंगा कर के जूते मारे हों. वह भारी कदमों से शराब के ठेके पर गया और शराब पी कर घर आया.
उस रात उस ने पूजा की जम कर धुनाई कर दी. वह पूरी रात पूछता रहा कि वह किस के साथ पार्कों और होटलों में घूमती है. लेकिन पूजा ने अपने आशिक का नाम नहीं बताया. उस दिन के बाद से यह रोज का किस्सा बन गया. उन में रोज पूजा के तथाकथित प्रेमी को ले कर कलह होने लगी. राकेश ने पूजा का घर से निकलना भी बंद कर दिया. रोजरोज के झगड़े ने पूजा के मन में पति के प्रति नफरत पैदा कर दी.
चाचा ने लिखाई रिपोर्ट…
थाना शिवदासपुर (जयपुर दक्षिण) के एसएचओ हरिपाल सिंह के पास 25 फरवरी, 2023 को 2 व्यक्ति आए. इन में एक व्यक्ति बाबूलाल मीणा, 53 साल और दूसरा सीताराम मीणा, 34 साल था. दोनों गांव झुंझनूं, थाना वौली, जिला सवाई माधोपुर के रहने वाले थे. बाबूलाल ने एक प्रार्थनापत्र एसएचओ को दिया. एसएचओ ने वह प्रार्थनापत्र पढ़ा तो वह गंभीर हो गए. उन्होंने बाबूलाल मीणा के चेहरे पर नजरें गड़ा कर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, ‘‘आप का भतीजा राकेश मीणा 5 फरवरी से लापता है और आप अब थाने आ रहे हैं?’’
“साहब, मुझे गांव में 2 दिन पहले ही अपने भतीजे राकेश के गुम हो जाने की बात पता चली. मैं शिवदासपुर में अपने भतीजे के घर आया और बहू पूजा उर्फ फूला से राकेश के बारे में पूछा तो उस ने बताया कि वह कंपनी के काम से कहीं गए हैं. मैं ने कंपनी में पूछताछ की तो वहां से बताया गया कि 20 दिन से राकेश ड्यूटी पर नहीं आ रहा है.’’
“इस का मतलब आप की बहू पूजा झूठ बोल रही है.’’
“जी साहब.’’ बाबूलाल ने सिर हिलाया, ‘‘बहू का कृष्ण कुमार मीणा नाम के युवक से अवैध रिश्ता बना हुआ है. राकेश और पूजा के बीच इसी बात को ले कर झगड़ा चल रहा था. मुझे शक है कि पूजा ने ही कृष्ण कुमार के द्वारा मेरे भतीजे राकेश की हत्या कर दी है और उस की लाश किसी कुएं में डलवा दी है. आप आसपास के कुओं में तलाश कीजिए.’’
“आप को पूजा और कृष्ण के बीच अवैध संबंध होने की बात किस ने बताई है? और आप को यह क्यों शक है कि राकेश की लाश किसी कुएं में ही है?’’
“साहब, 5 फरवरी को मेरा भतीजा झुंझनूं गांव में मुझ से मिलने आया था, उस ने बहू पूजा की कृष्ण कुमार से अवैध रिश्ते की बात बता कर यह भी बताया था कि पूजा उसे मरवा कर किसी कुएं में फेंकने की बात करती है.’’
“ठीक है, मैं जांच करवाता हूं.’’ एसएचओ हरिपाल सिंह ने कहा और एसआई कैलाश चंद को बुला कर बाबूलाल मीणा की शिकायत दर्ज करने तथा पूजा को पकड़ कर थाने लाने का आदेश दिया.
पुलिस ने बाबूलाल मीणा की तरफ से भादंवि की धारा 364, 302, 201, 120बी के तहत रिपोर्ट दर्ज कर ली. पूजा को वसुंधरा कुटुंब सोसायटी के फ्लैट से गिरफ्तार कर के एसआई कैलाश चंद थाने ले लाए और उस से सख्ती से उस के पति राकेश मीणा के बारे में पूछताछ की तो उस ने बड़ी आसानी से बता दिया कि कृष्ण कुमार मीणा ने राकेश मीणा की हत्या कर के लाश मोहनपुरा में चंदलाई रोड स्थित कुएं में डाल दी है.
कुएं में मिली लाश…
जयपुर (शिवदासपुर) एसएचओ हरिपाल सिंह पुलिस टीम ले कर चंदलोई रोड पहुंच गए. उन के साथ राकेश मीणा के चाचा बाबूलाल और गांव से साथ में आया सीताराम भी था. थाने से चलते वक्त एसएचओ ने उच्च अधिकारियों को भी घटना से अवगत कर दिया था.
