शक्की शौहर की भयानक करतूत : पत्नी और मासूम बच्चों की बेरहमी से हत्या

सुहागरात के बाद खुल कर नाची मौत – भाग 4

22 जून, 2023 को गाजेबाजे के साथ निकासी हुई और शाम 4 बजे बारात गंगापुरा के लिए रवाना हुई. रात 8 बजे वेदराम व उस के परिजनों ने बारात का स्वागत किया. बारात में शिववीर ने जम कर डांस किया. डीजे की धुन पर दूल्हा दुलहन भी खूब थिरके.

शिववीर वैसे तो खुश था, लेकिन छोटीछोटी बातों को ले कर वह लड़की पक्ष के लोगों से भिड़ जा रहा था. कभी लाइट को ले कर तो कभी पानी को ले कर वह नाराज हो रहा था. घर वालों के समझाने पर वह चुप हो जाता. डीजे बंद होने पर तो वह इतना नाराज हुआ कि वह रात में ही मोटरसाइकिल से घर वापस आ गया.

23 जून की सुबह वेदराम व उस की पत्नी सुषमा ने अपनी लाडो को लाल जोड़े में आंसुओं के बीच विदा किया. दोपहर बाद बारात गोकुलपुरा गांव वापस आ गई. उस के बाद ज्यादातर रिश्तेदार तो चले गए, लेकिन सोनू की बहन प्रियंका, जीजा सौरभ, मामी सुषमा तथा दोस्त दीपक उपाध्याय रुक गए. शाम तक मुंहदिखाई व अन्य रस्मेें होती रहीं.

ढोलक की थाप पर नाचगाना भी हुआ. फिर देर रात तक डीजे पर डांस होता रहा. सोनू, सोनी भी खूब थिरके. दीपक, सौरभ व शिववीर ने भी खूब डांस किया.

क्या हुआ था नशीली कोल्ड ड्रिंक पीने के बाद

रात 12 बजे कर्ज से परेशान शिववीर कोल्ड ड्रिंक लाया. बस यहीं से उस ने अपने मंसूबों को अंजाम देना शुरू कर दिया. उस ने चालाकी से कोल्ड ड्रिंक में नशीली गोलियों का पाउडर मिला दिया. फिर एकएक गिलास सभी को थमा दिया. सभी कोल्ड ड्रिंक पीने लगे. कोल्ड ड्रिंक पीने के दौरान ही सोनी की मां सुषमा की काल आई. सोनी ने काल रिसीव की और बताया कि ससुराल में सब ठीक है. अभी चंद मिनट पहले ही डांस बंद हुआ है. जेठजी (शिववीर) कोल्ड ड्रिंक ले कर आए हैं, हम सभी पी रहे हैं.

इधर कोल्ड ड्रिंक पीने के बाद सौरभ, भुल्लन व दोस्त दीपक उपाध्याय आंगन में जा कर लेट गए तथा सोनू की मामी सुषमा, भाभी डौली, बहन प्रियंका तथा मां शारदा देवी बरामदे में सो गईं. बरामदे के पास ही सुभाषचंद्र खटिया पर लेट गए. सोनू व उस की पत्नी सोनी सुहागरात मनाने छत पर बने कमरे में जा कर लेट गए. उन्होंने जीने का दरवाजा अंदर से बंद कर लिया.

नशीली कोल्ड ड्रिंक पी कर कुछ देर बाद सभी सो गए. लेकिन शिववीर की आंखों से नींद कोसों दूर थी. रात 3 बजे के बाद वह कमरे में आया. उस ने छिपा कर रखा तमंचा निकाला, फिर लोड कर कमर में खोंस लिया.

इस के बाद फरसा ले कर कमरे से बाहर आया. चूंकि जीने का दरवाजा बंद था, अत: वह दीवार के सहारे सीढ़ी लगा कर छत पर पहुंचा. कमरे के अंदर सोनू व सोनी अस्तव्यस्त हालत में लेटे थे. शायद वे सुहागरात मनाने के बाद सुख की नींद सो रहे थे. शिववीर ने एक घृणाभरी नजर दोनों पर डाली फिर फरसे से गले पर वार कर दोनों को मार डाला.

Ghatna Sthan Par Pada Nav-Dampati Ke Shav

घटनास्थल पर पड़े नव दंपति के शव

नवदंपति की हत्या करने के बाद शिववीर जीने का दरवाजा खोल कर आंगन में आया. यहां भाई भुल्लन, बहनोई सौरभ व भाई का दोस्त दीपक सो रहा था. शिववीर ने फरसे से गरदन व चेहरे पर बारीबारी से वार कर तीनों को मौत की नींद सुला दिया.

5 हत्याएं करने के बाद शिववीर आंगन से बरामदे में आया. यहां उस ने फावड़े से अपनी पत्नी डौली व मामी सुषमा पर वार किया. डौली का पैर तथा सुषमा का हाथ जख्मी हो गया. वे दोनों चीखीं तो सुभाष, उस की पत्नी शारदा तथा बेटी प्रियंका जाग गईं.

उन तीनों ने शिववीर का रौद्र रूप देखा तो वे कांप उठीं. फिर भी वह उसे पकडऩे दौड़ीं. इसी बीच शिववीर ने फरसे से पिता पर वार कर दिया. लेकिन फरसा घूम जाने से उस की जान बच गई. केवल हाथ में ही मामूली चोट आई.

हिम्मत जुटा कर सुभाष, शारदा व प्रियंका ने शिववीर को पकडऩे का प्रयास किया तो वह मकान के पीछे की ओर भागा. परिवार का कत्ल करने के बाद शिववीर ने कमर में खोंसा तमंचा निकाला और कनपटी से सटा कर फायर कर दिया. फायर की आवाज सुन कर प्रियंका व शारदा वहां पहुंचीं तो शिववीर की मौत हो चुकी थी. मांबेटी तब चीखनेचिल्लाने लगीं.

शारदा व प्रियंका की चीखपुकार सुन कर आसपड़ोस के लोग आ गए. उन्होंने घर के अंदर का खौफनाक मंजर देखा तो सभी की रूह कांप उठी. उस के बाद तो गांव में सनसनी फैल गई. गोकुलपुरा ही नहीं, बल्कि आसपास के गांव के लोग उमड़ पड़े.

पुलिस को सूचना मिली तो आला अधिकारी भी मौके पर आ गए और जांच में जुट गए. प्रिंट और इलैक्ट्रौनिक मीडिया के पत्रकारों का जमावड़ा भी शुरू हो गया.

Deepak Kumar (I.G.)

आईजी दीपक कुमार

पुलिस अधिकारियों ने सब से पहले घायलों को अस्पताल भेजा, फिर जरूरी काररवाई पूरी कर शवों को पोस्टमार्टम हाउस भिजवाया. उस के बाद घटना के संबंध में घर के मुखिया सुभाष से जानकारी हासिल की.

Rajesh Kumar (A.S.P.)

एएसपी राजेश कुमार

पूछताछ के बाद किशनी थाने के एसएचओ अनिल कुमार ने घर के मुखिया सुभाषचंद्र यादव की तहरीर पर बड़े शिववीर के खिलाफ हत्या का मुकदमा तो दर्ज किया, लेकिन आरोपी द्वारा भी आत्महत्या कर लेने से उन्होंने फाइल बंद कर दी.

कथा संकलन तक डौली और सुषमा का इलाज सैफई के अस्पताल में चल रहा था. उन की जान तो बच गई, लेकिन दिल के जख्म शायद ही जीवन में भर सकें.

प्रियंका का सुहाग भाई ने ही उजाड़ दिया. उस के जीवन में अब शायद ही कभी बहार आए. सुभाष यादव व उन की पत्नी शारदा भी पश्चाताप के आंसू बहा रहे थे. उन का कहना था कि जब परिवार ही नष्ट हो गया तो वह जिंदा रह कर क्या करेंगे?

-कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

मौसी के हुस्न का शिकारी

नय अपने दोस्त पिंटू के साथ होटल खोलना चाहता था, इसलिए उसे 15 हजार रुपयों की सख्त जरूरत थी. उस ने पिंटू को पूरा भरोसा दिलाया था कि रुपयों  की व्यवस्था कर लेगा. क्योंकि उसे विश्वास था कि उस की मौसी इंद्रा उसे रुपए दे देंगी. लेकिन मौसी ने तो रुपए देने से साफ मना कर दिया था. यह बात विनय को बड़ी नागवार लगी थी, क्योंकि मौसी के इस तरह मना कर देने से दोस्त के सामने उस की बड़ी बेइज्जती हुई थी.

इस बात को ले कर पिंटू अकसर उस की हंसी उड़ाने लगा था. मजबूरी में विनय खून का घूंट पी कर रह जाता था. तब उसे मौसी पर बहुत गुस्सा आता था. धीरेधीरे उस का यह गुस्सा इस कदर बढ़ता गया कि उस ने धोखा देने वाली मौसी को सबक सिखाने का निश्चय कर लिया. वह उस की हत्या कर के उस के घर में रखी नकदी और गहने लूट लेना चाहता था.

हमेशा की तरह 27 जनवरी को जब पिंटू ने विनय को चिढ़ाने के लिए रुपयों के बारे में पूछा तो उस ने गंभीर हो कर कहा, ‘‘चिंता मत करो दोस्त, अब बहुत जल्द रुपयों की व्यवस्था हो जाएगी.’’

‘‘वह कैसे, मौसी रुपए देने को तैयार हो गई क्या? पहले तो उस ने मना कर दिया था, अब कैसे राजी हो गई?’’ पिंटू ने उसे जलाने के लिए मुसकराते हुए कहा.

‘‘भई सीधी अंगुली से घी न निकले तो अंगुली टेढ़ी कर देनी चाहिए. मौसी सीधे रुपए नहीं दे रही न, देखो अब मैं कैसे उस से रुपए लेता हूं.’’ विनय ने कहा.

‘‘भई, जरा हमें भी तो बता मौसी से कैसे रुपए लेगा?’’ पिंटू ने हैरानी से पूछा.

‘‘मौसी के पास काफी गहने हैं. घर खर्च के लिए 10-5 हजार रुपए हमेशा घर में रखे ही रहते हैं. इस के अलावा आलोक भैया बिजनैस करते हैं, उन के भी कुछ न कुछ रुपए रखे ही रहते होंगे. मैं सोच रहा हूं मौसी की हत्या कर के उन के गहने और रुपए हथिया लूं.’’ विनय ने कहा, ‘‘अब तू बता, तेरा क्या इरादा है? इस मामले में तू मेरा साथ देगा या नहीं?’’

‘‘यार जिंदगी का सवाल है. इसलिए मैं तेरा साथ देने को तैयरा हूं. लेकिन पकड़े गए तो जिंदगी बनने के बजाय बिगड़ जाएगी.’’ पिंटू ने चिंता व्यक्त की.

‘‘मैं ने ऐसी योजना बना रखी है कि किसी को पता ही नहीं चलेगा. फिर मौसी पूरे दिन घर में अकेली ही रहती हैं. हम अपना काम कर के आराम से चुपचाप चले जाएंगे. बस इतना ध्यान रखना होगा कि कोई पड़ोसी न देखने पाए.’’ विनय ने कहा.

पिंटू ने हामी भर दी तो विनय ने उसे अपनी योजना समझा कर अगले दिन यानी 28 जनवरी को ही उसे अंजाम देने की तैयारी कर ली. अगले दिन सुबह ही पिंटू विनय के घर पहुंच गया. दोनों ट्रक से उन्नाव के लिए रवाना हो गए. विनय की मौसी का घर उन्नाव बाईपास के पूरननगर में था. इसलिए दोनों बाईपास पर ही उतर गए. वहां से दोनों पैदल ही चल पड़े.

जिस समय विनय पिंटू के साथ अपनी मौसी इंद्रा के घर पहुंचा, उस के मौसा प्रकाशचंद्र श्रीवास्तव अपनी ड्यूटी पर राजकीय आयुर्वेदिक औषधालय जा चुके थे तो मौसेरा भाई आलोक लुकइयाखेड़ा स्थित अपनी कंप्यूटर की दुकान पर. इंद्रा घर में अकेली ही थी. विनय ने घंटी बजाई तो उन्होंने झट दरवाजा खोल दिया.

विनय और पिंटू को देख कर इंद्रा ने मुसकराते हुए कहा, ‘‘आओ, अंदर आओ. आज बहुत दिनों बाद आए हो?’’

‘‘हां, आप से मिले बहुत दिन हो गए थे, इसीलिए सोचा कि चलो आज मौसी से मिल आते हैं.’’ कहते हुए विनय अंदर आ गया.

‘‘बहुत अच्छा किया. इधर कई दिनों से तुम्हारी याद आ रही थी.’’ इंद्रा ने विनय के कंधे पर हाथ रख कर सोफे पर बैठते हुए कहा, ‘‘तुम दोनों बैठो, मैं चाय बना कर लाती हूं.’’

इतना कह कर इंद्रा रसोई में चाय बनाने चली गई तो विनय और पिंटू अपनी योजना को अंजाम देने के बारे में खुसुरफुसुर करने लगे. विनय ने टीवी की आवाज तेज कर दी, जिस से हत्या करते समय मौसी चीखे भी तो उस की आवाज उसी में दब जाए. इंद्रा ने चाय और नमकीन ला कर रखी तो सभी खानेपीने लगे.

चाय पीते हुए विनय ने कहा, ‘‘मौसी, मैं आप से होटल खोलने के लिए 15 हजार रुपए कब से मांग रहा हूं. लेकिन आप दे नहीं रहीं हैं. आप के अलावा कोई दूसरा मेरी मदद नहीं कर सकता, इसलिए आप कैसे भी रुपयों की व्यवस्था कर दीजिए.’’

‘‘मैं तुम्हें न जाने कितने रुपए दे चुकी हूं, इस का तुम्हारे पास कोई हिसाब है. जब देखो, तब तुम रुपए लेने आ जाते हो,’’ इंद्रा ने नाराज हो कर कहा, ‘‘तुम्हारी आदत पड़ गई है, मुझ से रुपए ऐंठने की. लेकिन अब मैं तुम्हें एक कौड़ी नहीं दूंगी. अगर तुम ने ज्यादा परेशान किया तो तुम्हारी शिकायत तुम्हारे मौसा से कर दूंगी.’’

मौसी की बातें सुन कर विनय गुस्से से पागल हो उठा. वह तो पिंटू के साथ उस की हत्या की योजना बना कर ही आया था, इसलिए फुरती से उठा और सामने बैठी मौसी को दबोच कर बोला, ‘‘तू मौसा से मेरी शिकायत करेगी, शिकायत तो तब करेगी, जब जिंदा रहेगी. मैं अभी तुझे जान से मारे देता हूं.’’

कह कर विनय ने अपने गले में लिपटा मफलर निकाला और मौसी के गले में लपेट कर कसने लगा. दबाव से इंद्रा की सांस रुकने लगी तो वह छटपटाने लगी. उस ने बचाव के लिए हाथपैर बहुत मारे, लेकिन गुस्से में पागल विनय फंदे को कसता गया. कुछ देर छटपटाने के बाद इंद्रा का शरीर शिथिल पड़ गया.

विनय को लगा कि मौसी का खेल खत्म हो गया है तो उस ने मफलर छोड़ दिया. उस के मफलर छोड़ते ही इंद्रा लुढ़क गई. विनय के साथ आए पिंटू को लगा कि अगर इंद्रा जिंदा रह गई तो उन का भेद खुल जाएगा. उस के बाद उन्हें जेल की हवा खानी पड़ेगी. यह सोच कर पिंटू ने घर में रखी सिल उठा कर इंद्रा के सिर पर पटक दिया, जिस से उस का सिर फट गया.

इंद्रा की हत्या करने के बाद विनय और पिंटू अलमारी की चाबी ढूंढ़ने लगे. जल्दी ही उन्हें चाबी मिल गई. विनय ने अलमारी खोल कर उस के लौकर में रखे सोने के एक जोड़ी झुमके, सोने की एक जंजीर, अंगूठी, 1 जोड़ी चांदी की पायल निकाल लिए. विनय को अलमारी में उतने रुपए नहीं मिले, जितने कि उसे उम्मीद थी. अलमारी से उसे मात्र 15 सौ रुपए ही मिले. चलते समय उस ने मौसी का मोबाइल भी ले लिया था. घर से निकल कर उन्होंने बाहर से दरवाजे की कुंडी बंद कर दी और भाग गए. घर से बाहर आते ही विनय ने मौसी के मोबाइल का स्विच औफ कर दिया था.

दोपहर को आलोक को कोई काम पड़ा तो उस ने अपनी मम्मी इंद्रा को फोन किया. लेकिन मम्मी के फोन का स्विच औफ था. काफी देर यही हाल रहा तो परेशान हो कर वह घर आ गया. उस ने दरवाजे पर बाहर से कुंडी लगी देखी तो सकते में आ गया. उसे लगा कि शायद मम्मी घर पर नहीं हैं. दरवाजा खोल कर वह घर के अंदर दाखिल हुआ तो खून से सनी मम्मी की लाश देख कर वह चीखने लगा. उस का चीखना सुन कर आसपड़ोस वाले आ गए.

इंद्रा की खून से सनी लाश देख कर पड़ोसियों को समझते देर नहीं लगी कि कोई उस की हत्या कर गया है. सूचना पा कर प्रकाशचंद्र श्रीवास्तव भी आ गए. अलमारी खुली थी और उस में रखे गहने, नकदी और उन की पत्नी का मोबाइल गायब था. लूट और हत्या के इस मामले की जानकारी थाना कोतवाली को दी गई.

एक महिला की हत्या और लूट की सूचना मिलते ही प्रभारी निरीक्षक धर्मेंद्र सिंह रघुवंशी सिपाहियों के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए. उन्होंने डौग स्क्वायड और फोरेंसिक टीम को भी बुला लिया था. सारी काररवाई निपटाने के बाद कोतवाली प्रभारी धर्मेंद्र सिंह रघुवंशी मृतका इंद्रा के बेटे आलोक कुमार श्रीवास्तव को साथ ले कर कोतवाली आ गए, जहां उस की तहरीर पर हत्या और लूट का मुकदमा दर्ज कर लिया गया.

अभियुक्तों तक पहुंचने का पुलिस के पास एक ही सूत्र था, मृतका का मोबाइल. पुलिस ने उसे सर्विलांस पर लगवा दिया. लेकिन मोबाइल का स्विच औफ था, इसलिए उस की लोकेशन नहीं मिल रही थी. पुलिस ने इंद्रा के हत्यारों तक पहुंचने के लिए बहुत हाथपैर मारे, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला.

इस मामले का खुलासा न होते देख पुलिस अधीक्षक रतन कुमार श्रीवास्तव ने अपर पुलिस अधीक्षक रामकिशन यादव और क्षेत्राधिकारी (सदर) मनोज अवस्थी की देखरेख में एक पुलिस टीम गठित की, जिस का नेतृत्व प्रभारी निरीक्षक धर्मेंद्र सिंह रघुवंशी को ही सौंपा गया.

टीम का गठन होते ही संयोग से घटना के लगभग महीने भर बाद इंद्रा के मोबाइल की लोकेशन कानपुर के नौबस्ता की मिल गई. उस नंबर का भी पता चल गया, जो नंबर उस में उपयोग में लाया जा रहा था.

पुलिस टीम ने लोकेशन और नंबर के आधार पर उस आदमी को पकड़ लिया, जिस के पास वह मोबाइल फोन था. पूछताछ में उस ने बताया कि यह मोबाइल फोन उस ने सपई गांव के रहने वाले पिंटू सिंह चंदेल से खरीदा था.

पुलिस को उस आदमी से पिंटू का पता मिल गया था. छापा मार कर पुलिस ने 3 मार्च को पिंटू सिंह चंदेल को उस के घर से गिरफ्तार कर लिया. प्रभारी निरीक्षक धर्मेंद्र सिंह रघुवंशी ने कोतवाली ला कर जब उस से इंद्रा की हत्या के बारे में पूछताछ की तो उस ने बिना किसी हीलाहवाली के स्वीकार कर लिया कि मृतका की बहन के बेटे विनय के साथ मिल कर उस ने इस घटना को अंजाम दिया था.

पिंटू से पूछताछ के बाद पुलिस ने विनय की तलाश में उस के घर छापा मारा. लेकिन वह नहीं मिला. तब पुलिस ने पिंटू को अदालत में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया.

पुलिस विनय श्रीवातस्तव की तलाश में पूरे जोरशोर से लग गई थी, लेकिन पुलिस से बचने के लिए वह छिप गया था. आखिर 13 मार्च को पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर विनय को भी गिरफ्तार कर लिया.

जब उस का दोस्त पकड़ा जा चुका था तो विनय के झूठ बोलने का सवाल ही नहीं था. इसलिए उस ने मौसी की हत्या करने की बात स्वीकार कर ली. इस पूछताछ में उस ने जो कहानी सुनाई, वह हैरान करने वाली थी. क्योंकि विनय के अपनी मां समान ही नहीं, उम्र में दोगुनी से भी ज्यादा मौसी से अवैध संबंध थे. इस तरह अवैध संबंधों की नींव पर टिकी लूट और हत्या की यह कहानी कुछ इस प्रकार थी.

उत्तर प्रदेश के जिला उन्नाव के थाना कोतवाली के मोहल्ला पूरननगर में रहते थे प्रकाशचंद्र श्रीवास्तव. वह राजकीय आयुर्वेदिक औषधालय में वार्डब्वाय थे. उन के परिवार में पत्नी इंद्रा के अलावा बेटा आलोक और बेटी ज्योति थी. पढ़ाई पूरी कर के आलोक ने लुकइयाखेड़ा में कंप्यूटर की दुकान खोल ली थी. ज्योति की भी पढ़ाई पूरी हो गई तो प्रकाशचंद्र ने उस की शादी कर दी थी.

इंद्रा की बड़ी बहन मंजूलता की शादी कानपुर के थाना नौबस्ता के सरस्वतीनगर के रहने वाले अरुणकुमार श्रीवास्तव के साथ हुई थी. अरुण कुमार लोहिया फैक्ट्री में नौकरी करते थे. उन के कुल 3 बेटे थे, विकास, विनय और विनीत. पढ़ाई पूरी होने के बाद विकास ने लिटिल स्टार एंजल स्कूल में नौकरी कर ली थी, तो बीकौम करने के बाद विनय जूते का काम करने लगा था. सब से छोटे विनीत ने बीकौम कर के लैपटौप रिपेयरिंग का काम शुरू कर दिया था. 6 साल पहले अरुण कुमार की मौत हो गई तो घर की सारी जिम्मेदारी मंजूलता पर आ गई थी.

विनय का मन जूते के काम में कम, क्रिकेट खेलने में ज्यादा लगता था. मैच खेलने के चक्कर में ही वह इधरउधर घूमता रहता था. खाली होने की वजह से वह अकसर अपनी मौसी इंद्रा के घर भी चला जाता था, जहां वह कईकई दिनों तक रुका रहता था. इंद्रा उस का बहुत खयाल रखती थी.

एक तो प्रकाशचंद्र की उम्र हो गई थी, दूसरे बच्चे सयाने हो गए थे, इसलिए वह पत्नी में कम ही रुचि लेते थे जबकि इंद्रा चाहती थी कि पति रोजाना उस के पास आए और उसे संतुष्ट करे. पति से इच्छा पूरी न होने से इंद्रा का मन भटकने लगा तो वह, किसी युवक की तलाश में रहने लगी. लेकिन उसे इस बात का भी डर सता रहा था कि किसी युवक से संबंध बनाने पर अगर बात खुल गई तो बड़ी बदनामी होगी.

तब वह किसी ऐसे युवक की तलाश में लग गई, जिस से संबंध बनाने पर किसी को पता न चल सके. ऐसा युवक वही हो सकता था, जिस से उस के घरेलू संबंध हों यानी जिस के घर आनेजाने पर किसी को संदेह न हो. इस बारे में उस ने काफी सोचाविचारा तो उस की नजर अपनी बहन के बेटे विनय पर टिक गई. क्योंकि विनय उस के घर में ही रहता था. दूसरे बहन का बेटा होने की वजह से जल्दी उस पर कोई संदेह भी नहीं कर सकता था.

विनय उस उम्र में था, जिस उम्र में स्त्री देह कुछ ज्यादा ही आकर्षित करती है. तब रिश्तेनाते का भी खयाल नहीं रहता. विनय की शादी भी नहीं हुई थी. ऐसे में इंद्रा ने रिश्ते नाते, लाजशरम त्याग कर अपनी देह को उस के सामने परोसा तो जवानी की दहलीज पर खड़े विनय को फिसलते देर नहीं लगी. मौसी की देह तो उस के लिए अंधे सियार को पीपल ही मेवा की तरह लगा. वह निश्चिंत हो कर मौसी के साथ मौज करने लगा.

इंद्रा ने विनय को हिदायत दे रखी थी कि यह बात वह अपने दोस्तों तक को भी नहीं बताएगा. इसलिए विनय ने यह बात कभी किसी को नहीं बताई. उस का जब भी मन होता, वह मौसी के यहां आ जाता और जितने दिन मन होता, आराम से रहता. मौसा और मौसेरे भाई के जाने के बाद वही दोनों घर पर रह जाते थे, इसलिए उन का जो मन होता, आराम से करते.

इंद्रा विनय को न सिर्फ शारीरिक सुख देती थी, बल्कि उसे अपने आकर्षण में बांधे रहने के लिए उस की छोटीमोटी जरूरतें भी पूरी करती थी. वह उसे जेब खर्च के लिए रुपए भी देती थी. विनय को दोहरा लाभ था, इसलिए वह मौसी से खूब खुश रहता था.

क्रिकेट खेलने में ही विनय की दोस्ती कानपुर के थाना बिधनू के गांव सपई के रहने वाले वीरेंद्र सिंह चंदेल के बेटे पिंटू से हो गई थी. पिंटू नौबस्ता में चाय की दुकान चलाता था. विनय का जूते के काम में मन नहीं लगता था, इसलिए उस ने पिंटू के साथ होटल खोलने की योजना बनाई. होटल खोलने के लिए उसे 15 हजार रुपयों की जरूरत थी.

विनय को पूरा यकीन था कि मौसी इंद्रा उसे ये रुपए दे देंगी. इसीलिए उस ने बड़े ही विश्वास के साथ पिंटू से कह दिया था कि उस की मौसी एक बार मांगने पर रुपए दे देंगी. लेकिन मौसी ने रुपए नहीं दिए. उसी का नतीजा था कि नाराज हो कर विनय ने पिंटू के साथ मिल कर उन के यहां लूट के इरादे से उन की हत्या कर दी थी.

पूछताछ के बाद प्रभारी निरीक्षक धर्मेंद्र सिंह रघुवंशी ने विनय को पत्रकारों के सामने भी पेश किया. प्रेसवार्त्ता करा कर उन्होंने उसे अदालत में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया. कथा लिखे जाने तक विनय और पिंटू की जमानत नहीं हुई थी.

कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

मजबूत डोर के कमजोर रिश्ते : भाई क्यों बना कसाई?

सुहागरात के बाद खुल कर नाची मौत – भाग 3

कुछ दिन बाद डौली के वापस आने की जानकारी शिववीर को हुई तो वह उसे लेने आ पहुंचा. लेकिन सुभाष ने डौली को यह कह कर उस के साथ नोएडा नहीं भेजा कि बहू के जाने से घर में रोटीपानी की परेशानी होगी. क्योंकि डौली की सास शारदा की तबियत खराब चल रही थी.

शिववीर अब 15 दिन में घर आता. 2-3 दिन रहता, उस के बाद फिर नौकरी पर नोएडा चला जाता. लेकिन जब भी आता, पापा से पैसों की डिमांड करता. न देने पर लड़ाईझगड़ा करता. मां शारदा से भी उलझ जाता. एक दिन तो हद ही हो गई. शिववीर ने पापा सुभाष पर हाथ छोड़ दिया. पति पर हाथ छोडऩा शारदा को नागवार लगा, इसलिए वह उस से भिड़ गई और कई तमाचे शिववीर के गाल पर जड़ दिए.

घर आतेजाते एक रोज शिववीर को पता चला कि पापा व दोनों भाइयों ने मिल कर सड़क किनारे एक प्लौट तथा 5 बीघा उपजाऊ भूमि खरीदी है. लेकिन प्लौट व जमीन में उस का नाम दर्ज नहीं कराया गया है. वह मन ही मन जलभुन उठा. उस के मन में घर वालों के प्रति नफरत की आग सुलगने लगी.

शिववीर ने इस बाबत पापा से पूछा तो उन्होंने कहा कि सोनूू और भुल्लन ने अपनी कमाई से खेत खरीदे हैं. यह सुन कर शिववीर गुस्से से बोला, ”खेत, प्लौट खरीदने को तुम लोगों के पास पैसा है, लेकिन हमारा कर्ज चुकाने को तुम्हारे पास पैसा नहीं है. यह नाइंसाफी है.’’

शिववीर ने इस नाइंसाफी के बारे में बहनोई सौरभ तथा मामा विनोद से भी बात की, लेकिन उन लोगों ने भी उस की एक न सुनी. शिववीर अब मामा व बहनोई से भी नफरत करने लगा.

सुभाष का मंझला बेटा सोनू राजस्थान की खुशखेरा स्थित जिस फैक्ट्री में काम करता था, उसी में वेदराम यादव भी नौकरी करता था. वेदराम यादव इटावा जिले के गंगापुरा गांव का रहने वाला था. चूंकि सोनू और वेदराम एक ही क्षेत्र के रहने वाले थे, इसलिए परिचय होने के बाद दोनों के बीच घनिष्ठता बढ़ गई थी. जब भी दोनों को फुरसत मिलती तो साथ बैठ कर घरगांव की बातें करते थे. चूंकि दोनों यादव जाति के थे, सो दिन पर दिन उन की दोस्ती बढ़ती गई.

वेदराम यादव के परिवार में पत्नी सुषमा के अलावा 4 बेटियां सोनी (18 वर्ष), अंजलि (16 वर्ष), खुशबू (14 वर्ष), खुशी (13 वर्ष) तथा एक बेटा यश (7 वर्ष) था. वेदराम स्वयं तो नौकरी करता था, लेकिन उस की पत्नी सुषमा घरखेत की जिम्मेदारी संभाले थी. पांचों बच्चों की देखरेख व पालनपोषण की जिम्मेदारी सुषमा की ही थी.

वेदराम की बेटी सोनी भाईबहनों में सब से बड़ी थी. वह खूबसूरत तो बचपन से ही थी, लेकिन 16 बसंत पार कर जब उस ने जवानी की डगर पर कदम रखा तो उस की खूबसूरती में और भी निखार आ गया था. असित इंटर कालेज, गंगापुरा से उस ने हाईस्कूल की परीक्षा पास कर ली थी. वह आगे पढऩा चाहती थी, लेकिन मम्मी ने उस की पढ़ाई बंद करा दी थी और घरेलू काम में लगा दिया था.

वेदराम अपनी जवान बेटी के ब्याह के लिए चिंतित रहता था. वह फैक्ट्री में जब भी सोनू से मिलता तो उसे अपनी बेटी सोनी की याद आ जाती. उसे लगता कि सोनू ही उस की बेटी के योग्य है. वह उसे सदा खुश रखेगा.

रिश्ता हो गया तो दोनों की जोड़ी खूब फबेगी. इशारेइशारे में वेदराम ने कई बार सोनू का मन टटोला तो वह हंस कर टाल गया और बोला, ”शादी विवाह मम्मीपापा की मरजी से होते हैं. पहले उन की हां फिर मेरी हां.’’

वेदराम सोनू का इशारा समझ गया. इस बार मार्च, 2023 में होली त्यौहार की छुट्टी में जब वेदराम घर आया तो वह बेटी का रिश्ता ले कर सोनू के गांव गोकुलपुरा अरसारा पहुंच गया. उस ने बिना कोई भूमिका बांधे सोनू के पापा सुभाष यादव से कहा कि वह अपनी बेटी सोनी का रिश्ता ले कर उन के पास आए हैं. उन का बेटा सोनू उन्हें पसंद है.

Soni (Mratika)

मृतका सोनी

आपस की बातचीत के बाद सोनी का रिश्ता सोनू के साथ तय हो गया. शादी की तारीख 22 जून, 2023 तय हुई. इस के बाद दोनों परिवार शादी की तैयारी में जुट गए.

भाई की शादी पर क्यों चिढ़ा शिववीर

शिववीर को सोनू का ब्याह तय होने की बात पता चली तो वह मन ही मन जल उठा. वह नोएडा से घर आया तो मम्मीपापा से झगडऩे लगा और बोला, ”तुम्हारे पास शादी रचाने को रकम है, लेकिन मेरा कर्ज चुकाने को नहीं. क्या मैं सौतेला बेटा हूं या फिर किसी की नाजायज औलाद. आखिर घर में मेरी अनदेखी क्यों की जा रही है?’’

शिववीर ने शादी की तैयारी के बहाने सुभाष से 20 हजार रुपया मांगा, लेकिन उन्होंने पैसा देने से साफ इंकार कर दिया. इस इंकार से शिववीर की नफरत चरम पर पहुंच गई. वह सोचने लगा कि उसे इस तरह तो कुछ भी हासिल न होगा. उसे सब कुछ छीनना ही पड़ेगा.

उस ने मन ही मन तय कर लिया कि वह पूरे परिवार का सफाया कर देगा. उस के बाद आराम की जिंदगी बिताएगा. जमीनजायदाद, घर, प्लौट का वही मालिक होगा.

अपने खतरनाक मंसूबों को सफल बनाने के लिए वह तैयारी में जुट गया. सब से पहले उस ने चारा काटने वाली मशीन के ब्लेड से तेज धार वाला फरसा तैयार कराया. इस के बाद उस ने एक स्थानीय अपराधी की मदद से तमंचा व कारतूस खरीदा.

फरसे व तमंचे को उस ने अपने कमरे में सुरक्षित रख दिया. यही नहीं, उस ने हर खतरे से निपटने के लिए अन्य तैयारियां भी पूरी कर लीं. मिर्च का स्प्रे व नींद की गोलियों का इंतजाम भी उस ने कर लिया.

शिववीर ने अपने खतरनाक मंसूबों की किसी को भनक तक न लगने दी. वह सामान्य तरीके से रहने लगा. सुभाष यादव व उस के दोनों बेटे शादी की तैयारियों में जुटे थे. निमंत्रण कार्ड आदि बांटे जा चुके थे. गांव में शादी की रस्में एक सप्ताह पहले ही शुरू हो जाती हैं. रिश्तेदारों व महिलाओं का आनाजाना भी शुरू हो गया था. सोनू की बहन प्रियंका, मौसी, मामी भी आ चुकी थीं. 20 जून को मंडप गाड़ा गया. उस के बाद से मंडप के नीचे ढोलक की थाप पर मंगल गीत गाए जाने लगे.

सुभाष यादव ने बड़े बेटे शिववीर को शादी में नहीं बुलाया था, फिर भी वह 3 दिन पहले ही नोएडा से घर आ गया. वह हर काम हंसीखुशी से करने लगा. उस ने भाइयों को तनिक भी आभास नहीं होने दिया कि उस के मन में क्या चल रहा है.

एसडीएम पत्नी का हत्यारा बना पति – भाग 3

3 अक्तूबर, 2021 को जिस दिन उन्होंने शादी करने की सूचना दी, हम उसी दिन नीलिमा परिवार के साथ डिंडोरी पहुंचे, लेकिन मनीष वहां से गायब था. वह यहां सिर्फ पैसे लेने ही आता था.

शादी के बाद ही निशा को अपने पति मनीष पर संदेह होने लगा था, क्योंकि खुद को मनीष की दूसरी पत्नी बताने वाली रश्मि उसे मैसेज कर के कहती थी कि वह उस की पहली पत्नी है. उस के दोनों मोबाइल नंबर से भेजे मैसेज के स्क्रीनशौट्स भी उस ने सेव कर रखे थे.

निशा के परिवार के लोगों को पहले से ही मनीष पर संदेह था. मनीष ने मैट्रीमोनियल साइट पर अपने आप को प्रौपर्टी डीलर बताया था, जबकि वह बस कंडक्टर था. निशा ने उस की प्रोफाइल को सच मान कर घर वालों को बगैर बताए मनीष से शादी कर ली.

शादी के बाद मनीष की असलियत निशा जान चुकी थी, मगर अपने पद और स्टेटस के लिहाज से वह खून का घूंट पी कर रह गई थी. मनीष ने जब अपनी जरूरतों के लिए निशा पर पैसों का दबाव बनाना शुरू किया तो निशा ने एक बार बैंक से लोन ले कर उसे 5 लाख रुपए दिए थे. बाद में वह 15 लाख रुपए मांगने लगा तो निशा ने अपनी बड़ी बहन नीलिमा को बताया तो नीलिमा ने डांटते हुए सख्त हिदायत दे रखी थी कि उसे और पैसे नहीं देना.

मनीष पर परिवार के लोगों के संदेह की वजह यह भी थी कि वह खुद को अखंड समाज पार्टी का अध्यक्ष बताता था और इस नाम का विजिटिंग कार्ड भी उस ने दिया था, परंतु जब परिवार वालों ने अपने स्तर पर उस की पड़ताल की तो पता चला कि यह फरजी है.

सर्विस रिकौर्ड में नौमिनी बनाने पर क्यों अड़ा था मनीष

मनीष बेरोजगार था, इस से पुलिस का शक और बढ़ा, इसलिए जब पुलिस ने सख्ती की तो मनीष ने अपना गुनाह स्वीकार कर लिया कि उस ने ही निशा की हत्या की थी. उस की वजह यह थी कि बारबार कहने के बाद भी निशा सरकारी दस्तावेजों, मसलन सर्विस बुक, बैंक अकाउंट्स और इंश्योरेंस वगैरह में उसे अपना नौमिनी नहीं बना रही थी. इस पर दोनों में आए दिन कहासुनी और झगड़ा भी हुआ करता था, जो 28 जनवरी को भी हुआ तो मनीष ने तकिए से मुंह दबा कर पत्नी का नामोनिशान मिटा दिया.

निशा ने अपने सरकारी दस्तावेज और बैंक में पति की जगह बहन नीलिमा और उस के बेटे स्वप्निल का नाम बतौर नौमिनी दिया था. सामान्य तौर पर विवाहित महिलाएं पति का नाम देती हैं. इस वजह से भी मनीष शर्मा अपनी पत्नी निशा से विवाद करता था.

मनीष के दूसरे लड़कियों से संबंध की जानकारी निशा को थी. निशा मनीष की हरकतों से परेशान रहने लगी थी, मगर अपने ओहदे और प्रतिष्ठा की वजह से वह कोई ठोस कदम नहीं उठा पा रही थी.

मनीष अकसर ग्वालियर में ही रहता था. 10-15 दिनों में वह शहपुरा आता था. 25 जनवरी को मनीष शहपुरा आया और निशा से पैसों की मांग करने लगा. निशा अगले दिन होने वाले गणतंत्र दिवस की तैयारियों में व्यस्त थीं. इसलिए उन्होंने मनीष की डिमांड पर कोई ध्यान नहीं दिया.

गणतंत्र दिवस पर पूरे दिन वह कार्यक्रम में व्यस्त रहीं. 27 जनवरी को पैसे मांगने पर दोनों के बीच विवाद हुआ. दूसरे दिन 28 जनवरी, 2024 को सुबह 10 बजे मनीष निशा से बोला, ”निशा, मैं ने तुम से शादी की है. आखिर तुम मुझे अपने सर्विस रिकौर्ड में नौमिनी क्यों नहीं बनाना चाहती?’’

”तुम ने शादी कर के सोने के अंडे देने वाली मुरगी पा ली है. तुम ने झूठ बोल कर मुझ से शादी की. मैं तुम्हारी अय्याशी का खर्च अब नहीं उठा सकती.’’ निशा ने टोटूक कह दिया.

”मैं किस के साथ अय्याशी कर रहा हूं?’’ भड़कते हुए मनीष बोला.

”सोशल मीडिया पर जिस लड़की के साथ तुम्हारी फोटो है, उसी के साथ गुलछर्रे उड़ाते हो और खर्च मुझ से मांगते हो. अब से  एक पैसा तुम्हें नहीं मिलेगा.’’ गुस्से में निशा ने कहा.

इतना सुनते ही मनीष गुस्से से आगबबूला हो गया और तकिया उठा कर निशा का मुंह जोर से बंद कर दिया.

कुछ ही पलों में दम घुटने से निशा की मौत हो गई. निशा की नाक से खून निकल आया, जिस से बेडशीट और तकिए के साथ निशा के कपड़ों पर खून के निशान बन गए. मनीष ने निशा के कपड़े चेंज किए और बैडशीट, तकिया कवर के साथ सभी कपड़े वाशिंग मशीन में डाल दिए.

हत्या के बाद सुबूत मिटाने की गरज से उस ने निशा के खून से सने कपड़े वाशिंग मशीन में धोए और अपने बचाव के लिए जो कहानी गढ़ी, वह पुलिस की सख्ती के आगे टिक नहीं पाई.

पुलिस ने निशा की हत्या के आरोपी मनीष शर्मा के खिलाफ आईपीसी की धारा 302, 304बी और 201 के तहत मामला दर्ज कर शहपुरा न्यायालय में पेश किया, जहां आरोपी लगातार पुलिस को चकमा देने के लिए चक्कर खा कर गिरने का नाटक कर रहा था.

इसी के चलते उसे 30 जनवरी की रात भर गिरफ्तारी के बाद भी पुलिस की निगरानी में भरती के दौरान थाने ला कर भी 3 बार पूछताछ की गई.

31 जनवरी, 2024 की दोपहर को आरोपी मनीष शर्मा को शहपुरा न्यायालय में पेश किया गया, लेकिन वहां भी वह चक्कर खा कर गिरने का नाटक करने लगा. न्यायालय के आदेश पर उसे फिर अस्पताल में भरती कराया गया.

देर शाम को पुलिस की सख्ती के बाद आरोपी मनीष शर्मा जेल भेज दिया. एसडीएम निशा नापित की मौत की कहानी बताती है कि किस तरह प्रशासनिक पदों पर बैठे पढ़ेलिखे लोग भी सोशल मीडिया साइट्स पर दी गई जानकारी को सच मान कर शादी जैसा अहम निर्णय ले लेते हैं और अपनी जिंदगी दुश्वार कर जान से हाथ धो डालते हैं.

—कथा मीडिया रिपोर्ट पर आधारित

सुहागरात के बाद खुल कर नाची मौत – भाग 2

उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले के किशनी थाना अंतर्गत एक गांव है-गोकुलपुरा अरसारा. यादव बाहुल्य इसी गांव में सुभाषचंद्र यादव सपरिवार रहते थे. उन के परिवार में पत्नी शारदा देवी के अलावा 3 बेटे शिववीर, सोनू, अभिषेक उर्फ भुल्लन तथा एक बेटी प्रियंका थी. सड़क किनारे उन का पक्का मकान था. वह किसान थे. खेती से ही वह परिवार का भरणपोषण करते थे.

सुभाषचंद्र यादव खुद तो पढ़े लिखे नहीं थे, लेकिन बेटों को पढ़ालिखा कर योग्य बनाना चाहते थे. इसलिए वह उन की पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान देते थे. अपनी कमाई का एक बड़ा हिस्सा वह बेटों की पढ़ाई पर खर्च करते थे. 2 बेटे सोनू व भुल्लन तो पढऩे में तेज थे, लेकिन बड़ा बेटा शिववीर पढऩे में कमजोर था. इंटरमीडिएट की परीक्षा जैसेतैसे पास कर उस ने पढऩा बंद कर दिया और पिता के साथ खेती में हाथ बंटाने लगा.

Shiv veer (Hatyara)

हत्यारा शिववीर

लेकिन शिववीर का मन खेती किसानी में भी नहीं लगा. इस के बाद वह नौकरी की तलाश में जुट गया. काफी प्रयास के बाद उसे मैनपुरी में स्थित एक फर्म में सेल्समैन की नौकरी मिल गई. चूंकि कृषि यंत्र बेचने में उसे कमीशन भी मिलता था, इसलिए उस की अच्छी कमाई होने लगी. अब वह ठाठबाट से रहने लगा.

शिववीर कमाने लगा तो सुभाषचंद्र उस के ब्याह की सोचने लगे. वह ऐसी लड़की चाहते थे, जो उन का घर संभाल सके, भले ही वह ज्यादा पढ़ीलिखी न हो. उन्हीं दिनों करहल (मैनपुरी) निवासी हरीसिंह यादव अपनी बेटी डौली का रिश्ता ले कर सुभाष के पास आए.

सुभाष यादव तो शिववीर के रिश्ते के लिए लालायित ही थे, सो उन्होंने रिश्ता मंजूर कर लिया. फिर दोनों तरफ से बात तय होने के बाद 8 फरवरी, 2019 को हरीसिंह ने डौली का विवाह शिववीर के साथ कर दिया.

डौली शिववीर की दुलहन बन कर ससुराल आई तो उस के जीवन में बहार आ गई. डौली सुंदर तो थी ही, साथ ही सुशील व सदाचारी भी थी. उस ने ससुराल आते ही घर संभाल लिया था. वह पति की सेवा तो करती ही थी, सासससुर की सेवा में भी कोई कसर न छोड़ती थी.

शादी के एक साल बाद डौली ने एक बेटी को जन्म दिया, जिस का नाम उस ने पीहू रखा. पीहू के जन्म से घर की खुशियां और बढ़ गई. शिववीर डौली से बहुत प्यार करता था. वह उस के प्यार में ऐसा खोया कि कामधंधा ही भूल गया. लापरवाही बरतने व काम पर न जाने के कारण उस की नौकरी भी छूट गई.

शिववीर बेरोजगार हुआ तो वह आवारा घूमने लगा. उस की संगत कुछ अपराधी प्रवृत्ति के लोगों से हो गई, जिन के साथ वह नशापत्ती करने लगा. डौली मना करती तो वह उसे झिड़क देता. कभीकभी उस पर हाथ भी उठा देता था.

बेटे को गलत रास्ते पर जाते देख कर सुभाष की चिंता बढ़ गई. उन की समझ में नहीं आ रहा था कि वह शिववीर को कैसे सुधारें. काफी विचारविमर्श के बाद उन्होंने किशनी कस्बे में शिववीर को फ्लैक्स की दुकान खुलवा दी.

बैनर, पोस्टर बनाने के इस धंधे में शिववीर को शुरू में तो आमदनी हुई, लेकिन उधारी के कारण बाद में नुकसान होने लगा. यहां तक कि दुकान का किराया तथा कारीगरों की मजदूरी भी निकालनी मुश्किल हो गई. धंधे में नुकसान हुआ तो उस ने दुकान बंद कर दी. इस धंधे में वह कमाने के बजाय कर्जदार हो गया.

घर वालों ने शिववीर की क्यों नहीं की मदद

सुभाषचंद्र की बेटी प्रियंका अब तक जवान हो गई थी. वह उस के हाथ जल्द ही पीले कर देना चाहते थे. प्रियंका खूबसूरत तो थी, लेकिन ज्यादा पढ़ीलिखी नहीं थी.

आठवीं कक्षा पास करते ही मां शारदा ने उस की पढ़ाई बंद करा दी थी और अपने साथ घरेलू काम में लगा लिया था. उन का मानना था कि ज्यादा पढ़ीलिखी लड़की के लिए योग्य लड़का खोजना मुश्किल होता है. जबकि सुभाष यादव पत्नी की बात से सहमत नहीं थे.

सुभाष यादव ने प्रियंका के लिए योग्य वर की खोज शुरू की तो उन्हें एक लड़का सौरभ पसंद आ गया. सौरभ के पिता रामकिशन यादव मैनपुरी जिले के गांव चांद हविलिया के रहने वाले थे. 24 वर्षीय सौरभ दूध का व्यवसाय करता था और पिता के साथ खेती में भी हाथ बंटाता था.

सुभाष को सौरभ पसंद आया तो उन्होंने 6 जून, 2021 को प्रियंका का विवाह सौरभ के साथ कर दिया. प्रियंका को ससुराल में किसी चीज की कमी न थी, सो वह सुखपूर्वक ससुराल में पति के साथ जीवन बिताने लगी.

सुभाष जहां अपने बड़े बेटे शिववीर से दुखी था तो वहीं अन्य 2 बेटों से संतुष्ट भी था. मंझला बेटा सोनू पढ़लिख कर अकाउंटेंट की नौकरी पा गया था. वह राजस्थान की खुशखेरा स्थित एक फैक्ट्री में काम करता था. उसे अच्छी सैलरी मिलती थी.

सब से छोटे अभिषेक उर्फ भुल्लन को नौकरी तो नहीं मिली थी, लेकिन उस ने किशनी तहसील के पास फोटोकापी की दुकान खोल ली थी. दुकान से उसे अच्छी आमदनी होने लगी थी. अभिषेक व सोनू पिता की मरजी से हर काम करते थे, इसलिए वे दोनों उन की आंखों के तारे बन गए थे.

इधर शिववीर ने फ्लैक्स के काम में पैसा गंवाने के बाद कर्ज ले कर गल्ले का धंधा किया, लेकिन इस में भी वह मात खा गया. अब वह पहले से ज्यादा कर्जदार हो गया. उस ने पिता व भाइयों से कर्ज उतारने के लिए पैसा मांगा, लेकिन उन्होंने पैसा नहीं दिया. कर्जदार होने से घर वाले उस की उपेक्षा करने लगे.

कर्जदारों से परेशान शिववीर घर छोड़ कर पुणे चला गया. वहां वह किसी फैक्ट्री में काम करने लगा. एक साल तक शिववीर घर से गायब रहा. उस के बाद फिर घर वापस आ गया. वापस आते ही कर्ज वाले उस के घर के चक्कर लगाने लगे. शिववीर ने फिर घर वालों से पैसे मांगे, लेकिन सभी ने उसे दुत्कार दिया. एक पैसा भी नहीं दिया.

पत्नी भी क्यों हुई शिववीर के खिलाफ

शिववीर ने तब लड़झगड़ कर डौली के जेवर छीन लिए और बेच दिए. एकदो लोगों का उस ने मामूली कर्ज अदा किया. फिर घर छोड़ कर खोड़ा (नोएडा) आ गया. यहां वह किसी प्रिंटिंग प्रेस में काम करने लगा.

कुछ दिनों बाद वह अपनी पत्नी डौली को भी ले आया. डौली एकदो माह तो उस के साथ खुश रही, फिर दोनों में झगड़ा होने लगा. झगड़ा जेवर बेचने को ले कर होता था.

एक रोज तो झगड़े ने बड़ा रूप ले लिया. शिववीर ने पहले तो पत्नी को पीटा, फिर दीवार में उस का सिर पटक दिया, जिस से डौली का सिर फट गया. गुस्से में डौली ने अपनी मासूम बच्ची को साथ लिया और आनंद विहार बसअड्डे आ गई.

यहां से बस पर सवार हो कर करहल आ गई, फिर वहां से अपने मायके आ गई. मम्मीपापा को उस ने पति की करतूत बताई तो उन्होंने बेटी को गले लगा लिया और बेटी को शिववीर के साथ न भेजने का फैसला लिया.

कुछ दिनों बाद शिववीर डौली को लेने ससुराल आया तो डौली के मम्मीपापा का गुस्सा फूट पड़ा. उन्होंने शिववीर को खूब खरीखोटी सुनाई और बेटी को साथ भेजने से साफ मना कर दिया. शिववीर ने डौली को लाख मनाने की कोशिश की. माफी भी मांगी, लेकिन डौली नरम नहीं हुई. उस ने भी पति के साथ जाने को साफ मना कर दिया. अपमानित हो कर शिववीर घर आ गया. उस ने सारी बात अपने मम्मीपापा को बताई, फिर वह नोएडा चला गया.

इधर जब डौली कई माह तक ससुराल वापस नहीं आई तो डौली को ले कर गांव में कानाफूसी होने लगी. इज्जत बचाने के लिए सुभाष बहू के मायके गए और उसे किसी तरह मना कर विदा करा लाए. डौली के मम्मीपापा ने कई शर्तों के साथ डौली को उस समय ससुराल भेजा था.

एसडीएम पत्नी का हत्यारा बना पति – भाग 2

बड़ी बहन ने बताया निशा के पति का सच

2021 से पहले स्वप्निल निशा के पास रह कर ही स्कूल की पढ़ाई करता था, बाद में निशा की शादी मनीष से होने पर मनीष ने ऐतराज जताया तो मनीष के कहने पर निशा ने अपने पास रखने से मना कर दिया था.

छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में रहने वाली निशा नापित ने छत्तीसगढ के अंबिकापुर में चौपड़ा कालोनी में रह कर अपनी पढ़ाई की थी. उन के पापा ज्ञानचंद नापित और मम्मी का पहले ही निधन हो चुका था. निशा की बड़ी बहन के अलावा उन का कोई नहीं था.

निशा बचपन से ही प्रशासनिक अधिकारी बनने का सपना देख रही थीं. वह जिंदगी को अपने तरीके से जीना चाहती थीं. प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करतेकरते शादी की उम्र होने पर बड़ी बहन नीलिमा ने निशा से कहा, ”अब तू शादी कर ले, अधिकारी बनने के चक्कर में तेरी उम्र निकल रही है.’’

इस पर निशा ने अपना रुख साफ करते हुए कहा, ”दीदी, जब तक मैं अपना करिअर नहीं बना लेती, तब तक शादी हरगिज नहीं करूंगी.’’

निशा के इस जबाब पर नीलिमा के पास चुप रह जाने के अलावा कोई दूसरा रास्ता भी नहीं था. निशा नापित ने 15 मार्च, 2003 को नायब तहसीलदार के पद पर सेवाएं मध्य प्रदेश के छिंदवाडा जिले से शुरू की थी. पदोन्नत हो कर पहले वह तहसीलदार बनीं और उस के बाद डिप्टी कलेक्टर के पद पर पदस्थ हुई थीं. 2010 में निशा तहसीलदार बना कर सतना भेजी गईं और 2020 में उन का प्रमोशन डिप्टी कलेक्टर के रूप में हो गया. उस समय निशा मंडला में पोस्टेड थीं.

निशा ने दूसरी जाति के युवक से की थी शादी

प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने जब उन की बहन नीलिमा को पूरा घटनाक्रम बताया तो उन्होंने निशा के पति मनीष को ही मौत का जिम्मेदार बताया. छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर की रहने वाली निशा नापित और ग्वालियर के रहने वाले मनीष शर्मा ने लवमैरिज की थी. निशा नाई जाति की थीं जबकि मनीष ब्राह्मण था.

दोनों की मुलाकात एक मैट्रीमोनियल साइट ‘शादी डौटकौम’ के जरिए हुई थी. दोनों ने एकदूसरे को पसंद कर लिया और अक्तूबर 2020 में मंडला के गायत्री मंदिर में उन्होंने शादी कर ली थी.

एसडीएम जैसे ओहदे पर बैठीं निशा नापित की मनीष से जानपहचान एक मैट्रीमोनियल साइट के जरिए हुई थी. उस समय निशा की उम्र 46 साल हो चुकी थी. घर वाले भी निशा के लिए रिश्ते तलाश रहे थे. ऐसे ही समय निशा को मनीष की प्रोफाइल ठीक लगी.

मनीष उस समय 40 साल का था और निशा से शादी करने तैयार था. एकदूसरे को जानने समझने के लिए फोन पर शुरू हुआ बातचीत का सिलसिला मुलाकातों में बदल गया और जल्द ही दोनों में प्यार भी हो गया.

इस मामले में निशा ने अपनी बड़ी बहन नीलिमा से चर्चा की तो नीलिमा ने मनीष से बातचीत कर उस के बारे में तहकीकात की. मनीष से हुई बातचीत में नीलिमा को मनीष के व्यवसाय को ले कर शक भी हुआ था और नीलिमा ने निशा को आगाह भी किया था कि वह सोच समझ कर फैसला ले.

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नीलिमा नापित 

इस के बाद निशा ने परिवार को बिना बताए शादी कर ली थी. परिवार के लोगों को बाद में जानकारी लगी. निशा एक बार नीलिमा से मिलने घर आई तो पति मनीष भी साथ में था. मंडला में पोस्टिंग के दौरान भी दोनों के बीच खूब विवाद हुआ था. तत्कालीन एसपी ने दोनों को समझाया था.

निशा छत्तीसगढ़ की रहने वाली थीं और उन की शादी ग्वालियर में हुई थी. वह बतौर डिप्टी कलेक्टर जुलाई, 2023 में डिंडोरी जिले में पदस्थ हुई थीं और उन्हें 2023 के विधानसभा चुनाव से पहले शहपुरा एसडीएम की कमान सौंपी गई थी.

निशा को कुत्ते पालने का बहुत शौक था, जब वह सतना में पोस्टेड थीं, तब उन के पास 3 डौग्स थे और शहडोल जिले के अनूपपुर आने के बाद 2 डौग और रख लिए थे. मनीष से शादी होने के कुछ ही महीने बाद उन्होंने वो सारे डौग्स अपने घर अंबिकापुर भेज दिए थे.

बाद में निशा की बड़ी बहन नीलिमा नापित ने पुलिस को बताया कि शादी के तीसरे दिन से ही मनीष निशा को पैसों के लिए प्रताडि़त करने लगा था. उस का कई दूसरी महिलाओं से भी अफेयर था.

पति की इन हरकतों से परेशान निशा ने नीलिमा के बेटे स्वप्निल को सरकारी दस्तावेजों में अपना नौमिनी बना दिया था. इस से मनीष झल्लाया रहता था, क्योंकि आमतौर पर तमाम रिकौर्डों में जीवनसाथी को ही नौमिनी बनाया जाता है.

शादी के चंद दिनों बाद ही निशा को समझ आ गया था कि अकसर घर से गायब रहने वाले मनीष ने उस के रुतबेदार ओहदे, पगार और पैसों से शादी की है. आए दिन वह निशा से पैसे मांगता रहता था. एक बार तो धंधे रोजगार के लिए निशा ने बैंक लोन ले कर भी उसे 5 लाख रुपए दिए थे. मनीष शराब भी पीता था और आवारा, मनचले भंवरों की तरह तितलियों पर मंडराना भी उस की फितरत थी. जाहिर है, प्यार का भूत निशा के सिर से उतर चुका था. निशा जल्दबाजी में लिए गए अपने शादी के फैसले पर पछता रही थी.

मनीष ने निशा ने क्यों छिपाई सच्चाई

मनीष शर्मा का परिवार ग्वालियर में  रहता है. मनीष जब 14 साल का था, तभी उस ने घर छोड़ दिया था. वह घर से अलग ही रहता था. 2009 में वह घर आया था, तब उस ने कहा था कि मुझे खेती में हिस्सा चाहिए. उस के भाई नीलेश ने उस के हिस्से की 3 बीघा जमीन उस के नाम कर दी थी. इस के बाद हमारा उस से कोई रिश्ता नहीं रहा.

2018 में वह एक बार फिर घर आया और मां से कहने लगा कि मेरी उम्र 40 साल हो गई है. शादी नहीं हुई है. मेरे लिए एक रिश्ता आया है. मां ने पहले इनकार किया, लेकिन सब रिश्तेदारों ने सोचा कि चलो शादी के बाद सुधर जाएगा. यही सोच कर उस की शादी कर दी.

शादी के 3 महीने ही हुए थे कि मनीष ने उस लड़की से भी झगड़ा शुरू कर दिया. जब मां उस के कमरे में गई तो वह बोला कि तुम मेरे लिए मर गए हो. फिर हम ने अपने मामा से बात की. मामा ने समझाने की कोशिश की तो मनीष ने कहा कि तुम सब मेरे लिए मर चुके हो. बाद में फिर मनीष का उस लड़की से तलाक हो गया.

शादी डौटकौम पर अपनी प्रोफाइल में अपने आप को प्रौपर्टी डीलर बताने वाले मनीष शर्मा की जब निशा से शुरुआती मुलाकात हुई तो वो खुद को एक इंजीनियर बताता था. रिश्ते के लिए जब निशा की बड़ी बहन नीलिमा ने बात की तो वह उन के सवालों का ठीक से जवाब नहीं दे पाया. लेकिन निशा ने परिवार के मना करने के बावजूद एक दिन फोन कर बताया कि उन्होंने शादी कर ली है.

सुहागरात के बाद खुल कर नाची मौत – भाग 1

पुलिस अधिकारियों को बरामदे में ही 2 महिलाएं घायल पड़ी दिखाई दीं. पूछने पर सुभाष ने बताया कि एक महिला उस की बहू डौली है तथा दूसरी रिश्तेदार सुषमा है. पुलिस अधिकारियों ने इन दोनों को इलाज हेतु सैफई अस्पताल भिजवा दिया. इस के बाद पुलिस अधिकारी आंगन में पहुंचे तो वहां 3 लाशें पड़ी थीं. इन की हत्या गला काट कर बड़ी बेरहमी से की गई थी. आंगन में खून ही खून फैला था.

पूछने पर सुभाष ने बताया कि एक लाश उस के छोटे बेटे अभिषेक उर्फ भुल्लन (20 वर्ष) की है, जबकि दूसरी लाश दामाद सौरभ (26 वर्ष) की है. तीसरी लाश बेटे के दोस्त दीपक (21 वर्ष) की है.

Bhullan (Mratak)               Sonu (Mratak)

     अभिषेक उर्फ भुल्लन                                 मृतक सोनू

लाश के पास ही खून सना फरसा पड़ा था. शायद उसी फरसे से उन का कत्ल किया गया था, इसलिए फरसे को पुलिस ने सुरक्षित कर लिया.

एसपी विनोद कुमार सहयोगियों के साथ आंगन से जीने के रास्ते छत पर पहुंचे तो वहां का दृश्य देख कर वह चौंक गए. कमरे के अंदर सुभाष के बेटे सोनू व उस की नई नवेली दुलहन सोनी की लाश पड़ी थी. उन दोनों के हाथ की मेहंदी व पैरों की महावर अभी छूटी भी न थी कि उन्हें मौत की नींद सुला दिया गया था. उन दोनों की हत्या भी गला काट कर ही की गई थी. सोनू की उम्र 23 साल के आसपास थी, जबकि सोनी की उम्र 20 वर्ष थी.

निरीक्षण करते हुए एसपी विनोद कुमार जब मकान के पिछवाड़े पहुंचे तो वहां एक और युवक की लाश पड़ी थी. पूछताछ से पता चला कि वह लाश सुभाष के बड़े बेटे शिववीर (Shivvir) की है.

पता चला कि शिववीर ने ही पूरे परिवार का कत्ल किया था, फिर पकड़े जाने के डर से खुदकुशी कर ली थी. शिववीर की उम्र 28 साल के आसपास थी.

शिववीर के शव के पास ही एक तमंचा पड़ा था. इसी तमंचे से गोली मार कर उस ने खुदकुशी की थी. पुलिस ने तमंचे को सुरक्षित कर लिया. पुलिस ने शिववीर की तलाशी ली तो उस की जेब से मिर्च स्प्रे तथा नींद की गोलियों के 2 खाली पत्ते मिले. पुलिस ने इसे भी सुरक्षित कर लिया.

इस के अलावा पुलिस ने कमरे से कुल्हाड़ी व फावड़ा भी कब्जे में लिया, जिस से शिववीर ने पत्नी, भाभी व पिता पर हमला किया था.  यह बात 24 जून, 2023 की है.

शिववीर ने घर के 5 जनों को क्यों काटा

यह वीभत्स घटना उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के मैनपुरी (Mainpuri) जिले के किशनी थाने के गांव गोकुलपुरा अरसारा में बीती रात घटित हुई थी. सामूहिक नरसंहार (Mainpuri Mass Murder Case) की खबर थाना किशनी पुलिस को मिली तो पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया.

पुलिस अधिकारी भी घटनास्थल की तरफ रवाना हो लिए. कुछ ही देर में एसएचओ अनिल कुमार, एसपी विनोद कुमार, एएसपी राजेश कुमार तथा सीओ चंद्रशेखर सिंह घटनास्थल पर आ गए.

सुभाष के दरवाजे पर अब तक भारी भीड़ जुट चुकी थी. ग्रामीणों की इतनी भीड़ देख कर पुलिस अधिकारी भी हैरान रह गए. उन्हें लगा कि असामाजिक तत्त्व भीड़ को गुमराह कर कहीं कोई बवाल खड़ा न कर दें. इसलिए उन्होंने अतिरिक्त फोर्स मंगा कर गोकुलपुरा गांव में तैनात करा दी.

सामूहिक हत्याकांड (Mainpuri Mass Murder) की खबर सुन कर अब तक सुभाष यादव के घर पर रिश्तेदारों का जमावड़ा शुरू हो गया था. जब भी कोई खास रिश्तेदार आता, महिलाओं का करुण रुदन कलेजा चीरने लगता. माहौल उस समय तो बेहद गमगीन हो उठा, जब नईनवेली दुलहन मृतका सोनी के मम्मीपापा के साथ सैकड़ों लोग आ गए.

वेदराम व उन की पत्नी सुषमा बेटी दामाद का शव देख कर बिलख पड़े. उन का करुण रुदन इतना द्रवित कर देने वाला था कि वहां मौजूद शायद ही कोई ऐसा हो, जिस की आंखों में आंसू न आए हों. पुलिसकर्मी तक अपने आंसू न रोक सके.

Deepak (Mratak)                  Saurabh (Mratak)

मृतक दीपक                                              मृतक सौरभ

मृतक दीपक के मम्मीपापा भी फिरोजाबाद से आ गए थे. वह भी बेटे की लाश के पास सुबक रहे थे. प्रियंका भी पति सौरभ की लाश के पास बिलख रही थी. उस की मम्मी शारदा देवी उसे ढांढस बंधा रही थी. यह बात दीगर थी कि उन की आंखों से भी लगातार आंसू बह रहे थे. क्योंकि उन की आंखों के सामने ही बेटे, बहू और दामाद की लाश पड़ी थी.

पुलिस अधिकारियों ने संवेदना व्यक्त करते हुए किसी तरह समझाबुझा कर मृतकों के घर वालों को शवों से अलग किया, फिर पंचनामा भरवा कर मृतक सोनू, भुल्लन, दीपक, सौरभ, शिववीर तथा सोनी के शवों को पोस्टमार्टम के लिए मैनपुरी के जिला अस्पताल भिजवा दिया.

शवों को पोस्टमार्टम हाउस भिजवाने के बाद एसपी विनोद कुमार ने घर के मुखिया सुभाष यादव से घटना के बारे में जानकारी जुटाई. सुभाष यादव ने बताया कि यह खूनी खेल उस के बड़े बेटे शिववीर ने ही खेला है. 22 जून को उस के मंझले बेटे सोनू की शादी थी. बारात गंगापुरा (इटावा) गई थी. 23 जून को दोपहर बाद बारात वापस आई. घर में बहू की मुंहदिखाई व अन्य रस्में पूरी हुईं. खूब गाना बजाना हुआ.

रात 12 बजे तक डीजे पर सब नाचतेझूमते रहे. शिववीर भी जश्न में शामिल रहा. लेकिन उस के मन में क्या चल रहा है, हम लोग भांप नहीं पाए. रात के अंतिम पहर में इस क्रूर हत्यारे ने हमला कर 5 जनों को काट कर मौत की नींद सुला दिया. शायद उस का इरादा सभी को खत्म करने का था, लेकिन पत्नी बेटी सहित वह बच गए.

Ghar Ke Mukhiya Se Puch-Tach Karte S.P. Vinod Kumar

घर के मुखिया सुभाषचंद यादव से बातचीत करते हुए एसपी विनोद कुमार

एसपी विनोद कुमार ने गोकुलपुरा अरसारा गांव में डेरा जमा लिया था. शवों के अंतिम संस्कार तक वह कोई रिस्क नहीं लेना चाहते थे. देर शाम एडीजी राजीव कृष्ण व आईजी दीपक कुमार गोकुलपुरा पहुंचे और उन्होंने घटनास्थल का निरीक्षण कर घर के मुखिया सुभाषचंद यादव से बातचीत की. उन्होंने एसपी विनोद कुमार से भी घटना से संबंधित जानकारी हासिल की तथा कुछ आवश्यक निर्देश दिए.

मृतकों के शवों का पोस्टमार्टम वीडियोग्राफी के साथ 3 डाक्टरों के पैनल ने किया. वहां क्षेत्रीय विधायक बृजेश कठेरिया मृतकों के परिजनों के साथ रहे और उन्हे धैर्य बंधाते रहे.

पोस्टमार्टम के बाद शव उन के परिजनों को सौंप दिए गए. पुलिस व्यवस्था के साथ दीपक का शव फिरोजाबाद तथा सौरभ का शव उस के गांव चांद हविलिया (किशनी) भेज दिया गया. 3 बेटों सोनू, भुल्लन व शिववीर का दाह संस्कार सुभाष ने किया.

इधर वेदराम यादव अपनी बेटी सोनी का शव ले कर अपने गांव गंगापुरा पहुंचे तो माहौल बेहद गमगीन हो गया. लाडली बेटी का शव देखने के लिए पूरा गांव उमड़ पड़ा. हर आंख में आंसू थे.

दर्द इस बात का था कि जिस बेटी को पूरे गांव ने हंसी खुशी से ससुराल भेजा था, उस का कफन में लिपटा शव गांव आया था. पूर्व दर्जाप्राप्त राज्यमंत्री रामसेवक यादव भी बेहद दुखी थे. क्योंकि लाडली बेटी सोनी उन के गांव व परिवार की थी. वेदराम को ढांढस बंधाते वह स्वयं भी रो रहे थे.

Ghatna Sthal Par Pahuchi Sansad Dimple Yadav

घटनास्थल पर पहुंची डिंपल यादव

सामूहिक नरसंहार से राजनीतिक गलियारों में भी हलचल शुरू हो गई थी. चूंकि मामला यादव परिवार से जुड़ा था और डिंपल यादव भी मैनपुरी से सांसद हैं, इसलिए वह दूसरे रोज ही गोकुलपुरा गांव जा पहुंचीं.

पर्यटन राज्यमंत्री जयवीर सिंह ने भी सामूहिक नरसंहार (Mainpuri Mass Killing) पर गहरा दुख व्यक्त किया. शिववीर ने अपने सगे भाइयों की हत्या क्यों की? परिवार के प्रति उस के मन में ईष्र्या, द्वेष और नफरत की भावना क्यों पनपी? वह क्या हासिल करना चाहता था? यह सब जानने के लिए हमें उस की पारिवारिक पृष्ठभूमि को समझना होगा.

एसडीएम पत्नी का हत्यारा बना पति – भाग 1

शाहपुरा पुलिस फोरैंसिक टीम के साथ जब जांच के लिए एसडीएम बंगले पर पहुंची तो पाया कि एसडीएम निशा की मौत जिस कमरे में हुई थी, वहां के बैड की बैडशीट और तकिया का कवर वहां मौजूद नहीं था.  पुलिस टीम ने जब मनीष से इस के बारे में पूछा तो उस ने कहा, ”मैडम को उल्टी होने पर नाक से ब्लड आया था, जिस से कपड़े खराब हो गए थे. इसी वजह से उस ने बैडशीट और तकिए का कवर मशीन में धोने के लिए डाला था.’’

पुलिस टीम ने जब वाशिंग मशीन का ढक्कन खोला तो बैडशीट और तकिए के कवर के साथ एसडीएम निशा के कपड़े भी मशीन के सुखाने वाले पोर्शन में पड़े हुए थे. पुलिस टीम यह सोच कर हैरान थी कि एसडीएम बंगले पर मौजूद कर्मचारी से कपड़े मशीन में धुलवाने के बजाय मनीष ने खुद यह काम क्यों किया. मनीष के इसी बयान पर पुलिस का शक यकीन में बदल गया.

रविवार 28 जनवरी, 2024 का दिन था और मौसम का सब से सर्द दिन. ऐसे में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात सीनियर डा. रत्नेश द्विवेदी अपने सरकारी आवास पर बैठे धूप का आनंद ले रहे थे, तभी दोपहर करीब 2 बजे उन के मोबाइल फोन पर घंटी बजी.

जैसे उन्होंने काल रिसीव की तो दूसरी तरफ से हड़बड़ी में एक आवाज सुनाई दी, ”डाक्टर साहब, मैं गाड़ी भेज रहा हूं, जल्दी से एसडीएम के बंगले पर आ जाइए. मैडम की तबीयत ज्यादा खराब है.’’

फोन मध्य प्रदेश के डिंडोरी जिले की तहसील शहपुरा की एसडीएम निशा नापित के बंगले से आया था, लिहाजा डा. रत्नेश द्विवेदी बिना देर किए तैयार हो गए और जैसे ही गाड़ी आई, उस में बैठ कर वह एसडीएम बंगले पर पहुंच गए.

बंगले के बाहर एक शख्स उन का बेसब्री से इंतजार कर रहा था. जैसे ही डा. द्विवेदी गाड़ी से उतरे तुरंत ही उस शख्स ने कहा, ”डाक्टर साहब, अंदर चलिए. मैडम सुबह 10 बजे के बाद से ही कुछ बोल नहीं रहीं.’’

डा. रत्नेश द्विवेदी उस शख्स के साथ बंगले के अंदर दाखिल हुए. एसडीएम निशा नापित अपने बैड पर बेहाल पड़ी थीं. डा. द्विवेदी ने स्टेथस्कोप के एक सिरे को अपने कानों से  और उस का दूसरा सिरा मैडम के सीने के बाईं ओर लगाया और उस शख्स से मुखातिब होते हुए बोले, ”मैडम की ऐसी हालत कब से है?’’

”डाक्टर साहब, कल शनिवार को उन का व्रत था और मेरे मना करने के बाद भी वह 2 अमरूद खा गईं. मैडम का एक ही गुर्दा काम करता है और उन को सर्दीखांसी की हमेशा दिक्कत रहती थी. शायद इसी वजह से आज 10 बजे के आसपास उन को उल्टी हुई, फिर उन की नाक से ब्लड आया. इसे ले कर हमारी बहस भी हुई. वह नहीं मानीं, गुस्से में सो गईं तो मैं भी गुस्से में बाहर आ गया.’’ एसडीएम बंगले पर मौजूद उस शख्स ने बताया.

”जब उल्टी होने पर नाक से ब्लड आया था, तभी आप को मुझे फोन करना था.’’ डा. रत्नेश द्विवेदी बोले.

”रविवार को कोई काम रहता नहीं, इसलिए मैं ने जगाया ही नहीं. 10 बजे काम वाली बाई आई तो मैं घूमने चला गया. फिर बाई ने खाना बनाया और चली गई. फिर एक बजे के आसपास मैं ने सोचा खाने के लिए मैडम को जगा दूं. जब वह नहीं जागीं तो मैं ने आप को काल किया.’’

”मैडम को तत्काल अस्पताल ले चलो. हाइपरटेंशन या फिर ब्रेन हेमरेज की वजह से नाक से खून निकलता है.’’ कान से स्टेथस्कोप निकालते हुए डा. द्विवेदी ने कहा.

यह घटना 28 जनवरी, 2024 दोपहर 3 बजे की थी. उप जिलाधिकारी (एसडीएम) निशा को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शहपुरा लाया गया, जहां पर मौजूद डाक्टरों ने जांच के बाद बताया कि उन की मौत हो चुकी है. तहसील के सब से बड़े अधिकारी की मौत का मामला था, ऐसे में डा. रत्नेश द्विवेदी ने उन की मौत की सूचना जिले के वरिष्ठ अधिकारियों को दे दी.

वाशिंग मशीन देख कर पुलिस क्यों हुई हैरान

सूचना मिलते ही डिंडोरी जिले के कलेक्टर विकास मिश्रा और एसपी अखिल पटेल, बालाघाट रेंज के डीआईजी मुकेश श्रीवास्तव भी शहपुरा अस्पताल पहुंच गए. संदिग्ध हालात में मौत की वजह से पुलिस ने एसडीएम का बंगला सील कर दिया और निशा नापित के घर वालों को भी सूचना दे दी गई.

एसपी अखिल पटेल

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के डाक्टरों को शक होने पर पुलिस को खबर दे कर एसडीएम निशा का इलाज शुरू किया तो पाया कि निशा की मौत तो कोई 4-5 घंटे पहले ही हो चुकी थी.

मध्य प्रदेश के आदिवासी जिले डिंडोरी की शहपुरा तहसील में पिछले साल ही तहसीलदार पद से प्रमोट हुई निशा एसडीएम बनी थीं, इसलिए कस्बे में उन्हें हर कोई जानता था. शहपुरा पुलिस आई और उस ने एसडीएम के साथ रहने वाले उन के पति मनीष से पूछताछ की तो वह एक ही कहानी दोहराता रहा. पुलिस ने उन के ड्राइवर और घर के अन्य कर्मचारियों से भी पूछताछ की.

पुलिस की पूछताछ में मनीष ने कहा कि वह प्रौपर्टी ब्रोकर है और पत्नी निशा के पास आता जाता रहता है. पुलिस के शक की सुई मनीष की ओर ही घूम रही थी. एसपी अखिल पटेल ने मामले को गंभीरता से लेते हुए एसडीओपी मुकेश अविंदा के नेतृत्व में एक टीम का गठन किया, जिस में जांच शहपुरा पुलिस थाने के टीआई एस.एल. मरकाम को सौंप दी.

एसडीएम निशा की मौत की खबर जैसे ही उन के घर वालों को लगी तो उन्हें पहले तो विश्वास ही नहीं हुआ. शहपुरा में पोस्टमार्टम के बाद 30 जनवरी को निशा का पार्थिव शरीर छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर ले जाया गया, जहां उन के परिवार के लोगों की मौजूदगी में अंतिम संस्कार किया गया. निशा का अंतिम संस्कार बहन नीलिमा के बेटे स्वप्निल ने किया.