एआई की सीईओ बनी बेटे की कातिल – भाग 2

रिसैप्शनिस्ट ने डिसूजा से पूछा कि क्या वह बेंगलुरु के लिए जा सकता है? एक महिला पैसेंजर कैब से गोवा से बेंगलुरु जाना चाहती है.

7 जनवरी को रविवार का दिन था, अमूमन डिसूजा संडे को अपने परिवार के साथ ही रहता था. आमतौर पर डिसूजा अपनी कैब इतनी दूर नहीं ले जाता था, लेकिन डिसूजा को नाइट शिफ्ट बहुत पसंद थी. रात को कैब चलाना उसे अच्छा लगता था. क्योंकि तब सड़कें खाली हुआ करती हैं.

क्योंकि पैसेंजर को बेंगलुरु छोड़ कर उसे वापस आना था, इसलिए डिसूजा ने वापसी का किराया भी जोड़ कर कुल 30 हजार रुपए की मांग की थी. साथ ही उस ने यह भी कहा था कि चूंकि उसे गोवा अकेले वापस आना है, इसलिए वह अपने साथ एक साथी ड्राइवर को भी ले कर आएगा. इस के बाद सौदा तय हो गया.

इस के बाद सूचना सेठ के कहने पर रिसैप्शनिस्ट ने कैब ड्राइवर से कहा कि वह ठीक 12 बजे अपनी कैब ले कर होटल पहुंच जाए.

इस बीच 10 जनवरी, 2024 को मासूम चिन्मय की पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी आ गई थी. पोस्टमार्टम करने वाले डा. कुमार नाइक के अनुसार बच्चे का गला घोंट कर हत्या की गई थी. रिपोर्ट के अनुसार तकिया या तौलिए का इस्तेमाल गला घोंटने के दौरान किया गया था. बच्चे का चेहरा और छाती सूजी हुई थी और उस की नाक से खून भी बह रहा था.

पुलिस ने क्राइम सीन क्यों किया रीक्रिएट

12 जनवरी, 2024 को गोवा पुलिस (Goa Police) सूचना सेठ को ले कर क्राइम स्पौट गोवा के सोल बनयान ग्रांड होटल के कमरा नंबर 404 में पहुंची.

वारदात वाली जगह पर पुलिस ने क्राइम सीन को रीक्रिएट किया और हत्या के मामले में गहराई से जांच की. सूचना सेठ के कमरे से गोवा पुलिस को कफ सिरप की 2 खाली शीशियां भी मिलीं. पुलिस सूत्रों के मुताबिक बेटे की हत्या से पहले सूचना सेठ ने उसे नशे की भारी डोज दी थी.

पोस्टमार्टम करने वाले डा. कुमार नाइक ने रिपोर्ट में बताया कि बच्चे की ओर से विरोध करने का कोई भी निशान नहीं मिला था. शायद बच्चा भारी नशे में था. उस के बाद सूचना सेठ ने बच्चे का तकिए से नाक मुंह दबा कर या किसी कपड़े के सहारे गला घोंट दिया था.

बच्चे की हत्या के बाद जब सूचना सेठ को चित्रदुर्ग से गिरफ्तार किया गया था तो उस समय पुलिस ने जब उस का बैग खुलवाया तो उस में कुछ नहीं मिला था. हालांकि पुलिस ने जब उस बैग में से कपड़े निकाले तो खिलौनों के बीच उस के बेटे का शव बरामद हुआ था.

इस बीच सूचना सेठ का मैडिकल भी कराया गया और साथ ही उस की जांच मनोचिकित्सिक से भी कराई गई.

आखिर कौन है सूचना सेठ?

अपने 4 साल के बेटे की हत्या करने वाली सूचना सेठ बंगाल की रहने वाली है. उस ने कलकत्ता विश्वविद्यालय से एस्ट्रोफिजिक्स के साथ प्लाज्मा फिजिक्स की डिग्री भी हासिल की है. उस ने भौतिकी में मास्टर्स की. इस के बाद सूचना सेठ ने साल 2008 में फस्र्ट क्लास औनर्स हासिल किया था.

सूचना सेठ ने बेंगलुरु में बूमरेंग कामर्स में सीनियर डेटा साइंटिस्ट का पद भी संभाला था. वह औप्टिमाइजेशन और इंटेलिजेंस के लिए डेटा संचालित उत्पादों को डिजाइन भी करती थी. उस ने यहीं पर 2 पेटेंट भी दाखिल किए.

सूचना सेठ इनोवेशन लैब्स के साथ भी जुड़ी थी और डेटा साइंसेज ग्रुप में सीनियर एनालिस्ट कंसलटेंट के रूप में भी काम किया. वर्तमान में सूचना सेठ ‘द माइंडफुल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Mindful AI Lab) की सीईओ थी. सूचना सेठ पिछले 4 साल से भी अधिक समय से इस लैब का नेतृत्व कर रही थी.

उस ने 2 साल तक बर्कमैन क्लेन सेंटर में भी काम किया है. इस के अलावा वह बोस्टन, मैसाचुसेट्स में भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में काम कर चुकी है. सूचना सेठ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) क्षेत्र की दुनिया की 100 शीर्ष महिलाओं में शामिल है.

उन के दांपत्य में क्यों पड़ी दरार

नवंबर 2010 में सूचना सेठ का विवाह वेंकट रमन से कोलकाता में हुआ था, लेकिन वैवाहिक जीवन असफल रहा था. वह और वेंकट रमन बेंगलुरु में एकदूसरे से मिले थे, तब दोनों की उम्र तकरीबन 20 वर्ष थी. दोनों की महत्त्वाकांक्षाएं व तकनीक के प्रति उत्साह दोनों को सिलिकौन वैली ले आया, जिस ने उन के रोमांस को भी परवान चढ़ाया. सूचना सेठ पश्चिम बंगाल से थी, जबकि वेंकट रमन केरल से, परंतु दोनों का आकर्षण एकदूसरे के प्रति शुरू से ही रहा.

9 सालों की शादी में इस दंपति के घर में अगस्त 2019 को एकमात्र बेटे के रूप में चिन्मय का जन्म हुआ था. दंपति से परिवार बनना उन के जीवन का एक नया और सुखद अध्याय था, लेकिन दुर्भाग्य से यह एक अलगाव का कारण बन गया. चिन्मय के जन्म ने उन दोनों के बीच एक गहरी खाई को जन्म दे दिया था.

पहले से ही इस तनावपूर्ण स्थिति को कोविड लौकडाउन ने और बढ़ा दिया, जिस ने उन दोनों को नवजात शिशु के साथ घर में ही कैद कर के रख दिया था. उन दोनों के आपसी संबंध दिन प्रतिदिन बद से बदतर होते जा रहे थे. अगस्त 2022 में दोनों का रिश्ता पूरी तरह से टूट चुका था.

8 अगस्त, 2022 को दर्ज हुए मामले में सूचना सेठ ने अपने पति वेंकट रमन पर उसे और उस के बेटे को प्रताडि़त करने का आरोप लगाया था. उस ने कोर्ट में सबूत के तौर पर वाट्सऐप मैसेज, फोटो और मैडिकल रिकौर्ड की तसवीरें पेश की थीं.

हालांकि वेंकट रमन ने कोर्ट में अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों से इंकार किया, लेकिन अदालत ने वेंकट रमन के खिलाफ रिस्ट्रेनिंग और्डर जारी कर दिया था यानी उसे सूचना सेठ के घर में प्रवेश करने पर रोक लगा दी थी.

इस के अलावा किसी भी माध्यम से संपर्क करने की रोक भी लगा दी गई थी. वेंकट रमन पर बेटे से फोन या किसी भी माध्यम से संपर्क करने की रोक लगा दी गई थी. कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई 29 जनवरी, 2024 तक के लिए स्थगित कर दी थी.

इस कानूनी लड़ाई के बीच अपने संरक्षण में बेटे को पा कर सूचना सेठ अपने जीवन में आगे बढ़ती हुई दिखाई देने लगी थी. एक प्रतिष्ठित और कामकाजी एकल मां के रूप में अपने निजी जीवन को संतुलित व व्यवस्थित करते हुए अब वह एक लग्जरी अपार्टमेंट में रहने लगी थी, लेकिन तलाक की कड़वाहट उस के जीवन में बढ़ती ही जा रही थी.

अब सूचना सेठ ने अधिक कमाई का हवाला देते हुए अपने पूर्व पति वेंकट रमन से पर्याप्त भरण पोषण की मांग कर दी थी, जबकि वह अब तक कम भरण पोषण दे रहा था और बेटे से मिलना चाह रहा था, जिसे सूचना सेठ दिन बदिन मुश्किल बनाती चली जा रही थी.

वैसे यदि देखा जाए तो तलाक आज के युग में कोई असामान्य बात नहीं है, लेकिन इस में कठिनाइयां, प्रताडऩाएं काफी जटिल होती हैं और कभी कभी तो यह हिंसा का कारण भी बन जाती है.

दिसंबर 2023 में अदालत ने आदेश जारी कर के वेंकट रमन को हर रविवार अपने बेटे से मिलने की अनुमति दे दी थी. अचानक अदालत द्वारा आए इस अप्रत्याशित फैसले से सूचना सेठ एकदम से परेशान हो कर अपना मानसिक संतुलन खोने लगी थी. उस ने अब अपने घर वालों से वेंकट रमन के लिए जहर उगलना शुरू कर दिया था कि वेंकट रमन अब उस के बेटे को उस से छीन लेना चाहता है.

दूसरी ओर उस का बेटा चिन्मय भी अपने पिता के बिना काफी खालीपन सा महसूस करता था और अपनी मम्मी सूचना सेठ से अकसर अपने पापा वेंकट रमन के बारे में बातें किया करता था और साथ ही अपने पापा से मिलने की जिद भी करने लगा था.

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जिस क्षण सूचना सेठ अपने 4 वर्षीय बेटे चिन्मय को ले कर बेंगलुरु से गोवा की फ्लाइट में सवार हुई थी, वह उस का एक पूर्व नियोजित प्लान ही था. एक होटल में ठहरी, अपने बेटे की खांसी के बहाने उस ने रिसैप्शन पर कफ सिरप मंगाने के लिए एक बड़े ही अजीब तरीके से अनुरोध किया.

इन सभी घटनाओं का यदि हम अध्ययन करें तो यह साफ साफ पता चलता है कि उस ने ये सब कुछ पहले से ही तय कर लिया था. जो कफ सिरप की खाली शीशियां होटल के कमरा नंबर 404 में मिली थीं, उन दोनों का इस्तेमाल शायद उस ने अपने अबोध बेटे को बेहोश करने के लिए किया था.

अनुराधा बिराजदार हत्याकांड : इज्जत के नाम पर चढ़ी बलि

5 अक्तूबर, 2018 सुबह करीब 9 बजे वोराले गांव की रहने वाली मालन म्हमाणे अपने घर की सफाई कर  रही थी, तभी उसे 2 खत मिले. मालन म्हमाणे ने वह खत ला कर अपने बेटे बालासाहेब म्हमाणे को देते हुए पढ़ कर सुनाने को कहा.

बालासाहेब म्हमाणे ने जब खतों को पढ़ा तो वह परेशान हो उठा. उस के चेहरे पर पसीना आ गया, क्योंकि वे दोनों खत उस की भांजी अनुराधा के द्वारा लिखे हुए थे. वह उन के यहां ही रह रही थी और एक दिन पहले ही अपनी मां के साथ अपने घर लौट गई थी. दोनों खतों में अनुराधा ने अपने पिता और सौतेली मां से अपनी जान को खतरा और अपनी हत्या का संदेह जताया था.

बेटे को परेशान देख कर मां मालन म्हमाणे भी घबरा गईं. उन्होंने बालासाहेब का कंधा हिलाते हुए पूछा, ‘‘क्या हुआ तुझे, यह खत किस के हैं, जो तू इतना परेशान हो गया?’’

बालासाहेब म्हमाणे ने लंबी सांस लेते हुए कहा, ‘‘मां यह खत अनुराधा के हैं और इन में कुछ अच्छा नहीं लिखा है. उस के साथ कुछ गलत होने वाला है.’’

यह सुन कर मालन म्हमाणे के होश उड़ गए.

अनुराधा कैसी है, यह जानने के लिए मां ने उसी समय उसे फोन किया तो दूसरी ओर से किसी ने फोन नहीं उठाया. इस के बाद तो उन का और ज्यादा परेशान होना स्वाभाविक था. लिहाजा उन दोनों ने अनुराधा के गांव जाने की तैयारी कर ली.

उसी समय किसी ने उन्हें फोन कर के अनुराधा के बारे में जो बताया, उसे सुन कर मांबेटे के पैरों तले से जमीन खिसक गई. उन्हें बताया गया कि अचानक तबीयत खराब हो जाने के कारण अनुराधा की मौत हो गई और रात में ही उस का अंतिम संस्कार भी कर दिया गया.

मालन म्हमाणे ने अपने दामाद यानी अनुराधा के पिता को फोन किया तो उन्होंने भी अनुराधा की डेंगू से मौत हो जाने की पुष्टि की. यह बात मालन के गले नहीं उतरी थी. अनुराधा को भला ऐसी कौन सी बीमारी हो गई थी, जब वह यहां से गई थी तो भलीचंगी थी.

अपनी नातिन की मौत की बात मालन के गले नहीं उतर रही थी. आश्चर्य की बात यह थी रिश्तेदारों को कोई खबर दिए बिना उस का दाह संस्कार भी कर दिया गया था.

मालन को अनुराधा के मांबाप पर संदेह होने लगा. अनुराधा का मातम मनाने के लिए उस के घर न जा कर वह सीधे मंगलमेढ़ा पुलिस थाने पहुंच गई. थानाप्रभारी प्रभाकर मोरे की सारी बातें बता कर उन्होंने अनुराधा के दोनों खत थानाप्रभारी को सौंप दिए.

मामला संदिग्ध भी था और सनसनीखेज भी. मंगलमेढ़ा थानाप्रभारी प्रभाकर मोरे ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उन की शिकायत दर्ज कर इस की जानकारी अपने वरिष्ठ अधिकारियों के साथसाथ पुलिस कंट्रोल रूम और फोरैंसिक टीम को दे दी. इस के बाद वह असिस्टेंट इंसपेक्टर वैभव मार्कंड, सिपाही दत्तात्रेय तोंदले, संजय गुंटाल को साथ ले कर घटनास्थल की ओर रवाना हो गए.

अनुराधा की अचानक मौत और उस के दाह संस्कार करने की खबर जब गांव में फैली तो गांव वाले हैरान रह गए. देखते ही देखते गांव के तमाम लोग अनुराधा के घर के सामने इकट्ठे हो गए.

पुलिस टीम ने अनुराधा के परिवार वालों और गांव वालों से उस के बारे में पूछताछ शुरू की. थोड़ी देर में जानकारी पा कर एसपी (ग्रामीण) मनोज पाटिल, एसडीपीओ दिलीप जगदाले भी फोरैंसिक टीम के साथ पहुंच गए. लोगों से बातचीत कर के और थानाप्रभारी को दिशानिर्देश दे कर अधिकारी अपने औफिस लौट गए.

अपने वरिष्ठ अधिकारियों के जाने के बाद थानाप्रभारी प्रभाकर मोरे उस जगह पर पहुंचे, जहां अनुराधा का अंतिम संस्कार किया गया था. वहां से उन्होंने अनुराधा के शव की राख का सैंपल लिया. जब अनुराधा के कमरे की तलाशी ली गई तो वहां जहरीले पदार्थ की एक शीशी मिली.

दोनों को परीक्षण के लिए प्रयोगशाला भेज दिया गया. विस्तृत पूछताछ के लिए पुलिस अनुराधा के मांबाप को थाने ले आई. उन से सख्ती से पूछताछ की गई तो उन्होंने स्वीकार कर लिया कि अनुराधा ने उन के सामने ऐसे हालात पैदा कर दिए थे, जिस से उन्हें उस की हत्या करने के लिए मजबूर होना पड़ा. अनुराधा की हत्या की उन्होंने जो कहानी बताई, वह इस प्रकार निकली—

20 वर्षीय अनुराधा देखने में जितनी खूबसूरत थी, उतनी ही चंचल और महत्त्वाकांक्षी भी थी. जो उसे देखता था, अपने आप उस की तरफ खिंचा चला जाता था. लेकिन अनुराधा जिस की तरफ खिंची चली गई, वह उस के बचपन का दोस्त श्रीशैल विराजदार था.

अनुराधा के पिता विट्ठल विराजदार महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के तीर्थस्थल पंढरपुर, तालुका मंगलमेढ़ा, गांव सलगर के रहने वाले थे. तालुका मंगलमेढ़ा में उन की गिनती एक रसूखदार किसान के रूप में होती थी. उन की समाज में काफी इज्जत और प्रतिष्ठा थी.

एक अच्छे काश्तकार होने के साथ साथ वह मंगलमेढ़ा विद्या मंदिर हाईस्कूल में क्लर्क थे. वह इज्जतदार सामाजिक व्यक्ति थे, जबकि अनुराधा का स्वभाव अपने पिता से एकदम अलग था. वह खुले दिमाग की थी. उस के स्वभाव में इंसानियत भी थी और दया भी. वह ऊंचनीच, अमीरगरीब के भेदभाव को नहीं मानती थी.

अनुराधा अपनी बहन और भाई से बड़ी थी. जब वह 2-3 साल की थी, तभी उस की मां की मृत्यु हो गई थी. मां की मौत के बाद पिता के सामने बच्चों की देखभाल और काश्तकारी की वजह से समस्या खड़ी हो गई. इस समस्या के चलते वह किसी पर भी ध्यान नहीं दे पा रहे थे.

तब विट्ठल विराजदार ने अपने नातेरिश्तेदारों और परिवार वालों से सलाहमशविरा कर के दूसरी शादी करने का फैसला किया और पास के गांव की रहने वाली श्रीदेवी से दूसरा विवाह कर लिया.

श्रीदेवी ने विट्ठल विराजदार की गृहस्थी को संभल लिया. अपनी काश्तकारी संभालने के लिए विट्ठल ने कर्नाटक के सिंदगी के रहने वाले चिन्नप्पा विराजदार को अपने यहां नौकरी पर रख लिया. इस के बाद विट्ठल विराजदार की गाड़ी पटरी पर आ गई.

श्रीशैल विराजदार और अनुराधा हमउम्र थे. श्रीशैल जब कभी अपने पिता से मिलने आता तो अनुराधा उस से घुलमिल जाती थी. उस समय वह यह नहीं जानती थी कि वह उन के नौकर का बेटा है.

कुछ दिनों तक तो श्रीदेवी अपनी सौतन के बच्चों की ठीक से देखभाल करती रही, लेकिन जब वह स्वयं मां बनी तो सौतन के बच्चों के प्रति उस का व्यवहार बदल गया. इसी बीच संदिग्ध परिस्थितियों में अनुराधा की छोटी बहन की मौत हो गई, जिस से अनुराधा को काफी दुख हुआ.

4 साल की हो चुकी अनुराधा को मां और सौतेली मां के बीच के फर्क का अंदाजा होने लगा था. यह फर्क भारी दरार में न बदल जाए, इसलिए विट्ठल विराजदार ने उसे कुछ दिनों के लिए वोराले गांव में उस की नानी और मामा के यहां भेज दिया.

वोराले गांव में अपनी नानी और मामा के साथ रह कर अनुराधा काफी होशियार और समझदार हो गई थी. उस ने जब 10वीं क्लास अच्छे अंकों से पास करती तो आगे की पढ़ाई के लिए विट्ठल विराजदार अनुराधा को अपने गांव ले आए और अच्छे कालेज में दाखिला दिलवा दिया.

अनुराधा डाक्टर बनना चाहती थी. उस की पढ़ाई में रुचि और मेहनत देख कर विट्ठल अनुराधा को डाक्टर के रूप में देखने लगे थे.

अनुराधा ने भी अपने पिता के सपनों को पूरा करने के लिए जीतोड़ मेहनत की, जिस से 12वीं की परीक्षा में उस ने 99 प्रतिशत अंक हासिल किए. इस के बाद अनुराधा ने कर्नाटक के सिंदगी मैडिकल कालेज में एडमिशन ले लिया और कालेज के हौस्टल में रह कर मैडिकल की पढ़ाई करने लगी.

विट्ठल विराजदार की खेती संभालने वाला चिन्नप्पा विराजदार सिंदगी का रहने वाला था. उस का बेटा श्रीशैल अनुराधा का बचपन का दोस्त था. सिंदगी मैडिकल कालेज में आ जाने के बाद श्रीशैल कभीकभी अनुराधा से मिलने आने लगा. वह उस का पूरा ध्यान रखता था. कभीकभी अनुराधा भी श्रीशैल के घर पहुंच जाती थी. श्रीशैल के परिवार वाले अपने मालिक की बेटी की हैसियत से उस का आदरसत्कार करते थे.

छुट्टी के दिनों में श्रीशैल अनुराधा को ले कर इधरउधर घुमाने के लिए निकल जाता था. दोनों की बचपन की दोस्ती कब प्यार में बदल गई, उन्हें पता ही नहीं चला. जैसे जैसे समय बीत रहा था, वैसेवैसे उन के प्यार का रंग भी गहरा होता जा रहा था. एक समय ऐसा भी आया जब अनुराधा और श्रीशैल ने एकदूसरे के साथ जीने मरने की कसमें खा लीं.

किसी माध्यम से जब इस बात की जानकारी अनुराधा के पिता विट्ठल विराजदार को हुई तो उन का खून खौल उठा. उन्होंने अनुराधा को ले कर जो सपना देखा था, वह टूट कर बिखरता हुआ नजर आया.

मामला काफी नाजुक था. मौका देख कर पतिपत्नी दोनों ने अनुराधा को काफी समझाया. उसे अपनी मान मर्यादा के बारे में सचेत किया. लेकिन श्रीशैल के प्यार में आकंठ डूबी अनुराधा पर उन की किसी बात का असर नहीं हुआ.

अनुराधा पर अपनी बातों का असर न होता देख विट्ठल विराजदार और उन की पत्नी श्रीदेवी परेशान हो उठे. उन्होंने श्रीशैल और अनुराधा को एकदूसरे से दूर करने के लिए अपने यहां काम कर रहे श्रीशैल के पिता को यह कह कर काम से निकाल दिया कि वह अपने बेटे को समझा दे. अगर उस ने उन की इज्जत से खेलने की कोशिश की तो परिणाम अच्छा नहीं होगा.

इस के साथसाथ उन्होंने अनुराधा को मैडिकल कालेज के हौस्टल से बुला कर घर पर पढ़ाई करने को कहा. इस के बावजूद श्रीशैल ने अनुराधा का पीछा नहीं छोड़ा तो विट्ठल विराजदार ने अपने सगे संबंधियों के साथ श्रीशैल को काफी मारापीटा.

उन लोगों ने परिवार वालों को यह धमकी भी दी कि वह उसे उन की बेटी अनुराधा से दूर रखें. विट्ठल विराजदार और सगे संबंधियों के खिलाफ श्रीशैल के परिवार वालों ने बीजापुर एसीपी औफिस में जा कर शिकायत की.

कहते हैं इश्क बगावत कर बैठे तो दुनिया का रुख मोड़ दे, महलों में आग लगा दे. यही हाल अनुराध और श्रीशैल का था. परिवार की सख्तियों के बावजूद उन के प्यार में कोई कमी नहीं आई थी. बल्कि उन का प्यार और मजबूत हो गया था. दोनों एकदूसरे को छोड़ने के लिए तैयार नहीं थे. उन की मुश्किलें अब पहले से जरूर ज्यादा बढ़ गई थीं, लेकिन अब वे सावधानी बरतने लगे थे.

श्रीशैल और अनुराधा अमीर गरीब, मानसम्मान की सीमाएं खत्म कर एक हो जाना चाहते थे. उन्हें तलाश थी तो सिर्फ एक मौके की. यह मौका उन्हें पहली अक्तूबर, 2018 को मिल गया. उस दिन कालेज के एक पेपर के बहाने अनुराधा घर से निकली तो वापस नहीं आई. उस ने अपने प्रेमी श्रीशैल के साथ बीजापुर जा कर कोर्टमैरिज कर ली. वहां से वह श्रीशैल के साथ उस के घर चली गई.

इस बात की जानकारी जब विट्ठल विराजदार और श्रीदेवी को हुई तो उन का खून खौल उठा. अनुराधा ने अपने से कम हैसियत और कम पढ़ेलिखे नौकर के बेटे के साथ कोर्टमैरिज कर उन के अहं और मानसम्मान को जो ठेस पहुंचाई थी, वह उन की बरदाश्त के बाहर था. उन्हें अनुराधा से नफरत हो गई.

2 अक्तूबर, 2018 को विट्ठल विराजदार अनुराधा की ससुराल गए, वहां उन्होंने ठंडे दिमाग से उस के घर वालों और श्रीशैल से बातचीत की और शादी की कुछ रस्मों को निभाने के बहाने अनुराधा को अपने साथ ले आए. लेकिन वह अनुराधा को अपने घर लाने के बजाए अपनी ससुराल वोराले गांव ले कर गए. वहां अनुराधा के मामा और नानी को सारी बातें बता कर उसे समझाने के लिए कहा.

वह 2 दिनों तक अपनी ननिहाल में मामा और नानी के साथ रही, लेकिन डरी और सहमी सी. मामा और नानी ने उसे काफी समझाया, लेकिन अनुराधा के मन से पिता और सौतेली मां का भय कम नहीं हुआ.

उस ने 2 दिनों में अपने पिता और सौतेली मां के खिलाफ 2 लंबे खत लिखे, जिस में उस ने अपनी मौत हो जाने की जिम्मेदारी उन के ऊपर डाली और वह खत किचन में रख दिए, जो बाद में उस की नानी के हाथ लग गए थे.

4 अक्तूबर, 2018 को एक खतरनाक योजना बना कर विट्ठल विराजदार अपनी ससुराल आया और अपनी सास व साले से यह कह कर अनुराधा को अपने साथ ले गया कि उसे पेपर दिलवाने कालेज ले कर जाना है. अनुराधा की मौत से अनभिज्ञ उस की नानी और मामा ने उसे विट्ठल विराजदार के साथ भेज दिया.

घर के अंदर अनुराधा की सौतेली मां श्रीदेवी ने उस की मौत का सारा इंतजाम पहले ही तैयार कर रखा था. गांव आ कर विट्ठल विराजदार और श्रीदेवी ने अनुराधा पर श्रीशैल से रिश्ता खत्म करने का दबाव बनाया, जिसे अनुराधा ने नकार दिया. इस से नाराज विट्ठल विराजदार और श्रीदेवी ने अनुराधा को जबरन जहरीला पदार्थ पिला दिया, जिस की वजह से सुबह 4 बजे अनुराधा की मौत हो गई.

पुलिस के शिकंजे से बचने के लिए विट्ठल रात में ही अनुराधा के शव को अपने खेत में ले गया और जला दिया. सुबह को उस ने गांव में यह अफवाह फैला दी कि अनुराधा की डेंगू के कारण अचानक मौत हो गई थी. इसलिए उस ने रात में ही उस का दाह संस्कार कर दिया. इस तरह सिर्फ 5 दिन की दुलहन अनुराधा खोखली प्रतिष्ठा और अहं की आग में जल कर राख हो गई थी.

अनुराधा की मौत की खबर जब टीवी द्वारा श्रीशैल और उस के परिवार वालों को मिली तो उन पर वज्रपात सा हुआ. अनुराधा के मातापिता श्रीशैल को भी मारने वाले थे, मगर वह बच गया.

जांच अधिकारी सहायक इंसपेक्टर वैभव मार्कंड ने विट्ठल विराजदार और श्रीदेवी से पूछताछ कर उन के खिलाफ हत्या का केस दर्ज कर लिया. बाद में दोनों को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया. इस के साथ ही पुलिस ने अनुराधा की छोटी बहन की संदिग्ध स्थिति में हुई मौत की जांचपड़ताल भी शुरू कर दी थी.

एआई की सीईओ बनी बेटे की कातिल – भाग 1

अपने बेटे चिन्मय (Chinmay) की हत्या करने वाली (Mindful AI Lab) स्टार्टअप (Startup) की सीईओ (CEO) सूचना सेठ (Suchana Seth) ने हत्या करने से पहले बेटे को  लोरी सुनाई थी. इतना ही नहीं, बच्चे की हत्या करने के बाद उस ने खुद की जान लेने की कोशिश की थी. इस के लिए उस ने अपनी कलाई की नस को भी काटा था.  लेकिन अपनी मौत के डर व पीड़ा को वह सहन न कर सकी और इस के बाद अपने बेटे के शव को खिलौने से भरे बैग में ले कर टैक्सी के सहारे भाग निकली.

8 जनवरी,  2024 को पूरे देश में एक खबर आग की तरह फैल गई थी. हर अखबार और हर न्यूज चैनल की हैडिंग में यह खबर जब आई तो उसे सुन कर व देख कर लोगों के दिल दहल उठे थे.

मानवता को तारतार कर देने वाली यह चौंका देने वाली घटना उत्तरी गोवा (Goa) के कैंडोलिम (Candolim) स्थित सोल बनयान ग्रांड होटल (Sol Banyan Grand Hotel) से सामने आई, जहां पर एक महिला को अपने ही 4 साल के मासूम बेटे की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया. आरोपी महिला 39 वर्षीय सूचना सेठ (Suchana Seth) अपने बेटे के शव को बैग में रख कर गोवा से कर्नाटक जा रही थी, तभी गोवा पुलिस ने कर्नाटक के चित्रदुर्ग से उसे रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया. आरोपी महिला कोई मामूली इंसान नहीं थी, बल्कि वह एक एआई स्टार्टअप (AI Startup) के सीईओ पद पर कार्यरत थी.

सूचना सेठ (Suchana Seth) किसी परिचय का मोहताज नहीं है, क्योंकि कामयाबी की जिस बुलंदी को इस नाम ने छुआ था, उस का कसीदा तो सारा सोशल मीडिया पढ़ ही रहा था, लेकिन इस वक्त यह नाम कसीदे के लिए नहीं पढ़ा जा रहा था, बल्कि मानवता को शर्मसार कर देने वाले एक संगीन जुर्म के सिलसिले में इस नाम की चर्चा मीडिया में हो रही थी.

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बंद कमरे में गोवा की यह वारदात मानवीय रिश्तों को शर्मसार कर देने वाली है. 4 साल के एक मासूम की हत्या,  हत्यारा भी कोई और नहीं बल्कि 9 महीने तक उसे कोख में पाल कर जन्म देने वाली उस की अपनी सगी मां थी.

100 प्रतिभाशाली महिलाओं में शामिल सीईओ सूचना सेठ ने अपने बेटे से कहा, ”चलो बेटा, गोवा घूमने चलते हैं.’’

4 वर्षीय चिन्मय अपनी मां की बात को सुन कर खुश हो गया था. उसे इस बात का अंदाजा बिलकुल भी नहीं था कि जो मां उस की हर सुविधा, खुशी का इतना खयाल रखती है, इतना अधिक प्यार करती है, उसे नुकसान भी पहुंचा सकती है.

होटलकर्मियों को सूचना सेठ पर क्यों हुआ शक

अपनी प्लानिंग के अनुसार सूचना सेठ अपने 4 वर्षीय बेटे चिन्मय को ले कर गोवा पहुंच गई. गोवा के कैंडोलिम इलाके के सोल बनयान ग्रांड होटल में उस ने एक कमरा बुक कराया. वह बेटे को ले कर इस होटल में 6 जनवरी, 2024 को आ आ गई.

पूरा दिन और पूरी रात वह बेटे के साथ होटल में रही. इस के बाद मौका देख कर उस ने अपने बेटे की हत्या कर डाली. हत्या करने के बाद उस ने बेटे के शव को एक बैग में रखा और कैब से भागने की कोशिश करने लगी.

8 जनवरी की सुबह सूचना सेठ होटल से चेक आउट करने लगी. चेक आउट करने के दौरान होटल के स्टाफ ने पूछा, ”मैम, आप के साथ तो आप का बेटा भी इस होटल में 6 जनवरी को आया था, मगर अभी वह आप के साथ नहीं है.’’

”भैया,  बेटे को मैं ने अपने एक रिश्तेदार के साथ सुबह ही भेज दिया है. अब आप प्लीज एक कैब बुलवा लीजिए, मैं बेंगलुरु कैब से जाना चाहती हूं.’’ सूचना सेठ ने कहा.

”मैम कैब से तो आप को बहुत अधिक समय लग सकता है. यदि आप कहें तो बेंगलुरु के लिए आप की फ्लाइट में सीट बुक कर दें?’’ रिसैप्शनिस्ट ने कहा.

”देखो भैया, मैं ने आप से पहले भी कहा था कि मैं फ्लाइट से नहीं जाना चाहती हूं. गोवा और बेंगलुरु के बीच हमारे कई जानपहचान वाले लोग रहते हैं, इसलिए मैं और मेरा बेटा उन से इसी बहाने थोड़े समय के लिए मिल भी सकते हैं. आप तो जल्दी से कोई कैब मंगवा दीजिए. कैब में ही अपने बेटे के साथ बेंगलुरु जाना चाहती हूं.’’ सूचना ने सीधेसीधे रिसैप्शनिस्ट को आदेश दे दिया.

30 हजार रुपए में कैब कर के वह बेंगलुरु के लिए चल दी. कैब ड्राइवर रौय जौन साथ में अपने एक ड्राइवर दोस्त को भी ले गया था.

रिसैप्शनिस्ट ने कैब मंगवा ली और सूचना सेठ अपने सामान के साथ कैब में बैठ गई. रिसैप्शस्टि को न जाने क्यों कुछ अटपटा सा लग रहा था कि यह महिला अपने बेटे को साथ में ले कर आई थी, लेकिन अब वह कहां चला गया?

फ्लाइट में जाने के बजाए यह महिला कैब में क्यों जा रही है? रिसैप्शनिस्ट ने अपने संदेह से फैसिलिटी मैनेजर गगन गंभीर को अवगत करा दिया कि ये कुछ अजीब सा लग रहा है.

फैसिलिटी मैनेजर गगन गंभीर तुरंत देवाशीष माझी के साथ जब रूम नंबर 404 में पहुंचे तो उन्हें वहां पर कई जगह खून के धब्बे दिखाई दिए. गगन गंभीर ने तुरंत कलंगुट पुलिस स्टेशन (Calangute Police Station) के एसएचओ को इस घटना की सूचना दे दी.

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सूचना पा कर एसएचओ परेश जी नाइक होटल के कमरा नंबर 404 में अपनी टीम के साथ पहुंच गए और वहां पर तहकीकात और पूछताछ शुरू कर दी. होटल मैनेजर ने पूछताछ में पुलिस को सारी जानकारी दे दी. इस से पहले 7 जनवरी को सूचना सेठ ने दिन में अपने बेटे के लिए कफ सिरप की 2 शीशियां भी रिसैप्शन से और्डर की थीं.

असल में कातिल मां सूचना सेठ ने गोवा से बेंगलुरु जाने के लिए जो टैक्सी बुक की थी, उसी कैब ड्राइवर रौय जौन डिसूजा की सूझबूझ से वह पुलिस की गिरफ्त में आ गई थी.

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जब इंसपेक्टर परेश नाइक ने होटल में पूछताछ करनी शुरू की तो उन्होंने वहां से पहले टैक्सी ड्राइवर का मोबाइल नंबर लिया. फिर टैक्सी ड्राइवर को फोन कर पूछा कि तुम्हारे साथ बैठी हुई महिला सूचना सेठ अकेली बैठी है या उस के साथ कोई छोटा बच्चा भी है.

ड्राइवर ने पुलिस इंसपेक्टर को बताया कि टैक्सी में सूचना सेठ अकेली बैठी हुई है. उस के बाद इंसपेक्टर ने ड्राइवर से फोन सूचना सेठ को देने को कहा. इंसपेक्टर ने सूचना सेठ से पूछा कि मैं होटल से बोल रहा हूं, आप का बेटा अब तो आप के साथ ही होगा न मैम? तब सूचना सेठ ने कहा कि मेरा बेटा फतोर्दा में मेरे एक दोस्त के पास है.

इंसपेक्टर ने पूछा कि मैम क्या आप बता सकती हैं कि आप का बेटा किस दोस्त के पास है. आप प्लीज उन का पता बता दीजिए, क्योंकि हम होटल वाले सारी चीजें अपने रजिस्टर में दर्ज करते हैं ताकि कल को कोई हमारे ऊपर किसी तरह का आरोप न लगा सके. उस के बाद सूचना सेठ ने एक पता दिया.

पुलिस ने जब उसे पते की जांच की तो वह फरजी निकला. इंसपेक्टर और टैक्सी ड्राइवर के बीच जो बातचीत हुई थी, वह कोंकणी भाषा में हो रही थी, इसलिए सूचना सेठ को टैक्सी ड्राइवर पर शक नहीं हुआ था.

अब तक पुलिस को पूरा यकीन हो चुका था कि इस मामले में कुछ न कुछ गड़बड़ जरूर है. इसलिए इंसपेक्टर परेश जी नाइक ने कोंकणी भाषा में एक बार फिर कैब के ड्राइवर रौय जौन डिसूजा से बातचीत की और उसे रास्ते में किसी भी पुलिस स्टेशन में पहुंच कर फोन करने के लिए कहा.

ड्राइवर थाने में क्यों ले गया टैक्सी

इस के बाद इंसपेक्टर ने यह जानकारी उत्तरी गोवा के एसपी निधिन वाल्सन को दे दी तो एसपी ने चित्रदुर्ग (Chitradurga) के एसपी से बात कर मामले से अवगत कराया.

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टैक्सी ड्राइवर रौय जौन डिसूजा अपनी टैक्सी रास्ते के ही ऐमंगला पुलिस स्टेशन (Aimangala Police Station) के भीतर ले कर घुस गया. सूचना सेठ जब तक उस से पूछती कि उस ने वहां पर क्यों रोकी है, तब तक रौय जौन डिसूजा ने इंसपेक्टर परेश जी को फोन लगा कर अपना मोबाइल फोन ऐमंगला थाने के इंचार्ज को दे दिया. ऐमंगला पुलिस ने गोवा पुलिस से बातचीत की और सूचना सेठ का पूरा सामान चैक किया तो एक बैग में सूचना सेठ के 4 साल के बेटे चिन्मय का शव बरामद हुआ.

बाद में पुलिस पूछताछ व मीडिया को जानकारी देते हुए टैक्सी ड्राइवर रौय जौन डिसूजा ने बताया कि गोवा के ‘द सोल बनयान ग्रांड’ होटल से उसे 7 जनवरी की रात 11 बजे मोबाइल पर फोन आया था. डिसूजा ग्रांड होटल के इस मोबाइल नंबर को पहचानता था, क्योंकि वह कई बार इस होटल से पर्यटकों को गोवा घुमाने लिए ले जा चुका था.

जीजा साली का जुनूनी इश्क

मासूम से दुश्मनी : चचेरे भाई ने ले ली जान – भाग 3

थानाप्रभारी नवीन सिंह को जब मुखबिर के जरिए पता चला कि शिवम फरार हो गया है तो उन का माथा ठनका. उन्होंने इस बाबत जब शिवम के पिता विनोद विश्नोई से पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि शिवम बहुत परेशान था. वह खाना भी ठीक से नहीं खा पा रहा था. कोई बात पूछने पर उलझ जाता था. फिर अकस्मात कहीं चला गया. वह कहां गया और किस हालत में है उन्हें नहीं पता.

यकीन नहीं था भाई ही ऐसा करेगा

शिवम पर शक गहराया तो पुलिस टीम उस के पीछे पड़ गई. सर्विलांस सेल प्रभारी राजीव कुमार ने उस के मोबाइल फोन के नंबर को सर्विलांस पर लगा दिया. स्वाट टीम प्रभारी रोहित तिवारी भी शिवम की टोह में जुट गए. पुलिस टीम ने अपने खास मुखिबर भी शिवम की सुरागरसी में लगा दिए.

उस की लोकेशन कभी रनियां में मिलती तो कभी पुखरायां में. बारबार लोकेशन बदलने से वह पुलिस की पकड़ में नहीं आ रहा था.

10 नवंबर, 2018 की दोपहर थानाप्रभारी नवीन कुमार सिंह, एसपी द्वारा गठित टीम के साथ विचारविमर्श कर रहे थे, तभी उन्हें एक मुखबिर द्वारा सूचना मिली कि शिवम, राजपुर औरैया रोड स्थित एक ढाबे पर मौजूद है.

मुखबिर की सूचना महत्त्वपूर्ण थी, इसलिए उन्होंने बिना देर किए पुलिस टीम के साथ मुखबिर की निशानदेही पर ढाबे पर छापा मारा. पुलिस को आया देख कर शिवम भागा, लेकिन पुलिस टीम ने उसे दबोच लिया. शिवम को थाना राजपुर लाया गया.

थाने पर जब शिवम ने आकाश की हत्या के संबंध में पूछा गया तो वह रिश्तों की दुहाई दे कर पुलिस को गुमराह करने की कोशिश करने लगा. लेकिन जब पुलिस ने सख्ती की तो वह टूट गया.

उस ने हत्या का राज खोलते हुए बताया कि आकाश ने उस की बहन को बदनाम किया था. बदनामी न करने के लिए उस ने आकाश को बहुत समझाया. वह नहीं माना तो उस ने उसे अपहृत कर के बंबे में डुबोडुबो कर मार डाला. हालांकि वह आकाश को बहुत चाहता था और उस की हत्या नहीं करना चाहता था.

गिरफ्तारी के बाद पुलिस टीम ने घटना को रिक्रिएट किया. रिक्रिएशन के दौरान शिवम ने जिस तरह आकाश का अपहरण किया तथा जिस तरह उसे बंबे में डुबो कर मारा, सब कर के दिखाया. इस से यह बात स्पष्ट रूप से साबित हो गई कि शिवम ही आकाश का हत्यारा था. थानाप्रभारी नवीन कुमार सिंह ने आकाश की हत्या का राज खोलने तथा हत्यारे को पकड़ने की जानकारी एसपी राधेश्याम को दे दी.

चूंकि अभियुक्त शिवम ने आकाश की हत्या का जुर्म कबूल कर लिया था. इसलिए थानाप्रभारी नवीन कुमार सिंह ने शिवम को अपहरण व हत्या की धारा 363, 302 आईपीसी के तहत विधिवत गिरफ्तार कर लिया. पुलिस की जांच और अभियुक्त शिवम के बयानों से पूरी साजिश का पता चल गया.

कानपुर देहात जनपद का कस्बा राजपुर कानपुर मुख्यालय माती से लगभग 30 किलोमीटर दूर है. सुनील विश्नोई राजपुर कस्बे में अपने परिवार के साथ रहता था. उस के परिवार में पत्नी रानी के अलावा 2 बेटे आकाश, अंशु और एक बेटी राधा थी. सुनील सीधासादा व्यवसाई था. व्यवसाय से ही वह अपने परिवार का पालनपोषण करता था.

सुनील विश्नोई पानतंबाकू से संबंधित चीजों का व्यवसाय करता था. यह सामान वह अकबरपुर, पुखरायां, भोगनीपुर व रनियां आदि कस्बों में पान की दुकानों व जनरल स्टोर्स पर सप्लाई करता था. इस के अलावा वह आसपास के बाजारों में भी अपना सामान बेचता था. इस काम में उसे अच्छी कमाई हो जाती थी.

सुनील विश्नोई का 12 वर्षीय पुत्र आकाश पढ़ने में जितना तेज था, उस से कहीं ज्यादा शरारती भी था. पढ़ाई के साथसाथ वह अपने पिता के व्यवसाय में हाथ बंटाता था. आकाश की मां रानी व बहन राधा भी काम में हाथ बंटाती थीं.

पतिपत्नी नहीं समझ पाए शिवम की नीयत

सुनील के घर से 2 मकान आगे उस का बड़ा भाई विनोद रहता था. विनोद किसान था. खेती की उपज से वह अपने परिवार का पालनपोषण करता था. विनोद के बेटे का नाम शिवम था. वह खेती के कामों में अपने पिता का हाथ बंटाता था. विनोद गुस्सैल स्वभाव का था. इसलिए मोहल्ले के लोग उसे पसंद नहीं करते थे.

सुनील और विनोद दोनों भाइयों में खूब पटती थी. दोनों का एकदूसरे के घरों में आनाजाना व उठनाबैठना था. सुनील का बेटा आकाश व विनोद का बेटा शिवम चचेरे भाई थे. उन में भी खूब पटती थी. दोनों एक दूसरे के घरों में बेरोकटोक आतेजाते थे.

शिवम की बहन मोहल्ले के एक युवक से प्यार करती थी. दोनों चोरीछुपे मिलते थे. एक रोज आकाश ने दोनों को हंसते बतियाते और अश्लील हरकत करते देख लिया.

आकाश ने प्रेमप्रसंग वाली बात पहले मां रानी को बताई फिर मोहल्ले के अन्य लोगों को भी बता दी. इस से यह बात पूरे क्षेत्र में फैल गई. शिवम को जानकारी हुई तो उस ने आकाश को फटकारा और आइंदा जुबान बंद रखने को कहा. लेकिन आकाश नहीं माना.

बहन के प्रेमप्रसंग को ले कर शिवम की बदनामी हो रही थी. उस का गली से निकलना दूभर हो गया था. उस ने आकाश को सबक सिखाने की ठान ली और उचित समय का इंतजार करने लगा.

21 सितंबर, 2018 को जब आकाश स्कूल से लौटा और खेलने के लिए पार्क में पहुंचा तो उस पर शिवम की नजर पड़ गई. जब आकाश खेल चुका तो शिवम ने उसे बुलाया और बहलाफुसला कर अपने साथ कस्बे के बाहर बंबे पर ले आया.

कुछ देर वह आकाश से बतियाता रहा, फिर अकस्मात उस का गला दबाने लगा. आकाश छटपटाने लगा तो शिवम ने उसे बंबे में धकेल दिया और डुबोडुबो कर मौत के घाट उतार दिया. हत्या करने के बाद उस ने शव को पत्थर से दबा दिया और वापस घर आ गया.

इधर आकाश खेल कर घर वापस नहीं आया तो उस की मां रानी को चिंता हुई. वह उसे खोजने घर से निकल पड़ी.

आकाश तो किसी को नहीं मिला लेकिन 4 दिन बाद उस की लाश बंबे में उतराती मिली. पूछताछ के बाद पुलिस ने शिवम को अदालत में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया.

— कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

मासूम से दुश्मनी : चचेरे भाई ने ले ली जान – भाग 2

3 दिन बाद आई मौत की खबर

25 सितंबर, 2018 की सुबह 10 बजे थानाप्रभारी नवीन कुमार सिंह क्षेत्र के एक कुख्यात अपराधी की फाइल का निरीक्षण कर रहे थे, तभी उन के मोबाइल पर एक काल आई. उन्होंने काल रिसीव की तो दूसरी तरफ से पूछा गया, ‘‘आप इंसपेक्टर साहब बोल रहे हैं?’’

‘‘जी हां, मैं इंसपेक्टर राजपुर नवीन कुमार सिंह बोल रहा हूं, कहिए क्या बात है?’’

‘‘सर, यहां बंबे में एक लाश उतरा रही है. आप जल्दी आइए.’’

‘‘लाश स्त्री की है या पुरुष की?’’

‘‘सर, लाश न स्त्री की है न पुरुष की. देखने से लगता है लाश किसी 10-12 साल के बच्चे की है.’’

‘‘बच्चे की लाश?’’ सुनते ही थानाप्रभारी नवीन कुमार सिंह का माथा ठनका. नवीन सिंह ने एसआई देशराज सिंह, हेडकांस्टेबल सुरेशचंद्र तथा आकाश के पिता सुनील विश्नोई को साथ लिया और राजपुर स्थित बंबे पर पहुंच गए. वहां काफी भीड़ जुटी थी, लोग तरहतरह की चर्चाएं कर रहे थे.

इंसपेक्टर नवीन कुमार सिंह भीड़ को हटा कर बंबे के किनारे पहुंचे. उन्होंने बंबे में तैरती लाश को बाहर निकलवाया. सुनील विश्नोई ने जब लाश देखी तो वह फफक कर रोते हुए बोला, ‘‘साहब, लाश मेरे बेटे आकाश की है.’’ रोते हुए ही उस ने बेटे की हत्या की खबर अपने घर वालों को दी. सुनते ही उस के घर में कोहराम मच गया.

आकाश की लाश की शिनाख्त होने के बाद नवीन कुमार सिंह ने अपहृत आकाश की हत्या करने और लाश मिलने की सूचना पुलिस अधिकारियों को दे दी. सूचना मिलते ही पुलिस कप्तान राधेश्याम विश्वकर्मा और सीओ (अकबरपुर) अर्पित कपूर घटनास्थल पर आ गए. पुलिस अधिकारियों ने लाश का मुआयना किया.

ऐसा लग रहा था जैसे आकाश की हत्या गला दबा कर की गई हो. या फिर उसे पानी में डुबो कर मारा गया हो. उस के शरीर पर चोटों के निशान नहीं थे.

एसआई देशराज सिंह ने शव को माती स्थित पोस्टमार्टम हाउस भेज दिया. इस के साथ ही आज्ञात लोगों के खिलाफ दर्ज अपहरण के मामले में हत्या की धारा भी जोड़ दी गई. पोस्टमार्टम के बाद आकाश की लाश उस के घर वालों को सौंप दी गई. उसी शाम उस का अंतिम संस्कार कर दिया गया.

पुलिस इस मामले को काफी संवेदनशील मान कर चल रही थी. हालांकि आकाश एक छोटे व्यवसाई का बेटा था, फिर भी पुलिस को डर था कि कहीं व्यापारी इस के विरोध में न उतर आएं. इसी के मद्देनजर पुलिस अधिकारी सुनील के सीधे संपर्क में थे और उसे आश्वासन दे रहे थे कि जल्दी ही हत्यारों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा.

एसपी राधेश्याम विश्वकर्मा ने आकाश के अपहरण और हत्या के मामले की तह तक पहुंचने के लिए सीओ (अकबरपुर) अर्पित कपूर की निगरानी में एक पुलिस टीम बनाई.

इस टीम में राजपुर थानाप्रभारी नवीन कुमार सिंह, हेडकांस्टेबल सुरेशचंद्र, कांस्टेबल राकेश कुमार, स्वाट टीम प्रभारी रोहित तिवारी, सर्विलांस सेल के राजीव कुमार, प्रहलाद सिंह, मोहित तिवारी, अनूप कुमार तथा प्रशांत को शामिल किया गया.

आकाश के गायब होने के बाद, उस के घर वालों के पास फिरौती के लिए कोई फोन नहीं आया था. न ही पत्र के माध्यम से कोई सूचना आई थी. इस से स्पष्ट था कि उस का अपहरण फिरौती के लिए नहीं किया गया था. इस से पुलिस टीम को लग रहा था कि आकाश की हत्या दुश्मनी या किसी अन्य वजह से की गई होगी.

2 लोगों पर जताया शक

आकाश के पिता सुनील विश्नोई का पान, तंबाकू से संबंधित सामान सप्लाई करने का व्यवसाय था. पुलिस ने सोचा कि हो न हो उस की किसी दुश्मनी का खामियाजा उस के बेटे को भुगतना पड़ा हो. इसलिए इंसपेक्टर नवीन कुमार सिंह ने सुनील विश्नोई से पूछा कि उस की किसी से कोई रंजिश वगैरह तो नहीं है.

‘‘सर, हम लोग छोटे व्यवसाई हैं. रंजिश की बात तो दूर अगर कोई हम से नाराज हो कर चार बातें कह भी जाए तो हम सुन कर चुप रह जाते हैं.’’ सुनील विश्नोई ने दिमाग पर जोर डाल कर बताया कि 3 साल पहले कस्बे के 2 युवकों से उस का माल जबरदस्ती छीनने को ले कर विवाद हुआ था. उन्होंने उसे सबक सिखाने की धमकी भी दी थी.

सुनील विश्नोई के बयान के आधार पर पुलिस बिना देरी किए उन युवकों के घर पहुंच गई. दोनों युवकों को थाने लाया गया पुलिस टीम ने दोनों से अपने तरीके से पूछताछ की. पूछताछ में दोनों बेकसूर लगे तो उन्हें छोड़ दिया गया.

मतलब जांच जहां से शुरू हुई, वहीं आ कर रुक गई. पुलिस अधीक्षक राधेश्याम व सीओ अर्पित कपूर पुलिस टीम के सीधे संपर्क में थे. उन के दिशा निर्देश के बाद टीम ने आकाश के पिता सुनील विश्नोई और मां रानी से पुन: बात की.

दरअसल, पुलिस टीम को जांच आगे बढ़ाने के लिए कहीं से कोई क्लू नहीं मिल रहा था. इसलिए टीम को शक हुआ कि कहीं हत्यारा विश्नोई परिवार का कोई करीबी तो नहीं है. क्योंकि ऐसे लोग अपना काम आसानी से कर जाते हैं और उन पर किसी को शक भी नहीं होता है.

पुलिस टीम ने सुनील, उस की पत्नी रानी व अन्य लोगों से आकाश के गुम होने के बाद परिवार वालों की गतिविधियों के बारे में पूछताछ की. हालांकि इस बात पर सुनील व कुछ अन्य घर वालों ने ऐतराज भी किया. उन का सगा सबंधी या पारिवारिक सदस्य ऐसा क्यों करेगा? लेकिन जब पुलिस टीम ने उन्हें समझाया तो वे पिछली बातें याद करने के लिए दिमाग पर जोर डालने लगे.

कुछ देर बाद सुनील विश्नोई ने बताया कि जब वे लोग आकाश को तलाश कर रहे थे तो घर वाले 2-2, 3-3 के ग्रुप में थे. लेकिन शिवम सब से अलग अकेला घूम रहा था. इतना ही नहीं वह कुछ घबराया हुआ भी दिख रहा था. पति की बात खत्म होते ही रानी ने बताया कि घटना वाली रात जब वह आकाश को देखने शिवम के घर गई थीं तो उस ने उसे दरवाजे पर ही रोक दिया था और खुद घर में देखने चला गया था.

सुनील विश्नोई के मकान के तीसरे नंबर का मकान शिवम का था. पुलिस शिवम के घर पहुंची. उस से पूछताछ की गई तो उस ने कहा, ‘‘आकाश मेरा चचेरा भाई था. मैं उसे बहुत प्यार करता था. भला मैं उस के साथ ऐसा कैसे कर सकता हूं? उसे ढूंढने के लिए मैं ने रात दिन एक कर दिया और आप उसे मारने की बात कह रहे हैं.’’

शिवम ने बिना घबराए जिस तरह अपनी बात कही, उस से पुलिस को लगा कि शायद शिवम सच बोल रहा है. अत: पुलिस ने उसे हिदायत दे कर छोड़ दिया. शिवम पुलिस की पकड़ से बच तो गया, लेकिन अब उसे डर सताने लगा. इसी डर से वह घर में किसी को बिना कुछ बताए फरार हो गया.

मासूम से दुश्मनी : चचेरे भाई ने ले ली जान – भाग 1

स्कूल से घर लौटने के बाद आकाश ने अपना बैग मेज पर रखा और फौरन बाहर की तरफ दौड़ लगा दी. मां रानी ने उसे कई आवाजें  दीं, लेकिन वह यह कहते हुए घर से निकल गया कि खेलने जा रहा है. आकाश अकसर स्कूल से लौटने के तुरंत बाद खेलने चला जाता था. थोड़ी देर खेल कर वह घर लौट आता था. इसलिए रानी उस की ओर से ध्यान हटा कर घर के काम में लग गई. यह 21 सितंबर, 2018 की शाम 4 बजे की बात है.

आकाश आधे एक घंटे में खेल कर घर लौट आता था. लेकिन उस दिन जब वह साढ़े 6 बजे तक नहीं लौटा तो रानी को उसे बुलाने के लिए घर से निकलना पड़ा. घर से कुछ ही दूरी पर पार्क था. पार्क में जो बच्चे खेल रहे थे, उन में आकाश नहीं था. रानी ने बच्चों से आकाश के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि आकाश कुछ देर पहले बच्चों के साथ क्रिकेट खेल रहा था.

आकाश जिन बच्चों के साथ क्रिकेट खेल रहा था, वह भी रानी के पासपड़ोस में रहते थे. रानी उन बच्चों के घर गई तो उन्होंने बताया कि कुछ देर पहले वे खेलबंद कर के घर लौट आए थे. आकाश वहीं रह गया था.

रानी ने अपनी बेटी राधा को साथ लिया और पार्क में खेलने वाले बच्चों और पार्क के आसपास रहने वाले लोगों से आकाश के बारे पता करने लगी. लेकिन आकाश का कोई पता नहीं लगा. मायूस हो कर घर लौटी रानी ने आकाश के लापता होने की बात अपने पति सुनील विश्नोई को बताई.

सुनील उस समय बाजार में था. बेटे के लापता होने की खबर मिली तो वह आननफानन में घर आ गया. फिर वह भी बेटे को ढूंढने के लिए घर से निकल पड़ा. रानी और उस की बेटी राधा कस्बे की गलियों में आकाश को खोजने लगीं. लेकिन आकाश का कोई पता नहीं लगा, पतिपत्नी दोनों परेशान थे. अचानक रानी ने सोचा कि कहीं आकाश खेल कर शिवम के घर तो नहीं चला गया.

शिवम विश्नोई, रानी के जेठ विनोद विश्नोई का बेटा था. उस का घर रानी के घर से 2 घर छोड़ कर था. घबराई हुई रानी शिवम के घर पहुंची और आकाश के बारे में पूछा. शिवम ने बताया, ‘‘चाची, आकाश आया जरूर था, लेकिन थोड़ी देर बतिया कर चला गया था.’’

तब तक 9 बज चुके थे और रात गहराने लगी थी. आकाश का जब कुछ पता नहीं चला तो उस के पिता सुनील विश्नोई ने पुलिस कंट्रोल रूम के 100 नंबर पर फोन कर के बता दिया कि राजपुर कस्बे की गली नंबर 9 से 12 साल का एक लड़का गायब हो गया है. राजपुर कस्बा कानपुर देहात जिले के थाना राजपुर क्षेत्र में आता है. पुलिस कंट्रोल रूम ने लड़के के गायब होने की सूचना थाना राजपुर को दे दी.

सूचना मिलते ही एसआई देशराज सिंह हेडकांस्टेबल सुरेशचंद्र को साथ ले कर राजपुर कस्बे स्थित सुनील के घर पहुंच गए. सुनील विश्नोई और उस की पत्नी रानी घर पर थे. शिवम भी उन के साथ था. उन्होंने आकाश के गायब होने की जानकारी उन्हें दी. एसआई देशराज सिंह सुनील विश्नोई का बयान दर्ज कर के थाने लौट आए.

थानाप्रभारी नवीन कुमार सिंह उस समय थाने पर मौजूद थे. एसआई देशराज सिंह ने 12 वर्षीय आकाश के गुम होने की जानकारी उन्हें दे दी. उन्होंने अज्ञात लोगों के खिलाफ अपहरण की रिपोर्ट दर्ज करवा दी और इस मामले की जांच देशराज सिंह को ही सौंप दी.

एसआई देशराज सिंह आकाश की खोजबीन में जुट गए. सूचना पा कर रानी के मातापिता भी आ गए. उन्होंने रानी से कहा कि वह एक बार ठीक से देख लें कि वह घर में ही तो नहीं सो गया है. रानी ने घर के सारे कमरे छान मारे लेकिन आकाश नहीं मिला. आकाश कहीं शिवम के घर न सो गया हो, यह सोच कर रानी शिवम के घर गई तो वह दरवाजे पर ही मिल गया.

रानी ने जब उस से आकाश को घर में देखने की बात कही तो वह बोला, ‘‘चाची, वैसे तो आकाश यहां से चला गया था, फिर भी तुम कहती हो तो मैं एक बार और देख लेता हूं.’’

शिवम घर में चला गया, जबकि रानी दरवाजे पर ही खड़ी रही. कुछ देर बाद शिवम ने बाहर आ कर बताया कि आकाश यहां नहीं है.

फिरौती के लिए नहीं हुआ अपहरण

इधर इंसपेक्टर नवीन कुमार सिंह ने आकाश अपहरण पर गहन विचारविमर्श किया. उन के विचार से आकाश का अपहरण फिरौती के लिए नहीं किया गया था. क्योंकि सुनील विश्नोई की आर्थिक स्थिति इतनी अच्छी नहीं थी कि उस के बेटे का अपहरण 2-4 लाख की फिरौती के लिए किया जाता. दूसरे फिरौती की बात इसलिए भी गले नहीं उतर रही थी, क्योंकि अभी तक अपहर्त्ता का कोई फोन नहीं आया था.

नवीन कुमार सिंह का अनुमान था कि आकाश का अपहरण किसी और कारण से किया गया है. यह कारण क्या हो सकता है, इस का पता लगाना जरूरी था. फिर भी इंसपेक्टर नवीन कुमार सिंह ने पुखरायां, घाटमपुर, भीमसेन रेलवे स्टेशन के अलावा कानपुर देहात के सभी प्रमुख बस अड्डों पर छानबीन के लिए आकाश के फोटो के साथ अलगअलग पुलिस टीमें रवाना कर दीं.

एसआई देशराज सिंह थाना क्षेत्र के नदी, नालों और सड़क किनारे की झाडि़यों पार्कों आदि में इस आशंका से आकाश को खोज कर रहे थे कि कहीं किसी ने उस की हत्या न कर दी हो.

कस्बा राजपुर में सड़क किनारे एक शिव मंदिर था. मंदिर के पास वाले मैदान में बच्चे खेलते थे. पुलिस आकाश की खोज में वहां भी गई, लेकिन उस का पता नहीं चला. पुलिस ने नमाज के समय मसजिद से आकाश के हुलिए सहित उस के गुम होने की सूचना प्रसारित कराई, पर कोई सफलता नहीं मिली.

उधर आकाश के लापता होने से विश्नोई परिवार की आंखों की नींद उड़ी हुई थी. घर के सभी लोगों को इस बात की चिंता सता रही थी कि उन की आंखों का चिराग पता नहीं कहां और किस हाल में होगा. वे लोग पूरी रात बैठे रहे. उन के दिमाग में तरहतरह के खयाल आ रहे थे.

अंधेरा छंटते ही वे लोग फिर 2-2, 3-3, के ग्रुप में आकाश की खोज में निकल पड़े. उधर पुलिस ने आकाश के गुम होने की सूचना उस के हुलिए के साथ कानपुर देहात जनपद के सभी थानों को दे दी थी.

ज्योंज्यों समय बीतता जा रहा था त्योंत्यों  सुनील और उस की पत्नी रानी की चिंता बढ़ती जा रही थी. दोनों की समझ में नहीं आ रहा था कि आकाश चला कहां गया? रानी बेटे के गम में सब से ज्यादा दुखी थी. उस का रोरो कर बुरा हाल था. उस ने खानापीना भी छोड़ दिया था.

धीरेधीरे 3 दिन बीत गए, लेकिन अब तक आकाश का पता न तो घर वाले लगा पाए थे और न ही पुलिस को सफलता मिली थी. पुलिस आकाश की खोज में जीजान से जुटी थी. उस ने क्षेत्र के हर रेलवे स्टेशन व बस अड्डे पर आकाश की फोटो सहित सूचना चस्पा कर दी थी.

पुलिस आपराधिक प्रवृत्ति के युवकों को पकड़ कर थाने लाई और उन से सख्ती से पूछताछ की. लेकिन आकाश के बारे में कोई जानकारी हासिल नहीं हुई. आखिर पुलिस को मजबूरन उन युवकों को रिहा करना पड़ा. पुलिस का मुखबिर तंत्र भी आकाश का पता लगाने में नाकाम रहा.

अविवेक ने उजाड़ी बगिया

जीजा साली का जुनूनी इश्क – भाग 3

घर की कलह और रोजरोज की मारपीट से आजिज आ कर शादी के एक साल बाद पूजा मायके आ कर रहने लगी. कुछ दिन बाद पति ओमप्रकाश उसे मनाने आया लेकिन पूजा ने ससुराल जाने से साफ मना कर दिया.

अधिकांश मांबाप को बेटी का गुस्से में ससुराल छोड़ कर आना अच्छा नहीं लगता. जगराम सिंह और मीना को भी यह अच्छा नहीं लगा, उन्होंने पूजा को समझाया परंतु पूजा ने साफ कह दिया कि वह जहर खा कर मर जाएगी पर ससुराल नहीं जाएगी. इसके बाद मांबाप भी बेबस हो गए.

जब मनोज को पता चला कि पूजा गुस्से में ससुराल से मायके आ गई है तो उस की खुशी का ठिकाना नहीं रहा. उस ने ससुराल आ कर पूजा से मुलाकात की. उस ने पूजा द्वारा उठाए गए कदम को सही ठहराया और उस की हर संभव मदद करने का भरोसा दिया. पूजा की मदद के बहाने मनोज अब फिर ससुराल आने लगा. उस ने फिर से पूजा से नाजायज संबंध बना लिए.

ओमप्रकाश ने पूजा को जितना प्रताडि़त किया था, वह उस के बदले उसे सबक सिखाना चाहती थी. इस के लिए उस ने जीजा मनोज के सहयोग से नौबस्ता थाने में पति ओमप्रकाश के खिलाफ दहेज उत्पीड़न की रिपोर्ट दर्ज करा दी. पुलिस ने ओमप्रकाश को दहेज उत्पीड़न के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. ओमप्रकाश कुछ दिनों बाद किसी तरह जमानत करा कर जेल से बाहर आ गया.

जमानत मिलने के बाद ओमप्रकाश ने बड़े भाई तेजबहादुर पर मामले को रफादफा करने का दबाव डाला, लेकिन तेजबहादुर ने साफ मना कर दिया. तब ओमप्रकाश ने बडे़ भाई से जम कर झगड़ा और मारपीट की. तेजबहादुर उस की ससुराल वालों के पक्ष में था.

पूजा को ले कर दोनों भाइयों के बीच रंजिश बढ़ गई. हां, इतना जरूर था कि ओमप्रकाश की बहन ऊषा तथा भाई छोटू व प्रमोद उस के पक्ष में थे और उस की हर संभव मदद करते थे.

ओमप्रकाश दहेज उत्पीड़न का मुकदमा वापस लेने के लिए पत्नी पर भी दबाव डाल रहा था. वह उसे हर तरह से ठीक प्रकार रखने का आश्वासन भी दे रहा था. लेकिन पूजा उस की बात नहीं मान रही थी. पूजा के पति से साफ कह दिया कि उसे उस पर भरोसा नहीं रहा. इसलिए मुकदमा वापस नहीं लेगी. ओमप्रकाश को शक था पूजा को उस का जीजा मनोज ही भड़का रहा है जिस से वह उस की बात नहीं मान रही.

पूजा ने पति की बात नहीं मानी तो ओमप्रकाश ने दूसरा रास्ता निकाला. अब वह जब भी ससुराल जाता तो नशे में धुत होता. वह घर में देखता कि कहीं मनोज तो पूजा के साथ रंगरलियां मनाने नहीं आया. पूजा रोकती टोकती तो वह उसे गाली बकता. उस का साला राजकुमार कुछ कहता तो वह उस की पिटाई कर देता था. इस से राजकुमार को भी ओमप्रकाश से नफरत हो गई.

ऐसे ही एक रोज ओमप्रकाश ससुराल पहुंचा तो घर के अंदर मनोज था. ओमप्रकाश को शक हुआ कि सूने घर में मनोज पूजा के साथ रंगरलियां मना रहा होगा. उस ने खा जाने वाली नजरों से मनोज को देखा, फिर पूजा को बुरी तरह मारापीटा.

इस के बाद उस ने मनोज को घर से चले जाने को कह दिया, ‘‘हमारा तुम्हारा रिश्ता साढू का है. तुम पूजा की बहन के सुहाग हो. इसलिए बख्श रहा हूं. कोई दूसरा होता तो इस कमरे से उस की लाश बाहर जाती. कान खोल कर सुन लो. आइंदा पूजा से मिलने की जुर्रत मत करना वरना…’’

मनोज को गुस्सा तो बहुत आया. लेकिन वह अपराधबोध से सिर झुकाए चला गया.

उसी शाम मनोज के मोबाइल पर पूजा का फोन आया, ‘‘मैं तुम्हें बड़ा तीसमार खां समझती थी, पर तुम तो नामर्द निकले. ओमप्रकाश मुझे पीटता रहा और तुम खड़ेखड़े तमाशा देखते रहे. तुम्हें तो उसे वहीं पटक कर जान से मार देना चाहिए था.’’

पूजा की ललकार से मनोज की मर्दानगी जाग गई. खुद का अपमान भी उसे याद आने लगा. गुस्से से तिलमिला कर वह बोला, ‘‘मैं ने ओमप्रकाश को इसलिए छोड़ दिया, क्योंकि वह तुम्हारा पति है. तुम ने मेरी मर्दानगी को ललकारा है इसलिए अब मैं उसे जान से मार कर ही तुम्हें मुंह दिखाऊंगा.’’

‘‘हां, मार दो.’’ पूजा ने गुस्से की आग में घी डाला, ‘‘जब तक ओमप्रकाश नहीं मरेगा मेरा कलेजा ठंडा नहीं होगा.’’

इस के बाद मनोज ने ओमप्रकाश की हत्या की योजना बनाई. इस योजना में उस ने अपने साले राजकुमार तथा ओमप्रकाश के बड़े भाई तेजबहादुर को भी शामिल कर लिया.

चूंकि ओमप्रकाश कई बार तेजबहादुर को पीट चुका था और उसे बेइज्जत भी किया. इसलिए वह भाई की हत्या में मनोज का साथ देने को राजी हो गया. राजकुमार को अपनी बहन की प्रताड़ना व बेइज्जती बरदाश्त नहीं थी इसलिए वह भी उस का साथ देने को राजी हो गया.

6 नंवबर, 2018 को तेजबहादुर ने रात आठ बजे मनोज को मोबाइल फोन पर बताया कि ओमप्रकाश विधनू में पप्पू रिपेयरिंग सेंटर पर अपनी मोटरसाइकिल ठीक करा रहा है. वहां से वह बहन ऊषा के घर पतारा जाएगा. तुम पहुंचो, पीछे से मैं भी आ रहा हूं. आज उचित मौका है.

मनोज ने साले राजकुमार को साथ लिया और विधनू पहुंच गया जहां ओमप्रकाश अपनी मोटरसाइकिल ठीक करा रहा था. योजना के अनुसार मनोज अपनी मोटरसाइकिल से विधनू के रिपेयरिंग सेंटर पर पहुंच गया. वहां मनोज ने ओमप्रकाश से दुआसलाम की फिर अपने किए की माफी मांगी. मनोज झुका तो ओमप्रकाश भी नरम पड़ गया.

वैसे भी मनोज कोई गैर नहीं, साढ़ू था. इसलिए ओमप्रकाश ने उसे माफ करते हुए कहा, ‘‘ठीक है भाई साहब, मैं ने तुम्हें माफ किया. मगर गलती दोहराने की कोशिश मत करना.’’

‘‘ठीक है, आइंदा गलती नहीं होगी, लेकिन मैं चाहता हूं कि इस खुशी में आज तुम मेरे साथ पार्टी करो. तब मैं समझूंगा कि तुम ने दिल से मुझे माफ कर दिया है.’’

‘‘जब तुम यह बात कह रहे हो तो मुझे मंजूर है.’’ इस के बाद मनोज और ओमप्रकाश ने ठेके पर जा कर शराब पी. मनोज ने जानबूझ कर ओमप्रकाश को कुछ ज्यादा पिला दी. घर वापसी में मनोज ने शंभुआ हाइवे पुल पर मोटरसाइकिल रोक दी. ओमप्रकाश भी रुक गया. इस के बाद मनोज ने तेज बहादुर को भी बुला लिया.

योजना के मुताबिक राजकुमार ने ओमप्रकाश की मोटरसाइकिल हाईवे किनारे पलट दी. फिर मनोज व तेज बहादुर ने ओमप्रकाश को दबोच लिया और दोनों ने मिल कर चाकू से ओमप्रकाश की गरदन रेत दी.

दुर्घटना दर्शाने के लिए उन लोगों ने उस के शव को सड़क किनारे फेंक दिया. इस के बाद मनोज, राजकुमार के साथ ससुराल पहुंचा और पूजा को उस के पति की हत्या कर देने की जानकारी दी. तेज बहादुर भी अपने घर हंसपुरम आ गया.

7 नवंबर की सुबह शंभुआ हाईवे पुल पर दुर्घटना की सूचना विधनू थानाप्रभारी संजीव चौहान को मिली तो वह पुलिस टीम के साथ वहां पहुंच गए. उस समय वहां भीड़ जुटी थी. इसी भीड़ में से एक शख्स सामने आया और उस ने बताया कि उस का नाम तेजबहादुर है और वह नौबस्ता थाने के हसंपुरम का रहने वाला है. मृतक उस का छोटा भाई ओमप्रकाश है. वह उसे खोजता हुआ यहां पहुंचा था. बीती शाम ओमप्रकाश बहन ऊषा के घर गया था. शायद वहीं से घर लौटते समय उस का एक्सीडेंट हो गया.

चूंकि शव की शिनाख्त हो गई थी इसलिए थानाप्रभारी संजीव चौहान ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. दूसरे रोज जब पोस्टमार्टम रिपोर्ट उन्होंने पढ़ी तो वह चौंक गए. क्योंकि ओमप्रकाश की मौत सड़क दुर्घटना में नहीं हुई थी बल्कि गला काट कर हत्या करने के बाद उसे सड़क पर डाला गया था ताकि मामला दुर्घटना का लगे.

इस के बाद थानाप्रभारी संजीव चौहान ने मृतक के भाई तेजबहादुर, प्रमोद व छोटू तथा बहन ऊषा से पूछताछ की. तेजबहादुर तो पुलिस को बरगलाता रहा. लेकिन प्रमोद, छोटू व उषा ने शक जाहिर कर दिया. उन्होंने बताया कि ओमप्रकाश की शादी पूजा से हुई थी.

पूजा के अपने बहनोई मनोज से नाजायज संबंध थे. ओमप्रकाश इस का विरोध करता था. पूजा नाराज हो कर मायके चली गई थी. इतना ही नहीं उस ने भाई के खिलाफ दहेज उत्पीड़न का मामला दर्ज करा दिया था. उन्होंने कहा कि मनोज व पूजा ने ही भाई की हत्या की है.

मनोज शक के घेरे में आया तो थानाप्रभारी संजीव चौहान ने उसे थाने बुलवा लिया. जब उस से सख्ती से पूछताछ की गई तो वह टूट गया. मनोज ने ओमप्रकाश की हत्या का जुर्म कबूल कर लिया.

मनोज ने बताया कि उस ने अपने साले राजकुमार व मृतक के बड़े भाई तेज बहादुर के साथ मिल कर ओमप्रकाश की हत्या की थी. मनोज ने यह भी स्वीकार किया कि मृतक की पत्नी के साथ उस के नाजायज संबंध हैं. उसी के उकसाने पर ओमप्रकाश की हत्या की गई थी.

हत्या का राज खुला तो पुलिस ने मृतक की पत्नी पूजा तथा भाई तेजबहादुर को भी हिरासत में ले लिया. किंतु राजकुमार फरार हो गया. मनोज की निशानदेही पर पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त चाकू भी बरामद कर लिया, जिसे उस ने घर में छिपा दिया था.

थानाप्रभारी संजीव चौहान ने मृतक के छोटे भाई प्रमोद की तरफ से मनोज, पूजा, तेजबहादुर व राजकुमार के खिलाफ भादंवि की धारा 302 के तहत केस दर्ज कर के उन्हें विधिवत गिरफ्तार कर लिया.

14 नवंबर, 2018 को पुलिस ने हत्यारोपी मनोज, पूजा व तेज बहादुर को कानपुर कोर्ट में रिमांड मजिस्ट्रैट के समक्ष पेश किया, जहां से उन्हें जिला कारागार भेज दिया गया. कथा संकलन तक उन की जमानत नहीं हुई थी. जबकि राजकुमार फरार था.

— कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

जीजा साली का जुनूनी इश्क – भाग 2

एक रात अचानक पूजा के पिता जगराम सिंह की नींद खुल गई. उन्हें बेटी के कमरे से खुसरफुसर की आवाजें आईं. जिज्ञासावश उन्होंने बेटी के कमरे में खिड़की से झांका तो छोटी बेटी पूजा को दामाद के साथ देख कर उन का खून खौल गया.

किसी तरह उन्होंने गुस्से पर काबू कर के दरवाजा खटखटाया. दरवाजा खोलना मजबूरी थी, पूजा ने डरते सहमते दरवाजा खोल दिया, सामने पिता को देख कर वह घबरा गई. मनोज माफी मांगते हुए ससुर के पैरों में गिर गया.

बहरहाल, उस समय जगराम ने उन से कुछ नहीं कहा. सुबह होने पर जगराम ने रात वाली बात अपनी पत्नी मीना को बताई. बदनामी के भय से जगराम सिंह व मीना ने शोरशराबा नहीं किया. उन दोनों ने पूजा और मनोज को धमकाया. दोनों सिर झुकाए अपनी फजीहत कराते रहे. कुछ देर बाद मनोज वहां से अपने घर लौट गया.

जगराम सिंह और मीना ने बड़ी बेटी ममता के दांपत्य को कड़वाहट से बचाने के लिए उस के पति की करतूत छिपाए रखी. ससुराल की बात ससुराल में ही दबी रही और वह पूजा के लिए लड़का देखने लगे ताकि जल्द उस के हाथ पीले कर सकें. लेकिन दामाद की करतूत छिपाना जगराम को महंगा पड़ा हुआ.

मनोज के मन में जो डर था वह धीरे धीरे दूर हो गया. एक दिन पूजा ने मनोज को फोन कर के बता दिया कि उस के पिता उस के लिए लड़का ढूंढ रहे हैं. यह जानकारी मिलते ही मनोज एक दिन ससुराल पहुंच गया. उस ने सास ससुर से अपनी गलती की माफी मांग ली. साथ ही यह भी कहा कि आइंदा वह पूजा को साली नहीं बल्कि छोटी बहन मानेगा.

वह उस के साथ वैसा ही व्यवहार करेगा, जैसा एक भाई, अपनी बहन से करता है. जगराम सिंह और मीना के लिए यही बहुत था कि दामाद को अपनी गलती का अहसास हो गया था और उस ने पूजा को बहन मान लिया था. अत: दोनों ने सच्चे दिल से मनोज को माफ कर दिया.

मौका मिलने पर मनोज ने पूजा को बताया, ‘‘तुम्हारी शादी भले ही कहीं हो जाए, मेरे संबंध तुम्हारे साथ पहले की तरह ही रहेंगे.’’ इस पर पूजा ने भी कह दिया, ‘‘मैं भी तुम्हें प्यार करती रहूंगी. तुम्हें कभी नहीं भुला सकूंगी.’’

इस के बाद मनोज अपने ससुर के साथ मिल कर पूजा के लिए लड़का खोजने लगा. इसी बीच जगराम सिंह की मुलाकात तेज बहादुर से हुई. तेजबहादुर कानपुर शहर के हंसपुरम (नौबस्ता) में रहता था. वह जगराम के बड़े भाई सुखराम का दामाद था. उस के साथ सुखराम की बेटी अनीता ब्याही थी. इस नाते वह उस का भी दामाद था.

जगराम ने उस से अपनी बेटी पूजा के लिए कोई लड़का बताने को कहा तो उस ने बताया कि उस का छोटा भाई ओमप्रकाश ब्याह लायक है. ओमप्रकाश कार चालक है और अच्छा कमाता है. तेज बहादुर ने यह भी बताया कि ओमप्रकाश के अलावा उस के 2 अन्य भाई छोटू व प्रमोद हैं. सभी लोग साथ रहते हैं.

चूंकि पुरानी रिश्तेदारी थी. अत: जगराम सिंह ने ओमप्रकाश को देखा तो वह उन्हें पसंद आ गया. पूजा के इस रिश्ते को मनोज ने भी सहमति दे दी. क्योंकि पूजा कहीं दूर नहीं जा रही थी. आपसी सहमति के बाद जगराम सिंह ने 16 फरवरी, 2016 को पूजा का विवाह ओमप्रकाश के साथ कर दिया.

शादी के बाद पूजा अपनी ससुराल हंसपुरम पहुंच गई. पूजा खूबसूरत थी, इसलिए ससुराल में सभी ने उस की सुंदरता की तारीफ की. ओमप्रकाश भी खूबसूरत बीवी पा कर खुश था. चूंकि पूजा और अनीता चचेरी बहनें थीं और एक ही घर में दोनों सगे भाइयों को ब्याही थीं. इसलिए दोनों में खूब पटती थी. पूजा ने अपने व्यवहार से पूरे परिवार का दिल जीत लिया था. वह पति के अलावा जेठ तेजबहादुर तथा देवर प्रमोद व छोटू का भी पूरा खयाल रखती थी.

पूजा ससुराल चली गई तो मनोज उस से मिलने के लिए छटपटाने लगा. आखिर जब उस से नहीं रहा गया तो उस ने पूजा से बात की फिर वह उस की ससुराल जा पहुंचा, चूंकि मनोज, ओमप्रकाश का साढ़ू था, सो सभी ने उस की आवभगत की.

इस आवभगत से मनोज गदगद हो उठा. इस के बाद वह अकसर पूजा की ससुराल जाने लगा. आतेजाते मनोज ने पूजा के जेठ तेजबहादुर से अच्छी दोस्ती कर ली. दोनों की साथसाथ भी महफिल जमने लगी.

मनोज जब भी पूजा की ससुराल पहुंचता तो वह उस के आसपास ही घूमता रहता था. वह उस से खूब हंसीमजाक करता और ठहाके लगा कर हंसता. उस की द्विअर्थी बातों से कभीकभी पूजा तिलमिला भी उठती और उसे सीमा में रहने की नसीहत दे देती.

ओमप्रकाश को साढ़ू का रिश्ता पंसद नहीं था. न ही उसे मनोज का घर आना और पूजा से हंसीमजाक करना अच्छा लगता था. वह मन ही मन कुढ़ता था. लेकिन विरोध नहीं जता पाता था.

एक रोज ओमप्रकाश ने मनोज के आनेजाने को ले कर अपनी पत्नी पूजा से बात की और कहा कि उसे आए दिन मनोज का यहां आनाजाना पसंद नहीं है. न मैं उस के घर जाऊंगा और न ही वह हमारे घर आया करे. मुझे उस की बेहूदा बातें और भद्दा हंसीमजाक बिलकुल पसंद नहीं है. तुम उसे यहां आने से साफ मना कर दो.

लेकिन पूजा ने मनोज को मना नहीं किया. वह पहले की तरह ही वहां आता रहा. बल्कि अब वह कभीकभी रात को वहां रुकने भी लगा था. मनोज की गतिविधियां देख कर ओमप्रकाश का माथा ठनका. उस के दिमाग में शक का कीड़ा कुलबुलाने लगा. उस ने गुप्त रूप से पता लगाया तो जानकारी मिली कि शादी के पहले से ही पूजा और मनोज के बीच नाजायज संबंध थे.

मनोज ने इस बारे में पूजा से बात की तो कड़वी सच्चाई सुन कर पूजा उखड़ गई. उस ने साफ कहा कि उस के और जीजा के बीच कोई नाजायज संबंध नहीं थे और न हैं. कोई उन दोनों को बदनाम करने के लिए इस तरह की बातें कर रहा है. पूजा ने भले ही कितनी सफाई देने की कोशिश की लेकिन उस के पति के दिमाग में तो शक का बीज अंकुरित हो चुका था.

नतीजा यह हुआ कि इन बातों को ले कर उन के घर में कलह होने लगी. कभीकभी कहासुनी इतनी बढ़ जाती कि नौबत मारपीट तक जा जाती थी. इस कलह की जानकारी मनोज को हुई तो उस ने पूजा की ससुराल जाना बंद कर दिया. लेकिन पूजा के जेठ तेजबहादुर से उस ने नाता नहीं तोड़ा और दोनों घर के बाहर महफिल जमाते रहे.

मनोज का घर आनाजाना बंद हुआ तो पूजा खिन्न रहने लगी. वह अपने पति से बातबेबात झगड़ने लगती. दोनों के बीच दूरियां भी बढ़ने लगीं. इस का परिणाम यह हुआ कि ओमप्रकाश ने शराब पीनी शुरू कर दी. वह देर रात नशे में चूर हो कर घर लौटता तो आते ही पत्नी को गालियां बकनी शुरू कर देता था. उस पर चरित्रहीनता का लांछन लगाता.

पूजा कुछ बोलती तो वह उस की पिटाई कर देता था. पूजा की चीखपुकार सुन कर उस का जेठ तेजबहादुर बीचबचाव करने आता तो ओमप्रकाश बडे़ भाई से भी भिड़ जाता था. इतना ही नहीं वह उस के साथ भी मारपीट करने लगता.