एडिशनल डीसीपी भरतलाल मीणा (जयपुर दक्षिण) एवं डा. संध्या यादव के अलावा एसएसपी चाकसू फोरैंसिक टीम को ले कर चंदलोई रोड स्थित कुएं पर पहुंच गए. कुआं सूखा हुआ था, उस में एक नर कंकाल पड़ा हुआ था. उसे बाहर निकाला गया. बाबूलाल मीणा ने कंकाल के हाथ की घड़ी और अंगूठी से पहचान कर के बताया कि यह शव उन के भतीजे राकेश मीणा का ही है. फोरैंसिक जांच टीम ने उस कंकाल का निरीक्षण किया. इस के बाद उस कंकालनुमा शव को पोस्टमार्टम हेतु महात्मा गांधी अस्पताल सीतापुरा (जयपुर) में भेज दिया गया.
कुएं में राकेश मीणा की लाश मिलने की खबर चारों ओर फैल गई. एडिशनल डीसीपी भरतलाल ने हत्यारे कृष्ण मीणा की गिरफ्तारी के लिए एसआई आशुतोष, कांस्टेबल संदीप, राजेश, जीतसिंह, भरतसिंह, प्रेम राज की एक टीम गठित कर दी. उन्होंने एसीपी (चाकसू) के नेतृत्व में दूसरी टीम में एसएचओ हरिसिंह, एसआई कैलाशचंद, हुसैन अली, हैडकांस्टेबल राजवीर, लोकेश, बन्नालाल और कांस्टेबल कानाराम की शामिल किया. पूजा उर्फ फूला से कृष्ण कुमार के घर का पता पूछ कर उस के घर पर दबिश दी गई, लेकिन वह पूजा के गिरफ्तार होने की भनक पा कर फरार हो गया था.
कृष्ण कुमार मीणा हुआ गिरफ्तार…
पुलिस टीम ने पूजा से कृष्ण का मोबाइल नंबर ले कर उसे सर्विलांस पर लगा दिया. कृष्ण का मोबाइल फोन बंद था, लेकिन जैसे ही उस ने कुछ देर के लिए उसे चालू किया, पुलिस को उस की लोकेशन मिल गई. दोनों टीमों ने उसे उस लोकेशन पर ढूंढ कर गिरफ्तार कर लिया.
थाने में उस से सख्ती से पूछताछ की गई तो उस ने बताया कि पूजा ने परेशान हो कर अपने पति कृष्ण कुमार का मर्डर कराया था. उस ने कहा कि राकेश को ठिकाने लगा दो. इस के बाद कृष्णकुमार ने अपने जानकार दिलखुश मीणा, विजय मीणा और ड्राइवर विजेंद्र उर्फ विजय को राकेश की हत्या करने के लिए राजी किया.
प्लान के मुताबिक, कृष्ण ने 5 फरवरी, 2023 को राकेश को फोन कर के कहा, ‘‘बड़े भाई, मैं पूजा से रिश्ता खत्म करना चाहता हूं और मुझ से जो गलती कर हो चुकी है, उस की माफी मांगने के लिए आप से एक बार मिलना चाहता हूं. आप मोहनपुरा में आ जाएंगे तो अच्छा रहेगा.’’ राकेश ने कृष्ण कुमार की बातों पर विश्वास कर लिया और वह अपनी बाइक से मोहनपुरा आ गया. कृष्ण योजनानुसार अपने साथियों के साथ पहले से वहां मौजूद था. राकेश के पहुंचते ही सभी ने उसे दबोच लिया और गला घोट कर उस की हत्या करने के बाद लाश को चंद्रलोई स्थित कुएं में डाल दी.
कृष्ण कुमार के द्वारा जुर्म कुबूल कर लेने के बाद उस के साथियों को भी पुलिस टीम ने गिरफ्तार कर लिया. कृष्ण कुमार मीणा से राकेश मीणा की बाइक आरजे-25एस पी6942 भी पुलिस ने बरामद कर ली. पूजा सहित हत्या में शामिल सभी आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से सभी को जेल भेज दिया गया.
पोस्टमार्टम के बाद राकेश के शव को उस के चाचा बाबूराम मीणा को सौंप दिया गया, जिस का अंतिम संस्कार करने के लिए वह उसे पैतृक गांव झुंझनूं ले कर चले गए. पूजा ने अपने तनिक सुख के लिए एक हंसतेखेलते घर को बरबाद कर दिया था. अब उस की आंखों में पश्चाताप के आंसू थे.
—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित